मम्मी का शौहर - SexBaba
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मम्मी का शौहर

राघव 38 बिजनेस मैन, अच्छे आदमी जो आपने परिवार से प्यार करते हैं


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सुमित्रा देवी;- 68 दादी धार्मिक औरत होने के साथ साथ नयी सोच वाली, घर की बड़ी अपने पोते-पोतियों बेटे बहू से प्यार करती हैं

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सुनीता 36 साल, एक पढ़ी लिखी समझदार, पूजा पाठ वाली संस्कारी औरत, संस्कृति और संस्कार के साथ साथ आधुनिक सोच विचारों वाली, बेहद ही खुबसूरत,
34 डीडी 32-36।
इस उम्र में एकदम ताज़े गुलाब की तरह खिली हुई।
जो अपने पति और बच्चे से प्यार करती हैं
कभी किसी पराए मर्द की तरफ कभी आंख उठा कर देखा।

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संध्या 22 बहन बिजनेस में पापा की मदद करती है अमेरिका मे ही पली बढ़ी और पढ़ी,

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रतन ३४ चाचा ;- राघव का छोटा भाई, राघव के साथ ही बिजनेस में है और समझदार और जिम्मेदार व्यक्ति हैं,


राधा 34 चाची ;- थोड़ी ज्यादा बोलती है बच्चों से प्यार बहुत करती है, पर सुनीता से थोड़ा बचती है, क्योंकि घर में सुनीता की ही चलती है,

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अभिराज (अभि) 18 बेटा , अच्छा संस्कारी, अपनी मम्मी पापा से बहुत प्यार करता है एक अच्छा दोस्त, अमीर गरीब नहीं मानता,

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अब्दुल 40 फैमली ड्राइवर


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सलमा 38 ड्राइवर की बीवी, व्यवहार से अच्छी है ग़रीबी तो उसे अच्छा नहीं लगती और थोड़ी अकडू भी है पर अपने बेटे असलम से बहुत प्यार करती है।

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असलम की खाला 32 अच्छी पर थोड़ी नकचढ़ी, पर बहुत ही खुबसूरत और सेक्सी,


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असलम - ड्राइवर का बेटा और अभि का अच्छा दोस्त (कहानी का मुख्य किरदार)

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दोस्तों के लिए अच्छा, बड़ो का सम्मान भी करता है थोड़े सपने देखने वाला
इसके मिल्फ यानि बड़ी उमर की औरत पसंद है

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मिल्फ बीएफ देखता है
 
ये कहानी एक बहुत अमीर संस्कारी पूजा पाठ वाली फैमिली की जो बहुत खुश थी पर बिज़नेस में कर्ज बहुत ज्यादा हो गया,

कुछ कर्ज ऐसे लोग से भी लिए गया था जो अंडरवर्ल्ड से थे, जो अब परिवार को खत्म करने की धमकी देते थे अगर 1 महीने में उनका पैसा नहीं दिया तो वे पुरे परिवार को ख़त्म कर देंगे।

घर का मुखिया राघव इस सब से बड़ा परेशान हो गया था, राघव घर आता हैं और कमरे में सुसाइड करने की कोशिश लगता हैं,

तभी अचानक से राघव की पत्नी सुनीता आ जाती है और पकड़ लेती है और सबको आवाज लगती है परिवार के सभी सदस्यों आ जाता हैं

मम्मी- ये क्या कर रहे थे आप अगर आपको कुछ हो जाता तो,

दादी - हां राघव ये क्या बेवकूफी हैं

राघव- (रोते हुए) तो क्या करु मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा है अपने परिवार को ख़त्म होने से बचाने के लिए ये उपाय नहीं कर सकता और मैं अपने परिवार को मारता तो नहीं देख सकता ना इसे अच्छा मैं मर जाऊ।

दादी- एक चाटा मरती है अब चुप राघव अब कभी मरने नहीं सोचना समझा।

कोई ना कोई रास्ता निकल आएगा।


सुनीता- हम्म जी कोई तो रास्ता निकल जाएगा

चाचा- हां भैया हम साथ हैं आपके


फिर सब चले जाते हैं कमरे में सिर्फ राघव और सुनीता होते हैं।
सुनीता- आपने ये क्यों किया अगर आपको कुछ हो जाता तो मेरा और मेरे बच्चों का क्या होता।

राघव- तो क्या करू सुनीता कोई रास्ता नहीं बचा अगर एक महीने में कर्ज नहीं चुकाया तो वो लोग हमें जिन्दा नहीं छोड़ेंगे।
मुझे ये करना पड़ा।


(सुनीता के पिता की वसीयत )

