अपडेट 3
ऐसा लगा जैसे कोई मेरे माथे पर कुछ लगा रहा है ,मैंने तुरंत hi आँखे खोली सामने सिसकती हुई भाभी बैठी थी …
“अब कैसा है मुन्ना “
उन्होंने बड़े hi मुश्किल से ये बोलै था ,आँखों के आंसू रह रह का रूण नाजुक से गलो में उतर जाते थे ,साड़ी के पल्लू से अपना मुँह छुपा छुपा कर वो रो रही थी
मैं बिलकुल hi आश्चर्यचकित होकर उन्हें देख रहा था इतना सब कुछ होने के बाद भी वो मेरा धयान रख रही थी ,मैंने पास hi खड़े सोहन को भी देखा ,सोहन मेरे बचपन का दोस्त था लेकिन दुनिया दरी में मुझे कही आगे था ..
“सोनू भाई तुम्हारे भाई का चक्केर तुम्हारे पड़ोस की उस लड़की चंचल से है ,मैं कई दिन से उन्हें देख रहा हु लेकिन कुछ बोलै नहीं सोच की सब ठीक हो जायेगा ,वो साली बहुत hi गन्दी लड़की है भाई उसके चक्कर में भैया ने भाभी को घर से निकाल दिया ताकि उनका रास्ता साफ हो जाए और पूरी जैजात खुद हड़पने के लिए तुझे भी निकाल दिया, भाभी और तेरे रिश्ते के बारे में बुरा भला बोलकर ..”
मैं अब भी मुँह फाडे उसकी बात सुन रहा था, मुझे मेरे कानो पर यकीं नहीं था मेरा भाई ऐसे कैसे कर सकता था, जिस भाभी को मैंने अपनी माँ समझा था अपनी बड़ी बहन समझा था उसके hi बारे में वो ऐसे कैसे बोल सकता tha…lekin ये हुआ था और पुरे गांव ने देखा भी था…
“भाभी आप फ़िक्र मत करो हम पंचायत बुलाएँगे और देखते है की भैया कैसे जैजात का बटवारा नहीं करते “सोहन फिर से बोलै ,वो गुस्से में था ,मुझे भी गुस्से में होना था लेकिन मैं बस बेसुध था मुझे कुछ समझ hi नहीं आ रहा था की ये आखिर हो क्या रहा है ..
तभी भाभी बोल उठी
“नहीं भैया, मैं कुछ भी नहीं करुँगी , मैं ये गांव hi छोड़कर चली जाउंगी ,सोनू को उसका हक़ मिल जाए बस ..जिसके सहारे घर परिवार सब छोड़कर आयी थी वो hi ऐसा निकल गया तो अब मेरे पास बचा hi क्या है जीने के लिए ,मैं कही भी चली जाउंगी ,कुछ भी करके गुजरा कर लुंगी “
भाभी को ऐसी हालत में मैंने आज तक नहीं देखा था….. पहले माँ पापा के बुरा भला कहने को भी मैंने देखा था ,गांव वालो की तरह तरह की बातो को भी मैंने सुना था लेकिन ये ...भाभी कभी नहीं टूटी थी लेकिन आज उन्हें देखकर ऐसा लगा जैसे वो टूट चुकी है ,जिससे प्यार किया था उसने hi जब इल्जाम लगा दिया, वो hi जब नहीं रहा तो उनकी दुनिया में आखिर और क्या बचा था ……..
“भाभी आपके बारे में कोई ऐसे कैसे कुछ भी बोल सकता है , जब तक मैं हु तब तक आप यही रहोगी और मैं देखता हु की कैसे भाई उस लड़की को घर में लाता है और आपकी जगह देता है सेल को वही काट दूंगा ..”
मेरा भी खून आखिर खोलने लगा था मुझे भी समझ आ चूका था की बात क्या हुई है ..
“नहीं सोनू तुझे मेरी कसम है तू कुछ भी नहीं करेगा , आखिर जब प्यार hi नहीं रहा तो उनके साथ रहना भी किसी लाश के साथ रहने जैसा hi होगा ..”
उनकी बात मुझे समझ नहीं आ रही थी
“भाभी उस आदमी ने आप पर इतना बड़ा इल्जाम लगाया है मैं उसे जिन्दा नहीं छोडूंगा “
मैं अभी खड़े होने की हालत में भी नहीं था लेकिन जैसे तैसे खड़ा हो गया ..
