A wedding ceremony in village - Page 14 - SexBaba
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A wedding ceremony in village

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देव झड़ने के बाद शबाना से परे हैट गया और ज़मीन पर लेट कर गहरी गहरी सासे लेने लगा. देव तो झाड़ गया था पारा कुंदन प्रताप का तो अभी शुरू भी नहीं हुआ था वो तो शबाना के कामुक अंगो उसके स्तनों और छूट गांड को चाट चाट कर hi अपने लुंड हिला रहे थे. देव के हटने के बाद कुंदन भी शबाना के पीछे से हैट गया और उठ कर खड़ा हो गया और शबाना के चूतड़ों को चौड़ा कर के उसके गांड के छोटे से कैसे हुए छेड़ को निहारने लगा जो शबाना के डोगग्य पोजीशन में होने की वजह से थोड़ा चौड़ा हो गया था कुंदन एक नज़र अपने झाटो से भरे झटके कहते लुंड को देखता तो एक नज़र शबाना के गांड को देखता. वो अपना लुंड शबाना की गांड में डालने को मचल रहा था पर उसके मन में ख्याल आया अगर शबाना को खड़ा करके उसके पीछे से ये लुंड उसकी गांड में उतरा जाए तो वो उसकी गांड में और कास कर अंदर जाएगा और मज़ा दो गुना हो जाएगा. ये सोचते हुए अपना लुंड सहलाते सहलाते उसकी नज़र शबाना के नीचे उसके दूध चूसते प्रताप पर पड़ी जिसका लुंड भी बार बार झटके खा रहा था और शबाना की छूट में घुसने को बेताब था. ये सोचकर कुंदन के मन में कुछ नै तरह से शबाना को दोहरी चुदाई का ख्याल आया क्युकी ये कुत्ता बनाकर छोड़ने की पोजीशन तो बहुत पुराणी हो गई थी.

कुंदन: आए प्रताप चल इस दुधारू गए के नीचे से निकल बहुत बछड़े की तरह पी लिया दूध अब अपने लुँडो का भी कुछ सोच बड़ी देर से गरम होकर झटके पे झटके खाए जा रहे है इन्हे भी ठंडा करना. चल निकल बहार और खड़ा कर ये एक लुंड अंदर लेने के लिए तड़प रही थी आज इसे एक साथ दो लुँडो का मज़ा देते है.

कुंदन के अलफ़ाज़ शबाना के कानो में जा रहे थे और वो उनका मतलब भी समझ रही थी पर विरोध करने का अंजाम उसने देख लिया था और यहाँ कोई ऐसा था नहीं जो उसे बचा ले क्युकी जिसके भरोसे पर वो यहाँ आई थी वो तो उसके दर्द का मज़ा ले रहा था. कुंदन ने एक बार फिर शबाना के बालो को मुट्ठी में जकड़ा और उसे खींचकर खड़ा कर दिया प्रताप भी शबाना के नीचे से निकल कर उसके सामने आकर खड़ा हो गया. दोनों शबाना के बदन से इस कदर आकर चिपक गए थे की शबाना उनके बीच छुप सी गई थी. और दोनों के लुंड इस कदर अकड़ कर सामे की तरफ तन गए थे की पीछे से लालू का लुंड शबाना के चूतड़ों में रगड़ रहा था तो आगे से प्रताप का लुंड शबाना की छूट में यहाँ वह घिस रहा था.

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पीछे से कुंदन शबाना की नंगी चिकनी पीठ और गार्डन को अपनी जीभ से चाटने लगा तो आगे से प्रताप ने अपने होंठ शबाना के होंठो पर रख दिए. शबाना को किश करते करते कुंदन प्रताप ने उसकी एक ब्याह को आपमें अपने कंधो पर रखा और शबाना के चूतड़ों और जांघो के नीचे हाथ का सहारा देकर उसे एक साथ अपनी गोड़ में उठा लिया. कुंदन शबाना के चूतड़ों को पीछे से थामे था तो प्रताप ने आगे से उसकी जांघो को अपनी कमर पर लपेट थाम रखा था इस पोजीशन में शबाना के दोनों छेड़ उसकी गांड और छूट पूरी तरह खुल गए थे. प्रताप को शबाना के होंठो को चूम hi रहा था कुंदन भी शबाना के गालो को छत्ता हुआ उसके होंठो तक पहुंच और दोनों एक साथ शबाना के होंठो को चूसने लगे.

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अपने आगे पीछे दो दो मर्दो की गरम गरम सासे न चाहते हुए शबाना को भी उत्तेजित कर रही थी. वो कुछ पल को साडी बर्बरता वो मार वो सिगरेट की जलन सब भूल गई थी और उनकी किसिंग में डूब सी गई थी. वो कुछ पल को अपने सेंस से बहा सी हो गई उसे होश तब आया जब उसे अपने गांड और छूट दोनों छेड़ो पर एक साथ दो लुँडो का दबाव महसूस हुआ. वो छटपटाना छह रही थी आज़ाद होना छह रही थी पर दो गाँव के हट्टे काटते मर्दो की पकड़ से छूटना इतना आसान कहा था वो भी तब जब वो उनकी गोड़ में उठी हुई हो. प्रताप और कुंदन दोनों के लुंड किसी मैने में लालू से कम नहीं था और बार शबाना की छूट और गांड के छेड़ो पर दस्तक दे रहे थे. शबाना के ज़हन में अपना और लालू का वो फर्स्ट एनकाउंटर घूम रहा था जब लालू ने घोड़ी बनाकर उसकी गांड मारी थी. उस दर्द के बार में सोच सोच कर hi उसके रौंगटे खड़े हो जाते थे और यहाँ तो दो दो मर्द एक साथ उसके अंदर दाखिल होने की कोशिश कर रहे थे. जब एक लुंड ने उसकी गांड में दर्द का भूचाल ला दिया था एक साथ दो लुंड लेना तो उसके लिए बेहद डरावना था. कुंदन ने अपना लुंड का टोपा शबाना की गांड में छेड़ के मुहाने पर रख दिया और प्रताप ने अपने लुंड का आगे का हिस्सा शबाना की छूट में फसा दिया.

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शबाना बुरी तरह छटपटा रही थी अपनी कमर को हिला हिला कर उनके लुंड अपने दोनों छेड़ो से अलग करने की भरसक कोशिश कर रही थी पर उनकी मजबूत पकड़ के सामने उसकी हर कोशिश बेकार थी. वो ज़बान से बोलकर उन्हें रोकना चाहती थी पर एक साथ दो मर्दो के होंठो ने उसके आवाज़ को बंद कर रखा था. वो न बोल सकती थी न हिल सकती थी. कुंदन ने अपने लुंड पर हल्का सा दबाव डाला और उसके लुंड का टोपा की शबाना की गांड के छेड़ को खोलता हुआ उसके अंदर जाकर फस गया. सिर्फ लुंड का टोपा यानि शायद एक चौथाई हिस्सा अंदर जाने भर से शबाना में बदन में दर्द की एक लेहेर दौड़ गई अभी तो तीन चौथाई अंदर जाना बाकी थी और अभी तक प्रताप ने तो कुछ करा hi नहीं था. शायद वो दोनों एक साथ शबाना के अंदर दाखिल होना चाहते थे. और कुंदन ने प्रताप आँखों आँखों में इशारा करा और दोनों एक साथ धक्का मारते हुए अपना अपनाब आधा लुंड शबाना के दोनों छेड़ो के अंदर एक साथ दाखिल कर दिया. शबाना दर्द से बुरी तरह तड़प उठी जिस औरत ने यहाँ इस गाँव में आने से पहले अपने पति तक का लुंड अपने किसी छेड़ में नहीं लिया था आज एक साथ दो दो तगड़े लुंड उसके दोनों छेड़ो को अंदर दाखिल हो गए थे.

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कुछ देर शांत रहने के बाद उन दोनों ने एकसाथ एक और धक्का मारा और उनके तीन चौथाई लुंड शबाना के अंदर दाखिल हो गई. शबाना की और दर्द भरी कराह उसके होंठो में hi घुट कर रह गई. पर इस बार अपने अपने लुंड को अंदर दाल कर hi वो न रुके उनके लुंड ने शबाना की गांड और छूट के अंदर अपने लिए प्रॉपर जगह बना ली थी भले hi इस सबमे में शबाना को कितना भी दर्द हुआ हो पर शबाना के दर्द से उन्हें कोई लेना देना नहीं था. इसलिए अपने लुंड अंदर घुसेड़ देने के बाद एकसाथ रदमीक मोशन में शबाना के दोनों छेड़ो में लुंड अंदर बहार करना शुरू कर दिया. उनके हर धक्के में शबाना के बदन में दर्द की एक तेज़ लेहेर दौड़ जाती. क्युकी उसकी गांड और छूट अब तक केवल एक एक बार चूड़ी थी इसलिए उसकी तिघटनेस अब तक सलामत थी और ऐसे में दो ड्रग्स की वजह से ज़रुरत से ज्यादा फूले लुंड जब एक साथ उसकी टाइट छूट और गांड की दीवरों को चीरते हुए अंदर बहार हो रहे थे तो वो दर्द उसके बर्दाश्त के बहार था. वो तो गनीमत थी की इस पोजीशन की वजह से उनके पुरे लुंड शबाना के अंदर तक नहीं पहुंच पा रहे थे वर्ण शबाना के दर्द की कल्पना करना भी मुश्किल था. पर इसके बावजूद कुंदन और प्रताप ताबड़तोड़ नीचे से शबाना की गांड और छूट को अंदर बहार पेले जा रहे थे.

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शबाना को इस तरह इस कामुक मुद्रा में चुड़ते हुए देख कर ज़मीन पर लेते देव के लुंड में एक बार फिर हल्का हल्का तनाव आने लगा. वो नीचे से शबाना के दोनों छेड़ो में अपने दोस्तों के लुंड अंदर बहार होते देख रहा था और शबाना के चेहरे पर नज़र आते दर्द के भावो को भी समझ रहा था पर ये दर्द भरे एक्सप्रेशन उसके अलग hi मज़ा दे रहे थे. देव उठकर शराब के काउंटर पर गया और वह से एक बोतल उठाकर पीने लगा पर अचानक उसके मन में एक ख़याल आया और वो शराब की बोतल लेकर सीधा शबाना के करीब आ गया और प्रताप और कुंदन को अपने हाथ में पकड़ी बोतल दिखते हुए शबाना की तरफ इशारा करा. वो दोनों भी उसकी बात समझ गए और उन्होंने शबाना के होंठो को अपने होंठो की पकड़ से आज़ाद कर दिया पर इससे पहले की शबाना कुछ कहती चीखती व चिल्लाती देव ने शराब की बोतल शबाना के मुँह में ठूस दी. शबाना जिसने आज तक शराब को हाथ भी नहीं लगाया था आज जबरन उसका गैंग बंग करते हुए उसे शराब पिलाई जा रही थी. और बेचारी शबाना मजबूर थी उसे पीने के लिए. शराब उसके मुँह से ओवरफ्लो होते हुए उसके बदन से बहती हुई उसकी छूट तक जा रही थी क्युकी उसकी टाँगे तो हवा में उठी थी.

देव वो बोतल तब तक शबाना के मुँह में ठूसे रहा जब तक पूरी बोतल खली नहीं हो गई. और जब देव ने बोतल निकली तो शबाना को अपना सर घूमता सा लग रहा था. कुंदन और प्रताप अब भी शबाना की गांड छूट को पेले जा रहे थे. और शराब के नशे में अब शबाना का दर्द भी कुछ कम हो गया था और उसके चेहरे जे दर्द के भाव भी अब ख़तम हो गए थे और मुँह से करहो की जगह अब ाहो की आवाज़े आ रहे थे. शबाना की आँखे दो लुँडो के धक्को की उत्तेजने के मारे बंद हो गई थी उसने कुंदन प्रताप के गले में पड़ी बहो को कास कर उसने अपने बदन से भींच लिया था. शायद शबाना एक बार फिर अपने ओर्गास्म के करीब पहुंच गई थी. शबाना के इस कामुक बदले हुए रूप से कुंदन प्रताप का जोश भी दुगना हो गया था उनके धक्को की गति भी बाद गई थी. उनके हर धक्के पर शबाना के मुँह से उह आह की आवाज़े आ रही थी जिसे सुनकर वो और तेज़ तेज़ धक्के लगाए जा रहे थे. और दो लुँडो की मार के आगे शबाना की छूट ने समर्पण कर दिया और छूट की दीवार उसके जूस से चिकनी हो गई इस लिए प्रताप का लुंड भी आसानी से अंदर बहार हो रहा था हर धक्के में उनके लुंड शबाना की छूट और गांड में रगड़ते हुए अंदर को जा रहे थे. और इस रगड़ की वजह से वो अपनी उत्तेजना के चरमबिंदु पर पहुंच चुके थे जिस वजह से उन्होंने एक साथ शबाना के बदन को कास कर भींच लिया और एक साथ उन दोनों के लुँडो ने शबाना की दोनों छेड़ो की गर्मी के आगे अपने हथियार दाल दिए.

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उन दोनों के लुँडो से वीर्य की धार शबाना के दोनों छेड़ अंदर तक भर गए थे और शबाना के पेअर हवा में होने की वजह से वो वीर्य शबाना के दोनों छेड़ो में फेज लुँडो के अगल बगल से बैठ्कर बहार आ रहा था. वो दोनों अब भी शबाना को अपने बीच में दबाकर उठाए खड़े हुए थे और उनके लुंड अब भी शबाना के दोनों छेड़ो में फेज हुए थे हुए लुंड सब भी थोड़ा थोड़ा वीर्य शबाना की छूट और गांड को अंदर तक गरम और गीला कर रहा था. हर निकलते वीरा की बूँद के साथ उनके लुंड का अकार छोटा पड़ता जा रहा था और जब उनके वीर्य का आखिरी कटरा तक निकल गया तो उनके लुंड सूखे छुआरे की तरह शबाना के दोनों छेड़ो से बहार आ गए.

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कुंदन प्रताप और शबाना तीनो गहरी गहरी सासे ले रहे थे. कुंदन और प्रताप ने शबाना को अपनी बहो से उतार कर नीचे खड़ा कर दिया पर वो अब भी शबाना को अपनी बहो के जकड़े हुए थे और उसके कंधे गालो और होंठो को चाट रहे थे. पर वो दो तो शबाना को चाट hi रहे थे उनके बगल में खड़ा देव ने भी शबाना की कमर में हाथ डालकर उसके बदन से चिपक गया. शबाना के पुरे बदन से शराब की महक आ रही थी, जितनी शराब उसने खुद पी थी उससे ज्यादा तो उसके शरीर से बहकर नीचे गई थी.

