A wedding ceremony in village - Page 6 - SexBaba
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A wedding ceremony in village

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इधर कमरे में शबाना की ,,., पूरी होने को आ गई थी उसने आँख बंद करे करे hi सर को दे बै घुमा कर ऊपर वाले का शुक्रिया करा और ,,., ऐडा करके उसने जैसे hi आँख खोली वो एक पल के शॉक होकर पीछे को हैट गई क्युकी सामने कुर्सी पर लालू बड़े स्टाइल में अपनी दोनों टांगो को फैलाए अपना लुंड चैन से बहार निकलकर हाथ से सहलाते हुए मुस्कुराता हुआ शबाना को ,,., ऐडा करते देख रहा था. लालू को अचानक से अपने सामने बैठा अपना लुंड सहलाता देख शबाना एकदम शॉक रह गई.

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शबाना: तुम तुम यहाँ क्या कर रहे हो अंदर कैसे आए.

लालू: अरे मुझसे क्या पूछती है तेरी सहेली को बहार जाते देखा तो सोचा अपनी रखैल का हाल चल पूछ औ यहाँ आया तो देखा दरवाज़ा खुला था अंदर आया तो तू अपनी गांड उचकाए बैठी थी मुझे तो लगा की मेरे लिए पहले से गांड ऊपर उठाए बैठी है ताकि तुझे पीछे से पेल दू पर तू तो ,,., पद रही थी तेरी उठे हुए तरबूज़ देखकर मन तो करा पीछे से तेरा उठाकर गांड मार लू फिर सोचा पहले तुझे ,,., ऐडा कर लेने दू.

शबाना: बकवास बंद करो अपनी क्या करने ए हो यहाँ जाओ यहाँ से.

शबाना का इतना बोलना था की एक लात उसके मुँह पर पड़ी.

लालू: साली दो टेक रंडी कल रात तेरी क्या हालत करि थी भूल गई साली अपने मूट से नहलाया था तुझे मेरी पेशाब पि थी तूने कपडे फड़वा के गांड मरवाई थी सर पर रखकर मेरे जूते ले थी 50000 हज़ार दिए थे तुझे एक रात के भूल गई सुबह होते hi बड़ा कॉन्फिडेंस आ गया तेरे अंदर जो मुझसे सवाल पूछ रही है कहा से आया इतना कॉन्फिडेंस अपनी उस रंडी दोस्त नेहा को बता दिया क्या कल रात के बारे में.

एक बार फिर लालू को अपने सामे उग्र रूप में देख शबाना के ज़हन में कल रात की दर्दनाक यादे ताज़ा हो उठी, उसकी आँखों के सामने कल रात का मंज़र फिर सजीव हो उठा जिसे याद करके उसकी ज़ुबान की साडी एक पल में दर में बदल गई. उसने सर घुमा कर दरवाज़े की तरफ देखा शायद इस उम्मीद में की नेहा आ जाए पर दरवाज़े की सिटकनी बंद थी. लालू ने खड़े होकर ज़मीन में गिरी पड़ी शबाना के चेहरे को मुट्ठी में दबोच कर अपनी तरफ घुमाया और अपना मोटा कला बालो से भरा लुंड शबाना के चेहरे पर यहाँ वह घिसने लगा.

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शबाना अपना चेहरा हटाने की भरसक कोशिश कर रही थी पर लालू की पकड़ बहुत मजबूत थी. फिर भी शबाना ने अपनी पूरी ताकत समेत कर दोनों हाथो धक्का देकर लालू को पीछे धकेल दिया जिसके जवाब में लालू ने बस भौंए टेडी कर के शबाना को देखा और शबाना को देखते देखते hi अपनी जेब से अपना मोबाइल निकला और मोबाइल में कुछ करने लगा, शबाना अब भी ज़मीन पर गिरी पड़ी लालू को ये सब करते देख रही थी अचानक लालू ने मोबाइल का फेस शबाना की तरफ कर दिया मोबाइल एक वीडियो अपलोड करने की साइट खुली थी जिसपर शबाना और धामु का रात वाला वीडियो सेलेक्ट था और उस वीडियो को अपलोड करने के लिए बस एक क्लिक की ज़रूरत थी.

लालू ने इशारे में hi शबाना से पुछा की वो ये वीडियो अपलोड करदे. शबाना हाथ जोड़ कर लालू के सामने मिन्नत की मुद्रा में आ गई की वो ऐसा न करे.

लालू: बोल अपलोड करदु तेरा वीडियो.

शबाना: नहीं प्लीज मत करो ऐसा.

लालू: तो चल हाथ बड़ा और मेरे इस झटके कहते लुंड को अपने कोमल कोमल हाथो में पकड़ कर देख.

शबाना रट हुए: नहीं मई ऐसा नहीं कर सकती

लालू: क्यों नहीं कर सकती उस डेड पसली धामु का लुंड तो अपने हाथो में लेकर बहुत मसल रही थी और इस मरदाना लुंड को हाथ में लेने गांड फैट रही है. चल पकड़ साली रुंडी की औलाद पकड़ मेरा लुंड.

शबाना ने कपट हाथो को बढ़ाकर लालू के लुंड को अपने हाथो में थम लिया.

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लालू: आह क्या मुलायम मुलायम हाथ है साली ज़रा अपने हाथ मेरे लुंड की आगे की खाल पर तो चला आगे पीछे कर इसे.

शबाना आँखों में आंसू भरे चुपचाप लालू के लुंड को हाथो में थामे बैठी थी, शबाना की तरफ से कोई प्रतिक्रिया न होती देख लालू का पारा चढ़ गया और लालू ने एक तमाचा शबाना के चेहरे पर रसीद कर दिया.

लालू: साली तेरे हिंजड़े मुसलमान पति की तरह खतना कराया हुआ लुंड नहीं है असली खालिस बिना कटा ***** लुंड है कभी देखा है तेरे बाप भाई चाचा फूफा जो भी तुझे छोड़ते होंगे सबके लुंड कटे हुए होंगे तूने तो कभी लुंड के आगे की खाल देखि hi नहीं होगी. देख ले एक ***** ठाकुर का मूसल लुंड है तेरे जैसी मुसलमान औरतो को बिस्तर पर रगड़ने के लिए मालिश करके इतना सख्त बनाया है. चल भें की लोदी मसल जल्दी नहीं तो जेरी जवानी का दर्शन साड़ी दुनिया को करता हु अभी.

लालू की ये धमकी शबाना के लिए काफी थी उसके हाथ लालू के लुंड पर हौले हौले चलने लगे वो एक फर्स्ट टाइम की तरह बस खानापूरी करने के लिए लालू के लुंड पर हाथ फिरा रही थी.

लालू: साली कुटिया की बच्ची हाथो में जान नहीं है क्या साली चिकन मटन कहती होगी इतना हत्ता कट्टा शरीर बना रखा है लुंड मसलते वक़्त ऐसा लग रहा है हाथो में जान hi नहीं है. चल ढंग से रगड़ खाल आगे पीछे होनी चाहिए वर्ण अभी तेरी इज़्ज़त का चबूतरा बनता हु. चल हाथ चला रुंडी चला हाथ ज़ोर ज़ोर से.

लालू की उग्र होती आवाज़ ने शबाना को खौफ से भर दिया था और उसने अपने हाथो को तेज़ तेज़ लालू के लुंड पर चलना शुरू कर दिया. शबाना के तेज़ तेज़ चलते हाथो ने लालू के लुंड को आकर बढ़ाने पर मजबूर कर दिया और जल्द hi लालू का लुंड अपने विकराल रूप में शबाना की आँखों के सामने था. अपने लुंड के पूर्ण आकर में आ जाने के बाद लालू ने शबाना के हाथ रुकवा दिए और अपने लुंड के आगे के सुपडे से शबाना के होंठो पर दस्तक देने लगा. शबाना अपना चेहरा इधर उधर करने की कोशिश कर रही थी पर लालू तो जैसे आज शबाना से लुंड चुसवाने का सोच कर आया था. शबाना के बार बार चेहरा घूमने ने एक बार फिर लालू को आप खोने पर मजबूर कर दिया.

लालू: साली मादरचोद बेहेन की लोदी क्या ड्रामा कर रही है कल साली मेरा मूट पि गई आज लुंड मुँह में लेने बड़ी पाकीज़ा बन रही है. चल मुँह खोल, खोल नहीं तो दुबारा नहीं कहूंगा खोल जल्दी.

लालू शबाना गन्दी से गन्दी गालिया दे रहा था जिन्हे सुन कर hi शबाना को खुद पर घिन आ रही थी अब और गली सुनने की शबाना में हिम्मत नहीं थी और लालू रुकने वाला नहीं था उससे किसी दया की उम्मीद करना बेकार था वो जो करने आया था करके hi मानेगा इसलिए शबाना ने भी अपना कलेजा मजबूत कर लिया और अपना चेहरा स्थिर करके अपनी आँखे बंद कर्ली. शबाना को हथियार डालते देख लालू के होंठो पर भी मुस्कान आ गई वो समझ गया की उसने इस ज़हीन पाक '. महिला को बेज़्ज़ती में इस मुकाम तक ला दिया था की वो अब और विरोध करने की हिम्मत नहीं कर पाएगी. लालू अपना लुंड शबाना के होंठो पर फिरने लगा पर शबाना के होंठ अब भी बंद थे उसकी सासे तेज़ तेज़ चल रही थी उसने आज तक अपने पति का भी लुंड मुँह में नहीं लिया था और आज एक गैर '. मर्द उसकी मर्ज़ी के खिलाफ उसके मुँह में अपना लुंड दाखिल कर रहा था.

लालू: चल मुँह खोल मुँह में ले मेरा लुंड और खबरदार इसे दातो से कटा पहले hi आगाह कर देता हु कोई भी ऐसी वैसी हरकत करने की सोची भी न तो अपने माँ बाप और बहनो के बारे में सोच लेना. चल अब टाइम पास मत कर मुँह खोल जल्दी.

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शबाना ने कलेजा मजबूत करके बड़े भरी मन से अपने होंठो को हल्का सा खोला भर hi था की लालू पूरी ताकत के साथ अपना लुंड शबाना के मुँह में दाखिल कर दिया. लुंड के शबाना के हलक में अंदर तक उतर गया.

लालू: माँ की छूट भोसड़ीवाली क्या गरम मुँह है तेरा साला लगता है दो मिनट भी नहीं संभल पाउँगा ये गरमी.

लालू कुछ देर यही अपना लुंड शबाना के हलक तक ठंसे रहा शबाना अपने हाथो को लालू के पेअर पर ज़ोर ज़ोर से पटक रही थी पर उस सांड जैसे शरीर वाले लालू पर उन मुक्को का कोई असर नहीं हो रहा था. शबाना का सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था पर लालू को शबाना की हालत की कोई परवाह नहीं थी उसे बस अपने मज़े से मतलब था. कुछ पल यही अपना लुंड शबाना के मुँह में रखने के बाद लालू ने अपना लुंड शबाना के मुँह से बहार निकला शबाना की आँखों नाक मुँह सब जगह से पानी निकल आया था.

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उसने सपने में भी नहीं सोचा था की एक मर्द इस हद तक जल्लाद हो सकता है. शबाना ने बड़ी मुश्किल से अपना कलेजा मजबूत करा था पर इस पहले अनुभव ने hi उसकी हिम्मत को चकनाचूर कर दिया पर लालू अभी शांत नहीं हुआ था उसने एक बार फिर अपना लुंड मुँह खोल कर खास्ती शबाना के खुले मुँह में दाखिल कर दिया. शबाना ने उसे पीछे धकेलने की कोशिश करि पर उसकी हर कोशिश लालू की ताकत के आगे बेकार थी.

लालू: देख साली ये नौटंकी बंद कर तू जितना ड्रामा करेगी तुझे उतनी hi ज्यादा तकलीफ होगी और अगर चुपचाप बिना किसी ड्रामे के करेगी उतना मज़ा आएगा. बोल और तकलीफ दू तुझे.

शबाना ने न में सर हिला दिया.

लालू: गुड गर्ल चल अब हलके हलके से मेरे लुंड को चूस तूने कल बताया था तेरी सहेली ने तुझे सेक्स की ट्रेनिंग दी तो लुंड चूसना भी सिखाया होगा और अगर नहीं सिखाया तो आज मई सीखा दूंगा. चल अपने होंठो को गोल करके मेरे लुंड को अपने मुँह में आगे पीछे करती रह.

शबाना ने मान लिया था लालू के आगे उसका कोई ज़ोर नहीं चलने वाला है तो हाथ पेअर चलकर कोई फायदा नहीं तो वो अपने होंठो को लालू के लुंड पर आगे पीछे करने लगी. लालू भी अपने हाथ से शबाना के मुँह को आगे पीछे कर रहा था. वो ये तो समझ गया था की ये शबाना के लुंड चूसने का पहला अनुभव है और ये उसकी चूसै में साफ़ झलक रहा था पर फिर भी शबाना के मुँह की गर्मी hi लालू के लिए काफी थी. इस वक़्त उसे लुंड चूसने में माहिर करने का वक़्त नहीं था क्युकी लालू को शबाना के रूम में काफी देर हो चुकी थी नेहा कभी भी आ सकती थी. इसलिए लालू ने शबाना के सर को पीछे से धकेल कर तेज़ तेज़ अपने लुंड पर आगे पीछे करना शुरू कर दिया.

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शाबर के सर पर पड़ा वैल लालू की उत्तेजना को और बड़ा रहा था. उसका लुंड शबाना के मुँह के अंदर hi तेज़ तेज़ झटके खा रहा था वो झड़ने के करीब था और शबाना भी ये बात समझ गई थी और उसने अपना चेरा पीछे हटाने की भरसक कोशिश की पर शबाना की कोशिश के साथ hi लालू ने भी उसके सर पर अपनी पकड़ और मजबूत करदी और एक बार फिर अपना लुंड शबाना के हलक में अंदर तक उतर दिया. और शबाना के मुँह की गहराई तक पहुंचते hi लालू के लुंड ने शबाना के मुँह के अंदर hi उलटी करना शुरू करदी. लालू का सारा वीर्य शबाना के मुँह के अंदर निकल कर उसके हलक से होता हुआ उसके पेट में जा रहा था. जब तक लालू के वीर्य का आखिरी कटरा तक नहीं निकल गया लालू ने अपना लुंड शबाना के मुँह से नहीं निकला.

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सारा वीर्य निकल जाने के बाद लालू ने शबाना के सर पर अपनी पकड़ ढीली करदी और अपना लुंड शबाना के मुँह से बहार निकल लिया. लालू की पकड़ से आज़ाद होकर शबाना ने वही ज़मीन पर थूक थूक कर जितना हो सकता था अपना मुँह में भरा वीर्य बहार थूकने की कोशिश की. लालू झड़ने के बाद आँखे बंद करे अपने मज़े में अलग hi दुनिया में खड़ा था जब वो थोड़ा रॉल्स हुआ तो उसने शबाना को ज़मीन पर अपना वीर्य थूकते हुए पाया.

लालू: साली मैंने अपना वीर्य तेरे मुँह में इसलिए निकला था ताकि तू उसे यहाँ ज़मीन में थूक कर बर्बाद करदे साली इसी वीर्य से बच्चा बनता है और तू मेरे वीर्य की इस तरह बेज़्ज़ती कर रही है इसका सबक तुझे सीखना पड़ेगा ताकि आगे के दिन के लिए तू दुबारा ऐसी हिमाकत करने की सोचे भी नहीं. चल जितना वीर्य तूने अभी ज़मीन में थूका अब जीभ निकल निकल कर चाट चाट कर उसे वापस अपने मुँह में ले.

लालू की ये बात सुन कर तो शबाना की कान सुन्न पद गए उसे अपने कानो पर विश्वास नहीं हुआ.

लालू: चल तेरे इस थूक को और टेस्टी बना देता हु इसमें अपना थूक मिलकर.

लालू ने ज़मीन पर पड़े शबाना के थूक पर खुद भी थूक दिया.

लालू: चल अब चाट जल्दी चाट.

शबाना हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाते हुए: नहीं सॉरी आगे से नहीं करुँगी इस बार माफ़ कार्डो आगे से नहीं करुँगी.

लालू: नौटंकी नहीं तुझे बोलै था मैंने कोई ड्रामा नहीं जो बोलै है चुपचाप वो कर पूरा दिन यही तेरे पास नहीं बैठा रहूँगा मई चल जल्दी चाट.

शबाना हाथ जोड़े लालू से दया की भीक मांग रही थी.

लालू: तू ऐसे नहीं मानेगी तेरा एक वीडियो अपलोड कर hi देता हु तब तेरी अकाल ठिकाने आएगी.

शबाना: नहीं नहीं ऐसा मत करना मई चाटूँगी चाटूँगी मई.

शबाना एक बार फिर ,,., की मुद्रा में झुक कर अपना चेहरा ज़मीन पर पड़े अपने और लालू के थूक के करीब ले आई और आँखों में आसनु भरे हुए अपनी जीभ निकल कर ज़मीन पर पड़ा लालू का वीर्य मिला थूक चाट चाट कर साफ़ करने लगी.

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उसे अंदर से उबकाई सी आ रही थी पर उसे काबू करते हुए ज़मीन चाट रही थी. वो अभी ज़मीन चाट hi थी की इसे अपने वैल पर कुछ पानी गिरता हुआ महसूस हुआ जो उसके गालो से बेहटा हुआ ज़मीन पर आ रहा था. उसने अपना चेहरा घुमा कर देखा और वो शॉक रह गई क्युकी लालू उसके चेहरे उसके वैल पर hi खड़ा खड़ा मूट रहा था. उसने उठने की कोशिश की पर लालू ने अपना मूट रोककर शबाना के चेहरे को अपने जूते से ज़मीन पफ दबा दिया.

लालू: तू फीका फीका थूक चाट रही थी तो सोचा इसे थोड़ा नमकीन बना दू इसलिए इसमें अपनी पेशाब मिला दी चल मई ज़मीन पर मूट रहा हु और तू जीभ निकल निकल कर ज़मीन पर बहती मेरी पेशाब को चाट चाट कर पीयेगी और मेरी पेशाब की एक बूँद भी बर्बाद नहीं जनि चाहिए. जब मई आया था तो तू ,,., ऐडा कर रही थी तो ये समझ ले तुझे तेरी ,,., का फल मिल गया. उस वक़्त तू ,,., में झुक कर दुआ मांग रही थी अब तू ,,., में झुक कर मेरा मूट पिएगी. चल जल्दी कर जल्दी जल्दी काम ख़तम कर मुझे बहार भी जाना है चल जल्दी चाट मेरा मूट.

लालू अब भी शबाना के सर को अपने जूते से ज़मीन पर दबाए था और शबाना का चेहरा ज़मीन पर बहती लालू की पेशाब से गीला हो चूका था. शबाना जानती थी बिना अपनी बात मनवाए लालू यहाँ से जाएगा नहीं और उसकी बात मैंने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं है. तो उसने अपनज जीभ निकल कर ज़मीन पर बहती लालू मि पेशाब को भी चेतना शुरू कर दिया. शबाना को अपना मूट छत्ते देख लालू ने उसके सर से अपना जूता हटा लिया और अपने लुंड से धीमे धीमे पेशाब की धार नीचे गिरना शुरू करदी जो शबाना के वैल को भिगोती हुई ज़मीन तक जा रही थी. पर शबाना ने भी अपने हालात से समझौता कर लिया था और वो कुटिया की तरह जीभ निकल निकल कर ज़मीन पर गिरती लालू को पेशाब को चाट चाट कर साफ़ कर रही. जिस मुद्रा में कुछ देर पहले उसने ,,., पड़ी थी अब उसी मुद्रा में झुके हुए वो एक आदमी की पेशाब चाट रही थी. लालू ने अपनी साडी पेशाब वही कमरे की फर्श पर खली करदी और शबाना ने चाट चाट कर लालू की पेशाब का कटरा कटरा पी लिया.

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शबाना आँखों में आंसू भरे वही लालू की पेशाब से गीली हुई ज़मीन पर बैठी थी.

