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- Dec 5, 2013
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सत्यम इस पल उसके चेहरा का सुकून देखते हुए उसे बेहरमी से छोड़ता रहता है उसकी चूचियों को बेहरमी से मसलता रहता है फिर खुद hi झुक क एक चुकी को मुंह में भर क जोर से उसके निप्पल पे काट क मानो उसे होश में लाता है
"आआआआह्ह्ह्ह… kutttttttttttteeeeeeeee… खून निकलेगा किया.."
सत्यम मुस्कुराते हुए जोर जोर से अपने लुंड को उस कामुक योनि की गहराई में उतारते हुए है पड़ता है और मुस्कुरा क कहता है
"नहीं.. माँ की लोदी.. दूध.."
मालती तोह बुरी तरह शर्मा सी जाती है, पर सत्यम अपना अगला सवाल करता है
"वैसे अगर सोनू ने छूट मांगी तोह देगी किया.."
मालती इस नए प्रश्न से पूरी तरह हैरान रह जाती है, वो पूरी तरह पागल सी हो उठी है ये सोच क एक जवान होता बचा उसे छोड़ेगा..
पर वो अपनी कामुकता को काबू करते हुए धीरे से कहती है
"कुट्टी.. सुवर कही का.. पागल हो गया है किया तू.. दिमाग ख़राब है तेरा.. किया"
पर सत्यम नीचे झुकते हुए एक बार पूरी चुकी को मुंह में भर लेता है और जोर से चूसना सुरु कर देता है
"उम्मम्मम… Slllllrrrrrrrrruuuuuuuuuupp… Glllrrrrrrrrrruuuuuuuuuuppp………… ummmmmmmmmmm… आआआआअह्ह्ह… उम्मम्मम्मम्मम… सल्ल्ल्लूऊरररररररपपप.."
पर कुछ hi पल में अपना मुंह हटते हुए कहता है
"साली रंडी एक बार उसे दे देगी तोह कोनसी तेरी छूट घिस जाएगी.. बोल बेहेन की लोदी देगी न उसे.. अपनी छूट.."
मालती कांपते हुए अपने अंदर और अधिक गर्मी का प्रवाह महसूस करती है और कांपती हुई आवाज़ में कहती है
"मुंह बंद कर अपना.."
पर सत्यम इस बार अपनी कमर को रोक देता है और एक hi पल में मालती जैसे तड़प उठती है, वो एक पल तक सत्यम की और ाश भरी नज़रों से देखती रहती है पर सत्यम कोई हरकत नहीं करता जिसपे मालती खुद hi नीचे से अपनी कमर चलने लगती है तोह सत्यम अपना लुंड थोड़ा सा बहार खींच लेता है और इस कारन मालती का हाल ऐसा हो जाता है जैसे उसके जलते बदन पे गिरता हुआ ठंडा पानी अचानक से रोक लिया गया हो
"आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.. किया कर रहा है कुत्त्तीीीे.. छोड़.. छोड़.. छोड़.. मुझे.. छोड़.. नाआ…."
ये मालती की वो कामुकता थी जिसे अब वो छुपाने में कामयाब नहीं हो प् रही थी, पर सत्यम ऐसे अपनी जीत समझते हुए कहता है
"तोह बता पहले.. कहा लेगी सोनू का लुंड.. बोल चिनार.. वर्ण में जा रहा हु.."
मालती एक पल क लिए उसकी आँखों में देखती है और फिर अपनी hi आग में जलती हुई सी कहती है
"गांड.. गांड में.. अब खुस.. अब तोह छोड़ मुझे.. छोड़.. छोड़.. छोड़ कुत्त्ते.. छोड़ मुझे.."
