Tumhaare Liye- Ek Prem Kahaani - Page 5 - SexBaba
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Tumhaare Liye- Ek Prem Kahaani

अपडेट- 07

फिर दोनों बहाने कुछ देर बात करती रही. थोड़ी hi देर में लड़के वाले आ गए. अपनी क्षमता के अनुसार आनंद जी ने पूरी व्यवस्था की थी. कुछ hi देर में सगाई की रश्म शुरू हो गयी, लेकिन सगाई होते होते लड़के वालों का मुंह फूल गया. लड़के के पापा तो ऐसे बर्ताव करने लगे जैसे उनके घर में किसी की मृत्यु हो गयी हो.

लड़के के पापा ने आनंद जी को अलग से बात करने के लिए बुलाया. आनंद जी के साथ उनके सेल भी थे. लड़के के पापा ने आनंद जी से कहा.

L.Papa- ये क्या है आनंद जी आपने तो कहा था की आपकी खातिरदारी में कोई कमी नहीं रहेगी और सगाई की रेशम बहुत अचे से होगी, लेकिन यहाँ तो न खातिरदारी ठीक से हुई और न hi सगाई की रेशम hi अचे से हुई. जब सगाई में ये हाल है तो शादी में तो आप मुझे लूट hi लोगे.

आनंद जी- अरे नहीं भाई साहब. ये आप कैसी बात कर रहे हैं. मैं अपनी क्षमता से ज्यादा कर रहा हूँ. ताकि मेरी बेटी खुश रहे. शादी में कोई कमी नहीं होगी भाई साहब. हमने पूरी कोशिश की सगाई में कोई कमी न रहने पाए. फिर भी अगर कोई कमी रह गयी हो तो आप हमको बता दीजिये. हम पूरी कोशिश करेंगे की उसे दूर कर सके.

L.Papa- देखो आनंद एक तो लड़के को अपने सोने की जंजीर नहीं दी. और आपने सगाई में पैसे भी काम दिए हैं. ऐसे कैसे चलेगा. आखिर हमने अपने बेटे की पढाई लिखे में कितना पैसा खर्चा किया है. और तुम अपनी बेटी के लिए उसे फोकट में अपना दामाद बनाना चाहते हो. और साथ में हमारे साथ आये हुवे मेहमानो का आपने स्वागत ढंग से नहीं किया.

आनंद जी- या आप कैसी बात कर रहे हैं भाई साहब. हमने अपनी तरफ से खातिरदारी में कोई कमी नहीं राखी. भाई साहिब सगाई के लिए पैसे और जंजीर की कोई बात हुई hi नहीं थी. सगाई की अंगूठी के अलावा मैंने अपनी तरफ से एक सोने की अंगूठी दी है. वैसे भी बात तो शादी के लिए हुई है मोटर साइकिल और 2 लाख रूपये की. जो मैं शादी के समय दूंगा आपको.

L.papa- ऐसे कैसे मैं तुम्हारी बात का भरोषा कर लून. जो इंसान सगाई में इतनी कंजूसी कर सकता है वो शादी में क्या खर्चा करेगा. मुझे तो लूट लिया तुमने सगाई में और शादी में तो कंगाल hi बना डोज तुम मुझे.

S.Mama- देखिये भाई साहब आप अब कुछ ज्यादा hi बोल रहे हैं. हमने अपनी तरफ से कोई कसार नहीं राखी खातिरदारी में. फिर भी अगर कही कमी रह गयी हो तो हमको माफ़ कर दीजिये. और रही बात शादी के समय किये गए वेड की तो वो हम पूरी तरह से निभाएंगे. जो हमने देने के लिए कहा है वो हम्म आपको देंगे.

सरिता के मां की बात सुनकर लड़के के पापा गुस्से में आ गए और उन्होंने तेज़ आवाज़ में कहा.

L.papa- क्या ज्यादा बोल रहा हूँ मैं. मुझे आप दोनों पर तनिक भी भरोषा नहीं हैं. अब जब तक आप लड़के के लिए जंजीर और 50000 रुपये और नहीं देंगे. तब तक शादी के बारे में भूल जाइये.

S.mama- ये क्या बात हुई भाई शाहब. हम आपसे इतने प्रेम से बात कर रहे हैं तो अआप धमकी देने पर उतर आये हैं. मैं भी देखता हूँ की कैसे नहीं करते आप शादी. हमारी बिटिया कोई सजावट का सामान है क्या की जब मन चाहा हां किया और जब मैं चाहा न कर दिया. जब हम बोल रहे हैं की आपको शादी के समय जो भी देने के लिए कहा गया है वो हम देंगे तो अब आप की डिमांड बढाती जा रही है. ये बिलकुल भी सही नहीं है.

L.papa- ऐसे कैसे नहीं देंगे आप. आखिर मैंने अपने बेटे को पलने और पढाई लिखे पर जो खर्च किया है वो कौन देगा. आप फ्री में मेरे कमाऊ बेटे को अपना दामाद बनाना चाहते हैं. या तो मेरी बात मानिये या तो ये रिश्ता ख़तम समझिये.

आनंद जी- नहीं नहीं भाई साहब ऐसा मत कहिये. अभी इतनी जल्दी ये सब कैसे अर्रंगे करूँगा मैं. आप हमें कुछ दिन का समय दीजिये मैं जंजीर और 50000 रुपये आपको दे दूंगा. लेकिन आप ये रिश्ता मत तोड़िये. बहुत बदनामी हो जाएगी मेरी समाज में.


ल. पापा- मुझे अब और कोई बात नहीं करनी. मुझे अभी के अभी 50000 रुपये और सोने की जंजीर लड़के के लिए चाहिए. नहीं तो मैं चला लड़के को लेकर अपने घर.

लड़के के पापा की बात सुनकर आनंद जी की आँखों में आँशु आ गए. उन्होंने अपनी पगड़ी उतर कर लड़के के पापा के पैरों में रखने लगे तो सरिता के मां ने उनको रोकते हुवे कहा.


S.Mama- ये क्या कह रहे हैं आप जीजा जी. ये लालची लोग हैं इनके क़दमों में अपनी इज़्ज़त रखने का कोई मतलब नहीं है. इतना तो मैं भी समझ गया हूँ की इनकी नजर में पैसा hi सबकुछ है. अब आप इनकी कोई भी बात नहीं मानेंगे. इनकी मानगो को पूरा करके आप सरिता के लिए मुश्किलें पैदा कर रहे हैं.

अभी ये सब बाटे हो रही थी की किसी ने सरिता को खबर कर दी की लड़के के पापा और आनंद जी में कुछ कहा सुनी हो गयी है तो सरिता भी सगाई वाले कपड़ों में hi वह पहुंच गयी. जब उसने पूरी बात सुनी और अपने पापा को अपनी पगड़ी लड़के के बाप में पैरों में रखते हुवे देखा तो उसका माथा भन्ना गया. उसने लड़के के पापा को दो टूक जवाब देते हुवे कहा.

सरिता- आप क्या शादी के लिए मन करेंगे. मैं ये शादी खुद तोड़ रही हूँ. नहीं करनी मुझे आप के बेटे से शादी. निकल जाइये आप अभी और इसी समय यहाँ से और अपने बेटे के लिए कोई और लड़की ढूंढ लीजिये.


सरिता की बात सुनकर आनंद जी ने उससे गुस्से से कहा.

आनंद जी- ये क्या कर रही हो तुम सरिता. तुम अंदर जाओ. मैं बात कर रहा हूँ न.

सरिता- मैं क्यों अंदर जाऊं पापा. और आप क्यों इनकी बात सुन रहे हैं. क्या अपने हमें इसीलिए पाल पॉश कर बड़ा किया था की एक दिन हमारी वजह से इन भिखमंगो के सामने हाँथ फैलाना पड़े. मैं ये कभी बर्दास्त नहीं करुँगी की मेरी वजह से मरे पापा को किसी के सामने हाँथ फिअलना पड़े और किसी के सामने शर्मिंदा होना पड़े.

आप हमारा गुरुर हैं पापा. अभिमान हैं आप हमारे. मैं अपने गुरुर और अभिमान को किसी के सामने toot-ta हुवा नहीं देख सकती. आप खुद सोचिये पापा की अभी मेरी शादी भी नहीं हुई है तो इनका ये हाल है. मेरी शादी हो जाने के बाद तो ये शेर हो जायेंगे. आपसे कुछ भी डिमांड कर देंगे. और आप मेरी ख़ुशी के लिए इनकी हर डिमांड पूरी करते फिरेंगे. इनके पैरो में गिर कर रोयेंगे, गिड़गिड़ाएंगे. जो मैं कभी नहीं होने दूँगी.

औरत कोई सजावट की वस्तु नहीं है पापा जो उसकी बोली लगायी जाये. अरे ठोकर मरती हूँ मैं इनकी दौलत और इनके बेटे की नौकरी पर. आप मेरी शादी किसी गरीब मजदूर से कर देना पापा. मैं रोज कमाकर खा लुंगी. लेकिन इन जैसे भिखमंगो के घर मेरी शादी मत करिये पापा. मेरी बात मन लीजिये पापा. अपनी सरिता की बात मन लीजिये.

S.mama- सरिता सही कह रही है जीजा जी. ये लोग लालची हैं शादी के बाद अगर इनकी कोई डिमांड हम न पूरी कर पाए तो. आपने सोचा है की ये अपनी सरिता के साथ कितना बुरा बर्ताव कर सकते हैं. मान जाइये जीजा जी. मैं सरिता बिटिया के साथ हूँ. और मैं भी नहीं चाहता की अब ये शादी हो.

आनंद को भी सरिता की बात सही लगी. उन्होंने भी दबे मन से अपनी सहमति दे दी. लड़के के पापा को फ़िलहाल ऐसी उम्मीद नहीं थी की लड़की खुद आकर शादी के लिए मन कर देंगी. उन्होंने ने सोचा था की दरवाज़े पर सगाई टूट जाने के दर से आनंद जी उसकी मांग पूरी कर देंगे, लेकिन सरिता के दो टूक इंकार ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. शादी टूट जाने के बाद लड़के वाले अपना अपना मुंह लेकर वह से चले गए.

सरिता के इंकार करने के कुछ hi देर में जंगल में आग की तरह चारो तरफ ये खबर फिकल गयी की सरिता ने शादी से इंकार कर दिया. फिर तो वही हुवा जो अक्सर लड़की की शादी टूटने पर होता है. जीतनेय मुंह उतनी बातें. कोई कह रहा था की सरिता ने बहुत अच्छा किया जो ऐसे लालची लोगो के यहाँ बहु बैंकर जाने से इंकार कर दिया तो कोई कह रहा था की लड़की वालो को इतना घमंड शोभा नहीं देता.

आनंद जी के पदोष में एक नए परिवार ने कुछ समय पहले नया घर बनवाया था और वो घर के सभी सदश्यो के साथ वह सिफत हुए थे. घर के मुखिया पुलिस महकमे में इंस्पेक्टर थे. तो उनका मन सम्मान भी था. उनकी पत्नी हाउसवाइफ थी. लेकिन मुंहफट थी. किसी के सामने कुछ भी बोल देती थी. ये भी नहीं समझ आता था उनको की उनकी बात किसी को बुरी लग सकती है.

हमेशा अपने पति के इंस्पेक्टर होने का घमंड दिखती रहती थी. इनका बीटा सेंट्रल बैंक में पो की पोस्ट पर पिछले साल hi लगा था. और बिटिया हम उम्र थी सरिता की. इसलिए दोनों में थोड़ी बहुत बातचीत हो जाती थी, लेकिन वो भी अपनी माँ की तरह hi थी. पदोष में रहने के कारन उनको ये भी पता चल गया था की अभिषेक घर छोड़कर चला गया है. और किसलिए गया है ये भी पता था.