लालू: वाह साली तू तो सचमुच कुटिया बन गई कुटिया की तरह चाट चाट कर क्या फर्श साफ़ करा है. कल की बजाए आज तुझे इस तरह पेशाब पिलाने का अपना अलग मज़ा है. चल अब अभी मई चलता हु तू भी खुद को अच्छी तरह से साफ़ कर लेना और कमरे को भी अच्छे से साफ़ कर देना वर्ण पेशाब की बदबू से महेकता रहेगा. अब मई रात में आऊंगा कल रात की तरह पर घबरा कल रात की तरह तेरा बंग नहीं करूँगा न अभी की तरह तुझे अपना मूट चटवाऊंगा आज रात को बड़े प्यार से तेरे साथ सुहागरात मनाऊंगा. पर मेरी एक शर्त है तू उस तरह तैयार होना जैसे निकाह के बाद अपने पति के लिए तैयार हुई थी एक मुसलमान औरत की तरह hi तैयार होना आज रात मई तेरा शौहर बन कर आऊंगा और तुझे अपने बच्चे की माँ बनाऊंगा. यही चाहती है न तू तो आज रात तेरी ख्वाहिश पूरी कर दूंगा बस जैसे बताया है वैसे तैयार रहना और मुझे गुस्सा मत दिलाना. मुझे खुश रखेगी तो तू भी खुश रहेगी. चल चलता हु रात में मिलूंगा और है जाते जाते तुझे एक बार और याद दिला दू की ये सब बहार किसी को पता नहीं चलना चाहिए खासकर तेरी सहेली नेहा को वर्ण तू जानती है मई क्या करूँगा जानती है न.

शबाना ने हां में सर हिला दिया.

शबाना को अपने हुक्म का गुलाम देख कर लालू मुस्कुराता हुआ सिटकनी खोल कर दरवाज़े के बहार निकल गया. शबाना फूट फूट कर रोना चाहती थी पर वो इस कदर मजबूर थी खुल कर चिल्ला चिल्ला कर रो भी नहीं सकती थी इस दर से की कही कोई उसका रोना सुन न ले. वो वही पेशाब से गीली ज़मीन पर सर रख कर लेट गई और कुछ पल यही ज़मीन पर लेती रही और मन hi मन उपरवाले से ये सवाल कर रही थी की आखिर उसकी ,,., में क्या कुमी रह गई जो उसका उसे ये फल मिला. वो इस क़दर अंदर से टूट चुकी थी की अब ज़मीन से आती पेशाब की बदबू से भी उसे कोई फ़र्क़ नहीं पद रहा था. कुछ पल बाद उसे महसूस हुआ की दरवाज़ा खुला है और किसी भी पल नेहा वापस आ सकती है और इस कमरे की हालत देख कर वो दस सवाल पूछेगी और फिलहाल वो उसे कुछ बताने की हालत में नहीं है. इसलिए उठ कर सबसे पहले शबाना ने दरवाज़ा बंद करा फिर कमरे की फर्श को गीले कपडे से अच्छी तरह साफ़ करा. फर्श साफ़ करते हुए उसे खुद पर घिन आ रही थी क्युकी अभी कुछ देर पहले इसी फर्श को उसने जीभ से छठा था. फर्श साफ़ करके उसने कमरे में सेंट छिड़क दिया ताकि कमरे से पेशाब की बदबू चली जाए फिर बाथरूम में जाकर शावर ों करके उसके नीचे बैठकर अपनी इस बुरी हालत की वजह सोचने लगी की क्या उसकी गलती इतनी बड़ी की उपरवाले ने उसे सजा देने के लिए लालू जैसा हैवान भेज दिया.

वो काफी देर तक शावर के नीचे यही बैठी सोचती रही और उस दिन को कोसती रही जब उसने नेहा की बात मानकर धामु को सडके करने की कोशिश करि थी पर अब पछताए हॉट क्या जब चिड़िया चुग गई खेत. क्युकी जब उसे सही गलत में चुनाव करना था तब उसने एक गलत रास्ता चुना और लालू के रूप में उस गलती का एक भयंकर परिणाम उसके सामने था जिससे निकलने का फिलहाल उसे कोई रास्ता समझ नहीं आ रहा था सिवाए इसके की वो बचे कुछ दिन चुपचाप लालू की बात मान ले तो शायद यहाँ से जाने से पहले लालू उसके सरे वीडियो डिलीट करदे. शबाना में अब भी उपरवाले में यकीन कायम था और वो दुआ कर रही थी की वो उसे लालू नाम की इस मुसीबत को सहने की छमता दे पर देखना था लालू अभी हुए किस हद तक गिरता था और शबाना को कितना ज़लील करता था.
 
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हवेली के उस कमरे में ,,.,ा पड़ती शबाना के साथ लालू ने फिर एक बार ज़लालत की नै इबारत लिखी थी और दूसरी तरफ इस ज़लालत में शबाना को झोकने वाली नेहा इस बात से अनजान अपनी फैंटाइस की एक अलग hi दुनिया में खोई हुई फिलहाल वो पार्सल लेने और उस रसोइये रामु से मिलने किचन की तरफ जा रही थी. किचन के बहार hi एक डस्टबिन रखा था नेहा को याद आया की बाथरूम में भी उसे पार्सल डस्टबिन में मिला था उसने डस्टबिन खोल कर देखा तो उसे स्ट्रेंजर का पैकेट मिल गया. फिर नेहा ने किचन के अंदर खिड़की से झाका वो एक बड़ा सा हॉलनुमा कमरा था जहा हर तरफ खाना बनाने का सामन भरा था और किचन में इस वक़्त रामु काका अकेले थे इसलिए नेहा मौका का फायदा उठाते हुए किचन में घुस गई और सीधे रामु के पास पहुंच गई. रामु एक गन्दी सी बनियान और धोती पहने एक टेबल के पीछे खड़ा टेबल पर राखी गैस पर गरम गरम पूड़िया सेक रहा था. नेहा को अचानक से अपने सामने देख रामु चौंक पड़ा पर वो तुरंत समझ गया की नेहा उसके पास क्यों आई है क्युकी छोटू के मुँह से वो नेहा की सारा कारस्तानी सुन चूका था.

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रामु: क्या हुआ मेमसाब आप यहाँ कैसे खाना तो हवेली के हॉल में लगा है यहाँ तो हम गरमा गरम पूड़िया सेक रहे थे. आप पूड़ी लेने आई है जाइये मई पूड़ी सकते hi हॉल में पहुँचता हु.

नेहा: मुझे तुमसे कुछ बात करनी है अकेले में.

रामु मुस्कुराते हुए: आँख में पट्टी बांध के करोगी या बिना पट्टी के.

नेहा समझ गई रामु का इशारा किस तरफ है.

नेहा: मई जानती हु तुम्हे छोटू ने सब बता दिया है पर तुम ये बात किसीको नहीं बताओगे.

रामु: और ऐसा मई क्यों करूँगा.

नेहा: लोग तुम्हारी बात क्यों मानेगे और आइए भी लोगो को बताकर तुम्हे क्या मिल जाएगा.

रामु: ये गाँव है मेमसाब आपका शहर नहीं और वैसे भी जैसे खुले खुले आप कपडे पहनती हो लोग वैसे भी आपके बारे में तरह तरह की बात करते है तो सब मानेंगे. और बताकर मुझे कुछ नहीं मिलेगा तो छुपकर क्या मिल जाएगा.

नेहा रामु की बनियान के साथ खेलते हुए: क्या पता चुप रहने का क्या इनाम मिल जाए.

रामु: ये गिफ्ट क्या मेरे लिए ले है चुप रहने के बदले.

नेहा: नहीं ये तो तुम्हारे लिए नहीं ले पर क्या पता इससे भी कुछ अच्छी चीज़ मिल जाए.

नेहा और रामु बात कर hi रहे थे की तब तक दो रामु की काम करने वाली महिला रसोइयों के बात करते हुए किचन की तरफ आने की आवाज़ सुनाई दी जिसे सुन रामु एकदम से हड़बड़ा गया क्युकी बेशक रात में वो छोटू का शोषण करता था पर दुनिया के सामने उसकी इमेज बड़ी पाक साफ़ थी और जब इंसान के मन में चोर होता है तो उसे जवाब नहीं सूझता इसलिए जब वो औरते नेहा को उसके साथ देखेंगी तो वो क्या जवाब देगा उसे समझ नहीं आ रहा था. उसने नेहा को छुपने को कहा.

रामु: वो खाना बनाने वाली औरते आ रही है आप कही छुप जाओ.

नेहा: कहा छुपु यहाँ कही छुपने की जगह कहा है. और मई उन्हें कुछ भी कह दूंगी.

रामु: नहीं नहीं आप छुप जाओ वर्ण वो बात का बतंगड़ बना देंगी एक काम करो आप इस टेबल के नीचे छुप जाओ सामने से टेबल बंद है और वो टेबल के इस तरफ नहीं आएंगी तो वो आपको देख नहीं पाएगी.

नेहा: ठीक है मई छुप जाती हु.

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नेहा वही टेबल के नीचे छुप गई टेबल की खुली तरफ रामु खड़ा था और दूसरी तरफ से लकड़ी लगी थी इसलिए दूसरी तरफ से नेहा को कोई नहीं देख सकता था. कमरे में आई दो महिला रसोइया रामु से बात करने लगी.

औरत: काका पूरी थोड़ी कम पद गई कहा है गरम गरम पूरी सेक कर लाओ थोड़ा आता और माड़ ले.

रामु पकडे जाने के दर से टेंशन में: हम्म माड़ लो.

औरते वही ज़मीन पर बैठ कर आता माड़ने लगी और टेबल के इस तरफ खड़ा रामु कड़ाई में तेल गरम करने लगा पर उसका ध्यान टेबल के नीचे छुपी नेहा पर भी था की कही नेहा की मौजूदगी का एहसास उन औरतो को न हो जाए वर्ण उसकी बानी बनाई इज़्ज़त मिटटी में मिल जाएगी. पर नेहा तो यहाँ कुछ और hi सोच कर आई थी. रामु काका टेबल के एक तरफ खड़े औरतो से बात कर रहे थे ताकि उन्हें उनके हाव भाव से शक न हो की तभी उन्हें अपनी धोती पर एक हाथ महसूस हुआ.

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रामु जनता था की ये नेहा hi है पर सामने बैठी वो औरते उसे hi देख रही थी इसलिए वो नीचे देखने की हिम्मत नहीं कर प् रहा था. कुछ देर यही रामु की धोती को अपने हाथो से सहलाने के बाद नेहा ने हाथ वापस हटा लिए. रामु समझ रहा था की नेहा बस उसे थोड़ा तैसे कर रही थी पर रामु अब तक ये नहीं जनता था की नेहा किस खूबसूरत बाला का नाम है और वो यहाँ थोड़े से वक़्त में कैसे कैसे कारनामो को अंजाम दे चुकी है कितने मर्द उसके नाम ले लेकर हर रात मुठ मार रहे है.

नेहा की तरफ से कोई हरकत होती न देख रामु फिर उन औरतो के साथ बातो में मशगूल हो गया. पर अचानक उसे अपनी धोती के अंदर अपनी नंगी जांघ के बालो पर नेहा के हाथ की छुअन महसूस हुई नेहा ने रामु की धोती को थोड़ा ऊपर करके अपना हाथ रामु की धोती अंदर दाल दिया. नेहा को टेबल के उस तरफ बैठी उन औरतो की आवाज़े सुनाई दे रही थी और रामु के पैरो की कपकपाहट दिखाई दे रही थी जो उसके अंदर की नौघटिनेस्स को और भड़का रही थी. नेहा अपने हाथ को ऊपर बढ़ाते बढ़ाते रामु के पटरे वाले जांघिये तक पहुंच गई और कुछ देर यही अपने हाथ को वह रोके हुए रामु की टांग को सहलाती रही.

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पर कुछ देर बाद नेहा ने अपना हाथ रामु के जांघिये के अंदर दाल दिया और रामु की जांघ से रगड़ कहते हुए अपनी हथेली रामु के लुंड तक पंहुचा दी, और रामु के लुंड को अपनी हथेली में भर लिया पर उसे लुंड की बजाए बालो का गुच्छा कहना ज्यादा सही रहेगा. उन बालो को महसूस करके ऐसा लग रहा था जैसे शायद hi कभी उन्हें कटा गया होगा. रामु को इस वक़्त समझ नहीं आ रहा था की वो नेहा के हरकतों पर कैसे रियेक्ट करे उसे नेहा की हरकतों में मज़ा भी आ रहा था और पकडे जाने का दर भी वो नेहा की हरकतों का मज़ा भी लेना छह रहा था और पकडे जाने के दर से रोकना भी छह रहा था. क्युकी अभी पकडे जाने पर छोटू वाली बात खुलने का भी दर था.

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रामु की कपकपाती टांगो को देख नेहा ने रामु के लुंड को अपने हाथो में भरकर मसलना शुरू कर दिया. वो मर्दो को उत्तेजित करने के अपने अनुभव का यहाँ बखूबी इस्तेमाल कर रही थी. रामु के लुंड का अकार बढ़ता जा रहा था और उसकी उत्तेजना भी वो टेबल के एक तरफ खड़ा खड़ा hi गहरी गहरी साँसे ले रहा था. उसने अपना एक हाथ नीचे करके धोती के ऊपर अपने जांघिये के अंदर घुसे नेहा के हाथ को अपने हाथो में कास कर थम लिया. नेहा की हस्तमैथुन की वजह से उसका लुंड पूरी तरह से उत्तेजित हो चूका था उसकी आँखे बंद थी और मुँह खुला था. जब आता माद्ति उन औरतो की नज़र रामु पर पड़ी तो उन्हें मुँह खोले आँखे बंद करे चुपचाप खड़ा रामु बड़ा अजीब लगा.

औरत: काका क्या हुआ ऐसे मुँह खोले खड़े खड़े क्यों सो रहे हो कोई तकलीफ है क्या.

औरतो के अचानक से यु बोल पड़ने से रामु चौंक पड़ा और नेहा के हाथो पर उसकी पकड़ ढीली पद गई.

रामु: आ हां आ नहीं नहीं तो कुछ भी नहीं हुआ मुझे क्या होगा मई एकदम ठीक हु तुम लोग जल्दी जल्दी अपना काम करो.

रामु को यु कपकपाता देख नेहा की हसी निकल पड़ी पर अपने रामु के हाथो की पकड़ ढीली हो जाने की वजह से उसने दुबारा अपने हाथो को रामु के बालो से भरे लुंड पर चलना शुरू कर दिया.

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नेहा को रुकता न देख रामु भी फिलहाल मजबूर था और आँखे बंद करके वो अपने सामने बैठी औरतो को हिंट दे चूका था इसलिए दुबारा आँख बंद करने की गलती भी नहीं कर सकता क्युकी अगर वो उठ कर इस तरफ आ जाती तो टेबल के नीचे छुपी बैठी नेहा को देख लेती और फिर क्या पता नेहा उन्हें छोटू के बारे में बता देती. इसलिए रामु आँख खोले हुए चेहरे पर अपने उत्तेजना को दबाए हुए एक फेक स्माइल के साथ खड़ा था ताकि औरतो को कुछ अजीब न लगे. 5 मिनट तक नेहा लगातार अपने हाथो को रामु के लुंड पर आगे पीछे चलती रही रामु ने भी अपने लुंड पर एक जवान खूबसूरत लड़की का हाथ बड़े दिनों बाद महसूस किया था इसलिए वो भी नेहा के हाथो की कोमलता और उत्तेजक रगड़ को ज्यादा देर बर्दाश्त न कर सका और उसके लुंड ने नेहा के हाथो में hi अपना वीर्य उगलना शुरू कर दिया.

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नेहा की पूरी हथेली रामु के वीर्य से भर गई थी पर रामु को वीर्य निकलता महसूस करके भी नेहा ने अपना हाथ उसके जांघिये से बहार नहीं निकला और रामु के लुंड को पूरी तरह शिथिल होने तक रामु के लुंड को अपने हाथो में भरे रही. रामु के इर्द गिर्द मौजूद बालो का गुच्छा भी उसके वीर्य से गीला हो गया था.

अपनी उत्तेजना को दबाने की भरसक कोशिश करता रामु भी वीर्य निकलने की उत्तेजना को छुपा नहीं पाया और वही टेबल को कास कर पकड़ कर गहरी गहरी साँसे लेता रहा. रामु का लुंड पूरी तरह शिथिल हो जाने के बाद नेहा ने भी अपना हाथ उसके जांघिये से बहार निकल लिया. नेहा ने अपने हाथ में भरा रामु का वीर्य देखा जो उम्र की वजह से उतना गाड़ा नहीं था जितना जवान मर्दो का होता है पर फिर भी काफी सारा था शायद आज रामु के हद से ज्यादा उत्तेजित हो जाने की वजह से. नेहा ने रामु के वीर्य से पूरी तरह गीले अपने हाथो को रामु की hi धोती से पोछकर अच्छी तरह साफ़ कर दिया और सारा वीर्य रामु की धोती पर लगा दिया. रामु का जांघिया और उसकी धोती दोनों hi अपने hi वीर्य से गीली हो गई थी और जहा गीली नहीं हुई था वह नेहा ने अपना हाथो पर लगा वीर्य पोछकर गीला कर दिया था. उन औरतो ने तब तक पूड़िया बेल दी थी रामु ने फटाफट उन्हें सेक दिया जिसके बाद वो औरते पूड़िया लेकर वापस खाने वाले हॉल की तरफ चली गई. उनके जाने के बाद नेहा भी टेबल के नीचे से बहार निकल आई और मुस्कुराते हुए रामु काका के सामने कड़ी हो गई. रामु ने नज़रे झुका कर अपनी वीर्य से गीली धोती को देखा उसे अंदर से काफी गीला और चिपचिपा सा महसूस हो रहा था. रामु की गीली धोती देख नेहा की भी हसी निकल गई.

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नेहा को हस्ता देख रामु ने उसकी कमर में हाथ दाल कर अपनी तरफ खींच कर अपने सीने से लगा लिया और अपने नेहा के होंठो से जोड़ और पागलो की तरह उसे किश करने लगा. रामु की इस जंगली किश में नेहा को उस स्ट्रेंजर की बड़सम वाली किश का एहसास हो रहा था. नेहा के दिमाग कई सवाल चलने लगे की कही रामु काका hi वो स्ट्रेंजर तो नहीं इनके शौक भी बड़सम वाले है पर नहीं उस स्ट्रेंजर के लुंड के इर्द गिर्द झात के बाल का इतना गुच्छा नहीं था ये वो नहीं है. रामु अब भी नेहा को चूमे जा रहा था नेहा ने पूरी ताकत लगाकर रामु को पीछे धकेल दिया. रामु फिर उसकी तरफ बड़ा पर नेहा ने उसे हाथ के इशारे से रुकने को कहा.

नेहा: नहीं अभी नहीं अगर फिर कोई आ गया तो दुबारा तुम्हे मुझे छुपाना होगा और तो तुम्हारी गीली धोती भी साडी कहानी बया कर रही है.

रामु: फिर कब.

नेहा: धैर्य रखो धैर्य का फल मीठा होता आज तो बस ट्रेलर दिखाया है पूरी पिक्चर सही टाइम आने पर दिखा दूँगी.

रामु: और वो सही टाइम कब आएगा.

नेहा: आएगा यहाँ से जाने से पहले ज़रूर आएगा पर उसके लिए तुम्हे मेरी दो बाते माननी होगी.

रामु: कौनसी दो बाते?

नेहा: पहली बात आज के बाद तुम छोटू को कभी परेशां नहीं करोगे बोलो.

रामु: ठीक है मुझे छोटू के बदले में अगर तुम्हारे जैसा मस्त माल मिल जाएगा तो मई उस बच्चे पर टाइम बर्बाद क्यों करूँगा. और दूसरी बात.

नेहा: छोटू ने तुम्हे जो भी बताया उसे तुम अपने तक hi रखोगे.

रामु: है ये भी कोई कहने की बात है.

नेहा: ठीक है तुम मेरी बात मनो तुम्हे इसका इनाम जल्द hi मिलेगा अभी मई जाती हु.

रामु: सुनो इनाम जब मिलेगा तब मिलेगा पर तब तक के लिए एक नज़र उस इनाम के दर्शन तो करा दो.