मालती ने ये सोनू क लिए जिस द्वार की बात करि थी उसका कारन आप स्नानघर वाले उस खास अपडेट में पद hi चुके है
सत्यम जैसे hi मालती क मुख से ये सुनता है वो अपने लुंड को वापस से ट्रैन की गति से दौड़ा देता है
जिससे मिलने वाले आनंद क चलते मालती की आँखें बंद होती चली जाती है और उसे ऐसे देख क सत्यम मन hi मन है पड़त है.. जैसे वो कोई जुंग जीत गया हो, अब मोनू की माँ 'मालती' भी अपनी छूट में वापस से बढ़ती हुई गति को साफ़ साफ़ महसूस कर प् रही थी, वही सत्यम ने फिर से मोर्चा सँभालते हुए अपने दोनों हाथों से अपनी नंगी पुंगी चची की दोनों चूचियों को कसके जकड क पूरी बेहरमी से मसलना सुरु कर दिया था.. यानि अब मालती एक साथ दोहरे हमले को महसूस कर रही थी और आनंद से भर्ती जा रही थी
“Aaaaaaaaaaaahhhh... माआआआ.... आईसीईई... हीई... आआआआअह्ह्ह्हह.... पहाडडडडड डाआआलल्लूऊओ.... बेताआए... अपनी चची की छूट को.... आआआअह्ह्ह्ह... माआआ... आआआआह्ह्ह्ह.... ऐसे hi.... आआआह्ह्ह्ह.... आआआआअह्ह्ह्हह.. छोड़ो मुझे.. मैं ऐसी लायक हु.. यही होना चाहिए मेरे साथ.. रंडी बना क छोड़ो मुझे… जोर जोर से छोड़ो.. भर दे मेरी छूट को.. Aaaaaaaaaahhhh… लाल कर दो मेरी छूट और चूचियों को.. आआआआह्ह्ह्ह"
सत्यम भी अब पूरी तरह पसीने में भीग चूका था, उसका पसीना उसके चेहरे से टपकते हुए मालती की चूचियों पे तोह कभी उसकी नाभि पे गिर रहा था.. हैरानी थी की ऐसी ठण्ड में भी एक औरत की गर्मी ने उसे पसीना ला दिया था, पर सत्यम भी म्हणत करने में कही से पीछे नहीं था वो दोनों हाथों से 'मोनू की माँ' की चूचियों को दबाते हुए ऐसे मसल रहा था जैसे अभी क अभी उनमें से दूध की धरा बह उठेगी
सत्यम जोर जोर से छूट में दकके लगते हुए
"आआआअह्हह्ह्ह्ह.... साआल्लीीी... इतनी गरम छुट्ट्ट्ट... आआआह्ह्ह्ह... कामिनी.. रंडी.. आआआअह्ह्ह.. साएलीई तेरी छूट… मेरे लुंड को गन्ने की मशीन क जैसे निचोड़ रही है... Aaaaaaaaaahhhhhhhhh"
मालती भी इस खेल में पीछे नहीं थी, वैसे भी पहले झींगुर और फिर सोनू क नाम ने जो एक आग भड़काई थी उसके अंदर उसके चलते वो खुद hi अब नीचे से अपनी कमर को हरकत देने लगी थी.. और पूरी कोशिश कर रही थी की सत्यम का इतना बड़ा लुंड उसकी योनि क अंतिम चोर को बार बार चुवे
"Aaaaaaaaaahhhhh... माआआआ.... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़.... और जोर जोर से छोड़... कुत्त्तीीी... भड़वे... आआआहहहहह.. हराम क पिल्लै… रंडी की औलाद.. पहाड़ दे मेरी छूट को.. आआआहहह… उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़….. कमीने कोई अपनी चची को ऐसे छोड़ता है किया... आआआआअह्हह्ह्ह्ह.. हआ.. पर तू ऐसे hi छोड़ कुत्ते..."
सत्यम का जोश भी काम होने का नाम नहीं ले रहा था वो पूरी ताक़त से जोरदार दकके मरते हुए हाफ रहा था और मुस्कुरा क कहता है
"आआआअह्ह्ह्ह... साललीई.. चिनार.. है हु मैं 'रंडी की औलाद'.. और अब देख कैसे ये 'रंडी का बचा' तेरी छूट को भरेगा आज.. साली हरामजादी अब से तू मेरी चची नहीं.. सिर्फ मेरी रंडी है.. मेरी रखेल है... मेरी कुटिया है... बोल है न... साललीई"
सत्यम अपनी बात कहते हुए एक बार फिर से अपनी चची क नंगे जिस्म पे पूरी तरह च सा जाता है और उसके मुंह में अपनी जीभ घुसा क मुंह का अंदर तक स्वाद लेने लगता है.. पर इन सब क बाद भी उसकी चलती कमर में कोई भी कमी नहीं आयी थी, वो अब भी 'कुंदन की पत्नी' को उसी रफ़्तार से छोड़ रहा था
कंटिन्यू...
