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From this section you can read all the indian sex stories arranged from the various users. So what you are going to read stories like 'Office girl with her lover', 'Indian mom with her son. Lots of erotic tales are posted here. So guys hold your cock for the amazing sexual fantasies.
मम्मी की चूचियों ब्लाउज में कैद बाहर आने को फाड़फडा रही थी।
असलम ने मम्मी के नंगे चिकने पेट को देख कंट्रोल खो दिया अपने होठों को मम्मी के पेट पर रख मम्मी की नाभि को चूमने लगे।
आज पहली बार था कि किसी मर्द ने मम्मी की नाभि को चूमा और चाटा था,
मम्मी के मुंह से सिसकारियां फूटने लगी ना चाहते हुए मम्मी आपको नहीं रोक पाईं
और अपने हाथ को असलम के सिर पर रख कर आआआआआहह उउउउउउहहहहहह...
मम्मी; जी रुक जाइए ये क्या कर रहे थे गुदगुदी होती है
असलम मम्मी के ऊपर आकर अपने होठों को मम्मी के होठों पर रख दिया और मम्मी के होंठो को चूमने लगे।
मम्मी के ऊपर लेटने के कारण असलम का लंड जो खड़ा था मम्मी की चूत के पास टकरा रहा था
मम्मी को असलम का खड़ा लंड अपनी चूत पर साफ महसूस हो रहा था,
मम्मी अपनी टांगें चौड़ी कर असलम का भरपुर साथ दे रही थी दोनो एक दूसरे से सब कुछ भूल गए बस एक दूसरे के होंठो को चूम रहे थे।
दोनो को एक दूसरे के होंठो को चूमते एक अलग सा नशा चढ़ रहा था नशे में उनकी आंखे लाल हो गई थी
असलम; बेगम साहिबा कितनी हॉट हो तुम कितनी नरम और अपना एक हाथ नीचे की ओर सरका कर मम्मी की चुची पर रख दिया।
और
मम्मी के नागपुरी संतरे को अपनी मुट्ठी में भर कर
दबाने लगा।
असलम ने मम्मी की पहाड़ जैसी चुची को अपने हाथ में पकड़ कर दबाया,
मम्मी की चूचियां कितनी टाइट थी एक दम पत्थर की तरह सख्त, शर्म से लाल मम्मी के मुंह से कुछ भी नहीं निकल रहा था,
असलम ने अपने हाथ को नीचे सरकते हुए मम्मी का ब्लाउज़ जहां शुरू होती थी वहीं ले जा कर अपने हाथ को मम्मी के ब्लाउज़ के अंदर घुसने की कोशिश करने लगा।
मम्मी का ब्लाउज़ काफी टाइट था पर दबाने से असलम की तीन उंगलियां मम्मी के ब्लाउज़ में अंदर घुस गई और मम्मी की चुची के निचले भाग को छूने लगी,
मम्मी ने अपनी सांस छोड़ी जिस से मम्मी का ब्लाउज़ थोड़ी ढीला हो गए जिस से असलम का पूरा हाथ मम्मी की पहाड़ जैसी सख्त चूचियों तक पहुंच गया
असलम एक हाथ मम्मी की चुची पर रख दिया और मम्मी की चुची को जोर जोर से दबाने लगा,
असलम के होठों तो मम्मी के नाज़ुक होठों का रस चूसने लगा,
मम्मी भी असलम होंठो पर झुकती
उसको होंठो को चूमने लगी,
एक मर्द को आगे बढ़ने के लिए और क्या चाहिए
असलम मम्मी को चूमते हुए सुनीता बेगम आप तो आग हो ।
और जब की उसके दोनो हाथ मम्मी की चुचियों और मम्मी की गांड का मजा ले रहे थे। मम्मी भी मस्ती में आ कर असलम के नीचे वाला होंठ को अपने होंठो में लेकर चूसने लगी।
मम्मी और असलम के दूसरे के होंठो को ऐसे चूस रहे थे की जैसे वो जन्मों से प्यासे हो
मम्मी अब पूरी तरह से असलम को अपने बदन से चिपका रही थी उसको रोक नहीं रही थी
मम्मी सुनीये जी लाइट तो बंद कर दो, मुझे शर्म आती है
असलम पक्का खिलाड़ी था वो मम्मी जैसी माल को इतनी आसानी से कैसे जाने देता,
असलम; बेगम आज की रात तो मिलन की रात है, शौहर से कैसा सरमाना
असलम का हाथ फिर से मम्मी के ब्लाउज़ के अंदर घुस चुके थे और मम्मी के रस से भरे पहाड़ जैसे चूचों पर अब असलम के मजबूत हाथ का कब्ज़ा हो चुका था।
असलम मम्मी को अपने बदन से चिपकाये उसके होंठों का रस चूसने के साथ मम्मी की चुची को अपने हाथ में पकड़ कर हॉर्न की तरह से दबा रहा था।
मम्मी अपनी चुची को पहली बार किसी मर्द के हाथों से अपनी पहाड़ जैसी चूचियों को दबवाने से मम्मी को जो मजा आ रहा था वो उसी भूल भुलैया की दुनिया में खोई बस असलम के नीचे पड़ी थी,
असलम मम्मी के होठों को चूमते उनकी चूचीयों से खेलते अपने पैर की अंगुठे से मम्मी की मखमली पैरो को हल्का हल्का सहलाने लगता है...
