Tumhaare Liye- Ek Prem Kahaani - Page 3 - SexBaba
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Tumhaare Liye- Ek Prem Kahaani

अपडेट- 05

सभी खाना खाने के बाद अपने अपने बिस्टेर पर सोने चले गए. इसी तरह दिन गुजरते रहे. पर अभिषेक के रवैये में ज्यादा बदलाव नहीं आया. हाँ इतना जरूर हुवा था की अब वो पलट कर जवाब नहीं देता था. जब उसके पापा उसे dant-te थे या समझते थे, या माँ समझती थी, या सरिता समझती थी.

समझने के कुछ दिन बाद तक तो अभिषेक ठीक रहता था, लेकिन उसके बाद उसकी हरकते फिर से शुरू हो जाती थी. वो बात बात पर मारपीट शुरू कर देता था. जिससे उसकी शिकायते घर पर आती रहती थी. आनंद जी और रानी जी ने इसे अपनी बुरी किस्मत मानकर स्वीकार कर लिया था और अपने कान में रुई दाल लिया था.

जब भी कोई अभिषेक की शिकायत करता तो वो दोनों बोल देते थे की आप खुद hi अपने तरीके से उसे देख लीजिये. इसी चक्कर में अभिषेक कभी कभी पिट कर भी घर आता था. कुल मिलकर ये कहा जाये तो गलत न होगा की अभिषेक के कारन hi आनंद जी को हमेशा शर्मिंदगी झेलनी पड़ती थी, लेकिन सरिता के कुछ अच्छे काम, बात व्यवहार और बड़ों के प्रति सम्मान के कारन लोग उनकी तारीफ भी कर देते थे.

सरिता भी अपने माँ बाप की तकलीफ समझती थी इसीलिए उसने अभिषेक को समझने का हर संभव प्रयाश किया. लेकिन कहते हैं न की गलत रस्ते पर जाने के लिए बहुत सी दिशाए होती हैं, लेकिन वापस आने के लिए वो सभी दिशाए बंद हो जाती हैं बस एक संकरा रास्ता नज़र आता है जो हर कोई पार नहीं कर सकता, यही हाल अभिषेक का भी था.

वो कोशिश तो करता था बुरी सांगत छोड़ने की लेकिन छोड़ नहीं पता था. ऐसे hi समय गुजरता गया और सरिता की बोर्ड परीक्षा भी हो गयी. कुछ दिन बाद उसकी बोर्ड परीक्षा का परिणाम आ गया. सरिता 1सत डिवीज़न में पास हुई थी वो भी 95 % नंबर के साथ. पूरे डिस्ट्रिक्ट में 6वे नंबर पर आयी थी.

सभी घर वाले और आस पास के लोग जिन्होंने भी इस बारे में सुना सभी ने सरिता की तारीफ की. सभी घर वाले बहुत खुश थे. और सबसे ज्यादा खुश था अभिषेक. वो भले hi कितना hi बिगड़ा हुवा था. लेकिन अपनी बहनों से बहुत प्यार करता था.

इसी ख़ुशी में अभिषेक ने सरिता और मनीषा को अपने पास बिठा लिया और उनसे कहा.

अभिषेक- मैं बहुत खुश हूँ सरिता. बहुत ज्यादा खुश हूँ. जो मैं कभी नहीं कर पाया वो तुमने कर दिखाया. मैंने तो हमेशा hi मम्मी पापा का नाम डुबाया है, लेकिन एक तुम hi हो जो उनका सर ुचा कर देती हो. मैं बहुत खुश हूँ और इसी ख़ुशी के मौके पर मैं तुम दोनों की ड्राइंग बनाऊंगा. बस तुम दोनों कुछ समय तक ऐसे hi बैठे रहना. उठाना नहीं.

मनीषा- लेकिन भैया. दिदिया पास हुई है तो मिठाई खिलाओ पहले.

अभिषेक- नहीं पहले तुम दोनों की तस्वीर बनाऊंगा. उसके बाद hi मिठाई लेने जाऊंगा.