देव ने शबाना के बदन से नीचे बह कर जाती शराब को देखा और उसका चेहरा अपनी तरफ घुमाकर उसके होंठो के नीचे ठुड्डी पर लगी शराब को अपनी जीभ से चाट लिया पर वो शराब को छत्ते हुए उसे न जाने क्या सूझी की वो भागकर दुबारा शराब काउंटर के पास गया और एक और बोतल ले आया. और वो शराब की बोतल शबाना के बदन पर उडेलनि शुरू कर दी. कुंदन और प्रताप ने जब देव को इस तरह शबाना के बदन पर शराब डालते देखा तो उन्होंने अपने होंठ शबाना के पेट पर रख दिए और अपनी जीभ निकल शबाना के बदन पर ऊपर से बह कर आती शराब को चेतना शुरू कर दिया.

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वो दोनों शबाना के पेट उसके गर्दन उसके स्तन कवज हर जगह से शराब को चाट रहे थे उन्होंने कई बार शराब पी थी पर शराब पीने का जो मज़ा उन्हें आज आ रहा था वो आज से पहले कभी नहीं आया था. अपने दोस्तों इस तरह मग्न होकर शराब पीटा देख देव और 10-12 दारु की बोतल ले आया. और उनमे से 2-3 बोतल और शबाना के बदन पर खली करने के बाद एक बोतल लेकर शबाना की जांघो के बीच बैठ गया और उसकी एक जांघ उठाकर अपने कंधे पर रख ली और उस शराब की बोतल का मुँह शबाना की छूट के अंदर दाल कर उसकी साड़ी शराबा की छूट के अंदर खली करनी शुरू करदी.

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शबाना को भी अपनी छूट के अंदर शराब की चिपचिपाहट का एहसास हो रहा था उसे दर भी लग रहा था की कही उसका उसके माँ बनने पर कुछ गलत असर न पड़े वो छूटना चाहती थी पर 6 मर्दाने हाथ उसे इस कदर शिकंजे में जकड़े थे की वो बेबस थी और रही सही कसार उसके दिमाग पर चढ़ती शराब ने पूरी करदी. देवत तब तक शबाना की चूर में शराब डालता रहा था जब तक वो पूरी बोतल खली नहीं हो गई. बोतल खली होने में बाद जैसे hi देव ने शबाना की छूट से बोतल का मुहाना निकला छूट से शराब की तेज़ धार उसके जांघो से बहते हुए नीचे की तरफ आने लगी. ऐसे लग रहा था जैसे शबाना अपनी छूट से शराब की जगह दारु मूट रही हो. पर देव भी इसके लिए तैयार था उसने तुरंत अपने होते शबाना की छूट पर रख दिए ताकि शबाना की छूट से निकलती शराब का एक भी कटरा वास्ते न जाए वो शबाना की छूट से निकलती शराब का एक एक कटरा पिए जा रहा था. उसने तब तक शबाना की छूट से अपना मुँह नहीं हटाया जब तक की उसमे भरी पूरी शराब बहार नहीं आ गई. पर वो यही नहीं रुका उसने शबाना की जांघो पर बह कर आई शराब को अपनी जीभ से चाट चाट कर पूरा साफ़ कर दिया.

उन तीनो को तो जैसे एक नया खेल मिल गया था और शबाना का बेबस सा नंगा बदन उनके लिए बस एक खिलौना भर था वो उसके जिस्म के अलग अलग अंगो पर शराब उड़ेल रहे थे और वह से चाट चाट कर शराब पी रहे थे. शबाना के जिस्म का ऐसा एक भी हिस्सा नहीं बचा था जहा से शराब की महक नहीं आ रही थी और जहा से उन तीनो ने शराब नहीं पी. उसकी गांड कमर पीठ उसके चूतड़ छूट गाल जांघ कोहनी यहाँ तक की शबाना की मुँह में शराब भर कर उसके मुँह से मुँह लगाकर भी उन्होंने शराब पी थी. पुरे कमरे में केवल शराब की hi महक आ रही थी. पर इतनी शराब पीने के बाद भी वो तीनो जस के तस खड़े थे पर बेचारी शबाना से तो खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था. वो पूरी तरह नशे में धुत्त हो चुकी थी उसे नशे में धुत्त देख उन तीनो ने उसे छोड़ दिया उनके छोड़ते hi वो कुछ कदम लड़खड़ाते हुए चली और फिर ज़मीन पर गिर पड़ी. उसे यु बेबस देख वो तीनो और लालू उस पर है रहे थे उसकी बेबसी का मज़ाक उदा रहे थे. कुंदन और देव तो शबाना के एक एक छेड़ का मज़ा ले चुके थे पर देव अब तक शबाना के उन छेड़ो की गर्मी से अनजान था वो तो शबाना के मुँह की गर्मी से झड़ने को मजबूर हो गया था. पर अब शबाना के अलग अलग छेड़ो को एक एक बार छोड़ने के बाद शबाना के बदन से यु कामुक तरह से शराब पीकर उन तीनो के लुंड एक बार फिर झटके खाने लगे थे. और वो तीनो एक बार शबाना के बदन के साथ राउंड तवो खेलने को तैयार थे वो भी इस बार एक साथ.
 
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देव वही कुछ दूर पड़े सोफे पर बैठ गया और नशे में धुत्त शबाना को देख कर अपना लुंड मसलने लगा.

देव: साला तुम दोनों ने तो रगड़ लिया इसको मई अब तक सूखा हु लेकर आ देख मेरा लुंड कितना बेचैन है इसके लिए.

कुंदन और प्रताप ने शबाना के एक एक हाथ को पकड़ा और उसे सहारा देकर देव के पास ले आए.

देव: आए साली माँ बनना है न तुझे मर्द का वीर्य चाहिए न तुझे आज तुझे हर जगह से इतना वीर्य से भर देंगे की तू भी क्या याद रखेगी. तुम दोनों ने इसके दो छेड़ो को तो छोड़ लिया एक साथ चलो अब इसके तीनो छेड़ो को एक साथ लुंड से भर देते है.

देव ने शबाना के बालो को अपनी मुट्ठी में जकड़ा और उसे खींच कर अपनी गोड़ में इस तरह बिठा लिया की उसका चेहरा देव की तरफ था. शबाना के चूतड़ सीधा देव के लुंड के ऊपर थे और देव का लुंड शबाना के गांड के बीच की दरार में गड रहा था.

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कुंदन और प्रताप शबाना के पीछे खड़े थे और शबाना के बदन से बहती शराब को चाट चाट कर उनके लुंड भी एक बार फिर बम्बू बन गए थे और एक बार फिर शबाना पर चढ़ने को तैयार थे.

प्रताप: देव तो अब इसकी छूट को घिस घिस कर गरम कर रहा है वो तो इसकी छूट में घुसने की फ़िराक में है. इसकी गांड और मुँह अब भी खली है तू तो इसकी गांड मार hi चूका फ़ो ज़रा मई भी इसकी गांड की तुघटनेस चेक करके देख लू तू अपने उस झाटो से भरा लुंड को इसके मुँह की गरम गरम सासो का एहसास करा ले.

कुंदन: चल ठीक तू इस पर पीछे से सवार हो मई आगे से और अपना चरसी देव नीचे से. बड़े दिनों बाद किसी इतनी गद्रे बदन वाली औरत को तीनो एक साथ मिलकर छोड़ेंगे.

देव नीचे से शबाना के चूतड़ों को अपने लुंड रगड़ रगड़ कर और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था और उसके मोठे मोठे दूध को अपने होंठो में भरकर चूस रहा था और उधर प्रताप भी शबाना की पीठ को छत्ते हुए उसके पीछे आकर खड़ा हो गया तो कुंदन देव के पीछे और शबाना के सामने आकर उसके चेहरे पर अपना लुंड रगड़ रगड़ कर गरम करने लगा.

वो तीनो शबाना के तीनो छेड़ो में एक साथ घुसने से पहले एक तरह से थोड़ा वार्मअप कर रहे थे. सबसे पहले देव ने शबाना के चूतड़ों के नीचे हाथ दाल कर उसे थोड़ा ऊपर उचकाया और उसके चूतड़ों के नीचे दबा अपना लुंड सीधा करके उसके छूट के मुहाने पर रख दिया और एक झटके में शबाना के काढ़ो पर दबाव दाल कर उसे पूरा नीचे तक बैठा दिया. दो बार झाड़ चुकी कुंदन का लुंड तीन चौथाई अंदर ले चुकी थी और पूरी एक बोतल शराब भी पीकर शबाना की छूट भी नशे में धुत्त और चिकनी हो चुकी थी. इसलिए एक hi बार के दबाव में देव का पूरा का पूरा लुंड फिसलता हुआ शबाना की छूट में अंदर तक उतरता चला गया.

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कुंदन का लुंड तो तीन चौथाई hi अंदर गया था पर देव का तो पूरा लुंड शबाना के अंदर चला गया था. शबाना की छूट में पूरा अंदर तक दाखिल होकर देव ने शबाना को कास कर अपनी बहो में जकड लिया और कुछ देर यही उसके बूब्स को अपने मुँह में भरे हुए चूसता रहा. शबाना की छूट की गरम दीवारों की वजह से बार बार उसका लुंड शबाना की छूट के अंदर झटके पे झटके खा रहा था.

देव तो शबा के अंदर दाखिल हो गया था और अब बारी थी प्रताप और कुंदन की. प्रताप ने भी अपना लुंड शबाना की गांड के छेड़ पर रखा शबाना की गांड पर अब भी कुंदन के वीर्य का गीलापन था और इसी वजह से प्रताप का लुंड का टोपा भी बिना जद्दोजहद के शबाना के गांड के छेड़ में सेट हो गया. अपने लुंड का टोपा शबाना की गांड में डालने के बाद प्रताप ने अपना कमर का एक तेज़ धक्का आगे को मारा और उसका मूसल लुंड उस पाक ज़हीन औरत की गांड की दीवारों को चीरता हुआ अंदर दाखिल होता चला गया. प्रताप का लुंड मोटा नहीं था पर काफी ळून्म और नुकीला था और शबाना की गांड के अंतिम छोर तक पहुंच गया.

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शबाना के जिस्म में एक बार फिर दर्द का फव्वारा फूट पड़ा और इस बेतहाशा दर्द में उसके पूरी ताकत से चीख पड़ी. शबाना की छूट अपने नीचे लेते देव के लुंड से सराबोर थी तो उसकी गांड को प्रताप के लम्बे लुंड ने अंदर तक चीयर कर रख दिया था. और इस दोहरे हमले के दर्द को वो चीख कर अपनी आवाज़ से बर्दाश्त कार्नर की कोशिश कर रही थी पर उन दरिंदो से ये भी बर्दाश्त न हुआ और उसके सामने खड़े कुंदन ने अपना झाटो से भरा काला मूसल लुंड शबाना के खुले मुँह के अंदर घुसेड़ कर उसकी चीख को भी उसके मुँह में hi घोट दिया.

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देव कुंदन प्रताप तीनो ने अपने अपने लुंड से एक साथ शबाना के तीनो छेड़ो को भर दिया था. कुंदन ने अपना लुंड शबाना के मुँह के पूरा अबदार तक दाल दिया जिस वजह से उसकी काली घनी झट भी उसके लुंड के साथ उसके मुँह के अंदर आ रही थी और बेचारी शबाना उसके लुंड के साथ उन झाटो को भी चेतना पद रहा था. कुंदन को अपने लुंड की पर शबाना की मुँह की गर्माहट का एहसास हो रहा था और ये एहसास उसे और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था और शबाना के मुँह में अपना लुंड के धक्के अंदर बहार किये जा रहे था. कुंदन की कमर को हिलता देख देव और प्रताप ने शबाना के दर्द को बढ़ाने का ज़िम्मा संभल लिया और देव ने नीचे से और प्रताप ने पीछे से शबाना की छूट और गांड का मर्दन करना शुरू कर दिया. इससे पहले जब कुंदन और प्रताप ने उसके अंदर एक साथ अपने लुंड डाले थे तो कुमसे कम उसे सास लेने का मौका तो मिल रहा था पर अब तो कुंदन ने उसके मुँह में अपना गन्दा बदबूदार लुंड घुसेड़ दिया था और उसके लुंड की बड़ी बड़ी झाते उसकी नाक के छेड़ में घस रही थी. शबाना को उबकाई सी आ रही थी उसके मुँह से बस गऊ गऊ की आवाज़े आ रही थी आखे आसुओ से लाल हो गई थी आखो का काजल बहकर उसके गालो को काला कर रहा था.

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देव कुंदन और प्रताप तीन तरफ से शबाना के जिस्म से अपनी हवस पूरी कर रहे थे. उनके लिए तो शबाना कोई इंसान नहीं केवल एक हवस पूरी करने की एक भोग विलास की चीज़ मात्रा थी. उनके लिए तो उसका दर्द कोई मैने hi नहीं रखता था. देव और प्रताप शबाना की गांड और छूट में ताबड़तोड़ धक्के लगाए जा रहे थे पर शबाना की परेशानी की असली वजह कुंदन का झाटोब्से भरा मोटा काला लुंड था जो उसके मुँह को पूरी तरह चौक करे हुए उसे सास लेने का भी मौका नहीं दे रहा था. वो उन तीनो के बीच बेबस सी छटपटा रही थी अपने हाथ पाँव चला रही थी पर उसकी छटपटाहट तो उन्हें और ज्यादा सुकून दे रही थी. उस मासूम औरत की बेबसी में उसके दर्द उसकी छटपटाहट उनके अंदर के जानवर को और ज्यादा भड़का रही थी और उनके धक्को की स्पीड तेज़ और तेज़ होती जा रही थी.

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उन तीनो के ये हरकते लालू को भी उत्तेजित कर रही थी उसका लुंड भी झटके खा रहा था पर वो उनके बाइक नहीं जाना चाहता था इसलिए उसने अपनी गोड़ में बैठी चांदनी के कपड़ो को पहाड़ कर उसे नंगा कर दिया और खुद को नंगा करके उसे अपनी गोड़ में बिठाकर नीचे से सीधा अपना तना हुआ लुंड उसकी छूट के अंदर घुसेड़ दिया. एक तरफ चांदनी को शबाना की हालत पर दया आ रही थी पर दूसरी तरफ वो लालू को कुछ कह नहीं सकती थी इसलिए उसके हवस को पूरा करने के सिवा उसके पास कोई रास्ता नहीं था. इसलिए चांदनी लालू के लुंड पर अपनी कमर को ऊपर नीचे करने लगी. लालू जितना अपने दोस्तों की वेह्शितत देख रहा था ुतं उसे और ज्यादा मज़ा आ रहा था. उसने खुद शबाना की गांड छूट मुँह सब छोड़ लिया था पर आज अपने सामने उसे इस तरह दुसरे से चुड़ते देखने उसे तड़पते चीखते चिल्लाते रट हुए देखने में उसे एक अलग hi सटिस्फैक्शन मिल रहा था. शायद यही वो मज़ा था जिसके लिए उसने इस आज के गैंगबैंग की रूपरेखा गाड़ी थी और खुद को इस गैंगबैंग से अलग रखा था क्युकी वो बहार रहकर शबाना के दर्द का मज़ा लेना चाहता था जो उसे उस रात उस झापड़ की बेज़्ज़ती में मरहम का एहसास करा रही थी.

