A wedding ceremony in village - Page 13 - SexBaba
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A wedding ceremony in village

पूरी रात जागकर अभी अभी रात के 5 बजे अपडेट रेडी करा है अब कल मेर्री क्रिसमस पर भीमा और शोभा का अपडेट पोस्ट करूँगा तो कल तक अपडेट का वेट करे. नाउ गोइंग तो स्लीप.
 
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काली अँधेरी रात घने पेड़ जिन्होंने चाँद की रौशनी को भी अवरुद्ध कर दिया था. ऐसे में खुद के हाथ भी नहीं दिख रहे थे केवल छू कर hi महसूस करा जा सकता था. ऐसे में वो आम के पेड़ का बाघ एक बेहद कामुक घटना का गवाह बनने जा रहा था. ये वही बाघ था जहा नेहा ने कल्लू से अपनी छूट छतवई भीमा के सामने अपनी पंतय उतर कर पेड़ पर टांगी न जाने कितनी बार अपने छोटे कपड़ो या नंगे बदन के दर्शन करा कर भीमा को उत्तेजित होने पर मजबूर कर दिया. और आज उसी नेहा के जैसा बनने की छह में कोई और उसकी भरी कीमत चुकाने जा रहा था.

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उन घने पेड़ो के बीच एक औरत और एक मर्द एक दुसरे में पूरी तरह गुथे खड़े थे और मज़े की बात ये थी की वो दोनों hi एकदूसरे की असलियत से अनजान थे और एक दुसरे को कोई और hi समझ रहे थे. एक थी उस हवेली की असली मालकिन और इस वेडिंग सेरेमनी की ब्राइड शोभा और दूसरा था उसी हवेली की गंदगी साफ़ करने वाला जमादार और जबान से गूंगा भीमा. भीमा इस बात से अनजान था की इस वक़्त जो उसकी बहो में है वो शोभा है वो तो उसे नेहा समझ रहा था और वही शोभा जो एक बार पहले भी शराब के नशे में अपने hi बाप को अपना पति समझ कर उसे अपना कौमार्य सौप कर उसके साथ हमबिस्तर हो चुकी थी एक बार फिर अँधेरे में कद काठी में अपने पति जैसे दिखने वाले भीमा को अपना पति समझ कर उसके साथ हमझेड़ी होने की तरफ अग्रसर थी.

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भीमा शोभा को पीछे से अपनी बहो में कास कर जकड़े हुए था और अपने एक हाथ से शब्बा के पुरे बदन को सेहला सेहला कर महसूस कर रहा था और दुसरे हाथ से अब भी शोभा के मुँह को बंद करे हुए थे ताकि कही वो चिल्ला न दे. वही शोभा ने उसे अपना पति विक्रम समझ कर पूरी तरह खुद को उसके हवाले कर दिया था और अपना जिस्म का पूरा भर उसपर दाल दिया था. भीमा ने भी नेहा को पहले भी ऐसी कामुक हरकते करते देखा था इसलिए वो इस मौका का पूरा फायदा उठा रहा था. शोभा के बदन को सहलाते सहलाते उसने अपने हाथ उसके टॉप के ऊपर से उसके स्तनों पर रख दिए और उसके उभारो को अपने हाथो को मसलने लगा. शोभा के स्तनों को मसलते मसलते वो अपना हाथ नीचे ले जाता गया और उसके हाथ शोभा की मिनी स्कर्ट के निचले सिरे पर hi जाकर रुके. पर जीवन में पहली बार भीमा ने किसी औरत को अपने आगोश में लिया था और वो भी इतनी कामुक औरत को इसलिए उसका उत्तेजित होना तो स्वाभाविक था. इसलिए उसके हाथ यही नहीं रुके बल्कि उसके शोभा की उस छोटी सी स्कर्ट जो उसके घुटनो से भी ऊपर तक थी उसे सामने से पूरा उठा दिया और अपनी हथेली को शोभा की स्कर्ट के अंदर करके सीधा उसकी पंतय के अंदर घुसेड़ दिया.

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आज तक कभी भीमा को किसी औरत का सुख नहीं मिला था. उसकी छोटी जाट और काम ऊपर से उसके गूंगे होने की वजह से कोई औरत उसके करीब नहीं आती थी इसलिए एक औरत के जिस्म की भूक ने उसके अंदर की हवस की आग ने उसे व्याकुल सा कर दिया था और इतने दिन से नेहा की हरकतों ने उस भूक उस आग में घी का काम करे उसे और बुरी तरह भड़का दिया था. ऐसे में जब एक औरत की छूट उसके उंगलियों के इतना करीब थी तो इस लम्हे पर खुद पर काबू रखना उसके लिए नामुमकिन सा था और बिना देर किये भीमा ने अपनी दो उंगलिया शोभा की छूट के अंदर दाखिल करदी. और उन्हें तेज़ तेज़ शोभा की छूट में अंदर बहार करने लगा.

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शोभा का तो उत्तेजना और मज़े के मरे बुरा हाल था बेशक वो अपनी छूट में पूरा लुंड ले चुकी थी एक मर्द के साथ सम्भोग कर चुकी थी पर नशे में होने की वजह से वो अनुभव उसके लिए न के बराबर था. पुरे होशो हवास में अपनी छूट पर एक मर्द के स्पर्श का ये उसका प्रथम एहसास था. शोभा के लिए खड़े रहना भी मुश्किल हो रहा था वो बार बार अपने पैरो को मदद कर बैठने की कोशिश कर रही थी पर भीमा पीछे से उसे बैठने नहीं दे रहा था. और मुँह पर हाथ होने की वजह से उसे कुछ बोलने भी नहीं दे रहा था.

अचानक भीमा ने अपनी उंगलिया शोभा की छूट से और उसकी पंतय से बहार खींच ली और शोभा के मुँह से अपना हाथ हटा कर उसे अपनी तरफ घुमा लिया. पर मुँह से हाथ हटने के बाद इससे पहले की शोभा अपने मुँह से कुछ बोल पति उसके होंठ एक बार फिर बंद हो गए.

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और इस बार उसके होंठ बंद होने की वजह भीमा के हाथ नहीं बल्कि उसके होंठ थे. शोभा को अपनी तरफ घुमा उसके कुछ बोलने से पहले भीमा ने अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिए और पागलो की तरह उसके होंठो पर टूट पड़ा. भीमा का ये जंगलीपन देख कर शोभा को भी कही न कही मज़ा आ रहा था, उसे यही लग रहा था की उसके यु तैयार होने की वजह से विक्रम इस हद तक उत्तेजित हो गया है इसलिए वो भी अपने पति का पूरा साथ देने की कोशिश कर रही थी. उसे क्या पता था की उसे चूमने वाला उसका पति नहीं उस हवेली का जमादार भीमा है. दोनों hi एक दुसरे को अपनी बहो में जकड़े हुए थे और बेतहाशा एक दुसरे को होंठो को चूम और चूस रहे थे.

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दोनों के लिए ये उनकी ज़िन्दगी का होशो हवास में लिया गया पहला चुमबन था और दोनों hi इसे तोड़ने को तैयार नहीं थे.

भीमा तो शोभा को चूमते चूमते इस कदर टटिज हो गया की उसने शोभा के कूल्हों के नीच हाथ लेजाकर उसे अपनी गोड़ में उठा लिया. शोभा ने अपने जणू का साथ देते हुए अपनी टांगो को vikram(bheema) की कमर में लपेट लिया. भीमा ने शोभा को अपनी गोड़ में उठा पर उनका चुम्बन अब भी बदस्तूर जारी था.

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पर इस चुम्बन के दौरान शायद शोभा इस कदर कामुकता में डूब चुकी थी की उसे एहसास hi नहीं हुआ की वो जिस मर्द को चूम रही है उसके मुँह में जबान नहीं है, अगर उसे ये एहसास हो जाता तो शायद वो समझ जाती की ये जो उसके सामने है वो उसका पति नहीं है और ये भी समझ जाती की ये जो है वो कौन है क्युकी इस हवेली क्या इस पुरे गाँव में केवल एक hi शिक्षा है जिसके मुँह में जबान नहीं है.

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भीमा neha(shobha) को लेकर अपनी झोपडी की तरफ बड़ा शायद वो नेहा को अपनी झोपडी के अंदर छोड़ना चाहता था पर वह शायद थोड़ी बहुत रौशनी की गुंजाइश थी और रौशनी में एक दुसरे का चेहरा देखने बाद उनकी साडी उत्तेजना काफूर हो जाने वाली थी और शोभा की ये सुहागरात यही ख़तम हो जाने वाली थी पर शायद इसी का नाम संयोग था होनी ने अपना फैसला कर लिया था. बहार हवेली की लाइट चली जाने की वजह से कुछ लोग और नौकर चाकर बहार आ गए थे और वह लाइट सही की जा रही थी ऐसे में झाड़ियों से बहार जाना पॉसिबल नहीं था. इसलिए भीमा ने अपने कदम वापस खींच लिए. और शोभा को लेकर उसी पेड़ की तरफ चल दिया जहा उसकी और नेहा की कहानी शुरू हुई थी जहा उसने पहली बार कल्लू से छूट चतवते हुए देखा था फिर उसे अपनी पंतय उतर कर टांगते हुए देखा था.
 
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भीमा शोभा को लेकर उसी पेड़ के पास आ गया और शोभा की पीठ को उस पेड़ के तने से टिका दिया पर दोनों के होंठ अब भी एक दुसरे से अलग नहीं हुए थे. अगर कही इस स्टोरी के सबसे लम्बे चुम्बन का कोई अवार्ड होता तो निश्चित रूप से ये उन दोनों को मिल जाता. उस पेड़ के करीब पहुंच कर भीमा की उत्तेजना और भी ज्यादा बाद गई और वो पागलो की तरह शोभा के होंठो पर टूट पड़ा उसके इस जंगली किश से शोभा के होंठ दर्द करने लगे थे उनसे हल्का हल्का खून भी निकलने लगा था. पर शोभा भी अपनी बाकि सहेलियों की तरह छुई मुई किस्म की नहीं थी अपने पति के इस जोशीले रूप में उसे भी बड़ा मज़ा आ रहा था और वो vikram(bheema) को रोक कर इस मज़े पर ब्रेक नहीं लगाना चाहती थी.

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भीमा तकरीबन 20 मं से शोभा के होंठो को चूस रहा था शायद इसकी वजाज ये भी थी की जब किसी इंसान को बरसो के इंरेजार के बाद कोई चीज़ मिलती है तो वो उसका पूरा मज़ा उठा लेना चाहता है कुछ वही हालत इस वक़्त भीमा की थी और शोभा इसे अपने कपड़ो की वजह से जगी अपने पति की उत्तेजना समझ रही थी. जबकि भीमा के लिए तो वो बस एक औरत का जिस्म था जिससे वो अपनी हवस की आग ठंडी करना चाहता था.

इतनी देर शोभा के होंठो को चूसने के बाद भीमा अब नीचे की तरफ झुकने लगा और अपने होंठ शोभा के गर्दन पर रख कर उसकी गर्दन को चूमने लगा.

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शोभा की गर्दन को चूमते चूमते उसने अपने हाथ नीचे से शोभा के टॉप के अंदर डालने की कोशिश करने लगा. पर शोभा का टॉप काफी टाइट था जिस वजह से भीमा के लिए अपने हाथ अंदर डालना पॉसिबल नहीं था. पर फिर भी वो अपने हाथ अंदर डालने की जद्दोजहद में लगा था, शायद उसे पता hi नहीं था की इस टॉप की चैन पीठ के पीछे की तरफ होती है वर्ण वो हाथ अंदर डालने की बजाए पहले वो चैन खोलता. शोभा को उसकी उस फ़्रस्टेशन में हल्का हल्का मज़ा भी आ रहा था पर अपनी गर्दन पर उसकी गरम गरम सासो ने उसे उत्तेजित भी कर दिया था और वो खुद ज्यादा डेट इंतज़ार के मूड में नहीं थी इसलिए शोभा ने खुद अपने हाथ पीछे लेजाकर अपने टॉप की चैन को खोल दिया. पीछे से चैन खुलते hi आगे से भी उसके टॉप की कसावट ख़तम हो गई और भीमा ने अपने दोनों हाथ शोभा के टॉप के अंदर दाल कर अपनी हथेली शोभा के स्तनों पर रख दी.

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पर अब भी उसके हाथो और शोभा के स्तनों के बीच एक दीवार थी शोभा की ब्रा की दीवार और भीमा को वो भी बर्दाश्त नहीं हो रही थी वो शायद Neha(shobha) को नंगे स्तनों को अपने हाथो से महसूस करना चाहता था.

भीमा अपने हाथो को शोभा की ब्रा के अंदर डालना छह रहा था पर टॉप की तरफ ब्रा भी बेहद टाइट थी और एक बार शोभा से और ज्यादा इंतज़ार बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने अपने हाथ पीछे लेजाकर अपनी ब्रा का हुक भी खोल दिया. और हुक खुलने के साथ hi भीमा के शोभा की ब्रा के अंदर दाखिल होकर सीधा उसके स्तनों के ऊपर पहुंच गए.

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भीमा अपने हाथो से शोभा के स्तनों को मसल रहा था और अपने होंठो से शोभा की गर्दन को चूमते हुए नीचे की तरफ आ रहा था. नीचे आते आते अब भीमा का सर शोभा के स्तनों के एकदम सामने हुए भीमा ने बिना देर करे अपने हाथो से शोभा के टॉप और ब्रा को ऊपर उठाया और अपने होंठ सीधा शोभा के स्तनों पर रख दिए.

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भीमा अपनी होंठो को शोभा के स्तनों पर गोल गोल घुमा रहा था पर अब भी वो ढंग से उसके स्तनों को चूस नहीं प् रहा था क्युकी बार बार शोभा का टॉप और ब्रा बीच में आ रहे थे जो उसे इर्रिटेट कर रहे थे. और शोभा भी कही न कही इस इर्रिटेशन को समझ रही थी और खुद भी पूरी तरह वासना में उन्माद में डूब चुकी शोभा अब इस पड़ाव पर vikram(bheema) को इर्रिटेट नहीं करना चाहती थी इसलिए उसने खुद से hi अपने टॉप और ब्रा को अपनी गर्दन से निकल कर वही पेड़ के पास ज़मीन पर दाल दिया. शोभा के ऊपरी कपडे पूरी तरह उतारते hi भीमा को जैसे खुली छूट मिल गए और उस हवेली के जमादार ने उस हवेली की नै नवेली दुल्हन के दूध को अपने मुँह में भर लिया.

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शोभा का तो उत्तेजना के मारे बुरा हाल था उत्तेजना में उसने vikram(bheema) के सर को अपने हाथो में भर लिया और उसके सर को ज्यादा से ज्यादा अपने छाती पर दबाने लगी. भीमा भी पुरे जोश में पागलो की तरह इस तरह चूसने लगा जैसे आज hi पहली बार में चूसकर उनसे दूध निकल देगा. जीवन में पहली बार उसे एक औरत के दूध चूसने का मौका मिला था और वो पूरी शिद्दत के साथ इस मौके का फायदा उठा रहा था. और इस शिद्दत की वजह से शोभा के स्तनों पर कई जगह भीमा के दांतो के निशान बन गए थे यानि उसके लव बिट्स.

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पर शोभा खुद से इसके लिए आई थी इसलिए आज उसने तै कर लिया था की वो विक्रम को किसी चीज़ के लिए नहीं रोकेगी यहाँ तक अपने स्तनों को vikram(bheema) से कटवाने में भी उसे एक अलग एक्ससिटेमेंट हो रहा था. Neha(shobha) के स्तनों को अच्छी तरह चूसने के बाद भीमा उसके सामने घुटनो पर बैठ गया और शोभा की नंगी कमर को अपने हाथो में थम लिया और उसे हल्का आगे खींच कर अपने होंठो को शोभा की नाभि पर रख दिया और बेतहाशा पागलो की तरह चूमने लगा. शोभा का तो उत्तेजना के मरे बुरा हाल हो रहा था अपने पेट पर vikram(bheema) की गरम गरम सासे उसे दीवाना कर रही थी वो vikram(bheema) के बालो में अपनी उंगलिया घुमा रही थी.

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शोभा के पेट को चूमते हुए भीमा हलके से उसके पेट को दांत से काट भी लेता जिस वजह से शोभा एक पल चिहुँक पड़ती और भीमा को बालो को कास कर जकड लेती पर फिर उसकका साथ देने लगती. Neha(Shobha) की तरफ से पूरा समर्थन पाकर भीमा ने शोभा की कमर को छोड़ दिया और अपने हाथो से शोभा के तलवो को थम लिया और धीमे धीमे अपने हाथ को सरकते हुए ऊपर की तरफ लेन लगा. उसके हाथ लगातार ऊपर की तरफ आते जा रहे थे उसके घुटनो तक फिर उसकी जांघो तक उसकी मिनी स्कर्ट के अंदर फिर उसकी पंतय तक और फाइनली उसके पंतय के सिरों को दोनों और से पकड़ लिया और आहिस्ता आहिस्ता उस पंतय को नीचे सरकना शुरू कर दिया. शोभा भी इसके लिए तैयार थी उसने vikram(bheema) के कंधो को थम लिया और भीमा ने नीचे सरकते सरकते शोभा की चड्डी को उसके पैरो से खींच कर निकल दिया और वही पेड़ के पास ज़मीन पर फ़ेंक दिया.