आनंद जी और रानी जी ये देखकर बहुत खुश थे की अभिषेक बिगड़ा हुवा होने के बाद भी अपनी दोनों बहनो से बहुत प्यार करता है. उनके बच्चो में प्यार बहुत है. फिर अभिषेक ने अपनी ड्राइंग का कमल दिखाया और 1/2 हॉर्स से भी काम समय में hi बहुत hi अच्छी hu-ba-hu तस्वीर अपनी दोनों बहनों की बना दी.

फिर कुछ कलर और पेंसिल की कारीगरी ने तस्वीर में चार चाँद लगा दिए. बहुत hi खूबसूरत तस्वीर बानी थी. ऐसा लगता था जैसे सरिता और मनीषा साक्षात तस्वीर में उतर गयी हो. अभिषेक ने तस्वीर बनाने के बाद सरिता को दिखते हुवे कहा.

अभिषेक- देख सरिता कैसी बानी है तस्वीर तुम दोनों की.

सरिता और मनीषा ने तस्वीर देखि तो वो भी खुश हो गयी. बहुत खूबसूरत बानी थी उन दोनों की तस्वीर. थोड़ी देर सरिता ने तस्वीर देखने के बाद कहा.

सरिता- इसमें कुछ कमी है भैया. आप यहाँ बैठिये मैं उस कमी को सुधर देती हूँ.

अभिषे- लेकिन कमी क्या है ये तो तुमने बताया hi नहीं.

सरिता- कमी ये है की इस तस्वीर में मेरे प्यारे भैया हम दोनों के साथ नहीं हैं.

उसके बाद सरिता ने अभिषेक को बैठाया और अपनी कारीगरी का ऐसा नमूना पेश किया की अभिषेक को नमूना बनाकर तस्वीर में उतर दिया. जब सरिता ने अभिषेक को तस्वीर दिखाई तो अभिषेक हँसते हुवे बोलै.

अभिषेक- हाहाहाहा. ये मैं हूँ. तुमने तो मुझे नमूना बना दिया सयरता. तुम भी ना. हाहाहाहा.

सरिता- (नाराजगी के साथ) क्या भैया मैंने आपकी इतनी अच्छी तस्वीर बनायीं है और आप हैं की हसना रहे हैं. जाइये मैं आपसे बात नहीं करती.

अभिषेक- (अपने कान पकड़कर) अरे तुम तो नाराज़ हो गयी. मैं तो मज़ाक कर रहा था. तुमने बहुत अच्छी कोशिश की मेरी बहना. खैर जैसी भी है अब तुमने बनायीं है तो अच्छी है. मैं इसे हमेशा अपने पास hi रखूँगा.

फिर अभिषेक घर के अंदर गया और एक चिकनी .05 मम की पॉलीथिन ले आया. और उस तस्वीर वाले कागज को उस पॉलीथिन में डालकर स्टेपलर करते हुवे अपनी पुरष में रख लिया और बोलै.

अभिषेक- अब मैं जा रहा हूँ अपनी बहन के लिए मिठाई लेन.

आनंद जी- मिठाई तो मैंने सुबह hi ला ली थी. फिर क्यों जा रहे हो.

अभिषेक- नहीं पापा. मेरी बहन इतने अच्छे नंबर से पास हुई है. मैं अपने पैसे से अपनी बहन के लिए मिठाई लेकर आऊंगा.

इतना कहकर अभिषेक मिठाई लेन दुकान पर चला गया. अभिषेक दुकान से मिठाई ले रहा था. उसकी पीठ रोड की तरफ थी. तभी उसने दो लड़को को कुछ बात करते सुना. वो दोनों लड़के उसके घर से थोड़ी दूर hi रहते थे अपने परिवार के साथ. उनकी बात सुनकर अभिषेक का दिमाग सटक गया और फिर वो हुवा जो जोशी परिवार ने सपने में भी नहीं सोचा था.

P.ladka- यार सुना है अपनी आइटम बहुत अच्छे नंबर से पास हुई है.

D.ladka- अबे तू किसकी बात कर रहा है. कही वो सरिता की बात तो नहीं कर रहा है.