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चांदनी का चेहरा लालू की तरफ था और उसके हिलते हुए मोठे मोठे दूध लालू के मुँह के सामने. पर लालू तो चांदनी को देख hi नहीं रहा था उसकी नज़रे तो एकटक बस शबाना पर hi थी. वो छोड़ भले hi चांदनी को रहा था पर दिलो दिमाग ज़हन में केवल शबाना और बस शबाना hi थी. लालू ने चांदनी के बदन को कास कर जकड लिया और उसे खींच कर उसके दूध अपने होंठो के नज़दीक लेकर उसे अपने अपने मुँह में भर लिया. और कुछ देर उसे चूसते चूसते ऊसर दांतो से काटने लगा. चांदनी दर्द के मारे तड़प रही थी पर वो थी तो एक धनदेवाली उसे इससे पहले भी इस तरह के कई कस्टमर से पला पद चूका था यहाँ तक लालू और उसके दोस्तों ने भी उसे कई बार मिलकर छोड़ा था पर आज लालू के छोड़ने में उसे एक अलग हु वहशीपन नज़र आ रहा था. और वो भी ये बात समझ रही थी की आज लालू के इस जोश और जिंगलीपन की वजह वो नहीं बल्कि सामने तीन तीन मर्दो का लुंड ले रही शबाना है और लालू जो कुछ उसके साथ कर रहा वो असल में ये सब शबाना के साथ कर रहा है.

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देव कुंदन प्रताप तीनो शबाना के तीनो छेड़ो में लुंड पेले जा रहे थे. धप धप की आवाज़ों से पूरा हाल गूँज रहा था. नीचे से देव अपने लुंड के धक्के शबाना की छूट में गहराई तक पेले जा रहा था. और पीछे से प्रताप ने अपने हट्टे काटते बदन का पूरा भर शबाना मि पीठ पर दाल रखा था ताकि उसका लुंड शबाना की गांड में पूरी गहराई तक समां सके. और प्रताप के बदन के दबाव के कारन देव के लुंड को शबाना के काफी अंदर तक जाने में आसानी हो रही थी. और कुंदन तो उसे सास लेने का भी मौका नहीं दे रहा था. शबाना धीमे धीमे उनकंससियस सी हो रही थी उसका सारा विरोध ढीला पड़ता जा रहा था उसके दिलो दिमाग में बेहोशी सी छ रही थी. पर उसकी हालत का भी उन पर कोई असर नहीं पद रहा था. बल्कि शबाना की इस हालत को देख देख कर लालू का जोश और बाद रहा था उसने नीचे से अपने लुंड के तेज़ तेज़ धक्के चांदनी की छूट में अंदर तक मारना शुरू कर दिया और इतना hi नहीं उसने उस बेचारी के स्तनों को अपने दातो में कास कर भींच लिया और अपने दांतो को उसके सतनो में गार्डनर लगा जैसे. वो भूल गया था की उसकी बहो में चांदनी है शबाना नहीं. चांदनी बेचारी इन सबमे अलग से पीस रही थी लालू जानवरो की तरह उसके स्तनों को काट रहा था उसके स्तनों से दूध तो नहीं पर हल्का हल्का खून ज़रूर आ रहा था. पर अगर इस वक़्त वो कुछ भी कहती तो शायद उसकी हालत शबाना से भी ज़ादा बदतर कर दी जाती इसलिए ेओ बस अपने दांतो को कास कर भींच कर अपने दर्द को बर्दाश्त करने की कोशिश कर रही थी और यही सोच रही थी की वो जितना दर्द सेह शबाना उससे कही ज्यादा बर्दाश्त कर रही है.

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चारो दरिंदो को अपने अपने लुंड अलग अलग जगहों पर पेलते हुए 15 मं से ज्यादा हो गया था शायद उस ड्रग्स की वजह से. वो झड़ने के करीब थे. और सबसे पहले लालू ने नीचे से शबाना के बदन को कास कर जकड लिया और अपना लुंड शबाना की छूट की गहराई तक उतर दिया और इसके साथ उसके लुंड ने ढेर सहारा वीर्य शबाना की छूट के अंदर खाली कर दिया. लालू और प्रताप के बाद देव वो तीसरा मर्द बन गया था जिसने शबाना की छूट में अपना वीर्य छोड़ दिया था. जब शबाना ने माँ बनने के लिए नेहा की बात मणि थी और धामु का वीर्य अपने अंदर लेने का फैसला करा था तब उसे क्या पता था की उसे इतने सरे लुंड का वीर्य अपने अंदर लेना होगा की अगर वो माँ बन भी जाए तो उसे पता hi न हो उसके बच्चे का असल बाप कौन है. देव झाड़ चूका और उसके कुछ देर बाद hi प्रताप ने भी अपना पूरा भर शबाना की पीठ पर दाल दिया था जिससे साफ़ ज़ाहिर था की उसका लुंड भी शबाना की गांड के अंदर अपने हथियार दाल चूका है. देव और प्रताप दोनों शबाना ऊपर नीचे से अपनी बहो में भरे तेज़ तेज़ सासे ले रहे थे. शबाना की छूट और गांड से उसे उनके लुँडो के अगल बगल से उनके वीर्य की धार बहार आती साफ़ नज़र आ रही थी.

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शबाना की छूट और गांड से बहकर आते वीर्य को देख लालू का जोश भी बाद गया उसने चांदनी के स्तनों को छोड़ उसके चेहरे को अपने करीब लेकर उसके होंठो को अपने दांतो में बड़ा लिया और उसके स्तनों के बाद उसके होंठो को भी अपने दांतो से काटने लगा. चांदनी के होंठो को काटते हुए भी वो नीचे नीचे से तेज़ तेज़ धक्के मारे जा रहा था. लालू भी अपनी उत्तेजना के चरम पर पहुंच रहा था उसके काटने की इंटेंसिटी भी बढ़ती जा रही थी चांदनी के होंठो पर भी उसके उसके दांतो के निशान बन गए थे और हल्का हल्का खून भी छलक आया था. चांदनी भले hi एक रुंडी थी पर थी तो हाड मॉस की इंसान पर जिसे दर्द होता है पर इससे भी लालू के काटने पर ज़रा असर न पड़ा बल्कि चांदनी के होंठो से निकलते खून को वो अपने चूस रहा था. यानि उसे पता चल रहा था की उसके काटने से किसी को इस कदर दर्द हो रहा है की उसका खून तक छलक आया पर उसके लिए तो ये भी बस एक मज़ा था. लालू के धक्को की गति भी बाद गई थी वो झड़ने के करीब था और आखिर उसने भी चांदनी के बदन को कास कर भींच लिया और उसके लुंड से ढेर सारा वीर्य चांदनी की छूट को अंदर तक सराबोर करता चला गया.

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आखिर चांदनी के दर्द सहने की परीक्षा भी समाप्त हुई झड़ने के बाद लालू ने चांदनी के होंठो को भी अपनी गिरफ्त से आज़ाद कर दिया.

लालू देव और प्रताप तीनो झाड़ चुके थे पर आज की रात शबाना का सबसे बड़ा नाईटमेयर कुंदन जिसने शबाना को सबसे ज्यादा दर्द दिया उसे उनकंससियस होने पर मजबूर कर दिया अब तक अपना लुंड शबाना के मुँह में पेले जा रहा था. झड़ने के बाद लालू चांदनी को अपनी बहो में भरे गहरी गहरी सासे ले रही था उसका लुंड अब भी चांदनी की छूट के अंदर था वही देव और प्रताप के लुंड तो सिकुड़ कर शबाना की छूट और गांड से बहार आ गए थे. देव तो अब भी शबाना के बदन के नीचे दबा था और शबाना के बदन का पूरा भर उसके ऊपर था इसलिए वो उठ नहीं पा रहा था पर लुंड बहार आने के बाद प्रताप शबाना के पीछे से हैट कर जब अब तक आँखे बंद करे जानवरो की तरह उसके मुँह में लुंड पेले जा रहे कुंदन के करीब आया और उसकी नज़र शबाना पर पड़ी तो उसकी हवइया उड़ गई. शबाना पूरी तरह उनकंससियस थी उसके बदन में किसी तरह की कोई हरकत नहीं थी. और कुंदन इस सबसे बेखबर अब भी उसके मुँह में अपना लुंड पेले जा रहा था.

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परताप के तो हाथ पाँव फूल गए उसने अपनी ऊँगली शबाना की नाक के करीब लेकर उसकी सासो को महसूस करने की कोशिश की उसके हलकी हलकी सासे महसूस हुई. जिसे महसूस करके उसकी जान में जान आई की शबाना मरी नहीं बस बेहसूश हो गई है. पर उसने शबाना के मुँह को छोड़ते कुंदन के कंधे पर हाथ रख कर उसे तेज़ी से झकझोर दिया. अचानक से अपने मज़ा में व्यवधान डालने से कुंदन ने आग बबूला होते हुए अपनी आँखे खोली जो पूरी तरह नशे के प्रभाव में सुर्ख लाल थी. जिसे देख कर hi किसी रौंगटे खड़े हो जाए शायद उसने अपने साथियो से कही ज्यादा नशा कर लिया था. परताप ने शबाना की तरफ इशारा करके कुंदन को उसकी हालत दिखहि.

प्रताप: अबे साले हब्सी जानवर हालत देख उसकी कोई हरकत नहीं है उसके शरीर में सेल सास तो ले लेने देता उसे.

कुंदन अब भी शबाना का मुँह में लुंड पेलते हुए: सेल मर गई क्या है.

ये सुनकर लालू और देव भी एकदम अपने सेंस में वापस आए चांदनी भी परेशान थी की कही सच में शबाना मर तो नहीं गई.

प्रताप: नहीं मरी नहीं है सासे चल रही है पर साले सास तो उसे देने दे ऐसे पलेगा तो नहीं मरी तो मर जाएगी.

कुंदन: सालो तुम तीनो ने अपना अपना माल निकल लिया और मेरे माल निकलने में ज्ञान छोड़ रहे हो.

प्रताप लालू की तरफ देखते हुए: यार समझा इसे नशे में बावला हो गया है.

लालू: कुंदन........

Kundan:Chup सालो चुप करो मई अपना माल निकले बिना अपना लुंड इसके मुँह से नहीं निकलने वाला. और तुम लोगो को इतनी चिंता है इसकी तो जाओ अपनी माओ को ले आओ और उनसर कहो मेरा लुंड चूस चूस कर मेरा माल निकलवा दे. और माए नहीं ला सकते तो आओ खुद मेरा लुंड अपने मुँह में ले लो.

कुंदन पर ड्रग्स का असर साफ़ नज़र आ रहा था. और अब लालू को भी फ़िक़रा हो रही थी की अगर कही शबाना मर गई तो बहुत बड़ा बवाल बन जाएगा. लालू ने अपनी गोड़ में नंगी बैठी चांदनी को इशारा करा.

लालू: ऐ साली तुझे उसकी बड़ी चिंता है न तो जा अपनी जीभ का कमल दिखा और जल्द से जल्द उसका लुंड झड़वा दे वर्ण वो ऐसे hi पेलता रहा तो वो मर जाएगी.

चांदनी को भी शबाना की फ़िक़रा थी और वो तुतंत लालू की गोड़ से उठकर कुंदन के पास जाकर शबाना क बगल में घुटनो के बल बैठ गई. हलाकि उसके होंठ अब तक लालू के काटने से दर्द कर रहे थे और हलके सूज भी गए थे पर शबाना को बचनर के लिए कुंदन को झड़वाने ज़रूरी था. इसलिए चांदनी ने बिना देर किये कुंदन के लुंड के नीचे लटकती झाटो से भरी घोटियो को अपने मुँह में ले लिया और अपनी गरम गरम सासो से कुंदन के अंडकोषों की उत्तेजना को बढ़ाने लगी.

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अंडकोषों को चूसते चूसते वो अपनों जीभ निकल कर उन्हें चाट भी रही थी यहाँ तक की उसकी बदबूदार झाटो से उसे उबकाई सी आ रही थी पर शबाना के लिए वो ये भी सहने को तैयार थी. वो अपने रुणदीपन का पूरा एक्सपीरियंस कुंदन के लुंड पर इस्तेमाल कर रही थी और उसका ये एक्सपीरियंस काम भी कार कर रहा था कुंदन का लुंड शबाना के मुँह के अंदर झटके खा रहा था.

कुंदन की अंडो को छत्ते छत्ते चांदनी कुंदन के पीछे उसके कूल्हों के पीछे आ गई और उसके कूल्हों को छत्ते लगी और उसे अपने दांतो से हल्का हल्का खरोचने लगी उसका हर पैतरा कुंदन की उत्तेजना को बढ़ाता और बढ़ाता जा रहा था. कुंदन के चूतड़ों को छत्ते छत्ते चांदनी ने अपनी जीभ हलकी उसके कूल्हों के बीच सरकै और बस हल्का हल्का अपनी जीभ से टिकल करा भर hi था की कुंदन अपने लुंड पीरा शबाना में मुँह में अंदर तक पेल दिया.

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और इस दोतरफा म्हणत के बाद आखिर उसके लुंड से भी निकलते वीर्य ने शबाना के मुँह को अंदर तक भर दिया. शबाना तो बेचारी अब तक बेहोश थी उसका सामना किन जल्लादो से पड़ा है जिन्हे उसके बेहोश होने के बाद उस पर तरस नहीं आया था. शायद वो मर भी जाती तब भी उन्हें रत्ती भर फ़र्क़ नहीं पड़ता. पर शबाना के मुँह को अपने मुँह से सराबोर करने के बाद फाइनली कुंदन ने भी शबाना को अपनी गिरफ्त से आज़ाद कर दिया और गहरी गहरी सास लेते हुए पीछे हैट कर वही पड़े सोफे पर जाकर बैठ गया. कुंदन के हटने के बाद देव ने भी शबाना को अपने ऊपर से हटा कर वही बगल में फर्श पर लिटा दिया.

