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चारो तरफ भगदड़ मची हुई थी. मालूम हुआ की किसी ने सुनार पर हमला कर दिया था . कुछ लोग उसे गाड़ी में पटक रहे थे , उसका एक हाथ झूल रहा था, मैंने देखा उसे. पिछले कुछ दिनों से गाँव में बड़ी अजीब अजीब घटनाये हो रही थी , पर सिर्फ उन लोगो के साथ जो या तो जब्बर के साथ थे या सुनार के साथ. रीना को उसके घर छोड़ने के बाद मैं फिर से वारदात वाली जगह पर पहुँच गया .
अब वहां पर कुछ गिने चुने लोग ही थे. किसी से तो बड़ी गहरी दुश्मनी थी इन लोगो की जो वो सीधा ही इन्हें मार रहा था . मैंने घटनास्थल की बड़ी बारीकी से जांच की पर कुछ भी ऐसा नहीं मिला जिस से कोई अनुमान लगाया जा सके.पर मेरे दिमाग में दो सवाल बड़ी तेजी से दौड़ लगा रहे थे , पहला ये की हमलावर हो न हो हमारे ही गाँव , मोहल्ले का हो सकता है वर्ना इतनी जल्दी वो कैसे भाग गया. दूसरा सवाल ये की आज ही मैं लाला से उस हीरे के बारे में बात करने वाला था और आज ही लाला पर हमला हो गया.
क्या ये कोई इत्तेफाक था या फिर कोई था जो नहीं चाहता था की लाला मेरे से मिले. मुझे दुश्मनी वाला एंगल ज्यादा जंच रहा था क्योंकि पहले जो लोग मारे गए थे उनसे मेरा कोई लेना देना नहीं था . पर फिर भी इस हमलावर में मेरी दिलचश्पी जाग गयी थी . पंडाल में पड़ी कुर्सी पर बैठे बैठे मैं तमाम तरह के अनुमान लगा रहा था . मैं ताई के घर जा रहा था की मेरी नजर गली में खड़ी चाची पर पड़ी.
“तुम क्या कर रही हो यहाँ पर ” मैंने कहा
चाची- तुमसे मतलब.
मैं- चलो घर चलते है , कुछ नहीं बचा इस तमाशे में देखने को .
उसने बुरा सा मुह बनाया और मेरे साथ चलने लगी. घर के दरवाजे को खोलने के लिए उसने अपना हाथ उठाया ही था की वो अचानक से करह उठी. उसने दुसरे हाथ से अपना हाथ संभाला. मैंने देखा की उसके हाथ से खून बह रहा था .
“ये चोट कैसे लगी तुमको ” मैंने सवाल किया
“तुजसे क्या मतलब है ” चाची ने थोड़े गुस्से से कहा.
मैंने हिमाकत करते हुए उसकी बांह को मरोड़ा और उसे दिवार के सहारे लगा दिया.
“आई, कमीने तेरी ये जुर्रत छोड़ मुझे ” उसने कहा
मैं- मेरी जुर्रत तूने देखि ही कहा है , ये चोट कैसे लगी तुझे , क्या सुनार पर तूने हमला किया था . तू भी थी न वहां पर
चाची- बांह छोड़ दे मेरी मैं कहती हु .
मैं- ये धौंस किसी और को दिखाना और सीधा मेरे सवाल का जवाब दे, तू थी न वहां पर तूने किया न ये ,
तभी वो हुआ जिसकी मुझे जरा भी उम्मीद नहीं थी , चाची ने पलटा खाया और एक झटके में खुद को मुझ से आजाद करवा लिया और अगले ही पल एक तामाचा खींच कर मेरे मुह पर दे मारा .
“दुबारा मेरे साथ बदतमीजी की तो खाल खींच लुंगी तेरी ” चाची ने कहा और दनदनाते हुए घर के अन्दर चली गयी . जबड़े को सहलाते हुए मैं सोच रहा था की ये औरत जितनी दिखती है उस से ज्यादा घाघ है , चाची और ताई दोनों की सख्शियत ही जुदा थी अपने अन्दर न जाने क्या क्या दबाये बैठी थी ये औरते, और तब मुझे समझ आया की दुनिया के राज मुझे बाद में जानने है पहले अपने घर की गुत्थी को सुलझाना होगा.
रात बहुत हुई थी, मैं सोना चाहता था पर अभी अन्दर जाता तो चाची फिर कलेश कर देती तो मैं गयी के यहाँ चला गया . वो कमरे में पलंग पर लेटी थी .
मैं- दरवाजा तो बंद कर लिया करो
ताई- मुझे लगा तू आयेगा
मैं ताई के पास जाकर लेट गया. उसके बदन से आती खुशबू मेरी साँसों में सामने लगी. जैसे ही उसने अपनी पीठ मेरी तरफ की मैंने उसके ऊपर अपनी बांह डाल दी और उसके गोरे,मुलायम पेट को सहलाने लगा. कितना कोमल था वो . मैंने अपनी ऊँगली ताई की नाभि में फिराई
ताई- क्या कर रहा है
मैं- कुछ नहीं .