मम्मी के सारे शरीर में गुदगुदी जैसी महसूस हो रही थी,
असलम मम्मी को अपने और घुमा लेता हैं...
दोनों की नज़र आपस में मिली थी...
मम्मी ये देख के एक दम शर्मा जाती है और अपने नज़र नीचे कर लेती है...
असलम मम्मी से धीरे से बोलते हैं।
मेरी जान शौहर से क्यों शर्मा रही हो....मैं तुम्हारा शौहर हूं...
मैं चाहता हूं तुम भी खुल के मज़े लो, और मेरा पूरा साथ दो हमारे इसे प्यार में...ऊपर देखो ना मेरी आंखों में...मैं तुमसे कितना प्यार करता हूं....
जैसे ही मम्मी ने अपना चेहरा ऊपर करके असलम की आंखों में देखा है तो..तो मम्मी और असलम का होंठ एक समान आ गया..
असलम अपने होंठ बढ़ा के मम्मी के खूबसूरत चेहरे को हल्का सा सहलाता हैं....
जिस से मम्मी फिर से अपनी आंखें बंद कर लेती है..
मम्मी फिर से मुस्कराती हुई असलम से बोली सुनीये ना अभि के अब्बू लाइट बंद कर दीजिए ना मुझे शर्म आती है
असलम; जान अब हम दोनो में शर्म कैसी,
हम दोनो जिस्म एक जान हैं क्या मुझे अपनी बेगम साहिबा की खूबसूरती देखने का हक नहीं तो मम्मी ये सुन कर चुप हो गई।
असलम फिर धीरे से मम्मी की गुलाब की पंखुड़ी के जैसे होठों की ओर देख एक मुस्कान के साथ आगे बढ़ कर मम्मी के लाल गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठो पर अपने होंठ रख दिए।
जैसे ही असलम ने अपने होंठ मम्मी के होंठ से लगाया, मम्मी भी थोड़ा आगे बढ़कर असलम के होंठ को अपने रसीले होंठों से मिला दिए।
मम्मी भी असलम का पूरा साथ देने लगती है और वो भी असलम को किस करने लगती है...
मम्मी भी अब असलम की जीभ को भी अपने मुंह के अंदर लालीपॉप की तरह चूसने लगी...
मम्मी के जीभ चूसने से असलम के मुंह से दोनों की होंठों की मिठास का पानी निकलने लगते हैं...
असलम के मुंह का पानी अब मम्मी धीरे-धीरे पीने लगती है...
कभी असलम मम्मी की जीभ पी रहा था तो कभी मम्मी असलम के होंठों का रसपान कर रही थी.....
दोनो की ये होंठों के मिलन का मधुर खेल चल रहा था... दोनो अब अपने मैं मस्त थे... दुनिया से बेखबर... प्यार का मजा ले रहे थे... और रूम में चुंबनों की मधुर की आवाज गूंज रही थी... ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊम्मा आआआआआहहप्प्प्प्प्प्च्च्ह
असलम मम्मी की पहाड़ जैसी चूचियों को अपने हाथ से कस कर पकड़ कस कस के ब्लाउज के ऊपर से ही दबा रहा था
मम्मी आह भर रही थी।
असलम ने फिर मम्मी के ब्लाउज का पहला हुक खोला और फिर दूसरा हुक.....