शब्द निढाल सी नंगी बेसुध ज़मीन पर पड़ी थी. जब उसके मन में बस माँ बनने का मासूम सा ख्याल आया था तब उसने सपने में भी नहीं सोचा होगा की उसकी ये छोटी सी ख्वाहिश उसे इस हालत तक पंहुचा देगी. इन वहशियों के हाथ का खिलौना बना देगी.

लालू चांदनी से: ऐ साली देख क्या रही है देख कही निकल तो नहीं ली.

देव प्रताप भी पीछे हैट गए और चांदनी तेज़ी से शबाना के करीब आ गई और उसके सीने पर कान रख कर उसकी धड़कनो को महसूस करने लगी. और शबाना की धड़कनो को महसूस करके उसने भी रहत की सास ली.

चांदनी: ज़िंदा है केवल बेहोश है सुबह तक ठीक हो जाएगी.

कुंदन: चलो अच्छा है वर्ण साली की लाश को यही ठिकाने लगाना पड़ता.

कुंदन की बात सुनकर चारो ठहाके मार कर है पड़े.

चांदनी को उनकी बाते सुनकर उन पर घिन आ रही थी की किस तरह की घटिया मानसिकता वाले लोग है ये और उसे खुद पर भी गुस्सा आ रहा तह की कही न कही शबाना की इस हालत की ज़िम्मेदार वो भी थी उसने भी दर से शबाना का कोई साथ नहीं दिया.

शबाना के नंगे बेहोश बदन को पीछे से देखते हुए कुंदन एक बार फिर अपना लुंड मसल रहा था.

कुंदन: साला बड़ी ज़ोर से पेशाब आ रही है.

कुंदन अपनी जगह से उठा और सीधा शबाना के बेहोश पड़े शरीर के अगल बगल अपने पेअर करके खड़ा हो गया और अपने लुंड का मुँह शबाना के जिस्म की और कर लिया. चांदनी को यकीन नहीं हो रहा की शबाना की ये हालत करने के बाद भी अब भी उनका मन नहीं भरा है और वो शबाना की बेहोशी की हालत में उसके ऊपर मूतने को तैयार है. पर चांदनी से और बर्दाश्त नहीं हो रहा था आखिर उसके साबरा का बांध टूट hi गया और उसकी बंद ज़बान खुलने को मज़बूर हो गई.

चांदनी: साहब बक्शा दीजिये ऊसर बेहोश है वो बेचारी ऐसे में ये मत करिये आप चाहे तो मेरे ऊपर मूट लीजिये, मई आपका पेशाब पी भी लूंगी आप सबका पी लूंगी.

कुंदन ने नज़ारा घूमा कर चांदनी को गुस्से में घूर कर देखा और बिना कुछ कहे एक लात उसके मुँह पर जड़ दी. चांदनी की नाक से खून की धरा निकल आई

कुंदन: साली दो टेक रुंडी साली हमे सही गलत बताएगी. साली यही काट के ज़मीन में गाड़ देंगे. मूट रहे केवल मूतने से ये मर नहीं जाएगी.

मजबूर चांदनी बेबस सी अपना खून पोछते हुए पीछे हैट गई और कुंदन ने अपने पेशाब की धार बेहोश शबाना के बदन पर मारना शुरू कर दिया. कुंदन को शबाना पर मोटे देख देव और प्रताप के लुंड की नसों में भी पेशाब उतर आई और वो भी शबाना के इधर उधर आकर खड़े हो गए. चांदनी को छोड़ने के बाद पेशाब तो लालू को भी आ रही थी उन तीनो को शबाना के इर्द गिर्द खड़ा देख लालू भी शबाना के बेहोश पड़े बदन के करीब आ गया. चारो ने एक दुसरे को देख कर एक ज़ोर का ठहाका मारा और ेल साथ शबाना के ऊपर मूतना शुरू कर दिया. वो शबाना के पुरे बदन को अपनी पेशाब से नेहला रहे थे और कोने में बैठी चांदनी उन्हें बेहोश पड़ी शबाना पैट मोटे देख रही थी और मन hi मन उनसे नफरत और शबाना पर तरस खा रही थी. शबाना का पूरा बदन उनकी पेशाब से गीला हो गया था. उनका पीला बदबूदार पेशाब उसके बदन के नीचे से बह कर बहार आ रहा था और वो उसी पेशाब पर बेसुध सी लेती थी.

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उन चारो ने अपने लुंड में भरे पेशाब का लगभग तीन चौथाई आशा शबाना के बदन पर खली कर दिया पर उसके बाद अपने लुंड दबा कर उसमे से बहार आते पेशाब को रोक लिया. और कुंदन ने कोने में बेबस बैठी चांदनी को ऊँगली के इशारे अपने पास बुलाया. चांदनी चुपचाप घुटनो के बल चलती हुई उन चारो के पास आ गई.

कुंदन: तूने कहा था तू हम सब का पेशाब पीयेगी चल तेरे लिए हम सबने थोड़ा थोड़ा पेशाब बचा कर रखा चल ले अपना गाला भी तर कर ले.

लालू: और वीर्य में तर हम सबके लुंड को चाट चाट कर अच्छे साफ़ करदे समझी.

कुंदन: और दुबारा हमे कुछ समझने की कोशिश मत करना वर्ण जो हाल इसका करा है न उससे भी बुरा तेरा करेंगे. और तू तो वैसे भी एक रुंडी है तेरे लिए तो कोई रोने भी नहीं आएगा. चल चाट हम सबके लुंड.

चांदनी उन सबके बीच आकर बैठ गई और चुदाई के बाद उनके लुंड पर चिपके वीर्य को अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ़ करने लगी. चाहत्ते छत्ते उसने कुंदन के लुंड को अपने मुँह में लिया और इसी के साथ कुंदन ने अपने लुंड में भरी अपनी बची हुई पेशाब उसके मुँह में खली कर दी. कुंदन के बाद देव प्रताप और लालू ने भी चांदनी के मुँह में अपना अपना बचा हुआ पेशाब खली कर दिया और चांदनी ने उन सबके लुंड को चाट चाट कर अच्छे से साफ़ कर दिया.

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अपने लुंड अच्छे से साफ़ करवाने के बाद उन चारो ने अपने कपडे वापस पेहेन लिए. और एक बार शबाना की ऊपर आकर उसके ऊपर आकर एक साथ उसके ऊपर थूक दिया.

लालू कहँड़नी से: आए सुन ख्याल रख इसका इसे कुछ भी होना नहीं चाहिए अगर इसे कुछ हुआ तो तेरी भी खैर नहीं. अभी हम जा रहे है सुबह वापस आएँगे तब तक इसे अच्छे से नेहला धुला कर तैयार कर देना. समझी...

चांदनी: जी

इतना कह लालू एंड कंपनी अपनी उस खोखली मर्दानगी का जश्न मानते हुए फार्महाउस से बहार निकल गए. उनके जाने के बाद चांदनी शबाना के सिरहाने आकर बैठ गई और उसका सर अपनी गोड़ में रख लिया तभी वो दोनों बुड्ढे नौकर हॉल में आए और वह नंगी बैठी चांदनी की गोड़ नंगी पड़ी शबाना की हालत देख उनका भी दिल देहल गया और वो समझ गए यहाँ क्या क्या हुआ होगा. उन्हें देख चांदनी बरबस hi उनपर बरस पड़ी उसका सारा गुस्सा उन पर निकल गया.

चांदनी गुस्से में चीखते हुए: क्या हुआ तुम दोनों की भी नियत ख़राब हो रही है इसे बिना कपड़ो के देख कर तो तुम लोग भी अपनी हवस पूरी करलो. तार तार कार्डो इसकी अस्मत को तुम लोग भी सुबह तो बड़ी नियत ख़राब हो रही थी न तुम लोगो की इसपर तो तुम लोग भी अपनी ख्वाहिश पूरी करलो.

बंसी: नहीं नहीं बिटिया मन हम थोड़े ठरकी है पर उनकी तरह जल्लाद नहीं जो इसके साथ इस हालत में कुछ गलत करे.

संभु अंदर कमरे से एक चद्दर और मरहम ले आया.

संभु: है बिटिया हम कुछ नहीं करेंगे लो इस चद्दर से इसे धक् दो और ये मरहम भी लेलो और इसके छोटो पर लगा दो.

चांदनी: ये मरहम इसकी इन बहरी छोटो पर तो लगा दूँगी तो पर जो चोट इसकी आत्मा पर लगी होगी उस पर कौनसा मरहम लागू.

चांदनी शबाना की कूल्हों पर बने बेल्ट की मार के निशाँ पर मरहम लगा रही थी और इसी दौरान उसकी नज़र सिगरेट से जलने के निशाँ पर पड़ी जिसे देख कर उसके आंसू निकल आए. वो रट हुए शबाना के जख्मो पर मरहम लगा रही थी और उसके मन में इस समाज में औरत की जगह के बारे तरह तरह विचार और कई सवाल घुमड़ रहे थे.

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चांदनी (मन में): " क्या यही इज़्ज़त है एक औरत की इस पुरुष प्रधान समाज में. एक औरत जिसे ऊपर वाले वो नियामत दी है जो इस दुनिया को चलती है. हर मर्द जो इस दुनिया में आया है वो किसी न किसी औरत के अंदर से निकला है. जब एक औरत ने उसे 9 महीने अपनी कोख में रखा उसे पैदा करने के बाद उसे अपनी छाती का दूध पिलाया तब वो अपने पैरो में खड़ा होने लायक बना फिर कई वही मर्द औरतो को खुद से कमजोर समझने लगता है उसे अपने पाँव की जूती समझता है उसे सिर्फ एक भोग विलास की चीज़ समझता है. क्यों एक औरत को दर्द तकलीफ देने में उसे मर्दानगी का अनुभव होता है. असल में ये इनकी मर्दानगी नहीं इनका इन्फेरियरीत्य काम्प्लेक्स है क्युकी ये जानते है की जो चीज़ औरत कर सकती है वो ये मर्द छह कर भी नहीं कर सकते है. और शायद इसीलिए ये मन hi मन औरत की इस ताकत से जलते है. और उसकी इस ताकत को उसकी कमज़ोरी बनाने पर तुले रहते है. हे ऊपर वाले क्या कसूर है हमारा क्यों आपने हमे ये माँ बनने एक नै जान को इस दुनिया में लाने की नियामत दी जिसकी बार बार हमे सजा दी जाती है. कब तक ये सब होता रहेगा आखिर कब तक. कब तक सड़क पर दौड़ती एक बस में एक मासूम को अस्मत को वहशियत की हद तक तार तार किया जाता रहेगा. कब तक अपनी एक औरत का बंग करने के बाद उसे ज़िंदा जलाया जाता रहेगा. लोग कहते है की औरते क्यों बदन दिखाऊ कपडे पेहेन कर बहार निकलती है अब लड़के तो मनचले है औरत के छोटे छोटे कपड़ो में झाकते बदन को देख कर मचल जाते है उत्तेजित हो जाते है और उसी उत्तेजना में थोड़ा ूच नीच हो जाती है. अरे तो 3 साल ने बच्ची ने उन्हें ऐसा क्या उत्तेजित कर दिया था जो एक मर्द ने उसे भी न बक्शा. है मई रुंडी हु पर मुझे रुंडी बनाने वाले भी यही मर्द थे क्या कसूर था इस बेचारी का बस माँ hi बनना चाहती थी ये जिसके लिए इसे इतना कुछ सहना पड़ा. हे भगवान् कुछ करो कुछ तो करो या तो मर्दो से उनकी मर्दानगी की निशानी जिस पर वो औरत पर राज करने का दम्भ भरते है वो चीन लो या चीन ला हम औरतो से हम औरतो से हमारी माँ बनने की नियामत ताकि इन मर्दो को सच्चाई का पता चले की अननत काल से ये दुनिया औरत प्रधान थी औरत प्रधान है और औरत प्रधान hi रहेगी. वो औरत hi है जो इस दुनिया को चलती है जिस दिन औरतो से उनकी माँ बनने की ताकत छीन गई इस दुनिया को ख़तम होने से कोई नहीं रोक पाएगा."

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विनीता और लखन के सूर्य नमस्कार के साथ शुरू हुआ कहने का ये सातवा दिन, उनके बीचे पनपे प्रेम के अनकहे रिश्ते, अधेड़ उम्र की गरिमा के भांग के लड्डुओं का सहारा लेकर कॉलेज गर्ल का गेटउप बनाकर बिहारी काका को सडके करके उनसे छुड़वाकर एक हाउसवाइफ के सेडक्टिव की दुनिया के नए chapter की शुरुआत अजेस्टर की लोगन की खोज पर निकलने, नीतू और अघोरी के एक दुसरे के सामने प्रथम बार निर्वस्त्र होकर योनि पूजा से होते हुए उस आम के बाघ और उसके पीछे बने तालाब तक पंहुचा जहा कोइंसिडेन्स का एक ऐसा किस्सा बना जिसने इस वेडिंग सेरेमनी के दूल्हा दुल्हन विक्रम और शोभा ने एक दुसरे से धोका करने पर मजबूर कर दिया कही जानबुझ कर तो कही अनजाने से और इस धोके का जरिया बने भीमा और नेहा जिनके बीच पिछले कई दिनों से चले आ रहा बोल्ड एनकाउंटर सातवे दिन अपने पड़ाव पर पंहुचा और इस संयोग का गवाह बना वो रहस्यमै स्ट्रेंजर जो अब भी एक पहेली था. और दिन का अंत हुआ उस अपडेट के साथ जो शायद न आता तो ज़ादा बेहतर था शबाना खान के गैंगबैंग के साथ जो अपने साथ समाज का एक घिनौना चेहरा दिखा और छोड़ गया अपने पीछे कई सवाल जिनका जवाब शायद किसी के पास नहीं था.

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कहानी के सातवे दिन इस कहानी की सबसे मातुरे नायिका गरिमा ने बचपने की साडी सीमाए लांघ कर सेडक्टिव की उस दुनिया में कदम रख दिया था जिससे वापसी का कोई रास्ता नहीं था. हरिया और उसके बीच जो हुआ उसका दोष कुछ हद तक परिस्थितियों को दिया जा सकता था पर कल रात जिस तरह उसने अपनी बाप की उम्र के एक बुड्ढे नौकर को भांग के लड्डुओं के बहाने से अपने साथ सम्बन्ध बनाने को मजबूर किया उसका वीर्य अपने अंदर लिया उसका दोष किसी भी तरह केवल परिस्थिति पर नहीं डाला जा सकता. जो गरिमा पिछले कई दिन से सबसे लेट उठ रही थी आज सबसे पहले उठ चुकी थी और जो शिक्षा उसके खाने में बेहोशी की दवा मिलकर उसके देर से उठने की वजह था वो भयहारी काका अब खुद उन्ही गोलियों के प्रभाव से बेसुध सा पूरी तरह नंगा उसके बिस्तर पर उसके बगल में लेता था. पर क्या मकसद था गरिमा का अगर उसे केवल अपने से उम्र में बड़े शिक्षा के साथ सेक्स करना था तो उसने सेक्स के बाद काका को धोके से बेहोश क्यों करा.

