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इधर कमरे में शबाना की ,,., पूरी होने को आ गई थी उसने आँख बंद करे करे hi सर को दे बै घुमा कर ऊपर वाले का शुक्रिया करा और ,,., ऐडा करके उसने जैसे hi आँख खोली वो एक पल के शॉक होकर पीछे को हैट गई क्युकी सामने कुर्सी पर लालू बड़े स्टाइल में अपनी दोनों टांगो को फैलाए अपना लुंड चैन से बहार निकलकर हाथ से सहलाते हुए मुस्कुराता हुआ शबाना को ,,., ऐडा करते देख रहा था. लालू को अचानक से अपने सामने बैठा अपना लुंड सहलाता देख शबाना एकदम शॉक रह गई.
शबाना: तुम तुम यहाँ क्या कर रहे हो अंदर कैसे आए.
लालू: अरे मुझसे क्या पूछती है तेरी सहेली को बहार जाते देखा तो सोचा अपनी रखैल का हाल चल पूछ औ यहाँ आया तो देखा दरवाज़ा खुला था अंदर आया तो तू अपनी गांड उचकाए बैठी थी मुझे तो लगा की मेरे लिए पहले से गांड ऊपर उठाए बैठी है ताकि तुझे पीछे से पेल दू पर तू तो ,,., पद रही थी तेरी उठे हुए तरबूज़ देखकर मन तो करा पीछे से तेरा उठाकर गांड मार लू फिर सोचा पहले तुझे ,,., ऐडा कर लेने दू.
शबाना: बकवास बंद करो अपनी क्या करने ए हो यहाँ जाओ यहाँ से.
शबाना का इतना बोलना था की एक लात उसके मुँह पर पड़ी.
लालू: साली दो टेक रंडी कल रात तेरी क्या हालत करि थी भूल गई साली अपने मूट से नहलाया था तुझे मेरी पेशाब पि थी तूने कपडे फड़वा के गांड मरवाई थी सर पर रखकर मेरे जूते ले थी 50000 हज़ार दिए थे तुझे एक रात के भूल गई सुबह होते hi बड़ा कॉन्फिडेंस आ गया तेरे अंदर जो मुझसे सवाल पूछ रही है कहा से आया इतना कॉन्फिडेंस अपनी उस रंडी दोस्त नेहा को बता दिया क्या कल रात के बारे में.
एक बार फिर लालू को अपने सामे उग्र रूप में देख शबाना के ज़हन में कल रात की दर्दनाक यादे ताज़ा हो उठी, उसकी आँखों के सामने कल रात का मंज़र फिर सजीव हो उठा जिसे याद करके उसकी ज़ुबान की साडी एक पल में दर में बदल गई. उसने सर घुमा कर दरवाज़े की तरफ देखा शायद इस उम्मीद में की नेहा आ जाए पर दरवाज़े की सिटकनी बंद थी. लालू ने खड़े होकर ज़मीन में गिरी पड़ी शबाना के चेहरे को मुट्ठी में दबोच कर अपनी तरफ घुमाया और अपना मोटा कला बालो से भरा लुंड शबाना के चेहरे पर यहाँ वह घिसने लगा.
शबाना अपना चेहरा हटाने की भरसक कोशिश कर रही थी पर लालू की पकड़ बहुत मजबूत थी. फिर भी शबाना ने अपनी पूरी ताकत समेत कर दोनों हाथो धक्का देकर लालू को पीछे धकेल दिया जिसके जवाब में लालू ने बस भौंए टेडी कर के शबाना को देखा और शबाना को देखते देखते hi अपनी जेब से अपना मोबाइल निकला और मोबाइल में कुछ करने लगा, शबाना अब भी ज़मीन पर गिरी पड़ी लालू को ये सब करते देख रही थी अचानक लालू ने मोबाइल का फेस शबाना की तरफ कर दिया मोबाइल एक वीडियो अपलोड करने की साइट खुली थी जिसपर शबाना और धामु का रात वाला वीडियो सेलेक्ट था और उस वीडियो को अपलोड करने के लिए बस एक क्लिक की ज़रूरत थी.
