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- Dec 5, 2013
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औरत घर पे पहुंच के दरवाजा खटखटाने लगती है...
थक्क... थक्क... थककक...
अंदर से आवाज़ आती है....
"है.... आए रही हूँ....
आए..... रही... हूँ.... "
खटखटाना बंद हो जाता है...
शयद बहार जो कोई भी थी.... उसने आवाज़ सुन ली थी...
कुछ हे देर में किसी के कदमो की आहात होती है.. और खड़क से दरवाजा खुल जाता है....
दरवाजा... खुलते हे.... एक औरत दूसरे औरत को अपने सामने खड़ा हुआ पाती है...
घर का दरवाजा मल्टी ने खोला था...
मल्टी - जी आप कौन.....
औरत - जी मई चमेली.... आप कौन हो और जीजी कहा है...
मल्टी - किस जीजी की बात कर रही है आप...
चमेली - मेरे उनके जीजी की..
मल्टी - यहाँ कोई उनके की जीजी नहीं रहती है लगता है आप गलत जगह आ गयी है.
चमेली - ारी उनके मतलब मेरे पति की जीजी...
मल्टी - यहाँ कोई पति वती की जीजी नहीं रहती..
चमेली - अच्छा...
चमेली अपने हाथ में पकडे कागज़ को मक्ति को दिखते हुए... ये देखिये यही पता है न ये..
मल्टी - हां पता तोह यही है... लेकिन यहाँ किसी की जीजी विजि नहीं रहती...
चमेली - नहीं.... मई मान हे नहीं सकती.... मेरी जीजी यही होंगी.. क्यों की मेरे पति ने कहा है और वह कभी गलत कहते हे नहीं....
मल्टी - ारी जब मई कह रही हु न की यहाँ तुम्हारी कोई जीजी विजि नहीं रहती तोह फिर क्यों जबरन का घुसे चली आ रही हो...
चमेली.. जबरन जीजी जीजी कहते हुए अंदर घुसने लगी...
आवाज़ सुनके... बिमला भी बहार आ गयी....
बिमला की नज़र जैसे हे चमेली पे पड़ी...
बिमला - ारी.. बहुरिया तू.... आ गयी....
चमेली ने जैसे हे बिमला की आवाज़ सुनी..
चमेली - जीजी... जीजी...
बिमला के पाँव छू के..
पाय लागु जीजी...
बिमला - खु रह...
मल्टी बिमला के मुँह से बहुरिया सुन के..
मल्टी ( ये कौन है... और बिमला इसको बहुरिया क्यों कह रही है..)
बिमला - टीकू ने बताया था की उसकी जगह तू आ रही है... आने में कोई तकलीफ तोह नहीं हुई..
चमेली- आने में तोह कोई तकलीफ नहीं हुई जीजी बस यहाँ आपकी नौकरानी ने मुझे रोक लिया था... घुसने हे नहीं दे रही थी... कलमुही कही की....
बिमला - नौकरानी... कौन नौकरानी...
चमेली - ये जो दरवाजे पे कड़ी है...
बिमला ने दरवाजे की तरफ देखा... वह मल्टी कड़ी थी...
बिमला - ारी.. बहुरिया... वह कोई नौकरानी नहीं है तेरे जीजा की....
बिमला ने अभी इतना बोलै हे था की
चमेली - ओह... जीजी मुझे माफ़ करियेगा... मई पहचान नहीं पायी की ये नौकरानी नहीं बल्कि जीजा जी की बहिन है...
ये सुनते हे बिमला मैं हे मैं तहका मार के हसने लगी... और मल्टी अंदर हे अंदर और बहार से भी गुस्से में आग बबूला होकर चिल्लाने लगी..
मल्टी - बिमला कौन है ये... कलमुही... साली जब से आयी है अनाप सनाप बाके जा रही है...
बिमला मल्टी का गुस्सा देख सकते में आ गयी...
