Thriller "विश्वरूप" ( completed ) - Page 6 - SexBaba
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Thriller "विश्वरूप" ( completed )

आदरणीय मित्रों avsji SANJU ( V. R. ) Rajesh Ajju Landwalia SHADOW KING prakash Vickyabhi आदि मेरे सभी मित्रों

अपनी जीवन की मनोदशा लिख रहा हूँ संक्षिप्त में, मेरे जीवन में एक शुन्य स्थान हो गया है जिसकी पूर्ति लगभग असंभव है l मैंने एक गहरे मित्र को खो दिया है l उसके साथ मेरी मित्रता पच्चीस वर्ष की थी l पहले हम कलकत्ता में RRB exam के दौरान धर्मताला के एक स्कुल में हुआ था l मुलाकात बहुत ही यादगार था क्यूंकि दोनों ही धर्मताला बस स्टैंड में पेशाब करते हुए पोलिस के द्वारा पकड़े गए थे और फाइन भरे थे l फिर हमारी मुलाकात सिकंदराबाद RRB exam के दौरान स्टेशन पर मुलाकात हुई थी l बीते मुलाकात की याद को ताजा कर दोनों बहुत हँसे थे l खैर तीसरी बार हमारी मुलाकात उस इंटरव्यू में हुई थी जिस के बाद हमें नौकरी मिली थी l एक PSU में l उसके बाद दोनों का मेडिकल चेकअप एक ही दिन हुआ और जॉइनींग भी एक ही दिन हुई l कमाल की बात यह रही कि हमारी पोस्टिंग एक ही एरिया में हुई l थर्मल पावर प्लांट में l

हाँ यह बात और है कि उसकी शादी पहले हुई और मेरी शादी तीन साल बाद l दोनों की क्वार्टर अगल-बगल में मिली हुई थी l बाद में जब बड़ी क्वार्टर मिली तो मैं सेक्टर वन में रह गया और वह सेक्टर तीन को चला गया l

मैं स्वभाव से थोड़ा आलसी हूँ, वह हमेशा मॉर्निंग वॉक और इवनींग वॉक के लिए मुझे जबरदस्ती घर से लेकर जाता था l प्लांट में दोनों की जब भी एरिया में मुलाकात होती थी तब हमारे बीच हमेशा स्लैंग लैंग्वेज ईस्तेमाल किया करते थे l हम किसी ना किसी तरह प्लान कर के हर रविवार को A शिफ्ट ड्युटी पर आ जाते थे l दोनों एक एरिया में ड्युटी डलवा कर उस दिन थोड़ी शराब और मटन की रसोई किया करते थे l यह सिलसिला बाइस सालों तक चलता रहा l फिर कुछ हफ्ते पहले उसे ब्रेन हमरैज हुआ और ऑपरेशन टेबल पर ही चल बसा l बाइस साल की रेगुलर रुटीन अब पुरी तरह से डिस्टर्ब हो गया है l अब मैं ड्यूटी स्पॉट पर खामोश ही रहता हूँ l अब मैंने अपना ऑफ भी बदलवा दिया है l पहले शुक्र वार था अब संडे को ले लिया है l

ऐसी मेरी स्थिति थी यार l इसलिए पेज पर बड़ी मुश्किल से ही आ पा रहा था l

खैर शुक्रिया बहुत बहुत शुक्रिया

कोशीश में हूँ खुद को फिर से पटरी पर लाने की l बहुत जल्द आ जाऊँगा l
 
👉एक सौ अड़तीसवाँ अपडेट

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एक कमरे में अंधेरा पसरा हुआ था l एक कोने में रीडिंग टेबल पर टेबल लैम्प जल रहा था और टेबल पर बहुत से किताबें बिखरे पड़े हुए थे l पास ही एक शख्स नाइट शूट में चेयर की हेड रेस्ट सिर टिका कर पर छत की ओर देखते हुए आँखे मूँद कर लेटा हुआ था l टेबल पर मोबाइल फोन अचानक से बज उठता है l वह शख्स चौंक कर नींद से जाग जाता है l मोबाइल को हाथ में लेकर देखता है, स्क्रीन पर दरोगा लिखा हुआ था l फोन को कान से लगा कर

- हैलो...

रोणा - हैलो नहीं हिलो... क्यूँ बे साले... काले कोट वाले... सुबह नहीं हुई है क्या भुवनेश्वर में...(यह शख्स कोई और नहीं बल्लभ था)

बल्लभ - ओह दरोगा... क्या हुआ... बड़ा ताजा ताजा लग रहा है....

रोणा - हाँ... हूँ तो... क्यूँकी अभी अभी अपना हाथ का अंतिम बार उपयोग किया है...

बल्लभ - क्या मतलब...

