Thriller "विश्वरूप" ( completed ) - Page 10 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Thriller "विश्वरूप" ( completed )

शुक्रिया मेरे दोस्त आपका बहुत बहुत शुक्रिया

पहली बात रोणा ने जिस तरह रुप पर अपना हमला बोला था और पकड़ में आ गया था l इससे राजा भैरव सिंह को विश्व के बारे में अंदाजा हो गया था l इसलिए जब लैपटॉप में वैदेही तो दिखी पर विश्व नहीं दिखा उसे संदेह हुआ l क्यूंकि उसे मालुम था महल में पहरेदारी कम होगी और सारे पहरेदार गाँव वालों के साथ होंगे l क्यूंकि पहले एक हादसा हो चुका था जब विश्व महल में दाखिल हो कर नागेंद्र के कमरे में घुस गया था l

भाई इतना तो आपने पढ़ लिया होगा कि रुप ने अट्ठन्नी के जरिए खिड़की की रेलिंग खोल चुकी थी l कारण बचपन में एक बार विश्व के साथ बाहर गई थी l बाकी विश्व ने पहले ही प्लान किया हुआ था l कैसे नींद में ले गया था यह आपको अगले कड़ी में मालुम होगा l

हा हा हा

भाई थ्रिलर कहानी में इतना कुछ तो होना ही चाहिए

शुक्रिया फिरसे आभार दिल से
 
शुक्रिया लियोन भाई आपका बहुत बहुत शुक्रिया

हाँ यही घटना आगे चल कर गाँव वालों में रोष और आक्रोश पैदा करने वाले हैं

ताकि विश्व को समय और मौका दोनों मिल जाएं रुप को घर से बाहर निकलने के लिए

भैरव अपनी क्रोध और अहं के चलते बल्लभ को समझ नहीं पा रहा है l जब कि बल्लभ को इसके पीछे उदय का मंशा दिख रहा है l पर भैरव सिंह के आगे उस समय चुप रहना बल्लभ की मजबूरी थी

लियोन भाई यह वही आदमी है जो पिनाक के इर्द-गिर्द रहता है और पिनाक को भड़काता रहता है वीर और अनु के खिलाफ l यह आगे चलकर कर मालुम हो जाएगा l

बस यहीं तक क्यूंकि अब उनके जीवन में तूफान का आना बाकी है

हाँ विश्व ने वादा जो किया था कि रुप की पहली किस को वह यादगार बना देगा l

भाई स्पयलर दे ही देता हूँ

लैपटॉप में भैरव सिंह को एक शख्स नहीं दिखा जो सुबह बच्चों के साथ नगर परिक्रमा किया था और होलिका दहन के समय सभी बच्चे और वैदेही तक दिखी पर विश्व नहीं दिखा l इसलिए
 
शुक्रिया मेरे दोस्त आपका बहुत बहुत शुक्रिया

हाँ यही घटना आगे चलकर गाँव वालो के भीतर रोष और आक्रोश भरने वाला है

हाँ यह बिल्कुल सही कहा आपने

फिलहाल के लिए चेट्टी कामयाब हो गया है

पर उसका अंजाम भी उसके सोच के खिलाफ ही होगा

भाई चरित्र बहुत हैं और लड़ाई भी जबरदस्त रहेगी l विश्व अब तक आपने टीम के दम पर कामयाब रहा है आगे भी रहेगा पर जरूरी नहीं कि हर बार विश्व भारी ही पड़ेगा l विश्व से भी चूक होगी तब विश्व भी अपना कीमत चुकाएगा

भाई यह एक सस्पेंस है

बहुत जल्द क्रैक होने वाला है

क्यूंकि उसका सामने आने से कई खुलासे और धमाके होने वाले हैं

शुक्रिया शुक्रिया और शुक्रिया
 
शुक्रिया avsji भाई पर हिंदी लेखन आपकी हमेशा बढ़िया रहा है l मैं इस कहानी को मार्च तक ख़तम कर देना चाहता हूँ l एक विश्राम लेना चाहता हूँ ताकि आपकी कहानी श्राप पढ़ सकूँ l आशा है मार्च तक खत्म कर दूँगा

धन्यबाद फिर से

यह थोड़ा स्वल्प कालीन सस्पेंस है अगली कड़ी में आपको मालुम हो जाएगा

हाँ यह भी आपको अगले अंक में मालुम हो जाएगा

यह दुर्घटना बल्लभ के दिल को चीर कर रख दिया है जिसका फायदा विश्व लेगा l यह कोई बड़ी बात नहीं होनी चाहिए l

हाँ यश कोई धर्मराज नहीं था पर चेट्टी का पुत्र मोह नैचुरल है l बदले की भावना स्वभाविक है

धन्यबाद मेरे भाई आपका बहुत बहुत शुक्रिया

बस बढ़िया हूँ

आप कैसे हैं और जूनियर कैसा है

ईश्वर की कृपा आप पर सदेव बनी रहे
 
👉एक सौ सैंतालीसवां अपडेट

----------------------------------------

मेगा अपडेट

------------


मोबाइल पर रिंग बजने लगती है l विश्व अपनी आँखे बंद कर लेटा हुआ था l उसके होठों पर मुस्कान आ जाती है l वैसे ही आँखे बंद रख कर मोबाइल को कान से लगाता है l

विश्व - हैलो... जी..

रुप - जाग गए...

विश्व - जी... आपकी मेहरबानी...

रुप - यु... सुबह सुबह छेड़ रहे हो...

विश्व - अजी कहाँ... मैं तो सपनों में मस्त था... आपकी ख़यालों में खोया हुआ था... बस आपने हमें बाहर लाकर त्रस्त कर दिया...

रुप - अच्छा जी... तो सुबह सुबह सपने देख रहे थे...

विश्व - हाँ... वह कहते हैं ना... सुबह सुबह का सपना हमेशा सच होता है..

रुप - ओ.. हो... हमें तो मालुम ही नहीं था... वैसे क्या सपना देख रहे थे... जनाब आप...

विश्व - ही ही ही... वह.. मुझे... छी... शर्म आ रही है...

रुप - शर्म आ रही है... यु... स्क्रौंड्रल...

विश्व - हा हा हा...

रुप - देखना... कभी सच नहीं होगा...

विश्व - ओ सितमग़र जरा होश आओ... इश्क की मंजिल ही मिलन है... इससे ना मुकर जाओ...

रुप - गो टु हैल...

विश्व - आय हाय... क्या सितम है...

रुप - शॉट ऑप...

विश्व - ठीक है... मैं शॉट ऑप हो ही लेता हूँ... पर सच सच बताइए... आपको कौन से सपने आते हैं...

रुप - (शर्म से) उम्म्म्... मैं नहीं बताऊंगी...

विश्व - अब यह मेरे समझ से परे है... यह शर्म है या कुछ और...

रुप - जो भी समझना है समझ लो...

रुप शर्मा कर फोन को बेड पर पटक देती है और अपने दोनों हाथों से अपना चेहरा छुपा लेती है l फिर बड़ी मुश्किल से अपने अंदर क