अब शोभा के बदन पर कपडे के नाम पर बस एक छोटी सी स्कर्ट थी और उस स्कर्ट के नीचे उसकी छूट भी पूरी तरह नंगी थी. और शोभा भी कही न कही जानती थी की उसकी चड्डी उतरने के बाद अगला हमला उसकी छूट पर hi होने वाला है. और हुआ भी बिलकुल वैसा काफी देर से शोभा का पेट चाट रहे और उसके पेट पर जगह अपने लव बिट्स बना रहे भीमा ने neha(shobha) की स्कर्ट को आगे से उठा दिया और और अपना सर शोभा के पेट से हटाकर सीधा उसकी जांघो के बीच घुसेड़ दिया. और अपनी होंठ सीधा शोभा की चिकनी बिना बालो वाली छूट पर रख दिए.

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बेचारी शोभा ने तो आज अपने पति के लिए अपनी छूट को अच्छे से साफ़ करा था ताकि अपने पति को इम्प्रेस कर सके और वो तो अब भी यही समझ रही की जो शिक्षा को उसकी छूट को देख कर एक्ससिटेड होकर उसे चूम रहा है वो उसका पति hi है जिसके साथ अभी एक हफ्ते पहले hi उसने अग्नि के सात फेरे लिए है उसे तो अंदाज़ा भी नहीं था की जो उसकी छूट को चूम रहा है वो उसका पति नहीं बल्कि इस हवेली में लोगो की टट्टी साफ़ करने वाला एक दो टेक का जमादार है. और न भीमा को ये अंदाज़ा था की वो जिस औरत की छूट चूम रहा है वो इस इलाके के सबसे रसूखदार शिक्षा लखन सिंह की इकलौती नै नवेली बहु है जिसकी अब तक अपने पति के साथ सुहागरात भी नहीं हुई है. अगर उन दोनों को ज़रा भी अंदाजा हो जाता तो वो न होता जो अब होने वाला था और जो उनके जीवन की दशा और दिशा बदल देने वाला था.
 
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उस हवेली का जमादार भीमा उस हवेली की मालकिन और एक नै नवेली दुल्हन शोभा की जांघो के बीच अपना सर घुसेड़े बैठा था और अपने जीवन की पहली छूट को बड़ी बदहवासी से चूम रहा था क्युकी चाटने के लिए उस बेचारे के पास जबान तो थी hi नहीं. और शोभा उसकी तो ये जीवन की पहली छूट चटाई थी उस रात में नशे की हालत में मलखान सिंह ने अपनी बेटी के साथ सब कुछ कर डाला था यहाँ तक की उसका कुंवारापन भी ख़तम करके उसकी खोख को अपने बीज से भर दिया था पर शायद नशे में चुदाई की जल्दबाज़ी में उसकी छूट को छठा नहीं था और अगर छठा भी होता तो नशे की वजह से शोभा को कुछ याद न होता इसलिए शोभा के लिए तो तब भी ये फर्स्ट टाइम एक्सपीरियंस hi होता. पर यहाँ भी भीमा की जीभ न होने की वजह से वो उसे छूट के अंदर जीभ दाखिल होने का सुख नहीं दे सकता था.

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पर फिर भी भीमा की होती की hi हर हरकत शोभा से पुरे बदन में करंट की लेहेर सी दौड़ जाती, कामुकता के मरे उसका बुरा हाल हो रहा था और इसी कामुकता में शोभा ने अपने बदन पर बचे उस आखिरी कपडे उस मिनी स्कर्ट की चैन को भी खोल दिया और उसे भी वही ज़मीन पर दाल दिया और अपनी जांघो को कास कर भींच लिया जिस वजह से भीमा का सर उसकी जांघो के भींच फस गया. शायद शोभा ने ये जानबूझ कर करा था क्युकी वो vikram(bheema) के होंठो को अपनी छूट से अलग नहीं होने देना चाहती थी. अब उस हवेली की मालकिन पूरी तरह नंगी कड़ी होकर उस सन्नाटे में अपनी छूट चटवा रही थी इस धोके में उसकी छूट को चूमने वाला उसके पति है.

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Neha(shobha) के यु अपनी जांघो को कास लेने से भीमा का चेहरा उसकी छूट के बेहद करीब आ गया इतना करीब की उसकी नाक तक शोभा की छूट की दरार में रगड़ खा रही थी और शोभा की छूट से आती आती भीनी भीनी मादक सी खुशबू उसकी हवस की आग को और हवा दे रही थी. और भीमा ने शोभा के पीछे हाथ लेजाकर उसके चूतड़ों को अपने हाथो में थम लिया और बेतहाशा शोभा की छूट पर चुम्बन की बौछार करदी. अपनी छूट पर Vikram(bheema) की गरम गरम सासे शोभा को दीवाना कर रही थी उसके पेअर लड़खड़ा रहे थे वो तो भीमा ने उसे अपनी गिरफ्त में ले रखा था वर्ण शायद शोभा लड़खड़ा कर गिर hi जाती. जीवन में पहली बार शोभा अपनी जांघो के बीच किसी मर्द की सासो की गर्माहट महसूस कर रही थी और उसकी छूट ज्यादा देर तक ये गर्मी बर्दाश्त न कर पाई और उसके अंदर से लीकेज शुरू हो गई या खुले शब्दों में कहे तो वो अपने चरमसुख पर पहुंच गई और उसमे चरमसुख का प्रसाद बहना शुरू हो गया जो सीधा भीमा के मुँह के अंदर समां रहा था क्युकी शोभा के ओर्गास्म के बाद भी भीमा ने वह से अपने होंठो को नहीं हटाया था.

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ओर्गास्म के बाद शोभा ने अपना पूरा भर भीमा के कंधो पर दाल दिया उसकी टांगो में खड़ा रहने की भी ताकत नहीं रह गई थी. भीमा के कंधो का सहारा लेकर किसी तरह कड़ी शोभा की सासे तेज़ तेज़ चल रही थी शायद ये ये मर्द के स्पर्श से होशो हवस में हुए अपने प्रथम ओर्गास्म का प्रभाव था. जब तक शोभा की छूट की से कामरुस की आखिरी बूँद भी नहीं निकल गई भीमा ने अपने होंठ वह से नहीं हटाए. और उसके बाद भीमा खुद उठकर खड़ा हो गया पर शोभा में अब भी खड़े रहने की ताकत न थी इसलिए वो वही वही पेड़ के नीचे घुटनो के बल बैठ गई. वह अब भी घनघोर अँधेरा था कुछ दिखाई नहीं दे रहा था बस परछाई देखकर अनुमान लगाया जा सकता था और यही अनुमान उन दोनों की ग़लतफहमी की वजह बना था. शोभा वह घुटनो पर बैठी हाफ रही थी और भीमा अब भी उस छूट की मादक सुगंध के नशे में मदमस्त सा खड़ा था. पर भीमा आज इतने पर hi रुकने वाला नहीं था बरसो के इंतज़ार के बाद तो उसे आज औरत का जिस्म मिला था भोगने को इसलिए वो आज अपने अंदर दबी हवस की हर इच्छा पूरी कर लेना चाहता था.

और इसीलिए भीमा ने अपनी जिस्म का वो एकमात्र कपडा अपनी कमर के नीचे बंधी लुंगी की गाँठ खोल दी. गाँठ खुलते hi वो लुंगी सरक कर नीचे जा गिरी और उस गाँव के सबसे हट्टे काटते मर्दो में से एक वो जमादार भीमा अब उस काली अँधेरी रात में उन घने पेड़ो के बीच मादरजात पूरी तरह नंगा खड़ा था.

अपने अंदर लगी हवस की आग की वजह से उसका लुंड पूरी तरह तन कर बम्बू बन गया था और एकदम कड़ी मुद्रा में सामने बैठी शोभा की तरफ अपना फन उठाए फुफकार रहा था. और भीमा भी अपने पैरो में गिरी अपनी hi लुंगली को अपने पैरो टेल रौंदता हुआ अपने लुंड द्वारा दिखाई जा रही दिशा यानि शोभा की तरफ उसके ेकडूक करीब उसके चेहरे के एकदम सामने आकर खड़ा हो गया. शोभा तो यहाँ अपने पति और इस गाँव के जमींदार के साथ सुहागरात मानाने के इरादे से आई थी और अब जमींदार नहीं बल्कि इस गाँव का जमादार उसके सामने पूरी तरह नंगा अपना लुंड ताने खड़ा था.

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भीमा ने अपने लुंड को अपने एक हाथ में ले लिया और दुसरे हाथ से neha(shobha) के चेहरे को ऊपर उठाया और अपना लुंड उसके चेहरे पर यहाँ वह छुआने लगा कभी उसके गालो पर तो कभी उसकी आँखों पर कभी नाक पर और फाइनली अपना लुंड उसके होंठो पर लेकर रख दिया.

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बेशक शोभा विक्रम को दिलोजान से चाहती थी और उसे हर तरह से हर कीमत पर पाना चाहती थी पर साथ hi वो एक जमींदार की बेटी भी थी और एक बोल्ड लड़की थी और इस तरह किसी मर्द का लुंड चूसना उसकी डिग्निटी के खिलाफ था और वो इसके लिए कटाई तैयार नहीं थी. इसलिए अपने होंठो पर हुए लुंड के एहसास ने उसकी साडी थकावट को दूर कर दिया और उसे समझ आ गया की विक्रम उससे क्या चाहता है पर वो इसके लिए तैयार नहीं थी इसलिए उसने एक झटके में अपना मुँह फेर लिया.

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पर भीमा इसके लिए तैयार नहीं था, बरसो से अपने hi गाँव की औरतो को तिरस्कार उनकी घृणा भरी नज़रो ने उसके अंदर के इंसान को मार दिया था. ऐसे में आज जब एक औरत खुद से अपनी मर्ज़ी से उसके सामने घुटनो पर थी तो उसके अंदर का जानवर बहार आ गया था. वो एक औरत से लुंड चुसवाने की अपनी ये इच्छा भी पूरी कर लेना चाहता था पता नहीं दुबारा मौका मिले न मिले.

इसलिए भीमा ने शोभा को मुँह कास कर पकड़ा और पूरी ताकत के साथ उसे दुबारा से अपनी तरफ घुमा diya.Aur अपनी तरफ चेहरा घुमाकर उसने शोभा के गालो पर अपने हाथो का दबाव डाला जिस वजह से शोभा के होंठ हलके से खुल गए. और भीमा ने दुबारा से अपना लुंड शोभा के होंठो से सताया और पूरा ज़ोर लगते हुए अपना लुंड शोभा के मुँह के अंदर दाखिल कर दिया.

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शोभा ने अपने चेहरे को इधर उधर करने की भरसक कोशिश की पर भीमा के पकड़ इतनी ज्यादा थी की शोभा लाख कोशिश के बाद भी उसे हटा नहीं पाई. और भीमा का लुंड आधे से ज्यादा शोभा के मुँह के अंदर चला गया. शोभा जो खुद को बहुत बोल्ड और स्ट्रांग महिला समझती थी उसे भी आज एक मर्द की ताकत का एहसास हो गया की औरत चाहे कितनी भी बोल्ड और स्ट्रांग बन ले उसे मर्द के नीचे आना hi पड़ता है. और आज न चाहते हुए भी एक मर्द भले hi वो उसका पति hi हो का लुंड जहा से वो मोटा है उस गंदे लुंड को अपने मुँह में लेने को मजबूर होना पड़ा. शोभा को अंदर से उबकाई सी आ रही थी वो vikram(bheema) को पीछे धकेलने के लिए पूरा ज़ोर लगा रही थी पर भीमा के अंदर तो जैसे जानवर सा जाग गया था उसने शोभा के चेहरे को इतनी मज़बूती से पकड़ रखा था को शोभा पूरी तरह बेबस थी.

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शोभा की मुँह की गरमाहट भीमा के लुंड को और भी ज़ादा गरम कर रही थी उसकी नसों में खून का दौडान बाद गया था लुंड का अकार उसके मुँह में और बाद गया था. शोभा भीमा को पीछे धकेलने और उसका लुंड अपने मुँह से निकलने का भरपूर प्रयास कर रही थी पर भीमा तो बरसो बाद एक औरत नसीड हुई आज वो हर तरह से उअका मज़ा उठा लेना चाहता था अपनी हर इच्छा पूरी कर लेना चाहता था. शोभा के मुँह की गर्मी भीमा को हद से ज्यादा उत्तेजित कर दिया था और इसी उत्तेजना में भीमा ने अपने लुंड से शोभा को मुँह को छोड़ना शुरू कर दिया. भीमा ने पूरी ज़िन्दगी गाँव की औरतो का तिरस्कार hi देखा था जिसने उसके दिल में बहुत आग भर दी थी और गलती से आज शोभा उसके हत्थे चढ़ गई थी और उस आग की साडी गर्मी आज शोभा को झेलनी पद रही थी. भीमा ने अपने लुंड को पूरी ताकत से शोभा के मुँह में अंदर बहार करना शुरू कर दिया. शोभा विक्रम का जंगली रूप देख कर हैरान थी उसे यकीन नहीं हो रहा था की विक्रम उसे देख कर इस कड़ा उत्तेजित हो गया की उसके मुँह को इस तरह छोड़ रहा है. दूसरी तरफ भीमा को भी कहा पता था की वो जिस औरत के साथ इतना जंगलीपन कर रहा है वो कौन है अगर उसे हल्का भी अंदाज़ा होता तो उसकी ये सब करने की हिम्मत न होती.

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भीमा अपनी कमर को तेज़ तेज़ आगे पीछे करके अपने लुंड को शोभा के मुँह पूरा अंदर तक दाल रहा था. शोभा को गुस्सा तो बहुत आ रहा था उसका मन तो कर रहा था की उसके लुंड में कसकर काट ले पर इसी लुंड के साथ उसे पूरी ज़िन्दगी बितानी है, इसी के वीर्य से माँ बनना है तो इसे घायल करने में उसीका नुक्सान है इसलिए वो ये भी नहीं कर सकती थी. शोभा का गाला चौक हो गया था उसकी नाक से पानी निकलने लगा था वो भीमा के पेट में तेज़ तेज़ घुसे मार रही थी पर भीमा तो आज पूरी तरह जानवर बन गया था उसी शोभा की तड़प से कोई मतलब नहीं था या शायद ये उसका पहल सेक्स था इसलिए उसे अंदाज़ा hi नहीं था की उसकी हरकते सामने बैठी औरत पर क्या असर दाल रही होगी और अँधेरे की वजह से उसे कुछ दिख रहा नहीं था इसलिए वो तो शोभा के घूसों को भी उसकी उत्तेजना hi समझ रहा था.
 
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भीमा का लुंड शोभा के हलक में पूरा अंदर तक जा रहा था शोभा को इतना तो अंदाज़ा हो गया था की उसका पति एक भरपूर ताकतवर मर्द है और एक तगड़े लुंड का मालिक है. इसलिए कही न कही उसे इस बात की ख़ुशी भी थी की उसकी सेक्स लाइफ ज़बरदस्त होने वाली है बस दिक्कत थी तो बस उसके इस जंगली रवैये की जिसने फिलहाल उसकी हालत ख़राब कर राखी थी. उसे अब लग रहा था की अगर उसने शुरू में उसके लुंड मुँह में डालने का विरोध न करा होता और एक अच्छी पत्नी की तरह उसके लुंड को खुद से प्यार करा होता उसे अच्छे से जीभे से छठा होता खुद से मुँह में लिया होता तो शायद उसे ये जंगलीपन न झेलना पड़ता. पर फिलहाल तो अब कुछ नहीं हो सकता था पर आगे से वो इस बात का ध्यान रखेगी विक्रम को कन्विंस करेगी की वो उसके मुँह में लुंड न डेल पर अगर वो नहीं मन तो खुद से उसका लुंड अपने मुँह में लेगी ताकि उसे ये ज़बरदस्ती करने का मौका न मिले. भीमा को शोभा का मुँह छोड़ते हुए 10 मं से ज्यादा हो गया था शोभा के जबड़े तक दर्द करने लगे थे.