“सोनू तुझे मेरी कसम तू ऐसा कुछ भी नहीं करेगा, उसने गांव के लोगो को अपने पक्ष में कर लिया है, और गांव के सभी गुंडों को अपनी तरफ कर लिया है तू वंहा जायेगा तो वो लोग तुझे नहीं छोड़ेंगे “
भाभी ने मेरा हाथ अपने सर में रख दिया, मेरा खौलता हुआ खून ठंडा तो हो hi नहीं रहा था लेकिन भाभी की कसम ने कही न कही मुझे थोड़ा ठंडा जरूर कर दिया था ..
“भाभी लेकिन ..”
“लेकिन वेकिन कुछ नहीं तू कही नहीं जायेगा बस ,और रही बात मेरी तो मैं आज hi ये गांव छोड़कर चली जाउंगी ,और कल तू पंचायत बुलकर अपने हिस्से की जमीं ले लेना “
उनकी बात ऐसी लगी जैसे दिल में कोई तलवार सी चल गई हो ..
“भाभी आप मुझे छोड़कर चली जाएँगी ??”
मेरा गाला hi भर गया था ,माँ तो छोड़कर चली गई थी ,बहन थी hi नहीं जिसके अंदर ये दोनों रूप देखा करता था जो मेरे लिए प्रेम की जीती जगती प्रतिमा थी वो भी मुझसे दूर जाने वाली थी..
“हां बाबू मैं इस अपमान के साथ नहीं जी सकती ,जिसे मैंने अपना छोटा भाई समझा ,अपने बेटे की तरह जिसे प्यार दिया उसके साथ मेरा नाम बदनाम किया जा रहा है ,मैं ऐसी जगह नहीं रह सकती “
वो फिर से फुट फुट कर रोने लगी थी ,पास खड़ा सोहन भी कुछ भी बोल रहा था…
“अगर आप की यही इक्च्चा है तो मैं भी आपके साथ जाऊंगा “
आखिर कार मैंने कहा ,भाभी और सोहन दोनों hi मुझे देख रहे थे
“तू पागल हो गया है ये तेरा घर है ,वो तेरी जमीं है जिसपर तेरे भाई ने कब्ज़ा किया हुआ है तू ये सब छोड़कर कैसे जा सकता है “
भाभी की बात स्वाभाविक थी लेकिन मैं अपने दिल से जनता था की मेरे लिए क्या जरुरी है ..
“आपके बिना मुझे ये सब मिल भी जाए तो क्या ?? आप जंहा रहोगी मैं भी वही रहूँगा ,आप कहती थी ना की आप मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो ,तो सुनो मैं भी आपके लिए कुछ भी कर सकता हु ,”
भाभी मुझे बस देखती hi रह गई थी ,जिसे उन्होंने एक बच्चा hi समझा था वो आज अचानक से बड़ा हो गया था ……
तभी कोई और भी उस घर में आया ,वो हरिया था मेरे बचपन का दोस्त ,ऐसा लग रहा था जैसे वो दौड़ते हुए आया हो उसकी सांसे तेज थी ..
“सोनू ,भाभी …..”
“क्या हुआ हरिया ऐसे हांफ क्यों रहा है..” उसे देखते hi सोहन ने कहा
“राजू भैया (मेरा भाई ) आप लोगो को मरने के लिए आ रहा है ,मैंने सुना है की वो लोग इस घर को आग लगाने वाले है और आप दोनों को जान से मरने की बात कर रहे थे ..”
उसकी बात सुनकर हम तीनो hi स्तब्ध थे …तभी भाभी अचानक से उठी और मेरा हाथ पकड़ लिया ..
“चल सोनू ..”
“मैं आपको आपका हक़ दिला कर hi जाऊंगा, मैं मरने से नहीं डरता “
मेरी बात सुनकर उनके चेहरे में चिंता की लकीरे और भी बाद गई थी
“वो तू दिला सकता है ,लेकिन आज नहीं बीटा ,अगर तुझे मेरी वजह से कुछ हो गया तो मैं खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाऊँगी चल जल्दी से चल..”
उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खिंचा ..
“लेकिन कहा “सोहन ने कहा था ..
“जंहा किस्मत ले जाए ..”
भाभी ने कहा ,हमारे लिए अभी यही सही रास्ता था और हरिया और सोहन की मदद से हम गांव के बहार चले आये ,उन्होंने हमें शाम की आखिरी बस में बैठा दिया था जो शहर को जा रही थी, वो बस आखिर कहा जा रही थी मुझे नहीं पता था और उसका अंतिम ठिकाना कहा था वो भी नहीं, लेकिन वो जंहा भी जा रही थी वही हमारा ठिकाना होने वाला था ………