लालू ने इशारे में hi शबाना से पुछा की वो ये वीडियो अपलोड करदे. शबाना हाथ जोड़ कर लालू के सामने मिन्नत की मुद्रा में आ गई की वो ऐसा न करे.
लालू: बोल अपलोड करदु तेरा वीडियो.
शबाना: नहीं प्लीज मत करो ऐसा.
लालू: तो चल हाथ बड़ा और मेरे इस झटके कहते लुंड को अपने कोमल कोमल हाथो में पकड़ कर देख.
शबाना रट हुए: नहीं मई ऐसा नहीं कर सकती
लालू: क्यों नहीं कर सकती उस डेड पसली धामु का लुंड तो अपने हाथो में लेकर बहुत मसल रही थी और इस मरदाना लुंड को हाथ में लेने गांड फैट रही है. चल पकड़ साली रुंडी की औलाद पकड़ मेरा लुंड.
शबाना ने कपट हाथो को बढ़ाकर लालू के लुंड को अपने हाथो में थम लिया.
लालू: आह क्या मुलायम मुलायम हाथ है साली ज़रा अपने हाथ मेरे लुंड की आगे की खाल पर तो चला आगे पीछे कर इसे.
शबाना आँखों में आंसू भरे चुपचाप लालू के लुंड को हाथो में थामे बैठी थी, शबाना की तरफ से कोई प्रतिक्रिया न होती देख लालू का पारा चढ़ गया और लालू ने एक तमाचा शबाना के चेहरे पर रसीद कर दिया.
लालू: साली तेरे हिंजड़े मुसलमान पति की तरह खतना कराया हुआ लुंड नहीं है असली खालिस बिना कटा ***** लुंड है कभी देखा है तेरे बाप भाई चाचा फूफा जो भी तुझे छोड़ते होंगे सबके लुंड कटे हुए होंगे तूने तो कभी लुंड के आगे की खाल देखि hi नहीं होगी. देख ले एक ***** ठाकुर का मूसल लुंड है तेरे जैसी मुसलमान औरतो को बिस्तर पर रगड़ने के लिए मालिश करके इतना सख्त बनाया है. चल भें की लोदी मसल जल्दी नहीं तो जेरी जवानी का दर्शन साड़ी दुनिया को करता हु अभी.
लालू की ये धमकी शबाना के लिए काफी थी उसके हाथ लालू के लुंड पर हौले हौले चलने लगे वो एक फर्स्ट टाइम की तरह बस खानापूरी करने के लिए लालू के लुंड पर हाथ फिरा रही थी.
लालू: साली कुटिया की बच्ची हाथो में जान नहीं है क्या साली चिकन मटन कहती होगी इतना हत्ता कट्टा शरीर बना रखा है लुंड मसलते वक़्त ऐसा लग रहा है हाथो में जान hi नहीं है. चल ढंग से रगड़ खाल आगे पीछे होनी चाहिए वर्ण अभी तेरी इज़्ज़त का चबूतरा बनता हु. चल हाथ चला रुंडी चला हाथ ज़ोर ज़ोर से.
लालू की उग्र होती आवाज़ ने शबाना को खौफ से भर दिया था और उसने अपने हाथो को तेज़ तेज़ लालू के लुंड पर चलना शुरू कर दिया. शबाना के तेज़ तेज़ चलते हाथो ने लालू के लुंड को आकर बढ़ाने पर मजबूर कर दिया और जल्द hi लालू का लुंड अपने विकराल रूप में शबाना की आँखों के सामने था. अपने लुंड के पूर्ण आकर में आ जाने के बाद लालू ने शबाना के हाथ रुकवा दिए और अपने लुंड के आगे के सुपडे से शबाना के होंठो पर दस्तक देने लगा. शबाना अपना चेहरा इधर उधर करने की कोशिश कर रही थी पर लालू तो जैसे आज शबाना से लुंड चुसवाने का सोच कर आया था. शबाना के बार बार चेहरा घूमने ने एक बार फिर लालू को आप खोने पर मजबूर कर दिया.
लालू: साली मादरचोद बेहेन की लोदी क्या ड्रामा कर रही है कल साली मेरा मूट पि गई आज लुंड मुँह में लेने बड़ी पाकीज़ा बन रही है. चल मुँह खोल, खोल नहीं तो दुबारा नहीं कहूंगा खोल जल्दी.
