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बहार बारिश जैसे और तेज होती जा रही थी, हवा क थपेड़ों क साथ साथ पानी की तेज बौछार बार बार उस बंद पड़ी सीसे की खिड़की पे जोर से आके टकरा रही थी, पर यहाँ अंदर जो गर्मी बाद रही थी उसका इलाज न इस बारिश क पास था न hi इस ठण्ड क पास..
नसरीन का जवान बीटा 'खालिद' अभी भी उसके पीछे से पूरा चिपका हुआ था और उसका एक हाथ उसकी अम्मी की एक बड़ी bhari-bharkam चुकी पर जमा हुआ उसे जोर जोर से कभी खींच रहा था तोह कभी पूरी ताक़त से मसल और मरोड़ रहा था.. वही उसका दूसरा हाथ नीचे की और उस बुर पे जमा हुआ था जिससे वो खुद पैदा हुआ था.. खालिद पूरी ताक़त से अपनी अम्मी की बुर को मुठी में भरे हुए मसले जा रहा था जिसके चलते नसरीन की बुर से निकलने वाले पानी से खुद उसके बेटे का पूरा हाथ भीग चूका था
"Aaaaaaaaaaaaaahhh.. माआआआं.. Jaaaaaaaaaaaaaa… बीटा… मत कर न… "
वैसे नसरीन चाहती तोह एक हाथ को चौखट पे जमाये हुए दूसरे हाथ से अपने बेटे का हाथ पकड़ क उसे अपनी बुर से अलग कर सकती थी पर वो ऐसा कुछ कर नहीं प् रही थी.. या सायद करना नहीं चाहती थी, वो बस बार बार वही बात दोहराती है जहा इस बार सब्द थोड़े से अलग था
"रुक जा खालिद.. मत कर ये गुनाह.. तेर हाथ जोड़ती हु… ऊपर जाके तेरे अब्बा को क्या मुंह दिखाउंगी… आआअह्ह्ह… रुक जा बीटा.. आआआआह… चोर दे मुझे.."
ये सुनते hi न जाने क्यों, खालिद का जोश जैसे कई गुना बाद जाता है और वो उसी हालत में अपनी कमर को हल्का सा पीछे की और खींचता है जिससे उसका उसकी अम्मी की सलवार क ऊपर से hi उनके चूतड़ों क बीच घुसा वो अजगर हल्का सा बहार सा आता है और फिर उसी वेग से चूतड़ों क कैसे गलियारे को चीरता हुआ उस छेद पे जेक टकराया है जहा से आग का पूरा दरिया बहार चालक पड़ने की कोशिश कर रहा था.. वही जैसे hi नसरीन को इतना तेज़ प्रहार अपने उस मासूम गांड क छेद पे महसूस होता है उसकी आँखें बंद हो जाती है और मुंह से दर्द और कामुकता में सनी हुई वो आवाज़ फुट पड़ती है
"Aaaaaaaaaaaaaaahhhhh… Khalidddddddddddddddd… किया कर रहा है ये……. Maaaaaaaarrrrrrrrrrrr.. गईइइइइइइइइ.. Jeeeeeeeeee… कमीना… मत कररररररररर… Ammiiiiiiiiiii.. हु में तेरी… मत कर ये….. Aaaaaaaaaaaaaaa.."
खालिद क उस प्रहार में इतनी शक्ति समय हुई थी थी सलवार का कुछ कपडा भी नसरीन क बेटे क मोठे बिना चमड़ी वाले सुपडे क साथ अंदर जेक उस छेद का मुंह खोल क अंदर तक घुस गया था
"Aaaaaaaaaaaaaahhhhh.. Ammiiiiiiiiiiiiiiiii… तुम्हारा ये छेद अंदर से कितना गरम है…. अम्मी किया में ऐसे देख लू…."
अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह तड़प गयी नसरीन उसकी बात का तनिक भी मतलब नहीं समझ पति और अपने hi नसे में खोयी हुई बोल पड़ती है
"पीछे खींच कमीने.. फिर चाहे जो कर.. आआआआअह्ह्ह्ह.. पीछे खींच.."
पियासे को किया चाहिए.. सिर्फ.. पानी, और एक जवान बेटे को किया चाइये.. सिर्फ.. उसकी माँ
खालिद जैसे hi उसकी अम्मी की बात सुनता है उसका पूरा सरीर ख़ुशी से झूम उठता है, उसने अब तक जिस हाथ को अपनी अम्मी की छूट पे रख क वह अपनी जन्मभूमि का मर्दन कर रहा था, उसी हाथ को हल्का सा ढीला करते हुए अपनी अम्मी की बुर को आज़ाद कर देता है और खुद भी पीछे हैट जाता है जिससे उसका मोटा अजगर जैसा लुंड जो उसकी अम्मी की सलवार क ऊपर से hi उनकी गांड क छेद में घुसा हुआ.. उसका मोटा सूपड़ा बहार निकल अत है और साथ hi वो फांसी हुई सलवार भी
पर असल खेल ये थोड़ी था, ककी अगले hi पल खालिद अपना हाथ छूट क स्तन से थोड़ा ऊपर सरकते हुए अपनी अम्मी की सलवार क नाड़े पे रोकता है और बिना किसी disha-nirdesh क एक hi पल में अपनी अम्मी की सलवार का नाडा खींच देता है, जिसके चलते नसरीन क कुछ भी समझ पाने से पहले hi उसकी सलवार उसे नीचे से नंगा करते हुए जमीन को चूमना सुरु हो जाती है
नसरीन अपनी सलवार क खुलते hi पूरी तरह हैरान रह जाती है और दिल जोरो से धक् धक् करने लगता है.." "आआआआअह्ह्ह.. ये.. ये किया कर रहा है कमीने.. चोर मुझे…"
पर खालिद अपनी अम्मी को कुछ करने नहीं देता है, ककी जैसे hi नसरीन एक हाथ उस चौखट से हटती है अपनी सलवार को उठाने क लिए खालिद तुरंत hi उनका वो हाथ पकड़ से उसे वापस से उसी चौखट पे जमा देता है और दूसरे हाथ से अपनी अम्मी की कमीज को पीछे से पकड़ से उठाते हुए कहता है
"अम्मी… आप मुझे क्यों रोकती हो.. जबकि आप खुद यानि चाहती हो वर्ण खेत और उससे पहले मामू क यहाँ वो सब करने क्यू देती मुझे.. और अभी तोह आपने खुद कहा न की जो चाहे करू.."
नसरीन बुरी तरह कामुकता क चलते थरथरा सी जाती है और अपनी भरी होती आवाज़ में कहती है
"मैंने ये थोड़ी कहा की तू मेरी सलवार.. उतर दे.. मुझे नंगी कर दे, मत कर ये सब अम्मी हु तेरी मैं…"
इधर खालिद जैसे hi पीछे से कमीज को उठता है उसे उसकी खूबसूरत अम्मी की नंगी गांड क दर्शन होते है जिसे देखते hi उसका अजगर जैसा लुंड फुफकार उठता है.. और किसी भी तरह उन चूतड़ों क बीच छुपे हुए उस बिल में घुस जाना चाहता था
"मैं जनता हु की आप मेरी अम्मी हो.. तभी तोह मैं आपसे पियर करना चाहता हु
..आपको पाना छठा हु, वो सब करना चाहता हु जो एक सोहर अपनी बेगम से करता है.. मैं आपके पेट से अपना बचा पैदा करना चाहता हुआ..
बताओ अम्मी.. मुझे करने डौगी.. ये सब ?"