सगाई में शामिल होने वो लोग भी आये थे इंस्पेक्टर को छोड़कर. तो जब उनको भी ये बात पता चली की सरिता ने शादी से मन कर दिया है तो उन्हें मौका मिल गया अपनी बात कहने का, लेकिन उन्होंने यह नहीं देखा की सरिता और मनीषा उनके पीछे आ रही हैं. उन्होंने पास बैठी औरत से कहा.

I.wife- जानती हो बहन मुझे तो शक है की इस सरिता का कही न कही चक्कर चल रहा है. जिसके कारन उसने शादी से मन कर दिया. नहीं तो बताओ भला. नौकरी वाले लड़के को आजकल कौन मन करता है शादी से.

औरत- नहीं बहन ऐसा कुछ नहीं है तुम गलत समझ रही हो बहुत hi नेक बछिया हैं.

I.wife- तुम्हे नहीं पता कुछ भी. ये दोनों ऊपर से मासूम दिखती हैं, लेकिन अंदर से बहुत घाघ हैं. मुझे तो लगता है जिससे सरिता का चक्कर चल रहा हैं ये वही लड़के होंगे. जिनको अभिषेक ने मारा होगा. बिना लड़की की हाँ के कोई लड़का उसके बारे में ऐसे थोड़ी बोल सकता है. पता नहीं क्या संस्कार दिए हैं आनंद जी ने अपनी बेटियों को. अभिषेक को पता चल गया होगा इन चक्करो के बारे में. वो तो पहले से hi गुंडा था. इसलिए उस लड़के को पिट दिया.

अपने भाई से बदला लेने के लिए इसने अभिषेक को घर से निकलवा दिया होगा. कोई संस्कार नहीं हैं इसके अंदर. कोई इज़्ज़त नहीं है उनकी समाज में. अरे जिसके बेटे और बेटियों के ये लक्षण होंगे उसकी क्या इज़्ज़त रहेगी समाज में. मेरे पति को देखो. कितना मान सम्मान है. मेरे बेटे को देखो बैंक में पो हैं ये सब अच्छे संस्कार का नतीजा है. मुझे दुःख होता है की आनंद ने कैसे संस्कार दिया हैं अपने बच्चो को. बीटा गुंडा बन गया और दोनों बेतिया चरित्रहीन निकल गयी.

ये बात सुनकर सरिता रट हुवे अपने कमरे में भाग गयी, लेकिन मनीषा आग बबूला हो गयी और चिल्लाते हुवे बोली.

मनीषा- ये क्या बोल रही हो आप. मेरी दिदिया के चरित्र पर इतना घटिया इलज़ाम लगते हुवे आपको शर्म नहीं आती. मेरी दिदिया गंगा की तरह पवित्र है और आपको मेरी दिदिया के चरित्र का सर्टिफिकेट देने की जरूरत नहीं हैं. आपकी समाज में इज़्ज़त है. तो हम लोग भी आपके यहाँ भीख मांगने नहीं जाते. आप अपनी इज़्ज़त अपने पास रखिये.

आप संस्कार की बात कर रही हैं. तो आप अपने संस्कार देखिये. आपके यही संस्कार हैं की आप बिना सच्चाई जाने मेरी दिदिया पर इतना घटिया इलज़ाम लगा रही हैं. आप मेरी दिदिया को कुछ बोलने से पहले अपनी बिटिया की सच्चाई जाकर पता करिये की वो पढाई का बोल कर बहार जाती है तो पढाई करने जाती हैं या लड़को के साथ गुल छर्रे उड़ने जाती है.

महिषा की तेज़ आवाज़ सुनकर बहुत सी औरते और आदमी वह पर जमा हो गए थे. उस औरत की बेटी भी वह आ गयी थी. जब उसने अपने बारे में सुना तो वो भी अपनी माँ की तरह शुरू हो गयी.

लड़की- क्यों रे मनीषा. क्या बोली तू. तू मेरे बारे में जासूसी करती हैं. तुझे मैं छोडूंगी नहीं. मेरी माँ सही कह रही हैं तुम दोनों बहने चरित्रहीन हो. कोई इज़्ज़त नहीं है समाज में तुम लोगों की. भाई गुंडा है और बहन बदचलन. अरे तुम लोगो को तो चुल्लू भर पानी में डूबकर मर जाना चाहिए. चलो माँ यहाँ से ऐसे लीचड़ो के यहाँ से कोई रिश्ता नहीं रखना है हमको.

अन्य पडोसी व्यक्ति- ये तुम माँ बेटी क्या बोले जा रही हो ानप सनाप. हम लोग इन बच्चियों को बचपन से जानते हैं. इन दोनों बच्चियों जैसा संस्कारी और व्यवहारी. बड़ो का आदर करने वाली बछिया यहाँ आस पास ढूढ़ने से भी नहीं मिलेंगी. और इनके बेटे के बारे में क्या जानती हो तुम दोनों. वो शरारती था, लड़ाई झगड़ा करता था, लेकिन कभी भी किसी लड़की से गलत व्यव्हार नहीं किया उसने कभी किसी की बहन बेटियों को गन्दी नजर से नहीं देखा.

उसने उन लड़को को इसलिए मारा था क्योंकि उन दोनों ने इन बच्चियों के बारे में गन्दी बात की थी. तुम्हारे आदमी पुलिस में हैं तो इसका ये मतलब नहीं है की तुम्हारे जो मुंह में आये वो तुम बक्ति जाओ. तुम दोनों को ये नहीं दिख रहा है की उस बच्ची पर मुसीबतो का पहाड़ टूटा है. उसकी शादी कैंसिल हो गयी है. उसे दिलाशा देने के बजाय उसे बदनाम कर रही हो तुम दोनों. शर्म आणि चाहिए तुम दोनों को.

I.wife- हम क्यों शर्म करे. हमने या हमारी बेटी ने कही मुंह कला नहीं किया है. शर्म तो इन दोनों लड़कियों को आणि चाहिए. जो मुंह कला करती फिरती हैं. भलाई का तो जमाना hi नहीं रहा.

अभी वो आदमी कुछ और बोलता उससे पहले आनंद जी बिच में बोले पड़े.

आनंद जी- बस कीजिये आप लोग. क्यों मेरी सरिता के पीछे पड़े हैं आप सब. भगवन के लिए उसे बक्श दीजिये और अपने अपने घर जाइये. जो भी दुःख और मुसीबत हमारे ऊपर पड़ी है उसे हम झेल लेंगे. हमें आप लोगो की सहानुभूति की जरूरत नहीं है. मेहरबानी करके आप लोग जाइये यहाँ से.

आनंद जी की बात सुनकर वो दोनों माँ बेटी भुनभुनाती हुई अपने घर चली गयी. उसके बाद धीरे धीरे सब पास पदोष के लोग उनके घर से बहार निकल गए.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
बहुत बहुत धन्यवाद आपका महोदय इस खूबसूरत समीक्षा के लिए।।

समाज के ऐसे कई चेहरे हैं जो समय समय पर सामने आते रहते हैं। किसी को पैसे का गुरुर है तो किसी को शोहरत का।

कोई इंसान किसी की खुशियां नहीं देख सकता गम बांटने की बात तो बहुत दूर है।

सरिता के गम में शरीक न होकर इंस्पेक्टर की पत्नी ने उसपर लांछन लगा दिया। जो कहीं न कहीं सरिता को कचोटता रहेगा।

साथ बने रहिए।।
 
धन्यवाद आपका महोदय।।

कुछ लोग होते है ऐसे जीने लिए गुणों से ज्यादा पैसा महत्त्व रखता है। सरिता जैसी संस्कारी और सद्गुणों वाली लड़की से ज्यादा लड़के के बाप को पैसा प्यार था। तभी तो उसने सरिता के बदले पैसे को अहमियत दी।। पड़ोसी भी ज्यादा सेज नहीं होते। मौका मिलते ही वो अपनी औकात दिखा ही देते हैं।।

साथ बने रहिए।।
 
अपडेट- 8

सबके चले जाने के बाद आनंद जी जमीन पर बैठ कर फूट फूट कर रोने लगे. अंदर सरिता रो रही थी और बहार आनंद जी और रानी जी रो रहे थे. आनंद जी और रानी जी को रिश्तेदार संभल रहे थे तो सरिता को मनीषा संभल रहे थे. सरिता को अपनी शादी टूटने का कोई दुःख नहीं था बल्कि वो खुद अपनी शादी तोड़कर आई थी.

लेकिन इंस्पेक्टर की वाइफ और बेटी की बाते उनसे दिल और दिमाग को छलनी कर रही थी. उसके करैक्टर पर इलज़ाम लगाया था दोनों ने. जो उसने कभी सपनो में भी नहीं सोचा था. उसके बारे में उन दोनों ने बोलै था. लेकिन जैसे hi उसके कानो में आनंद जी के रोने की आवाज़ सुनाई पड़ी वो अपना दुःख दर्द भूलकर अपने कमरे से भागकर अपने मम्मी पापा के पास आई और उनके गले लगकर रोने लगी.

सभी रिश्तेदार की आँखों में आँशु थे. साथ में पास पदोष के जो लोग सरिता और मनीषा को जानते थे. सभी इंस्पेक्टर की वाइफ और बेटी की बातो से नाखुश थे. सभी रिश्तेदार मान , बाप बेटी को दिलाशा देकर चुप करवा रहे थे. आनंद जी रट हुवे बोले.

आनंद- उसने मेरी बच्ची के करैक्टर पर ऊँगली उठाई. मेरी बच्ची को गली दी उसने. मेरी बच्ची ने कुछ नहीं किया. मेरी बच्ची गलत नहीं कर सकती. वो झूठ बोल रही है.

Sarita-(rote हुवे) पापा आप चुप हो जाइये. उसको जो कहना है कहने दीजिये. उसके कहने से सच्चाई थोड़ी hi बदल जाएगी. आपको मुझपर भरोषा है न पापा. अगर आपको मुझपर भरोषा है तो मुझे कोई फर्क नहीं पादकता की कोई मेरे बारे में क्या बोलता है. अब आप चुप हो जाईये पापा. आप hi मेरी ताकत हो पापा. अगर आप hi टूट गए तो मुझे कौन संभालेगा. मुझे इस समय आपकी सबसे ज्यादा जरूरत है पापा.

मनीषा- (सिसकते हुवे) हाँ पापा दिदिया सही कह रही है. आप शांत हो जाइये. हमको किसी से मतलब नहीं है पापा. बस आप हमपर भरोषा रखते हैं तो दुनिया कुछ भी बोले हमें कोई फर्क नहीं पड़ता पापा.

आनंद जी- (रट हुवे) मुझे तुम दोनों पर अपने से भी ज्यादा भरोसा है बेटी. मैं तो ये सोचकर रो रहा हूँ की मैंने तुम दोनों को जीवन में कभी खुशिया नहीं दे पाया. हमेशा दुःख दिए हैं मैंने तुम दोनों को. मुझे माफ़ कर दो बेटी.

सरिता- (उनका हाँथ पकड़कर) आप ऐसा मत कहिये पापा. आप ने कुछ नहीं किया है. आप ने हमारे लिए जो किया है वो कोई और नहीं कर सकता पापा. आप दुनिया के सबसे बेस्ट पापा हो. अब आप शांत हो जाइये. नहीं तो मैं और भी जोर जोर से रोने लगूंगी.

फिर मनीषा और सरिता ने अपने पापा को उठाकर खटिया पर बैठाया. मनीषा ने एक गिलास पानी लेकर अपने पापा को दिया. आनंद जी ने पानी पीकर थोड़ा आराम करने के लिए कहा. क्योंकि आनंद जी शारीरिक रूप से ज्यादा मानशिक रूप से थक गए थे. इसलिए वो वही खटिया पर लेटकर आराम करने लगे.

सुबह खुशियों से शुरू हुवा ये दिन शाम होते होते मातम में बदल गया. (सही hi है किसी किसी के नसीब में खुशिया आने से पहले इतना ज्यादा दुःख आता है की लोग हतास हो जाते हैं अपनी जिंदगी से). रानी जी के भाइयो ने मिलकर पूरा टैंट, गद्दा, कुर्शी और जो भी सामान सगाई के लिए किराये पर लाया गया था, उन्हें वापस पहुंचाया.

