A wedding ceremony in village - Page 10 - SexBaba
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A wedding ceremony in village

कब्रिस्तान

सूर्योदय होने को था अघोरी योग के माध्यम से अपनी उत्तेजना को काबू कर चूका था की अचानक उसके मोबाइल जो उसने लखन विनीता को पूजा की विधि समझने के लिए रखा था में लगा अलार्म बज उठा. यानि लखन विनीता को अगले गृह की पूजा की विधिया समझने का समय हो गया था और ये विधि सूर्योदय से पहले समझाना ज़रूरी था. अघोरी ने बिना देर किये लखन के नंबर पर कॉल लगा दी.

काकातुआ के जंगल

उस ब्लोजॉब के बाद बड़ी मुश्किल से विनीता और लखन की आँख लगी थी और वो कुछ घंटे hi सो पाए थे की अचानक से उनके फ़ोन की घंटी बज उठी. फ़ोन की घंटी से अचानक विनीता और लखन की आँख खुल गई. लखन ने तुरंत वो फ़ोन रइवे करा दूसरी तरफ अघोरी था.

अघोरी: आप दोनों उठ गए. (अघोरी ने जानबूझ कर कल रात की विधि के बारे में नहीं पुछा क्युकी वो कल रात के बारे में पूछ कर लखन को शर्मिंदा नहीं करना चाहता था.)

लखन: प्रणाम बाबा जी फ़ोन की घंटी की आवाज़ से हम दोनों उठ गए पर इतनी सुबह सुबह अपने कॉल करा अभी तो सूरज भी नहीं निकला.

अघोरी: मई जनता हु की अभी सूरज भी नहीं निकला और इसीलिए मैंने आपको अभी कॉल करि क्युकी आज की पूजा की पहली विधि आपको सूर्योदय के समय hi पूरी करनी है.

लखन: ऐसा क्या करना है हमे बाबा और आज किस गृह की पूजा करनी है हमे.

अघोरी: आज आपको ऐसे दो ग्रहो की पूजा करनी है जो ग्रहमाला का हिस्सा न होते हुए भी ग्रेहमाला और मनुषय के भाग्य से अनिवार्य रूप से जुड़े है. जिनका हमारी कुंडली में शेष ग्रहो की तरह एक महत्वपूर्ण स्थान है और जो हमारे भूत भविष्य वर्त्तमान तीनो समयकालो को प्रभावित करते है. हमारे जीवन से अंधकार को दूर करके ुए अपने प्रकाश से रोशन करते है.

लखन: आप सूर्य की बात कर रहे है.

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अघोरी: सही समझे सूर्य ग्रेहमाला का मुखिया सभी ग्रह उपग्रह जिसके चारो और चक्कर लगते है. जो दुनिया को अपने प्रकाश से रोशन करता है. आज सूर्योदय से सूर्यास्त तक आपको सूर्य पूजा की साडी विधिया पूरी करनी है. और उनमे से पहली विधि आपको सूर्योदय के समय hi करनी है सूर्यनमस्कार और जल समर्पण जिसमे आपको अपनी अर्धांगिनी के साथ सूर्य को जल का अर्घ्य देना है वो भी पूरी तरह शुद्ध होकर शुद्ध वस्त्र धयान करके. अभी मई ज्यादा विस्तार से नहीं बताऊंगा क्युकी उसमे सूर्योदय का समय निकल जाएगा. इसलिए आप दोनों शीघ्रता से स्नान करके अपने वस्त्रो में से शुद्ध वस्त्र धारण करले जैसे आपको यहाँ आने पर उपलभ्द कराए गए थे. और सूर्योदय के समय सूर्य को नमस्कार करते हुए उसे गंगाजल का अर्घ्य चढ़ाए. जब तक आप लोग स्नान करके बहार आएँगे गंगाजल से भरा कमंडल आपके लिए बहार रख दिया जाएगा.

लखन: जी बाबा

अघोरी: आगे की विधि मई आपको सूर्योदय के बाद बताऊंगा.

लखन: जी

इतना कह कर अघोरी ने फ़ोन रख दिया. कल रात की घटनाओ को भूलते हुए लखन विनीता ने भी आगे बढ़ने का निश्चय करा. और चुपचाप अपने कपड़ो में से कुछ कपडे उठाकर बारी बारी से नहाकर आ गए.

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लखन विनीता जब तैयार होकर बहार आए तो बहार हमेशा की तरह गंगाजल से भरा एक कमंडल दरवाज़े पर रखा था. लखन सिंह ने वो कमंडल उठा लिया और वो दोनों सूर्योदय का इंतज़ार करने लगे. शीघ्र hi पेड़ो के पीछे से सूर्य उदय होता नज़र आने लगा.

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लखन विनीता ने उस उगते हुए सूर्य को प्रणाम करके उसका आशीर्वाद लिया और प्रार्थना की ये सूर्य उन दोनों के जीवन के अंधकार को अपने प्रकाश से रोशन कर दे अपनी परेशानियों का सामना करके की ऊर्जा प्रदान करे. सूर्य नमस्कार के बाद लखन विनीता ने सम्मलित रूप से उस कमंडल में भरे गंगाजल से सूर्य को अर्घ्य समर्पित करा. सूर्य पूजा की पहली विधि पूरी करने के बाद लखन ने अघोरी को फ़ोन करा.

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लखन: बाबा सूर्योदय हो गया है और हमने सूर्य देवता को जल समर्पित करने की प्रथम विधि भी पूरी कर्ली है.

अघोरी: उत्तम आप दोनों कल यूरेनस नेप्तुने की कठिन विधिया पूरी कर्ली तो उनकी तुलना में आज की विधिया आपके लिए सरल है. आज आपको दुनिया को प्रकाश देने वाले दो देव ग्रहो की पूजा करनी है. देव गृह इसलिए क्युकी ग्रेहमाला का हिस्सा न होते हुए भी हमारे जीवन में इनका ख़ास स्थान है. जिनमे से एक है सूर्य, वैसे तो सूर्य का प्रकाश सदैव विद्यमान रहता है पर पृथ्वी के घूमने की वजह से इसके प्रकाश का स्वरुप बदलता रहता है. सूर्यास्त के पश्चात् एक अन्य नक्षत्र के माध्यम से पृथ्वी को सूर्य का प्रकाश मिलता है जो हमारा दूसरा देव गृह है जिसे हम चन्द्रमा कहते है. जो रात्रि में सूर्य को प्रकाश को शीतल करके सफ़ेद रूप में धरती को अँधेरे में नहीं डूबने देता है. और आज आपको प्रकाश के इन्ही दो स्रोर्तो सूर्य और च्नद्र की पूजा करनी है. किन्तु चाँद का अस्तित्व सूर्यास्त के बाद hi सामने अत है इसलिए चाँद की पूजा की विधिया आपको सूर्यास्त के बाद hi करनी है इसलिए उनके बारे में मई तब hi बताऊंगा. फिलहाल आप दोनों को सूर्य की पूजा संपन्न करनी है. जिसका प्रथम चरण अपने अभी अभी पूरा करा.

लखन: जी बाबा हमे क्या करना होगा.

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अघोरी: सूर्य जिसे ग्रीक माइथोलॉजी में मानव स्वरुप में अपोलो के नाम से जाना जाता है. सूर्य की पूजा आप लोग यहाँ नहीं करेंगे बल्कि बल्कि हमारे उस आश्रम में करेंगे जहा से अब तक आपको समय समय पर सामग्री उपलब्ध कराइ जाती रही है. सूर्य को न्याय का देवता मन जाता है और उसे उत्सव नृत्य संगीत और खेल की प्रतियोगिताएं बहित प्रसिद्ध है. विदेशो में भी सूर्य को प्रसन्न करने के लिए उत्सव का आयोजन किया जाता है जिसमे तरह तरह की प्रतियोगिता आयोजित की जाती है नृत्य संगीत किया जाता है. इसलिए आज इस देव गृह को प्रसन्न करने के लिए वह एक उत्सव का आयोजन किया गया है. प्रथम चरण आप दोनों ने पूरा कर लिया है अब दुसरे चरण में उत्सव स्थल प् 101 यज्ञ वीडियो पर सामूहिक रूप से सूर्य को पसनन करने के लिए यज्ञ करा जाएगा यज्ञ के पश्चात उस उत्सव में तीन चरण की एक प्रतियोगिता होगी जिनमे आप भी प्रतिभाग करेंगे छठे चरण में नाच गए कर सूर्य को प्रसन्न करा जाएगा. और फिर सातवे चरण में उन्ही 101 वीडियो में 101 जोड़ो का विवाह कराया जाएगा जिसमे व्यय होने वाला धन आपसे शुरुआत में लिया गया था. आके परिवार ने कई कन्याओ hi हत्या का जो पाप किया था वो 101 कन्याओं के इस समहूकी विवाह से मिलने वाले पुण्य से काफी हद तक नष्ट हो जाएगा इसलिए आज की ये सूर्य पूजा काफी महत्वपूर्ण है. सूर्यास्त के बाद चंद्र पूजा के बारे में आपको बताऊंगा फिलहाल आप दोनों बहार इंतज़ार करे शीघ्र hi आपको लेने एक रथ आएगा जो आपको उत्सव वाली जगह ले जाएगा जहा इस पूजा के अगले 6 चरण पुरे किये जाएंगे.

लखन: जी बाबा

विनीता लखन भी निश्चिन्त थे की सूर्य पूजा में उन्हें कोई ऐसा काम नहीं करना पद रहा जिसके लिए वो पूरी तरह तैयार न हो. और पिछले तीन दिन से दुनिया से पूरी तरह कटा हुआ जीवन जीने के बाद आज इस उत्सव की वजह से उन्हें थोड़ा मूड सही करने और रिलैक्स होने भी मौका मिलेगा, ये उत्सव उन्हें कल रात के अनुभव से बहार निकलने में भी मदद करेगा. विनीता लखन वही बहार रथ का इंतज़ार करने लगे. जल्द hi उन्हें रथ के पाइयो की आवाज़े सुनाई दी और पेड़ो के झुरमुट से निकल कर एक रथ उनके सामने आ खड़ा हुआ.

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रथ में 2 सफ़ेद घोड़े लगे थे और रथ भी बेहद सुन्दर था. रथ शायद इसीलिए भेजा गया क्युकी सूर्य देव का वहां भी रथ है जिसमे 7 घोड़े लगे होते है.

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रथ वाहक: आश्रम से आप दोनों के लिए ये रथ भेजा गया है आप दोनों इस पर बैठ जाए.

विनीता लखन दोनों रथ पर सवार हो गए और रथ पथरीले रास्तो में सरपट दौड़ता हुआ आश्रम की तरफ बाद चला. और कुछ घंटो के सफर के बाद लखन विनीता उस आश्रम में पहुंच गए जहा सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए उस उत्सव का आयोजन किया गया था. उत्सव स्थल को बहुत सुन्दर तरीके से सजाया गया था. मैदान में एक जगह एक विशाल शामियाना लगा था जक्सके अंदर 101 हवन कुंड बने थे जहा शुरुआत में हवन किया जाना था और अंत में इन्ही में 101 जोड़ो की शादी होनी थी.

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मैदान के एक कोने 7 रथ खड़े थे अब उनमे क्या होना था पता नहीं शायद उनका सम्बन्ध उस प्रतियोगिता से हो सकता है. मैदान के बीच में कोई विशाल मूर्ति राखी थी जो एक केसरिया रंग के कपडे से ढकी थी. वह काफी भीड़ थी ये शायद आज विवाह बंधन में बांधने वाले वो जोड़े और उनके परिवार वाले होंगे. एक कोने में ढोल नगाड़े वाले नृत्य संगीत वाले कलाकार भी मौजूद थे. लखन विनीता वह उत्सव की शोभा को निहार hi रहे थे की उन्होंने देखा की आश्रम से पुजारियों का एक दाल एक वृद्ध साधू के नेतृत्व में उनकी तरफ आ रहा था. जब वो साधू उनके समीप पहुंच तो लखन विनीता ने रथ से उतारकर उन्हें प्रणाम करा.

वृद्ध साडू: यशश्वी भाव अब तक आपको आपके घर के बहार जो भी बक्से मिलते थे वो हमारे यहाँ से hi भिजवाए जाते थे. मुझे आप लोगो की पूजा के बारे में बता दिया गया था इसलिए आपकी पूजा प्रारम्भ होने के पहले दिन से भी पहले से हम इस उत्सव की तैयारी कर रहे थे. आज आपसे प्राप्त धन से कई गरीब कन्याओं का विवाह संपन्न होगा जिसका पुण्य प्रताप आपके पुरे परिवार को मिलेगा. आपके परिवार ने कैनकन्यायो को पैदा होते hi मार दिया पर आज आपकी वजह से यहाँ आज 100 गरीब कन्याओं का घर बसेगा उनकी उनके परिवार की दुआए तो आपको मिलेगी hi जिनसे उस श्राप का असर कम हो जाएगा.

लखन: पुजारी जी मुझे नहीं पता था वो धन इस महान काम के लिए लिया जा रहा है वर्ण मई और धन दे देता. और मई आज प्राण लेता हु सिर्फ इसी वर्ष नहीं हर वर्ष इसी तरह गरीब कान्याययो का विवाह करवाऊंगा. पर पुजारी जी मेरा एक सवाल है.

साधू: निसंकोच पूछिए.

लखन: अघोरी बाबा ने बताया था की यहाँ 101 की शादी होगी वह उन वीडियो पर भी अंतिम अंक 101 दिख रहा और आप कह रहे की 100 जोड़े है शायद आप 101 की जगह 100 बोल गए.

साधू: जी नहीं मई सही बोलै आप से मिले धन से यहाँ 100 गरीब कन्याओं hi विवाह होगा.

लखन: फिर वो 101वि जोड़ी.

साधू: वो 101वि जोड़ी इस वक़्त मेरे सामने कड़ी है.

लखन विनीता आश्चर्य से एक दुसरे को देखने लगे.

लखन: पर पुजारी जी हमारा विवाह तो हो चूका है.

साधू: मई जनता हु आपका विवाह हो चूका है पर विवाह कब और किन परिस्थितियों में हुआ इससे आप दोनों भी भली भाति परिचित है. उस वक़्त मजबूरी में कोई दूसरा उपाय न होने की वजह से आनन फानन में आप दोनों की शादी संपन्न करा दी गई थी. पर उस वक़्त उस शादी के लिए न विनीता जी तैयार थी न hi शायद आप खुद. बल्कि अगर मई सही हु तो उससे पहले आप दोनों एक दुसरे को जानते तक नहीं थे बस अचानक से मजबूरी वश आप दोनों को एक दुसरे के साथ विवाह बंधन में बांधना पड़ा.

लखन: जी बाबा मैंने जिस स्त्री को बुलाया था उसका एक्सीडेंट..

साधू: मुझे पता है ये सब पर विवाह हमारे जीवन के 16 संस्कारो में सबसे अहम् संस्कार है और इतनी बड़ी पूजा में हे संस्कार को बस एक औपचारिकता के रूप में नहीं किया जा सकता. इसीलिए आज आपके सामने वो अवसर दुबारा आया है जब आप इस विवाह संस्कार एक औपचारिकता की तरह नहीं बल्कि दिल से कर सकते है. तीन दिन से आप दोनों सिर्फ एक दुसरे के संपर्क में है ऐसे में ज़ाहिर है आप दोनों एक दुसरे को भली भाटी समझ गए होंगे. एक दुसरे के प्रति आपके मन में कुछ अच्छे कुछ बुरे भाव भी बन गए होंगे. मई यहाँ प्रेम भाव की बात कर रहा.

साधू की बात सुनकर विनीता लखन दोनों सकपका गए की ये साधू क्या बोल गए.

साधू: आप लोग मेरी बात का गलत अर्थ न निकले मई जनता हु ये पहले से शादीशुदा है और मई इनकी शादीशुदा लाइफ पर कुछ टिपण्णी कर भी नहीं रहा. और यहाँ प्रेम शब्द से मेरा तात्पर्य प्रेमी प्रेमिका का प्रेम नहीं. प्रेम शब्द बहुत गहरा है उसे एक रिश्ते में सीमित मत करिये. आप अपनी बेटे अपने बहु के लिए ये पूजा कर रहे है यानि आप उनसे प्रेम करते है विनीता जी अपनी सहेली के लिए ये कर रही है यानि उन्हें उनसे प्रेम है. पर क्या यही प्रेम आपके बीच है यही आज आपको निर्णय करना है. चाहे तो आज भी आप दोनों औपचारिक शादी कर सकते है किसी को कुछ पता नहीं चलेगा या आज के दिन कुछ पल के लिए अपने बेटे बहु अपने परिवार अपनी सहेली अपनी पिछली ज़िन्दगी को भुला कर सच्चे मन से सच्चे दिल से इस शादी की रस्मो को पूरा करे. दो दिन बाद तो वैसे भी आपको इस शादी से मुक्त कर दिया जाएगा पर आने वाले दो दिन आपके इस प्रेम भाव की कड़ी परीक्षा लेने वाले है क्युकी 72 घंटे से आप दोनों साथ है और 72 घंटे बहुत होते अगर इतने वक़्त में भी आपके मन में एकदूसरे के लिए अपनेपन की फीलिंग नहीं उत्पन्न हुई तो आने वाले दो दिन आपके लिए बहुत मुश्किल बीन वाले है. इसलिए आज इन 100 जोड़ो के साथ आपकी शादी उस प्रेम भाव को जगाने की ये अंतिम कोशिश है ताकि आपके अगले दो दिन आसानी से बीत जाए. क्युकी अगर अगले दो दिन भी आप ये पूजा मजबूरी में करेंगे तो शायद आप इस पूजा को पूरा न कर पाए इसीलिए आज आपकी दुबारा शादी करवा कर आपको और अवसर दिया जा रहा है. अब आप दोनों खुद विचार कर ले की आपको क्या करना है.

साधू की प्रेम पर कही गई ये बाते विनीता और लखन को अंदर तक झकझोर गई क्युकी ये सच था की इन तीनो दिनों में उनके मन एक दुसरे के प्रति भावो में काफी परिवर्तन आ चूका था पर अब भी वो असमंजस में थे की क्या ये सिर्फ अपनापन है या कुछ और. पर इसका निर्णय तो उन्हें खुद करना था. और अगले दो दिन में क्या क्या होने वाला है की प्रेम भाव की परीक्षा होगी. वो दोनों ये सोच hi रहे थे की साधू ने फिर उन्हें पुकारा.

साधू: लखन जी विनीता जी किस सोच में डूब गए देखिये विवाह इस पूजा का अंतिम चरण है उससे पहले काफी वक़्त मिलेगा आपको सोचने के लिए फिलहाल सामूहिक यज्ञ का समय हो रहा है अगर आप लोग तैयार हो तो यज्ञ स्थल की तरग चले.

लखन विनीता: जी जी बिलकुल चलते है.

लखन विनीता साधुओ के दाल के पीछे यज्ञ स्थल की तरफ चल दिए. यज्ञ स्थल का पंडाल लोगो से खचाखच भरा था. पंडाल में चारो तरफ लाइन से 100 हवन कुंड बने थे और बीच में एक बड़ा हवन कुंड बना था जहा प्रधान पुजारी को यज्ञ करना था. और शायद इसी वेदी पर विनीता को एक बार फिर लखन सिंह के साथ विवाह बंधन में बांधना था. प्रधान पुजारी लखन विनीता के साथ उस बड़ी वेदी के समीप आकर खड़ा हो गया और उनके कहने पर लोग बाकि हवन कुंडो के इर्द गिर्द बैठ गए. लखन विनीता और प्रधान पुजारी भी पंडाल के मध्य में बानी यज्ञ वेदी के इर्द गिर्द बैठ गए.

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सभी 101 यज्ञ वीडियो को एक साथ अग्नि से प्रज्वलित कर दिया गया. और पूरा पंडाल ॐ सूर्याय नमः के जाप से गूंजायमान हो उठा. लखन विनीता भी हाथ जोड़ का ॐ सूर्याय नमः का जाप करते हुए भगवान् सूर्य देव से इस पूजा में अपना आशीर्वाद देने की प्रार्थना करने लगे. पर कही न कही उन दोनों के मन उस पुजारी की बातो से एक अजीब सा अंतर्द्वंद चल रहा था की क्या वाकई उनके मन एक दुसरे के प्रति प्रेम का भाव उत्पन्न हो गया है या सिर्फ अपनेपन का. तीन दिन पहले जो शादी उनके लिए एक मजबूरी में की गई औपचारिकता थी क्या 72 घंटे एक दुसरे के साथ गुजरने के बाद एक दुसरे के सुख दुःख बाटने के बाद क्या अब भी वो शादी उनके लिए औपचारिकता है. क्या आज जब वो दुबारा शादी की वो रस्मे पूरी कर्नेगे तब भी उनके मन में वही भाव रेहनेगे जो तीन दिन पहले थे या आज की शादी उनके मन नै इच्छाओ के बीज के अंकुरित होने की वजह बनने वाली थी.

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हवेली में

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शोभा जब सुबह सो कर उठी तो वो एक नै सोच के साथ उठी. रात भर उसके दिमाग में यही चलता रहा की विक्रम जो उससे चाहता है क्या वाकई वो इतना गलत है. वो ये सोच hi रही थी की अचानक उसके दरवाज़े पर किसीकी दस्तक हुई.

शोभा: कौन है.

दरवाज़े पर: भाभी मई रीना आपकी ननद. (रीना विक्रम की बड़ी बेहेन लखन सिंह की सगी बेटी इसका और इसके पति मंगल सिंह का परिचय इंट्रो अपडेट में दिया गया था)

शोभा: है दीदी आई. (शोभा ने तुरंत दरवाज़ा खोला). आइये न दीदी कुछ काम तो मुझे बुला लेती.

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रीना: अरे काम कैसा बस ऐसे hi बैठे बैठे बोर हो रही थी, शादी में आई हुई औरतो ने तो गॉसिप करके कान खा लिए. उन्हें वक़्त देने के चक्कर अपनी भाभी से दो घडी बात करने का मौका hi नहीं मिला.

शोभा: सच कहा दीदी.

रीना: और बताओ मेरा भाई तुम्हे परेशां तो नहीं करता न.

शोभा मुरझाते हुए: नहीं दीदी ऐसा कुछ नहीं.

रीना: तुम्हारे चेहरे के भाव और बाते मेल नहीं खा रही. अगर कोई बात हो तो खुलकर मुझे बताओ.

शोभा: नहीं दीदी कोई बात नहीं है.

रीना: ठीक है शायद अभी तुम मुझे अपना नहीं समझती इसलिए मुझसे कुछ शेयर नहीं करना चाहती ठीक है अगर नहीं बताना चाहती तो मई चलती हु.

शोभा: अरे दीदी रुकिए ऐसा मत कहिये आपसे नहीं कहूँगी तो किसे कहूँगी. विक्रम के घर में आप hi तो अकेली औरत है.

रीना: तभी तो कह रही हु बताओ मुझे क्या बात है अगर विक्रम ने कुछ कहा है तो बताओ. विक्रम को मई तुमसे बेहतर जानती हु.

शोभा को समझ नहीं आ रहा था की रीना को क्या बताए अगर वो ये कहेगी की वो विक्रम के साथ एक बार मिलान कर चुकी है और दुबारा उसके साथ मिलान के लिए तड़प रही है तो वो उसे सेक्स के लिए डेस्पेरेट समझेगी. और अगर उन्हें ये पता चला की मेरे और विकर्म के बीच आलरेडी सब कुछ हो चूका है तो पता नहीं कैसे रियेक्ट करेंगी. शोभा क्या कहे ये सोच hi रही थी की रीना खुद बोल पड़ी.

रीना: क्या शादी के बाद भी विक्रम के साथ मिलान न हो पाने की तकलीफ है.

शोभा तो एकदम से उस बात पर हड़बड़ा गई. और उसकी हड़बड़ाहट देख रीना समझ गई की यही बात है.

रीना: हम्म मतलब यही बात है अरे चिंता क्यों करती हो लाडो रानी बस दो दिन की बात है उसके बाद तो पूरी ज़िन्दगी तुम्हे साथ hi रहना है जो चाहो वो करना कोई रोकने वाला नहीं होगा. और अगर फिर मिलने का और थोड़ा बहुत करने का मन करे तो चोरी छुपे मिल लिया करो लोगो से नज़रे बचा कर इसका भी अपना अलग मज़ा है. दुनिया से छुप कर अपने प्रेमी से मिलने जाना. हाय सो रोमांटिक.

शोभा शरमाते हुए: क्या भाभी आप भी.

रीना: अरे शर्माती क्यों हो मेरी लाडो मई ऐसी hi हु बिंदास. शादी से पहले मई भी तुम्हारी तरह बड़ी शर्मीली थी पर अब शादी के बाद तुम्हारे नन्दोई जी ने मुझसे ऐसे ऐसे काम करवाए की क्या बताऊ पक्का बेशरम बना दिया मुझे.

