Romance भंवर (पूर्ण) - Page 9 - SexBaba
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Romance भंवर (पूर्ण)

Update:-65

तीनों एक साथ सुलेखा के कमरे से बाहर निकले, अपस्यु और ऐमी वापस से अपने ऊपर चस्मा डालते, पहले के अंदाज में ही अपने कदम बढ़ाते, चल परे। तीनों ही बेहद खुश नजर आ रहे थे। नंदनी अपनी पूरी सभा आरव के कमरे में ही लगाई हुई थी।

दरवाजे पर दस्तक, वीरभद्र ने जब दरवाजा खोला और सामने अपस्यु और ऐमी को खड़ा देखा तो कुछ पल के लिए बस दोनों को देखते रह गया… "क्या वीरे, हमे अंदर नहीं आने दोगे क्या?.. पीछे से स्वस्तिका उससे पूछने लगी।"

वीरभद्र दरवाजे से हटा और तीनों अंदर। तीनों पर पहली नजर कुंजल की पड़ी और वो सिटी बजती हुई अपस्यु के ओर भागी… "क्या भाई, बिल्कुल हीरो बनकर आए हो, बात क्या है।".... "अरे ऐसा कुछ ना है, बस मां ने डरा दिया, ना कोई खबर, ना कोई फोन और सीधा यहां आ गई। ऐसा कौन करता है।"…

कुंजल:- आप को पता भी है कि नहीं कुछ?

अपस्यु, अपना चस्मा वापस सीने पर लगाते… "क्या?"

पीछे से नंदनी बोल उठी…. "नाटक तो देखो इसकी, अपने दोस्तों के साथ आया है और इसे कुछ पता भी नहीं। सब के सब एक से बढ़कर एक नौटंकी है। सबके चेहरे की खुशी से तुम्हे पता नहीं चल रहा की इन्हे उड़ान भरने से पहले सब पता था।

कुंजल:- "कमाल है, इनको किसने बताया, यहां कौन है घर का भेदी"….. कुंजल अपनी बात कहती हुई आरव के ओर देखने लगी..

आरव:- मां देखो ना कैसे शक्की नजर से देख रही कुंजल…

नंदनी उसके बाल पकड़कर सर को गोल-गोल घुमाती कहने लगी…. "कोई बड़ी बात नहीं है कि तुमने ही सोनू (अपस्यु) को बताया होगा, तभी तो सबके साथ पहुंचा है। मै तो चाहती हूं ये दोनों (ऐमी और स्वस्तिका) जाकर लावणी को भी बेलन और झाड़ू का पूरा उपयोग सीखा दे, फिर अच्छा होगा। सुबह शाम जब इसे पड़ेंगी ना तब पता चलेगा…

ऐमी, हंसते हुए… "बिल्कुल आंटी, इस छछूंदर के लिए इतना तो कर ही सकती हूं।"

कुंजल:- अब छोड़ो भी ना मां क्या आप फिर से वही राग आलाप रही। भाई आ गया ना, अब तो बस पार्टी ही पार्टी चलेगी इधर।

अपस्यु:- अरे बिल्कुल… आज से पूरा पार्टी होगा.. और माते श्री को भी डांस सिखाया जाए.. मां का एक सोलों परफॉर्मेंस होगा..

ऐमी:- वो तो मुझ पर छोड़ दो, आंटी के साथ कुंजल को भी डांस सिखाना है।

कुंजल:- वाउ, सच में.. थैंक्स ऐमी। मुझे ना वो "दिल्ली वाली गर्लफ्रेंड" पर सीखा देना। मस्त डांस की है उसपर दीपिका ने..

ऐमी, उसे आंख मारती… "सीखा तो दूंगी लेकिन तुम्हारा रणवीर कहां है"..…

अपस्यु, आरव को देखते हुए… "एक बात बता उस खड़ूस राजीव मिश्रा को तूने पटाया कैसे, उससे तो तू झगड़ा भी कर चुका है ना"…

आरव, थोड़ा शर्माते हुए… "अब छोड़ ना, कहां गाड़े मुर्दे उखाड़ रहा।"

आरव, उसके चेहरे के हाव भाव देखते हुए…… "ओय होए लड़के के चेहरे की रंगत तो देखो… आय हाय शर्मा भी रहा है ये तो। अब इधर भी आएगा या वहीं बैठा रहेगा।"…. आरव थोड़ा शर्माए, थोड़ा मुस्कुराए अपस्यु के पास पहुंचा.. अपस्यु उसे गले लगाते, चूमते हुए बोला.. "थैंक्स यार ! बहुत दिनों से हमने कोई खुशी नहीं देखी। इसी बहाने हम भी थोड़ा नाच गा लेंगे।"…

पीछे से ऐमी पहुंची, अपस्यु को हटाकर वो भी गले लगी और उसके कानों में कहने लगी…. "छछूंदर, कंग्रॅजुलेशन… तेरे लिए बहुत खुश हूं।"… ऐमी को हटाते स्वस्तिका भी आरव के गले लगी… उसने भी आरव के गाल को चूमा और प्यार से उसे बधाई देने लगी।

नंदनी पहली बार कुछ लोगों के रिश्ते और प्यार को समझ रही थी। वो ना तो ऐमी को अच्छे से जानती थी और स्वस्तिका को तो पहली बार देख रही थी। नंदनी अंदर से खुश थी… "क्यों सोनू (अपस्यु) तुम्हे मां कि चिंता थी और तुम अपने दोस्तों के साथ हीरो की तरह एंट्री मार रहे, ये कैसी चिंता थी जरा मुझे समझाओगे।"..

अपस्यु भागकर अपने मां के पास पहुंचा और पाऊं छूते हुए कहने लगा…. "चिंता दिखाऊं या खुशी मुझे समझ में नहीं आया। अब चुकी मै कन्फ्यूज था इसलिए आप सबको कंफ्यूज करने ऐसे आया।"…

नदनी:- एक बात बता.. साची, ऐमी, अभी ये लड़की और वहां अपने पड़ोस वाली श्रेया.. तुम्हे केवल लड़कियों से ही दोस्ती होती है क्या? कभी किसी लड़के को नहीं देखी तेरे साथ। ये अपने आप में आश्चर्य है।

अपस्यु:- क्या मां आप भी… वैसे आप को तो मिलवाना ही भूल गया… ये है स्वस्तिका, आपकी दूसरी बेटी।

स्वस्तिका:- मै कुंजल से बड़ी हु, तो पहली बेटी हुई ना।

नंदनी:- एक बात बता जब ऐसा था तब तुमने पहले क्यों ना मिलवाया और ये हमारे साथ क्यों नहीं रहती।

स्वस्तिका, नंदनी के पास जाती हुई कहने लगी… "मां मैंने ही माना किया था अपस्यु को, कुछ नहीं बताने। मै खुद मिलकर बताना चाहती थी। और मै मुंबई मेडिकल कॉलेज में हूं, इसलिए साथ नहीं।"

नंदनी:- ठीक है तुम्हारा समझ में आ गया। अब सिन्हा जी तो कहते है कि आरव उनका बेटा है, इस हिसाब से ऐमी भी…

नंदनी ऐमी पर थी कि अपस्यु बोलने लगा… "मां इंगेजमेंट कब की है।".... इधर स्वस्तिका और आरव दोनों कोना पकड़ लिए, ऐमी, वैभव के पास चली गई और उस जगह पर बस कुंजल और नंदनी ही रह गए थे।

नंदनी:- 30 जून की एंगेजमेंट है। और सुन, ये लड़की वाले ना बहुत ही बेकार लोग है, इसलिए लावणी को छोड़ कर किसी से बहुत ज्यादा मतलब नहीं रखना, समझे…

अपस्यु:- क्या मां आप भी पुराने हिंदी फिल्मों वाले लड़के वाले बन रही हो। अरे आप को किसने परेशान किया है वो बताओ, हम नए युग के लड़के वाले बनेंगे। तरह-तरह के प्रोग्राम रखेंगे और उनमें उनको नीचा दिखाएंगे…

कुंजल:- भाई एक बात बताओ, मां जब ऐमी की बात कर रही थी तब सब भाग क्यों गए और आपने मां को बोलने से बीच में रोक क्यों दिया?