मेरा दिल कर रहा था की अभी हाथ आगे बढ़ा कर ताई की चुचियो को पकड़ लू और कस कस के मसल दू उनको. मेरी जांघे ताई के कुल्हो से सटी हुई थी . मादक नितम्बो का स्पर्श , मेरे रोम रोम को पुलकित कर रहा था . कांपते होंठो से मैंने ताई की गर्दन के पिछले हिस्से पर एक चुम्बन अंकित किया. ताई के बदन में एक झुर्खुरी दौड़ गयी.
मैंने ताई के चेहरे को अपनी तरफ किया और ताई के गालो को चूमने लगा. मैंने देखा की ताई ने अपनी आँखों को बंद कर लिया था . पर मैं जानता था की शायद यही वो समय था जब मैं उसे अपनी बना सकता था . मैंने अपने होंठो पर जीभ फेरी और ताई के गुलाबी होंठो को अपने मुह में भर लिया.
ताई के होंठो का रस पीते हुए मैंने ताई को सीधी लिटा दिया और अपना एक पैर उसके ऊपर डाल दिया. जब तक मेरा दिल किया मैं उसके होंठो, गालो को चूमता रहा . फिर मैंने ताई के ब्लाउज पर अपना हाथ रखा और ताई की चुचियो को दबाने लगा.
एक दो तीन, चार मैंने गिनते हुए ब्लाउज के हुको को खोला और जालीदार ब्रा में कैद ताई की गदराई चुचिया मेरी आँखों के सामने थी . मैंने ब्रा के ऊपर से ही उनको चूमना शुरू किया , कभी मैं उनको चूमता कभी मैं उनको मसलता . मैंने फिर ब्रा को ऊपर किया और ताई के गहरे भूरे रंग के निप्पल को अपने होंठो से लगा लिया. मैंने ताई के बदन को कांपते महसूस किया. जब मैं उसकी छातियो को पी रहा था तो वो भी मस्ताने लगी . ताई मेरे सर के बालो में हाथ फिराने लगी.
स्तनपान करते हुए मैंने मेरा हाथ ताई की जांघो पर रखा और उनको सहलाने लगा. ताई का लहंगा थोडा ऊँचा हो गया था मैंने उसमे अपना हाथ डाल दिया और ताई की चिकनी जांघो को मसलने लगा. और फिर जब मेरा हाथ दोनों जांघो के बीच उस तपती जगह पर गया जिसकी गर्मी को मैंने अपने जिस्म में उतरते महसूस किया. मैंने मुट्ठी में भर कर ताई की चूत को मसला ही था की .
अब वहां पर कुछ गिने चुने लोग ही थे. किसी से तो बड़ी गहरी दुश्मनी थी इन लोगो की जो वो सीधा ही इन्हें मार रहा था . मैंने घटनास्थल की बड़ी बारीकी से जांच की पर कुछ भी ऐसा नहीं मिला जिस से कोई अनुमान लगाया जा सके.पर मेरे दिमाग में दो सवाल बड़ी तेजी से दौड़ लगा रहे थे , पहला ये की हमलावर हो न हो हमारे ही गाँव , मोहल्ले का हो सकता है वर्ना इतनी जल्दी वो कैसे भाग गया. दूसरा सवाल ये की आज ही मैं लाला से उस हीरे के बारे में बात करने वाला था और आज ही लाला पर हमला हो गया.
क्या ये कोई इत्तेफाक था या फिर कोई था जो नहीं चाहता था की लाला मेरे से मिले. मुझे दुश्मनी वाला एंगल ज्यादा जंच रहा था क्योंकि पहले जो लोग मारे गए थे उनसे मेरा कोई लेना देना नहीं था . पर फिर भी इस हमलावर में मेरी दिलचश्पी जाग गयी थी . पंडाल में पड़ी कुर्सी पर बैठे बैठे मैं तमाम तरह के अनुमान लगा रहा था . मैं ताई के घर जा रहा था की मेरी नजर गली में खड़ी चाची पर पड़ी.
“तुम क्या कर रही हो यहाँ पर ” मैंने कहा
चाची- तुमसे मतलब.
मैं- चलो घर चलते है , कुछ नहीं बचा इस तमाशे में देखने को .
उसने बुरा सा मुह बनाया और मेरे साथ चलने लगी. घर के दरवाजे को खोलने के लिए उसने अपना हाथ उठाया ही था की वो अचानक से करह उठी. उसने दुसरे हाथ से अपना हाथ संभाला. मैंने देखा की उसके हाथ से खून बह रहा था .
“ये चोट कैसे लगी तुमको ” मैंने सवाल किया
“तुजसे क्या मतलब है ” चाची ने थोड़े गुस्से से कहा.