सुनीता के पापा सुनीता से गुस्सा थे क्योंकि सुनीता ने राघव लव मैरिज हुई थी,

तो गुस्से उन्होंने वसीयत बनाई, अगर सुनीता को उनकी प्रोपर्टी में तभी कुछ मिलेगा जब सुनीता इन शर्तों को पूरा करें।

१. सुनीता को राघव से तलाक लेना होगा।
२. सुनीता को अपनी उम्र से आधे उम्र के लड़के से शादी करनी होगी.
३. सुनीता जिस लड़के से शादी करेंगी वह गरीब होना चाहिए।
४. यह शादी कम से कम ३ साल के लिए होगी।
५. अभि को भी सुनिता के साथ ही रहना होगा।
६. सुनीता जिस ग़रीब लड़के से शादी करेंगी शादी के साथ उसको १०० करोड़ रुपए दहैज में मिलेगा और ३ साल बाद १०० करोड़।

अगर सुनीता ये शादी करेंगी तो शादी के बाद आधी प्रॉपर्टी 1000 करोड़ सुनीता और अभि के नाम शिफ्ट होगी।

बाकी के १००० करोड़ 3 साल बाद राघव के नाम।


सुनीता कोई तो रास्ता होगा आप कहें तो में अपने भैया से पैसा मांगू।

राघव- सुनीता कर्ज़ इतना बड़ा है कि वो भी नहीं कर सकता अगर तुम्हारे पापा की प्रॉपर्टी होती तो सब सॉल्व भी हो जाता।

हम फिर से अमीर भी जाते मगर तुम्हारे पापा ने ऐसी शर्त रख दी है वसीयत में जो नामुमकिन है ।

सुनीता- हम्म वो अगर वो प्रॉपर्टी होती तो सब ठीक हो जाता पर अब वो तो हो नहीं सकती कुछ सोचिए आप ही

राघव- हम्म देखते क्या होता है तो अभी सो जाओ।

राघव को नींद नहीं आ रही थी और राघव के दिमाग में वही वसीयत चल रही थी कि अगर 3 साल की बात, है तो नाम बस के लिए शादी की जा सकती है, किसी भरोसा मंद के साथ,
ऐसा सोचते-सोचते राघव भी सो गया।
 
अगली शाम राघव कार से घर वापस आ रहे थे और साथ में फैमली ड्राइवर अब्दुल भी था राघव के साथ।

अब्दुल - साहब बहुत टेंशन में हो क्या बात है आप बहुत परेशान लग रहे हो।

राघव- हां अब्दुल तुमसे क्या छुपाना तुम तो घर के क्या हालत है जानते ही हो,
परिवार की जान पर आ गई है अब तो मुझे समझ नहीं रहा क्या करु

अब्दुल- साहब आप तो इतने बड़े बिजनेसमैन हो आप सब ठीक कर देंगे
राघव- अरे अब्दुल सब खत्म हो चुका है एक रास्ता है तो वो नामुमकिन ही है


अब्दुल- कौन सा रास्ता साहब
राघव- तुमसे क्या छुपाना अब्दुल, मेरे ससुर को तो तुम जानते ही हो मेरे से नफ़रत करते थें।


अब्दुल- जी साहब
राघव- हम्म तो उसकी वजह से उन्होंने वसीयत में ऐसी शर्त रखी, जिसे मैं और तुम्हारी मालकिन सुनीता भी पूरी नहीं कर सकती, लेकिन अगर शर्त पूरी हो गई तो शर्त की प्रॉपर्टी मिल जाती है, और सब सॉल्व हो जाता है।

अब्दुल- कैसी शर्त


( सुनीता के पिता की वसीयत )

अगर सुनीता को उनकी प्रोपर्टी में तभी कुछ मिलेगा जब सुनीता इन शर्तों को पूरा करें।

१. सुनीता को राघव से तलाक लेना होगा।
२. सुनीता को अपनी उम्र से आधे उम्र के लड़के से शादी करनी होगी.
३. सुनीता जिस लड़के से शादी करेंगी वह गरीब होना चाहिए।
४. यह शादी कम से कम ३ साल के लिए होगी।
५. अभि को भी सुनिता के साथ ही रहना होगा।
६. सुनीता जिस ग़रीब लड़के से शादी करेंगी शादी के साथ उसको १०० करोड़ रुपए दहैज में मिलेगा और ३ साल बाद १०० करोड़।

अगर सुनीता ये शादी करेंगी तो शादी के बाद आधी प्रॉपर्टी 1000 करोड़ सुनीता और अभि के नाम शिफ्ट होगी।
बाकी के १००० करोड़ 3 साल बाद राघव के नाम।