लालू शबाना गन्दी से गन्दी गालिया दे रहा था जिन्हे सुन कर hi शबाना को खुद पर घिन आ रही थी अब और गली सुनने की शबाना में हिम्मत नहीं थी और लालू रुकने वाला नहीं था उससे किसी दया की उम्मीद करना बेकार था वो जो करने आया था करके hi मानेगा इसलिए शबाना ने भी अपना कलेजा मजबूत कर लिया और अपना चेहरा स्थिर करके अपनी आँखे बंद कर्ली. शबाना को हथियार डालते देख लालू के होंठो पर भी मुस्कान आ गई वो समझ गया की उसने इस ज़हीन पाक '. महिला को बेज़्ज़ती में इस मुकाम तक ला दिया था की वो अब और विरोध करने की हिम्मत नहीं कर पाएगी. लालू अपना लुंड शबाना के होंठो पर फिरने लगा पर शबाना के होंठ अब भी बंद थे उसकी सासे तेज़ तेज़ चल रही थी उसने आज तक अपने पति का भी लुंड मुँह में नहीं लिया था और आज एक गैर '. मर्द उसकी मर्ज़ी के खिलाफ उसके मुँह में अपना लुंड दाखिल कर रहा था.
लालू: चल मुँह खोल मुँह में ले मेरा लुंड और खबरदार इसे दातो से कटा पहले hi आगाह कर देता हु कोई भी ऐसी वैसी हरकत करने की सोची भी न तो अपने माँ बाप और बहनो के बारे में सोच लेना. चल अब टाइम पास मत कर मुँह खोल जल्दी.
शबाना ने कलेजा मजबूत करके बड़े भरी मन से अपने होंठो को हल्का सा खोला भर hi था की लालू पूरी ताकत के साथ अपना लुंड शबाना के मुँह में दाखिल कर दिया. लुंड के शबाना के हलक में अंदर तक उतर गया.
लालू: माँ की छूट भोसड़ीवाली क्या गरम मुँह है तेरा साला लगता है दो मिनट भी नहीं संभल पाउँगा ये गरमी.
लालू कुछ देर यही अपना लुंड शबाना के हलक तक ठंसे रहा शबाना अपने हाथो को लालू के पेअर पर ज़ोर ज़ोर से पटक रही थी पर उस सांड जैसे शरीर वाले लालू पर उन मुक्को का कोई असर नहीं हो रहा था. शबाना का सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था पर लालू को शबाना की हालत की कोई परवाह नहीं थी उसे बस अपने मज़े से मतलब था. कुछ पल यही अपना लुंड शबाना के मुँह में रखने के बाद लालू ने अपना लुंड शबाना के मुँह से बहार निकला शबाना की आँखों नाक मुँह सब जगह से पानी निकल आया था.
उसने सपने में भी नहीं सोचा था की एक मर्द इस हद तक जल्लाद हो सकता है. शबाना ने बड़ी मुश्किल से अपना कलेजा मजबूत करा था पर इस पहले अनुभव ने hi उसकी हिम्मत को चकनाचूर कर दिया पर लालू अभी शांत नहीं हुआ था उसने एक बार फिर अपना लुंड मुँह खोल कर खास्ती शबाना के खुले मुँह में दाखिल कर दिया. शबाना ने उसे पीछे धकेलने की कोशिश करि पर उसकी हर कोशिश लालू की ताकत के आगे बेकार थी.
लालू: देख साली ये नौटंकी बंद कर तू जितना ड्रामा करेगी तुझे उतनी hi ज्यादा तकलीफ होगी और अगर चुपचाप बिना किसी ड्रामे के करेगी उतना मज़ा आएगा. बोल और तकलीफ दू तुझे.
शबाना ने न में सर हिला दिया.
लालू: गुड गर्ल चल अब हलके हलके से मेरे लुंड को चूस तूने कल बताया था तेरी सहेली ने तुझे सेक्स की ट्रेनिंग दी तो लुंड चूसना भी सिखाया होगा और अगर नहीं सिखाया तो आज मई सीखा दूंगा. चल अपने होंठो को गोल करके मेरे लुंड को अपने मुँह में आगे पीछे करती रह.
