A wedding ceremony in village - Page 8 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

A wedding ceremony in village

नेहा वापस होश में तब आई जब ठन्डे पानी की एक तेज़ बौछार उसके चहेरे पर पड़ी और वो हड़बड़ा कर वापस अपने होश में आ गई. होश में एते hi नेहा खुद को कमरे के बीचो बीच पाया. कमरे के बीचो बीच बस एक बल्ब जल रहा था. और उस बल्ब के नीचे नेहा के हाथ पेअर और गर्दन किसी बेदी में जकड़े हुए थे. ध्यान से देखने पर नेहा को समझते देर न लगी की ये क्या है. ये बड़सम में इस्तेमाल करने वाली फ्लोर पिल्लोरी थी.

images-52.jpg


ये चीज़ उसके लिए नै नहीं थी क्युकी फ्लोर पिल्लोरी से उसका स्याह अतीत बेहद गहरे तरीके से जुड़ा था. फ्लोर पिल्लोरी hi वो चीज़ थी जिसने सीढ़ी साधी फॅमिली से आने वाली इंट्रोवर्ट और शाय नेहा को फंतासी गर्ल नेहा बना दिया था. फ्लोर पिल्लोरी नेहा के जीवन की वो काली सच्चाई थी जिससे उसके बेहद करीबी लोग भी अनजान थे.

फ्लोर पिल्लोरी पर आगे बढ़ने से पहले रीडर्स का इससे परिचित होना बेहद ज़रूरी है.

images-31-1.jpg


फ्लोर पिल्लोरी- फ्लोर पिल्लोरी बड़सम में बाँध कर सेक्स करने में इस्तेमाल किया जाने वाला एक टूल है. जिसमे लोहे की कुछ रोडस और पांच कुफ्फस होते है जिनमे दो हैंडकफ्फ्स दो लेग्कफस और एक नेककूफ होता है. इसे फ्लोर पर रख दिया जाता है और female(or मेल इतस ऑप्शनल जो भी सुब्मिस्सिवे होना चाहता है) उसके ऊपर डोगग्य पोज़ में आ जाता है और नेककूफ से अपनी गर्दन लॉक कर लेती है लेग कफ से अपने पेअर यदि के पास से लॉक कर लेती है और हैंडकफ से अपने हाथ. सरे कुफ्फस लॉक कर देने के बाद वो उस पोजीशन में पूरी तरह लॉक हो जाती है और चाहकर भी खुद को इस पोजीशन से आज़ाद नहीं कर सकती जब तक डोमिनेंट उसे आज़ाद नहीं करता.

फ्लोर पिल्लोरी ने नेहा को कुछ पल के लिए अपनने अतीत में पीछे भेज दिया अपनी सोच को रोकते हुए नेहा ने कमरे में यहाँ वह देखा पर उसे कही भी वो स्ट्रेंजर नहीं दिखा वो इधर उधर देख hi रही थी अचानक कमरे में जल रहा वो एकमात्र बल्ब भी बंद हो गया और पुरे कमरे में अन्धाघुप्प अँधेरा छ गया. अँधेरा होने के बाद जब नेहा की एक ज्ञानेंद्री बंद हो गई तो वो अपनी बाकि ज्ञानेन्द्रियो से आस पास में माहौल को महसूस करने की कोशिश करने लगी. और इसी दौरान उसे महसूस हुआ की वो विशाल डिलडो और उन बिजली के झटको की वजह से उसकी छूट में हो रहा दर्द अब कुछ कम था. उसे अपनी छूट के अंदर एक चिकने तरल लेप का भी एहसास हो रहा था जो शायद उसके बेहोश होने के बाद उस ास्मि ने उसकी छूट में लगाया होगा. और फिर उसीने उसे यहाँ कमरे के बीच में इस फ्लोर पिल्लोरी में बाँध दिया होगा. नेहा ने अपने हाथ पैरो को आज़ाद करने की पूरी कोशिश की पर वो भी जानती थी बड़सम की इस चीज़ से आज़ाद होना नामुमकिन है जब तक कोई आपको खुद आज़ाद न करे. अपना दर्द गायब हो जाने से नेहा को ये भी अंदाज़ा हो गया की वो एक घंटे से ज्यादा समय से बेहोश थी. क्युकी दवा या लेप को असर करने में भी 30-40 मं तो लगते hi है और फिर उसे उस कुर्सी से उठाने वो पोल्ल हटाने उसे फ्लोर पिल्लोरी में जकड़ने इन सबमे भी कुछ समय तो लगा hi होगा यानि वो एक घंटे या उससे ज्यादा समय से बेहोश थी.

नेहा अपने खयालो में डूबी थी की उसे किसी के पदचापों की आवाज़ सुनाई दी जो उसकी hi तरफ आ रही थी पर अन्धाघुप्प अँधेरे में कुछ नहीं दिख रहा था. वो पदचाप उसके सर के पास आकर रुक गए. कोई उसके सामने खड़ा था पर अँधेरे में वो उसे देख नहीं सकती थी और हाथ पेअर बंधे होने की वजह से वो उसे छू भी नहीं सकती थी. वो आदमी अपना चेहरा नेहा के कान के पास ले आया और फुसफुसा कर उससे बात करने लगा.

स्ट्रेंजर: क्यों माय स्लेव बाँडेज डोमिनान्स सबमिशन मसोचिस्म का ये रूप कैसा लगा तेरी तो हालत ख़राब हो गई इतने में hi, बेहोश हो गई तू तो.

नेहा: बिजली के झटके लग रहे थे मई उन्हें बर्दाश्त नहीं कर पाई प्लीज अब और झटके मत देना.

स्ट्रेंजर: हाहाहाहा तू तो इतने में hi दर गई चल कोई बात नहीं अब तू मेरे सामने इतना गिड़गिड़ा रही है तो चल अब और झटके नहीं दूंगा. पर रात तो अभी बाकि है. और अभी तो मेरा वो दोस्त भी बाकि है जिसके बारे में मैंने तुझे बताया था.

नेहा: मई अब आज रात और झेल नहीं पाऊँगी प्लीज कल कर लेना.

नेहा का इतना बोलना था की एक तेज़ झापड़ नेहा के गलो पर पड़ा.

W7qDVznU_o.gif


स्ट्रेंजर: भूल गई तू तो मेरी गुलाम है जब तक मई तुझे जाने को नहीं कहूंगा तब तक कैसे जा सकती है. और तेरी छूट पर मैंने अंदर हाथ डालकर अच्छे से लेप लगा दिया है. तुझे दर्द नहीं होगा बल्कि मेरे दोस्त का स्टैमिना देख तेरे होश उड़ जाएंगे. मुझसे भी ज्यादा ज़ादा देगा वो तुझे.

पहली बार कोई मर्द चुदाई के मामले में अपने से ज्यादा किसी दुसरे मर्द की स्टैमिना की तारीफ कर रहा था, वर्ण नोर्मल्ली तो मर्द खुद को hi बाहुबली समझता है. अब तो नेहा भी एक्ससिटेड थी इस शिक्षा के उस दोस्त से मिलने को. स्ट्रेंजर उठकर अँधेरे में hi पीछे उसके चूतड़ों के पास आकर बैठ गया और अपने हाथो से नेहा की स्टॉकिंग्स के ऊपर से उसकी टांगो को चाटने लगा. छत्ते छत्ते वो अपना चेहरा नेहा की छूट के करीब ले गया और पंतय के ऊपर से नेहा की छूट की महक सूंघने लगा. पंतय के अंदर से छूट के साथ साथ उस लेप की महक भी आ रही थी जो उसने नेहा की छूट में लगाया था. ये शायद गाँव का कोई देसी आयुर्वेदिक लपे था क्युकी इतना बड़ा डिलडो अंदर लेने के बावजूद नेहा का दर्द अब लगभग न के बराबर था. कुछ पल यही नेहा की छूट को पंतय के ऊपर से सूंघने के बाद स्ट्रेंजर ने नेहा की पंतय पीछे से फाड़ दी और नेहा की छूट को पीछे से खोल दिया.

tGGmFHrN_o.gif


और कुछ चिपचिपा चिपचिपा चाशनी जैसा कुछ नेहा की छूट और गांड में लगा दिया. नेहा को लगा शायद ये भी कोई लेप हो जिससे लुंड आसानी से अंदर चला जाए.

नेहा को यही लग रहा था शायद अब वो खुद उसकी चुदाई करने वाला है क्युकी कल तो उसने न उसकी गांड मरी थी न छूट बस अपना लुंड चुसवा कर उसे जाने दिया था. इसलिए शायद आज वो उसकी चुदाई करेगा और यहाँ आने के बाद अब तक उसने कई मर्दो के साथ बहुत कुछ करा था पर प्रॉपर चुदाई नहीं की थी यानि अपनी छूट में किसी का लुंड नहीं लिया. कल्लू से छूट छतवई, भूरा से गांड मरवाई, छोटू से दूध चुस्वाए उसका लुंड चूसा, रामु काका को हैंडजॉब दिया और इस स्ट्रेंजर के साथ भी 69 पोजीशन में ब्लोजॉब करा पर यहाँ गाँव में एक भी लुंड अपनी छूट में नहीं लिया था, तो शायद आज इस गाँव में इस स्ट्रेंजर के हाथो जिसका अब तक उसने चेहरा भी नहीं देखा उसके हाथो उसकी छूट की बोंय होने वाली थी. पर इस बोंय से उसे अर्जुन मिलेगा या जहान्वी ये कहना मुश्किल था. नेहा अपने hi खयालो में खोई थी की उसे वो पदचाप दूर जाते सुनाई दिए यानि वो स्ट्रेंजर उससे दूर जा रहा था. पर क्यों यु अचानक से उसकी पंतय पहाड़ कर वो अब दूर क्यों जा रहा था क्या चल रहा था उसके दिमाग में.

नेहा अपने विचारो में खोई थी की अचानक उसे अपने होंठो पर किसी का हाथ महसूस हुआ जो उसके होंठो को खोल रहा था नेहा ने भी ज्यादा न सोचते हुए अपना मुँह खोल दिया और मुँह खुलते hi उस शिक्षा ने एक छोटी सी बॉल नेहा के मुँह में घुसेड़ दी जो दोनों तरफ से चमड़े की पट्टी से बंधी थी.

BpXVAC6z_o.gif


नेहा बड़सम के सामन से भली भाति परिचित थी और वो समझ गई की ये क्या है ये बॉल गैग है जो बड़सम में सुब्बम्मीसीवे का मुँह बंद करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है ब्रूटल फ़क से पहले. ताकि सुब्बम्मीसीवे की चीख बहार न जा पाए. पहले hi वो इतने बड़े डिलडो और बिजली के झटको से नेहा को चीखने पर मजबूर कर चूका था और अब ये बॉल गैग से उसका मुँह बंद कर दिया तो क्या अब उससे भी ज्यादा ब्रूटल फूकिंग करने वाला है. नेहा ये सोच hi रही थी की अचानक से वो बल्ब जल उठा और वो स्ट्रेंजर पहली बार रौशनी में उसकी आँखों के सामने था.

images-57.jpg


सूट बूट पहने वो नेहा के सामने कुछ दूरी पर कुर्सी पर बैठा था. पर उसके चेहरे पर अब भी मास्क था और पूरा बदन कपड़ो से ढाका था यहाँ तक की हाथ भी ग्लव्स के नीचेहो ओल्ड इस थे डॉटर इन ताकें ढके थे. इसलिए नेहा के सामने होते हुए भी वो अब भी नकाब के पीछे छुपा हुआ था. पर नेहा यही सोच रही थी की अब वो करने क्या वाला है पहले उसे फ्लोर पिल्लोरी में जकड दिया फिर पीछे से उसकी पंतय पहाड़ दी फिर वह कुछ चिपचिपा लगा दिया फिर उसके मुँह भी बॉल गैग से बंद कर दिया ताकि वो चीख न सके और खुद सामने आकर बैठ गया और इसका वो दोस्त कहा है. आखिर ये करने क्या वाला है.

lusciousnet-pain-721115299.jpg


इतस लोगन हेरे यहाँ से आगे का अपडेट थोड़ा रूल्स के अगेंस्ट चला गया तो मई उसे अभी हटा रहा हु.
 
jaxsmean-5c4a92.jpg


ये अपडेट फिलहाल मई हटा रहा हु इसी पेज पर दुबारा लिखंड पर पोस्ट करूँगा.
 
xbR8gYDL_o.gif


मास्टर: चल आज के लिए इतना दोसे बहुत है तू भी इससे ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पाएगी. इतने में hi तेरी हालत ख़राब हो गई है. चल यहाँ से तू कल की तरह अपने कमरे में चली जाना वैसे शुक्र मान मैंने आज तुझे कल की तरह यहाँ नंगा नहीं छोड़ा.

नेहा: मई तुम्हारा चेहरा कब देखना चाहती हु.

मास्टर: इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता तू क्या चाहती है फ़र्क़ इससे पड़ता है मई क्या चाहता हु और फिलहाल इसका वक़्त नहीं आया जब सही वक़्त आएगा तब चेहरा भी देख लेना फिलहाल अपने कमरे में चली जा वर्ण हवेली के नौकरो ने तुझे इन कपड़ो में देख लिया तो तुझे एक रुंडी समझकर तेरा गैंग बंग कर देंगे. और फिलहाल उस संदितिओं में नहीं है की एक भी लुंड बर्दाश्त कर सके. तो जल्दी निकल ले यहाँ से.