अब्दुल; तो साहब आप ये शर्त पुरी कर दो।

राघव; क्या बोल रहे हो अब्दुल सुनीता की शादी किसी ऐसे से जो अभि की उम्र का हो और साथ में गरीब भी हो।

सुनीता भी कभी नहीं मानेगी,

अब्दुल- अरे साहब तो कोई भरोसेमंद व्यक्ति को ढूंढ़ो जो सिर्फ नाम के शादी करे और 3 साल बाद तलाक ,

उसे अच्छा पैसा भी मिल रहें हैं कुछ आप उसे अपनी तरफ से भी दे देना।

इसके सब हल होगा।
 
राघव; हम्म अब्दुल बात तो सही कह रहे हो इससे सब हल भी हो जाएगा,
कुछ गलत भी नहीं पर ऐसा भरोसेमंद व्यक्ति मिलेगा कहा कोई भला अपने बच्चों की लाइफ क्यों खराब करेगा।

अब्दुल- हम्म ये बात तो है मगर वो मिल भी गया तो मालकिन थोड़ी तैयार होंगी

राघव; हम्म ये बात भी है मगर बच्चों के लिए शायद मान जाए 3 साल की बात है और नाम की शादी।


अब्दुल- हम्म ये बात भी पर मिलेगी कहां ऐसा भरोसेमंद व्यक्ति।


राघव; अब्दुल मेरे दिमाग में एक लड़का है भरोसेमंद भी है और मेरे सबसे भरोसे का आदमी का बेटा भी,

अब्दुल- कौन साहब

राघव; तुम्हारा बेटे असलम

अब्दुल- क्या बोल रहे हैं साहब

असलम अभि बेटा की उम्र का है, और अभि बेटा और वो सबसे अच्छा दोस्त है।

दोनों में भाई की तरह प्यार है, और असलम भी मालकिन को बचपन से माँ ही मानता है ।

मालकिन भी असलम से कैसे


राघव; तभी तो सैफ है कोई प्रॉब्लम नहीं है और भरोसेमंद भी है

ये एक ही रास्ता है तुम बोलो तैयार हो तुम,आज मुझे तुम्हारी जरूरत है अब्दुल,

अब्दुल- साहब पर कैसे बात करूं,

आप हिंदू हो, हम मुस्लिम कैसे आपके रिश्तेदार ,परिवार सब और मेरी बीवी सलमा भी असलम की शादी कैसे,


राघव; अरे अब्दुल जब मुश्किल नहीं होगी तो कोई आएगा थोड़ी, बस 3 साल की बात है,और ये शादी कोई असली शादी भी तो नहीं है।

अब बोलो मान जाओ अब्दुल

अब्दुल- ठीक है साहब मैं तैयार हूं मगर असलम की अम्मी और असलम को मुझे पूछना होगा।

राघव; ठीक है मैं भी घर पर जा कर सब से बात करके मैं तुम्हे कॉल करूंगा।

तुम भी बात कर लो अपनी बीवी से


राघव आ जाते हैं, अब्दुल अपने घर चला जाता है।
 
राघव घर आते ही पहले अपनी मां सुमित्रा देवी से बात करता हैं


राघव - मां सब रास्ते खत्म हो गए हैं बस एक ही रास्ता बचा है वो है सुनीता के पापा की वसीयत।


सुमित्रा देवी- क्या बोल रहा है तू राघव जानता है वो नामुमकिन है सुनीता की शादी किसी और से हम सब ये कैसे सोच सकते है।

बहू एक संस्कारी औरत है २ जवान बच्चे हैं।

राघव - मां कोई ओर रास्ता नहीं है।

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सुमित्रा देवी - ठीक पर सुनीता मानेंगी क्या और तेरे बच्चे ।

ऐसे भरोसेमंद व्यक्ति और परिवार मिलेगा इतना कम समय में,

राघव - मिल गया है मां
सुमित्रा देवी; कौन

राघव; अपने ड्राइवर अब्दुल का बेटा असलम

दादी- क्या असलम क्या बोल रहा है तू वो सुनीता को मां जैसा मानता है,
सुनीता भी असलम को अपने बेटे जैसा।

अभि और वो अच्छी दोस्त है और एक बात की वो मुस्लिम है।
ये नहीं हो सकता है सब मान भी लू तो वो मुस्लिम कैसे,


राघव - मां तभी तो सुरक्षित है क्योंकि वो सुनीता की इज्जत करता है अभि का दोस्त भी है तो उसका घर अभि रह भी सकता है और मां मुस्लिम है तो क्या हुआ है तो इंसान ही ओर भरोसेमंद भी है।