रोणा - अबे ढक्कन... मूठ मारी है... वह भी आखिरी बार... उस नंदिनी के नाम...

बल्लभ - साले हरामी... इतना कुछ होने के बाद भी... तु अभी भी... उसीके बारे में सोच रहा है...

रोणा - हाँ... क्यूँकी वह तब तक सेफ है... जब तक विश्वा भुवनेश्वर में है... (बल्लभ कुछ ज़वाब नहीं देता) क्या हुआ... क्या सोचने लगा...

बल्लभ - पता नहीं क्यूँ पर... मैं अभी अभी उस लड़की के बारे में कुछ याद कर रहा था...

रोणा - अच्छा... कोई खास बात...

बल्लभ - मैंने शायद उस लड़की को... राजकुमार की अंगेजमेंट पार्टी में देखा है...

रोणा - (यह सुनते ही रोणा की माथे पर बल पड़ जाता है) अच्छा... कहीं तु मेरा मजा तो नहीं ले रहा...

बल्लभ - नहीं... पता नहीं... मैंने ध्यान नहीं दिया था... पर अब जब तुने उस लड़की की बात छेड़ी है... तो ऐसा लग रहा है... शायद उस पार्टी में.. मैंने उस लड़की को देखा है...

रोणा - ह्म्म्म्म... तो... तो क्या हुआ...

बल्लभ - मतलब... वह लड़की राजा साहब की पहचान में हो सकती है...

रोणा - या फिर... सामल साहब की भी हो सकती है....

बल्लभ - हाँ... शायद... अच्छा बोल फोन किसलिए किया...

रोणा - अरे बोला ना... आज आखिरी बार मूठ मारा है...

बल्लभ - क्यूँ... हिमालय जाना चाहता है क्या...

रोणा - अबे नहीं... मुझे एक ज़िम्मेदारी मिली है...

बल्लभ - कैसी जिम्मेदारी...

रोणा - विश्वा को ठिकाने लगाने की...

बल्लभ - अच्छा...

रोणा - हाँ तुने ही कहा था ना... मुझे तेरे दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिए...

बल्लभ - हाँ तो इंतजार कर...

रोणा - ना.... मुझे पता है... कल तेरा मुहँ काला होने वाला है... और परसों तु अपना काला मुहँ लेकर राजगड़ आने वाला है...

बल्लभ - (अपनी भवें सिकुड़ कर) क्या यह बात... तुझे राजा साहब ने कहा है...

रोणा - हाँ यह उनकी भविष्यवाणी है...

बल्लभ - पहली बार... राजा साहब को... अपने दुश्मन पर भरोसा हो गया है...

रोणा - हाँ...

बल्लभ - इसका मतलब यह हुआ... के हम नाकारे हो गए हैं... तुझे क्या लगता है... विश्वा मुझ पर भारी पड़ेगा...

रोणा - वकील... राजा साहब ने शायद विश्वा की दिमाग पढ़ लिया है... तुझे क्या लगता है...

बल्लभ - अगर तेरी बात सही है... तो मैं भी देखना चाहूँगा... कल भूमि पूजन को विश्वा कौनसी दाव लगा कर रोकता है... कानून की किताब में ऐसा कौनसा दाव है जो मुझसे छूट गया है...

रोणा - एक बात तो है... विश्वा मुझे मेरी समझ पर मात दे चुका है... अगर उसने तेरी समझ को मात दे दी...

बल्लभ - तो समझ ले... रुप फाउंडेशन केस में... हम सब फंसने वाले हैं... क्यूँकी विश्वा ने... आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक... हाई कोर्ट में पीआईएल दाखिल कर दी है....

रोणा - इसीलिए तो मुझे जिम्मेदारी मिली है... चल तु आजा... मिलकर उसकी माँ बहन करते हैं...

बल्लभ - कल रात से... मैं सन साईन प्रोजेक्ट की हर पहलू को... कानूनी तर्ज़ पर तौल रहा हूँ... मुझे कहीं से भी... कोई लूप होल्स नहीं दिख रहा... फिर भी राजा साहब को लगता है... विश्वा मुझे मात दे जाएगा... (रोणा चुप रहता है) मैंने बीडीए के उस अधिकारी काजमी को... उसके मुताबिक इंडाइरेक्ट रिश्वत मुहैया कराया है... जिसके वज़ह से... उससे मैंने मन माफिक सर्वे रिपोर्ट हासिल किया... उसके बाद ही... प्लॉट रजिस्ट्रेशन और प्रोजेक्ट बीडीए से अप्रूवल लिया है... इतना कुछ होने के बाद भी... राजा साहब को लगता है... विश्वा मुझे मात दे सकता है...