"आआआआह्ह्ह्ह… kutttttttttttteeeeeeeee… खून निकलेगा किया.."
सत्यम मुस्कुराते हुए जोर जोर से अपने लुंड को उस कामुक योनि की गहराई में उतारते हुए है पड़ता है और मुस्कुरा क कहता है
"नहीं.. माँ की लोदी.. दूध.."
मालती तोह बुरी तरह शर्मा सी जाती है, पर सत्यम अपना अगला सवाल करता है
"वैसे अगर सोनू ने छूट मांगी तोह देगी किया.."
मालती इस नए प्रश्न से पूरी तरह हैरान रह जाती है, वो पूरी तरह पागल सी हो उठी है ये सोच क एक जवान होता बचा उसे छोड़ेगा..
पर वो अपनी कामुकता को काबू करते हुए धीरे से कहती है
"कुट्टी.. सुवर कही का.. पागल हो गया है किया तू.. दिमाग ख़राब है तेरा.. किया"
पर सत्यम नीचे झुकते हुए एक बार पूरी चुकी को मुंह में भर लेता है और जोर से चूसना सुरु कर देता है
"उम्मम्मम… Slllllrrrrrrrrruuuuuuuuuupp… Glllrrrrrrrrrruuuuuuuuuuppp………… ummmmmmmmmmm… आआआआअह्ह्ह… उम्मम्मम्मम्मम… सल्ल्ल्लूऊरररररररपपप.."
पर कुछ hi पल में अपना मुंह हटते हुए कहता है
"साली रंडी एक बार उसे दे देगी तोह कोनसी तेरी छूट घिस जाएगी.. बोल बेहेन की लोदी देगी न उसे.. अपनी छूट.."
मालती कांपते हुए अपने अंदर और अधिक गर्मी का प्रवाह महसूस करती है और कांपती हुई आवाज़ में कहती है
"मुंह बंद कर अपना.."
पर सत्यम इस बार अपनी कमर को रोक देता है और एक hi पल में मालती जैसे तड़प उठती है, वो एक पल तक सत्यम की और ाश भरी नज़रों से देखती रहती है पर सत्यम कोई हरकत नहीं करता जिसपे मालती खुद hi नीचे से अपनी कमर चलने लगती है तोह सत्यम अपना लुंड थोड़ा सा बहार खींच लेता है और इस कारन मालती का हाल ऐसा हो जाता है जैसे उसके जलते बदन पे गिरता हुआ ठंडा पानी अचानक से रोक लिया गया हो
"आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.. किया कर रहा है कुत्त्तीीीे.. छोड़.. छोड़.. छोड़.. मुझे.. छोड़.. नाआ…."
ये मालती की वो कामुकता थी जिसे अब वो छुपाने में कामयाब नहीं हो प् रही थी, पर सत्यम ऐसे अपनी जीत समझते हुए कहता है
"तोह बता पहले.. कहा लेगी सोनू का लुंड.. बोल चिनार.. वर्ण में जा रहा हु.."
मालती एक पल क लिए उसकी आँखों में देखती है और फिर अपनी hi आग में जलती हुई सी कहती है
"गांड.. गांड में.. अब खुस.. अब तोह छोड़ मुझे.. छोड़.. छोड़.. छोड़ कुत्त्ते.. छोड़ मुझे.."