इतना कह कर वो स्ट्रेंजर एक बार फिर बिना अपना चेहरा दिखाए एक बार फिर पेड़ो के झुरमुट में कही खो गया. नेहा से अब भी खड़ा नहीं हुआ जा रहा था वो उस अँधेरी रात में उन घने पेड़ो के बीच अकेली सेक्सी सी स्टॉकिंग्स पहने बैठी थी. और ये सच था की अगर कोई उसे उस ड्रेस में देख लेता टी बिना चोदे उसे नहीं जाने देता इसलिए वो ज्यादा देर यहाँ नहीं रुक सकती थी. तालाब के किनारे बैठी नेहा ने सबसे पहले तालाब के पानी से अपने बाल और चेहरा साफ़ करा ताकि उसके जिस्म से आती कुत्ते की पाहाब की महक चली जाए. नेहा करीब 20 मं वह वैसे hi बैठी रही जब नेहा के पैरो में थोड़ी बहुत जान आई तो वो एक पेड़ का सहारा लेकर किसी तरह कड़ी हुई. नेहा से अब भी ढंग से चला नहीं जा रहा था पर किसी तरह लड़खड़ाते हुए वो उस पेड़ के पास पहुंची जहा उसने वो शार्ट स्कर्ट टांग दी थी जो वो आते टाइम पेहेन कर आई थी. नेहा ने वो स्कर्ट दुबारा पेहेन ली क्युकी पीछे से उसकी पंतय फटी हज थी और छूट से कुत्ते का वीर्य भी बेहटा हुआ नीचे आ रहा था. नेहा लड़खड़ाते लड़खड़ाते भीमा की झोपडी के करीब आ गया भीमा अब भी अपनी झोपडी के बहार नहीं था शायद अंदर हो.

नेहा भीमा की झोपडी देख hi रही थी की किसीने उसे पीछे से पकड़ लिया. अचानक से किसी के यु पकड़ने से नेहा सेहम सी गई वो चीखने को हुई पर उस पकड़ने वाले ने नेहा का मुँह अपने मजबूत हाथो से दबा लिया. वो शिक्षा बिना कुछ बोले अपना हाथ नेहा की स्कर्ट के अंदर से उसकी पंतय की तरफ ले जाने लगा की नेहा ने अपने दोनों हाथो उसका हाथ पकड़ लिया. वो शिक्षा अपनी बहो में उठाए उठाए नेहा को उस झोपडी के अंदर ले आया जिससे नेहा समझ गई की उसे पकड़ने वाला और कोई नहीं वो गूंगा जमादार भीमा है जो इतने दिनों से नेहा की हरकतों से उत्तजित हो चूका है कभी उसे कल्लू से छूट चतवते देख कर कभी उसे पंतय उतारते देख कर तो कल रात उसे पूरा नंगा देख कर.

नेहा मन में: उसे यही लग रहा है की मई ये सब जानबूझ कर उससे छुड़वाने के लिए कर रही hi पर मुझे उसे रोकना होगा क्युकी उसका लुंड बहुत बड़ा है और फिहाल मई इस हालत में नहीं हु की अब और चुदाई झेल सकू.

नेहा ने अपनी नोकदार हील से भीमा के पेअर दबा दिए जिससे उसकी पकड़ नेहा पर कुछ ढीली हो गई और नेहा उसे धकेल कर उससे अलग हो गई पर अब भी वो झोपडी के अंदर थी और सामने भीमा एक गन्दी सी धोती पहने ऊपर से चौड़ी खुली छाती लिए झोपडी के दरवाज़े पर. नेहा समझ गई की ताकत के बल पर तो उसे हटाकर यहाँ से निकल नहीं पाएगी और अगर चीखी चिल्लाई तो यहाँ भीड़ इकठ्ठा हो जाएगी तब लोग पहले उससे पूछेंगे की वो इस तरह कपड़ो में एक जमादार की झोपडी में करने क्या आई थी तब वो क्या जवाब देगी. इसलिए यहाँ ताकत से नहीं दिमाग से काम लेना होगा. भीमा अब भी दरवाज़े पर खड़ा नेहा की इस प्रतिक्रिया पर शॉक था क्युकी वो भी यही मैंने लगा था की नेहा उससे छुड़वाना चाहती तभी बार बार उसे उत्तेजित कर रही है. नेहा ने भी दिमाग से काम लिया और भीमा को बड़े प्यार से हैंडल करा.

नेहा: सॉरी सॉरी भीमा मेरी सांडले की हील से तुम्हारा पेअर दुःख गया मुझे माफ़ कार्डो.

नेहा को रिलैक्स देख भीमा भी शांत हुआ और नेहा की तरफ बड़ा पर नेहा ने भीमा की छाती पर हाथ रखकर उसे रोक दिया. नेहा के यु रोकने से भीमा रुक गया.

नेहा: रुको भीमा मई जानती हु तुम मुझे छोड़ना चाहते हो और मई भी तुमसे छुड़वाना चाहती हु इसीलिए कल नंगी आई थी पर यहाँ तुम्हारी झोपडी खुले में थी इसलिए कल यहाँ से भाग गई थी आज भी इसी इरादे से आई थी पर आज आते समय मेरा पेअर मुद गया उसमे बहुत दर्द होने लगा है इसलिए आज रहने दो. पर कल पक्का कल मई तुम्हे नहीं रोकूंगी और रोकू भी तो तुम मत रुकना कल की रात मई तुम्हारी हो जाउंगी पर आज रात मुझे जाने दो प्लीज.

नेहा ने बड़े प्यार से भीमा के चेहरे को सहलाते हुए ये कहा की भीमा चाहकर भी नेहा की बात विरोध नहीं कर पाया और सीधे साढ़े भीमा ने नेहा की बात को सच मान लिया और सहमति में अपना सर हिला दिया और दरवाज़े से हैट गया. नेहा तेज़ी से बहार निकली पर जैसी hi आगे बड़ी भीमा ने उसका हाथ पकड़ लिया. नेहा दर गई की कही भीमा ने अपना इरादा बदल तो नहीं दिया उसने पलट कर भीमा की तरफ देखा. भीमा ऊँगली से उसकी ड्रेस की तरफ इशारा कर रहा था की उसकी ड्रेस बहुत सुन्दर.

नेहा: क्या कह रहे हो अच्छा ये ड्रेस की बात कर रहे हो तुम्हे पसंद है, क्या कल मई यही पेहेन कर औ ठीक ऐसी hi सेक्सी सी शार्ट स्कर्ट पेहेन कर आउंगी पक्का प्रॉमिस.

नेहा की बात सुनकर भीमा खुश हो गया और उसने नेहा का हाथ छोड़ दिया. हाथ छुट्टे hi नेहा भीमा को bye करके लड़खड़ाते हुए हवेली की तरफ चल दी. भीमा नेहा को लड़खड़ाकर जाते हुए देख रहा था और यही समझ रहा था की नेहा को दर्द है इसलिए आज नहीं छुड़वाया और कल वो पक्का उससे छुडवाएगी.

30slde5.jpg


और दूसरी तरफ नेहा रॉल्स थी इतनी बुरी तरह से छोड़ने के बाद उसे उस हट्टे काटते जमादार से नहीं छोड़ना पड़ा और वो उसे गोला टिका चलती बानी अब कल का कल देख्नेगे.

नेहा तुरंत अपने कमरे में आ गई और कमरे में आते hi उसने जल्दी जल्दी अपने कपडे उतर कर बिस्तर पर फेंके और बाथरूम में घुसकर शावर ों करके उसके नीचे बैठ गई. और सबसे पहले अपनी छूट में ऊँगली दाल कर उसमे भरा वीर्य जहा तक हो सके साफ़ करने लगी. छूट साफ़ करने के बाद उसने मुँह में माउथवाश लेकर कई बार अपने मुँह को साफ़ करा. काफी देर तक शावर के नीचे बैठे बैठे अपने बदन को अच्छी तरह साफ़ करा. नेहा इस कदर थक चुकी थी की खुद को साफ़ करने के बाद बैडरूम में जाने की बजाए नेहा शावर बंद करके वही बाथरूम की फर्श पर नंगी hi लेट गई. और बाथरूम में नंगा लेते लेते hi उसे नींद आ गई और वो नंगी hi बाथरूम की फर्श पर लेते लेते सो गई. वो यहाँ बाथरूम की फर्श पर नंगी सो रही थी और उसकी सहेली शबाना भी नंगी हालत में वह अपने रेपिस्ट लालू के कमरे में उसीके सीने पर सर रखे सो रही थी. और इससे साफ़ था की दोनों का आज का चुदाई सेशन बेहद लुम्बा और थकावट भरा रहा था और कही न खाई दोनों के लिए ये फर्स्ट टाइम एक्सपीरियंस था. जहा शबाना ने लाइफ में पहली बार एक लुंड अपनी छूट में लिया था अपनी छूट में वीर्य का एहसास करा था तो वही कई बार छुड़वा चुकी नेहा के लिए भी ये एक नै तरह का फर्स्ट टाइम एक्सपीरियंस था. अब देखना ये था ये फर्स्ट टाइम एक्सपीरियंस उन दोनों की लाइफ को किस मुकाम पर ले जाने वाला था.
 
रीडर्स से मेरी एक रिक्वेस्ट है की मुझे hi नहीं बल्कि सब वरिटेरस जिनकी स्टोरी आप पड़ते हो पसंद करते हो उन्हें रेटिंग्स दो. इसके लिए आपको उनकी प्रोफाइल पर जाकर रेपुटेशन वाले कलम में रेट पर क्लिक करके आप रेटिंग पॉजिटिव नेउत्र या नेगेटिव दे सकते है.

अगर आपको स्टोरी की कई पोस्ट अच्छी लगती है तो आप उसके नीचे दिए गए रेट के ऑप्शन से भी उस पोस्ट को अलग से रेटिंग्स भी दे सकते है. इससे हमे पता चलता रहता है की हमारी स्टोरी की किस पोस्ट को पॉजिटिव रेस्पॉन मिल रहा कब नेगेटिव. इसलिए कमेंट के साथ कभी कभार वक़्त निकल रेटिंग्स भी दे दिया करे. जो भी पोस्ट अच्छी लगे उसे रेट जरूर करे.

राइटर को रेटिंग देने के लिए मैंने नीचे एक पिछ अपलोड करि है जहा आपको रेपुटेशन वाले कलम में रेट का ऑप्शन दिख रहा होगा. ये रेटिंग उसकी ओवरआल स्टोरी पर जाती है.

तो इस तरह आप दो तरह से रेट कर सकते है एक किसी पोस्ट को और दुसरे राइटर को उसकी प्रोफाइल पर जाकर.

थैंक यू

Screenshot-20190820-104144-Chrome.jpg
 
Disha-Patani-stills.jpg


इधर अपनी तरफ बाद रहे तूफ़ान से बेखबर आरती हवेली की तरफ आ रही थी और वो साया उसके saath-saath चल रहा था उसे आभास हो रहा था अभय के आने का पर उस रुद्राक्ष जो आरती के पास था के प्रभाव के कारन वो कुछ नहीं कर पा रहा था. अचानक उस सन्नाटे को चीरती कुछ आवाज़े आरती को सुनाई दी वो आवाज़े पल पल करीब आती जा रही थी और साफ़ होती जा रही थी. वो कुत्तो के भौकने की आवाज़े थी. कुत्तो के झुण्ड उसी तरफ दौड़ा चला आ रहा था. इससे पहले आरती कुछ समझती 20 - 25 जंगली कुत्ते उसके सामने खड़े थे. आरती की तो सिटी पित्ती गम हो चुकी थी उसे अपनी मौत सामने नजर आ रही थी और वो भी hi घिनौनी और दर्दनाक मौत.

images-32.jpg


आरती ने सरपट वह से भागना शुरू कर दिया पर कुत्तो को अपना शिकार सामने नजर आ रहा था कुत्ते उसके पीछे दौड़ पड़े. आरती भागे जा रही थी तेज और तेज पर कुत्ते उसके करीब आते जा रहे थे अचानक आरती का पेअर एक पेड़ की जड़ से टकराया और आरती मुँह के बल जमीन पर गिरी उसके हाथ पेअर में काफी चोट आई. उससे खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था कुत्ते उसके एकदम करीब आ गए और उसे चारो तरफ से घेर लिया. आरती और उसकी मौत के बीच बस चाँद कदमो का फैसला था, वो जंगली कुत्ते उसके शरीर को नोच नोच कर खा जाने को उतावले थे.

movie-poster-the-breed-2006-EFABG6.jpg


उनमे से दो कुत्तो ने आगे बाद कर आरती के ऊपर छलांग लगा दी. आरती ने दर के मरे अपना हाथ चेहरे के आगे कर लिया पर कुछ पल बीत जाने के बाद भी वो कुत्ते आरती तक नहीं पहुंचे. डरते डरते आरती ने अपने चेहरे से हाथ हटाया और सामने का दृएश्या देखकर आरती की आँखे फटी की फटी रह गयी. सामने वो दोनों कुत्ते हवा में टंगे थे जैसे किसीने उन्हें हवा में पकड़ लिया हो उन्हें रोक लिया हो पर रोकने वाला कोई वह दिखाई नहीं दे रहा था. उस से ने उन कुत्तो को बीच में hi रोक लिया था उसने उन कुत्तो के सर आपस में टकराए और घुमाकर उन्हें दूर फेंक दिया. बाकी कुत्ते भी शांत हो गए अपने साथियो का ये हाल देखकर.