रोणा - हाँ लगता तो यही है.... तभी तो... सात साल पहले की गलती को सुधारने की... मतलब कंप्लीट एलीमिनेशन... अब पुरी जिम्मेदारी मुझे सौंपी है...

बल्लभ - कैसी गलती...

रोणा - विश्वा को जिंदा छोड़ने की गलती...

बल्लभ - तो तु क्या विश्वा को मार देगा...

रोणा - अब काम मिल गया है... काम का दाम भी मिला है... काम पुरा हो जाने पर.... इनाम की ग्यारंटी मिली है...

बल्लभ - मुझे यकीन नहीं हो रहा है...

रोणा - क्यूँ... क्यूँ नहीं हो रहा है...

बल्लभ - इसलिए कि... विश्वा वह सात साल पहले वाला विश्वा नहीं रहा.... पहली बात अब वह वकील है... दुसरी बात... वह आरटीआई एक्टिविस्ट है... तीसरी बात... उसका ओड़िशा हाइकोर्ट में लाइफ थ्रेट ऐफिडेविट दाखिल है... इसलिए उसका बाल भी बाँका हुआ तो...

रोणा - जानता हूँ... तभी तो बोल रहा हूँ... भुवनेश्वर का काम को छोड़... जल्दी मेरे पास आजा... मिलकर विश्वा की कानूनी इलाज करेंगे...

बल्लभ - कानूनी....

रोणा - हाँ... याद है... खूब जमेगा रंग... जब मिल बैठेंगे कमीने तीन... एक तु.. एक मैं और

बल्लभ - तीसरा कौन...

रोणा - अबे शराब... वह भी कमीनी नंदिनी की कबाब घोल के...

बल्लभ - तेरे सिर से उस लड़की का भूत उतरा नहीं है अभी तक...

रोणा - भूत नहीं नशा... और नशा हमेशा सिर चढ़कर ही बोलता है... बोल कब आ रहा है...

बल्लभ - भले ही राजा साहब को लग रहा है... यह बाजी मेरी हारी हुई है... फिर भी अपनी उस बाजी की हार की गवाह मुझे बनना है... विश्वा मुझे कैसे मात दे पाता है... मुझे देखना है...

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भीमा रंग महल के एक कमरे के आगे आकर खड़ा होता है l दरवाजे पर हल्का सा दस्तक देता है l अंदर से भैरव सिंह की आवाज़ गूंजती है l

भैरव सिंह - कौन... भीमा

भीमा - जी हुकुम...

भैरव सिंह - अंदर आ जाओ...

भीमा दरवाजे को धकेल कर अंदर आता है l देखता है भैरव सिंह शिकारी के लिबास में एक काँच की अलमारी के सामने खड़ा है l उस अलमारी में एक मूठ विहीन तलवार है, ठीक उसके नीचे एक शिकार करने वाला पुरानी दो नाली वाली पुराने ज़माने की टेलीस्कोप बंदूक है l शायद भैरव सिंह शिकार करने के लिए तैयार हो चुका है l भैरव सिंह भीमा को देख कर पूछता है l

भैरव सिंह - कहो भीमा... क्या जानने आए हो...

भीमा - हुकुम... कल आपने जो काम दरोगा को सौंपा है... वह काम... (झिझकते हुए) हम में से... कोई भी कर सकता है...

भैरव सिंह - हा हा हा.. (हँसने लगता है) भीमा...

भीमा - जी हुकुम...

भैरव सिंह - चलो गाड़ी निकालो... आज हम शिकार करने जंगल की ओर जाएंगे... आज शिकार किया हुआ गोश्त ही खाएंगे...

भीमा - जी हुकुम...

कह कर भीमा बाहर की ओर भागता है l भैरव सिंह अलमारी के दीवार पर टंगे हुए वही पुराने ज़माने की टेलीस्कोपीक हंटर राइफल निकालता है l एक दुसरे अलमारी के पास जाकर कारतूस वाली एक बेल्ट निकालता है l जब तक वह रंग महल की सीडियां उतरने लगता है, भीमा गाड़ी लेकर उसके सामने पहुंच जाता है l भैरव सिंह गाड़ी में बैठते ही भीमा गाड़ी को राजगड़ से दूर ले जाने लगता है l गाड़ी दौड़ी जा रही थी l बीच बीच में भीमा भैरव सिंह की ओर देख रहा था, भैरव सिंह के चेहरे पर एक आत्मविश्वास भरा मुस्कान था l करीब एक घंटे के ड्राइव के बाद राजगड़ की जंगल में पहुँचते हैं l भीमा गाड़ी रोक देता है l

भैरव सिंह - गाड़ी जितना भीतर तक जा सकती है... लिए चलो...

भीमा - जी... जी हुकुम...