शबाना ने मान लिया था लालू के आगे उसका कोई ज़ोर नहीं चलने वाला है तो हाथ पेअर चलकर कोई फायदा नहीं तो वो अपने होंठो को लालू के लुंड पर आगे पीछे करने लगी. लालू भी अपने हाथ से शबाना के मुँह को आगे पीछे कर रहा था. वो ये तो समझ गया था की ये शबाना के लुंड चूसने का पहला अनुभव है और ये उसकी चूसै में साफ़ झलक रहा था पर फिर भी शबाना के मुँह की गर्मी hi लालू के लिए काफी थी. इस वक़्त उसे लुंड चूसने में माहिर करने का वक़्त नहीं था क्युकी लालू को शबाना के रूम में काफी देर हो चुकी थी नेहा कभी भी आ सकती थी. इसलिए लालू ने शबाना के सर को पीछे से धकेल कर तेज़ तेज़ अपने लुंड पर आगे पीछे करना शुरू कर दिया.
शाबर के सर पर पड़ा वैल लालू की उत्तेजना को और बड़ा रहा था. उसका लुंड शबाना के मुँह के अंदर hi तेज़ तेज़ झटके खा रहा था वो झड़ने के करीब था और शबाना भी ये बात समझ गई थी और उसने अपना चेरा पीछे हटाने की भरसक कोशिश की पर शबाना की कोशिश के साथ hi लालू ने भी उसके सर पर अपनी पकड़ और मजबूत करदी और एक बार फिर अपना लुंड शबाना के हलक में अंदर तक उतर दिया. और शबाना के मुँह की गहराई तक पहुंचते hi लालू के लुंड ने शबाना के मुँह के अंदर hi उलटी करना शुरू करदी. लालू का सारा वीर्य शबाना के मुँह के अंदर निकल कर उसके हलक से होता हुआ उसके पेट में जा रहा था. जब तक लालू के वीर्य का आखिरी कटरा तक नहीं निकल गया लालू ने अपना लुंड शबाना के मुँह से नहीं निकला.
सारा वीर्य निकल जाने के बाद लालू ने शबाना के सर पर अपनी पकड़ ढीली करदी और अपना लुंड शबाना के मुँह से बहार निकल लिया. लालू की पकड़ से आज़ाद होकर शबाना ने वही ज़मीन पर थूक थूक कर जितना हो सकता था अपना मुँह में भरा वीर्य बहार थूकने की कोशिश की. लालू झड़ने के बाद आँखे बंद करे अपने मज़े में अलग hi दुनिया में खड़ा था जब वो थोड़ा रॉल्स हुआ तो उसने शबाना को ज़मीन पर अपना वीर्य थूकते हुए पाया.
लालू: साली मैंने अपना वीर्य तेरे मुँह में इसलिए निकला था ताकि तू उसे यहाँ ज़मीन में थूक कर बर्बाद करदे साली इसी वीर्य से बच्चा बनता है और तू मेरे वीर्य की इस तरह बेज़्ज़ती कर रही है इसका सबक तुझे सीखना पड़ेगा ताकि आगे के दिन के लिए तू दुबारा ऐसी हिमाकत करने की सोचे भी नहीं. चल जितना वीर्य तूने अभी ज़मीन में थूका अब जीभ निकल निकल कर चाट चाट कर उसे वापस अपने मुँह में ले.
लालू की ये बात सुन कर तो शबाना की कान सुन्न पद गए उसे अपने कानो पर विश्वास नहीं हुआ.
लालू: चल तेरे इस थूक को और टेस्टी बना देता हु इसमें अपना थूक मिलकर.
लालू ने ज़मीन पर पड़े शबाना के थूक पर खुद भी थूक दिया.
लालू: चल अब चाट जल्दी चाट.
शबाना हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाते हुए: नहीं सॉरी आगे से नहीं करुँगी इस बार माफ़ कार्डो आगे से नहीं करुँगी.
लालू: नौटंकी नहीं तुझे बोलै था मैंने कोई ड्रामा नहीं जो बोलै है चुपचाप वो कर पूरा दिन यही तेरे पास नहीं बैठा रहूँगा मई चल जल्दी चाट.
शबाना हाथ जोड़े लालू से दया की भीक मांग रही थी.