सभी दो दिन तक रुके रहे, लेकिन घर का माहौल ऐसा हो गया था की जैसे घर में किसी की मृत्यु हो गयी हो. सभी जैसे हंसना खाना पीना सब कुछ भूल गए थे. दो दिन बाद रानी जी के दोनों भाई अपने परिवार के साथ वापस अपने घर चले गए. आखिर सभी के घर में काम होता है.

उनके जाने के बाद यहाँ पर रानी जी और आनंद जी की हालत ख़राब hi थी. तो दोनों बहनो ने सब कुछ भूलकर खुद को मज़बूत किया और सामने आई परिस्थिति का सामना करते हुवे अपने माँ और बाप को भी इस विचित्र परिस्थिति से बहार निकला.

इस स्तिथि से उबरने के लिए आनंद जी को 1 हफ्ते का समय लगा. इन 1 हफ्तों में आनंद जी ने ऑटो बहार नहीं निकला था, लेकिन वो कब तक ऐसा करते. आखिर पापी पेट के लिए वो अपनी दिनचर्या पर वापस लौट आये. अब वो वापस पहले की तरह सामान्य हो गए थे. कभी कभी उन्हें ये बात जरूर सालती थी की उनकी बेटी को किसी ने उनके सामने hi चरित्रहीन कहा था. ये याद आते hi उनकी आँखों में आँशु आ जाते थे.

सरिता खुद को अपना मम्मी पापा के सामने मज़बूत दिखती, जैसे कुछ हुवा hi नहीं है, लेकिन जेब वो अकेली होती तो इंस्पेक्टर की वाइफ और उसकी बेटी की बाटे उसके दिलो दिमाग में गूंजने लगती. अपने ऊपर लगाए गए लांछन को याद करके उसकी आँखों में आँशु आ जाते थे. ये सब दिमाग में आते hi कभी कभी तो वो इतनी हतास और परेशां हो जाती की उसके मन में गलत विचार पनपने लगते (गलत विचार से मतलब कोई गन्दा ख्याल नहीं है).

कभी सोचती की वो hi अपने पापा के दुखो का कारन है उसी के कारन उसके भैया घर छोड़कर चले गए और उसी के कारन आज उसके पापा की ये हालत हुई है. उसके कारन hi पापा की कितनी बेइज़्ज़ती हुई थी. उसे इस घर में रहने का कोई हक़ नहीं है. उसे मर जाना चाहिए. लेकिन जैसे hi ये ख्याल दिमाग में आता. तो उसकी रूह कैंप जाती,

क्योंकि उसने देखा था की अभिषेक के चले जाने के बाद आनंद जी रात रात भर अपनी गलतियों के कारन रट थे. अगर उसने ऐसा कुछ किया तो उस औरत का लगाया गया इलज़ाम सही साबित हो जायेगा. फिर तो पापा शर्मिंदगी के कारन कुछ भी उल्टा सिद्ध कर सकते हैं. नहीं नहीं मैं ऐसा नहीं होने दूँगी. मैं पापा को कुछ नहीं होने दूँगी. मैं ऐसा कुछ भी नहीं करुँगी. मैं ये सब करने के बजाय कुछ ऐसा करुँगी की पापा के सर फकर से ुचा हो जाये. लोगो के सामने पापा सीना तन कर बोल सके की मैं उनकी बेटी हूँ.

सरिता अकेले में यही सब सोचती रहती, लेकिन उसे क्या करना है ये निर्णय वो नहीं ले प् रही थी. ऐसे hi दिन गुजरने लगे. और सरिता सोचती रही की उसे क्या करना है. इस घटना को एक महीना बिट चूका था. एक दिन सरिता अपने मोबाइल में वचनस्य सर्च कर रही थी. तभी सरिता की नजर उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन के वचनस्य उत्तर प्रदेश प्रोविंशियल सिविल सर्विस (उपप्कस) पर पड़ी.

वचनस्य को देखने के बाद सरिता को अपना रास्ता मिल गया. उसने निश्चय कर लिया की वो इसी माध्यम से अपने पापा का सर ुचा करेगी और उन दोनों माँ बेटी को दिखाएगी की समाज में उनकी भी इज़्ज़त है. सरिता ने निश्चय तो कर लिए था लेकिन इसके पहले उसे अपने पापा से बात करनी थी. उनसे सहमति लेनी थी. अभी वो इसी सोच में थी की तभी मनीषा भी वह आ गयी. अपनी दिदिया को सोच में देखकर वो बोली.

मनीषा- दिदिया. ो दिदिया. क्या सोच रही हो. मुझे भी बताओ जरा.

सरिता- मुझे अपना टारगेट मिल गया है मनीषा. बस अब मुझे उस टारगेट को अचीव करना है

मनीषा- कैसा टारगेट दिदिया. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है.

सरिता- तुम्हे पता है. जिस दिन से उन दोनों माँ बेटी ने यहाँ हंगामा किया था. उस दिन से मैं यही सोचकर परेशां हूँ की मेरी वजह से पापा को इतने लोगो के सामने शर्मिंदा होना पड़ा. मेरी वजह से पापा को उन लालची लोगो के सामने मेरे लिए गिड़गिड़ाना पड़ा. तभी से मैं यही सोच रही हूँ की मुझे कुछ ऐसा करना है की पापा का सर मेरी वजह से झुके नहीं बल्कि ुचा हो जाये. और मुझे आज वो रास्ता नजर आ गया है. मुझे मेरी मंजिल नजर आ गयी है.

मनीषा- पर वो मंजिल है क्या दिदिया. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है.

सरिता- ये है मेरी मंजिल जिसे हासिल करके मैं पापा को गिफ्ट देना चाहती हूँ.

इतना कहकर सरिता ने मनीषा के सामने अपना मोबाइल रख दिया. मनीषा ने जब देखा तो उसकी आँखे बड़ी बड़ी हो गयी. वो अपनी आँखें बड़ी करके सरिता को देखते हुवे बोली.

मनीषा- उत्तर प्रदेश प्रोविंशियल सिविल सर्विस (उपप्कस) मतलब पुलिस की नौकरी करेंगी आप. पापा इसके लिए कभी तैयार नहीं होंगे. और वैसे भी ये नौकरी कोई बच्चो का खेल नहीं है. इसके लिए बहुत म्हणत करनी पड़ेगी आपको.

सरिता- मुझे पता है की इसके लिए मुझे बहुत नहीं बहुत ज्यादा म्हणत करनी पड़ेगी, लेकिन मैं करुँगी. पापा के लिए मैं दिन रात एक कर दूँगी, लेकिन ये गिफ्ट मैं पापा को जरूर दूंगी. पापा को मानना मेरा काम है. अब तुम मेरी थोड़ी हेल्प कर देना. मेरे सपोर्ट में बोल देना.

मनीषा- मैं अपनी दिदिया के लिए कुछ भी करुँगी.

इतना कहकर मनीषा सरिता के गले लग गयी. इसी तरह दिन बिट गया. शाम को जब आनंद जी ऑटो लेकर घर आये तो वो बहुत खुश थे. रानी जी ने उनकी ख़ुशी का कारन पुछा तो उन्होंने बताया

आनंद जी- आरी भाग्यवान सरिता के लिए एक ाचा रिश्ता मिल गया है. लड़का लखनऊ में सिचाई विभाग में क्लर्क है. घर परिवार भी ठीक है. अगर ये रिश्ता जैम गया तो इसी साल सरिता के हाँथ पिले कर देंगे.

रानी जी- ये तो बहुत ख़ुशी की बात है. तो आप रिश्ते की बात आगे बढ़ाइए फिर.

आनंद जी- मैंने अपने दोस्त को बोल दिया है की वो बात को आगे बढ़ाये. दो चार दिन में वो बताने के लिए बोलै है.

सरिता अपने पापा की बात सुन रही थी. उसे समझ नहीं आ रहा था की वो अपने पापा की ख़ुशी को अपनी बात कहकर गम में तो नहीं बदल देगी. फिर भी उसने हिम्मत जुताई और आनंद जी से कहा.

सरिता- पापा मुझे आपसे कुछ जरूरी बात करनी है.

आनंद जी- अरे सरिता बीटा. मुझे भी तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है.

सरिता- आप से ज्यादा जरूरी मेरी बात है पापा. एक बार मेरी बात सुन तो लीजिये.

आनंद जी- ठीक है बेटी बताओ क्या बात है.

सरिता- पहले आप वडा करिये की मेरी बात सुनकर आप गुस्सा नहीं करेंगे. मेरी बात आप ध्यान से सुनेंगे. और उसे समझने की कोशिश करेंगे. मेरी भावनाओ को समझने की कोशिश करेंगे.

आनंद जी- (परेशां होते हुवे) तू ऐसा क्यों कह रही है बेटी. क्या बात है.

सरिता- नहीं पापा पहले आप वडा करिये. की आप गुस्सा नहीं करेंगे. फिर मैं बताउंगी.

आनंद जी- ठीक है बेटी वडा करता हूँ की मैं गुस्सा नहीं करूँगा.

सरिता- पापा बात ये है की मुझे अभी शादी नहीं करनी है.

सरिता की बात सुनकर आनंद जी और रानी जी के होश hi उड़द गए. उन्हें उम्मीद नहीं थी की सरिता ऐसा कुछ बोलेगी. उसकी बात सुनकर रानी जी ने कहा.

रानी जी- क्यों. क्यों शादी नहीं करोगी तुम, शादी की उम्र हो गई है तुम्हारी. इतना अच्छा रिश्ता आया है हाथ में. तेरे पीछे पीछे तेरी बहन भी शादी की उम्र पर आ गयी है.

सरिता- माँ मैं अभी दो साल शादी नहीं करना चाहती हूँ. मुझे नौकरी करना है. कुछ बनना है. उसके बाद शादी करनी है.

आनंद जी- ये क्या धुन सवार हो गयी है तुझपर बेटी. तुझे पता है न अपनी माली हालत. तेरे साथ तेरे बहन की भी शादी की जिम्मेदारी आ जएई मुझपर इन दो शलो में. तू खुद सोच अगर तू दो साल शादी नहीं करेगी तो तेरे से पहले तो मनीषा की शादी नहीं कर सकता हूँ न. फिर तुम दोनों की शादी का बोझ एकसाथ कैसे उठा पाऊँगी मैं बेटी.

सरिता- मैंने इस बारे में बहुत सोचा है पापा, लेकिन उस (इंस्पेक्टर वाइफ) की बात मेरे दिमाग में घूमती रहती हैं. मैं भी उसको बताना चाहती हूँ की मेरे पापा की भी इज़्ज़त है. मैं उसे बताना चाहती हूँ की उसने जो इलज़ाम लगाया है हम दोनों बहनो और भाई के ऊपर वो गलत है. मुझे दो साल का समय दे दीजिये पापा. उसके बाद आप जिस लड़के से बोलेंगे मैं उससे शादी कर लुंगी. मैंने आज तक आपसे कुछ नहीं माँगा पापा. आज मांग रही हूँ. मुझे मेरी ज़िन्दगी के दो साल दे दीजिये पापा.

सरिता ये बात करते करते आनंद का हाँथ पकड़ कर रो पड़ी. उसके रोने से सभी की आँखों में आँशु आ गए. रानी जी ने सरिता से कहा.

रानी जी- हम तेरी भावनाये समझ रहे हैं बेटी, लेकिन तुम भी हमारी मजबूरी समझने की कोशिशः करो बेटी. इतना अच्छा रिश्ता बार बार नहीं मिलता.

आनंद जी- मुझे अपनी बेटी की कृषि सबसे ज्यादा प्यारी है. तुझको दो साल चाहिए न. दिया तुझको दो साल, लेकिन बेटी दो साल बाद तुम्हे मेरी बात man-ni होगी. क्योकि तुमसे कुछ छुपा हुवा नहीं है.

रानी जी - ये आप क्या कह रहे हैं. इतना अच्छा रिश्ता नौकरी वाला लड़का……….