मम्मी असलम का हाथ पकड़ लेती हैं, "...
असलम कहा माने वाला ब्लाउज के हुक को ना खोलने के लिए..." और असलम ने मम्मी के ब्लाउज के हुक को खोलना जारी रखता हैं....
मम्मी भी मना नहीं कर रही थी मम्मी का ब्लाउज पूरा तरह खुल जाता है।
असलम मम्मी की ब्रा में कैद दो सुंदर पहाड़ जैसी चूचियों को देख कर पागल हो जाते हैं। ....
फिर मम्मी के ब्लाउज़ बदन से निकाल ने लगता हैं...ब्लाउज थोड़ा टाइट था...निकलने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी...
मम्मी खुद ही वो ब्लाउज़ निकालने से मुस्कराती हुई असलम की मदद करती है
अब मम्मी खुद को असलम के सामने खुद को ब्रा देखकर आंखे बंद करते हुए बोली, सुनिए जी
असलम; हा
मम्मी; वो लाइट बैंड कर दीजिए ना मुझे शर्म आती है
असलम; बेगम साहिबा अपनों से भी कोई शर्म करता है अब हम एक हैं भले ही दो जिस्म है पर जान तो एक ही है
इतना कहते ही उन्होंने पहली बार आरिया की राइट चुची को ब्रा के ऊपर से दबाया
मम्मी: आआआआआहह उउउउउउहहहहहह ससससससीईईईईईईई अभि के अब्बू ज़रा धीरे,,
असलम के एक हाथ मम्मी की चुचियों को ब्रा के ऊपर से पकड़ कर दबाने लगे,
वो दोनो एक दूसरे के बदन के सामने की कोशिश करने लगे,
पूरे कमरे में उन दोनों की सिसकियों के साथ मम्मी की चुड़ियों की खनक गूंज रही थी।
असलम मम्मी के बदन मसाले जा रहा था और मम्मी की मस्ती सातवे आसमान पर थी,
वो तो मस्ती में अपने बाहें फैला कर अपनी चादर को अपनी मुट्ठी में भर कर खींच रही थी,
असलम मम्मी के होंठो को चुसते हुए नीचे की तरफ आए और असलम ने अपना मुंह मम्मी की ब्रा के ऊपर रख कर मम्मी की चुचियों को चूमने लगा
मम्मी के निप्पल एकदम खड़े और कड़क हो गए थे, वो ब्रा के ऊपर से साफ नजर आने लगे थे।
असलम ने अपना मुंह मम्मी के निप्पल पर रख कर उसे ब्रा के साथ अपने मुंह में भर लिया
कोई भी औरत हो जब कोई मर्द उसके निप्पल को अपने होंठों से दबा कर चूसे उसे होंठों से खींचे उस औरत को कितना मज़ा मिलता है ये वो ही जानती है और मम्मी को तो ये मौका था,
मम्मी को आज जीवन में पहली बार मिल रहा था
(क्योंकि पापा ने मम्मी से ऐसे कभी प्यार नहीं किया था)
फिर असलम ने मम्मी के ब्रा के ऊपर से अपने मुंह से मम्मी के निप्पल को पकड़ कर धीरे से काटने लगा
मम्मी दर्द और मज़े के मिलें जुले परिणाम से चिंहुक सी गई मम्मी मुँह से बस यहीं निकला ..
असलम मम्मी की ब्रा के ऊपर से मम्मी के निप्पल को अपने होठों से भरकर हल्के हल्के काटने लगा तो मम्मी के मुंह से केवल आआआआआहह उउउउउउहहहहहह ससससससीईईईईईईई ही निकल रही थी मम्मी अपनी बाहें फैला कर असलम के नीचे अपनी टांगें फैला कर मज़ा ले रही थी,
असलम के थुक से मम्मी की ब्रा पूरी गीली हो गई जिस से मम्मी की चुचियों की शेप की ब्रा से ही साफ नजर आने लगी थी
मम्मी की ब्रा के अंदर खड़े गुलाबी रंग के निप्पल किसी भाले की नोक की तरह खड़े साफ दिखा रहे थे।
असलम मम्मी के उपर से थोड़ा सा उठा और मम्मी की ब्रा के अंदर हाथ डाल उसकी मासूम सी पहाड़ जैसी गोल मटोल रस से भरी हुई असलम के रुक से सराबोर चुचियों को बाहर निकाल लिया।
आज असलम दुसरा मर्द था जो मम्मी की नारंगी रंगत को देख रहा था और वो भी इतने करीब से थी..
