अडुल्टेरी 𝐁𝐡𝐨𝐨𝐭 𝐤𝐢 𝐦𝐚𝐚 𝐤𝐢 𝐜𝐡𝐨𝐨𝐭 🥰 - Page 38 - SexBaba
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अडुल्टेरी 𝐁𝐡𝐨𝐨𝐭 𝐤𝐢 𝐦𝐚𝐚 𝐤𝐢 𝐜𝐡𝐨𝐨𝐭 🥰

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रात को संजू की नींद.... सुसमा के उठाने से खुली...

सुसमा - उठो संजू... उठो.... जल्दी तैयार हो जाना भी है हमें स्टेशन.....

संजू - हां... हां... उठ गया...

फिर दोनों तैयार होने लगते है और फिर रात को hi स्टेशन के लिए निकल पड़ते है....

स्टेशन पे ट्रैन कड़ी थी... संजू और मल्टी दोनों अपने अपने सीट 💺पे बैठ जाते है रात का समय था 3 बज रहे थी.... दोनों को नींद भी लग रही थी इसलिए पता hi नहीं चला दोनों कब सो जाते है....

सुबह जब आँख खुलती है तोह देखते है की वोह स्टेशन पहुंच गए है वह से हम दोनों तीरथ यात्रा करने के लिए घूमने लगते है....


यात्रा के बाद...
 
एप - 124

हमने रेलवे स्टेशन से दिल्ली के लिए ट्रैन का सफर किया

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और फिर दिल्ली एयरपोर्ट से दक्षिण भारत में मदुरै के लिए फ्लाइट पकड़ी.


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वहां से हमने एक कार बुक कराई जो पूरी यात्रा के लिए हमने अपने पास राखी. दक्षिण भारत में मौसम अच्छा था. हम पहले रामेश्वरम गए और फिर वहां से तिरुपति गए.


तिरुपति में सुसमा ने मुझसे सर के बाल सफाचट करवाने को कहा. मेने भी इस यात्रा का आनंद लिया था तो बिना किसी लग लपेट के पंडिताइन की इच्छा अनुसार शेव करवा लिया.

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तिरुपति दर्शन के बाद हमारी वापसी यात्रा सुरु हुई. जो कार हमने यात्रा के सुरु में मदुरै से बुक करवाई थी , उसी से हम बैंगलोर पहुँच गए.

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तक़रीबन 4:30 पं पर हम बैंगलोर पहुंचे और सीधे चांसरी पवेलियन होटल , आ गए. लम्बी धार्मिक यात्रा अब संपन्न हो चुकी थी. रूम में आकर नहाने के बाद थोड़ा आराम कर लिया.


फिर पिने के मूड से

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मई होटल की बार में चला गया.

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पंडिताइन अभी आराम कर रही थी , थकन से उसे नींद आ गयी थी.


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मेने रूम की चाभी ली और चुचाप चला आया ताकि पंडिताइन की नींद डिस्टर्ब न हो.

बार में थोड़ा पिने के बाद मुझे घर की याद आने लगी. घर की याद आने पर मेरा मूड ऑफ हो गया.

फिर मेने सुसमा को फ़ोन किया की आपने डिनर कर लिया. पंडिताइन बोली बीटा मई तो तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ.

मुझे शर्म आयी की मई यहाँ बार में मज़े कर रहा हूँ और रूम में सुसमा जी मेरा इंतज़ार कर रही है. मेने कहा , मई आ रहा हूँ और फटाफट रूम में आ गया. जब मेने चाभी से रूम खोला तो पंडिताइन वहां नहीं थी.


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फिर बाथरूम से सुसमा के भजन गाने की आवाज़ आयी

मई समझ गया वोह नहाने गयी है. मई सोफे में बैठ के टीवी देखने लगा.

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करीब 10 मिनट बाद पंडिताइन ने आवाज़ लगायी,” संजू बीटा मेरी निघ्त्य पकड़ा दो.


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मेने बीएड से निघती उठायी और बाथरूम के दरवाज़े पर जाकर सुसमा जी को आवाज़ लगायी. पंडिताइन ने थोड़ा सा दरवाज़ा खोला और निघती पकड़ने के लिए अपना हाथ दरवाज़े से बहार निकला. मई निघती पकड़ने के लिए थोड़ा आगे को आया और उसी छगन (पल) से मेरी दुनिया बदल गयी.


बाथरूम ऐसे बना हुआ था की उसमे बायीं तरफ शावर था और दायी तरफ वाश बेसिन और ड्रेसर था. जब पंडिताइन ने दरवाजे के पीछे छिपकर सिर्फ हाथ बहार निकला तो सामने मिरर में मुझे वो पूरी नंगी दिखाई दी.

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आगे बताने से पहले मई पंडिताइन के बारे में बता दूँ. पंडिताइन ( सुसमा ) की उम्र लगभग 52 – 53 वर्ष है वो एक साधारण हाउसवाइफ है. उम्र के हिसाब से hi उसकी कमर पर चर्बी छड़ी हुई है. यहाँ की औरतों की अपेक्षा उसकी हाइट थोड़ी ज्यादा है , 5’5 की . बड़ी चूचियां , और चौड़े नितम्ब जो इस उम्र की औरतों के होते हैं. देखने में वो साधारण hi है पर उसका रंग एकदम साफ़ है , बिलकुल गोरी चिट्टी है.

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दरवाज़े पर खड़े होकर जब मेने पंडिताइन को एकदम नग्न देखा तो मई देखता hi रह गया. उसकी बड़ी बड़ी गोरी चूचियां जो 50 की उम्र पार करने के बाद भी ज्यादा झुकी हुई नहीं थी. जवान लड़कियों के जैसे ऊपर को भी नहीं थी पर ज्यादा ढली हुई भी नहीं थी. सुसमा दरवाज़े के पीछे थोड़ा साइड में होकर कड़ी थी तो मुझे चूचियों के बीच में गुलाबी एरोला और मोठे निप्पल भी दिख रहे थे. उसकी जंघे बड़ी बड़ी और मांसल थी और लम्बी गोरी टांगें मुझे दिखी. साइड में होने से उसकी नाभि के निचे का व् शेप वाला भाग मिरर में नहीं दिख रहा था.