आरती जिसे भूत प्रेत में विश्वास नहीं था पर अब उसे भी अघोरी की बातो पर यकीन हो रहा था की सच में उसके ird-gird कोई ऊपरी साया है. उसने तुरंत अपनी जेब में रखा अघोरी का दिया रुद्राक्ष निकल लिया और उसे आगे कर दिया. उस रुद्राक्ष की ूत में आरती को वो साया साफ़ नज़र आ रहा था जैसे हवा में किसी आदमी की आकृति सी उभर आई हो जो उसे hi देख रही हो.

images-7.jpg


वो साया उसकी तरफ बाद रहा था आरती तो दर के मरे पसीने पसीने हो गयी थी उसके मन से जंगली कुत्तो का दर तो कही खो गया और उस साए का दर उसके दिलो दिमाग पर हावी हो गया था.

वो साया हाथो के इशारे से आरती को न डरने के इशारे कर रहा था पर आरती पर तो दर इस कदर हावी हो गया था की उसे उसके इशारे समझ hi नहीं आ रहे थे. उसे बस वो साया अपनी तरफ बढ़ता नजर आ रहा था. और इसी दर और तनाव की स्थिति में आरती ने अपने हाथ में पकड़ा बजरंगी रुद्राक्ष उस साए की तरफ उछाल फेका. उस रुद्राक्षा से छूटे hi उस साए की साड़ी शक्ति नष्ट हो गयी वो खीछा हुआ उस रुद्राक्षा के अंदर समा गया और उसमे कैद हो गया. जो आरती का रक्षक था उसे hi अपना भक्षक समझकर आरती ने खुद उसे उस रुद्राक्षा में कैद कर दिया.

वो साया उन भूके कुत्तो और आरती के बीचे से हैट चुका था. अब उनके और उनके शिकार आरती के बीच कोई नहीं था. उस साए के हट्टे hi एक बार फिर वो शिकारी कुत्ते लार टपकते हुए आरती की तरफ बड़े. आरती ने अपने अंदर की पूरी ताकत इकठा करके खुद को खड़ा करा और एक कदम आगे बढ़ाया hi था की पेअर के दर्द की वजह से वो लड़खड़ा कर फिर गिरी और उसका सर एक पत्थर से टकराया और आँखों के आगे अँधेरा सा छाने लगा वो बेहोशी के आगोश में खोटी जा रही थी और बड़ी मुश्किल से आँखे खोले उन कुत्तो को अपनी तरफ बढ़ता हुआ देख रही थी. जो उसे बचा सकता था उसे तो खुद उसने रुद्राक्षा में कैद कर दिया और वो खुद इस हालत में नहीं थी की खुद को बचा सके. हर बीतते पल के साथ एक दर्दनाक मौत उसके करीब और करीब आती जा रही थी.

images-23.jpg


पर वो कहते है न इंसान को मौत तब तक नहीं आती जब तक उसकी मौत की घडी ना जाए. अचानक से उन कुत्तो के बढ़ते हुए कदम रुक गए. उस चाँद की रौशनी में कोई आरती के पीछे आकर खड़ा हो गया था जिसकी आँखों से उठते अंगारो का दर उन कुत्तो की आँखों में साफ नजर आ रहा था. अधखुली आँखों से आरती उन कुत्तो को पीछे हट्टे देख रही थी और एक परछाई जो जमीन पर बन रही थी को आगे बढ़ते देख रही थी मतलब कोई उसके पीछे था पर उसमे इतनी ताकत भी ना बची थी की गर्दन घुमाकर अपने पीछे खड़े शिक्षा को देख सके.

बेहोशी आरती पर हावी होती जा रही थी पर बेहोश होने से पहले आरती ने इतना hi देखा की काले लिबास में एक शिक्षा उसके और उन कुत्तो के बीच आकर खड़ा हो गया था उसकी पीठ आरती की तरफ थी इस वजह से वो उसका चेहरा नहीं देख सकती थी वो कोई और नहीं अभय था जो आरती और उन कुत्तो के बीच खड़ा हो गया था.

images-34.jpg


उन कुत्तो में से एक सबसे हटता कट्टा कुत्ता अभय पर झपटा पर अभय ने उसे बीच में hi रोक दिया उस कुत्ते की देखा देखि बाकी कुत्तो में भी जोश आ गया वो अभय को एक आम आदमी समझकर उसपर हमला करने की गलती कर बैठे. अभय की भौंए गुस्से में तन गयी.

उसने उस सबसे हट्टे काटते कुत्ते के दोनों जबड़ो को अपने हाथो से पकड़ लिया और एक झटके में उस कुत्ते को दो हिस्सों में चीयर दिया. जिन कुत्तो ने अभय के शरीर में दांत गदा दिए थे उनका शरीर माँ की तरह गलना शुरू हो गया था शायद अभय के जिश्म में खून की जगह ज़हर था जिसके संपर्क में आते hi वो कुत्ते गलती चले गए बाकी बचे कुत्तो में अब आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं थी जैसे वो समझ गए थे की वो मिलकर भी इससे नहीं जीत पाएंगे उनहोंने उलटे पाँव लौट जाने में hi अपनी भलाई समझी. बचे हुआ कुत्ते पलटकर वापस लौट गए.

अभय अब आरती की तरफ पलटा आरती की पलके अब बड़ी मुश्किल से खुल पा रही थी उसे उसका halkaa-halkaa चेहरा दिख रहा था. वो आरती के एकदम करीब आकर बैठ गया और उसके मुंह से बस एक शब्द निकला मंजरी. अभय आज 200 साल की लुम्बी जुदाई के बाद एक बार फिर अपनी मंजरी के पास पहुँच चुका था. इसी के साथ आरती की हिम्मत ने उसका साथ छोड़ दिया और वो बेहोश हो गई. अभय ने आरती के चेहरे को अपने हाथो में थम लिया.

अभय- मंजरी 200 साल दूर रहा हु तुझसे पर मुझे यकीन था एक ना एक दिन हम फिर मिलेंगे. आख़िरकार मैंने तुझे पा hi लिया. सोचा था जब तू मेरे सामने आएगी तो तुझे जान से मार दूंगा पर क्या करू तुझसे इतना प्यार करता हु की तुझे मार भी नहीं सकता. पर अब हमारे बीच कोई नहीं आ पाएगा वो भी नहीं जो खुद को बहुत बड़ा स्टार समझता था.

अचानक अभय की नजर कुछ दूर पड़े उस रुद्राक्षा पर पड़ी और उसे उसकी मौजूदगी का आभास हो गया.

images-12.jpg


अभय- साले कायर इस रुद्राक्षा में छुपा बैठा है. तेरी किस्मत बहुत अच्छी है जो तू इस वक़्त इस रुद्राक्षा के अंदर है अगर बहार होता तो तेरा उससे भी बुरा हश्र करता जैसा 200 साल पहले करा था. ना तू तब मेरे और मंजरी के बीच आ सका था और ना आज आ पाएगा.

अभय ने बेहोश आरती के सर पर हाथ रखा और आरती के दिमाग में मौजूद साड़ी बाते अभ के दिमाग में आकर लेने लगी. बीते दिनों में आरती के साथ जो कुछ भी हुआ वो अभय को पता चलता चला गया.

अभय- अब तेरे और मेरे बीच कोई नहीं आएगा जो आ सकता था उसे तो तूने खुद कैद कर दिया और तेरे दिमाग से वो साड़ी यादे मैं मिटा दूंगा जो तुझे मुझसे दूर करे. जो गलती 200 साल पहले मैंने करि थी वो इस बार नहीं होगी तुझे मुझसे मुहोब्बत करनी hi होगी अपनी मर्जी या बिना मर्जी के.

अभय ने आरती को अपनी बाहो में उठा लिया. आरती का बेहोश बदन अभय की खून से सनी बाहो में झूल गया. अभय उस चांदनी रात में आरती को बाहो में भरे हुए वापस उस नदी के किनारे पर आ पहुंचा.

sinr-NKbbdjjfc.jpg


अभ- इस कहानी का अंत वही से होगा जहा से इस कहानी की शुरुआत हुई थी उसी जगह से जहा तूने मुझे धोखा दिया वही तू एक बार फिर मेरी दुल्हन बनेगी फिर एक बार हमारी सुहाग की सेज सजेगी और इस बार हमारी सुहागरात मुकम्मल रूप लेगी. और इसके लिए हमें इस नदी के पार जाना होगा.

अभय आरती को अपनी बाहो में भरे एक बार फिर तेज बहाव से बहती उस नदी को chalte-chalte यु पार कर गया जैसे वो ज़मीन पर चल रहा हो. आरती को लेकर अभय उसी जगह आ गया जहा बरसो पहले उसकी सुहागरात अधूरी रह गयी थी उसी खंडहर के सामने जहा 200 साल से सोया हुआ था. अभय की आँखों के एक इशारे में वो खँडहर एक आलिशान हवेली में तब्दील हो गया.

अभय- दुनिया के लिए ये आज भी एक खँडहर hi है कोई इसे देखेगा तो उसे ये खँडहर दिखेगा पर जब तू जागेगी तब तुझे ये तेरे सपनो का महल नज़र आएगा. अब हमारे गृहप्रवेश का वक़्त आ गया है बरसो पहले भी हमने यही saath-saath गृहप्रवेश करा था आज फिर एक बार हम saath-saath गृहप्रवेश कर्नेगे.

अभय की आँखों के एक इशारे में उस हवेली के गेट पर चावल भरा एक कलश रख गया. अभय ने आरती के पैरो की हलकी सी ठोंकर उस कलश में मारी और आरती को लेकर उस खँडहर के अंदर आ गया और आरती को लाकर उसी पत्थर के बिसरार पर लिटा दिया जहां गरिमा और हरिया के सम्भोग के बाद अभय जगा था. आरती अब भी बेहोश थी और अभय द्वारा उसके दिमाग के साथ किए गए खिलवाड़ की वजह से जल्दी जल्द उसके होश में आने की उम्मीद कम थी. अभय ने आरती की छोटो पर अपना हाथ फिराया और आरती के हाथ पेअर सर पर लगे घाव खुद बा खुद भर गए पर बेहोश वो अब भी थी. अभय वही आरती के सिरहाने पर बैठ गया और उसे निहारने लगा.

images-42.jpg


इधर आरती पूरी तरह से अभय के चंगुल में फस चुकी थी क्या सम्बन्ध था आरती और अभय का क्यों मार दिया था आरती ने उस इंसान को जो उसे इस कदर दीवानो की तरह चाहता था और मरने के बाद भी अभय इतनी शक्तियों के साथ अपने शरीर के साथ वापस कैसे आ गया था उसका शरीर बरसो दफ़न रहने के बाद भी गला क्यों नहीं कौन था ये अभय उससे भी बड़ा सवाल था क्या था ये अभय? और इन सारे सवालों का जवाब नदी के उस पार उस बजरंगी रुद्राक्षा में कैद था जिसमे कैद था इस आरती अभय की कहानी का तीसरा और सबसे हम किरदार जो उस रुद्राक्षा की कैद से आजाद होने के लिए छटपटा रहा था. क्या सम्बन्ध था उसका आरती और अभय से क्यों अभय उससे इतनी नफरत करता था क्या हुआ 200 साल पहले इन सवालों के जवाब जल्द hi एक तूफ़ान की शकल में दुनिया के सामने आने वाले थे. एक महायुद्ध की रूपरेखा तैयार हो चुकी थी बस देखना ये था की इसमें विजय किसे मिलती है अभी तो इसमें ये भी तय नहीं थी की इस कहानी का नायक कौन था और खलनायक कौन.

suriya.jpg


हर काम किया मैंने उसकी ख़ुशी के लिए

फिर भी न जाने क्यों बेवफा कहलाया हु

मौत से पहले करलु एकबार दीदार उसका

इसलिए मरकर भी बस उसे देखने आया हु
 
काकातुआ के जंगल

depositphotos-35285141-stock-photo-planet-uranus.jpg


यूरेनस पूजन की विधिया सुन कर विनीता अंदर घर में दुखी बैठी थी की ऐसी घृणित गन्दी विधि वो कैसे पूरी कर सकती है, कैसे अपनी सहेली के ससुर को ब्लोजॉब दे सकती है यानि कैसे उनका लिंग अपने मुँह में ले सकती है और केवल लिंग मुँह में hi नहीं लेना है उससे निकलने वाले वीर्य को पीना भी है. ये विधि विनीता के लिए किसी भी तरह से आसान नहीं थी. जिस औरत ने आज तक किसी मर्द का छूना तो दूर देखा तक नहीं था अचानक से उसे अपने से दुगनी उम्र के आदमी जो उसकी सहेली का ससुर है का लिंग मुँह में लेने को कह दिया गया, उसे ब्लोजॉब देने को कहा गया उसके वृषण चूसने को कहा गया उसका वीर्यपान करने को कहा गया. विनीता के लिए ये न शारीरिक दृष्टि से आसान था न hi मानसिक दृष्टि से. एक मर्द में साथ से वंचित रही विनीता का शरीर एक मर्द के लिंग को अपने सामने देख क्या अपनी उत्तेजना पर काबू रख पाएगा और अगर उसके शरीर ने खुद पर रख भी लिया तो पिछले कुछ समय वो लखन से जिस तरह भावनात्मक रूप से जुड़ गई है जितना प्यार जितना अपनापन उसे उनसे मिला है क्या उनके लिंग को मुँह में लेने के बाद वो अपनी भावनाओ पर काबू रख पाएगी.