किसी मर्द के सामने इस तरह अपनी नंगी चुचियों को घूरते हुए देख कर मम्मी को शर्म आ रही थी, साथ ही उसके अंदर एक अलग ही तरह की उत्तेजना हो रही थी,
कि कोई मर्द उसकी चुचियों को इतने लालची नज़रों से देख रहा था,
मम्मी के खड़े गुलाबी निप्पल इतने पास से देख कर असलम के मुंह में पानी आ गया,
असलम अपने होठों पर जब फिरते लंबी लंबी सांसे छोड़ने लगा,
मम्मी अपनी चुचियों पर असलम की गरम सांसे महसूस कर रही थी मम्मी के बदन भी मस्ती की लहर दौड़ गई और मम्मी को और उत्तेजित कर रही थी.
असलम मम्मी के साथ लेट गए और अपनी टांगो को मम्मी की चिकनी टांगो के बीच फंसा लिया, साथ ही मम्मी की दोनों टांगों को फैला कर मम्मी की चूचियों को अपने दोनो हाथो में भर लिया,
मम्मी सिर्फ पेटीकोट में थी उसकी साड़ी उसके बदन पे से कब असलम ने उतार दी थी ये मम्मी को भी नहीं पता चला....
अब मम्मी असलम के सामने सिर्फ पेटीकोट में और ऊपर सिर्फ ब्रा में थी...
और मम्मी गांड बिल्कुल ऊपर के दिखती है असलम को....
असलम से ये देख के उन्हें नहीं रहा गया और वो अपने एक हाथ मम्मी के पेटीकोट के ऊपर से ही मम्मी के गांड पर अपने हाथ रख देते हैं... और मम्मी के उपर चढ़ कर मम्मी के होंठो पर अपने होंठ रख दिए
असलम मम्मी को बांहों में भर कर अपने होंठ से मम्मी के रस भरे होंठों को चूस रहा था और मम्मी भी असलम के होंठो को अपनी बाहों में भर कर चूस रही थी
कब मम्मी की दोनों टांगों फैला गई मम्मी को पता नहीं चला,
मम्मी का पेटीकोट मम्मी की दूधिया गोरी चिकनी टांगों से सरक मम्मी की बड़ी गांड़ पर आ गया था और मम्मी के पहाड़ जैसे चूतड़ खुद पर खुद असलम असलम की आंखों के सामने थे।
णतम
असलम मम्मी के चूतड़ को अपने कठोर हाथ में ले के हल्का सा दबा देता, ....जैसे ही मम्मी के भारी-भरकम चूतड़ों को दबाता मम्मी के मुंह से आआआआऊऊऊऊऊऊऊऊचच्च निकालने लगती।
मम्मी की ये सिसकियां मज़े में मम्मी के मुंह से फूट रही थी,
असलम मम्मी के बड़े बड़े चूतड़ों से पकड़ दबा भींच कर मम्मी को ओर भी ज़्यादा गरम कर रहा था,
मम्मी फिर शांत हो के असलम के साथ खेल का आनंद लेने लगती है.... कुछ देर ऐसे ही मम्मी की गांड को सहलाने और मसलने के बाद....
असलम मम्मी की एक टांग उठा कर चूमने लगा,
मम्मी के मुंह से सिस्की निकल गई आआआआआहह उउउउउउहहहहहह ससससससीईईईईईईई,,
फिर असलम पूरी तरह मम्मी के ऊपर चढ़ जाता हैं और मम्मी असलम के नीचे अपनी बड़ी सी गांड़ फैला असलम के नीचे पूरी तरह से दब सी जाती है.....
