अडुल्टेरी 𝐁𝐡𝐨𝐨𝐭 𝐤𝐢 𝐦𝐚𝐚 𝐤𝐢 𝐜𝐡𝐨𝐨𝐭 🥰 - Page 40 - SexBaba
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अडुल्टेरी 𝐁𝐡𝐨𝐨𝐭 𝐤𝐢 𝐦𝐚𝐚 𝐤𝐢 𝐜𝐡𝐨𝐨𝐭 🥰

मई चाहता हूँ की काश पंडिताइन ऐसे hi मुझे नहलाये... 😍

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एप 127 (ा)



सुबह जल्दी मेरी नींद खुल गयी, बहार अभी उजाला नहीं हुआ था. मई बीएड में लेते हुए hi रात में हुई घटना के बारे में सोचने लगा. लेकिन मई कुछ भी ठीक से नहीं सोच प् रहा था , दिमाग में कई तरह के विचार आ रहे थे. मुझे बहुत अपराधबोध हो रहा था लेकिन इस बात से भी मई इंकार नहीं कर सकता था की जिस आनंद की मुझे अनुभूति हुई थी वैसी पहले कभी नहीं हुई.

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मेने खुद से स्वीकार किया की पंडिताइन का इस घटना में कोई हाथ नहीं है,

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ये सब मेरी वजह से hi हुआ है. मेरी hi वजह से पंडिताइन इस पाप की भागीदार बानी , जिसके बारे में हमारे समाज में सोचा भी नहीं जा सकता.

यही सब सोचते हुए मुझे फिर से नींद आ गयी. सुबह बीएड के हिलने से मेरी नींद खुली. मई खिड़की की तरफ मुंह करके सोया हुआ था और पंडिताइन की तरफ मेरी पीठ थी. पंडिताइन के हिलने डुलने से मुझे लगा की वो बीएड से उठ रही है. उसने बीएड साइड लैंप ों किया. मेने सामने देवर पर लगे मिरर में देखा पंडिताइन बीएड में पीछे टेका लगाकर बैठी है और उसने अपना चेहरा हाथों से ढाका है. फिर वो सुबकने लगी और उसकी आँखों से आंसू बहने लगे. बीच बीच में वो, है प्रभु ! है ईश्वर ! भी जप रही थी.

मुझे बहुत बुरा लगा. क्या करू समझ नहीं आया इसलिए मई चुपचाप वैसे hi लेते रहा. मेने फिर से मिरर में देखा तो , मेरे अंदर का जानवर फिर से सर उठाने लगा. मिरर में सुसमा की बड़ी छाती दिख रही थी.

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कुछ घंटे पहले रात में इन चूचियों को मेने खूब चूसा था पर अभी नज़ारा कुछ और hi था.

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जब सुसमा ने अपने हाथों से चेहरा ढाका था तो मिरर में कुछ दिख नहीं प् रहा था पर जब उसने अपनी आँखे पोची और हाथ निचे कर दिए तो पंडिताइन की गदराई हुई छाती मुझे दिखने लगी. मुझे इस बात पे हैरानी हुई की सुसमा की चूचियां ज्यादा ढली हुई नहीं थी. वो बड़ी बड़ी और गोल थी और उन्होंने अपना आकर बरक़रार रखा था. सुसमा ने अपना सर पीछे को किया हुआ था और उसके गहरी सांसे लेने से उसकी चूचियां हलके से हिल रही थी. उसके कंधे उसकी उठी हुई थोड़ी , सब कुछ एकदम परफेक्ट था.

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फिर वो सीधी होकर बैठ गयी और हाथ पीछे ले जाकर अपने बाल बांधने लगी. उसने एक नज़र मेरी तरफ देखा. क्या मेने उसे मुस्कुराते हुए देखा ? हाँ, वो मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी.

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फिर मेने उसका हाथ अपने सर पे महसूस किया. उसने प्यार से मेरा सर सहलाया फिर मेरे गाल को सहलाया.

“ये तूने क्या कर डाला संजू “, पंडिताइन बोली.

मेने मिरर में देखा पंडिताइन मेरे ऊपर झुक रही है. मेने सोये हुए का नाटक करते हुए आँखे बंद कर ली. मेने पंडिताइन की गरम सांसे अपनी गर्दन पर महसूस की. पंडिताइन ने अपने होठ मेरी बायीं कांपत पर रख दिए और कुछ देर तक ऐसे hi वो अपने हाथ से मेरा सर सहलाती रही.

फिर उसने अपने होठ हटाए और वो बीएड से उठने लगी. मेने अपनी आँखे खोली और मिरर में देखा लेकिन तब तक वो बीएड से उठ चुकी थी.

मेने कान लगाकर सुनने की कोशिश की , बाथरूम का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आयी. पंडिताइन बाथरूम में चली गयी है समझकर मई जैसे hi सीधा लेटने को हुआ वो अचानक मिरर में मुझे दिख गयी. मेने जल्दी से आँखे बंद कर ली. फिर थोड़ी सी खोलकर देखा. पंडिताइन घूमकर मेरी बीएड की साइड में आयी और फर्श से अपनी निघ्त्य उठाने लगी , जो मेने रात में उतर कर फेंक दी थी. निघ्त्य को अपनी छाती से लगाकर वो सामने मिरर में अपने नंगे बदन को देखने लगी , उसकी पीठ मेरी तरफ थी.

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वो दृश्य पागल कर देने वाला था. सुसमा ( पंडिताइन ) अपनी पूरी नग्नता के साथ मिरर के सामने कड़ी थी . उसने अपनी निघ्त्य बीएड में रख दी और अपने को देखा. वो थोड़ी साइड में घूमी और अपने को मिरर में देखने लगी. ऐसा hi उसने दूसरी तरफ घूमकर किया.

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फिर उसने अपनी चूचियों के निचे हाथ रखे और उन्हें थोड़ा ऊपर उठाया ,

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फिर थोड़ा हिलाया. चादर के अंदर hi मेरा पानी निकलने को हो गया. वो थोड़ी देर तक अपने को ऐसे hi मिरर में निहारती रही. सायद वो गर्व महसूस कर रही होगी की अभी भी उसका बदन ऐसा है की एक जवान हैंडसम लड़का भी उस पर लट्टू हो गया.

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फिर वो थोड़ा पीछे हटी , मिरर में अपना पूरा बदन देखने के लिए. अब वो मेरे बिलकुल करीब थी. उसके बदन से उठती खुसबू को मेने महसूस किया. उसके पसीने और चुतरस की मिली जुली खुसबू से मई मदहोश हो गया. कमरे में आती हुई सूरज की रौशनी में ुस्कानेंगा बदन चमक रहा था.

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कुछ समय के लिए मई दुनिया को भूलकर अपनी देवी जैसी पंडिताइन को देखते रहा. उसकी टैंगो और जांघों का पिछले भाग जो मेरी आँखों के सामने था , बिलकुल गोरा और मांसल था. कमर से निचे को उसके विशाल नितम्ब फैले हुए थे जो पंडिताइन के हिलने के साथ hi हिल दल रहे थे.

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उसकी छूट के बड़े पहले हुए होठों से उसकी गुलाबी क्लीट धक् सी गयी थी. ज्यादातर गोरी औरतों की छूट भी काळा रंग की होती है लेकिन उसकी गोरी थी. नाभि के निचे वो उभरा हुआ भाग बड़ा hi मादक दिख रहा था.

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मुझे लगा मेरी प्यारी पंडिताइन रति का अवतार है.

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एक आदमी को जो चाहिए वो सब उसमे था. लम्बी टंगे, अच्छा आकर लिए हुए चूचियां, बहार को निकले हुए विशाल नितम्ब और नाभि के निचे उभरा हुआ वो भाग.

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मई पंडिताइन को देखने में डूबा हुआ था तभी पंडिताइन झुकी और बीएड से अपनी निघ्त्य उठाने लगी. उसके झुकने से उसके नितम्बों के बीच की दरार से मुझे उसकी छूट दिखी.

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अब मेरा लुंड पूरा मस्त हो चूका था. मेरा मूड हुआ की मई वहीँ पर hi पंडिताइन को छोड़ दूँ. लेकिन इससे पहले की मई उठ पता पंडिताइन ने निघ्त्य अपने बदन पर दाल ली और वहां से चली गयी.

फिर बाथरूम का दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आयी. मेने बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ का इंतज़ार किया.

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फिर मई उठ गया और टीशर्ट और शार्ट पहन लिया..

तभी बाथरूम का दरवाज़ा खुला और पंडिताइन सिर्फ ब्रा और पेटीकोट पहने हुए बहार आयी. मेरी तरफ देखे बिना वो सूटकेस में से अपनी साड़ी निकलने लगी. वो थोड़ी देर कड़ी रही फिर उसने कुरता और पायजामा निकाल लिया. पंडिताइन की तरफ सीधे देखने की मेरी हिम्मत नहीं हुई इसलिए मई आँखों के कोने से उसे देखता रहा.