शोभा हस्ते हुए: ऐसा क्या करवाते है.

रीना: अब वो सब फिर कभी बताउंगी वो सब बता कर अभी मई तुम्हारी उत्तेजना नहीं बढ़ाना चाहती. तुम्हारे और विक्रम के मिलान में लगा बैरियर हैट जाने दो फिर तुम्हे पूरा त्रिनेड कर दूंगी. पर तब तक इन दो दिनों को खुल कर जी लो मेरी लाडो क्युकी ये दो दिन तुम्हे दुबारा नहीं मिलेंगे. दो दिन बाद तो वैसे भी तुम्हारी एक पत्नी की लाइफ शुरू हो जाएगी. भले hi आपस में कुछ न करो पर आपस में छुप कर मिल तो सकती हो थोड़ी बहुत चुम्मा छाती तो अल्लोवेद है.

शोभा झेपते हुए: क्या दीदी आप भी न बड़ी बदमाश हो.

रीना: अरे सच कह रही हु शादी को तीन दिन हो चुके है पर इस निगोड़ी पूजा की वजह से तुम दोनों मिल नहीं पा रहे, मेरा भाई तो बेचारा भरा बैठा होगा और तुम ऐसे शर्मा रही हो.

शोभा: आपके भाई उनके बारे में तो कुछ कहो hi नहीं.

रीना: क्यों ऐसा क्यों कह रही कुछ कहा क्या उसने.

शोभा: उन्हें तो मुझमे इंटरेस्ट hi नहीं है. उन्हें तो मुझसे ज्यादा इंटरेस्ट मेरी सहेली नेहा में है.

रीना: नेहा कौन वो दुबली पतली सी जो छोटे छोटे कपडे पहनती है.

शोभा: है वही कह रहे थे तुम उसके जैसे कपडे क्यों नहीं पहनती छोटे छोटे हमेशा ये साडी पहने रहती हो.

रीना: अब बुरा न मन्ना पर तुमने अपनी उस फ्रेंड को यहाँ बुलाकर बहुत बड़ी गलती की है. सिर्फ विक्रम क्या गाँव के सरे मर्दो के दिमाग ख़राब कर दिए. तुम्हारे नन्दोई जी भी फुलटू लत्तो है तुम्हारी सहेली पर मुझे कह रहे थे ऐसे कपडे पेहेन्ने को.

शोभा: फिर आपने क्या कहा आपको तो बड़ा गुस्सा आया होगा.

रीना: क्यों इसमें गुस्सा कैसा अब भाई तुम्हारी सहेली ने यहाँ साडी औरतो के लिए कम्पटीशन खड़ा कर दिया है तो अब उसे फेस तो करना hi पड़ेगा. और मेरे पति ने hi कहा है मुझे छोटे कपडे पेहेन्ने को अपने पति के लिए इतना नहीं कर सकती. अगर मई तुम्हारी सहेली की तरह तैयार होकर उनके सामने जाउंगी तो हमारी सेक्स लाइफ में एक नया रंग भर जाएगा हम और अच्छे से एन्जॉय कर सकेंगे. बीवी घर की दाल होती और रोज रोज घर की दाल खाकर इंसान बोर हो जाता इसलिए समय समय पर घर में hi पनीर की सब्ज़ी बनाते रहना चाहिए वर्ण आदमी बहार पनीर खाने की आदत दाल लेगा. अब तुम्हारा केस थोड़ा उल्टा है तुमने पहले hi अपने पति के सामने पनीर टिक्का पेश कर दिया तो अब उसे घर की दाल में कैसे इंटरेस्ट पैदा होगा. विक्रम के नज़रिये से भी सोचो.

रीना की बातो ने शोभा को सोचने पर मजबूर कर दिया.

शोभा: पर मई वैसे कपडे कैसे पेहेन सकती हु लोग क्या कहेंगे की लखन सिंह की बहु ऐसे कपडे पहनती है.

रीना: तो तुम्हे कौनसा लोगो को दिखने है. मई भी तो पहनुंगी अपने पति के लिए. तुम भी तरय करो अपने पति के सामने पहनो उसके साथ कही घूमने जाओ तब पहनो अपने बैडरूम में पहनो कही अकेले में उससे मिलने जाओ तब पहनो.

शोभा: पर ऐसे कपड़ो में मुझे शर्म आती है बड़ा खुला खुला सा लगता है.

रीना: देखो शोभा अगर तुम यही शर्माती रहोगी तो तुंहारा पति तुम्हारे हाथ से निकल जाएगा. अपने पति को अपने पास रखने के लिए उसे अपनी तरफ आकर्षित करना उसे रिझाना बहुत ज़रूरी होता है. तुम्हे क्या लगता है वो नेहा तुमसे ज़ादा खूबसूरत है. नहीं वो तुम्हारी खूबसूरती के आगे कुछ नहीं बस वो ऐसे छोटे छोटे कपडे पहनती है की मर्द उसकी तरफ खींचे चले जाते है.

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रीना: अब खुली मिठाई के ऊपर तो वैसे भी मक्खिया ज्यादा भिनभिनाती है. अगर तुम उसके जैसे कपडे पेहेन लो तो वो तुम्हारे सामने पानी कम चाय है. तुम्हे ऐसे कपड़ो में देख दो मिनट में तुम्हारे पति के दिमाग से उस नेहा का फितूर उतर जाएगा.

शोभा: तो क्या मुझे वैसे कपडे पहनने चाहिए.

रीना: ज़रूर पेहेन्ने चाहिए, मई जब अपने लिए वैसे कपडे मँगाऊँगी तब तुम्हारे लिए भी माँगा दूंगी. बल्कि अगर अभी इन दो दिनों में विक्रम को अपना वो रूप दिखा सको तो दिखा दो. अभी पापा जी भी यहाँ नहीं है और वो करमजली नेहा भी यहाँ है तो विक्रम जब तुम्हे उसके जैसे कपड़ो में देखेगा और जब तुम्हे और नेहा को कपड़े करेगा तब उसे पता चलेगा की उसकी बीवी के सामने वो नेहा कुछ भी नहीं. और तुम्हारा लेवल एक झटके में नेहा से ऊपर हो जाएगा.

शोभा: पर अभी तो मेरे पास ऐसे कपडे नहीं है आपके पास है.

रीना: नहीं रे अभी तो नहीं है भला शादी में कोई ऐसे कपडे लता है क्या. पर तेरी सहेली के पास तो है कपडे उसीसे मांग ले कोई अच्छी सी सेक्सी सी ड्रेस.

शोभा: उससे क्या कह कर मांगू की मेरा पति मुझे उसके जैसा बनने को कह रहा है इसलिए उसके जैसे कपडे चाहिए. कितनी बेज़्ज़ती फील होगी मुझे उसके सामने.

रीना: है ये बात तो है, तो एक काम कर न जब वो कमरे में न हो तो चुपके से उसके कमरे में जाकर उसके कपड़ो में से कोई सेक्सी सी ड्रेस निकल ला और एक बार विक्रम को अपने इस कामुक रूप के दर्शन करवाकर वो ड्रेस वापस से उसके कपड़ो में रख देना. उसे पता भी नहीं चलेगा और तुम्हारा काम भी हो जाएगा.

शोभा: मतलब चोरी करू वो भी कपड़ो की.

रीना: चोरी नहीं करनी विक्रम के दिमाग से नेहा की हॉटनेस का पर्दा उतरना है एंड भाभी जान इश्क़ और जुंग में सब जायज़ है एवरीथिंग इस फेयर इन लव एंड वॉर. अगर तुम्हे हॉटनेस के मामले नेहा के सामने खुद को बीस साबित करना है तो तुम्हे ये करना hi होगा.

शोभा: आप सही कह रही हो मुझे ये करना hi होगा. पर मई उनके पास जाओ या उन अपने पास बुलाऊ.

रीना: जाना तो फिलहाल तुझे hi होगा क्युकी तुझे खुद को साबित करना है पर दिन में मत जाना एक तो लोग जाग रहे होंगे तो तुझे छोटे कपडे पेहेन कर जाने में शर्म लगेगी. रात में जाना जब सब सो जाए तब सही टाइम होगा तब तू जाकर विक्रम को अपने हुस्न के जलवे दिखा कर एक बार में hi फ्लैट कर देना. पर तब तू उस नेहा की किसी हॉट ड्रेस का जुगाड़ कर ले.

शोभा: वो जुगाड़ मई कर लुंगी, थैंक यू दीदी शादी के बाद मई बड़ा दर रही थी पर आपसे बात करके बहुत अच्छा लगा सचमे.

रीना: मुझे भी तुमसे बात करके बहुत अच्छा लगा. चलो अब मई चली हु कोई भी प्रॉब्लम हो तो मुझे कॉल कर लेना. मई तुम्हे गाइड कर दूगी.

शोभा: जी

रीना बहार आई शोभा भी उसे बहार तक छोड़ने आई. बहार नीचे हवेली के सामने खुले मैदान में विक्रम अपने जीजा मंगल और चचिया ससुर अभिलेख के साथ खड़ा चाय पी रहा था. रीना और शोभा दोनों की नज़र उन पर पड़ी विक्रम ने हवेली में ऊपर छज्जे पर कड़ी शोभा को देखहा और एक स्माइल पास करदी.

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रीना: देख तेरा पति और मेरे पति दोनों खड़े है. अच्छा सुन उसे अभी कुछ मत बताना रात में एकदम से सरप्राइज देना. सरप्राइज का अपना अलग मज़ा है. पर ध्यान रखना लिमिट क्रॉस मत करना समझ रही हो न.

शोभा: जी (अब शोभा उन्हें क्या बताती की पहले hi लिमिट क्रॉस कर चुकी पर वो तो यही समझती थी की उसने वो सब विक्रम के साथ hi करा है वो भी इस बात से अनजान थी की ये सब उसने अपने पति के साथ नहीं बल्कि बाप के साथ करा था)

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शोभा को अच्छे से गाइड करके रीना वह से चली गई. विक्रम चोर नज़रो से शोभा को देख लेता था क्युकी उसे अब भी लग रहा था की कल उसने जो कुछ कहा उसकी वजह से शोभा गुस्सा होगी. शोभा ने झूठे गुस्से का दिखावा करते हुए अपनी पीठ उसकी तरफ कर्ली पर मन hi मन उसने फैसला कर लिया था बस देखना ये था की उसका ये फैसला उसकी और विक्रम की शादीशुदा ज़िन्दगी को किस रास्ते पर ले जाने वाला था.
 
लखन की कोठी में

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रात में काका की उन हरकतों के कारन ठीक से न सो पाने के बावजूद पिछले दिनों की तुलना में आज गरिमा की नींद जल्दी खुल गई और आज उसका सर भरी भरी भी नहीं लग रहा था न उसके पेट पर कोई सफ़ेद पपड़ी जमी थी. मतलब साफ़ था काका उसके रात के खाने में कुछ बेहोशी की दवा ज़रूर मिलते थे और उसे बेहोश करके उसके साथ वो सब करते थे जो उन्होंने कल रात में करा. पर क्या हो जब वो ये सब उसके होशो हवास में करे जब काका को भी पता हो मई होश में हु, क्या तब भी वो ये सब इतना खुल के कर पाएंगे. वो एक बुड्ढे आदमी के साथ ये एक्सपीरियंस लेना चाहती थी. अपने से दुगनी उम्र के आदमी को सडके करने का एक अलग रोमांच था और गरिमा उस रोमांच को महसूस करना चाहती थी. इसलिए आज उसने पूरी तरह काका को खोलने का निश्चय कर लिया. गरिमा हरिया की बीवी के कपड़ो में से एक टाइट सी घाघरा चोली लेकर बाथरूम में घुस गई और अपने कपडे उतार दिए. वो अंदर से बुरी तरह उत्तेजित थी और चाहती थी की कोई लुंड बुरी तरह उसकी छूट को अंदर तक रगड़ दे. हरिया ने उसे लुंड लेने की ऐसी लत लगा दी थी की उसे एक लुंड की कुमी बहुत महसूस हो रही थी.

हरिया के जाने के बाद से उसे कोई लुंड अंदर लेने का मौका नहीं मिला या ये कहे की मौके तो मिले पर उन मौको पर चौके नहीं लग पाए. जंगल में जीतू के साथ मौका था पर तब रीडर्स ने जीतू के लुंड को रिजेक्ट करके उसकी लुंड लेने को तड़पती बुर को धोका दे दिया और रात में काका के साथ में मौका बना था पर तब वो पहल नहीं कर पाई. पर अब उसके पास पूरा मौका भी था और कोई धोका भी नहीं था. वो जैसे चाहे काका के साथ इस सिचुएशन को एन्जॉय कर सकती थी. चाहे तो सीधे जाकर काका से चुदाई के लिए कह सकती थी क्युकी काका भी यही चाहते थे पर सीधे जाकर कहने में कोई एक्ससिटेमेंट नहीं था मज़ा तो उन्हें सडके करके ये सब करने को मजबूर करने में था. वो इस सिचुएशन को ज्यादा से ज्यादा कामुक और एक्ससिटिंग बनाना चाहती थी ताकि उसका भरपूर मज़ा ले सके. लुंड की गैर मौजूदगी में उसकी बुर उसे फिंगरिंग करने के लिए उकसा रही थी पर फिंगरिंग के ज़रिये ओर्गास्म प् कर अपनी उत्तेजना को ठंडा नहीं करना चाहती थी. क्युकी उत्तेजना की आग जितना ज्यादा जाएगी मज़ा भी उतना hi आएगा.

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अपनी उत्तेजना को थोड़ा शांत करने के लिए गरिमा ने शावर ों कर लिया और ठन्डे ठन्डे पानी से अपनी उत्तेजना को काबू करने का प्रयास करने लगी. नाहा धो कर कपडे पेहेन कर वो बाथरूम से बहार आ गई. उसकी चोली उसके उभारो पर बेहद कासी और और पीछे पीठ पर डोरी वाली थी. वही उसका घाघरा भी काफी कैसा था जिस वजह से उसकी गदराई मांसल गांड की गोलिया उनका कटाव साफ़ नज़र आ रहा था. बहार आकर गरिमा ने हल्का फुल्का मेकअप करा अपनी आँखों पर काजल लगाया. सुगन्धित इत्र लगाया आज तो वो पूरी तरह उस बुड्ढे रसोइये पर बिजलिया गिराने का इरादा कर चुकी थी. वही उस बिहारी काका को अंदाजा भी नहीं था की उनका आज का दिन कितना रोमांचक होने वाला था बीवी के जाने के बाद बरसो तक छूट के लिए तरसते उनके लुंड को एक औरत के अंदर दाखिल होने का सुख मिलने वाला था और वो औरत भी कौन उनसे आधी उम्र शहर की एक हॉट सुन्दर हाउसवाइफ जिसके ऊपर वो पिछली कई रातो से चोरी छुपे अपना माल निकल रहे थे. गरिमा आज उसे बुड्ढे रसोइया के साथ क्या क्या करने वाली थी ये तो सिर्फ वो जानती थी या लोगन. पर इतना तै था की इस सातवे दिन में गरिमा के chapter में रीडर्स कल बड़ा मज़ा आने वाला था.

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हवेली में नेहा शबाना के रूम में

रात की ताबड़तोड़ थकावट भरी चुदाई और फिर ढंग से सो न पाने के कारन आज नेहा और शबाना की आँख देर से खुली. जागने के बाद भी दोनों के मन में कल रात की घटनाए hi घूम रही थी. शबाना जहा इस बात को लेकर चिंतित थी की आज रात उसके साथ क्या होगा पता नहीं लालू के तीनो दोस्तों ने अपना फैसला बदला होगा. लालू थोड़ा बहुत सुधरा तो अब उसके तीनो दोस्त उसे ब्लैकमेल करने लगे और अगर वो तीनो नहीं माने तो वो इस सिचुएशन को कैसे हैंडल करेगी क्या सच में उसे आज रात एक नाचने वाली रुंडी की तरह उन तीनो के सामने स्ट्रिप मुजरा करना होगा. और क्या वो सिर्फ स्ट्रिप मुजरे पर hi रुकेंगे अगर उन तीनो ने उसके साथ कुछ करा तो हलाकि लालू ने तो वडा करा है वो संभल लेगा पर अगर वो नहीं माने पर कल रात भी तो लालू ने उन्हें शांत कर दिया था. पर क्या मई लालू पर इतनी जल्दी भरोसा कर सकती हु पर उस पर भौसा करने के शिव मेरे पास चारा भी क्या है.

जहा शबाना को आने वाली रात की वजह से पैराहन थी वही नेहा बीती रात की वजह से थोड़ी दुविधा में थी. कल रात वो स्ट्रेंजर जिस तरह इस बड़सम के खेल को एक अलग hi लेवल तक ले गया उसने जिस तरह मुझे करंट के झटके दिए मुझे एक ऐसा सेक्स करने पर मजबूर किया जो इस साइट पर अपलोड भी नहीं किया जा सकता. क्या इसके बाद मुझे इस फंतासी के खेल में आगे बढ़ना चाहिए वो भी तब जब मई अब तक ये भी नहीं जानती की वो स्ट्रेंजर आखिर है कौन. क्या वाकई ये बस खेल है और क्या मई उस खेल को झेल पाऊँगी. कल रात उसने गेम को जिस लेवल पर छोड़ा उतने में मई अपने होशो हवास खो बैठी मुझे अपनी ज़िन्दगी का सबसे वीयर्ड सेक्स करने को मजबूर होना पड़ा मेरी हालत ऐसी हो गई की मुझसे ढंग से चला भी नहीं जा रहा था अब अगर आज वो गेम को इससे भी एक लेवल ऊपर ले गया तो लेवल कहा पहुंचेगा और वो क्या क्या करेगा किस हद तक दर्द देगा मुझे और क्या मेरा शरीर उस दर्द को बर्दाश्त कर पाएगा. नहीं मुझे अब खेल में अब और आगे नहीं बढ़ना चाहजए, एक शिक्षा जिसका मैंने चेहरा भी नहीं देखा उसके साथ ऐसा खतरनाक और पेनफुल खेलना इस तू रिस्की. मुझे इस खेल को यही ख़तम कर देना चाहिए. नेहा ने फैसला कर लिया की वो अभी उस स्ट्रेंजर को मोबाइल से मश्ग करके इस खेल को यही ख़तम कर देगी.

शबाना: तुम फ्रेश होने जाओगी या पहले मई हो औ.

नेहा: हम्म पहले आप हो औ मई आपके बाद चली जाउंगी.

शबाना: ठीक है मई नाहा कर आती हु.

नेहा: Ok

बिस्तर से उठकर शबाना बाथरूम में चली गई. वही नेहा ने भी बिस्तर से उतारकर अपनी गांड को छूकर देखा वह का दर्द अब काफी कम हो गया था. नेहा ने एक ढीली ढाली टीशर्ट पहनी और एक छोटा सा शार्ट पहना उस स्ट्रेंजर वाला मोबाइल लिया और कमरे के बहार आकर छज्जे पर कड़ी हो गई. बहार दिन पूरी तरह निकल आया था लोग अपने अपने काम में लगे थे. पर नेहा के बहार आते hi जैसे सबके काम रुक गए, सब एक साथ अपने काम रोक कर उन छोटे छोटे कपडे में दिखती नेहा की गोरी गोरी टांगो को निहारने लगे.

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रियलिटी में तो नेहा के पास जाने की हिम्मत नहीं थी पर नेहा को देखा रहा हर शिक्षा नैनो से नेहा को ऊपर से नीचे तक छोड़ रहा था. अपनी अपनी इमेजिनेशन में नेहा को अलग अलग सीटुएशन्स में अलग अलग पोजीशन में छोड़ रहा था और कही न कही नेहा को भी इसका अंदाजा था की लोग उसे घूरते हुए क्या सोचते होंगे और उसे इससे फ़र्क़ भी नहीं पड़ता बल्कि वो तो ये सब एन्जॉय करती थी. मर्दो को अपने ऊपर लार टपकते देखने में उसे मज़ा आता था. पर फिलहाल उन मर्दो से ज्यादा बड़ी प्रायोरिटी उसके लिए फिलहाल वो स्ट्रेंजर था. उसने उस स्ट्रेंजर को मश्ग करने की वो अब इस खेल को यही ख़तम कर रही है फ़ोन निकला hi था की अचानक उसके मोबाइल में मश्ग आने की वाइब्रेशन हुई.

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मास्टर: गुड मॉर्निंग माय स्लेव उठ गई, आज बड़ी देर करदी उठने में लगता है रात की थकावट उत्तरी नहीं पिछवाड़े में ज्यादा दर्द तो नहीं हो रहा. वैसे इन छोटे से शॉर्ट्स में गज़ब की हॉट लग रही है. देख तेरे बहार आते hi सब अपना काम रोक कर तुझे hi देखने लगे.

नेहा ने अपनी नज़रे इधर उधर दौड़ाई, नेहा उस वक़्त वह मौजूद हर शिक्षा की बॉडी लैंग्वेज को बड़े बारीकी से ऑब्सेर्वे करने की कोशिश कर रही थी. क्युकी उसे मश्ग करने वाला वो मास्टर इस वक़्त वही कही मौजूद था. वो देख रही थी की कौन मोबाइल उसे कर रहा एक दो लोगो के हाथ में मोबाइल थे पर ये कहना मुश्किल था की ये वही है. और ज़रूरी नहीं जो लोग खुले में खड़े है वो इन्ही में हो. हो सकता है वो कही से छुप कर नेहा को देख रहा हो. अचानक फिर नेहा का मोबाइल विबरते हुआ.

नेहा: क्या हुआ यहाँ वह क्या देख रही है मुझे ढून्ढ रही है क्या. मई समझ सकता हु तू बड़ी बेसब्र हो रही है मुझे बिना मास्क के देखने के लिए.

नेहा को समझ नहीं आ रहा था की वो उसे क्या रिप्लाई करे साफ़ साफ़ उसे मन करदे की वो इस गेम को यही ख़तम कर रही है पर उसके अंदर का फंतासी का कीड़ा उसे रोक रहा था और कही न खाई वो खुद भी उत्सुक थी की आखिर ये स्ट्रेंजर है कौन. इतना सब कर लेने के बावजूद वो स्ट्रेंजर अब तक नक़ाब के पीछे छुपा था. पर नेहा ये भी समझ रही थी की अगर वो यही उस शिक्षा की हर बात मानती रही तो उसकी हिम्मत और बाद जाएगी वो पता नहीं क्या क्या करे. इसलिए उसे एक दोसे देना ज़रूरी है.

नेहा: मई अब बड़सम का गेम और नहीं खेलूंगी मई इस खेल को यही ख़तम कर रही हु.

मास्टर: ये क्या कह रही है, एक रात के बड़सम सेशन में तेरी गांड पहात के हाथ में आ गई. कल रात के बाद तो मई तुझे बड़ा बहादुर समझने लगा था तू तो बड़ी डरपोक निकली.

नेहा: तुम मुझे डरपोक बोल रहे, अरे मई जो करती हु बिंदास करती हु जो चैलेंज लेती हु उसे पूरा करती हु. तुमने मुझे जहा बुलाया वह आई अकेले बुलाया अकेले आई जिस तरह बुलाया उस तरह आई जिस वक़्त बुलाया उस वक़्त आई. तुमने मुझे जो टास्क दिए वो बिना किसी दर के पुरे करे और तुम मुझे डरपोक बोल रहे. तुम मेरा मास्टर बनने चाहते हो मेरे साथ बड़सम खेलना चाहते हो अरे दो दिन हो गए तुममे इतनी हिम्मत भी नहीं हो रही की मेरे सामने बिना नक़ाब के आ सको मुझे अपना चेहरा दिखा सको और तुम मुझे डरपोक बोल रहे.

पहली बार नेहा ने उस स्ट्रेंजर की मर्दानगी पर चोट की थी उसे बिना नक़ाब के आने का खुला चैलेंज करा था. नेहा के मश्ग के बाद 15 मं तक मोबाइल में कोई मश्ग नहीं आया. नेहा को भी लगा की शायद वो स्ट्रेंजर दर गया उसमे उसके सामने आने की हिम्मत नहीं इसीलिए उसने कोई रिप्लाई नहीं करा. वो ये सोच hi रही थी की 20 मं बाद उसका मोबाइल फिर विबरते हुआ.

मास्टर: तेरा तीसरा पार्सल हवेली की छत पर बानी पानी की टंकी की नीच रखा है जाकर कलेक्ट करले.

नेहा: तुम्हे लगता है समझ में नहीं अत या शायद तुम्हारा ईगो ये मैंने को तैयार नहीं की एक लड़की ने तुम्हे मन कर दिया. मैंने तुम्हे कह दिया की मई ये खेल अब और नहीं खेलने वाली.