अब असलम का लंड मम्मी की चूत से रगड़ खा कर बिल्कुल लोहे के जैसे सख़्त हो गया था
असलम ने मम्मी को बिस्तर से हटा दिया और मम्मी को अपनी बाहों में भर लिया
असलम मम्मी की गर्दन और चुचियों की बीच की घाटी पर अपना मुह लगा कर चूमने लगा,
मम्मी भी सब कुछ भुला कर असलम के साथ ऐसे लिपट गयी जैसे कोई नागिन चंदन के पेड़ से लिपट जाती है
मम्मी भी असलम के बदन पर अपने मुलायम हाथ फिराती हुई कभी कंधे को चूमती और
कभी अपने होंठो को असलम के गालों से हटा कर चूमने लगी।
असलम ने अपने हाथ से मम्मी को बांहों में कसता कभी अपने हाथ को मम्मी की कमर से सरका कर नीचे उसके चूतड़ों पर रख कर दबाते हुए मम्मी के कान के पास अपना मुंह ले जा कर बोला, सुनीता डार्लिंग कैसा लग रहा है मज़ा आ रहा है।
भले ही मम्मी अब असलम की बेगम थी और शौहर बेगम के बीच तो ये सब होता ही है
असलम के सवाल पूछने पर मम्मी ने शर्म से अपने मुंह असलम की चौड़ी छाती में छुपा लिया।
असलम अपने सीने से चिपकी अपनी जवान गुलाबी होंठ वालीं बेगम की बड़ी गांड़ को सहलाता फिर से पूछने लगा उसके चेहरे को ऊपर उठा तो मम्मी ने शर्म से घूम गई।
तो असलम ने मम्मी को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया और मम्मी के गाल और
गालों को चूमने लगा तो मम्मी मस्ती के रथ पर सवार आंखे बंद किये लम्बी लम्बी सांसे छोड़ने लगी।
और पलट कर घूम कर फिर से मुस्कराती हुई असलम से लिपट गई।
असलम; सुनीता डार्लिंग क्या हुआ आ रहा है ना मज़ा
मम्मी ने एक लंबी सांस छोड़ कर अपनी सहमती दी, मम्मी अपनी आंखें बंद कर लम्बीं लम्बीं सांसें छोड़ रही थी,
असलम; बेगम साहिबा अपनी आंखें खोलों,
मम्मी; मुझे शर्म आती है
असलम; बेगम साहिबा, गुले गुलज़ार मल्लिकायें हुस्न आज की रात तुम्हारी सारी शर्म दूर कर दूंगा फिर आज के बाद हम दोनो के बीच शर्म कहा रहती है, सुनीता जान क्या मैं तुम्हारा दूध पी सकता हूं ।
असलम के मुंह से अपनी चूचियां चूसने की बात सुन मम्मी ने शर्म से असलम के सीने में हाथ मारती हुई बोली धत् कितने बेशर्म हो,
असल; बेगम साहिबा बेशर्म होकर ही तो मज़ा आता है तूम भी बेशर्म होकर मज़ा लो।
मम्मी ने सरमाते हुए बोली धत् मुझे नहीं मालूम,
मम्मी की चुचिया जो पहाड़ जैसी खड़ी थी ऐसा लग रहा था जैसे दो बड़े हपशु आम बाल मम्मी के बदन से चिपकी हुई गुलाबी रंग के निप्पल जो एकदम से खड़े मानो अभी असलम को खुद निमंत्रण दे रहे थे आओ और इनका रस निचोड़ कर चूस लो।
असलम को इस तरह अपनी चुचियों को निहारते देख मम्मी शर्म से आंखे बंद किये ही बोली, सुनिये लाइट तो बंद कर दीजिये लेकिन उस समय असलम कैसे मम्मी की बात को सुनता वो तो अपनी जवान बीवी की सुंदरता और खूबसूरती को निहार रहा था,
असलम ने अपने दोनो हाथों को बढ़ा कर मम्मी की दोनो चुचियों को अपने हाथों में थम ली और उन्हें किसी हॉर्न की तरह कभी धीरे और कभी जोर से मसलने लगा,
मम्मी भी मस्ती मस्ती के घोड़े पर सवार होकर मज़ा से आहें भरने लगी आह ईईईईई ऊऊऊऊऊऊऊ सीईईईईईईईई ...