नास्ता आ चूका था और पंडिताइन चाय दाल रही थी. मेने रूम सर्विस को लांड्री के लिए कहा और खिड़की से बहार झाँकने लगा. हमारे रूम के सामने निचे स्विमिंग पूल था, मई बच्चों को तैरते हुए देखने लगा.

पंडिताइन ने नास्ते के लिए बुलाया तो मई उनके सामने बैठ गया.

मेने सीधे पंडिताइन की आँखों में देखा. उन्होंने नज़रें घुमा ली और सैंडविच की प्लेट मेरी तरफ सरका दी

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मेने सैंडविच उठा लिया और खाने लगा. जब भी मई पंडिताइन की और देखता की वो क्या सोच रही है तो वो अपनी नज़रें घुमा लेती. लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था की जब मई उसको नहीं देख रहा होता था तो वो मुझे देख रही होती थी.

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नास्ता भी ख़तम हो गया और हमारे बीच टेंशन बना रहा. कोई कुछ नहीं बोलै

नास्ता ख़तम होते hi , लांड्री के लिए वेटर आ गया. मेने उसको कपड़ों का बैग दिया और पंडिताइन से पूछा,” पंडिताइन आपको कुछ और देना है लांड्री के लिए ?”

पंडिताइन ने सिर्फ ‘नहीं’ कहा . फिर जैसे hi वेटर जाने को मुदा तो उन्होंने सूटकेस से 2 निघती निकलकर लांड्री बैग में दाल दी.

उसके जाते hi रूम साफ़ करने के लिए आया आ गयी. मई बैठे हुए सोचने लगा , अब क्या किया जाये.

रूम की सफाई करने के बाद आया ने ट्राली में से 2 साफ़ चादर निकली और बीएड से पुराणी चदरिन हटा दी. मई आया को ऐसे hi देख रहा था तभी उसने पुराणी चादर को अपनी नाक पर लगाकर सुंघा. उसमे एक बड़ा सा दाग लगा हुआ था. मुझे इतनी शर्म आयी की मेने मुंह फेर लिया और निचे स्विमिंग पूल को देखने लगा. तभी आया पंडिताइन से कन्नड़ में कुछ बोलने लगी.

मई मुड़कर उसे देखने लगा , तभी वो टूटी फूटी हिंदी में धीमे से पंडिताइन से बोली,” भगवन अयप्पा के आशीर्वाद से आपको ऐसी बहुत सी रातें बिताने को मिले.”

फिर ऐसा कहते हुए आया ने पंडिताइन को वो चादर पर लगा धब्बा दिखाया. पंडिताइन दर गयी.

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उसने सोचा रात में जो हुआ , वो सब आया समझ गयी है. उसने जल्दी से 500 का नोट निकला और आया के हाथ में थमा दिया. ताकि आया खुश हो जाये और अपना मुंह बंद रखे और अपने साथ काम करने वालों को कुछ न बताये.

आया ने खुश होकर वो नोट अपने माथे से लगाया और बोली,” भगवन तुम दोनों को खुश रखे.” और फिर वो चली गयी.

उसके जाते hi पंडिताइन ने मुझे देखा , शर्म से उसका पूरा चेहरा सुर्ख लाल हो गया था.


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मई दौड़कर उसके पास गया और कन्धों से उसे पकड़ लिया. पंडिताइन ने मेरी आँखों में देखा और अपनी नज़रें फर्श की तरफ झुका li.mene अपने आलिंगन में पंडिताइन को कास लिया और वो सुबकने लगी. मई कुछ भी नहीं बोल पाया और उसे अपने से चिपकाये रखा.

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फिर मई उसे बीएड के पास ले गया और बीएड पर बिठा दिया. और उसकी पीठ बीएड के हैडबोर्ड पर टिका दी.

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खुद उसके सामने बैठ गया.

“तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया ? क्या तुम्हारे मन में लम्बे समय से मेरे लिए वासना थी या फिर मेरे व्यहार में ऐसा कुछ था जिससे ये घटना हुई ?”

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मई सीधे पंडिताइन की आँखों में नहीं देख पाया. मई दूसरी तरफ देखता रहा.

पंडिताइन ने मेरे कंधे पकड़कर मुझे अपनी तरफ घुमाया,” बताओ संजू. कल रात जो हुआ उसके बारे में बहुत सी बातें करनी है , जाननी है.”

मुझे चुप देखकर पंडिताइन ने मुझे जोर से झिंझोड़ दिया,” मुझसे बात करो. मई बर्बाद हो गयी हूँ. हम दोनों hi इस घटना से प्रभावित हुए है.”

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पंडिताइन गुस्सा करे जा रही थी...

संजू -- “पंडिताइन , मेने कभी आपको ऐसी नज़र से नहीं देखा. लेकिन जब आप बाथरूम में थी और आपने मुझसे निघ्त्य मांगी थी, जिस दिन हम बैंगलोर आये थे…….” और फिर मेने पूरी बात पंडिताइन को बता दी की कैसे कैसे मेरी काम इच्छा बढ़ती चली गयी.

पूरी बात सुनकर वो अपने को दोष देने लगी और रोने लगी.

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मेने कहा,” पंडिताइन ये बात सही है की उस दिन बाथरूम में आपको देखकर hi ये भावना मेरे अंदर आयी. लेकिन जो कुछ हुआ उसके लिए आप अपने को दोषी क्यों ठहरा रही हैं. आपने तो होनी को टालने की पूरी कोशिश की थी लेकिन आप भी इंसान हैं और शारीरिक इच्छाओं के आगे आपने समर्पण कर दिया.”

एक गहरी सांस लेकर वो बोली,” संजू, सिर्फ एक पल की कमज़ोरी से मेरा सब कुछ चीन गया. है ईश्वर! मेने ऐसा होने कैसे दिया .”

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फिर सुबकते हुए वो कहने लगी,”. मई अब वो पंडिताइन नहीं रही जो तुम्हारे लिए पूजनीय थी जिसकी तुम इज़्ज़त करते थे. आज से मई तुम्हारी नज़रों में ऐसी चरित्रहीन औरत हूँ जो इस उम्र में भी अपनी टंगे फैला देती है.”

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“पंडिताइन प्लीज , ऐसा न कहो. मई अब आपको और भी ज्यादा प्यार करता हूँ. आप ये बात समझ लो की बिना इज़्ज़त के प्यार नहीं हो सकता. आप मेरे लिए वो देवी हो जिसके चरणों में मेरा सब कुछ अर्पित है. प्यार , इज़्ज़त और जरुरत पड़ी तो मेरी जिंदगी भी. ये हमारे भाग्य में था. या तो हमें इसे स्वीकार कर लेना चाहिए या फिर रट चिल्लाते रहे , कोसते रहे लेकिन भाग्य में जो होगा वो होकर रहेगा.”

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मेरी बात सुनकर पंडिताइन ने रोना बंद कर दिया और आश्चर्य से बोली,” क्या तुम मुझे ये समझाना चाहते हो की जो कुछ हुआ वो सही था और हमें इस पाप को करते रहना चाहिए ? अपनी काम इच्छाओं को सही ठहरने के लिए भाग्य का बहाना बनाना चाहिए ?”

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“पंडिताइन क्या सही है क्या गलत, इसका फैसला मई या आप नहीं कर सकते हैं. ये बस यूँही हो गया और मुझे इसका कोई अफ़सोस या दुःख नहीं है. आप अपने को देखिये , आपने विरोध करने की कोशिश की थी लेकिन कही गहरायी में आपके अंदर कुछ था जिसने आपके विरोध को कमज़ोर कर दिया और उसके बाद आपने भी यौनसुख का भरपूर आनंद लिया.

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पंडिताइन आप चाहे मने या न मने लेकिन आपके अंदर भी कुछ खालीपन या शुन्य (0) था जिसके बारे में आप खुद अनजान थी.

“पंडिताइन मेरी आँखों में देखिये और मुझसे कहिये की जो कुछ हुआ उसके बाद आप मुझसे गृह्णा करती हैं और आप इसे जारी नहीं रखना चाहती हैं. मेरी सौगंध लीजिये पंडिताइन , उसके बाद मई कभी आपको परेशां नहीं करूँगा. मेरे हृदय में आप मेरी काम की देवी की तरह रहेंगी लेकिन मई आपसे फिर कभी सम्भोग के लिए नहीं कहूंगा. बताइये मुझे पंडिताइन .“ मेरी आँखों से आंसू बहने लगे.

पंडिताइन ने अपनी बड़ी बड़ी आँखों से मुझे देखा और बड़बड़ायी ,” हे ईश्वर !”

वो मुझे ऐसे hi देखती रही जैसे मुझे नहीं बल्कि मेरे अंदर मेरी आत्मा में कुछ देख रही हो.