मास्टर: तूने मुझे बिना नक़ाब में सामने आने को कहा है न, तू मुझे बिना नक़ाब के देखना चाहती है तो चल आज लास्ट टाइम आ अगर हिम्मत हो तो. आज मई तेरे सामने बिना नक़ाब के आऊंगा. ये तेरा लास्ट पार्सल है इसके बाद हमारे बीच होगा खुल्लम खुल्ला होगा. बोल है हिम्मत.

नेहा: मेरी हिम्मत तो तुमने कल रात hi देख ली थी.

मास्टर: हम्म तो ठीक है अगर इतनी hi हिम्मत है तो जाकर अपना ये आखिरी पार्सल कलेक्ट करले और आज रात आ जाना वही. वडा करता हु आज तुझे उस नक़ाब के पीछे का चेहरा दिखा दूंगा.

स्ट्रेंजर के इस मश्ग ने नेहा को दुबारा सोचने पर मजबूर कर दिया. कल रात के बिजली के झटको ने नेहा को अंदर तक झकझोर दिया था पर फिर भी उसके मन में उस स्ट्रेंजर को देखने की उत्सुकता भी थी.

नेहा मन में- बड़सम में ये सब तो होता hi है और वैसे भी अब स्ट्रेंजर ने अपना चेहरा दिखने की बात करि है तो एक बार चांस लेकर देखा तो जाए की आखिर उस नक़ाब के पीछे है कौन. जब इतना कुछ झेल लिया तो एक बार और चांस लेकर देखा जाए ज्यादा से ज्यादा क्या होगा वो एक बार और गांड मार लेगा या छोड़ देगा तो मेरा कौन सा ये फर्स्ट टाइम है. पर अगर यहाँ से बिना ये देखे की चली गई की उस नक़ाब के पीछे कौन था तो ज़िन्दगी भर ये सोचती रहूंगी की एक बार चांस लेती तो जान जाती की वो स्ट्रेंजर आखिर था कौन.

नेहा ने एक गहरी सांस लेते हुए डीडे कर लिया और उसके कदम ऊपर छत की तरफ जाती सीढ़ियों की तरफ मुद गए. और वो सीढ़ियों की तरफ कदम बढ़ाते हुए छत की चल दी.

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इधर कमरे में शबाना

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शबाना नाहा धो कर बहार आई पर अंदर कमरे में नेहा नहीं थी. शबाना शीशे के सामने कड़ी होकर अपने बाल सूखने लगी. की अचानक दरवाज़े पर दस्तक हुई. शबाना समझ गई की नेहा होगी.

नॉक नॉक

शबाना: है दरवाज़ा खुला है अंदर आजा.

दरवाज़ा खुलने और फिर बंद होने की आवाज़ आई.

शबाना: मई फ्रेश हो आई हु जा अब तू भी जाकर फ्रेश होल.

शबाना यही समझ रही थी की कमरे में आने वाली नेहा है. पर अचानक उसे अपनी कमर पर दोनों तरफ किसी के हाथो का स्पर्श महसूस और हाथो के अकार और उनकी पकड़ से ये तो साफ़ था की ये हाथ नेहा के तो बिलकुल नहीं है. शबाना ने फ़ौरन अपना चेहरा ऊपर उठाया और अपने पीछे खड़े शिक्षा को देख वो चौंक गई. उसके पीछे लालू उसकी कमर को थामे खड़ा मुस्कुरा रहा था. लालू को यु अचानक से अपने कमरे में देख शबाना शॉक रह गई. क्युकी अभी तो नेहा कमरे के बहार गई थी और अब लालू उसके पीछे खड़ा है.

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शबाना: तुम इस वक्र इतनी सुबह सुबह यहाँ पर. नेहा बहार hi होगी वो किसी भी पल आ जाएगी और तुम्हे यहाँ इस तरह मेरे साथ देकर दस तरह के सवाल करेगी. मैंने उसे अब तक हमारे बारे में कुछ नहीं बताया है तुम जाओ यहाँ से अभी प्लीज जाओ.

लालू: रिलैक्स रिलैक्स मैंने अभी अभी नेहा को छत की तरफ जाते देखा तभी मौके का फायदा उठाते हुए तुझसे बात करने यहाँ तेरे कमरे में आ गई.

शबाना: नेहा छत पर क्या करने गई है खैर गई है तो वापस भी तो आएगी, वो अचानक से दरवाज़े पर आकर कड़ी हो गई तब तुम बहार कैसे निकलोवे और कमरे में कहा छुपोगे क्युकी आते hi बाथरूम जाएगी तो वह नहीं छुप सकते.

लालू: तू टेंशन बहुत लेती है चिंता न कर मई देव को छत की सीढ़ियों पर खड़ा करके आया हु, नेहा जैसे hi छत से उतरेगी वो मुझे मश्ग कर देगा मई एक मं में बहार निकल जाऊंगा.

शबाना: पर तुम इस वक़्त यहाँ आए hi क्यों. किसी ने देख लिए तुम्हे मेरे कमरे से निकट तो गड़बड़ हो जाएगी.

लालू: आना ज़रूरी था तुझसे आज रात के बारे में बात करनी थी.

शबाना: क्या बात तुम्हारी उन लोगो से बात हुई.

लालू गहरी सांस लेते हुए: है हुई काफी देर बात हुई बात क्या ज़ोरदार बेहेस हुई एक बार तो बेहेस झगडे तक पहुंच गई.

शबाना: फिर क्या कहा उन्होंने वो मान गए न.

लालू: सॉरी जान पर वो लोग नहीं माने, वो अपनी बात पर अड़े है की वो तेरा मुजरा देख कर रहेंगे वो भी स्ट्रिप मुजरा.

शाबान की सांस हलक में आ गई, वो तो यही उम्मीद लगाए थी की लालू उन्हें मन लेगा पर हुआ इसका उल्टा.

लालू: तू इतना टेंशन क्यों ले रही है मई हु न भरोसा रख मुझपे.

शबाना: मतलब मुझे उनके सामने नंगा होकर नाचना होगा.

लालू: नहीं तुझे पूरा नंगा नहीं होना होगा बड़ी मुश्किल से मैंने उन्हें चड्डी पर मनाया है. यानि तुझे चड्डी नहीं उतरनी होगी पर चड्डी छोड़कर तुझे बाकि सारे कपडे उतरने होंगे. अगर तू नहीं मानेगी तो वो तेरी फोटो और वीडियो लीक कर देंगे.

शबाना का दर के मारे बुरा हाल था.

लालू: देख तू चिंता मत कर मई भी वह मौजूद रहूँगा मेरी उनसे बात हो गई है वो तुझे हाथ भी नहीं लगाएंगे. और अगर लगाने की कोशिश भी करि तो मई उन्हें ऐसा करने नहीं दूंगा. पर.......

शबाना: पर क्या....

लालू: पर उनकी भी एक शर्त है.

शबाना: कैसी शर्त

लालू: शर्त क्या उनकी डिमांड है की तुझे भी एक रुंडी की तरह मटक मटक कर उस नाचने वाली चंडी जैसा नाच दिखाना होगा. अगर तू ढंग से नहीं नाची या उन्हें मज़ा नहीं आया तो वो उसी वक़्त तेरा वीडियो सोशल मीडिया पर दाल देंगे.

शबाना: पैट मुझे वैसा डांस नहीं आता मैंने तो कभी ऐसे वीडियो भी नहीं देखे.

लालू: मैंने भी यही कहा इस पर उन्होंने कहा की तुझे आज पूरा दिन हमारे फार्महाउस पर उस नाचने वाली चांदनी के पास रहकर उससे डांस सीखना होगा और रात में मई उनके साथ वही आऊंगा तब तू एक बार उनके सामने डांस करदे वो तेरा वीडियो और फोटो डिलीट कर देंगे.

शबाना: ये कैसे पॉसिबल मई पूरा दिन यहाँ से क्या कह कर जाउंगी, नेहा को क्या बताउंगी.

लालू: उसका तरीका मैंने सोच लिया है, वो चांदनी यहाँ तेरी एक दूर की खला के पडोसी की लड़की बन कर आएगी बुरखा पेहेन कर. तू नेहा के सामने उससे ऐसे पेश में आना जैसे वो सच में तेरी रिश्तेदार है और नेहा को बताना की इसकी शादी यही पड़ोस के गाँव में हुई है. तेरी इससे व्हाट्सप्प पर बात हुई तब तूने बताया की तू यहाँ अपनी सहेली की शादी में आई है. तो इसने कहा एक दिन के लिए मेरे घर चलो तो इसलिए वो तुझे ले जाने आई है और तू एक दिन के लिए उसके साथ जा रही है. इससे नेह को किसी तरह का शक नहीं होगा तू चांदनी के साथ चली जाना शाम तक हम भी पहुंच जाएंगे वह.

शबाना: वह वो लोग कुछ गलत तो नहीं करेंगे न मेरे साथ.

लालू: कुछ गलत नहीं होगा तेरे साथ मई जुबां देता हु. (पर मन hi मन लालू जनता था की वह शबाना के साथ क्या क्या होने वाला है)

शबाना: ठीक है

लालू: गुड जैसे hi चांदनी हवेली के गेट पर आएगी मई तुझे मश्ग कर दूंगा तू उसे लेने गेट पर आ जाना. और फिर उसे अपनी सहेलियों से मिलवा कर उन्हें बता कर की तू आज उसके यहाँ जा रही है उसके साथ निकल जाना बाकि सब वो संभल लेगी. समझ गई.

शबाना: हम्म

लालू: और तू ज्यादा रेंसिओं मत ले भरोसा रख मुझ पर मई कोई गड़बड़ नहीं होने दूंगा.

शबाना: हम्म

लालू: चल अब मई चलता हु तेरी सहेली भी आती होगी चांदनी के आने पर तुझे मश्ग कर दूंगा.

शबाना: हम्म

लालू: क्या हम्म हम्म लगा राखी है. जाते जाते एक किश नहीं देगी आखिर अब तेरे बच्चे का बाप बनने वाला हु एक चुम्मा तो देदे.

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लालू ने अपने होंठ आगे कर दिए और शबाना ने थोड़ा शरमाते झिझकते हुए अपने होंठ लालू के होंठो पर रख दिए. और दोनों एक पैशनेट किश में डूब गए. करीब दो मं तक यही एक दुसरे के साथ किश में डूबे रहे फिर बहार कोई आहत होने पर दोनों की किश टूटी.

शबाना: चलो अभी जाओ यहाँ कोई आ गया तो बहुत दिक्कत हो जाएगी.

नेहा: चल ठीक है जैसा कहा है वैसा hi करना.

शबाना: हम्म ठीक है

इतना कह कर लालू कमरे के बहार चला गया. पर शबाना अब भी असमंजस में थी की उसे लालू की बात माननी चाहिए और उस नाचने वाली के साथ जाना चाहिए या नहीं. उसे दिमाग उसे बार बार आने वाले खतरे से सावधान कर रहा था पर उसका साफ़ दिल लालू पर शक नहीं कर प् रहा था वो भी कल उसके प्यार भरे बेहविओ के बाद. अब देखना ये था की दिल और दिमाग की इस जुंग में जीत किसकी होती है. पर जीत किसी की भी हो हार तो सिर्फ शबाना की होनी थी यदि वो जाती तो वह उसके साथ क्या क्या हो सकता था और अगर नहो जाती तो उसका वीडियो फोटो वायरल कर दिए जाते जो उसके परिवार को एफेक्ट करता. फैसला शबाना को करना था.

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नेहा

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छत के गेट पर पहुंच कर नेहा छत पर किसी के हाफने की आवाज़े सुनाई दी. छत पर कोई मर्द था जो तेज़ तेज़ साँसे भर रहा था. नेहा ने पिछले कुछ दिनों में हवेली में अलग अलग मर्दो के साथ सेक्स के अलग अलग अनुभव लिए थे इसलिए उसे इस हाफने में भी कुछ वैसा hi महसूस हो रहा था जैसे कोई मर्द औरत को छोड़ते समय तेज़ तेज़ सांस लेता है वैसी hi आवाज़े उसे लग रही थी. मतलब छत पर कोई मर्द किसी औरत को छोड़ रहा है. नेहा बड़े बड़े आहिस्ता आहिस्ता छत से आती उस आवाज़ की तरफ बड़ी. आवाज़ छत पर बानी पानी की टंकी की पास से hi आ रही थी. क्या ये वो सतरंगेर है या कोई और. पानी की टंकी के पास पहुंच कर नेहा ने इधर उधर झांक कर देखा पर उसे कोई पार्सल नहीं दिखा, नेहा ने टंकी के नीचे झाँका तो उसे पार्सल नज़र आ गया. नेहा ने हाथ डालकर वो पार्सल निकल लिया. नेहा वापस जाने को हुई पर अचानक से फिर हाफने की आवाज़े आना शुरू हो गई. ये आवाज़े टंकी के दूसरी तरफ से आ रही थी. यानि टंकी के पीछे कोई कपल सेक्स कर रहा है. नेहा के मन में उन्हें देखने की उत्सुकता भी बाद गई इसलिए उसने पार्सल वापस टंकी के नीचे छुपा दिया और हौले हौले टंकी की दीवार के किनारे किनारे दूसरी तरफ का सन देखने के लिए बाद गई. दीवार के किनारे पहुंच कर नेहा जैसे hi दूसरी तरफ झक कर देखा तो वह से आ रही हाफने की आवाज़ की वजह और उस पर अपनी सोच पर उसे हसी आ गई. वो ज़ोर से हसने वाली थी पर उसने अपना मुँह बंद कर लिया. वह कोई मर्द किसी औरत की चुदाई नहीं कर रहा था बल्कि एक हत्ता कट्टा मर्द ज़मीन पर पुशअप्स मार रहा था और पुशअप्स की वजह से वो हाफने की आवाज़ निकल रहा था.

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नेहा ने एक बार फिर जब झाँक कर उस मर्द को गौर से देखा तो वो और कोई नहीं विक्रम था जो चाय पीने के बाद छत पर एक्सरसाइज कर रहा था. नेहा ने खुद को स्टुपिड कहा और वो वापस जाने को मुड़ी पर फिर अचानक से उसने अपने कदम रोक लिए और एक बार फिर झाँक कर विक्रम को एक्सरसाइज करते देखने लगी. विक्रम जो की ऊपर से बारे बॉडी था और नीचे भी एक बेहद कैसा जॉकी का अंडरवियर पहने था. पुशअप्स के कारन उसका बदन पसीने पसीने हो चूका था और उसके बदन पर बहते पसीने ने उसकी मसल्स के कटाव को और आकर्षक बना दिया था. नेहा ने आज तक विक्रम को पुरे कपड़ो में तो कई बार देखा था और साली होने के नाते उसके साथ हलकी फुलकी शरारते भी की थी पर आज उसने विक्रम का जो रूप देखा उससे छुड़वाने के लिए कोई भी औरत ख़ुशी ख़ुशी तैयार हो जाए. विक्रम जब पुषप के दौरान नीचे जाता तो उसकी बाइसेप्स फूल जाती और शोल्डर निकल आते. निश्चित hi बॉडी और पर्सनालिटी के मामले में पुरे गांव में विक्रम का कोई सांई नहीं था.

6.5 का लम्बा चौड़ा बदन मजबूत और मरदाना जिस्म हत्ता कटती मसल्स गाँव में आज के समय में विक्रम का कोई मुकाबला नहीं था. हलाकि विक्रम का बाप लखन और ससुर मलखान भी उसके सामान hi हट्टे काटते और लम्बे थे पर अब वो 50+ थे ऐसे में उनकी तुलना विक्रम से नहीं की जा सकती थी. लाख मलखान के अलावा अगर कोई विक्रम के मुक़ाबले का था तो वो था भीमा पर उसका धुल मिटटी से भरा बदन और जमदारी का उसका काम उसे विक्रम के सामने उन्नीस कर देता था. इनके अलावा अगर कोई मर्द विक्रम की टक्कर का था तो वो था अघोरी पर वो तो ब्रह्मचारी था तो उसने अब तक खुद को इस रेस से बहार hi रखा था इसके अलावा लुक्स और पहनावे में भी विक्रम उनपर भरी था. ऐसे में अगर गाँव में कोई मर विलेज कम्पटीशन हो तो उसमे विक्रम को मर विलेज का खिताब मिले इसमें कोई शक नहीं था. सिर्फ विक्रम के जिस्म को एक कैसे अंडरवियर में एक्सरसाइज करते देख कर hi नेहा को अपनी जांघो के बीच नमी महसूस होने लगी थी.

नेहा को मन hi मन शोभा से थोड़ी जलन होने लगी.

नेहा मन में: वाह शोभा दी ज़िन्दगी भर किसी मर्द से बात तक नहीं करि बर्फ बनाना तो दूर की बात पर शादी के लिए क्या सही बाँदा सेट करा है. कसम से क्या बोड्ट है बन्दे की पहली रात को hi आपके छेड़ को अंदर तक खोल कर रख देगा. इनकी बॉडी इतनी मस्त तो इनका वो कैसा होगा. छी छी छी नेहा क्या सोच रही है अपनी सहेली की शादी में आई और उसी के नए नवेले पति पर नियत ख़राब हो रही है तेरी. पर बी गॉड क्या कुत्स है शोभा दी शादी में न आई होती तो छुड़वा लेती इनसे.

नेहा के हाथ खुद बा खुद अपने शॉर्ट्स के ऊपर से अपनी छूट पर पहुंच गए और वो अपनी गीली हो रही छूट को थपकी देकर शांत करने लगी.

नेहा: शांत होजा मुनिया ये अंगूर खट्टे है. है है मई जानती हु तुझे ये बड़ा बड़ा केला खाने का मन कर रहा है पर ये केला अपना नहीं है शोभा दी का है. समझा कर अच्छा नहीं लगता अपनी hi सहेली की शादी में आकर उसकी खुद की सुहागरात होने से पहले hi मई उसके पति के साथ सुहागरात मन लू. लॉयल्टी नाम की भी कोई चीज़ होती है वैसे भी शोभा दी ने कभी कोई बर्फ तक नहीं बनाया ले देकर एक हस्बैंड मिला है उनको उसमे भी मई बीच में टंगड़ी मार दू. नहीं गलत बात है समझा कर मुनिया तुझे तो बीसियों केले मिल जाएंगे ये केला शोभा दी को खा लेने दे. या कम से कम उन्हें अपना उद्घाटन तो कर लेने दे फिर भविष्य में कभी मौका मिला तो हम भी टास्ते करके देखेंगे की ये केला कितना मीठा और कितना हार्ड है. पर अभी इनके साथ चुदाई नहीं कर सकते पर थोड़ी बहुत छेड़खानी तो कर hi सकते है आफ्टर आल साली है हम आधी घरवाली हक़ बनता है हमारा.

नेहा दीवार के पीछे से निकल कर खुले में आ गई और अपनी कमर मटकते हुए एक्सरसाइज करते विक्रम की तरफ बढ़ने लगी. विक्रम का धयान अब भी नेहा की तरफ नहीं गया था. पर विक्रम के करीब पहुंच कर नेहा ने खस्ने की आवाज़ निकली जिसे सुनकर विक्रम ने अपनी नज़रे ऊपर उठाई और सामने नेहा को खड़ा वो एकदम से चौंक कर खड़ा हो गया. खड़ा होते hi विक्रम का लुम्बा भरा बूरा बदन नेहा के सामने था वो भी लगभग नंगा सिवाय एक कासी चड्डी. और वो कासी चड्डी भी विक्रम के जिस्म के आकर्षण में चार चाँद लगा रही थी. चड्डी की कसावट के कारन उस अंदर छुपा केला अपने नीचे लटकते दो नीबुओं के साथ काफी पहला हुआ नज़र आ रहा था जो बिना तने hi तना तना सा प्रतीत हो रहा था.

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नेहा का मन तो कर रहा थी की अभी आगे बाद कर विक्रम की चड्डी को नीचे सरका कर उसका लुंड बहार निकल कर उसे अपने मुँह में लेले पर उसने अपने अरमानो पर काबू रखा.

नेहा: वाओ जीजजजजी व्हाट ा हॉट बॉडी मई नहीं जानती थी की कपड़ो के पीछे इतनी ज़बरदस्त बॉडी छिपी है, पहले पता होता तो.....

विक्रम: तो तो क्या करती आप साली साहिबा.

नेहा: तो पहले hi आपके कपडे उतर देती.

विक्रम ने अपना थूक गतका और मन hi मन सोचा की क्या अफलातून लड़की है बोलने से पहले कुछ सोचती है की नहीं. नेहा को भी बोलने के बाद समझ आया की वो क्या बोल गई.

नेहा: मेरा मतलब है आपकी शर्ट आपकी शर्ट उतरवा देती आपकी 6 पैक एबीएस देखने के लिए.

विक्रम: अरे वो तो बस ऐसे hi.....

नेहा: तो छत पर एक्सरसाइज कर रहे थे, रोज तो नहीं करते थे मई कई बार छत पर आई.

विक्रम: घर पर तो रोज करता था यहाँ टाइम नहीं मिला शादी के काम के चक्कर में आज खली था तो सोचा थोड़ी एक्सरसाइज करलु.

नेहा: ाअव्व्व तो मैंने आपको डिस्टर्ब कर दिया.

विक्रम: अरे नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है.

नेहा: डिस्टर्ब नहीं करा तो मेरे आते hi आपने एक्सरसाइज क्यों रोक दी. आप कंटिन्यू रख सकते है अपनी पुशअप्स. मई भी तो देखु मेरे जीजजजजी एक बार कितनी पुशअप्स मार लेते है.

विक्रम: अरे नहीं मई बस ख़तम hi करने वाला था.

नेहा: क्यों मेरे आते hi ख़तम नहीं मुझे भी आपको एक्सरसाइज करते देखना है चलिए चलिए शरुरु हो जाइये फ़ास्ट.

विकर्म: चलिए आप इतनी ज़िद्द कर रही है तो ठीक है.

विक्रम ने फिर पुशअप्स करना शुरू कर दिया पर अचानक नेहा ने उसे रोक दिया.

नेहा: ऐसी पुशअप्स तो कोई भी कर लेगा कभी वेटेड पुशअप्स करि है.

विक्रम: वो क्या होती है.

नेहा: मतलब कभी किसी को अपनी पीठ पर बिठाकर पुशअप्स की है.

विक्रम: ोू वो है रीना दीदी का लड़का है उसे बिठाकर करि है पुशअप्स.

नेहा: हम्म्म वो तो बच्चा है कभी किसी लड़की को अपने ऊपर बिठा कर पुशअप्स की है.

विकर्म को कुछ कुछ नेहा का इशारा समझ आ रहा था.

विक्रम: नहीं वो तो नहीं करि पर अगर आप मौका दो तो वो भी तरय करके देखा जाए.

नेहा: नेकी और पूछ पूछ. वैसे बैठने की बजाए आपकी पीठ पर लेट जाऊ तो सही रहेगा आपको करने में थोड़ी आसानी होगी.

विक्रम: अस ु विश मैडम.

नेहा आगे बाद कर आहिस्ता से विक्रम की पीठ पर पेट के बल लेट गई. पेट के बल लेते होने से नेहा की छोटी छोटी चूचिया विक्रम की पीठ पर डाब रही थी. अपनी पीठ पर नेहा की चूचियों का स्पर्श विक्रम को और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था उसका भी मन कर रहा था अभी नेहा को यही ज़मीन पर पटक कर उसके कपडे उतर कर उसे छोड़ दे पर उसने भी अपने अरमानो पर काबू रखा. और नेहा के अपने ऊपर लेटते hi विक्रम ने पुशअप्स करना शुरू कर दिया.

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नेहा: ओने तवो थ्री..... सेवन आठ

विक्रम पुशअप्स कर रहा था और उसके ऊपर लेती नेहा उसकी पीठ की मांसपेशियों को सिकुड़ते खुलते देख रही थी. इतने करीब से देखने से विक्रम के बदन का कटाव नेहा को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रहा था और वो उत्तेजना में अपने छोटे छोटे निप्पल टॉप के ऊपर से hi विक्रम की पीठ पर घिस रही थी.

नेहा: ....... फिफ्टीन सिस्स्टीन...... ट्वेंटी तवो ट्वेंटी थ्री....... थर्टी. बस बस रुक जाइये अब रुक जाइये.

नेहा विक्रम के ऊपर से उठकर कड़ी हो गई. विक्रम भी खड़ा हो गया.

नेहा: वाह मान गई आपको अगर मई न रोकती तो पता नहीं आप कितनी करते.

विक्रम: फिर रोका क्यों.

नेहा: क्युकी आपसे और भी बहुत कुछ करना था अभी तो.

विक्रम: क्या

नेहा: सिर्फ पुशअप्स hi करते है एक्सरसाइज में.

विक्रम: दंड बैठक करता हु उससे जांघ की मांसपेशिया मजबूत होती है.