मम्मी के मुंह से सिसकारियां पराकाष्ठा पर थी, असलम तो मस्ती के घोड़े पर सवार मम्मी की जवानी का मज़ा लूट रहा था।
असलम अपने मन में सोच रहा था ( अभि देखो तुम्हारी मम्मी कैसे मेरे नीचे अपनी टांगें चौड़ी किये हुए पड़ी हैं और अब मैं तुम्हारी मम्मी का शौहर हूं आज मैं अपनी बेगम साहिबा को प्यार करके वाला हूं, और देखना चाहता हो तो यह देख सकते हो कि मैं अपनी बेगम साहिबा को कैसे ठोकता हूं,
और देखना अभि तुम्हारी मम्मी कैसे मज़ा से अपने पहाड़ जैसी चूचियों को चूसते हुए सुनीता बेगम की चूत में धक्के मारूंगा तो मेरी गुले गुलज़ार मल्लिकायें हुस्न कैसे नीचे से अपनी बड़ी सी गांड़ उछल उछल कर चुदवायेंगी अब ये मेरी हो गई हैं हमेशा हमेशा के लिए अपना मर्द शौहर मानेगी मुझे )
मेरी मम्मी सर्दी के मौसम में सिर्फ ब्रा पेटीकोट में बेंड पर लेटी मचल रही थी,
मम्मी को असलम की बांहों में मचल रही थी असलम के जिस्म की गर्मी से मम्मी को सर्दी का एहसास नहीं होने दे रही थी,
मेरी मम्मी तो कब से असलम के लौड़े असलम के नीचे अपनी टांगें चौड़ी करके चुदने के लिए तैयार थी,
असलम मम्मी के साथ मम्मी के ऊपर चढ़ा मम्मी को अपनी बहन से भर कर चूमने चाटते अपने होठों को कभी मम्मी के गालों पर ले जाता कभी मम्मी के गले को चूमता,
असलम मम्मी से बोला,
सुनीता बेगम गुले गुलज़ार इतनी कमाल की जवानी की मालकिन हो कर तड़प रही हो,
अब जब तुमने अपनी ये जवानी मेरे हाथो में दी है तो देखना कैसे तुम्हे जवानी के मज़े करवाता हू सच में बड़ी ही नमकीन हो सुनीता बेगम,
असलम मम्मी के ऊपर चढ़ा मम्मी के चेहरे से अपना चहेरा रगड़ते हुए मम्मी की गर्दन को चूमते बोला, मल्लिकाएं हुस्न क्या मैं तुम्हारी इस मदमस्त जवानी को आज रात चख सकता हूं
मेरी मम्मी असलम को इस समय कैसे इंकार कर सकती थी वो तो खुद मस्ती के घोड़े पर सवार थी मस्ती के नशे में बिगड़ती बोली, सुनीये ना अभि के अब्बू अब तो आप मेरे शौहर मैं आपको रोक कह रही हूं, मेरे हुस्न पर अब असलम शेख आपका हक़ है और मेरे रोकने पर आप कौन-सा रुक जाओगे, और हम काहे रोकेंगे अपने शौहर को,
मम्मी के मुंह से इतना सुनते ही असलम बेंड के ऊपर से उठा और अपनी शर्ट उतारने लगा
असलम शर्ट उतार उतार कर फर्श पर मम्मी की साड़ी पर फेंक दी
अब असलम के बदन पर सिर्फ पैंट थी असलम मम्मी की आंखों में देखते-देखते और मुस्कुराते हुए अपनी पैंट खोलने लगे मम्मी की नजर पर असलम की पैंट पर ही थी ,
हर औरत की तरह मम्मी की भी इच्छा थी कि मम्मी अपने होने वाले बच्चों के अब्बू का हथियार देखें कि वो कैसा ही था क्योंकि अब असलम के हथियार पर ही मम्मी जीवन की खुशी कायम थी जैसे ही असलम अपनी पैंट की ज़िप खोलने लगा मम्मी का गला सूखने लगा मम्मी अंदर एक अजीब सी उत्कृष्ट होने लगी और जैसे ही असलम अपनी ज़िप खोल कर अपनी पैंट को नीचे खींच लिया
मम्मी की आंखें असलम के लंड पर टिकी हुई थी असलम मम्मी आंखों में देखते मुस्करा रहा था और जैसे ही मम्मी की नजर असलम के अंडरवियर पर पड़ी मम्मी की आंखे फटी की फटी रह गई मम्मी ने अपने दोनो हाथों को अपने मुंह रख लिया,