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फिर मई पंडिताइन के नज़दीक बैठ गया , पंडिताइन ने थोड़ा खिसककर मुझे जगह दी. मेने अपनी बांह पंडिताइन से लपेटकर उन्हें अपनी और खिंचा. पंडिताइन ने मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया और मेरी छाती पर अपनी बांह लपेटकर मुझे पकड़ लिया. मेने पंडिताइन के चेहरे को सहलाया तो उनके मुंह से एक सिसकारी निकली और मेरे बदन में अपना चेहरा छुपा लिया.

पंडिताइन को अपने से लगाए हुए मई बैठा रहा. उस समय कुछ ऐसे फीलिंग थी जैसा पहले कभी महसूस नहीं हुआ था. वो वासना नहीं थी, प्यार भी नहीं था, एक अजीब सी भावना थी , क्या था मुझे भी नहीं पता. अब मेरे अंदर कोई अपराधबोध या इच्छाओं के बीच संघर्ष नहीं रह गया था. सब साफ़ हो चूका था की मुझे पंडिताइन की पूजा और उनसे प्यार करने की अपनी जिम्मेदारी को निभाना है.

पंडिताइन और मेरे शारीरिक सम्बन्ध के बावजूद , पंडिताइन का रुतबा और उनके लिए इज़्ज़त पहले जैसी hi रही. पंडिताइन को ऐसे पकडे रहने और उनकी चूचियों के मेरे बदन से दबने से मुझे उत्तेजना आ रही थी , लेकिन उसके पंडिताइन होने की भावना भी मेरे मन में आ रही थी. किसी भी औरत के साथ मई इस अवस्था में होता तो ूटीज़न की भावना तो आती लेकिन वो इमोशनल फीलिंग नहीं आती जो पंडिताइन के साथ आ रही थी.

मेने अपने अंगूठे से पंडिताइन के होठों को छुआ.

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चुने पर उनके होठों में हुए कम्पन को मेने महसूस किया. मेने धीरे से निचले होठ को अलग किया और थोड़ा सा अंगूठा अंदर डाला. उन्होंने अपने होठों से मेरे अंगूठे का हल्का चुम्बन लिया.

मेने पंडिताइन की थोड़ी ऊपर उठायी , अब पंडिताइन सीधे मेरी आँखों में झांक रही थी. उनके होठ खुले हुए थे. मेने पंडिताइन की आँखों में देखा और अपने होठ पंडिताइन के होठो से मिला दिए.

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पंडिताइन के बदन में कम्पन हुआ. मेने उनके मुंह में जीभ घुसा दी. पंडिताइन ने कोई विरोध नहीं किया और मजबूती से मुझे पकडे rakha.hum चुम्बन लेते रहे. पंडिताइन अपनी तरफ से ज्यादा कुछ नहीं कर रही थी. उसने अपनी जीभ से मेरे होठों को छुआ और कभी कभार मेरे निचले होठ को अपने होठों में भर लेती थी .

थोड़ी देर तक ये हल्का फुल्का प्यार, चुम्बन ऐसे hi चलता रहा. फिर मेने पंडिताइन के कुर्ते के बटन खोलने सुरु किये. पंडिताइन बिलकुल जड़वत हो गयी. उसका पूरा बदन अकड़ गया. मेने अपने हाथ रोक दिए , कुछ पल बाद जब पंडिताइन का बदन ढीला पड़ने लगा. तो मेने फटाफट बटन खोल दिए

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और अपनी उँगलियों से चूचियों का ऊपरी हिस्सा सहलाने लगा. पंडिताइन ने मेरे कंधे को कास के पकड़ लिया और दूसरे हाथ से मेरी पीठ को पकड़कर मुझे आलिंगन कर लिया.

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मई अपने हाथ को निचे ले जाकर पंडिताइन की चूचियों को सहलाने लगा. मेने कुर्ते के बहार से पंडिताइन की नाभि को सहलाया. फिर मेने कुर्ते के निचे से अंदर हाथ घुसाने की कोशिश की लेकिन कुरता पंडिताइन के निचे दबा हुआ था. पंडिताइन ने थोड़ा सा अपने नितम्ब ऊपर को उठाये और मेने कुरता उनके निचे से हटा दिया. फिर मेने निचे से कुर्ते के अंदर हाथ डाला तो अपने पेट पर मेरे हाथों के स्पर्श से पंडिताइन ने सिसकारी ली.

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कुछ पल तक मई पंडिताइन के मुलायम पेट पर हाथ फिरता रहा और उनकी नाभि को सहलाता रहा. फिर मई ऊपर को बड़ा और उसकी चूचियों को छुआ.



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एप 127 (बी)



एक बार फिर से पंडिताइन का बदन अकड़ गया. लेकिन उसने कोई विरोध नहीं किया. मुझे टाइट पकडे हुए वो सिसकारी ले रही थी. पंडिताइन की ब्रा के ऊपर से hi मेने दोनों चूचियों को धीरे से दबाया.

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फिर मेने पंडिताइन के होठों को चूमा और एक हाथ पीछे ले जाकर ब्रा के हुक खोल दिए.

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ब्रा की क़ैद से चूचियों को आज़ाद करके मई उन्हें दबाने और सहलाने लगा. अंगूठे और बीच वाली ऊँगली के बीच निप्पल को दबाकर मेने धीरे से मसला.

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पंडिताइन के मुंह से , oh…Panditaayin ! निकला और वो बीएड पर पीछे को लेट गयी. मई भी कोहनियों के बल पंडिताइन के पास लेट गया. हम दोनों की नज़रें मिली और फिर उसने अपनी आँखे बंद कर ली.

मेने पंडिताइन का कुरता उतरने की कोशिश की. पंडिताइन ने अपनी बांहे उठाकर मुझे मदद की.

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जैसे hi मेने कुरता उतरा पंडिताइन ने अपनी बांह आदि रखके चूचियां धक् ली.

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मेने पंडिताइन का चुम्बन लिया और उसकी बांह हटा दी. मेने उसकी बड़ी चूचियों को मसला

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और अब एरोला और निप्पल को जीभ से छठा.

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निप्पल पर मेरी जीभ लगते hi पंडिताइन ने ज़ोर से सिसकारी ली और अपनी बांह मेरे ऊपर रख दी.

अब हम प्रेमी जोड़े की तरह से थे. पंडिताइन की शर्म और हिचकिचाहट दूर हो चुकी thi.wo धीरे धीरे मेरा साथ दे रही थी. वो एक ऐसे शर्मीली लड़की की तरह व्यव्हार कर रही थी

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जिसे पहली बार छुआ गया हो.

मेने दोनों हाथों में चूचियां पकड़कर जोर से दबा दिया.

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पंडिताइन ने …….आह भरी और आँखे खोल के मुझे देखा. मेरा सर पकड़कर वो मेरे चेहरे को नज़दीक लायी और मेरा चुम्बन लेते हुए मेरे मुंह के अंदर जीभ दाल दी. अब हम दोनों जोरदार तरीके से चुम्बन लेने लगे.

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उसने मेरे गालों और माथे को चूमा और फिर से होठों को बेतहाशा चूमने लगी.

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मेने अपना हाथ निचे ले जाकर पंडिताइन के पेट पर फिराया और फिर पयजामे के इलास्टिक के अंदर हाथ दाल दिया. मेने उठकर पंडिताइन की आँखों में देखा. पंडिताइन ने शांति से मुझे देखा उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे.

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मेरे हाथ पयजामे के अंदर निचे को बढ़ता गया और पंडिताइन के चेहरे के भाव बदलते गए.

जैसी hi मेरे हाथ ने उसकी छूट को छुआ, पंडिताइन ने अपने निचले होठ को दांतो से काट लिया और अपना मुंह दूसरी तरफ घुमा लिया.

मेने दूसरे हाथ से पंडिताइन का मुंह घुमाकर सीधा कर दिया और पंडिताइन की छूट के उभरे हुए भाग को हथेली में पकड़ लिया.

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पंडिताइन ने अपनी आँखे कास कर बंद कर राखी थी.

“पंडिताइन मुझे देखो.” लेकिन उसने आँखे नहीं खोली.

मेने ज़ोर से पंडिताइन की छूट को हथेली से दबा दिया. “पंडिताइन प्लीज.”

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पंडिताइन ने अपनी आँखे खोल दी और मुझे देखा. उसकी आँखों में कामोन्माद दिखा. छूट की दरार की पूरी लम्बाई पर मई ऊँगली फिरने लगा ऊपर से निचे तक.

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पंडिताइन अपने होठों को काटने लगी, उसने अपनी थोड़ी ऊपर उठा ली और उसकी जंघे ढीली पद गयी.

पंडिताइन की गीली छूट में मेने बीच वाली ऊँगली दाल दी.