नेहा समझ गई रामु का इशारा किस तरफ है उसने अपनी स्कर्ट को ऊपर उठा कर अपनी पंतय को अपनी छूट के ऊपर से हटाकर रामु काका को अपनी छूट की फांको के दर्शन करा दिए. नेहा की छूट को देखते हुए रामु का हाथ बरबस hi अपने गीले और सिकुड़े हुए लुंड पर पहुंच गया उसने नेहा की तरफ कदम बढ़ाया पर नेहा ने उसे रोक दिया.

नेहा: जल्दबाज़ी मत करो वैसे भी अभी तुम्हारी साडी गर्मी निकल चुकी है और इस उम्र में दो बार उत्तेजित करने में गड़बड़ हो जाती है तो आज के लिए इतना काफी है. अगर तुम मेरी बात मानोगे तो तुम्हे तुम्हारा ये इनाम ज़रूर मिलेगा ये नेहा का वडा और नेहा अपना वडा कभी नहीं तोड़ती. गोत आईटी

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इतना कह कर नेहा वो गिफ्ट पैक लेकर किचन से बहार निकल गई रामु उसे पीछे से गांड हिला हिला कर जाता हुआ देखता रहा. नेहा वो गिफ्ट पैक लेकर वापस अपने कमरे में आ गई उसे कमरे में शबाना नहीं दिखी उसने सोचा शायद शबाना ,,., पादकफ़ खाना खाने चली गई होगी. उसने वो गिफ्ट पैक अपने सामन में छुपा दिया और कमरे से खाना खाने के लिए निकल गई उसका ध्यान कमरे की गीली फर्श की तरफ गया hi नहीं और न उसे एहसास हुआ की शबाना अब भी बाथरूम में बैठी रो रही थी. नेहा को अंदाजा hi नहीं था कमरे से जाने से लेकर वापस आने के बीच शबाना के साथ क्या हो गया. बाथरूम के अंदर से शबाना ने नेहा की आवाज़ सुनली थी और नेहा शायद उसे खाने वाले हॉल में ढूंढे और वो उससे कुछ सवाल न करे इसलिए नेहा के जाने के बाद शबाना भी अपने आंसू पोछ कर बहार आकर खाने के हॉल की तरफ चली गई.
 
काकातुआ के जंगल

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सूर्यास्त नज़दीक था पोसिएदोन का ट्राइटन लिए सफ़ेद घोड़े पर सवार लखन अपनी मंज़िल की तरफ बड़ा चला आ रहा था. विनीता उस बेहद सुन्दर नीली जलपरी सी पोषक में खुद को सजा सवार के अपने नकली पति के इंतज़ार में उस रस्ते पर hi टकटकी लगाए बैठी थी. वो एक पल ढलते हुए सूरज को देखती तो दुसरे पल उस रस्ते को देखती. पता नहीं लखन सूरज ढलने से पहले वापस आ भी पाएंगे या नहीं यही विचार उसके दिमाग में इस वक़्त चल रहा था. इतनी बेचैनी से तो उसने अपने असली पति का भी इंतज़ार नहीं करा था जितनी बेचैनी से वो लखन का इंतज़ार कर रही थी. हर बीतता पल उसकी बेचैनी को और बड़ा रहा था. अचानक उसे उस खामोश वातावरण में सन्नाटे को चीरती घोड़े के तपो की आवाज़ सुनाई दी और पेड़ो के झुरमुट के बीच से घोड़े की लगाम को थामे तेज़ तेज़ घोडा दौड़ते हुए लखन आते दिखाई दिए.

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लखन को अत देख विनीता के चेहरे पर एक प्रेम भरी मुस्कान आ गई जैसे कोई उसके दिल के बेहद करीब का शिक्षा पुरे दिन के इंतज़ार के बाद वापस आ रहा था जिसके लिए वो इतना सजी सवरी थी. उस ट्राइटन को लेकर लखन पोसिएदोन की उस प्रतिमा के सामने आकर रुक गया.

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और उसकी नज़र नीले रंग के उन कपड़ो में सजी सवरी विनीता पर पड़ी जे एकदम किसी जलपरी के सामान सुन्दर लग रही थी. कल पत्तो के बने वस्त्र वासना और हवस से परिपूर्ण थे पर आज जो वस्त्र विनीता ने पहने थे उनमे उसकी सुंदरता निखार कर सामने आई थी. जिस्म से एकदम चिपके होने की वजह से उसके जिस्म का हर घुमाव हर अंग प्रत्यंग का आकर साफ़ समझ आ रहा था. उसके उभारो की गोलिया उसकी पतली कमर उसकी सुराहीदार गर्दन. लखन कुछ पल के लिए मंत्रमुग्ध सा बूत बना विनीता को एक तक यही देखता रहा. विनीता को लखन का यु खुद को देखना बहुत रोमांचित कर रहा था पहली बार उसके लखन की आँखों में अपने प्रति आदर के अलावा कुछ और भाव दिख रहे थे बेशक ुमने वासना नहीं थी पर प्रेम का हल्का हल्का समावेश भी था. लखन के यु खुद को निहारने ने विनीता को बरबस hi अपनी नज़रे झुकाने पर मजबूर कर दिया. कुछ पल बाद लखन को एहसास हुए की वो इस तरह जिसे देख रहा है वो असलियत में उसकी बीवी नहीं उसकी बहु की ब्याहता सहेली है किसी की बीवी है. और जल्द hi उसे भी अपनी भूल का एहसास हो गया और वो विनीता से अपनी नज़रे हटाकर उस घोड़े से उतारकर ट्राइटन लेकर उस मूर्ति के समीप आ गया.

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उसके बाद अघोरी द्वारा बताए गई विधि के अनुसार विनीता और लखन ने पोसिएदोन (नेप्तुने) और ट्राइटन की पूजा करके विनीता ने उसे उस मूर्ति के हाथो में स्थापित कर दिया. जब विनीता उस ट्राइटन को उस मूर्ति में हाथो में स्थापित कर रही थी तो लखन की नज़र पीछे से उस चिपकी हुई ड्रेस में कैद विनीता के नितम्बो पर पड़ी जिनका आकर उस पोषक में साफ़ दिखाई दे रहा था. विनीता को पीछे से देख लखन के मन में एक पल को विनीता की कल रात बताई गई बाते ताज़ा हो गई जो उसने अपने पति के बारे में बताई थी और उसके मन में बरबस से ये विचार आने लगा की क्या विनीता सच में उसकी पत्नी बन सकती है. पर जल्द hi उसे विचारो पर अफ़सोस हुआ की बिना विनीता की इच्छा जाने ऐसा सोचना भी गलत है भला विनीता अपने से उम्र में दुगनी उम्र के शक्स को पति क्यों बनाएगी. पहले hi वो अपने पहले पति से इस कदर दुःख प् चुकी है अब उस पर अपने विचार ज़ाहिर करना गलत होगा. उस ट्राइटन की स्थापना के साथ नेप्तुने पूजा का दूसरा चरण भी पूर्ण हो गया.

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अब बरी थी नेप्तुने पूजा के तीसरे और अंतिम चरण को पूरा करने की यानि उस गोल्ड फिश को उसकी सही जगह पहुंचने की. विनीता अंदर जाकर उस गोल्डफिश का बाउल उठा लाइ और विनीता और लखन उस बाउल को लेकर उसी नदी की तरफ चल दिए जिसके किनारे उन्होंने कल की रात बीते थी. कल आ चुके होने की वजह से आज उन्हें ज्यादा भटकना नहीं पड़ा और जल्द hi वो उस नदी के समीप पहुंच गए. विनीता ने पुरे दिन उस गोल्डफिश का बहुत अच्छे से ख्याल रखा था और नेप्तुने की उपासना करते हुए उस मछली को उस नदी में प्रवाहित कर दिया. इसके साथ नेप्तुने पूजा का ये अंतिम चरण भी पूरा हो गया. उस मछली को प्रवाहित करने के बाद विनीता लखन वापस चल दिए पर अचानक विनीता का पेअर एक ुचे नीचे पत्थर पर पड़ी और उसका पेअर मुद गया. दर्द के मरे विनीता वही ज़मीन पर बैठ गई लखन ने उसे सहारा देकर खड़ा करने की कोशिश की पर लाख कोशिश के बावजूद विनीता से खड़ा नहीं हुआ जा रहा था. कोई चारा न देख लखन ने विनीता की कमर के नीचे हाथ डालकर उसे अपनी बहो में उठा लिया.

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लखन 7 दिन की अपनी उस नकली दुल्हन को अपनी बहो में थामे अपने घर की तरफ चल पड़ा. यु लखन जी की बहो में विनीता को भी बड़ा अजीब सा लग रहा था. पर ये अजीब बुरा तो नहीं था लखन की बहो में होने के बावजूद आज विनीता को उनकंफर्टबले महसूस नहीं हो रहा था उसे ऐसा hi महसूस हो रहा था जैसे वो किसी अपने की बहो में है जो उसके दर्द उसकी तकलीफ को अच्छी तरह समझता है उसे महसूस करता है. विनीता को लखन की शारीरिक ताकत भी आकर्षित कर रही थी इस उम्र में भी किसी नौजवान से किसी मामले में कम नहीं है किसी तरह मुझे अपनी बहो में उठाए बिना थके चले जा रहे है.

दूसरी तरफ विनीता को अपनी बहो में उठाए लखन अपने अतीत की यादो में खो गया था अपनी शादी की रात अपने फेरो की याद में. लखन ने लव मर्रिज की थी वो अपनी पत्नी से बेइंतिहा प्यार करता था और शादी वाली रात उसने अपनी पत्नी को बहो में उठाकर पेहेर लिए थे. आज विनीता को यु अपनी बहो में उठाए लखन के मन में एक बार फिर वो पल ताज़ा हो गए थे उसे इस वक़्त विनीता में अपनी पत्नी का अक्सा hi नज़र आ रहा था. जिस वजह से वो विनीता को देख कर मुस्कुरा रहा था विनीता को एक पल को समझ hi नहीं आया की लखन जी उसे देख कर यु मुस्कुरा क्यों रहे है. पर अचानक विनीता को अपने नितम्बो पर लखन की हाथ का फिराव महसूस हुआ.

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एक पल के लिए उसे बड़ा गुस्सा आया की लखन जी इस मौका का इस तरह फायदा कैसे उठा सकते है उसे यकीन नहीं हो रहा था की लाख जी ऐसा कर रहे है. अब तक वो लखन जी के बारे में सोचती आ रही थी एक पल में वो सब उसे झूट सा लग रहा था. कुछ पल बर्दाश्त करने के बाद आखिरकार विनीता बोल hi पड़ी.

विनीता: लखन जी ये आप क्या कर रहे है.

विनीता के अचानक आई आवाज़ से लखन जी की सुधबुध वापस आई और उन्हें एहसास हुआ की वो कर रहे थे.

लखन: माफ़ करियेगा मुझे दिल से माफ़ कर दीजियेगा मई कुछ और hi सोच रहा था उसी धोके में..... मुझे माफ़ कर दीजिये प्लीज.

विनीता: कोई बात नहीं कोई बात नहीं वैसे आप क्या सोच रहे थे.

लखन: कुछ नहीं बस अपनी पत्नी के बारे में.

विनीता: बताइये न क्या, बातो बातो में रास्ता काट जाएगा.

लखन: दरअसल मई मंजुला मेरी मेरी पत्नी उसे शादी से पहले से पसंद करता था और मैंने शादी वाली रात उसे इसी तरह बहो में उठा कर अग्नि के सात फेरे लिए थे.

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पुरे गाँव में आज भी उन फेरो की मिसाल दी जाती है. आज पता नहीं क्यों अचानक से वो पल मेरे आँखों के आगे दुबारा आ गए. माफ़ कर दीजिये मेरी बिलकुल गलत इंटेंशन नहीं थी.

विनीता: इतस ok मई समझ समक्ति हु कल जब मई अपने उस पति को लेकर भावुक हो गई जो मुझे प्यार hi नहीं करता तो आप तो अपनी को बहुत प्यार करते थे आपका भावनाओ को मई समझ सकती हु.

बाते करते करते वो कब घर पहुंच गए उन्हें पता hi नहीं चला. लखन में विनीता को अंदर कमरे में बिस्तर पर लिटा दिया और फ़ोन करके अघोरी नेप्तुने पूजा के पूरा हो जाने की जानकारी दे दी.

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लखन: बाबा आपकी बताई विधि के अनुसार हमने नेप्तुने पूजा की साडी विधिया पूरी कर ली. विनीता जी वो नीले वस्त्र धारण कर पोइसिएदोन की प्रतिमा की पूजा करि मई उस मत्स्य मंदिर से वो ट्राइटन लेकर पोसिएदोन की प्रतिमा में स्थापित कर दिया और हमने वो गोल्डफिश भी पानी में वसर्जित कर दी है.

अघोरी: उत्तम आप दोनों थोड़ा भोजन कर ले थोड़ा विश्राम कर ले, यूरेनस पूजा आपको रात्रि में करनी है और उसके बारे में मई आपको विस्तार से कुछ देर बाद बताऊंगा.

लखन: जी बाबा.

अघोरी बाबा के बाद लखन ने खुद हल्का फुल्का भोजन बना विनीता के साथ भोजन करा और विनीता के पेअर की मालिश भी करि. विनीता ने लखन जी की उम्र का लिहाज़ करते हुए उन्हें रोकने की बहुत कोशिश की पर लखन जी नहीं मने. विनीता को इस लखन जी द्वारा अपना ख्याल रखना अंदर hi अंदर अच्छा भी लग रहा था क्युकी आज तक उसके पति ने भी उसका इस तरह ख्याल नहीं रखा था. लखन जी की मालिश से पल भर में विनीता का सारा दर्द दूर हो गया और कब उसकी झपकी लग गई उसे पता hi नहीं चला. लखन भी नीचे ज़मीन पर चद्दर बिछा कर लेट गया और आज विनीता के नितम्ब पर अपने हाथो के स्पर्श को महसूस करते हुए आँख बंद करके लेट गया. वो ये सब नहीं सोचना चाहता था पर विचारो पर किसी का कहा काबू होता है इसलिए न चाहते हुए भी उसके मन में ये विचार आ रहे थे. यही सब सोचते हुए उसकी भी आँख लग गई.

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लखन की कोठी में गरिमा

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सुबह नहाने के बाद गरिमा ने जीतू के साथ जो हलकी फुलकी तैसिंग की थी उसने उसके अंदर की कामुकता को हवा देदी थी. हरिया गरिमे के जिन सोए हे अरमानो को जगा गया था अब वो अरमान किसी नए एक्ससिटेमेंट की तलाश में व्याकुल हो रहे थे और ये एक्ससिटेमेंट उसे जीतू में नज़र आ रहा था. कहते है जब शेर के मुँह में एक बार इंसान का खून लग जाता है तो वो आदमखोर बन जाता है यहाँ कुछ हालत गरिमा की थी उसे भी यहाँ इस अनजान जगह पर अपनी कामइच्छाओ की पूर्ति का एक मौका मिल चूका था और उसमे उसे बहुत मज़ा भी आया इसलिए अब इन बचे हुए दिनों को खुल कर जीना चाहती थी और उसका दूसरा शिकार था जीतू. एक नया नया जवान हुआ लड़का जो न पूरी तरह बच्चा था न सेक्स का अनुभवी. उसका नंगा बदन तो गरिमा पहले hi देख चुकी थी जब वो गरिमा के नाम की मुठ मार रहा था और उसका हथियार का नाप भी गरिमा देख चुकी थी.

जीतू बेशक 18 साल का था पर कद काठी में वो भरपूर मर्द था जो किसी भी औरत को पूरी तरह संतुष्ट कर सकता था. जीतू छोटू दोनों जाबांज की देहलीज़ पर थे जीतू छोटू से की उम्र में बराबर थे. पर छोटू जहा एक बहुत छोटी जगह से था और मानसिक रोयोप से भी इतना परिपक्व नहीं था और सेक्स के मामले में भी पूरी तरह अबोध था इसपर भी रामु काका द्वारा किये जा रहे यौनशोषण ने उसके मन की यौन इच्छाओ को अच्छे से विकसित hi नहीं होने दिया था पर जीतू के साथ ऐसा नहीं था. जीतू जवानी की देहलीज़ पर खड़ा वो लड़का था जिसकी नज़र गाँव में नै नै ब्याह के आई भाभियो पर रहती थी वो नै नै ब्याह के भयभीयो को नंगा इमेजिन करके मुठ मारता था

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और अपने गाँव की नै नै जवान हुई कच्ची उम्र की लड़कियों को नंगा करके छोड़ने के सपने देखता था.

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बस उम्र और अनुभव की कुमी की वजह और पकडे जाने के खौफ के कहते उसकी किसी भाभी या लड़की पर चांस मारने में फटती थी. पर फिलहाल उसकी नज़र अपनी hi कोठी में रुकी गरिमा भाभी पर ख़राब थी और आज सुबह से उसे बिना कपडे के नंगा देख लेने के बाद तो अंदर से पूरी तरह गरम था. उसे किसी भी कीमत में इस वक़्त गरिमा की एक पहनी हुई चड्डी चाहिए थी जिसे अपने लुंड में लपेटकर वो उसमे अपना माल निकल दे. पर गरिमा तो आज कोठी में hi थी और आज हरिया भाई भी नहीं जो उन्हें फिर कही बहार ले जाते और इस बीच उसे गरिमा की चड्डी निकलने का समय मिल जाता.

वो अपने कमरे में नंगा लेता गरिमा को नंगा छोड़ते हुए इमेजिन करके अपने लुंड को हलके हलके मसल रहा था और इसी उधेड़बुन में था की अचानक उसके दरवाज़े पर खत खत हुई. उसे लगा शायद बाबू होंगे किसी काम से आए होंगे पर जैसे hi उसने दरवाज़ा खोला उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा क्युकी दरवाज़े पर उसके बापू नहीं बल्कि गरिमा कड़ी थी वो भी एक सेक्सी सी रेड घाघरा चोली जिसके ऊपर एक पतली सी महीन सफ़ेद चुनरी पड़ी जो बस नाम के लिए गरिमा के उभारो को ढके थी.

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गरिमा को इस तरह अचानक से अपने दरवाज़े पर खड़ा देख जीतू को कुछ समझ नहीं आया. इससे पहले की वी कुछ बोलता गरिमा hi अपनी तरफ से बोल पड़ी.

गरिमा: जीतू क्या कर रहे थे.

जीतू: आ वो मई मई वो कुछ नहीं कुछ भी तो नहीं कर रहा था बस यही खली बैठा था.

गरिमा: तुम बड़े उनकंफर्टबले से लग रहे हो कोई बात है क्या कही आज सुबह कमरे में जो हुआ उसकी वजह से तो नहीं.

जीतू: नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं मई ठीक हु.

गरिमा: देखो आज सुबह जो मेरे कमरे हुआ वो हो गया उसके बारे में तुम ज्यादा मत सोचो और न मेरे साथ बात करने में हिचकिचाना इतस ok. मई समझ सकती हु तुम्हारी हालत को तुम्हे अब मेरे सामने आने में हिचकिचाहट हो रही होगी इसीलिए मई खुद यहाँ आ गई. एंड रिलैक्स सब ठीक है कोई इतनी बड़ी बात नहीं है.

गरिमा की बातो से जीतू भी अब थोड़ा रिलैक्स था वो तो सोच रहा था पता नहीं अब गरिमा उससे बात करेगी भी की नहीं पर यहाँ तो गरिमा खुद उससे बात करने आ गई थी. वो ये सब सोच hi रहा था की गरिमा फिर बोल पड़ी.

गरिमा: अच्छा ये सब छोडो मई सुबह से कमरे में बैठे बैठे बोर हो रही हु चलो न कही घूम कर आते है. बिहारी काका बता रहे थे यहाँ से कुछ दूर पर एक बड़ा पुराण मंदिर है हरिया ने भी बताया था और कहा था वो मुझे ले जाएगा पर उसे अपने गाँव जाना पड़ा तो तुम मुझे ले चलोगे वह.

जीतू: वह वो तो यहाँ से 3 कम दूर है और मेरे पास तो हरिया भाई की तरह मोटरसाइकिल या कार भी नहीं एक साइकिल है बस.

गरिमा: तो क्या हुआ बड़ा टाइम हो गया साइकिल में बैठे हुए वैसे तुम मुझे बिठा के साइकिल चला तो लोगे न.

जीतू: है साइकिल तो चला लूँगा मई तो दो दो लोगो को बिठा कर साइकिल चला लेता हु बार बापू से पूछना पड़ेगा.