आनंद जी- (बात को बिच में काटकर) नहीं भाग्यवान. मेरी बेटी ने पहली बार मुझे कुछ माँगा है. मैं इतना भी निर्दयी नहीं हूँ की अपनी बेटी के अरमानो का गाला घोट दूँ. मैं जनता हूँ की खुशिया इस घर से रूठी हुई हैं, लेकिन समय हमेशा एक सा नहीं रहता. हो सकता हैं ये कोई समय का चक्र हो जो सरिता के माध्यम से कुछ अच्छा करवाना चाहता हो. रिश्तों का क्या हैं अगर भगवन की मर्जी हुई तो इससे भी अचे अचे रिश्ते आएंगे हमारी सरिता के लिए.

सरिता- धन्यवाद् पापा. अपने मेरी बात मणि. मैं मन लगाकर वो कम् करुँगी जिसके लिए मैंने आपसे दो साल मांगे हैं. मैं आपकी सर गर्व से ुचा करुँगी पापा.

इतना कहकर सरिता सिसकते हुवे आनंद जी से लिपट गयी.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
🙏🙏👋👋👏👏

हर लालची इंसान यही कहता है लड़की के बाप से की उसने लूट लिया उसे। जैसे उसका बलात्कार ही कर दिया है लड़की के बाप ने।😁😁

😁😂😂🤣

अभिषेक का मामला अब बहुत पुराना हो चुका है। उसने जो किया उसका फल उसे मिला चुका है।।

😁😂🤣

अभिषेक के जाने के बाद ही इंस्पेक्टर का परिवार वहां रहने आया था। ये हो सकता है कि इंस्पेक्टर की पत्नी ने अभिषेक का फोटो देख लिया है और एओ उसपर फिदा हो गई हो।😁😂😃

जो भी हो अगर ऐसा है तो अभिषेक बहुत किस्मत वाला है जो उसे ऐसा बकबकी माल मिल रहा है।😁😁

आखिर कहानी में नायक और नायिका को मिलाने के लिए कुछ न कुछ तो तिकड़म लगानी ही पड़ेगी न।।

वो तो आने वाला समय बताएगा कि निश्चल की निश्चला कौन होगा मनीषा या सरिता।

धन्यवाद आपका बहुत बहुत इस खूबसूरत समीक्षा के लिए।

साथ बनी रहिए।।
 
अपडेट- 09

आनंद जी से परमिशन मिलने के बाद कुछ hi दिनों में सरिता ने उत्तर प्रदेश प्रोविंशियल सिविल सर्विस (उपप्कस) के लिए आवेदन कर दिया. उसके बाद सरिता पढाई में झूट गयी. अभी 4-5 महीने पहले hi उसने पोस्ट ग्रेजुएशन की पढाई ख़तम की थी तो पढाई से अभी उसका नाता टूटा नहीं था. वो पूरे मन से पढ़ाई में झूट गयी. जुट क्या गयी उसने अपने आपको कमरे में बंद कर लिया और अपने आपको किताबों को समर्पित कर दिया.

इसी बिच जब इंस्पेक्टर अपने घर वापस आया तो उसे अपनी पत्नी की करतूत पता चली तो उसे बहुत गुस्सा आया अपनी पत्नी पर. चूँकि इंस्पेक्टर भला मनुष्य था तो उसने अपनी पत्नी को आनंद की फॅमिली के साथ बुरा बर्ताव करने के कारन बहुत डांटा और आनंद जी के पास जाकर आनंद जी, रानी जी, सरिता और मनीषा से अपने पत्नी के बर्ताव के लिए मर्जी मांगी.

चूँकि आनंद जी भले और सुलझे हुवे इंसान थे, इसलिए उन्होंने इंस्पेक्टर को माफी मांगने से मना कर दिया.

इधर सरिता अपनी पढ़ाई में जुटी हुई थी. बहुत hi जरूरी काम होने पर hi वो घर से बहार जाती थी. धीरे धीरे आसपास के लोगो, जिनके साथ आनंद के अचे सम्बन्ध थे को पता चल गया की सरिता उत्तर प्रदेश प्रोविंशियल सिविल सर्विस (उपप्कस) के एग्जाम की तयारी कर रही है. ये बात उड़ाते उड़ाते इंस्पेक्टर की वाइफ को भी पता लगी. उसकी भी जिससे pat-ti थी उसने उसे बताया तो उसने कहा.

लेडी- अरे सुना है की आनंद जी की बेटी ने अभी कुछ साल शादी के लिए मन कर दिया है और उत्तर प्रदेश प्रोविंशियल सिविल सर्विस (उपप्कस) की तयारी कर रही है. बहुत अच्छा है उसकी नौकरी लग जाये. बेचारे आनंद जी का बोझ काम हो जायेगा.

आईएनएस. वाइफ- इतना आसान है क्या उत्तर प्रदेश प्रोविंशियल सिविल सर्विस (उपप्कस) की पढ़ाई करना. मेरे पति भी इसकी बहुत तयारी किये थे लेकिन हुवा नहीं. और ये कल की लौडिया चली है इसकी तयारी करने. ये सब चोंचले हैं उसके ताकि कुछ दिन और रंगरेलिया मन सके वो अपने यार के साथ.

लेडी- तुम कैसी बात करती हो. हम लोग उसे बचपन से जानते हैं. वो ऐसी बिलकुल भी नहीं है, वो बहुत संस्कारी और अच्छी लड़की है.

आईएनएस. वाइफ- मैं इंस्पेक्टर की बीवी हूँ. इतना तो किसी को भी देख कर बता सकती हूँ की कौन कैसा है. वो तुम लोगो के सामने अपने संस्कार दिखती है और बहार अपने प्रेमी के साथ गुलछर्रे उड़ाती होगी. मैं अचे से जानती हूँ इन लोअर क्लास लोगो को. फंस लिया होगा किसी अमीर जेड को.

लेडी- मैं hi बेवकूफ हूँ जो पत्थरर पैर सर पटक रही हूँ. ाचा मैं चलती हूँ मुझे बहुत काम है.

वो लेडी वह से उठकर चली गयी. इंस्पेक्टर की वाइफ भुनभुनाते हुवे अपने घर में चली गयी. सरिता तो जैसे पढाई के चक्कर में दीं दुनिया को भूल गयी थी. उसके दिमाग में बस 2 hi चीज घूम रही थी और वो था अपने पापा से किया हुवा वडा. 2 साल के समय का वडा और इंस्पेक्टर की वाइफ की खरी खोटी.

यही बात अपने दिमाग में बैठकर सरिता पढाई कर रही थी. उत्तर प्रदेश प्रोविंशियल सिविल सर्विस (उपप्कस) फॉर्म भरने के कुछ महीनो बाद hi प्रीलिम्स का पेपर की डेट आ गयी. एग्जाम के दिन सरिता रानी जी का आशीर्वाद लेकर परीक्षा देने गयी. आनंद जी खुद उसे ऑटो पर बैठकर परीक्षा केंद्र पर ले गए. ऑटो से उतरने के बाद सत्यता ने आनंद जी का पेअर चुकार आशीर्वाद लिया और अंदर चली गयी. पेपर देने के बाद सरिता को अंदाज़ा हो गया की पेपर उसकी उम्मीद के मुताबिक अच्छा गया था.

एग्जाम से वापस आने के बाद वो माईनस की पढाई में जुट गयी. कुछ दिन बाद प्रीलिम्स का रिजल्ट आया तो वो पास थी. सभी घरवाले बहुत खुश हुवे. ऐसे hi दिन गुजरते रहे ज़िन्दगी अपने हिसाब से चलती रही. देखते hi देखते माईनस की डेट भी गयी. सरिता ने पूरा मन लगाकर माईनस की भी परीक्षा दी. माईनस की परीक्षा भी अच्छी hi गई थी. सरिता को पूरा भरोषा था की वो पास हो जाएगी.

अब उसे टेंशन थी तो इंटरव्यू की. उसने यूट्यूब से इंटरव्यू के वीडियो देखे. मनीषा के सामने इंटरव्यू की ट्रेनिंग करती. जितना संभव होता वो अपनी तरफ से पूरा सीखने की कोशिश करती थी.

कुछ महीने बाद माईनस का भी रिजल्ट आ गया था और सरिता माईनस में भी अच्छे नंबर से पास हुई थी. पूरा परिवार ख़ुशी से झूम उठा. पास पदोष के लोगो को भी जब पता चला तो जो शुभचिंतक थे उनको ख़ुशी हुई और जो शुभचिंतक नहीं थे उनको कोई फर्क नहीं पड़ा.

सरिता का इंटरव्यू आज से 1 हफ्ते बाद का था. वो बहुत hi नर्वस थे. उसे समझ में नहीं आ रहा था की वो इन्तेर्विएवेर का सामना कैसे करेगी. इन्ही साडी बातो को सोचकर वो बेचैन थी. आनंद जी ने जब सरिता की ये हालत देखि तो वो सरिता के पास बैठते हुवे बोले.

आनंद जी - क्या बात है बीटा. तुम कुछ परेशां सी दिख रही हो.

सरिता- पापा मुझे इंटरव्यू को लेकर बहुत घबराहट हो रही है. मुझे बहुत दर लग रहा है पापा.

आनंद जी- इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है. और तू कब से डरने लगी. तू तो मेरी बहादुर बेटी है न. फिर क्यों दर रही है जो भी होगा सब अच्छा hi होगा.

सरिता- वो तो ठीक है पापा लेकिन मैं इन्तेर्विएवेर का सामना कैसे करुँगी. मैंने कभी इंटरव्यू फेस नहीं किया है पापा. कैसा होता है. क्या सवाल पोछोटे हैं. कुछ भी नहीं मालूम मुझे.

आनंद जी- देखो बेटी मैं ज्यादा पढ़ा लिख तो हूँ नहीं की मैं इसमें तुम्हारी कोई मदद कर पाऊं, लेकिन फिर भी ज़िन्दगी में मिलने वाली ठोकरों ने इतना ज्ञान जरूर दिया है की मैं तेरा हौसला बढ़ा सकूँ. अच्छा एक बात बताओ सरिता. क्या तुमने कभी इससे पहले उत्तर प्रदेश प्रोविंशियल सिविल सर्विस (उपप्कस) का एग्जाम दिया था क्या.

नहीं न, लेकिन तुमने थान लिया था की 2 साल का तुम्हारे पास जो समय है उसी समय में तुम्हे इसकी परीक्षा पास करनी है. इसके लिए तुमने किताबे जरूर पढ़ी लेकिन तुम्हे ये नहीं पता था की क्वेश्चन कौन से आएंगे. किश टाइप के होंगे. किताब पढ़कर बस हमको अंदाज़ा होता है की इसी तरह के क्वेश्चन एग्जाम में एते हैं, लेकिन कौन सा क्वेश्चन एग्जाम में आएगा ये पता नहीं रहता. ठीक उसी तरह तुम इंटरव्यू के लिए यूट्यूब पर जो इंटरव्यू देखती हो वो बस एक ढांचा है की इंटरव्यू ऐसे होता है, लेकिन क्वेश्चन क्या होगा ये उसी समय पता चलेगा.

तो जिस तरह तुमने प्रीलिम्स और माईनस क्लेयरे किया है उसी तरह तुम इंटरव्यू भी क्लियर करोगी. ये मुझे मालूम है बेटी. इसलिए तुम अपने मन से दर निकल दो.

सरिता- वो सब ठीक है पापा. मैं पूरी कोशिश करुँगी अपना बेस्ट से बेस्ट देने की. लेकिन इन्तेर्विएवेर कैसे होंगे. उनका स्वाभाव कैसा होगा. वो 3-4 लोग भी रहते हैं वह पर. तो मेरे आंसर से सबको सटिस्फैक्शन मिलेगा या नहीं मिलेगा.