और ये तो पूजा की सिर्फ दो विधिया थी तीसरी और अंतिम विधि तो इससे भी ज्यादा घृणित और एक नारी की गरिमा के खिलाफ थी. मूत्रासनं यानि लखन सिंह के मूत्र से नहाना उनका मूट सीधा अपने ऊपर निकलवाना. नोर्मल्ली सरकारी सुलभ सौचालयो में से आती पेशाब की तीव्र दुर्गन्ध के कारन उसके पास से गुजरने पर हम अपनी नाक बंद कर लेते है और यहाँ उस पूजा की विधि के अनुसार विनीता को खुद को लखन सिंह के लिए सुलभ शौचालय बनाना था जिसपर वो पेशाब करेगा. कैसी विधि थी जो एक झूटी hi सही पर एक पत्नी को अपने पति का सुलभ शौचालय बनने को मजबूर कर रही थी. विनीता के जिस्म की खाल इस कदर चिकनी और कोमल थी जैसे वो पानी से नहीं दूध और शहद से नहाती हो और यहाँ उसे पेशाब से नहाने को कहा जा रहा था. निश्चित hi विनीता के लिए यूरेनस पूजा अब तक हुए सभी ग्रहो की पूजा में सबसे मुश्किल पूजा थी. अगर यही विनीता की जगह नेहा होती तो उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं थी ब्लोजॉब वीर्य पीना मूट से नहाना उसके लिए एक आम बात थी उसके लिए तो बस ये एक रात की फंतासी थी उससे ज्यादा कुछ नहीं बल्कि वो तो शायद इस पूजा को एन्जॉय भी करती और लखन सिंह को भी एन्जॉय करा देती पर विनीता नेहा नहीं थी, विनीता के लिए ये साड़ी बाते बहुत बड़ी थी. 15 साल की उम्र में अपनी वीरगिनती दे देने वाली नेहा और 30 साल की शादीशुदा वर्जिन विनीता के लिए इस पूजा की शर्तो के मायने अलग अलग थे.

Mohanlal-Latest-Stills-from-Janatha-Garage2.jpg


दूसरी तरफ घर के बहार बैठे लखन सिंह भी पूजा से ज्यादा अपने परिवार के भविष्य की चिंताओं में डूबे हुए थे. उनका ज़मीर किसी भी सूरत में इस पूजा की घृणित शर्तो को माने के लिए विनीता से रिक्वेस्ट करने से रोक रहा था. विनीता ने अब तक हर मोड़ पर उनका पूरा साथ दिया. हर गृह की पूजा में सामने आने वाली हर चुनौती को उनके साथ कदम से कदम मिलकर पूरा करा पर अब जो उसे करना था वो एक शालीन शरीफ महिला की शालीनता पर सीधा तुषाराघाट था उसकी शराफत का बेजा फायदा उठाना था और लखन सिंह इतने घटिया चरित्र का इंसान नहीं था. वो किसी भी सूरत में विनीति से इस बारे में कुछ नहीं कहने वाला था. पर दूसरी तरफ उसे ये भी चिंता थी की अगर ये पूजा यही ख़तम हो गई तो उसके परिवार का क्या होगा, जिस भरोसे जिस विश्वास के साथ वो शोभा को ब्याह कर लाया था उस भरोसे उस विश्वास का क्या होगा अगर उसके परिवार के श्राप को दूर करने की वेदी पर उस बच्ची की आहुति चढ़ गई तो वो खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाएगा. वो ऊपर वाले से विनती कर रहा था की अगर किसीकी आहुति होनी है तो ऊपर वाला उसकी आहुति लेले पर उसके बच्चो को बक्शा दे उसके परिवार के गुनाहो की सजा उसके बच्चो को न दे.

कश्मकश का एक अजीब सा द्वन्द उनके दिलो में चल रहा था. अंदर बैठी विनीता ने एक नज़र उस बक्से को देखा जिसमे से उस नीली साडी का पल्लू हल्का सा लटक रहा था जो उसे इस पूजा में पहनी थी. रट रट विनीता की आँखों से बहते आंसू भी ख़तम हो गए थे उसे अंदाज़ा भी नहीं था की वो कितने घंटो से इसी हालत में बैठी रो रही थी. वो कई मिंटो तक उस साडी को एकटक टकटकी लगाए निहारती रही फिर उठकर उस बक्से के पास आकर बैठ गई और वो सादज हाथो में थम ली. उस साडी को अपने सीने से लगा कर दीवार से धोक टिका कर वो आँखे बंद करके बैठ गई. बंद आँखों से उसके दिमाग में कुछ दृश्य उभर आए जिसमे एक औरत एक मर्द का लुंड अपने मुँह में लेकर चूस रही है जब उस औरत का चेहरा साफ़ हुआ तो उसमे विनीता को अपना खुद का चेहरा नज़र आया ौड वो मर्द और कोई नहीं लखन सिंह था. अचानक से उसके जेहे में कुछ नए दृश्य उभर आए जिसमे उसका पति समीर उसके माँ बाप उसकी सहेलिया और उसके नाते रिश्तेदार उसे गालिया दे रहे है उसे चरित्रहीन कुलटा न जाने क्या क्या कह रहे है.

समीर: शादी वाली रात मुझे तो बड़ा ज्ञान दे रही थी आज अपनी बाप की उम्र के आदमी का लुंड मुँह में लेते शर्म नहीं आई.

माँ: बेटी इसी दिन के लिए तुझे पाल पास कर बड़ा करा था की तू हमे ये दिन दिखाए शर्म आती है तुझ पर की तू मेरी बेटी है.

नेहा: वाह विनीता दी मई तो आपको बड़ा सीधा साधा समझती थी आप तो मेरी भी गुरु निकली मान गई आपको.

पडोसी: छी कैसी औरत है ये न उम्र का लिहाज़ न रिश्ते की मर्यादा.

अचानक वो ताने मारते लोग किसी धुए के गुबार में उड़ गए और एक नया दृश्य विनीता के ज़हन में उभर आया जहा कुछ लोग एक अर्थी लिए राम नाम सत्य है करते हुए चले जा रहे है और विनीता सामने कुछ दूरी पर कड़ी है. उन लोगो ने वो अर्थी लेकर विनीता के ठीक सामने रख दी. लाश पर सफ़ेद कपडा पड़ा था. विनीता ने सहमे हाथो से उस लाश से वो सफ़ेद कपडा हटाया वो लाश लखन सिंह की थी. अर्थी पर लखन सिंह को देख विनीता एकदम चौंक उठी.

images-53.jpg


विनीता: ये कैसे हुआ क्या हुआ इन्हे.

लोग: वो पूजा पूरी न होने की वजह से इनकी बहु और बीटा दोनों ख़तम हो गए. लड़की के बाप और समाज ने इन्हे इतने ताने दिए की दूसरे की लड़की खा गया. बेचारा शरीफ इंसान समाज के ताने बर्दाश्त न कर सका और फ़ासी लगा कर खुदखुशी कर ली.

अचानक धामु ने आगे बढ़कर विनीता की हथेली को पकड़ लिया.

धामु: क्यों करा तुमने ऐसा क्यों अगर एक रात तुम वो सब कर लेती तो क्या बिगड़ जाता दुनिया में किसे पता लग जाता की वह तुमने क्या करा. क्यों मेरा पूरा परिवार छीन लिया तुमने जब तुम्हे पूजा पूरी नहीं करनी थी तो पहले हां क्यों करि थी. क्या तुम्हारा सम्मान मेरे परिवार की जान से ज्यादा बड़ा था. मई दिमाग से पागल मेरे पिता और भाई दोनों चले गए अब कौन संभाले मुझे. बोलो जवाब दो जवाब दो.

अचानक धामु ने अपनी जेब से एक धारदार खंजर निकल लिया, विनीता दर गई की अब ये मुझे जान से मार देगा वो अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगी. पर धामु खुद उसका हाथ छोड़ दिया और इससे पहले विनीता कुछ समझती या करती धामु ने वो खंजर अपने सीने में उतर लिया. और धामु का खून से लथपथ शरीर विनीता के पैरो में गिर पड़ा. विनीता ने आगे बाद कर धामु को सँभालने की कोशिश की पर धामु ने उसे पीछे धकेल दिया.

धामु: मेरा अब कोई नहीं बचा तो मई भी ज़िंदा रहकर क्या करूँगा पर तुम अपने सम्मान के साथ ज़िंदा रहना. पर तुम ज़िंदा भले hi रहो पर कभी खुश नहीं रहोगी मेरे पुरे खानदान की मौत तुम्हे कभी चैन से जीने नहीं देगी नहीं जीने देगी.

इतना बॉलर बोलते धामु का शरीर भी बेजान हो गया. और हड़बड़ा कर अपने खयालो में डूबी विनीता ने अपनी आँखे खोल दी उसका बदन पसीने पसीने हो गया था सासे तेज़ तेज़ चल रही थी छाती ऊपर नीचे ऊपर नीचे हो रही थी.

उसने गर्दन घुमा कर अपने दाई तरफ देखा जहा उसके चीखते चिल्लाते माँ बाप नाते रिश्तेदार उसे गालिया दे रहे थे उसे चिल्ला चिल्ला कर ये न करने को कह रहे थे और फिर गर्दन घुमाकर अपने बाई तरफ देखा जहा एक अजीब सी ख़ामोशी एक मातम सा छाया था और चार लाशें पड़ी थी शोभा विक्रम लखन और धामु की. एक तरफ से आता गालियों का शोर और दूसरी तरफ छै मातम की ख़ामोशी. पर मातम की ख़ामोशी उसे गालियों के शोर से ज्यादा विचलित कर रही थी. उस ख़ामोशी में वो गालियों का शोर दबता सा जा रहा था. उसने एक बार फिर अपने हाथ में थमी उस साडी को देखा और अपने दिल को कठोर करते हुए अपने चेहरे से दर्द में भावो को दूर करते हुए अपने गालो से बहते हुए आंसुओ को पोछते हुए फैसला कर लिया था की उसे क्या करना था.

images-55.jpg
 
images-61.jpg


विनीता वो नीली साडी अपने हाथो में थम ली और अपने पुराने पहने हुए कपडे उतर कर वो नीली साडी और उसके साथ का मैचिंग ब्लाउज पेटीकोट सब पेहेन कर खुद को तैयार कर लिया. उसने पूजा की विधि के अनुसार पूरा मेकअप करा पर इस दौरान उसका चेहरा एकदम भावशून्य था न दर्द न उत्तेजना न ख़ुशी न गम. जैसे उसने खुद को एक पत्थर बना लिया था एक रोबोट जिसमे कोई फीलिंग्स नहीं होती और वो केवल खुद को दिए टास्क को हर कीमत पर पूरा करता. ठीक उसी तरह विनीता भी इस वक़्त खुद को तैयार कर रही थी. विनीता के मन के हालत को बया करना शायद मेरे लिए भी मुश्किल था वो अपना श्रृंगार कर रही थी वो भी किस लिए अपने से दुगनी उम्र के एक आदमी का लुंड छोस्ने के लिए उसके मूट से नहाने के लिए. शायद hi कभी किसी महिला ऐसे काम के लिए अपना श्रृंगार करा था. और यही विनीता के लिए सबसे पीड़ा दायक था पर उसने दिए गए काम को पूरा करा और उस बक्से में राखी शृंगार की सामग्री से खुद को अच्छे से सजाया सवार था. अपना श्रृंगार करके विनीता घर के बहार बैठे लखन सिंह की तरफ चल दी. और कुछ hi पल वो उस सुन्दर सी नीली साडी में लखन सिंह के सामने कड़ी थी.

images-21-1-2.jpg


अपने खयालो में खोए लखन सिंह ने जब नज़र उठा कर देखा तो सामने यु विनीता को खड़ा देख लखन सिंह को यकीन नहीं हो रहा था. एक तरफ विनीता की खूबसूरती में चार चाँद लगाती वो नीली साडी और दूसरी तरफ उस पूजा की विधि जानते बूझते विनीता का खुद से तैयार होकर यु आ जाना थोड़ा उत्तेजक भी था और थोड़ा अजीब भी. विनीता वह नज़रे झुकाए कड़ी थी और लखन हक्का बक्का से खड़ा उसे देखे जा रहा था. दो काफी देर यही खामोश खड़े रहे फिर लखन ने hi उस ख़ामोशी को तोडा.

लखन: आप यहाँ इस तरह इस साडी में.

विनीता: पूजा में यही साडी पहनी थी.

लखन: पूजा आप समझ रही है न आप किस पूजा की बात कर रही है.

विनीता: सब समझ बूझ कर hi यहाँ आई हु.

लखन: देखिये कोई ज़रूरत नहीं है आपको ये सब करने की मैंने आपको इस पूजा की साडी विधियों से आज़ाद करा.

विनीता: आपने मुझे किसी बेदी में जकड़ा hi कब था जो आज आप मुझे आज़ाद कर रहे है. इस पूजा में आने का फैसला मेरा अपना था आज ये साडी पेहेन्ने का फैसला भी मेरा है.

लखन: नहीं मई आपको और ये सब करने को नहीं कह सकता मई इतना खुदगर्ज़ नहीं बन सकता.

विनीता: देखिये बड़ी मुश्किल से मैंने खुद को तैयार करा है अब आप ये सब कह कर दुबारा मुझे कमज़ोर न करे.

विनीता ने आगे बाद कर लखन का हाथ अपने हाथो में थम लिया और खींचते हुए अंदर घर की तरफ लेन लगी. दंगल के मैदान पर अपने से आधी उम्र के हट्टे काटते पहलवान को पटक देने वाला लखन सिंह वह उस कोमलांगी नाज़ुक सी विनीता के खींचने पर यु खींचा चला जा रहा था जैसे उसके शरीर में कोई ताकत hi न रही हो. उसका ज़मीर विनीता को रोकना छह रहा था पर उसकी मजबूरी उसे रोकने से रोक रही थी. वो ये भी जनता था की विनीता उसे किस लिए ले जाहि है पर सब कुछ जानते बूझते हुए भी उसके लिंग में जैसे कोई उत्तेजना नहीं थी. विनीता खींचते हुए लखन सिंह को घर में बने स्नानघर में ले आई और अपनी आँखों को बंद करके गहरी गहरी सासे लेते हुए अपनी धड़कनो को कण्ट्रोल करते हुए लखन की तरफ अपना चेहरा घुमा कर कड़ी हो गई. एक बार फिर कुछ पल को वह ख़ामोशी छै रही लखन विनीता दोनों की धड़कने तेज़ तेज़ चल रही थी मजबूरी और उत्तेजना अजीब सा मिश्रण था उनके मन में. लखन जनता था की विनीता यहाँ उसे ब्लोजॉब देने लाइ है और विनीता भी जा थी की उसे अब क्या करना होगा पर फिर भी उत्तेजना और मजबूरी का मिला जुला भाव उनके मन में था.