3 साल की ही तो बात है

सुमित्रा देवी - वो मुस्लिम है सुनीता कैसे वहां 3 साल रह पायेगी, और क्या सुनीता इसके लिए तैयार होगी।

राघव; मां यही रास्ता है मान जाओ देखो 3 साल की बात है फिर सब नॉर्मल हो जायेगा।
सुमित्रा देवी - ठीक है पहले सुनीता से बात कर लेते हैं
राघव; जी मां

फिर राघव कमरे में चला गया गए और अपनी धर्म पत्नी सुनीता से बात करने लगा।

राघव - सुनीता देखो मैं जो कह रहा हूं शांति से सुनना गुस्सा मत करना और सोचना।


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सुनीता- जी क्या बोलिए

राघव- सुनीता सब रास्ते खत्म हो गए हैं अब एक ही रास्ता बचा है तुम्हारे पापा की वसीयतनामा।

सुनीता- क्या बोल रहे हो आप जानते हो ना वो नामुमकिन है

राघव- पहले सुनो तो देखो मैंने सोचा है किसी भरोसे से शादी करेंगे बस 3 साल की बात है फिर सब नॉर्मल हो जाएगा।
और ये शादी भी बस नाम की होगी,
ये बस शादी होगी जिसमें कुछ भी नहीं होगा।


सुनीता- मैं ये नहीं कर सकती रिश्ते-नाते निभाना होता है शादी मजाक नहीं है।

मैं आप से प्यार करती हूं
मेरे 2 बच्चे है समझें।

राघव- अरे सुनीता मैं भी बहुत प्यार करती हूं पर मजबूर हूं ।

तुम रिश्ते-नाते निभाना है बस,
वो सब तो नहीं करना होगा जो एक पति-पत्नी करते हैं,
शारीरिक संबंध।

हम भरोसेमंद से करेंगे और अभि भी तो होगा वहां मैं बच्चों की जान के लिए ही तो कर रहा हूं,

सुनीता- (रोते हुए) हे भगवान ये मैं कैसे कर सकती हो आप सोचिये,

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राघव- मैं जानता हूं सुनीता पर कोई रास्ता नहीं है,

इसलिए मैं मर रहा था और फिर मेरे बच्चे क्या सोचेंगे।
इसलिए करना पड़ रहा है,

सुनीता (रोते हुए अपने बच्चों की जान के लिए) ठीक है पर ऐसा भरोसेमंद कौन व्यक्ति होगा जो अपने बच्चों की लाइफ खराब करेगा,

राघव- वो भरोसेमंद व्यक्ति मुझे मिल गया है,
हमारे ड्राइवर अब्दुल का बेटा असलम

सुनीता- चोंकते हुए,

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क्या हमारे ड्राइवर अब्दुल का बेटा असलम, आपको पता है आप क्या कह रहे हैं

असलम मेरे बेटे जैसा अभि का बेस्ट फ्रेंड है,
हर बात शेयर करते हैं, दूसरी बात वो मुस्लिम है मैं और अभि कैसे 3 साल मुस्लिम घर में रहेंगे,व


राघव- अरे असलम हमारा है तो सेफ है, कोई दिक्कत नहीं होगी समझी, क्योंकि असलम भी अपना ही बच्चा है,

मुस्लिम है तो क्या हुआ असलम तुम्हारा मां जैसा सम्मान करता है, तुम खुद उससे बेटा जैसा समझी कभी मुस्लिम सोची हो

सुनीता- हां पर कैसे मुस्लिम घर में और अभि और असलम भी नहीं मानेंगे।

राघव- समझने पर मान जाएंगे जब सिचुएशन पता चलेगी।
बस 3 साल की बात है मैंने मां से बात कर ली।

सुनीता- ठीक है (धीमी आवाज में) पर आपके बिना उस घर के बिना कैसे रहूंगी।
 
राघव- मैं भी सुनीता पर ये हमारी तपस्या है 3 साल की जुदाई तुम फिक्र मत करो सब ठीक होगा ।

हमें ये सब झलेना है बच्चों के लिए


फिर सुनीता मान जाती हैं दोनों बाहर आ जाते हैं राघव सीधे अपनी मां सुमित्रा देवी के पास जाता है,

सुमित्रा देवी, राघव सुनीता, रतन और राधा सुमित्रा देवी और राघव इस पर सब से बात करते हैं,