मई हाथ में निघती पकडे मिरर में सुसमा को नग्न देख रहा था तभी सुसमा की आवाज़ से मुझे होश आया.

सुसमा थोड़ा jhun-jhlate हुए बोली,”

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क्या कर रहे हो , निघती देते क्यों नहीं.”


पंडिताइन को पता hi नहीं था की मैंने मिरर में उसे नंगी देख लिया है. मेने उसे निघती पकड़ाई और फिर टीवी देखने लगा.

अब मेरे मन में mili-juli भावनाये आने लगी. एक तरफ तो जो मेने देखा उससे मई उत्तेजित हो गया था और दूसरी तरफ पंडिताइन के बारे में ऐसा सोचने से मुझे गिलटी फीलिंग भी आ रही थी. मुझे अपने ऊपर बहुत शर्म आयी लेकिन पंडिताइन की वो नग्न छवि जो मेने मिरर में देखि वो मेरे मन से हैट hi नहीं रही थी. मेरे दिमाग का एक हिस्सा कह रहा था की पंडिताइन को नग्न देखकर उत्तेजित होना गलत बात है , तो दूसरा हिस्सा वही नग्न छवि दिखाकर मुझे फिर से उत्तेजित कर दे रहा था.

टीवी के आगे बैठकर मई यही सब सोच रहा था , तभी पंडिताइन अपनी स्लीवलेस वाइट कॉटन निघती पहनकर बाथरूम से बहार आयी. निघती से सिर्फ उसकी बहन दिख रही थी बाकि पूरा बदन ढाका हुआ था.

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अपने गीले बालों में जो उसकी आधी पीठ तक पहुँच रहे थे , वो मुझे सुन्दर लग रही थी.


उसकी तरफ देखते हुए मुझे फिर वही नग्न छवि दिखाई देने लगी. लाख कोशिश करने पर भी अब सुसमा को देखने पर वही नग्न छवि मेरी आँखों के आगे आ जा रही थी.

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पंडिताइन ने नहाकर ब्रा नहीं पहनी थी इसलिए जब वो चलती तो उसकी बड़ी चूचियां इधर उधर हिल रही थी.. मई अब सुसमा को ध्यान से देख रहा था. पंडिताइन शीशे के आगे कड़ी होकर बाल बनाने लगी और उसके हाथ हिलने से हिलती हुई चूचियों को मई देखने लगा.

तभी सुसमा ने कहा की डिनर आर्डर कर दो तो में होश में आया. सुसमा ने कहा की उसे हल्का खाना खाने का मन है , तो मेने सिर्फ सलाद और सूप आर्डर कर दिए. फिर हम टीवी में न्यूज़ देखते हुए डिनर करने लगे.

मेरा दिमाग अभी भी कहीं खोया हुआ था और में टीवी की तरफ खली देख रहा था , उसमे क्या आ रहा था क्या नहीं मुझे कुछ पता नहीं. तभी सुसमा की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी. उसने कुछ कहा पर ध्यान कहीं और होने से मुझे साफ़ सुनाई नहीं दिया. मुझे ऐसा लगा जैसे सुसमा की आवाज़ कहीं दूर से आ रही है.

अब सुसमा थोड़ी इर्रिटेट हो गयी और नाराजगी से बोली,” तुम्हे इतना नहीं पीना चाहिए की सामनेवाला क्या कह रहा है ये भी तुम्हे सुनाई न दे.”

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उसकी झिड़की से मई एकदम से चौंक गया. उसे क्या पता था की मेने ज्यादा पिया नहीं है बल्कि कुछ देखा है , जिससे मेरा मन विचलित हो गया था.

मई बोलै,” ी ऍम सॉरी पिने से नहीं बल्कि सफर की वजह से मई थक गया हूँ. इसलिए आपकी बात नहीं सुनी.”

फिर मेने पंडिताइन की तरफ देखा और सीधी मेरी नज़र उसकी क्लीवेज पर पड़ी , जो उसकी निघती के गले से ब्रा न होने से दिख रही थी. ज्यादा नहीं दिख रहा था पर जब वो सूप पिने को आगे को झुकती तो चूचियों का ऊपरी हिस्सा दिख जा रहा था.

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तभी सुसमा ने मेरा ध्यान टीवी में आ रही न्यूज़ की तरफ दिलाया


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की उत्तर भारत में कड़ाके की सर्दी पद रही है और ज्यादातर एयरपोर्ट्स कोहरे की वजह से अगले कुछ दिन के लिए बंद हैं. टीवी में दिल्ली एयरपोर्ट में परेशां पैसेंजर्स को दिखाया जा रहा था जिनकी फ्लाइट्स कैंसिल हो गयी थी.


मई थोड़ा टेंशन में आ गया की अब हम कब घर जा पाएंगे ….और मई थोड़ा भावुक हो गया ….. तभी पंडिताइन उठी और मेरे पास बैठ गयी. प्यार से मुस्कुराते हुए उसने मेरा सर पकड़कर अपनी छाती से लगा दिया. कुछ देर के लिए मई दुनिया को भूल गया और एक बच्चे की तरह उससे लिपटकर सिसकने लगा. मुझे रट देखकर सुसमा ने मुझे और कसकर अपने से चिपटा लिया और कुछ कहकर मुझे चुप करने की कोशिश करने लगी. उसने क्या बोलै मई अपने सिसकने की वजह से नहीं सुन पाया.

सुसमा सोच रही थी की मई घर से दूर होने के कारन रो रहा हु लेकिन मेरे रोने का कारन कुछ और hi था. रोना तोह एक बहाना है hihihi…Lagbhag 10 मिनट बाद में शांत हुआ मेने पाया की मेरा सर सुसमा की छाती पर टिका हुआ है.

होश में आते hi फिर वही ख्याल आने लगे. उसकी निघती थोड़ी निचे को हो गयी थी तो मेरी आँखों को निघती के गले से सुसमा की चूचियां ऊपर से दिखने लगी. मेरा दया गाल तो चुकी पर hi दबा हुआ था. मेने दोनों हाथों से सुसमा को आलिंगन किया हुआ था. और जिस हाथ से सुसमा के दये कंधे को पकड़ा हुआ था , उस हाथ की कुहनी सुसमा की दायी चुकी के निप्पल पर डाब रही थी. मेरे ऊपर फिर से वासना हावी हो गयी और में साडी दुनियादारी भूलकर जैसे hi अपने होठ सुसमा की निघती के गले से जहाँतकटी चूचियों पर लगाने को हुआ तभी सुसमा ने मुझे सीधा कर दिया और बोली,” संजू अब सो जाते हैं.”