वो दोनों यही खामोश खड़े थे पर यु खड़े रहने से कुछ नहीं होने वाला था. विनीता जो अपना दिल कठोर कर चुकी थी पहल करते हुए लखन के सामने घुटनो के बल बैठे गई. और उसने अपने मुँह से जो चार शब्द बोले उन्हें सुनकर लखन के दिल की धड़कने बाद गई न चाहते हुए भी उसके लिंग में उत्तेजना का संचार होना शुरू हो गया.

विनीता: अपना वो बहार निकालिये.

लखन भी जानते थे की विनीता किस वो की बात कर रही है पर उत्तेजना शर्म और संकोच ने उनके हाथो को जड़ कर दिया था. जिन हाथो ने पहलवान को पटक दिया एक अड़ियल घोड़े को काबू कर लिया एक मजबूत चट्टान को खंड खंड कर दिया वो हाथ अपनी धोती के अंदर से अपना लिंग बहार निकलने में काँप रहे थे.

विनीता: देखिये मई जानती हु आप ये सब नहीं करना चाहते पर मई भी ये अपनी ख़ुशी से नहीं कर रही हु मेरे लिए ये सब करना आपसे कही ज्यादा मुश्किल है पर हमे ये करना है. मई ये सब खुली आँखों से नहीं कर पाऊँगी इसलिए मई अपनी आँखे बंद कर रही हु आप अपना वो बहार निकल लीजिये.

विनीता ने अपनी आँखे बंद कर्ली और लखन अब भी विनीता को अपने सामने आँखे बंद करे घुटनो पर बैठा देख रहा था. लखन ने एक गहरी सास ली और अपना हाथ अपनी धोती में डालकर अपना लुंड अपनी धोती से बहार निकल लिया. कई सालो से एक औरत के स्पर्श से दूर रहा लखन का लुंड अपने से आधी उम्र की वो भी अपनी बहु की सहेली ऊपर से इतनी खूबसूरत औरत के सामने हवा में झूल रहा था पर विनीता की आँखे बंद होने की वजह से वो अब भी अपनी ज़िन्दगी के पहले लुंड को देखने से महरूम थी. विनीता को अपने सामने इस रूप में देख न चाहते हुए भी लखन के लिंग में धीरे धीरे तनाव आ रहा था उसने लखन के हाथो में hi हलके हलके झटके खाना शुरू कर दिया. लखन ने खांसने की आवाज़ निकल कर विनीता को इशारा कर दिया की उसने अपना लिंग बहार निकल लिया है. लखन से सिग्नल पाकर विनीता ने अपनी पलकों को और कास कर बंद कर लिया की कही अनजाने में उत्तेजना में उसकी आँखे न खुल जाए.

विनीता ने सकुचाते हुए डरते सेहमते हुए अपने हाथ की हथेली को धीमे धीमे ऊपर उठाना शुरू करा. विनीता को देखने की वजह से लखन भी अंदर hi अंदर उत्तेजित हो रहा था इसलिए लगातार बाद रही अपनी उत्तेजना को काबू करने के लिए लखन ने भी अपनी आँखे बंद कर ली, की शायद अगर वो विनीता को अपना लुंड छूटे उसे अपने मुँह में लेते देखेगा नहीं तो वो उस हद तक उत्तेजित भी न हो. विनीता का ऊपर उठते हाथ की उंगलिया अचानक से किसी सख्त कपकपाती सी चीज़ से छुई और विनीता को समझते देर न लगी की यर क्या है, उसने तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लिया. विनीता के हाथ के एक हलके से टच से hi लखन के लुंड को एक हल्का झटका लगा. विनीता की हालत एकदम ऐसी थी की जैसे किसी व्यक्ति ने ज़िन्दगी में कभी साइकिल भी न चलाई हो और एकदम से उसे कार चलने को कह दिया जाए वैसे hi विनीता जिसने ज़िन्दगी में कभी हल्का फुल्का रोमांस भी नहीं किया था कभी किसी लड़के को किश भी नहीं किया था अपने पति के साथ भी कुछ नहीं किया था आज सीधा उसे अपने से दुगनी उम्र के आदमी का लुंड मुँह में लेने को कह दिया गया था. तो सकुचाना डरना तो लाज़मी था.

zQc6ZuJY_o.gif


विनीता ने एक बार फिर अपनी हथेली को ऊपर करा और अपनी तर्जनी ऊँगली से छूकर लखन सिंह के लिंग को महसूस करा. पर इतनी हिम्मत करने के बावजूद लखन सिंह के लिंग को अपने हाथो में भरने में विनीता घबरा रही थी इसलिए झेपते हुए विनीता ने उनका लिंग अपनी ऊँगली और अंगूठे के बीच थम लिया. लखन सिंह को अपने लिंग पर विनीता की दो उंगलियों का स्पर्श महसूस हो रहा था पर वो बड़ी मुश्किल से आँखे बंद करे हुए अपनी उत्तेजना को काबू में करे था. लिंग को अपनी दो उंगलियों में थामे थामे विनीता ने अपनी उंगलिया नीचे ले जाते हुए लखन सिंह के लिंग के नीचे लटकते वृषणों को छूकर महसूस करा क्युकी पूजा का प्रारम्भ इन वृषणों के चुम्बन से hi होना था. पहली बार किसी मर्द के लिंग के स्पर्श के एहसास भर से विनीता के आधार कपकपा रहे थे. विनीता के होंठ सूख रहे थे एक एक इंच अपना चेहरा आगे करना उसे कई कम चलने से भी ज्यादा भरी लग रहा था. आँखे बंद करे करे hi अपना होंठो का हल्का सा खोलते हुए अपना चेहरा आगे बढ़ाया और अपनी उंगलियों में थामे लखन सिंह के वृषणों को अपने होंठो से चूम लिया.

OLUwuQOi_o.gif


विनीता के होंठ जैसे hi लखन के लिंग के नीचे लटकते वृषणों से टच हुए विनीता के तन बदन में रोमांच की एक लेहेर दौड़ गई. अपने लिंग पर एक औरत के होंठो का हल्का सा स्पर्श लखन के लिए भी इग्नोर करना मुश्किल था. विनीता की धड़कने धक् धक् धक् धक् कर रही थी. वो बार बार अपना थूक जातक कर अपने गले को तर कर रही थी.

विनीता ने एक बार फिर अपने दिलो दिमाग को कठोर करते हुए लखन सिंह के लिंग को अपनी दो उंगलियों में थाम लिया और लखन के लिंग के आगे के अग्रभाग के बराबर अपने होंठो को हल्का सा खोला और अपने चेहरे को आगे बढ़ाते हुए और अपनी उंगलियों को लिंग पर थोड़ा पीछे सरकते हुए लखन के लिंग के आगे के हिस्से को अपने होंठो के बीच फसा लिया.

1194562.jpg


लखन के लिंग के आगे का टोपा विनीता के कोमल रसभरे होंठो के बीच फसा था और मुँह के अंदर हिलती हुई जीभ बार बार लिंग के आगे के हिस्से में टच हो रही थी जिसके कारन लिंग में आते तनाव के कारन उसका आकर लगातार बढ़ता जा रहा था. ब्लोजॉब में लड़की मर्द के लुंड को मुँह में लेकर अपना मुँह आगे पीछे करती है पर चुकी यहाँ परिस्थितिया अलग थी इसलिए बजाए लखन का पूरा या आधा लिंग अपने मुँह में लेने के विनीता ने अपनी दो उंगलियों जिनमे वो लिंग थामे हुए थी से लखन के लिंग की खाल को आगे पीछे करना शुरू कर दिया था. विनीता बड़े आहिस्ता आहिस्ता अपनी उंगलियों को चलते हुए पूजा की शर्तो को पूरा करते हुए लखन सिंह के लिंग को एक नपा तुला ब्लोजॉब दे रही थी.

EIVefsRL_o.gif


प्रक्टिकली देखा जाए तो ये एक ब्लोजॉब hi था पर न इसमें औरत ने मर्द के लुंड को अपने हाथो की गिरफ्त में लिया था न उसे जीभ से चाट चाट कर गीला करा था और लुंड का एक चौथाई से भी कम हिस्सा विनीता के मुँह वास्तव में ये एक बड़ा कॅल्क्युलेटिवे ब्लोजॉब हड़जोब मिक्सउप था. पर जो मर्द बरसो से एक औरत के साथ से महरूम रहा हो उसके लिए तो नपा तुला ब्लोजॉब भी उत्तेजना से परिपूर्ण था. लखन के जिस्म की उत्तेजना लगातार बढ़ती जा रही थी मुँह के अंदर से आती विनीता की गरम गरम सासे और अंदर होती जीभ की अठखेलिया लखन सिंह को दीवाना कर रही थी. इस उत्तेजना इस दीवानगी में एक पल को लखन सिंह के हाथ विनीता के सर की तरफ बड़े ताकि उसके बालो को अपने हाथो में थम कर उसका सर अपने लुंड पर दबा दे पर अचानक से लखन सिंह ने होशोहवास को काबू करते हुए अपने बढ़ते हाथो को रोक लिया और अपनी उत्तेजना को कण्ट्रोल करने के लिए अपनी मुठी को कास कर भींच लिया. विनीता लगातार अपनी दो उंगलियों से लखन सिंह के लिंग की खाल को आगे पीछे कर रही थी. लखन सिंह का लिंग अपना पूर्ण अकार ले चूका था और निसंदेह वो गांव के सबसे ताकतवर लुँडो में से एक था पर विनीता की आँखे बंद होने के कारन वो उसका उत्तेजित स्वरुप देख नहीं सकती थी और लिंग के उसके हाथो की गिरफ्त में न होने के कारन वो छू कर भी अंदाज़ा नहीं लगा सकीय.

2ePCUkUB_o.gif


कछुए की चल से hi सही पर विनीता लगभग 15 मं से लखन सिंह के लिंग की खाल को अपनी उंगलियों से रगड़ रही थी और खून का दौडान उसके लिंग की नसों में तेज़ ते हो रहा था. कई सालो बाद लखन के लिंग को इस तरह का उत्तेजना का अनुभव मिला था. लखन सिंह के अंडकोष वीर्य के दबाव से कड़े हो चुके थे और उनसे होते हुए वो वीर्य लखन सिंह के लिंग की मूत्र नाली तक पहुंच चूका. लखन सिंह को भी अंदर से इस उत्तेजना का एहसास हो रहा था और उन्हें अनुभव हो रहा था की किसी भी पल उनके लिंग से वीर्य का बहाव निकलना शुरू हो जाएगा. और उनके लिंग का अग्रभाग विनीता के होंठो में दबा होने की वजह से वो वीर्य सीधा विनीता के मुँह में जाएगा. आज तक उनकी अपनी पत्नी ने भी उनका लिंग मुँह में नहीं लिया था. पूजा की शर्त तो यही थी जिसके अनुसार विनीता को लखन सिंह के लिंग से निकलने वाले वीर्य का पान करना था, लखन सिंह को विनीता के मुँह में स्खलित होना बहुत गलत और शर्मनाक लग रहा था. इसलिए इस पूरी क्रिया के दौरान पहली बार लखन सिंह अपनी चुप्पी तोड़ने को मजबूर हो गए.

लखन: विनीता जी पीछे हैट जाइये.

लखन जी के मुँह से निकले इन शब्दों को सुनकर एक एपल के लिए विनीता भी रुक गई उसके दिल की धड़कने तेज़ हो गई वो समझ गई की लखन जी उसे क्यों पीछे हटने को कह रहे है पर फिर विनीता को इस पूजा की शर्ते याद आई और इस पूजा पहले किया हुआ अपना संकल्प याद आया. और उस संकल्प को याद करते हुए एक बार फिर लखन सिंह के लिंग का टोपा अपने होंठो में फसाए फसाए अपनी उंगलियों से उनके लिंग की खाल को आगे पीछे करना शुरू कर दिया और इस बार उसकी उंगलियों की गति पहले से तेज़ थी क्युकी वो भी जल्द से जल्द ये काम पूरा कर लेना चाहती थी. विनीता को न रुकता देख और अपनी उत्तेजना को चरम पर पहुँचता महसूस कर लखन ने अपनी मुट्ठी खोल दी और विनीता के कंधो को थमते हुए उसे पीछे धकेलने की कोशिश करने लगे. लखन के बेदाग़ चरित्र और उनकी अंतरात्मा की आवाज़ ने उनके ज़हन से इस पूजा की शर्तो को मिटा दिया था पर विनीता को अपना संकल्प याद था और वो पूरी दृढ़ता के साथ उस पर डटी थी. लखन सिंह हैरान थे की इतना धकेलने के बावजूद विनीता उनका लिंग अपने होंठो से निकलने को तैयार नहीं है.