गरिमा: तुम उनसे मेरा नाम कह देना की मई ले जा रही हु चलो मई भी चलती हु मेरे सामने वो मन नहीं कर पाएंगे.

जीतू: है आप भी चलो आपके सामने पूछूंगा तो मन नहीं करेंगे.

गरिमा मन hi मन खुश हुई की क्युकी हरिया की अनुपस्थिति में दिन भर से उत्तेजना की आग में जल रही गरिमा ने दिमाग में एक खुराफाती आईडिया सोच रखा था. गरिमा और जीतू अंदर कोठी में बिहारी काका के पास जाने का पूछने आ गए.

जीतू: बापू वो मई मैडम जी को वो पुराने बरगद वाले मंदिर ले जा रहा हु ले जाऊ.

काका: मौसम देख बदल छाडे हुए बारिश भी हो सकती है और तो मैडम जी को इतनी दूर ले जा रहा है.

जीतू: बापू मई नहीं मैडम जी को जाना था वही कह रही थी वो घर में बैठे बैठे बोर हो रही थी तो कह रही थी.

गरिमा: है मेरा मन कर रहा था की कही बहार घूम औ तो इसीलिए मैंने hi जीतू से कहा साथ चलने को.

काका: अच्छा अच्छा मैडम जी मई तो बस इसलिए कह रहा था की कही बारिश न होने लगे.

गरिमा: अरे तो हम कौनसा माँ के बने है की बारिश में पिघल जाएंगे वैसे भी मई तो नदी में गिरने के बाद नहीं पिघली तो इस बारिश के पानी से क्या हो जाएगा. और हम कोशिश करेंगे जल्दी लौट आए.

काका: अच्छा जैसी आपकी मर्ज़ी जाइये पर जल्दी लौट ाइयेगा. और तू जाएगा कैसे.

जीतू: वो अपनी साइकिल ले जा रहा हु.

काका: है साइकिल ले जा और मैडम जी का ख्याल रखना और ये ले मेरा फ़ोन भी लेता जा कोई बात हो तो कोठी के लैंडलाइन पर फ़ोन कर देना.

जीतू: हम्म

इतना कह कर काका को वही छोड़ गरिमा और जीतू वह से निकल गए. जीतू ने अपनी पुराणी साइकिल निकल ली साइकिल डंडे वाली थी और उसमे पीछे की सीट भी टूटी हुई थी.

जीतू: मैडम जी पीछे की सीट निकल गई है आप आगे डंडे पर बैठ जाओगी.

गरिमा: है है क्यों नहीं मई तो वैसे भी अपने भाई के साथ साइकिल के आगे के डंडे पर बैठ कर hi कॉलेज जाती थी. आज दुबारा बचपन की यादे ताज़ा हो जाएगी.

गरिमा बिना देर करे साइकिल के आगे के डंडे पर बैठ गई और ने साइकिल के पड़ले पर पेअर मार कर उसे चलना शुरू कर दिया. साइकिल पर यु बैठे होने की वजह से से गरिमा जीतू एक दुसरे के बेहद नज़दीक थे और गरिमा के जिस्म से आती महक जीतू को साफ़ महसूस हो रही थी. जीतू बड़ा खुश था क्युकी वो तो बस गरिमा की चड्डी की उम्मीद लगाए बैठा था यहाँ तो पूरी की पूरी गरिमा hi उसकी साइकिल के डंडे पर आ गई थी और पड़ले चलने पर जीतू की ताने गरिमा की जांघो में रगड़ रही थी जो जीतू को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थी और उसका साइकिल चलने से ज्यादा ध्यान उस घिसाई पर था. पर जीतू से भी ज्यादा खुश गरिमा थी क्युकी अब जीतू उसके साथ अकेला था और वो गरिमा की आकर्षित है ये तो गरिमा पहले से जानती थी बस अब ज़रूरत थी इस आकर्षण को उत्तेजना में बदलने की ताकि वो अपने अंदर की हवस की इस आग को ठंडा कर सके.

जीतू चुपचाप बिना कुछ बोले बस साइकिल चलाए जा रहा था उसके दिमाग में वही कमरे का दृश्य था और अपनी जांघो पर गरिमा का स्पर्श. एक घंटे साइकिल चलने के बाद गरिमा और जीतू उस शांत सुन्दर मनमोहक जगह पर पहुंच गए. गाँव की आबादी से दूर गंदे मंदार के पेड़ो से घिरा शीतला माता का बड़ा सुन्दर मंदिर बना था. गरिमा और जीतू सीडिया चढ़ते हुए मंदिर पहुंच गए वह देवी माँ का आशीर्वाद लिया कुछ देर मंदिर में टहल कर वह की सुंदरता ऑनर शांत वातावरण का आनंद लिया. मंदिर के पीछे hi एक सुन्दर सा तालाब जो कमल पुष्पों से भरा था और उसमे ढेर साडी बतख तैर रही थी.

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गरिमा: तुम इसे अपने बापू से पूर्ण बर्बाद वाला मंदिर कह रहे थे क्यों यहाँ तो कोई बरगद का पेड़ नहीं लगा है.

जीतू: वो पेड़ यहाँ नहीं इस तालाब के दूसरी तरफ लगा है बहुत पुराण पेड़ है बहुत घाना और विशाल.

गरिमा: तो चलो वह भी चलते है.

जीतू: ठीक है पर वह पैदल जाना होगा ये तालाब के किनारे की ज़मीन पथरीली है न तो साइकिल नहीं चलेगी.

गरिमा: है तो पैदल चलते है.

जीतू: ठीक है साइकिल यही मंदिर में कड़ी कर देते है.

जीतू ने साइकिल वही मंदिर में कड़ी कर दी और उस तालाब के किनारे किनारे उस पुराने बरगद के पेड़ की तरफ चलने लगे. वो अभी आधी दूरी पर hi पहुंचे होंगे की बहुत देर पानी बरसने के आसार दिखा रहे आसमान में बदलो की गड़गड़ाहट शुरू हो गई और पानी की एक बूँद गरिमा के गालो पर आकर गिरी. मंदिर भी काफी पीछे छूट गया था और बरगद का पेड़ भी अभी दूर दिखाई दे रहा था इससे पहले की वो वापस मंदिर लौटने या आगे बढ़ने का फैसला करते तेज़ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई.

जीतू: बारिश तेज़ हो रही वापस मंदिर चलते है वह बारिश बंद होने तक रुकते है.

पर गरिमा के दिमाग में तो कुछ और hi था गरिमा: मंदिर भी दूर है वह तक पहुंचते पहुंचते भी भीग जाएंगे और भीग तो वैसे भी जानेगे और बारिश पैट नहीं कब तक बंद हो तो आगे बरगद के पेड़ तक hi चलते है वही पेड़ के नीचे बैठ लेंगे.

जीतू: चलिए ठीक है.

गरिमा और जीतू आगे बाद गए. बारिश लगातार तेज़ होती जा रही थी और छुपने का कोई ठिकाना नहीं था ज़मीन भी काफी पथरीली थी तो वह तेज़ तेज़ चला नहीं जा सकता था. तेज़ हो रही बारिश में गरिमा और जीतू दोनों पूरी तरह भीग चुके थे अचानक एक तेज़ हवा का झोका आया और गरिमा के सीने को थोड़ा बहुत hi सही पर ढके हुए वो अंचल हवा में उड़ गया और हवा के बहाव के साथ तालाब में गिर कर काफी दूर तक चला गया अब उसे वापस पाना मुश्किल था इसलिए उसे वही छोड़ वो आगे बढ़ते गए कुछ hi दूर पर उन्हें बरगद का पेड़ दिखने लगा वो सच में काफी बड़ा और घाना पेड़ था.

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कुछ hi पल में दोनों उस पेड़ के नीचे पहुंच गए उसकी जड़ो को देख कर लग रहा था की ये पेड़ सच में काफी पुराण है. पेड़ के नीचे उन्हें बारिश में भीगने से थोड़ा सुकून था पर अब भीगने को कुछ बचा भी नहीं था वो पहले hi पूरी तरह भीग कर तरबतर हो चुके थे. जीतू ने नज़र उठाकर एक नज़र गरिमा को देखा तो उसके दिल की धड़कने बुलेट की रफ़्तार से चलने लगी. एक तो गरिमा की छाती वैसे hi काफी बड़ी बड़ी थी उस पर भी हरिया की बीवी की छोलिया भी उनके हिसाब से काफी टाइट थी जिनमे गरिमा की छाती की कसावट और उभर आती थी और हर बार की तरह शायद आज भी गरिमा गरिमा अंदर ब्रा नहीं पहने थी उसके बाद जो अंचल उसके उभारो को थोड़ा बहुत ढके था वो भी हवा में उड़ गया और रही सही कसार इस मूसलाधार बारिश ने पूरी करदी जिनमे भीग जाने के कारन वो पहले से टाइट ब्लाउज गरिमा के स्तनों पर पूरी तरह चिपक गया था और ब्रा की गैरमौजूदगी में गरिमा के स्तनों के ऊपर मौजूद निप्पल की वो छोटी छोटी डॉट उस बारिश में भीगे ब्लाउज के अंदर से अपनी मौजूदगी का साफ़ साफ़ एहसास करा रही थी.

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बारिश के साथ चलती ठंडी ठंडी हवाओ के साथ गरिमा की सासे तेज़ तेज़ चल रही थी जिस वजह उस उसकी छाती भी ऊपर नीचे हो रही थी. जीतू छह कर भी उनसे अपनी नज़रे नहीं हटा प् रहा था उसके अंदर उत्तेजना की लहरें हिलोरे खा रही थी और इसी उत्तेजना में उसका हाथ खुद बा खुद अपने लुंड पर पहुंच गया और वो आहिस्ता आहिस्ता पंत के ऊपर से hi अपना लुंड हल्का हल्का मसलने लगा अब तक गरिमा सामने हो रही बारिश पर था अपने गद्रे बदन को निहार रहे जीतू पर नहीं. यु तो बारिश का पानी जोरोशोरों से भड़कती को आग भी ठंडा कर सकता था पर फिलहाल तो इस पानी ने जीतू के अंदर उत्तेजना के शोलो को भड़का दिया था और उत्तेजना उन्हें किस नतीजे पर ले जाने वाली थी ये देखने वाली बात थी.
 
काकातुआ के जंगल

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कुछ घंटे के आराम के बाद विनीता और लखन उठ गए. शाम और रात के बीच का समय था, उठने के बाद लखन ने अघोरी बाबा को फ़ोन करा ताकि वो यूरेनस पूजा के बारे विस्तार से बता सके.

लखन: बाबा हमने आराम कर लिया अब अगर आप यूरेनस पूजा के बारे में बता देते तो हम उसकी तैयारी कर लेते.

अघोरी: ठीक है फ़ोन का स्पीकर ों करलो ताकि तुम और विनीता एक साथ मेरी बात को सुन लो.

लखन ने फ़ोन का स्पीकर ों कर दिया और विनीता लखन अघोरी बाबा के बोलने का इंतज़ार करने लगे.

अघोरी: मैंने स्पीकर इसलिए ों करवाया क्युकी इस पूजा की जो विधि है वो शायद तुम अपने मुँह से विनीता को बता नहीं पाओगे.

लखन ने बड़े असमंजस के साथ विनीता को देखा: ऐसा क्यों बाबा मई क्यों नहीं बता पाउँगा.

अघोरी: अब तक तुमने जिन 5 ग्रहो की पूजा करि है वो यूरेनस पूजा के सामने कुछ भी नहीं है.

अघोरी के इन अल्फाज़ो ने विनीता के दिल की धड़कनो को और बड़ा दिया. अब तक की पूजा में hi विनीता पत्तो की ड्रेस पेहेन चुकी थी खुले में नंगे होकर नाहा चुकी थी अधनंगी हालत में लखन की गोड़ में बैठ चुकी थी एक पूरी ठंडी रात उनके आलिंगन में गुज़र चुकी थी और अघोरी कह रहा था ये सब यूरेनस पूजा के सामने कुछ भी नहीं ऐसा क्या करवाने वाले थे अघोरी बाबा वो भी अब रात में.

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अघोरी: यूरेनस हमारी ग्रह शृंखला का आखिरी ग्रह क्युकी प्लूटो को ग्रह श्रंखला से बहार कर दिया गया है. बेशक यूरेनस ग्रह शृंखला का अंतिम ग्रह है पर ग्रीक माइथोलॉजी में इस ग्रह शृंखला की उत्पत्ति यूरेनस से हुई. यूरेनस से hi बाकि सभी ग्रहो का उद्भव हुआ. अब तक आपने जितने भी ग्रहो की पूजा करि उन सबके सौर परिवार और ग्रीक माइथोलॉजी में अलग अलग नाम है जैसे मार्स और एरेस, मरकरी और हरमेस, जुपिटर और ज़ीउस, सैटर्न और क्रोनस, नेप्तुने और पोसिडियों पर यूरेनस अपने आप में अकेला ऐसा गृह है जिसका ग्रीक माइथोलॉजी में भी नाम यूरेनस है. अब आते है इसकी पूजा पर तो इसकी पूजा का आधार भी इसके नाम में hi छुपा है. यूरेनस शब्द इंग्लिश के यूरिन शब्द से बना है और यूरिन को हिंदी में क्या कहते है ये तो आप दोनों जानते hi है पेशाब.

पेशबद शब्द सुनकर विनीता के रोंगटे खड़े हो गए इससे पहले भी एक इस पूजा के दौरान दंगल वाले दिन पेशाब पर आदरित एक टास्क विनीता के सामने आ गया था जहा उसे सैकड़ो गाववालो के सामने लखन की एक कटोरे में भरी पेशाब पीनी थी और विनीता के लिए वो पल बेहद शर्मिंदगी भरा था उस पल उसे अफ़ज़ा हुआ था की क्यों उसने इस पूजा के लिए है करदी थी. पर उस दिन लखन ने बुद्धिमानी से काम लेते हुए खुद वो पेशाब पी कर विनीता को पुरे समाज के सामने शर्मिंदा होने से बचा लिया था. पर आज एक बार फिर यूरेनस पूजा के रूप में यूरिन यानि पेशाब विनीता के सामने आ कड़ी हुई थी और पता नहीं आज विनीता को ऐसा क्या करना पड़ेगा जो पेशाब से रिलेटेड हो. सिर्फ पेशाब शब्द सुनकर hi विनीता के दिमाग में अनेको तरह में विचार आ जा रहे थे. वो सब करना तो दूर उनके बारे में सोच सोच कर hi विनीता के चेहरे पर हवइया उड़ने लगी थी. विनीता भगवान् से प्रार्थना कर रही थी की उसे ऐसा कुछ न करना पड़े जो वो सोच रही है. वो दिल थम कर अघोरी के अगले अल्फाज़ो का इंतज़ार कर रही थी.

अघोरी: इतना तो आप दोनों समझ hi गए होंगे की यूरेनस की पूजा कही न कही यूरिन से जुडी है. अगर आप ऐसा सोच रहे है तो आप सही सोच रहे है. यूरेनस ने इस समस्त ग्रह माला की उत्पत्ति अपने वृषण से की थी अगर दोनों को नहीं पता की वृषण क्या होते है तो आपको बता दू की पुरुष के लिंग के नीचे जो दो अंडाकार गोलिया लटकती रहती है उन्हें hi वृषण कहते है.

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लखन के सामने बैठकर ये सब बाते सुनकर विनीता को बहुद शर्म आ रही थी वो उसे नज़रे उठाकर लखन की तरफ देखने में भी शर्म आ रही थी. कुछ यही मनोदशा लखन सिंह भी थी पहले hi आज विनीता के नितम्ब सेहला देने के वजह से वो शर्मिंदा थे और अब ये सब सुनते हुए वो भी चुपचाप नज़रे झुकाए बैठे थे.

अघोरी: तो यूरेनस पूजा पूरी तरह परुष के जननांग यानि उसकी लिंग और वृषण के इर्द गिर्द hi रहेगी. बहार जहा सुबह पोसिएदोन की प्रतिमा राखी थी जिसके हाथो में अपने ट्राइटन स्थापित करा वो प्रतिमा वह से हटा ली गई है और अब उसके स्थान पर यूरेनस की प्रतिमा राखी है और उसके बगल में सुबह की तरह एक बक्सा रखा है जिसमे इस पूजा की सामग्री राखी है. आप दोनों बहार जाए और यूरेनस की प्रतिमा को प्रणाम करके वो बक्सा अंदर उठा लाए.

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लखन और विनीता बहार गए वह पोसिएदोन की प्रतिमा के स्थान पर अब एक दूसरी प्रतिमा राखी थी यूरेनस की प्रतिमा. यूरेनस का ऊपरी शरीर पर कोई कपडा नहीं था और कमर में जननांग वाले हिस्से को hi एक कपडा ढके हुए था उस प्रतिमा के बगल में सुबह की तरह hi एक बक्सा रखा रहा. विनीता लखन ने उस प्रतिमा को प्रणाम करा और वो बक्सा उठाकर अंदर ले आए. अंदर लेकर उन्होंने बक्सा खोलकर देखा उसमे एक नीले रंग की बहुत सुन्दर सी साडी मैचिंग ब्लाउज पेटीकोट था और निश्चित रूप से ये साडी विनीता के लिए थी. यहाँ आने के बाद पहली बार विनीता को एक साडी पेहेन्ने को मिली थी वर्ण कभी घाघरा चोली कभी पत्ते कभी जलपरी जैसे कपडे पेहेन्ने को मिले थे. इसके अलावा उसमे एक तेल की छोटी सी शीशी भी थी इसके अलावा एक रेजर भी था जिसमे ब्लेड पहले से लगा था पर इस पूजा में रेजर के क्या काम हो सकता है ये न विनीता को समझ आया न लखन को.

अघोरी: आप लोग वो बक्सा ले आए.

लखन: जी बाबा

अघोरी: इसमें एक नीले रंग की साडी और उसके साथ का सामन है जो ज़ाहिर सी बात है विनीता के लिए है. यूरेनस एक नीला गृह है इसलिए उसकी पूजा की विशि भी नीले वस्त्रो में की जाएगी वैसे तो वो जलपरी की पोषक जो इस वक़्त विनीता पहने है वो भी नीली है पर चुकी उस पोषक में पोसिएदोन यानि नेप्तुने की पूजा हो चुकी है जिस वजह से वो पोषक शुद्ध हो चुकी है और इस पूजा की विधि थोड़ी अशुद्ध कर्म है इसलिए ये पूजा इस नीली साडी में होगी. समझ गई विनीता जी.

विनीता: जी बाबा

अघोरी: बक्से में साडी के साथ एक छोटी सी तेल की शीशी है. ये तेल एक विशेष तरह जड़ीबूटी से बनाया गया जिससे लिंग की मालिश करने से उसकी उत्तेजक छमता तीन गुना बाद जाती है और वृषण पर मलने से उसमे बनने वाला वीर्य अधिक और ज्यादा गदा बनता है तेल के साथ एक रेजर भी है जिससे मर्द अपने दादी मूछ के बाल साफ़ करते है पर आज इसका इस्तेमाल विनीता को करना है. विनीता को आज रात पहले इस रेजर से अपनी पति यानि लखन के लिंग और वृषण के इर्द गिर्द के सारे बाल साफ़ करने है जिसे देसी भाषा में झात के बाल कहते है और फिर इस तेल से उनके लिंग और वृषण की अच्छे से मालिश करनी है.

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ये एक लाइन सुनकर विनीता को एहसास हो गया की क्यों अघोरी ने इस पूजा को इससे पहले हुई सभी पुजाओ से ज्यादा कठिन बताया tha.Isse पहले भी मरकरी यानि हरमेस पूजा के दौरान एक बार उसे पुरुष लिंग देखना पड़ा था भीमा का लिंग पर तब शोभा की वजह से उसे उस लिंग को स्पर्श नहीं करना पड़ा था पर आज तो उसे साडी शर्मा हाय त्याग कर लखन के लिंग को अपने हाथो से पकड़ कर उसके झांट के बालो को खुद साफ़ करना था और फिर उसकी अच्छे से मालिश करनी थी और साथ में उसके नीचे लटक रहे वृषणों की भी. लखन के लिए भी ये सब सोचना hi बहुत मुश्किल था की किस तरह वो इस पूजा के दौरान अपने जज़्बातो पर काबू रख पाएगा वो भी तब जब पहले hi कल रात और आज की घटनाओ ने उसके मन में विनीता के प्रति कुछ कोमल एहसास पैदा कर दिए थे. पर ये तो बस शुरुआत थी अभी तो आज रात की पूजा विनीता की साडी शर्मोहया को अच्छे से खोल कर रख देने वाली थी. अघोरी की ये पहली लाइन hi विनीता के लिए किसी बस के धमाके से कम नहीं थी अभी विनीता इससे उबरी भी नहीं थी की तब तक अघोरी ने उस पर एक नया और उससे भी ज्यादा बड़ा बूम फोड़ दिया.