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पंडिताइन उठी और सोने चली गयी. बीएड पर लेट ते hi वो खर्राटे लेने लगी.

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सुसमा के सो जाने के बाद मई सोफे पर बैठे हुए आज दिन में जो घटित हुआ उसके बारे में सोचने लगा. मई वही पर बैठे हुए, बाथरूम में पानी से भीगी हुई पूरी नंगी पंडिताइन की छवि को याद करते हुए, मुठ मरने लगा. फिर जब मुझे लगा की अब मेरा निकलने वाला है तो मई बाथरूम की तरफ चल दिया.


जब मई सोफे से उठा तो मेने एक नज़र पंडिताइन के ऊपर डाली. पंडिताइन दायी तरफ करवट लेकर सोई हुई थी. उसका बया घुटना मुदा हुआ था जिससे निघती खिसककर जांघों के ऊपरी भाग तक आ गयी थी. सायद रूम हीटिंग की वजह से नींद में उसको गर्मी महसूस हुई होगी और सुसमा ने रजाई से पेअर बहार निकल दिए थे. सुसमा की पूरी टंगे निचे से लेकर , जहाँ से नितम्बों का उभर सुरु होता है, वहां तक पूरी नंगी थी.

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मई बाथरूम जाना छोड़कर वहीँ पर खड़ा पंडिताइन की नग्नता को देखने लगा. फिर मेरा हाथ मेरे लुंड पर चला गया और बेशरम बनकर मेने वहीँ बीएड के पास खड़े होकर मुठ मरना सुरु कर दिया. फिर जब मेरे लुंड ने वीर्य की पीतचकारी छोड़ी तो आनंद से मेरी आँखे बंद हो गयी थी. रोकने की कोशिश करने के बावजूद एक हलकी सी आह मेरे मुंह से निकल गयी. फिर मुझे आशंका हुई की कहीं मेरा वीर्य पंडिताइन सुसमा के जांघों के ऊपर तो नहीं पद गया है ? इस ख्याल से मुझे एक अजीब सी उत्तेजना आयी , लेकिन थोड़ी घबराहट भी हुई.


एक बार मेने सोचा की लाइट ों करके देखु , फिर मेने बैडरूम की लाइट ों करने के बजाय बाथरूम का दरवाज़ा खोल दिया. बाथरूम से लाइट की रौशनी में देखा वीर्य की कुछ बुँदे पंडिताइन सुसमा की जांघों के अंदरूनी हिस्से पर पड़ी थी. मेने सोचा अगर पॉच दू और पंडिताइन उठ गयी तो परेशानी में पद जाऊंगा. या फिर ऐसे hi रहने दू , ये अपने आप थोड़ी देर में सूख जायेगा और सुबह सुसमा उठकर नाहा लेगी तो धूल जायेगा. इन दोनों में से मुझे एक चुनना था , या तो पॉच दू या फिर ऐसे hi रहने दू.

लेकिन पंडिताइन सुसमा की जांघों पर हाथ फेरने की मेरी इच्छा ने मुझे रिस्क लेने पर मजबूर कर दिया. मेने एक छोटा सा टॉवल लिया और फर्श पर झुक गया. धीरे से मेने टॉवल से वीर्य को पॉच दिया. झुकने पर मुझे परफ्यूम की सी महक आयी. मेरे ख्याल से सुसमा ने पसीने की गंध को दूर करने के लिए परफ्यूम उसे किया होगा. वो खुसबू सुसमा की जांघों के ऊपरी हिस्से पर नाक लगाने से आ रही थी. मई कुछ देर तक बैठे हुए उसे खुसबू को सूंघता रहा.

अब मुझे पंडिताइन सुसमा के साथ सम्भोग करने की तीव्र इच्छा होने लगी. लेकिन आश्चर्यजनक रूप से मुझे इसमें गन्दा या गलत कुछ भी महसूस नहीं हो रहा था.

वहीँ फर्श पर बैठे हुए hi मुझे नींद आ गयी. पता नहीं कैसे जब मेरी नींद खुली तो मेने देखा की सुसमा अब सीधी लेती हुई सो रही थी. उसकी टंगे अभी भी पूरी ऊपर तक खुली हुई थी. रजाई उसने पूरी एक तरफ को फ़ेंक दी थी. मई खड़ा हुआ और कुछ देर तक पंडिताइन को देखता रहा फिर बीएड में सोने के लिए लेट गया.

लेकिन नींद नहीं आ रही थी. मई सोचने लगा जब हम घर पहुँच जायेंगे तो मुझे अपने घर जाना होगा और मुझे सुसमा के साथ अकेले रहने का मौका नहीं मिलेगा. और सुसमा को ऐसे सोये देखना तो दुर्लभ hi हो जायेगा.

मई सोचने लगा कुछ दिन और घर से दूर कैसे रहा जाये. एक ख्याल मैं में आया की ख़राब मौसम का सहारा लेकर वापसी यात्रा को थोड़ा लम्बे रस्ते से ले जॉन जिससे कुछ और रात मुझे सुसमा के साथ होटल में काटने को मिले. यही सब सोचते हुए मई सो गया.

सुबह जब नींद खुली तो पंडिताइन साड़ी पहन रही थी.

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लाल रंग के बॉर्डर वाली सफ़ेद सिल्क की साड़ी में सुसमा अच्छी लग रही थी. मेरी नज़र उसके ब्लाउज पर पड़ी. ब्लाउज के अंदर उसकी बड़ी चूचियों का शेप दिख रहा था. जब तक वो साड़ी पहनते रही मई ध्यान से उसे देखता रहा. फिर मई उठ गया और जाने को तैयार होने लगा.


होटल वालों ने कार से हमें एयरपोर्ट पहुंचा दिया.