भीमा गाड़ी को घनी जंगल में ले जाता है और एक जगह गाड़ी की आगे बढ़ने के लिए कोई रास्ता नहीं मिलता तो भैरव सिंह गाड़ी से उतर कर पैदल ही आगे बढ़ने लगता है और भीमा भी उसके पीछे पीछे चल देता है l दोनों कुछ देर के बाद एक नदी की पठार तक आते हैं l भैरव सिंह एक पेड़ के नीचे जगह बना कर बैठ जाता है l भीमा उसके पीछे खड़ा रहता है l

भैरव सिंह - हाँ तो भीमा.. कुछ पुछ रहे थे...

भीमा - जी हुकुम... वह...

भैरव सिंह - बस... यही ना... विश्वा को मारने के लिए... दरोगा को क्यूँ चुना...

भीमा - जी... जी हुकुम...

भैरव सिंह - (लहजे में कड़क पन छा जाता है) भीमा... विश्वा ने तेरे आदमियों की क्या गत बनाया है... क्या यह बताना जरूरी है...

भीमा - हुकुम गुस्ताखी माफ़... पर बात अगर जान से मारने की है तो... मारने के कई तरीके हो सकते हैं...

भैरव सिंह - हाँ... हो सकते हैं... वैसे कहीं तुम्हें भी रंग महल की ख्वाहिश तो नहीं...

भीमा - (हड़बड़ा कर) नहीं नहीं हुकुम नहीं... पुरखों से हम आपको सेवा दे रहे हैं... आपका हुकुम ही हमारे लिए पत्थर की लकीर है.... हम उसे लांघने की हिम्मत कभी कर ही नहीं सकते... आखिर हम सब आपके नमक ख्वार हैं...

भैरव सिंह - ह्म्म्म्म... चलो हम गहरी बात तुमको बताते हैं... आखिर तुम हमारे नमक ख्वार जो हो...

इतना कह कर भैरव सिंह अपनी बंदूक की नाल खोलता है और उसके खोल में एक कारतूस भरता है l फिर नाल को लॉक करने के बाद एक साइलेंसर लगाता है और फिर अपनी बैठी हुई जगह पर खड़ा होता है और भीमा की ओर देख कर कहता है

भैरव सिंह - भीमा हम कोई आम खानदान में जन्मे नहीं हैं... हम खास हैं... एक खास खानदान में जन्में हैं... हम पैदाइशी क्षेत्रपाल हैं... हम ने ता उम्र किसीको अपने बराबर समझा ही नहीं... इसलिए ना तो हमने किसी से दोस्ती की... ना ही किसी से दुश्मनी... क्यूँकी दोस्त हो या दुश्मन... दोनों हमारे बराबर खड़े हो जाएंगे... विश्वा जैसे लोग... जो हमारे ही टुकड़ों पर पला बढ़ा... हमसे नजरें मिलाकर बात करने की जुर्रत कर रहा है... दोस्त नहीं है वह हमारा... और विश्वा जैसे दुश्मन हमें गवारा नहीं... हम नहीं चाहते... लोग यह जानें... यह समझें... कोई है जो राजा साहब के बराबर खड़ा हुआ है... इसलिए हमने दरोगा को चुना है.... (थोड़ी देर के लिए भैरव सिंह चुप हो कर भीमा की ओर देखता है, भीमा उसे आंखें बड़ी कर टुकुर टुकुर देखे जा रहा था) दरोगा का और विश्वा का छत्तीस का आँकड़ा है... दरोगा विश्वा से इतनी बार मात खाया हुआ है कि... विश्वा के लिए खुन्नस पाले हुआ है... इससे पहले कि विश्वा हम तक पहुँचे... हमने उसकी राह में... दरोगा को खड़ा कर दिया... दरोगा है बैल बुद्धि... अपने खुन्नस और लालच के चलते वह किसी भी हद तक जाएगा... और विश्वा से दुश्मनी ले लेगा...

भीमा - ओह... दरोगा विश्वा पर हावी हुआ तो ठीक... पर अगर विश्वा दरोगा पर भारी पड़ा... तब..

भैरव सिंह - हमने विश्वा के औकात के बराबर उसका दुश्मन उसके सामने रख दिया है... उनमें से कोई किसी को भी रास्ते से हटाए... बचने वाले को कानूनी सजा होगी... (भीमा की आँखे हैरानी से फैल जाते हैं) जीत विश्वा की हो... तो दरोगा के खुन के इल्ज़ाम में अंदर जाएगा... और अगर दरोगा जीता तो विश्वा के खुन के इल्ज़ाम में अंदर जाएगा... समझा...