प. लड़का- हाँ बे. आनंद जोशी के बेटी सरिता. सुना है 95% नंबर लाया है उसने.

D.ladka- हां बे. पढाई में वो जितनी होशियार है. उतनी मस्त दिखती भी है साली. उसकी जवानी बहुत हिलोरे मार रही है. देखा नहीं कितनी मस्त माल बनती जा रही है din-ba-din. उसे देखकर तो मन में हलचल होने लगती है यार. कण्ट्रोल hi नहीं होता है अब. काश उसे चखने का एक मौका मिल जाये तो ज़िंदगी गैन जाये.

P.ladka- तू सही कह रहा है बे. अरे सरिता तो जो है सो है hi. तूने कभी छोटी वाली को देखा है. मनीषा को. वो भी साली अभी छोटी hi है, लेकिन इस उम्र में भी बहुत कटीली हो गयी है. उसे देखकर भी मेरे मुंह में पानी आ जाता है. दोनों बहाने एकदम पटाखा बन चुकी हैं. मन तो करता है की दोनों को उठा कर कहीं ले जॉन और उनके साथ……………………………….

लड़के के और शब्द उसके मुंह में hi रह गए, क्योंकि अभिषेक न उसकी पीठ पर अपनी कोहनी का भरपूर वार किया था. वो लड़का दर्द से बिलबिलाने लगा.

(दरअसल अभिषेक ने शुरू में उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब उनके मुंह से सरिता का नाम सुना तो उसके कान खड़े हो गए).

अपना दोस्त का हल देखकर दूसरा लड़का अभिषेक को मरने आया. लेकिन अभिषेक ने एक जोरदार लात उसके पेट पर मारी. उसके बाद अभिषेक ने आस पास देखा तो उसे दुकान के बहार एक बांस का डंडा दिखाई दिया जो हलवाई ने कुत्तो को डरने के लिए रखा था. अभिषेक ने वो डंडा उठा लिया और दोनों लड़को को बुरी तरह मरने लगा और बोलने लगा.

अभिषेक- सेल Madar……d, Bhos……..le, मेरी बहनो पर बुरी नजर रखता है, उनके बारे में गन्दी बात बोलता है. आज तुम दोनों को जिन्दा नहीं छोडूंगा. मेरी बहाने मेरी जान हैं और तुम दोनों ने मेरी जान पर बुरी नज़र डाली. मैं तुम दोनों की आँखे फोड़ दूंगा.

अभिषेक बहुत बुरी तरह से उन दोनों लड़को को मार रहा था. आस पास के कुछ लोग अभिषेक को पकड़ने के लिए आये. लेकिन अभिषेक किसी के काबू में नहीं आ रहा था, वो बस लगातार उन लड़कों को मरे जा रहा था. और बाद बड़बड़ाये जा रहा था. थोड़ी hi देर में वो लड़के अधमरी हालत में हो गए. अगर अभिषेक उन्हें थोड़ी देर और मरता तो दोनों लड़के मर hi जाते,

3-4 लोगो ने किसी तरह अभिषेक को उन लगको से खींचकर अलग किया और उसे खींचते हुवे उसके घर की तरफ ले जाने लगे. लेकिन अभिषेक बार बार उनसे अपने आपको छुड़ाने की कोशिश करता और बोलता.

अभिषेक- छोड़ दो मुझे. मर डालूंगा सालो को. मेरी बहनो पर गन्दी नजर रखते हैं सेल. छोडो मुझे. एक को भी नहीं छोडूंगा मैं.

वो तीनो आदमी किसी तरह अभिषेक को उसके घर तक ले जाते हैं. शोर शराबा सुनकर जब आनंद जी बहार आते हैं तो उन्हें समझते देर नहीं लगती की अभिषेक न फिर से झगड़ा किया है, लेकिन उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता था की झगड़ा करने की मैं वजह क्या थी, इसलिए उन्होंने उन आदमियों से पुछा.

आनंद- क्या हुवा भाई. फिर से इसने झगड़ा किया क्या कही.