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भीमा का लुंड अब पूरी तरह अपने उग्र रूप में आ चूका था और झड़ने के बेहद करीब था शोभा को इसका अंदाज़ा हो गया था की ये लुंड किसी भी पल वीर्य उगलना शुरू कर सकता है और वो किसी भी कीमत पर वीर्य अपने मुँह में नहीं लेना चाहती थी. भीमा को भी ये अंदाज़ा हो गया था की वो झड़ने के करीब है और ये एक औरत के साथ उसका पहला स्खलन होगा और स्खलन के बाद उसका लुंड में वो जोश नहीं रह जाएगा जो इस वक़्त है और वो तो आज एक औरत की छूट में पुरे जोश के साथ दाखिल होने को ललित था इसलिए वो भी अपना ये पहला वीर्य उसके मुँह के अंदर नहीं निकलना चाहता था बल्कि वो अपना पहला स्खलन उसकी छूट के अंदर करना चाहता था. इसलिए उसने भी neha(shobha) के चेहरे पर अपनी पकड़ ढीली कर दी. भीमा की पकड़ ढीली होते hi शोभा ने पूरा ज़ोर लगा कर भीमा को पीछे धकेल दिया और मुँह से थूकती हुई पीछे हैट गई. भीमा के ज़बरदस्त मुख मैथुन ने शोभा की हालत ख़राब करदी थी वो तेज़ तेज़ सासे भर रही थी. उसके मुँह के शब्द भी नहीं बोलै जा रहा था अगर बोल देती तो शायद ये ग़लतफहमी यही दूर हो जाती और भीमा को पता चल जाता उसके सामने नेहा नहीं है. भीमा को शोभा की सासो की और थूकने खस्ने की आवाज़े आ रही थी पर वो खुद अपने लुंड को थोड़ा शांत कर रहा था ताकि जो वो झड़ने के करीब पहुंच गया था वो थोड़ा शांत हो जाए और छूट में दाखिल होते hi तुरंत न झाड़ जाए क्युकी वो अपनी इस पहली चुदाई का पूरा मज़ा उठाना चाहता था और नहीं चाहता था की छूट में दाखिल होते hi उसका लुंड अपने हथियार दाल दे.

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करीब 5-10 मं भीमा और शोभक दोनों अपने आप को संयत करने में लगे रहे इन चाँद मिनटों में शोभा की सासे थोड़ा नार्मल हो गई थी वही भीमा का लुंड का अकार भी थोड़ा कम हो गया था और जो वीर्य उसके लुंड की धमनियों में आगे तक आ गया था और निकलने के बेहद करीब था वो अब थोड़ा पीछे चला गया था. भीमा अब औरत की छूट के अंदर अपना लुंड दाखिल करने को बेताब था बरसो से एक औरत के सम्भोग करने की जो इच्छा उसके मन में दबी थी वो आज अपनी मंज़िल पाने को बेताब थी, अब तक तो वो नेहा की चड्डी को अपने लुंड पर रगड़ रगड़ कर उस चड्डी को hi उसकी छूट इमेजिन करके अपने बदन की गर्मी शांत कर लेता था पर आज फाइनली वो लम्हा आ गया था जब उसे अपने लुंड की नसों पर एक असली ायरत की छूट की चिकनाहट का एहसास मिलने वाला था उसे एक औरत की कोख को अपने बीज से भरने का मौका मिलने वाला था.

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वही लुंड को मुँह में डलवाने से शोभा ज़रूर थोड़ा विचलित हो गई थी पर वो भी जानती थी की वो यहाँ जिस काम के लिए आई है अपने पुरे होशो हवास में अपनी पहली चुदाई के लिए वो लम्हा अब नज़दीक है किसी भी पल उसका पति आकर उसकी छूट में अपना लुंड दाल देगा. जिस मूसल लुंड ने अब तक उसके मुँह को छोड़ छोड़ कर उसकी हालत ख़राब कर दी थी उसके जबड़ो में दर्द कर दिया था वो जब उसकी छूट में दाखिल होगा तो कैसा लगेगा उसे कितना दर्द होगा. हलाकि वो पहले भी ये लुंड अपने अंदर ले चुकी है पर उस वक़्त वो नशे में थी और नशे की वजह से शायद उसे दर्द का एहसास hi न हुआ हो पर अब जब पुरे होशो हवस में ये इतना बड़ा लुंड उसके अंदर जाएगा तो उसकी छूट का क्या हाल होगा. उसने अपने हाथ नीचे ले जाकर अपनी छूट की फैंको को छू कर देखा जो बेहद टाइट थी. बेशक वो एक बार छुड़वा चुकी थी पर एक बार में छुड़वा लेने से छूट की तिघटनेस ख़तम नहीं हो जाती वो अब भी काफी टाइट थी और यही तिघटनेस उसे होने वाले दर्द का एहसास करा रही थी. पर फिर भी ये दर्द तो बड़ा मीठा लगता है हर औरत इस दर्द को सहने को बेताब थी. उसे अफ़सोस था की उसका पहला मिलान उसे याद hi नहीं था पर आज इस पुनः मिलान को वो यादगार बनाना चाहती थी इसके हर लम्हे को जी भर कर जी लेना चाहती थी हर दर्द को भी मज़े लेकर सहना चाहती थी.

भीमा और शोभा दोनों अपने अपने करने से चुदाई के लिए पूरी तरह तैयार थे. भीमा नेहा की छूट को अपने बीज से भरने को तैयार था तो शोभा अपने पति विक्रम के साथ सम्भोग कर उसके वीर्य को अपनी छूट में लेकर उसके बच्चे की माँ बनने को तैयार थी. उन दोनों को hi अंदाजा नहीं था की वो क्या करने जा रहे है.

अपने लुंड को थोड़ा शांत करके भीमा दुबारा ज़मीन पर अपनी साँसों को संयत करती neha(shobha) की तरफ बड़ा और बिना किसी सिग्नल के सीधा शोभा के चेहरे पर अपना खुदरा हाथ रखकर सीधा उसे धक्का देकर ज़मीन पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़कर लेट गया.

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शोभा को अपनी नंगी पीठ के नीचे और कूल्हों के नीचे वह की सूखी घास और थोड़े बहुत कांटो का भी एहसास हो रहा था. वो घास की तिनके काटो की तरह उसकी पीठ और कूल्हों में चुभ रहर थे पर वो बेचारी हिल भी नहीं सकती थी क्युकी एक भरी भरकम शरीर उसके ऊपर लेता था. शोभा के मुँह से अलफ़ाज़ निकलने को हुए भर थे की भीमा ने उसके होंठो को अपने होंठो से बंद कर दिया. भीमा का हत्ता कट्टा कला नंगा बदन के नीच शोभा के गोर नंगा बदन पूरी तरह धक् सा गया था. ऊपर भीमा के होंठो ने शोभा के होंठो को बंद कर उसके अल्फाज़ो के निकलने का रास्ता hi बंद कर दिया और नीचे उसका झटके पे झटके खा रहा लुंड शोभा के निचले होंठ यानि उसकी छूट पर रगड़ रगड़ कर एक बार फिर छूट के स्पर्श मात्रा से बढ़ना शुरू हो गया था. और झटके पे झटके खाए जा रहा था जैसे उस छूट में घुसने का रास्ता तलाश रहा हो.

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भीमा शोभा के होरहो को चूमते हुए अपनी कमर को हिला कर उसी पोजीशन में शोभा के ऊपर लेते हुए शोभा की छूट में दाखिल होने का रास्ता तलाश रहा था, नीचे से शोभा भी अपनी टांगो को फैला कर अपनी छूट को चौड़ा करने की कोशिश कर रही थी ताकि vikram(bheema) आसानी से उसके अंदर दाखिल हो सके. पर शोभा की छूट की तिघटनेस और भीमा का पहली बार होने की वजह से इनएक्सपेरिएन्स शायद भीमा को उसके अंदर दाखिल होने से रोक रहा था. काफी देर भीमा ऊपर से और शोभा नीचे से अपने प्रयासों में लगे रहे पर सफल नहीं हो सके. कामयाब न होने पर भीमा शोभा के ऊपर से सरक कर उसकी टांगो के बीच आकर बैठ गया. शोभा ने भी अपनी टांगो को अपने पति के लिए पूरी तरह खोल दिया.

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भीमा ने अपना लुंड शोभा की छूट पर रखा जो अपने चरमसुख के बाद काफी गीली हो गई थी पर अब भी काफी टाइट थी शायद शोभा के हद से ज्यादा एक्ससिटेड होने की वजह से. वही भीमा का लुंड भी तन कर पूरी तरह हार्ड हो चूका था उसकी एक एक नस साफ़ ऊपर उभर आई थी. पर ये भी उसका वो रूप नहीं था जो कुछ देर पहले था यानि इसमें अभी और उफान आना बाकि था.

शोभा ने अपने जबड़ो को भींच लिया जैसे वो पूरी तरह जानती थी की अब अगले पल क्या होने वाला एक मूसल लुंड उसकी छूट में दाखिल होने वाला है. और हुआ भी वैसा hi भीमा ने बिना शोभा की छूट में अपना लुंड का टोपा फसाए सीधा धक्का आगे की तरफ मारा. और वही हुआ जो एक बेहद टाइट छूट के सामने इस कंडीशन में होता है भीमा का लुंड ऊपर सिरक गया. पहली बार की चुदाई की वजह से भीमा को पता hi नहीं था की इस तरह की टाइट छूट में एक धक्के में लुंड डालने के लिए पहले लुंड का टोपा उसके अंदर फसाना ज़रूरी होता है. पर शोभा की छूट की तिघटनेस और भीमा के इनएक्सपेरिएन्स की वजह से भीमा यहाँ भी अपना लुंड दाखिल नहीं कर प् रहा था. अपनी पहली चुदाई को बेताब भीमा को अब हल्का हल्का फ़्रस्ट्रेशन भी हो रहा था और गुस्सा भी आ रहा था. और इसी गुस्से और फ़्रस्ट्रेशन में अपनी खिसियाहट उतरने के लिए hi सही भीमा ने शोभा के दोनों पैरो को घुटने से मोड़ कर उसके काढ़ो तक ऊपर कर दिया.

बेशक ये उसने अपनी फ़्रस्ट्रेशन में करा पर इस पोजीशन में शोभा की जांगजो के बीच पड़े खिचाव की वजह से उसकी छूट का छेड़ पूरी तरह खुल कर चौड़ा हो गया. भीमा एक बार फिर सरक कर आगे आ गया और अपना पूरा भर शोभा के मुड़े हुए पैरो पर दाल दिया और एक बार फिर अपना तना हुआ शोभा की छूट के मुहाने पर रखा और अपनी फ़्रस्ट्रेशन और खीज निकलते हुए अपनी पूरी ताकत से एक इतना ज़ोरदार धक्का आगे को मारा की इस बार एक hi धक्के में उसका तीन चौथाई से ज्यादा लुंड शोभा की छूट को अंदर तक चीरता हुआ छूट में समां गया.

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जब एक मूसल लुंड इस तरह एक नै नवेली छूट में इतने जंगली तरह से उतरता है तो दर्द की कोई सीमा नहीं रहती. शोभा के मुँह से चीख निकल hi पाई की भीमा की मजबूत हथेलियों ने उसके मुँह को बंद कर दिया और उसके चीख उसके मुँह में hi घुट कर रह गई. पर भीमा ने उसके मुँह को तो बंद कर दिया था पर उसकी आँखे अब भी खुली थी और उनसे बहकर आते आंसू शोभा को हो रहे दर्द का बिना आवाज़ के चीख चीख कर सबूत दे रहर थे. शोभा को ये तो पता था की पहली चुदाई में दर्द होता है क्युकी लड़की की सील टूटी है. पर उसकी सील तो टूट चुकी थी और उस वक़्त नशे की हालत में उसे कितना दर्द हुआ होगा इसका उसे अंदाज़ा नहीं था इसलिए उसने सोचा था की इस बार उतना दर्द नहीं होगा. पर ये दर्द तो शोभा जैसी स्ट्रांग महिला के लिए भी उसकी बर्दाश्त से बहार था. पर पहली बार वो एक 56-57 साल के बुड्ढे का लुंड था जो कितना भी तगड़ा हो एक जवान मर्द के लुंड की बराबरी नहीं कर सकता ऊपर से वो जवान मर्द अगर भीमा जैसा हो जिसका लुंड एक नार्मल जवान हट्टे काटते मर्द से भी 21 हो तो उस दर्द को शबदो में बयां नहीं किया जा सकता. और जब भी वो मर्द जिंदगी भर औरतो का तिरस्कार झेलता आया हो तो उसके धक्को का जोश और भी बाद जाता है. और यही जोश इस वक़्त भीमा के धक्को में था. भीमा ने एक और ज़ोरदार धक्का आगे को मारा और उसका लुंड शोभा की दीवारों को पूरी तरह चीरता हुआ उसकी छूट आखिरी हिस्से तक पहुंच गया जहा उसकी बच्चेदानी थी.

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दर्द के मारे शोभा का चेहरा सुर्ख लाल पद गया था और उसे अपनी छूट में कुछ गीला गीला गरम गरम गरम सा भी महसूस हो रहा था पर भीमा के अंदर जैसे जानवर सवार था उसे इस वक़्त अपने लुंड की गर्मी को शांत करने के सिवा कुछ समझ नहीं आ रहा था. शोभा की छूट में पूरी तरह दाखिल होने के बाद भीमा ने जब अपने लुंड को आधे से ज्यादा बहार निकला तो पूरी तरह लाल था यानि उसकी गधे जैसे लुंड ने उस नै नवेली दुल्हन की छूट को उस हद तक चीयर दिया था की कौमार्य भांग होने के बावजूद उसमे से खून ंजकल आया था पर पर अँधेरे में न शोभा को इसका एहसास हुआ न भीमा को.

और भीमा ने एक जंगली बैल की तरह ज़ोर ज़ोर से धक्के पे धक्के मारना शुरू कर दिया उसने पल भर को शोभा के होंठो से अपनी हथेलिया हटाई पर इससे पहले की शोभा कुछ कहती उसने अपने होंठो से उसके होंठो को बंद कर दिया.

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शोभा की टांगो को ऊपर की तरह मोड हुए भीमा उसकी छूट में ताबड़तोड़ धक्के लगाए जा रहा था शोभा का दर्द उसकी बर्दाश्त से बहार था और इसी दर्द में शोभा ने भीमा ककी पीठ को दोनों हथेलियों से पकड़ लिया और अपनी दसो उंगलियों के नाखून भीमा की पीठ में गदा दिए.

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शोभा ने इस दर्द के आवेश में भीमा की पीठ को अपने नाखूनों से छलनी कर दिया पर उसकी इन खरोचों का भी भीमा के धक्को पर रत्ती भर भी असर नहीं पड़ा. जितना शोभा उसे दर्द दे रही उतनी hi उसके धक्को की तेज़ी बढ़ती जा रही थी.

भीमा अपने लुंड आधे से ज्यादा बहार लता और एक तेज़ धक्के के साथ उसे शोभा की छूट के आखिरी छोर तक उतार देता. भीमा के हर दकके पर शोभा की जान हलक तक आ जाती. जितना जंगलीपन भीमा के धक्को में था उतना hi जंगलीपन उसकी किश में था. शोभा ने सपने में भी नहीं सोचा था की विक्रम उसे इस तरह जानवरो की तरह छोड़ सकता है.

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पर vikram(bheema) की इस जंगली चुदाई से शोभा को ये

ख्याल आया की शायद विक्रम नेहा की तरफ कुछ ज्यादा hi अट्रैक्ट था और इस वक़्त मुझे इन कपड़ो में नेहा के रूप िंगने करके hi छोड़ रहा है इसलिए इस तरह पागलो की तरह छोड़ रहा है. भीमा का लुंड शोभा की छूट की दीवारों से रगड़ खता हुआ अंदर तक जा रहा था और इन रगड़ो ने उसके लुंड में खून का दौडान और भी ज़ादा तेज़ कर दिया ऊपर से शोभा की छूट की गरमहात. जिस वजह अंदर रगड़ते रगड़ते hi भीमा का लुंड दुबारा से अपने विकराल रूप में आ चूका था और शोभा की पूरी तरह फस कर आगे पीछे हो रहा था.

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शोभा की छूट में धक्के लगते हुए भीमा को दस मिनट से भी ज्यादा हो गया था अब तक शोभा का दर्द भी थोड़ा कम हो गया था. और अब उस लुंड का हर धक्का उसे अलग hi रोमांच का अनुभव करा रहा था. उसे समझ आ गया था की उसे जितना दर्द झेलना था वो झेल लिया अब मज़ा लेने का टाइम आ गया है. जिस लुंड के विशाल आकर ने कुचब मिनट पहले उसकी हालत इस हद तक ख़राब करदी थी की उसने अपने पति की पीठ को लहूलुहान कर दिया अब उस लाऊड का वही विशाल आकर उसे अलग की प्राउड की फीलिंग करा रहा था. उसे गर्व हो रहा था की उसका पति एक इतने ज़बरदस्त लुंड का मालिक है जो किसी भी औरत को पूरी तरह संतुष्ट कर सकता है. और साथ hi अपने पति के स्टैमिना पर भी नाज़ हो रहा था की इतनी देर से धक्के लगाने के बावजूद वो झाड़ा नहीं. पहले जिन धक्को से उसे दर्द हो रहा था अब जब भी भीमा का लुंड उसकी छूट की दीवारों में रगड़ खता हुआ अंदर तक जाता उसकी सिसकारी निकल जाती. भीमा के धक्को में शोभा को उत्तेजना के चरमबिंदु पर पंहुचा दिया था और कुछ यही हाल भीमा का भी था उसका लुंड भी अपना संपूर्ण आकर ले चूका था उसके लुंड की एक एक नस पूरी तरह उभर कर ऊपर आ गई थी. जो वीर्य पहले पीछे चला गया था वो एक दुगनी मात्रा में उसके लुंड की धमनियों में उतर आया था.