अब भीमा का मुहँ खुला रह जाता है l तब तक भैरव सिंह किसी पेड़ पर बैठे एक पंछी पर निशाना लगा कर फायर करता है l जब पंछी खून से लथपथ फडफडा कर भीमा के पास आकर गिरता है तभी भीमा को होश आता है l

भीमा - पर हुकुम... विश्वा को कुछ हुआ तो... वह पुराने केस खुल सकते हैं ना...

भैरव सिंह - हाँ खुल सकता है... हमने भी उसकी तैयारी कर ली है... अगर केस खुला... तो सब दरोगा के सिर जाएगा...

भीमा - (ऐसे चौंकता है जैसे उसे बिजली का झटका जोर से लगा) क्या...

भैरव सिंह - हाँ... (एक कुटिल मुस्कान के साथ कह कर और एक फायर करता है)

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क्या हुआ आज आप कॉलेज नहीं गईं... यह सवाल पूछा विश्व ने रुप से l रुप आज अपनी भाभी की गाड़ी लाई थी विश्व को पीक अप कर कहीं ले जा रही थी l गाड़ी में रुप थोड़ी गम्भीर लग रही थी इसलिए थोड़ी दुर जाने के बाद विश्व ने यह सवाल किया था, पर रुप कोई जवाब दिए वगैर गाड़ी को चलाए जा रही थी l विश्व फिर से सवाल पूछता है

विश्व - कोई परेशानी है...

रुप कोई जवाब नहीं देती, नज़रे रास्ते पर गड़ी हुई थी और गाड़ी चली जा रही थी l रुप से जवाब ना पा कर विश्व फिर से सवाल करता है l

विश्व - कहीं मुझे टपकाने का प्लान तो नहीं है... (रुप विश्व की ओर घूर कर देखती है) ठीक है ठीक है... हम दोनों की जिंदगी बहुत अहम है.... आप रास्ते पर नजर रखिए...

गाड़ी कटक छोड़ कर भुवनेश्वर लांघ चुकी थी l विश्व अब बहुत कन्फ्यूज लग रहा था l उसे लगा शायद कोई बड़ी परेशानी है l रुप गाड़ी को एक मोड़ पर घुमा देती है, एक कच्ची सड़क से होते हुए एक बड़ी सी तालाब के पास रुप गाड़ी को रोक देती है और एक गहरी साँस छोड़ते हुए गाड़ी से उतर कर तालाब के किनारे जाकर खड़ी हो जाती है l विश्व भी गाड़ी से उतरता है और रुप के पास आकर खड़ा होता है l रुप अचानक विश्व के सीने से लग जाती है और अपने दोनों हाथों को विश्व के कमर के इर्द-गिर्द कस लेती है l

विश्व - देखिए... प्लीज.. आप ऐसे मत कीजिए... कोई देख लेगा... तो... मैं किसीको मुहँ दिखाने के.. लायक नहीं रहूँगा...

रुप - (चिढ़ कर) आह... (दो तीन मुक्के विश्व की सीने पर मारती है फिर विश्व की शर्ट को मुट्ठी में कस लेती है)

विश्व - अकेला लड़का जान कर... आप मेरे साथ यह ज्यादती नहीं कर सकती... देखिए मैं चिल्लाउंगा... बचाओ... आह बचाओ...

रुप - (चिढ़ कर विश्व के सीने पर मुक्के बरसाने लगती है) मुझे क्यूँ सता रहे हो...

विश्व - झूट ना बोलिए... सता मैं नहीं आप रही हो...

रुप - क्या कहा... यु... (कह कर विश्व को धक्का देकर धकेलते हुए कुछ पेड़ों के नीचे लाती है और विश्व पर कुद जाती है l विश्व नीचे घास पर पीठ के बल गिर जाता है और उसके पेट के ऊपर रुप बैठ जाती है और दोनों हाथों से विश्व की कलर पकड़ कर) फिर से कहो... कौन किसको सता रहा है...

विश्व - आप...

रुप - क्या... (विश्व की कलर भींच कर) आई हेट यु...

विश्व - (अपने हाथ रुप की पीठ पर लेकर अपने ऊपर झुकाते हुए) बट आई लव यु...

रुप के गाल लाल हो जाते हैं l चेहरे पर आती खुशी को छुपाते हुए रूठने के अंदाज में मुहँ को मोड़ विश्व के पेट से उतर कर पीठ करते हुए बैठ जाती है l विश्व उठ कर बैठते हुए

विश्व - क्या हुआ...

रुप - कब से आए हो... एक बार भी मिलने की अपने तरफ़ से कोशिश नहीं की... हूँह्..

विश्व - क्या इसलिए मुझे घर से किडनैप कर ले आईं...