अपस्यु:- कुंजल तुमने अपने भाभी के लिए शॉपिंग कि, और तुमने अपने लिए क्या लिया है वो ना दिखाई.. वैसे मां, मै अभी-अभी पहुंचा हूं, तो थोड़ा फ्रेश होकर आ जाऊं, भूख भी काफी लगी है, जबतक आप कुछ खाने के लिए मंगवा लो ना।

इतना कहकर अपस्यु भी निकला वहां से। नंदनी सिन्हा जी को देखती हुई पूछने लगी…. "क्यों अनिरुद्ध जी, आप ही कुछ इन दोनों के बारे में बता दीजिए।"

सिन्हा जी भी वहां से निकलने में ही अपनी भलाई समझे। वो बहना बनाते हुए कहने लगे… "आरव मेरा पहला इकलौता बच्चा है, उसके बाद जबसे वो मुझे छोड़ कर गया, उसका गम को कम करने के लिए, वैभव को ले आया। वैभव अब मेरा दूसरा बच्चा है। बाकी मुझे ना तो कभी उतना ज्यादा ऐमी से लगाव रहा और ना ही अपस्यु से। मै आता हूं थोड़ा अपने काम निपटाकर।

कुंजल पीछे से नंदनी के कंधे पर अपना चेहरा टीका कर कहने लगी…. "मां मुझे ना इन दोनों पर कुछ-कुछ शक हो रहा है।"

नंदनी:- शक तो मुझे भी है बेटा, लगता है दोनों के बीच कुछ चल रहा है। वैसे ऐमी को देखी, कितनी खूबसूरत लग रही थी और जब दोनों साथ थे तब ऐसा लग रहा था यहां बस वही दोनों है।

कुंजल:- सो तो मैंने भी देखा मां। लेकिन आप जैसा सोच रही है वैसा नहीं है दोनों के बीच।

नंदनी:- तुम कहना क्या चाहती हो कुंजल, साफ-साफ बोल ना बेटा।

कुंजल:- मां लगता है दोनों बहुत करीबी है, पर एक दूसरे से प्यार नहीं करते। शायद भाई और ऐमी को देखकर, इन सबने पहले गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड ही समझा हो, आपकी तरह। लेकिन उन्होंने आपस में कभी ऐसा रिश्ता रखा ही ना हो, और बार-बार इनके टोकने पर, दोनों ने उन सब को ऐसा सुनाया की कोई भी अपना मुंह नहीं खोल रहा। इसलिए तो भाई और ऐमी के मैटर में सबने कन्नी काट लिया।

नंदनी:- पता ना तुम क्या कहना चाह रही हो। मुझे कुछ समझ में नहीं आया। अब बात जो भी हो, मेरा बेटा खुद किसी दिन बता देगा, उसके लिए मुझे कुछ नहीं सोचना। हां बस दोनों साथ में कमाल के लगते है, किसी की नजर ना लगे।

रात के तकरीबन 1 बजे, अपस्यु बार में अकेले बैठकर अपनी फेवरेट कॉकटेल की चुस्कियां ले रहा था। आरव भी अाकर अपस्यु के पास बैठ गया।…. "कैसा है अभी।"

अपस्यु:- बिल्कुल पहले जैसा हूं, पूरा रिकवर।

आरव:- तू बहुत परेशान है ना मेरे कारण। मुझे शायद ये फैसला सबसे पूछकर लेना चाहिए था। लेकिन मै भी क्या करता, अचानक ही माहौल ऐसा बना कि मै कुछ कर नहीं पाया।

अपस्यु:- आए पागल, तुझे मै परेशान दिख रहा हूं। गधा है तू, मैं बेहद खुश हूं। तू देखेगा, देखेगा तू मै कितना खुश हू…… रुक अभी..

अपस्यु ने वहीं एक टोस्ट करते हुए, वहां मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। सबके लिए बार से 4 पेग फ्री करवाते हुए जाम के ग्लास को अपने सर पर डाल कर नाचने लगा… बिल्कुल सुद्घ देसी स्टाइल में, जैसे कोई बड़ा भाई खुश होकर अपने भाई के शादी में डीजे पर झूमता है।

आरव, अपस्यु की खुशी को देखकर हंस भी रहा था और उसके आशु भी निकल आए… आरव अपने भाई को खुशी से झूमते देखकर, वह भी अाकर ठुमके लगाने लगा.. दोनों भाई ने एक दूसरे को देखा और दोनों गले लगकर, अपनी खुशी का इजहार करते हुए फिर नाचने लगे… आरव जोड़ से चिल्लाते हुए कहने लगा… "द डेविल ब्रदर्स इज़ हेयर।"..…

सुबह के 4 बज रहे थे। दोनों की एनर्जी देखकर तो वो बार वाले भी हैरान थे। लगभग 3 घंटे से दोनों भाई पी रहे थे और नाच रहे थे। उनका नाचना देखकर वहां मौजूद कर्मचारियों के आखें थक गई लेकिन इन दोनों के पाऊं नहीं थके। .. दोनों झूमते हुए बाहर निकले। बार से निकलकर, होटल की लॉबी से लेकर कमरे में जाने तक दोनों भाई नाचते ही गए।

दिन के 2 बज रहे होंगे, ऐमी, अपस्यु को जगाकर उसे जल्दी से तैयार होने कहीं। अपस्यु के तैयार होकर आते ही, दोनों आरव के कमरे में पहुंचे। इससे पहले की कोई कुछ बोलता, अपस्यु कहने लगा… "मां चलो, तू भी चल कुंजल।"

नंदनी:- मै तुम लोगों के साथ कहां जाऊंगी, तुम लोग को जहां जाना है वहां जाओ।

ऐमी नंदनी का हाथ थामती हुई कहने लगी…. "आप आएं हमारे साथ, कुछ ऐसा जो कल आप हम दोनों से पूछ रही थी और उसका जवाब आप को नहीं मिला, उसपर ही कुछ बातें करनी है।

नंदनी:- हां तो यहीं बता दो ना।

ऐमी:- छोटी सी गुजारिश है बस मान लीजिए और हमारे साथ आएये…

नंदनी फिर मना नहीं कर पाई। चारों समुद्र किनारे पहुंचे, वहां छोटे से प्राइवेट शिप में चारों समुद्र कि कुछ दूरियों को तय किया… अपस्यु शिप को रोककर पहुंचा तीनों के पास। अपस्यु नीचे बैठकर नंदनी के हाथ को अपने हाथ में लिया और उसे देखते हुए कहने लगा….. "कुंजल को पिछले कुछ दिनों से मैंने खुद उसे तैयार किया है, हो सकता है वो आने वाले चीजों को जल्दी काबू कर सके, क्या आप अपनी पूरी परिपक्वता (maturity) से चीजों को आकलन करने की कोशिश करेंगी।"

नंदनी, अपस्यु को हैरानी से देखते हुए पूछने लगी….. "बात क्या है बेटा, क्या तुम पिछली कोई बात बताने वाले हो।"

अपस्यु:- हां आप ने सही सोचा।

नंदनी:- बेटा खुशियां घर में आयी है, छोड़ दे उन बातों को। हम सब खुश हैं और तू भी खुश रह।

कुंजल:- भईया मां सही कह रही हैं। जाने दो ..

अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है, पर क्या मेरे लिए कुछ कर सकती हैं?

नंदनी अपस्यु के सर पर हाथ फेरती… "तू बेटा है या कोई अनजान जो ऐसे पूछ रहा।

अपस्यु:- मां अपने परिवार के कुछ कातिल वहां उस माहौल में है, मै चाहता हूं आप अपने मायके से लेकर सरुराल पक्ष की पूरी पहचान गुप्त रखे…

नंदनी और कुंजल को जैसे झटका लगा हो। कुंजल को तो ऐमी ने संभाल लिया और कुछ भी बोलने से रोक ली, लेकिन नंदनी, उसके आखों में गुस्सा साफ झलक रहा था।….

अपस्यु:- मां कुछ तो कहिए…

नंदनी:- मै कौन होती हूं कहने वाली। आखिर तुम शुरू से ही बदले कि राह पर थे, और मुझसे झूठ कहा।

अपस्यु:- आप का गुस्सा मै समझ सकता हूं। लेकिन मैं अब भी कहूंगा की मै बदले कि राह पर नहीं हूं, मै न्याय के मार्ग पर हूं।

नंदनी:- मुझे इतनी सफाई देने की जरूरत नहीं है, यहां से लौटकर हम तुम्हारे साथ नहीं रहेंगे।

कुंजल:- मां ये क्या कह रही हो… भाई को बोलने तो दो।

नंदनी चिल्लाई…. "मै ही क्यों सुनूं, ये क्यों नहीं समझता मेरी बात को। क्या गलती थी भूषण की जो लोगों ने उन्हें मार दिया। क्या तुझे तेरे पापा के जाने का दर्द नहीं मेहसूस होता? क्या गलती थी एक छोटे से मासूम लड़के कि, जरा भी दया नहीं आयी जब उसका गला घोंटा रहे थे? किस दिल के बने थे लोग, जो उसकी मासूमियत नहीं दिखी? जब उनके चेहरे सामने आते है एक पल काटना मुश्किल होता है। अब और क्या चाहते हो, अपने बचे परिवार का भी मरा हुआ मुंह देखूं? क्या तू अपने दोनो भाई का मारा हुआ मुंह देखना चाहती है?"