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गरिमा उठ कर बैठ चुकी थी और अपने बगल में नंगे लेते काका के झुर्रीदार लुंड को देख रही थी जिसने पिछली रात उसकी बुर को छोड़ा था. गरिमा को अपनी छूट के इर्द गिर्द काका के वीर्य की चिपचिपाहट साफ़ महसूस हो रही थी जो उसे और एक्ससिटेड कर रही थी. गरिमा का मन कर रहा था की एक बार फिर उसे मसल मसल कर खड़ा करके अपनी छूट के अंदर लेले पर फिलहाल ये उसके प्लान का हिस्सा नहीं था. वो यहाँ इस गाँव में सेक्स का पूरा लुत्फ़ उठाना तो चाहती थी पर इस तरह की कोई उसके खुद के चैरेक्टर पर ऊँगली न उठा सके और जो कुछ हो उसके लिए या तो खुद को दोषी मने या परिस्थितियों को और गरिमा एक विक्टिम बनकर साफ़ निकल जाए. और यही वजह थी जो उसने खुद भांग के लड्डू खाने का बहाना बनाकर अपनी सेक्स की ख्वाहिश भी पूरी कर्ली और काका को बेहोश करके उसका ब्लामे उनपर डालने की पूरी तैयारी भी कर्ली. और कल रात हुए सेक्स को खुला जाहिर करके आगे के दिन में नै रोमांच की रूपरेखा भी तैयार कर्ली. और अब समय इस पूरी प्लानिंग पर अमल करने का.

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गरिमा ने वही बिस्तर पर पड़ी चद्दर को अपने ऊपर लपेट कर अपने बदन के नंगेपन को धक् लिया और आँखों में ासु भर कर रोने जैसा मुँह बना लिया. और जिस बोतल का पानी पीला कर बिहारी को रात में बेहोश करा था उसीका बचा हुआ पानी सीधा बिहारी काका के मुँह पर उड़ेल दिया. अचानक से अपने चेहरे पर पड़े इस पानी से बिहारी हड़बड़ा कर उठ बैठा और उठते hi उसकी नज़र सीधा अपने सामने चद्दर लपेटे बैठी गरिमा पर पड़ी जो गुस्से में आँखों में आंसू भरे उसे घूर रही थी. और गरिमा पर नज़र पड़ते hi उसके ज़हन में कल रात की साडी घटना पल दर पल ताज़ा हो गई. फिर उसे अपने नंगेपन का भी एहसास हुआ उसके दिल की धड़कने बाद गई होंठ सूख गए नज़रे झुक गई उससे गरिमा से नज़रे भी नहीं मिले जा रही थी. मन पिछली कई रातो से वो गरिमा को बेहोश करके उसके ऊपर मुठ मार रहा था पर कल रात तो उसने साडी लिमिट hi क्रॉस करदी थी गैमा को छोड़ hi दिया था पर वो ये भी जनता था की कल पूरी तरह उसकी गलती नहीं थी. कल रात उसने गरिमा का जो रूप देखा उसे देख कर उसका बहकना लाज़मी था. पर इसके बावजूद उसका गिल्ट उसे कुछ कहने नहीं दे रहा था.

पर गरिमा का तो इरादा hi यही था पूरी तरह उस पर हावी हो जाने का ताकि पूरी तरह कल रात का ब्लामे उन पर दाल सके और खुद पाक साफ़ साबित करदे. गरिमा ने बिना कुछ बोले hi अपनी दहकती आँखों और उसमे डबडबाते आसुओ से hi बिहारी काका को बेबस सा कर दिया था. उन्हें तो न कुछ कहते बन रहा था और न वह से जाते. वो चुपचाप सर झुकाए बैठे थे. कई मिनट की ख़ामोशी के बाद फाइनली गरिमा ने hi चुप्पी तोड़ी.

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गरिमा: मई आपको काका काका कहकर इज़्ज़त देती थी थी और कल रात मेरे भांग के नशे में होने का फायदा उठा कर आपने मेरी इज़्ज़त hi लूट ली.

बिहारी: नहीं बिटिया ऐसा नहीं है वो मई.....

गरिमा: मत कहिये मुझे अपनी गन्दी ज़बान से बिटिया. बिटिया शब्द भी आपके मुँह से गाली जैसा लग रहा है मुझे. अगर मेरी जगह आपकी अपनी बेटी होती और वो इस तरह नशे में होती तो क्या उसके साथ भी आप वो सब करते जो आपने मेरे साथ करा.

बिहारी काका के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था वो चुपचाप सर झुकाए बैठे थे.

गरिमा: चुप क्यों बैठे है जवाब दीजिये. आपको एक बार भी शर्म नहीं आई मेरे साथ ये सब करते हुए की आप मेरी बाप के उम्र के हो. और शर्म की बात छोड़िये आपको एक बार भी ये दर नहीं लगा की आप ये सब किसके साथ कर रहे है मई आपके मालिक लखन सिंह की मेहमान हु बस में एक आदमी ने मुझे छू भर दिया था लखन सिंह ने उसकी हालत ख़राब कर दी थी और आपने ये सब कर दिया अब अगर ये बात लखन सिंह को पता चल जाए तो क्या होगा आपका.

बिहारी का कलेजा धक् करके रह गया. गरिमा ने जो कहा उसे सोच कर hi उनका चेहरा पीला पद गया. वो हड़बड़ा कर बिना अपने लुंड को ढके hi बदहवास से गरिमा के पैरो में गिर गए और रट हुए उससे रेहम की भीक मांगने लगे. गरिमा को एक तरफ उनपर तरस भी आ रहा था क्युकी वो जानती थी की ये सब उसने hi करा है पर दूसरी तरफ वो बिहारी काका को उस हरकत का सबक भी सीखना चाहती थी जो वो हरकत वो पिछली कई रातो से उसके साथ कर रहे थे उसके खाने में नींद की गोली मिलकर उसके ऊपर मुठ मारने की. उन्हें इस बात का सबक सीखना तो ज़रूरी था ताकि वो दुबारा कभी ऐसा करने की हिम्मत न करे. गरिमा ने अपनी लातो से धक्का देकर बिहारी काका को पारर धकेल दिया. गरिमा के इस तरह व्यवहार करने से बिहारी काका फूट फोइट कर रो पड़े. गरिमा को उन पर बहुत तरस आ रहा था पर उसने कुछ पल के लिए अपना दिल कर्रा कर लिया.

बिहारी काका रट हुए: बिटिया साहब से कुछ नट कहना वर्ण वो मुझे और मेरे बेटे दोनों को मार देंगे.

गरिमा: ये आपको वो सब करने से पहले सोचना चाहिए था.

बिहारी काका को अब समझ आ गया था की अब बचने का कोई तरीका नहीं है. उनके ज़हन में बार बार वो दृश्य आ रहे थे जब गरिमा लखन को सब बता देगी और लखन सिंह गाँव में बीच चौराहे पर उन्हें घसीटते हुए ले जाएंगे जहा लोग उन पर थूकेंगे उन्हें पत्थर मारेंगे और शायद उन्हें फांसी पर लटका देंगे और उसके बाद पता नहीं वो जीतू के साथ कैसा बर्ताव करेंगे. वो ये सब सोच सोच कर hi बदहवास से हो रहे थे.

बिहारी काका: मई समझ गया हु की जो गलती मई कर चूका हु उसकी कोई माफ़ी नहीं है और इस सबके आपसे ये उम्मीद करना की आप मुझे माफ़ करदे गलत होगा. पर लखन सिंह मेरे साथ जो कर्नेगे उसका असर मेरे बेटे पर भी होगा उसका इस गाँव ने जीना मुश्किल हो जाएगा. आपको मेरी माफ़ी मंज़ूर नहीं है आप ये बात लखन सिंह को बताएंगी और वो पुरे गाँव के सामने मुझे बेज़्ज़त करके मारेंगे इतने सालो की मेरी इज़्ज़त मिटटी में मिल जाएगी. पर उसके बाद कुछ गलती न होते हुए भी मेरे बेटे की ज़िन्दगी मुश्किल हो जाएगी लोग उसे ताने देंगे. इसलिए एक रिक्वेस्ट है आपसे आप मुझे सजा देना चाहती है न मेरी मौत चाहती है न तो मई खुद अपनी जान दे देता हु पर प्लीज लखन सिंह को कुछ मत कहियेगा मेरे बेटे जीतू की खातिर.

इतना कह कर बिहारी काका बिना अपने कपडे पहने तेज़ी से गरिमा के कमरे से बहार निकल गए. गरिमा उनके आखिरी अल्फाज़ो को सुन कर अवाक सी वह कड़ी रह गई. उसे समझ नहीं आ रहा था की वो बिहारी काका के इन शब्दों पर कैसे रियेक्ट करे इन्हे इमोशनल अत्याचार के रूप में ले या वाकई बिहारी काका ने अपनी जान देने की बात करि. ये सोचकर hi उसके हाथ पाँव फूल गए की कही वाकई बिहारी काका अपनी जान न दे दे. उसके हाथो में थमी चद्दर जो उसके नंगेपन को ढके थी वो उसके हाथो से सरक गई और वो अवाक सी अधनंगी वह कड़ी थी. अगले hi पल वो वैसे hi अधनंगी बहार निकले बिहारी काका की तरफ दौड़ पड़ी. कमरे के बहार निकलते hi उसकी नज़र काका पर पड़ी जो अब तक नीचे पहुंच चुके थे और रट हुए सीधा किचन की तरफ जा रहे थे. किचन में तो वो नींद की गोलियों वाली शीशी राखी थी जिससे एक एक गोली वो रोज़ गरिमा को दिया करते थे. गरिमा बिजली सी फुर्ती से नीचे सीढ़ियों की तरफ दौड़ पड़ी. एक एक पल उसे बहुत भरी लग रहा था. वो एक एक कदम में तीन तीन सीडिया उतर रही थी. इतनी ज़ोर से भागने की वजह से उसके उभर और नितम्ब दोनों ज़ोर ज़ोर से हिल रहे थे, कोई नार्मल सिचुएशन होती तो कोई भी इन हिलते उभारो और नितम्बो पर hi अपना लुंड झाड़ देता पर फिलहाल किसीको मरने से रोकना ज़ादा ज़रूरी है.

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गरिमा ने आखिरी की चार पांच सीडिया के ऊपर से hi जम्प लगा दी. जम्प लगाने से उसका घुटना और ईडी मुद गए वो एक दम लड़खड़ा कर ज़मीन पर औंधे मुँह गिरी उसकी कमर भी बलोच गई.

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गरिमा दर्द से तड़प उठी पर कुछ पल के लिए अपने दर्द को इग्नोर करते हुए वो दुबारा से उठी ऑफ अपने अंदर की पूरी ताकत समेत कर किसी तरह दुबारा कड़ी हुई और लड़खड़ाते कदमो से दुबारा किचन की तरफ दौड़ पड़ी उसका घुटना ईडी कमर तीनो में बेतहाशा दर्द हो रहा था पर फिलहाल उसका किचन तक पहुंचना ज़ादा ज़रूरी था ताकि उसका कल का किया गया एक नाटक हक़ीक़त में किसी की जान न लेले. गरिमा लड़खड़ाते कदमो के साथ भी तेज़ी से किचन के दरवाज़े तक पहुंच गई. और अंदर का दृश्य देख काट उसके रोंगटे खड़े हो गए, अंदर बिहारी काका वो नींद की गोलियों से भरी शीशी अपने हाथो में थामे खड़े थे और उसमे भरी साड़ी गोलियों को अपने मुँह में उड़ेलने hi वाले थे की अचानक गरिमा ने फुर्ती से आगे बाद कर उनके हाथ में अपना हाथ कास कर मारा की वो शीशी उनके हाथो से छूट गई और उसमे भरी गोलिया यहाँ वह बिखर गई.

गरिमा दर्द में कराहते हुए: ये क्या बेवकूफी करने जा रहे थे आप.

बिहारी काका गरिमा को दर्द में देख कर परेशान हो गए: ये क्या हुआ आपको आप दर्द में लग रही.

गरिमा: मेरी छोड़िये ये बताइये ये आप क्या करने जा रहे थे अपनी जान देने जा रहे थे.

बिहारी काका: बिटिया ज़िल्लत भरी मौत मरने से अच्छा है की मई खुद अपनी जान देदू.

गरिमा बोलने को हुई hi थी की अचानक उसे बहार कोठी का मैं लोहे का गेट खुलने की आवाज़ सुनाई दी और बहार से जीतू के गुनगुनाते हुए आने की आवाज़ सुनाई दी. गरिमा ने एक पल को अपनी अधनंगी हालत पर नज़र डाली और काका के जांघो के बीच झूलते हुए लुंड को देखा. काका भी जीतू के अचानक आ जाने से शॉक रह गए और उनकी बाते बीच में hi रुक गई.

गरिमा: जीतू आ गया है अगर उसने हमे इस हालत में देख लिया तो दस बाते पूछेगा जिनका हमारे पास कोई जवाब नहीं होगा. देखिये मुझे आपकी जान नहीं चाहिए और न आप ऐसा कुछ करेंगे हम इस बारे में बाद में बात करेंगे तब तक आप ऐसा कुछ नहीं करेंगे.

बिहारी काका: पर लखन सिंह

गरिमा: मई उनसे कुछ नहीं कहूँगी हम इस बारे में बाद में बात करेंगे फिलहाल जीतू को अंदर आने से रोकिये अगर उसने हमे यु इस हालत में देख लिया तो आप लखन सिंह से पहले उसे क्या जवाब डोज. जाइये अपने नीचे कुछ लपेट कर बहार जाइये और उसे कुछ पल के लिए बहार hi रोकिये ताकि मुझे भी ऊपर अपने कमरे तक पहुंचने का समय मिल जाए. क्युकी अपनों बचने के चक्कर में मई सीढ़ियों से गिर गई मेरे पेअर और कमर में मोच आ गई है मई ज्यादा जल्दी ऊपर नहीं जा पाऊँगी तो उसे 10-15 मं बहार hi रोकिये ताकि मई धीमे धीमे अपने कमरे तक पहुंच जाऊ. जाइये जल्दी बहार इससे पहले वो अंदर आ जाए.