नेहा: मुझे कंधे पर बिठा कर कर लेंगे दंड बैठक.

विक्रम: अपने भांजे को बिठा कर तो करि है आपको बिठा कर भी कर लूंगा आपका वजन hi कितना है ज़ादा से ज़ादा 50-55 कग.

नेहा: ऐसा है तो करके दिखाइए.

विक्रम घुटनो के बल बैठ गया और नेहा पीछे से आकर उसके कंधो पर पेअर इधर उधर करके बैठ गई. इस पोजीशन में बैठने से उसकी छूट शॉर्ट्स के अंदर से विक्रम की गर्दन में टच हो रही थी. नेहा के हाथो को थम कर विक्रम ने बैलेंस बनाते हुए दंड पेलना शुरू कर दिया. उठक बैठक करने से नेहा की छूट पीछे विक्रम के बालो और गर्दन पर रगड़ खा रही थी. छूट की ये रगड़ नेहा की छूट को तो गीला कर hi रही थी पर ये रगड़ विक्रम को भी अपनी गर्दन पर महसूस हो रही थी जिस वजह से उसका लुंड भी चड्डी के अंदर झटके खा रहा था. फिर भी नेहा को अपने कंधो पर बिठाकर विक्रम ने करीब 20 दंड बैठक पेल दिए.

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नेहा (मन में): ओह माय डेरा जीजाजी इतनी पुश यूपीएस मार दी काश ऐसे hi मेरी गांड मार देते, इतने दंड पेल दिए काश ऐसे hi मेरी छूट में अपना लुंड पेल देते तो सच में चरमसुख मिल जाता.

20 दंड बैठक के बाद नेहा विक्रम के कंधो से उतर गई.

विक्रम: और कोई हुकूक साली साहिबा.

नेहा: नहीं नहीं और कुछ नहीं पर आप ये पुश यूपीएस और दंड बैठक जैसी बिना इक्विपमेंट वाली एक्सरसाइज hi करते है किसी इक्विपमेंट का उसे नहीं करते जैसे डंबल वेट रोड.

विक्रम: नहीं मेरे घर में सारा सामन है एक्सरसाइज का पर अब यहाँ क्या लता तो इसलिए यही कर लेता हु.

नेहा: रोड में कितना वेट लगते है.

विक्रम: 30-30कग दोनों तरफ.

नेहा: मतलब 60 कग क्या बात है. तब तो आपको एक इक्विपमेंट मई दे सकती हु.

विक्रम: क्या

नेहा: जब आप रोड 60 कग उठा लेते है तो मई तो 52 कग hi हु मुझे hi अपनी रोड समझ कर एक्सरसाइज कर लीजिये.

विक्रम: हाहाहाहा क्या तुम भी कुछ भी.

नेहा: No मई मज़ाक नहीं कर रही ी ऍम सीरियस क्यों मुझे उठाकर वेट लिफ्टिंग नहीं कर पाओगे.

विक्रम: अरे तुम्हे तो मई एक हाथ से उठा दू.

नेहा: एक हाथ से नहीं दोनों हाथ से उठाओ वो भी 40 बार.

विक्रम: Ok अस ु विश.

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विक्रम ने एक फ़िल्मी हीरो की तरह नेहा को अपनी बहो में उठा लिया और एक वेटेड रोड की तरह उसे ऊपर नीचे करके बाइसेप्स मारने लगा. बेशक विक्रम नेहा के वजन से ज्यादा उठता था पर एक लड़की और रोड को पकड़ने में अंतर होता. रोड तो उसकी दोनों मुट्ठी के बीच कासी रहती थी पर नेहा का अपने हाथो में बैलेंस बनाने के लिए उसे सही जगह और सही तरह थामना बहुत ज़रूरी था. इसलिए बाइसेप्स मारते मारते विक्रम का हाथ सरकते हुए नेहा की शॉर्ट्स के ऊपर से उसके कूल्हों पर पहुंच गया. पर नेहा ने इस पर कोई अप्पति नहीं जताई तो विक्रम भी अपना हाथ वह रखे बाइसेप्स मारता रहा. बैलेंस सही रखने के लिए विक्रम ने नेहा के एक कूल्हे को अपनी मुट्ठी में कास कर दबा लिया. नेहा को भी अपनी गांड पर विक्रम के हाथो की पकड़ बहुत अच्छी लग रही थी. सही ढंग से पकड़ने के बाद नेहा को उठाना विक्रम के लिए बच्चो को खेल था इसलिए विक्रम ने 40 की बजाए 50 बाइसेप्स मार दी.

नेहा: बस बस मान गई मान गई आप बहुत स्ट्रांग हो रुकने का नाम hi नहीं ले रहे. अब लास्ट में वेट लिफ्टर जैसे वेट रोड को ऊपर उठा देते है आप भी मुझे ऊपर उठा दो. देखु तो 8 फुट ऊपर से टंगे टंगे ज़मीन कैसी लगेगी.

विक्रम: ऐसा क्या.

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विक्रम ने एक झटके में नेहा को घुमाकर पेट के बल 90° में ऊपर उठा दिया. पर अचानक यु उठाने में नेहा को सँभालने के चक्कर में विक्रम का हाथ सीधा नेहा की छाती के ऊपर पहुंच गया और दूसरा नेहा की जांघो के बीच सीधा उसकी छूट पर. नेहा की छूट पर हाथ पहुंचते hi विक्रम की उसके गीलेपन का एहसास हो गया वह नेहा की पूरी चुकी विक्रम की मुट्ठी में थी. विक्रम को भी अपने हाथो के गलत जगह पर होने का एहसास होते hi विक्रम ने तुरंत नेहा को नीचे ज़मीन पर उतर दिया.

विक्रम: वो मई मई वो ी ऍम सॉरी वो तुम्हे बैलेंस करने के चक्कर में हाथ वह...

नेहा: इतस ok चिल जीजू ी कैन अंडरस्टैंड जब साली इतनी हॉट हो तो ऐसी छोटी मोती गलतिया हो जाती है कभी कभार हाथ गलत जगह पहुंच जाता है. वैसे ी मस्ट से गज़ब की ताकत है आपमें फर्स्ट नाईट में शोभा दी की तो हालत ख़राब कर डोज.

विक्रम: क्या तुम भी...

नेहा: वैसे मैंने आज आपसे बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करवा दी पसीना पसीना हो गए आप तो.

विक्रम: अरे कोई बात नहीं अब एक्सरसाइज में इतना पसीना तो निकलता है.

नेहा: कहो तो मई पोछ दू.

विक्रम: अब फिलहाल मई कोई टॉवल या रुमाल तो लाया नहीं तुम्हारे पास हो तो देदो.

नेहा: रुमाल तो अभी मेरे पास भी नहीं पर कुछ दिन पहले आपने मुझे रुमाल दिया था आज मेरी बारी है. याद है न.

विक्रम ने याद करा लखन विनीता की शादी वाला दिन जब कल्लू के चाटने से नेहा की लेग्गी आगे से गीली हो गई थी तब विक्रम ने नेहा को अपना रुमाल दिया था.

विक्रम: है बिलकुल याद है उस रुमाल को तो आज भी वैसे hi संभल कर रखा है.

नेहा: ऐसा क्यों

विक्रम: उसमे आपकी खुशबू जो बस गई थी.

नेहा: अच्छा जी क्या बात है तो आज मई उधर चूका दू ताकि मई भी आपकी खुशबू को सहेज कर रख लू.

विक्रम: पर बिना रुमाल या टोलिया के कैसे पोछेंगी मेरा पसीना.

नेहा: जब नेहा कुछ करने का सोच लेती है तो तरीका अपने आप बना लेती है.

विक्रम कुछ सोचते उससे पहले नेहा ने वो करा जिसे देख विक्रम का मुँह खुला का खुला रह गया. नेहा ने अपने टॉप को नीचे से दोनों हाथो में थमा और विक्रम के कुछ समझने से पहले अपना टॉप ऊपर करते हुए अपने गले से निकल कर उतर दिया.

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विक्रम का मुँह खुला का खुला रह गया क्युकी टॉप उतरने के बाद नेहा के ऊपरी बदन पर अब केवल सेक्सी सी थीं ब्रा थी जिसमे नेहा की छोटी छोटी नुकीली चूचिया बेहद सेक्सी और आकर्षक लग रही थी. विक्रम का मन तो कर रहा था की आगे बाद कर उस ब्रा के ऊपर से hi उसकी चूची को पूरा का पूरा अपने मुँह में भर ले पर वो यु अधनंगी हालत में हवेली की छत पर खड़ा था और अब तो नेहा ने भी खुद को अधनंगा कर दिया था कोई भी अगर इस वक़्त छत पर आ नए तो अच्छा खासा सन बन जाए और अगर ये बात शोभा को पता चल जाए तो पता नहीं वो कैसे रियेक्ट करे विक्रम को इस बात की भी चिंता थी. विक्रम एक नज़र नेहा को और एक नज़र पीछे छत को देखता की कही कोई आ तो नहीं रहा.

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विक्रम: ये ये ये तुमने अपना टॉप क्यों उतर दिया.

नेहा: आपका पसीना पोछने के लिए.

विक्रम: हम लोग हवेली की छत पर है कोई भी आ सकता है.

नेहा: दो मिनट मुझे अपना उधर तो चूका लेने दो ताकि मई भी अपने जीजू की महक को अपने पास सहेज लू.

अचानक जीने में कुछ आहत हुई और विक्रम एकदम हड़बड़ा गया.

विक्रम: देखो कोई आ रहा अपना टॉप पेहेन लो वर्ण लोग गलत सोचेंगे.

नेहा: Ok पर ये उधर रहा फिर कभी सही.

विक्रम: है है फिर कभी.

नेहा ने वापस अपना टॉप पेहेन लिया और विक्रम को वही छोड़ मुद कर ऐडा के साथ मटकती हुई वापस चल दी. विक्रम पीछे से उसे वापस जाते और उसके छोटे छोटे शॉर्ट्स में से दिखती उसके कूल्हों की बीच की दरार को देखकर अपना लुंड मसलने लगा. अचानक नेहा एकदम से घूम गई विक्रम ने तुरंत अपना हाथ अपने लुंड से हटाया पर तब तक नेहा ने उसे अपना लुंड मसलते देख लिया था. जिसे देख वो मुस्कुरा दी और बड़ी ऐडा से विक्रम को bye करा.

नेहा: Ok bye जीजू आज आपके साथ एक्सरसाइज करके मज़ा आ गया.

विक्रम: है मुझे भी

नेहा: और खुद को इतना मत थका लेना अभी आपको शोभा दी के साथ भी काफी एक्सरसाइज करनी है.

विकर्म: मई उसके लिए भी पूरी तरह तैयार हु.

नेहा: कूल बढ़िया है Ok bye (फ्लाइंग किश देते हुए)

विक्रम: Bye(flying किश कैच करते हुए)

नेहा मटकते हुए वह से चली गई जाते जाते नेहे ने अपना पार्सल भी उठा लिया और विक्रम वह खड़ा अपना लुंड मसलता रह गया.

विक्रम: साली जब मिलती है अंदर तक गरम कर जाती है साली को अगर ढंग से लाइन दू तो छुड़वा भी ले पर सही वक़्त और सही मौका नहीं मिल रहा और अगर शोभा को पता चल गया तो लेने के देने पद जाएंगे. वो सोचेगी उसे मई मन कर रहा और इसके साथ डिंग डाँग कर रहा. एक तो शोभा के साथ अपनी सुहागरात नहीं मन पा रही ऊपर से ये बार बार एक्ससिटेड करके चली जाती है कितना कण्ट्रोल करू खुद पर ओह गॉड एक बार इसकी लेने का मौका दिलवा दे. अब फिर बाथरूम में जाकर अपने हाथो का सहर लेना पड़ेगा.

विक्रम भी छत से उतर कर अपनी गर्मी को शांत करने सीधा अपने कमरे में चला गया. वह शोभा रात में विक्रम को सडके करके उसके दिलो दिमाग में छाए नेहा की हॉटनेस के परदे को हटाने का सोच रही थी वही नेहा ने विक्रम के दिलो दिमाग में खुद को और गहराई तक घुसा दिया और विक्रम तो अब उसे किसी भी तरह छोड़ने का मौका तलाश रहा था. पर सिर्फ विक्रम hi अकेला नहीं था जो नेहा पर लत्तो था वो स्ट्रेंजर भी था जिसका चेहरा देखने को नेहा उतावली और आज रात एक बार फिर उससे मिलने जाने वाली थी और इन दोनों के अलावा एक तीसरा भी था जो जाने कबसे नेहा की पंतय को अपने लुंड पर लपेट लपेट कर hi अपनी गर्मी को शांत कर रहा था भीमा जिससे कल रात नेहा आने का वडा का आई थी. एक अकेली नेहा और चाहने वाले तीन यानि एक अनार और तीन बीमार और उन तीनो में से किसके लिए आज जन्नत का दरवाज़ा खुलने वाला था. क्या आज शोभा विक्रम की दिलो दिमाग से नेहा को हटाकर खुद की जगह बनाने सफल हो पाएगी या जीजा साली की ये हलकी फुलकी तैसिंग भरी कहानी एक नए लेवल पर पहुंचने वाली थी या गाँव में लोगो की गंदगी साफ़ करने वाले एक जमादार को एक हॉट सेडक्टिव लड़की को छोड़ने का मौका मिलने वाला था. और वो शिक्षा कौन था जो अब तक एक नक़ाब के पीछे छुपा था क्या होगा जब वो नक़ाब के पीछे का चेहरा सामने आएगा.

पांच अलग अलग किरदारों को लेकर एक महासंयोग की भूमिका तैयार हो चुकी थी पर इसका परिणाम क्या होगा ये तो आने वाला वक़्क़त hi जानता था.

विक्रम शोभा स्ट्रेंजर नेहा भीमा

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सूर्य पूजा स्थल

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ब्रह्म महूरत में प्रारम्भ हुआ सूर्य सिद्धि यज्ञ पिछले दो घंटो से अनवरत जारी था और अपने अंत की और था. और प्रधान पुजारी की आखिरी आहुति और ॐ सूर्याय नमः के जाप के साथ वो यज्ञ समाप्त हुआ और इसी के साथ सूर्य पूजा का दूसरा चरण भी पूरा हुआ. अब बारी थी अगले तीन चरण की जो एक प्रतियोगिता के रूप में थे. यज्ञ समाप्ति के बाद प्रधान पुजारी लखन विनीता और बाकि जनमानस को पंडाल से बहार ले आया. और मंच पर खड़े होकर जनमानस को सम्बोधित करने लगा.

पुजारी: आज हम सब जो यहाँ इस सामूहिक विवाह के उत्सव में सम्मिलित हुए है उसका सारा श्रेया लखन जी को जाता है इन्ही के सहयोग से आज ये उत्सव यहाँ आयोजित हो पाया है. हमारे यहाँ इकठ्ठा होने की एक वजह लखन जे परिवार पर लगा गृह दोष में सूर्य दोष दूर करने में इनका सहयोग करना भी है. इसीलिए अभी यहाँ ये सूर्य सिद्धि यज्ञ संपन्न किया गया. पर इस यज्ञ में जो भी सम्मलित हुआ उन सभी को भगवान् सूर्य का आशीर्वाद मिलेगा. अब यहाँ हम सूर्य पूजा के अगले तीन चरण पुरे करेंगे. पर उनके बारे में बताने से पहले हम यहाँ विशेष रूप से कोणार्क से मंगवाई गई सूर्य प्रतिमा का अनावरण करेंगे. जल्द hi यहाँ पर लखन जी के सहयोग से एक नवग्रह मंदिर की स्थापना की जाएगी जिसमे ये सूर्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी. इसलिए मई लखन और विनीता जी से अनुरोध करता हु की वे दोनों आगे बड़े और इस प्रतिमा का अनावरण करे और इसका पूजन करके पूजा के अगले चरणों के लिए भगवान् सूर्य की आशीर्वाद ले.

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लखन विनीता ने आगे बाद कर उस विशाल प्रतिमा के ऊपर पड़ा कपडा खींच कर हटा दिया. वो एक बेहद सुन्दर सूर्य देव की प्रतिमा थी जिसमे वो एक रथ पर सवार थे जिसे 7 अश्व खींच रहे थे. अब तक तक जितने भी ग्रहो की पूजा हुई उन सबके मानव रूप के लिए उनके ग्रीक समतुल्य की प्रतिमा राखी गई थी पहली बार एक ***** देव की प्रतिमा थी जिससे विनीता लखन भी भली भाटी परिचित थे. प्रतिमा अनावरण के बाद वह मौजूद सब लोगो भगवान् सूर्य को प्रणाम करा विनीता की पूजा की थल लेकर सूर्य के सातो घोड़ो की प्रतिमाओं के टीका लगाया फिर सूर्य देव की आरती करके उनके भी टीका लगा कर उनका आशीर्वाद लिया.

पुजारी: धन्यवाद देवी अब समय है प्रतियोगिता के नियम बताने का. भगवान् सूर्य को खेल प्रतियोगिताओ का विशेष शौक़ीन मन जाता है. जैसा की आप जानते है की सूर्य देव ज्यादातर अपने रथ पर सवार दिखाए जाते है यानि चेरियट रेस यानि रथ दौड़ उनका प्रिय खेल है.

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सूर्य देव के ग्रीक समरूप अप्पोलो के हाथ में हमेशा एक स्वर्ण धनुष रहता यानि तीरंदाज़ी भी उनका एक प्रिय खेल है.

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इनके अलावा एक और चीज है जो सूर्य देव को अति प्रिय है सूरजमुखी का पुष्प. हमारी आज की प्रतियोगिता भी उनके इन्ही दो प्रिय खेलो और सूरजमुखी के पुष्प पर आधारित होगी. प्रतियोगिता में सम्मलित होने वाले सभी प्रतियोगी सामने आ जाए.

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लखन सामने आ गया और उसके साथ 6 युवक और भीड में से आए. लखन ने राठो की तरफ वह 7 रथ खड़े थे हर रथ के सामने 7-7 सूरजमुखी के पुष्प लगे थे और उनसे कुछ दूरी पर हर रथ की सीध में 7 मेज राखी थी और हर मेज पर एक धनुष और तीन तीर रखे थे यानि ये प्रतियोगिता हम 7 लोगो के बीच होगी. लखन किसान आदमी था साड़ी जिंदगी उसने खेतो में हल चलाया और अपने पालतू घोड़े बदल की सवारी की टी रथ चलना उसके लिए कुछ मुश्किल नहीं था इसके अलावा निशानेबाज़ी का भी वो शौक़ीन था तो तीरंदाज़ी भी उसे आती थी.

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पुजारी: लखन जी आपके इन 6 प्रतिद्वंदियों का चुनाव शादी में आए युवको में से उनके रथ कौशल और तीर चलने की योग्यता के आधार पर पहले hi कर लिया गया है. आपको अपने सामने तीन चीज़े दिख रही है. सबसे पहले हर प्रतियोगी के लिए एक धनुष और teen-teen तीर रखे गए है. जिनसे आप अपना तीरंदाज़ी कौशल सिद्ध करके उन्हें प्रतियोगिता का प्रथम चरण पूरा करना है. हर रथ के सामने 7 सूरजमुखी के पुष्प लगे है जो सब असली प्रतीत हो रहे है पर उनमे केवल 1 असली है बाकी 6 नकली है. इनसे आपके बुद्धि कौशल की परीक्षा होगी. आप सातो को तीन अवसर मिलेंगे उस असली सूरजमुखी के पुष्प पर निशाना लगाने लिए. जो इन तीन अवसरों में उस असली सूरजमुखी के पुष्प को पहचान कर उसे तीर से भेद देगा उसे अगले चरण के लिए रथ हासिल होगा और जो नहीं भेद पाएगा वो पहले चरण में hi बहार हो जाएगा. लखन जी सूर्य देव का पूर्ण आशीर्वाद हासिल करने के लिए आपको यह प्रतियोगिता जितनी hi होगी. और आप 6 में से यदि कोई ये प्रतियोगिता जीता तो उसे इनाम स्वरुप भगवान् सूर्य की एक स्वर्ण प्रतिमा मिलेगी जिसकी कीमत 15-20 लाख है (इतनी बड़ी रकम की बात सुन उन 6 की आँखों में चमक आ गई). अब आप सातो अपने अपने धनुष को थाम ले.

सातो प्रतियोगी अपनी अपनी मेज के समीप आ गए लखन सिंह मध्य में यानि चौथे स्थान पर खड़े थे तीन प्रतियोगी उनके दाई तरफ और तीन बाई तरफ. सबने अपना अपना धनुष उठा लिया और एक तीर उसकी प्रत्यंचा पर रख लिया.

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पुजारी: अब जैसे hi मई तीन तक गिनती गिनूंगा आप सातो एक साथ अपने अपने 7 पुषो में से एक को निशाना बनाएगे जिसका पहली बार में hi सही निशाना लगा वो रथ लेकर आगे बाद जाएगा. बाकि दुबारा मेरे कहने पर निशाना साधेंगे जिसका तीर पहली बार में hi किसी पुष्प पर भी नहीं लगा वो प्रतियोगिता से बहार हो जाएगा उसे दुबारा निशाना लगाने का मौका भी नहीं मिलेगा. आप सातो दो मं विचार कर ले की असली पुष्प कौन सा है और उस पर लक्ष्य साध ले.

सातो प्रतियोगी अपने अपने 7 पुषो को ध्यान से देखने लगे सरे पुष्प अलग दिशाओ में घूमे हुए थे उत्तर, उत्त्तर पूर्व, पूर्व, पूर्व दक्षिण, दक्षिण और दो पुष्प दाई और बाई तरफ दो अलग दिशाओ में थोड़ा ऊपर की तरफ उठे हुए थे. सातो ने अपने अपने चुने हुए पुष्प की तरफ लक्षय साध लिया.

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पुजारी: आप सातो तैयार है.

प्रतियोगी: जी

पुजारी: तो मई गिनती गिनु.

प्रतियोगी: जी

पुजारी: एक दो तीन...

इसी के साथ सातो ने अपने तीर छोड़ दिए एक प्रतियोगी का तीर पुष्पों के ऊपर से निकल गया जबकि बाकी 6 के तीर पूर्व दिशा की तरफ मुँह करे सूरजमुखी के पुष्प में जा धसे जिनमे लखन सिंह का तीर भी शामिल था.

Pujari:Kya बात है सभी ने पूर्व दिशा के सूरजमुखी के असली होने का अनुमान लगाया. शायद इसलिए क्युकी सूर्य पूर्व से उगता है पर अफोसस आप सबका अनुमान गलत है ये नकली पुष्प है. प्रतियोगी नंबर 3 का तीर किसी पुष्प को न भेद सका इसलिए वो प्रतियोगिता से बहार होता है. बाकि बचे 6 प्रतियोगी दुबारा अपने तीर धनिष पर चढ़ा कर लक्ष्य साध ले.

बाकि बचे 6 लोगो ने दुबारा अपना अपना पुष्प चुन कर उस पर निशाना साध लिया. और तीन की गिनती के साथ उन्होंने तीर चला दिया. दो प्रतियोगियों के उत्तर पश्चिम के पुष्प पर लगे और लखन और एक प्रतियोगी ने उत्तर पूर्व में पुष्प को निशाना बनाया प्रतियोगी नंबर 7 का तीर खली चला गया और वो रेस से बहार हो गया पर प्रतियोगी नंबर 5 सूर्य की दिशा देखते हुए ऊपर सूर्य की तरफ मुँह करे दाई तरफ के पुष्प को भेदा और पुजारी ने उसके पुष्प को सही घोषित कर दिया.

पुजारी: शाबाश युवक तुम्हारा अनुमान और लक्ष्य एकदम सही लगे ये hi असली पुष्प था अब तुम अपने रथ की तरफ बाद सकते हो यहाँ से अब तुम्हे पूर्व दिशा में रथ लेकर जाना है जब तक तुम्हे एक ताड़ का पेड़ न दिखे उसके पास 7 रंगो के झंडे लगे है वह से तुम्हे अपने रथ के रंग का झंडा लेकर वापस यही आना है. बाकि बचे 4 प्रतियोगियों के पास अब ये अंतिम अवसर है. जो अपना झंडा लेकर यहाँ सबसे पहले आएगा वो विजय होगा.

लक्ष्य भेदने वाला प्रतियोगी अपना नीला रथ लेकर पूर्व दिशा की तरफ चला गया. बाकि 4 प्रतियोगियों ने तीसरी बार अपना लक्ष्य साध लिया.

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अब सही पुष्प तो उन्हें पता था बस निशाना सही लगाना था. पुजारी के तीन गिनने पर उन्होंने फिर तीर छोड़े. लखन और दो प्रतीयगी hi सही पुष्प को निशाना बना पाए प्रतियोगी नंबर 6 का तीर लगा तो पर गलत पुष्प से जिस वाहह से वो भी रेस से बहार हो गया.