रुप - किडनैप कहाँ... माँ और पापाजी से इजाजत लेकर तुम्हें लाई हूँ... (विश्व की तरफ मुहँ कर) और तुम हो के... मुझे सताये जा रहे हो...

विश्व - अरे कहाँ सता रहा हूँ... (अपना नाक रुप की नाक से लड़ाते हुए) मैं तो अपनी नकचढ़ी के नाक पर गुस्सा देखना चाहता था...

रुप - आह हा हा... बहुत बातेँ बनाने लगे हो... लोग कहते हैं... मेरा गुस्सा बहुत खराब है...

विश्व - वह लोग ही खराब हैं... साले अंधे हैं... आपकी गुस्से वाली चेहरा तो सबसे सुंदर है... इतना सुंदर की बस... देखते हुए खो जाने को मन करता है... (रुप अपना चेहरा घुमा कर अपनी हँसी को छुपाने की कोशिश करती है) अच्छा आपने बताया नहीं... मुझे किडनैप करके इतनी दुर क्यूँ लाई हैं...

रुप - ओह गॉड... यु बुद्धू... यु डफर... तुमसे अकेले में मिलना चाहती थी... तुमसे ढेर सारी बातेँ करना चाहती थी... जब से आए हो... भैया के लिए लगे हो... उनके उलझन में उलझे हुए हो... जब सारे प्रॉब्लम सॉल्व हो गए... तब तो तुम्हें मुझसे मिलना चाहिए था... उसकी भी जहमत नहीं उठाई तुमने... जहमत तो छोड़ो... एक फोन नहीं तो एक मेसेज भी कर सकते थे... पर नहीं... तो क्या करती... इसलिए... तुम्हें मैं यहाँ लेकर आई हूँ... समझे... (विश्व मुहँ फाड़े एक टक रुप को देखे जा रहा था) अब ऐसे उल्लू की तरह आँखे फाड़ फाड़ कर क्या देख रहे हो...

विश्व - नहीं.. मैं यह देख कर सोच रहा था...

रुप - क्या...

विश्व - यही के... इतना कंप्लैन... आप बोल गईं... वह भी बिना रुके... साँस कब ले रही हैं... यह सोच रहा था... (हँस देता है)

रुप - (चिल्लाती है) आह... (फिर से विश्व के सीने पर मारने लगती है, विश्व हँसते हँसते नीचे लेट जाता है रुप उसके सीने पर सिर रख कर लेट जाती है, विश्व रुप की बालों पर हाथ फेरने लगता है) मुझे तंग करने में... तुम्हें अच्छा लगता है...

विश्व - नहीं... पर राजगड़ जाने से पहले... इन प्यारे लम्हों को... दिल में संजो का ले जाना चाहता हूँ... (एक पॉज लेकर) आपको बुरा लग रहा है...

रुप - (अपना चेहरा उठाकर ठुड्डी को विश्व की सीने पर रख कर अपनी नाक और होंठ सिकुड़ कर सिर हिला कर ना कहती है)

विश्व - (थोड़ा मुस्कराता है) अच्छा अब बताइए...

रुप - क्या...

विश्व - कुछ तो खास बात होगी... हम किसी मॉल में जा सकते थे... किसी पार्क में... या किसी रेस्तरां में भी जा सकते थे... इतनी दूर... यहाँ..

रुप - (तुनक कर बैठ जाती है) कहाँ... कैसे... जहाँ तन्हाई चाहिए... वहीँ ज्यादा भीड़ दिखती है... पार्क देखो... नदी किनारा देखो... समंदर का किनारा देखो... रेस्तरां देखो... हूँह्ह... भीड़ कितना होता है वहाँ... दिल की बात करने के लिए भी चिल्ला चिल्ला कर बात करना पड़ेगा...

विश्व - (उठ कर बैठते हुए) ओ... तो दिल की बात करने के लिए... इतनी दूर तन्हाई में आए हैं... ह्म्म्म्म...

रुप - और नहीं तो... (देखो ना कितनी तन्हाई है... इतनी तन्हाई की जुबां खामोश भी रहे तो भी बातेँ कानों तक पहुँच ही जाए...

विश्व - वाव... क्या बात है.. लफ्जों में... इतनी गहराई...

रुप - तुम मुझे छेड़ रहे हो...

विश्व - मेरी इतनी हिम्मत और औकात कहाँ...

रुप वहाँ से उठ जाती है और विश्व से थोड़ी दुर पेड़ के नीचे विश्व की ओर पीठ कर खड़ी हो जाती है l विश्व अपनी जगह से उठता है, रुप के पास जाकर उसके कंधे पर हाथ रखता है, रूप विश्व की ओर घुमती है और विश्व के सीने से लग जाती है l विश्व को एहसास होता है कि रुप की आँखे बह रही थीं l

विश्व - क्या हुआ राजकुमारी जी... आपके आँखों में आँसू क्यूँ है...