खालिद क इस सवाल ने नसरीन क पुरे अस्तित्व को सूखे पत्ते सामान कंपकपी से भर दिया था, उसे समझ नहीं आता की भला वो अपने बेटे को कैसे समझाए की एक माँ बेटे क बीच ये सब संभव नहीं है, पर कही न कही ये बातें उसकी बुर से गरम दरिया भी बहा रही थी.. वो एक अजीब से मजधार में फास चुकी थी
खालिद अपना पहला हाथ जो उसने अपनी अम्मी क हाथ पे रख क उसे चौखट पे जमाया हुआ उसे वह से हटा क अब दोनों हाथों से उनकी नंगी कमर को पकड़ क हल्का सा पीछे की और खींच लेता है और इतनी दिएर से अपने बेटे क आगे रुकने की मिन्नत करने वाली नसरीन भी न जाने क्यू क हल्का सा पीच होक अपनी गांड को अपने बेटे की और निकल देती है.. जहा उसकी कमीज अब ऊपर छड़ी हुई थी और गांड पूरी की पूरी बहार निकल चुकी थी और सलवार क बारे में तोह आप जानते hi है की वो उसके पायल वाले पैरों को चूमने में पूरी तरह व्यस्त थी, पर फिर भी नसरीन अपनी कांपती सी आवाज़ में धीरे से कहती है
"मान जा…. खालिद.. मत कर ये गुनाह.."
तभी खालिद अपनी अम्मी की नंगी हो चुकी गांड पे अपना एक हाथ फिरते हुए कहता है
"पर मुझे ये गुनाह करना है अम्मी…. करने दो मुझे ये गुनाह.."
वो अपनी बात कहते हुए धीरे से अपने घुटनो पे बैठ जाता है और अब उसका मुंह ठीक उसकी अम्मी क चूतड़ों क बीच वाली उस लम्बे और गहरे गलियारे क सामने था जिसे पार करने क बाद वो खूबसूरत दरवाजा अत है
कंटिन्यू... (भविष्य में कही..)
***
आशा करता हु 'माँ बेटे' का ये कामुक क्रियाकल्प आप सभी को पसंद आया होगा


नष्ट अपडेट
फिर से नहीं.. आआअह्ह
[On 24-04-26]






अपकमिंग उपदटेस
फिर से नहीं.. आआअह्ह (24-04-2026)
ये कैसा सपना था ? (30-04-2026)
Chapter
नसरीन का जवान बीटा 'खालिद' अभी भी उसके पीछे से पूरा चिपका हुआ था और उसका एक हाथ उसकी अम्मी की एक बड़ी bhari-bharkam चुकी पर जमा हुआ उसे जोर जोर से कभी खींच रहा था तोह कभी पूरी ताक़त से मसल और मरोड़ रहा था.. वही उसका दूसरा हाथ नीचे की और उस बुर पे जमा हुआ था जिससे वो खुद पैदा हुआ था.. खालिद पूरी ताक़त से अपनी अम्मी की बुर को मुठी में भरे हुए मसले जा रहा था जिसके चलते नसरीन की बुर से निकलने वाले पानी से खुद उसके बेटे का पूरा हाथ भीग चूका था
"Aaaaaaaaaaaaaahhh.. माआआआं.. Jaaaaaaaaaaaaaa… बीटा… मत कर न… "
वैसे नसरीन चाहती तोह एक हाथ को चौखट पे जमाये हुए दूसरे हाथ से अपने बेटे का हाथ पकड़ क उसे अपनी बुर से अलग कर सकती थी पर वो ऐसा कुछ कर नहीं प् रही थी.. या सायद करना नहीं चाहती थी, वो बस बार बार वही बात दोहराती है जहा इस बार सब्द थोड़े से अलग था
"रुक जा खालिद.. मत कर ये गुनाह.. तेर हाथ जोड़ती हु… ऊपर जाके तेरे अब्बा को क्या मुंह दिखाउंगी… आआअह्ह्ह… रुक जा बीटा.. आआआआह… चोर दे मुझे.."