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“ooooo…ooofff…Panditaayin !” पंडिताइन ने सिसकारी ली और अपनी बांहों में भरके जोर से मेरे होठों का चुम्बन ले लिया.

पंडिताइन ने अपनी जंघे थोड़ी फैला दी. मेने दो उँगलियाँ डालकर छूट में अंदर बहार करना सुरु किया.

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पंडिताइन ने मेरे होठ काट लिए और मेरे मुंह में अपनी जीभ घूमने लगी.

मई निचे को जाकर पंडिताइन के तने हुए निप्पल को होठों के बीच लेकर बच्चे की तरह चूसने लगा.

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फिर और निचे को जाकर पंडिताइन के पेट पर जीभ फिरने लगा. पंडिताइन की छूट में ऊँगली करना जारी रखते हुए मेने उनके मुलायम पेट पर दांतो से हलके हलके काट लिया.

पंडिताइन ooo…ohh…..aaaa..aaahhhh करती रही.

मेने पंडिताइन की छूट से उँगलियाँ बहार निकाल ली और उनके पयजामे को निचे खिसकने लगा. पायजामा उनके निचे दबा हुआ था इसलिए मई निचे नहीं कर पाया. मेने उनकी नाभि पर जीभ फिराई और उन्होंने थोड़ा सा उठकर पायजामा उतरने दिया. मेने घुटनो तक पायजामा खिंच लिया. और फिर मई उनके ऊपर लेट गया.

मेने कोहनियों के बल ऊपर उठकर पंडिताइन को देखा , पंडिताइन ने अपनी नज़रें नहीं हटाई. उसकी गहरी आँखों में शांति का भाव था. उसके चेहरे पर मुझे हलकी सी मुस्कराहट दिखी.

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उसने दोनों हाथों से मेरी टीशर्ट पकड़ी और सर के ऊपर से उतर दी.

अब पंडिताइन के हाथ मेरी पूरी पीठ को सेहला रहे थे. कन्धों से लेकर निचे नितम्बों तक. पंडिताइन अब अपनी नज़र फेर नहीं रही थी वो सीधे मेरी आँखों में देख रही थी.

फिर मई अंगूठे से पंडिताइन की क्लीट को मसलने लगा और दो उँगलियाँ छूट के अंदर बहार करने लगा.

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पंडिताइन ने अपने होठ काट लिए और कमर ैथ कर टेडी कर di,”ooooo…oooh ! बर्दास्त नहीं हो रहा है. इतनी दूर ले आये हो की अब वापस नहीं लौट सकती.

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मेने पंडिताइन के पयजामे के इलास्टिक में अपने पेअर का अंगूठा फसाया और पयजामे को निचे को खिंच दिया. पंडिताइन ने अपने पैरों को हिलाकर पीजमे को अपने पैरो से निकाल दिया. अब मेरी प्यारी पंडिताइन मेरी बांहों में बिलकुल नग्न थी. लेकिन आश्चर्यजनक रूप से मुझे कोई जल्दबाजी नहीं थी , एक पुरुष और स्त्री नग्न होकर जैसे एक दूसरे के ऊपर टूट पड़ते हैं , वैसा कुछ भी नहीं था. मई शांत भाव से आगे बाद रहा था. अपना शांत भाव देखकर मुझे खुद हैरानी हो रही थी. तभी मुझे पंडिताइन को पूर्ण रूप से देखने की इच्छा हुई. और मई बीएड से उठकर थोड़ी दूर खड़ा हो गया और पंडिताइन को देखने लगा.

मुझे ऐसे देखते हुए पाकर पंडिताइन ने अपने को ढकने की कोशिश की. मेने निचे झुककर पंडिताइन को roka,”Panditaayin मुझे रति के रूप की ये छवि देखने दो. प्लीज मुझे इस दृश्य को देखने से वंचित मत कीजिये.”

मेरी प्रार्थना सुनकर पंडिताइन शांत पद गयी. उसने अपने घुटने मोड़ लिए और कमर थोड़ी टेडी करते हुए हाथ फैला लिए. पंडिताइन उस पोज़ में खजुराहो के मंदिरों में गाड़ी हुई किसी नारी की तरह कामुक लग रही थी. और उसके चेहरे की मुस्कराहट देखकर

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तो मेरा पानी hi निकलने को हो गया.

मेने अपना शार्ट उतर दिया और पंडिताइन के बगल में लेट गया. एक हाथ पंडिताइन की गर्दन के निचे डालकर मेने उसे चुम्बन के लिए अपनी और खिंचा. पंडिताइन ने चुम्बन में पूरा साथ देते हुए मेरे मुंह में जीभ घुसा दी.

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उसके हाथ मेरी नंगी पीठ को, कंधे से लेकर नितम्बों तक सहलाने लगे. मेरे नितम्बों के बीच की दरार पर पंडिताइन ने उँगलियाँ फिराई. मेरे नितम्बों को उसने दबाया और सहलाया. अब हमारे बीच अप्रत्भाथ जैसी कोई भावना नहीं रह गयी थी , ये इतना आनंद दायक था की मई बिना सम्भोग किये हुए hi दिन भर पंडिताइन के साथ ऐसे hi लेते रह सकता था. मेरे लिए जैसे समय रुक सा गया था. आनंद के उन पलों को मई लम्बा खींचना चाहता था, ऐसा लग रहा था की ये पल कभी ख़तम hi न हो.

मेने पंडिताइन का हाथ पकड़ा और अपने लुंड पर रख दिया. पंडिताइन ने पहले हलके से लुंड को छुआ फिर हलके से पकड़ लिया.

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उसने मेरी गोलियों को सहलाना सुरु kiya.mene अपना सर उठाकर पंडिताइन को देखा.

फिर उसने लुंड को जोर से दबाया और मेरा सर निचे को खींचकर अपनी छाती में दबा लिया.

पंडिताइन की चूचियों के बीच से सर उठाकर मई निचे को बड़ा और उसकी जांघों के बीच आ गया. पंडिताइन की छूट में मुंह लगाने से पहले hi उसने मुझे रोक दिया.

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“संजू आज आनंद का समय नहीं है. आज मुझे लाज और सांसारिकता की इस दुर्गम नदी के पर ले चलो. आनंद के अवसर तो और भी आएंगे. इससे पहले की मेरा सहस टूट जाये , आज मुझे बहा के ले चल .”

पंडिताइन की छूट में जीभ घुसाने की अपनी इच्छा को रोकते हुए मई ऊपर को बड़ा और उसकी जांघो के ऊपर झुक गया. अपनी जांघो को फैलाकर पंडिताइन ने मुझे जगह दी. लुंड को हाथ से पकड़कर मेने पंडिताइन की छूट के होठों और क्लीट पर रगड़ना सुरु किया. पंडिताइन ने अपनी कमर उठा दी और क्लीट को रगड़ने से वो सिसकारी लेने लगी.

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“हे पंडिताइन , इस अलौकिक संसर्ग की अनुमति मांग रहा हूँ. मुझे, अपनी योनि में स्वीकार कीजिये पंडिताइन .” पंडिताइन के दोनों तरफ हाथ रखकर मेने पंडिताइन की आँखों में देखा , जिनमे आनंद और आंसू दोनों hi मुझे दिखा.

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“आओ , मेरा उपभोग करो संजू बीटा . तुम्हारी पंडिताइन तुम्हारा स्वागत करती है. परन्तु तुमको सौगंध है अपने उत्तरदायित्व और मर्यादा का पालन करने की.” ऐसा कहते हुए पंडिताइन ने मेरे लुंड को पकड़ा और अपनी छूट के छेद पर लगा दिया.

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अपने नितम्बों को थोड़ा ऊपर करके उसने मुझे धक्का देने का इशारा किया.

मेने धीरे से लुंड को पंडिताइन की छूट के अंदर डाला . पंडिताइन की छूट के होठों ने फैलकर मेरे लुंड को अंदर घुसने दिया. बहुत hi आनंद की अनुभूति हो रही थी. फिर मेने पूरा लुंड बहार निकलकर पंडिताइन की कमर पकड़कर एक झटके में जड़ तक छूट में घुसा दिया.

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पंडिताइन के मुंह से लम्बी सिसकारी निकली. मेने सर उठाकर पंडिताइन को देखा. वो अपने होठ काट रही थी और कमर टेडी कर राखी थी. लेकिन मुझे आश्चर्य हुआ की उसकी आँखे बंद नहीं थी. वो सीधे मेरी आँखों में देख रही थी. वो मुझे देखती रही फिर उसने मेरे लिए अपनी बांहे उठा दी. मई पंडिताइन की बांहो में आ गया और अपने होठ उसके होठों से मिला दिए.

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पंडिताइन की छूट की गर्मी अपने लुंड पर महसूस करते हुए मेने पंडिताइन के मुंह में जीभ घुसा दी.