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वहां पता चला की हमारी जेट एयरवेज की फ्लाइट कैंसिल हो गयी है. हमने जेट के स्टाफ से किसी और फ्लाइट में सीट देने के लिए पूछा तो उन्होंने मन कर दिया. मेने बाकि एयरलाइन्स के काउंटर पर भी पूछताछ की , इस सब में 5पं हो गया और हम बुरी तरह से थक चुके थे. इंडियन एयरलाइन के काउंटर पर एक अधेड़ उम्र की लेडी ने मुझे 3 दिन बाद का टिकट लेने को कहा. इससे पहले जो फ्लाइट्स जाएँगी उनमे पैसेंजर्स की भीड़ देखते हुए टिकट मिलना मुश्किल होगा. या फिर रोज़ रोज़ एयरपोर्ट आकर पता करो. मेने उस लेडी की बात मान ली और उसने हमें 3 दिन बाद के टिकट दिए वो भी वैटलिस्टिंग में , लेकिन उसने कहा की सीट्स मिल जाएँगी तब तक.


मेने पंडिताइन को ये बात बताई तो उसका चेहरा लटक गया.

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मेने उसे दिलासा दी,” ारी पंडिताइन जी हम कोई जंगल में बिना खाना और पानी के भटक थोड़ी गए हैं. बैंगलोर इतना बड़ा सहर है . हम आराम से कुछ दिन यहाँ गुजर सकते हैं.”

सुसमा चेयर से उठी और कहने लगी सुबह से वेट करते करते मेरी कमर दर्द हो गयी है. पूरा दिन एयरपोर्ट में बैठे हुए वो थक गयी थी और मई तो एक काउंटर से दूसरे काउंटर दौड़ने में hi था.

पंडिताइन ने कहा होटल में अब रूम खली है की नहीं , पता तो करो. मेने होटल फ़ोन किया की हम वापस आ रहे हैं तो उन्होंने कहा की हमारी एक कार एयरपोर्ट पर किसी गेस्ट को छोड़ने गयी हुई है , उसके ड्राइवर से हम आपको होटल वापस लेन को कह देते हैं .

जब हम अपने रूम में पहुंचे तो 8पं हो चूका था.

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सुबह से रात तक हम दोनों एयरपोर्ट में चक्कर लगाकर थक चुके थे.

नहाने के बाद मेने पंडिताइन से कहा , मई अभी थोड़ी देर में आता हूँ.


पंडिताइन मुस्कुरायी और बोली, ठीक है , लेकिन ज्यादा मत पीना हाँ.

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मेने कहा , हाँ नहीं पियूँगा और रूम से बहार आ गया.


बार में आने के बाद मई ड्रिंक करने लगा. अब मुझे पंडिताइन के साथ 3 दिन होटल में बिताने थे. ड्रिंक करते हुए मई सोचने लगा

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मई पंडिताइन के साथ सम्भोग करने की अपनी इच्छा कैसे पूरी करू. लेकिन कोई तरीका नहीं सूझ रहा था. थोड़ी देर बाद मई वापस रूम में आ गया.


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पंडिताइन बीएड में लेटकर टीवी देख रही थी


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उसने एक स्लीवलेस निघती पहनी हुई थी जो उसके घुटनो तक उठी हुई थी. मई सुसमा के सामने सोफे पर बैठ गया. फिर मेने डिनर का आर्डर दे दिया. पंडिताइन टीवी देख रही थी और मई चुकपचाप सुसमा की सुंदरता को निहार रहा था. क्या लग रही थी वोह..


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जैसे hi दूर बैल बजी तो मई दरवाजा खोलने को उठा. अचानक सुसमा बीएड से उठी और बाथरूम में चली गयी. जब वेटर डिनर देकर चला गया तो मेने सुसमा को आवाज़ दी. जब सुसमा बाथरूम से बहार आयी तो मुझे एहसास हुआ की सुसमा वेटर के सामने रूम में क्यों नहीं रही.

उसने जो निघती पहनी थी वो उसके घुटनो से कुछ hi इंच नीचे तक थी और बड़े गोल गले वाली स्लीवलेस थी.

उसने ब्रा पहनी हुई थी और उस बड़े गोल गले से क्लीवेज दिख रही थी.

नए ज़माने की औरतों के लिए तो ये कुछ भी नहीं था पर पंडिताइन सायद दूसरे आदमियों के सामने इस निघती में असहज महसूस कर रही थी.

तभी वो वेटर के अंदर आने से पहले बाथरूम चली गयी.


पंडिताइन ने बाथरूम से आकर मुझे अपनी निघती को देखते हुए पाया तो वो बोली,

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” बाकि सब गन्दी हो गयी हैं , एहि बची है. कल लांड्री के लिए कपडे देने होंगे.”


मेने कहा,” कोई बात नहीं पंडिताइन जी. ठीक तो है.”

डिनर करने के बाद

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मेने बाथरूम जाकर बीएड में लेटने के लिए बरमूडा पहन लिया. बाथरूम से आकर मेने देखा सुसमा ने ब्रा उतर दी है और धोने के कपड़ो के ढेर में उसे रख रही है. मई जब उसके पास खड़ा हुआ तो उसके बड़े गले के अंदर झाकने पर चूचियां साफ़ दिख रही थी.


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वास्तव में पंडिताइन के लिए वो निघती सही नहीं थी.

तभी पंडिताइन बोली,

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” संजू तुम्हारे पास कोई पेनकिलर है तो दो, एयरपोर्ट में दिन भर कुर्सी में बैठने से मेरी कमर दर्द कर रही है.”


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मेने डिक्लोफेनाक पानी के साथ पंडिताइन को दी


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फिर मेने पूछा,” पंडिताइन जी आप चाय 🍵 पियोगी ?”


उसने मन कर दिया तो मेने अपने लिए चाय 🍵 ली और बीएड में बैठकर पिने लगा और फिर हम सो गए.

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लगभग 10 मिनट बाद वो बोली,

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” संजू बीटा, कमर दर्द से मुझे नींद नहीं आ रही है. मेरी कमर और पैरो में मालिश कर डोज ?”


मेने कहा,” ठीक है पंडिताइन जी.”

फिर मेने बीएड लैंप को स्विच ों कर दिया और सुसमा के पैरों के पास आ गया.