आनंद- तुम्हे याद है बेटी की जब मैंने तुम्हारी मम्मी से तुम्हारी शादी के विषय में बात कर रहा था तब तुमने क्या कहा था. की मैं अभी शादी नहीं करुँगी. और मेरे पूछने पर तुमने बताया था की तुम्हे दो साल का समय चाहिए उसके बाद मैं तुम्हारी शादी जिससे भी करूँगा तुम मन लोगी.

उस समय तुमने बिना डरे तुमको जो सही लगा तुमने कहा. ठीक वैसे hi. इंटरव्यू के समय तुम बस ये समझ लेना की सामने तुम्हारा बाप यानि की मैं बैठा हूँ. कई रूप में. कोई हंसी वाला रूप, कोई संजीदा रूप, कोई मजाक वाला रूप. तो ये समझ लेना की सामने जो 4-5 लोग बैठे हैं वो मैं हूँ.

तो जो भी सवाल तुमसे पूछा जाये. बिना डरे और बिना हिचक के जैसे उस दिन तुमने मेरे सवाल का उत्तर दिया था. जो तुम्हे उस समय सही लगा था. ठीक उसी तरह जो भी सवाल पुछा jaye.uska जो भी उत्तर तुम्हे सही लगे. बिना डरे और बिना झिझक के अपना उत्तर देना. मुझे पूरा भरोषा है की तुम जरूर सफल होगी.

आनंद की बात सुनकर सरिता को थोड़ा बहुत हौसला मिला. अपने पापा की बात सुनकर उसके अंदर एक नै ऊर्जा का संचार हुवा और वो इंटरव्यू की तैयारी में जुट गयी. 15 दिन बाद इंटरव्यू की डेट फिक्स हो गयी. जैसे जैसे इंटरव्यू का दिन नज़दीक आता जा रहा था वैसे वैसे सरिता का कॉन्फिडेंस बढ़ता जा रहा tha.Aakhirkar वो दिन आ गया जब सरिता को इंटरव्यू के लिए जाना था.

सरिता सुबह अच्छे से तैयार होकर रानी जी का आशीर्वाद लेने गई. रानी जी ने उसे आशीर्वाद के साथ दही चीनी खिलाकर भेजा. मनीषा ने भी अपनी दिदिया की सफलता के लिए भगवन से प्रार्थना की. आनंद जी खुद सरिता को लेकर इंटरव्यू की जगह गए. अंदर जाने से पहले सरिता न आनंद का पेअर चुकार आशीर्वाद लिया तो आनंद जी बोले.

आनंद जी- बेटी एकदम बिंदास होकर, बिना किसी दर और झिझक के हर सवाल का जवाब देना. मेरा आशीर्वाद सदा तुम्हारे साथ है बेटी. तुम जरूर सफल होगी.

सरिता- जी पापा मैं पूरी कोशिश करुँगी.

इतना कहकर सरिता अंदर चली गयी. आनंद जी बहार सरिता के इंतज़ार में बैठे रहे. सरिता से उन्होंने कह तो दिया था जो उनके मन में था, लेकिन वो खुद नहीं जानते थे की इंटरव्यू होता कैसे हैं, इस लिए वो भी बहार बैठे नर्वस हो रहे थे. लगभग चार घंटा के बाद सरिता बहार आते हुवे दिखाई पड़ी.

सरिता का चेहरा कुछ उतरा हुवा दिख रहा था. उसके आने के बाद आनंद जी ने उससे पुछा.

आनंद- क्या हुवा बेटी. तुम्हारा चेहरा क्यों उतरा हुवा है.

सरिता- पापा. मैं उनके दो सवालो का ठीक से जवाब नहीं दे पाई. मुझे लगता है की मैं फ़ैल हो जाउंगी

आनंद- ऐसे निराश नहीं होते बीटा, जब तक रिजल्ट नहीं आ जाता. तब तक सफलता और असफलता का आंकलन करना गलत है. मेरा दिल कहता है की तुम जरूर पास हो जयति. चलो अब इसकी चिंता छोडो और घर चले. तुमने इस परीक्षा के कारन अपने आपको एकदम समेत कर रखा है. अब जब तक रिजल्ट नहीं आ जाता तब तक एकदम बिंदास होकर रहो.

फिर आनंद जी और सरिता वापस घर को आ गए. सरिता ने रानी जी और मनीषा को भी ये बता दिया की उसके पास होने की उम्मीद काम है.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट- 10

फिर आनंद जी और सरिता वापस घर को आ गए. सरिता ने रानी जी और मनीषा को भी ये बता दिया की उसके पास होने की उम्मीद काम है.

नियर अबाउट फोर मंथ लेटर

उत्तर प्रदेश प्रोविंशियल सिविल सर्विस (उपप्कस) का रिजल्ट आ गया था. जिससे सभी घर वालो के साथ साथ सरिता के चेहरे पर भी परेशानी साफ देखि जा सकती थी. सरिता को बहुत बेचैनी हो रही थी की उसका एग्जामिनेशन का रिजल्ट क्या होगा. उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो अपना रिजल्ट देखे.

मनीषा के बार बार कहने पर जब सरिता ने परिणाम देखने की हिम्मत नहीं दिखाई तो मनीषा ने खुद hi रिजल्ट देखने के लिए सरकारी रिजल्ट की साइट ओपन की और रिजल्ट देखने लगी. मनीषा के साथ सरिता भी बगल में बैठी थी. रानी जी और आनंद जी भी साथ में hi बैठे हुवे थे.

मनीषा ने रोल नंबर डाला और सर्च पर क्लिक कर दिया. रिजल्ट सामने था. सरिता ने जब देखा तो उसकी आँखों से आँशु बहने लगे. क्योंकि स्क्रीन पर लिखा था रिजल्ट नॉट फाउंड. सयरता रोने लगी. उसकी इतने दिन की म्हणत पर एक झटके में पानी फिर गया. वो रट हुवे आनंद जी से बोली.

सरिता- पापा मैं हार गयी. मैंने अपना सपना पूरा करने के लिए दिन रात एक कर दिया था, लेकिन इतनी म्हणत के बावजूद मेरा सपना टूट गया पापा.

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आनंद जी- कुछ नहीं हुवा बेटी. इस बार नहीं हुवा तो तुम अगली बार और कोशिश करना. मुझे तुमपर पॉर्रा भरोषा है. तुम इस बार नहीं पास हुई तो क्या हुवा अगली बार जरूर पास हो जाओगी.

आनंद जी सरिता को दिलाशा दे रहे थे. उधर मनीषा को शक हुवा की उसने शायद गलत रोल नंबर दाल दिया है तो उसने फिर से रोल नंबर चेक किया और चिल्लाते हुवे बोली.

मनीषा- अरे दिदिया रोवो मत. मैंने रोल नंबर गलत दल दिया था. मैं दोबारा देखती हूँ.

मनीषा इतना कहकर दोबारा से रोल नंबर दाल कर सर्च किया और रिजल्ट देखते hi ख़ुशी से उछाल पड़ी और सरिता से लिपट गयी और बोली.

मनीषा- हूऊऊऊरररररीीे. मेरी दिदिया पास हो गयी. दिदिया पास हो गयी.

सरिता को तो उसकी बातो पर विश्वास नहीं हुवा तो वो मोबाइल हाँथ में लेकर स्क्रीन पर देखने लगी. जिसमे रोल नंबर के सामने pass/selected लिखा हुवा था. और रैंक 123तह आयी थी. सरिता की आँखों में ख़ुशी के अंशु आ गए. वो रानी जी और आनंद जी के पेअर चुकार उनके गले लगते हुवे बोली.

सरिता- पापा. मैं पास हो गयी. मैंने अपना सपना सच कर दिखाया. मैंने अपना वडा पूरा किया पापा. मैं बहुत खुश हूँ आज. काश आज भैया यहाँ होते तो वो भी बहुत खुश होते.

सरिता को आज फिर से अभिषेक की याद आ गयी. वैसे सरिता की आदत में ये सुमार हो गया था की जब भी कोई ख़ुशी का मौका आता था तो सरिता एक बार अभिषेक को जरूर याद करती थी. आनंद जी ने सरिता के सर पर हाँथ फेरते हुवे कहा.

आनंद जी- मुझे तुमपर पूरा भरोषा था बेटी की तुम ये परीक्षा जरूर पास कर लोगी. अब अभिषेक को याद करना छोड़ दे 8 वर्ष से ज्यादा का समय हो गया है उसको घर छोड़कर गए हुए. पता नहीं किस हाल में होगा. वो क्या कर रहा होगा. वो है भी या नहीं.

आखिरी शब्द बोलते हुवे आनंद जी की आँखों में भी आँशु आ गए. आखिर अपने बेटे के जिन्दा न होने का सोच कर किस बाप की आँखों में अंशु नहीं आएंगे. उनकी बात सुनकर रानी जी ने कहा.

रानी जी- ये कैसी बात कर रहे हैं आप. इस ख़ुशी के मौके पर आप अशुभ बाटे क्यों कर रहे हैं. मेरा बीटा जहा भी होगा सही सलामत होगा. देखना एक दिन वो अपनी माँ के पास जरूर लौट कर आएगा.

सरिता- और नहीं तो क्या. भैया को कुछ नहीं होगा. मैं उन्हें खुद ढूंढ कर लाऊंगी.

मनीषा- ये हुई न बात दिदिया. मुझे तुम पर पूरा भरोषा है दिदिया. तुम भैया को जरूर ढूंढ निकलोगी.

इसी तरह ये सब बाते करते रहे. सरिता काउत्तर प्रदेश प्रोविंशियल सिविल सर्विस (उपप्कस) अच्छी रैंक से क्लियर कर लेना बहुत बड़ी बात थी. क्योंकि उस एरिया में और आस पास के कई किलोमीटर के एरिया में कोई भी इस परीक्षा को क्लियर नहीं कर पाया था और सरिता ने उत्तर प्रदेश प्रोविंशियल सिविल सर्विस (उपप्कस) की परीक्षा को पहले hi प्रयाश में क्रैक कर लिया था.

ऊपर से वो लड़की थी , इसलिए ये चर्चा का विषय ban-na hi था. दोपहर को घोषित हुवे रिजल्ट के कारन आस पास के क्षेत्रो में ये कबर की आनंद जी की बेटी सरिता ने पहले hi प्रयाश में उत्तर प्रदेश प्रोविंशियल सिविल सर्विस (उपप्कस) को क्लियर कर लिया है, जंगल में आग की तरह फ़ैल गयी.

पूरे क्षेत्रो में लोग सरिता की तारीफ करते नहीं थक रहे थे. जैसे जैसे लोगो को पता चलता गया. वैसे वैसे बधाई देने वालो का ताँता लग गया आनंद कैग हर.

जो भी बधाई देने आता आनंद जी से उनकी और सरिता की बहुत तारीफ करते. जिसे सुनकर उन्हें अपनी बेटी को बहुत गर्व हो रहा था. उनकी आँखों में ख़ुशी के आँशु आ गए थे. आज सरिता के कारन उन्हें बहुत मान सम्मान मिल रहा था.

रात भर बधाई देने वालो का टाटा लगा रहा, जो आनंद जी को पसंद नहीं करते थे वो भले hi सामने न आये हों लेकिन पीठ पीछे उनके मुंह से भी सरिता के लिए तारीफ निकली. बधाई देने वालो में वो इंस्पेक्टर भी था. जिसकी पत्नी ने सरिता के करैक्टर पर सवाल उठाये थे. इंस्पेक्टर अच्छा आदमी था.

सरिता की शादी टूटने के बाद जब वो घर वापस आया था तो उसे अपनी पत्नी के बर्ताव के बारे में पता चला था तो उसने अपनी पत्नी को बहुत डाटा था, लेकिन पत्नी आदत से मजबूर थी इसलिए उसे इंस्पेक्टर की बातो से कोई फर्क नहीं पड़ा था. सरिता के पास होने की खबर सुनकर वो जल भूनकर राख हो गयी थी. उसे एक जलन सी हो रही थी आनंद जी और उसकी फॅमिली से.