अघोरी: मालिश के दौरान इस तेल की तासीर की वजह से लखन का लिंग काफी उत्तेजित हो जाएगा उसकी नसे फूल जाएगी. उसके उत्तेजित होने के बाद उसे अच्छे से धो कर साफ़ करके विनीता को वो काम करना है जो करना शायद उनकी असली पत्नी के लिए भी मुश्किल होता. विनीता को लखन में यूरेनस की छवि अनुभव करते हुए उनके साथ मुखमैथुन करना है. शायद आप लोगो को समझ न आए की मुखमैथुन क्या होता है. स्त्री जब पुरुष के लिंग की अपने हाथ से मालिश कर करके उसका वीर्यपात करवाती है तो उसे हातमैथुन कहते है और जब स्त्री उस लिंग को अपने मुँह में लेकर अपनी जीभ की हरकत और मुँह की गर्मी से उसका वीर्यपात करवा दे तो उसे मुखमैथुन कहते है. तो मतलब साफ़ है की विनीता को लखन के लिंग को मुँह में लेकर उसका वीर्यपात करवाना है.

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और मुखमैथुन के दौरान उन्हें उनके वृषण का भी अच्छे से ख्याल रखना है उन वृषणों को भी मुँह में लेकर चूसना है चेतना है. अपनी जीभ से चाट चाट कर लखन के लिंग और वृषण पूर्ण उत्तेजित करना है. विनीता को ये सरे काम देवता यूरेनस को समर्पित करना है इसलिए ये पूरी क्रिया बेहद उत्तेजक और कामुक तरह से करनी है.

अघोरी के कहे गए ये अलफ़ाज़ विनीता के कानो में पिघले लोहे की तरह चीरते हुए अंदर तक उतारते चले गए. कहा तो शादी होने के बावजूद आज तक वर्जिन थी उसने जीवन में किसी मर्द का लुंड छुआ तक नहीं था और आज उसे अपने सहेली के ससुर का लुंड मुँह में लेकर चूसना था उसे अपनी जीभ से चेतना था. यहाँ तक की उसके गोटे भी चूसने थे. जब बातो बातो में नेहा कभी ऐसी हरकतों का ज़िक्र करती थी तब भी विनीता उसे बड़ी घिन की नज़रो से देखती थी और उसे यही कहती की भला पेशाब करने वाली चीज़ को वो मुँह में कैसे ले लेती है उसे घिन नहीं अति. और आज खुद उसे वो काम करना था जिसकी बारे में सिर्फ सुनकर उसे घिन अति थी. कुछ यही प्रतिक्रिया लखन सिंह की भी थी अघोरी की बाते सुनकर उसे अंदर hi अंदर बेहद शर्मिंदगी महसूस हो रही थी की उनके परिवार के लिए की जा रही पूजा की वजह से एक भली महिला को कितनी ज़लालत फेस करनी पद रही है. वो नज़र उठाकर विनीता से नज़रे भी नहीं मिला प् रहा था. अघोरी की बातो ने विनीता लखन के होंठो को सील कर रख दिया था.

अघोरी: आप दोनों की चुप्पी से साफ़ पता चलता है की मेरी बाते आपको कितना दर्द दे रही है पर क्या करू मई भी मजबूर हु. हर गृह की पूजा भी उसकी प्रवृत्ति उसके गन उसकी पसंद पर आधारित होती है इसलिए मई मजबूर हु आपसे ये सब करवाने के लिए. मुखमैथुन के दौरान जब लखन सिंह का वीर्यपात होगा तो वो वीर्यपात विनीता को अपने मुँह के अंदर करवाना होगा.

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और उसका पूरा वीर्य अपने हलक के नीचे उतरना होगा यानि वीर्यपान करना होगा. कहते है की पुरुष में वृषण में वीर्य की उत्पत्ति यूरेनस के प्रभाव से hi होती है और फिर उन वृषणों से उत्तेजित नसों के सहारे ये वीर्य पुरुष के लिंग तक अत है इसलिए ये वीर्य hi इस पूजा का प्रसाद है और इस प्रसाद की एक भी बूँद व्यर्थ नहीं जनि चाहिए. इसलिए विनीता को न सिर्फ वीर्य अपने मुँह में निकलवाना है बल्कि वीर्यपात के बाद जितना भी वीर्य लिंग के इर्द गिर्द लगा हो या बहकर वृषणों तक पहुंच गया हो वो सब भी चाट चाट कर लिंग और वृषण को अच्छे से साफ़ कर देना है.

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विनीता की आँखे आसुओ से भर गई थी वो अपने कानो को बंद कर लेना चाहती थी पर अघोरी की बातो से जैसे उसके हाथ भी जड़ हो गए थे. लखन ने भी शर्मिंदगी की वजह से अपनी आँखों को बंद कर लिया था अपनी मुठी को भींच लिया था और अपने जबड़ो को भींच दिया. वो इस पूजा से इंकार कर देना चाहते थे पर कुछ भी कहने की उनमे हिम्मत नहीं हो प् रही थी.

अघोरी: विनीता मुझे आपसे ये करने को कहते हुए बड़ा बुरा लग रहा पर इसके सिवा कोई दूसरा उपाय नहीं है. मुँहमैथुन और लिंग को साफ़ करने के बाद बस एक आखिरी कार्य शेष रह जाता है. वो क्रिया जो यूरेनस के नाम पर आधारित है यानि यूरिन से सम्बंधित. ये एक शारीरिक सत्य है की स्खलन के बाद पुरुष को बहुत तेज़ पेशाब अत है और उस पेशाब में जीवन का मूलभूत आधार वीर्य का भी कुछ अंश होता होता जो वीर्यपात के बाद लिंग के अंदर की नसों में शेष रह जाता इसलिए स्खलन के बाद का मूत्र सबसे शुद्ध होता है क्युकी जीवन चक्र के आधार वीर्य का समावेश होता है. मुखमैथुन एक अनैतिक क्रिया है क्युकी पुरुष का लिंग स्त्री की योनि में जाने के लिए बना है उसके मुख में स्खलित होने के लिए नहीं इसलिए पूजा की क्रिया होने के बावजूद ये एक अशुद्ध क्रिया है और इस क्रिया को करने की वजह से विनीता भी अशुद्ध हो जाएगी तो उसे शुद्ध करना होगा. और उसकी शुद्धि उसी मूत्र से होगी जो स्खलन में लखन के लिंग से निकलेगा. अर्थात विनीता को लखन के मूत्र से स्नान करके खुद को शुद्ध करना होगा विनीता के शरीर का हर हिस्सा वीर्य से भीग जाना चाहिए. पर उस मूत्र के साथ नसों में भरा वीर्य भी बहार अत है और वो वीर्य इस पूजा का प्रसाद इसलिए उस मूत्र की प्रथम धरम को सीधे लिंग को अपने मुँह में लेकर पीना होगा ताकि वीर्य की एक बूँद भी व्यर्थ न जाए.

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अब मर्यादा की साडी हाडे पार हो चुकी है विनीता ने मरे शर्म के अपना चेहरा अपने हाथो से धक् लिया और फूट फूट कर रोने लगी. विनीता को रोटा देख लखन के लिए भी ये सब सहना अब मुश्किल हो गया. उसकी भी बर्दाश्त करने की एक लिमिट थी और लखन की आखिरी बात ने वो लिमिट भी क्रॉस करदी थी अब और कुछ सुन्ना लखन के बर्दाश्त के बहार था.

लखन: बस बाबा बस अब चुप हो जाइये मई ये सब कभी नहीं करूँगा बेशक उससे मेरी शादी हुई है पर सिर्फ एक पूजा के लिए असलियत में वो मेरी बहु की सहेली मेरी बेटी से भी उम्र में छोटी है. और बेहद शरीफ और भली महिला है इतने दिनों में इसे बेहद करीब से जान गया हु. सिर्फ मेरे परिवार को एक श्राप से मुक्त करने के लिए वो इतना कुछ कर रही है इतना कुछ सेह रही है मई उसकी भलमनसाहत का नाजायज़ फायदा नहीं उठा सकता.

अघोरी: पर इसे पूजा बीच में hi भांग हो जाएगी इतने दिनों में की गई कई सभी ग्रहो की पूजा व्यर्थ हो जाएगी. और आपके परिवार पर लगा श्राप ख़तम नहीं होगा.

लखन: पूजा भांग होती है तो हो है मेरे परिवार का इस श्राप से विनाश होता है तो हो जाए पर मई ये नहीं करूँगा.

अघोरी: पर इस पूजा सबसे घातक परिणाम अपनी पुत्रवधु शोभा को सहना पड़ेगा उसकी जान भी जा सकती थी.

अघोरी की इस बात लखन को निशब्द कर दिया उसे समझ नहीं आ रहा था की अब वो क्या बोले. लखन के आँखों से भी आसुओ की धरा बह निकली वो वही रट हुए ज़मीन पर घुटनो के बल बैठ गया.

लखन: हे भगवान् ये किस धरम संकट में दाल दिया है तूने मुझे एक तरफ मेरे दोस्त की वो बच्ची है जिसे मई बड़ा विश्वास दिलके अपने परिवार की बहु बनाया था की उसे कुछ नहीं होने दूंगा और दूसरी तरफ इस भली महिला का मान सम्मान है जिसे मई इस तरह तार तार नहीं कर सकता. बाबा मई अपने दोस्त से माफ़ी मांग लूंगा. अपना सब कुछ उसे दे दूंगा अपनी जान भी दे दूंगा पर ये सब घिनौना काम मुझसे नहीं हो पाएगा.

विनीता चुपचाप लखन और अगोरी की बातचीत सुन रही थी उसमे फिलहाल कुछ भी कहने की हिम्मत hi नहीं बची थी.

अघोरी: देखिये प्रथम दिन hi मैंने आप दोनों को बता दिया था की ये सिर्फ एक पूजा नहीं एक तंत्र पूजा है जिसके रस्मे सामान्य नहीं होगी. मैंने आप दोनों को इस पूजा की कठिनाइयों से अवगत कराया था तब आप दोनों ने बिना सोचे समझे हां करदी अब अगर आप दोनों इस पूजा को आगे नहीं बढ़ाना चाहते तो मई आपको फाॅर्स नहीं कर सकता आपका फैसला आपकी मर्ज़ी जो आपको ठीक लगे वो करे. पर इसका दुष्परिणाम के लिए भी मैंने आपको जगह कर दिया है अब फैसला आपको करना है. वैसे आपको ये पूजा रात्रि 12 बजे के बाद करनी है तब तक आप दोनों के पास समय है आप दोनों सोच ले विचार कर ले खास कर विनीता जी क्युकी ये पूजा पूरी तरह उन्हें hi करनी है. आप दोनों सोच समझ ले की आपके लिए अपना मान सम्मान ज्यादा ज़रूरी है या किसीका जीवन पर ध्यान रहे पर ध्यान रहे किसीका जीवन बचने के लिए कोई घृणित कार्य करने से मान सम्मान घटता नहीं और बढ़ता है. आप 12 बजे तक सोच ले अगर आप का जवाब न होगा तो सुबह आपके लिए गाड़ी भेज दी जाएगी आप वापस आ सकते है पर ध्यान रखियेगा आपके फैसले पर किसीका जीवन निर्भर करता है इसलिए जल्दबाज़ी में नहीं अलग अलग बैठकर एकांत में अच्छे से सोच विचार करके hi निर्णय लीजियेगा. बस मई और कुछ नहीं कहना चाहता. अब आपको 12 बजे फ़ोन करूँगा आप तब मुझे अपना निर्णय बता दीजियेगा. रखता हु फ़ोन.

इतना कह कर अघोरी ने फ़ोन रख दिया. लखन चुपचाप वह खड़ा थी और विनीता भी खामोश सी वह बैठी थी. काफी देर वह ऐसी hi ख़ामोशी छै रही. फिर लखन ने hi इस ख़ामोशी को तोडा.

लखन: विनीता जी आप परेशां मत हो आपको ये सब करने की कोई ज़रूरत नहीं है ये आपकी प्रॉब्लम नहीं है आप मेरी वजह से मेरे परिवार की वजह से इस समस्या में फांसी है अब मई hi आपको इससे बहार निकलूंगा.

विनीता ने लखन की किसी बात का कोई जवाब नहीं दिया शायद उसे समझ hi नहीं आ रहा था की वो क्या कहे.

लखन: आप आराम करिये मई कुछ देर बहार बैठा हु कुछ देर अकेला बैठना चाहता हु. आप सो जाइये.

इतना कह कर लखन घर के बहार निकल गया और बहार एक पेड़ के नीचे बैठ कर आसमान में टिमटिमाते तारो को देखने लगा जैसे उन तारो में अपने परिवार का भविष्य ढून्ढ रहा हो. वही अंदर बैठी विनीता जाने कितनी देर से बुआ खामोश हो गई थी उसने ये तो सोचा था की पूजा की रस्मे कामुक हो सकती है पर इस हद तक पहुंच जाएगी ये उसने भी नहीं सोचा था पर अब फैसला उसे करना था क्युकी लखन जी ने बिना संकोच के उसे इस पूजा की रस्मो से आज़ाद कर दिया था पर वो क्या ये अपराधबोध लेकर जीवन बिता पाएगी की उसकी वजह से उसकी सहेली को कुछ हो गया. शायद उस पहले दिन उसने भावनाओ में बहकर इस पूजा के लिए हां न करि होती तो शायद कोई और महिला मिल जाती पर तब उसने बिना सोचे समझे इस पूजा के लिए हां करदी और अब बीच मझधार में वो मान सम्मान के लिए लखन जी को अकेला छोड़ दे शोभा का जीवन संकट में दाल दे. अगर शोभा को कुछ हो गया तो वो खुद को जीवन भर माफ़ नहीं कर पाएगी.

विनीता लखन दोनों अपने अपने विचारो में खोए थे. अब देखना ये था की विनीता क्या फैसला लेती है. क्या वो इस घृणित पूजा के लिए खुद को तैयार कर पाएगी. और अगर अपना दिल मजबूत करके खुद को तैयार कर भी लेती है तो क्या इस पूजा की इन घृणित रस्मो को पूरा कर पाएगी. और अगर किसी तरह उन रस्मो को पूरा करती भी है तो क्या जीवन में प्रथम बार किसी मर्द जिसके प्रति उसके मन में कही न कही एक सॉफ्ट कार्नर भी है के लुंड को अपने इतने करीब देख कर क्या वो अपनी भावनाओ पैट काबू रख पाएगी. और क्या विनीता के होंठो की गर्मी अपने लुंड पर महसूस कर लाख अपनी उत्तेजना पर काबू रख पाएंगे जबकि उनके मन में भी विनीता के प्रति एक सॉफ्ट कार्नर पनप रहा था. इन सब सवालो का जवाब अगले कुछ घंटो बाद hi मिलेगा की विनीता क्या फैसल करती है.

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सॉरी गाइस दरअसल मैंने गरिमा का पूरा अपडेट लिख लिया था पर पोस्ट करने से पहले जब मैंने खुद उसे पड़ा तो मई उससे उतना सटिस्फी नहीं हुआ इसलिए मैंने वो पूरा लिखा लिखाया अपडेट हटा दिया और अब मई दुबारा अपडेट लिख रहा हु. जब मई खुद उस अपडेट से सटिस्फी नहीं था तो रीडर कैसे पसंद करते लिखते hi पोस्ट करिंगा और जल्द से जल्द कोशिश करूँगा.
 
गाँव में उस विशाल बरगद के पेड़ के नीचे

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बरसात तेज़ और तेज़ होती जा रही थी, गरिमा का पूरा बदन बारिश में पहले hi पूरी तरह भीग चूका था. और भीगे ब्लाउज के अंदर से उसके उभरे हुए चूचक साफ़ नज़र आ रहे थे. भाग कर आने की वजह से वो तेज़ तेज़ सासे ले रही थी जिस वजह से उसका भरी सीना ऊपर नीचे हो रहा था. गरिमा की छाती को ऊपर नीचे होता देख जीतू भी काफी उत्तेजित हो गया था और अपनी उत्तेजना को काबू करने के लिए उसने अपना एक हाथ पंत की जेब में दाल दिया. गरिमा भी समझ रही थी की अचानक से यु जेब में हाथ दाल कर वो क्या कर रहा है. जीतू की उत्तेजना को और बढ़ाने के लिए गरिमा को एक तरकीब सूझी वो अपने घाघरे को घुटनो से कुछ ऊपर और चड्डी से कुछ नीचे तक उठा कर निचोड़ निचोड़ कर उसका पानी निकलने लगी. झुके होने की वजह से गरिमा के स्तनों के बीच की दरार जीतू को साफ़ नज़र आ रही थी और घाघरा से घुटनो से ऊपर होने की वजह से उसकी गदराई पानी से भीगी जाँघे जीतू के सामने थी. वैसे तो जीतू गरिमा को पहले hi बिना कपड़ो के देख चूका था पर यहाँ माहौल अलग था घर में जीतू के बापू थे पर यहाँ दूर दूर तक उन्हें देखने और डिस्टर्ब करने वाला कोई नहीं था और लगातार बारिश हो रही थी ये वजहें उसकी उत्तेजना और बड़ा रही थी.

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जीतू की उत्तेजना गरिमा से भी छुपी नहीं थी और हरिया के साथ बिताये हुए कुछ दिनों ने उसे उत्तेजना की एक नै दुनिया से परिचित करा दिया था और वो अब जब तक यहाँ थी इस उत्तेजना को खुल कर अनुभव करना चाहती थी क्युकी वो भी जानती थी की यहाँ से जाने के बाद पता नहीं उसे ये मौका दुबारा मिले की नहीं. और दुसरे वो अपने प्रति जीतू के मन की भावनाओ को भी समझती थी. गरिमा का सर नीचे झुका देख जीतू उत्तेजना में अपना हाथ जेब से निकल कर पंत के ऊपर से hi अपना लुंड मसलने लगा. वो ये सब गरिमा से छुपकर कर रहा था पर गरिमा ने तिरछी नज़रो से उसे ऐसा करते हुए देख लिया था. और गरिमा जानती थी की अगर वो ज्यादा देर अपन घाघरा यही उठाए रही तो ये ऐसे hi मसल मसल कर अपना सारा माल अपनी पंत में hi निकल देगा और एक बार झाड़ जाने के बाद दुबारा मर्द को उत्तेजित करना ऐसे hi है जैसे डूबते आदमी को पानी से बहार लेकर माउथ तो माउथ रेस्पिरेशन देकर होश में लाना. और फिलहाल गरिमा इस स्थिति में नहीं जाना चाहती थी इसलिए वो एक झटके में अपना घाघरा नीचे करके सीढ़ी कड़ी हो गई. अचानक से सीधा हो जाने की वजह से जीतू को अपना हाथ हटाने का मौका hi नहीं मिला और गरिमा ने खुलेआम जीतू को अपना लुंड मसलते और आहे भरते देख लिया. गरिमा को सीधा देख जीतू ने फ़ौरन अपना हाथ हटा लिया.

हवा ठंडी होती जा रही थी और बारिश में भीगे होने की वजह से गरिमा को ठण्ड भी काफी लग रही थी. आज भीगे बदन के साथ गरिमा को इस गाँव में बीते अपनी पहली रात याद आ रही थी जब वो नदी में गिर कर बेहोश हो गई थी और बेहोशी की हालत में हरिया ने जिस तरह उसे नंगा करके अपने जिस्म की गर्मी से उसकी जान बचाई थी या यु कहे उसे नंगा करके उसके साथ वो पहली रात गुज़री थी और उत्तेजना के संसार के उसे प्रथम दर्शन कराए थे. आज भी कुछ कुछ हालत वही थे वो उस रात की तरह hi भीगी हुई और एक नए मर्द के साथ एक सुनसान जगह पर भीगे कपड़ो के साथ ठण्ड में ठिठुर रही थी. बस उस रात वो बेहोश थी जबकि आज पुरे होशोहवास में थी, उस रात वो पूरी तरह से एक पतिव्रता स्त्री थी पर आज वो एक गैर मर्द के साथ दो बार अपनी मर्ज़ी से सम्भोग करके पहले hi इस वासना और हवस के संसार में कदम रख चुकी जहा घुसना आसान है पैट वह से वापस निकलना बहुत मुश्किल.