अपनी पत्नी के देहांत के बाद पहली बार लखन सिंह का लिंग स्खलन के करीब था. लखन सिंह की उत्तेजना चरमबिंदु पर पहुंच चुकी थी और वो ज्यादा देर तक इस उत्तेजना को अपने काबू में न रख सके और इतने सालो से जिस वीर्य को बहार निकलने का मौका hi नहीं मिला था वो पुरे फाॅर्स के साथ बहार आ गया. लिंग के आगे बने छेड़ से वीर्य की एक तेज़ पिचकारी विनीता के गले से टकराई, विनीता को पता चल गया की ये क्या है उसने अपने दुसरे हाथ की मुट्ठी को कास कर भींच लिया. विनीता की उंगलिया लखन सिंह के लिंग को कास कर थामे हुए थी, लखन सिंह के लिंग के अंदर होता वीर्य का दौडान विनीता को अपनी उंगलिया से साफ़ महसूस हो रहा था. लखन सिंह के लिंग से लगातार वीर्य निकलता जा रहा था जो विनीता के मुँह के अंदर भरता जा रहा था. विनीता का मुँह लखन सिंह के वीर्य भर गया था पर फिर भी विनीता ने वीर्य की एक बूँद भी बहार नहीं निकलने दी.

edDSuLPp_o.gif
 
लखन सिंह के हाथ अब भी विनीता के कंधे को थामे हुए थे उनकी सासे तेज़ तेज़ चल रही थी पेअर लड़खड़ा रहे थे पर विनीता के कंधो का सहारा लेकर वो खड़े थे. लखन सिंह यही विनीता का कंधो का सहारा लिए खड़े रहे और विनीता भी उनके लिंग के अग्रभाग को अपने होंठो में दबाए वह यही बैठी रही जब तक की लखन सिंह के लिंग से वीर्य की आखिरी बूँद तक विनीता के मुँह में नहीं निकल गई. स्खलन पूरा होने के बाद विनीता ने लखन का लिंग से अपनी उंगलिया हटा ली और उसे अपने होठो की गिरफ्त से आज़ाद कर दिया. लखन सिंह ने अपना लिंग वापस अपनी धोती के अंदर कर लिया और विनीता की तरफ पीठ करके खड़े हो गए उन्हें अब विनीता से नज़रे मिलते हुए भी शर्म आ रही थी. विनीता का पूरा मुँह लखन सिंह के गाड़े गाड़े वीर्य से भरा गया था पर अभी तो उसे ये वीर्य अपने हलक के नीचे उतरना था. विनीता को अपने मुँह में बहुत नमकीन नमकीन सा लग रहा था. अपना दिल कठोर करके उसने किसी तरह अपने मुँह में वीर्य का स्खलन तो करवा लिया था पर इसे हलक के नीचे उतरना एक और चुनौती थी पर बिना इसके काम अधूरा था. विनीता को अंदर से उबकाई सी आ रही थी पर अपनी उबकाई रोकने के लिए विनीता ने अपने मुँह को अपनी हथेली से कास कर दबा लिया और वो भी लखन की तरफ पीठ करके ज़मीन पर बैठ गई.

Js1nu81H_o.gif


विनीता ने खुद पर काबू रखते हुए पूरी हिम्मत के साथ अपने मुँह में भरा वीर्य अपने हलक के नीचे उतर लिया. विनीता ने अपनी ज़िद और हिम्मत से इस पूजा वीर्यपान की शर्त को पूरा कर दिया था. पर अपने हलक से नीचे जाते लखन सिंह के वीर्य ने विनीता के साबरा के बाँध को तोड़ दिया और उसने वही बाथरूम की फर्श पर उलटी करना शुरू करदी. लखन सिंह को विनीता के उलटी करने की आवाज़ सुनाई दे रही थी और इसकी वजह भी पता थी पर फिलहाल पलट कर विनीता को दिलासा देने की हिम्मत उनमे नहीं थी. उलटी करके शांत हो जाने के बाद विनीता वही बाथरूम की दीवार पर धोक लगा कर बैठ गई और अपने पास राखी पानी को बाल्टी से पानी दाल कर बाथरूम की फर्श को साफ़ कर दिया. पहली बार उसने आँख खोल कर लखन जी की तरफ देखा जो अब भी उसकी तरफ पीठ करके खड़े थे. विनीता समझ गई की अपने अच्छे चैरेक्टर की वजह से उन्हें उससे नज़रे मिलाने में शर्म आ रही थी वो अंदर से गिलटी महसूस कर रहे थे. पर अभी तो इस पूजा की आखिरी और सबसे घृणित विधि बाकी थी मूत्रासनं. और इसके लिए लखन जी को गिल्ट से बहार लाना ज़रूरी था.

विनीता: लखन जी पूजा की दो रस्मे पूरी हो गई है आखिरी रस्म को भी पूरा करिये.

लखन रुंधे गले से रट हुए: नहीं विनीता जी मुझे इतना छोटा मत बनाइये अब तक दुनिया के सामने फ़क़्र से चलने वाला लखन सिंह आज खुद को बहुत छोटा महसूस कर रहा है. घिन आ रही है मुझे खुद कर.

विनीता: लखन जी आप रो रहे है देखिये मेरी लिए ये सब आपसे ज्यादा मुश्किल है पर फिर भी मई कर रही पर अगर आप यु टूट जाएंगे तो अब तक मैंने जो कुछ किया वो सब बेकार चला जाएगा. सब कुछ करने के बावजूद दुनिया मुझे तना देगी क्या आप यही चाहते है की दुनिया मुझे तना दे.

लखन: नहीं आप के जैसी महान औरत पर एक भी तना देना पाप होगा.

विनीता: तो मेरी मदद करिये बड़ी हिम्मत से खुद को इसके लिए तैयार करा है इस तरफ घूमिये और पूजा की उस आखिरी रसम को पूरा करिये.

लखन रट हुए: नहीं ये मुझसे नहीं हो पाएगा इतनी भली औरत को इस तरह गांडा करने का पाप मई नहीं कर पाउँगा.

विनीता: करना पड़ेगा आपको ये सब करना पड़ेगा आपको मेरी कसम इधर घूमिये.

विनीता ने अपनी कसम देकर लखन सिंह को पीछे घूमने पर मजबूर कर दिया. लखन सिंह पीछे तो घूमे पर विनीता से नज़रे नहीं मिला प् रहे थे. विनीता अपने दिल को मज़बूत करके लखन सिंह के सामने ज़मीन पर आँखे बंद करके पालथी मार कर बैठ गई.

विनीता: पूरी करिया वो तीसरी शर्त.

लखन: कैसे मई कैसे मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा.

विनीता: करिये जो आपको करने के लिए कहा गया है.

लखन: लेकिन.....

विनीता चीखते हुए गुस्से से: करिये.....

लखन सिंह ने पहली बार इस हद तक गुस्से में देखा था और लखन सिंह ने एक बार फिर अपना लिंग धोती से बहार निकल लिया और उसका मुँह विनीता की तरफ करके खड़े हो गए. पर विनीता के ऊपर पेशाब करने की उनमे हिम्मत नहीं हो रही थी.

विनीता: देखिये आप जितनी ज़ादा देर लगाएंगे उतनी hi मुझे ज्यादा तकलीफ होगी ाल नहीं समझ रहे ये एक एक पल काटना मेरे लिए कितना मुश्किल हो रहा है.

1573609-0.jpg


विनीता की ये बात सुनकर लखन ने अपनी रुकी हुई पेशाब पर से अपना नियंत्रण हटा लिया और लखन सिंह के लिंग से पीला पीला पेशाब विनीता के ऊपर गिरना शुरू हो गया. जो विनीता के सर से बेहटा हुए उसके पुरे बदन को भिगोता हुआ नीचगे फर्श तक आ रहा था. लखन सिंह से ये सब देखा नहीं जा रहा था इसलिए उसने एक बार फिर अपनी आँखे बंद कर्ली और वही खड़ा खड़ा विनीता के ऊपर तब तक पेशाब करता रहा जब तक उसके लिंग से पेशाब निकलना बंद नहीं हो गई.

images-60.jpg


विनीता का पूरा जिस्म लखन सिंह के पेशाब से नाहा गया था. विनीता के पुरे जिस्म को अपने मूट से नेहला कर लखन सिंह ने यूरेनस पूजा की मूत्रासनं की तीसरी और आखिरी शर्त को भी पूरा कर दिया था. ये आखिरी काम करके लखन सिंह खुद से नज़रे नहीं मिला प् रहा था और अब यहाँ विनीता के सामने खड़े रहना भी उसके लिए मुश्किल था इसलिए विनीता को वही छोड़कर वो बिना कुछ बोले चुपचाप बाथरूम से बहार निकल गया.

images-54.jpg


इस पूरी पूजा के दौरान विनीता ने पहली बार अपनी आँखे खोली उसकी आँखे अंदर से सुर्ख लाल पद गई थी पर इनकी वजह क्या थी क्या ये उत्तेजना के लाल डोरे थे जो एक लुंड में स्पर्श से उसकी आँखों में उतर आए थे या ये गुस्से के लाल आगरे थे जो या फिर शायद ये उसके अंदर का दर्द था ये वो आंसू थे जो उसने अपनी आँखों में रोक लिए ताकि लखन सिंह ये पूजा बीच में रोक न दे. वही बैठे बैठे विनीता ने अचानक फूट फूट कर रोना शुरू कर दिया. अब ये साफ़ की उन आंको की लालिमा की वजह उसके अंदर का दर्द था की जिस औरत को आज तक अपने पति का प्यार नसीब न हुआ उसे आज अपनी दोस्ती निभाने के लिए एक मर्द के पेशाब से नहाने को मजबूर होना पड़ा. अपने जिस्म से आती पेशाब की बदबू से विनीता को खुद पर घिन आ रही थी पर कही न कही एक संतोष भी था की उसने अपनी दोस्ती और इंसानियत का फ़र्ज़ निभाते हुए इस पूजा को संपन्न करवा दिया. विनीता ने वही बाथरूम में लगा नल ों करा और साडी पहने हुए hi उसके नीचे बैठ गई और न जाने कितनी देर यही उस नल के नीचे बैठी रही. बहार लखन में फिलहाल इतनी हिम्मत नहीं थी की वो जाकर विनीता का हालचाल भी पूछ सके.

images-52.jpg


तकरीबन एक घंटे तक यही उस नल के नीचे खुद को भिगोते रहने के बाद विनीता उन गीले कपड़ो में hi बाथरूम से बहार आ गई क्युकी बदलने के लिए कपडे तो वो ले hi नहीं गई थी. अंदर कमरे में लाख उसे यु भीगा देख असमंजस की हालत में था की उसे कुछ पूछे या नहीं. विनीता ने बिना कुछ बोले कमरे में मौजूद अपने कपड़ो में से एक साडी उठाई और कमरे से बहार निकल गई और अपने कपडे बदलकर पेशाब में भीगे उन कपड़ो को वही बाथरूम में छोड़कर वापस कमरे में आकर बिस्तर पर आकर चुपचाप लेट गई. न लखन ने विनीता से कुछ पूछा न विनीता ने लखन से कुछ बोलै. लखन नीचे ज़मीन पर लेता था और विनीता ऊपर बिस्तर पर पर दोनों की आँखों से आज नींद गायब थी पर दोनों में आज एक दुसरे से कुछ बोलने की हिम्मत भी नहीं थी. काफी देर तक दोनों अपने अपने विचारो में डूबे रहे. विनीता ने आँखे बंद करके सोने की कोशिश की पर आँखे बंद करते उसके ज़हन में वो अनुभव ताज़ा हो गए जब लखन सिंह का लिंग उसके होंठो के बीच था और वो उस लिंग को अपने उंगलियों से सेहला रही थी. उस वक़्त विनीता का फ़र्ज़ उसकी उत्तेजना पर हावी हो गया था पर अब यु लेते लेते हस अनुभव को याद करते करते विनीता उस उत्तेजना को महसूस कर रही थी. और इस उत्तेजना में विनीता के होंठ खुद बा खुद खुल गए जैसे उस वक़्त खुले थे उसकी जांघो के बीच चीटिया सी काटने लगी और उसके हाथ खुद बा खुद अपनी जांघो के बीच पहुंच कर अपनी छूट को साडी के ऊपर से सहलाने लगे.

images-63.jpg


विनीता के मन में तरह तरह के विचार आ रहे थे जिसमे वो उसी बाथरूम में वही नीली साडी पहने बैठी थी अचानक से उसके सामने की दीवार में एक छटा सा गोल छेड़ बन जाता है, विनीता सरक कर उस छेड़ के नज़दीक जाती है वो उस छेड़ को ध्यान से देख hi रही थी की अचानक से उस छेड़ में खुद लुम्बी कठोर सी चीज़ बहार आती है. वो एक नसों से भरा हुआ पूर्ण उत्तेजित लुंड था जो झटके पे झटके खा रहा था. विनीता ने उस लुंड की तरफ हाथ बढ़ाया उसका हाथ उस लुंड से टच हुआ hi था की अचानक से वो दीवार गिर गई और उस दीवार के पीछे पूर्ण नग्न अवस्था में लखन सिंह खड़े थे और ये लुंड उन्ही का था और वो विनीता को देख कर मुस्कुरा रहे थे. मुस्कुराते हुए उन्होंने विनीता को इशारे से अपने करीब बुलाया. विनीता चुपचाप उनके करीब चली गई, फिर उन्होंने विनीता के कंधो पर दबाव डालकर उसे अपने सामने बैठाया और अपना तना हुआ लुंड विनीता के होंठो के आगे कर दिया. विनीता ने भी उनकर इशारे को समझते हुए चुपचाप अपना मुँह खोल दिया और इस बार काफी बड़ा.