पुरजरी: आप तीनो ने भी सही पुष्प पर लक्ष्य साध प्रतियोगिता का प्रथम चरण पूरा करा अब शीघ्र प्रस्थान एक प्रतियोगी काफी आगे निकल गया होगा. लखन अपना सफ़ेद और प्रतियोगी 1 और 2 अपने काले और लाल रथ लेकर आगे बाद चले. तीनो रथ साथ साथ चल रहे थे और चौथा प्रतियोगी तो काफी आगे निकल चूका था. अब देखना था इस प्रतियोगिता का क्या परिणाम निकलता है.

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कब्रिस्तान में

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इधर कब्रिस्तान में अघोरी की झोपडी में रात भर की जाएगी नीतू की नींद बहुत देर से खुली. अंगड़ाइयां लेती हुई वो उठ बैठी, उसने अपनी नज़रे इधर उधर घुमाकर अघोरी को ढूंढा पर अघोरी वह नहीं था. उसने उठकर अपनी साड़ी पहनी और अघोरी को ढूंढ़ने झोपडी के बहार निकली, बहार हर तरफ कब्र hi कब्र बानी थी नार्मल परिस्थिति में तो ये दृश्य भी काफी डरावना था पर नीतू ने कल रात जो जो दृश्य देख लिए थे तो अब ये सब तो उसके लिए कुछ भी नहीं था. कब्रिस्तान में एक तरफ लगे एक पीपल के पेड़ के नीचे अघोरी साधना मि मुद्रा में बैठा था. नीतू उस पास जाकर कड़ी हो गई और अघोरी को ऊपर से नीचे तक निहारने लगी. कल की पहल के बाद अघोरी के प्रति नीतू के मन के विचार पूरी तरह बदल चुके थे. कल अघोरी को लिंग के विशाल अकार को महसूस करने के बाद नीतू उसे प्रत्यक्ष देखने को उतावली थी.

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अब अघोरी को सडके करने का मकसद उसके लिए सिर्फ राज की जान बचनना भर नहीं था अब वो खुद इतने बड़े और दैत्याकार लुंड को महसूस करना चाहती हलाकि अंदर न के मामले में थोड़ा भय भी था पर न ंन्न और वासना भय पर हावी हो गई थी. वो जन है की उनका लुंड इतना बड़ा हो इतना बड़ा लुंड सिर्फ अफ्रीकन हब्सी लोगो का hi होता और अघोरी उन्ही में से एक था और नीतू ने ऐसे अफ्रीकन हब्सी मूल के बड़े लुंड वाले मर्दो के पोर्न वीडियो तो बहुत देखे थे पर किस्मत ने उसे प्रत्यक्ष एक हब्सी लुंड देखने का मौका दिया था और वो ये मौका जाया नहीं जाने देने चाहती थी. दूसरी अघोरी अब भी कल रात में हुई घटना को नींद में अनजाने में की गई गलती hi मान रहा था. और इस बात से अनजान था की जिस नीतू को वो पवित्र मन से अपने घर में ले आया है वो दरअसल अब मेनका बन चुकी जो किसी भी कीमत पर इस विश्वामित्र की तपस्या भांग करके उसका ब्रह्मचर्य भांग करने आई है.

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नीतू एकटक यही यही खड़े खड़े साधना में बैठे अघोरी को hi निहार रही थी. उस विशाल लिंग के एक स्पर्श की वजह से काम वासना उसके दिलो दिमाग में इस कदर हावी हो गई थी की उस वक़्त उसके दिलो दिमाग से राज का ख्याल गायब hi हो गया था. पहली बार उसने अघोरी को वासना की नज़रो देखा था और इन नज़रो में उसे अघोरी के बदन का एक एक कटाव बेहद आकर्षक और कामुक लग रहा था. 7.5 फुट का हत्ता कट्टा बदन, चौड़ी मर्दानी छाती, जिस्म का कला रंग उसकी कामुकता को और बड़ा देता था. बेशक अघोरी एक बड़े लुंड का मालिक था पर लुंड के अलावा उसका जिस्म भी किसी औरत को बहकने को मजबूर कर देने के लिए काफी था.

पिछले अपडेट में विक्रम को एक्सरसाइज करते देख जो हालत नेहा की हो रही थी कुछ वही स्थिति इस समय नीतू की थी. बस वह नेहा के सामने गाँव का प्लेबॉय विक्रम था जो अब तक कई औरतो के साथ सम्बन्ध बना चूका था और यहाँ नीतू के सामने एक दर्द संकल्प ब्रह्मचारी अघोरी जिसने आज तक किसी औरत को गलत नियत से नहीं देखा. नीतू का मन तो कर रहा था की अभी जाकर अघोरी की गोड़ में बैठ जाए और अपने होंठ अघोरी के होंठो से मिला दे पर जल्दबाज़ी में बात बनने से पहले hi बिगड़ सकती थी. इसलिए नीतू वही बैठ कर अघोरी को निहारती रही अघोरी को साधना से जगाने का उसे मन नहीं कर रहा था. पर साथ hi साथ उसके दिमाग में ये भी चल रहा था की उसे इस ब्रह्चारी वश्वमित्र का ब्रह्मचर्य कैसे भांग करना है कैसे उसे अपने ऊपर मोहित होने पर मजबूर करना है.

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चुनौती इतनी आसान नहीं थी अब देखना था नेहा ये चुनौती कैसे पूरी करती है.

प्राचीन खंडहर

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वह नीतू साधना में बैठे अघोरी को निहार रही वही उस खंडहर में उसकी बस्ती आरती अब तक बेहोश पड़ी थी और अभय पूरी रात से बस उसे निहारे जा रहा था. 200 साल की नींद से जागने के बाद अभय ने बहुत बड़े बड़े दावे करे थे अपने धोकेबाज़ प्यार से बदला लेने के उसे बर्बाद कर देने के पर जब वही प्यार उसके सामने आया तो जैसे 200 साल का सारा गुस्सा साडी नफरत पल में काफूर hi गई. और अब उसे आरती में अपनी भोली भली मंजरी hi नज़र आ रही थी. माहौल में बड़ी मासूम सी ख़ामोशी छै हुई थी पर अचानक वो ख़ामोशी एक आवाज़ से टूट गई और सबसे हैरान करने वाली बात ये थी उस वक़्त उस खँडहर में बेहोश पड़ी आरती और उसे चुपचाप निहारते अभय के अलावा कोई नहीं थी.

आवाज़: अभय

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ये आवाज़ कही और से नहीं अभय के अंदर से आ रही थी उसके दिल से पर ये उसके दिल की आवाज़ नहीं थी उसके दिल से आती आवाज़ थी और उसकी आवाज़ से भिन्न आवाज़ थी जैसे उसके दिल के अंदर कोई दूसरा शिक्षा बैठा हो जो अंदर से उसे पुकार रहा हो.

आवाज़: अभय.

अभय: हम्म बोलो

आवाज़: तुम फिर इस लड़की के प्यार में पढ़कर अपना असली मकसद भूल रहे हो 200 साल पहले भी तुम इस लड़की के प्यार में पढ़कर अपने असली मकसद से भटक गए थे और पूरी तरह बर्बाद हो गए थे. बड़ी मुश्किल से तुम्हे ये दूसरा मौका मिला है और तुम फिर इस अफाट की पोटली को उठा लाए. और अब बैठे इसे निहार रहे हो भूल गए इसने तुम्हारे साथ क्या करा था. अब ये तुम्हारे सामने है अरे इसे यु निहारने की बजाए इससे अपना बदला लो ख़तम करो इसे और इसका भी वही हाल करो जो उस अजय का करा था.

अभय: एआई खबरदार जो मंजरी की तरफ आँख उठाकर भी देखा प्यार करता हु मई मंजरी से उसकी तरफ उठने वाली हर आँख को फोड़ दूंगा.

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आवाज़: देखो मई जनता हु तुम्हारी सुहागरात अधूरी रह गई थी तुम उसे पूरा करना चाहते हो तो अब तो ये तुम्हारे पास है तुम इसके शरीर को भी काबू कर सकते हो और इसके दिमाग को. करलो जो करना है इसके साथ पूरी करलो अपनी सुहागरात.

अभय: तंत्र तुम्हारी ये बोलने की हिम्मत भी कैसे हुई. मैंने मंजरी से मुहोब्बत की है अयाशी नहीं. अभय अगर मैनजरि का जिस्म हासिल करना चाहता तो वो 200 साल पहले भी हासिल कर लेता पर मजनारी के लिए मेरे दिल में प्यार है बस प्यार हवस नहीं.

आवाज़: अभय तुम समझ नहीं रहे इस लड़की के शरीर में कुछ विशेष पवित्र ऊर्जा मौजूद है अगर तुम इसके साथ एक बार शारीरिक सम्बन्ध बना लो तो वो पवित्र ऊर्जा तुम्हारा सुरक्षा कवच बन जाएगी और तुम अपराजित हो जाएगी इसके अलावा वो एकमुखी रुद्राक्ष ढूंढ़ना भी इसकी नियति में लिखा है अगर ये लड़की ज़िंदा रही तो ये वो एकमुखी रुद्राक्ष वापस ला सकती है और तुम जानते हो अगर वो एकमुखी रुद्राक्ष वापस आ गया तो क्या हो सकता है. पर अगर ये लड़की hi ख़तम हो जाए तो उस रुद्राक्ष की वापसी का मार्ग भी बंद हो जाएगा और बिना उस रुद्राक्ष के कोई तुम्हे नहीं हरा सकता. इसलिए इसके साथ सम्बन्ध बना कर इसकी पुण्य ऊर्जा अपने अंदर समाहित करके इसका वध कार्डो.

अभय: मंजरी को मारने से पहले अभय अपनी जान दे देगा और तुम मुझे अपनी मंजरी की जान लेने को कह रहे हो. और रही उसके साथ सम्बन्ध बनाने की बात तो अभय अपनी अधूरी सुहागरात पूरी करेगा पर तब जब मंजरी पुरे होशो हवस में सच्चे मन से मेरे प्यार को कबूल करेगी. मुझे मंजरी का प्यार चाहिए उसका जिस्म नहीं.

आवाज़: देखो बात समझने की कोशिश करो आने वाला वक़्त बहुत मुश्किल होने वाला है तुम भले hi इसे ख़तम मत करो पर इसके साथ मिलान तो कर hi सकते हो. इससे तुन्हे एक ऐसा सूरकः कवच मिल जाएगा जिसे कोई नहीं भेद पाएगा.

अभय: अभय को किसी कवच की ज़रूरत नहीं. और अभय ने ज़िन्दगी में बस एक hi चीज़ सच्चे दिल से की है वो है अपनी मंजरी से प्यार और उस प्यार के रिश्ते को अभय पूरी शिद्दत और ईमानदारी से निभाएगा.

आवाज़: पर तुम्हारा ये प्यार तुम्हारी मौत की वजह भी बन सकता है.

अभय: साड़ी दुनिया मिल कर भी अभय के सामने आ जाए तो भी मुझे नहीं हरा पाएगी अगर अभय को कोई हरा सकता है खुद अभय. और रही मेरी मौत की बात तो मौत आती है तो आ जाए मई तो 200 साल पहले hi मर गया था वो तो तुमने खुद को कुर्बान करके मुझे नया जीवन दे दिया. अगर दुबारा मौत अभय के सामने आ गई तो अभय बहे फैला कर उसका स्वागत करेगा परै चाहता जब मई आखिरी साँसे लू तब पुरे गर्व के साथ ये कह सकू की मैंने मंजरी को सच्चे दिल से चाहा था और उस प्यार को पूरी शिद्दत से निभाया और माजरी को अभय से ज्यादा प्यार कोई नहीं कर सकता वो अजय भी नहीं.

आवाज़: 200 साल पहले मैंने खुद को ख़तम कर दिया सिर्फ तुम्हे ज़िंदा रखने की खातिर और आज तुम मेरी hi बात नहीं मान रहे. प्यार ने तुम्हे अँधा कर दिया है मई तुम्हे कुछ भी कहु तुम्हे समझ नहीं आएगा.

अभय: मई तुम्हारा एहसानमंद हु की तुमने मुझे नया जीवन दिया पर क्या करू प्यार चीज़ hi ऐसी है. तंत्र तुमने कभी किसी से प्यार नहीं किया न इसलिए मई तुम्हे कितना भी समझौ तुम समझ नहीं पाओगे.

आवाज़: जो मन में आए वो करो तुमसे बेहेस करना बेकार है.

आवाज़ खामोश हो गई पर ये दूसरी आवाज़ थी किसकी जो अभय के hi शरीर के अंदर से आ रही थी जिसे अभय तंत्र नाम से पुकार रहा था. कौन था ये तंत्र और किस बलिदान की बात कर रहा था वो उसने किस तरह 200 साल पहले अभय को नया जीवन दिया था. और उस रुद्राक्ष की क्या सच्चाई थी को वो तंत्र उस रुद्राक्ष को अभय के लिए बहुत बड़ा खतरा बता रहा था. इन सवालो का जवाब तो तभी मिलेगा जब 200 साल पहले की उस कहानी से अतीत का पर्दा हटेगा.

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दूसरी तरफ उस शिव मंदिर के पास बने पीपल के पेड़ पर बैठा अजय बेसब्री से सूर्यास्त होने का इंतज़ार कर रहा था ताकि वो उन आदिवासियों के इलाके में प्रवेश कर सके और आरती को ढूंढ़ने में उन आदिवासियों की मदद ले सके. हलाकि उन आदिवासियों के इलाके में जाने में काफी खतरा भी था जिसके बारे में अघोरी ने उसे पहले hi बता दिया था पर आरती को बचने के लिए अजय हर खतरा उठाने को तैयार था. अजय पल पल बड़ी मुश्किल से काट रहा था और अभय के लिए तो पल जैसे थम से गए थे सामने लेती आरती उर्फ़ मंजरी को निहारने भर से hi जैसे उसे दुन्जय जहाँ की खुशिया मिल गई थी, होश में आने के बाद आरती पता नहीं कैसे रियेक्ट करे पता नहीं ये पल उसे दुबारा नसीब हो इसलिए वो इन पालो को जी भर के जी लेना चाहता था.

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तुम मेरे हो इस पल मेरे हो

कल शायद ये आलम न रहे

तुम जैसे हो तुम तुम न रहो

हम जैसे है हम हम न रहे

ये रास्ते अलग हो जाए

चलते चलते हम खो जाए

मई फिर भी तुमको चाहूंगा

मई फिर भी तुमको चाहूंगा

इस चाहत में मिट जाऊंगा

मई सिर्फ तुमको चाहूंगा
 
गाँव में लखन की कोठी में

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नाहा धो कर तैयार होकर गरिमा अपने कमरे से बहार आई. नीचे काका जीतू पर चिल्ला रहे थे.

काका: नालायक कल कहा था सुबह सुबह चले जाना खेत में जनाब 10 बजे तो सो कर उठ रहे है. चल अब सीधा खेतो में जा और कल सुबह से पहले यहाँ दिखाई मत पड़ना वह बंसी और श्यामू को लेकर सारे खेत की मेड बना देना. और सारा अनाज खेत के पास वाले गोदाम में रखवा देना और रात में वही रुक जाना.

जीतू: जी बापू

गरिमा जीतू के जाने का इंतज़ार करने लगी क्युकी आज उसका टारगेट जीतू नहीं उसका बाप था. जल्द hi जीतू वह से चला गया और काका किचन में अपने काम में लग गए. जीतू में जाने के बाद गरिमा नीचे उतर आई और किचन के गेट पर hi खड़े खड़े पीछे से काका को ऊपर से नीचे तक निहारने लगी. आज का दिन शायद लड़को को निहार कर उत्तेजित होने का hi दिन था पहले नेहा विक्रम को देख कर उत्तेजित हुई फिर नीतू अघोरी को देखकर उत्तेजित हुई और अब गरिमा की नियत बिहारी काका पर ख़राब थी. गरिमा की उत्तेजना का चिंगारी तो हरिया पहले hi सुलगा गया था और कल रात में काका ने जो कुछ करा उसने इस चिंगारी में घी का काम करा था. गरिमा अंदर hi अंदर इस उत्तेजना की आग में सुलग रही थी जिसे एक मर्द का साथ hi ठंडा कर सकता था और वो मर्द इस वक़्त गरिमा की आँखों के सामने था.

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काका को पीछे से देख गरिमा को उस दिन की याद आ गई जब गरिमा के पीछे खड़े होकर काका ने वही किचन में खड़े खड़े अपना वीर्य निकल दिया था. गरिमा का मन तो कर रहा था की ाब्व जाकर काका को पीछे से कास कर पकड़ ले और अभी उनसे छुड़वा कर अपने बदन की गर्मी शांत करले. पर वो खुद को काका के सामने बाज़ारू भी साबित नहीं करना चाहती थी. तो उसने फिलहाल काका को सडके करने का hi निस्ज्काय करा की वो काका को इस हद तक उत्तेजित करदे की वो उसे छोड़ने के लिए मजबूर हो जाए. गरिमा आज फिर काम में मदद करने के बहाने किचन में पहुंच गई.

गरिमा: काका क्या कर रहे है.

काका: अरे बेतिया जाग गई आप बस रसोई की थोड़ी साफ़ सफाई कर रहा था अभी आपकी चाय बना देता हु.

गरिमा: काका मुझे भी कुछ काम बताओ जो मई करदु.

काका: अरे बिटिया आप रहने दो मई कर लूंगा. आप बैठो जाकर आराम करो.

गरिमा: अरे काका दिन भर बैठी hi तो रहती हु कुछ काम करने का मन हो रहा है. आज जीतू भी नहीं है जो उससे बाते कर लेती. बोलो न क्या करू.

काका: अच्छा तो आप एक काम करो आप ये आता माड़ लो और उसके बाद धनजय टमाटर को बारीक काट कर सिलबट्टे पर पीस कर उनकी चटनी बना लो. कर लोगी इतना

गरिमा: अरे बड़े आराम से काका.

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गरिमा वही खड़े खड़े किचन की स्लैब पर आता माड़ने लगी और काका साफ़ सफाई में लग गया. गरिमा एक तरफ तो आता माड़ रही थी पर सामने खिड़की में लगे शीशे से पीछे साफ़ सफाई करते काका पर भी नज़र रखे थी जो चुपके चुपके नज़र उठाकर पीछे से पेटीकोट के अंदर से हिलते गरिमा के चूतड़ों को देखकर अपना लुंड मसल लेते थे. उस दिन तो जब पहली बार गरिमा ने उन्हें ाजसा करते देखा था तब वो शॉज रह गई थी पर आज उसे इसमें एक अलग hi एक्ससिटेमेंट फील हो रहा था. किचन में काफी गर्मी थी और आता माड़ते माड़ते गरिमा पसीने पसीने हो गई थी काका की साफ़ सफाई भी लगभग ख़तम हो आई थी. गरिमा को इस बहते पसीने के साथ भी एक शरारत सूझी काका को तैसे करने की. गरिमा ने अचानक आता माड़ते माड़ते काका को अपने पास बुलाया जो पीछे से उसकी गांड निहार रहे थे और काका से नॉर्मली बात करने लगी ताकि उन्हें ऐसा न लगे जैसे वो जानबूझ कर उन्हें उत्तेजित कर रही है.

गरिमा: काका

काका हाड़बताए हुए: है है है बिटिया.

गरिमा: ज़रा दिहार आइयेगा.

काका पास आते हुए.

गरिमा: आज गर्मी तो बहुत है इतनी देर में hi पूरा शरीर पसीना पसीना हो गया आप कैसे खाना बना लेते hi इतनी गर्मी में.

काका: अरे बिटिया मेरा तो ये रोज का काम है मैंने आपसे पहले hi कहा था की आप बहार हवा में बैठो मई कर लूंगा.

गरिमा: अरे नहीं नहीं काका मई आपसे इसलिए थोड़ी न कह रही हु की मुझे काम करने में परेशानी है मैंने तो बस इसलिए बुलाया था की पसीने की वजह से मेरे पेट में बहुत खुजली हो रही और मेरे हाथो में आता लगा है अब ऐसे हाथ से कैसे खुजलाउ या फिर पहले हाथ धो फिर खुजलाउ कौन इतनी ख़ोख़त करे आप थोड़ा खुजली कार्डो मेरी पेट में नाभि के पास आपके हाथ तो सही है.

काका को अपने कानो पर यकीन नहीं हो रहा था की गरिमा खुद अपनी तरफ से उसे अपनी कमर को छूने उसे सहलाने खुजलाने को कह रही थी. काका ने कई रातो से गरिमे के सोने के बाद उसके पेट को बहुत सहलाया चूमा यहाँ तक उस पर अपना वीर्य भी निकला पर आज गरिमा के होशो हवस में पहली बार उसे गरिमा के बदन को छूने का मौका मिला था और ये मौका तो खुद उसे गरिमा ने दिया था.

काका: पर मई वह कैसे हाथ लगा सकता हु.

गरिमा ने मन hi मन सोचा रात में मुझे नींद की गोली खिलाकर मेरे पेट पर अपना वीर्य निकलने में शर्म नहीं आती और अभी खुजली करने में देखिओ कैसे ड्रामा कर रहे है. असल में तो अंदर hi अंदर ख़ुशी के लाडू फूट रहे होंगे.

गरिमा: अरे क्या आप भी आईएसएम इतनी क्या बड़ी बात है कमर hi तो है कोई गलत जगह थोड़ी न छूना है. इतस ok आप कार्डो खुजली प्लीज कार्डो बहुत ज़ोर से हो रही है.

काका ने बिना कोई न नुकुर धीमे धीमे अपने हाथ बढ़ाते हुए गरिमा के पेट पर रख दिए.

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इस स्पर्श से गरिमा के तन बदन में उत्तेजना की लेहेर दौड़ गई पर गरिमा ने उत्तेजना पर उसके चेहरे पर उत्तेजना का कोई भाव नहीं आने दिया. और काका भी गरिमा के मांसल गदराई कमर को सहलाए जा रहा था और उसके चेहरे के भावो को पद रहा था. सिर्फ गरिमा की कमर को सहलाने भर से उसके लुंड ने धोती के अंदर हिचकोले खाना शुरू कर दिया. न गरिमा ने उसे रुकने को कहा न वो खुद रुका. कुछ देर बाद गरिमा ने उसे शुक्रिया काका कह दिया ये इशारा था की अब वो रुक जाए. पर इसके बाद अचानक गरिमा नै रेक रख दी.

गरिमा: शुक्रिया काका अब अगर आपको दिक्कत न हो तो अपने अंगोछे से यहाँ का पसीने पोछ भी दीजिये इसकी वजह से बड़ी इर्रिटेशन हो रही है.

काका ने चुपचाप अपने कंधे पर पड़ा अंगोछा उतरा और गरिमा के पेट में जहा जहा पसीने की बूंदे नज़र आ रही थी उन्हें साफ़ करने लगा. पर गरिमा इतने पर hi नहीं रुकी.

गरिमा: काका ज़रा मेरे चेहरे और गले के नीचे का पसीना भी पूछ दीजिये.

गरिमा हल्का से तितछी होकर काका की तरफ घूम गई और काका ने पहले तो उसके माथे पर बहते पसीने को पोछा और फिर गरिमा के गले से नीचे को और बहते आ रहे पसीने को देखा जो गले से नीचे की और आकर गरिमा के भरी भरी स्तनों के बीच की दरार में से गरिमा के ब्लाउज में समां रहा था. गरिमा का ब्लाउज पसीने में इस कदर भीग चूका था की अंदर ब्रा न होने की वजह से गरिमा की स्तनों के ऊपर की निप्पल भी ब्लाउज के अंदर से उभरी हुई साफ़ नज़र आ रही थी. काका की नज़र तो ब्लाउज में से झाकते उन छोटे छोटे निप्पल पर hi जैम सी गई थी. वो तो गरिमा की आवाज़ से उनका ध्यान टूटा.

गरिमा: काका क्या सोचने लगे मेरे गले का पसीना भी पोछ दीजिये.

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गरिमा के कहने पर काका ने अपने अंगोछे को नीचे सरकते हुए उसकी गर्दन तक ले आया. और उसकी गर्दन से बहते पसीने को पोछने लगा गर्दन को पोछते पोछते बिहारी काका के हाथ पसीने के नीचे आने की दिशा में आते आते गरिमा के ब्लाउज के खुले गले वाले हिस्से तक पहुंच गए जहा गरिमा की स्लीव्ज की दरार ब्लाउज के अंदर से झांक रही थी. काका के हाथ में लिप्त अंगोछा अब गरिमा के क्लीवेज के ऊपर था और बड़े आहिस्ता आहिस्ता गरिमा के क्लीवेज के ऊपर बहते पसीने को पोछ रहे थे. कुछ देर पहले अपने काम में बुरी तरह व्यस्त काका अब एक औरत के पसीने को पोछने में इतने मग्न थे की अब किसी काम की कोई चिंता नहीं थी. वही गरिमा का हाथ की हलकी सी भी छुअन गरिमा को रोमांच से भर देती पर वो काका हल्का सा भी हिंट न देते हुए चुपचाप आता माड़ने रही थी और यही ज़ाहिर कर रही थी की वो तो अपने काम में बिजी है. गरिमा जितनी देर आता माद्ति रही काका उनके क्लीवेज का पसीना hi पोछते रहे जैसे जाने कितने जन्मो का पसीना हो वह. काका ने अपना हाथ तब हटाया जब गरिमा ने बुबारा उन्हें शुक्रिया करा.