बिमला - ारी मल्टी बहिन ये मेरे भाई टीकू की बहिन है... वोह नहीं आ पाया उसके पेअर में चोट लगी थी इसलिए... इसको यहाँ भेजा है..
मल्टी - गुस्से में.. - इसको समझा दो की मेरे घर में ऐसे बदतमीज़ी बर्दास्त नहीं की जाएगी...
चमेली - ारी.. वाह ये तेरा घर कब से हो गया... जा तू अपने ससुराल... अपने मायके को अपना घर बना रही है... ये घर जीजा जी के मरने के बाद मेरी जीजी का है तेरा नहीं समझी...
बिमला - ारी.. चमेली चुप हो जा... कुछ भी अनाप सनाप बकवास किये जा रही थी...
चमेली - आप मुझे क्यों डाट रही हो... अपनी ननद को समझाओ...
बिमला - ारी... तू मेरी बात तोह पहले सुन...
वह मेरी ननद नहीं है...
चमेली - अच्छा इसका मतलब मई सही थी ये आपके यहाँ नौकरानी है...
बिमला अपना सर पकड़ के...
बिमला- ारी.. नहीं रे... तेरी सुई बार बार नौकरानी और ननद पे जेक हे अटक रही है
मैं में - वैसे ाचा तोह मुझे भी लग रहा है इस तरह से इस मालती को जलील करने पे.. लेकिन अभी कुछ दिनों तक मुझे उसका साथ देना होगा... वार्ना ये प्रॉपर्टी का आधा हिस्सा मुझे देने से कही मुकर न जाए...
हरिया जी के खेतो पे मेरा भी हक़ है और मई उनको लेकर हे रहूंगी..
बिमला - ारी.. ये तेरे जीजा की न कोई बहिन है और न हे कोई नौकरानी..... ये तेरे जीजा की हे दूसरी बहिन है...
चमेली - है तोह वही तोह मई भी कह रही हु न जीजी की ये जीजा जी की बहिन है...
बिमला - ओह सॉरी मैंने बहिन कह दिया क्या..
( मैं में) - जान बुझ के बोलै हीहीही
मल्टी ( खिसयाते हुए) - हां...
बिमला - वोह ये वोह... तेरे जीजा की हे पत्नी है...
चमेली - मतलब की आपकी सौतन....
बिमला - ऐसा नहीं कहते बहुरिया... ये मेरी छोटी बहिन की तरह है.. चलो अब इस से अपने बर्ताव के लिए माफ़ी मांगो...
चमेली - मई कोई माफ़ी वाफी नहीं मांगने वाली आपकी इस सौतन से....
बिमला ( ारी ये बहुरिया तोह मरवायेगी मुझे... ऐसे में ये मल्टी कही नाराज़ न हो जाए और मुझे हिस्सा देने से मन न कर दे क्यों की समझ के सामने मल्टी हे हरिया की मान्य पत्नी है उसके मुताबिक़ साड़ी प्रॉपर्टी मल्टी को मिलेगी... )
बिमला खींचते हुए चमेली को कोने में ले जाती है...
बिमला- ारी क्या कर रही है बहुरिया... मांग ले माफ़ी...
फिर अपने सारे मंसूबो को बताती है...
चमेली - अच्छा... इसलिए आप उसकी इतनी तरफदारी कर रही है...
बिमला - और नहीं तोह क्या...
चमेली - अगर ऐसी बात है तोह फिर ठीक है... मई मांग लेती हु आपकी सौत से माफ़ी...
फिर चमेली मल्टी के पास जाकर उसके पैरो में गिर जाती है और उसके पेअर पकड़ के मगरमछ के आंशू बहते हुए...
चमेली - मुझे माफ़ कर दीजिये... मल्टी जीजी... मई आपको पहचान न सकीय... और कुछ भी अनाप सनाप बकने लगी... मुझे माफ़ कर दीजिये... जब तक आप मुझे माफ़ नहीं करोगी मई आपके पेअर नहीं छोडूंगी...