8Tg7sPpa_o.gif


लखन सिंह ने एक बार में अपना सारा लुंड उसके मुँह में दाल दिया और धक्के पे धक्के लगाना शुरू कर दिया. लखन सिंह धक्के पे धक्के लगता गया और विनीता भी उसका पूरा साथ देते हुए उसके लुंड को चूसते रही जब तक की लखन सिंह ने अपना माल विनीता के मुँह में नहीं निकल दिया.

images-51.jpg


माल निकट hi विनीता की आँखे खुल गई और वो हड़बड़ा कर उठ बैठी, उसका पूरा बदन पसीने पसीने हो गया था और सासे तेज़ तेज़ चल रही थी. अचानक उसे अपनी जांघो के बीच कुछ चिपचिपा सा महसूस हुआ उसने धोती के ऊपर से अपनी छूट को छू कर देखा तो वो चौंक पड़ी क्युकी उसकी साडी छूट के ऊपर के हिस्से पर गीली हो गई थी. इतनी देर से उस सपने में देखे गए दृश्यों की उत्तेजना में वो अपनी छूट रगड़ती रही और यही रगड़ते रगड़ते अपने जीवन के पहले ओर्गास्म तक पहुंच गई और अपनी छूट से निकले कामरुस से अपनी साडी को गीला कर बैठी. उसने नज़रे घुमा कर लखन सिंह की तरफ देखा जो उसकी तरफ पीठ करे लेते थे हलाकि नींद उनकी आँखों में भी नहीं थी पर उनका चेहरा दूसरी तरफ होने की वजह से उन्हें पता hi नहीं था की विनीता उन्हें देख रही थी. उनका बदन ऊपर से नंगा था और पीछे से उनकी चौड़ी सुडौल पीठ विनीता को अपनी तरफ देखने को मजबूर कर रही थी उसे अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी. विनीता के मन लखन सिंह के प्रति भावो में परिवर्तन होने का प्रारम्भ हो चूका था पहली बार विनीता ने उन्हें अपने सहेली के ससुर से एक मर्द के रूप में देखा था. पर अचानक से अपने मन में उठते विचारो को महसूस कर विनीता ने लखन की निर्वस्त्र पीठ से अपनी नज़रे हटा ली.

anushka-shetty-142484149970.jpg


वो चुपचाप बिना आवाज़ करे अपने बिस्तर से उत्तरी बिना आवाज़ करे अपने कपड़ो में से एक दूसरी साडी निकली और उसे लेकर चुपचाप कमरे से निकल कर बाथरूम में पहुंच गई. वह अपनी कामरुस से भीगी साडी को उतर कर वही फर्श पर दाल दिया और अपने पैरो को साफ़ करके दूसरी साडी पेहेन कर वापस कमरे में आ गई. लखन सिंह अब भी उसकी तरफ पीठ करे लेते थे. वो भी चुपचाप वापस बिस्तर पर जाकर लखन की तरफ पीठ करके लेट गई जैसे कुछ हुआ hi नहीं. और कुछ देर पहले अपने मन में आए विचार अपने ओर्गास्म लखन सिंह सुडौल शरीर के बारे में सोचती रही, ये सोचना सही है या गलत इस पर तरह तरह से अपना आत्ममंथन करती रही और यही सब सोचते सोचते कब उसकी पलके बंद हो गई उसे एहसास भी न हुआ. पर एक दर्द संकल्प से शुरू हुआ पूजा का ये चरण दर्द और मजबूरी से होते हुए फाइनली उत्तेजना के अपने आखिरी पड़ाव तक पहुंच hi गया था. 6 ग्रहो की पूजा पूरी हो चुकी थी अब पता नहीं आने वाले दिनों में बचे हुए ग्रहो की पूजा विनीता और लखन से क्या क्या करवाने वाली थी और अंत में इस पूजा का क्या परिणाम आने वाला था इन सवालों का जवाब भविष्य के गर्भ में hi छिपा था.

4WdDDhMz_o.gif
 
लखन की कोठी

images-64.jpg


सुबह बारिश में भीग जाने और फिर जीतू के साथ ओर्गास्म का एक मादक खेल खेलने के बाद गरिमा काफी थक गई थी और मंदिर से आते वक़्त उसने ढाबे में खाना खा लिया इसलिए उसे भूक भी नहीं लगी थी इसलिए वो बिना खाना खाए सो गई थी पर बिहारी काका ने खाना बना लिया था और उन्हें बुरा न लगे इसलिए वो खाना अपना कमरे में ले आई थी और उसे बिना खाए ऐसे hi धक् कर सो गई थी. कहानी पड़ने वाले रीडर्स ने समझ लिया था की अब डे 6 में गरिमा की कहानी ख़तम हो गई है और अब गरिमा से उनकी मुलाकात डे 7 में hi होगी. पर राइटर लोगन के दिमाग में कुछ और hi था जिसकी रूपरेखा वो पहले दिन से hi बना रहा था.

हमेशा अपने घर में जल्दी उठ जाने वाली गरिमा इस कोठी में हर सुबह देर से उठ रही थी हर सुबह उसे अपना सर भरी भरी सा लगता था हर सुबह उसे अपने पेट पर कुछ सफ़ेद पपड़ी सी जुमी नज़र आती थी. ये साड़ी बाते रीडर्स कहानी के शुरूआती उपदटेस से पड़ते आ रहे थे पर कभी किसी का ध्यान इस तरफ नहीं गया की ऐसा लगातार क्यों हो रहा है क्यों राइटर (लोगन) बार बार कहानी में इस बात का ज़िक्र कर रहा है पर अब इस नार्मल सी दिखने वाली घटना के पीछे की असली सच्चाई रीडर्स में सामने आने वाली थी. एक ऐसी घटना जो दुसरे दिन से लगातार हर रात रीडर्स की नाक के नीचे होती चली आ रही थी जिसका हिंट भी बार बार उन्हें राइटर (लोगन) ने दिया पर कभी किसी का ध्यान उस तरफ नहीं गया आज उस घटना पर से पर्दा हटने वाला था.

maxresdefault.jpg


रात के 2 बज रहे होंगे. गरिमा बिस्तर पर इत्मीनान की नींद ले रही थी. चारो तरफ ख़ामोशी थी इसलिए बारीक से बारीक आवाज़ भी साफ़ सुनाई दे रही थी. अचानक कुछ ज़मीन पर कुछ भरी चीज़ खिसकने की आवाज़ आणि शुरू हो गई. हमेशा गहरी नींद में सोने वाली गरिमा की आज थकी होने के बावजूद उतनी गहरी नींद में नहीं थी उसके कानो में ये खिसकने की आवाज़े साफ़ सुनाई दे रही थी. कुछ पल नींद की खुमारी में उसने इन आवाज़ों को इग्नोर करा पर आवाज़ लगातार आते जाने और उसके बेहद करीब और तेज़ आने के कारन उसने अपनी पलकों को हल्का सा खोल कर देखा और सामने का दृश्य देख उसके होश फाख्ता हो गए.

images-65.jpg


सामने लकड़ी की वो अलमारी जिसमे उसने हरिया की बीवी के कपडे और शोभा के यहाँ से लाया हुआ बैग रख दिया था वो कोई पीछे से आगे की और धकेल रहा था. पर उस अलमारी के पीछे इतनी जगह नहीं थी की वह कोई छुप कर खड़ा हो सके और उसके पीछे तो दीवार थी फिर कैसे कोई पीछे खड़ा होकर उस अलमारी को आगे धकेल रहा है. एक पल को गरिमा चीखने को हुई पर दर के मरे उसके मुँह से आवाज़ hi नहीं निकल रही थी. की अचानक कमा में जलते नाईट बल्ब की रौशनी में उसे अलमारी के पीछे से किसी का हाथ नज़र आया जो अलमारी को कास कर पकड़ कर आगे की और धकेल रहा था.

गरिमा कुछ करती या उठ कर बैठती उससे पहले वो शिक्षा अलमारी के पीछे से निकल कर बहार आ गया. गरिमा का दर के मारे बुरा हाल था अब उसकी चीखने की भी हिम्मत नहीं थी की कही ये कोई चोर हुआ जिसके पास चाकू या बन्दूक हो और वो उसके चिल्लाते hi उस पर हमला कर दे तो. इसलिए उसने चुप रहना hi ठीक समझा. गरिमा अपनी आँखे बंद करे वैसे hi सोने की एक्टिंग करती रही. पर उसने अपनी पलकों को बहुत हल्का सा खोले जिससे उस शिक्षा को पता न चले की वो जाग रही है. उसने उसके चेहरा देखने की कोशिश की पर कम रौशनी और ज्यादा दूरी की वजह से उसका चेहरा साफ़ नज़र नहीं आ रहा था.

man-in-apartment-coming-out-of-dark-room-to-balcony-buqjy7h-F0000.png


वो शिक्षा धीमे धीमे बिस्तर पर सोती गरिमा के नज़दीक आ रहा था. गरिमा के दिल की धड़कने तेज़ तेज़ चल रही थी उसे दर भी बहुत लग रहा था. उसका दिल उसे चिल्लाने को कह रहा था पर उसका दिमाग उसे रोक रहा था की कही चिल्लाने से उसकी जान खतरे में न पद जाए. अगर ये कोई चोर है तो हो सकता है वो ये देखने आ रहा है की वो जाग रही है या सो रही है और उसे सोता पाकर वो चुपचाप चोरी करके यहाँ से निकल जाए. पर नीचे रसोई कमरे में तो काका सोते है जब ये चोर अंदर आया तो उन्हें पता नहीं चला या फिर पता चला पर इस चोर ने उनके साथ कुछ कर दिया.

वो ये सोच hi रही थी की तब तक वो शिक्षा उसके बीएड के एकदम नज़दीक आ कर खड़ा हो गया. गरिमा ने अपनी पलकों की झिर्री से उसका चेहरा देखा जो अब साफ़ नज़र आ रहा था और उसका चेहरा देखते hi गरिमा के पैरो टेल की ज़मीन निकल गई. ये कोई चोर वॉर नहीं था बल्कि खुद बिहारी काका थे. एक पल के लिए गरिमा का मन हुआ वो उठ जाए पर फिर उसके मन में ख्याल की चुप चाप सोते रहने की एक्टिंग की जाए और देखा जाए ये काका करते क्या है. यही सोच कर गरिमा चुपचाप लेती रही. बिस्तर के पास खड़े बिहारी काका गरिमा के बदन को काफी देर तक ऊपर से नीचे तक निहारते रहे.

21ankhon-dekhi.jpg


उसके बाद वो बिस्तर पर गरिमा के बगल में आकर बैठ गए गरिमा का अंचल उसके सीने के ऊपर से हटा दिया और अपने हाथ ब्लाउज के ऊपर से सीधा गरिमा के स्तनों पर रख दिए और उन्हें हाथ से हल्का हल्का दबाने लगे.

kasthuri-hot-pictures-1.jpg


गरिमा की तो धड़कने तेज़ हो गई उसे यकीन नहीं हो रहा था की दिन भर उसके सामने बड़े सीधे साढ़े बांके रहने वाले काका रात में इस तरह निडर होकर उसके ये सब कर रहे है, उन्हें उसके जाग जाने का दर भी नहीं है.

images-62.jpg


गरिमा के स्तन दबाते दबाते काका अपना चेहरा गरिमा के चेहरे के नज़दीक लाए और बिना डरे अपने होंठ सीधा गरिमा के होंठो पर रख दिए. गरिमा को यकीन नहीं हो रहा था की एक 50-55 साल का अधेड़ उम्र का बुद्धा रसोइया रात में चुपके से उसके कमरे में आकर उसके जिस्म के साथ निडर होकर इस तरह खेल रहा है वो भी बस उसकी नींद का सहारा लेकर. क्या उन्हें उसके जागने का भी दर नहीं है या फिर उन्हें यकीन है की इतना सब होने के बावजूद मई नहीं जगूंगी. वो इतने निडर कैसे है. बिहारी काका अपने एक हाथ से गरिमा के स्तन दबा रहे थे और उसके चेहरे पर झुके हुए उसके होंठ अपने होंठो में भर कर चूस रहे थे.

images-52-1.jpg


गरिमा के लिए भी इस उत्तेजना को कण्ट्रोल करना मुश्किल हो रहा था पर वो काका को ये हिंट भी नहीं देना चाहती थी की वो जाग रही है क्युकी वो देखना चाहती की काका ये सब करते हुए किस हद तक जा सकते है. उसने अपनी उत्तेजना को काबू रखने के लिए बिस्तर की चद्दर को कास कर पकड़ लिया और काका को खुली छूट देदी की वो जो करना चाहे करले. करीब 12 मिनट तक काका यही गरिमा के स्तनों को दबाते रहे और उसके होंठो को चूसते रहे. फिर सीधे बैठ कर उन्होंने गरिमा के बदन ऊपर से नीचे तक देखा. गरिमा काका की नज़रे बचाकर उनकी हर हरकत को ऑब्सेर्वे कर रही थी.

images-61.jpg


काका ने अपना हाथ गरिमा के मांसल चिकने पेट पर रख दिया और उसे अपने हाथ से सहलाने लगे. वो एक बार फिर अपना चेहरा गरिमा के ब्लाउज में छुपे स्तनों के नज़दीक लाए और अपने होंठो को हलके हलके गरिमा के उभारो पर जिसने लगे. पर वो ज्यादा ज़ोर नहीं लगा रहे थे शायद उन्हें इस बात थोड़ा बहुत दर था की ज्यादा ज़ोर से दबाने पर दर्द की वजह से मई उठ न जाऊ. काका कुछ देर यही गरिमा के उभारो की महक सूंघते रहे और उसके पेट को सहलाते रहे. धीमे धीमे वो अपना चेहरा नीचे सरका कर गरिमा के पेट पर ले आए और गरिमा के पेट को यहाँ वह चूमने लगे. अपने होंठो से गरिमा का पेट चूमते चूमते उन्होंने अपना हाथ पेटीकोट के ऊपर से गरिमा की छूट के ऊपर रख दिया और और अपने हाथो से उसकी छूट सहलाने लगे.