आदमी- झगड़ा नहीं किया आनंद जी. जान से मरने की कोशिश की इसने …………… और ………… लड़को को, वो तो सही समय पर हम लोगो ने इसे पकड़ लिया, नहीं तो आज वो दोनों लड़के तो गए hi समझ लीजिए. लेकिन इसने उन्हें इतना ज्यादा मार दिया है की कही कोई मर मुरा न जाये. शायद उन्होंने कुछ कहा था अभिषेक से जिसके कारन अभिषेक ने उनको मारा.

आदमी की बात सुनकर अभिषेक के पापा ने अभिषेक का गिरेबान पकड़ कर उसे झिंझोड़ते हुवे पुछा.

आनंद जी- अब क्या यही करने को बाकि रह गया था क्या. सब कुछ तो तू कर चूका है, किसी की जान लेना बाकि रह गया था, आज तूने वो भी करने में कोई कसार नहीं छोड़ी.

अभिषेक- इसमें मेरी कोई गलती नहीं है, वो दोनों सरिता और मनीषा के बारे में गन्दी गन्दी बाटे कर रहे थे इसलिए मुझसे बर्दास्त नहीं हुवा और मैंने उन्हें मारा.

अभिषेक की बात सुनकर आनंद जी को बहुत गुस्सा आ गया, सच्चाई पता न होने के कारन उन्हें ये लगा की अभिषेक अपने आपको बचने के लिए बहाने बना रहा है. उन्होंने गुस्से से गरजते हुवे अभिषेक से कहा.

आनंद जी- एक तो इतना बड़ा कांड करके आया है और ऊपर से झूठ भी बोल रहा है. तुझे शर्म नहीं आती. अपनी करनी का ठीकरा अपनी बहनो पर फोड़ रहा है. किस जनम का बदला ले रहा है मुझसे तू. तुझे पैदा करके हमने ऐसा कौन सा पाप कर दिया जो तू हमें ये दिन दिखा रहा है. आज तक मैं तेरी हर गलतियों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेता था, लेकिन तू सुधरने वाला नहीं है. आज मैं तुझे ऐसा सबक सिखाऊंगा की तू हमेशा याद रखेगा.

इतना कहकर आनंद जी ने अभिषेक के ऊपर अपने थप्पड़ो की बरसात कर दी. उसे तब तक मरते रहे जब तक वो थक नहीं गए. जब थक गए तो वो वही जमीन पर बैठकर रोने लगे. अभिषेक ने अपने पापा को देखते हुवे कहा.

अभिषेक- मैंने कुछ नहीं किया पापा. वो दोनों सरिता और मनीषा के बारे में गन्दी गन्दी बाटे कर रहे थे. इसलिए मैंने उन्हें मारा. क्या मैंने गलत किया.

आनंद जी- हां तुमने गलत किया. अगर वो कुछ बोल रहे थे तो मार पिट करने की क्या जरूरत थी. उन्हें समझा भी तो सकते थे. तुमने हमें कही मुंह दिखने लायक नहीं छोड़ा. हर जगह से तुम्हारी शिकायते मिलती रही हैं. कभी भी तुमने हमारे बारे में सोचा है. तुम्हारे जैसा बीटा होने से अच्छा है की मेरा कोई बीटा hi नहीं होता.

कब तक अपने बाप की छाती पर बैठा उसे तकलीफ देता रहेगा. अगर तुझमे जरा भी शर्म और हम लोगो के लिए इज्जत बाकि है तेरे दिल में तो चला जा यहाँ से और फिर कभी अपनी शकल भी मत दिखाना. मैं भी समझ लूँगा की मेरा कोई बीटा था hi नहीं.

आनंद जी की बात सुनकर रानी और सरिता ने उन्हें समझते हुवे कहा.

सरिता- ये क्या कह रहे हैं आप पापा. मन की भैया ने गलत किया है, लेकिन इसके लिए आप उन्हें इतनी बड़ी सजा मत दीजिये. हमारे एकलौते भाई हैं ये.