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फिर मई धीरे धीरे लुंड को अंदर बहार करने लगा. पंडिताइन ने अपनी टंगे उठाकर मेरी कमर पर लपेट दी. इशारे को समझते हुए मई लम्बे स्ट्रोक लगाकर पंडिताइन की चुदाई करने लगा.

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आधे से ज्यादा लुंड बहार निकलकर मई एक झटके से अंदर घुसा दे रहा था. जिससे पंडिताइन का बदन हिल जा रहा था. पंडिताइन की आँखों में देखते हुए मई ऐसा करते रहा. पंडिताइन अपने निचले होठ को काटते हुए “ooofff……aaahhh…ohhhhh…sanju ….उम्म्म्म” करती रही. पंडिताइन की सिसकारियों से मई बहुत उत्तेजित हो गया लेकिन अपने ऊपर काबू रखते हुए मेने धीमे धीमे चुदाई जारी राखी.

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पंडिताइन की छूट में लुंड घुसाए रखकर मई पंडिताइन के पुरे बदन को देखने लगा. मेने अपने लुंड को देखा जो पंडिताइन की छूट में घुसा हुआ था. मेने थोड़ा अंदर डाला और फिर बहार निकल लिया. मेरी प्यारी पंडिताइन की छूट के रास से लुंड पूरा भीग गया था. वही छूट जो कल तक मेरे लिए असंभव थी, उस फीलिंग को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. मेने पंडिताइन की जांघों पर हाथ फिराया और जोर से मांस को दबा दिया. पंडिताइन को देखा , वो मुस्कुरा रही थी.

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“जो तुम्हारी आँखों में देख रही हूँ वो पाप नहीं हो सकता. मुझे आज तक आभास नहीं हुआ की क्या ऐसा है जिसकी मुझे तलाश थी. पर अद्भुत पूर्णता का आभाष हो रहा है. ऐसा लग रहा है की मुझे इसका इंतज़ार था. आओ संजू आओ और पूर्ण कर दो अपनी पंडिताइन को.” ऐसा कहते हुए पंडिताइन ने अपनी जंघे उठा दी और अपने नितम्बों को ऊपर को मोड़कर अपनी छूट ऊपर उठा दी.

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मेने अपने दोनों हाथों पर वजन डालकर छूट पर गहरे धक्के मरने सुरु किये. इस पोज़ में बहुत गहरायी तक छूट के अंदर लुंड घुस जा रहा था. धक्कों से पंडिताइन की चूचियां हिलने लगी और उसने अपनी थोड़ी ऊपर उठा दी.

“उफ्फ्फ पंडिताइन , आआह्ह्ह्हह sanjuu……..bhar दो मुझे बीटा. मुझे विस्वास नहीं हो रहा की मई ये कर रही हूँ लेकिन मुझे अच्छा लग रहा है. Aaa…aah.”

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पंडिताइन ने मुझे और तेजी से करने को कहा. अब मई पंडिताइन की तेज तेज चुदाई करने लगा. पंडिताइन ने अपना सर उठाकर लुंड को छूट में घुसते देखा. फिर उसने अपनी बांहे मेरी पीठ में लपेटकर मुझे अपनी और खिंचा. मई निचे आकर पंडिताइन की चूचियों के निप्पल को चूसने लगा.

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इससे पंडिताइन का आनंद कई गुना बाद गया.

“पे लो संजू.

मेने जोर से निप्पल को चूसा.

“aaaaa…aaah संजू.” पंडिताइन सिसकी.

पंडिताइन की चुदाई करते हुए दोनों चूचियों को मेने खूब चूसा. ऐसा आनंद मुझे पहले कभी नहीं आया था.

अब पंडिताइन ने अपने हाथ मेरे नितम्बों पर रख दिए और उनको कसके पकड़कर वो मुझे अपनी और खींचने लगी. और हर धक्के के साथ उसकी सिसकारी निकल जा रही थी.

अचानक पंडिताइन ने अपने नितम्बों को ऊपर उछलना सुरु किया, मेरे हर धक्के का जवाब वो निचे से देने लगी. हमारे बदन के टकराने की आवाज़ पुरे कमरे में गुजने लगी. वो इतनी जोर से अपने नितम्बों को ऊपर उछाल रही थी की उसका साथ देना मेरे लिए मुश्किल हो गया. थप थप थप की आवाज़ के साथ पंडिताइन की सिसकारियां कमरे मं गुजने लगी.

मुझे ऐसा लगा की अब पंडिताइन अपने ओर्गास्म के नज़दीक है. अपनी जांघों के बीच वो मुझे किसी गुड्डे की तरह ऊपर उछाल रही थी.

“Sanju….aah …बेटे तेज karo……..oooohhhhh…..beta मई मझधार में हूँ , मुझे पार करा दो .”

पंडिताइन के कहने का मतलब था मुझे ओर्गास्म आने वाला है, तेज धक्के लगाकर मुझे ओर्गास्म दिला दो. मैंने तेज़्ज़ तेज़्ज़ धक्के मारने शुरू कर दिए....

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पंडिताइन - आआआह्ह्ह्हह्ह.... aaaaaaaaaahhhhh.. aaaaaaaaaaahhhhhhhh... एस्शह्ह्हह्ह...... एससससससहहहहहह..... एसस्शह्ह्ह्ह..... एससससससहहहहह...... आआअह्हह्ह्ह्हह......
 
एप -- 128

पंडिताइन को ओर्गास्म आने वाला था , पंडिताइन ने मुझे तेज तेज करने को कहा. मई तेज तेज धक्के लगाकर लुंड को पंडिताइन की छूट में गहराई तक पेलने लगा.

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मेने पंडिताइन की चूचियों में मुंह लगाया और जोर से दांत गदा दिए.

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“aaa…aah बीटा…” पंडिताइन सिसकी.

अब पंडिताइन ऊपर को छोटे छोटे धक्के लगा रही थी . मेने पंडिताइन का चुम्बन लिया और उसकी जीभ को चूसा.

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“aaaiiiiiiiiii………aaaaahhhhhhhhhhhh…”

पंडिताइन ने अपनी कमर उठाकर टेडी कर दी और वो सिसकियाँ लेते हुए झड़ने लगी.

उसने मेरी पीठ पर नाखून गदा दिए. कुछ पल तक ऐसे hi हवा में रूककर पंडिताइन ने कमर निचे कर दी.

“रुक मत संजू नहीं तो मेरी जान निकल जाएगी. मुझे दे दो बीटा.” पंडिताइन चिल्लाई.

पंडिताइन ने फिर से अपनी जंघे उठा ली. मई पंडिताइन की जांघों को पकड़कर छूट में लम्बे और जोरदार स्ट्रोक लगाने लगा.

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मुझे मालूम था पंडिताइन का ओर्गास्म पूरा नहीं हुआ है और पूरा ओर्गास्म निकलने के लिए उसको तेज तेज चुदाई की जरुरत है.

“ हाँ …haan…..aise hi.. ……बस थोड़ा aur………….thoda और मेरे sartaaz…..aaaaaa…aaahh…..sanjjjuuuuuuu……..main gayi…..mujhe sambhalo……….oiiiiiiiiiiii….”

फिर पंडिताइन ने मुझे अपनी गिरफ्त में जकड लिया. मेने उसकी जांघों को छोड़ दिया और धक्के लगाकर पंडिताइन की चुदाई करते रहा. पंडिताइन के झड़ने से उसकी छूट से रास बहने लगा.

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छूट के अंदर बहार लुंड जाते समय रास से भीगकर पहुंच…. पहुंच…… पहुंच की आवाज़ करने लगा.

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अब पंडिताइन बीएड में शांत पद गयी. उसके बदन से पसीना निकल रहा था. पंडिताइन की चूचियों के बीच मुँह रखकर मई लेट गया.

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पंडिताइन ने मेरे कन्धों को पकड़कर मुझे थोड़ा ऊपर उठाया और मेरे चेहरे पर उँगलियाँ फिरने लगी. उसके चेहरे पर मुस्कराहट थी, अब वो कोई दूसरी hi औरत बन चुकी थी. उसने अपनी जांघो को उठाया और नितम्बों को हिलाकर मुझे चुदाई की याद दिलाई.

मई पंडिताइन के चेहरे को देखते हुए हलके हलके धक्के लगाकर चुदाई करने लगा.

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“ओह संजू, ऐसा विस्फोटक चरम मैंने आज तक अनुभव नहीं किया.” सिसकियाँ लेते हुए पंडिताइन बोली.

मेने मुस्कुराते हुए पंडिताइन का चुम्बन लिया,” ी लव यू पंडिताइन .”

पंडिताइन ने मेरे चेहरे को पकड़ा और माथे का चुम्बन लिया , फिर आँखों, नाक और होठों का चुम्बन लेकर मेरे निचले होठ को चूसने लगी.