रतन- पर मां भाभी की शादी अब्दुल के बेटे से क्यों हम हिंदू हैं वो मुस्लिम

सुमित्रा देवी- हम्म, इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं है,

रतन; लेकिन मां भाई बोला है बस 3 साल की बात है मानी पड़ रहा है मजबूरी है।

राधा - (मन ही मन अच्छा हुआ अब इस घर में मेरा राज होगा भाभी बहुत बोलती थी मुझे अब मुस्लिम की बहू बनेगी)

राघव; रतन अब असलम से सुनीता की शादी के अलावा और कोई रास्ता नहीं है, इस शादी से सुनीता के पापा के वसीयतनामा की शर्त पूरी हो जाएगी,

रतन; (कुछ सोचते हुए) हम्म भाई साहब सही कहते हैं कोई रास्ता नहीं है तभी तो कर रहे हैं धर्म क्या है बस शादी है 3 साल की बात है।


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राधा - ठीक है अगर यही है तो

(यहां अब्दुल अपने घर में अपनी बीवी सलमा से बात करता है)

अब्दुल - सलमा साहब को हमारी ज़रूरत है (वो सलमा को वसीयत के बारे में बताता है)
इसीलिए सहाब मेम साहब की शादी हमारे असलम से कराना चहाते है।

सलमा - अरे ये कैसे हो सकता है असलम छोटा है अभि बेटे का दोस्त है,
हम मुसलमान हैं वो हिंदू कैसे होगा ये समझ कर भी तो देखो ना,

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अब्दुल- सलमा साहब के कितने अहसान हैं हम पर असलम इतना बड़ा स्कूल का छात्रा है,
अभि बेटे के साथ साहब फ्री देते हैं हमें समान देते हैं मुस्लिम होने पर भी घर में अपने समझते हैं तो हम नहीं कर सकते बस 3 साल की बात


सलमा - मैं समझी हूं उनके अहसान है, पर असलम बेटा है हमारा मजहब भी है अगर अगर कुछ हो गया तो तो बाद में कौन असलम को लड़की देगा ।

अब्दुल; सलाम में समझता हूं ३ साल की ही तो बात है हम कोई ना कोई रास्ता निकलेगा,

सलमा; हम्म मैं समझती हूं , मैं तैयार हूं पर कुछ मेरी भी शर्त होंगी

अब्दुल- क्या बोलो

सलमा- शादी मुस्लिम तरीके से होगी,
3 साल तक सब के सामने मालकिन को घर के नियम कानून मानें होंगे,

अब्दुल- ठीक है मैं बात करुंगा
सलमा भी मान जाती है,
तभी अब्दुल के फोन पर राघव का फ़ोन आता है


राघव- हौलो अब्दुल तुमने सलमा से बात कर ली

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अब्दुल- जी साहब वो तैयार है बस कुछ बातें है जो आपको बतानी है, और साहब आपने अपने घर में बात कर ली,


राघव; हम्म, हां कर ली सब मान गए हैं कल तुम सलमा बीबी और असलम को लेकर आ जाओ मां ने शादी की बात करने बुलाया है।

अब्दुल जी साहब हम आ जाएंगे


फिर दोनो फोन रख देते है।
 
अगले दिन सुबह ग्यारह बजे अब्दुल सलमा, असलम के साथ राघव के घर आ गए,

अभि और असलम को नहीं पता था।

( अभि की जबानी )
असलम पापा दादी को प्रणाम करके मेरे कमरे में आ गया

अभि - अबे तू आया इतनी सुबह क्या बात है


असलम- अरे मैं अकेला नहीं अम्मी अब्बू भी आए

अभि - अच्छा क्यों क्या बात है तूने कुछ किया क्या

असलम -नही, पर तूम क्या कर रहे थे।

अभि - अरे कुछ नहीं बैठा हूं लैपटॉप में कुछ वीडियो देख रहा हूं

असलम - अच्छा कौन सी वो वाली

अभि - तू भी ना हर वक्त वही लगा रहता है

असलम - हां तू क्यों देखेगा ।

तुझे तो वो अर्बन पसंद है ना क्लास की, बोलता क्यों नहीं उस से

अभि - अरे क्या बोलू एक तो मुस्लिम ऊपर से उसका भाई को पता चला तो लफड़ा
असलम- किसी को कुछ पता नहीं होगा बस तुम मज़े लो, और मैं हूं ना तेरे लिए कोई उस मोहल्ले का बोल सकता है क्या

अभि- वो बात नहीं है लेकिन फ्री का इश्यू हो जाएगा पता, ना पिछली बार में रुबीना के चक्कर में तेरे मोहल्ले के शहज़ाद को पीट दिया था,