मम्मी की आंखों के सामने अंडरवियर में खड़े असलम के लंड पर थी,
अंडरवियर में से असलम के लंड के नीचे लटक रहे बॉल जिन में माल भरा हुआ था साफ दिखायी दे रहे थे असलम भी जनता था कि मम्मी की आंखे उसके लंड पर ही है,
असलम भी मम्मी को ओर अधिक तड़पाने के इरादे से बिना किसी शर्म के अपने लंड को सहलाने लगा
कुछ देर अपने लंड को सहलाते हुए अपने अंडरवियर को नीचे खींच लिया और उसका कड़क लंड किसी कुतुब मीनार की खडी हो मम्मी की आंखो के सामने था
मम्मी असलम के जिस लंड से खेलने वाली थी, जो मम्मी की चूत की गहराई नापने वाला था,
अब वो मम्मी की आंखों के सामने था,
मम्मी जैसी औरत जो इतने बरसों से चुद रही थी असलम का लंड देख कर मम्मी का मुंह हैरानी खुला ही रह गया
जैसे मम्मी ने लंड नहीं कोई बहुत बड़ा अजगर देख लिया हो,
पापा के इलावा आज असलम दूसरा मर्द था जिसका लंड मम्मी देख रही थी, वैसे मम्मी गलत नहीं थी, मम्मी किसी पहले मर्द का लंड नहीं, मम्मी तो अपने शौहर का ही लंड देख रही थी, अब असलम मम्मी का शौहर ही था,
असलम; सुनीता बेगम आंखो खोलो ना देखो मेरी तरफ, तो मम्मी अपना चेहरा ढके मुस्कुराते हुए ना मेरी गर्दन हिलाने लगी
मम्मी असलम का बहुत बड़ा भयानक अजगर देख इतना डर गई थी और ना चाहते हुए
भी मम्मी के मुंह से निकला है हाय दईया ये क्या है हमार शौहर का हथियार तो मेरी चूनमुनीया फाड़ कर रख देगा,
असलम मम्मी के सामने अंडरवियर के ऊपर से अपने लंड को सहलाने लगे और अपने लंड को सहलाते बोले
सुनीता इधर देखो तो सही तो मम्मी किसी नयी नवेली दुल्हन के जैसे सरमाते हुए,
मम्मी; धत् कितने बड़े बेशर्म हो आप तो शर्म आती ही नहीं है,
असलम; बेगम साहिबा शर्म किस से आज तो हमारे मिलन की रात ही है और इस मिलन की रात में तुम शर्मा रही हो भला अपनो से भी कोई सरमाते है,
चलो मैं तुम्हारी शर्म दूर कर देता हूं पैंट तो मैंने उतार दी लो अंडरवियर तुम उतार दो देखना एक बार पास आ कर खुद अंडरवियर उतार कर निकालोगी तब शर्म नहीं आएगी,
मम्मी; , हाय अल्लाह कैसी बात करते हैं, बड़े बेशर्म हो ( वैसे असलम मम्मी को अपना अंडरवियर उतारने के लिए कुछ ग़लत तो नहीं बोल रहा था अब असलम मम्मी का शौहर था और असलम की बेगम साहिबा सुनीता की जिम्मेदारी थी असलम का अंडरवियर उतारने की,)
मम्मी ने मुस्कुराइए अपने चेहरे को ढंक कर ना मैं सर हिलाने लगी,
मम्मी को क्या पता था कि मम्मी का पाला इतने बड़े हथियार से पड़ने वाला है,
अंडरवियर के ऊपर देखने पर ही असलम का लौड़ा मेरी कलाई की जितना लंबा 9 इंच लंबा और 4 इंच मोटा था,
असलम; अच्छा सुनीता वैसे इसको तो अब इसको उतारने की जिम्मेदारी तुम्हारी ही है, बेगम साहिबा शौहर का अंडरवियर बेगम ही उतारती है, पहले अपने हाथो से उतारी है और फिर अपने होंठों से आज नहीं तो कल तुम इसको उतारोगी अपने हाथो से या फिर अपने होंठों से,
मम्मी अपने होंठों से असलम का अंडरवियर उतारने की बात सुन कर मुस्कराती हुई
