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सुसमा ने लुंड से निकला सारा वीर्य पि लिया... और फिर लुंड को साफ़ कर दिया अपनी जीभ से चाट चाट के.... फिर हमें देर भी हो रही थी इसलिए हम वह से उसके घर के लिए निकल गए....
सुसमा के चेहरे पे अलग की चमक थी जो साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी...
अब दोनों घर पहुंच जाते है...
सुसमा ( पंडिताइन) घर का दरवाजा खटखटाने लगती है....
पंडिताइन - माँ... ो.. माँ...
अंदर से किसी की आवाज़ आती है..
- अअअअअ..... रही हु.....
और फिर दरवाजा खुलता है...
" खडाककक... "
दरवाजा एक 70 साल की औरत ने खोला था
पंडिताइन - माँ.....
और पंडिताइन जाके उस औरत से लिपट जाती है....
वोह औरत... - बेटी...
अब दोनों का भारत मिलाप ओवर होता है.
योगिनी ( पंडिताइन की माँ ) - बेटी.... ये कौन है...?
सुसमा - ये... मेरे साथ hi आया है.... इनके बारे में मई आपको बताती हु... पहले अंदर toh...chalo
योगिनी - हां.. हां... आओ... आओ... अंदर आओ..
सुसमा और संजू अंदर आ गए...
और फिर सुसमा ने जो बातें करनी शुरू की है... अपनी माँ से क्या hi बातें थी वोह मजा आ गया.... कौन सी लड़की कहा भागी से लेकर पूरे गांव की चुगली कर डाली मेरा तोह दिमाग hi भन्ना गया..
योगिनी - अच्छा.... ये तोह बता ये बच्चा कौन है...
मैंने जाकर उनके पेअर छू लिया...
योगिनी - खुस रहो बीटा...
तुम बहुत सुन्दर हो.... बीटा..
संजू - थैंक यू ❤..
योगिनी ;- ारी.. सुसमा तूने अभी तक नहीं बताया इसके बारे में..
सुसमा - हां.. माँ वोह मई बताने hi वाली थी... वोह क्या है न माँ.... अब तुमसे क्या छिपाना... तुम तोह जानती हो एक अकेली विधवा का दुःख.... क्युकी तुम भी पिताजी के मरने के बाद से विधवा का जीवन hi जी रही... तुम्हे पता है की एक विधवा होना कितना बड़ा अभिशाप है....
योगिनी : - हां.. बेटी ये तोह मुझे पता है...
सुसमा - हां... और पंडित जी के जाने के बाद मई बिलकुल अकेली सी हो चुकी थी.... मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था... अकेलापन मुझे काटने को दौड़ रहा था.... तभी मेरी ज़िन्दगी में इनकी एंट्री हुई... और इन्होने मुझे पूरा कर दिया.
योगिनी - मतलब क्या है तेरे कहने का...
सुसमा - मेरे कहने का ये मतलब है की मई इनसे प्यार करने लगी और इनसे शादी कर ली.... और ये आपके दामाद है...
योगिनी - क्या...
तूने अपने से इतने छोटे लड़के से शादी कर ली...
तुझे होश भी है की तू क्या बक्क रही... ारी समाज में किसी को पता चला तोह सब थूकेंगे तुझपे और मुझपे भी..... इस उम्र में शादी कर ली वोह भी अपने से 30 साल छोटे लड़के से जिसकी अभी तक दाढ़ी भी ठिक्क से नहीं आयी...
सुसमा - माँ वोह सब मुझे नहीं पता...
मई इससे प्यार करती हु और अब इनके बिना बिलकुल भी नहीं रह skti...aur वैसे भी हम समाज के सामने बस एक परिचित व्यक्ति की तरह रहेंगे लेकिन घर की चार दीवारों में हम पति पत्नी की तरह रहेंगे.... इससे न तोह समाज हमपे ऊँगली उठाएगा और न hi किसी को हमारे असली रिश्ते का पता चलेगा...
योगिनी - अब तूने ये फैसला कर hi लिया है तोह मई अब क्या hi कर सकती हु... जैसा तुम्हे ठिक्क लगे वैसा करो....
वैसे... मानना पड़ेगा तेरी चॉइस को है बड़ी कड़क
सुसमा - वोह तोह है...
योगिनी - चलो हाथ मुँह धो लो मई खाना लगाती हु... फिर बिस्तर बिछा दूंगी एक hi कमरे में..
सुसमा - एक hi कमरे में क्यों...
योगिनी - क्युकी मुझे पता तोह था नहीं न की तुम आ रही हो साथ में दामाद जी भी खरीद के ला रही हो.... तोह मैंने दूसरा कमरा साफ़ नहीं किया वह रद्दी... कबाड़ का सामान रखा हुआ है.... कल साफ़ कर दूंगी मई लेकिन आज की रात तुम लोगो को ऐसे hi गुज़ारनी पड़ेगी... ये सुनके संजू और पंडिताइन दोनों का चेहरा मुरझा गया...
संजू ( मैं में) - हट साला... सुहागरात मनाने का प्लान फ़ैल हो गया
अब सुसमा ने खाना परोसना सुरु कर दिया...
रात ढल चुकी थी, और योगिनी अपनी बेटी सुसमा और दामाद संजू को खन्ना परोस रही
thee…..uska धयान बार संजू के पायजामे के तरफ जा रहा tha….yahan से संजू
का प्याजमा थोड़ा पहला हुआ tha….wo छह कर भी वहां देखने से अपने आप को
रोक नहीं पा रही thee…..aur ये बात संजू जान चूका था. की उसकी सांस उसके लुंड
के तरफ चाहत भरी नज़रों से देख रही thee…….Yogini का पति तो बहार से शराब पी कर नशे मैं तुन होकर आया tha…….aur उसकी
पत्नी के नज़रे कहाँ पर है, वो इस बारे मैं सोच भी नहीं सकता tha….jab योगिनी
खन्ना परोसते हुए, संजू के अग्गे झुकी , तो उसका अंचल उसकी कंधो से खिसक gaya…..aur उसकी चुच्यों के घाटी संजू के आँखों के सामने तैर गए……
योगिनी ने
शरमाते हुए अपना पल्लू ठीक kiya…..aur संजू के आँखों मैं देख कर मुस्कारते
हुए बहार चली गए……
योगिनी को थोड़ा सा अजीब सा भी लग रहा था की, उसका दामाद उसकी चुच्यों को
खा जाने वाले नज़रों से देख रहा tha…..ye सोच कर उसके होंटो पर मुस्कान फैलती जा
रही थी….