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शोभा ने भीमा को कास कर अपनी बहो में जकड लिया और उसके चेहरे को बेतहाशा अपनी जीभ से चाटने लगी. और कुछ hi लम्हो में भीमा के धक्को के सामने शोभा ने अपने हथियार दाल दिए. भीमा को अपने लुंड पर कुछ गीला गीला चिपचिपा सा महसूस हो रहा था अचानक से शोभा की छूट अंदर से काफी चिकनी हो गई थी जिस वजह से से उसका लुंड अब ज्यादा तेज़ी और आसानी से फिसलता हुआ उसके अंदर बहार हो रहा था. जिस वजह से उसके धक्को की स्पीड और बाद गई थी. ऐसे hi 10-12 धक्को के बाद भीमा के लुंड की धामियो में भरा वीर्य भी बहार आना शुरू हो गया. अपने लुंड के इस स्खलन के शुरू होते hi भीमा ने अपना पूरा भर neha(shobha) की पैरो पर छोड़ दिया और अपना लुंड शोभा की छूट में पूरा अंदर तक पैवस्त कर दिया ताकि उसके वीर्य का कटरा कटरा उसकी छूट की गहराई तक चला जाए. बरसो से जो वीर्य उस जमादार ने किसी औरत के लिए संभल कर रखा था वो फाइनली उस हौले की नै नवेली दुल्हन की कूख को अपने बीज से भर रहा था. पहले इस जंगली चुदाई ने ज़रूर शोभा को परेशान करा पर अब अपनी कोख में उस गरम गरम गाड़े गाड़े गाड़े वीर्य ने उसके सारे दर्द पर मरहम का काम कर दिया था. उसने बड़े प्यार से भीमा के गाल को चूम लिया.

शोभा खुश थी की उसे इतनी ज़बरदस्त तरह से छोड़ने वाला पति माला और आज दुबारा उसने उसकी कोख को अपने वीर्य से सारभूत कर दिया. शोभा को अपने कोख में उस गाड़े गाड़े गरम वीर्ये की मौजूदगी का साफ़ एहसास हो रहा था और ये भी पता चल रहा था की उस लुंड ने उसकी कोख में कितना ज्यादा वीर्य निकला है. शोभा को तो अंदाज़ा भी नहीं था की वो जिसे अपने पति का वीर्य का समझ कर इतना संतुष्ट और खुश फील कर रही है वो उसके पति का नहीं बल्कि एक नीची जाट के दो टेक जमादार का है. उस हवेली के जमादार ने उस हवेली नै नवेली दुल्हन की कोख को अपने वीर्य से भर दिया था. भीमा और शोभा दोनों एक दुसरे को अपनी बहो में जकड़े वही उन झाड़ियों के बीच ज़मीन पर लेते थे अब इस भरपूर चुदाई के बाद शोभा को अपनी पीठ और कूल्हों पर चुबने वाले तिनको का एहसास भी नहीं हो रहा था. झड़ने के बाद भी भीमा अपना लुंड शोभा की चीत में डेल रहा और धीमे धीमा धक्के लगता रहा जब तक उसकी लुंड ने वीर्य की आखिरी बूँद भी शोभा की छूट में खली नहीं करदी. पूरा वीर्य निकल जाने के बाद भीमा का लुंड खुद बा खुद सिकुड़ कर बहार आ गया और भीमा भी शोभा के ऊपर से हैट कर उसके बगल में आकर लेट गया पर ऊपर से हटने के बाद भी वो शोभा को अपनी बहो में जकड़े था. शोभा की छूट में इतना ज्यादा वीर्य भर गया था की वो शोभा की छूट से बहकर बहार आ रहा था पर उस वीर्य का रंग सफ़ेद के साथ हल्का लाल भी था शायद ये वो खून था जो भीमा की ज़बरदस्त चुदाई की वजह से शोभा की छूट से निकला था.

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वो दोनों काफी देर तक एक दुसरे को अपनी बहो में जकड़े लेते रहे. इस ज़बरदस्त चुदाई के बाद शोभा बुरी तरह थक चुकी थी पर शोभा को यहाँ आए दो घंटे से ज्यादा हो चुके थे तो इस वक़्त रात के तीन बज रहे होंगे चार पांच बजे से हवेली में चला पहल शुरू हो जाती है तब इन कपड़ो में उसका वापस जाना बहुत रिस्की था कोई भी उसे इन कपड़ो में देख सकता था और ऐसे में लोग तरह तरह की बाते बनाते उसके चरित्र पर सवाल उठाते. भले hi वो अपने पति से मिलने आई और साडी रात उसके साथ बीते पर पूजा की शर्तो के अनुसार उनके सम्बन्ध बनाने पर पाबन्दी थी फिर उन्होंने एक नहीं दो बार आपस में सम्बन्ध बना लिए. ऐसे में अगर ये बात लोगो को पता लगती तो वो शोभा को hi ब्लामे करते इसलिए दुनिया की नज़र से बचने के लिए शोभा का अभी लौटना hi सही था. यही सोचकर शोभा उठने को हुई पर भीमा तो उसे छोड़ने को तैयार hi नहीं था. फाइनली शोभा अपने होंठ भीमा के कान के पास लाइ और पहली बार उसके कान में फुसफुसा कर बोलै.

शोभा: जाने दो न अब इतना सब कर लिया अब भी मन नहीं भरा.

भीमा ने कभी शोभा से बात नहीं करि थी ऐसे में वो उसकी आवाज़ नहीं पहचानता था और उसने कहा भी फुसफुसा कर तो फुसफुसाहट से किसी की आवाज़ का अंदाज़ा लग्न नामुमकिन है तो भीमा को पता hi नहीं चला की ये नेहा नहीं है और शोभा ने कोई नाम भी नहीं लिया था जिससे भीमा को पता चलता. दूसरी तरफ शोभा विक्रम के जवाब का इंतज़ार कर रही थी पर जब वो विक्रम होता तो जवाब देता. वो तो गूंगा भीमा था जिसकी जबान hi नहीं थी तो वो क्या जवाब क्या देता पर शोभा को यही लगा की विक्रम उसे छोड़ना नहीं चाहता इसलिए कुछ नहीं बोल रहा. ऐसे में शोभा ने दुबारा vikram(bheema) के कान में कहा.

शोभा: जाने दो जानू सब कुछ तो कर लिया थोड़ी देर में सवेरा हो जाएगा लोग उठ जाएंगे तब किसी ने हमे देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगी लोग दस बाते बनाएँगे. अभी जाने दो समझा करो जानू प्लीज. मन तो मेरा भी नहीं है पर जाना पड़ेगा.

भीमा अब भी उस फुसफुसाहट को न पहचान पाया पर उसे शोभा की कही बात समझ आ गई उसे लगा की ये बाते नेहा कह रही है और कोई उसे और नेहा को साथ न देख ले इसलिए जाने की बात कह रही है और यही बात तो कल भी नेहा ने कही थी और आज रात आने का वडा करा था और आई भी और छुड़वाया भी ऐसे में उसे ज़बरदस्ती रोकना ठीक नहीं. इसलिए neha(shobha) के दुबारा रिक्वेस्ट करने पर भीमा ने अपनी बहो की पकड़ ढीली कर दी. भीमा की बहो की पकड़ ढीली होते hi शोभा उठकर कड़ी हो गई और ज़मीन पर टटोल टटोल कर यहाँ वह बिखरे अपने कपड़ो को ढूंढ़ने लगी. शोभा झुक कर घोड़ी बानी अपने कपडे ढून्ढ रही थी पीछे से भीमा ने लेते लेते अपनी खुरदुरी हथेली उसके चूतड़ों पर रख दी और उन्हें प्यार से सहलाने लगा. सहलाते सहलाते अचानक भीमा के हाथ शोभा के गुदा के छेड़ तक पहुंच गए और भीमा ने बड़े शरारती अंदाज़ में अपनी ररजनी ऊँगली शोभा की गांड के छेड़ में दाल दी.

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शोभा तो एकदम चिहुँक पड़ी क्युकी जीवन में पहली बार किसी ने उसकी गांड में ऊँगली करि थी. शोभा हड़बड़ा कर आगे बाद गई और भीमा की ऊँगली शोभा की गांड से बहार आ गई.

भीमा भी मुस्कुरा पड़ा हलाकि अँधेरे की वजह से शोभा उसकी ये मुस्कुराता न देख सकीय. शोभा की गांड के अंदर दाखिल हुई ऊँगली को भीमा पहले अपनी नाक के करीब लाया और उसमे से आती शोभा की गांड की महक को सूंघने लगा और उस महक को सूंघते सूंघते उस ऊँगली को अपने मुँह में दाल लिया और चूसने लगा. जैसे उस ऊँगली को नहीं neha(shobha) की गांड को hi चूस रहा हो. अब तक शोभा को भी अपने कपडे मिल चुके थे और साथ साथ vikram(bheema) की लुंगी भी. शोभा ने अपने कपडे पेहेन कर अपने नंगेपन को धक् लिया और उस लुंगी को अब भी ज़मीन पर लेते भीमा के ऊपर दाल दिया और वह से जाने को हुई पर पीछे से भीमा ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसके सामने एक बार फिर उठ कर खड़ा हो गया और झटका देकर उसे एक बार फिर अपने सीने से लगा लिया. पर इससे पहले शोभा कुछ कहती या रियेक्ट करती भीमा ने एक बार फिर अपने होंठो को शोभा के होंठो पर रख दिया और एक बार फिर उसके होंठो को चूमने लगा. चूमते चूमते उसने शोभा के निचले होंठ को अपने दांतो में दबा लिया और हलके से काट लिया. जिस पर शोभा ने उसे हलके से पीछे धक्का दिया और है दी. भीमा वापस से उसकी तरफ लपका पर शोभा पीछे होकर झाड़ियों से बहार निकल गई.

बहार अब तक लाइट सही हो गई थी पर सब सो चुके थे. ऐसे में शोभा पलट कर भीमा की तरफ एक फ्लाइंग किश देकर हवेली की तरफ भाग चली. भीमा पीछे से उसे जाते देख रहा था, हवेली के गेट पर शोभा नज़र रो साफ़ आई पर उस वक़्त उसकी पीठ भीमा की तरफ रही और वो पलटी नहीं इसलिए जाते जाते भी उन दोनों को hi ये पता न चल पाया की उनहोंने ये सब जो भी करा वो किसके साथ करा. वो दोनों अब भी अपनी ग़लतफहमी को सच मान रहे थे. हवेली के गेट से शोभा सीधा भागते हुए अपने कमरे में चली गई और सीधा बिस्तर पर गिर पड़ी और कुछ पल पहले हुई अपनी ज़बरदस्त चुदाई की मीठी यादो में खो गई और अपने पति की ज़बरदस्त मर्दानगी पर फ़क़्र करने लगी, वही शोभा के जाने के बाद भीमा भी अपनी झोपडी में आ गया और अपनी किस्मत पर नाज़ करने लगा की इतने बरसो तक उसे किसी लड़की ने घास तक नहीं डाली और आज डाली भी तो शहर से आई एक बेहद सेक्सी और हॉट लड़की ने और उसका एक लड़की को छोड़ने का सपना पूरा करा. वो दोनों hi अपनी चुदाई की हसीं यादो में डूबे हुए थे आज रात उनकी आँखों में नींद का नामोनिशान नहीं था. दोनों अपनी अपनी ग़लतफहमी की ख़ुशी में hi खुश थे भीमा खुश था की फाइनली उसे एक लड़की की छूट छोड़ने का मौका मिला और शोभा खुश की उसे इतने बड़े लुंड वाला पति मिला.

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पर क्या इस रात की सच्चाई उनके सामने आ पाएगी की नहीं और क्या होगा जब उनकी ग़लतफहमी दूर होगी क्या वो दोनों इस सच्चाई को बर्दाश्त कर पाएंगे. जब भीमा को ये पता चलेगा की उसने नेहा के धोके में लखन सिंह की बहु को छोड़ दिया तो उसका क्या हाल होगा और जब शोभा को पता चलेगा की उसने अपने पति के धोके में एक जमादार के वीर्य को अपनी कोख में उतर लिया तो वो इसे कैसे बर्दाश्त करेगी. और सिर्फ वही दोनों क्यों अगर विक्रम या लखन सिंह को इसका पता चल गया तो उनका क्या रिएक्शन होगा. लखन सिंह तो अपने बेटे बहु की ज़िन्दगी की खुशहाली के लिए इतनी काठी गृह शांति पूजा कर रहा था और विक्रम ने शादी के बाद भी अपने पिता की बात मानते हुए अपनी बीवी को हाथ भी नहीं लगाया था और यहाँ उसकी बीवी एक नहीं दो बार उसके धोके में दो गैर मर्दो के साथ सामान्य बना चुकी थी उनका वीर्य अपनी छूट में ले चुकी थी जिनमे से एक तो उसका अपना बाप था. जब ये सच्चाई उनके सामने आएगी तो क्या होगा ये तो आने वाला वक़्त hi जनता था पर इतना तै था की आने वाला वक़्त अपने अंदर कई तूफ़ान छुपाए हुए था जो कई लोगो की ज़िन्दगी में उथल पुथल लेन वाले थे..

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उधर इस वीडिंग सररमोनी की ब्राइड अपने पति विक्रम के धोके में इस हवेली के जमादार के साथ सेक्स का एक नया chapter लिखने में व्यस्त थी और यहाँ उसका ग्रूम विक्रम तालाब के पास एक अजीब सी स्थिति में निःशब्द सा खड़ा था क्युकी इस कहानी की सबसे बोल्ड और हॉट नैका जो अपने बोल्ड स्टेप्स और सेक्सुअल एनकाउंटर्स के लिए प्रसिद्ध थी नेहा शर्मा एक बार फिर एक बोल्ड स्टेप के साथ अपनी hi सहेली के पति जिसकी शादी में वो अस ा गेस्ट आई थी के सामने पूरी तरह नंगी कड़ी थी. ये जाने के बाद की सामने खड़ा शिक्षा विक्रम है नेहा और खुल कर कड़ी हो गई ताकि विक्रम को उसके बदन का एक एक अंग साफ़ नज़ारा आ जाए खासकर उसकी छूट.

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अपनी सहेली को यु धोका देना सही था या गलत ये तो नहीं कह सकते पर जब इंसान वासना के उन्माद में चूर होता है तो उसकी सही गलत की समझ कमजोर हो जाती है कुछ यही हाल इस वक़्त नेहा का था. एक तो आज सुबह जब नेहा ने विक्रम को कसरत करते देखा था तभी उसके मन में विक्रम के कसरती बदन के प्रति आकर्षण का भाव उत्पन्न हो गया था और दुसरे वो तो यहाँ उस मास्क स्ट्रेंजर से मिलने आई थी पर विक्रम को यहाँ पाकर उसे hi स्ट्रेंजर समझ रही थी और वो स्ट्रेंजर तो नेहा के साथ अब तक बहुत कुछ कर चूका था तो उसके हिसाब से तो विक्रम hi उसके साथ वो सब कर चूका था तो अब सहेली के पति होने के गिल्ट का कोई मतलब नहीं रह जाता था और ऊपर से इस रात के कामुक माहौल ने उनकी इस मुलाकात को और भी ज्यादा कामुक बना दिया था.

शोभा और भीमे के बीच जो कुछ हुआ वो तो एक कोइंसिडेन्स था पर क्या विक्रम की यहाँ मौजूदगी भी महज एक कोइंसिडेन्स था. क्या आज hi सुबह नेहा का उसकी तरफ आकर्षित होना भी एक कोइंसिडेन्स था. क्या सच था ये तो अब भी एक रहस्य था पर इस मेगा अपडेट का वो पांचवा किरदार वो नक़ाब धरी स्ट्रेंजर झाड़ियों के पीछे छुपा नेहा विक्रम की हर हरकत पर नज़रे गड़ाए था और उसकी मौजूदगी इस घटना को और भी ज्यादा स्ट्रेंज बना रही थी.

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पर नेहा के दिमाग में स्ट्रेंजर की असलियत जान्ने का जो फितूर था वो विक्रम को देखकर पूरा हो गया था. और विक्रम को उस स्ट्रेंजर के रूप में देखकर नेहा मन hi मन और भी ज्यादा खुश थी. कल उस स्ट्रेंजर ने उसके साथ जो करा था उस वजह से पहले उसके मन में थोड़ा गुस्सा था पर अब विक्रम के प्रति अपने मन में उत्पन्न आकर्षण के कारन अब उसे यहाँ पाकर वो गुस्सा भी काफूर हो गया. और चैलेंज निभाने का तो वैसे भी नेहा को कुछ ज्यादा hi कीड़ा था और अब अपने मन माफिक मर्द मिल जाने के बाद तो ये कीड़ा कुछ ज्यादा hi एक्टिव हो गया था. चैलेंज की बात करे तो वही चैलेंज NO रियेक्ट NO टॉक जस्ट सडके एंड सेक्स. नेहा अपने सामने बेनकाब खड़े उस स्ट्रेंजर को सडके करके सेक्स तक ले जाने को पूरी तरह तैयार थी.

