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गरिमा दिन भर की थकन के बाद नींद के पहलु में जा चुकी थी तो आंसुओ से भरी विनीता की आँखों से आज नींद कोसो दूर चली गई थी अघोरी द्वारा बताई गई आज की पूजा की विधियों को करने या न करने का अजीब सा द्वन्द उसके दिलो दिमाग में चल रहा था.
वही हवेली में बाकि बची पाछो सहेलियों की ज़िन्दगी भी अपनी अपनी दिशा में आगे बाद रही थी. कल रात नशे की हालत में अपने बाप को अपना पति समझ मनाई गई सुहागरात की ख़ुशी में डूबी शोभा आज रात फिर विक्रम के साथ प्यार की गहराइयो में डूब जाना चाहती थी और इसी बारे में बात करने वो एक बार फिर विक्रम के कमरे में पहुंच गई.
शोभा: विक्रम आज रात भी तुम मेरे कमरे में आओगे न मई इंतज़ार करुँगी तुम्हारा.
विक्रम अब थोड़ा इर्रिटेट हो रहा था हलाकि वो भी शोभा को पसंद करता था पर अपने बाप को धोका भी नहीं देना चाहता था. पर शोभा कुछ सुनने को तैयार hi नहीं थी.
विक्रम: शोभा पापा की वो पूजा पूरी हो जाने दो उसके बाद तो हमारे पास वक़्त hi वक़्त होगा.
शोभा: अरे अभी छुप छुप कर ये सब करने का जो मज़ा है वो तब नहीं होगा. तुम्हारी बेशक कुछ गिर्ल्फ्रेंड्स रही होंगी पर मैंने तुम्हारे अलावा कभी किसीके बारे में नहीं सोचा कॉलेज में किसी लड़के के साथ नहीं घूमी. कॉलेज के बाद सोचा तुम्हारे साथ कुछ प्यार भरे पल बिताउंगी पर हमारी शादी तै हो गई और फटाफट हो भी गई अब दो दिन मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बन लेने दो उसके बाद तो पूरी ज़िन्दगी बीवी hi बांके रहना है.
विक्रम को समाजः नहीं आ रहा था की वो शोभा को कैसे समझाए कल तो जैसे तैसे उसने नशे की गोली देकर काम चला दिया था पर ये रोज़ रोज़ नशे की गोली इस्तेमाल नहीं की जा सकती थी और उसे आज की रात के बाद दो और राते बिना शोभा के करीब जाए कटनी थी इसलिए उसे इस समस्या का कोई सही इलाज खोजना था. वो जनता था शोभा को लड़कियों के छोटे छोटे कपडे कपडे अच्छे नहीं लगते कॉलेज के दिनों में भी उसने कई बार शोभा को ऐसे कपडे गिफ्ट करने चाहे पर शोभा ने हमेशा इंकार कर दिया. हलाकि शोभा साड़ी में भी बेहद सुब्दर लगती थी पर फिलहाल विक्रम को इसी बात में इस समस्या का हल नज़र आया की अगर वो शोभा को ऐसे कपडे पेहेन्ने को फाॅर्स करे तो शोभा कभी नहीं मानेगी तब वो भी इस बात पर अगले दो दिन आसानी से काट लेगा. वो थोड़ी नाराज़ होगी पर पूजा होने के बाद प्यार से उसे मन लेंगे. विक्रम को ये तरीका सही लगा.
विक्रम: तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनने की बात कर रही हो पर गर्लफ्रेंड बनने से पहले ढंग से गर्ल तो बन जाओ. कॉलेज के दिनों में अपना गेटउप याद है ऊपर कुरता नीचे जीन्स लाठर जैकेट लड़की कम लड़का ज्यादा लगती थी और अब जबसे गाँव आई हो बस ये साड़ी जिसमे तुम लड़की कम औरत ज्यादा लगती हो. पहले बॉय बानी रही अब औरत बन गई हो गर्ल तो तुम कभी रही hi नहीं. कितनी बार तुम्हे कहा की थोड़ा खुद को बदलो थोड़ी मॉडर्न बनो मैंने कितनी बार तुम्हे मॉडर्न कपडे गिफ्ट करने चाहे पर तुमने कभी नहीं लिए.