तो साला पूरा समाज ले आया था वो तो पापा की पहचान थी पुलिस में तो सब सॉल्व हो गया

असलम- पर टेंशन ना ले जो भी है देख लेंगे बात तो कर उससे

अभि- हम्म देखता हूं तू किसी को पसंद करता है।

असलम- तू तो जनता है मुझे बड़ी उम्र की औरतें पसंद है तभी मिल्फ वीडियो देखता हूं।

यार सच में तबियत से देती है, खुदा कसम अगर ऐसी औरत मिल जाए तो मजा जाए।

क्या बदन होता ही एकदम भरा एक बार चढ़ जाओ तो गद्दे की जरूरत नहीं होती

अभि - हम्म जनता हूं पर फिर भी यार कोई लड़की पसंद कर समझा

असलम- देखा है पर मिल्फ़ की बात अलग है तू जनता है

अभि - हम्म ठीक है पर रिस्पेक्ट करना चाहिए ना उनकी

असलम- अरे रिस्पेक्ट अपनी जगह सबकी करता हूं पर दिल को भी अच्छी लगती है।

रिस्पेक्ट करने के लिए मेरी अम्मी, आंटी अपने घर के लोगों की पूरी करता हूं

अभि- हम्म चल कोई गेम खेलते हैं

फिर दोनो गेम खेलने लगते हैं


(बाहर सब )


पापा- आओ अब्दुल आओ बैठो ।

दादी-हां अब्दुल बैठो सलमा तुम भी बैठो

अब्दुल- साहब आपके बराबर कैसे

दादी- अरे अब्दुल अब हमारे बराबर ही हो, बैठो


अब्दुल- ठीक है मांजी

दादी- राधा बहू जाओ नाश्ता, लाओ

चाची- जी मांजी (चाची अब इन नोकर के लिए भी नाश्ता लाओ)


दादी- अब्दुल तुम्हें तो सब पता है कि क्या बात है तो शादी तो अब होना ही है।

ये शादी वसीयत के लिए है और शर्त तो पता ही है सिर्फ 3 साल के लिए

अब्दुल- हां मांजी साहब ने सब बता दिया।

दादी- तो शादी की तारीख 3 दिन बाद निकली है।

तो तुम्हें कोई ऐतराज तो नहीं है।


कोई बात तो बता दो, शादी अच्छे से होगी,
क्योंकि सुनीता के घरवाले बहुत बड़े लोग हैं इसी तरह से तो शादी की फ़िक्र मत करो, बस शादी अच्छे से अमीर तरीके से ठीक ही है।

अब्दुल- जी मांजी जैसा आप कहे।

सलमा- मांजी हम आपके बोले बिना ही सब कुछ समझ गये, हम सब बात समझ रहे हैं आप हमारे मालिक आपसे ही हमारा घर चलता है
पर बात ये है कि ये शादी जो मुस्लिम तरीके से होगी, मतलब निकाह होगा।

दादी- क्या बोल रहे हो तुम अब्दुल
अब्दुल- सलमा क्या बोल रही हो।

सलमा- मांजी माफ करना हम मजबूर ही अगर हमने उस तरीके से नहीं किया तो हमें समाज से निकाल देंगे, हमारे बेटे की दोबारा शादी नहीं होगी इसलिए आप भी समझिए बाकी सब आपके हिसाब से होगा।

दादी- राघव क्या बोलता है

पापा- ठीक है कोई बात नहीं वसीयत में शर्त के लिए तो शादी हो या निकाह

दादी- ठीक है तो अभी सगाई कर देते हैं, अंगूठी बदल लेते हैं

अब्दुल- जैसा आप सही समझते दादी

दादी- तुम दोनो ने अपने बेटे से बात कर ली है ना
पापा- अभी कर लेता हूं

अब्दुल- मैं भी कर लेता हूं

पापा- अब्दुल तुम दोनो अभि के कमरे में जाकर असलम से बात कर लो।
अभि को बोलना कि मैंने अपने कमरे में बुलाया है
 
अब्दुल- हां साहब


अब्दुल और सलमा अभि के कमरे में आते हैं तो अभि ओर असलम दोनों जल्दी से लैपटॉप बंद करते हैं।

अभि - अरे अंकल आंटी आप यहां क्या बात हैं।

अब्दुल- बेटा वो हमें असलम से कुछ बात करनी है तुम्हे भी साहब ने अपने कमरे में बुलाया है

अभि - ठीक है अंकल आप लोग कर लो।

अभि अपने मम्मी पापा के कमरे में चला गया।

अभि - पापा आपने बुलाया मुझे

पापा- हां अभी एक जरूरी बात करनी है (फिर पापा सब शुरू से समझते हैं बताते हैं क्या होना चाहिए)