नंदनी तेज तेज चिल्लाती अपनी बात कहते गई। गुस्से के साथ दर्द भी निकलता जा रहा था, जो समुद्र का सिना चिर रही थी। नंदनी चुप होकर अब भी हांफ रही थी, और कुंजल अपनी मां की बात को सुनकर बस आखों में आशु लिए अपने भाई को ही देख रही थी।

अपस्यु अब भी मुस्कुरा रहा था। वो अपने एक हाथ से कुंजल के आशु पोछने लगा तो दूसरे हाथ से नंदनी का चेहरा ऊपर करके उससे कहने लगा…

"आप दोनों का दर्द मै अच्छे से समझ सकता हूं। मै एक छोटी सी कहानी बताता हूं, आप दोनों ध्यान से सुनना और फिर मेरे कुछ सवाल होंगे, उन सवालों का जवाब देना।"
 
Update:-66

नंदनी तेज-तेज चिल्लाती अपनी बात कहते गई। गुस्से के साथ दर्द भी निकलता जा रहा था जो समुद्र का सिना चिर रही थी। नंदनी चुप होकर अब भी हांफ रही थी, और कुंजल अपनी मां की बात को सुनकर बस आखों में आशु लिए अपने भाई को ही देख रही थी।

अपस्यु अब भी मुस्कुरा रहा था। वो अपने एक हाथ से कुंजल के आशु पोछने लगा तो दूसरे हाथ से नंदनी का चेहरा ऊपर करके उससे कहने लगा…

"आप दोनों का दर्द मै अच्छे से समझ सकता हूं। मै एक छोटी सी कहानी बताता हूं, आप दोनों ध्यान से सुनना और फिर मेरे कुछ सवाल होंगे, उन सवालों का जवाब देना।"

"ये कहानी है एक चालक लोमड़ी की। जंगल का ये लोमड़ी बहुत ही शातिर और अपने भाव बदलने में महारत हासिल किए हुए था। वैसे वो था पूरा ही चरित्रहीन और छुब्द मानसिकता (narrow minded) का शिकार। कहीं दूर जंगल में ये अपना पाऊं पसार रहा था। अपने चालाकी के चादर के अंदर वो अपने लोगों और परिवारों का ऐसा इस्तमाल करता, की उससे बड़ा कोई भगवान नहीं।"

"ये तो हो गया उस जंगली लोमड़ी का चरित्र चित्रण, उसके बहुत से किए कारनामे है, वो फिर कभी सुना दूंगा, जब भी आप सुनना चाहे मां। अभी मै मुख्य घटना सुनता हूं। तो बात कुछ ऐसी हुई की, वो जंगली जानवर अपने जंगल के कटने से पूरा हताश हो चुका था। कहीं दूर का एक प्यारा आशियाना उस लोमड़ी को पसंद आ गया। अपने कुछ और, चालाक लोमड़ी के साथ मिलकर उसने एक योजना बनाई।"

"उस योजना के तहत उसने 160 प्यारे और मासूम लोगों को जिंदा जला दिया। हां ठीक सुना जिंदा जला दिया। उसकी एक प्यारी सी पत्नी थी, जिसे उसके इरादों की खबर लग गई थी। हां शायद उसे अपने पति के इरादों की भनक नहीं लगती, लेकिन जान से भी ज्यादा चाहने वाली उसकी एक दोस्त थी। दोनों के बीच इतना अटूट और गहरा रिश्ता था कि उसने उस लोमड़ी की पूरी जानकारी साझा कर दी।"

"उन 160 लोगों में उसने अपनी पत्नी को भी जिंदा जलाया था। देखो जरा किस्मत, उस समय उस लोमड़ी की प्यारी पत्नी के साथ, एक और प्यारी सी औरत बातें कर रही थी, वो भी अपनी बेटी का सर अपने गोद में रखकर। वो बेचारी दूसरी औरत आने वाले खतरे से बिल्कुल अनजान, वो तो बस लोमड़ी की पत्नी से उसकी दुविधा सुन रही थी और किस तरह से उस लोमड़ी और उनके साथियों को रोका जाए उसकी योजना बना रही थी।"

"इधर दोनों योजना बना रही थी और उधर योजनाबद्ध तरीके से एक 20 फिट का गड्ढा खोदा गया था, जिसमें बड़ी सी भट्टी लगाई गई। धू-धू करती आग कि लपटें 20 फिट के गद्दे से ऊपर उठती। सबसे पहली जिंदा चिता में उसने अपनी पत्नी को झोंका… आहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहह.. वो चीखें। पहली चींख थी जो किसी जिंदा के जलने की आ रही थी। जो भी सुन रहे थे, उनका कलेजा दहल रहा था।"

"अपनी पत्नी को तो उस लोमड़ी ने जिंदा जलाया, और जिस वक़्त वो अपनी पत्नी को घसीट कर उस अग्नि कुंड तक ले जा रहा था, ठीक उसी वक़्त उसके एक साथी ने, लोमड़ी की पत्नी से बात कर रही उस औरत के गले में पतली रस्सी डालकर उसका गला घोंटना शुरू कर दिया। जब ये सब शुरू हुआ, तब वो बच्ची भी उठ गई, जो अपनी मां के गोद में सोई थी। उसके बालों को मुट्ठी में दबोचे उसके मुंह पर हाथ डालकर उसका एक अन्य साथी उस बच्ची को ये सब दिखा रहा था।"

"उसके आखों के सामने लोमड़ी की पत्नी को आग में फेका गया, जिसके जलने से चिल्लाना सुनकर उस लड़की का कलेजा सहम गया। वो सदमे में थी तभी दम घुटने से वो अपनी मां के छटपटाते पाऊं देख रही थी। अपनी मां कि आंखे बाहर आते हुए वो देख रही थी। और अंत में जब उसकी मां की श्वांस थम गई तब उसे भी उसी आग में फेक दिया गया।"

"इसी के साथ अब उस लड़की को भी फेका जाना था, उस आग के कुएं में जहां अंदर से एक साथ ना जाने कितनो के चिल्लाने की आवाज़ आती और दम तोड़ जाती। किंतु उस लोमड़ी के आखों में हवस आ चुकी थीं। उसने अपने साथी को यह कहकर रोक लिया कि, ये तो मारेगी ही, मै जरा इसे मज़े दे दूं वरना उपर जाकर कहेगी "कोड़ी ही मार डाला।"

"उस लड़की को बाल से घसीट कर वो एक कुटिया में ले गया। वो लड़की सहमी सी, आखें उसकी खुली थी लेकिन सरीर का कोई भी अंग काम नहीं कर रहा था। उस लोमड़ी ने लगभग उस लड़की के साथ बलात्कार कर ही चुका था। इतने में उस जगह पर उस लोमड़ी बेटा पहुंचा, जो पागलों कि तरह ना जाने कितनी दूर से पहले अपनी मां और फिर अपने साथियों की दर्दनाक चिंख्र सुनकर दौरा चला आ रहा था। जब यह घटना हो रही थी उसका बेटा रात के अंधेरे में उजला-नीला एक फूल तोड़ने निकला हुआ था।"

"पागलों की तरह जब वो लोमड़ी का बेटा दौड़ा चला आ रहा था, आग की ऊंचे लपटों की रौशनी में वो दूर से देख पा रहा था, कैसे लोमड़ी की झुंड पकड़-पकड़ कर उसके साथियों को उस अग्नि कुंड में फेक रहे थे। उसी रौशनी में फिर उसने देखा उसका लोमड़ी बाप उसके सबसे प्यारे साथी को एक कुटिया में ले जा रहा था। लड़का भागते हुए सीधा उस कुटिया में पहुंचा और अपने लोमड़ी बाप को ऐसा करते देख उसकी आखें खुली की खुली रह गई।"

"जो लड़की लगभग मरी सी केवल उसकी आखें खुली थी, उस लड़के को देख कर जोर से चिंखी और बेहोश हो गई। उस लड़के के कान में उसके अन्य साथियों की दर्दनाक चिंख उसका कलेजा दहला रही थी, और उसका बाप किसी निर्लज की तरह नंगा खड़ा हंस रहा था।"

"वो लड़का ना तो भयभीत हुआ और ना ही उसे अपने आखों के सामने अपना पिता दिखा। यह वक़्त सोचने में व्यर्थ करता वो लड़का तो कुछ और जिंदगियां उस आग में होती। उस लड़के के मन में उस वक़्त भी बदला नहीं था, उसके अंदर न्याय कि सोच जागृत थी और उसने न्याय किया। अपने पिता को पहले फांसी से टंगा और उसे लटकता हुआ छोड़ दिया। जब वो लड़का सजा तय कर रहा था, उसका कलेजा कांप गया, और जब फसी पर चढ़ा रहा था उसके हाथ कांप रहे थे, आखों से आशु बह रहा था, लेकिन नीति रचा जा चुका था और सजा तय हो चुकी थी।"

"बाप कैसा भी हो बाप था, उसी अग्निकुंड में उसका आखरी संस्कार करने के बाद, वो लड़का उस लड़की को अपने पीठ पर बांध कर पहाड़ों के ऊपर बने एक महादेव के मंदिर ले गया। नीचे अब भी भूखे भेड़िए झुंड में घूम रहे थे, और वो बेबस बस उन्हें देख रहा था।"

"बदले की आग उस लड़के के अंदर भड़क रही थी। जिसके साथ वो लड़का पल कर बड़ा हुआ, सब उसके आखों के सामने राख के ढांचे में थे, लेकिन वो बदला लेने उस वक़्त वहां जाता, तो वो लड़का भी उसी आग में राख बन जाता। उसके दिमाग में उसके गॉडफादर की सिखाई बात गूंज रही थी, यदि वो जिंदा रहेगा तभी उसका न्याय भी जिंदा रहेगा।"

"महादेव उसपर स्वयं सहाय थे। उस लड़के के 2 साथी और, अपनी जान बचाकर उस पहाड़ के ऊपर चढ़ चुके थे और उसके साथ उस लड़के का भाई भी था, जो अपनी मां को अग्नि में फेंकते देख कर ही सदमे से बेहोश हो चुका था, जिसे उसके साथियों ने ढोकर, अपने साथ उस पहाड़ के ऊपर लाए थे। तीनों बचपन के साथी, अपने कई साल साथ बिताए आशियाने और उस आशियाने के साथ उसके सभी साथी की मौत देख रहे थे।"

अपस्यु जैसे-जैसे अपनी बात कहता आगे बढ़ रहा था, वो ऐमी को अपने अंदर समेटे जा रहा था। उसके पीठ पर लगातार हाथ फेरकर मानो जताने की कोशिश कर रहा हो, वो हमेशा उसके साथ खड़ा है। नंदनी और कुंजल उसकी बात सुनकर पत्थर जैसे बन गई हो। दोनों की रूह कांप चुकी थी। अपस्यु अपनी बात समाप्त कर सबसे पहले तो तीनों को पानी पिलाया.. कुछ देर खामोश रहा.. फिर पूछना शुरू किया…

अपस्यु:- आप को पता है इस कहानी में वो लोमड़ी कौन था?