उस समय इंस्पेक्टर छूती पर घर आया हुवा था. जब उसे पता चला की सरिता ने उपप्कस का एग्जाम क्रैक कर लिया है पहले hi प्रयाश में तो वो भी सरिता को बधाई देने के लिए आया था. उसने सरिता को बधाई देते हुवे कहा.

इंस्पेक्टर- बहुत बहुत बधाई हो बेटी. मुझे बहुत ख़ुशी हुई तुम्हारे बारे में सुनकर.

सरिता- धन्यवाद चाचा जी. ये सब मेरे पापा और मम्मी के कारन hi संभव हो पाया है. क्योंकि मेरा माता पिता ने हर मुश्किल परिस्थितियों में मेरा हर कदम पर साथ दिया है.

इंस्पेक्टर- आपको भी बहुत बहुत बधाई भाई साहब और भाभी जी. आपने सच में अपनी बच्चियों को बहुत अचे संस्कार दिए हैं. मैंने आपकी बच्चियों की बहुत तारीफ सुनी है.

आनंद जी- धन्यवाद आपका साहब. ये तो आप लोगो का बड़प्पन है जो आप लोग मुझे इतना सम्मान दे रहे हैं. बाकि ये सब मेरी बेटी की म्हणत का फल है जो उसने अपने सपने पूरा करने के लिए किये थे.

इंस्पेक्टर- आपकी बेटी बहुत मेहनती हैं तभी उसने पहले hi प्रयाश में एग्जाम क्लियर कर लिया. सरिता बीटा, तुम जानती हो न की ये जॉब कैसी होती है.

सरिता- थोड़ा बहुत जानती हूँ चाचा जी. बाकि का ज्वाइन करने के बाद सिख जाउंगी.

इंस्पेक्टर- पोस्टिंग अल्लाहाबाद में तो नहीं होगी तुम्हारी, इसलिए ये सोचकर परेशां मत होना. पोस्टिंग चाहे जहा भी हो. बस तुम अपना काम पूरी म्हणत और ईमानदारी से करना. जैसे तुमने अभी तक किया है. तुम्हे और ज्यादा सफलता मिलेगी.

सरिता- जी चाचा जी. मैं अपनी जॉब के प्रति पूरी तरह से समर्पित रहूंगी.

प्रेस वाले भी आये. उन्होंने सरिता और उसके मम्मी पापा का इंटरव्यू लिया. सरिता ने अपने इंटरव्यू में अपने मम्मी पापा मनीषा के बारे में hi जीकर किया था. की उन्होंने किस तरह से हर कठिन परिस्थितियों में उसका साथ दिया था. साथ hi साथ उसने अपने भाई के बारे में भी जीकर किया.

इसी तरह पूरा तीन दिन निकल गए. रिश्तेदार भी सरिता के पास होने की खबर सुनकर घर आये थे बधाई देने. सरिता का इंटरव्यू और उसकी फोटो नेवसपपेर में भी छपी थी. धीरे धीरे समय गुजरता जा रहा था. सरिता के सिलेक्शन के बाद कुछ अचे रिश्ते भी आये थे. लेकिन आनंद जी ने सरिता के ऊपर आखिरी निर्णय छोड़ दिया था की अगर वो अभी और समय चाहे तो ले सकती है.

क्योंकि सरिता की सरकारी जॉब लग जाने के बाद आनंद जी को उसकी शादी की ज्यादा चिंता नहीं रह गयी थी. (ज्यादा चिंता से मतलब है फाइनेंसियल प्रोब्लेम्स नहीं रह गयी थी). सरिता ने अभी 2 साल के लिए शादी से मन कर दिया. तो आनंद जी ने रिश्ता भेजने वाले को बता दिया. धीरे धीरे सरिता की जोइनिंग का समय भी निर्धारित हो गया

समय को जाते देर नहीं लगती और सरिता के साथ भी ऐसा hi हुवा. उसकी ट्रेनिंग पूरी हो चुकी थी और कल उसको जोइनिंग के लिए दुसरे शहर जाना था.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
बहुत बहुत धन्यवाद आपका महोदय इस खूबसूरत समीक्षा के लिए।

आपने सही कहा कि हर बेइज्जती का बदला सामने वाले को बेइज्जत करके नहीं लिया जाना चाहिए, क्योंकि वो बदला क्षणिक होता है जिसे सामने वाला कुछ दिन में भूल जाएगा। बदला ऐसा लिया जाए कि उसमें आवाज़ न हो लेकिन उसकी गूंज सामने वाले के दिमाग मे सारी उम्र बानी रहे। सरिता ने जो किया वो सच मे सराहनीय था। पहले अपने बाप को बेइज्जत होने से बचाया लालची लोंगों से फिर उसने इंस्पेक्टर की पत्नी को उसी की भाषा मे जवाब दिया मगर थोड़ा हटके।।

साथ बने रहिए।।
 
अपडेट- 11

उत्तर प्रदेश प्रोविंशियल सिविल सर्विस (उपप्कस) में सिलेक्शन के बाद आज जोइनिंग के लिए सरिता को दूसरे शहर जाना था. जिसके लिए वो अपना सामान पैक कर रही थी. मनीषा भी सामान पैक करने में उसकी मदद कर रही थी. साथ hi साथ अपना सामान भी पैक कर रही थी. सामान पांच करते समय मनीषा की नजर सरिता के कपड़ो पर पड़ी तो मनीषा ने वह कपडा उठाकर सरिता को देते हुवे कहा.

मनीषा- दिदिया इस कपडे को भी अपने बैग में रख लो. तुम्हारे बहुत काम आएगा.

मनीषा की बात सुनकर सरिता ने कपडे की तरफ देखा तो मनीषा की हाँथ में एक पार्टी गाउन था. जिसे वह सरिता को रखने के लिए बोल रही थी. सरिता ने मनीषा से कहा.

सरिता- इसकी मुझे वह पर फ़िलहाल कोई जरूरत नहीं है. मैंने पहले hi अपना सलवार कमीज रख ली है और अब मेरा बैग भी फुल हो चूका है.

मनीषा- तुम न एकदम पागल हो दिदिया. मान लो की वह तुम्हे किसी के साथ किसी पार्टी में जाना पड़े या किसी के साथ डिनर करने के लिए जाना पड़े तो ये तुम्हारे बहुत काम आएगा.

मनीषा ने शरारत से ये बात सरिता को कही. उसकी बात का मतलब समझते हुवे सरिता ने उसके सर पर चपत लगते हुवे कहा.

सरिता- तू न अपना ये छोटा सा दिमाग ज्यादा मत चलाया कर. तू जो कहना चाहती है मैं अचे से समझ रही हूँ. लेकिन एक बात तू अचे से जान ले. मैं वहां जॉब करने जा रही हूँ पुलिस इंस्पेक्टर की. किसी के साथ डिनर करने नहीं जा रही हूँ समझी.

मनीषा- अरे दिदिया. मैं कहा कह रही हूँ की तुम अभी जा रही हो किसी के साथ डिनर पर. मान लीजिये की तुम्हारे hi ऑफीस में कोई मिल गया जो तुम्हे डिन्नर पर ले जाना चाहे तो. मैं तो बस तुम्हारे भले के लिए बोल रही थी.

मनीषा ने मस्ती करते हुवे सरिता से कहा. मनीषा की बात सुनकर सरिता ने उसका कण पकड़ कर उमेठ दिया. जिससे मनीषा को हल्का सा दर्द हुवा. मनीषा अपना कण सहलाने लगी. सरिता ने महिषा से कहा.

सरिता- तू अपना दिमाग ज्यादा मत चलाया कर समझी न. अब ज्यादा बकवास न कर और पैकिंग में मेरी मदद कर.

मनीषा- (अपना कण सहलाते हुवे). मतलब तुम्हारे भले के लिए भी नहीं सोच सकती. तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता दिदिया. तुम जैसे थी पहले वैसे अभी तक हो. अपने में रिज़र्व रहने वाली. अब तो अपने आपको बदल लो दीदी. आखिर एक पुलिस अफसर बन गयी हो तुम. तुम न एकदम आदिमानव के ज़माने में जी रही हो. दीं दुनिया से कोई मतलब hi नहीं है.

आजकल की लड़कियों को देखो. घर से सब्जी खरीदने भी निकलती हैं तो ऐसे मकूप करके जाती हैं जैसे बॉयफ्रंड से मिलने जा रही हैं. बगल से भी गुजर जाये तो वातावरण महकने लगता है. और एक तुम हो जो अगर काजल भी लगा ले तो भी 72 नुस्क निकलती हो उसमे. कब सुधरेगी तुम दिदिया.

सरिता- देख मनीषा. असली ख़ूबसूरती मेकअप और सेंत लगाकर तड़क भड़क दिखने में नहीं है. असली ख़ूबसूरती मन की होती है. मेकअप सेंत और तड़क भड़क वाली ख़ूबसूरती जितनी जल्दी दिल पर छाती है. उसनी जल्दी वो दिल से उतर भी जाती है. लेकिन मन की ख़ूबसूरती को फैलने में भले देर लगती है लेकिन एक बार ये किसी के दिल पर चा जाती है तो मरते दम तक नहीं उतरती. तो इसलिए तू अपनी बकबक बंद कर और जल्दी जल्दी हाँथ चला नहीं तो तेरे चक्कर में मेरी ट्रैन छोट जाएगी.

सरिता की बात सुनकर मनीषा ने बुरा सा मुंह बना लिया और बैग में सामान रखने लगी तभी रानी जी कुछ लेकर सरिता के पास आती है और उससे कहती हैं.

रानी जी- ये लो सरिता इसको भी अपने पास रख लो. इसमें नमकीन और मठरी है जो मैंने तेरे लिए अपने हांथो से बनाई है.

सरिता ने देखा की रानी जी के हाथ में 2-3 डिब्बे थे जिसमे नमकीन और माथै थे. सरिता ने रानी जी से कहा.

सरिता- इसकी क्या जरूरत है मम्मी. आप तो ऐसे सब कुछ मेरे बैग में भरे दे रही जैसे जहा मैं जा रही हूँ. वह कुछ मिलेगा hi नहीं खाने को. अरे मम्मी. आप क्यों परेशां हो रही हैं. मेरा जो भी खाने पिने का मन होगा मैं खरीदकर खा लुंगी वह.

रानी जी- तू नहीं समझेगी सरिता. ये एक माँ का प्यार है. जब टब hi माँ बनेगी तब तुझे भी पता चल जायेगा इसके बारे में.

मनीषा- रहने दो माँ. अगर दिदिया इतना नखरा कर रही है तो मैं खा लुंगी.

सरिता- देख मनीषा अब तू चुप हो जा. जब से आई है यहाँ बक बक किये जा रही है. अगर अब एक शब्द भी और कहा तो पीट दूंगी तुझे मैं.

रानी जी- अच्छा तुम दोनों बस करो अब. हमेशा चूहे बोली की तरह लड़ते रहते हो. मैं जानती हूँ तुम दोनों एक दुसरे के बिना नहीं रह सकते, लेकिन साथ में रहकर भी साथ नहीं रह सकते. हमेशा लड़ते झगड़ते रहते हो. कुछ दिन बाद जब तुम दोनों को एक दुसरे की याद आएगी तब पता चलेगा तुम दोनों को. और ये नमकीन और मठरी रख लो बेटी. इसमें माँ के हाथो का प्यार है.

रानी जी की बात सुनकर सरिता को अपनी गलती का एहसास हो गया की उसने अनजाने में hi अपनी माँ को दुखी कर दिया है. इसलिए सरिता ने रानी जी को गले लगा लिया और बोली.

सरिता- मुझे माफ़ करना मम्मी. मैंने ये बस ऐसे hi बोल दिया था. मुझे माफ़ कर दो मनीषा.

मनीषा- क्या दिदिया. तुम क्यों माफ़ी मांग रही हो. तुमको सताने में मुझे बड़ा मज़ा आता है.

सरिता- रुक अभी बताता हूँ तुझे. Din-ba-din शैतान होती जा रही है तू. बहुत पिटेगी मुझसे तू किसी दिन.