शोभा: उन बदन दिखाऊ छोटे छोटे कपड़ो को तुम मॉडर्न होना कहते हो जिसमे साडी दुनिया के सामने औरत के जिस्म की नुमाइश होती है लोग उसे गन्दी नज़र से देखते है ये मॉडर्न होना है तुम्हारी नज़र में.
विक्रम: अब बाते मत बनाओ साडी दुनिया जहाँ की लड़किया ऐसे कपडे पहनती है पर तुम पेहेन लोगी तो बहुत बड़ी बात हो जाएगी. अपनी फ्रेंड नेहा को देखो वो भी तो पहनती है ऐसे कपडे कुछ उसीसे सीख लो.
शोभा: वाओ तो तुम चाहते हो मई नेहा से सीखू तुम जानते hi कितना हो नेहा को पता है वो किस चैरेक्टर की है कितने लड़को को अपने आगे पीछे घूमती है तुम चाहते मई वैसी हो जाऊ.
विक्रम: बेफिज़ूल की बाते मत करो मई यहाँ किसी के चैरेक्टर पर कुछ नहीं कह रहा वो चैरेक्टर वाइज कैसी है उससे मुझे कुछ लेना देना नहीं मई यहाँ सिर्फ लुक्स और कपड़ो की बात कर रहा. उसका ड्रेसिंग सेंस देखो कितनी हॉट बांके रहती है.
शोभा: मई जैसी हु ठीक हु मुझे कोई ज़रूरत नहीं उसके जैसा बनने की. मई यहाँ तुमसे कितने अच्छे मन से प्यार भरी बाते करने आई थी और तुम मुझे नेहा जैसा बनने को कह रहा. तुम इसी में खुश रहो शायद मैंने hi तुमसे कुछ ज्यादा एक्सपेक्ट कर लिया था. गुड नाईट अब तुमसे बीवी के रूप में hi मिलूंगी शायद गितलफ्रेंड बॉयफ्रेंड बनना हमारे नसीब में नहीं.
इतना कह कर शोभा गुस्से में कमरे से निकल गई विक्रम ने भी थोड़ी रहत की सांस ली की चलो अब शोभा अगले दो दिन शायद गुस्से में उससे बात भी नहीं करेगी और पापा के वापस आने के बाद हमारी सुहागरात पर मई इसे कैसे भी करके मन hi लूंगा तब तक ये मुझे अब दस्तूरब नहीं करेगी. 10 मं की बातचीत में इस प्रॉब्लम का सलूशन हो गया.
विक्रम को यही लग रहा था की उसने बड़े इंटेलीजेंट तरीके से 10 मं की बातचीत से इस प्रॉब्लम को फिलहाल के लिए सोल्वे कर लिया है पर उसे ये अंदाजा भी नहीं था की 10 मं की ये नार्मल सी दिखने वाली बातचीत उसकी नै नै शुरू हुई शादीशुदा ज़िन्दगी में ऐसा भूचाल लेन वाली थी जो उसकी शादीशुदा ज़िन्दगी की जड़ो को हिला कर रख देने वाला था. हवा में उड़ते तिनको को हम फूक मार कर उडा देते है ये सोचकर की ये एक छोटा सा तिनका हमारा क्या उखड लेगा पर जब यही अनगिनत तिनके एक साथ इकट्ठे हो जाते है तो इन्हे बवंडर का रूप लेने में ज्यादा वक़्त नहीं लगता. इस बातचीत में छुपा एक ऐसा hi बवंडर बड़ी मद्धम गति से हौले हौले उनकी तरफ बाद रहा था बस देखना ये था की क्या इनकी शादीशुदा ज़िन्दगी उस बवंडर का वेग सेहेन कर पाएगी या उस तिनके की तरह तिनको तिनको में बिखर कर रह जाएगी.