मालती ने ये सोनू क लिए जिस द्वार की बात करि थी उसका कारन आप स्नानघर वाले उस खास अपडेट में पद hi चुके है
सत्यम जैसे hi मालती क मुख से ये सुनता है वो अपने लुंड को वापस से ट्रैन की गति से दौड़ा देता है
जिससे मिलने वाले आनंद क चलते मालती की आँखें बंद होती चली जाती है और उसे ऐसे देख क सत्यम मन hi मन है पड़त है.. जैसे वो कोई जुंग जीत गया हो, अब मोनू की माँ 'मालती' भी अपनी छूट में वापस से बढ़ती हुई गति को साफ़ साफ़ महसूस कर प् रही थी, वही सत्यम ने फिर से मोर्चा सँभालते हुए अपने दोनों हाथों से अपनी नंगी पुंगी चची की दोनों चूचियों को कसके जकड क पूरी बेहरमी से मसलना सुरु कर दिया था.. यानि अब मालती एक साथ दोहरे हमले को महसूस कर रही थी और आनंद से भर्ती जा रही थी
“Aaaaaaaaaaaahhhh... माआआआ.... आईसीईई... हीई... आआआआअह्ह्ह्हह.... पहाडडडडड डाआआलल्लूऊओ.... बेताआए... अपनी चची की छूट को.... आआआअह्ह्ह्ह... माआआ... आआआआह्ह्ह्ह.... ऐसे hi.... आआआह्ह्ह्ह.... आआआआअह्ह्ह्हह.. छोड़ो मुझे.. मैं ऐसी लायक हु.. यही होना चाहिए मेरे साथ.. रंडी बना क छोड़ो मुझे… जोर जोर से छोड़ो.. भर दे मेरी छूट को.. Aaaaaaaaaahhhh… लाल कर दो मेरी छूट और चूचियों को.. आआआआह्ह्ह्ह"
सत्यम भी अब पूरी तरह पसीने में भीग चूका था, उसका पसीना उसके चेहरे से टपकते हुए मालती की चूचियों पे तोह कभी उसकी नाभि पे गिर रहा था.. हैरानी थी की ऐसी ठण्ड में भी एक औरत की गर्मी ने उसे पसीना ला दिया था, पर सत्यम भी म्हणत करने में कही से पीछे नहीं था वो दोनों हाथों से 'मोनू की माँ' की चूचियों को दबाते हुए ऐसे मसल रहा था जैसे अभी क अभी उनमें से दूध की धरा बह उठेगी
सत्यम जोर जोर से छूट में दकके लगते हुए
"आआआअह्हह्ह्ह्ह.... साआल्लीीी... इतनी गरम छुट्ट्ट्ट... आआआह्ह्ह्ह... कामिनी.. रंडी.. आआआअह्ह्ह.. साएलीई तेरी छूट… मेरे लुंड को गन्ने की मशीन क जैसे निचोड़ रही है... Aaaaaaaaaahhhhhhhhh"
मालती भी इस खेल में पीछे नहीं थी, वैसे भी पहले झींगुर और फिर सोनू क नाम ने जो एक आग भड़काई थी उसके अंदर उसके चलते वो खुद hi अब नीचे से अपनी कमर को हरकत देने लगी थी.. और पूरी कोशिश कर रही थी की सत्यम का इतना बड़ा लुंड उसकी योनि क अंतिम चोर को बार बार चुवे
"Aaaaaaaaaahhhhh... माआआआ.... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़.... और जोर जोर से छोड़... कुत्त्तीीी... भड़वे... आआआहहहहह.. हराम क पिल्लै… रंडी की औलाद.. पहाड़ दे मेरी छूट को.. आआआहहह… उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़….. कमीने कोई अपनी चची को ऐसे छोड़ता है किया... आआआआअह्हह्ह्ह्ह.. हआ.. पर तू ऐसे hi छोड़ कुत्ते..."
सत्यम का जोश भी काम होने का नाम नहीं ले रहा था वो पूरी ताक़त से जोरदार दकके मरते हुए हाफ रहा था और मुस्कुरा क कहता है
"आआआअह्ह्ह्ह... साललीई.. चिनार.. है हु मैं 'रंडी की औलाद'.. और अब देख कैसे ये 'रंडी का बचा' तेरी छूट को भरेगा आज.. साली हरामजादी अब से तू मेरी चची नहीं.. सिर्फ मेरी रंडी है.. मेरी रखेल है... मेरी कुटिया है... बोल है न... साललीई"
सत्यम अपनी बात कहते हुए एक बार फिर से अपनी चची क नंगे जिस्म पे पूरी तरह च सा जाता है और उसके मुंह में अपनी जीभ घुसा क मुंह का अंदर तक स्वाद लेने लगता है.. पर इन सब क बाद भी उसकी चलती कमर में कोई भी कमी नहीं आयी थी, वो अब भी 'कुंदन की पत्नी' को उसी रफ़्तार से छोड़ रहा था
कंटिन्यू...