मल्टी - ारी. ठीक है ठीक है मैंने तुम्हे माफ़ किया... अब छोडो मेरे पेअर.. और उठ जाओ बहुरिया...
चमेली खुस होते हुए उठ जाती है और मल्टी के गले लग जाती है...
और सब प्रॉब्लम सोल्वे हो जाता है...
बिमला चमेली को चंदा के रूम में पंहुचा आती है... और मल्टी से चमेली की हरकतों के लिए माफ़ी मांगने लगती है..
मल्टी - ारी कोई बात नहीं ... हो जाता है
इधर....
संजू कुछ सोच कर
अपने कदम पानी में हे रोक लेता है
और वापस मुद के पानी में जाने लगा...
वोह कौवे तेज़्ज़ी से बढ़ते हुए संजू की तरफ आने लगे...
इधर संजू पानी में पेट से थोड़ा ऊपर पानी तक अंदर आ गया...
और तभी एक कौवा उड़ते हुए आकर संजू के कह्दे पे बैठ के अपनी चोंच जैसे हे संजू के गर्दन पे चुभाने वाला था की संजू ने उस कौवे को अपने कंडे पे दबा लिया हाथ से और एक डुबकी पानी में लगा दी..
बेचारे कौवे को तोह समझ में हे नहीं आया की क्या हुआ.....
कौवा पानी में संजू के साथ दुब गया.... और पानी पी लिया...
संजू ने पानी के अंदर कौवे को अच्छे से दबोच लिया... पानी के अंदर कौवे की एक न चल पा रही थी... पंक भीगने से वह जयादा चटपटा भी नहीं प् रहा था और यही सही मौका जान के संजू ने पानी के भीतर हे उस कौवे का टेटुआ दबा दिया और वह निपट गया...
संजू उसको निपटा के वापस पानी से बहार निकला और फिर से अब एक एक करके जितने भी उसपर अटैक करने आ रहे कौवे थी सबको पानी में डुबो डुबो के मारने लगा...
मरने के बाद साड़ी कौवे की लास राख में बदल जा रही थी...
कौवे भी अपने साथियो की ऐसी हालत देख... घबरा गए... और सब में एक साथ अटैक करने का सोचा..
संजू ( मैं में) - ओह अच्छा तोह अब एक साथ अटैक का विचार है... कोई नई आ जाओ...
सारे कौवे इस बार संजू के ऊपर आकर बैठ गए और अपनी चोंच चुभाने लगे...
संजू इस बार पानी में नहीं डूबा...
कौवे - लगता है सबको एक साथ अटैक करने से ये डर गया और इसलिए दोबारा पानी में डुबाने की हिमाकत नहीं करेगा...
संजू भी इम्तिहान से थोड़ा भोजन ( मतलब की चोंच चबाने देने लगा...) और जब निश्चित हो गए संजू के ऊपर से ध्यान हटा लिया और चोंच चुभाने में खो गए तब एक हे झटके में संजू ने पानी में डुबकी लगा दी और गहरायी में जाने लगा...
सभी कौवो को शॉक लगा..
सभी धोखा धोका धोका... करने लगे...
लेकिन वह जितनी बार धोका बोलने के लिए मुँह खोलते ( हलाकि वह संजू को कॉव कॉव हे सुनाई दे रहा था... ) उतना हे पानी उनके पेट में भरता जाता.... और वह पानी पीने से मरते जाते....
कुछ देर में संजू पानी से बहार निकला... सब कौवे मारे जा चुके थी सभी राख में तब्दील हो गए..
संजू - ये क्या बवासीर है बी... साला ये कौवे अचानक से राख में कैसे तब्दील हो गए... जो भी हो हमको क्या... गांड मरए भजिया खाये... मई तोह चला
संजू घर के लिए निकल गया...