विक्रम भी शादी वाली रात से नेहा की तरफ उसके बोल्ड कपड़ो की तरफ उसकी कातिल अदाओ की तरफ कुछ ज्यादा hi अट्रैक्ट था और ऐसा नहीं था की नेहा वो पहली लड़की थी जो उसके सामने बिना कपड़ो के आई थी वो अपने दोस्तों लालू एंड कंपनी के साथ इससे पहले भी गांव की कई छिनार लड़कियों रंडियो कालगर्ल्स को छोड़ चूका था पर इसके बावजूद नेहा की बात hi कुछ और थी. और नेहा की अब इस बोल्डेस्ट अवतार ने तो उसकी भी बोलती बंद करदी थी. दोनों चुपचाप से एक दुसरे की नज़रो से नज़रे मिलाए खड़े थे. विक्रम को चुपचाप खड़ा देख नेहा को लगा की शायद वो चाहता hi मई उसे खुद आगे बाद कर सडके करू. और यही समझते हुए नेहा एक स्टेप आगे लेकर विक्रम के सीना के एकदम नज़दीक आ गई इतना नैकीद की उसके नुकीले छोटे छोटे स्तनों के ऊपर उभरे गुलाबी निप्पल विकर्म की छाती को स्पर्श कर रहे थे. नेहा को बिना कपड़ो के अपने इतना करीब देख विक्रम का खून भी गरम हो रहा था.

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विक्रम नेहा से करीब 1.5 फुट लुम्बा था इसलिए नेहा अपना तोए पर उचक कर अपना चेहरे उसके चेहरे के बेहद करीब ले आई इतना करीब की इतने होंठो के बीच बस इंच भर की दूरी रह गई थी फिर भी अपने होंठो को उसके होंठो से जोड़ा नहीं. विक्रम नेहा को रसीले अधरों को अपने होंठो में भरने को उतावला हो रहा था पर सातब hi वो थोड़ा सकुचा भी रहा था क्यों नेहा उसकी पत्नी शोभा की सहेली थी और एक तरफ शोभा को वो इग्नोर कर रहा है ऐसे में क्या उसे नेहा के साथ ये सब करना चाहिए. पर फिर भी वो पीछे नहीं हैट रहा था शायद इस उम्मीद में की नेहा hi अपने होंठ उसके होंठो से जोड़ दे और उसे गिल्ट महसूस न hi की उसने अपनी बीवी को इग्नोर करके उसके सहेली को किश करा. एक तरफ उसका मन कर रहा था की नेहा की कमर को अपने बहो में जकड ले उसे अपनी गोड़ में उठा ले और इस मौके का लाभ उठाते हुए तबाटोड उसके होंठ का सारा रूस पी जाए सिर्फ होंठ hi क्या उसके छरहरे बदन की जवानी को अपने मर्दानगी से निचोड़ कर रख दे पर नेहा तो उसके होंठो के इतना करीब पहुंच कर भी रुक सी गई थी शायद उसे तैसे कर रही थी. विक्रम इसी पशोपेश में बना रहा की ये करदे वो करदे तब तक नेहा बिना उसे चुम्बन दिए hi अपने कदम पीछे खींच लिए.

नेहा: क्या हुआ जीजू आप तो बड़ा पसीने पसीने हो रहे है. पानी तो सामने तालाब में है आप अपने माथे पर क्यों ला रहे हो. वैसे रात में कपडे उतर कर तालाब में तैरने का अपना अलग मज़ा है. चलोगे......

इतना कह कर नेहा उलटे कदम पीछे हट्टे हट्टे वापस तालाब में उतर गई. विक्रम अब भी अवाक से नेहा की हर हरकत देख रहा था उसे समझ नहीं आ रहा था की अचानक से हो क्या रहा है. नेहा इस तरह पूरी तरह नंगी होकर यहाँ क्या कर रही है. नेहा तालाब में अठखेलिया कर रही थी और बार बार इशारे से तालाब में आने को कह रही थी.

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पर विक्रम को अब भी समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे.

नेहा: क्या जीजू मई तो आपको बहुत माचो मन समझती थी आप आधी रात में तालाब में आने में दर रहे हो. जाने दो आप बस डंबल्स पुषप करुन्चेस hi कर पाओगे रियल डरे आपके बस का नहीं है.

नेहा ने सीधा सीधा विक्रम की मर्दानगी को चैलेंज करा था अब तो विक्रम के लिए उसे जवाब देना ज़रूरी हो गया था. विक्रम भी आगे बाद कर तालाब के किनारे आकर खड़ा हो गया और अपनी लुंगी उतर कर वही एक चट्टान पर रख दी. लुंगी के नीचे वो एक फ्रेंची पहने था जिसकी तिघटनेस की वजह से उसके लुंड का फूला हुआ आकर साफ़ नज़र आ रहा था जो इस वक़्त नेहा के नंगे बदन को देख कर और भी ज्यादा बड़ा हो गया था. उस रात में तालाब के किनारे अपने फूले हुए लुंड में अपनी हटती कटती पर्सनालिटी के साथ एक बेहद टाइट कासी हुई फ्रेंची में विक्रम गज़ब का हॉट लग रहा था नेहा तो वैसे भी बोल्ड थी पर अगर उसकी जगह कोई शाय महिला भी होती तो शायद विक्रम को इस वक़्त इस रूप में देखकर उसका भी ओर्गास्म हो जाता.

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उस टाइट फ्रेंची में विक्रम भी नेहा के पीछे पीछे तालाब में उतर गया और नेहा के साथ तैरते हुए तालाब में एकदम बीच में आ गया. तालाब ज्यादा जहर नहीं था पानी गर्दन से नीचे तक hi था और वह आराम से खड़ा हुआ जा सकता. अचानक से नेहा ने एक दिवे मारी पर वो काफी देर तक वापस ऊपर नहीं आई. विक्रम बदहवास सा तैर कर उस जगह पहुंच गया जहा नेहा ने दिवे मारी थी और पानी में हाट पेअर चलकर नेहा को ढूंढ़ने लगा पर नेहा का कोई अत पता नहीं था.

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अचानक विक्रम को नीचे पानी में अपनी जांघो पर दो हाथो की पकड़ महसूस हुई जो उसकी जांघो को सेहला रहे थे. वो हाथ धीमे धीमे उसकी जांघो को सहलाते सहलाते उसकी फ्रेंची के फूले हुए हिस्से यानि उसके लुंड पर पहुंच गए और सीधा उसके लुंड को मसलने रगड़ने लगे. पर नेहा सिर्फ हाथो तक hi नहीं रुकी हाथो से मसलते मसलते नेहा ने फ्रेंची के ऊपर से hi विक्रम के लुंड को अपने होंठो में दबा लिया.

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विक्रम की तो उत्तेजना के मारे आँखे hi बंद हो गई और होंठो से आह निकल गई. नेहा पानी के अंदर hi अपने होंठो को विक्रम की फ्रेंची पर रगड़ रही उसकी फ्रेंची को चाट रही थी. नेहा को पानी के अंदर काफी देर हो गई थी इसलिए उसने सांस लेने को अपना चेहरा पानी से बहार निकला और उसके सर ऊपर निकलते hi उत्तेजना में चूर हो चुके विक्रम ने उसके बालो को अपनी मुठी में जकड कर उसे ऊपर खींच लिया और उसे अपने सामने खड़ा करके उसके होंठो को अपने होंठो में जकड लिया. नेहा ने भी विक्रम को अपनी बहो में कास लिया जीवन में पहली बार वो दोनों इस तरह एक तालाब में किश कर रहे थे ये उन दोनों के लिए hi एक अलग तरह का अनुभव था.

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वो दोनों पूरी तरह एक दुसरे की किश में डूबे हुए थे. नेहा विक्रम को अपने आगोश में भरे हुए थी और विक्रम के हाथ नेहा के पुरे बदन को छूकर महसूस कर रहे थे उसकी नंगी पीठ उसकी कासी हुई गांड की दरार उसके चिकने चूतड़. विक्रम के ज़हन से अपनी बीवी शोभा का ख्याल पूरी तरह से धूमिल सा हो गया था और अब उसके दिलो दिमाग में कुछ चल रहा तो अपनी वासना की आग. पानी में खड़े होने के बावजूद उन अधनंगे औरत और मर्द के तन बदन में अजीब सी आग जल उठी थी जिसे बुझाए बिना अब वो नहीं रुकने वाले थे. नेहा के होंठो को चूमते चूमते विक्रम ने उसके पुरे चेहरे को चाट रहा था उसकी गर्दन को पर अपने होंठ फिरा रहा था. वही नेहा भी अपनी सभी सहेलियों में सेक्स की सबसे माहिर खिलाडी थी किसी मर्द को कामुकता के चरम पर ले जाना उसे अच्छी तरह आता था और जब मर्द विक्रम जैसा बांका सजीला हो जिसे देख कर उसकी छूट भी पनिया गई थी तो ऐसे में तो उसकी कामुक अवतार का अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल था. विक्रम तो नेहा को चूम hi रहा था पर नेहा भी को होंठो की गरम गरम सासे उसके पुरे बदन पर छोड़ कर उसे उत्तेजित कर रहा था. खुद को नीचे करते करते नेहा अपना चेरा विक्रम के छोटे निप्पल तक ले आई और विक्रम के निप्पल को अपने दांतो में भर लिया और अपनी जीभ निकल कर विक्रम के निप्पल चाटने लगी.

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विक्रम के निप्पल को चूमते हुए नेहा एक बार फिर पानी में नीचे को होती चली गई और विक्रम के पेट पर अपने होंठो को रगड़ते हुए फिर से पूरी तरह पानी के अंदर समां गई. एक बार फिर पानी के अंदर विक्रम की फ्रेंची का मोटा सा उभर नेहा के चेहरे के एकदम सामने थे जो ऊपर हुई पैशनेट किश की वजह से और फूल गया था. पर इस बार नेहा केवल विक्रम को फ्रेंची के कपडे को चाट कर शांत नहीं होने वाली थी. वो तो उस फ्रेंची के फूले होने की असल वजह को देखने के लिए ललित हो रही थी. और नेहा बिना देर किये अपनी उंगलिया विक्रम की फ्रेंची के दोनों सिरों में अंदर दाल दी और एक hi झटके में विक्रम के बदन का वो एक इकलौता कपडा भी ुकि जांघो से खींच कर बहार निकल दिया और उस फ्रेंची को तालाब की धरा के साथ hi बहा दिया. अब उस चांदनी रात में तालाब के बीचो बीच इस वेडिंग सेरेमनी का दूल्हा अपनी hi दुल्हन की सहेली के साथ पूरी तरह नंगा खड़ा था.

उसका विशाल लुंड अब पानी के अंदर नेहा की नज़रो के ठीक सामने सावधान को मुद्रा में एकदम सीधा तना हुआ खड़ा था. जिसका मुँह नेहा के होंठो की hi तरफ था जैसे नेहा को इन्विते कर रहा हो की नेहा आगे बाद कर उसे अपने नरम नरम गुलाबी होंठो में भर ले.

नेहा ने भी उसके इनविटेशन को दरकिनार नहीं करा और लोल्लिपोप का वैसे भी कुछ ज्यादा hi शौक़ीन नेहा ने उस मर्दानगी भरे हट्टे काटते नसों से भरे लुंड के सुपर को अपने होंठो के बीच छुपा लिया और लुंड के आगे की खाल को अपने होंठो से छौंने और रगड़ने लगी.

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नेहा के लिए बेशक ये उसके जीवन का पहला लुंड नहीं था जिसमे उसके नरम नरम होंठो की गर्माहट महसूस करने का मौका मिला था पर इस गाँव में कई मर्दो के साथ तरह तरह की कामुकता भरी चीज़े करने के बावजूद उसने अब तक किसी मर्द के लुंड को अपने होंठो में नहीं लिया था पर विक्रम के लुंड की तो बात hi और थी उसकी मर्दानगी और लम्बाई देख कर नेहा उसे अपने होंठो में भरने से रोक नहीं पाई. विक्रम का लुंड अब पानी के अंदर नेहा के होंठो की गिरफ्त में था और नेहा अपनी ब्लोजॉब की साडी टेक्निक्स उसके लुंड पर आजमा रही थी. जीवन में कई औरतो ने विक्रम के लुंड को मुँह में लिया था पर पानी के अंदर ब्लोजॉब करवाना एक नया hi अलग तरह का एक्सपीरियंस था. अपने जांघो को छू कर जाती ठन्डे ठन्डे पानी की लेहेरे जहा उसे ठण्ड का एहसास करा रही थी वही अपने लुंड पर नेहा की गरम गरम सासे जहा उसे अंदर तक गरम कर जा रही अजीब सा ठंडा गरम एहसास था उसके लिए.

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नेहा ने भी विक्रम के चौड़े कूल्हों को अपनी हथेलियों में जकड रखा था और जितना ज्यादा से ज्यादा से हो सके उसका लुंड अपने मुँह में उतरने की कोशिश कर रही थी. शायद इस गाँव के अपने पहले ब्लोजॉब को लाइफटाइम के लिए पूरी तरह यादगार बना देना चाहती थी. नेहा मछली की तरह कुछ पल को सांस लेने के लिए अपनी नाक बहार लाती और दुबारा से पानी के अंदर मुँह करके विक्रम को लुंड को अपने मुँह में भर लेती. विक्रम के लुंड को चूसने के साथ नेहा उसे अपनी जीभ के हरकतों से उत्तेजित भी कर रही थी. नेहा विक्रम के लुंड के साथ उसके नीचे लटकी गोटियों को अपने होंठो में लेकर चाट रही थी. नेहा का मुँह इतना ज्यादा बड़ा नहीं था और विक्रम का लुंड शायद इस गाँव के सबसे तगड़ो लुंड में से एक था शायद भीमा के बराबर तो ऐसे वो लुंड पूरी तरह नेहा के हलक के अंदर तक उतर जाता था पर नेहा को इस तरह के ब्लोजॉब का पहले से एक्सपीरियंस था उसे पता था ब्लोजॉब को ज्यादा से ज्यादा इरोटिक कैसे बनाते है. वो लुंड को पूरा हलक के अंदर तक उतरती और फिर अपने होंठो को लुंड की नसों पर रगड़ते हुए पूरा बहार को लती. विक्रम का लुंड भी पूरी तरह उत्तेजना की अवस्था में पहुंच चूका था उसका आकर इतना बड़ा हो चूका था की नेहा का पूरा हलक भी उसके लिए छोटा पद रहा था.

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नेहा कुछ पल को दुबारा पानी के ऊपर आई लुंड हलक से बड़ा होने के बावजूद दुबारा उसे अपने होंठो में भर लिया. और तब तक उसे अपने मुँह में अंदर बहार करती रही जब तक वीर्य उसकी लुंड की धमनियों तक नहीं उतर आया और जब नेहा को ये एहसास हो गया की किसी भी पल अब विक्रम का स्खलन हो सकता है पर फिर भी उसने वो लुंड अपने मुँह से नहीं निकला. विक्रम के लुंड ने अपना सारा वीर्य नेहा के मुँह में hi उगलना शुरू कर दिया नेहा का पूरा मुँह विक्रम के गाड़े वीर्य से भर गया था, विक्रम का सारा वीर्य अपने मुँह में भरने के बाद नेहा ने उसे अपने मुँह से निकल दिया और अपना मुँह खोल दिया. नेहा का मुँह खुलते hi उसके मुँह में भरा वीर्य वही तालाब के पानी में घुलने लगा.

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नेहा ने कई बार लुंड से वीर्य का स्खलन होते देखा था पर पानी के अंदर से एक मर्दाने लुंड से इस वीर्य के स्खलित होने का नज़ारा अपने आप बेहद अद्भुत और कामुक था. स्खलन के बाद पानी में खड़ा विक्रम तेज़ तेज़ सासे भर रहा था वो निढाल सा वह खड़ा गहरी गहरी सासे ले रहा था. कुछ समय वो यही वह सेंसलेस सा खड़ा रहा और जब वो वापस अपने सेंस में आया और तो उसने नेहा को बहार लेन के लिए पानी के अंदर हाथ डाला पर नेहा पानी में अंदर थी hi नहीं. विक्रम ने पानी के अंदर दिवे मारी और यहाँ वह नज़र घुमा कर नेहा को ढूंढ़ने की कोशिश करि पर नेहा तो जैसे पानी में देसोल्वे हो गई थी. विक्रम पानी के अंदर नेहा को ढून्ढ hi रहा था की अचानक उसे अपने कंधो पर किसीकी जांघो का दबाव महसूस हुआ जैसे कोई उसके कंधो के ऊपर बैठ रहा.