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सुसमा बायीं करवट लेकर मेरी बीएड की तरफ लेती हुई थी.

उसकी छोटी निघती घुटनो तक खिसक गयी थी और बड़े गले से चूचियों का ऊपरी भाग बहार निकला हुआ था.

बीएड लैंप की रौशनी पंडिताइन के ऊपर पद रही थी और फिर से मुझे पंडिताइन के साथ सम्भोग की इच्छा होने लगी.


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जब मई उसके पैरों के पास बैठा तो वो पीठ के बल सीधी होकर लेट गयी. मेने उसका पेअर अपनी गॉड में रख लिया और उसकी मालिश करने लगा.


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थोड़ी देर ऐसे hi पैरों की मालिश के बाद पंडिताइन को आराम महसूस हुआ. वो बोली,”

संजू बीटा, भगवन तुमको मेरी बाकि बची उम्र दे दे. तुम्हारे जैसा सेवा करने वाला बीटा नसीब वालो को मिलता है ,


कोई और समय होता तो सुसमा का आशीर्वाद सुनकर मई भावुक हो जाता. पर इस समय वासना मुझ पर हावी थी. मई कुछ नहीं बोलै. चुपचाप पैरों की मालिश करता रहा.

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कुछ देर बाद मेने पंडिताइन से घुटने मोड़ने को कहा. पंडिताइन ने जब घुटने मोड तो अब उसके पेअर उल्टा व् की शेप में थे. जिससे निघती घुटनो से निचे को जांघों की तरफ खिसक गयी थी. ये नज़ारा देखकर मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा. मई उसकी टांगों के पिछले भाग की मालिश करने लगा.


पंडिताइन अभी भी हलकी आवाज़ में आशीर्वाद देती जा रही थी. हालाँकि उसकी आवाज़ इतनी धीमी थी की सब्द सुनाई नहीं दे रहे थे. सायद मेडिसिन और मालिश के असर से वो मुंह hi मुंह में बुदबुदा रही थी.

फिर में थोड़ा सा खिसका और घुटने से निचे को उसकी दायी जांघ की मालिश करने लगा. जब मेरा हाथ उसकी निघती तक पहुंचा तो मई रुक गया.

मई निघती को ऊपर करके और ऊपर तक जांघ की मालिश करना छह रहा था पर इतनी हिम्मत मुझमे नहीं थी की उसकी निघती ऊपर कर दूँ.

तो में घुटने से आधी जांघ तक मालिश करने लगा. कुछ देर तक मई ऐसे hi पंजो से घुटने तक और घुटने से आधी जांघ तक मालिश करते रहा.


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फिर कुछ ऐसा हुआ जिसकी मुझे उम्मीद नहीं थी. पंडिताइन ने कहा,” भगवन सबको तुम्हारे जैसा बीटा दे.”

और अपना बया पेअर सीधा कर दिया. अब उसका बया पेअर सीधा था और दया पेअर घुटने से मुदा हुआ खड़ा था. इससे मुझे उसकी जांघों के जोड़ तक दिखने लगा. अब मेरी धड़कने बहुत बाद गयी.


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मेने जांघों के बिलकुल ऊपरी हिस्से तक मालिश करना सुरु कर दिया. जिससे निघती और ऊपर खिसक गयी. मई मालिश करते हुए पंडिताइन की मांसल झंघों पर ऊपर तक हाथ फिरने लगा. फिर ऐसे hi मेने बायीं जांघ की भी मालिश की.


लगभग 15 मिनट बाद पंडिताइन बोली,

” संजू अब मेरी कमर की मालिश कर दो.”

और वो घूमकर पेट के बल लेट गयी.


अब जो नज़ारा मेरे सामने था उसे देखकर मई दांग रह गया.

जब पंडिताइन उल्टा लेती तो उसकी निघती उसके और ऊपर खिसक गयी.

उसके पेअर पुरे नंगे थे और जहाँ से नितम्ब सुरु होते हैं , उससे थोड़ा ऊपर तक सब खुला था.


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अब में पंडिताइन के ऊपर से आँखे हटा hi नहीं प् रहा था.

उसकी गोरी जंघे और नितम्बों का निचला हिस्सा मेरी आँखों के सामने था.

नितम्बों के बीच की दरार के निचले हिस्से से पंडिताइन की छूट का कुछ भाग भी दिख रहा था.


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थोड़ी देर तक मई ऐसे hi देखता रहा.


फिर मुझे होश आया. मेने सोचा खली देखने से क्या होगा. मुझे कुछ करना होगा. लेकिन किस्मत कितनी देर तक मेरा साथ देगी.

21 वर्ष की उम्र में पंडिताइन के साथ एक गलत हरकत और जिंदगी भर के लिए मई श्रापित हो जाता. मेरी जिंदगी डाव पर लगी थी.

लेकिन मई उस मोड़ पर पहुंच चूका था जहाँ पर मेरी इच्छाओं ने मुझे वश में कर लिया और मेने अपने को डाव पर लगा दिया.


बिना ज्यादा सोचते हुए मई पंडिताइन की जांघों के दोनों तरफ पेअर रखकर उसकी कमर और पीठ को उँगलियों से दबाने लगा. अंगूठे और उँगलियों से कमर को दबाकर मालिश करने से उसकी निघती थोड़ा थोड़ा करके और ऊपर होने लगी और कुछ देर बाद पंडिताइन के बड़े बड़े गोर नितम्ब आधे नंगे हो गए.

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मई उसकी पीठ और कमर को उँगलियों और अंगूठे से दबाकर मालिश करता रहा पर मेने उसके खुले हुए नितम्बों को नहीं छुआ.

अब मेरा लुंड पूरा मस्त होकर तन चूका था और बरमूडा के कोने से सूपड़ा बहार झांक रहा था.


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मई पंडिताइन के नितम्बों की तरफ थोड़ा ऊपर खिसकर पीठ की मालिश करने लगा.


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मई अपन तरफ से पूरी सावधानी बारात रहा था और अच्छी मालिश कर रहा था ताकि पंडिताइन को आराम महसूस हो.

क्या पता आगे क्या होने वाला था ?