बाकि नेक्स्ट एप में..
थक्क... थक्क... थककक...
अंदर से आवाज़ आती है....
"है.... आए रही हूँ....
आए..... रही... हूँ.... "
खटखटाना बंद हो जाता है...
शयद बहार जो कोई भी थी.... उसने आवाज़ सुन ली थी...
कुछ हे देर में किसी के कदमो की आहात होती है.. और खड़क से दरवाजा खुल जाता है....
दरवाजा... खुलते हे.... एक औरत दूसरे औरत को अपने सामने खड़ा हुआ पाती है...
घर का दरवाजा मल्टी ने खोला था...
मल्टी - जी आप कौन.....
औरत - जी मई चमेली.... आप कौन हो और जीजी कहा है...
मल्टी - किस जीजी की बात कर रही है आप...
चमेली - मेरे उनके जीजी की..
मल्टी - यहाँ कोई उनके की जीजी नहीं रहती है लगता है आप गलत जगह आ गयी है.
चमेली - ारी उनके मतलब मेरे पति की जीजी...
मल्टी - यहाँ कोई पति वती की जीजी नहीं रहती..
चमेली - अच्छा...
चमेली अपने हाथ में पकडे कागज़ को मक्ति को दिखते हुए... ये देखिये यही पता है न ये..
मल्टी - हां पता तोह यही है... लेकिन यहाँ किसी की जीजी विजि नहीं रहती...
चमेली - नहीं.... मई मान हे नहीं सकती.... मेरी जीजी यही होंगी.. क्यों की मेरे पति ने कहा है और वह कभी गलत कहते हे नहीं....
मल्टी - ारी जब मई कह रही हु न की यहाँ तुम्हारी कोई जीजी विजि नहीं रहती तोह फिर क्यों जबरन का घुसे चली आ रही हो...
चमेली.. जबरन जीजी जीजी कहते हुए अंदर घुसने लगी...
आवाज़ सुनके... बिमला भी बहार आ गयी....
बिमला की नज़र जैसे हे चमेली पे पड़ी...
बिमला - ारी.. बहुरिया तू.... आ गयी....
चमेली ने जैसे हे बिमला की आवाज़ सुनी..
चमेली - जीजी... जीजी...
बिमला के पाँव छू के..
पाय लागु जीजी...
बिमला - खु रह...
मल्टी बिमला के मुँह से बहुरिया सुन के..
मल्टी ( ये कौन है... और बिमला इसको बहुरिया क्यों कह रही है..)
बिमला - टीकू ने बताया था की उसकी जगह तू आ रही है... आने में कोई तकलीफ तोह नहीं हुई..
चमेली- आने में तोह कोई तकलीफ नहीं हुई जीजी बस यहाँ आपकी नौकरानी ने मुझे रोक लिया था... घुसने हे नहीं दे रही थी... कलमुही कही की....
बिमला - नौकरानी... कौन नौकरानी...
चमेली - ये जो दरवाजे पे कड़ी है...
बिमला ने दरवाजे की तरफ देखा... वह मल्टी कड़ी थी...
बिमला - ारी.. बहुरिया... वह कोई नौकरानी नहीं है तेरे जीजा की....
बिमला ने अभी इतना बोलै हे था की
चमेली - ओह... जीजी मुझे माफ़ करियेगा... मई पहचान नहीं पायी की ये नौकरानी नहीं बल्कि जीजा जी की बहिन है...
ये सुनते हे बिमला मैं हे मैं तहका मार के हसने लगी... और मल्टी अंदर हे अंदर और बहार से भी गुस्से में आग बबूला होकर चिल्लाने लगी..
मल्टी - बिमला कौन है ये... कलमुही... साली जब से आयी है अनाप सनाप बाके जा रही है...
बिमला मल्टी का गुस्सा देख सकते में आ गयी...