बिहारी काका: जी जी मई जाता हु.

बहार हैंडपंप चलने की आवाज़ आ रही थी. बिहारी काका ने वही किचन में तंगी एक तौलिया अपनी कमर में लपेट ली और तेज़ी से बहार की तरफ बड़े पर अचानक किचन के दरवाज़े पर जाकर ठिठक गए.

बिहारी काका: आप सच में लखन सिंह को इस बारे में नहीं बताएंगी न.

गरिमा: मैंने कहा न हम इस बारे में बाद में बात करेंगे ये बाते जीतू के सामने नहीं कर सकते इस बारे में हम रात में बात करेंगे तब तक आप जीतू के सामने नोर्मल्ली बेहवे करियेगा अब जल्दी जाइये बहार.

बिहारी काका: जी

बिहारी काका फुर्ती से कोठी के बहार निकल आए बहार जीतू हैंडपंप पर अपने हाथ पाँव धो रहा था. अपने बापू को यु तौलिया में देख जीतू है पड़ा.

जीतू: अरे बापू ये तौलिया लपेट कर काहे घूम रहे हो मेमसाब कहा है.

बिहारी काका को हड़बड़ाहट में समझ नहीं आ रहा था की वो क्या कहे. अचानक उन्हें गरिमा की पेअर की मोच वाली बात याद आई.

बिहारी काका: अरे मई तो घाट की साफ़ सफाई कर रहा था इस लिए तौलिया लपेट ली और बिटिया ज़रा सीढ़ियों से फिसल गई तो उसके पैरो और कमर में मोच आ गई है.

जीतू: अरे मई उन्हें देख कर आता हु.

बिहारी काका: अरे ruk(bihari काका ने उसे अंदर जाने से रोक दिया) तू कोई डॉक्टर है जो यही उनकी मोच सही कर देगा. जा पड़ोस की विमला बुआ के यहाँ ताज़ा सरसो का तेल ले आ.

जीतू: पर सरसो का तेल तो रखा है न अंदर.

बिहारी काका: तुझे ज्यादा पता रहता है वो तेल फैल गया साफ़ सफाई करते समय तू जा न लेकर आ न.

जीतू: ठीक है लता हु अंदर किचन से बर्तन तो लेलु.

अंदर गरिमा लड़खड़ाते लड़खड़ाते धीमे धीमे सीढिया चढ़ रही थी. जीतू अंदर को बड़ा पद बिहारी काका ने उसे फिर रोक दिया.

बिहारी काका: अरे बर्तन उन्ही से ले लेना तेल बेचती है उनके पास कोई बर्तन नहीं होगा ले आ किसी बर्तन में बाद में वापस करवा देंगे. चल जा अब.

जीतू: ठीक है जाता हु

जीतू कोठी के मैं गेट से बहार निकल गया बिहारी काका ने अंदर झांक कर देखा गरिमा अब तक लड़खड़ाते हुए ऊपर तक पहुंच गई थी. उसके चेहरे पर दर्द के भाव साफ़ नज़र आ रहे थे पर फिलहाल काका में उसके करीब जाकर उसकी मदद करने की हिम्मत नहीं थी. गरिमा लड़खड़ाते हुए अपने कमरे के गेट तक पहुंच गई और उसने एक बार पीछे पलट कर नीचे कोठी के दरवाज़े पर खड़े बिहारी काका को देखा और फिर मुँह फेर कर अपने कमरे में घुसकर गेट बंद कर लिया. उसे सच में काफी दर्द हो रहा था पर वो उस बात से भी रिलैक्स थी की उसने काका को अपनी जान लेने से रोक दिया वर्ण बहुत बड़ा बवाल हो जाता. बातो से बाते निकलती तो क्या पता यहाँ उसने जो कुछ करा हरिया के साथ जीतू के साथ काका के साथ सब खुल कर सामने आ जाता. वो फिलहाल थोड़ा रिलैक्स थी पर अंदर कमरे की हालत अब भी अस्त व्यस्त थी, कमरे में पड़े उसके और काका के इनर गारमेंट्स बिस्तर की सिमटी हुई चद्दर उसपर पड़े वीर्य के निशाँ देख कर साफ़ समझ आ रहा था की वह क्या क्या हुआ. इतने में जीतू सरसो का तेल लेकर आ गया और इससे पहले काका उसे कुछ कहते या रोकते वो सीधा कोठी के अंदर आकर सीढिया चढ़ते हुए गरिमा के कमरे की तरफ चल दिया.

बिहारी काका: अरे कहा जा रहा है.

जीतू: गरिमा दी के पैरो की मालिश करने, मालिश से उनकी मोच सही हो जाएगी.

बिहारी काका: है पर अभी वो आराम कर रही है उन्हें कुछ देर आराम करने दे.

काका भी समझ रहे थे की इस वक़्त कमरे की क्या हालत होगी ऐसे में जीतू का वह जाना ठीक नहीं. पर जीतू ने उनकी बात को अनसुना कर दिया और सीधा गरिमा के दरवाज़े तक जा पंहुचा पर गरिमा ने भी अंदर से सिटकनी बंद कर्ली थी. जीतू ने बहार से आवाज़ दी.

जीतू: दी गरिमा दी आपको मोच आई है मई कड़वा तेल लाया हु.

गरिमा कराहते हुए: ओह है जीतू अभी थोड़ी देर बाद आना अभी मई आराम कर रही हु तुम थोड़ी देर बाद आना.

जीतू: अरे दी इसकी मालिश से आप पल में ठीक हो जाओगी.

गरिमा: नहीं जीतू अभी थोड़ी देर आराम कर लेने दो.

बिहारी काका: अरे जब वो कह रही है उन्हें अभी आराम करना है तो तुझे समझ नहीं आ रहा कुछ देर बाद चले जाना.

जीतू: ठीक है दी मई कुछ देर बाद आता हु आपको दर्द ज्यादा लगे तो बता देना.

जीतू वापस नीचे उतर आया गरिमा ने भी कुछ पल को रहत की सास ली और दर्द बर्दाश्त करते हुए बिस्तर पर जाकर लेट गई. दर्द की वजह से अभी फिलहाल कमरा ठीक करने की भी हिम्मत गरिमा में नहीं थी. इसलिए कुछ पल के लिए वो बिस्तर पर hi आँखे मूँद कर लेट गई और दर्द से अपना ध्यान हटाने के लिए यहाँ गाँव में आने के बाद उसके साथ जो कुछ हुआ और जो कुछ उसने किया वो सोचने लगी की कैसे वो एक घरेलु हाउसवाइफ के रूप में इस गाँव में आई थी और एक एक्सीडेंट ने उसके अंदर के सेडक्टिव को इस क़दर जगाया की पहले उसे हरिया के बिस्तर पर जाने को मजबूर कर दिया और फिर अपने से 25 साल बड़े बिहारी काका को अपने बिस्तर तक लाने को मजबूर कर दिया. यही सब सोचते सोचते एक बार फिर उसकी झपकी लग गई.

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काकातुआ के जंगल

जंगल की सुबह की शांति चिडियो की चहचहाट से बेहद मधुर लग रही थी. अचानक वो शांत वातावरण रथ के पहियों की गङ्गाहट और घोड़े की हिनहिनाहट से गूँज उठा. कमल सरोवर के पास एक दुसरे के खयालो में खोये सो रहे विनीता लखन भी रथ की इस आवाज़ से हड़बड़ा कर उठ बैठे. वो दोनों तम्बू से बहार निकल कर आए तो सामने से वही सारथि जो उन्हें यहाँ तक छोड़ गया था आता नज़र आ रहा था. उसने रथ ठीक उनके सामने आकर रोक दिया.

सारथि: नमस्ते आशा करता हु आपकी रात अच्छी बीती होगी, अब दिन निकल आया है आपके वापस अपने निवास पर लौटने का समय हो गया है तो अपने वादे के मुताबिक नियत समय पर मई यहाँ वापस आ गया. अगर आप लोग तैयार हो तो चले.

लखन विनीता: जी

लखन विनीता रथ पर सवार हो गए और रथ जंगल के पथरीले रास्तो से होता हुआ वापस उनके निवास स्थल की तरफ बाद चला. उनका रथ उनके निवास के समुख पंहुचा hi था सामने का नज़ारा देख वो चकित रह गए. सामने उनके निवास स्थान के सामने 101 कान्ये अलग अलग आयु वर्ग की 3 साल से 17 साल तक की कान्ये कड़ी थी और हर कन्या के हाथ में एक पौधा था और उन 101 कन्याओ के साथ खड़ा था एक ग्वाला जिसके साथ कड़ी एक बेहद सुन्दर सफ़ेद गाय जिसे देख कर साफ़ लग रहा था की वो पेट से है. ये सब देख कर लखन विनीता एक बार एक दुसरे को देखा फिर उन कन्याओ उनके हाथ के पौधों और उस गाय को. सामने का नज़ारा देख वो ये तो समझ गए थे की ये सब हो न हो उनकी आज की चुनौती से हो सम्बंधित ये सब आज की गृह पूजा का hi हिस्सा है पर वो चुनौती क्या होगी और वो गृह कौन सा होगा ये अब भी एक सवाल था. वो रथ उन 101 कन्याओ के ठीक सामने जाकर रुका और इससे पहले लखन उस रथ सवार से कुछ पूछते उसने अपना मोबाइल उनकी तरफ बड़ा दिया जिसमे अघोरी का नंबर दिआलद था. लखन ने फ़ोन का स्पीकर ों कर दिया ताकि विनीता भी सुन सके.

अघोरी: आप लोग वापस आ गए.

लखन: जी बाबा

अघोरी: आपसे ये पूछने की ज़रूरत नहीं की चंद्र और सूर्य पूजा कैसी रही मुझे पता है आपने पूजा की सभी विधियों का अक्षरसः पालन करा होगा. और अब चिंता न करे केवल दो कदम दूर है आप अपनी मंज़िल है. अब केवल दो गृह शह रह गई इस पूजा के संपन्न होने में वीनस और एअर्थ.

लखन: जी

अघोरी: पर ये दो गृह hi आप पर काफी भरी पड़ने वाले है. अंत में आकर हार न मान जाइएगा हिम्मत से डटकर इन आखरी दो ग्रहो को भी पार कर जाइये.

लखन: जी बाबा हम पूरी कोशिश करेंगे.

अघोरी: ठीक है तो आज की पूजा से सम्बंधित विषय वास्तु आपके सामने है वो 101 कान्ये उनके हाथ में थामे वो 101 पौधे और वो गर्भवती गाय ये तीनो hi आपकी आज की पूजा की विषयवस्तु है. इन्हे देख कर आपको हल्का हल्का ये अंदाज़ा हो जाना चाहिए की आज की पूजा किस गृह से सम्बंधित है.

लखन: जी पौधों को देख कर यही लग रहा है शायद पृथ्वी यानि एअर्थ.

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अघोरी: बिलकुल सही समझे आप आज की पूजा पृथ्वी यानि एअर्थ की hi है जहा हम रहते जिस पर ऊगा अन्न हम कहते है जिसका हम भरपूर दोहन करते है पर बदले में शायद उसे कभी कुछ नहीं देते है. धरती को हम माता कहते है पर सिर्फ कहते है दिल से मानते नहीं कभी उस माँ का क़र्ज़ चुकाने की कोशिश नहीं करते आज आपको उसी धरती माँ को प्रसन्न करना है उसका क़र्ज़ चुकाना है.

लखन: जी बताए इसके लिए हमे क्या करना होगा.

अघोरी: पृथ्वी को ***** और ग्रीक दोनों सभ्यताओं में एक देवी का स्वरुप मन जाता पर दोनों hi सभ्यताओं में इस स्वरुप में बहुत बड़ा अंतर है और यही अंतर उनको प्रसन्न करने की विधियों में भी नज़र आएगा. ग्रीक माइथोलॉजी में पृथ्वी को गया नाम से सम्बोधित करा जाता है पर उसके बारे में आपको बाद में बताएंगे.

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आज की पूजा के कुल 7 चरण है तीन चरण ***** सभ्यता से सम्बंधित है जिनसे सम्बंधित विषयवस्तु आपके सामने है और तीन चरण सूर्यास्त से पहले पुरे करे जाएंगे और तीन चरण पृथ्वी के ग्रीक स्वरुप गया से समबंशित है जो सूर्यास्त के बाद पुरे करे जाएंगे हुए तीन चरण से सम्बंधित चिट्ठी वो रथ वाहक आपको दे देगा पर वो चिट्ठी आप सूर्यास्त के बाद hi खोले उसमे पृथ्वी के ग्रीक स्वरुप गया और उसकी पूजा की विधि के बारे में विस्तार से लिखा है.

इतना सुनकर उस रथ वाहक ने एक बंद लिफाफा लखन सिंह की तरफ बड़ा दिया जिसमे गया से सम्बंधित पूजा के तीन चरण के बारे में लिखा था. लखन ने वो लिफाफा थम लिया.

लखन: पर बाबा ये तो 6 चरण hi हुए आपने कहा की पूजा के 7 चरण है.

लखन की बात सुनकर अघोरी कुछ पल के लिए शांत हो गया और फिर एक गहरी सास लेकर दुबारा बोलै: इस पूजा का सातवा चरण आपकी इस 9 ग्रहो की पूजा का सबसे मुश्किल चरण होगा और आखिरी भी और वो सातवा चरण आपको आज नहीं करना है वो सातवा चरण आपको कल सबसे आखिर में करना है और उसके बारे में आपको कल hi बताया जाएगा.

लखन विनीता दोनों थोड़ा सशंकित थे की ऐसा क्या है उस सातवे चरण में की अग्गौरी बाबा ने उसे सबसे मुश्किल कहा पर जो भी था वो कल था फिलहाल तो आज के बारे में सोचणा था.

लखन: ठीक है बाबा पर सूर्यास्त से पूर्व के ***** सभ्यता वाले वो तीन चरण क्या है जो हमे इन बालिकाओ पौधों और गाय के साथ करने है.

अघोरी: बताता हु ये तीन चरण ज्यादा मुश्किल नहीं है और आपको बारी बारी से ये तीन चरण पुरे करने है. और ये पूर्ण रूपेण हमारी वैदिक ***** सभ्यता पर आधारित है जहा कन्याओ की पूजा की जाती है गाय को माता मन जाता है धरती को भी माता कहा जाता है और यही आपकी पूजा के प्रथम तीन चरण है. धरती ने हमे बहुत कुछ दिया पर इंसान आधुनिकता की दौड़ में इतना अँधा हो गया की वो धरती के सरे उपकार भूल गया पेड़ो को अँधा धुंध काटता चला गया अब समय है आपका उसे कुछ देने का इन कन्याओ के हाथ में थामे ये 101 पौधे धरती के प्रति अपनी कृतज्ञता ज़ाहिर करने का छोटा सा प्रयास है आपको इन कन्याओ के सहयोग से जंगल के अलग अलग हिस्सों में ये 101 पौधे लगाने है. यही इस पूजा का प्रथम चरण है.