रानी जी- हाँ जी. अपने इकलौते बेटे को ऐसे कोई घर से निकल जाने के लिए कहता है क्या.

अभिषेक न जब सरिता के मुंह से ये सुना की वो भी उसे गलत समझ रही है तो उसे बहुत तकलीफ हुई की उसकी बहन भी उसको गलत समझ रही है. उसने सरिता से कहा.

अभिषेक- तुमने मुझको गलत कहा सरिता. मैंने क्या गलत किया. वो तुम्हारे और मनीषा के बार में गन्दी गन्दी बाटे कर रहा था. इसलिए मैंने मारा. तो क्या मैंने गलत हो गया.

सरिता- हाँ भैया. अपने गलत किया है. मन की वो हमारे बारे में गलत बोल रहे थे, लेकिन मार पिट इसका हल नहीं है. हम उनके घर उनके मां पापा से शिकायत करते. वो उन्हें मरते. आप कौन होते हैं उन्हें मरने वाले. वो भी इतनी बुरी तरह से मारा आपने उन्हें. अगर उन दोनों को कुछ हो गया तो आपको पता है की कितनी बड़ी मुसीबत आ सकती है हम सब पर. हर समस्या का समाधान लड़ाई झगड़ा hi नहीं होता. कुछ बाटे प्यार से भी समझे जाती हैं. कितनो को मरेंगे आप भैया. आज उन दोनों ने कहा. आप ने उन्हें मारा. कल कोई और कहेगा. तो आप उन्हें मरोगे. परसो सारा मोहल्ला कहेगा तो किस किस से लड़ेंगे आप.

अभिषेक- मैं सब को मार डालूंगा जो तुम दोनों के बारे में बुरा बोलेगा. किसी को नहीं छोडूंगा.

आनंद- अरे नालायक अभी भी तू यही खड़ा है. क्या मुझे मार कर hi तुझे चैन मिलेगा. मैंने कितने अरमान सजाये थे की मेरा बीटा बड़ा होकर मेरा नाम रोशन करेगा. मेरे बुढ़ापे के सहारा बनेगा, लेकिन तुमने अच्छा नाम रोशन किया है मेरा. अरे बेगैरत. अगर तुझमे जरा भी शर्म बची है तो निकल जा मेरे घर से. और दोबारा कभी अपनी शकल मत दिखाना.

ये बात लगभग हर बाप अपने बच्चो से बोल देता है जब वो बहुत गुस्से में होता है. एक नजरिये से देखा जाये तो अभिषेक ने यहाँ पर कुछ गलत नहीं किया था, क्योंकि इस बात बात उसकी बहनों की थी, लेकिन वो इसके पहले इतनी बार लड़ाई झगड़ा कर चूका था की उसका ये झगड़ा जो उसने अपनी बहनो के लिए किया था वो भी गलत hi नजर आने लगा था उसके पापा को जो अभी बहुत गुस्से में थे. रही सही कसार सरिता ने ये बोलकर पूरी कर दी की अभिषेक ने गलत किया है. बचपन से hi छोटी- छोटी बातों को दिल से लगाने वाले अभिषेक ने सरिता की इस बात को बहुत ज्यादा दिल पे ले लिया. अभिषेक ने सरिता को देखते हुवे कहा.

अभिषेक- सरिता मुझे पापा की बात सुनकर इतना बुरा नहीं लगा जितना तुम्हारी बातो का.

इतना कहकर अभिषेक घर के अंदर चला गया और अपना सामान एक बैग में रखने लगा. रानी जी सरिता और मनीषा सभी उसके पीछे गए और उसे रोकते रहे. लेकिन वो नहीं मन. बस यही कहता रहा की उसे सरिता की बातों ने दुखी किया. उसे सरिता से ऐसी उम्मीद नहीं थी. वो अपना बैग लेकर कमरे से बहार आया और जाने लगा तो रानी, सरिता और मनीषा उसे रोकने की कोशिश करने लगे तो आनंद जी ने कहा.