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अब मई भी झड़ने के करीब था. मेने लम्बे स्ट्रोक लगाने सुरु किये. लुंड को आधा बहार निकालकर फिर एक झटके में अंदर घुसाने लगा. पंडिताइन की छूट की गहरायी में जड़ तक मई लुंड को घुसा दे रहा था.

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“ओह्ह संजू भर दो मुझे…...” पंडिताइन मेरा उत्साह बढ़ाते रही.

मुझे एहसास हुआ की हम बिना किसी गरहनिरोध के hi चुदाई कर रहे हैं. पंडिताइन को गर्भ भी ठहर सकता है. मुझे चिंता हुई.

“Sanju….kash की मई गर्भ धारण कर सकती. तुम्हारे वीर्य से स्थापित गर्भ मेरे बच्चे. संजयपणे वीर्य से मेरी योनि भर दो. Aah….Sanju भर दो मुझे.”

अब पंडिताइन सरे बंधनो से पर जा चुकी थी. वो खुलेआम अपनी भावनाओ का इज़हार कर रही थी. पंडिताइन की चूचियों को पकड़कर मई जोरदार धक्के लगाने लगा.

“पंडिताइन ….मेरी प्यारी पंडिताइन …….मेरे वीर्य को ग्रहण करो.”

“भर दो. अपनी पंडिताइन की योनि को अपने वीर्य से भर दो. न जाने कितने जनमो से ये योनि तुम्हारे वीर्य के लिए तरसती रही है. भर दो मुझे.”

मेने पंडिताइन की चूचियों को छोड़ दिया और उसकी गर्दन के निचे हाथ डालकर उसे चूमने लगा. मेरे वीर्य से पंडिताइन की छूट भर गयी. पंडिताइन ने भी वीर्य को महसूस किया और अपने नितम्बों को उठाकर वीर्य को ग्रहण किया. मेरे नितम्बों को पकड़कर वो मुझे अपनी छूट पर पटकने लगी.

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“ओह्ह Sanjuuuu….mai फिर से गयी………” पंडिताइन जोर से चीखी . उसको दूसरा ओर्गास्म आ गया. मेरे शरीर से सारा वीर्य निकलकर पंडिताइन की योनि में चला गया.

जबरदस्त चुदाई के बाद हम दोनों बीएड पर शांत पद गए. मई पंडिताइन के बदन के ऊपर लेता हुआ था. उसने अपनी बांहों में मुझे जकड़ा हुआ था. पंडिताइन की छूट में अभी भी मेरा लुंड घुसा हुआ था. मेने फिर से धक्के लगाने की कोशिश की लेकिन पंडिताइन ने मुझे रोक दिया और शांत लेते रहने को कहा.

मेरा लुंड मुरझाकर पंडिताइन की छूट से बहार निकल गया. पंडिताइन मुस्कुरायी और मुझसे हटने को कहा. मई उसके ऊपर से सरककर बगल में लेट गया.

पंडिताइन बीएड में बैठ गयी और अपनी फैली हुई जांघों के बीच देखने lagi,”Sanju देखो, तुमने क्या किया है.”

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मई उठकर देखने लगा. पंडिताइन की छूट से वीर्य निकलकर बीएड में चादर पर गिर रहा था.

मेने पंडिताइन को देखा , वो मुस्कुरायी,” काश मई इससे गर्भधारण कर पति.”

संजू -- तुम जरूर माँ बनोगी मेरे बच्चो की

फिर झुककर पंडिताइन ने मेरे होठों का चुम्बन ले लिया.

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मेने पंडिताइन की छूट से वीर्य निकलकर उसकी चूचियों पर मॉल दिया.

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और उसकी छूट में ऊँगली करने लगा.

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“aaa…aah संजू. अब बस करो मैं थक गयी हूँ. इस उम्र में कैसे तुम्हारा इतना साथ दे पायी मुझे खुद आश्चर्य हो रहा है. कहाँ से आयी मुझ में इतनी शक्ति ?”

“पंडिताइन , आपकी सही सही उम्र क्या है ?” मेने पूछा.

“18 वरस की उम्र में मेरी शादी हो गयी थी “ पंडिताइन मुस्कुराते हुए बोली और बीएड से उठने लगी.

मेने उसका हाथ पकड़ा,” इसका मतलब आप….”

पंडिताइन ने अपना हाथ छुड़ाया और बाथरूम में भाग गयी.

बाथरूम के दरवाज़े से बोली,” तुम मेरी उम्र का हिसाब लगते रहो लेकिन कुछ खाने का भी आर्डर दे दो. मुझे भूक लगी है. अपने प्यारे पति का ख्याल रखने के लिए मुझे ताकत की जरुरत है.” पंडिताइन शरत भरी मुस्कान से मुझे आँख मरते हुए बोली और फिर बाथरूम का दरवाज़ा बंद कर दिया.

मेने घडी में देखा, 11:45 का टाइम हुआ था. हे ईश्वर 4 घंटे ! , 4 घंटे तक हमारा लम्बा प्यार चला था. मई मुस्कुराने लगा.

फिर मेने खाने का आर्डर दिया और पंडिताइन ने बाथरूम से मुझे आवाज़ दी. बाथरूम का दरवाज़ा थोड़ा खुला हुआ था. मई बाथरूम के अंदर चला गया. पंडिताइन बाथटब में कड़ी थी.

“आओ संजू तुमको नेहला दूँ” पंडिताइन मुस्कुराते हुए बोली.

मई बाथटब में गया और पंडिताइन का चुम्बन लिया. और दूसरे हाथ से पंडिताइन की चूचियां दबाने लगा. पंडिताइन ने मेरा चुम्बन लिया और फिर मुझे धकेलते हुए boli,”pehle नाहा लो बता.”

एक अच्छे बच्चे की तरह मई पंडिताइन के सामने खड़ा हो गया. पंडिताइन ने मुझे घुमा दिया और मेरी पीठ पर साबुन लगाने लगी.

फिर निचे को साबुन लगते हुए उसका हाथ आगे मेरे लुंड पर लगा.,” हे भगवन तुम तो फिर से तैयार हो.”

“मेरा ऐसा हाल नहीं था , ये तो आपके चुने से हो गया.” मेने मुस्कुराकर जवाब दिया.

पंडिताइन ने मुझे सीधा घुमाकर शावर चला दिया. फिर नहलाने के बाद तौलिये से मेरा बदन पोछने लगी. मई चुपचाप खड़ा रहा और पंडिताइन को निहारते रहा. ऊपर का बदन पोछकर पंडिताइन निचे को पोछने लगी. मई देवर से तक लगाकर खड़ा हो गया , कुछ पल के लिए मेने अपनी आँखे बंद कर ली.

तभी मेरे लुंड पर गर्मी महसूस हुई . मेने आँखे खोलकर देखा तो पंडिताइन ने लुंड को मुंह में लिया हुआ था. वो भी क्या दृश्य था. मेरे मुंह से …ाः निकली. पंडिताइन ने हाथ से मेरे लुंड को पकड़ा और चूसने लगी. दूसरे हाथ से वो मेरी गोलियों को सेहला रही थी. मेने फिर से आँखे बंद कर ली.

पंडिताइन ने मुझसे टंगे फ़ैलाने को कहा. और मेरे नितम्बों को पकड़ लिया. मेरा ओर्गास्म बनने लगा . तभी पंडिताइन ने अचानक मेरी गांड के छेद में अंगुली दाल दी और आगे पीछे करने लगी. सुरु में मुझे कुछ अजीब लगा लेकिन फिर मेरे आनंद में कई गुना बढ़ोतरी हो गयी.

“पंडिताइन …मई झड़ने वाला हूँ…” और फिर मेने पंडिताइन को हटाने की कोशिश की. पंडिताइन ने हाथ के इशारे से मुझे मन किया और लुंड चूसते रही.

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मेरे लुंड से वीर्य की धार निकली और सीधे पंडिताइन के मुंह में गिरी . पंडिताइन लुंड चूसते रही .

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वीर्य से उसका मुँह भर गया. खासते हुए मुंह में हाथ लगाकर बड़ी मुश्किल से उसने वीर्य निगल लिया.

मेने पंडिताइन को कंधे से पकड़कर उठाया,” पंडिताइन आपने थूक क्यों नहीं दिया ?”

“अपने पति के वीर्य को कैसे बहा दूँ. तेरा वीर्य अमूल्य है मेरे लिए. धीरे धीरे आदत पद जाएगी. तब आसानी से पे सकुंगी.” पंडिताइन मुस्कुराते हुए बोली और मेरे होठों का चुम्बन ले लिया.

मैंने कहा क्या बात है पति कहे जा रही अब तोह

पंडिताइन – है अब पति को पति नहीं कहनी तोह और क्या कहूँगी… क्यों तू मुझसे शादी नहीं करेगा क्या

इस बात पर मैंने कोई उत्तर न देते हुए उसके उठ चुम लिए पंडिताइन के होठों से मुझे अपने hi वीर्य का स्वाद आया. मेने पंडिताइन को कसकर आलिंगन कर लिया, उसकी बड़ी चूचियां मेरी छाती से डाब गयी.