वही हवेली में बाकि बची पाछो सहेलियों की ज़िन्दगी भी अपनी अपनी दिशा में आगे बाद रही थी. कल रात नशे की हालत में अपने बाप को अपना पति समझ मनाई गई सुहागरात की ख़ुशी में डूबी शोभा आज रात फिर विक्रम के साथ प्यार की गहराइयो में डूब जाना चाहती थी और इसी बारे में बात करने वो एक बार फिर विक्रम के कमरे में पहुंच गई.
शोभा: विक्रम आज रात भी तुम मेरे कमरे में आओगे न मई इंतज़ार करुँगी तुम्हारा.
विक्रम अब थोड़ा इर्रिटेट हो रहा था हलाकि वो भी शोभा को पसंद करता था पर अपने बाप को धोका भी नहीं देना चाहता था. पर शोभा कुछ सुनने को तैयार hi नहीं थी.
विक्रम: शोभा पापा की वो पूजा पूरी हो जाने दो उसके बाद तो हमारे पास वक़्त hi वक़्त होगा.
शोभा: अरे अभी छुप छुप कर ये सब करने का जो मज़ा है वो तब नहीं होगा. तुम्हारी बेशक कुछ गिर्ल्फ्रेंड्स रही होंगी पर मैंने तुम्हारे अलावा कभी किसीके बारे में नहीं सोचा कॉलेज में किसी लड़के के साथ नहीं घूमी. कॉलेज के बाद सोचा तुम्हारे साथ कुछ प्यार भरे पल बिताउंगी पर हमारी शादी तै हो गई और फटाफट हो भी गई अब दो दिन मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बन लेने दो उसके बाद तो पूरी ज़िन्दगी बीवी hi बांके रहना है.
विक्रम को समाजः नहीं आ रहा था की वो शोभा को कैसे समझाए कल तो जैसे तैसे उसने नशे की गोली देकर काम चला दिया था पर ये रोज़ रोज़ नशे की गोली इस्तेमाल नहीं की जा सकती थी और उसे आज की रात के बाद दो और राते बिना शोभा के करीब जाए कटनी थी इसलिए उसे इस समस्या का कोई सही इलाज खोजना था. वो जनता था शोभा को लड़कियों के छोटे छोटे कपडे कपडे अच्छे नहीं लगते कॉलेज के दिनों में भी उसने कई बार शोभा को ऐसे कपडे गिफ्ट करने चाहे पर शोभा ने हमेशा इंकार कर दिया. हलाकि शोभा साड़ी में भी बेहद सुब्दर लगती थी पर फिलहाल विक्रम को इसी बात में इस समस्या का हल नज़र आया की अगर वो शोभा को ऐसे कपडे पेहेन्ने को फाॅर्स करे तो शोभा कभी नहीं मानेगी तब वो भी इस बात पर अगले दो दिन आसानी से काट लेगा. वो थोड़ी नाराज़ होगी पर पूजा होने के बाद प्यार से उसे मन लेंगे. विक्रम को ये तरीका सही लगा.
विक्रम: तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनने की बात कर रही हो पर गर्लफ्रेंड बनने से पहले ढंग से गर्ल तो बन जाओ. कॉलेज के दिनों में अपना गेटउप याद है ऊपर कुरता नीचे जीन्स लाठर जैकेट लड़की कम लड़का ज्यादा लगती थी और अब जबसे गाँव आई हो बस ये साड़ी जिसमे तुम लड़की कम औरत ज्यादा लगती हो. पहले बॉय बानी रही अब औरत बन गई हो गर्ल तो तुम कभी रही hi नहीं. कितनी बार तुम्हे कहा की थोड़ा खुद को बदलो थोड़ी मॉडर्न बनो मैंने कितनी बार तुम्हे मॉडर्न कपडे गिफ्ट करने चाहे पर तुमने कभी नहीं लिए.