अभि - क्या पापा ये क्या बोल रहे हैं आप ये नहीं हो सकते मम्मी की शादी कैसे हो सकतीं हैं वो भी मेरे दोस्त से,

पापा- बेटा सब समझ लिया है मज़बूरी है हमारी यही आखिरी रास्ता है ।

सिर्फ वसीयत के लिए बस ३ साल की बात हैं तू भी रहेगा ना।


अभि पर पापा वो मेरा सबसे अच्छा दोस्त है वो बहुत गरीब है।

मम्मी वहां कैसे रहेंगी।

मेरे सब दोस्त लोग मज़ाक बनाएंगे,
मम्मी की भी उनके समाज में पहचान है।

पापा- बेटा क्या करें मज़बूरी है अब ३ साल तो निभाना होगा, और सच्चाई तो हम लोग जानते है ना कि बस वसीयत के लिए यह सब।

अभि पर मुझे सही नहीं लग रहा है मम्मी आप ही कुछ कहो।

मम्मी- बेटा मैं भी मज़बूरी हूं मानतीं हूं कि बस वसीयत के लिए है, हम मजबूर हैं,

असलम तो मेरे बच्चे जैसे है।

अभि; (मन ही मन )मैं अब कैसे समझाऊं मम्मी जिसे आप बच्चा कह रही हैं,
वो कैसा है,
देखना वो बच्चा आपको अपने बच्चे की मां बना देगा,

अभि - ठीक है पर मुझे पता है देखना असलम नहीं मानेगा।

पापा- अब्दुल माना लेगा चलो बाहर सगाई करनी है सुनीता तूम भी चलों।

सब दुखी होकर बाहर आ जाते हैं,

मम्मी भी दुखी थी वो जानती थी चाहे शादी वसीयत के लिए हों, मगर शादी तो हो रही है तो रिश्ते निभाने होंगे घर से पापा से 3 साल के लिए रिश्ता टूट रहा है

(असलम को अब्दुल अंकल मेरे कमरे में सब बताते हैं)

असलम- क्या अब्बू आप क्या बोल रहे हैं सुनीता आंटी से निकाह कैसे वो अम्मी की तरह है मेरे लिए, और अभी की मम्मी है।

अब्दुल- बेटा मजबूर है साहब पर मुश्किल यही रास्ता निकला है 3 साल की बात है,

असलम- हम्म ये तो है अभी मेरा सबसे अच्छा दोस्त है, आंटी को मैं अम्मी की तरह ही माना हूं,

असलम ( मन ही मन) ये बात भी है कि आंटी बहुत खूबसूरत है भरी हुई बिलकुल जैसा सोचा था।
3 साल रिश्ते में बेगम होगी, मेरी क्या हालत होगी जब मेरे सपनों की हूर मिल रही है, क्या पता कुछ हो जाए, अभि मेरा दोस्त है ये भी गलत है दोस्ती अपनी जगह क्या हम हमेशा दोस्त रहेगा)

असलम- अबू क्या आंटी मान गई है।

अब्दुल- हम्म बेटा

असलम- ठीक ही जैसा आप बोले।

फिर असलम अब्दुल और सलमा साथ बाहर आ जाता है।
 
अब्दुल फिर अंदर आया और राघव से साहब; आप से एक बात करनी है।

राघव; हां हां बोलो अब्दुल

अब्दुल; साहब आप जानते ही हैं ये निकाह सिर्फ और सिर्फ दिखावे के लिए है लेकिन लोग जो निकाह में आएंगे वो तो नहीं जानते, अगर उन्हें ये पता चले तो मोहल्ले में हमारी इज्जत चली जाएगी।

राघव; मैं समझ सकता हूं किसी को इसके बारे में पता नहीं चलेगा, आखिर हम दोनों की इज्जत का सवाल है।

अब्दुल; साहब हम सब जानते ही हैं कि यह निकाह किस मज़बूरी में हो रहा है।

मेंम साहब भी इस निकाह से दुखी हैं, पर वो क्या है निकाह में मेंम साहब थोड़ी सी खुश दिखेंगी, आप समझ रहे हैं ना।


राघव; मैं समझ सकता हूं तुम उसकी चिंता मत करो, चलों अब सगाई करा देते हैं।


सुमित्रा देवी; तो सगाई की रस्म शुरू करे,
राधा बहू दोनो को अंगूठी दे दो


राधा; जी मां अभी लाई,
ये लिजिए भाभी,
ये लो असलम
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(अभि) मैं सोचा रहा था कि असलम कैसे मान गया गुस्सा भी आ रहा था पर कुछ बोल नहीं सकता था, सबके सामने
मम्मी पापा को देखती है कि ये सब झलेना है ,
अब दूसरा रिश्ता जुड़ रहा है, मम्मी की आंखें नम थी।