रुप - अनाम... पता नहीं क्यूँ... पर कल से मुझे डर सा लग रहा है...

विश्व - डर... क्यूँ...

रुप - तुमने देखा ना... वीर भैया और अनु भाभी जी के साथ क्या हुआ...

विश्व - आखिर में दोनों मिल भी गए ना...

रुप - हाँ... पर हमारे प्यार का क्या अंजाम होगा...

विश्व रुप को खुद से अलग करता है l उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों में लेकर दोनों अंगूठे से रुप की आँसू पोछता है l

विश्व - क्या हुआ... मुझे पूरी बात बताइए...

रुप - (अपना चेहरे से विश्व की हाथ को हटाती है और पेड़ पर पीठ लगा कर खड़ी हो जाती है) कल की बात तो तुम माँ से जान ही चुके होगे... हमने वीर भैया और अनु भाभी को... पैराडाइज में छोड़ कर आ गए... फिर मैं कॉलेज गई... वहाँ पर मेरे दोस्त मेरा इंतजार कर रहे थे... उनसे मिली तो पता चला... तब्बसुम ने नज्म ए शब जीत चुकी थी... मुझे इतने दिनों बाद देख कर सभी खुश बहुत हुए... फिर पार्टी हुई... बहुत से दोस्त शामिल हुए... एक बात की खुशी थी... वीर भैया की इमेज एक ज़माने में बहुत खराब था... पर अनु भाभी के लिए जिस तरह से सबसे भीड़ गए... वह हमारे कॉलेज के यूथ के हीरो बन गए हैं... (रुप चुप हो जाती है)

विश्व - फिर डर कैसा....किस बात का...

रुप - जब पार्टी में मालुम हुआ... नज्म ए शब के अवार्ड्स को स्पंसर किसने किया था मालुम हुआ...

विश्व - (रुप को देखे जा रहा था)

रुप - निर्मल सामल....

विश्व - तो इसमे प्रॉब्लम क्या है...

रुप - (मुस्कराती है) जब निर्मल सामल का नाम आया... तब मैं कड़ी से कड़ी जोड़ने लगी... और मुझे पूरा खेल तभी समझ में आ गया....

विश्व - कौनसा खेल...

रुप - केके का क्षेत्रपाल से टूटना... निर्मल सामल का क्षेत्रपाल से जुड़ना... निर्मल सामल की बेटी सस्मीता से... वीर भैया का मंगनी की कोशिश... और इन सब के बीच... तब्बसुम का कॉलेज ना आना... तुम्हारा उन्हें ढूंढना... अंकल को राजी करना... उसके बाद यह शब ए नज्म का कंपटीशन... जिसमें तब्बसुम का जितना...

विश्व - इन सब में खेल कहाँ है...

रुप - बताती हूँ... तब्बसुम खुद साटीशफाय नहीं है... अपनी परफॉर्म से... फिर भी उसे अवार्ड मिला... सब मिला कर कुल पैंतालीस लाख का... (चुप हो जाती है)

विश्व - रुक क्यूँ गईं... आगे बोलिए...

रुप - अंकल रिश्वत नहीं लेते... निर्मल सामल की स्पंसरशीप.. सन साइन प्रोजेक्ट में एक प्लॉट और सिंगापुर आने जाने की फॅमिली टिकेट... इनडायरेक्ट रिश्वत... वह भी कंपटीशन के नाम पर...

विश्व - (मुस्कराता है) वाव... क्या बात है... तो इंसब में आप को क्या दुख पहुँचा मेरी नकचढ़ी राजकुमारी...

रुप - अनाम... दुश्मनी कितनी खुल्लमखुल्ला होने लगी है तुम्हारी... हमारे प्यार का अंजाम... दुखद हो तो चलेगा... पर अगर भयानक होगा...

विश्व - वैसे भी हमारी प्यार की राह आसान कब थी... आप राजकुमारी और मैं गुलाम अनाम...

रुप - डर रही हूँ... कहीं तुम पर कोई आँच ना आए...

विश्व - आँच तब आएगा जब.. राजा साहब तक खबर जाएगी...

रुप - पर जाएगी तो एक ना एक दिन ही...

विश्व - क्या उस दिन की सोच कर डर रही हैं...

रुप - नहीं सिर्फ वही एक वज़ह नहीं है...

विश्व - तो बताइए ना... और क्या क्या वज़ह हैं...

रुप - काजमी अंकल और उनके परिवार को कुछ होगा तो नहीं ना...

विश्व - आप ऐसा क्यूँ सोच रही हैं...