कोई कुछ नहीं बोला सब खामोश … अपस्यु अपने सवाल का खुद जवाब देते हुए कहा… "उस लोमड़ी का नाम था चन्द्रभान रघुवंशी।"

अपस्यु:- इस कहानी की वो लड़की कौन है, जानती है..

नंदनी, कुंजल यह सवाल सुनकर बस अपनी तेज धड़कन के साथ ऐमी के ओर देखने लगे.. लेकिन उनके मुंह से जैसे जुवान कहीं गुम हो गई थी, कुछ बोल नहीं पाए… अपस्यु फिर से अपने ही सवाल का जवाब देते कहने लगा… "वो लड़की ऐमी है।"

"क्या आप को पता है वो दोनों साथी कौन है जिसने उसके भाई को बचाया और आज तक अफसोस कर रहे है, कि उनमें क्षमता होने के बावजूद भी वो किसी को क्यों बचा नहीं पाए… "वो थे स्वस्तिका और पार्थ।"

"एक कली अंधेरे रात की वो दर्दनाक कहानी जिसे हमने फिर कभी याद नहीं किया। अब जब बात निकल ही आयी है तो मै यह भी बता दूं कि मां आप को हमसे ज्यादा दर्द मिला है। हमने उस दौरान कुछ खोया था तो कुछ बचाया भी था, लेकिन उस दौर में आपका सबकुछ लूट लिया गया।"

"उस दौरान आपने ना केवल अपने पति और बच्चे को खोया था, बल्कि अपने मायके के सारे लोग को भी खो चुकी थी, जिसके बारे में शायद आज तक आप को पता भी नहीं। आप ने उस दिन सही कहा था, और यह पूर्ण सत्य है कि मेरे ही बाप ने आपके पति और बच्चे का कत्ल करवाया था और आपके चचेरे भाई ने आप के मायके के पूरे परिवार को साफ कर दिया।"

"पहले दिन की बस 1 बात सही थी कि मेरे बाप ने आप लोगों के लिए 100 करोड़ की संपत्ति छोड़ी थी, लेकिन मैंने वो सभी संपति उसी दिन उस आग में जला चुका था। मैंने उन खूनी रुपयों की परछाई भी किसी पर नहीं पड़ने देना चाहता था।"

"मानता हूं आप का दर्द हम सब से गहरा है, लेकिन हमारे दर्द कि कहानी सिर्फ इतनी है कि आप ने सबको मरने के बाद देखा या सुना और हम सबने सबको अपने आखों के सामने जिंदा जलते हुए देखा, उनकी दर्द भरी चींखें सुनी।"

कुंजल रो रही थी, ऐमी रो रही थी लेकिन वहां 2 लोगों के आखों में आशु नहीं थे… एक तो अपस्यु था और दूसरी नंदनी। लगभग पूरी कहानी नंदनी के सामने थी। एक असमंजस कि स्तिथि नंदनी झेल रही थी। वो अपने हाल पर रोए या इन बच्चों के दर्द कि गहराई पर चढ़ाए उन मरहम को देखे जो साथ रहकर भी इन दोनों भाइयों ने कभी जताया तक नहीं।

नंदनी अपना फैसला कर चुकी थी और अपने ही अंदाज़ में उसने भी अपना साफ इरादा अपने बेटे के सामने रखी……

"मै साथ हूं, जितना दर्द झेलना था हमने झेल लिया। अब जो भी करेंगे वो बस उनके न्याय कि खातिर होगा, जिनका कोई दोष ना होकर भी, किसी की साज़िश का शिकार हो गए। चाहे वो कोई भी हो, हर एक को घुटने पर लाओ। जिस मकसद के लिए हमसे हमारा सब कुछ छीन लिया गया, तुम लोग सबसे पहले उनसे उनकी वो खुशी छिनो, फिर उनको इतना तड़पाओ की उन्हें ज़िन्दगी बदतर लगने लगे। हर पल कुढ़े और तिल-तिल मरते रहे और जब दर्द बेइंतहा हो जाए तो खुद अपनी ज़िंदगी से तंग आकर मौत को गले लगा ले।

नंदनी की बात सुनकर जैसे कुंजल में भी जोश भर आया हो.... आशु में डूबी आखें, सोलों में दहक रही थी, और हौसला पूरे जोश भरता… "भाई, ठीक वैसा ही करना जैसा मां ने कहा"…

ऐमी:- आप दोनों आक्रोशित ना हो। नियति अपना खेल रच चुकी है, हर काम अपने तय समय पर ही होगा। इसलिए धैर्य बनाए रखिए।

बातें खत्म करके सब ख़ामोश बस समुद्र कि लहरों को सुन रहे थे। शायद शब्द अब कुछ बचे नहीं थे, बस सबके अंदर एक ज्वाला सी धधक रही थी। कुंजल माहौल में थोड़ी तब्दीली लाते पूछने लगी…. "मां ऐमी से पूछो, ये जो बात बोलकर तुम्हे यहां लाई थी वो बात पूरी बताए"…..

नंदनी:- कौन सी बात..

कुंजल:- भुल्लकड़, वहीं इन दोनों के बीच चल क्या रहा है..

नंदनी भी पुराने माहौल से निकलकर नए माहौल में ढलती हुई पूछने लगी…. "अच्छा याद दिलाया। चलो अब दोनों में से कोई एक हम दोनों मां बेटी का सस्पेंस खत्म करो?"

ऐमी:- सर अपस्यु आप बता रहे या मै बताऊं..

अपस्यु:- तुम ही बता दो…

ऐमी:- हम दोनों की कहानी सिर्फ इतनी है कि मै इसकी और ये मेरी परछाई है। हम हमेशा एक दूसरे के साथ तो हो सकते है, लेकिन कभी एक नहीं हो सकते।

नंदनी अपस्यु को अपने दाएं तो ऐमी को बाएं ओर से अपने सीने से लगाई और कहने लगी…. "मुझे नहीं समझना कि तुम दोनों के बीच क्या चल रहा है या तुम दोनों का किसी और के साथ क्या चल रहा है। बस दोनों खुश रहना और जिसके साथ भी रहना अपने बीच कभी दूरियां मत आने देना।

कुंजल:- मै भी तो रोई थी मुझे कहां गले लगाई मां।

अपस्यु और ऐमी दोनों अपनी बाहें फैलाए "यहां आ जाओ".. कुछ पल का एक दूसरे से गले लगाना भी कितना सुकून दे जाता है। ऐसा लग रहा था सब के एहसास जुड़ रहे थे एक दूसरे से।

नंदनी:- अब बताओ कि हमे क्या करना है?

अपस्यु:- पहला काम बिना किसी से झूठ बोले, किसी को अपनी पिछली जिंदगी का पता ना चलने देना।

कुंजल:- अरे ये कैसे होता है.. ऐसा भी होता है क्या?

अपस्यु:- होता क्यों नहीं। अब यहां सबको पता है मै आश्रम में पढ़ा हूं। लेकिन किसी को पता है कि मैं कौन से आश्रम में पढ़ा हूं। लोगों को पता है कि मेरे पास मेरे बाप की बहुत संपति है, मेरा बाप कौन है कोई नहीं जानता। ये सब्दों का जादू और पेश करने की ऐसी कला है, जिसमे सब सामने होकर भी कुछ भी नजर नहीं आता।

कुंजल:- मान लो मै कोई अनजान हूं और आप से सीधा पूछती हूं.. अपने पिता का नाम बताओ?

अपस्यु:- मधुवेश्वर कर्मकार सीबी रघुवंशी..

कुंजल:- क्या?

अपस्यु:- हां सही सुनी, पीछे दादा का नाम जुड़ा है।

नंदनी:- हां वो सही बोल रहा है।

कुंजल:- ओके तो इस हिसाब से पापा का नाम हुआ मधूवेश्वर कर्मकार बीपी रघुवंशी।

अपस्यु:- राईट…

ऐमी:- अपस्यु और आरव तुम्हारे कजिन नहीं है।

नंदनी और कुंजल दोनों एक साथ …. क्या ?