गरिमा: शुक्रिया काका लीजिये आता तो मैना माड़ दिया अब लाइए मई चटनी पीस देती हु. सिलबट्टा कहा है.

काका: वो वह फ्रिज के पीछे ललिये मई ले अत हु.

गरिमा ने आगे बाद कर फ्टीज के पीछे से वो सिलबट्टा निकल लिया और उसे ज़मीन पर रख कर धनिया टमाटर उठा कर वही किचन की फर्श पर चटनी पीसने बैठ गई.

काका: अरे आप ज़मीन पर क्यों बैठ रही है मई सिलबट्टे को यहाँ स्लाबे पर रख देता हु.

गरिमा: नहीं नहीं खड़े खड़े क्यों काम करू बैठ के कर दूंगी.

काका: तो एक चौकी रख देता ऐसे फर्श पर क्यों बैठ रही है.

गरिमा: अरे ठीक है कोई आसमान की पारी नहीं हु जो ज़मीन पर नहीं बैठ सकती अपने घर में भी ज़मीन पर बैठ कर काम करती हु और वैसे भी आपने अभी फर्श साफ़ की है तो कोई प्रॉब्लम नहीं. और ऐसे बैठ कर चटनी पीसना ज्यादा कम्फर्टेबले है.

काका: ठीक है तब तक मई आपका नाश्ता बना देता हु चाय पकोड़े.

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चटनी तो बस बहाना था असलियत में तो ये काका के खून को गरम करने की उसके खेल का दूसरा चरण था. काका अपने काम में लग गया और काका नज़र घूमते हज गरिमा ने टाँगे फैला कर अपना पेटीकोट घुटनो तक ऊपर चढ़ा लिया. इस तरह बैठे होने की वजह से पेटीकोट के अंदर की मोती मोती जाएंगे भी नज़र आ रही थी. और गरिमा आगे पीछे होकर सिलबट्टे पर चटनी पीस रही थी. जिसमे ब्लाउज के अंदर ब्रा न पहने होने की वजह से उसके स्तन ब्लाउज के अंदर कैसे नहीं थे और चटनी पीसने के दौरान आगे पीछे होने पर स्तन पर तेज़ तेज़ हिल रहे थे. हिलते हुए स्तन किसी भी मर्द को उत्तेजित कर देते है और आज गरिमा ने भी काका को अपने हिलते हुए स्तन दिखाकर उत्तेजित करने का निश्चय करा था. पकोडिया टालते टालते अचानक काका की नज़र गरिमा की तरफ गई और गरिमा माँ मादक कामुकता भरा रूप देख उनके लुंड ने धोती के ऊपर की तरफ धकेलना शुरू कर दिया. ऊपर से देखने की वाहह से गरिमा के स्तनों के बीच की दरार बेहद गहरी और अंदर तक नज़र आ रही थी जिसमे उस पर गरिमा के हिलते झूलते बड़े बड़े ढूढ़ तो काका की हालत ख़राब कर रहा था. उस पर गरिमा का यु टाँगे फैलाना की उसकी अंदर की गदराई मांसल जाँघे तक काका को नज़र आ रही थी. साथ hi काका को उत्तेजित करने के लिए वो हलके अपने हाथो से अपने दूध दबती जा रही थी.

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बरबस hi काका का हाथ अपने झटके पे झटके कहते लुंड पर पहुंच गया और वो उसे मसलने लगा. गरिमा ने भी चोर नज़र से काका को अपना लुंड मसलते देख लिया पर उसने ऐसे शो करा जैसे उसका ध्यान उस तरफ नहीं है.

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काका का मन तो कर रहा था की अभी गरिमा के ब्लाउज को आगे से पहाड़ कर उसके बड़े बड़े कबूतरों को आज़ाद करदे पर जब गरिमा नींद में थी तब वो ये न कर पाया तो इस समय तो ये उसके लिए नामुमकिन hi था. और गरिमा भी काका को अभी झड़वाने नहीं चाहती थी क्युकी उसे तो उनसे अपनी वासना की आग ठंडी करवानी थी. इसलिए उत्तेजना की इतनी दोसे फिलहाल के लिए काफी थी क्युकी अगर वो ज्यादा उत्तेजित करेगी तो काका झाड़ कर hi अपना सारा माल निकल देंगे और अभी तो उसे काका को ऐसी उत्तेजनांकि और दोसे देनी थी और हर बार झड़वा कर वो उनके लुंड को कमजोर नहीं करना चाहती थी. पर गरिमा को ये भी समझ नहीं आ रहा था की वो काका को सेक्स के लिए कैसे कन्विंस करे क्युकी डायरेक्ट वो कहना नहीं छह रही थी और कोई तरीका उसे समझ नहीं आ रहा था. पर काका की लगातार बढ़ती उत्तेजना पर ब्रेक लगाने के लिए चटनी को पीस कर गरिमा ने अपनी नज़रे उठा ली और गरिमा के चेहरा ऊपर करते hi काका ने लुंड से अपना हाथ हटा लिया. गरिमा ने चटनी को कटोरी में भर कर काका की तरफ बड़ा दिया और सिलबट्टा वापस फ्रिज के पीछे रख दिया.

गर्मी के मारे में उसका गाला सूख गया इसलिए उसने फ्रिज से एक पानी की बोतल निकली तभी उसे फ्रिज में एक डब्बे में कुछ लड्डू दिखे गरिमा एक लड्डू उठाकर खाने hi वाली थी की काका ने उसे रोक दिया.

काका: अरे अरे बिटिया रुको वो लड्डू मत खाओ.

गरिमा: क्यों काका एक hi खा रही थी कोई दिक्कत है क्या मेरे खाने में.

काका: अरे नहीं नहीं वो बात नहीं है दरअसल ये लड्डू आपके लिए सही नहीं है.

गरिमा: क्यों देखने में तो सही है खुशबू भी अच्छी आ रही है फिर मई क्यों नहीं खा सकती.

काका: दरअसल ये भांग के लड्डू है इन्हे खा कर आपका दिमाग घूम जाएगा आप अपने होश में नहीं रहोगी बड़ी तीखी भांग मिली है इनमे आप नहीं झेल पाओगी.

गरिमा: ओह ये बात है. थैंक्स बताने के लिए.

गरिमा ने वो लड्डू वापस रख कर फ्रिज बंद कर दिया पर अचानक उसकी आखे शरारत से चमक उठी उसने पलट कर वापस फ्रिज की तरफ देखा और एक शैतनि स्माइल उसके लबो पर उभर आई.

गरिमा मन में: मिल गया काका को बिना डायरेक्टली कहे उन्हें छोड़ने के लिए मजबूर कर देने का तरीका मिल गया.

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काका: बिटिया आपका नाश्ता.

गरिमा: काका मई अपने कमरे में लजाकर खा लुंगी.

काका: ठीक है बिटिया.

काका को वही छोड़ गरिमा नाश्ता लेकर अपने कमरे में चली गई. और बिहारी काका गरिमा के हिलते हुए दूध और गदराई कमर की छुअन को याद करके अपना लुंड मसलते रह गए. पर इतना तो तै की जिस उत्तेजना को काका बड़ी मुश्किल से दबाए हुए थे और बस गरिमा के ऊपर वीर्य निकल कर hi अपनी गर्मी को ठंडा कर लेता था उसे आग में गरिमा ने अपनी कामुकता का घी दाल दिया था इसलिए आग का भड़कना तो तब था पर अब ये आग कब और कैसे बबड़केगी ये तो बस गरिमा जानती थी.

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सूर्य पूजा चेरियट रेस

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लखन का सफ़ेद रथ और प्रतियोगी 1-2 के काले और लाल रथ लगभग नैक तो नैक साथ साथ चल रहे थे कभी कोई आगे हो जाता तो कभी कोई. और चौथा प्रतियोगी अपना नीला रथ लेकर बहुत आगे निकल गया था वो तो दूर दूर तक कही नज़र hi नहीं आ रहा था. वो जितनी आगे निकल गया था अब उसे हराना बहुत मुश्किल लग रहा था. फिलहाल लाल रथ दुसरे नंबर पर था. ऐसे में वो काळा रथ वाला लखन के रथ के एकदम करीब आकर उनसे बात करने लगा.

ब्लैक चेरियट: क्या बात है लखन जी मन्ना पड़ेगा इस उम्र में भी क्या खूब मेन्टेन करा है आपने खुद को.

लखन रथ चलते हुए: शुक्रिया पर अच्छा होगा ये बाते हम बाद में करे फिलहाल अपने रथ चलने में ध्यान दे.

ब्लैक: अब ध्यान देकर भी क्या फायदा हो जाएगा लाख जी वो नीला वाला तो बहुत आगे निकल गया हम तीनो कुछ भी कर ले उसे नहीं पकड़ पाएंगे.

लखन: कोशिश करना हमारा काम है आगे परिणाम जो हो.

ब्लैक: बात तो सही कह रहे है पर अगर कोशिश भी इस तरह की जाए ताकि परिणाम भी हमारे फवौर में हो तो.

लखन: मतलब

ब्लैक: देखिये अब अगर हम सही तरीके से यही रथ चलते रहे तब तो जीतने से रहे पर अगर हम दोनों मिलकर खेले तो हम दोनों hi ये रेस जीत सकते है.

लखन: क्या कहना चाहते हो खुल कर कहो.

ब्लैक: देखिये आप जो गृह सिद्धि की पूजा कर रहे है उसके लिए ये रेस जीतना चाहते है और मई उन 20 लाख रुपियो के लिए ये रेस जीतना चाहता हु. अगर मई और आप मिल जाए तो हम सबसे पहले इस लाल रथ वाले को घेरकर रेस से बहार कर देंगे फिर वो नीला वाला भी तो इसी रस्ते से वापस आएगा रस्ते में उसे भी दबोच लेंगे उसके बाद आप ये रेस जीत लेना और उसकी जो प्राइज मनी है वो मुझे दे देना. आपको आपकी जीत मिल जाएगी मुझे मेरे पैसे. क्या बोलते हो?

लखन: तुम्हारे सिर्फ रथ का रंग hi कला नहीं है तुम्हारा दिल भी उतना hi कला है. पर लखन सिंह ज़िन्दगी और खेल कही भी बेईमानी नहीं करता.

ब्लैक: पर मई तो.....

लखन: बस दफा हो जाओ यहाँ से मुझे तुंहरे साथ कोई सौदेबाज़ी नहीं करनी.

ब्लैक: Ok अस ु विश मई तो आपके फायदे की hi बात कर रहा था.

लखन सिंह अपने रथ की गति बढ़ाते हुए और लाल रथ वाले को पछाड़ते हुए आगे निकल गए अब लखन का रथ दुसरे स्थान पर था और कला और लाल रथ उनके पीछे. लखन तेज़ तेज़ रथ चलाए जा रहे थे और उन दोनों को आगे निकलने का कोई मौका नहीं दे रही थे. पर अचानक एक मोड़ पर काळा और लाल रथ उनके अगल बगल में आ गए और लखन सिंह का रथ उनके बीच में डाब गया. लखन सिंह न रथ को आगे ले जा प् रहे थे न पीछे.

ब्लैक: लखन जी मैंने आपको एक डील दी थी पर अपने तो इंकार कर दिया पर उसके बाद मैंने एक डील इस लाल वाले को दी की हममे से कोई भी जीते जीत की रकम आधी आधी बटेगी.

रेड: और मज़े की बात ये है की मैंने वो डील मान ली. इसलिए अब आपको इस रेस से बहार होना होगा.

ब्लैक: ोये लाले दी जान सामने जो कच्चा रास्ता दिख रहा है वह कुछ आगे एक रेतीला दलदली ज़मीन है चल लखन जी को उधर ले चलते है.

रेड: जैसा तुम कहो बरोथेर.

वो लाल और कला रथ लखन के रथ को दबाए हुए कच्चे रस्ते पर उतर गए और लखन जी को उनके बीच दबा होने की वजह से उसी तरफ मुड़ना पड़ा. आगे कुछ दूर पर वो दलदल नज़र आ रहा था उसके दलदल के करीब पहुंचते hi कला और लाल रथ लखन के रथ से अलग होकर दलदल के दे और बाई तरफ पहुंच गए पर लखन जब तक अपने रथ को घूमते उसके रथ का एक पहिया दलदल में जाकर फस गया.

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लखन सिंह तो रथ से कूदकर रथ से उतर गया पर उसका रथ दलदल में समता जा रहा था. लखन अपने रथ को बहार खींचने की कोशिश करने लगा.

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ब्लैक: चलिए लखन जी आप अपने रथ को बहार निकलने की कोशिश करते रहिये हम तब तक रेस में आगे बढ़ते है. अभी उस नीले वाले को भी रोकना है बीच रसस्ते में वर्ण आपके चक्कर में कही वो न निकल जाए.

रेड: है पर रथ निकलने की कोशिश करते करते इतना आगे न चले जाना की खुद भी दलदल में चले जाए और यहाँ कोई आपकी चीख सुनने वाला भी न हो. और आपकी वो सेक्सी सी दुल्हन वह मंडप में आपका इंतज़ार hi करती रह जाए.

ब्लैक: वैसे इनकी दुल्हन तो बड़ी हॉट और सेक्सी है सुना है इनसे उम्र में आधी है. आप उसकी चिंता न करो अगर आपको कुछ हो भी गया तो हम है न हम अपनी अपनी पत्नियों के साथ आपकी पत्नी को भी संभाल लेंगे.

लखन सिंह गुस्से में उनकी तरफ लपके पर वो दोनों तेज़ी से अपने रथ को आगे बढ़ाकर वह से भाग खड़े हुए. लखन कुछ दूर उनके पीछे भागे पर उन्हें घोड़ो के हिनहिनाने की आवाज़ सुनाई दी जो रथ के साथ साथ दलदल की तरफ खींचे चले जा रहे थे. लखन वापस उस दलदल के पास लौटे और घोड़ो की मदद से रथ बहार खींचने की कोशिश करि पर उनकी हर कोशिश बेकार रही और कोई रास्ता न दिखने पर उन्होंने घोड़ो को रथ से अलग कर दिया.

पर उनके आँखे गुस्से से लाल थी उन्हें किसी भी कीमत पर उन दोनों को सबक सीखना था. लखन ने रथ से आज़ाद हुए उन घोड़ो में से एक की लगाम थमी और उनके रथ के पीछे दौड़ पड़े.

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घोडा चलने में तो वैसे भी लखन सिंह का आस पास के गई गाँवों में कोई मुक़ाबला नहीं था. लखन सिंह का घोडा तेज़ गति से दौड़ रहा था पर अचानक लखन सिंह की नज़र रस्ते में किनारे खड़े उस नीले रथ पर पड़ी. रथ पर कोई नहीं था वो पहला नौजवान जो सबसे आगे चल रहा था वो गायब था. वो समझ गए की ये भी ज़रूर उन काळा और लाल रथ वालो का काम है. उन्होंने उस रथ के पास पहुंच कर इधर उधर देखा तो उन्हें थोड़ी दूर झाड़ियों के पास वो युवक ज़मीन पर गिरा दिख गया. लखन अपना घोडा लेकर उसके करीब पहुंचे तो देखा वो होश में है पर कराह रहा है यानि उन दोनों ने इसके साथ मारपीट की होगी. लखन सिंह ने घोड़े से उतारकर उसे संभाला उसने भी लखन सिंह को अपने पास देखा तो उसे भी थोड़ी हिम्मत आई.

लखन: उठो तुम्हारा ये हाल उन काळा और लाल रथ वालो ने किया है न.

ब्लू: लखन जी आप आ गए वो दोनों तो कह रहे थे की उन्होंने आपको भी रेस से बहार कर दिया है.

लखन: कोशिश तो की थी पर लखन सिंह ऐसे कल पैदा हुए लौंडो से हार मैंने वालो में से नहीं है.

लखन सिंह उसे संभल hi रहे थे की तब तक वो काले और लाल रथ वाले भी वह पहुंच गए.

ब्लैक: ओह लखन जी आप यहाँ मान गया आपको बड़े दीठ किसम के बन्दे हो. बड़ा सुना था आपके बारे में की आप जल्दी हार नहीं मानते आज देख भी लिया.

लखन सिंह ने भी पलट कर उन्हें देखा उनके हाथ में अपने अपने झंडे थे.

रेड: क्या बोलते हो इन्हे भी यही चित्त करदे ताकि ये रेस पूरी न कर सके.

ब्लैक: अरे रहने दे वैसे भी अभी तो इन्हे जाकर अपना झंडा लाना है फिर वापस आना है तब तक तो हम रेस जीत भी जाएंगे. और वैसे भी सुना है अपने से आधी उम्र के पहलवानो को हरा देते है अगर अभी इनके हत्थे चढ़ गए तो मसल के रख देंगे हमे इसलिए निकल लो यहाँ से.

लखन सिंह एक बार फिर उनकी तरफ लपका पर वो दोनों तेज़ी से आगे बाद गए. लखन सिंह अपने घोड़े पर बैठने को हुए पर तभी उस घायल राठी के कराह सुनाई दी जो अब भी ज़मीन पर पड़ा था और उसे इस वक़्त मदद की ज़रूरत थी. लखन सिंह वापस उसके पास गए वो बेहोश सा हो रहा था. लखन सिंह ने उसे खड़ा करने की कोशिश की पर वो खड़ा भी नहीं हो प् रहा था.

ब्लू: लखन जी मेरे पेअर में साप ने काट लिया है मेरा सर घूम रहा है.

लखन: क्या

लखन सिंह ने उसके पेअर को देखा तो एक पेअर में साप के काटने का निशान बना था. लखन जी किसी तरह उसे सहारा देकर उसके रथ तक ले आए और उसे रथ पर लिटा दिया.

ब्लू कराहते हुए: आअह्ह्ह्ह लखन जी मई जनता हु ये रेस जीतना आपकी गृह पूजा का एक हिस्सा है ममममम आह्हः ल और मई आपकी हार की वजह नहीं बनना चाहता. आप मेरा रथ लेकर रेस में आगे बढिये और अपना झंडा लेकर उन दोनों को हराइये. आआ

लखन: तुम्हे जल्द से जल्द इलाज की ज़रूरत है नहीं तो ज़हर तुम्हारे पुरे शरीर में फ़ैल सकता है. इसलिए रेस जीतने से ज्यादा ज़रूरी इस वक़्त तुम्हे आश्रम पहुंचना है.

ब्लू: पर अगर आप बिना अपना ध्वज लिए वापस गए तो आप हारे माने जाएंगे.

लखन: मेरी जीत हार किसी इंसान की जान से बाद कर नहीं. और अगर तुम्हारी जान खतरे में दाल कर मई ये रेस जीत भी गया तो वो मेरे लिए किसी हार से कम नहीं होगी.

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लखन सिंह ने उस नीले रथ की लगाम थमी और रथ वापस आश्रम की तरफ दौड़ा दिया. इस बार लखन सिंह का रथ पहले से ज्यादा तेज़ी से दौड़ रहा था क्युकी उस बार सवाल किसीकी ज़िन्दगी और मौत का था.

लखन सिंह रथ दौड़ते हुए उसी स्थान तक पहुंच गए जहा से वो दोनों रथ सवार उनका रथ उस कच्चे रास्ते पर ले गए थे. अचानक उनके कान में किसी के चीखने की आवाज़े पड़ी जो उस कच्चे रास्ते में दलदल वाली तरफ से hi आ रही थी.

आवाज़: बचाओ कोई तो बचाओ.

लखन सिंह वापस रथ उस कच्चे रास्ते में उतर दिए और जैसे hi वो उस दलदल के करीब पहुंचे वो शॉक रह गए. क्युकी वो लाल रथ वही दलदल के किनारे खड़ा था और उसको चलने वाला रथ सवार आधा दलदल में गदा हुआ था और जितना वो बहार निकलने की कोशिश कर रहा था उतना hi वापस गढ़ता जा रहा था.

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लखन सिंह को देखते hi वो एक पल को बड़ा लज्जित हुआ पर फिर अपने किए की माफ़ी मांगते हुए खुद को बचा लेने की विनती करने लगा.

रेड: लखन सिंह जी मुझे माफ़ कर दीजिये मई उस काळा वाले की बातो में आ गया था.

लखन: तुम दोनों तो इनाम की रकम आधी आधी बाटने वाले थे न तो तुम्हारा वो साथी कहा चला गया तुम्हे छोड़ कर उसने नहीं बचाया तुम्हे.

रेड: वो सच में दिल का कला था पहले मुझे अपनी बातो में लेकर मेरी मदद से आपको और उस नीले रथ वाले को रेस से बहार करवाया और फिर मुझे hi धोके से यहाँ दलदल में फसा कर चला गया. अब तक वो आश्रम पहुंच भी गया होगा. मुझे बचा लीजिये लखन जी मई इस दलदल से निकल नहीं प् रहा हु.

लखन: तुम्हारे जैसे धूर्त मक्कार इंसान के साथ यही होना चाहिए. जब मुझे इसी दलदल में फसा कर गए थे तब ये ख्याल नहीं आया था की मेरी भी जान जा सकती थी.

रेड: गलती हो गई मुझसे मई लालच में अँधा हो गया था मुझे माफ़ कर दीजिये.

लखन: बिलकुल नहीं तुम इसी के लायक हो.

लखन ने रथ वापस मोड़ लिया वो लाल रथ वाला लगातार चीख कर उनसे बचने की विनती कर रहा था.

रेड: नहीं लखन जी मुझे यु यहाँ छोड़ कर मत जाइये मई मर जाऊंगा. प्लीज लखन जी मई भी आपकी बेटे की उम्र का हु आज शादी होनी है मेरी. आप तो बड़े हो इतने कठोर मत बनिए सजा देने से माफ़ करने वाला ज्यादा बड़ा होता है मुझे यहाँ मरने के लिए छोड़ कर मत जाइये.

लखन जी ने रथ मोड़ तो लिया था पर उनसे आगे नहीं बड़ा जा रहा था. फाइनली अपने गुस्से को शांत करते हुए वो अपने रथ से उतरे हुए पास hi लगे एक बरगद के पेड़ के लाते तोड़ उनसे एक रस्सी बनाई और उसे उस लाल राठी की तरफ उछाल दिया जिसे उसने पकड़ लिया और फिर लखन सिंह ने उसे दलदल से बहार खींच लिया. बहार आते hi वो लखन सिंह के पैरो में गिर पड़ा.

रेड: मुझे माफ़ कर दीजिये मानीं आपके साथ इतना बुरा करा फिर भी अपने मेरी जान बचाई. मई आपका कैसे शुक्रिया ऐडा करू.

लखन: कोई बात नहीं गलतिया इंसान से होती है पर कोशिश करना की ज़िन्दगी में दुबारा कभी बेईमानी के रास्ते पर न चलो क्युकी बेईमानी के रास्ते पर चलने का अंजाम इसी तरह बुरा hi होता है.

रेड: जी मई आपकी ये सीख हमेशा याद रखूँगा.

तभी लखन जी को रथ में बेहोश पड़े उस नीले रथ वाले का ख्याल आया.

लखन: चलो इस रथ पर बैठ जाओ हमे जल्द से जल्द आश्रम पहुंचना होगा इसे जल्द से जल्द इलाज की ज़रूरत है. इसे साप ने काट लिया है

रेड: साप ने काट लिया पर जब हमने इसे वह छोड़ा था तब तो ये ठीक था शायद हमारे आगे जाने के बाद इसे साप ने कटा होगा.

लखन: तुम इसे होश में रखो मई रथ को तेज़ी से आश्रम तक पंहुचा दूंगा.

रेड: जी

लखन सिंह और वो लाल रथ वाला भी उस रथ पर सवार हो गए. लाल रथ वाला उस नीले वाले को होश में रखने की कोशिश कर रहा था और लखन सिंह तेज़ी से रथ को आश्रम की तरफ लिए जा रहे थे. लखन सिंह का रथ तेज़ी से आश्रम में दाखिल हुआ सामने प्रथम द्वितीय और तृतीया स्थान का पोडियम बना था जिसमे वो काळा रथ वाला प्रथम स्थान पर खड़ा था वही बगल में विनीता और प्रधान पुजारी भी खड़े थे. लखन सिंह ने अपना रथ सीधा प्रधान पुजारी के सामने रोका और उन्हें नीले रथ वाले की हालत से अवगत कराया.