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विक्रम ने उन जांघो को अपने हाथो में थम लिया और पानी में उठ कर सीधा खड़ा हो गया. उसके कंधो पर जाँघे लपेट कर बैठी नेहा उसके बलिष्ठ कंधो पर बैठे बैठे hi हवा में उठ गई. विक्रम ने नेहा की कमर को अपने हाथो में थमा और घुमा कर उसे अपने सामने ले आया की अब नेहा के पेअर विक्रम की पीठ की तरफ हो गए थे और उसके कूल्हे सामने की तरफ और नेहा की गुलाबी गुलाब की पंखुड़ी सी छूट विक्रम के ठुड्डी के सीध में. एकदम से घुमाने से नेहा हल्का सा डिस्बैलेंस हुई पर विक्रम ने नेहा के कूल्हों को अपने हाथो में थाम लिया और उस हल्का सा अपने कंधो पर आगे खींच कर अपने कंधो पर उठा लिया. आगे खींचने से नेहा की छूट अब विक्रम के होंठो के ठीक सामने उसके बेहद करीब आ गई थी.

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इतना करीब की उत्तेजना से भरी नेहा की छूट की उत्तेजक महक विक्रम के नथुनों में समां रही थी. इस भीनी भीनी का अपने आप में अलग hi नशा था जो किसी अच्छे भले इंसान को भी सूद बुध खोने पर मजबूर करदे. ये महक विक्रम को भी सब कुछ भूल कर अपने अंदर खो जाने को मजबूर कर रही थी.

विक्रम की हथेलियों की गिरफ्त नेहा के चूतड़ों पर और सख्त हो गई. नेहा के छोटे छोटे पाँव रोटी जैसे चूतड़ विक्रम की विशाल हथेलियों के अंदर धक् से गए थे. विक्रम ने नेहा के चूतड़ों पर अपनी हथेलियों का हल्का सा दबाव आगे को करा जिस वजह नेहा नेहा की छूट विक्रम के होंठो से आकर सात सी गई. नेहा के निचले होंठ विक्रम के होंठो से इसतरह जुड़ गए थे जैसे नेहा अपने ऊपर के होंठो के बाद अब अपने नीचे के होंठो से अपने नए नवेले जीजाजी को प्रेम का चुम्बन देकर अपने साली यानि आधी घरवाली होने का फ़र्ज़ ऐडा कर रही हो. विक्रम ने भी नेहा के निचले होंठो के इस चुम्बन को दरकिनार नहीं करा और नेहा की छूट की फैंको को अपने होंठो में भर लिया और बड़े प्यार से आहिस्ता आहिस्ता उनेह किश करने लगा. अपनी छूट पर विक्रम के होंठो के स्पर्श ने नेहा को उत्तेजित कर दिया और उसने अपनी उंगलिया विक्रम के बालो में दाल दी और उन्हें प्यार से सहलाने लगी. विक्रम एक अच्छे फ्रेंच किसर की तरह नेहा की छूट को चूम रहा था समझ नहीं आ रहा था की वो नेहा की छूट को सूचक कर रहा है या किश.

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नेहा को अपने कंधे पर उठाए विक्रम उसकी छूट को चूमने के साथ अपनी जीभ निकल कर उसकी छूट की फैंको को चाटना भी शुरू कर दिया और छूट की फैंको को पूरी तरह गीला कर देने के बाद अपनी जीभ को उसकी छूट में अंदर दाखिल कर दिया. जैसे एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को किश करते करते अपनी जीभ को उसके मुँह के अंदर दाखिल कर देता है उसी तरह इस वक़्त विक्रम की जीभ नेहा के निचले होंठो के अंदर दाखिल होकर औरत के बदन के उस कामुक छेड़ का अंदर से पूरी तरह जायज़ा ले रही थी. विक्रम की जीभ भी उसके लुंड के सामान hi काफी लुम्बी थी जो नेहा की छूट में काफी अंदर तक पहुंच गई थी और नेहा की छूट के ज़र्रे ज़र्रे को नाप रही थी उसे चाट रही थी. नेहा भी छूट चटवाने के उन्माद में इस कदर पागल हो चुकी थी की उसने अपनी टांगो को विक्रम की गर्दन के ईद गिर्द कास लिया था और विक्रम के बालो को अपनी मुट्ठी में कास कर जकड लिया था.

इस गाँव में आने के बाद पिछले सात दिनों में hi विक्रम वो तीसरा मर्द था जो नेहा की छूट चाट रहा था इससे पहले भी नेहा दो बार अपनी छूट चटवा चुकी थी. शादी में वेटर का काम कर रहे कल्लू और छोटू से पर उन दोनों hi मौको पर नेहा का ध्यान अपनी छूट चटवाने से ज्यादा कही और अधिक था जहा दुसरे दिन कल्लू से बाघ में छूट चतवते वक़्त उसका ध्यान कल्लू से छूट चटवाने से ज्यादा पेड़ के पीछे छुपकर देख रहे और अपना हस्तमैथुन कर रहे भीमा पर था, वही पांचवे दिन छोटू से छूट चतवते वक़्त उसका ध्यान छोटू से ज्यादा शबाना की छूट चाटने पर था इसलिए वो छूट चटवाने का असली मज़ा ले hi नहीं पाई था, इसके अलावा जब नेहा दुल्हन के लिबाज़ में यही इसी कॉटेज में पहली बार स्ट्रेंजर से मिलने आई थी तब स्ट्रेंजर ने जिस स्टैंडिंग 69 पोजीशन में नेहा की छूट छाती थी उसमे औरत और मर्द एक साथ एक दुसरे के गुप्तांग को छत्ते और चतवते है इसलिए उस वक़्त भी नेहा को छूट चटवाने का भरपूर आनंद नहीं मिल पाया पर आज उसके इस आनंद के बीच कुछ नहीं था न भीमा न शबाना न hi कोई लुंड. इसलिए आज नेहा पुरे उन्माद में पुरे आनंद में मगन होकर आँखे बंद करे इस छूट चटाई का आनंद ले रही थी.

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और छूट चटवाने की ये पोजीशन भी बेहद कामुक और उत्तेजक थी. जहा कल्लू उसके सामने घुटनो के बल बैठ कर उसके सामने समर्पण करते हुए उसकी छूट चाट रहा था जो छूट चटवाने में एक आम सी अवस्था थी, तो छोटू के सामने नेहा ज़मीन पर लेती थी और छोटो तो बेचारा बच्चा था एक औरत की छूट को चाटने में कच्चा था तो ऐसे में उससे ज्यादा कुमुक्त की उम्मीद करना बेकार था पर विक्रम भी नेहा की तरह सेक्स का एक प्रो प्लेयर था और उसके हट्टे काटते शरीर और बलिष्ठ भुजाओ ने जिस तरह नेहा को अपने चौड़े कंधो पर उठा कर रखा था इस पोजीशन में एक मर्द की मर्दानगी और एक स्त्री की कामुकता दोनों का परफेक्ट समावेश था. और उस पर तालाब में पड़ती चाँद की रौशनी जिसने छूट चाटने की इस मुद्रा को और भी ज्यादा उत्तेजक बना दिया था. तालाब में नंगा मुद्रा में खड़े विक्रम और उसकी भुजाओ में ऊपर उठी नेहा को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे एक जंगली बैल ने एक नाज़ुक सी हिरणी को अपनी सींगो पर उठा रखा हो.

विक्रम की जीभ लपलप्ति हुई नेहा की छूट को अंदर से बहार तक चाट रही थी. और नेहा आँखे बंद करे उसके कंधो पर बैठी बस उसके बालो को अपनी मुट्ठी में जकड़े थी, जकड़े क्या थी उसे पूरी ताकत से नोच रही थी पर विक्रम को तो जैसे दर्द का कोई एहसास hi नहीं हो रहा था. शोभा के बार बार उसके पास आने और पूजा के नियम के कारन उसे बार बार इग्नोर करने के कारन आज जब उसे के बदन की मादक महक का एहसा मिला तो उसने अंदर के मर्द को उसकी हवस की चिंगारी को हवा देदी थी. विक्रम को नेहा की छूट को छत्ते हुए 15 मं से भी ज्यादा हो गया था इतनी उत्तेजना के बावजूद नेहा अब तक नहीं झड़ी थी शायद खुद को झड़ने से रोक रही थी शायद इस अनोखी छूट चटाई का ज्यादा से ज्यादा मज़ा ले लेना चाहती पर इंसान के संयम की भी एक लिमिट होती है नेहा का संयम भी अपने चरम पर आ चूका था उसके पेट में मरोड़ सी उठ रही थी छूट के अंदर का बांध अब अपने अंदर के बहाव को रोकने में नाकाम सिद्ध हो रहा था. और जल्द hi नेहा के संयम का बाँध टूट गया नारी उत्तेजना का प्रसाद अपने मार्ग पर बह निकला विक्रम को अपने जीभ पर उस ओर्गास्म के जूस का एहसास हो रहा था पर विक्रम की उत्तेजना भी दुबारा बाद चुकी थी की उसने नेहा की छूट से अपनी जीभ को नहीं निकला और नेहा के जूस की एक एक बूँद को उसके छूट की दीवारों से छत्ता रहा.

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विक्रम के कंधो पर बैठी नेहा ने उसकी गर्दन को कास कर पकड़ लिया था ुर विक्रम के सर पर झुक कर तेज़ तेज़ आहे भर रही थी. नेहा ने विक्रम को ब्लोजॉब का एक अलग अनुभव दिया तो विक्रम ने भी नेहा की छूट इस अद्भुत अंदाज़ में चाट कर उसे फवौर रेतुर्न कर दिया था. झाड़ियों के पीछे से उनकी एक एक हटकट हो देख रहा वो मास्क स्ट्रेंजर भी इस कामुक अंदाज़ को देखकर उत्तेजित हो चूका था पर अपनी उत्तेजना को काबू में रखे हुए वो उनकी एक एक हरकत को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर रहा था.
 
ओर्गास्म हासिल हो जाने के बाद तो नेहा के बदन में जैसे जान hi न बची थी विक्रम ने भी नेहा की छूट को अंदर से बहार तक चाट कर पूरी तरह साफ़ कर दिया था. नेहा की छूट को चाट कर पूरी तरह साफ़ करने के बाद विक्रम ने उसे आहिस्ता से अपने कंधो से उतर कर वापस पानी में खड़ा कर दिया. ठन्डे ठन्डे पानी के अपने बदन से स्पर्श होते hi नेहा एक बेल की तरह दुबारा विक्रम के जिस्म से लिपट गई. विक्रम ने भी नेहा को अपनी बहो में भर लिया नेहा का चेहरा विक्रम की छाती पर टिका था और नेहा की छूट को छत्ते छत्ते विक्रम का लुंड भी एक बार फिर तन कर खड़ा हो चूका था और बार बार अपने बदन से लिपटी नेहा की जांघो के बीच दस्तक दे रहा था जैसे उनके बीच दाखिल होने का रास्ता तलाश रहा हो.

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नेहा के मुँह से गरम गरम सासे निकल रही थी उसका दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था पर अब भी उसके जिस्म की चुआड़ी की प्यास अभी शांत नहीं हुई थी अभी अभी अपने ओर्गास्म को हासिल हुई उसकी पनियति छूट उस बार बार अपने दरवाज़े पर दस्तक दे रहे गाँव के उस सबसे हट्टे काटते लुंड को अपने अंदर लेने के लिए मचल रही थी. वही विक्रम भी ये भूल चूका था की उसकी अभी कुछ दिन पहले hi शादी हुई है और अब तक उसकी सुहागरात भी नहीं हुई है और उसकी नै नवेली दुल्हन उससे मिलान की प्यास में तड़प रही है उसे तो इस वक़्त बस अपने लुंड के मुहाने पर कड़ी वो कासी हुई गुलाबी छूट hi नज़र आ रही थी जिसमे घुसकर उसका मर्दन कर देने के लिए बुरी तरह बेताब था और बार बार झटके पे झटके खाए जा रहा था. अपनी जांघो पर महसूस होते विक्रम के लुंड के ये झटके नेहा की उत्तेजना को भी हवा दे रहे थे उससे भी और बर्दाश्त नहीं हो रहा था. इस गाँव में आने के बाद अब तक उसकी छूट में एक भी मर्द का लुंड नहीं गया था उसकी गांड का छेड़ और मुँह को एक मर्द के लुंड का एहसास मिल चूका था पर उसकी छूट को एक लुंड मिला भी पर वो भी ऐसा की उसके ज़िक्र भर ने इस कहानी को बन करवा दिया था. उसकी छूट अब भी प्यासी थी और इतने सख्त मूसल लुंड को अपने इतना करीब पाकर ये प्यास उससे और ज्यादा बर्दाश्त नहीं हो रही थी.

विक्रम का झटके पे झटके खा रहा लुंड बार बार नेहा की जांघो के बीच दाखिल होने की कोशिश कर रहा था पर नेहा की जांघो के चिपके होने के कारन सफल नहीं हो प् रहा था. इसलिए नेहा ने भी ये प्रवेश द्वार खोल दिया, नेहा ने अपनी एक टांग विक्रम के इर्द गिर्द लपेट ली जिससे उसकी छूट का मुख अब विक्रम के लुंड के ठीक सामने उस पर इधर उधर टच हो रहा था. नेहा ने विक्रम के सीने से चेहरा उठाकर उसकी आँखों में देखा, नेहा की आँखे वासना के नशे में लाल हो चुकी थी तो विक्रम की आँखों में भी हवस साफ़ नज़र ा रही थी. दोनों एक तक एक दुसरे की आँखों में देख रहे थे. एक दुसरे को यु घूरते घूरते नेहा अपना एक हाथ विक्रम की पीठ से सरकते हुए नीचे की तरफ ले गई और विक्रम के कूल्हों को सहलाते हुए अपना हाथ आगे लेकर विक्रम के लुंड को अपने हथेली में थाम लिया. नेहा अपनी हथेली की मोटाई से विक्रम के लुंड को साफ़ महसूस कर सकती थी एक बार झड़ने के बाद वो पहले से भी ज्यादा सख्त हो गया था. नेहा अपनज उंगलिया उस मूसल लुंड पर फिरा रही थी और नेहा को अपनी उंगलियों पर विक्रम के लुंड की एक एक नस साफ़ महसूस हो रही थी. नेहा ने अपने जीवन ने कई लुंड अपने अंदर लिए थे पर निश्चित रूप से ये लुंड उन सबमे सांसे मजबूत और लुम्बा था और इतना तै था की मूसल लुंड उसके अंदर बहुत अंदर तक जाने वाला था.

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नेहा ने लुंड के टोपे को अपनी उंगलियों में फसा लिया और उसे अपनी छूट के मुहाने पर रख कर उस लुंड का टोपा अपनी छूट में हल्का दाखिल कर दिया या यु कहे की उस लुंड का निशाना अपनी छूट में सेट कर दिया ताकि एक hi धक्के में वो छूट की दीवारों को चीरता हुआ अंदर उतर जाए. लुंड को अपनी छूट पैट सेट करके नेहा ने विक्रम के कूल्हों को अपने हाथो में थाम लिया और अपनी जीभ निकल कर विक्रम के सीने के छोटे छोटे निप्पल को चाटने लगी. नेहा की गरम गरम सासे विक्रम को अपने सीने पर महसूस हो रही जो उसे और गरम कर रही थी. विक्रम के सीने को छत्ते छत्ते नेहा ने अपनी हथेलियों का दबाआव विक्रम के कूल्हों पर डाला और खुद को थोड़ा आगे को धकेला जिससे विक्रम का लुंड हल्का सा नेहा की छूट में दाखिल हो गया. विक्रम को भी अब अपने लुंड पर नेहा की छूट की गर्माहट उसके गीलापन साफ़ महसूस हो रहा था जो उसे और उत्तेजित कर रहा था.

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विक्रम ने भी उत्तेजना में नेहा को अपनी बहो में कास कर जकड लिया. और नेहा की छूट में फेज हुए अपने लुंड को हल्का हल्का उसके अंदर घिसने लगा. विक्रम का लुंड नेहा की छूट के आगे के दाने को छू छू कर उसमे रगड़ रहा था पर अब भी उसकर लुंड का बस एक तिहाई हिस्सा hi नेहा के अंदर गया था जरूरत थी तो बस एक तेज़ ज़ोरदार धक्के की. नेहा अपने होंठो को विक्रम के सीने पर यहाँ वह रगड़ कर उसे ज्यादा से ज्यादा उत्तेजित कर रही थी जिससे विक्रम अपने मूसल लुंड के साथ उसकी छोटी सी छूट पर टूट पड़े उसकी छूट का भोसड़ा बना दे. नेहा के होंठो का असर धीमे धीमे विक्रम पर हो भी रहा था उसकी आँखे उत्तेजना के मरे बंद हो गई थी और उसके हाथ नेहा की पीठ को ऊपर से नीचे तक नाप रहा थे. नेहा की पीठ को सहलाते सहलाते विक्रम ने भी नेहा के कूल्हों को अपनी हथेलियों में जकड लिया. और ये संकेत था की अब वो भी नेहा के कूल्हों पर दबाव दाल कर अपने लुंड को उसकी छूट में दाखिल करने को तैयार है बस ज़रुरत है तो उसकी उत्तेजना पर एक आखिरी चोट करने की. और नेहा ने वो आखिरी चोट करते हुए विक्रम की निप्पल छत्ते छत्ते उसके एक निप्पल को अपने दांतो में दबा लिया. नेहा के दांतो के दबाव ने विक्रम को दर्द का एक हल्का सा झटका दिया और उस झटके में hi विक्रम की हथेलियों एक तेज़ दबाव नेहा के कूल्हों पर पड़ा और विक्रम ने भी अपने कूल्हों का एक तेज़ झटका आगे को लिया की विक्रम का नेहा की छूट की चौड़ा करता हुआ आधे से ज्यादा उसके अंदर उतर गया.