आनंद जी- जाने दो इसको. बड़ी गर्मी चढ़ी हैं इसके खून में न. जब दुनिया की ठोकरे खायेगा तब अकाल आएगी. जब जिंदगी की हकीकत का सामना होगा तब आते दाल का भाव पता चलेगा. चार दिन बाद जब खून का उबाल काम होगा तो अपनी गलतियां नजर आएगी इसे. तब पता चलेगा की दुनिया अपने हिसाब से नहीं चलती. हमें दुनिया के हिसाब से चलना पड़ता है.

आनंद जी की बात सुनकर अभिषेक सभी से अपने को छुड़ाकर घर से बहार निकल गया.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
ये केवल रानी और आनंद की ही सोच नहीं है ये लगभग हर उस मा बाप की सोच है जिनके घर का बेटा वयस्क हो रहा होता है। लेकिन हर मां बाप की इच्छा पूरी नहीं होती। कुछ अभिषेक जैसे बेटे भी होते हैं जिन्हें अपनों का दुःख दर्द नहीं दिखाई देता है।। पढ़ाई में पहले से ही कमजोर है। लड़ाई झगड़े अलग से करता है।।

वो तो है। समय के साथ उसमें सुधार होने चाहिए था लेकिन हुआ इसके बिल्कुल विपरीत। इसी कारण पूरा परिवार परेशान रहा है और आगे चलकर उनके जीवन मे और भी ज्यादा परेशानी आने वाली है।

साथ बने रहिए।।
 
बहुत बहुत धन्यवाद आपका महोदया,

मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि जैसे इंसान किसी बात से गुस्सा हो तो अपने हर शब्द चबा चबा कर कहता है उसी तरह आपके भी हर शब्द ऐसा लग रहा है जैसे चबा चबा कर कहा गया है।😁🤣😂

मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि आप सरिता के साथ अपनी पुरानी खुन्नस निकाल रही हैं।😃😁🤣😂

खैर जाने दीजिए।।

जो परिस्थितियां बनी थी उस परिस्थिति को देखते हुए किसी को भी गलत नहीं ठहराया जा सकता। कितना भी बिगड़ा हुआ भाई क्यों न हो अपनी बहन के बारे में किसी लड़के के मुंह से गंदी बातें कभी भी बर्दाश्त नहीं कर सकता है।।

आनंद जी भी अपनी जगह गलत नहीं हैं। अगर अभिषेक कोई अच्छा बेटा होता उनका तो आनद जी उसे मारने के बजाय समझाते ,लेकिन अभिषेक की पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें भी गलतफहमी हो गई इसके बारे में।

सरिता ने भी कुछ गलत नही कहा अभिषेक से। लड़की जब जवान होती है तो उसके जिस्म पर गिद्ध रूपी पुरुषों की नजर हमेशा से रही है। लेकिन लड़की को ये सब नजरअंदाज करना पड़ता है। अपने भाई के प्यार के कारण वो उसे गलत कह रही है कि कहीं अभिषेक किसी मुसीबत में न पड़ जाए।।

इतनी खूबसूरत समीक्षा के लिए बहुत बहुत शुक्रिया।

आगे भी आपको ऐसे मौके मिलते रहेंगे।।

साथ बनी रहिए।।
 
हो सकता है आपकी बात सही हो, लेकिन अगर कहानी की शुरुआत अस्पताल वाले दृश्य से न करते तो पाठकों को पता कैसे चलता कि सरिता ने अपने भाई को गोली मारी है। ये तो एक राज बनकर रह जाता।

अभी सबको पता है कि सरिता ने अभिषेक को गोली मारी, लेकिन किसलिए मारी ये किसी को पता नहीं है। लोग अपनी अपनी तरफ से अनुमान लगा रहे हैं, लेकिन जरूरी नहीं है कि उनका अनुमान सही हो। अस्पताल वाले दृश्य में एक अनुच्छेद नहीं लिखा है मैंने, जो मेरे लिए प्लस पॉइंट है।।😁🤣

लोगों को अनुमान लगाने दीजिए।। लेकिन गोली मारने का कारण क्या है उसका अनुमान नहीं लगा पाएंगे। क्योंकि वो सिर्फ हम जानते हैं।😃😁
 