अघोरी: कन्या देवी का स्वरुप होती है और आपके खानदान ने उन्ही कन्याओ की हत्या करि आज आपको उसी का प्राश्चित करना है इन 101 कन्याओ की सेवा करके जिस तरह नवरात्री में 9 कन्याओ को भोजन कराया जाता है आपको इन 101 कन्याओ को भोजन करना है. इससे वो पाप ख़तम तो नहीं हो जाएगा पर इन कन्याओ के सच्चे मन से निकली दुआओ से उसका प्रभाव कम ज़रूर हो जाएगा. जिस वक़्त आप जंगल में वो पौधे लगाएंगे आपकी पत्नी यानि विनीता उन 101 बालिकाओ के लिए भोजन बनाएगी. भोजन का सारा सामन रसोईघर में रखा है. भोजन करवा कर उनसे आशीर्वाद लेकर आप उन्हें विदा करेंगे यही आपका आज की पूजा का दूसरा चरण है.

विनीता लखन खुश थे की चलो इतने दिनों में पहली बार कुछ ऐसा करने को मिला है जो वास्तव में पूजा जैसा हो. उन्होंने तो यही सोचा था की अब आज पता नहीं उन्हें क्या क्या करना पड़ेगा पर ये दो चरण तो नार्मल थे.

अघोरी: अब तीसरा चरण उस गाय से सम्बंधित है. गाय और पृथ्वी दोनों को hi हम माता कहते और वास्तव में गाय को पृथ्वी का hi स्वरुप मन जाता है इसलिए कहा जाता है की एक गाय की सेवा धरती की सेवा के समतुल्य है. अब ऐसे में यदि गाय गर्भवती हो तब उसकी सेवा से मिलने वाले पुण्य की तो कल्पना भी नहीं की जा सकती. क्युकी धरती को प्रजनन की देवी भी कहा जाता है हमारे सौरमंडल में धरती hi एकमात्र गृह है जिसमे जीवन को जनम देने की शक्ति है इसलिए धरती को प्रजनन की देवी कहा जाता है.

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और उस धरती के गर्भ से जीवन के अंकुर को आपको इस दुनिया में लाना है.

लखन: जी मतलब मई कुछ समझा नहीं.

अघोरी: अरे गाय धरती का स्वरुप है और वो गाय गर्भवती है तो उसे hi धरती का रूप मानते हुए उसके बच्चे को जन्म दिलाने में उस ग्वाले की मदद करनी है. घबराए नहीं इस काम में वो ग्वाला आपकी पूरी मदद करेगा और लखन जी विनीता जी तो शहरी परिवेश से है पर आप तो गांव से है आपके लिए तो ये सामन्य है.

लखन: जी

अघोरी: तो यही है आपकी धरती माँ की वैदिक पूजा के प्रथम तीन चरण जो सूर्यास्त से पहले होने है. सूर्यास्त के बाद होने वाले धरती के गया स्वरुप के ग्रीक रिवाज़ो से होने वाले तंत्र पूजन के बारे में उस चिट्ठी में विस्तार से लिखा है तो जो उसमे लिखा है उसे पूरा करियेगा और उस चिट्ठी को सूर्यास्त के बाद hi खोलियेगा.

लखन: जी बाबा

अघोरी: आज की पूजा की पूर्ति के लिए आपको शुभकामनाए अब आपसे कल बात होगी. और है आज की पूजा के लिए ज़रूरी वस्त्र आपके शयनकक्ष में रख दिए है.

Lakhan:Jee धन्यवाद बाबा.

इतना कह कर अघोरी ने फ़ोन रख दिया. लखन विनीता उन कन्याओं और उस ग्वाले को वही छोड़ अंदर माकन में अपने शयनकक्ष में गए जहा उनके वस्त्र रखे लखन शिंघ के लिए एक भूरे रंग की लुंगी और विनीता के लिए धरती के रंग यानि नीला और हरे रंग के कॉम्बिनेशन से बानी एक सारे जो बेहद खूबसूरत थी. लखन ने वो लुंगी अपनी कमर पर लपेट ली और कमरे से निकल गया. विनीता भी कुछ देर बाद तैयार होकर मोरपंखी सारे में जब बहार तो लखन उसे देखता hi रह गया. विनेगा और लखन ने बहार आकर उन कन्याओ के साथ माँ धरती का आवाहन करा उनकी पूजा की और इस पूजा की सभी रस्मो को संपन्न करने में उनका आशीर्वाद मांगा. और फिर लखन सिंह उन कन्याओ के साथ पूजा की प्रथम विधि वृक्षारोपण को संपन्न करने के लिए जंगल की तरफ निकल गया. और विनीता घर के अंदर रसोई में जाकर पूजा की दूसरी विधि कन्याभोज के लिए भोजन बनाने में जुट गई.

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है भाईलोग निजी व्यस्तताओंकी वजह से समय नहीं मिल प् रहा और अब दिन भर घर में रहते है तो सबके साथ बैठते है ऐसे में सेक्स स्टोरी कैसे लिखू फिर भी समय निकल कर लिख रहा.

स्टे सेफ स्टे ात होम

दुनिया हिला दी एक वायरस ने जिसका नाम कोरोना

सच्चा इंडियन कहता है इससे डराना.
 
कब्रिस्तान

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लखन और विनीता को धरती पूजा की ***** विधिया समझने के बाद जब अघोरी वापस अपनी कुटिया के अंदर आया तो नीतू तब तक उठ चुकी थी और अपने बदन पर लगा खून पोछ कर कपडे पेहेन रही थी जो कल रात पूजा के दौरान अघोरी ने उसके बदन पर लगाया था.

अघोरी: आपका वो ब्रह्मचारी कहा है आज हर हालत में उसकी मौजूदगी ज़रूरी है. आज बिना उसके आगे की साधना नहीं हो पाएगी.

नीतू को समझ नहीं आ रहा था की वो अघोरी को क्या जवाब दे उसे जो कुछ करना था आज करना था अघोरी से खुल कर बात करनी hi होगी. वैसे कल रात से पहले तक उसका अघोरी को अपने साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए तैयार करने का एकमात्र मकसद राज की जान बचाना था पर कल रात अघोरी को निर्वस्त्र देखने उसकी बलिष्ठ हत्ता कट्टा हब्सी शरीर देखने के बाद और उसका हद से ज्यादा लुम्बा लुंड देखने के बाद नीतू कद अंदर की इरोटिक फीलिंग भी जाग गई थी. नीतू जानती थी की एक हब्सी अफ्रीकन नीग्रो के साथ सेक्स का अवसर शायद उसे ज़िन्दगी में दुबारा नहीं मिलेगा इसलिए उसे किसी भी कीमत पर अघोरी को इसके लिए तैयार करना hi होगा.

नीतू ने अब फैसला कर लिया की वो अब अघोरी से सीधा सीधा बात करेगी क्युकी जो शिक्षा उसे नंगा देख कर भी अब भी सामन्य है तो बिना उसके सामने खुले सिर्फ दूर से सडके करते रहने से कुछ नहीं होने वाला. अघोरी नीतू की तरफ पीठ करे खड़ा था और कुछ काम कर रहा था. उसने अपना सवाल दुबारा दोहराया.

अघोरी: अपने जवाब नहीं दिया कहा है आपका वो ब्रह्मचारी.

फाइनली नीतू ने सच बोल hi दिया: कोई ब्रह्मचारी नहीं मिला मुझे पुरे गांव में.

अघोरी ने गुस्से में भौंए तान कर सर घुमाकर नीतू की तरफ देखा.

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नीतू: कोई नहीं आने वाला यहाँ इस साधना के लिए.

अघोरी: आपके बार बार टालने से मई समझ तो गया था पर ये बात आपके मुँह से सुन्ना चाहता था.

नीतू: हम्म मई भी आपको बताना छह रही थी पर बता नहीं प् रही थी.

अघोरी: फिर क्या सोचा है आपने कैसे संपन्न होगी ये साधना बिना एक ब्रह्मचारी पुरुष.

नीतू: संपन्न हो सकती है अगर आप मेरा साथ दे.

अघोरी: मई तो आपका साथ दे hi रहा हु शुरू से और क्या कर सकता हु.

नीतू: क्या आप उस ब्रह्मचारी पुरुष का स्थान लेकर मेरे साथ ये साधना पूरी कर सकते है.

अघोरी ने दुबारा नीतू की तरफ गुस्से में देखा.

अघोरी: मुझे आपकी मंशा समझ आ रही थी पर मई आपकी समस्या को देखते हुए उसे अनदेखा कर रहा था. पर ये नहीं हो सकता मैंने किसी कन्या के साथ सम्बन्ध न बनाने की प्रतिज्ञा की है.

नीतू: क्या आपकी प्रतिज्ञा किसी की जान से ज्यादा ज़रूरी है.

अघोरी: हर इंसान ऊपर से अपनी उम्र लिखवा कर आता है आपके प्रेमी की भी इतनी hi आयु थी आप प्रकृति के खिलाफ जा रही थी तो इसके लिए आप मुझे दोष नहीं दे सकती. मेरे ब्रह्मचर्य का असर मेरी सिद्धियों पर पड़ेगा मई अपना ब्रह्मचर्य नहीं छोड़ सकता.

नीतू: तो क्यों अपने मुझे ये रास्ता बताया जो होना था वो होता आपने क्यों प्रकृति के खिलाफ जाकर मुझे आने वाला भविष्य और बचने का रास्ता बताया.

अघोरी: मैंने सिर्फ आपकी मदद करने की कोशिश की.

नीतू: जी नहीं दुनिया में लाखो लोग रोज मरते है आप सबको बचने तो नहीं पहुंच जाते फिर मई hi क्यों. जानते है क्यों क्युकी मेरे शब्दों ने आपके ईगो को ठेस पहुंचे थी.

अघोरी: ये क्या कह रही है आप.

नीतू: सही कह रही हु यहाँ के लोग आपको पूजते है और मैंने आपको ढोंगी पाखंडी बुलाया था तभी आप मेरे पास आए थे न मुझे राज के बारे में बताने के लिए. आपसे ये बर्दाश्त नहीं हुआ और सिर्फ खुद को साबित करने के लिए आपने अपनी पावर्स का मेरे सामने शोऑफ करा मुझे बताया की मेरे बॉयफ्रेंड की जान खतरे में और आप चाहे तो उसकी जान बचा सकते है ताकि मई हाथ जोड़ कर रिक्वेस्ट करू.

अघोरी: आप गलत बोल रही है.

नीतू: आज hi तो मई सही बोल रही हु एक बात का जवाब दीजिये क्या होता अगर आप मुझे आकर न बताते की मेरा बॉयफ्रेंड 7 दिन में मरने वाला है. क्या होता वो मर जाता मई शायद सदमे में चली जाती रोटी चीखती चिल्लाती बहुत समय तक उसे भुला न पति पर वक़्त हर ज़ख्म भर देता है मई भी देर सावेर अपनी लाइफ में आगे बाद जाती. पर आपने क्या करा अपने मुझे ये बताया की अगर मई चहु तो मेरा बॉयफ्रेंड बच सकता है अगर मई एक ब्रह्मचारी पुरुष ढून्ढ कर उसके साथ सेक्स करलु तो वो बच सकता है. आपने राज की मौत का पूरा ब्लामे मेरे ऊपर दाल दिया की मई अगर उस ब्रह्मचारी को ढूंढ़ने में नाकाम रहती हु तो ज़िन्दगी भर खुद को माफ़ न कर पाव ज़िन्दगी भर ये सोचती राहु की मई राज को बचा सकती थी पर शायद मैंने hi ढंग से कोशिश नहीं की.

नीतू की इन बातो ने अघोरी को भी निशब्द कर के रख दिया था. उसे अब समझ आ रहा था की प्रकृति के नियमो से खिलवाड़ करके उसने कितना गलत करा. शायद वो उस दिन नीतू को कुछ न बताता तो आज उसे इन सवालो का सामना न करना पड़ता. कही न कही नीतू की इस हालत का ज़िम्मेदार वो भी था.

नीतू: आपने मुझे ऐसी मजबूर परिस्थिति में लेकर खड़ा कर दिया है जहा मुझे सही गलत कुछ समझ नहीं आ रहा. मेरा सिर्फ एक मकसद है राज को बचाना ताकि भविष्य में ये ब्लामे लेकर न जिउ की मुझे पता था वो मरने वाला है फिर भी मैंने कुछ न करा. है मैंने आपसे झूट बोलै की मुझे ब्रह्मचारी मिल गया पर वो पूरी तरह झूट नहीं था मुझे सिर्फ एक उम्मीद की किरण नज़र आई आप और अब आप कह रहे हो की आप किसी की जान बचने के लिए अपना ब्रह्मचर्य नहीं छोड़ सकते. अगर आप पूरी तरह मेरी मदद कर नहीं सकते थे तो फिर अपने मुझे ये रास्ता दिखाया hi क्यों. मई यहाँ इस गांव में पहली बार आई यहाँ के लोगो से अनजान आपको क्या लगा मई कहा से यहाँ एक ब्रह्मचारी पुरुष ढून्ढ लाऊंगी अगर बात ब्रह्मचारी पुरुष की थी तो आप खुद क्यों नहीं ढून्ढ कर लाए ऐसा कोई पुरुष जब अपने मुझे ये रास्ता दिखाया था.

अघोरी को समझ नहीं आ रहा था की वो नीतू को क्या जवाब दे उसका एक एक शब्द उसके दिल में कील की तरह चुभ रहा था. खुद को इतना बेबस इतना कमज़ोर उसने आज से पहले कभी महसूस नहीं किया था.

नीतू: मई यहाँ से जाउंगी तो राज की जान बचाकर जाउंगी वर्ण यहाँ से मई नहीं मेरी लाश जाएगी. एंड ी मैं आईटी.

अघोरी: राज खुशनसीब है की उसे इतना चाहने वाली लड़की मिली. पर मुझे सोचने का कुछ वक़्त दीजिये मई कुछ देर एकांत में बैठ कर सोचना चाहता हु. आप इतना तो कर hi सकती है मेरे लिए हमे आज की पूजा रात में करनी है मुझे शाम तक का वक़्त दे सकती है सोचने के लिए.