ये सुनते hi न जाने क्यों, खालिद का जोश जैसे कई गुना बाद जाता है और वो उसी हालत में अपनी कमर को हल्का सा पीछे की और खींचता है जिससे उसका उसकी अम्मी की सलवार क ऊपर से hi उनके चूतड़ों क बीच घुसा वो अजगर हल्का सा बहार सा आता है और फिर उसी वेग से चूतड़ों क कैसे गलियारे को चीरता हुआ उस छेद पे जेक टकराया है जहा से आग का पूरा दरिया बहार चालक पड़ने की कोशिश कर रहा था.. वही जैसे hi नसरीन को इतना तेज़ प्रहार अपने उस मासूम गांड क छेद पे महसूस होता है उसकी आँखें बंद हो जाती है और मुंह से दर्द और कामुकता में सनी हुई वो आवाज़ फुट पड़ती है
"Aaaaaaaaaaaaaaahhhhh… Khalidddddddddddddddd… किया कर रहा है ये……. Maaaaaaaarrrrrrrrrrrr.. गईइइइइइइइइ.. Jeeeeeeeeee… कमीना… मत कररररररररर… Ammiiiiiiiiiii.. हु में तेरी… मत कर ये….. Aaaaaaaaaaaaaaa.."
खालिद क उस प्रहार में इतनी शक्ति समय हुई थी थी सलवार का कुछ कपडा भी नसरीन क बेटे क मोठे बिना चमड़ी वाले सुपडे क साथ अंदर जेक उस छेद का मुंह खोल क अंदर तक घुस गया था
"Aaaaaaaaaaaaaahhhhh.. Ammiiiiiiiiiiiiiiiii… तुम्हारा ये छेद अंदर से कितना गरम है…. अम्मी किया में ऐसे देख लू…."
अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह तड़प गयी नसरीन उसकी बात का तनिक भी मतलब नहीं समझ पति और अपने hi नसे में खोयी हुई बोल पड़ती है
"पीछे खींच कमीने.. फिर चाहे जो कर.. आआआआअह्ह्ह्ह.. पीछे खींच.."
पियासे को किया चाहिए.. सिर्फ.. पानी, और एक जवान बेटे को किया चाइये.. सिर्फ.. उसकी माँ
खालिद जैसे hi उसकी अम्मी की बात सुनता है उसका पूरा सरीर ख़ुशी से झूम उठता है, उसने अब तक जिस हाथ को अपनी अम्मी की छूट पे रख क वह अपनी जन्मभूमि का मर्दन कर रहा था, उसी हाथ को हल्का सा ढीला करते हुए अपनी अम्मी की बुर को आज़ाद कर देता है और खुद भी पीछे हैट जाता है जिससे उसका मोटा अजगर जैसा लुंड जो उसकी अम्मी की सलवार क ऊपर से hi उनकी गांड क छेद में घुसा हुआ.. उसका मोटा सूपड़ा बहार निकल अत है और साथ hi वो फांसी हुई सलवार भी
पर असल खेल ये थोड़ी था, ककी अगले hi पल खालिद अपना हाथ छूट क स्तन से थोड़ा ऊपर सरकते हुए अपनी अम्मी की सलवार क नाड़े पे रोकता है और बिना किसी disha-nirdesh क एक hi पल में अपनी अम्मी की सलवार का नाडा खींच देता है, जिसके चलते नसरीन क कुछ भी समझ पाने से पहले hi उसकी सलवार उसे नीचे से नंगा करते हुए जमीन को चूमना सुरु हो जाती है
नसरीन अपनी सलवार क खुलते hi पूरी तरह हैरान रह जाती है और दिल जोरो से धक् धक् करने लगता है.." "आआआआअह्ह्ह.. ये.. ये किया कर रहा है कमीने.. चोर मुझे…"
पर खालिद अपनी अम्मी को कुछ करने नहीं देता है, ककी जैसे hi नसरीन एक हाथ उस चौखट से हटती है अपनी सलवार को उठाने क लिए खालिद तुरंत hi उनका वो हाथ पकड़ से उसे वापस से उसी चौखट पे जमा देता है और दूसरे हाथ से अपनी अम्मी की कमीज को पीछे से पकड़ से उठाते हुए कहता है
"अम्मी… आप मुझे क्यों रोकती हो.. जबकि आप खुद यानि चाहती हो वर्ण खेत और उससे पहले मामू क यहाँ वो सब करने क्यू देती मुझे.. और अभी तोह आपने खुद कहा न की जो चाहे करू.."