धीरे धीरे मेने पंडिताइन की निघती कमर तक खिसका दी. अब पंडिताइन के विशाल नितम्ब पुरे नंगे थे.

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एप 125



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फिर मेने हिम्मत करके निघती के अंदर हाथ डालकर उसकी कमर और पीठ के निचले हिस्से पर हाथ फिरते हुए मालिश सुरु कर दी.

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मई आगे झुक के मालिश कर रहा था और मेरा लुंड पंडिताइन के नंगे नितम्बों पर फिसल रहा था. अब मई बहुत उत्तेजित हो गया था. सम्भोग की मेरी इच्छा तीव्र हो चुकी थी. अब मेरा धैर्य जवाब देने लगा था. मेने हाथ कमर से निचे उसके नितम्बों पर भी फेरने सुरु कर दिए.

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फिर में रिड की हड्डी पर मालिश करते हुए पंडिताइन के कन्धों की मालिश करने लगा. पंडिताइन की बड़ी चूचियां उसके शरीर से दबी हुई थी और साइड्स से कुछ हिस्सा दोनों तरफ निकला हुआ था. साइड्स पर हाथ फिरते हुए मेने उन पर भी हाथ फेर दिया. पंडिताइन ने हलके से ooooooo…h की आवाज़ निकली.

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मई घबरा गया और जल्दी से हाथ हटाकर उसके कन्धों की मालिश करने लगा. तभी मेरा लुंड फिसलकर पंडिताइन के नितम्बों के बीच दरार में चला गया. लुंड से प्रेकम निकल रहा था और वो पंडिताइन के विशाल नितम्बों के बीच घुस गया. मुझे बहुत उत्तेजना हो रही थी और मेरे लुंड के पंडिताइन के नितम्बों के बीच घुसने से बहुत आनंद महसूस हो रहा था.

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दवाई और मालिश का असर उस पर हुआ था लेकिन मेरे ख्याल से अब पंडिताइन को भी पता चल चूका था. लेकिन सायद वो शॉक और ऐम्बर्रेस्सेमेंन्ट से कुछ बोल नहीं पायी. अपने नितम्बों के बीच जवान लुंड महसूस करके वो अवाक् रह गयी होगी.

लेकिन मई अब साडी सीमायें लाँघ चूका था. मुझे बहुत hi अच्छा महसूस हो रहा था. मई अपने लुंड को पंडिताइन के नितम्बों के अंदर रगड़ने लगा. मुझे लगा अब मेरा वीर्य निकल जायेगा.

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वासना पूरी तरह मुझ पर हावी हो चुकी थी. मेरा पूरा ध्यान सिर्फ पंडिताइन के साथ सम्भोग पर था. मेने अपना बरमूडा निचे खिसका दिया और पंडिताइन की निघती उसकी गर्दन तक ऊपर खिंच दी. अब पंडिताइन पीछे से पूरी नंगी थी. मई पंडिताइन के ऊपर लेट गया.

मई पंडिताइन की गर्दन को चूमने लगा...

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उसकी बांहों को चूमा और साइड्स से उसकी चूचियों को मलने लगा. मेने अपने लुंड को पकड़ा और नितम्बों के बीच और अंदर घुसाने की कोशिश की. मुझे एक छेद में अपना लुंड घुसता महसूस हुआ.

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मेने थोड़ा और जोर लगाया. लेकिन फिर मुझे महसूस हुआ वो पंडिताइन की छूट का छेद नहीं बल्कि उसकी गांड का छेद था.

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लेकिन मई कोई परवाह न करते हुए अंदर घुसाने को जोर लगाने लगा

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तभी पंडिताइन का बदन कंपा

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और वो आश्चर्य भरे स्वर में चिल्लाई,”

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aiyeeee…..maa, Sanjuuuuu…ye क्या .“

पंडिताइन पलटने की कोशिश करने लगी. मई अपने हाथों पर उठ गया और उसे मेरे निचे सीधा हो जाने दिया. जैसे hi वो सीधी हुई , मई फिर से उसके ऊपर लेट गया. पंडिताइन ने मुझे देखा , उसकी आँखों में अविश्वास और शॉक के भाव थे.

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मेरे हाथ पंडिताइन की चूचियों पर थे और मेरा लुंड उसकी छूट के ऊपर था.

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मई पंडिताइन की चूचियां दबाने लगा और मुझे लगा की मेरा वीर्य निकलने वाला है तो मई उसकी चूचियों को पकडे हुए , अपने नितम्ब उठाकर पंडिताइन के ऊपर धक्के मरने लगा. लुंड छूट के अंदर नहीं गया था, मई खली ड्राई हुम्पिंग कर रहा था,

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कुछ hi धक्कों में मेरे लुंड से इतने दिनों का जमा किया हुआ वीर्य निकलकर पंडिताइन की नाभि के पास पेट में गिरने लगा.

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पंडिताइन ने मेरा वीर्य अपने पेट पर गिरते महसूस किया. उसने अपनी आँखे बंद करके , एक गहरी साँस ली और बोली,

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” ये क्या किया तुमने.”

मुझे इतना तेज ओर्गास्म आया की कुछ पल के लिए मुझे होश hi नहीं रहा. मई पंडिताइन की चूचियों के भींच मुंह घुसाए लेता रहा.

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जब मुझे होश आया तो मई ेम्बरर्सेड और घबराया हुआ था. मुझे समझ नहीं आया अब कैसे रियेक्ट करू.🥲

मेरी दुनिया अब बदल चुकी थी. पंडिताइन के साथ मेरा सम्बन्ध अब बदल चूका था. क्या पंडिताइन के साथ पवित्र रिस्ता नष्ट हो जायेगा या फिर ये और भी मजबूत रिश्ते की सुरुवात थी ?

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धीरे धीरे मुझे अपनी स्थिति का आभास हुआ. मई पंडिताइन के ऊपर लेता हुआ था और पंडिताइन के पेट में गिरा हुआ वीर्य गोंड की तरह से हमारे बदन को आपस में चिपकाये हुए था.

