नीतू की तरफ से कोई हरकत होती न देख अघोरी ने दुबारा अपनी बात को दोहराया पर इस बार थोड़ा सख्त लहज़े में.
अघोरी: क्या बात है अभी तो आप मुझसे कह रही थी की मई आपकी आज की साधना संपन्न करा दू और अब जब मई आपको उस तंत्र घेरे में लेटने को कह रहा हु तो आप वह बैठी है.
अघोरी के यु दुबारा कहने पर नीतू उठकर उस तंत्र घेरे में जाकर लेट गई.
पर अब तक अघोरी नीतू की तरफ नहीं पलटा था और नीतू तो अघोरी का लुंड देखने लो व्याकुल थी. एक 7.5 फुट के काले हब्शी अफ्रीकन मर्द का लुंड कितना लुम्बा होगा वो देखने को एक्ससिटेड थी. पर शायद अघोरी अब भी इसमें थोड़ा झिझक रहा था.
नीतू: जी बाबा मई लेट गई हु इस घेरे में.
नीतू के बोलने पर अघोरी उसकी तरफ घूम गया. अघोरी के अपनी तरफ घुमते hi नीतू की नज़र सीधा उसके उसी अंग पर गई जिसे देखने के लिए वो हद से ज्यादा एक्ससिटेड थी उसके लुंड पर. नीतू समझ रही थी की अघोरी का रंग hi कला है पर उसका लुंड की कालिमा देख उसका ये वहां दूर हो गया उसका लुंड तो उसके जिस्म से भी ज्यादा काला था. लुंड पर बालो का इतना ज्यादा गुच्छा की मनो सादिया बीत गई हो वह के बाल साफ़ करे. वो लुंड इस वक़्त अपनी झुकी हुई यानि मुझे हुई अवस्था में था पर इस हालत में भी उसकी लम्बाई 7-8 इंच कम नहीं होगी जितनी एक आम मर्द के तने हुए लुंड की होती है. नीतू साधना तो सब भूल hi गई थी अघोरी को अपने सामने नंगा खड़ा देख उसके दिमाग में बस यही चल रहा था की जब ये लुंड अपने पूर्ण अकार में आएगा तो कितना लुम्बा होगा. और जब वो विकराल लुंड उसके अंदर जाएगा तो वो कैसे उसे झाले पाएगी. पर अभी तो अघोरी बस आज की साधना के लिए तैयार हुआ है कल उसे सम्भोग के लिए तैयार करना तो बाकि है. पहले वो तैयार तो हो उसके बाद झेलने की बात आएगी. अघोरी यही सब सोच रही थी की अघोरी ने वो सिन्दूर और रख से भरी दोनों थाल उठाई और उन्हें लेकर नीतू की तरफ आने लगा. इस नग्न मुद्रा में चलते हुए आने पर उसका लुंड इधर उधर हिल रहा था जो नीतू के एक्ससिटेमेंट को और भी ज्यादा बड़ा रहा था. अघोरी वो दोनों थाल लेकर नीतू की योनि के समीप आकर बैठ गया, नीतू बिना झिझक एक हब्सी अघोरी के सामने अपनी छूट खोल कर लेती थी.
साधना आरमभ करने से पहले नीतू को साधना के बारे में बताना आरम्भ करा.
अघोरी: साधना शुरू करने से पहले आपको इस साधना के बारे बताना ज़रूरी है. किसी शुद्ध पवित्र पूजा में हम पांच पवित्र चीज़ो का प्रयोग करते है दूध दही शहद जल और चीनी पर आज जो हम करने जा रहे है वो कोई पूजा नहीं है एक तांत्रिक क्रिया है जिसमे हम पटल के अंधकारमय शक्तियों की साधना कर रहे है इसलिए इसमें इन शुद्ध पवित्र चीज़ो का प्रयोग वर्जित है. पर इस तांत्रिक क्रिया में भी 5 चीज़ो का hi प्रयोग किया जाएगा. पर ऐसी 5 चीज़े जो सिर्फ तांत्रिक क्रिया में hi प्रयोग की जा सकती है. और उन 5 चीज़ो में पहली चीज़ है सिन्दूर और दूसरी है एक ताज़ी नै चिटा की रख. इस थाल में ये लाल सिंडोर है जिसका तंत्र क्रिया में विशेष महत्व है और ये राख मई एक ताज़ी चिटा में से लेकर आया हु. और इन दोनों चीज़ो को बारी बारी आपके योनि पर लगाया जाएगा अंदर बहार हर जगह और मई मंत्रो द्वारा आपकी योनि में हदीस की शक्तियों का आवाहन करूँगा.