मैंने हिमाकत करते हुए उसकी बांह को मरोड़ा और उसे दिवार के सहारे लगा दिया.
“आई, कमीने तेरी ये जुर्रत छोड़ मुझे ” उसने कहा
मैं- मेरी जुर्रत तूने देखि ही कहा है , ये चोट कैसे लगी तुझे , क्या सुनार पर तूने हमला किया था . तू भी थी न वहां पर
चाची- बांह छोड़ दे मेरी मैं कहती हु .
मैं- ये धौंस किसी और को दिखाना और सीधा मेरे सवाल का जवाब दे, तू थी न वहां पर तूने किया न ये ,
तभी वो हुआ जिसकी मुझे जरा भी उम्मीद नहीं थी , चाची ने पलटा खाया और एक झटके में खुद को मुझ से आजाद करवा लिया और अगले ही पल एक तामाचा खींच कर मेरे मुह पर दे मारा .
“दुबारा मेरे साथ बदतमीजी की तो खाल खींच लुंगी तेरी ” चाची ने कहा और दनदनाते हुए घर के अन्दर चली गयी . जबड़े को सहलाते हुए मैं सोच रहा था की ये औरत जितनी दिखती है उस से ज्यादा घाघ है , चाची और ताई दोनों की सख्शियत ही जुदा थी अपने अन्दर न जाने क्या क्या दबाये बैठी थी ये औरते, और तब मुझे समझ आया की दुनिया के राज मुझे बाद में जानने है पहले अपने घर की गुत्थी को सुलझाना होगा.
रात बहुत हुई थी, मैं सोना चाहता था पर अभी अन्दर जाता तो चाची फिर कलेश कर देती तो मैं गयी के यहाँ चला गया . वो कमरे में पलंग पर लेटी थी .
मैं- दरवाजा तो बंद कर लिया करो
ताई- मुझे लगा तू आयेगा
मैं ताई के पास जाकर लेट गया. उसके बदन से आती खुशबू मेरी साँसों में सामने लगी. जैसे ही उसने अपनी पीठ मेरी तरफ की मैंने उसके ऊपर अपनी बांह डाल दी और उसके गोरे,मुलायम पेट को सहलाने लगा. कितना कोमल था वो . मैंने अपनी ऊँगली ताई की नाभि में फिराई
ताई- क्या कर रहा है
मैं- कुछ नहीं .
मेरा दिल कर रहा था की अभी हाथ आगे बढ़ा कर ताई की चुचियो को पकड़ लू और कस कस के मसल दू उनको. मेरी जांघे ताई के कुल्हो से सटी हुई थी . मादक नितम्बो का स्पर्श , मेरे रोम रोम को पुलकित कर रहा था . कांपते होंठो से मैंने ताई की गर्दन के पिछले हिस्से पर एक चुम्बन अंकित किया. ताई के बदन में एक झुर्खुरी दौड़ गयी.
मैंने ताई के चेहरे को अपनी तरफ किया और ताई के गालो को चूमने लगा. मैंने देखा की ताई ने अपनी आँखों को बंद कर लिया था . पर मैं जानता था की शायद यही वो समय था जब मैं उसे अपनी बना सकता था . मैंने अपने होंठो पर जीभ फेरी और ताई के गुलाबी होंठो को अपने मुह में भर लिया.
ताई के होंठो का रस पीते हुए मैंने ताई को सीधी लिटा दिया और अपना एक पैर उसके ऊपर डाल दिया. जब तक मेरा दिल किया मैं उसके होंठो, गालो को चूमता रहा . फिर मैंने ताई के ब्लाउज पर अपना हाथ रखा और ताई की चुचियो को दबाने लगा.
एक दो तीन, चार मैंने गिनते हुए ब्लाउज के हुको को खोला और जालीदार ब्रा में कैद ताई की गदराई चुचिया मेरी आँखों के सामने थी . मैंने ब्रा के ऊपर से ही उनको चूमना शुरू किया , कभी मैं उनको चूमता कभी मैं उनको मसलता . मैंने फिर ब्रा को ऊपर किया और ताई के गहरे भूरे रंग के निप्पल को अपने होंठो से लगा लिया. मैंने ताई के बदन को कांपते महसूस किया. जब मैं उसकी छातियो को पी रहा था तो वो भी मस्ताने लगी . ताई मेरे सर के बालो में हाथ फिराने लगी.
स्तनपान करते हुए मैंने मेरा हाथ ताई की जांघो पर रखा और उनको सहलाने लगा. ताई का लहंगा थोडा ऊँचा हो गया था मैंने उसमे अपना हाथ डाल दिया और ताई की चिकनी जांघो को मसलने लगा. और फिर जब मेरा हाथ दोनों जांघो के बीच उस तपती जगह पर गया जिसकी गर्मी को मैंने अपने जिस्म में उतरते महसूस किया. मैंने मुट्ठी में भर कर ताई की चूत को मसला ही था की .