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गरिमा के ज़हन में उस रात हरिया द्वारा बताई गई एक एक बात आ रही थी की किस तरह हरिया ने उसकी जांघो के बीच अपना लुंड दाल कर अपना वीर्य उसकी जहंघो के ऊपर hi निकल दिया था क्युकी बेशक वो बेहोश थी पर हरिया ने उस रात का उसे सब कुछ बता दिया था. उसे याद आ रहा था की किस तरह बेहोशी की हालत में बीते गई उस रात ने उसे हरिया की तरफ आकर्षित होने पर मजबूर कर दिया था. और वो आकर्षण उसे हरिया के कमरे में उसके बिस्तर तक ले गया जहा भूल कहे या आकर्षण पर उसने हरिया को अपना सब कुछ सौप दिया और फाइनली उस खँडहर में वो अपनी मर्ज़ी से हरिया के साथ सम्बन्ध बनाने को तैयार हो गई. पर इस पूरी कहानी की शुरुआत उस पहली रात से hi हुई थी पर अफ़सोस बेहोशी की वजह से उस रात के बारे में उसे उतना hi पता था जितना हरिया ने उसे बताया था. पर आज के उस माहौल ने उसे उस रात का हल्का हल्का अनुभव करा दिया था. उसने एक नज़र जीतू को देखा बेशक उसमे हरिया जैसी वो मर्दानगी वो आकर्षण नहीं था पर एक औरत के जसीम के प्रति आकर्षण उसे पाने की भूक उसमे भी एक आम मर्द जैसी थी. उसने एक बार अपने सामने हो रही तेज़ बारिश को देखा अपने जिस्म को छू कर जा रही उन ठंडी ठंडी हवाओ को महसूस करा और अपने भीगे जिस्म को चोर नज़रो से निहारते जीतू को देखा जिसमे अब उसे जीतू कम और हरिया ज्यादा महसूस हो रहा था. वो इस वक़्त हरिया को बहुत मिस कर रही थी पर हरिया न सही जीतू तो था. और उसके दिमाग में एक अजीब सी इच्छा ने जन्म लिया इस कहानी की उस पहली रात को उस पहले इंटिमेट सन को दुबारा जीने का उसे रेक्रेट करने का जो पल बेहोशी की वजह से जिस प्रथम अनुभव को वो महसूस नहीं कर पाई थी उन्हें अब महसूस करने का. और ये सब उसे इस तरह करना था की वो जीतू की नज़रो में चरित्रहीन साबित न हो और ये सब उस रात की तरह मौके की ज़रूरत hi लगे.

गरिमा: जीतू क्या सोच रहे हो.

जीतू: नहीं कुछ नहीं कुछ भी नहीं सोच रहा.

गरिमा: तो इतना चुप चुप क्यों हो लगता है मुझे यु भीगा हुआ देख तुम सुबह वाली घटना के बारे सोचने लगे अब भी तुम्हारे दिमाग में आज सुबह वाली बात hi चल रही है.

जीतू: नहीं तो मई ऐसा नहीं सोच रहा.

गरिमा: ठण्ड लगातार बढ़ती जा रही है और बारिश तो बंद होने का नाम नहीं ले रही और हमारे कपडे पूरी तरह भीगे होने की वाकः से हमे ठण्ड ज्यादा लग रही है.

जीतू: है वो तो है ठण्ड तो मुझे भी लग रही है देखिये शायद जल्द बारिश बंद हो जाए तो हम लोग भी तुरंत निकल लेंगे अभी तो बिजली कड़क रही ऐसे में वापस जाना भी सही नहीं है.

गरिमा: है ये बात तो सही है पर बारिश को देख कर नहीं लगता की ये अगले दो घंटे तक बंद होने वाली है.

जीतू: हम्म बहुत तेज़ बारिश हो रही शायद बापू की बात माननी चाहिए थी आज नहीं आना चाहिए था.

गरिमा: अरे अब जो हुआ सो हुआ फिलहाल ये देखना है की इन बबीज कपड़ो की वजह से हम बीमार न पद जाए.

जीतू: है वो तो है पर क्या कर सकते बारिश रुकने तक का इंतज़ार तो करना hi पड़ेगा.

गरिमा: इधर कोई अत जाता तो नहीं है.

जीतू: ये मंदिर गाँव से बहार है इसलिए जिन्हे मंदिर आना होता है वही आते है और इतनी बारिश में तो कोई नहीं आएगा.

गरिमा: तो एक काम कर सकते है हम अपने कपडे उतर कर यही पेड़ की दाल पर तंग देते है हवा में थोड़ा बहुत तो सूख जाएंगे.

जीतू को एक पल को अपने कानो पर यकीन नहीं हुआ की जो वो सुन रहा है वो सही सुन रहा है गरिमा सच में अपने और उसके कपडे उतरने को कह रहे आज सुबह तो वो गरिमा को नंगा देख चूका था पर वो सब तो गलती से हुआ था वो भी कुछ पल के लिए पर इस वक़्त तो गरिमा खुद अपनी मर्ज़ी से अपने साथ साथ उसे भी नंगा होने की बात कर रही है वो भी कुछ पल के लिए नहीं बारिश बंद होने तक जो की अगले डेड दो घंटे तक बंद होने की कोई उम्मीद नहीं थी. तो क्या गरिमा सच में डेड दो घंटे तक उसके सामने नंगे होने की बात कर रही है. गरिमा जानती थी की जीतू के मन में क्या चल रहा है.

गरिमा: क्या हुआ क्या सोचने लगे.

जीतू: हम्म है कुछ नहीं क्या आप सच में कपडे उतरने की बात कर रही है.

गरिमा: है फिलहाल इसके शिव हमारे पास कोई चारा भी नहीं है ये गीले कपडे हम कितनी देर पहने रह सकते.

जीतू: नहीं वो मेरे कहने का मतलब ये था की कपडे उतरने के बाद तो हम नंगे हो जाएंगे, मतलब मेरा तो ठीक है पर आप कैसे मेरे सामने नंगी हो सकती है.

गरिमा: क्यों सुबह भी तो तुमने मुझे नंगा देखा था.

जीतू: है पर वो तो गलती से आपकी टॉवल खुल गई थी और कुछ मिनट में hi आपने अपने कपडे पेहेन लिए थे पर यहाँ तो डेड दो घंटे की बात है.

गरिमा: अब जब हम पैदा होते है तब भी तो नंगे बिना कपड़ो के hi पैदा होते है और बीमार होने से तो कपडे उतरना ज्यादा बेटर है. और वैसे भी जब एक बार तुम मुझे बिना कपड़ो के देख hi चुके हो तो दुबारा देख लोगे तो क्या हो जाएगा.

गरिमा अपनी बातो में बार बार नंगे शब्द का इस्तेमाल कर रही थी ताकि जीतू के दिमाग में वो कमरे में गरिमा को नंगा देखने वाली यादे ताज़ा बानी रही और अंदर hi अंदर वो उत्तेजना का अनुभव करे और गरिमा का तीर सही निशाने पर भी लगा था क्युकी गरिमा की ये उत्तेजक बाते जीतू को अंदर hi अंदर उत्तेजित कर रही थी और ये उत्तेजना उसे अपने लुंड के लगातार हो रहे झटको से साफ़ महसूस हो रही थी जिन्हे गरिमा भी पंत के ऊपर से अनुभव कर रही थी.

गरिमा: क्यों तुम्हे मेरे सामने नंगा होने में शर्म आ रही है क्या.

जीतू: नहीं वो बात नहीं है.

गरिमा: तो फिर चलो उतरो अच्छा चलो पहले मई उतरती हु ताकि तुम्हारी शर्म कुछ कम हो जाए.

गरिमा पीछे से अपनी चोली की गाँठ खोलने की कोशिश करने लगी और जीतू अवाक् सा उसे ये सब करते देख रहा था उसे तो अब भी यकीन नहीं हो रहा था की ये सब सच में हो रहा है या कोई सपना है. जिस औरत के नाम लेकर उसकी चड्डी को अपने लुंड पर लपेट कर वो हर रोज़ मुठ मरता है वो खुद अपनी मर्ज़ी से उसके सामने नंगी हो रही है. जिस फिल्म का एक छोटा सा ट्रेलर उसने आज सुबह देखा था अब वो पूरी फिल्म उसके सामने लाइव चलने वाली थी.

गरिमा: जीतू मुझसे मेरी चोली की गाँठ नहीं खुल रही प्लीज तुम मेरी हेल्प कर डोज आकर खोल डोज.

गरिमा जीतू के सामने पीठ करके कड़ी हो गई. जीतू ने एक नज़र पीछे से गरिमा को ऊपर से नीचे तक देखा उसका भीगा हुआ घाघरा गरिमा के चूतड़ों के बीच की दरार में घुस गया था और गीला होने की वजह से वो गरिमा के चूतड़ों से एकदम चिपक गया था जिस वजह स्व गरिमा के फूले फूले नितम्बो का आकर साफ़ नज़र आ रहा था. पर गरिमा के कहने पर जीतू गरिमा के पीछे आ गया और अपने कपकपाते हाथो से गरिमा की चोली की गांठ को अपनी उंगलियों में थम लिया और एक झटके में गरिमा को चोली की गाँठ को खोल दिया. गरिमा की चोली का कसाव ढीला पद गया और गरिमा ने दुसरे hi पल आहिस्ता से उसे अपनी बहो से खींच कर बहार निकल दिया ब्रा तो पहने hi नहीं थी,

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पर गरिमा अब भी जीतू की तरफ पीठ करे कड़ी थी जिस वजह से गरिमा की नंगी पीठ जीतू की आँखों के सामने थी. जीतू का लुंड पंत के अंदर बुरी तरह झटके पे झटके खा रहा था उसका मन कर रहा था की अपने होंठ इस नंगी पीठ पर रखकर इसे ऊपर से नीचे तक चाट ले पर उसने खुद पर काबू रखते हुए फिलहाल सिर्फ अपना लुंड सेहला कर काम चला लिया.

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गरिमा: लो मैंने तो उतर दिया अब तुम भी उतर दो.

ठन्डे मौसम के बावजू जीतू उत्तेजना के कारन अंदर से काफी गर्मी महसूस कर रहा था. पर गरिमा के दुबारा कहने पर उसने भी अपनी शर्ट के बटन खोलकर उसे उतर दिया और बनियान भी अपने गले से बहार करदी अब वो भी गरिमा की तरह कमर के ऊपर से बिना कपड़ो के था. गरिमा ने अपना हाथ पीछे करके अपने हाथ में पकड़ी चोली जीतू की तरफ बड़ा दी.

गरिमा: लो मेरी ये चोली भी अपने कपड़ो के साथ किसी दाल पर टांग दो.

जीतू ने गरिमा के हाथ से उसकी चोली लेकर अपनी शर्ट बनियान के साथ एक दाल पर टांग दिया. वो कपडे टांग कर जब वो पीछे पलटा तो उसके लुंड ने एक झटका लिया और उसके दिल की धड़कने तेज़ हो गई क्युकी इस बीच गरिमा अपने घाघरे की गाँठ खोल चुकी थी और उसका घाघरा उसकी कमर का साथ छोड़कर उसके तलवो के पास ज़मीन पर पड़ा था और हरिया की बीवी की छोटी सी चड्डी में उसके बड़े बड़े चूतड़ों को ढकने की नाकाम कोशिश कर रही थी. जीतू का लुंड पंत के अंदर से बहार ताबड़तोड़ सलामी दिए जा रहा था उसे काबू करना उसके लिए भी मुश्किल हो रहा था. गरिमा ने पेअर से सरका कर अपना घाघरा भी जीतू की तरफ कर दिया.

गरिमा: लो इसे भी अपनी पंत के कही तंग दो.

ये एक तरह से इंदिरेक्ट आदेश था की जीतू अब अपनी पंत भी उतर दे और जीतू ने भी आदेश का पालन करते हुए बिना देर किये अपने पंत का खोलकर उसे अपने पैरो से खींचकर निकल दिया और गरिमा का घाघरा और अपनी पंत एक दूरी दाल पर टांग दिए.

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अब जीतू और गरिमा के बदन पर कपड़ो के नाम पर बस एक एक चड्डी थी. और जीतू की चड्डी सावधान की मुद्रा में उचकी हुई थी उसके तने हुए लुंड की वजह से वो तो गरिमा अब भी जीतू की तरफ पीठ करे कड़ी इसलिए गरिमा उस तनाव को नहीं देख सकती थी, जीतू को लगा की शायद वो चड्डी नहीं उतारेगी तो उसने भी यही सोचकर अपनी तरफ से भी सहमति देदी.

जीतू: चड्डी रहने देते है पुरे कपडे उतरना भी ठीक नहीं.

गरिमा: नहीं गीली चड्डी पेहेनना तो सबसे गलत है जांघो के आस पास रशेस हो जाते है.

इतना कहकर गरिमा ने अगले hi पल अपनी उंगलिया अपनी चड्डी के दोनों सिरों पर फसे और जीतू के कुछ सोचने से पहले अपनी चड्डी खींचकर नीचे सरका दी और उसे टांग उठाकर उसे अपने पैरो से निकल कर जीतू की तरफ पीछे सरका दिया. अब आज के दिन में गरिमा दूसरी बार जीतू के सामने पूरी तरह नंगी थी पर सुबह की घटना जीतू के लिए एक गलती से हुई भूल तौलिया सरकने कज वजह से पर अभी गरिमा खुद अपनी इच्छा से उसके सामने नंगी हुई.

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गरिमा: ये लो अपनी और मेरी चांदी भी टांग दो ताकि ये अच्छे से सूख जाए.

जीतू ने गरिमा की चांदी भी एक दाल पर टांग दी पर अपने तने हुए लुंड की वजह से अपनी चड्डी उतरने में उसे हिचकिचाहट सी हो रही थी इसलिए उसने अपनी चड्डी नहीं उतरी.

गरिमा: तुमने भी अपने सरे कपडे उतर दिए.

अब जीतू क्या कहता की उसने अपनी चड्डी क्यों नहीं उतरी ये कोई ऐसी बात नहीं थी जिसे वो गरिमा से खुल कर बता सके और वैसे भी गरिमा तो उसकी तरफ पीठ करे कड़ी थी तो उसे क्या पता चलेगा तो उसने झूठी हां करदी.

जीतू: है उतर दिए.

गरिमा: गुड अब शायद ठंडी हवा में हमारे कपडे थोड़ा बहुत सूख जाए. पर कपडे उतरने के बाद ये हवाई सीधा अब हमारे नंगे शरीर को छू रही है और हमे ठंडा कर रही है.

जीतू: है दीदी ठण्ड तो मुझे भी लग रही है.

गरिमा: जीतू अगर तुम मेरा साथ दो तो हम इस ठण्ड में भी खुद को गरम रख सकते है.

जीतू: वो कैसे

गरिमा: मैंने कॉलेज में पड़ा था की हमारे शरीर में भी अपनी खुद गरनहत होती है और अगर दो लोग कभी इस तरह किसी ठंडी जगह फस जाए तो वो अपने कपडे उतर कर एक दुसरे के बदन से बदन चिपका कर एक दुसरे के जिस्म की गर्मी से खुद को गरम कर सकते है. तो अगर हम दोनों भी चिपक कर बैठ जाए तो हमे ठण्ड कम लगेगी.

गरिमा को दूर से नंगा खड़ा देख कर hi उसका लुंड उसकी चड्डी के अंदर बम्बू बन गया था और अब तो गरिमा खुद से उसे अपने जिस्म से चिपक कर उसके जिस्म की गर्मी लेने और अपने जिस्म की गर्मी लेने को कह रही थी ये ख्याल सोचकर hi उसके धड़कने और लुंड के झटके दोनों तेज़ हो गए. पर वो अपने इस तने हुए लुंड का क्या करे जो बैठने का नाम नहीं ले रहा था और गरिमा की बातो के जवाब में झटके पे झटके खाए जा रहा था. अगर इस हालत में वो चड्डी उतर कर गरिमा के जिस्म से चिपकता तो उसका लुंड के झटको से गरिमा उसकी उत्तेजना को समझ जाती और ता शायद वो उसे लात मारकर पीछे धकेल देती और गरिमा का नंगा बदन देख कर जो नयनसुख उसे मिल रहा है वो भी बंद हो जाता. जीतू को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या कहे क्या करे क्युकी गाँव की नै ब्याह कर आई भाभियो को शादी के लाल जोड़े में देखकर उनकी होने वाली सुहागरात का सोच कर hi उनपर उसकी नियत ख़राब हो जाती और यहाँ तो उन गाँव की औरतो से भी ज्यादा गद्रे बदन की औरत बिना कपड़ो के उसे अपने जिस्म से चिपकने के खुद बुला रही थी वो खुद तो भले hi काबू में रख ले पर उसका लुंड फिलहाल उसके काबू से बहार था. गरिमा वही ज़मीन पर जीतू की तरफ पीठ करे करे बैठ गई और जीतू को अपने करीब आकर चिपक कर बैठने के लिए बुलाने लगी. इधर जीतू असमंजस में था की क्या करे अंदर hi अंदर तो गरिमा के पास जाने को मचल रहा था पर अपने खड़े लुंड की वजह से उसे दर भी लग रहा थी की कही उसका कलपद खड़े लुंड पे धोका न हो जाए. पर गरिमा के बार बार बुलाने पर आखिरकार जीतू गरिमा के करीब पहुंच hi गया.

गरिमा: अब मेरे पीछे यही कितनी देर खड़े रहोगे अपनी टाँगे फैला के मेरे पीछे बैठ जाओ और पीछे से अपनी छाती मेरी पीठ से चिपका दो देखना मुझसे चिपकते hi पल में तुम्हारी साडी ठण्ड गायब हो जाएगी.

जीतू नीचे बैठने को हुआ hi था की उसकी गीली चड्डी का एक हिस्सा गरिमा की पीठ पर छू गया. गरिमा ने गर्दन घुमाकर देखा और अब भी जीतू को वो गीली चड्डी पहने देख गरिमा चीड़ गई.

गरिमा: ये क्या मैंने अपने सरे कपडे उतर दिए और तुम अब भी ये गीली चड्डी पहने हो.

जीतू: है ये रहने देते है एक गीली चड्डी से क्या हो जाएगा.

गरिमा: मैंने तुम्हे बताया की गीली चड्डी पेहेन्ने से रशेस कजजलि दाद ये सब हो जाता है. और वैसे भी जब तक तुम ये गीली चड्डी पहने रहोगे शरीर की गर्माहट क्या खाक मिलेगी.

जीतू: पर मई इस तरह आपके सामने नंगा कैसे हो सकता हु.

गरिमा: क्यों मई भी तो हुई हो नंगी और वैसे भी हम कोई जानबूझ कर नंगे थोड़ी न हुए परिस्थिति hi ऐसी है की हम ये करना पद रहा है. और वैसे भी हर औरत को किसी न किसी मर्द के सामने नंगा होना hi पड़ता है मेरे पति ने भी सुहागरात पर मुझे नंगा करा था तो एक और मर्द ने नंगा देख लिया तो क्या हो गया. तुम भी अपनी गर्लफ्रेंड के सामने नंगे हुए होंगे.

जीतू: मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.

गरिमा: चल झूठे.

जीतू: नहीं सच में मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.

गरिमा: सच में मतलब तुम सच में किसी औरत के सामने नंगे नहीं हुए.

जीतू: बचपन में अपनी माँ के सामने उसके अलावा किसी के सामने नहीं.

गरिमा: चलो कोई बात नहीं आज मुझे hi अपनी गर्लफ्रेंड मान लो ये समझ लो तुम अपनी गर्लफ्रेंड के सामने नंगे हो रहे हो.