अपस्यु:- हां उसने सही कहा। आगे जो होने वाला है वहां ऐसा ही कहना है। मां आप कहोगी जेठ की संपत्ति क्लेम करना था, इसलिए 2 अनाथ को आपने अपने जेठ का वारिस बनाया, ताकि संपति पाया जा सके, लेकिन अब दोनों से लगाव ऐसा हो गया कि वो मेरे बेटे जैसा है।

नंदनी:- ये सब क्या मै मिश्रा परिवार को बताऊं…

अपस्यु:- ये बहुत आगे आने वाला है, बस आज समझा दिया ताकि आगे कोई भी शंका ना रहे। मिश्रा परिवार से ये मत कहना।

नंदनी:- ठीक है मै समझ गई।

ऐमी:- एक मिनट सबसे जरूरी बात तो रह ही गई…

नंदनी और कुंजल फिर से साथ में…. "क्या?"

"यहां से लौटने के बाद ना तो आप दोनों कि नजरें बदले और ना ही नजरिया। ना ही किसी से कभी भी बीती बात की कोई चर्चा होगी। जैसा कि आपने भी देखा होगा, कुंजल तो हर वक़्त हमारे साथ ही थी, लेकिन मैंने या आरव ने, कभी भी बीते वक़्त की कोई बात नहीं की और ना ही कभी बीते वक़्त जीये। आज हमारा है, और बस आज में जीना ही ज़िन्दगी है। बड़े दिनों बाद घर में खुशियां लौटी है उसका खुले दिल से स्वागत कीजिए। हमारे बड़े से परिवार के लिए ये एक यादगार क्षण है.. इसलिए इस बीच ना तो हम कोई काम करेंगे और ना ही बीते वक़्त की कोई चर्चा"….
 
Update:-67

भावनाओ का समागम ऐसा था कि पहले जो केवल एक पहचान की लड़की थी अब वही सबसे खास नजर आने लगी। जिस लड़की को आज पहली बार कुंजल और नंदनी ने देखा था, वो अपनी सी लगने लगी। और एक जिसका केवल नाम सुना था, ऐसा लग रहा था, वो ना जाने कितने दिनों से घर के बाहर रह रहा है, बस जल्दी घर लौट आए, एक सदस्य की कमी सी मेहसूस हो रही है।

अपस्यु के उस रात की घटना के जिक्र के बाद ऐमी, स्वस्तिका और पार्थ खुद-व-खुद करीब हो गए नंदनी और कुंजल के। निकले थे तो चारों 2 बजे के करीब लेकिन अपस्यु 4 बजे तक होटल लौट आया और तीनों वहीं से कहीं और निकल लिए।

रात के तकरीबन 8 बजे तीनों लौटी। और जब तीनों लौटी तो तय कर पाना मुश्किल था कि तीनों में सबसे खूबसूरत कौन है। ऐमी के रंग में ही कुंजल भी रंगी नजर आ रही थी। कुंजल के टॉम बॉय लूक को पूरा बदल कर क्या हॉट और क्लासी लूक दिया था ऐमी ने। इससे भी ज्यादा गजब तो नंदनी थी। वो जब अपने पुराने रॉयल तौर-तरीके में लौटी और बिल्कुल किसी महारानी वाले एटिट्यूड के साथ अपने पहनावे और चाल को बदली, तब ऐसा लग रहा था जैसे 2 खूबसूरत राजकुमारी के साथ कहीं की महारानी चली आ रही है।

आज उन तीनों की एंट्री पर, फिर से दरवाजे पर वीरभद्र अटक गया। जैसे ही दरवाजा खोला और तीनों को ऐसे तैयार होकर अपने सामने पाया, वो फिर से दरवाजे पर खड़े-खड़े देखता रह गया। तीनों एक साथ अंदर आयी और इस बार तीनों को देखकर स्वस्तिका ने सिटी बजाते हुए उनका स्वागत किया।

नंदनी और कुंजल का हुलिया देखकर, आरव, ऐमी को ताने देते हुए कहने लगा… "बंदरिया अपने जैसी सबको नचनिया बना कर ले आयी है।" … आरव का ऐसा कहना था, कि उसके ऊपर नंदनी और कुंजल बरसना शुरू कर चुकी थी। आरव को घिरते दिख स्वस्तिका आरव के ओर से आ चुकी थी बोलने…

दरअसल स्वस्तिका, आरव और पार्थ एक टीम के थे और अपस्यु, ऐमी एक टीम से, और इनके बीच तू-तू, मै-मै की कहानी चलते रहती थी। आज लेकिन ऐमी के साथ अपस्यु ना होकर कुंजल और नंदनी थी। इधर सिन्हा जी की नजर जब नंदनी पर गई तो भावनाओं मै बहते हुए अचानक ही बोल परे…. "क्या दिख रही है नंदनी, एक दम मेग रयान (American actress Meg Ryan) लग रही है।"

अपस्यु, हैरानी से सिन्हा जी को देखते हुए…. "ओए सर जी ये सब क्या हो रहा है, खबरदार हो जाओ। और आपका ये मेग रयान का भूत उतरा नहीं है अब तक। यूएस आए हुए हो, जाकर मिल क्यों नहीं लेते?

सिन्हा जी:- अरे मेग रयान मेरी नजरें के सामने खड़ी है और तू कहां मुझे हॉलीवुड भेज रहा है।

अपस्यु, सिन्हा जी को देखा फिर अपनी मां को…. "ओए बुढऊ, ये क्या चल रहा है। मेरे ही सामने मेरी मां को घूर रहे।"

सिन्हा जी:- अब खूबसूरत लग रही है तो देख रहा, मुझे डिस्ट्रूब ना कर।

अपस्यु:- वो नंदनी रघुवंशी है, गुस्सा जब उनके सर पर हावी होता है तो चिपकाने में देर भी नहीं लगाती। संभालो, वरना सर जी आप का भविष्य खतरे में लग रहा मुझे।

सिन्हा जी:- चल चल, बच्चा है तू अभी, बड़ों के मामले में टांग ना अरा…

सिन्हा जी का इतना कहना था कि अपस्यु उसे घूरने लगा… "हद है यार, नहीं देखता तेरी मां को, खुश। अच्छा सुनना आज मूड बन रहा है, चल ना चलकर पीते हैं।

अपस्यु सिन्हा जी मना करते हुए, सबका ध्यान अपनी ओर खींचा….. "मां आप और सिन्हा जी अभी बैंक्वेट हॉल जा रहे है, वहां तीनों परिवार के मुखिया मिलकर आपस में कुछ चर्चा करेंगे… बाकी के सारे लोग प्राइवेट डिस्को यार्ड में पहुंचेंगे, जहां धमाल मचाने का कर्यक्रम रखा गया है। एक बात और, आप लोगों को ज्वाइन करने मिश्रा फैमिली और जिंदल फैमिली के यंगस्टर भी होंगे। सभा समाप्त कीजिए और जाकर तैयार हो जाइए।"

सभी लोग वहां से निकल गए अपने-अपने कमरे में, हालांकि कुंजल और ऐमी पहले से तैयार होकर आए थे, तो दोनों ऐमी के कमरे में ही जाकर वहीं बातें करने लगे। आरव तो बेचैन था लावणी से मिलने के लिए.. इसलिए वो भी पूरे लगन से तैयार हो रहा था।

कुछ देर जबतक ऐमी और कुंजल बातें कर रही थी, वहां स्वस्तिका भी तैयार होकर पहुंच गई। कुंजल उसे देखती हुई पूछने लगी… "हम अब बहने है, तो मुझे एक सवाल खाए जा रही है।"

स्वस्तिका, मुस्कुराती हुई… "बिल्कुल पूछो।"

कुंजल:- यहां हर कोई सज-संवर रहा है केवल तुम्हे छोड़ कर, ऐसा क्यों?

स्वस्तिका:- हिहिहीही… जिस दिन मै सज-संवर कर निकलूं, समझ लेना तुम्हे तुम्हारे जीजाजी मिल गए.. अब चलें…

कुंजल:- एक मिनट, एक मिनट… मुझे कंफ्यूज ना करो। इस हिसाब से तो मुझे भी नहीं संवरना चाहिए।

ऐमी:- नहीं ऐसा नहीं है। बस उसके दिल की तमन्ना ऐसी है कि किसी के लिए उसे जबतक संवरने की इक्छा ना हो, वो नहीं संवर सकती।

कुंजल:- फिर तो लगता है मुझे ही कोई चक्कर चलना होगा। वैसे भी कई सारी फैमिली के यंगस्टर जमा हो रहे है… चलें क्या?

ऐमी:- हां, हां क्यों नहीं, चलो चलकर धमाल मचाया जाए….

तीनों कमरे से निकलकर डिस्को एरिया में पहुंचे, पार्टी के माहौल को शुरू करने से पहले तीनों ही लड़कियां बार काउंटर पर पहुंची, 4 टकीला शॉट के लगाकर अभी रुके ही थे, कि ऐमी कहने लगी…. "अरे यार उस छछूंदर की एंगेजमेंट सेलीब्रेट करने आए हैं या नॉर्मल किसी डिस्को में, अभी सब 2 शॉट और लेंगे।"..