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नेहा की छूट जो अभी अभी हुए ओर्गास्म की वजह से अंदर से गीली थी इसलिए विक्रम का लुंड माखन की तरह सरकता हुआ उसके अंदर दाखिल हो गया. विक्रम को अपने लुंड पर नेहा की छूट के गीलेपन का साफ़ एहसास हो रहा था. और अब नेहा ने अपना काम कर दिया था उसने विक्रम को इस कदर उत्यजित कर दिया था की उसका आधे से ज्यादा लुंड उसकी छूट के अंदर आ चूका था अब ज़रूरत थी एक मर्द के धक्को की जो एक छूट को उसकी असली औकात का एहसास करता है. नेहा ने अपनी बदन को पूरी तरह ढीला छोड़ दिया विक्रम की कमर में लिपटी अपनी जांघ का भर विक्रम के बहो पर रख दिया. विक्रम ने भी नेहा की हवा में उठी टांग को थोड़ा और ऊपर करके उसे अपने कंधो तक ऊपर कर दिया जिस वजह से नेहा की छूट का मुँह और भी अच्छी तरह खुल गया. नेहा की छूट पूरी तरह खुली थी और विक्रम का तीन चौथाई लुंड उसके अंदर था और अगले hi पल विक्रम ने वो आखिरी धक्का आगे को मारा की उसका डंडे जैसा लुंड नेहा की छूट को अंदर तक फैलता हुआ पूरी तरह उसके अंदर गहराई तक उतर गया इतना अंदर की वो नेहा की बच्चेदानी को स्पर्श कर रहा था.

विक्रम के इस झटके ने तो नेहा की सास हलक तक पंहुचा दी पर किसी तरह उसने चीख को अपने गले में hi घोट दिया. विक्रम का पूरा का पूरा लुंड नेहा के अंदर तक उतर गया था. नेहा ने अपने अंदर कई लुंड लिए पर इतनी गहराई तक उसे लुंड का एहसास कभी नहीं था. नेहा के अंदर दाखिल होने के बाद विक्रम ने अपना लुंड आधे से ज्यादा बहार खींचा और पूरी ताकत के साथ दुबारा उसे नेहा की छूट में गहराई तक उतर दिया. ये तो अच्छा था की नेहा का ओर्गास्म हो चूका था इसलिए उसकी छूट की दीवारे गीली थी इसलिए लुंड आसानी से अंदर तक चला गया वर्ण निश्चित hi नेहा इन धक्को में बेइंतिहा दर्द होने वाला था. विक्रम ने ये प्रक्रिये दो तीन बार दोहराई वो लुंड को आधे से ज्यादा बहार लता और पूरी ताकत से है नेहा की छूट में पेल देता. तीन चार धक्को में hi नेहा की छूट अंदर तक काफी चौड़ी हो गई थी और अब ये लुंड पहले से ज्यादा अच्छी तरह नेहा की छूट में अंदर बहार हो रहा.

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नेहा की छूट के चौड़ा हो जाने के बाद धीमे धीमे विक्रम ने अपने धक्को की गति बढ़ाना शुरू करदी. हर धक्के के साथ विक्रम के धक्को की स्पीड बढ़ती जा रही थी. विक्रम का लुंड इतना ज्यादा बड़ा था की नेहा को अपनी छूट की दीवारों पर लुंड की नसों तक की रगड़ साफ़ महसूस हो रही थी. उसके मुँह से हलकी हलकी आह की आवाज़े उस सन्नाटे में गूँज रही थी ये आहे विक्रम को और उत्तेजित कर रही थी. वो और ताकत के साथ नेहा की छूट में अपना लुंड पेल रहा था. पीछे से देखने पर विक्रम के आगे पीछे होते पुष्ट सुडौल नितम्ब बेहद अकारक्षक और कामुक लग रहे थे. नेहा एक बार फिर अपने चरम तक पहुंच चुकी थी उसकी सासे लगातार भरी होती जा रही थी. उस तालाब में एक टांग पर कड़ी नेहा की हालत ख़राब हो गई थी. एक तो विक्रम के ज़ोरदार धक्के ऊपर से नीचे बेहटा ठंडा ठंडा पानी उसपर भी पिछले कई मिंटो से वो एक टांग पैट hi कड़ी थी और पानी की ठंडक में वो एक टांग भी नीचे से सुन्न सी पद गई थी. नेहा से अब खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था पर विक्रम तो लगातार धक्के धक्के लगाए जा रहा था.

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अपनी छूट पर लगातार विक्रम के लुंड की रगड़ ने एक बार फिर नेहा को झड़ने पर मजबूर कर दिया. एक तो पहले hi उसके पेअर सुन्न पद गए थे ऊपर से दुबारा हुए इस ओर्गास्म ने उसकी रही सही जान भी निकल दी. उसने अपने जिस्म का पूरा भर विक्रम के हाथो पैट दाल दिया पर विक्रम तो अब भी अपने काम पर लगा था वो तो एक डॉल की तरह नेहा को अपने हाथो में टाँगे हुए था उसकी एक टांग को अपने कंधो पर टिकाए हुए था और दुसरे हाथ से नेहा को कमर से पकडे हुए था. उस सन्नाटे में उन धक्को से होती धप्प धप्प की आवाज़ तक साफ़ सुनाई दे रही थी. विक्रम लगातार तेज़ तेज़ नेहा की छूट को पेले जा रहा. उसके धक्को की लगातार तेज़ स्पीड से साफ़ था की वो भी झड़ने के करीब है और बिना झड़े वो अब रुकने वाला भी नहीं है. इसलिए नेहा ने भी खुद को पूरी तरह उसके हवाले कर दिया ताकि वो भी उसके छूट की दीवारों से रगड़ रगड़ कर अपने लुंड की गर्मी को शांत करले.

विक्रम ने भी अपने धक्को की स्पीड बड़ा दी थी और एक आखिरी धक्के के साथ विक्रम नेहा के अंदर बहुत गहराई तक उतर गया और उसके लुंड ने अपनी मणि नेहा की छूट के अंदर सीधा उसके बच्चेदानी में जाकर खली कर दी. नेहा की छूट में झड़ते हुए विक्रम ने अपना सर नेहा की गर्दन पर टिका दी थी और उसके मुँह से निकलता थूक नेहा के कंधे को गीला कर रहा था हुए लुंड से निकलता गरम गरम वीर्य नेहा को अंदर तक गीला कर रहा था. नेहा भी समझ चुकी थी की विक्रम का निकल गया है अपनी छूट के अंदर उसके विक्रम के गाड़े गाड़े वीर्य की गर्मी साफ़ महसूस हो रही थी और ये भी महसूस हो रहा था की ये वीर्य उसके कितना अंदर तक उतर गया है.

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झड़ने के बाद भी विक्रम और नेहा यही उस तालाब में काफी देर तक एक दुसरे को पकडे खड़े रहे. वो दोनों पूरी तरह एक दुसरे में खोए हुए थे इस बात से अनजान की अभी उनके बीच जो भी हुआ वो न सिर्फ किसी और ने देखा बल्कि उसके एक एक पल को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड भी किया वो मास्क स्ट्रेंजर पर उसे रिकॉर्ड करने के पीछे उसका क्या मकसद था क्या चल रहा था उसके दिमाग में ये तो अब भी एक रहस्य था.

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15 - 20 मं नेहा और विक्रम यही एक दुसरे में खोए खड़े रहे जब उनकी लड़खड़ाती सासे संयत नहीं हुई उनका तेज़ तेज़ धड़कता दिल नार्मल न हुआ. नार्मल होने के बाद नेहा तो रिलैक्स थी क्युकी उसके लिए तो विक्रम अब भी वो मास्क स्ट्रेंजर था जिसके साथ उसने पिछली दो राते गुज़री थी पर विक्रम को अब ये एहसास हो रहा था की उसने जोश और उत्तेजना के नशे में चूर होकर क्या कर डाला अपनी बीवी को इग्नोर करके ुस्कीकी सहेली के साथ उससे पहले सुहागरात मन डाली. ये एहसास होते hi नेहा पर विक्रम की पकड़ ढीली हो गई और ये पकड़ ढीली होते hi नेहा विक्रम से परे हैट कर पीछे हो गई. विक्रम को समझ नहीं आ रहा था वो क्या कहे कैसे रियेक्ट करे पर इससे पहले वो कुछ करता या कहता नेहा ने एक बार फिर पानी के अंदर डुबकी ली पर इस बार भी वो काफी देर तक बहार न आई. जब नेहा काफी देर बहार नहीं आई तक विक्रम ने भी उसे ढूंढ़ने के लिए पानी के अंदर डुबकी लगाई पर काफी ढूंढ़ने के बाद भी नेहा का कोई अत पता नहीं था.

विक्रम सास लेने को थोड़ा बहार आया तो देखा नेहा तालाब के दुसरे छोर पर कड़ी थी जिस तरफ हवेली थी और उसके हाथ में विक्रम की वही फ्रेंची थी जो उसने तालाब में बहा दी थी. नेहा वो फ्रेंची विक्रम की तरफ लहराते हुए उसे चिड़ा रही थी शायद उसे स्य्रँगेर समझ कर ये मश्ग दे रही थी की एक बार टास्क के तहत उसने नेहा की पंतय उतरवाई थी आज नेहा ने उसकी फ्रेंची उतर कर हिसाब बराबर कर लिया. नेहा ने विक्रम को आँख मारते हुए वो फ्रेंची खुद पेहेन ली, फ्रेंची पूरी गीली होने की वजह से नेहा की कूल्हों से चिपक गई.

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विक्रम तैरते हुए नेहा की तरफ लपका पर नेहा उसे अंगूठा दिखाकर फ्लाइंग किश देते हुए पेड़ो के बीच घने अँधेरे में गायब हो गई. विक्रम जब तक तालाब से बहार आया नेहा का कोई अत पता नहीं था. विक्रम को ये भी एहसास हुआ की वो अब भी नंगा है इसलिए वो पल से वापस तालाब के दूसरी तरफ आया अपनी लुंगी से अपने नंगेपन को ढाका. विक्रम अंदर बाघ की तरफ बड़ा पर वह से लोगी की काफी आवाज़े आ रही थी शायद हवेली की लाइट सही हो रही थी.

एक लड़की को छोड़ने के बाद इस वक़्त विक्रम लोगो की नज़रो में नहीं आना चाहता था वो भी इस तरह भीगे बदन और गीली लुंगी के साथ जिसमे से उसका नंगापन भी साफ़ नज़र आ रहा था. इसलिए विक्रम भीमा की झोपडी की तरफ वाले रास्ते से न जाकर हवेली के पीछे की तरफ वाले रास्ते से घूमकर अँधेरे का फायदा उठाकर हवेली के अंदर पहुंच गया. अगर वो भीमा की झोपडी की तरफ वाले रास्ते से hi जाता तो शायद वो अपनी नै नवेली बीवी और उस जमादार की ाहो की आवाज़े सुन लेता और ये भी देख लेता की जिस तरह उसने अपनी बीवी से पहले उसकी सहेली के साथ सुहागरात मन ली उसी तरह उसकी बीवी ने भी उसके नक़्शे कदम पर चलते हुए उससे पहले hi एक जमादार के साथ सुहागरात मन डाली. हवेली के अंदर आने के बाद पहले उसने सोचा की नेहा के कमरे में जाकर उससे बात करे पर हवेली में काफी चेहेल पहल थी और रात भी काफी हो चुकी और वो भी अधनंगा था इसलिए फिलहाल उसने अपने कमरे में जाना hi सही समझा. विक्रम की सबकी नज़रो स बचता हुआ अपने कमरे में चला गया इधर नेहा भी वापस खिड़की के रास्ते से अपने कमरे में पहुंच गई थी.

नेहा को थोड़ा गिल्ट तो था की उसने कही न कही अपनी एक बेस्ट फ्रेंड को धोका दिया पर वो इस बात को भी ये सोच कर जस्टिफाई कर रही थी की जब उस सहेली का पति hi उसके साथ दो रात से बड़सम का खेल खेल रहा है उसे नंगा कर रहा है उससे अपना लुंड चुसवा रहा है तो इसमें उसकी क्या गलती जब पिछली दो रातो में उनके बीच इतना कुछ पहले hi हो चूका था तो आज अगर ये सब हो भी गया तो कौनसी बड़ी बात हो गई और इस बारे में कौनसा शोभा को कुछ पता चल जाएगा. मई तो वैसे भी 3 दिन में यहाँ से चली जाउंगी उसके बाद विक्रम पूरा का पूरा शोभा का hi है वो अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी में खुश रहे. वही विक्रम भी अपने कमरे में यही सोच रहा था की नेहा अचानक से वह यु बिना कपड़ो के क्यों आई क्या आज सुबह उसे कसरत करते हुए देख कर वो उसकी हटती कटती बॉडी की तरफ अट्रैक्ट हो गई थी और उसने उसे तालाब की तरफ आते देख लिया था तो उसे सडके करने के लिए इस तरह बिना कपड़ो के उसके पीछे पीछे आ गई. है यही हुआ होगा पर इस बारे में शोभा को पता नहीं चलना चाहिए अगर उसे पता चल गया तो पिताजी की इतनी कठिन साधना के बाद भी हमारी शादीशुदा ज़िन्दगी बर्बाद हो जाएगी और अगर ऐसा हो गया तो मई पिताजी को क्या जवाब दूंगा. मुझे कल सुबह नेहा से कहना होगा की इस बारे में शोभा को धोके से भी पता नहीं चलना चाहिए अच्छा हुआ वह हमारे बीचे जो कुछ हुआ वो किसी ने देखा नहीं.

विक्रम और नेहा दोनों hi इस बात से पूरी तरह अनजान थे उनका ये राज़ अब सिर्फ उन दोनों के बीच की बात नहीं रह गई थी. कोई तीसरा भी उस राज़ का राज़दार बन चूका था. और उसने न सिर्फ इस पूरी घटना को देखा था बल्कि उसे अपने मोबाइल में रिकॉर्ड भी कर लिया था. विक्रम तो इस बात से भी अनजान था की उसकी ज़रा सी िग्नोरिंग ने शोभा को भी कितनी बड़ी गलती करने पर मजबूर कर दिया. आज रात उस हवेली में जो कुछ था वो मात्रा एक कोइंसिडेन्स था या नहीं ये तो वक़्त hi जनता था पर विक्रम नेहा भीमा शोभा के बीच जो कुछ भी हुआ उसकी वजह से भविष्य में कुछ बड़ा घटित होने वाला था इतना तै था और इन चारो के अलावा वो शिक्षा जो अब भी सब रीडर्स के लिए एक रहस्य hi बना हुआ था उसने इस रात को और भी ज्यादा रहस्यमै बना दिया था. क्या मकसद था उसका इस रिकॉर्डिंग के पीछे क्या करने वाला था वो इसके साथ क्या वाकई में वो केवल एक बड़सम का शौक़ीन इंसान भर था जो बस नेहा की हॉटनेस पर फ़िदा होकर उसके साथ बड़सम का गेम खेल रहा था या असली गेम इससे कही ज्यादा गहरा था. जो भी था वो आने वाले दिनों दुनिया के सामने आने वाला था.

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ा डेंजरस गेम इस अबाउट तो बिगिन
 
लालू का फार्महाउस

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लालू का असली चेहरा शबाना के सामने आ चूका था जिस लालू पर भरोसा करके वो यहाँ अकेली उसके फार्महाउस पर आ गई थी उसीने उसे अपने मवाली दोस्तों के सामने तश्तरी में परोस कर रख दिया था. शबाना को अब अपनी गलती का एहसास हो रहा था एक गलती को छुपाने के चक्कर में वो पूरी तरह उनके जाल में फस चुकी थी. पर अब उस गलती को सुधरने ने बहुत देर हो चुकी थी.

एक छोटी सी पंतय में शबाना वह उन भेडियो के बीच बेबस लाचार सी पड़ी थी और वो भेडियो उसे नोच खाने को तैयार हो रहे थे. देव कुंदन प्रताप ने अपनी अपनी जेब से वो ड्रग्स की पुड़िया निकली उसका पाउडर अपनी हथेली में लिया और अपनी नाक उसके करीब लेकर उसका एक ज़ोरदार काश भरा.