छूट के अंदर सिन्दूर और चिटा की रख लगाने की बात सुनकर नीतू को थोड़ा अजीब लगा क्युकी वो साइंस की स्टूडेंट थी और इस तरह की चीज़े छूट के अंदर लगाने से इन्फेक्शन का खतरा था इसलिए उसने अघोरी के सामने अपनी चिंता ज़ाहिर करदी.
नीतू: बाबा मई आपकी साडी बात मानूगी पर बहार लगाना तो ठीक है पर ये सिन्दूर और किसी की चिटा की राख को छूट के अंदर लगाने से उसमे इन्फेक्शन तो नहीं हो जाएगा.
अघोरी: तंत्र में ऐसी बहुत सी चीज़े होती है जो विज्ञान की नज़र में गलत है पर तंत्र और विज्ञान दो विरोधाभासी चीज़े है तुम एक साथ उन दोनों पर विश्वास नहीं कर सकती. विज्ञान तंत्र को नहीं मंटा और तंत्र को विज्ञान के नियमो से कोई सरोकार नहीं है. इसलिए यदि तुम्हे तंत्र पर पूरी तरह विश्वास और आस्था हो तभी इस साधना को आगे बढ़ाओ वर्ण ये विज्ञान का ज्ञान मत दो.
नीतू: माफ़ करदे बाबा मई तो बस पूछ रही थी. आप करिये आपको जो सही लगता है.
अघोरी ने उस सिन्दूर की थल से पूरा मुट्ठी भर सिन्दूर उठा लिया और हाथ में नरमुंड लेकर उन्हें ऊपर उठा कर हदीस का आवाहन करने लगा और मन hi मन कुछ मंत्र बड़बड़ाते हुए उस सिन्दूर को नीतू की योनि के ऊपर फ़ेंक दिया.
अघोरी: ऐ हदीस अन्धकार की दुनिया के बेताज बादशाह, सिन्दूर सुहाग का प्रतिक है जो स्त्री उसीके नाम ला लगाती है जिसे वो अपना कौमार्य देती है. मई आपके नाम का ये सिन्दूर इसकी योनि पर लगा रहा हु जो इस बात का प्रतिक है की ये अपना कौमार्य आपको अर्पित कर रही है. इसका कौमार्य दान को स्वीकार करके इसकी योनि को जागृत करे हदीस.
अघोरी ने वो अपना हाथ सीधा नीतू की योनि पर रख दिया और अपनी हथेली से उस पर बिखरा सिन्दूर उसके चारो तरफ मलने लगा. अघोरी की खुरदुरा हथेली का स्पर्श नीतू को उत्तेजित कर रहा था. ऊपर मलते मलते अघोरी ने अपनी ऊँगली उसकी छूट के अंदर दाल दी.
अपनी छूट में इतनी मोती ऊँगली दाखिल होते hi उत्तेजना में नीतू की आँखे बंद और मुँह खुल गया. अघोरी ने वो सिन्दूर नीतू की छूट की दीवारों तक में मॉल दिया. जीवन में पहली बार कोई चीज़ उसकी छूट में दाखिल हुई थी और ये उनकी उत्तेजना बढ़ाने के लिए काफी था. नीतू यही सोच रही थी की जब ऊँगली की मोटाई इतनी ज्यादा है तो लुंड की क्या होगी. नीतू की योनि पर सिंदुर लगाने के बाद अघोरी ने थल का बचा हुआ सिन्दूर नीतू के पुरे बदन पर उड़ेल दिया. नीतू का पूरा बदन सिन्दूर से लाल हो गया था.