कुंजल:- वुहू… ये हुई ना बात…

स्वस्तिका:- दोनों पागल हो गई हो, पूरा घर कुछ देर में यहां होगा। और फिर मां भी तो होगी।

ऐमी:- अरे नंदनी रघुवंशी को आरव और अपस्यु संभालेगा, हम तो एन्जॉय करेंगे.. वैसे भी झूमने के लिए थोड़ा नशा तो होना चाहिए ना…

कुंजल ऐमी के साथ ताली देती हुई कहने लगी…. "बिल्कुल सही।"… दोनों ने 2 टकीला शॉट और खिंचा और साथ में स्वस्तिका को भी जबरदस्ती खिंचवाया। तीनों सबसे पहले पहुंचने वालों में से थे और उसके बाद उस जगह पर ध्रुव और साची एंट्री मार रही थी। …

साची को देखकर ऐमी कहने लगी… "लगता है अपस्यु को जलाने आयी है। इसे अपस्यु देखेगा तो जरूर अपने ऊपर चश्मा चढ़ा लेगा।"…

स्वस्तिका:- हिहीहिही… वो तो चश्मा ना भी चढ़ाएगा तो फर्क ना पड़ना, लेकिन ये क्या करेगी अपस्यु को देखकर।

कुंजल:- एक लड़की होकर तुमलोग दूसरी लड़की के लिए हंस रही, क्या तुम दोनों को उसके दर्द का एहसास भी है।

कुंजल थोड़े गुस्से में वहां से उठकर साची के पास चली गई और बिल्कुल किसी करीबी दोस्त की तरह उससे मिलती हुई, उसके और ध्रुव के साथ हंसी मज़ाक करने लगी… कुंजल और साची के रिश्ते को परखते हुए स्वस्तिका एक टकीला शॉट और लेती कहने लगी…. "ऐमी ये रिश्ता आगे जाकर हमे बहुत परेशान करने वाला है।"

ऐमी भी एक टकीला शॉट खींचती हुई कहने लगी…. "हां मै भी देख रही हूं। लेकिन कुंजल ने गलत क्या कहा, ये मासूम बेचारी अनजाने में ही एक बड़े गेम का हिस्सा बन गई, जिसके बारे में शायद इसे कभी पता भी ना चले।"

स्वस्तिका:- दर्द या तो हौसला देगा या फिर इसे तोड़ देगा। यहां हर किसी की किस्मत एक दूसरे से जुड़ी है ऐमी, हम चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते। हौसला रहा तो किनारे लग ही जाना है… वरना घुट तो वो अब भी रही है…

ऐमी:- स्वस्तिका ऐसा नहीं है कि "हम चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते।" यदि चाह ले तो साची के लिए भी कुछ किया जा सकता है।

स्वस्तिका:- हम्मम !! ठीक है अब जब तुम्हे ऐसा लग रहा है तो मै तुम्हारे साथ हूं, अब छोड़ भी उसको वो आगे आने वाले कामों में से एक है, अभी तो एन्जॉय कर ले…..

इधर सब जब तैयार होने गए... अपस्यु भी तैयार होने चला गया लेकिन वो तुरंत ही तैयार होकर अपनी मां के पास पहुंचा…. "चलें मां"

नंदनी:- तुम मेरे साथ जा रहे.. तुम्हे तो उनके साथ होना चाहिए सोनू।

"अरे मां, अब मेरा आप के साथ जाने का मन है, चलो भी…" अपस्यु अभी बात कर ही रहा था कि पीछे से सिन्हा जी पहुंच गए…. "तुम भी चल रहे हमारे साथ क्या?"…. "हां चल रहा हूं, और कोई बहस नहीं इसपर।"

तीनों वहां से निकले बैंक्वेट हॉल के लिए… नंदनी की चाल में पूरा रौब और रुतबा नजर आ रहा था, जो की एक रॉयल ब्लड के मुखिया में होना चाहिए। वहीं उसके एक ओर सिन्हा जी थे तो दूसरी ओर नजरों का आकर्षण बना अपस्यु।

एक ओर से ये तीनों बैंक्वेट हॉल की ओर बढ़ रहे थे, दूसरे ओर से प्रकाश जिंदल अपने ताम-झाम के साथ चला आ रहा था। प्रकाश जिंदल को देखकर अपस्यु ने एक पल के लिए अपनी पलकें झपकाई और आखों पर काला चश्मा लगाकर अपनी मां के साथ बढ़ने लगा। दोनों के कदम अलग-अलग दिशा से एक ही ओर बढ़ रहे थे, जैसे-जैसे दोनों करीब आ रहे थे, उस माहोल में जैसे किसी युद्ध नगाड़े की धुन छेड़ रखी हो। युद्ध का बिगुल फूका जा रहा था। इतनी कड़ी मेहनत और सफल योजना से, जिस पड़ाव तक पहुंचना था, वो पड़ाव खुद सामने से कदम बढ़ाते हुए उन्ही के ओर चला आ रहा था।

एक औपचारिक परिचय के बाद सभी अपनी जगह पर बैठकर बातचीत कर रहे थे। कितनी सही थी उस लोमड़ी की कहानी जिसे अपस्यु सुना चुका था। प्रकाश जिंदल अपने हाव-भाव से सबको प्रभावित करता जा रहा था। एक अरबपति जो बिल्कुल जमीन से जुड़ा हुआ था।

अपस्यु ठीक नंदनी के पास बैठकर उसकी बातें ध्यान से सुन रहा था और बिना कोई प्रतिक्रिया दिए बस उसे पूरी तरह भापने की कोशिश कर रहा था। वो भी लगभग दूसरा चन्द्रभान ही था, जिसके असली चेहरे के बारे में किसी को सोचना तो दूर, ऐसा ख्यालों में भी नहीं ला सकते।

उसके पास में ही उसकी बड़ी बेटी मेघा और उसका दामाद हाड़विक बैठा हुआ था। शक्ल से दोनों घमंडी और पैसे के नशे में चुर दंपत्ति, जो बस अपना मुंह केवल जरूरत के वक़्त ही खोल रहे थे।

"हे यू सर्वेंट, मेरे साथ आओ"… मेघा अपने फोन के संदेश को चेक करती हुई कहने लगी। मेघा का ऐसा कहना था और नंदनी के चेहरे का भाव बदलते देर ना लगे। अपस्यु तुरंत नंदनी का हाथ थामकर उसे बस शांत रहने का इशारा किया।

"मेघा जी, मै कोई फ़्री सर्विस नहीं देता।" अपस्यु अपना चश्मा हटाते हुए कहने लगा…

हाड़विक:- तुम जैसे हम कई सर्वेंट अफोर्ड कर सकतें है, अपनी सर्विस चार्ज बताओ।

सिन्हा जी:- एक काम के 2 करोड़ भारतीय रुपया, अभी कुछ दिन पहले ही तय हुआ है। और हां कोई अनैतिक काम नहीं करता…

सिन्हा जी की बात सुनकर दोनों दमापती चौंकते हुए कहने लगे … "व्हाट"..

अपस्यु:- फोन से बाहर निकालिए मैडम और ढंग से परिचय सुन लिया कीजिए।

प्रकाश जिंदल:- माफ़ करना बेटा, उसने ध्यान नहीं दिया। उसके लिए मै माफी मांगता हूं।

मेघा:- डैड इतनी भी बड़ी गलती नहीं थी कि आप इन लोगों से माफी मांगो।

प्रकाश जिंदल थोड़े आवेश में आते हुए….. "यदि बात करने की तमीज नहीं तो अपना मुंह मत खोला करो। हम परिवार के बीच बैठे है तुम्हारे ऑफिस के कर्मचारियों के बीच नहीं। मुझे लगता है तुम दोनों को डिस्को जाना चाहिए। हाड़विक तुम दोनों डिस्को अरीना में जाओ।"

दोनों अपने ही एटिट्यूड में वहां से निकल गए, और नंदनी गुस्से के घूंट को पी रही थी जो उसके चेहरे से साफ पता चल रहा था। प्रकाश जिंदल माहौल को थोड़ा मजाकिया बनाते हुए, नंदनी को थोड़ा सामान्य करने की कोशिश में जुट गया। इसी क्रम में एक इमोशनल कहानी गढ़ते हुए.. "बीन मां की बच्ची, विदेश में पली बढ़ी" वाली कहानी सुनाने लगा। जिसे सुनने के बाद नंदनी थोड़ी नॉर्मल होते हुए उसके साथ बातों में लग गई।

कुछ वक़्त बाद प्रकाश जिंदल अपस्यु से अकेले में कुछ बात करने का प्रस्ताव रखा, जिसे अपस्यु खुशी-खुशी स्वीकार करते हुए दोनों उसी हॉल के दूसरे हिस्से तक पहुंचे। और हॉल के कोने में जाकर दोनों बातें करने लगते है।…

जिंदल:- नए लड़कों में इतना ज्यादा धैर्य बहुत कम देखने मिलता है। मैंने देखा कैसे तुमने अपनी मां का हाथ थामकर उन्हें शांत रहने के लिए कहा।

अपस्यु:- मैंने भी देखा कैसे आपने हमे अपमानित करने वाली अपनी बेटी को, आपने बाहर भेज दिया। बहुत हिम्मत चाहिए होती है अपने बिगाड़े बच्चों को शांत करने के लिए…

जिंदल:- मै तो जमीन से जुड़ा हूं, क्योंकि मेरे पिताजी एक बहुत छोटे से सहर में रहा करते थे, और मैंने उनकी गरीबी की परवरिश देखी है। लेकिन मेरे बच्चों ने एक आलीशान परवरिश में पले और हमेशा बुलंदियों को ही देखा है। उनके लिए किसी का अपमान करना कोई नई बात नहीं।

अपस्यु:- मेरी मां राज परिवार से है, और उनके पुस्तों ने केवल राजशाही ही देखी है। बच्चो में थोड़ा समझदारी डालिए की देखकर अपमान किया करे।

जिंदल:- तुम्हारे बातों से गुरूर झलकती है।

अपस्यु:- मेरे तेवर में भी गुरूर है, बस दिखता नहीं कभी..