फिर मनीषा भी आकर सरिता के गले लग राई. ऐसे hi दोनों बहने कुछ देर गले लगी रही तभी कमरे में आनंद जी आये और दोनों बहनो को देखते हुवे बोले.

आनंद जी- लो जी कर लो बात. सारा प्यार दोनों बहाने आपस में hi कर रही हैं. अरे कोई मुझपर भी तो ध्यान दो.

आनंद जी की बात सुनकर सरिता और मनीषा दोनों जाकर आनंद जी के गले लग गयी. सरिता ने अपने पापा से कहा.

सरिता- मुझे आप की बहुत याद आएगी पापा. आप मेरे लिए सब कुछ हो. ये मैंने आज जो भी मुकाम हासिल किया है सब आपकी वजह से hi संभव हुवा है पापा. मैं कैसे रहूंगी वह अकेले.

मनीषा- इसीलिए तो मैं बोल रही हूँ की मुझे भी अपने साथ ले चलो. मैं रहूंगी आपके साथ तो आपका अकेलापन दूर हो जायेगा और आपको अपनी बहन के साथ रहने का मौका मिल जायेगा.

मनीषा की बात सुनकर सरिता ने उसके कान पकड़कर ऐंठते हुवे कहा.

सरिता- तुझे साथ ले जाने से बढ़िया है की मैं अकेले hi वह पर राहु.

मनीषा- देखो न पापा. दिदिया मेरा कान खींच रही है.

आनंद जी दोनों बहनों का प्यार देखकर बहुत खुश थे. उन्होंने दोनों के सर पर प्यार से हाँथ फेरते हुवे कहा.

आनंद जी- भगवन करे तुम दोनों का ये प्यार हमेशा बना रहे. सरिता बेटी अब तो तुम इंस्पेक्टर बिटिया हो गयी हो. मुझे तुम पर बहुत गर्व है बेटी. तुम वहां मन लगाकर काम करना. कोई शिकायत का मौका मत देना अपने सीनियर ऑफिसर्स को.

सरिता- आप बिलकुल भी बेफिक्र रहिये पापा. आपको शिकायत का कोई मौका नहीं दूँगी. मैं वो काम करुँगी की लोग बोलेंगे की बेटी हो तो आनंद जोशी की बेटी की तरह हो.

आनंद जी- भगवन करे तुझे हर जनम में मेरी बेटी hi बनाये. तुम्हारे जैसी गुनी बेटी पाकर मेरा नसीब hi खुल गया सरिता.

ये कहते हुवे आनंद जी की आँखों में पानी आ गया. जिसे सरिता ने साफ करते हुवे कहा.

सरिता- ये क्या पापा. आप अगर रोने लगेंगे तो मैं कमजोर पद जाउंगी. आप hi तो मेरा हौसला हो पापा. काम से काम मुझे जाते हुवे हंसकर विदा करिये. और वैसे भी आप रट हुवे बिलकुल भी अच्छे नहीं लगते.

आनंद- अच्छा मेरी मान. जैसा तुम कहो.

मनीषा बड़ी देर से सरिता और आनंद जी की बाटे सुन रही थी. जिसे सुनते हुवे बो आनंद जी से बोली.

मनीषा- ये क्या पापा आप सारा प्यार दिदिया को दे रहे हैं, जबकि मेरी तरफ देख भी नहीं रहे हैं.

सरिता- तो क्या हुवा. मेरे चले जाने के बाद घर में तू hi तो रहेगी. तब लेना पापा का प्यार तुम. अभी मुझे पापा का प्यार चाहिए.

मनीषा- नहीं मुझे चाहिए.

सरिता- नहीं मुझे चाहिए.

दोनों बहनो की तू तू मैं मैं फिर से शुरू हो गयी. आनंद जी और रानी जी खड़े हुवे अपनी बेटियों के इस निश्वार्थ प्रेम को देख रहे थे. थोड़ी देर देखने के बाद आनंद जी ने कहा.

आनंद जी- बस बस. शांत हो जाओ तुम दोनों. जब देखो तब कुत्ते बिल्लियों की तरह लड़ते- झगड़ते रहते हो. चलो शांत हो जाओ तुम दोनों.

मनीषा- एक बात कहनी थी आपसे पापा. मुझे भी जाना है दिदिया के साथ.

सरिता- तुम क्यों साथ चलोगी. तुम यही रहकर चुपचाप अपनी पढाई करो. कही जाने के जरूरत नहीं है.

मनीषा- नहीं मुझको जाना है तो जाना है. अगर मुझे साथ नहीं ले चलोगी तो मैं तुम्हे भी जाने नहीं दूँगी.

रानी जी- तुझे जाने की क्या जरूरत है. सरिता ठिक्क कह रही है. तू चुपचाप अपनी पढ़ाई कर.

मनीषा- मैं जाउंगी तो जाउंगी. नहीं तो मैं दिदिया को भी नहीं जाने दूँगी.

मनीषा ने अपनी जिद पकड़ ली थी. वो किसी के समझने से नहीं मान रही थी. तो आनंद जी ने कहा.

आनंद जी- जाने दो न भाग्यवान 5-6 दिन तक रहेगी फिर चली आएगी. वैसे भी सरिता को भी कुछ कंपनी मिल जाएगी.

रानी जी- ये आप दोनों की पहले से hi मिलीभगत थी या अभी ये प्लान बना है.

मनीषा- ये पहले का hi प्लान था तभी तो मैंने पहले hi अपना बैग पैक कर लिया है. ये देखो.

इतना कहकर मनीषा ने अपना बैग रानी जी और सरिता को दिखने लगी. बैग देखने के बाद सरिता न कहा.

सरिता- तू न बहुत hi शरारती हो गयी है. मुझे भी इस बात का पता नहीं चलने दिया किंतु भी साथ में चल रही है.

आनंद जी- चलो अब तुम दोनों खाना खाकर सो जाओ. कल सुबह जल्दी निकलना है. मैं तुम दोनों को खुद लेकर चलूँगा सटशन छोड़ने.

उसके बाद सभी ने खाना खाया और सोने के लिए अपने बिस्टेर पर चले गए. सुबह सब जल्दी से उठकर जाने के लिए तैयार होने लगे. कुछ hi देर में आनंद जी, रानी जी, मनीषा और सरिता ऑटो में बैठकर अल्लाहाबाद जंक्शन पहुंच जाते हैं. ट्रैन आने में अभी कुछ मिंटो का समय था तो रानी जी सरिता को समझा रही थी.

रानी जी- सरिता बीटा. वह पहुंच कर अचे से रहना. रोज मुझे फ़ोन करना. कोई भी समस्या आये तो बताने में बिलकुल भी मत हिचकिचाना. पैसे की जरूरत पड़े तो तुरंत बताना. अपना पूरा ख्याल रखना. समय पर खाना खा लिए करना. मन लगाकर अपना काम करना.

आनंद जज- अरे बस करो भाग्यवान. बेटी पुलिस इंस्पेक्टर बन गयी है. कोई भी समस्या आने पर वो खुद hi निपट सकती है. लोग उसके पास अपनी समस्याओं को लेकर आएंगे. और तुम उसे बोल रही हो की कोई समस्या हो तो वो तुम्हे बताये.

रानी जी- आप नहीं समझेंगे. मैं माँ हूँ उसकी.

मनीषा- तो किसने कहा की आप दिदिया के पापा हैं. और वैसे भी आप दिदिया की बिलकुल भी चिंता मत करे. मैं साथ में जा रही हूँ. मैं सब समझा दूँगी इनको.

रानी जी- चुप कर बेशरम लड़की. कुछ भी बोलती रहती हो. तुम्हारे जाने से hi मेरी चिंता बढ़ गयी है. तुम दोनों घर में कितना उत्पात मचती हो. वह पता नहीं कैसे रहोगी तुम दोनों.

अभी सब आपस में बात कर hi रहे थे की ट्रैन आकर प्लेटफार्म पर लग गयी. सरिता और मनीषा ने आनंद जी और रानी जी के पेअर छूकर आशीर्वाद लिया और ट्रैन में चढ़कर बैठ गए. रानी जी अभी भी ट्रैन के बहार कड़ी होकर खिड़की से सरिता को कुछ न कुछ बाटे समझाए जा रही थी.

ट्रैन ने दूसरा हॉर्न बजा दिया था और धीरे धीरे ट्रैन प्लेटफार्म से आगे की तरफ रेंगने लगी. आनंद जी, सरिता रानी जी और मनीषा की आँखों में आँशु आ गए. आज पहली बार ऐसा हो रहा था की जब सरिता अपने घर से कही दूर जा रही थी. धीरे धीरे तेन प्लेटफार्म को छोड़कर अपने गंतव्य की तरफ रावण हो गयी.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट- 12

जौनपुर एक हिस्टोरिकल सिटी है. जो अल्लाहाबाद से 90 कम. दूर और बनारस से 60 कम पहले गोमती नदी के किनारे बसा है. जिसकी नीव मोहम्मद बिन तुगलक (जूना खान) की याद में उसके चचेरे भाई फिरोज शाह तुगलक ने राखी थी. सरिता की फर्स्ट पोस्टिंग इसी शहर में हुई थी.

लगभग 2.5-3 घंटे के सफर के बाद (इस रुट पर एक्सप्रेस ट्रैन भी पैसेंजर ट्रैन की तरह चलती हैं) दोनों बहाने जौनपुर पहुंच गयी और एक होटल छुम लॉज में कर्मा ले लिया और अपना सामान रख कर फ्रेश होने के बाद आराम करने लगी. अगले दिन ऑफिस जाने के बाद hi किराये पर कमरा लेने के लिए स्टाफ के किसी मेंबर को बोल सकती थी सरिता या फिर ऑफिस की तरफ से रहने की कोई व्यवस्था हो सकती थी. थोड़ी देर आराम करने के बाद दोनों बहने उठ गयी. मनीषा ने सरिता से कहा.

मनीषा- चलो न दिदिया. कहीं बहार घूमकर आते हैं.

सरिता- बहार कहाँ जायेंगे घूमने. अभी हम इस शहर में नए हैं. कुछ जानते hi नहीं हैं इसके बारे में तो कहाँ घूमने चले.

मनीषा- अरे जब बहार निकालेंगे तो hi इस शहर के बारे में जानेंगे. और चलो इसी बहाने कुछ खरीदारी भी कर लेते हैं.

सरिता- बस पढाई लिखे में ध्यान देने के बजाय तुम इन सबपर ज्यादा ध्यान देती हो. यही करने के लिए आयी हो क्या मेरे साथ.

मनीषा- क्या दिदिया. तुम बहुत नीरस प्राणी हो. तुम्हारे अंदर कोई उत्साह hi नहीं है. मैं तो ये तुम्हारे लिए बोल रही थी. लेकिन तुम तो नाराज़ हो जाती हो.

सरिता- चल अब ज्यादा नाटक मत कर. मुझे पता है की ये सब तुम मेरे लिए नहीं अपने लिए कर रही हो. चल जल्दी से तैयार हो जा. फिर चलते हैं.

मनीषा- आप कितनी अच्छी हो दिदिया. मुझे कितनी अच्छी तरह से समझती हो.

इतना कहकर मनीषा ने सरिता को गले लगा लिया और वाशरूम में चली गयी. थोड़ी देर बाद दोनों तैयार होकर निचे आ गयी. दोनों कमरे से बहार आई और रिसेप्शन पर बैठे लड़के से पुछा.

मनीषा- यहां आस पास कोई कपडे की दुकान है क्या भैया.

इतनी सुन्दर लड़की के मुंह से भैया सुनकर लड़के को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा. उसने घूरकर मनीषा की तरफ देखा और धीरे से कहा.

लड़का- यहाँ से एक कम. आगे एक मार्किट है. जहाँ आपको कपडे मिल जाएंगे.

दोनों लॉज से बहार आई तो सरिता ने रिक्शा करना चाहा. मनीषा ने मन करते हुवे कहा.