सिन्दूर के बाद अघोरी ने वो चिटा की राख वाली थल में से मुट्ठी भरके राख उठाई.
अघोरी: कहते है चिटा जलने के बाद भी कुछ वक़्त तक उसकी राख में आत्मा का वास होता है और वो आत्मा इस दुनिया और उस दूसरी दुनिया को आपस में जोड़े रखती है. मई ये ताज़ी चिटा की राख इस कुंवारी कन्या की योनि पर लगा रहा ताकि इसकी योनि का उस दूसरी दुनिया से संपर्क जुड़ जाए. और वो अँधेरी दुनिया की आत्माए इस योनि को जागृत करने में मेरी मदद करा. ऐ अँधेरी दुनिया की आत्माओ मेरा आवाहन स्वीकार करो.
इतना कह कर अघोरी ने वो चिटा की राख भी नीतू की योनि पर मॉल दी. और फिर पहले वाली प्रक्रिया दोहराते हुए वो राख नीतू के योनि के अंदर लगाई और वो थल भी नीतू के बदन पर उड़ेल दी. नीतू का पूरा बदन सिन्दूर और राख से सराबोर था. साधना में दो चीज़ो के प्रयोग के बाद अघोरी पुनः अपने स्थान से उठा और वापस बची सामग्री की तरफ चल दिया. नीतू वही लेते लेते उसे जाते हुए देख रही थी पीछे से उसके बड़े बड़े काळा काळा कूल्हे एक दुसरे से घर्षण करते बड़े आकर्षक लग रहे थे. अघोरी जब वो शराब की बोतल और कटोरा उठाने को झुका तो उसके नितम्ब थोड़ा खुल गए और उनके बीच का छोटा सा छेड़ नीतू को नज़र आ गया. शरीर कितना भी विशाल हो गांड का छेड़ सामान hi होता है. अघोरी वो शराब की बूटले और वो बड़ा से कटोरा लेकर पुनः नीतू के समीप आकर बैठ गया. आते वकग नीतू ने अघोरी के लुंड को देखा था इस बार उसमे हल्का तनाव साफ़ नज़र आ रहा था. और ये तनाव इस बात का प्रमाण था की कही न कही न एक स्त्री के योनि के स्पर्श का असर उस ब्रह्मचारी अघोरी पर भी हो रहा था और ये इस बात का संकेत भी था की ागत नीतू अपने प्रयास जारी रखे तो इस ब्रह्मचारी को अपना ब्रह्मचर्य भांग करके सम्भोग के लिए तैयार कर सकती है.
अघोरी: सिन्दूर और रख के बाद अब समय साधना में एक अगली दो चीज़ो के प्रयोग का. साधना में प्रयुक्त होने वाली तीसरी चीज़ है शराब. शराब का अन्धकार की दुनिया से विशेष सम्बन्ध है शराब तामस को अपनी तरफ आकर्षित करती है इसीलिए तनयरा साधनाओ में शराब का विशेष रूप से प्रयोग होता है. साधना में प्रयोग होने वाली चौथी वास्तु और वो चीज़ जिसकी महक की तरफ काली शक्तिया सबसे ज्यादा आकर्षित होती है वो है राखत यानि खून.
खून शब्द सुनकर नीतू की सिटी पित्ती गम हो गई उसका सारा एक्ससिटेमेंट दर में बदल गया. यानि उस बड़े से कटोरे में खून है मगर किसका किसी इंसान का या जानवर का.
और क्या ये खून भी उसकी योनि के अंदर जाएगा. ये सोच कर hi नीतू को उबकाई सी आ रही थी. पर पहले उसके लिए ये जानना ज़रूरी था की ये खून है किसका.
नीतू: अघोरी बाबा मतलब उस कटोरे में खून है.
अघोरी ने वो कटोरा नीतू के आगे कर दिया वो पूरा गाड़े लाल खून से भरा था. नीतू को तो उसे देखने में hi सर घूम सा रहा था.
नीतू: ये खून किसका है. किसी आदमी का या जानवर का.