जिंदल:- तुम मुझे उकसा रहे हो क्या?..

अपस्यु:- नहीं मै बस सच्चाई बता रहा हूं।

जिंदल:- हम्मम ! बहुत दिनों के बाद ऐसा लग रहा है हिंदुस्तान का कोई जानदार परिवार के सामने खड़ा हू। तुम्हारे अंदर मेरी बेटी से ज्यादा गुरूर होना चाहिए, तुम्हारे स्वभाव के ऊपर वो और भी जचता…. कमाल के हो तुम, बातों में संतुलन, चेहरे पर तेज, और तुम्हारा अंदाज़… वाह!! तुमने मुझे काफी प्रभावित किया है।

दोनों अभी बात कर ही रहे थे कि आरव, अपस्यु को ढूंढता हुआ हॉल में पहुंच गया, और दूर से ही उसे हाथ दिखाने लगा। आरव को देखकर अपस्यु ने प्रकाश जिंदल को वहीं नमस्ते किया और सिन्हा जी के साथ बाहर…

आरव थोड़ा चिढ़ते हुए… "लावणी कहां है।"

अपस्यु:- मतलब तू मुझे ढूंढ़ने नहीं, बल्कि लावणी का पता पूछने आया था। वहीं उसके माता पिता बैठे थे, उनसे क्यों नहीं पूछा?

आरव:- ज्यादा होशियार मत बन, मैंने पूछा था सासू मां से, उन्होंने बोला सब अपस्यु का किया है वहीं जाने…

अपस्यु और सिन्हा जी दोनों एक साथ… "ओय होए, सासू मां"… फिर अपस्यु, आरव के गाल को थपथपा कर कहने लगा… "तू बेटा पार्टी एन्जॉय कर, वो भी आ जाएगी। हम दोनों जरा तुमलोग को देर से ज्वाइन करते है।"

आरव:- और वजह जान सकता हूं क्यों?

"छोड़ उसे बताने से क्या फायदा है छोटे, हम चलते है।"….. "हां सही ही कहा बापू।"….

दोनों आपस में बात करते आरव को छोड़ कर बार के ओर चल दिए। दोनों को एक साथ बार में जाते देखकर आरव जोर से चिल्लाते हुए कहने लगा… "दोनों, सीधा अपने कमरे में जाना, डिस्को में अाकर नौटंकी किए तो फिर देख लेना। दोनों का आज सर फोड़ दूंगा।"..

आरव दूर खड़ा चिल्लाता रहा और दोनों पीछे से उसे टाटा करते हुए बार में पहुंच गए….
 
Update:-68

आरव दूर खड़ा चिल्लाता रहा और दोनों पीछे से उसे टाटा करते हुए बार में पहुंच गए…. इधर दोनों बार में गए और आरव डिस्को में वापस आ गया। सोचा तो था कि ऐमी और स्वस्तिका से मिन्नतें करके बार में भेजेंगे, और दोनों को बार से उठाकर वापस लाएंगे। लेकिन यहां तो माहौल ही कुछ और था।

"मै शराबी, मैं शराबी" गाने की धुन बज रही थी और सभी पागलों की तरह नाचे जा रहे थे। तीनों लड़कियों का टकीला शॉट अपना काम कर रहा था। कुंजल, ध्रुव के साथ डांस करने में खोई थी और साची दोनों को नाचते देख हंस रही थी। वहीं स्वस्तिका और ऐमी को कोई पार्टनर नहीं मिला तो दोनों अकेले-अकेले ही नाचे जा रही थी।

आरव ऐमी को कहने तो आया था कि दोनों को बार से उठा कर यहां लाओ, लेकिन बेचारा ऐमी के हत्थे चढ़ गया। ऐमी उसके टाय को खींचकर अपने साथ पकड़ ली, वो चिल्ला-चिल्ला कर अपनी बात कहने की कोशिश रहा, लेकिन ऐमी कुछ सुनने के बजाय उसके साथ नाचने लगी…

एक तो आरव को उन दोनों के नौटंकी की टेंशन हो रही थी और ऊपर से लावणी कहीं नजर नहीं आ रही थी। आरव, ऐमी के साथ उसके कमर में हाथ डालकर गोल-गोल घूम ही रहा था कि उसे सामने से लावणी आती हुई नजर आयी। लावणी को देखकर ही, आरव सारी बातें भूलकर, बस उसे ही देखने लगा। आरव जब रुका, तब ऐमी उसे देखती हुई पूछने लगी कि क्या हुआ? प्रतिउत्तर में आरव के केवल मुस्कुरा रहा था।

उसके चेहरे की चमक सारी कहानी बयान कर गई। ऐमी पीछे पलट कर देखी और मुस्कुराती हुई आरव के कान में कहने लगी…. "बहुत प्यारी लग रही है, तू जा…" आरव ऐमी के पास से हटा और लावणी को आते हुए देखने लगा।

क्या लग रही थी वो, जैसे-जैसे लावणी अपने कदम बढ़ा रही थी, आरव का दिल जोड़-जोड़ से धड़कना शुरू हो चुका था। पारंपरिक भारतीय परिधान, लहंगा चुन्नी, काले भूरे रंग का मिश्रण, हाथों में लाल और हरे रंग की चूड़ियां, गले में वो चमचमाती हार, कान के बड़े बड़े झुमके जिसकी लड़ियां गालों को छुती हुई, चेहरे पर हल्की पाउडर और लाली, उसके ऊपर उसकी प्यारी मुस्कान… बन संवर कर ऐसे निकली कि वो आरव को घायल सी किए जा रही थीं।

मुस्कुराती वो आरव के ओर बढ़ने लगी, आरव भी मुस्कुराता उसके ओर बढ़ने लगा। इतने में ही बीच में जैसे भीड़ सा उमर आया हो। कुछ कबीर के दोस्त, कुछ ध्रुव के दोस्त और कुछ नीरज के। कुल मिलाकर एक ही वक़्त में 20-21 लड़के लड़कियां पहुंचे। कुछ तो डांस फ्लोर पर पैशन के साथ नाचने लगे और कुछ मुफ्त के दारू का मज़ा लेने लगे।

आरव इन सब को अनदेखा कर वापस से अपने लावणी का ध्यान करते हुए आगे बढ़ा, लेकिन भीड़ जब छंटी तब 2 लड़के लावणी के पास खड़े थे और लावणी का हाथ पकड़कर उसे डांस के लिए जिद कर रहे थे। आरव दोनों के बीच से, ठीक सामने से लावणी के पास पहुंचा और उसे गले लगाते हुए दोनो से कहने लागा… "दोस्त किसी और पार्टनर को ढूंढो, ये मेरी सोलमेट है।".. दोनों लड़के वहां से "सॉरी ब्रो" करते हुए निकल लिए।

लावणी, आरव के सीने से लगती हुई कहने लगी…. "ये हमारा फैमिली फंक्शन था ना फिर ये लड़के कहां से आ गए।"

"ये लोग भी फैमिली का ही हिस्सा होंगे इसलिए तो आए है, जान पहचान तो बाद में होती रहेगी।"… इतना कहकर आरव घुटनों पर बैठ गया और अपना हाथ आगे बढ़ा दिया।

लावणी मुस्कुराती हुई उसका हाथ थाम ली और आरव खड़ा होकर उसके उंगलियों को पकड़ कर एक पूरा रोल करते हुए अपने बाहों में लिया और उसके आखों में देखकर उसके होंठ को छूते हुए उसे खड़ा किया। इधर दोनों को साथ देखकर ऐमी ने म्यूज़िक का मूड बदला और रोमांटिक थीम चलने लगी।

दोनों गले में एक दूसरे के बाहें डाले एक दूसरे में डूबकर नाचने लगे। सब अपने पार्टनर के साथ डांस में खोए हुए थे, सिवाय साची के जो बस सबको नाचते हुए देखकर एन्जॉय कर रही थी। म्यूज़िक का मूड उप-डाउन हो रहा था और उसी के साथ नाचने वालों का पैशन भी उप-डाउन होता जा रहा था।

बीच-बीच में जान बूझकर कुंजल को टारगेट भी किया जा रहा था जिसे ध्रुव और साची दोनों ने देखा। ध्रुव को शायद ये सब अच्छा ना लगा। उन लोगों का रवैया देखकर वो कुंजल को लेकर डांस फ्लोर से बाहर आ गया और उससे माफी मांगने लगा। कुंजल मुस्कुराती हुई कहने लगी…. "कोई बात नहीं, पीए हुए हैं क्या किया जा सकता है।" फिर जबरदस्ती वो साची को ध्रुव के साथ भेज दी डांस करने।"..