ये उम्र ही ऐसी है कि अच्छा बुरा सही गलत कुछ नजर ही नहीं आता। बस वो नजर आता है जो हम करते हैं और करना चाहते हैं। हम सही लगते हैं कर हमें समझाने वाले गलत लगने लगते हैं। यही अभिषेक के साथ भी हो रहा है।।

हाहाहाहा।

मतलब सबको खराब करने पर तुले हैं आप।

इसके लिए आप बाप का माल पढ़िए। बहुत लुत्फ उठाएंगे आप उसने।

आपकी जब से वापसी हुई है तब से आप कुछ ज्यादा ही संजीदा हो गए है।🤣😁

अभिषेक बिगड़ा हुआ जरूर है लेकिन वो गलत नहीं है। जवानी के जिस दौर से वो गुजर रहा है वो दौर बहुत ही कठिन दौर है जिसमें उसका कोई बस नहीं है।

साथ बने रहिए।।
 
धन्यवाद आपका महोदय।

अभिषेक अपनी बहनों से बहुत प्यार करता है लेकिन वो उस प्यार को समझ नहीं पा रहा है। उसे ये नहीं समझ आ रहा है कि उसके गलत कृत्यों से उसके घर वालों, उसकी बहनों को कितनी तकलीफ होती है। अगर वो ये समझ जाता तो कहानी यहीं पर खत्म हो जाती।😃😂

उसकी हरकतें बिल्कुल बच्चों जैसी है जब मार पड़ती है तो कुछ दिन सही से रहते हैं लेकिन कुछ दिन बाद फिर से अपने पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं। अगर वो ये बात समझ जाता तो आज वो एक खुशहाल परिवार में रह रहा होता और ये जो समस्याएं खड़ी होने वाली हैं ये सब नहीं होता।

इसमें उनकी गलती नहीं है। ऐसे नमूने जो सामने आते हैं वो समझते हैं कि वो जो कर रहे है वो सही कर रहे हैं। किसी भी भाई के सामने उसकी बहन के बारे में अश्लील बातें होगीं यो उनका खून जरूर खुलेगा, लेकिन वो उस बात पर कैसा प्रतिक्रिया देता है इस पर निर्भर करता जी। मेरी नजर में अभिषेक ने कुछ गलत नहीं किया उस समय एक भाई को जो करना चाहिए था उसने वही किया। लेकिन बात तब बिगड़ गई जब उसने जान से मारने की कोशिश की उन्हें।।

साथ बने रहिए।।
 
अपडेट 12 में उसकी कहानी में इंट्री होगी वो भी धमाकेदार। यहां पर वो सुपर हीरो तो नहीं है लेकिन उसका किरदार बहुत ही दमदार है। कहानी भले ही सरिता के इर्द गिर्द घूमती है लेकिन इसके बावजूद कहानी में निश्चल ने सरिता के लिए ऐसे ऐसे काम किये हैं जो उसको किसी सुपर हीरो की तरह प्रदर्शित करता है।।

उसकी भूमिका भी दमदार है, बस उसके आने की देर है। उसके आने के बाद ही कहानी अपने रंग में आएगी।। हाँ ये अलग बात है कि निश्चल उस तरह का नही है इस कहानी में जिस तरह नैन महोदय की कहानी में था।।
 
कोई बात नहीं महोदय,

देर आये दुरुस्त आये।।

इतनी बड़ी टिप्पणी दी है अपने की एक अपडेट के बराबर है ये।। अब हम इसका काउंटर रिप्लाई कैसे दे समझ मे नहीं आ रहा है।।

😁😃🤣

जोड़ी तो इन तीनों की ही बनेगी, अभिषेक का रोल कहानी में ज्यादा नही है इसलिए उसके लिए लड़की नहीं है कोई। हाँ भविष्य में कोई लड़की आ भी सकती है।।