मेने पंडिताइन की छूट को चूसकर उसे सुख देने की कोशिश की लेकिन उसने मुझे रोक दिया.

“चलो, कमरे में चलो और कपडे पहन लो. बहुत सी बातें करनी हैं.

हमने अपने बदन नंगे करके एक दूसरे को दिखा दिए. अब हमें अपनी आत्मा को भी ऐसे hi खोलकर दिखाना है. एक पुरुष की तरह तुम्हे जानना है, समझना है और तुम भी एक स्त्री की तरह मुझे समझो, मुझे जानो. अच्छा या बुरा लेकिन हमें बहुत सी बातें करनी हैं.”

मेने हामी भरी और हम दोनों बाथरूम से बहार आ गए.


पंडिताइन - बैठो यहाँ पे....
 
भाई लोग..... तुम्हारे भाई की एक और लपलपाती हुई..... धूम मचती हुई स्टोरी कांटेस्ट में पोस्ट हुई है.... जाओ... और पढ़ डालो.... 🫵.....

ये रहा...... स्टोरी का लिंक.... आपके कंप्यूटर💻 स्क्रीन पर.... 😂

पोस्ट इन थ्रेड '★☆★ स्फोरम | अल्टीमेट स्टोरी कांटेस्ट 2024 ~ एंट्री थ्रेड ★☆★'



 
एप -- 129



पंडिताइन ने मुझे बीएड पे बिठाया...

पंडिताइन - देखो.... संजू.... तुम भी जानते हो की हमारा रिश्ता अब ऐसा बन चूका है जो की गलत है....

संजू - हां... जानता हु.... लेकिन...

पंडिताइन - पहले मेरी बात सुन लो फिर लेकिन वेकिन करना...

संजू - ok... सुनाओ..

पंडिताइन - देखो.... मई इस रिश्ते को ऐसे hi नहीं रहने देना चाहती हु.... मई इसको एक मुकाम देना चाहती हु.... तुम समझ रहे हो न...

संजू - मतलब....

पंडिताइन - देखो संजू..... मई अब तुम्हारे बिना.... तुम्हारे इस लुंड के बिना अब नहीं रह सकती.... मुझे तुम अब हर वक़्त के लिए अपने पास चाहिए हो..... और इसलिए मैंने ये फैसला किया है की मई तुम्हारे साथ शादी करुँगी.....

संजू - क्या... 🤯.... ये क्या बोल रही हो..... समाज क्या बोलेगा.... मेरे घर वालो को पता चलेगा तोह उनका क्या होगा...

पंडिताइन - ारी तुम उनकी चिंता मत करो... मैंने सब कुछ सोच रखा है हमारी जो शादी होगी उसके बारे में केवल हम दोनों को पता होगा.... बाकी किसी को नहीं..... हम दोनों समाज और दुनिया की नज़र में सिर्फ पहचान वाले और अकेले में पति पत्नी होंगे.... तोह क्या तुम्हे मेरा ये प्रस्ताव मंजूर है..

संजू - ारी.... जबरदस्त...... मजा आएगा तब तोह.... बताओ कब करनी है शादी....

पंडिताइन - हम दोनों कल hi करेंगे..... कल. हम मेरे मायके जाएंगे..... वह हम मंदिर में चुपके से शादी करेंगे.....

संजू - तुम अपने मायके वालो से क्या कहोगी...

पंडिताइन - संजू मेरे मायके में बस मेरी माँ hi रहती है उसके अलावा और कोई नहीं है.... और माँ को तोह मई ऐसे hi मन लुंगी....

और वोह भी हमारे इस राज़ को राज़ hi रखेंगी.....

संजू - और नहीं मानी तोह...

पंडिताइन - तोह.... उसका भी एक उपाय है मेरे पास

संजू - क्या...?

पंडिताइन - वोह मई तुम्हे वक़्त आने पर बता दूंगी....

अच्छा चलो अब सो जाते है तुमने छोड़ छोड़ के मेरी पूरी बंद बजा राखी है...

मई कितना थक्क गयी हु... देखो.. 😌

फिर हम दोनों एक दूसरे से लिपट के सो जाते है...

फिर अगली सुबह मेरी नींद.... मेरे चेहरे पे पानी के बूंदों के टपकने से खुली..

मैंने आँख खोलके देखा...

संजू ;- पंडिताइन डार्लिंग तुम...

क्या हाट है बड़ी खूबसूरत लग रही हो... 😍

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पंडिताइन - ये... पंडिताइन पंडिताइन क्या लगा रखा है.... मुझे सुसमा कहो न...

संजू - सुसमा डार्लिंग माय बेबी 😘उमा...

सुसमा - हैए😍 मेरा स्वीटू... कितना अच्छा लग रहा है तुम्हारे मुँह से अपने लिए ऐसा सुन्ना....

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चलो अब उठो और जल्दी से नाहा धोके तैयार हो जाओ फिर हम मेरे मायके के लिए निकलेंगे.....

संजू - हां.. हां... उठ रहा हु...

मई अब उठ के बाथरूम में नहाने चला गया..... मेरे नाहा के आते तक सुसमा ने पैकिंग कर ली थी..... और नास्ता भी आ गया.... हमने साथ में नास्ता किया...

सुसमा को मई अपने हाथो से खिला रहा था और वोह मुझे अपने हाथों से खिलाने लगी....

फिर खाना खाने के बाद वह से निकल पड़े मेरे होने वाले ससुराल की तरफ.... 😁

हमने कैब 🚖 बुक की.... और फिर हम निकल पड़े......

रस्ते में एक मंदिर पड़ा... जहा पे सुसमा ने 🚖 रोकने को कहा....

संजू - क्या... हुआ... गाडी क्यों रुकवा दी...

सुसमा - वोह मई न मंदिर में जाना चाहती हु... मैंने जिस मंदिर के बारे में कहा था न वोह यही है चलो अब मंदिर में चलके शादी करते है ....

संजू - चलो.... अब बलि का बकरा बनना hi पड़ेगा..... 🥲.....

सुसमा - क्या कहा तुमने...

संजू - कुछ नहीं... मैंने कहा कुछ कहा...

सुसमा - हां... चुपचाप चलो अब ....

अब हम दोनों मंदिर की ऑर्डर बढ़ने लगे...

मंदिर के पास जब पहुंचे तोह ये क्या देखा...😯..... वह तोह 100 से भी जयादा सीढ़ियां है मंदिर के लिए.....

सुसमा... - ारी... क्या हुआ... ?

संजू - इतनी साड़ी सीढ़ियां... कैसे चढ़ूंगा मई....

सुसमा - पेअर से और कैसे... 😄

संजू - हां... ारी नहीं... मतलब ये सीढ़ियां बहुत जयादा नहीं है...

सुसमा - क्यों... इतने में hi घबरा गए क्या... शादी करने का इरादा कही बदल तोह नहीं दिया....

संजू - ऐसा भी नहीं है... 🥲

सुसमा - हां..... बालने का सोचना भी मैट वार्ना .....

संजू - ारी नहीं बदलूंगा मेरी...

सुसमा - आए😳...

संजू - मेरी m..m..m..meri जान...

सुसमा - हां... बेटर ☺..... मुझे लगा था माँ बोल डोज...

संजू - नहीं नहीं 😅...

सुसमा - अच्छा... चलो अब मुझे उठाओ..

संजू - क्यों.. 😳 उठाना क्यों है..

सुसमा - ारी... मुझे गोद में उठके hi तोह चढ़ोगे न मंदिर

संजू - क्या 🤯......

( लग gaye...lag gaye...laude 🍌 लग गए )

सुसमा :- क्या हुआ.... ऐसे आंखें पहाड़ पहाड़ के क्या देख रहे हो... चलो उठाओ मुझे.... की दम नहीं है..... बस छोड़ने में hi सारा दम दिखते हो... इसमें तोह भीगी बिल्ली बन रहे...

संजू - ारी ऐसा भी नहीं है... अब देखो तुम अपने होने वाले पति देव की ताकत....

-- मेरे एक एक हाथ 💪 में 50 - 50 गोरिल्ला 🦍 की शक्ति है.....

सुसमा - ोहू.... 😍.... तोह चलो फिर उठाओ मुझे...

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संजू - अच्छा... जी अभी लो फिर...!!!!

चलो आ जाओ मेरी सूटकेस💼

मैंने पंडिताइन को अपनी दोनों बाहों में उठा लिया...

संजू - देखा उठा लिया ना....

पंडिताइन - जी देखा देखा... अब चलो सीढ़ियां भी चढ़नी है....

संजू - अभी लो...

अब मई पंडिताइन को अपनी गोद में उठा के सीढ़ियां चढ़ने लगा.....