4.jpg
 
images-34-4.jpg


काका उसकी छूट सहलाए जा रहे थे और उसके पेट को हर जगह चूमे जा रहे थे. गरिमा के लिए अपनी उत्तेजना अपनी ाहो को काबू करना मुश्किल हो रहा था. उसने अपने निचले होंठ को अपने दांतो में कास कर दबा लिया की कही उसकी आवाज़ बहार न निकल जार और काका को पता न चल जाए की वो जाग रही है क्युकी अब कही न कही उसे भी इस सबमे मज़ा आने लगा था. पर साथ hi साथ गरिमा को ये दर भी था की अगर काका यही उसकी छूट सहलाते रहे तो कुछ hi देर वो झड़ने को मजबूर हो जाएगी और तब उसके छूट के हिस्से पर गीलापन महसूस कर काका को अंदाजा हो जाएगा की वो सो नहीं रही है.

पर अचानक से काका बिस्तर से उठकर खड़े हो गए. गरिमा को लगा शायद इतना hi करने आए थे और अब वो वापस चले जाएंगे पर गरिमा की सोच के उलट उन्होंने ने अपनी धोती उतर दी नीचे जांघिया वो पहने hi नहीं था. इसलिए उनका घनी सफ़ेद झांटो से भरा लुंड अब पूर्ण उत्तेजित हालत में गरिमा की नज़रो के सामने तना खड़ा था. गरिमा को यकीन नहीं हो रहा था की काका इस हद तक बेखौफ्फ़ हो गए है की उसके कमरे के अपना लुंड नंगा करके उसके बिस्तर के इतना नज़दीक खड़े है. क्या वो उसे छोड़ने वाले है कि उसे उठ कर बैठ जाना चाहिए या अभी और लेते रहकर देखना चाहिए की काका क्या करने वाले है.

गरिमा िनी विचारो में खोई हुई थी की काका ने अपना लुंड हाथो में लेकर मुठ मारना शुरू कर दिया. वो चुपचाप गरिमा के बदन को ऊपर से नीचे तक निहारते हुए अपने लुंड की खाल को तेज़ तेज़ आगे पीछे कर रहे थे. गरिमा चुपचाप बिस्तर में आँखे बंद करे सोने की एक्टिंग कर रही थी और दूसरी तरफ काका उसके बदन को देखते हुए उसके hi ऊपर मुठ मार रहे थे. काका करीब 12 मिनट तक अपना लुंड सहलाते रहे पर शायद अब वो झड़ने के करीं थे इसलिए वो झुककर अपने लुंड गरिमा के पेट के ऊपर ले आए और उन्होंने गरिमा के पेट के ऊपर hi अपना गाड़ गाड़ा माल निकलना शुरू कर दिया. गरिमा को यकीन नहीं हो रहा था की वो उसके पेट के ऊपर अपना माल निकल रहे है. काका ने अपना पूरा माल गरिमा के पेट के ऊपर निकल दिया.

cg8Pb3B4_o.gif


अपना लुंड गरिमा के पेट पर खली कर देने के बाद काका वही बिस्तर के सिरहाने ज़मीन पर थक कर बैठ गए. उनकी साँसे तेज़ तेज़ चल रही थी इस रात के सन्नाटे में उनकी तेज़ तेज़ साँसे गरिमा को साफ़ सुनाई दे रही थी. गरिमा को अपने पेट पर बहते गरिमा के वीर्य का गीला गीला एहसास हो रहा था जो उसे बड़ी किंकी फीलिंग दे रहा था पर फिर भी गरिमा चुपचाप लेती थी. कुछ देर यही बैठे रहने के बाद अपनी साँसों को काबू करने के बाद काका दुबारा उठ कर खड़े हुए उन्होंने ज़मीन पर पड़ी अपनी धोती उठाई और उसी धोती से गरिमा के पेट पर बहते अपने वीर्य को पोंछ पोंछ कर साफ़ करने लगे.

बिहारी काका अपना सारा गदा गदा वीर्य पोंछ कर साफ़ कर दिया पर फिर भी कुछ चिपचिपा अंश बचा रह hi गया था जो नाईट बल्ब को रौशनी में उन्हें दिखा नहीं. अपना वीर्य पोछने के बाद काका ने वही धोती वापस से पेहेन ली और गरिमा के होंठो को एक बार फिर चूमकर उस अलमारी की तरफ वापस चल दिए. गरिमे उन्हें पीछे से जाते देख रही थी. उस अलमारी के पास पहुंच कर वो वापस उस अलमारी के पीछे चले गए और उसके बाद गरिमा को बस अलमारी वापस सरकती नज़र आई जो सरक कर वापस अपनी जगह पहुंच गई. काका के जाने के बाद इस अचानक हुई घटना से शॉकेड गरिमा कुछ देर यही लेती रही की कही काका वापस न आ जाए.

जब गरिमा को इत्मीनान हो गया की बिहारी काका जा चुके है तो वो उठ कर बैठ गई.

images-11-1.jpg


उसने अपना पेट छू जहा काका के वीर्य का चिपचिपा अंश अभी भी थोड़ा बहुत सेष था. फिर गरिमा उठ कर उस अलमारी के पास गई, उसने बड़े आहिस्ता से बिना आवाज़ करे अलमारी को थोड़ा आगे खींचा. दीवार से अलमारी आगे खींचते hi वो शॉकेड रह गई क्युकी उस अलमारी के पीछे दीवार नहीं बल्कि एक दरवाज़ा था जो दुसरे कमरे में खुलता था और उसी दरवाज़े के आगे ये अलमारी राखी होने की वजह से गरिमा को अब तक ये पता hi नहीं चला की उसके कमरे में दुसरे कमरे का एक इंटरलिंक दरवाज़ा भी था. यानि काका इसी दरवाज़े से अलमारी को आगे धकेल कर कमरे के अंदर आए और वापस इसी दरवाज़े से निकल कर पीछे से खींचकर अलमारी को खींचकर वापस अपनी जगह कर दिया. गरिमा ने वापस अलमारी को उसकी पहले वाली जगह सरका दिया और अपना पेट पर लगे काका का वीर्य की चिपचिपाहट साफ़ करने बातबरूम में घुस गई.

गरिमा के दिमाग में अब भी यही चल रहा था की काका इतने निडर कैसे हो गए की इतना सब करते हुए भी उन्हें गरिमा के जागने का दर नहीं लगा. वो ये सब बड़े इत्मीनान और आहिस्ता से कर रहे थे जैसे उन्हें पता था की गरिमा नहीं जागने वाली. गरिमा ने अपने पेट पारा लगा वीर्य साफ़ करने के लिए एक मग्गे में पानी उठाया hi था की उसने अपने पेट पर लगा वीर्य ध्यान से देखा जो अब तक थोड़ा थोड़ा सूखने लगा था. और उसे देख कर अब गरिमा के दिमाग में घंटी बजने लगी उसे उसे रोज सुबह अपने पेट पर मिलने वाली सफ़ेद पपड़ी की वजह समझ आना शुरू हो.

गरिमा ने एक कड़ी से दूसरी कड़ी को जोड़ना शुरू कर दिया और उसे उसके हर सवाल का जवाब मिलता चला गया. गरिमा को समझ आ गया की रोज सुबह जो उसके पेट पर सफ़ेद पड़ी मिलता है वो असलियत में बिहारी काका का वीर्य था. यानि हर रात काका उसके कमरे में इसी तरह अलमारी के पीछे वाले दरवाज़े से दाखिल होते थे. पर अगर काका हर रात उसके कमरे में आते थे तो कभी उसे इसका पता क्यों नहीं चला उसकी नींद क्यों नहीं खुले और आज थका होने के बावजूद वो उसकी नींद कैसे खुल गई. काका इतने निडर होकर ये सब कर रहे थे यानि उन्हें पता था की मई नहीं उठूंगी यानि उन्होंने ऐसा कुछ करा था जिससे मई नींद से न जगु मतलब हर रात वो मेरे खाने में नींद की गोली मिला देते थे जिसे खा कर मई गहरी नींद में सो जाती थी, और आई राय मेरा पेट भरा होने की वजह से मैंने खाना नहीं खाया इसीलिए मेरी आँख खुल गई. है और रोज सुबह मेरी आँख देर से खुलती थी और सर भरी भरी सा लगता था इसकी वजह भी वो नींद की गोलिया जो काका मुझे खाने में मिला कर देते थे.

गरिमा को रोज सुबह अपने देर से उठने अपना सर भरी भरी लगने और अपने पेट पर मिलने वाली सफ़ेद पपड़ी की असल वजह मिल गई थी. और इसी के साथ बिहारी काका का असल रूप भी सामने आ गया. अपने पेट पर से बिहारी काका का वीर्य साफ़ करके गरिमा वापस आकर अपने बिस्तर पर लेट गई और अभी जो कुछ हुआ उसके बारे में सोचने लगी. इस कोठी में अपने पहले दिन काका उसकी गांड देख कर किचन में उसके पीछे पीछे खड़े खड़े hi अपनी धोती में hi झाड़ गए थे और उसके बाद से हर रात उसके खाने नींद की गोली मिलकर उसके जिस्म से खेल रहे थे उसके ऊपर अपना माल निकल रहे थे. यानि हरिया के साथ चुदाई करने से पहले से काका उसके साथ ये सब कर रहे थे. इस गाँव में आने के बाद हरिया और जीतू के बाद बिहारी काका वो तीसरे शिक्षा थे जिन्होंने मेरे बदन के साथ खेला था. आज सुबह मैंने बेटे के साथ वो सब करा और अब उसका बाप रात में मेरे साथ ये सब कर गया.

images-58.jpg


काका की हरकते सोच सोच कर गरिमा भी उत्तेजित हो गई उसने अपना पेटीकोट अपनी छूट के ऊपर तक ऊपर कर लिया और काका के बारे में सोच सोच कर अपनी छूट उंगलिया अंदर बहार करने लगी. आँखे बंद करे उसकी आँखों से सामने काका बालो से भरा लुंड घूम रहा था. दूसरी तरफ वो ये भी सोच रही थी की इस गाँव में आने के बाद उसका चैरेक्टर किस हद तक गिर गया है की अब वो एक 19 साल के लड़के का लुंड देखकर भी उत्तेजित हो जाती है और एक 55 साल के बुड्ढे का लुंड देखकर भी. काका और जीतू का बाप बेटे का रिश्ता इस फीलिंग को और ज्यादा इरोटिक बना रहा था. की तरफ बीटा उसके बड़े बड़े मुम्मो को मसलने चूसने के उतावला है और दूसरी तरफ उसका बाप उसकी गांड को देखकर अपना पानी निकल देता है. उसके मन में तरह तरह के भाव आ रहे थे की अगर ये बाप बीटा मिलकर उसे चोदे तो कितना मज़ा आएगा. उसके दिमाग में थ्रीसम पोर्न वीडियोस में दृश्य घूमने लगे जो उसने कॉलेज टाइम में देखे थे.

qBZpOale_o.gif


ये सब सोचते सोचते वो लगातार अपनी छूट में उंगलिया अंदर बहार करती जा रही थी. वो इस बाप बेटे की जोड़ी से ज्यादा से ज्यादा मज़ा के लिए उतावली हो गई थी. उसके दिमाग में तरह तरह के आईडिया आ रहे थे. पर बेटे को वो थोड़ा बहुत अपने साथ खोल चुकी थी उसे अपने नंगे बदन के दर्शन करा चुकी अब बारी थी बाप को सडके करने की जो काम वो अब तक छुप छुप कर रहा था उसे खुल कर करने के लिए तैयार करने की. और इस काम के लिए कल से ज्यादा बेहतर दिन कोई नहीं हो सकता था क्युकी आज की बारिश के बाद कल काका ने जीतू को खेतो में मेड बनाने को कहा था जिसमे कल उसका पूरा दिन लग जाएगा यानि कल मई और काका यहाँ कोठी में अकेले होंगे इससे बेहतर मौका इस काम के लिए नहीं मिल सकता. कल का सोचते सोचते hi गरिमा इस हद तक उत्तेजित हो गई थी की वो एक 55 साल में बुड्ढे के बारे में सोच सोच कर hi झाड़ गई.

images-4-1.jpg


इस गाँव में एक शादी में शामिल होने आई एक घरेलु हाउसवाइफ इस कदर सेडक्टिव के दलदल में गड गई की उससे उसका निकलना नामुमकिन हो गया था और ये दलदल लगातार उसे अपने अंदर समेटता चला जा रहा था. हमउम्र हरिया से शुरू हुई एक हाउसवाइफ के सेडक्टिव की ये कहानी खुद से 15 साल छोटे नए नए जवान हुए बच्चे जीतू से होते हुए अब अपने से 20 साल बड़े एक अधेड़ बुड्ढे बिहारी तक पहुंच गई थी. पता नहीं ये सेडक्टिव गरिमा से और क्या क्या करवाने वाला था और क्या यहाँ से वापस जाने के बाद अपनी असली दुनिया में लौटने के बाद भी क्या वो इस सेडक्टिव के दलदल से बहार निकल पाएगी या ये दलदल पूरी तरह उसे अपने अंदर समां लेगा.

ा HOUSEWIFE'S सेडक्टिव

images-42-1-1.jpg
 
Back
Top