लखन: पुजारी जी इसे साप ने काट लिया इसे उपचार की ज़रूरत है इसको बचा लीजिये.

पुजारी: ठीक है हम देख लेंगे.

इतना कह कर लखन गुस्से में पहले स्थान पर खड़े उस काळा रथ वाले की तरफ उसे मारने को बड़े पर प्रधान पुजारी ने उनका हाथ पकड़ कर उन्हें रोक लिया.

लखन गुस्से में आग बबूला थे.

पुजारी: रेस हरने पर इतना गुस्सा.

लखन: मुझे गुस्सा रेस हरने का नहीं इसकी घटिया हरकतों का है और मई इसे सबक सीखा कर रखूँगा. पुजारी जी मेरा हाथ छोड़ दे आप जानते नहीं इसने ये रेस कैसे जीती है.

पुजारी: क्या करा इसने उस लाल रथ वाले के साथ मिलकर आपके रथ को दलदल में गिराया उस नीले रथ वाले को घायल करा और फिर अपने hi साथी को दलदल में गिरा कर यहाँ आ गया यही न.

लखन: आप सब जानते है और फिर भी अपने इसे यहाँ खड़ा कर रखा है. क्यों

पुजारी: अभी बताता हु.

पुजारी ने एक बार ज़ोर से ताली बजे और रथ पर बेहोश पड़ा वो नीले रथ वाला एकदम भला चंगा उनके सामने आकर खड़ा हो गया और उसके वो लाल रथ वाला भी था.

लखन: तुम ठीक हो तुम्हे तो साप ने काट लिया था.

अचानक वो काले रथ वाला भी उनके साथ एकरा खड़ा हो गया और वो तीनो एक दुसरे को देखकर मुस्कुराने लगे.

लखन: तुम दोनों इस पर गुस्सा होने की बजाए एक दुसरे को देखकर मुस्कुरा रहे हो आखिर ये हो क्या रहा है.

पुजारी: इसका उत्तर आपको मई देता हु. जैसा की आपको बताया गया था की इस प्रतियोगिता के तीन चरण होंगे पर वो तीन चरण तीर चलना रथ चलना और झंडा लाना नहीं थे. ये सच है की भगवान् सूर्य को तीरंदाज़ी और चेरियट रेस अति प्रिय है पर भगवान् सूर्य सिर्फ तीर या रथ के देवता नहीं है. वो न्याय के देवता है ज्ञान और सच्चाई का प्रतीक है. और ते प्रतियोगिता भी आपके आतंरिक गुड्डो की परीक्षा थी.

लखन: मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा आप क्या कह रहे है.

पुजारी: ये सच है की इस प्रतियोगिता के तीन चरण थे पर ये वो चरण नहीं थे जो आप समझ रहे थे. और न hi इस प्रतियोगिता में आपके अलावा और कोई प्रतियोगी था इसमें आप और सिर्फ आप hi एकमात्र प्रतियोगी थे. इस प्रतियोगिता के तीन चरण वो तीन प्रतियोगी थे जो इस प्रतियोगिता में आपके साथ रथ चला रहे थे.

लखन: क्या ये तीनो मई अब भी कुछ नहीं समझा.

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पुजारी: इस प्रतियोगिता का प्रथम चरण था वो कला राठी जब उसने आपको ऑफर करा था की आप और वो मिल कर बेईमानी और अनैतिकता से ये रेस जीत ले. वो आपकी नैतिकता की परीक्षा थी. अगर उस वक़्त आप उसका ऑफर मान लेते तो आप पहले चरण में hi हार जाते पर उसे मन करके आप नैतिकता की परीक्षा में सफल रहे. और आपका रथ भी दलदल में इसलिए फसाया गया था क्युकी ये घटना भी सूर्य से जुडी है सूर्य पुत्र करना का रथ भी इसी तरह दलदली ज़मीन में फस गया था उसी घटना जीवंत करने के लिए आपको भी उसी परिस्थिति में डाला गया.

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लखन का मुँह खुला का खुला रह गया और उसने उस काळा राठी को देखा जिसे वो अब तक गलत समझ रहे थे.

पुजारी: प्रतियोगिता का दूसरा चरण था वो नीला राठी जब वो आपको घायल अवस्था में मिला और उसने आपको बताया की उसे साप ने काट लिया है और ज़हर उसके शरीर में फ़ैल रहा है. उसने भी आपको विकल्प दिया की आप उसका रथ लेकर रेस में आगे बाद सकते है या आप वापस लौट कर उसके प्राण बचा सकते थे. ये आपके स्वार्थ और दयालुता की परीक्षा थी. और रेस जीतना आपके लिए ज़रूरी होने के बावजूद अपने निजी स्वार्थ को दरकिनार कर किसी के प्राण बचने के लिए खुद को रेस से बहार करके इस दयालुता की परीक्षा में भी आप सफल रहे. और आपकी जानकारी के लिए बता दू इसने खुद अपने आपको साप से कटवाया था वो भी बिना ज़हर के और जो कुछ उसने आपसे कहा वो सब झूट था.

लखन ने उस नीले राठी को घूर कर देखा और मुस्कुरा दिए.

पुजारी: प्रतियोगिता का तीसरा और आखिरी चरण था वो लाल राठी जिसने आपको उस दलदल में गिराया था आपकी पत्नी के बारे में अनुचित बाते कही थी और आपके मन में अपने लिए क्रोध पैदा करा था. और फिर खुद दलदल में फसने पर आपसे खुद को बचने की विनती करि थी. वो आपके क्रोध और सयम की परीक्षा थी. वो आपकी परीक्षा लेने के लिए खुद दलदल में फसा था, एक बार जब आप उसे छोड़ कर पलट गए तो लगा की आप इस चरण में फ़ैल हो जाएंगे पर अपने क्रोध को काबू काबू करते हुए सयम से काम लेते हुए आपने अपने दुश्मन के भी प्राणो की रक्षा करके इस तीसरे चरण को भी पार कर लिया. और आपको बता दू ये तीनो इस विवाह में सम्मिलित होने आए दूल्हे नहीं बल्कि मेरे hi शिष्य है जो अलग अलग चरण पर अलग अलग तरह से आपकी परीक्षा ले रहे थे. और इन तीनो hi चरणों में आप पूरी तरह सफल रहे.

लखन उन तीनो रथियो के पास गया और उन्हें हाथ जोड़ कर प्रणाम करा.

लखन तो ब्लू: मन्ना पड़ेगा मरने की एक्टिंग तो आप शाहरुख़ खान से भी अच्छी करते है.

ब्लू: माफ़ करिये लखन जी की मैंने आपसे झूट बोलै.

लखन: कोई बात नहीं.

लखन तो ब्लैक एंड रेड: मुझे माफ़ कर दीजिये मैंने आप दोनों के बारे में बहुत गलत सोचा.

ब्लैक: माफ़ी तो हमे आपसे मांगनी चाहिए की हमने आपकी पत्नी के बारे में अनुचित बाते बोली पर यकीन मानिये हमारा उद्देश्य सिर्फ आपका क्रोध भड़काना था और कुछ नहीं.

लखन: मई समझ सकता हु की आप दोनों सिर्फ अपने हिस्से का काम कर रहे थे.

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पुजारी: सूर्य देव की पूजा में आयोजित की गई ये न्याय प्रतियोगिता अब समाप्त हुई सभी दूल्हा दुल्हन के जोड़ो से अनुराध है की वो आश्रम में जाकर विवाह के लिए तैयार हो जाए. कुछ समय बाद आर्य रीति से 101 जोड़ो का विवाह होगा और उसके बाद वो सभी जोड़े नाच गए कर सूर्य देव की पूजा और अपने विवाह का उत्सव मनाएंगे. लखहन जी और विनीता जी आप दोनों भी विचार कर ले की क्या आप दोनों सच्चे मन से एक दुसरे को पति पत्नी मानते हुए ये विवाह करने को तैयार है. अगर है तभी इस विवाह में सम्मिलित हो क्युकी सूर्य देव के सामने झूट का कोई स्थान नहीं.

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सूर्य देव की पूजा के पांच चरण तो उन्होंने पुरे कर लिए पर असली चुनौती तो अब थी की क्या वो सच्चे मन से एक दुसरे को पति पत्नी मान सकते है. दोनों के मन में ेल दुसरे के लिए फीलिंग्स तो थी पर वो फीलिंग्स क्या इस लेवल की थी की वो एक दुसरे को पति पत्नी के रूप में स्वीकार कर सके. ये तो पूजा के अगले चरण में hi पता चलेगा.
 
हवेली में

छत से अपना पार्सल उठा कर नेहा जब तक नीचे आती लालू कमरे से निकल गया था. नेहा ने अपना पार्सल अपने पीछे छुपा लिया और कमरे में आ गई. दोनों hi एक दुसरे से थोड़ा झेप रही थी नेहा अपने पार्सल की वजह से और शबाना कुछ मिनट पहले hi कमरे से बहार गए लालू की वजह से. शबाना की नज़रे कुछ पल को हटी और नेहा ने वो पार्सल अपने बैग में छुपा दिया. पर शबाना को अब भी आज बहार जाने के बारे में नेहा को एक मनगढंत स्टोरी सुननी थी जैसा की लालू ने कहा था.

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शबाना: नेहा

नेहा: है दी

शबाना नार्मल सी दीखते हुए: तुझे पता है आज क्या हुआ आज मैंने फेसबुक पर यहाँ शादी की पिक्स डाली और लिखा मई इस गाँव में हु तो बचपन में मेरे घर के बगल में जो नरगिस आप रहती थी उनकी बेटी चांदनी का व्हाट्सप्प पर मश्ग आया "की आप यहाँ आई हो". बचपन में हम बहुत साथ में खेले है और मज़े की बात उसका निकाह यही दो गाँव छोड़ कर हुआ है. और आज उसके बच्चे का जन्मदिन है अब जब उसे पता चला की मई यहाँ आई हुई हु तो वो ज़िद करने लगी की मुझे एक दिन उसके यहाँ रुकना होगा.

नेहा: अच्छा तो आप आज वह जाओगी फिर तो मई यहाँ अकेली रह जाउंगी. गरिमा और विनीता दी तो पहले hi नहीं थे नीतू आरती भी अपने रिश्तेदार के यहाँ चले गए और अब आप भी जा रही है. और शोभा दी तो अपनी रस्मो में बिजी रहती है.

शबाना: बस एक रात की बात है कल सुबह वापस आ जाउंगी. '. फॅमिली है इसलिए तुझे साथ नहीं ले जा सकती.

नेहा: चलो कोई न पर आप उनके यहाँ जाओगी कैसे मई शोभा दी से कह कर गाड़ी अर्रंगे करवौ.

शबाना: नहीं जब मैंने चांदनी को बयाया की मई यहाँ हु तो वो मुझसे मिलने को इतनी उतावली हो गई की अपनों कार से मुझे यहाँ लेने आ रही है. तो मई उसके साथ चली जाउंगी.

नेहा: बढ़िया तो कितने बजे आ रही है आपकी ये चांदनी.

शबाना: कह तो रही थी की वो निकल गई है किसी भी वक़्त आती होगी.

नेहा: तो आप अपना बैग लगा लो रात को पेहेन्ने के कपडे रख लो तब तक मई भी हाथ मुँह धो लेती हु. बड़ी एक्ससिटेड होगी अपनी बचपन की सहेली से मिलने के लिए.

अब शबाना नेहा को क्या बताती की जिसे वो अपनी बचपन की सहेली बता रही है उसे तो वो पहचानती भी नहीं ये तो उसकी मजबूरी है जो उसे झूट बोलने और उसके साथ जाने को मजबूर कर रही है. नेहा बाथरूम में चली गई और उसके बाथरूम में जाने के कुछ मिनट बाद hi शबाना के मोबाइल पर लालू का मश्ग आया.

लालू: चांदनी हवेली के गेट पर पहुंचने वाली है तू गेट पर उसे लेने पहुंच जा. वो बुरखे में होगी ताकि यहाँ कोई उसे पहचान न ले. तू सीधा उसे लेकर अपने कमरे में आ जा. और अपनी सहेली से मिलवा कर थोड़ी बहुत देर बैठ कर चांदनी के साथ यहाँ से निकल ले बाकि सब चांदनी संभल लेगी. समझ गई

शबाना: हम्म

लालू का मश्ग मिलते hi शबाना हवेली के गेट पर पहुंच गई. वो गेट पर पहुंची hi थी की कुछ hi देर बाद हवेली के गेट पर एक सफ़ेद कार आकर रुकी. और उसमे से एक बुरखानशीं औरत उत्तरी जिसने बुरखे के अंदर से इधर उधर देखा और फिर आगे बाद कर शबाना शबाना करते हुए शबाना को गले से लगा लिया. शबाना तो उसकी ये एक्टिंग देख हैरान थी. वो लड़की शबाना के गले लगे थी और गले लगे लगे उसने शबाना के कान में फुसफुसा कर कहा.

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चांदनी: इतना ज्यादा शॉक मत हो मेरी जान मई hi चांदनी हु जो तुझे अपने साथ ले जाने आई हु. सच में इस बार तो साहब लोगो ने बड़ा चोखा माल फसाया है. तू तो एकदम मक्खन मलाई जैसी लगती है की हाथ लगा दो तो मैली हो जाए और तेरे कबूतर भी कितने बड़े बड़े है कैसे कैद रखती है इन्हे पिंजरे में. तेरे कबूतरा तो किसी का भी केला पका दे. चल अभी जल्दी यहाँ का ड्रामा ख़तम कर अपने को निकलने का भी है.

शबाना: है मेरे कमरे में चलिए.

चांदनी: आए है मेरी रसमलाई क्या पतली सी आवाज़ है तेरी बदन इतना गदराया हुआ और आवाज़ इतनी पतली. और बड़ी जल्दी है मुझे अपने कमरे में ले जाने की तू कही उस टाइप की तो नहीं है वो क्या कहते है फिरंगी उसे लेबनसिया.

शबाना: लेस्बियन....

चांदनी: है है वही वही लेबनसिया

शबाना: जी नहीं मई वैसी नहीं हु. अब हम यहाँ से चले वो लालू ने कहा था की यहाँ से आपको सीधा अपने कमरे में ले जाऊ और अपनी सहेली से मिलवा दू ताकि उसे कोई डाउट न रहे. और यहाँ आपको कोई पहचान भी सकता है इसलिए हमे चलना चाहिए.

चांदनी: है तो चल न खली पीली टाइम खोटी कैकु कर रैली है.

शबाना चांदनी को लेकर अपने कमरे की तरफ चल दी.

शबाना: देखो नेहा के सामने ये कैकु टाइम खोटी कर रैली है जैसे शब्द मत बोलियेगा उसे शक हो जाएगा आप पर मुझे ज्यादा बात करने देना आप कम से कम बोलना.

चांदनी: एक शर्त पर मुझे अपने होंठो पर चुम्मी देगी. (शबाना ने घूर कर देखा) हाहाहा टेंशन नको ले मज़ाक कर रैली है अपुन. Ok अपुन चुप रहेगा तुहिच बोलना ok.

शबाना चांदनी को लेकर जैसे hi कमरे में अंदर जाती है अंदर दाखिल वो शॉक रह गई क्युकी अंदर नेहा के साथ साथ शोभा भी थी.

नेहा: ओह दी आ गई आपकी फ्रेंड मैंने शोभा दी को भी बता दिया की आपकी फ्रेंड आ रही है तो वो भी मिलने चली आई.

शबाना को दर था की चांदनी भी इसी एरिया की है तो कही शोभा इसे पहचानती न हो.

शबाना फुसफुसाते हुए: अपना बुरका धक् के रखना ये शोभा यही की है कही पहचानती न हो तुम्हे.

चांदनी फुसफुसाते हुए: चांदनी को यहाँ के मर्द पहचानते है औरते नहीं.

शबाना: फिर भी हम रिस्क नहीं ले सकते.

चांदनी: Ok

नेहा: ये आप लोग क्या फुसफुसा रहे है आइये न.

शबाना: नहीं हम ज़ादा देर बैठेंगे नहीं चांदनी को घर पर बहुत काम है.

शोभा: अरे काम तो सबको रहते है पर तुम्हारी फ्रेंड मेरे घर तक आए और बिना कुछ खाए पाई चली जाए अच्छा नहीं लगता.

शोभा रामु काका को कॉल करते है और उनसे कुछ चाय नाश्ता शबाना के कमरे में पहुंचने को कहती है.

शोभा: आप अपना वैल हटा सकती है यहाँ हम सब औरते hi है.

चांदनी: नहीं ठीक है.

शोभा: Ok अस ु विश, तो आप यही पड़ोस वाले गाँव में रहती है कौनसा गाँव है आपका.

चांदनी: जी फरीदपुर

शोभा: अच्छा आप फरीदपुर से है वो तो यहाँ से बस 10 कम की दूरी पर है.

शोभा: और आपके शौहर क्या करते है.

चांदनी: वो ठेकेदारी का काम करते है.

शोभा चांदनी से सवाल पे सवाल पूछे जा रही थी और शबाना का दिल धक् धक् कर रहा था की कही चांदनी कुछ अंत शांत न बक दे और पकड़ी न जाए क्युकी अब उसकी इमेज भी चांदनी के साथ जुड़ गई थी और चांदनी में पकडे जाने का मतलब था उसका पकडे जाना. तब तक कल्लू नाश्ते की ट्रे लेकर कमरे में आ गया. पहले तो उसने नेहा को घूरकर देखा जिसके साथ उस दिन के बाद दुबारा मज़ा करने का उसे मौका hi नहीं मिला था. बीएड पर नाश्ता रखते हुए अचानक उसकी नज़र बुर्के में बैठी उस महिला के हाथो में पहनी अंगूठी पर गई जिसमे एक बड़ा सा हीरा ज्यादा था.

शोभा: नाश्ता रख दिया न अब जाओ यहाँ से.

कल्लू कमरे से बहार आ गया पर बहार आकर वो सोचने लगा.

कल्लू मन में: साला ये अंगूठी मैंने कही देखि है कहा देखि है अरे है ये अंगूठी तो मैंने उस नचनिया चांदनी बाई के हाथो में देखि थी एकदम शामे तो शामे. जब प्रताप सिंह के यहाँ जैसे में उसने नाचा था पर ये अंगूठी इस बुर्के वाली के हाथ में. अरे हो सकता है इसके पास भी शामे तो शामे वैसी hi अंगूठी हो वर्ण वो नाचने वाली यहाँ बुर्के में क्यों आएगी.

शोभा: लीजिये न कुछ.

चांदनी: जी नहीं वो दरअसल आज मेरा व्रत है.

शोभा: व्रत _ो में भी व्रत रखा जाता है.

चांदनी को अपनी गलती का एहसास हो गया की वो कुछ गलत बोल गई है पर शबाना ने मौके को संभल लिया.

शबाना: व्रत नहीं दरअसल आज ये अपने बच्चे का टिका करने के बाद खाएगी उसकी लुम्बी उम्र के लिए इसकी अम्मी भी यही करती थी तो वही आदत इसे भी लग गई है न.

चांदनी: है वैसे काफी देर हो रही है अब हमे चलना चाहिए घर पर जल्दी आने का बोल कर आई थी.

शबाना: है चलते है. तो हम चले.

शबाना ने अपना बैग उठा लिया.

नेहा: चलो मई आपको नीचे गाडी तक छोड़ औ. शोभा दी मई इन्हे गाडी तक छोड़ कर आती हु.

शोभा: है ठीक है तू छोड़ आ.

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नेहा उन्हें छोड़ने नीचे चली गई और इधर कमरे में मौजूद शोभा नेहा के कपड़ो में आज रात को पेहेन्ने के लिए कोई सेक्सी सी ड्रेस ढूंढ़ने लगी. शोभा की नज़र नेहा की उस ड्रेस पर गई जो नेहा ने सबाड़ी वाली रात पहनी थी रेड डबल स्ट्रिप वाली पर वो नेहा के जैसा बोल्ड और हॉट तो बनना चाहती थी पर उसकी नक़ल नहीं बनना चाहती थी और ये ड्रेस नेहा पेहेन चुकी थी इसलिए वो ये पहने कर विक्रम को ये नहीं जाताना चाहती थी की वो नेहा की पहनी हुई ड्रेस पेहेन कर उसकी नक़ल कर रही है. नेहा का बैग एक से बाद कर एक सेक्सी कपड़ो से भरा था शोभा को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या ले और नेहा भी किसी वक़्त वापस आ सकती थी और वो उसके सामने ये नहीं जाताना चाहती थी की अपने पति को इम्प्रेस करने के लिए उसे उसके जैसे कपड़ो की ज़रूरत है. नेहा के बैग में टाइट फिटिंग लेग्गी, बेहद सेक्सी शॉर्ट्स, छोटी छोटी छोटी स्कर्ट टॉप, सेक्सी लिंगरी, थोंग पैंतीस लास ब्रा क्या कुछ नहीं था नेहा के पास. कन्फूसिओं क्लियर न होने पर शोभा ने नेहा के कपड़ो में अलग अलग तरह के 4-5 कपडे निकल लिए एक छोटी सी शॉर्ट्स एक स्कर्ट टॉप एक सेक्सी लिंगेरी एक मिनी स्कर्ट गाउन और एक सेक्सी ट्रांसपेरेंट ब्रा पंतय सेट भी निकल लिया और उन्हें एक पॉलीबाग में दाल कर कमरे से निकल गई और अपने कमरे में जाकर छुपा दिया.

उधर नेहा ने उनको कार तक छोड़ दिया शबाना का दिल धक् धक् कर रहा था वो अब भी सूरे नहीं थी की उसे जाना चाहिए की नहीं पर जाने के अलावा उसके पास कोई दूसरा चारा भी नहीं था. शबाना और चांदनी कार में बैठ गए और कार वह से चल दी. कार में बैठ कर चांदनी ने अपना हिनाब उतर लिया.

चांदनी: उफ़ कैसे पहने रहते हो तुम लोग ये मई तो कुछ देर में hi पाक गई.

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चांदनी ने तो कार के अंदर आकर hi अपना हिजाब उतरा था पर उसे नहीं पता था की कल्लू एक पेड़ के पीछे से उनकी कार पर hi नज़र गड़ाए था और हिजाब उतारते hi उसने चांदनी का चेहरा देख लिया और वो उसे देखते hi पहचान गया.

कल्लू: ओह तेरी ये तो सच में वो नाचने वाली चांदनी है मई तो बस अंदाज़ा लगा रहा था ये तो सच में वो निकली पर ये चिकनी _टी क्या करने गई है इसके साथ. इसका एक नाचने वाली से क्या रिश्ता है. ये बात तो पता लगनी होगी.

नेहा वापस अपने कमरे में आ गई तब तक शोभा अपना काम कर के जा चुकी थी नेहा को अंदाज़ा भी नहीं था की शोभा उसके कुछ कपडे ले गई है. और न ये अंदाज़ा था की ये छोटी सी घटना उनके आने वाले समय में क्या तूफ़ान लेन वाली थी. वही एक नाचने वाली को शबाना की रिश्तेदार के रूप में देखकर कल्लू के मन में शबाना के चैरेक्टर पर संदेह उत्पन्न हो गया था अब पता नहीं ये संदेह किस नए घटनाक्रम को जन्म देने वाला था.
 
हवेली में

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कमरे में आने के बाद नेहा बिस्तर पर लेट गई और कुछ देर पहले छत पर विकर्म के साथ बिताए पालो को आँख बंद कर याद करने लगी. उसके दिलो दिमाग विक्रम का मरदाना बदन hi घूम रहा था यु तो भीमा भी की कद काठी भी विक्रम जैसी hi थी पर एक जमादार होने की वजह से नेहा के मन में भीमा के लिए कभी वो एक्ससिटेमेंट नहीं आया जैसा आज उसने विक्रम को उन टाइट शॉर्ट्स में देखकर फील करा. विक्रम के बदन की कसावट को याद करते करते hi कब उसके हाथ अपने शॉर्ट्स के अंदर पहुंच गए उसे पता hi नहीं चला और वो अपनी सहेली जिसकी शादी में वो आई थी उसीके नए नवेले दूल्हे को इमेजिन करके अपनी उंगलिया अपनी छूट में अंदर बहार करने लगी. नेहा विक्रम के बदन के आकर्षण में इस कदर खो गई थी की उसे ये अंदाज़ा भी नहीं था की ऐसे ख़यालात अपने मन में लेकर भी वो अपनी सहेली के साथ कितना बड़ा धोका कर रही थी. नेहा की ज़िन्दगी में तो न जाने कितने मर्द आए और कितने चले गए यही हवेली में hi नेहा कितने मर्दो के साथ काफी कुछ कर चुकी थी पर शोभा उसकी ज़िन्दगी तो विक्रम से hi शुरू थी और विक्रम पर hi ख़तम. पर अब उसी विक्रम पर उसीकी सहेली की नियत ख़राब हो गई थी.