वोह सीढ़ियां चढ़ते हुए हर एक पल मेरी तरफ hi प्यार भरी नज़रों से देखती रही...

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संजू ( मई) - ऐसे क्या देख रही हो मोहतरमा...

सुसमा - देख रही हो.... अपने पति देव को अपनी होने वाली पत्नी के प्यार में इतना म्हणत करते... कसम से आज जो तुमने किया है न उसने तोह मेरा दिल hi जीत लिया.... मई अपने मरे हुए पति ( पंडित) के साथ यहाँ आयी थी उसको कहा था मुझे गोद में उठा के ऐसे चढ़ो लेकिन उस भड़वे का तोह सीढ़ियां चढ़ाना क्या मुझे गोद में उठाना भी उससे हो नहीं पाया... मुझे खुसी है की तुम मेरी जिंदगी में आये...

संजू ( मैं में) - और मुझे गम है इस बात का.... 🥲.... की साला शादी कर रही हमसे ये 53 साल की औरत... हम है अभी 21 के बाचे और ये है गुलाबी 🩷 कच्चा पहनने वाली गदरायी औरत...🥹

सुसमा - कहा खो गए फिरसे.....

मई - नहीं नहीं कही नहीं,

सुसमा - तोह फिर चलो अब सीढ़ियां चढ़ा शुरू करो....

संजू - है ( मई)

मई उस 53 साल की गदरायी पंडिताइन

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को अपनी गोद में उठा के सीढ़ियां चढ़ते हुए मंदिर के अंदर पहुंच गया...

संजू - लो आ गया आपका मंदिर.....

वह पंडित जी भी थी...

पंडित - अरे..... क्या बात है.... आपने वोह कर दिखाया जो आज तक किसी ने नहीं किया.... मान्यता है की जो जोड़ा ऐसे गोद में उठा के मंदिर की सीढ़ियां चढ़ता है उनका रिश्ता जनम जन्मांतर के लिए फिक्स हो जाता है...

सुसमा - वाओ 😍.... इसका मतलब तुम अब हर जनम के लिए मेरे हो गए.. 😘...

सुसमा - पंडित जी.... हमें शादी करनी है हमारी शादी करवा दीजिये....

पंडित - जी...

पंडित ने अब एक थाल लायी जिसपर एक मंगलसूत्र और सिन्दूर था....

पंडित - लो बीटा..... ये सिन्दूर लो और भर दो इसकी मांग..... फिर ये मंगलसूत्र बाँध दो इनके गले में...

संजू - जी पंडित जी....

अब मैंने पंडित के बताये अनुसार..... सुसमा की मांग भी भर दी और मंगलसूत्र भी बाँध दिया..... अब सुसमा ने हमरे पेअर चुके आशीर्वाद ले लिया.....

और फिर हम दोनों ने पंडित के पेअर चुके आशीर्वाद ले लिए...

पंडित - सदा सुखी रहो....

पंडित - ये आशीर्वाद खास तुम्हारे लिए बेटी.... ढूढो नहाओ पुतो फलो....

अब हम पंडित का आशीर्वाद लेके..... भगवान् जी के दरसन करके मंदिर से निकल गए....

अब यहाँ से हमें कोई गाडी 🚘 नहीं मिलने वाली थी सुसमा के मायके के लिए...

संजू - ारी.... ऐसे क्या देख रही हो..

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सुसमा - सोच रही हु की कितनी नसीब वाली हूँ मई जो तुम मुझे मिले....

संजू - ारी ो मैडम..... ऐसे देखती मत रहो.... चलो अब ये बताओ की कैसे जाय जाए आपके माँ के घर....

सुसमा - यहाँ से तोह कोई गाडी नहीं मिलेगी...

संजू - तोह अब कैसे जाए.....

सुसमा - पैदल भी जा सकते है जयादा दूर नहीं है..... यही कोई 4 कम होगा...

संजू - अच्छा.... ठीक है फिर चलो....

सुसमा - चलिए..... फिर.....

हम दोनों पैदल पैदल चलते हुए... जाने लगे...

अभी हम चल hi रहे थी की.... सुसमा ने मेरा हाथ पकड़ लिया....

संजू - क्या हुआ....

सुसमा - कुछ नहीं...

संजू - तोह फिर ये हाथ क्यों पकड़ा....

सुसमा - क्यों ....! नहीं पकड़ना था क्या...

संजू - तुम्हारा गांव आने वाला है..... कोई देखेगा तोह क्या कहेगा...

सुसमा - गांव आएगा तब मई खुद hi हटा लुंगी लेकिन अभी तोह मई नहीं छोड़ने वाली...

कोई प्रॉब्लम....

संजू - न न मुझे क्यों प्रॉब्लम होगी 😅

लेकिन मेरे मुन्ना बाबू को प्रॉब्लम हो रही...

सुसमा - मुन्ना बाबू 😳 कौन मुन्ना बाबू...

संजू - अरे ये देखो मेरी पंत में... 😁

सुसमा - ओह.... अच्छा अच्छा.... अब समझी मई...

संजू - इनको थोड़ी परेशानी हो रही...

सुसमा - अच्छा जी.... तोह बताइये इनकी परेशानी कैसे दूर करे....

संजू - कुछ नहीं बस इसको थोड़ा चूस के संत कर दो....

सुसमा - अच्छा.. तोह चलिए उस पेड़ के पीछे...

संजू - चलो....

अब हम दोनों पेड़ के पीछे चले गए....

सुसमा - मेरी आँखों में बड़ी हवसी नज़रों से देखती हुई...

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अब ऐसे hi देखते देखते उसने अपने हाथ मेरे सीने से सहलाते हुए नीचे मेरे पंत तक ले गयी और मेरे लुंड को पंत के ऊपर से hi पकड़ के थोड़ा मसल दिया....

सुसमा - कितना कठोर है.... ☺...

संजू - सब आपके hi हुस्न का असर है.... अब इंतज़ार नहीं होता जल्दी करो डार्लिंग....

सुसमा - जी.... अभी लीजिये...

सुसमा ने अब अपने हाथ से संजू के पंत का चैन खोलके लुंड बहार निकाल लिया.... और अपने हाथो में लेकर सहलाने लगी....

संजू - देखो.... तुम्हे देख के कैसे खुस हो रहा मुन्ना भाई....

सुसमा - हां..... बड़ा प्यारा है...

अब सुसमा नीचे झुक गयी और मेरे लुंड को अपनी जीभ से चाटने लगी..

संजू - सस्शह्ह्हह्ह.... आआअह्हह्ह्ह्ह.... कितनी... गरमा गरम और रसीली जीभ है तुम्हारी.... उफ्फफ्फ्फ़.....

सुसमा ने अब अपनी जीभ से चाट चाट के पूरे लुंड को गीला कर दिया... अब वोह अपनी जीभ से लुंड के सुपाड़ी को चाटने लगी...

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संजू - उफ्फ्फ्फ़...... डार्लिंग.....

सुसमा ने अब एक बार मेरी तरफ अपनी नज़रें उठा के देखा और फिर गाआपपपप से अपने मुँह में लुंड को भर लिया....

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और किसी छोटे बच्चे की तरह जो निप्पल को मुँह में भरके रखता है और चुभकने लगता है बिलकुल वैसे hi चुभकने लगी....

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संजू - आआआआह्ह्ह्हह्ह..... एस्सस...... बेबी... एस....



 
सुसमा ने ऐसे थोड़ी देर चुभकने के बाद अब लुंड को अपने मुँह में और गहरायिओं तक घुसाने का प्रयाश किया...

लेकिन लुंड इतना मोटा और लम्बा था की उसके मुँह में आधे से ज्यादा नहीं घुस रहा था....




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ये देख वोह निराश होने लगी....

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और मेरी तरफ देखने लगी.... मई उसकी उदासी का कारन समझ गया... और मैंने एक छोटी सी स्माइल 😊 की और अपने हाथो से उसके सर को पीछे की साइड से पकड़ लिया और अपने लुंड पर दबा दिया.....

और अपनी कमर को थोड़ा पीछे ले जाकर एक जोडका धक्का आगे की ऑर्डर मारा और अपना लुंड आधे से जयादा सुसमा के मुँह के अंदर घुसा दिया...



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इस धक्के से उसकी आंखें बड़ी बड़ी हो गयी....

उसकी सांस मानो अटक सी गयी हो....

मेरा बड़ा मोटा लुंड उसके गले में जा घुसा था अब मैंने उसके बालों को हाथ से पकड़ लिया और दे दाना दान दे दाना लुंड उसके मुँह में पेलने लगा....


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उसकी आँखों में से आंशू बहे जा रहे थी....

लेकिन मेरा लुंड रुकने का नाम hi नहीं के रहा था...

मई करीब 30 मिनट्स उसके मुँह को धुआँधार छोड़ते हुए....

उसके मुँह में hi झाड़ गया....


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