नहीं महोदय ऐसा कुछ भी नहीं है। घर में सबसे ज्यादा राघव को लोग चाहते हैं तो इसका मतलब ये नहीं है कि निश्चल को किसी का प्यार नहीं मिलता। निश्चल भी सबका चहेता है, लेकिन राघव को घरवाले ज्यादा स्नेह किसलिए देते हैं ये आपको कहानी में पता चल जाएगा।।

स्वभाव और हस्ताक्षर कभी नहीं बदलते इस बात से हम इत्तेफाक नहीं रखते। दोनों समय के साथ परिस्थितियों के हिसाब से बदल जाते हैं। अभिषेक को मार्गदर्शन तो पूरा मिला, लेकिन वो उसे समझ नहीं पाया। उसकी किस्मत में बिगड़ना लिखा था इसलिए वो बिगड़ गया।।

सुधारने वाला अगर चाहे तो किसी को भी सुधार सकता है ये बात आपकी सही है, लेकिन एक बात और है और वो ये है कि अगर सुधरने वाला चाहे तभी वो सुधर सकता है नहीं तो कोई सिर पटक कर रह जाए लेकिन अगर किसी ने ठान लिया है कि उसे सुधरना ही नहीं है तो इसमें कोई कुछ नहीं कर सकता।। अभिषेक के पापा ने भी उसकी रुचि को देखते हुए उसको जॉब पर लगाया, लेकिन वो सुधरने के बजाय और भी बिगड़ गया।।

ये बात सही है कि अभिषेक ने जो किया वो त्वरित क्रिया थी और मेरी नजर में भी उसने कुछ गलत नहीं किया, लेकिन एक बहन होने के नाते सरिता कभी नहीं चाहती थी कि उसका भाई मारपीट कर और उसे कहीं कोई चोट वोट लगे। इसलिए सरिता ने अभिषेक से वो बात कही, लेकिन शायद अभिषेक ने उसकी बात का मतलब नहीं समझ पाया और घर छोड़कर चला गया।।

आंनद जी भी क्या करते। उसकी हरकतों से वो तंग आ चुके थे और इस बात ने उनके गुस्से को चरम पर पहुचा दिया जिसके कारण वो ऐसा कुछ बोल गए जो उन्हें नहीं बोलना चाहिए था और इस बात का पछतावा उन्हें सारी उम्र रहेगा जब तक अभिषेक मिल नही जाता।

सरिता ने अभिषेक को गोली किसलिए मारी ये भी अभी समय के गर्भ में है।

बहुत बहुत धन्यवाद आपका इतनी खूबसूरत समीक्षा के लिए।

साथ बने रहिए।।
 
धन्यवाद आपका महोदय।

सब समय और परिस्थिति का दोष है। कोई भी बुरा या बिगड़ा हुआ नहीं बनना चाहता है लेकिन समय और परिस्थितियां उसे बुरा बना देती हैं। अभिषेक की रुचि चित्रकारी में है लेकिन उसके साथ उसे पढ़ाई पर भी ध्यान देना चाहिए था, लेकिन वो पढ़ाई से कोसो दूर होता चला गया और अंत मे वो हो गया जो नहीं होना चाहिए था।

साथ बने रहिए।।
 
👋👏🙏

अभिषेक को यही बात समझ नहीं आयी कि जो कुछ भी उसके घरवाले उसे समझा रहे हैं वो उसकी भलाई के लिए ही है लेकिन उसे ये सब समझ नहीं आ रहा है।।

इस बात पर तो मैं भी अभिषेक के साथ ही हूँ। उसने कुछ गलत नहीं किया, लेकिन पहले से चली आ रही परिस्थितियों ने उसे गलत ठहरा दिया। अगर वो अच्छा लड़का होता अपने बाप की नजर में तो ये नौबत कभी नहीं आती जो सामने आई।।

सरिता ने जो भी कहा वो एक बहन का अपने भाई के प्रति प्यार था। वो कभी नहीं चाहेगी की उसके जान से प्यार भाई को कहीं कोई चोट लगे उसके साथ कुछ बुरा हो लेकिन अभिषेक उसकी बात का मतलब नहीं समझ पाया।।

धन्यवाद आपका महोदय,

साथ बने रहिए
 
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