अघोरी ये खून मुर्गे का है.
नीतू: मुर्गे का खून, और और क्या ये खून मेरी छूट मेरा मतलब है योनि के अंदर डाला जाएगा.
अघोरी: बेशक जब काली शक्तियों को आपकी योनि की तरफ आकर्षित करना है तो सभी वस्तुए भी वही डाली जाएगी. क्यों क्या फिर आपका विज्ञानं इसके बीच में आ रहा है. या तो आप अपनी समस्या का हल विज्ञान से करवा ले या तंत्र से फैसला आपको करना है.
नीतू: नहीं मई तो बस यही पूछ रही थी आप करिये आपको ठीक लगे.
अघोरी ने वो शराब की बोतल खोली अपनी उंगलियों के दबाव से नीतू की योनि का मुख थोड़ा खोला और शराब को नीतू की योनि के अंदर डालना शुरू कर दिया. कुछ पल में hi शराब नीतू की योनि से बहार ओवरफ्लो होने लगी. नीतू की योनि के शारब से भर जाने के बाद अघोरी ने उसमे शराब डालना बंद कर दिया और उस बोतल में बची शेष शराब नीतू के जिस्म पर खली कर दिया. नीतू की योनि से काफी शराब बह कर बहार आ चुकी और उसकी योनि फिर खली हो चुकी थी.
शराब की विधि पूरी होने के बाद अघोरी ने रखता से भरा कटोरा उठाया. अघोरी के हाथो में खून से भरा प्याला देख नीतू ने घिन के मरे आँखे बंद कर ली. हलाकि वो बंगाली थी और मछली कहती थी पर खून को अपनी छूट में डालना अलग बात है. नीतू के सरे एक्ससिटेमेंट की ैया लग गई थी जब अघोरी उसके सामने नंगा हुआ था तब उसे लगा था की इस नग्न अवस्था में पता नहीं क्या क्या होगा पर ये सब होगा इसकी तो उसने कल्पना भी नहीं की थी. नीतू ने एक बार फिर अपनी योनि पर अघोरी की उंगलियों का दबाव महसूस करा और अगले hi पल उसे अपनी योनि के अंदर कुछ गरम गरम गीला गीला सा महसूस हुआ. नीतू समझ गई की अघोरी ने वो खून उसकी योनि के अंदर डालना शुरू कर दिया है. योनि से राखत के ओवरफ्लो होने पर अघोरी ने रखता डालना भी बंद कर दिया और प्याला का बाकि सारा राखत नीतू के बदन पर खली कर दिया.
नीतू ने तो कास कर अपनी आँखे बंद कर्ली थी अघोरी को नंगा देखना का सारा एक्ससिटेमेंट उड़न छू हो गया था. खून की महक को बर्दाश्त करना भी उसके लिए मुश्किल हो रहा था 4 चीज़ो में hi उसकी हालत ख़राब हो गई थी और अभी तो पांचवी वास्तु का प्रयोग बाकि था.
अघोरी: दुर्गन्ध और काली आत्माओ का आपस में विशेष नाता है इसी लिए जहा इस तरह की काली आत्माए होती वह से अजीब सी दुर्गन्ध अति है. इस साधना के पांचवी वास्तु में आपके शरीर को दुर्गन्ध से भरा जाएगा ताकि उसकी महक उन काली आत्माओ को आकर्षित करे. इसलिए इस साधा में प्रयोग होने वाली पांचवी और आखिरी वास्तु है मानव मूत्र यानि पेशाब.
नीतू: जी मतलब
अघोरी: मतलब मई आपके शरीर पर पेशाब करूँगा.
नीतू को पहले hi उबकाई सी आ रही थी और अब अघोरी उसके ऊपर मूतने वाला था. वो एक सोफेस्टिकेटेड हाइजीनिक बैंकर थी उसने सोचा भी नहीं था की उसे एक दिन ऐसी घिनौनी स्थिति का सामना करना होगा. नीतू कभी उन पब्लिक टॉयलेट्स में भी नहीं जाती थी जहा पेशाब की हद से ज्यादा बदबू आती थी. और यहाँ तो वो पूरा पेशाब से नहाने वाली थी.