लालू: तू ऐसे नहीं मानेगी तेरा एक वीडियो अपलोड कर hi देता हु तब तेरी अकाल ठिकाने आएगी.
शबाना: नहीं नहीं ऐसा मत करना मई चाटूँगी चाटूँगी मई.
शबाना एक बार फिर ,,., की मुद्रा में झुक कर अपना चेहरा ज़मीन पर पड़े अपने और लालू के थूक के करीब ले आई और आँखों में आसनु भरे हुए अपनी जीभ निकल कर ज़मीन पर पड़ा लालू का वीर्य मिला थूक चाट चाट कर साफ़ करने लगी.
उसे अंदर से उबकाई सी आ रही थी पर उसे काबू करते हुए ज़मीन चाट रही थी. वो अभी ज़मीन चाट hi थी की इसे अपने वैल पर कुछ पानी गिरता हुआ महसूस हुआ जो उसके गालो से बेहटा हुआ ज़मीन पर आ रहा था. उसने अपना चेहरा घुमा कर देखा और वो शॉक रह गई क्युकी लालू उसके चेहरे उसके वैल पर hi खड़ा खड़ा मूट रहा था. उसने उठने की कोशिश की पर लालू ने अपना मूट रोककर शबाना के चेहरे को अपने जूते से ज़मीन पफ दबा दिया.
लालू: तू फीका फीका थूक चाट रही थी तो सोचा इसे थोड़ा नमकीन बना दू इसलिए इसमें अपनी पेशाब मिला दी चल मई ज़मीन पर मूट रहा हु और तू जीभ निकल निकल कर ज़मीन पर बहती मेरी पेशाब को चाट चाट कर पीयेगी और मेरी पेशाब की एक बूँद भी बर्बाद नहीं जनि चाहिए. जब मई आया था तो तू ,,., ऐडा कर रही थी तो ये समझ ले तुझे तेरी ,,., का फल मिल गया. उस वक़्त तू ,,., में झुक कर दुआ मांग रही थी अब तू ,,., में झुक कर मेरा मूट पिएगी. चल जल्दी कर जल्दी जल्दी काम ख़तम कर मुझे बहार भी जाना है चल जल्दी चाट मेरा मूट.
लालू अब भी शबाना के सर को अपने जूते से ज़मीन पर दबाए था और शबाना का चेहरा ज़मीन पर बहती लालू की पेशाब से गीला हो चूका था. शबाना जानती थी बिना अपनी बात मनवाए लालू यहाँ से जाएगा नहीं और उसकी बात मैंने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं है. तो उसने अपनज जीभ निकल कर ज़मीन पर बहती लालू मि पेशाब को भी चेतना शुरू कर दिया. शबाना को अपना मूट छत्ते देख लालू ने उसके सर से अपना जूता हटा लिया और अपने लुंड से धीमे धीमे पेशाब की धार नीचे गिरना शुरू करदी जो शबाना के वैल को भिगोती हुई ज़मीन तक जा रही थी. पर शबाना ने भी अपने हालात से समझौता कर लिया था और वो कुटिया की तरह जीभ निकल निकल कर ज़मीन पर गिरती लालू को पेशाब को चाट चाट कर साफ़ कर रही. जिस मुद्रा में कुछ देर पहले उसने ,,., पड़ी थी अब उसी मुद्रा में झुके हुए वो एक आदमी की पेशाब चाट रही थी. लालू ने अपनी साडी पेशाब वही कमरे की फर्श पर खली करदी और शबाना ने चाट चाट कर लालू की पेशाब का कटरा कटरा पी लिया.
शबाना आँखों में आंसू भरे वही लालू की पेशाब से गीली हुई ज़मीन पर बैठी थी.