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मेरे लुंड उसके पेट के निचले हिस्से में दबा हुआ था. पंडिताइन की छोटी छोटी झांटे मुझे लुंड के आखिरी सिरे पर चुभ रही थी. अब फिर से मेरा लुंड खड़ा होने लगा. मेरे दिमाग से उलझने निकल गयी और पंडिताइन के साथ सम्भोग करने की इच्छा जोर मरने लगी.

मेने सर उठाकर देखा , पंडिताइन की निघती उसके गले तक ऊपर थी. उसने अपना मुंह बायीं तरफ को मोड़ा हुआ था और उसकी आँखे बंद थी.

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बया हाथ उसने अपनी चूचियों के ऊपर रखा था और दया हाथ उसके कंधे से पीछे था और उसकी अंगुलियां मेरी अँगुलियों से मिली हुई थी. मुझे ध्यान hi नहीं था की मेने पंडिताइन का दया हाथ ऐसे पकड़ रखा है. मेने उसका हाथ छोड़ दिया और उसके बायीं तरफ बीएड पर खिसक गया

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और अब मई सर उठाकर पंडिताइन को देखने लगा.

बीएड लैंप की धीमी रौशनी में मेने देखा पंडिताइन उठने की कोशिश कर रही थी. वो अपनी कोहनियों के सहारे थोड़ा उठी और सीधे मेरी आँखों में झाँका.

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उसकी बड़ी बड़ी आँखें मुझे किसी सागर के जैसे लगी. मई उन्हें चूमने को आगे बढ़ा. उसने अपना चेहरा घुमा लिया. मेने उसका चेहरा पकड़ा और थोड़ा जोर लगाकर अपनी तरफ घुमाया. फिर मेने अपनी आँखे बंद करके पंडिताइन की आँखे चूम ली.

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तभी पंडिताइन बोली,” संजू अब रहने दो, जो हुआ उसे भूल जाओ.”

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फिर वो बीएड से उतरने को हुई. मेने अपने दये हाथ को उसकी छाती पर लपेटा और उसे उठने नहीं दिया. फिर मेने उसकी कोहनिया सीधी कर दी और उसे फिर से लिटा दिया. पंडिताइन ने विरोध किया पर मेने जोर लगा के उसे लिटा दिया.

फिर मई उसके होठों को चूमने लगा.

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मेने उसके होठों को अपनी जीभ से खोलने की कोशिश की लेकिन उसने अपने होठ नहीं खोले.

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फिर मई बारी बारी से उसके ऊपरी और निचले होठ को चूमने लगा. मेने अपना बया हाथ पंडिताइन की गर्दन के निचे डाला हुआ था और दये हाथ से मई उसकी चूचियां दबाने लगा. इससे उसकी सिसकारी निकल गयी.

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पंडिताइन ने बहुत जोर लगाकर मुझे ऊपर हटाया और boli,”oof संजू, कुछ शर्म करो, मैं एक विधवा पंडिताइन हूँ. यहीं रुक जाओ और आगे मत बढ़ो.”

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फिर बोली,” मैं क्या मुंह लेकर जाउंगी गांव वालो के सामने. मान जाओ संजू. मान जाओ...😡

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एप - 126



पेज no. 1

पंडिताइन के उठने बैठने और लेटने से उसकी बड़ी चूचियां खूब हिल दल रही थी , उनको देखकर मई मस्त हो जा रहा था.




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पंडिताइन ने मेरे कंधे पकडे हुए थे अपने से दूर हटाने के लिए. मेने जोर लगाकर अपने कन्धों से पंडिताइन के हाथ हटाए और झुककर

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बूब्स को दबाते हुए...

निप्पल मुंह में भर लिया और उसे चूसने लगा.

दूसरे निप्पल को मेने अपने अंगूठे और ऊँगली के बीच दबा लिया और उसे घूमने लगा.

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मेरी ched-chad से पंडिताइन के दोनों निप्पल टैंकर टाइट हो गए.



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पेज no - 02....



पंडिताइन अपना सर दायी बायीं तरफ हिलने लगी और उसके मुंह से हलकी सिसकारी भी निकल जा रही थी.

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उसने फिर से मुझे कंधे पकड़कर अपने ऊपर से हटाना चाहा, लेकिन मई उसकी चूचियों और निप्पल से चेहचाद करते रहा.

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कुछ समय बाद पंडिताइन ने मुझे धक्का देना बंद कर दिया और आँखे बंद किये हुए ,”मत करो Sanju…….hai bhagwan….ufffff….” ऐसे बोलने लगी.

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सायद अब उसका शरीर उसके दिमाग से अलग दिशा में रियेक्ट कर रहा था. अब उसका विरोध हाथों से नहीं हो रहा था , वो सिर्फ आँखे बंद किये हुए ‘मत करो’ बड़बड़ा रही थी.

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क्या उसके अंदर की औरत की कमचा जग गयी थी या सामाजिक मान्यताओं, बंधनो के विपरीत जाकर अपने से इतने छोटे लड़के द्वारा सुसमा के नंगे बदन को स्पर्श किये जाने से वो रोमांचित महसूस कर रही थी ?



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पेज no - 03.....

मेने अपने पेअर के पंजे से पंडिताइन की टंगे फैला दी और उसके ऊपर लेट गया.

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मेरे लुंड ने पंडिताइन की छूट को छुआ

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पंडिताइन के मुंह से जोर से आवाज़ निकली,”
ारी….”.

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मई थोड़ा ऊपर खिसक गया अब मेरा लुंड
पंडिताइन की नाभि पर आ गया.

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मेने अपनी हथेलियों में पंडिताइन का चेहरा पकड़ा और उसे अपने मुंह की तरफ घुमाया.
पंडिताइन ने आँखे खोल दी और सीधे मेरी आँखों में झाँका.

संजू -- “पंडिताइन, मई आपसे बहुत प्यार करता हूँ. आज मुझे मत रोकिये.


पंडिताइन -- “संजू अब इससे आगे मत बढ़ो, सब बर्बाद हो जायेगा.

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तुम इतने छोटे नहीं हो की इसका परिणाम न समझ सको. पंडिताइन से सम्भोग नहीं किया जाता पंडित लोग पूजनीय होते है..

तुम्हारी यौन इच्छा ने तुमको पागल कर दिया है. बीटा अपने ऊपर काबू रखो. ये पाप मत करो.”