अघोरी: आप तैयार है.
नीतू के पास कोई विकल्प नहीं था उसने हां में सर हिला दिया. नीतू के हां करते hi अघोरी उठ कर खड़ा हो गया. अब तक अपनी आँखे बंद करे लेती नीतू ने पल भर को अपनी आँखे खोली सामने वो आदम कद अघोरी पुरतः नग्न उस पर पेशाब करने को तैयार खड़ा था. नीतू ने एक बार अघोरी के बदन के सबसे आकर्षक अंग उसके लिंग को देखा जो अब काफी फूल चूका था पर अब भी वो अपने पूर्ण आकर में नहीं था. पर इतना तै था की नीतू का नग्न शरीर अपना असर दिखा रहा था. अघोरी ने अपने काले नाग को अपने हाथो में थम लिया और उसका निशाना नीतू पर कर दिया. नीतू ने भी फिर अपनी आँखे बंद कर अपने जबड़ो को कास कर भींच लिया और अगले hi पल अघोरी के लिंग से पेशाब की मोती धार निकल पड़ी जो सिद्घा नीतू के जांघो के बीच उसकी योनि पर आकर गिरी. योनि पर मूतने के बाद अघोरी ने पेशाब की धार को नीतू के पुरे बदन पर घुमाया और नीतू के जिस्म एक एक हिस्सा अपने मूत्र में सराबोर लार दिया उसका पेट उसके स्तन गाला यहाँ तक की उसका चेहरा भी.
न जाने कितना पेशाब भरा था अघोरी के अंदर करीब 10 मं तक वो नीतू पर मोटा रहा जब तक पेशाब की आखिरी बूँद तक खली नहीं हो गई. मूतने के बाद अघोरी दुबारा अपनी जगह पर बैठ गया और कुछ मंत्रो का जाप करने लगा.
अघोरी मॉस मदिरा का सेवन भी करता था इसलिए उसके पेशाब से हद से ज्यादा बदबू आ रही थी. उसका बदन की महक में शराब खून और पेशाब की बदबू का अजीब सा कॉकटेल सा बन गया था. नीतू के लिए एक एक पल काटना मुश्किल हो रहा था. नीतू के दिमाग में यही चल रहा था की ये साधना कब ख़तम हो गई और कब उसे इस बदबू भरे माहौल से मुक्ति मिलेगी. कुछ पल तो नीतू बर्दाश्त करती रही पर बदबू बर्दाश्त के बहार हो जाने पर नीतू बोल पड़ी.
नीतू: बाबा अभी मुझे कितनी देर इसी तरह लेता रहना होगा.
अघोरी: साड़ी रात
अघोरी के ये दो शब्द नीतू के कानो में गरम लोहे की उतारते चले गए.
नीतू: साड़ी रात मेरे लिए एक पल काटना भी मुश्किल हो रहा है मई साडी रात कैसे काट पाऊँगी.
अघोरी: मई इस दुर्गन्ध को तो दूर नहीं कर सकता पर आपकी तकलीफ ज़रूर ख़तम कर सकता हु.
नीतू: कैसे करिये जो संभव हो करिये पर इस बदबू से मुझे मुक्त करिये.
अघोरी ने अपने पास राखी एक पुड़िया नीतू को थमा दी.
नीतू: ये क्या है
अघोरी: इसमें एक चूर्ण है जिसे खा कर इंसान गहरी नींद में सो जाता है आप भी चाहे तो ये चूर्ण फांक सकती है इसे खाकर आप गहरी नींद में सो जाएगी और सुबह से पहले नहीं उठेगी और आपकी रात बिना दिक्कत के काट जाएगी.
नीतू को भी ये उपाय सही लगा उसने बिना देर करे वो चूर्ण अपने हलक के नीचे उतर लिया. कुछ पल बाद hi नीतू की पलके भरी भरी सी हो गई और नीतू गहरी नींद में सो गई. अघोरी यही नीतू के बगल में बैठे मंत्र जाप करते रहे.