असलम भी थोड़ा कन्फ्यूज था, कि उसकी होने वाली बेगम सुनीता आंटी है अभि की मम्मी है, अंदर थोड़ी खुशी भी थी कि एक खूबसूरत भरे बदन की औरत उसकी बेगम बनेंगी।


सलमा - असलम मालकिन को अंगूठी पहनाओ।

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असलम- हम्म अम्मी ( असलम मम्मी को अंगूठी पहना देता है)
सुमित्रा देवी; सुनीता तुम भी असलम को पहनो,
सुनीता थोड़ी झिझक महसूस कर रही थी, उसकी आंखें नम थी, सुनीता ने फिर अपने बेटे की उम्र के असलम को अंगूठी पहना दी,

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असलम जो अभि का बेस्ट फ्रेंड है जल्द ही सुनीता का शौहर होगा।

राधा; मुबारक हो सगाई हो गई।
रतन; चुप,

सुमित्रा देवी; तो सगाई हो गई शादी की तैयारी करो, शादी अच्छे से होगी पैसे की फिक्र मत करना।

राघव अब्दुल को शादी के लिए पैसे से दो,

राघव; जी मां,
राघव; अब्दुल ऑफिस से सब बिल पास करा लेना।

अब्दुल; जी साहब

सुमित्रा देवी; कल सुनीता बहू के घरवाले भी आ जाएंगे आप लोग बस 3 दिन बाद बारात लेकर आ जाना ठीक है।

अब्दुल- जी मांजी सब कर लेंगे अब हमें आज्ञा दीजिए

सुमित्रा देवी; ठीक है

अब्दुल; जी नमस्ते, असलम चलो घर बहुत काम है।

अभि- आंटी मुझे कुछ स्कूल का काम है असलम थोड़ी देर बाद आ जाएगा आप लोग जाओ।

सलमा- पर बेटा टाइम काम है बहुत काम है

अब्दुल- अरे रहने दो आ जाएगा ३० मिनट में आ जाना असलम ठीक है, अब तुम यहां नहीं आ सकते शादी तक ।

असलम- हम्म जी अब्बू
अब्दुल और सलमा अपने घर चले जाते हैं,
सुनीता भी अपने कमरे में जाकर अपना सामान पैक करने लगती हैं ।

असलम अभि कमरे में आता है अभि कमरा का दरवाजा बंद कर लेता है।

अभि असलम को एक मुक्का मारता है ।

असलम- अबे ये क्या कर रहा है

अभि- एक ओर मुक्का मरता है अबे तूने क्यों किया बे, ये सब जानते हुएं भी।

असलम- अबे बात तो सुन अब्बू ने सब बताया था, तेरे परिवार कितनी मुश्किल में है, तेरे नाना जी की शर्त जो वसीयत में है अगर पूरी नहीं हुई तो उनकी प्रोपर्टी में से तूम को कुछ नहीं मिलता,

अगर वसीयत से तेरे परिवार के लिए अगर पैसे नहीं आये तो तुझे और तेरे परिवार की जान को खतरा है।

अभि- पर मम्मी की शादी तूम से, स्कूल में सब मेरा मजाक उड़ायेंगे, और तूझे भी तो उस टाइप औरत पसंद है।

असलम- अबे ये सिर्फ वसीयत के लिए है, लोगों का काम है बोलना तो बोले रहेंगे, हम मिल के सॉल्व कर लेंगे भाई।

मैं आंटी की बहुत रिस्पेक्ट करता हूं, अम्मी की तरह है, ये बात तो है कि आंटी बहुत खूबसूरत है पर ख़ूबसूरत तो मेरी अम्मी भी है मैं उनकी भी रिस्पेक्ट करता हूं।

3 साल की बात है तू फिक्र मत कर तू भी तो होगा रहेगा ना मेरे पास घर में।

अभि - ठीक है पर देख जो भी हो, तू बाद में बदलना नहीं समझा,

असलम - हम्म भाई ये भी कोई कहने की बात है,चल अब मैं घर चलता हूं,

अम्मी अबू तो चले गए, तो में भी चलता हूं, और असलम चला गया।

अभि ने एक बात नोटिस की, जब से असलम और सुनीता की सगाई हुई थी
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असलम का लौड़ा उसकी सलवार में किसी बांस की तरह खड़ा था।
 
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