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:पार्टी1:
 
पेज no -- 4....



संजू 😊 - “कुछ नहीं बदलेगा पंडिताइन. ये तो मानव प्रेम की पराकाष्ठा है. जिस सम्भोग में सृष्टि की रचना निहित है वो पाप कैसे हो सकता है ? मेरा आपके साथ सम्भोग वासना नहीं पूजा है.”✨✨

ये सुनकर तोह सुसमा का चेहरा कुछ ऐसा hi गया.....

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पंडिताइन - “चुप रहो संजू. ये प्रेम नहीं वासना है वासना . एक विधवा पंडिताइन और एक कुंवारे लड़के में ऐसे सम्बन्ध नहीं होते. तुम मेरे शरीर से अपनी काम इच्छा शांत करना चाहते हो और उसके लिए ये तर्क दे रहे हो. तुम कैसे भूल सकते हो की मई तुम्हारे साथ साथ पूरे गाओं की पंडिताइन हूँ.

संजू - “पंडिताइन, मेरा प्यार hi निस्वार्थ है. सम्भोग तो प्रेमियों के प्रेम की पराकाष्ठा है. फिर हमारे बीच यदि ये हो तो बुरा क्यों है ? सिर्फ योनि hi क्यों मई तो आप से संपूर्ण प्रेम की याचना कर रहा हूँ. ऐसे पूर्णता जो एक औरत hi मर्द को दे सकती है. ऐसा निस्वार्थ काम pati-patni , premi-premika या किसी और सम्बन्ध में संभव नहीं. स्त्री और पुरुष के बीच यही एक सम्बन्ध हो सकता है....

पंडिताइन ने कुछ जवाब देने के लिए होठ खोले , लेकिन मेने उसको मौका नहीं दिया. मेने उसके होठों से अपने होठ चिपका दिए और अपनी जीभ उसके मुंह में घुसा दी.

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पंडिताइन ने अपना मुंह दूसरी तरफ घूमना चाहा

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पर मेरे हाथों की पकड़ ने उसे चेहरा घूमने नहीं दिया. थोड़ी देर बाद वो शांत पद गयी.

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मेने उसके गाल चूमे फिर गर्दन चूमि और फिर से होठों को चूमने लगा. अब वो पहले के जैसे अपने होठ टाइट बंद नहीं कर रही थी, मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ पर अब वो होठ खुले रख रही थी. मेरे चूमने का वो कोई जवाब नहीं दे रही थी पर विरोध भी नहीं कर रही थी.

पंडिताइन मेरी बांहो में थी उसके बदन पर सिर्फ एक कपडा था जो मेने उसकी गर्दन तक ऊपर खिंच दिया था. एक तरह से वो पूरी नंगी hi थी.

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पेज no - 05



पंडिताइन ने अब समर्पण कर दिया था , उसको थोड़ी उत्तेजित और कोई विरोध न करते देखकर मेने उसे किसी प्रेमी की तरह अपनी बांहों में पकड़ा और उसके बदन को हर जगह चूम लिया.

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पंडिताइन चुपचाप आँखे बंद किये लेती थी और मेरे चूमने से किसी किसी समय उसकी सिसकारी निकल जा रही थी.

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फिर मेने उसकी निघती गर्दन से ऊपर खींचने की कोशिश की उसने थोड़ा विरोध किया पर मई नहीं मन और निघती निकलकर बीएड पर रख दी. अब पंडिताइन पूरी तरह से नंगी थी.

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फिर मेने अपनी टी शर्ट भी निकाल दी और नंगा हो गया.

मेरे टी शर्ट उतारते समय पंडिताइन चाहती तो उठकर बीएड से उतर कर जा सकती थी. लेकिन वो शांत लेती रही न hi उसने अपने अंगो को छुपाने या ढकने की कोशिश की.

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इससे मेरी हिम्मत बाद गयी , मुझे लगा की अब पंडिताइन बी मेरा साथ दे रही है. और मेरे अंदर जो थोड़ा बहुत अपराधबोध था वो ख़तम हो गया.

फिर मई पंडिताइन की चूचियों को हाथों से सहलाने लगा और उनके एरोला पर जीभ घूमने लगा.

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दोनों चूचियों के बीच की घाटी को भी मेने चूमा और अपने दोनों गालों पर पंडिताइन की चूचियों का मुलायम स्पर्श महसूस किया.

फिर मई निचे की तरफ बड़ा और नाभि के पास पेट को चूमा.

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नाभि को चूमते hi पंडिताइन के बदन में कंपकंपी हुई.



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पेज no - 06 ......



मई थोड़ा और निचे बड़ा और पंडिताइन के शेव किये झांटो के छोटे छोटे बाल मुझे चेहरे पर चुभे.

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पंडिताइन ने तुरंत अपनी जंघे चिपका ली. फिर भी छूट की दरार के ऊपरी हिस्से पर मेने जीभ लगायी . फिर मेने पंडिताइन की जांघो को ढीला पड़ते महसूस किया. एक हाथ से पंडिताइन की एक चुकी को दबाये हुए दूसरे हाथ की बड़ी वाली ऊँगली मेने पंडिताइन की छूट में दाल दी.

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पंडिताइन का बदन कंपा और वो chikhi,”Sanjoooo…..tum पागल हो गए हो क्या ?”

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उसकी छूट पूरी गीली थी, जिससे पता चलता था की वो भी उत्तेजित हो राखी थी.

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मेने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और ऊँगली को छूट की अंदर बहार करने लगा. एक अंगुली से उसकी क्लीट को भी रगड़ने लगा.

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वो थोड़ा रिलैक्स हुई

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तो मेने उसकी जंघे थोड़ा फैला दी और अपनी जीभ से उसकी क्लीट को छेड़ने लगा.

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मेने अपने होठों में पंडिताइन की छूट के बड़े होठों को लिया और उन्हें चूमा और दांतो से थोड़ा खींचा.

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फिर मई उसकी छूट के अंदर जीभ डालकर पंडिताइन का कॉमर्स पिने लगा.

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पंडिताइन के मुंह से हलकी सी चीख निकली ,” oooo…uuuufffff……..Sanju, ये क्या हो गया तुम्हे. क्या कर दिया तुमने.”



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