बिमला - ारी मल्टी बहिन ये मेरे भाई टीकू की बहिन है... वोह नहीं आ पाया उसके पेअर में चोट लगी थी इसलिए... इसको यहाँ भेजा है..
मल्टी - गुस्से में.. - इसको समझा दो की मेरे घर में ऐसे बदतमीज़ी बर्दास्त नहीं की जाएगी...
चमेली - ारी.. वाह ये तेरा घर कब से हो गया... जा तू अपने ससुराल... अपने मायके को अपना घर बना रही है... ये घर जीजा जी के मरने के बाद मेरी जीजी का है तेरा नहीं समझी...
बिमला - ारी.. चमेली चुप हो जा... कुछ भी अनाप सनाप बकवास किये जा रही थी...
चमेली - आप मुझे क्यों डाट रही हो... अपनी ननद को समझाओ...
बिमला - ारी... तू मेरी बात तोह पहले सुन...
वह मेरी ननद नहीं है...
चमेली - अच्छा इसका मतलब मई सही थी ये आपके यहाँ नौकरानी है...
बिमला अपना सर पकड़ के...
बिमला- ारी.. नहीं रे... तेरी सुई बार बार नौकरानी और ननद पे जेक हे अटक रही है
मैं में - वैसे ाचा तोह मुझे भी लग रहा है इस तरह से इस मालती को जलील करने पे.. लेकिन अभी कुछ दिनों तक मुझे उसका साथ देना होगा... वार्ना ये प्रॉपर्टी का आधा हिस्सा मुझे देने से कही मुकर न जाए...
हरिया जी के खेतो पे मेरा भी हक़ है और मई उनको लेकर हे रहूंगी..
बिमला - ारी.. ये तेरे जीजा की न कोई बहिन है और न हे कोई नौकरानी..... ये तेरे जीजा की हे दूसरी बहिन है...
चमेली - है तोह वही तोह मई भी कह रही हु न जीजी की ये जीजा जी की बहिन है...
बिमला - ओह सॉरी मैंने बहिन कह दिया क्या..
( मैं में) - जान बुझ के बोलै हीहीही
मल्टी ( खिसयाते हुए) - हां...
बिमला - वोह ये वोह... तेरे जीजा की हे पत्नी है...
चमेली - मतलब की आपकी सौतन....
बिमला - ऐसा नहीं कहते बहुरिया... ये मेरी छोटी बहिन की तरह है.. चलो अब इस से अपने बर्ताव के लिए माफ़ी मांगो...
चमेली - मई कोई माफ़ी वाफी नहीं मांगने वाली आपकी इस सौतन से....
बिमला ( ारी ये बहुरिया तोह मरवायेगी मुझे... ऐसे में ये मल्टी कही नाराज़ न हो जाए और मुझे हिस्सा देने से मन न कर दे क्यों की समझ के सामने मल्टी हे हरिया की मान्य पत्नी है उसके मुताबिक़ साड़ी प्रॉपर्टी मल्टी को मिलेगी... )
बिमला खींचते हुए चमेली को कोने में ले जाती है...
बिमला- ारी क्या कर रही है बहुरिया... मांग ले माफ़ी...
फिर अपने सारे मंसूबो को बताती है...
चमेली - अच्छा... इसलिए आप उसकी इतनी तरफदारी कर रही है...
बिमला - और नहीं तोह क्या...
चमेली - अगर ऐसी बात है तोह फिर ठीक है... मई मांग लेती हु आपकी सौत से माफ़ी...
फिर चमेली मल्टी के पास जाकर उसके पैरो में गिर जाती है और उसके पेअर पकड़ के मगरमछ के आंशू बहते हुए...
चमेली - मुझे माफ़ कर दीजिये... मल्टी जीजी... मई आपको पहचान न सकीय... और कुछ भी अनाप सनाप बकने लगी... मुझे माफ़ कर दीजिये... जब तक आप मुझे माफ़ नहीं करोगी मई आपके पेअर नहीं छोडूंगी...