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नेहा की उनगलिया अपनी छूट में तेज़ तेज़ अंदर बहार हो रही थी कल रात के ज़बरदस्त बड़सम सेशन के दर्द की खुमारी भी नेहा को उंगलियों को रोकने में नाकाम थी. ऐसा नहीं था की नेहा को पता नहीं था की वो जो सोच रही है वो गलत है पर वासना का नशा वो नशा होता है जो जब दिमाग पर हावी हो जाता है तो सही गलत कुछ समझ नहीं अत. और इस वक़्त वही नशा नेहा के दिमाग पर हावी हो गया था. जितना नेहा ये सोचती की ये गलत है वो उसकी सहेली का पति है उतना वो और ज्यादा एक्ससिटेड हो जाती और उंगलिया और तेज़ अंदर बहार होने लगती. क्युकी सही काम करने की तुलना में गलत काम करते वक़्त हम ज्यादा उत्तेजित हो जाते है कुछ हालत नेहा की भी थी. कुछ पल के तूफ़ान के बाद नेहा एकदम शांत हो गई उसके अंदर की गर्मी से उसकी उनगलिया गीली हो गई और उसके दिमा में छड़ी वासना की खुमारी भी धीरे धीरे उतरने लगी. रिलैक्स होने और अपने अंदर की गर्मी को ठंडा कर लेने के बाद अब नेहा को अपनी सोच पर पछतावा हो रहा था की वो अपनी जिस सहेली की शादी में आई उसीके पति पर अपनी नियत ख़राब कर रही है. ये मनुष्य का स्वाभाव की मास्टरबेट करते वक़्त उसका दिल और दिमाग भावना और विचार शुन्य हो जाता है उसका सिर्फ एक लक्ष्य होता है जल्द से जल्द अपने अंदर की गर्मी को वीर्य के रूप में बहार निकल देना पर मास्टरबेट होने के बाद उसके मन में ये ख्याल अत है की उसने ये गलत करा. अपने शरीर की ऊर्जा को बिना बात खर्च कर दिया. कुछ यही स्थिति इस वक़्त नेहा की थी.

वो किसी भी कीमत पर इस वक़्त विक्रम से अपना ध्यान हटाना चाहती थी. पर कैसे अचानक उसकी नज़र अपने कपड़ो में से झाकते उस पार्सल पर पड़ी और उसे अपना दिमाग डाइवर्ट करने का जरिया मिल गया. स्ट्रेंजर

नेहा ने उठकर वो पार्सल उठाया और उसे खोलने लगी. इस बार क्या होगा इस पार्सल के अंदर पहले पार्सल में शादी का जोड़ा दुसरे में कॉल गर्ल स्टॉकिंग्स इस बार क्या. पर जब नेहा ने पार्सल खोला तो नेहा की एक बार फिर वो शॉक रह गई क्युकी वो पार्सल खली था उसके अंदर कोई ड्रेस तो दूर कपडे का एक छोटा सा टुकड़ा तक नहीं था. के मतलब था इसका पर पार्सल में कुछ तस्वीरें राखी थी जिसमे एक लड़का लड़की तालाब में नंगे होकर सेक्स कर रहे थे

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और साथ में एक नोट भी था.

के नुदे & सी में सडके में सेक्स विथ में

बूत बूत बिट डोंट से ा सिंगल वर्ड आफ्टर सी में

बिकॉज़ ु गेट ा रियल शॉक व्हेन ु सी में

सो NO रियेक्ट NO टॉक एंड इतस ा चैलेंज फॉर ु

अब तो नेहा के अंदर का एक्ससिटेमेंट और बाद गया उस स्ट्रेंजर को देखने का विक्रम से अपना धयान हटाना उस स्ट्रेंजर की आइडेंटिटी जानना और अब ये नया चैलेंज नेहा को इंसिस्ट कर रहे थे की वो इस चैलेंज को एक्सेप्ट करे. और एक गहरी सास लेते हुए नेहा ने वो फ़ोन उठाया जिससे वो स्ट्रेंजर से चाट करती थी और मश्ग करा.

नेहा: चैलेंज इस ों ी ऍम किंग.

कुछ hi देर में उधर से भी रिप्लाई आ गया. पर इस बार उस ईद का नाम मास्टर की जगह स्ट्रेंजर था.

स्ट्रेंजर: ग्रेट ी क्नोव ु एक्सेप्ट आईटी एंड थिस टाइम no मास्टर स्लेव. जस्ट सतरंगेर हु वांट रेवेअल हिज आइडेंटिटी. बूत रूल याद है न No रिएक्शन no टॉक जस्ट सडके में एंड सेक्स विथ में एंड के नुदे टोटली नुदे.

नेहा: गोत आईटी ी ऍम किंग नुदे टोटली नुदे.

स्ट्रागनेर: ी ऍम वेटिंग फॉर ु नियर थे लेक एंड बिलीव में ु गेट ा रियल शॉक व्हेन ु क्नोव हु ऍम ी.

नेहा: ी आल्सो वांट तो क्नोव हु ु अरे.

स्ट्रेंजर: थें के तो में ात नाईट ात शामे प्लेस ी ऍम वेटिंग फॉर ु फॉर थे फाइनल टाइम. Bye Bye

नेहा का सोचना सही था की उस स्ट्रेंजर की तरफ ध्यान डाइवर्ट करने से विक्रम से उसका ध्यान हैट जाएगा. अब देखना ये था की ये फाइनल मीट क्या नया सरप्राइज लेन वाली थी और इस कहानी का एकमात्र किरदार जो अब तक एक नक़ाब के पीछे छुपा था कौन होगा उस नक़ाब के पीछे जिसे देख कर नेहा को इतना बड़ा शॉक लगने वाला था.

कब्रिस्तान में

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अघोरी अपनी साधना से जगा तो सामने नीतू को अपने पास अपने बगल में खुद को देखता पाया.

अघोरी: अरे आप उठ गई.

नीतू: है आपको साधना में देखा तो डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा.

अघोरी: शायद ज़िन्दगी में पहली बार आपको ज़मीन पर सोना पड़ा होगा नींद तो अच्छे से आई.

नीतू: नहीं अच्छे से आई.

अघोरी: और कल रात की घटनाओ की वजह से तो मन अभी विचलित नहीं है न.

नीतू: नहीं अब मई ठीक हु.

अघोरी: और आपके उस ब्रह्मचारी पुरुष का क्या हुआ आज रात को हमे उसकी ज़रूरत पड़ने वाली है. आज रात को आपको और उसको एक साथ पूजा में बैठना है. वो आज रात तक मिल जाएगा न.

नीतू: जी वो आज रात तक मिल जाएगा मेरी सहेली उसे यहाँ ले आएगी.

अब नीतू उसे क्या समझती की कोई ब्रह्मचारी नहीं आने वाला इसलिए उसे जो करना है जल्द करना होगा.

नीतू: दिन काफी चढ़ आया है यहाँ कही नहाने की जगह है और भूक भी लगी है तो कुछ खाने को मिलेगा.

अघोरी: ओह हां मुझे याद hi नहीं रहा की आपको भूक लगी होगी कहलिये पहले आपकी नहाने की प्रोबलें दूर करते है फिर खाने का भी कुछ बंदोबस्त कर देंगे. यहाँ से कुछ दूर पर hi एक झील है आप वन नाहा सकती है. चलिए मई आपको वह ले चलता हु.

नीतू ने अपने कपड़ो में से लुम्बी सी रहीं चुनरी रख ली जिसे पेहेन कर वो नदी में नाहा सके और उसके ये कपडे गीले न हो. अघोरी उसे लेकर घने पेड़ो के बीच से होते हुए नदी की तरफ ले जाने लगा. रास्ते में नीतू को एक पेड़ पर बहुत सुन्दर हरे फल दिखाई दिए. नीतू ने उनमे से एक फल तोड़ कर खाना चाहा पर अघोरी ने उसका हाथ थम लिया.

अघोरी: क्या कर रही है.

नीतू: फल खा रही थी ये फल सही लगा तो सोचा एक फल खा कर देखु.

अघोरी: ज़रूरी नहीं हर सही दिखने वाली चीज़ अंदर से भी सही हो. ये नशे में इस्तेमाल किया जाने वाला फल है. जैसे अफीम का पौधा होता है ये भी कुछ उसी तरह का फल है जो हमारे दिमाग के नर्वस सिस्टम को कुछ वक़्त के लिए सुन्न कर देता है पर दिमाग को सुन्न करने के साथ साथ ये हमारी काम उत्तेजना को भी बड़ा देते है.

नीतू: ओह मुझे पता नहीं था.

अघोरी: इसीलिए बिना पूछे इस तरह जंगल की किसी भी चीज़ को हाथ न लगाए.

नीतू: जी आगे से इस बात का ख्याल रखूंगी.

अघोरी: चिंता न करे आपके लिए खाने लायक फल और सामान मई ला दूंगा.

नीतू: जी

इतनी देर वो झील के करीब भी पहुंच गए. वो जंगल के बीच बानी एक बेहद शांत और सुन्दर झील थी और एक जगह एक चट्टान से नीचे एक बड़े पत्तर पर गिर रहा था जो झरने का सा एक्सपीरियंस दे रह था. नीतू ने फिल्मो में हेरोइनो को बड़े सेडक्टिव अंदाज़ में झरने के नीचे नहाते और हीरो को छुप छुप कर उन्हें देखते और उत्तेजित होते देखा था और उसे भी इस झरने में कुछ वैसी hi होप नज़र आ रही थी जिससे वो शायद को थोड़ा बहुत अपनी तरफ आकर्षित कर सके.

नीतू: बाबा मई उस झरने के नीचे नाहा लू.

अघोरी: जी आप आधे घंटे यहाँ नाहा ले मई वापस जा रहा हु आधे घण्टे बाद दुबारा आ जाऊंगा. तब तक आप नाहा लीजियेगा.

नीतू: मतलब आप मुझे इस अनजान जगह अकेला छोड़ कर जा रहे है. नहीं नहीं मई यहाँ अकेले नहीं रहूंगी आपको भी यहाँ रुकना होगा.

अघोरी: पर...

नीतू: पर वॉर कुछ नहीं आर्डर नहीं दे रही रिक्वेस्ट कर रही हु ऐसे अनजान जगह पर नहाने में मुझे दर लगता है आप पास में रहोगे तो थोड़ा रिलैक्स रहूंगी.

अघोरी: ठीक है ठीक है इतस ok मई यही रहूँगा आप नाहा लो मई दूसरी तरफ मुँह कर लेता हु.

नीतू: क्यों दूसरी तरफ मुँह क्यों.

अघोरी: कैसी बात करती है मई एक औरत को नहाते हुए कैसे देख सकता हु और क्यों देखु इस तरफ.

नीतू: आपका चेहरे इस तरफ रहेगा तो मुझे थोड़ा सेफ फील होगा. और वैसे भी आप तो एक बाल ब्रह्मचारी है एक अघोरी हो तो आप देख भी लोगे तो क्या हो जाएगा. वैसे भी मई कपडे पेहेन कर नहाउंगी निर्वस्त्र होकर नहीं. इसलिए प्लीज मेरी तरफ नज़र बनाए रखना ताकि कही कुछ गड़बड़ हो तो आप बचा तो लो.

अघोरी: पर यहाँ सुनसान जगह क्या गड़बड़ हो जाएगी.

नीतू: क्या पता कब क्या हो जाए कल रात वाला कोई भूत मुझ पर सवार हो जाए और मुझे आपकी मदद की ज़रूरत पद जाए. बस मई कुछ नहीं जानती आप इधर देखते रहना. आपको खुद पर कण्ट्रोल नहीं है क्या जो आप मुझे नहाते देखने में इतना घबरा रहे हो.

अघोरी: नहीं ऐसी बात नहीं है ठीक है मई आपकी तरफ नज़र बनाए रखूँगा.

नीतू ने जानबूझ कर अघोरी के ब्रह्मचर्य पर सवाल उठाया जिस वजह से अघोरी नीतू को नहाते हुए देखने के लिए भी मान गया.

नीतू ने झाड़ियों के पीछे जाकर अपने सरे कपडे उतर कर वो चुनरी अपने बदन पर लपेट ली वो चुनरी बमुश्किल उसके घुटनो से कुछ ऊपर तक hi जा पर रही थी और ऊपर भी उसके ुबहरो के बीचे का क्लीवेज उनमे साफ़ नज़र आ रहा था वो चुनरी लपेट कर नीतू झाड़ियों से बहार आ गई.

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अघोरी ने एक नज़र नीतू को ऊपर से नीचे तक देखा बेशक अघोरी एक ब्रह्मचारी पुरुष था पर था तो एक मर्द hi और एक औरत जब इस तरह कामुक अंदाज़ में उसके सामने आकर कड़ी हो जाए तो उसके दिल की धड़कन बढ़ना भी स्वाभाविक था. नीतू तो मेनका बनकर इस विश्वामित्र की तपस्या तोड़ने hi आई थी इसलिए उसने तो फिलहाल अपनी शर्म के सरे परदे गिरा दिए थे और बिना किसी शर्म लिहाज के अघोरी की आँखों में आँखे दाल कर देख रही थी पर नीतू का इस तरह देखना अघोरी को ज़रूर थोड़ा असहज कर रहा था. नोर्मल्ली एक पुरुष की वासना भरी नज़रो से औरते उनकंफर्टबले फील करती है पर यहाँ तो एक औरत की नज़रो की वजह से एक पुरुष उनकंफर्टबले फील कर रहा था.

नीतू: बाबा मई नहाने जा रही हु आप यही रहना और मुझपर नज़रे बनाए रखना.

अघोरी: हम्म जाइये पर जल्दी आइयेगा.

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नीतू जाकर उस झरने के नीचे बैठ गई. और पानी में बड़े hi कामुक अंदाज़ में नहाने लगी. और अघोरी अपने वचन के कारन उसे अधनंगी हालत में नहाते हुए देखने को मजबूर था. नीतू एक औरत के बदन के आकर्षण का हर पैतरा आजमा रही थी. वो कभी अपनी चिकनी सावली जांघो पर पानी की बूंदे डालती तो कभी अपनी क्लीवेज के ऊपर पानी डालती जो फिसलता हुआ उसके स्तनों के बीच की दरार में समां जाता. कुछ पल तो अघोरी अपने वचन के कारन नीतू को देखता रहा पर आप उसकी आखे खुद बा खुद नीतू के जिस्म की अठखेलियों पर जैम गई थी. आखिर था तो वो भी एक मर्द जिसके अंदर औरत के ये रूप देखकर कामुकता का संचार होना स्वाभाविक था. बेशक गांव की कई औरतो ने अघोरी के सामने खुद को समर्पित करा पर हर औरत ने सीधे डायरेक्ट अघोरी को सम्बन्ध बनाने की पेशकश की जिसे अघोरी ने सिरे से ख़ारिज कर दिया पर नीतू जानती थी की यदि वो भी यही गलती करेगी तो अघोरी उसे भी साफ़ मन कर देगा इसलिए उसे जो करना है वो बड़ी सावधानी से करना है वो भी अघोरी में मन में अपने प्रति प्रेम उत्पन्न करते हुए. और नीतू इस वक़्त वही कर रही थी और कही न कही उसमे वो सफल भी हो रही थी. कल रात नीतू के हाथो के स्पर्श ने अघोरी के लिंग को खड़ा कर दिया था और नीतू को यु नाहटा देख अघोरी का लिंग झटके खाने को मजबूर था.

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नहाते नहाते नीतू झरने के कुछ ज्यादा hi नीचे आ गई पानी की तेज़ी से उसकी चुनरी उसके उभारो से नीचे हो गई और उसे स्तन अघोरी के सामने बेपर्दा हो गया. अब ये नीतू ने जान कर करा या अनजाने में ये तो नहीं पता पर नीतू वापस अपनी चुनरी को ऊपर करने की कोई कोशिश नहीं की बल्कि अपने हाथो से उन्हें ढकने की बेकार सी कोशिश करि या शायद वो खुद उन्हें ढकना hi नहीं चाहती थी.

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एक अघोरी होने और मोह माया से विरक्त होने के बावजूद उनका लिंग झटके पे झटके खा रहा था. अघोरी ने गहरी सास लेते हुए अपनी उत्तेजना को काबू करने की कोशिश की पर जैसे hi उसकी नज़र सामने नहाती नीतू पर जाती उसकी साडी कोशिश बेकार हो जाती इसलिए फाइनली अघोरी ने कुछ देर के लिए hi सही अपनी आँखे बंद कर्ली. नीतू ने अघोरी को आँखे बंद करे देखा तो एक तरफ तो वो खुश हुई की उसकी हरकतों ने अघोरी पर इतना असर तो डाला की उन्हें आँखे बंद करने की ज़रूरत पद गई पर दूसरी तरफ ये भी एहसास हो गया की उस बन्दे के ब्रह्मचर्य को तोडना इतना आसान नहीं है. अब तक नीतू को नहाते हुए भी काफी देर हो गई इसलिए वो झरने के नीचे से हैट गई और किनारे की तरफ तैरते हुए जाने लगी पर बीचे रस्ते में उसे एक और आईडिया आया अघोरी को और उत्तेजित करने का.

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किनारे के करीब पहुंच कर नीतू अचानक से ज़मीन पर बैठ गई और ज़ोर ज़ोर से कराहने लगी. नीतू की कराह सुन कर अघोरी को अपनी आँखे खोलनी hi पड़ी. और सामने नीतू को उस भीगी चुनरी में ज़मीन पर गिरा देख अघोरी को सामने आना hi पड़ा. ज्यूजि अघोरी झदोइयो के पीछे निकल आया नीतू का ध्यान सीधा उसके लंगोट के उभर पर hi गया जो ज़ाहिर है नीतू को नहाते देखने की वजह से hi था. पर नीतू ने अपनी ख़ुशी ज़ाहिर नहीं करते हुए अपने कराहने की एक्टिंग जारी राखी. अघोरी जब नीतू के करीब आया तो उसका ध्यान भी उसकी चोट से ज्यादा उसके भीगे बदन और उस पर पूरी तरह चिपक चुकी चुनरी पर गया. चुनरी के पूरी तरह जिस्म से चिपका होने की वजह नीतू के उभर के चूचक भी चुनरी में उभर आए थे नीचे वही नीचे नीतू की वो चुनरी उसके घुटनो के ऊपर तक आ गई थी. अघोरी नीतू का खड़ा करने की कोशिश कर रहा था पर नीतू जानबूझ कर कड़ी नहीं हो रही थी.

नीतू: मेरा पेअर मुद गया और मेरे घुतमे में भी लग है मुझसे खड़ा नहीं हुआ जाएगा.

अघोरी: थोड़ा कोशिश करिये मई आपको सहारा देकर ले चलूँगा.

नीतू: नहीं हो प् रहा क्या आप मुझे गोड़ में उठा सकते है.

अघोरी: जी मई वो....

नीतू: सॉरी बाबा मई भी क्या बोल रही हु मई खड़ा होने की कोशिश करती हु.

नीतू खड़ा होने की कोशिश करती पर जानबूझ कर बार बार गिर जाती. नीतू की ये हालत देख अघोरी का दिल भी पसीज गया और फिनॉल उसने नीतू की जांघो के नीचे हाथ दाल कर कमर से थम कर उसे अपनी बहो में उठा लिया. सहारा लेने के लिए नीतू ने भी अपनी बहे अघोरी के गले में दाल दी. अघोरी ने अब तक नीतू के मन को टटोलने की कोशिश नहीं की थी यदि करता तो उसे पता चल जाता की ये सब नीतू जानबूझ कर कर रही है. अघोरी नीतू को अपनी बहो में उठाए हुए अपनी कुटिया तक ले आया और नीतू को ज़मीन पर बिछी चटाई पर बिठा दिया.

अघोरी: आपके पेअर में मोच है मेरे पास एक लेप है जिसे लगाने से मांपेशियों का दर्द पल में दूर हो जाता है. मई अभी लेकर अत हु.

अघोरी अपने सामान में वो लेप ढूंढ़ने लगा और नीतू पीछे से अघोरी की मजबूत कद काठी को निहारने लगी. वासना भरी नज़रो से देखने पर नीतू कल पुरे गाँव में अघोरी से ज्यादा गठीला मर्द कोई नहीं दिख रहा था. काफी ढूंढ़ने के बाद अघोरी वो लेप ले hi आया.

अघोरी: माफ़ करियेगा सामन इतना अस्त व्यस्त है की एक चीज़ ढूंढ़ना भी बड़ी टेडी खीर है.

नीतू: है वो तो दिख रहा है कोई बात नहीं कल नहाने से पहले आपका कमरा पूरा सही कर दूंगी.

अघोरी: अरे नहीं नहीं इसकी कोई ज़रूरत नहीं मई तो रमता जोगी हु ऐसे hi ठीक हु.

नीतू: अब तक कोई औरत आपके साथ नहीं रही है न तभी कमरे की ये हालत अब मई आ गई हु न सब सही कर दूंगी.

नीतू ऐसे बात कर रही थी जैसे उसकी बीवी हो और ज़िन्दगी भर यही रहने वाली हो.

अघोरी: चलिए कल का कल देखेंगे फिलहाल ये लेप अपने पैरो में लगा लीजिये.

नीतू: मेरे हथेली में भी हलकी चोट लगी है आप लगा दीजिये न.

इतना कह कर नीतू ने अपनी टांग अघोरी के सामने आगे बड़ा दी. अघोरी भी सकुचाते सकुचाते नीतू के पैरो के पास बैठ गया पर अब भी उसे नीतू की टांगो को स्पर्श करने में हिचकिचाहट हो रही थी. पर हिचकिचाते हुए अघोरी ने नीतू के तलवे कल अपने हाथो में थम लिया. और उसके तलवे पर वो लेप लगाने लगा.

नीतू: घुटनो के पास दर्द है वह भी लगा देंगे.

अघोरी सकुचाते हुए नीतू के घुटनो पर लेप लगाने लगा.

नीतू: थोड़ा ऊपर.

अघोरी ने अपने हाथ नीतू के घुटनो से थोड़ा ऊपर सरका दिए. नीतू ने अपनी चुनरी को थोड़ा ऊपर खींचा.

नीतू: थोड़ा और ऊपर.

अघोरी अपना थूक गटकते हुए वह भी लेप मलनर लगा. अघोरी का लिंग ने एक बार फिर फड़फड़ाना शुरू कर दिया. उसके माथे पर पसीने की बूंदे साफ़ नज़र आ रही थी. और नीतू उन बूंदो को देख अघोरी की मन की हालत को समझ रही थी. पर ऐसे रास्तो पर बड़ी सावधानी से आगे बड़ा जाता है क्युकी जल्दबाज़ी में सारा किया कराया गुड़ गोबर हो सकता है और अभी उस क्रिया का वक़्त भी नहीं आया है जहा नीतू को अपना कौमार्य त्यागना है इसलिए अपनी भावनाओ को काबू करते हुए नीतू ने अघोरी को रुकने का इशारा कर दिया.

नीतू: बस करिये दर्द तो इसके ऊपर भी हो रहा है पर इसके ऊपर आप रहने दीजिये इसके ऊपर मई खुद लगा लुंगी.

अघोरी: जी

अघोरी ने चुपचाप वो लेप नीतू के हाथो में थमा दिया और कुटिया से बहार निकल गया. नीतू अघोरी की इस हालत पर है पड़ी की धीमे धीमे hi सही विश्वामित्र की तप डगमगा रहा है. पर अभी तो इस सेडक्टिव को और बढ़ाना है हद से गुज़र जाना है.

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पर नीतू एक अघोरी के मन की दमित भावनाओ को भड़का रही थी. हमेशा दूसरो का भला चाहने और करने वाले एक इंसान की भावनाओ से खेल रही थी. वो ये सोच भी नहीं रही थी की इसका अंजाम कितना घातक हो सकता है. अघोर संप्रदाय एक आम संप्रदाय नहीं है ये जन्म और मृत्यु की दुनिया को जोड़ने वाला संप्रदाय है और ऐसे संप्रदाय के एक सिद्ध अघोरी की भावनाओ को भड़काने का अंजाम बहुत खतरनाक हो सकता था उस पर भी अफ्रीकन हब्सी अघोरी जिसका लिंग शांत अवस्था में भी एक नार्मल मर्द के के उत्तेजित लिंग से बड़ा था तो जब वो पुरे टबव में होगा तो क्या नीतू उसका वेग सेह पाएगी. नीतू ने अपने बचपने में इन बातो के बारे सोचा भी नहीं था उसे अंदाज़ा भी नहीं था की वो अपने आने वाले भविष्य में कौनसा कला अध्याय शुरू करने जा रही थी जिसकी प्रस्तावना लिखना उसने आरम्भ भी कर दिया था.
 
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