शोभा: उन बदन दिखाऊ छोटे छोटे कपड़ो को तुम मॉडर्न होना कहते हो जिसमे साडी दुनिया के सामने औरत के जिस्म की नुमाइश होती है लोग उसे गन्दी नज़र से देखते है ये मॉडर्न होना है तुम्हारी नज़र में.
विक्रम: अब बाते मत बनाओ साडी दुनिया जहाँ की लड़किया ऐसे कपडे पहनती है पर तुम पेहेन लोगी तो बहुत बड़ी बात हो जाएगी. अपनी फ्रेंड नेहा को देखो वो भी तो पहनती है ऐसे कपडे कुछ उसीसे सीख लो.
शोभा: वाओ तो तुम चाहते हो मई नेहा से सीखू तुम जानते hi कितना हो नेहा को पता है वो किस चैरेक्टर की है कितने लड़को को अपने आगे पीछे घूमती है तुम चाहते मई वैसी हो जाऊ.
विक्रम: बेफिज़ूल की बाते मत करो मई यहाँ किसी के चैरेक्टर पर कुछ नहीं कह रहा वो चैरेक्टर वाइज कैसी है उससे मुझे कुछ लेना देना नहीं मई यहाँ सिर्फ लुक्स और कपड़ो की बात कर रहा. उसका ड्रेसिंग सेंस देखो कितनी हॉट बांके रहती है.
शोभा: मई जैसी हु ठीक हु मुझे कोई ज़रूरत नहीं उसके जैसा बनने की. मई यहाँ तुमसे कितने अच्छे मन से प्यार भरी बाते करने आई थी और तुम मुझे नेहा जैसा बनने को कह रहा. तुम इसी में खुश रहो शायद मैंने hi तुमसे कुछ ज्यादा एक्सपेक्ट कर लिया था. गुड नाईट अब तुमसे बीवी के रूप में hi मिलूंगी शायद गितलफ्रेंड बॉयफ्रेंड बनना हमारे नसीब में नहीं.
इतना कह कर शोभा गुस्से में कमरे से निकल गई विक्रम ने भी थोड़ी रहत की सांस ली की चलो अब शोभा अगले दो दिन शायद गुस्से में उससे बात भी नहीं करेगी और पापा के वापस आने के बाद हमारी सुहागरात पर मई इसे कैसे भी करके मन hi लूंगा तब तक ये मुझे अब दस्तूरब नहीं करेगी. 10 मं की बातचीत में इस प्रॉब्लम का सलूशन हो गया.
विक्रम को यही लग रहा था की उसने बड़े इंटेलीजेंट तरीके से 10 मं की बातचीत से इस प्रॉब्लम को फिलहाल के लिए सोल्वे कर लिया है पर उसे ये अंदाजा भी नहीं था की 10 मं की ये नार्मल सी दिखने वाली बातचीत उसकी नै नै शुरू हुई शादीशुदा ज़िन्दगी में ऐसा भूचाल लेन वाली थी जो उसकी शादीशुदा ज़िन्दगी की जड़ो को हिला कर रख देने वाला था. हवा में उड़ते तिनको को हम फूक मार कर उडा देते है ये सोचकर की ये एक छोटा सा तिनका हमारा क्या उखड लेगा पर जब यही अनगिनत तिनके एक साथ इकट्ठे हो जाते है तो इन्हे बवंडर का रूप लेने में ज्यादा वक़्त नहीं लगता. इस बातचीत में छुपा एक ऐसा hi बवंडर बड़ी मद्धम गति से हौले हौले उनकी तरफ बाद रहा था बस देखना ये था की क्या इनकी शादीशुदा ज़िन्दगी उस बवंडर का वेग सेहेन कर पाएगी या उस तिनके की तरह तिनको तिनको में बिखर कर रह जाएगी.