मल्टी - ारी. ठीक है ठीक है मैंने तुम्हे माफ़ किया... अब छोडो मेरे पेअर.. और उठ जाओ बहुरिया...
चमेली खुस होते हुए उठ जाती है और मल्टी के गले लग जाती है...
और सब प्रॉब्लम सोल्वे हो जाता है...
बिमला चमेली को चंदा के रूम में पंहुचा आती है... और मल्टी से चमेली की हरकतों के लिए माफ़ी मांगने लगती है..
मल्टी - ारी कोई बात नहीं ... हो जाता है
इधर....
संजू कुछ सोच कर
अपने कदम पानी में हे रोक लेता है
और वापस मुद के पानी में जाने लगा...
वोह कौवे तेज़्ज़ी से बढ़ते हुए संजू की तरफ आने लगे...
इधर संजू पानी में पेट से थोड़ा ऊपर पानी तक अंदर आ गया...
और तभी एक कौवा उड़ते हुए आकर संजू के कह्दे पे बैठ के अपनी चोंच जैसे हे संजू के गर्दन पे चुभाने वाला था की संजू ने उस कौवे को अपने कंडे पे दबा लिया हाथ से और एक डुबकी पानी में लगा दी..
बेचारे कौवे को तोह समझ में हे नहीं आया की क्या हुआ.....
कौवा पानी में संजू के साथ दुब गया.... और पानी पी लिया...
संजू ने पानी के अंदर कौवे को अच्छे से दबोच लिया... पानी के अंदर कौवे की एक न चल पा रही थी... पंक भीगने से वह जयादा चटपटा भी नहीं प् रहा था और यही सही मौका जान के संजू ने पानी के भीतर हे उस कौवे का टेटुआ दबा दिया और वह निपट गया...
संजू उसको निपटा के वापस पानी से बहार निकला और फिर से अब एक एक करके जितने भी उसपर अटैक करने आ रहे कौवे थी सबको पानी में डुबो डुबो के मारने लगा...
मरने के बाद साड़ी कौवे की लास राख में बदल जा रही थी...
कौवे भी अपने साथियो की ऐसी हालत देख... घबरा गए... और सब में एक साथ अटैक करने का सोचा..
संजू ( मैं में) - ओह अच्छा तोह अब एक साथ अटैक का विचार है... कोई नई आ जाओ...
सारे कौवे इस बार संजू के ऊपर आकर बैठ गए और अपनी चोंच चुभाने लगे...
संजू इस बार पानी में नहीं डूबा...
कौवे - लगता है सबको एक साथ अटैक करने से ये डर गया और इसलिए दोबारा पानी में डुबाने की हिमाकत नहीं करेगा...
संजू भी इम्तिहान से थोड़ा भोजन ( मतलब की चोंच चबाने देने लगा...) और जब निश्चित हो गए संजू के ऊपर से ध्यान हटा लिया और चोंच चुभाने में खो गए तब एक हे झटके में संजू ने पानी में डुबकी लगा दी और गहरायी में जाने लगा...
सभी कौवो को शॉक लगा..
सभी धोखा धोका धोका... करने लगे...
लेकिन वह जितनी बार धोका बोलने के लिए मुँह खोलते ( हलाकि वह संजू को कॉव कॉव हे सुनाई दे रहा था... ) उतना हे पानी उनके पेट में भरता जाता.... और वह पानी पीने से मरते जाते....
कुछ देर में संजू पानी से बहार निकला... सब कौवे मारे जा चुके थी सभी राख में तब्दील हो गए..
संजू - ये क्या बवासीर है बी... साला ये कौवे अचानक से राख में कैसे तब्दील हो गए... जो भी हो हमको क्या... गांड मरए भजिया खाये... मई तोह चला
संजू घर के लिए निकल गया...
बाकि नेक्स्ट एप में..