( मम्मी के होंठों से अपना अंडरवियर उतारने की बात बोल असलम ने मम्मी को सीधे अपना लौड़े को चूसने के लिए बोल दिया था)
मम्मी; हाय दईया रे, हमार शौहर कितने गंदे है और इतने बदमाश होंगे हमें तो पता नहीं था,
असलम; जान आज तुम इसको मत निकालना पर कम से कम इधर तो देखो मेरी आंखों में डार्लिंग तो अब मम्मी असलम की बात कैसे काट सकती थी,
मम्मी सीधे बिस्तर पर ब्रा पेटीकोट में बेंड पर लेटी असलम की आंखो में देखने लगी,
मम्मी और असलम दोनो एक दूसरे की आंखो को में आंखे डाले खो से गए,
दोनो की ही आंखों में अलग ही नशा था एक अलग ही प्यास थी,
तभी असलम बोला जानेमन आज की रात तुम मेरा अंडरवियर नहीं उतारोगी पर मुझे तो अपनी कच्ची अपने होंठों से उतारने का मोका दोगी,
मम्मी अपना चेहरा ढके मुस्कुराते हुए ना मेरी गर्दन हिलाने लगी
असलम अपना अपना अंडरवियर उतार दिया और असलम का लंड ऐसे बाहर निकला जैसे बरसो की कैद से आज़ाद हुआ हो,
असलम अपने लंड को हिलाते मम्मी से बोला, सुनीता बेगम देखो ना
देखो आपकी इस जवानी ने इसकी क्या हालत कर दी
इतना कहकर असलम मेरे ऊपर झुकने लगे जैसे जैसे असलम मेरे ऊपर झुक रहे थे
वैसे वैसे मेरे होंठ फड़फड़ा रहे थे तो मेरी प्यासी नजरों से अपनी पलकें झुका कर मैं अपने शौहर असलम का स्वागत करने लगी
अब मेरे बदन पर छोटी सी ब्रा जो मेरी रस से भरी हुई बड़ी बड़ी चूचियों को ठीक से ठक भी नहीं पा रही थी और नीचे पेटीकोट था ,
असलम के बदन पर तो कपड़े का कोई रेशा नहीं था, हमारे बदन नंगे थे,
मेरे और असलम के नंगे बदन एक हो चुके थे,
असलम के बालों से भरे बदन से चिपक कर आज मुझे एक अलग ही एहसास हो रहा था,
असलम के विशाल चौड़े बदन के नीचे मैं मानो छूप सी गई थी,
असलम मेरे ऊपर चढ़े अपने होंठो को मेरे गुलाबी होंठो पर रख कर चूसने लगे तो मैं भी उनका साथ देने लगी,
असलम और मैं दोनो ही एक दूसरे के होंठों को बड़ी शिद्दत से चूस रहे थे क्योंकि अब मेरी जवानी का मेरा सज्जन मेरा पति शौहर चूस रहा था
असलम लंड ठीक मेरी चूत के ऊपर था और मेरी चूत गीली हो कर असलम के लौड़े का स्वागत कर रही थी,
मेरी चूत का रस असलम के लंड का जलाभिषेक मेरी पेंटी और पेटीकोट के ऊपर से कर रही थी
मेरे और असलम के होंठो से होंठ छातियों से छातियां, चूत के ऊपर लंड,
असलम मेरे कोमल पैरो को अपने पैरो को रगड़ कर मेरी जवानी की आग को या भड़का रहे थे
मेरे शौहर असलम दोनो के बदन पर सिर्फ मेरी ब्रा पेंटी और पेटीकोट ही था,
बिस्तर का हाल बेहाल हो चुका था,
चादर पूरी खिच चुकी थी,
चारो और असलम और मेरे कपड़े बिखरे हुए जो हमारे बदन नीचे कुचले जा रहे थे,
कुछ ज़मीन पर,
ये देख के कोई भी बोल सकता है, कि यहां इस बिस्तर पर किसी मर्द और औरत के बीच जबरदस्त चुदाई होने वाली है,
हम दोनों के नंगे बदन एक हो गए थे तो मेरा गोरा मखमली बदन अब असलम की बालो भरे बदन से चिपका उसके अंदर एक अलग ही रोमांस पैदा कर रहा था,
जैसा ही असलम ने अपने होंठों को मेरे होंठों की ओर बढ़ाना शुरू किया तो मैंने खुद ही अपनी दोनो बाहें किसी हार की तरह असलम के गले डाल दी।