गरिमा की इस गर्लफ्रेंड वाली बात पर जीतू एक बार फिर उत्तेजना से भर उठा और उसके लुंड ने चड्डी के अंदर से hi एक ज़ोरदार झटका मारा जीतू के खड़ा होने की वजह से गरिमा ने इस बार साफ़ साफ़ वो झटका देखा और गरिमा का ध्यान जीतू की चड्डी के फूले हुए हिस्से पर गया और गरिमा समझ गई की ये उभर किस चीज़ का है उसका लुंड किस हद तक तना हुआ है वो ये भी समझ गई की क्यों जीतू अपनी चड्डी उतरने में इतना झिझक रहा है. इसलिए उसने खुद पहल करने का फैसला कर लिया जिस तरह उस रात हरिया ने खुद फैसला करके उसे नंगा कर दिया था.

गरिमा: चलो कोई बात अगर तुम्हे अपने हाथ से अपनी चड्डी उतरने में शर्म आ रही है तो मई उतर देती हु.

इतना कहकर गरिमा ने अपनी उंगलिया जीतू की चड्डी के दोनों सिरों पर फसे पर जीतू ने भी अपनी चड्डी को कास कर पकड़ लिया. उसे अब भी अपने लुंड की उत्तेजना गरिमा के सामने ज़ाहिर करने में शर्म आ रही थी.

गरिमा: जीतू हटाओ हाथ उतरने दो मुझे चड्डी.

जीतू: नहीं दीदी आप समझ नहीं रही हो.

गरिमा: मई सब समझ रही हु अपनी गिरलड्रेंड की इतनी सी बात नहीं मानोगे मैंने अपने बॉयफ्रेंड के सामने बिना शर्माए सरे कपडे उतर दिए तुम अपनी गर्लफ्रेंड की सर्दी दूर करने के लिए अपनी चड्डी तक नहीं उतर सकते.

गरिमा ने ये लाइन इतनी नज़ाकत ऐडा और प्यार से बोली की जीतू क्या उसकी जगह मई भी होता तो मन नहीं कर पता और जीतू ने चड्डी पर से अपना हाथ हटा लिया. जीतू के छोड़ते hi गरिमा ने हौले हौले सरका कर नीचे कर दिया.

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चड्डी नीचे सरकते hi काफी देर से गीली चड्डी की कैद में बंद जीतू का लुंड सावधान की मुद्रा में गरिमा के चेहरे के एकदम सामने आ गया.

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हलाकि गरिमा जीतू को पहले भी नंगा देख चुकी थी जब वो उसकी चड्डी अपने लुंड पर लपेट कर बाथरूम में मुठ मार रहा था पर उस दिन उसे वो 18 साल कुंवारा लुंड साफ़ नहीं दिखा था पर अब वो ुन्छुए लुंड गरिमा के चेहरे से बमुश्किल 4 इंच की दूरी पूरी तरह से तनाव की मुद्रा में खड़ा था. गरिमा जीतू की चड्डी को उतरना भूल कर उसके लुंड के तनाव को निहार रही थी. गरिमा को इस तरह हक्का बक्का देख जीतू को यही लगा की शायद उसके लुंड को इस तरह तना देख गरिमा गुस्सा हो रही है और उसने अपने दोनों हाथो से अपना लुंड छुपा लिया. एकदम से जीतू के अपना लुंड छुपा लेने से गरिमा अपने सेंस में वापस आई और उसे एहसास हुआ की वो किस तरह उसका लुंड बेशर्मी से निहार रही थी. गरिमा ने अपनी भावनाओ पर काबू रखते जीतू की चड्डी को उसके पैरो से बहार निकल कर वही ज़मीन पर फैला कर दाल दिया और वापस अपना लुंड छुपाए खड़े जीतू की तरह मुखातिब हुई.

गरिमा: तो तुम इस वजह से अपनी चड्डी उतरने में इतना हिचकिचा रहे थे.

जीतू: सॉरी दीदी ये पता नहीं कैसे ऐसा हो गया है. मई सच में आपके लिए कुछ गलत नहीं सोच रहा हु शायद ये ठण्ड की वजह से इतना ज्यादा फूल गया है.

गरिमा: रिलैक्स तुम सोचते बहुत हो रिलैक्स इतस नार्मल किसी औरत को इस तरह भीगे बदन के साथ देखकर मर्द का उत्तेजित होना स्वाभाविक है और ऐसे में अगर वो औरत अपने सरे कपडे उतर कर तुम्हारे सामने नंगी बैठी हो तब तुम लाख कोशिश के बावजूद भी इसकी उत्तेजना पर काबू नहीं रख सकते इसमें कुछ भी गलत नहीं है भगवान् ने औरत को बनाया hi इसी लिए है मर्द को उत्तेजित करने के लिए. ये एक हार्मोनल चीज़ है मेरे या तुम्हारे बस की चीज़ नहीं तो इस पर गिल्ट फील मत करो और अपने हाथ हटाओ. इसे अपनी शर्मिंदगी मत समझो ये तो तुम्हारी मर्दानगी का प्रमाण है. हटाओ अपना हाथ इसके सामने प्लीज मेरे लिए.

गरिमा के इतने प्यार भरे अलफ़ाज़ को जीतू इंकार कैसे कर सकता था. गरिमा ने जीतू के हाथ पकड़ कर उन्हें उसके लुंड के सामने से हटा दिया. एक बार फिर जीतू का नया नवेला लुंड पुरे शबाब के साथ गरिमा की आँखों के सामने और चेहरे के बेहद करीब था. गरिमा की नज़रे जीतू के लुंड पर hi तिकी थी उसकी एक एक नस नस फूली हुई और साफ़ नज़र आ रही थी उसका मन तो कर रहा था की अभी हाथ बढ़ाकर उसे अपने हाथो में भर ले पर जीतू के सामने खुद को चैरेक्टरलेस साबित भी नहीं करना चाहती थी.

गरिमा: जीतू मई जानती हु इस तरह ऐसे किसी के सामने नंगा होने शर्म तो अति hi है मुझे भी आ रही है पर अगर तुम डॉक्टर के पास इलाज करने जाते हो और वह तुम्हे कपडे उतरने पड़े तो तुम उतारते हो न तो इसे भी वैसे hi समझो ये भी मेडिकल बात है. मई इससे पहले भी इस तरह एक ठंडी जगह फस चुकी हु साड़ी रात के लिए तब वह भी हमने खुद को ऐसे hi गरम रखा था साड़ी रात.

जीतू: क्या कह रही है आप, आप इससे पहले भी इस तरह की सिचुएशन में फस चुकी है किसके साथ और तब भी आप उसके सामने इस तरह नंगी हुई थी.

गरिमा मन hi मन जानती थी की वो किसके साथ इस सिचुएशन में फांसी थी पर यहाँ वो हरिया का नाम नहीं ले सकती थी इसलिए उसने एक झूट कहानी सुना दी.

गरिमा: है मई अपनी एक फ्रेंड के साथ शिमला घूमने गई थी और वह रास्ता जाम होने की वजह से एक बर्फ़बारी वाले इलाके में फस गई थे जहा मई और मेरी दोस्त इसी तरह अपनी कार में नंगे होकर रात भर एक दुसरे से चिपक कर लेते रहे और साडी रात पार कर ली.

जीतू: आपकी दोस्त यानि वो लड़की थी.

गरिमा: है तब मई एक लड़की के साथ थी आज एक लड़के के साथ पर उससे क्या फ़र्क़ पड़ता है बारिश और भीगे होने की वजह से आज भी उतनी hi सर्दी है इसलिए मौके की मजबूरी को समझो और जैसा मई कहती हु वैसा करो.

जीतू: ठीक है बताइये मई क्या करू अब.
 
गरिमा हरिया के साथ बीते उस रात का एक एक पल यहाँ दुबारा जीना चाहती थी इसलिए वो उसी रात की तरह ज़मीन पर जीतू की तरफ पीठ करके लेट गई.

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अब उसके फूले हुए नितम्ब जीतू की आँखों के सामने एकदम खुले हुए थे. ऊपर से नीच तक पूरी तरह से गदराया गरिमा का चिकना मांसल जिस्म जीतू को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा था. पर जीतू अब भी अवाक् से गरिमा के अगले निर्देश का इंतज़ार कर रहा था.

गरिमा: अब बैठे बैठे देख क्या रहे हो मेरे पीछे मुझसे एकदम चिपक कर लेट जाओ इस तरह की हमारे बीच हवा को भी घुसने की जगह न मिले.

जीतू अपने थूक को गटकते हुए कपकपाते हुए ज़मीन पर सरकते हुए गरिमा की तरफ बढ़ने लगा अब ये कहना मुश्किल था की ये कपकपाहट सर्दी की वजह से थी या इस सिचुएशन की वजह से. और गरिमा के एकदम करीब पहुंचकर वो धीमे से गरिमा के बगल में लेट गया.

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पर अब भी अपने लुंड की तनाव की वजह से गरिमा से कुछ दूरी बनाए हुए था. क्युकी अगर वो गरिमा के और करीब जाता तो उसका लुंड सीधा उसकी चूतड़ों के बीच की दरार में घुस जाता और तब पता नहीं गरिमा कैसे रियेक्ट करती. शायद यही उसकी िम्मातुरित्य थी वर्ण उसकी जगह कोई और मर्द होता तो एक औरत को इस तरह नंगा गांड अपनी तरफ करे देख अब तक उसकी गांड में अपना बम्बू पेल दिया होता. पर जीतू के लिए उतना भी आसान नहीं था.

जीतू को पूरी तरह से अपने से न चिपका देख गरिमा ने पीछे पलट कर देखा तो पाया जीतू अब भी उससे कुछ दूरी बनाए है और गरिमा इसका कारन भी समझ रही थी. और कही न कही वो अब समझ गई थी की जीतू अपनी झिझक के कारन और अपने तने लुंड के कारन उसके जिस्म के करीब नहीं आएगा और अगर जीतू की झिझक दूर करने में अब ज्यादा वक़्त लगाया तो शायद बहुत देर हो जाए इसलिए उसे खुद पहल करनी होगी. इसलिए अब तक जीतू की तरफ पीठ करके लेती गरिमा ने करवट बदल कर अब जीतू की तरफ अपना चेहरा कर लिया. गरिमा के करवट बदलते जीतू की नज़र अपने आप गरिमा के उभारो पर चली गई जिनका वो पहले दिन से दीवाना था.

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गरिमा: तुम तो मेरे पास आओगे नहीं तो इसलिए मई hi आ जाती हु.

इतना कह कर गरिमा खुद आगे सरक कर जीतू के करीब आ गई. जीतू के करीब आते hi उसका तना हुआ लुंड सीधा गरिमा की छूट के मुहाने से जा टकराया और प्रतिक्रिया स्वरुप जीतू ने थोड़ा पीछे हटने की कोशिश की पर गरिमा ने जीतू को अपनी बहो में जकड कर उसे पीछे हटने से रोक लिया.

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गरिमा: नहीं जीतू मई समझ गई तुम अपने लुंड के तनाव की वजह से मेरे करीब आने से हिचकिचा रहे हो. इसलिए अब तुम्हारे करीब आना मेरे लिए और ज़रूरी हो गया है क्युकी तुम्हारे मन से इस शर्मिंदगी को हमेशा के लिए दूर करना ज़रूरी है. और उसके लिए अब मुझे तुम्हारे बेहद करीब आना hi होगा.

जीतू: पर दीदी ये आपके वह टच हो जाता और इतना अकड़ा हुआ है की क्या पता अंदर hi चला जाता तो कही आप गुस्सा न हो जाओ इसलिए मई दर रहा था.

गरिमा: मई समझ रही हु तुम बहुत अच्छे लड़के को इसलिए तुम्हारे मन से इस शर्मिंदगी को मई दूर करके रहूंगी और चिंता मत करो तुम्हारा ये मेरे वह टच नहीं होगा और न अंदर जाएगा मई अपनी टाँगे खोल देती हु तुम इसे मेरी टांगो के बीच फंसा दो.

गरिमा ने अपनी टांगो में हलकी सी जगह बनाई और अब जीतू भी थोड़ा आगे सरक कर गरिमा के जिस्म से चिपक गया और उसका लुंड गरिमा की जांघो के बीच की दरार में सेट हो गया और गरिमा ने जीतू के लुंड को दोनों और से अपनी जांघो से दबा लिया.

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अपने लुंड पर गरिमा की नंगी जांघो का स्पर्श hi जीतू को पागल किये जा रहा था. जांघो के बीच दबा जीतू का लुंड दबे दबे hi फड़फड़ा रहा था.

और ये झटके अब गरिमा को भी उत्तेजित कर रहे थे उसकी आँखों के सामने हरिया के साथ बिताए वो कमल पल hi घूम रहे थे बेशक वो इस वक़्त उसकी बहो में जीतू था पर उसके दिलो दिमाग तो बस हरिया hi छाया हुआ था. जिस तरह वो इस वक़्त जीतू के लुंड को अपनी जांघो में दबाए लेती है कुछ इसी तरह उस रात हरिया ने भी अपना लुंड उसकी जांघो की बीच दबाए दबाए hi उसकी जांघो में रगड़ रगड़ कर उसकी जांघो पर hi झाड़ दिया था. बस उस रात वो बेहोश थी इसलिए अब वही अनुभव एकदम नए तरीके से जीतू से लेना चाहती थी.

गरिमा: जीतू कैसा लग रहा है ठण्ड कुछ दूर हुई मेरे जिस्म की गर्मी मिली.

जीतू: हम्म

गरिमा: तो मुझे इतना ढीला क्यों पकडे हो कास कर पकड़ो जैसे मई पकडे हु. अपने दोनों हाथ मेरी पीठ पर रखकर मेरे सीने को अपने सीने से दबा लो.

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जीतू ने भी अब गरिमा की तरह अपनी बहे गरिमा के इर्द गिर्द कास ली और गरिमा को पीठ से कास कर पकड़ कर अपने सीने से सत्ता लिया. अब वो दोनों पूरी तरह एक दुसरे से चिपके हुए थे इस तरह की उनके बीच हवा का घुसना भी मुश्किल था और गरिमा के मोठे मोठे स्तन जीतू के छाती में यहाँ वह डाब रहे थे. अपनी छाती पर उन स्तनों का स्पर्श hi जीतू को दीवाना कर रहा था उसने सपने में भी नहीं सोचा था की पिछले कई दिनों से वो जिसके नाम की मुठ मार रहा था वो इस तरह नंगी उसकी बहो में दबी पड़ी होगी.

गरिमा: जीतू कुछ गर्माहट महसूस हुई.

अब जीतू गरिमा को क्या क्या बताता की उसे क्या क्या और कहा कहा महसूस हो रहा है.

जीतू: हम्म

गरिमा: मैंने कहा था न विदेशो में ठन्डे इलाको में इस तकनीक का इस्तेमाल एक आम बात है.

जीतू ने मन में सोचा की साला मई विदेश में पैदा क्यों नहीं हुआ.

गरिमा: अब मई तुम्हे माउथ तो माउथ रेस्पिरेशन बताती हु, हमारे जिस्म की सबसे ज्यादा गर्मी मुँह की भाप के माध्यम से बहार निकलती है पर अगर हम वो भाप बहार निकलने की बजाए सीधा एक दुसरे के मुँह में निकले तो वो गर्मी बहार वास्ते जाने की बजाए हमारे शरीर को गर्म करने के hi काम आएगी.

जीतू इतना भी बुद्धू नहीं था की वो समझ न पाए की गरिमा क्या कहना चाहती है पर फिर भी वो गरिमा के मुँह से hi सुन्ना चाहता था.

जीतू: Ok तो उसके लिए हम क्या करे.

गरिमा: अपने होंठ मेरे होंठो के करीब लाओ और उन्हें मेरे होंठो से जोड़ दो ताकि तुम्हारे मुँह की गरम गरम साँसे सीधा मेरे मुँह में जाए.

शब्द चाहे कोई भी इस्तेमाल किये जाए इंदिरेक्ट वे में जीतू जनता था की गरिमा उसे खुद को लिप तो लिप किश करने को कह रही है और वो तो कबसे इसके लिए मारा जा रहा था ौड अब गरिमा ने सामने से उसे ऐसा करने को कहा तो वो कहा पीछे हटने वाला था. जीतू अपने होंठ गरिमा के रसीले होंठो के करीब ले आया और बिना देर किये उन्हें गरिमा के होंठो पर रख दिया.

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पर यही जीतू के संयम का बाँध टूट गया और गरिमा पर जीतू की पकड़ और मजबूत हो गई और जीतू ने गरिमा को होंठो पर अपने होंठो को रगड़ना शुरू कर दिया. रगड़ते रगड़ते वो गरिमा के होंठो को अपने होंठो में भरकर चूसने लगा. गरिमा ने ये तो एक्सपेक्ट करा था की जीतू उसे किश करने के दौरान थोड़ा बहुत बहक सकता है पर वो इस कदर आवेशित होकर उस पर हावी हो जाएगा ये उसे भी उम्मीद नहीं थी. उसे समझ आ गया की अगर उसे अभी काबू में न करा गया तो शायद वो आज यही उसका बंग hi करदे. गरिमा ने एक कुंवारे लड़के के पहले शारीरिक सम्बन्ध को थोड़ा लिघ्टलय ले लिया था जिसका एहसास उसे अब हो रहा था. गरिमा के होंठो को चूसते चूसते जीतू ने उन्हें अपने दातो से हल्का सा काट भी लिया जिसके दर्द के एहसास से गरिमा भी अपना आप खो बैठी और उसने जीतू के चेहरे को पीछे धकेल कर एक कंटाप जीतू के गाल पर रसीद कर दिया.

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गरिमा: जीतू मैंने तुम्हे हलके हलके हौले हौले किश करने को कहा था ताकि हमारे जिस्म को एक दुसरे के होंठो की गर्माहट मिल सके पर तुम तो कुछ ज्यादा hi आवेश में आ गए. तुम इसे मेरे और तुम्हारे बीच सेक्स रिलेशन समझ बैठे. मई एक शादीशुदा औरत हु एक बच्चे की माँ हु मई यहाँ तुम्हारे साथ सेक्स करने के लिए नंगी नहीं हुई हु. मई इस ठण्ड के मौसम में आपस में मिलकर एक दुसरे के जिस्म को गरम रखने में बस तुम्हारी मदद चाहती थी पर शायद तुममे इसका गलत मतलब निकल लिया. तुम ये समझ बैठे की मई तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहती हु.

एकदम से गाल पर पड़े इस झापड़ और गरिमा की इन बातो से जीतू अपने होशोहवास में वापस आया और जिस बात का उसे दर था उसे वही होता महसूस होने लगा उसे यही लगा की सच में उसका कलपद होने जा रहा है और फिर से घर जाकर अपना हाथ जगन्नाथ करके hi काम चलना होगा. पर कही एकदम से शॉक की वजह से जीतू का लुंड मुरझा न जाए इसलिए गरिमा ने वापस से अपना रुख थोड़ा नरम कर लिया.

जीतू: ी ऍम सॉरी दीदी मई थोड़ा बहक गया था मई इसीलिए आपके करीब नहीं आ रहा था ये किसी औरत के साथ इस तरह मेरा फर्स्ट टाइम था. मई पहली बार किसी औरत के इस तरह इतना करीब गया हु पहली बार किसी को किश करा हु इसलिए खुद पर काबू नहीं रख पाया. हमे अलग हो जा चाहिए.

इतना कह कर जीतू अलग होने को पीछे हुआ पर गरिमा ने अपनी बाहो के झटके से एक बार फिर उसे अपने करीब खींच लिया.

गरिमा: ी ऍम सॉरी शायद मई hi थोड़ा ज्यादा रौदे हो गई मई ये भूल गई तुम्हारे जैसे एक टीनएज लड़के के लिए इस सिचुएशन पर खुद को कण्ट्रोल करना कितना मुश्किल होगा. मैंने बिना सोचे समझे तुम्हे झापड़ मार दिया. ी ऍम सॉरी जीतू.

जीतू: अरे आप सॉरी क्यों बोल रही गलती तो मेरी थी मई hi बहक गया था.

गरिमा: नहीं जीतू तुम्हारा बहकना ऑब्वियस था और असलियत में इसमें गलती तुम्हारी भी नहीं बल्कि तुम्हारे जिस्म के उस उत्तेजक अंग की है जिसने तुम्हे ऐसा करने पर मजबूर कर दिया.