लालू: वाह साली तू तो सचमुच कुटिया बन गई कुटिया की तरह चाट चाट कर क्या फर्श साफ़ करा है. कल की बजाए आज तुझे इस तरह पेशाब पिलाने का अपना अलग मज़ा है. चल अब अभी मई चलता हु तू भी खुद को अच्छी तरह से साफ़ कर लेना और कमरे को भी अच्छे से साफ़ कर देना वर्ण पेशाब की बदबू से महेकता रहेगा. अब मई रात में आऊंगा कल रात की तरह पर घबरा कल रात की तरह तेरा बंग नहीं करूँगा न अभी की तरह तुझे अपना मूट चटवाऊंगा आज रात को बड़े प्यार से तेरे साथ सुहागरात मनाऊंगा. पर मेरी एक शर्त है तू उस तरह तैयार होना जैसे निकाह के बाद अपने पति के लिए तैयार हुई थी एक मुसलमान औरत की तरह hi तैयार होना आज रात मई तेरा शौहर बन कर आऊंगा और तुझे अपने बच्चे की माँ बनाऊंगा. यही चाहती है न तू तो आज रात तेरी ख्वाहिश पूरी कर दूंगा बस जैसे बताया है वैसे तैयार रहना और मुझे गुस्सा मत दिलाना. मुझे खुश रखेगी तो तू भी खुश रहेगी. चल चलता हु रात में मिलूंगा और है जाते जाते तुझे एक बार और याद दिला दू की ये सब बहार किसी को पता नहीं चलना चाहिए खासकर तेरी सहेली नेहा को वर्ण तू जानती है मई क्या करूँगा जानती है न.
शबाना ने हां में सर हिला दिया.
शबाना को अपने हुक्म का गुलाम देख कर लालू मुस्कुराता हुआ सिटकनी खोल कर दरवाज़े के बहार निकल गया. शबाना फूट फूट कर रोना चाहती थी पर वो इस कदर मजबूर थी खुल कर चिल्ला चिल्ला कर रो भी नहीं सकती थी इस दर से की कही कोई उसका रोना सुन न ले. वो वही पेशाब से गीली ज़मीन पर सर रख कर लेट गई और कुछ पल यही ज़मीन पर लेती रही और मन hi मन उपरवाले से ये सवाल कर रही थी की आखिर उसकी ,,., में क्या कुमी रह गई जो उसका उसे ये फल मिला. वो इस क़दर अंदर से टूट चुकी थी की अब ज़मीन से आती पेशाब की बदबू से भी उसे कोई फ़र्क़ नहीं पद रहा था. कुछ पल बाद उसे महसूस हुआ की दरवाज़ा खुला है और किसी भी पल नेहा वापस आ सकती है और इस कमरे की हालत देख कर वो दस सवाल पूछेगी और फिलहाल वो उसे कुछ बताने की हालत में नहीं है. इसलिए उठ कर सबसे पहले शबाना ने दरवाज़ा बंद करा फिर कमरे की फर्श को गीले कपडे से अच्छी तरह साफ़ करा. फर्श साफ़ करते हुए उसे खुद पर घिन आ रही थी क्युकी अभी कुछ देर पहले इसी फर्श को उसने जीभ से छठा था. फर्श साफ़ करके उसने कमरे में सेंट छिड़क दिया ताकि कमरे से पेशाब की बदबू चली जाए फिर बाथरूम में जाकर शावर ों करके उसके नीचे बैठकर अपनी इस बुरी हालत की वजह सोचने लगी की क्या उसकी गलती इतनी बड़ी की उपरवाले ने उसे सजा देने के लिए लालू जैसा हैवान भेज दिया.
वो काफी देर तक शावर के नीचे यही बैठी सोचती रही और उस दिन को कोसती रही जब उसने नेहा की बात मानकर धामु को सडके करने की कोशिश करि थी पर अब पछताए हॉट क्या जब चिड़िया चुग गई खेत. क्युकी जब उसे सही गलत में चुनाव करना था तब उसने एक गलत रास्ता चुना और लालू के रूप में उस गलती का एक भयंकर परिणाम उसके सामने था जिससे निकलने का फिलहाल उसे कोई रास्ता समझ नहीं आ रहा था सिवाए इसके की वो बचे कुछ दिन चुपचाप लालू की बात मान ले तो शायद यहाँ से जाने से पहले लालू उसके सरे वीडियो डिलीट करदे. शबाना में अब भी उपरवाले में यकीन कायम था और वो दुआ कर रही थी की वो उसे लालू नाम की इस मुसीबत को सहने की छमता दे पर देखना था लालू अभी हुए किस हद तक गिरता था और शबाना को कितना ज़लील करता था.