मनीषा- क्या दिदिया. 1 कम के लिए भी रिक्शा. ऐसा रहा तो मुजरिमो को कैसे पकड़ेगी. रिक्शे से. हाहाहाहाहा..

सरिता- अब ज्यादा दन्त मत दिखा. मैं तो तेरे लिए रिक्शा कर रही थी. नहीं तो मुझे पैदल चलना अच्छा लगता है.

दोनों बहाने पैदल hi मार्किट की तरफ चली जा रही थी. हलके फ्लूक मेकअप में भी दोनों बहाने बहुत खूबसूरत लग रही थी. आसपास से गुजरने वाले उन दोनों पर एक नजर डालने पर मजबूर हो जाते थे. थोड़ी देर में दोनों मार्किट में पहुंच गई. मार्किट में बाहर भीड़ थी. रोड साइड पर कुछ दुकाने लगी थी कपडे की तो दोनों बहाने उसमे से कपडे देखने लगी. कुछ कपडे खरीदने के बाद मनीषा ने कहा.

मनीषा- दिदिया चलो न उस अंदर गारमेंट्स के दुकान में. वह से कुछ ले लेते हैं.

सरिता- तुझको लेना है तो तू जा. मैं यही बहार इंतज़ार करती हूँ.

सरिता की बात सुनकर मनीषा दुकान के अंदर चली गयी. सरिता बहार खड़े होकर वह का नजारा करने लगी. तभी उसे ऐसे लगा की उसकी कमर को किसी ने छुवा है. सरिता ने तुरंत पीछे मुड़कर देखा तो 26-27 साल का एक लम्बा चौड़ा , अच्छी पर्सनालिटी, देखने में एकदम हीरो जैसा रौबदार लड़का आँखों में बड़ा सा गॉगल्स लगाए फ़ोन पर किसी से बात कर रहा था.

सरिता ने आव देखा न तव, बिना कुछ पूछे खींचकर एक थप्पड़ उसे रसीद कर दिया. थप्पड़ इतना जोरदार था की उसका मोबाइल हाथ से छूटकर और गॉगल्स आँखों से निकलकर जमीन पर गिर पड़ा. लोगो की नजर उनकी तरफ उठ गयी. सरिता गुस्से से फुफकारते हुवे बोली.

सरिता- तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझे हाँथ लगाने की सेल. मैं तुम जैसे लड़को को अच्छी तरह से जानती हूँ, जहा कही भी कोई लड़की देखि नहीं की लार टपकना शुरू कर देते हैं. लेकिन तुमने इस बार गलत लड़की से पन्गा लिया है. तुम जैसो को सुधारना मैं अच्छी तरह से जानती हूँ.

थप्पड़ खाकर लड़के का दिमाग चक्र गया. उसने गुस्से से सरिता को देखते हुवे कहा.

लड़का- तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझपर हाँथ उठाने की. अगर तुम लड़की न होती तो मैं तेरे उस हाँथ को तोड़कर दुसरे हाँथ में दे देता.

सरिता- तूने जो हरकत की है उसके लिए तुझे थप्पड़ो से नहीं. संदल निकल कर पीटना चाहिए. ये तो शुक्र मनाओ की मैं अचे मूड में हूँ. इसलिए एक hi थप्पड़ मारा. अगर मेरा दिमाग घूम गया तो अपनी संदल उतारकर तेरी पिटाई करुँगी. देखने में तो शरीफ घर के लगते हो, लेकिन तुम्हारी हरकते छिछोरों की तरह हैं. तेरे घर में मान बहन नहीं हैं क्या.

सरिता की बात सुनकर उस लड़के को बहुत गुस्सा आ रहा था. उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया था मार्किट में लगभग अधिकतर लोग उस लड़के को जानते थे. वो सोच रहे थे की इस लड़की ने बेवजह hi उस लड़के से पन्गा ले लिया. लड़के ने अपनी मुठी भीज कर अपने गुस्से को कण्ट्रोल करते हुवे कहा.

लड़का- तू अपनी हद पार कर रही है लड़की. मैं कुछ नहीं बोल रहा हूँ. इसलिए तू कुछ भी बाके जा रही है. तुझे पता भी है मैं कौन हूँ. मैं एक पुलिस अफसर हूँ.

अभी लड़के ने इतना hi कहा था की उसके दुसरे गाल पर भी एक जोरदार तमाचा पद गया. जिसे सरिता ने hi मारा था. सरिता गुस्से से फुंफकारते हुवे बोली.

सरिता- तेरी हिम्मत कैसे हुई पुलिस को बदनाम करने की. एक तो ऐसी छिछोरी हरकत करता है और ऊपर से पुलिस का नाम लेकर उन्हें बदनाम करता है. अगर दोबारा पुलिस का नाम लिया तो मैं तेरा खून पि जाउंगी कमीने.

उन दोनों की तू तू मैं मैं इतनी बढ़ गयी थी की आस पास के लोग भी उनके पास जमा हो गए थे. बहार हो रहे शोर की आवाज़ सुनकर मनीषा भी दुकान से बहार आ गयी. और वो सरिता को खींचकर वह से ले जाने लगी, लेकिन सरिता बहुत गुस्से में थी. वो वह से जाने का नाम hi नहीं ले रही थी, बड़ी मुश्किल से मनीषा उसे वह से लेकर चली गयी. रस्ते में मनीषा ने सरिता से कहा.

मनीषा- क्या जरूरत थी उस बेचारे को थप्पड़ मरने की. तुम्हे फालतू के पंगे लेने में ज्यादा मज़ा आता है क्या. बेचारे का थोबड़ा सुजा दिया है तुमने.

सरिता मनीषा की बात सुनकर उसे गुस्से से घूरती हुई बोली.

सरिता- तू तो चुप hi कर. वो तुझे बेचारा दिख रहा था, अगर तू बिच में न आती तो मैं उसका मुंह तोड़ देती. मैं अचे से जानती हूँ इन जैसे लड़को को. वो जनता नहीं है मुझे. सरिता जोशी नाम है. उसने गलत लड़की से पन्गा लिया है.

मनीषा- मुझे क्यों बता रही हो आप ये. तुम न दिदिया. कुछ ज्यादा hi ओवर रियेक्ट कर रही हो. देखा नहीं तुमने. मार्किट में कितनी भीड़ थी. तो गलती से हाँथ लग गया होगा उसका. काम से काम एक बार पूछ तो लेना चाहिए था, लेकिन नहीं. जमा दिया उसको थप्पड़. हमेशा गुस्सा नक् पर लिए घूमती रहती हो. बेचारे का गाल लाल हो गया था. तुम्हारे हांथो के निशान चाप गए होंगे उसके गाल पर. तुमने मारा hi इतनी जोर से था उस लड़के को.

सरिता- अच्छा तू ज्यादा चमची न बन उसकी. तुझे बड़ा दुःख हो रहा है उसको लेकर. ये सब तेरी वजह से हुवा है. न मैं तेरे कहने पर मार्किट आती और न hi ये सब होता. मिल गयी संतुस्ती तुझे.

मनीषा- मैंने क्या किया दिदिया. मारा तो तुमने उसे है. अच्छा अब गुस्सा थूक दो और शांति के साथ कमरे में चलो. आज का दिन hi ख़राब गया.

दोनों बहाने बाटे करते हुवे फिर से लॉज में आ गयी और अपने कमरे में चली गयी. उधर मार्किट में वो लड़का अपनी बड़ी बहन सविता, जिसकी उम्र इस वक्त 30 वर्ष की हो गयी थी, के साथ आया था. जो दूसरी दुकान पर कुछ सामान खरीद रही थी और उसने दोनों की बहस होते देख लिया था. जब तक वो आती. मनीषा सरिता को लेकर निकल गयी थी. उसने आते hi लड़के से पुछा.

सवी- क्या हुवा. वो लड़की तुझपर इतना क्यों चिल्ला रही थी. क्या किया था तूने. जो वो तुझपर इतना क्यों भड़क रही थी. और तेरे दोनों गल्ल क्यों लाल हैं.

लड़का- कुछ नहीं दी. कोई सनकी लड़की थी. जो बिना मतलब मुझसे उलझ रही थी.

सविता- लेकिन तेरे गाल क्यों लाल हो गए हैं. आखिर हुवे क्या था यहाँ पर.

अपनी दीदी की बात सुनकर लड़का थोड़ा शर्मिंदा हो गया और अपनी गर्दन झुककर हकलाते हुवे धीरे से बोलै.

लड़का- वो क्या है न दी. वो लड़की थोड़ा पागल थी. उसने मेरे दोन्यू गल्ल लाल कर दिए. एक नंबर की सनकी थी वो लड़की.

लड़के की बात सुनकर सविता को बहुत आचार्य हुवा. आज तक किसी लड़की की हिम्मत नहीं हुई थी की वो उसके भाई से ऊँची आवाज़ में बात करे. यहाँ तो उस लड़की ने उसके भाई को थप्पड़ मर दिया. सविता ने आश्चर्य जताते हुवे कहा.

सवी- क्या. क्या कहा तुमने. उस लड़की ने तुम्हे थप्पड़ मरा. मंडल अधिकारी (सर्किल अफसर सिटी) को थप्पड़ मारा. सिटी सर्किल अफसर निस्चल सिंह राठोड के ऊपर हाथ उठाया. पूरे सिटी में किसी की हिम्मत नहीं है की तुझसे नजर मिलकर बात करे. और उस लड़की नई तुझे थप्पड़ मार दिया. ये बाटत किसी से भी भूल कर भी मत कह देना. नहीं तो तुम्हारी बड़ी फजीहत हो जनि है.

(जी हाँ ये महाशय निश्छल सिंह राठोड. राठोड खंडन के एकलौते वरिष्ठ. अरबो की मिलकियत है इसके पापा श्री महेन्दर सिंह राठोड के पास. कई कारखाने और फ़ैक्टरिया हैं महेंद्र सिंह राठोड के पास. कानपूर में इनके नाम की टूटी बोलती हैं. महेंद्र सिंह के लाख कहने के बाद भी निश्छल ने पैतृक कारोबार में कोई रूचि नहीं दिखाई. उसके सर पर बचपन से देश सेवा का धुन सवार था, क्योंकि निश्छल के दादा जी स्वतंत्रता सेनानी रह चुके थे. तो ये अपने दादा के नक्सेकदम पर चल निकले. पुलिस महकमें में इनकी ईमानदारी और बहादुरी के चर्चे थे. अपने कल्लेगे से दोस्तों जैसा व्यव्हार करते थे. इनके दो ख़ास बन्दे थे मोहित शर्मा और जावेद अख्तर. जिनके बारे में आपको आने वाले कुछ भागो में पता चलेगा. तो अब आते हैं कहानी पर)

निश्छल- क्या दी अब आप भी मेरा मजाक उदा रही हैं. जाइये मैं बात नहीं करता आपसे.

सवी- मैं मजाक नहीं सच कह रही हूँ. एक लड़की ने तुझे थप्पड़ मरा. मेरा मतलब है की मैंने पहली बात इतनी तेज़ तर्रार लड़की देखि है जिसने सर्किल अफसर को hi थप्पड़ जड़ दिया.

इतना कहकर सविता हंसने लगी. निस्चल सिंह को बड़ी शर्मिंदगी महसूस हो रही थी. वो अपनी दीदी से कहता है.

निस्चल- अब चलो भी दी. आपकी शॉपिंग तो हो hi गयी है अब. वो कोई सिरफिरी लड़की होगी दी.

सवी- (धीरे से) और तेरी पिटाई भी.

निस्चल- कुछ कहा आपने दी.

सवी- नहीं निशु मैंने तो कुछ नहीं कहा.

इतना कहकर सविता मुस्कुराते हुवे आगे बढ़ गयी. निश्छल को ये देखकर बहुत गुस्सा आ रहा था. वो मन hi मन सोच रहा था की अगर कभी मौका मिला तो वो इसका बदला जरूर लेगा. वो उस लड़की को सबक जरूर सिखाएगा



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
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