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वो ड्रग्स वाकई इतनी ज़ोरदार थी की एक काश में hi उनके दिमाग में अंदर तक उतर गई. उस ड्रग्स का असर उनकी आँखों में भी साफ़ नज़र आ रहा था उनकी आँखे खून सी सुर्ख लाल हो गई थी. शबाना उनके सामने हाथ जोड़े बैठी थी की शायद उनमे से किसी को तो उस पर रेहम आ जाए. पर ड्रग्स के नशे में चूर वो तीनो आहिस्ता आहिस्ता शबाना की तरफ बाद रहे थे और लालू शबाना की बर्बादी के हर पल का पूरा लुत्फ़ ले रहा था एक झापड़ का न जाने कितना बदला लेने वाला था वो. वह अगर किसी को शबाना पर तरस आ रहा था तो वो चांदनी थी पर वो भी बेबस थी वो चाहते हुए भी शबाना को बचने के लिए कुछ नहीं कर सकती थी. न जाने वो तीनो शबाना के साथ क्या करने वाले थे पर जो भी था वो बेहद बर्बर और खौफनाक होने वाला था.

वो तीनो शबाना के अगल बगल आकर बैठ गए और उसके बदन को अपने हाथो से यहाँ वह सहलाने लगे पर शबाना ने उन तीनो को परे धकेल कर खड़े होकर हॉल के दरवाज़े की तरफ दौड़ पड़ी और जैसे hi उस दरवाज़े को खींच कर खोलने की कोशिश की वो दरवाज़ा बहार से बंद था. वो तीनो वही बैठे डाट निकला कर है रहे थे.

देव: हेहेहे यार लालू ये तितली तो बड़ा फड़फड़ा रही है.

लालू: तो पर कुतर दो साली के साडी फड़फड़ाहट ख़तम हो जाएगी.

देव कुंदन प्रताप एक बार फिर दरवाज़ा पीट रही शबाना की तरफ बड़े. शबाना उन्हें अपनी तरफ आते देख रही थी पर उसके पास भागने की कोई जगह hi नहीं थी. कुंदन ने पीछे से शबाना को बालो को अपनी मुट्ठी में जकड लिया और उसे बालो से घसीटता हुआ वापस हॉल के बीच में ले आया. और हॉल के बीच में लेकर एक तेज़ झापड़ शबाना के गाल पर रसीद कर दिया. शबाना ौंधे मुँह लड़खड़ा कर ज़मीन पर जा गिरी. शबाना ने उठने की कोशिश करि पर देव और प्रताप ने उसकी टांगो पर अपनी टाँगे रख दी. शबाना दर्द से तड़प उठी पर उसकी दर्द का भी उन दरिंदो पर कोई असर नहीं हो रहा था.

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देव और प्रताप शबाना की टांगो पर टांग रखे खड़े थे और कुंदन ज़मीन पर गिरी शबाना के सामने आकर बैठ गया और शबाना की सर को बालो से पकड़ कर उठा कर एक के बाद एक 10 - 12 झापड़ उसके दोनों गालो पर रसीद कर दिए. शबाना के गाल कुंदन के झापडो से लाल पद गए थे पर फिर भी वो खुद को छुड़ाने की पुरज़ोर कोशिश कर रही थी.

कुंदन: बहुत चिल्ला रही है तू जितना चिल्लाएगी तुझे उतनी hi ज्यादा तकलीफ होगी. अब तू सोच ले तू कितनी तकलीफ झेल सकती है. लगता है तुझे एक डेमो देना होगा.

कुंदन शबाना के सामने से उसके कूल्हों के करीब आया उसकी पंतय को अपने दोनों हाथो की मुट्ठी में भरा और एक झटके उसकी पंतय को दो टुकड़ो में पहाड़ कर उसके जिस्म से अलग कर दिया. शबाना को पूरा नंगा करने के बाद कुंदन ने देव और प्रताप को इशारा करा और देव ने शबाना के हाथ और प्रताप ने उसके पैरो को जकड लिए. कुंदन ने शबाना की फटी हुई पंतय को उसके मुँह में ठूस दिए. उसके बाद कुंदन ने खड़े होकर अपनी पंत से चमड़े की बेल्ट निकाल ली. शबाना बेबस से कुंदन को अपनी बेल्ट निकलते देख रही थी पर हाथ पेअर जकड़े होने की वजह से वो हिल नहीं सकती थी और मुँह में कपडा ठूसा होने की वजह से कुछ बोल नहीं सकती थी. बस गर्दन हिला कर उनसे रेहम की भीक मांग रही थी.

देव और प्रताप शबाना को जकड़े हुए थे और कुंदन ने अपनी बेल्ट से शबाना के कूल्हों पर बेल्ट से मारना शुरू कर दिया.

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शबाना दर्द से चीख रही थी पर उसकी चीख भी उसके मुँह में hi घुट कर रह जा रही थी. कुंदन जानवरो की तरह शबाना को बेल्ट से मार रहा था शबाना की आँख का काजल बहकर उसके गालो तक आ गया था. वो दर्द से तड़प रही थी चांदनी की आँखे भी आसुओ से भर आई थी पर सिवाए रोने के वो कुछ नहीं कर सकती थी. पुर उन जल्लादो को शबाना के दर्द में भी मज़ा आ रहा था खासकर कुंदन को. कुंदन ताबड़तोड़ शबाना के चूतड़ों पर बेल्ट बरसाए जा रहा था हर मार पर शबाना का पूरा बदन हिल जाता जाता था लालू को भी शबाना की घुटी घुटी चीखो उसकी छटपटाहट में बड़ा मज़ा आ रहा था. शबाना मार खा खा कर बेदम सी हो गई थी उसकी चूतड़ों में खून छलक आया था उसके चूतड़ मार खा खा कर नीले पद गए थे.

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लालू: अबे इतना मत मारना की मर hi जाए ध्यान रखना कल इसे ज़िंदा ले जाना है वापस.

कुंदन: ओह है यार मई तो भूल गया था की इसे ज़िंदा वापस ले जाना है भावनाओ में बह गया था.

कुंदन ने बेल्ट मरना बंद कर दिया और शबाना के कानो में फुसफुसाकर बोलै: कैसा लगा बेबी मज़ा आया बोलै था न जितना ज्यादा छटपटाएगी उतना ज्यादा तकलीफ होगी.

शबाना बेबस सी नंगी फर्श पर पड़ी थी. इधर देव कुंदन प्रताप ने भी अपने बदन के कपडे उतार कर वही फर्श पर दाल दिया. अब वो तीनो भी शबाना की तरह पुरे नंगे थे और दुर्गस्य के प्रभाव के कारन उनके लुंड कुछ ज्यादा hi फूले हुए और तने हुए हवा में लहरा रहे थे. तीनो के लुंड एक से बढ़कर एक लम्बे थे कुंदन का लुंड तो बदन से भी ज्यादा बदसूरत और काला था और बालो से भरा हुआ था. नंगे होने के बाद प्रताप ने शबाना को बालो से पकड़कर उठा कर बिठा दिया उसके मुँह में ठुसी उसकी पांच को बहार निकल दिया और तीनो शबाना के इर्द गिर्द उसे घेरकर खड़े हो गए हुए उसके चेहरे के सामने अपने लुंड लहराने लगे. वो तीनो शबाना के चेहरे पर यहाँ वह अपने लुंड रगड़ रहे थे और शबाना अपना चेहरा हिला दुलकर बचने की हर संभव कोशिश कर रही थी. देव का लुंड शबाना के ठीक सामने और बार बार उसके होंठो को छू रहा था और उसके मुँह के अंदर दाखिल होने के लिए ज़ोर लगा रहा था. पर शबाना इतनी मार खाने के बाद भी अपने होंठो को कास कर जकड़े थी और देव को परे धकेलने की हर संभव कोशिश कर रही थी.

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देव: साली रुंडी की औलाद मुँह खोल कुटिया साली चल मुँह खोल.

पर देव के गाली देने के बावजूद शबाना उसे पीछे धकेल रही थी. एक औरत का इतना विरोध वो भी इतनी मार खाने के बाद उन हैवानो की बर्दाश्त के बहार था और ड्रग्स के नशे में उनका गुस्सा और बाद गया था. कुंदन की नज़र सिगरेट के काश भरते लालू पर पड़ी जो उन्हें देख कर है रहा था.

लालू: क्या हुआ एक दो टेक की औरत का मुँह नहीं खुलवा पा रहे तुम तीनो मिलकर मैंने अकेले इसका बंग करा था इसकी साड़ी अकड़ मिटटी में मिला दी थी और तुम साले तीन तीन मिलकर भी कुछ नहीं कर पा रहे. लानत है तुम लोगो की मर्दानगी पर, आए चांदनी अपनी कुछ चुडिया लेकर दे दे इन्हे क्युकी मर्द तो लगते नहीं ये.

लालू के इस टॉन्ट ने उनके गुस्से को और भड़का दिया था और लालू ने जानबूझ कर उनका गुस्सा भड़काया था क्युकी वो जनता था की उनका सारा गुस्सा शबाना पर निकलेगा और यही वो चाहता था.

कुंदन लालू के पास गया और उसके होंठो वो सिगरेट खींच ली उसका एक गहरा काश भरा और वो सिगरेट लेकर वापस शबाना के करीब आ गया और एक बार फिर उसके कान में फुसफुसा कर कहा.

कुंदन: बड़ी अड़ियल घोड़ी है तू तुझे इतना समझाया की ज्यादा अकड़ मत देखा जितना विरोध करेगी उतनी ज्यादा तकलीफ होगी डेमो भी दिया पर तुझे समझ नहीं आया. कोई बात नहीं हमे अड़ियल घोडियो को सीधा करना अच्छे से आता है. आए प्रताप चल घोड़ी बना इसे.

कुंदन के कहने पर प्रताप ने शबाना की गर्दन को अपनी बगल में दबाकर घोड़ी बना दिया. देव अब भी शबाना के सामने अपना लुंड टांग खड़ा था और कुंदन उस सिगरेट के काश भरता हुआ घोड़ी बानी शबाना के पीछे उसके चूतड़ों के पास आकर खड़ा हो गया. कुछ पल वो शबाना के बड़े बड़े कूल्हे जो बेल्ट की मार लाल हो गए थे उन्हें प्यार से सहलाता रहा और अगले hi पल उसने वो जलती हुई सिगरेट शबाना के कूल्हों पर मसल दी. पूरा हॉल शबाना की चीख से गूँज उठा, शबाना दर्द से तड़प उठी उसका असहनीय पीड़ा देख चांदनी की आँखे भी आंसुओ से भर आई.

पर बेचारी शबाना ज्यादा देर चीख कर अपने दर्द का इज़हार भी न कर पाई. चीखने के लिए उसके खुले मुँह में hi देव ने अपना लुंड एक झटके में अंदर तक पेल दिया.

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और ताबड़तोड़ उसके मुँह में अपना लुंड अंदर बहार करने लगा. देव का लुंड भी काफी तगड़ा और फूला हुआ था और शबाना के मुँह के अंदर तक जा रहा था, देव शबाना को सांस लेने तक का मौका नहीं दे रहा था. देव ने आगे से शबाना की हालत ख़राब कर राखी थी और इधर पीछे से कुंदन ने अपने होंठ शबाना की लाल लाल फूली हुई गांड में बने सिगरेट के जलने के निशाँ पर रख दिए. एक पल को शबाना तड़प कर रह गई पर धीमे धीमे जब कुंदन ने उस जले पर अपनी जीभ से चेतना शुरू करा था जीभ का गीलापन उसे अपने जले पर थोड़ा ठंडा एहसास भी दे रहा था. देव और कुंदन को अपने अपने काम में लगा देख कर प्रताप का लुंड भी झटके खा रहा था उससे वह खड़े खड़े उन दोनों को शबाना के जिस्म से खेलते नहीं देखा जा रहा था इसलिए वो भी शबाना के पीछे से ज़मीन पर लेट कर उसकी जांघो के बीच घुस गया और सीधा अपने होंठ शबाना की पहली हुई छूट पर रख दिए. अब देव शबाना के मुँह में धक्के पे धक्के लगाए जा रहा था तो कुंदन उसके चूतड़ों पर हद से ज्यादा बर्बरता करने के बाद उन्हें बड़े प्यार से चूम चाट रहा था वही प्रताप की जीभ शबाना की छूट की दरारों के अंदर दाखिल होकर उसकी छूट की गहराई को नाप रही थी. शबाना एक साथ उन तीन मर्दो के हाथ का खिलौना बानी हुई थी.

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देव शबाना के मुँह में अपना लुंड पेले जा रहा था शबाना के मुँह की गर्माहट भी उसके लुंड को नहीं झड़वा पाई थी शायद ड्रग्स के प्रभाव के कारन उसके लुंड के झड़ने का टाइम बाद गया था. वही शबाना की छूट को छत्ते छत्ते प्रताप सरक कर चौपाया बानी शबाना के पूरा नीचे तक आ गया की उसका चेहरा देव के धक्को के कारन हिलते शबाना के मोठे मोठे दूध के नीचे आ गया था. और इतनी सुन्दर बड़ी बड़ी चूचियों के इतना करीब होकर इन्हे मुँह में लेने से खुद को रोकना तो बड़े से बड़े शरीफजादो के लिए भी नामुमकिन था फिर भला प्रताप कहा रुकने वाला था. उसने बिना देर किये शबाना को अपनी बहो के भरकर उसकी एक चुकी को अपने मुँह में भर लिया. ये बताने की ज़रूरत नहीं थी की प्रताप का बड़ा सा मुँह भी शबाना के पुरे दूध को अपने मुँह में भरने में नाकाम सिद्ध हुआ. वही कुंदन ने शबाना की गांड के बीच की दरार को चौड़ा करके अपनी नानक उस दरार में घुसेड़ दी और शबाना के चूतड़ों से आती मादक महक को सूंघने लगा. शबाना की गांड को सूंघते सूंघते कुंदन ने अपनी जीभ से शबाना की गांड को चेतना शुरू कर दिया. कुंदन अपनी जीभ से शबाना की गांड की दरार को ऊपर से नीचे तक चाट रहा था. तीन तीन मर्द के कामुक खिलवाड़ की वजह से शबाना का तो उत्तेजना के मारे बुरा हाल हो रहा था.

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देव शबाना का मुँह छोड़ते हुए 10 मं से ज्यादा हो गया था शबाना का जबड़ा दर्द करने लगा था पर देव रुकने का नाम नहीं ले रहा था. शबाना ने उसे पीछे धकेलने की बहुत कोशिशे की पर उसकी पकड़ इतनी कर्री थी की शबाना का हर विरोध बेकार था. प्रताप कभी शबाना के एक चुके को मुँह में लेता तो कभी दुसरे को जैसे बछड़ा गई के नीचे खड़ा होकर उसके थान पीटा है वैसे hi प्रताप शबाना के दूध पी रहा था. वही शबाना की गांड को छत्ते छत्ते कुंदन शबाना को पीछे से उचका कर अपनी जीभ शबाना की छूट तक ले आया. कुंदन ने शबाना की छूट की फैंको को अपने होंठो में भर लिया और उन्हें होंठो के भर कर चूसने लगा. शबाना की छूट की गर्माहट को महसूस करने भर hi कुंदन का काला भुजंग लुंड झटके पे झटके खा रहा था तो शबाना के नीचे लेते उसके नरम मुलायम स्तनों को चूसते प्रताप के लुंड का भी यही हाल था. बार बार कुंदन और प्रताप के झटके कहते लुंड एक दुसरे से टकरा रहे थे.

ये सब अपनी मर्ज़ी के खिलाफ होने और असहनीय पीड़ा झेलने के बाद भी शबाना थी तो एक औरत hi और एक आवर्त के जिस्म की मर्यादाओ से बंधी थी. वो लाख कोशिशों के बावजूद अपनी बदन की उत्तेजना को काबू नहीं कर सकती और चाँद पालो में hi ये उत्तेजना उसकी छूट से झड़ने को मजबूर हो गई. शबाना की उत्तेजना का पूरा रूस उसकी छूट को मुँह में भरे कुंदन के मुँह में समां गया. उत्तेजना के नशे में मदमस्त होकर न चाहते हुए भी अनजाने में शबाना देव के लुंड को अपने होंठो में कसने को मजबूर हो गई. देव का लुंड पूरी तरह शबाना के मुँह में कैद हो गया और झड़ने के बाद शबाना के मुँह से उठती गरम गरम आहे सीधा देव के लुंड से टकरा रही थी. और देव का लुंड ज्यादा देर इन गरम गरम ाहो को बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसके लुंड से निकलता वीर्य सीधा शबाना के हलक से नीचे तक उतरता चला गया.

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शबाना को वो वीर्य बहार थूकने का मौका hi नहीं मिला और उसे ये वीर्य पीने को मजबूर होना पड़ा पर ये तो उसकी आज की वीर्य की पहली खुराक थी अभी तो उसे बहुत कुछ लेना था.
 
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