जीतू: आप किस हिस्से की बात कर रही है.

गरिमा: वही हिस्सा जिससे तुम सुसु करते हो जो पूर्ण आकर में तना हुआ है.

जीतू समझ गया की गरिमा उसके लुंड की बात कर रही है.

गरिमा: तुम्हारे उत्तेजना की मुख्या वजह तुम्हारे उसमे मौजूद नसों में उमड़ आया वीर्य है जो जब तक इन नसों में मौजूद रहता है पुरुष उत्तेजित रहता है. एक बार ये वीर्य निकल जाए तो तुम्हारी उत्तेजना भी ठंडी हो जाएगी. और तुम्हारा वो काफी देर से उत्तेजित अवस्था में है उसे जल्द सामान्य करना ज़रूरी है वर्ण ज़ादा देर उत्तेजित रहने से उसकी नसों में खिचाव आ जाता है और इससे आगे दिक्कत होती है.

जीतू: है पर आज वो कुछ ज्यादा hi तनाव में है इतना तनाव इसमें पहले कभी नहीं रहा.

गरिमा: वो मई समझ रही हु एक औरत के जिस्म की गर्माहट होती hi ऐसी की बुड्ढे आदमी का भी उत्तेजित हो जाए. पर अगर तुम कहो तो मई इसमें शांत करने में मदद कर सकती हु.

जीतू के दिमाग में तरह तरह के विचार आने लगे की अभी कुछ पल पहले तो बस किश कर लेने पर hi गाल पर एक तमाचा रसीद कर दिया अब लुंड झड़वाने में मदद करने की बात कर रही है ऐसा क्या करने वाली है. जीतू ने सेक्स भले hi न किया हो पर पोर्न वीडियो बहुत देखे थे और उसने देख था की एक औरत 5 तरीके से मर्द का लुंड झड़वा सकती है एक अपने हाथो से मसल कर दूसरा अपने मुँह में लेकर चूस चूस कर तीसरा अपने दूध के बीच लेकर उनसे रगड़ रगड़ कर चौथा अपनी गांड मरवा कर और पांचवा लुंड डायरेक्ट अपनी छूट में लेकर पूरा सेक्स करके. जीतू ये सोच hi रहा था की गरिमा इनमे से क्या करने वाली है की गरिमा ने अपना तरीका बताना शुरू कर दिया.

गरिमा: मई तुम्हारा वो अपनी जांघो के बीच दबा कर तुम्हारे ऊपर लेट जाउंगी, और अपनी जांघो को कास कर बंद कर लुंगी और अपनी जांघो मो तुम्हारे उसके आगे पीछे करती रहूंगी जांघो की रगड़ और मेरे बदन की गर्मी से कुछ hi पल में तुम्हारा वीर्य बहार निकल आएगा और तुम्हारा वो एकदम सामान्य हो जाएगा.

जीतू: पर कही फिर से आप झापड़ तो नहीं मार डौगी.

गरिमा हस्ते हुए: नहीं मरूंगी बल्कि इसीलिए इस बार मई खुद ऊपर रहूंगी ताकि तुम बहक न जाओ. और अब जो करुँगी मई करुँगी तुम बस चुपचाप लेते रहना.
 
जीतू ज़मीन पर पीठ के बल लेट गया और अपनी टाँगे फैला ली ताकि गरिमा उनके बीच खुद खुद को एडजेस्ट कर ले और इस बार गरिमा खुद जीतू के ऊपर आकर लेट गई और अपनी जांघो को जीतू के लुंड के इर्द गिर्द कास कर इस तरह बंद कर लिया की बस उसका थोड़ा सा टोपा hi पीछे से बहार दिख रहा था.

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जीतू के ऊपर लेते होने की वजह से गरिमा का चेहरा अब जीतू के बेहद करीब था. गरिमा थोड़ा नीचे सरक की तरफ सरक गई जिस वजह से अब उसकी छूट जीतू के लुंड ठीक ऊपर थी और चेहरा उसकी गर्दन के पास. गरिमा की छूट की गर्माहट जीतू को भी अपने लुंड पर महसूस हो रहा था और उसका मन तो कर रहा था की नीचे से hi अपना लुंड सीधा गरिमा की छूट के अंदर दाल दे पर कही दुबारा झापड़ न पद जाए और जो मिल रहा है उसपे भी ब्रेक लग जाए यही सोच कर उसने चुपचाप पड़े रहने में hi अपनी भलाई समझी.

गरिमा भी अब कुछ कुछ उन्ही हालत में थी जिनमे वो उस रात हरिया के साथ थी बस उस वक़्त जो करा था हरिया ने करा था पर इस वक़्त कमान उसके अपने हाथ में थी. उसे उस रात के बारे में उतना hi पता था जितना हरिया ने उसे बताया था की उस रात जब गरिमा को नंगा करने जे बाद उसके जिस्म की गर्मी से वो उत्तेजित हो गया था तो उसकी जांघो और छूट पर अपना लुंड रगड़ रगड़ कर hi उसने अपनी उत्तेजना को शांत कर लिया था. औरत की छूट लुंड के इतने करीब होने पर भी क्या मर्द बिना उसके अंदर दाखिल हुए बस बहार बहार से रगड़ कर hi झाड़ सकता है यही बात आज गरिमा खुद प्रैक्टिकल करके देखने वाली थी.

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गरिमा ने अपनी कमर को ऊपर नीचे करके अपनी जांघो की रगड़ से जीतू को एक चुदाई का सुख देना शुरू कर दिया. जांघो के साथ साथ गरिमा की छूट की बहरी त्वचा भी ऊपर से जीतू के लुंड की नसों पर रगड़ खा रही थी और रगड़ गरिमा की कामोत्तेजना को भी चरमबिंदु पर पंहुचा रही थी. जीतू का तो आनंद के मरे बुरा हाल था जीवन में पहली बार उसे एक औरत से इस तरह का अनुभव प्राप्त हुआ था बिना उसके अंदर दाखिल हुए hi उसे चुदाई का मज़ा मिल रहा था. इसी मज़े में जीतू की आँखे बंद हो गई और उसने अपने दोनों हाथो से गरिमा के कंधो को मजबूती से थम लिया. जीतू की आँखे बंद थी और मुँह खुला था जिसे वो तेज़ तेज़ आहे भर रहा था. अपने छूट के अधरों पर एक पूर्ण उत्तेजित लुंड का एहसास गरिमा को भी उत्तेजित कर रहा था और कामोत्तेजना में गरिमा की भी आँखे बंद हो गई और उसके होंठ अपने आप जीतू की गर्दन पर पहुंच गए.

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गरिमा अपने होंठो को जीतू की गरदन पर घिसने लगी गरिमा पर भी वासना का उन्माद हावी हो रहा था और इसी उन्माद में उसने नीचे अपनी कमर की गति कुछ बड़ा दी और अपनी कमर को गोल गोल घुमा कर अपनी छूट का ज्यादा से ज्यादा संपर्क जीतू के लुंड से कटवाने लगी.

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गरिमा: ओह हरिया आआअह्ह्ह्हह ममममम

कामवासना से भरे इस माहौल में बस ये कुछ शब्द गरिमा के मुँह से निकले पर अपने पहले काम अनुभव के नशे में पूरी तरह डूबे जीतू का ध्यान इन शब्दों से ज्यादा इस अनुभव पर था इसलिए शायद उसका ध्यान इन शब्दों पर गया hi नहीं. पर इन शब्दों से साफ़ था की तन से बेशक गरिमा जीतू के साथ थी पर मन से वो अब भी हरिया के साथ hi थी. इस वक़्त हरिया का नाम लेने का मतलब साफ़ था की वो ये सब कर भले hi जीतू के साथ कर रही थी पर बंद आँखों से वो महसूस हरिया को hi कर रही थी. जीतू केवल हरिया के साथ बीते उस पहली रात को अनुभव करने का एक जरिया मात्रा था.

गरिमा और जीतू दोनों अब पूरी तरह से वासना के नशे में डूब चुके थे. नीचे जीतू का लुंड गरिमा की मांसल जांघो के बीच दबे होने के बावजूद झटके पे झटके खा कर गरिमा की छूट के मुहाने पर दस्तक दे रहा था जैसे उससे रिक्वेस्ट कर रहा हो की जैसे उससे अंदर दाखिल होने की इज़ाज़त मांग रहा हो. पर फिलहाल गरिमा का ऐसा कोई इरादा नहीं था, ये जगह और समय दोनों चुदाई के लिए मुनासिब नहीं थे इस वक़्त गरिमा का ध्यान बस अपना ओर्गास्म हासिल करने तक था.

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उत्तेजना में डूबी गरिमा ने अपना चेहरा ऊपर करके अपने होंठ जीतू के होंठो पर रख दिए और अपनी जीभ निकल कर जीतू के होंठो और चेहरे को चाटने लगी. गरिमा के ये हरकते जीतू की उत्तेजना को बड़ा रही थी वो अपने हाथो को गरिमा के कंधो से हटाकर गरिमा के बालो को सहलाने लगा और गरिमा के सर पर पीछे से दबाव डालकर उसके होंठो को अपने होंठो पर रगड़ने लगा.

दोनों hi अपनी उत्तेजना के चरमबिंदु पर पहुंचने के करीब थे. ऊपर गरिमा और जीतू एक दुसरे के साथ एक कामुक चुम्बन में डूबे हुए थे और नीचे गरिमा की कमर की गति तेज़ और तेज़ हो गई थी. गरिमा की छूट काफी तेज़ी से जीते की लुंड की नसों पर रगड़ खा रही थी. और इस रगड़ से जीतू के लुंड की नसे में भरा लावा पुरे फ्लो के सह बहार आने को मचल रहा था. जीतू ने गरिमा के बालो से हाथ हटाकर कर गरिमा को पीठ से कास कर पकड़ लिया और पूरी ताकत से उसे अपने सीने से दबा लिया. ये दबाव इस बात का संकेत था की जीतू का वीर्य अगले किसी भी पल बहार आने वाला है. और अगले hi पल गहरी गहरी सासे भरते हुए जीतू ने अपने लुंड में भरा वीर्य गरिमा की जांघो पर उगलना शुरू कर दिया.

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जीतू को स्खलित होता महसूस कर गरिमा ने भी अपने होंठो को पूरी तरह जीतू के होंठो से सी दिया. स्खलन की उत्तेजना में जीतू गरिमा की पीठ को इतनी तेज़ी से पकडे था की उसकी उंगलियों के निशान तक गरिमा की पीठ पर बन गए थे. और वो इसी तरह गरिमा को कास कर पकडे रहा जब तक उसके वीर्य की आखिरी बूँद तक उसके लुंड से बहार नहीं आ गई. लुंड की अग्नि शांत होते hi जीतू की पकड़ भी ढीली पद गई और पकड़ ढीली पड़ने के साथ hi गरिमा को अंदाज़ा हो गया की जीतू ने चरमसुख को प् लिया है. और पहली बार एक औरत के जिस्म को इस कदर महसूस करने के बाद उससे और ज्यादा देर टिकने की उम्मीद करना उस पर ज़्यादती करना था वैसे भी गरिमा के नंगे बदन के नयनसुख ने hi उसे काफी देर तनाव की मुद्रा में बनाए रखा था इसीलिए उसके जिस्म की गर्माहट मिलने के बाद उसका कुछ पल में hi स्खलित हो जाना स्वाभाविक था.

पर गरिमा की वासना की आग अब भी ठंडी नहीं हुई थी पर वो पहली बार में hi जीतू पर ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहती थी और खुद को उसकी नज़रो में कामपिपासु औरत भी नहीं दिखाना चाहती थी. इसलिए जीतू के झड़ने के बाद उसके होठो पर एक किश देकर गरिमा उसके ऊपर से उठ गई और ज़मीन पर गिरी पेड़ की पत्तियों से अपनी जांघ के पीछे लगा जीतू का वीर्य पोछकर साफ़ करने लगी. एक औरत के बदन में क्या नशा है उसे पहली बार इतने करीब से अनुभव करने की मदहोशी में चूर जीतू भी अब धीमे धीमे अपने सेंसेस में वापस आ रहा था.

गरिमा को जांघो में लगा अपना वीर्य पोछते देख वो भी उठ कर बैठ गया और अबोध मासूम बच्चे की तरह गरिमा को पीछे से टाइट हुग कर लिया. अब तक कामुकता उत्तेजना वासना के माहौल में उन दोनों के बीच ये पहला निश्छल प्यार भरा आलिंगन था. अचानक से जीतू का उसे यु प्यार से हुग करना गरिमा को भी बड़ा प्यारा लगा.

गरिमा: क्या हुआ जीतू अब तक सर्दी दूर नहीं हुई.

जीतू: सर्दी तो पूरी तरह दूर हो गई पर आपको छोड़ने का मन नहीं कर रहा.

गरिमा: अच्छा जी अब तो बारिश भी बंद होने को आई है आपकी सर्दी भी हमने दूर करदी फिर भी छोड़ने का मन क्यों नहीं कर रहा आपका.

जीतू: बस आज आप बहुत अच्छी लग रही हो.

गरिमा: अच्छा मतलब इतने दिनों से कपड़ो में रहते थे तो अच्छे नहीं लगते थे आज कपडे उतर दिए तो अच्छे लगने लगे.

जीतू: सच कहु तो आप बिना कपड़ो के ज्यादा अच्छी लगती है कोठी में बापू है वर्ण पुरे दिन आपको बिना कपड़ो के राखु

गरिमा: कण्ट्रोल जीतू कण्ट्रोल अपनी भावनाओ पर ज़रा काबू रखो तुम भूल रहे हो मई किसी की बीवी हु किसी की माँ हु.

जीतू: सॉरी दीदी सॉरी मेरा कहना के ये मतलब नहीं था वो आज पहले बार मई किसी औरत के इतना करीब गया हु इसलिए कुछ ज्यादा बोल गया.

गरिमा: रिलैक्स रिलैक्स कोई बात नहीं मई समझती हु पर शायद तुम्हारे बापू से कह कर तुम्हारी जल्दी शादी करवानी होगी उन्हें बताना होगा की लड़का जवान हो गया है.

जीतू: काश आपकी hi शादी न हुई होती तो.......

गरिमा: तो क्या क्यों क्या मुझसे शादी कर लेते.

जीतू: है अगर आप मन जाती तो मई तो कर लेता.

गरिमा: पता है मई उम्र में तुमसे 15 साल बड़ी हु.

जीतू: अरे आपको देख कर कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता की आप 30+ हो एक बच्चे की माँ हो आप तो अब भी 20-22 की hi लगती हो.

गरिमा: चल झूठे.

जीतू: नहीं सच्ची.

गरिमा: चलो चलो कपडे पहनो वापस घर भी चलना है बारिश भी बंद हो गया कोई इधर आ गया तो हमे यु नंगा देख दस बाते बना देगा. और तुंहरे बापू भी इंतज़ार कर रहे होंगे. देखो कपडे भी अबतक काफी कुछ सूख गए होंगे.

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गरिमा और जीतू अपने अपने कपडे पेहेन्ने लगे और कपडे पेहेन कर मंदिर के पीछे कड़ी अपनी साइकिल पर बैठ कर वापस घर की तरफ चल दिए. रस्ते में एक ढाबा पड़ा झड़ने के बाद जीतू को भूक भी लग रही थी.

जीतू: दीदी कुछ खाओगी.

गरिमा: पर तुम्हारे बापू ने घर में खाना बना लिया होगा उसका क्या.

जीतू: अरे तो वो अपने कमरे में ले जाना मन करे खाना वर्ण धक् के रख देना कह देना खा लिया. मुझे भी भूक लगी है और यहाँ बहुत अच्छे प्याज़ के पराठे मिलते है एक बार खा कर देखो.

गरिमा: तुम्हे भूक लगी है तो चलो थोड़ा खा लेते है.

दोनों वही ढाबे पर पराठे खाने लगे और खा पी कर वापस कोठी की तरफ चल पड़े. रस्ते में

गरिमा: जीतू आज जो कुछ भी हुआ उसके बारे में अपने बापू से कुछ मत कहना वर्ण वो पता नहीं क्या सोचेंगे और कैसे रियेक्ट करेंगे.

जीतू: ये भी कोई कहने की बात है उन्हें मई कुछ नहीं बताऊंगा. कह दूंगा की बारिश होने लगी थी तभी छाया में खड़े हो गए रुकने पर वापस आए. पर आपको भी एक वडा करना होगा.

गरिमा: कैसा वडा.

जीतू: की अगर मुझे फिर सर्दी लगी तो आप मुझे गर्मी देने ज़रूर आओगी.

गरिमा: धत्त शैतान कही का आज तो बारिश में भीग गए थे इसलिए ये करा इसका मतलब ये थोड़ी न की मैंने सर्दी दूर करने का ठेका लिया है.

जीतू: अरे दीदी ऐसे मत बोलो आज जो मज़ा आया वो एक बार और करना चाहता हु जाने से पहले एक बार बस एक बार करवा देना.

गरिमा: अच्छा मई यहाँ हम दोनों की सर्दी दूर करने की कोशिश कर रही थी और तुम्हारे लिए ये मज़े की चीज़ थी.

जीतू: अरे नहीं नहीं मेरे कहने का वो मतलब नहीं थी मई तो बस यही कह गया......

गरिमा: ठीक है ठीक है देखूंगी सोचूंगी अगर मूड हुआ तो....

जीतू: चलिए ठीक है वैसे हम बेसब्री से आपके मूड का इंतज़ार करेंगे.

बात करते करते तब तक कोठी भी आ गई अंदर बिहारी काका उनका इंतज़ार कर रहे थे.

काका: अरे बिटिया आ गई आप और तू मैंने कहा था न की बारिश का मौसम है मेमसाब भीग जाएगी तो उन्हें ठण्ड लग जाएगी. भीगा दिया न उन्हें.

गरिमा: नहीं नहीं काका हमने इस बात का अच्छे से ख्याल रखा की हमे ठण्ड न लगे.

गरिमा और जीतू ने एक दुसरे को मुस्कुरा कर देखा की उन्होंने अपनी ठण्ड को कैसे अच्छे से दूर करा था.

काका: चलिए अच्छा है पर फिर भी आपके कपडे कुछ भीगे लग रहे है आप कपडे बदल लो तब तक मई खाना लगा देता हु.

पेट तो पहले hi गरिमा का भरा हुआ था पर काका को मन करना भी उसे अच्छा नहीं लग रहा था.

गरिमा: काका आप मुझे प्लेट लगा के दे दीजिये मई रूम में जाकर खा लुंगी.

काका: ठीक है आप रूम में जाकर चेंज करो मई खाना आपके रूम में दे जाऊंगा.

गरिमा: जी काका.

काका: और नालायक तू भी जा कर कपडे बदल ले और है आज की तेज़ बारिश में खेतो में पानी भर गया है कल जाकर सरे खेतो में मेड बना आना वर्ण पानी भरे भरे साडी फसल ख़राब हो जाएगी.

जीतू: पर बापू उसमे तो पूरा दिन चला जाएगा.

काका: तो तू कौन सा यहाँ पड़े पड़े बड़े पहाड़ तोड़ता है पूरा दिन लगे पर कल के कल ये काम हो जाना चाहिए.

जीतू: जी

जीतू बुझे मन से वह से चला गया आज गरिमा के साथ बिताए लम्हो के बाद तो उसने अगले दिन के लिए न जाने क्या क्या सपने सजा लिए थे पर आज की बारिश ने जहा उसका आज का दिन मज़ेदार बना दिया था वही कल का दिन काफी व्यस्त कर दिया था जहा उसे गरिमा के वक़्त बिताने का मौका hi नहीं मिलेगा. दूसरी तरफ गरिमा ने भी कमरे में जाकर अपने गीले कपडे चेंज कर लिए और एक ढीली ढली घाघरा चोली पेहेन ली तब तक काका भी खाना के थाली लगाकर गरिमा के लिए ले आए और गरिमा को थाली देकर वापस चले गए. पर गरिमा का पेट पहले से भरा था इसलिए उसने वो खाना वही बिस्तर के नीचे धक् कर रख दिया और काफी थक चुकी होने की वजह से बिस्तर पर आराम करने लेट गई और थकावट के कारन उसे जल्द hi नींद आ गई.

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