नसरीन बुरी तरह कामुकता क चलते थरथरा सी जाती है और अपनी भरी होती आवाज़ में कहती है
"मैंने ये थोड़ी कहा की तू मेरी सलवार.. उतर दे.. मुझे नंगी कर दे, मत कर ये सब अम्मी हु तेरी मैं…"
इधर खालिद जैसे hi पीछे से कमीज को उठता है उसे उसकी खूबसूरत अम्मी की नंगी गांड क दर्शन होते है जिसे देखते hi उसका अजगर जैसा लुंड फुफकार उठता है.. और किसी भी तरह उन चूतड़ों क बीच छुपे हुए उस बिल में घुस जाना चाहता था
"मैं जनता हु की आप मेरी अम्मी हो.. तभी तोह मैं आपसे पियर करना चाहता हु
..आपको पाना छठा हु, वो सब करना चाहता हु जो एक सोहर अपनी बेगम से करता है.. मैं आपके पेट से अपना बचा पैदा करना चाहता हुआ..
बताओ अम्मी.. मुझे करने डौगी.. ये सब ?"
खालिद क इस सवाल ने नसरीन क पुरे अस्तित्व को सूखे पत्ते सामान कंपकपी से भर दिया था, उसे समझ नहीं आता की भला वो अपने बेटे को कैसे समझाए की एक माँ बेटे क बीच ये सब संभव नहीं है, पर कही न कही ये बातें उसकी बुर से गरम दरिया भी बहा रही थी.. वो एक अजीब से मजधार में फास चुकी थी
खालिद अपना पहला हाथ जो उसने अपनी अम्मी क हाथ पे रख क उसे चौखट पे जमाया हुआ उसे वह से हटा क अब दोनों हाथों से उनकी नंगी कमर को पकड़ क हल्का सा पीछे की और खींच लेता है और इतनी दिएर से अपने बेटे क आगे रुकने की मिन्नत करने वाली नसरीन भी न जाने क्यू क हल्का सा पीच होक अपनी गांड को अपने बेटे की और निकल देती है.. जहा उसकी कमीज अब ऊपर छड़ी हुई थी और गांड पूरी की पूरी बहार निकल चुकी थी और सलवार क बारे में तोह आप जानते hi है की वो उसके पायल वाले पैरों को चूमने में पूरी तरह व्यस्त थी, पर फिर भी नसरीन अपनी कांपती सी आवाज़ में धीरे से कहती है
"मान जा…. खालिद.. मत कर ये गुनाह.."
तभी खालिद अपनी अम्मी की नंगी हो चुकी गांड पे अपना एक हाथ फिरते हुए कहता है
"पर मुझे ये गुनाह करना है अम्मी…. करने दो मुझे ये गुनाह.."
वो अपनी बात कहते हुए धीरे से अपने घुटनो पे बैठ जाता है और अब उसका मुंह ठीक उसकी अम्मी क चूतड़ों क बीच वाली उस लम्बे और गहरे गलियारे क सामने था जिसे पार करने क बाद वो खूबसूरत दरवाजा अत है
कंटिन्यू... (भविष्य में कही..)
***
आशा करता हु 'माँ बेटे' का ये कामुक क्रियाकल्प आप सभी को पसंद आया होगा
नष्ट अपडेट
[On 24-04-26]
अपकमिंग उपदटेस
फिर से नहीं.. आआअह्ह (24-04-2026)
ये कैसा सपना था ? (30-04-2026)