रुप - क्यूँ की मैं जानती हूँ... सन साइन प्रोजेक्ट फैल होने वाला है... और इस प्रोजेक्ट के पोषक लोग बहुत ख़तरनाक हैं... क्यूँकी इंडाइरेक्ट ही सही... अंकल तक उन्होंने रिश्वत तो पहुँचाया ही है... और कहीं यह रिवील हो गया के इन सब के पीछे तुम हो तब...

विश्व - नहीं... प्रोजेक्ट फैल होना तय है... और यह कल ही होगा... और आप यकीन रखें... आपकी दोस्त और उनकी परिवार पर कोई खतरा नहीं है.... (एक पॉज लेकर) और...

रुप - और क्या...

विश्व - और कौनसी वज़ह है... जिससे आप डर रहे हैं...

रुप - पता नहीं क्यूँ... कल से मुझे ऐसा लग रहा है... जैसे कोई हादसा मेरा इंतजार कर रही है...

विश्व - ऐसा क्यूँ लग रहा है भला...

रुप - पता नहीं... (बात को बदलते हुए) खैर... कल क्या होने वाला है...

विश्व - कल शाम की न्यूज में पता चल जाएगा आपको...

रुप - (मुहँ बना कर) मुझे नहीं बताओगे...

विश्व - मेरी जितनी भी पर्सनल है... उन सबमें आपका पूरा हक है... पर जो प्रोफेशनल है... उसके लिए आप मुझे कभी धर्म संकट में मत डालिए... मैं प्रोफेशनली जोडार सर से कमिटेड हूँ... तो..

रुप - ठीक है नहीं पूछूंगी...

थोड़ी देर के लिए रुप खामोश हो जाती है और किन्ही ख़यालों में खो जाती है l विश्व रुप की चेहरे को गौर से देखता है और सवाल करता है l

विश्व - राजकुमारी जी...

रुप - ह्म्म्म्म... (चौंक कर) कुछ पुछा तुमने...

विश्व - नहीं... पर आपने बताया नहीं... आपको किस बात का डर है... (रुप अपनी चेहरे को इधर उधर करने लगती है) ऐसा लग रहा है... जैसे आप कंफ्यूज हो..

विश्व रुप की हाथ पकड़ कर फिर से पेड़ की छांव में बिठा कर खुद उसके सामने आलती पालथी लगा कर बैठ जाता है l

विश्व - आप बेफिक्र हो कर कहिये... वादा है... सारी परेशानी आपकी दुर हो जाएगी...

रुप - अनाम... राजा साहब और तुम्हारे बीच की खाई कभी भरेगी नहीं... तो हमारे रिश्ते का भविष्य क्या है...

विश्व - आप क्या चाहतीं हैं... हमारे रिश्ते का भविष्य क्या होना चाहिए...

रुप - मैं नहीं जानती... पर मेरी ख्वाहिश है... मैं तुम्हारे साथ जीना चाहती हूँ... बुढ़ी होना चाहती हूँ... अपनी आँखे आखिरी बार बंद करने से पहले... तुम्हें देखते हुए मरना चाहती हूँ...

विश्व - तो ऐसा ही होगा... अगर आपको इस बात का डर है... के आपको कुछ हो जाएगा या मुझे... तो एक काम कीजिए... राजगड़ चले आइए... मेरे आँखों के सामने ही रहिए... फिर क्षेत्रपाल महल और हमारे प्यार का अंजाम अपनी आँखों से देखिए...

रुप - (मुस्करा देती है) तुम तो बात ऐसे कर रहे हो... जैसे तुमने टाइम फिक्स कर लिया है...

विश्व - हाँ ऐसा ही कुछ...

रुप - अनाम... क्या तुम्हें लगता है... राजा साहब का... सिर्फ तुम्हीं दुश्मन हो...

विश्व - नहीं... मैं जानता हूँ... पूरी दुनिया उनकी दुश्मन है... और हर कोई अपनी अपनी ताक में है...

रुप - इसका मतलब... उस दुश्मनी के चलते कोई मेरे ताक में भी हो सकता है...

विश्व - राजकुमारी जी... अपनी अकड़ और अहंकार के चलते... राजा साहब ने किसी से ना दोस्ती की... ना किसी को दुश्मनी के लायक समझा... पर उनसे खुन्नस रखने वाले हर दुसरे घर में मिल जाएंगे... पर राजा साहब पर वार करने के लिए... उनके कमजोर होने के इंतजार में हैं... तब शायद आप किसी के टार्गेट में आ जाएं... पर यकीन रखिए... आपके इर्दगिर्द हवा भी अपना रुख बदलेगा... तो भी मुझे पता चल जाएगा...

रुप - (तुनक कर खड़ी हो जाती है) क्या... इसका मतलब... तुम मेरी जासूसी करवा �