नीतू ने हां में सर हिला दिया, अघोरी ने फलो से भरी एक टोकरी नीतू के सामने रख दी और खुद बिना कुछ बोले कमरे से बहार निकल गया. नीतू वही ज़मीन में बैठ कर उसने जो कुछ बोलै वो सोचती रह गई. वो यही सोच रही थी की कही वो भावावेश में कुछ ज्यादा तो नहीं बोल गई. पर उसने खुद को तसल्ली दी जो बोलना था उसने साफ़ साफ़ बोल दिया अब कम से कम उसे गिल्ट नहीं रहेगा की वो अपनी मदद करने वाले शिक्षा के साथ धोका कर रही है. अघोरी बीच जंगल में जाकर ध्यान लगाकर बैठ गया और नीतू के एक एक शब्द पर मंथन करने लगा की वाकई ये सब उसने अपने अहम् को संतुष्ट करने के लिए करा.

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नीतू और अघोरी दोनों अपने अपने विचारो का मंथन कर रहे थे जैसे देवताओ और असुरो ने समुद्र मंथन करा था. अब देखना ये था की इस मंथन अमृत बहार अत है या विष.
 
हवेली में

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कल की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद आज शोभा की आँख भी काफी देर से खुली. शोभा की आँख बस खुली hi थी की बहार कोई दरवाज़ा खटखटा रहा था. वो आशा थी शोभा की ननद जिसने कल रात उसे नेहा की तरह तैयार होकर अपने विक्रम के पास जाने को कहा था.

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आशा: शोभा अरे ो शोभा कितनी देर सोएगी मेरी भाभी जी. जाग जाइये दिन चढ़ आया है.

शोभा जो रात में नंगी hi सो गई थी ने फटाफट एक निघ्त्य पेहेन कर अपने नंगेपन को धक् लिया. वो समझ है की ये ज़रूर कल रात के बारे में पूछेगी. कमरे और खुद की हालत ठीक करने के बाद शोभा ने दरवाज़ा खोला.

शोभा: जी दीदी माफ़ करियेगा वो दरअसल मई बाथरूम में थी.

आशा: बाथरूम में थी या आँख देर से खुली.

शोभा झेपते हुए: नहीं दीदी वो मई ऐसा....

आशा: अरे मुझसे क्यों छुपाती है पगली मुझे पता नहीं क्या की कल तू कहा गई थी.

आशा: मई तो यही पूछने आई थी की कल सब कैसा रहा मेरे भाई के दिमाग से नेहा का भूत उतरा की नहीं. तू उसपर अपना जादू चलने में सफल हुई की नहीं.

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शोभा शर्मा गई और उसकी शर्माहट देख कर आशा मुस्कुरा दी.

आशा मुस्कुराते हुए: आए है मेरी लड़ो तेरी शर्माहट देख कर hi मुझे मेरे सवाल का जवाब मिल गया. वैसे ये बता लिमिट तो क्रॉस नहीं की वह तुम दोनों ने कुछ ऐसा वैसा तो नहीं हुआ न तुम दोनों के बीच.

अब शोभा उसे क्या बताती की कुछ नहीं बहुत कुछ हो गया कल रात में. कल रात में उसके भाई ने किस तरह ज़बरदस्त चुदाई की उसका बयां करना शोभा के लिए मुश्किल था और वो बयां करना भी नहीं चाहती थी क्युकी पूजा की वजह से उनके सम्बन्ध बनाने पर रोक थी फिर भी उसने ये सब करा. उसने अपनी चल भी आशा के सामने नार्मल राखी ताकि उसे किसी तरह का शक न हो.

जहा शोभा कल रात की बात अपनी ननद से छुपा रही थी वही उसका पति विक्रम भी कल रात की बात सोच सोच कर परेशां था की कही नेहा और उसके बीच जो कुछ हुआ उसके बारे शोभा को पता न चल जाए वो कल जोश में ये सब कर तो गया पर आखिर नेहा शोभा की सहेली है कही उसने कुछ कह दिया तो शोभा कैसे रियेक्ट करेगी. विक्रम ने फैसला कर लिया की इस बारे में नेहा से बात करनी hi होगी की भूल से भी इस बात का ज़िक्र शोभा के सामने नहीं होना चाहिए. विक्रम ने नेहा को मैसेज करा.

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विक्रम: मुझे तुमसे बात करनी है.

वही नेहा तो कल रात की घटना से बहुत खुश थी की उसे फाइनली उस स्ट्रेंजर का पता चल गया और विक्रम जैसे बाकी जवान मर्द से एक अलग अंदाज़ में छुड़ाने का मज़ा भी मिल गया. बस नेहा की चिंता थी तो शोभा की कही उसे कल रात का पता न चल जाए. पर फ़ोन में विक्रम का मैसेज देख उसमे मिलने की बात पढ़कर वो चिंता एक बार फिर फंतासी में बदल गई. नेहा ने विक्रम को रिप्लाई करा.

नेहा: ठीक है आप छत में एक्सरसाइज करने जाते हो न तो मैसेज कर देना मई भी ऊपर पहुंच जाउंगी.

विक्रम: Ok वही मिलेंगे.

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तीनो hi कल रात की बात छुपाना चाहते थे पर तीनो के मकसद अलग अलग थे. पर क्या ये राज़ रात के अँधेरे में दफ़न हो जाने वाला था या स्प्रिंग की तरह दबाने पर दुगनी तेज़ी से ऊपर आने वाला था ये तो अगले दो दिन में पता चल hi जाने वाला था. पता नहीं क्या लिखा था इस वेडिंग सेरेमनी के दूल्हा दुल्हन की शादीशुदा ज़िन्दगी में नेहा नाम की ये आफत क्या तूफ़ान लाने वाली थी उनकी प्रेम कहानी में.

लालू का फार्महाउस

रात में हुए बर्बरतापूर्ण गैंगबैंग के बाद रात भर बेहोश रहने के बाद फाइनली शबाना को होश आ गया उसके टांगो के बीच अब भी दर्द हो रहा था और ये दर्द उसे याद दिला रहा था कल रात में उसके साथ हुई हैवानियत का. अचानक उसे अपने जांघो के बीच कुछ ठंडा ठंडा महसूस हुआ उसने सर घुमाकर देखा तो चांदनी उसकी जांघो के बीच बर्फ से सिकाई कर रही थी. चांदनी को देख शबाना के दिल का सारा गुस्सा उसी पर फूट पड़ा.

शबाना: बंद करो अपना ये नाटक तुम्हारे मालिकों ने बोलै है क्या ये सब करने के लिए मुझे दुबारा गैंगबैंग के लिए तैयार करने को.

चांदनी: ऐसा नहीं है.

शबाना: ऐसा hi है तुम सब जानती थी मेरे साथ क्या होने वाला है फिर भी मुझे कुछ नहीं बताया.

चांदनी: तुम्हारी गलती नहीं है धनदेवालियो को लोग शक की नज़र से देखते है पर कोई भी अपनी मर्ज़ी से धनदेवाली नहीं बनता. 19 साल की थी जब ज़मींदारो का बेगार न करने की वजह से ज़मींदारो ने उन्हें इतना मारा इतना मारा की उनकी जान चली गई. हम जब ठाणे में रिपोर्ट लिखने गए तो थानेदार ने रिपोर्ट लिखने के बदले एक रात के लिए मेरे साथ सोने की शर्त राखी. उस रात अपने बाप के मर्डर की कंप्लेंट लिखने के लिए मई पहली बार धंदे पर बैठी. उसके साथ सोने के बावजूद उसने मेरी कंप्लेंट नहीं लिखी. बल्कि ज़मीदारो को खबर कर दी और उन ज़मीदारो ने मेरी नंगी तस्वीरें पुरे गाँव की हर गली हर मोहल्ले हर घर की दीवार पर चिपका दी जो उस दरोगा ने उन्हें दी थी. मेरी माँ ये ज़िल्लत बर्दास्त न कर और उन्होंने फ़ासी लगा ली. जब तक मई अपने घर पहुंची पुरे गाँव की नज़रे मेरे लिए बदल चुकी थी. जिन लोगो को मई चाचा ताऊ भैया कहती थी वही अब मुझे धनदेवाली कह रहे थे मेरे साथ एक रात को सोने की कीमत लगा रहे थे. एक रात मोहल्ले के एक लड़के ने मेरी बेहेन का हाथ पकड़ लिया. उस दिन मुझे समझ आ गया की अगर मुझे इन सबसे अपने बेहेन को मेहफ़ूज़ रखना है तो खुद को इस आग में झोकना होगा. और उस दिन मई एक धनदेवाली बन गई और अपनी बेहेन को यहाँ से बहुत दूर पढ़कर एक अच्छा इंसान बनने के लिए भेज दिया. मेरे बेहेन के सिवा मेरा कोई नहीं है और उसके लिए मुझे ये सब करना पड़ता है.

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शबाना: ी ऍम सॉरी मुझे तुम्हारी बात नहीं पता थी.

चांदनी: समझ सकती हु. अब तुम तैयार हो जाओ उन लोगो का फ़ोन आया था वो आते hi होंगे.

शबाना: फिर मेरा गैंगबैंग करने के लिए.

चांदनी: नहीं तुम्हे वापस ले जाने के लिए और मई तुम्हे यही राय दूंगी जब तक यहाँ पर हो उनसे मत भिड़ो ये उनका एरिया है तुम यहाँ उनका कुछ नहीं बिगड़ पाओगी और दूसरी बात उनमे से किसी पर भरोसा मत करना.

शबाना चांदनी की बात मान कर तैयार हो गई तब तक एक गाडी गेट पर आकर रुकी उसमे केवल देव था जो शबाना को लेने आया था.

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देव: आए चल लेकर आ उसे ज्यादा टाइम नहीं अपने पास.

वो नौकर शबाना को बहार ले आए.

देव: आए है तू तो सही से चल रही है लगता है कल वाला दर्द दूर हो गया मन तो कर रहा की तुझे अभी फिर रगड़ दू पर लालू ने तुझे सही से लेन को कहा है तो चल गाडी में बैठ जा.

शबाना का मन तो कर रहा था की देव की जान लेले पर उसे चांदनी की बात याद आई की यहाँ वो इनका कुछ नहीं बिगड़ सकती तो वो चुपचाप गाडी में जाकर बैठ गई. और गाडी हवेली की तरफ चल दी. हवेली के करीब पहुंच कर गाडी अचानक से रुक गई शबाना ने सामने देखा तो सामने से लालू कुंदन प्रताप आते दिखे. शबाना को लग रहा था की शायद यहाँ ये सब फिर मिलकर उसका गैंगबैंग करेंगे.

लालू: तुझे लग रहा होगा हम फिर तेरा बंग करेंगे पर चिंता न कर अभी तो आराम से हवेली जा आराम कर जब तेरी ज़रूरत महसूस होगी तुझे बुला लेंगे.

शबाना सर झुका कर हवेली की तरफ चल दी पर अचानक लालू ने उसकी गर्दन पकड़ ली.

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लालू: सुन मई जनता हु इस वक़्त तू अंदर से गुस्से से तड़प रही होगी तेरा मन कर रहा होगा की हम सबको जान से मार दे. पर अपना जितना भी गुस्सा है न वो सारा गुसा अपनी गांड में घुसेड़ लेना बेहेन की लोदी. ध्यान रखना तेरे सारे वीडियोस हमारे पास है और अब तो तेरे मुजरे के वीडियो भी है और साथ में तेरे घर का पता भी तो कहने की ज़रूरत नहीं है की अपना मुँह बंद रखना समझी.

शबाना चुप थी जिस पर लालू ने उसके गले पर अपनी पकड़ मजबूत की.

लालू: समझी की नहीं हरामज़ादी.

शबाना: जी जी समझ गई.

लालू: गुड चल अब अपना मुँह खोल.

शबाना: जी मुँह क्यों.

शबाना के सवाल पूछते hi एक झापड़ उसके गाल पर पड़ा.

लालू: साली मूतना है तेरे मुँह में तेरी इतनी औकात की तू सवाल पूछे चल साली कुटिया मुँह खोल.

शबाना ने चुपचाप अपना मुँह खोल दिया और लालू ने एक गोली उसके मुँह में दाल कर एक पानी की बोतल उसके मुँह में ठूस दी जिससे वो गोली शबाना के हलक में उतर गई.

लालू: तू सोच रही होगी ये क्या गोली है घबरा मत ज़हर नहीं दिया है तुझे िपिल्ल की गोली दी है गर्भनिरोधक गोली.

शबाना की आँखे चौड़ी हो गई वो तो ये सौज रही थी की इतना सब सहने के बाद आखिरकार उसे माँ बनने का सुख तो मिलेगा पर लालू ने उसे ये गोली खिलाकर वो भी नहीं होने दिया. शबाना की आँखे एक बात फिर आसुओ से दबदबा आई.

शबाना: तुमने वडा करा था की तुम मुझे माँ बनने में मदद करोगे.

लालू: हम्म करूँगा पर तब अगर तू यहाँ से जाने तक हमारी बात मानती रहे और किसी से कुछ न कहे तब समझी चल अब जा अपनी उस रुंडी सहेली के पास और ध्यान रखना उसे कुछ पता नहीं चलना चाहिए. चल दफा हो.

शबाना चुपचाप अपने वह से हवेली की तरफ चली आई. और आंसुओ को पोछते हुए खुद को नार्मल दिखते हुए अपने कमरे में चली आई. जहा नेहा उसे देख कर बहुत खुश हो गई.

नेहा: अरे दी आ गई आप क्या आपकी सहेली आपको छोड़ने आई थी.

शबाना: है

नेहा: तो उसे अंदर ले आती.

शबाना: नहीं उसे जल्दी थी.

नेहा: अच्छा और बताइये कैसा था आपकी सहेली का घर.

शबाना: थोड़ा थक गई हु नाहा धो कर थोड़ा आराम करना चाहती हु.

नेहा: ठीक है ठीक है सॉरी आप रिलैक्स करो वैसे आज रात धामु को ले औ.

शबाना: इस बारे में में बाद में बात करेंगे.

नेहा: चलिए आप रिलैक्स करिये.

शबाना: चुपचाप बाथरूम में चली गई और अपने मुँह को बंद करके रोने बैठ गई ताकि उसके रोने की आवाज़ भी बहार न जाए.

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इस वेडिंग सेरेमनी में आने के बाद अगर किसी ने सबसे ज्यादा दर्द सहा था तो वो शबाना ने और अभी पता नहीं उसे कितना कुछ और सहना था. लालू एंड कंपनी का कितना ज़ुल्म उस पर होना बाकी था और कितनी बर्दाश्त करने की छमत थी उस बेचारी में जो अपना दर्द किसी के सामने बया भी नहीं कर सकती थी.
 
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