अब कुंजल अकेली बैठे सबका नाचना एन्जॉय कर रही थी, और बीच-बीच में किसी के अति आग्रह पर डांस फ्लोर पर पहुंच जाती, लेकिन आज जैसे कुछ लोग तय करके आए हुए थे कि कुंजल को परेशान करना है, यह बात शुरू से साची और ध्रुव भी देख रहे थे और नोटिस कर रहे थे। ध्रुव एक बार आक्रोशित होकर उठा भी लेकिन साची ने उसे रोक लिया। साची, ध्रुव और कुंजल को लेकर तीनों साथ में ही बैठकर बातें करने लगी और तीनों ही लोगों का डांस एन्जॉय करने लगे।

कुंजल को लगा कहां वो कपल के बीच में आ रही है इसलिए वो उठने लगी वहां से, लेकिन साची उसका हाथ पकड़कर अपने पास बिठाती हुई कहने लगी…. "तू कहां चली। अपने अंदर जो सोच लेकर यहां से हट रही है वैसा सोचना भी नहीं। ध्रुव और मेरे लिए तुम यहां सबसे क्लोज हो, और तुम्हारे होने से हमारा हर मोमेंट्स हैप्पी ही होता है। क्यों ध्रुव?

ध्रुव:- बिल्कुल सही, वैसे भी हम दोनों को पास लाने का क्रेडिट तुम्हे ही तो जाता है कुंजल।

साची:- अरे ऐसी कोई बात नहीं। बस मेरा भी मन कर रहा है नाचने का, अपने भाई का एंगेजमेंट है, मुझे भी एन्जॉय करना है।

ध्रुव:- हे सेक्सी, तुम मेरे पास बैठी रहो, वहां जाने की जरूरत नहीं है।

कुंजल:- ओह हो, तो मुझे सेक्सी कहा जा रहा है, कहां कल तक तो ध्यान ना देते थे। साची देख ले अभी से ही चांस मारा जा रहा है।

साची:- अब बेचारा करे भी तो क्या करे। मेरे साथ होने के कारण किसी बाहर वाली के साथ चांस तो मार नहीं सकता। एक साली थी तो वो भी अपने होनेवाले के साथ बिज़ी हो गई। ले दे कर बेचारे के पास तू ही इकलौती ऑप्शन बची है।

साची की बात सुनकर तीनों ही हसने लगे और सामने के डांस का लुफ्त उठाने लगे। डांस फ्लोर पर तो ऐमी और स्वस्तिका ने आग लगाया हुआ था। दोनों की एनर्जी और डांस उसके पार्टनर भी एन्जॉय कर रहे थे जो शायद ध्रुव के ही दोस्तो में से थे।

डांस करके सब थक चुके थे। एक-एक करके सब वापस आने लगे और तीनों को ही घेरकर बैठने लगे। हर कोई थका था लेकिन आरव और लावणी बस एक दूसरे में खोए, एक दूसरे के गले लगकर, बस अपने इस पल को जी रहे थे, संगीत कैसा था वो तो शायद उनके कानों में भी नहीं जा रहा था।

सब लोग आरव और लावणी को ही देखने लगे और उनका एक दूसरे में खोना देखकर बस मुस्कुराए जा रहे थे।… "दोनों साथ में कितने प्यारे लग रहे है ना।".. साची खुश होती हुई कहने लगी…

स्वस्तिका:- कमाल के तो तुम दोनों भी लग रहे थे जब डांस कर रहे थे। वैसे साची तुम्हे देखकर तो आज मुझे, तुम्हे लाइन मारने का मन हो गया है।..

स्वस्तिका की बात सुनकर वहां मौजूद सभी लोग हंसने लगे। तभी वहां के संगीत में अचानक से तब्दीली आ गई और कुछ जाना पहचाना धुन जो ऐमी और स्वस्तिका सुन रही थी। जैसे ही ये धुन बजी, ऐमी और स्वस्तिका अचानक ही नजर इधर-उधर करके अपस्यु को ढूंढ़ने लगी…

कुंजल:- क्या हो गया, इतने टेंशन में क्यों आ गई अचानक?

स्वस्तिका:- ये बताओ अपस्यु कहां है?

ध्रुव:- अरे हां, आज हीरो तो दिखा ही नहीं मुझे भी, कहां है?....

ऐमी अपने सर कर हाथ दिए, सर को झुकाए कहने लगी… "आने वाले है दोनों, यह म्यूज़िक उसी के आने के पहले का संकेत है।"

साची:- कौन दोनों मै समझी नहीं।

ऐमी:- वो दो जो पहुंचते ही यहां के माहौल को जंग का मैदान बना देंगे।

कुंजल:- कौन दोनों ऐमी क्यों पहेली बुझा रही…

स्वस्तिका:- ऐमी के पापा, सिन्हा अंकल और अपस्यु ।

कुंजल:- हां तो उनके आने से तुम दोनों इतने परेशान क्यों हो? वैसे भी भाई ने कितना कुछ मिस कर दिया, काश वो यहां शुरू से होता, तो हम तीनो भी पूरा एन्जॉय कर लेते।

ऐमी मुस्कुराती हुई कहने लगी… "कुंजल चिल मार, तो पेश होने वाला है आप लोगों के सामने दुनिया कि सबसे एंटीक जोड़ी… जिसने अगर साथ में बैठकर बैठक लगा लिया, तो समझो कि बेड़ा गर्क। ये महफ़िल में कितने देर से ही क्यों ना पहुंचे, लेकिन जितनी देर भी रुकेंगे, पूरा अगला पिछला कवर कर देंगे…

साची:- इस तरह के इंट्रो के बाद तो मेरी जिज्ञासा अपने चरम पर है।

ध्रुव:- मै भी एक्साइटेड हूं।

कुंजल:- मुझ से तो बर्दास्त नहीं हो रहा है। ऐमी की बच्ची अगर तूने जैसा इंट्रो दिया है वैसा ना हुए ना तो देख लेना..

स्वस्तिका:- जितना बोले है उससे ज्यादा ही होगा, कम या ना होने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।

वहां के बैकग्राउंड म्यूजिक में तब्दीली आना शुरू हो चुका था। ना तो रोमांटिक सोंग बज रहा था, ना ही पॉप, ना ही पार्टी सोंग.. बल्कि इंटेसे म्यूज़िक वहां बजने लगा....

सबलोग डांस करते-करते रुक गए, और हल्ला करने लगे। सभी लोग डीजे बजाने वाले पर बरसने लगे और उनके जगह को घेर कर हल्ला करने लगे। लेकिन डीजे वाला भी अपने जगह से सबको खाली करवाते हुए इतना ही कहा… "अभी सर ने मैसेज किया है, वो आ रहे है। हमे जो निर्देश मिले है हम बस उन्हीं का पालन कर रहे।"… सभी नवजावं निराश होकर आने वाले को ही देख रहे थे… जिसमे कबीर और उसके दोस्त कुछ ज्यादा ही खफा लग रहे थे।

"बेबी ये कैसा म्यूज़िक बज रहा है, मुझे जरा भी अच्छा नहीं लग रहा।".. लावणी खोई सी आवाज़ में कहने लगी।

"तुम मुझे फील करो ना, ये तुम्हारी आवाज़ मुझे परेशान कर रही है। खामोशी को सुनो, ये कितनी प्यारी है।"… आरव लावणी के गले को चूमते हुए कहने लगा।

"उफ्फ ! अच्छा था ये, एक बार और।"… लावणी, आरव के किस्स के को फील करती मदहोश होती हुई कहने लगी..

"चटाक"… किस्स करने होंठ बढ़ रहे थे और कंधे के साइड से जो आरव का दायां गाल था उसपर अपस्यु एक थप्पड चिपका दिया… आरव को थप्पड करते ही बाहर बैठे सभी लोग अपना बड़ा सा मुंह खोलकर पहले तो अपनी प्रतिक्रिया दिए "कैसे इतने प्यारे कपल को कोई दिस्ट्रूब भी कर सकता है।" फिर अगले ही पल लावणी को लज्जकर वहां से भागते देख सब हसने लगे।

इधर अपस्यु और सिन्हा जी, अपने ही धुन में अंदर चले आ रहे थे। सिन्हा जी आगे डीजे के पास पहुंचे अपनी फरमाइश लगवाने और इधर जबतक आरव के गाल पर एक तमाचा पर गया। तमाचा पड़ते ही आरव तिलमिला कर हटा, लावणी भी चौंककर अपने अासपास देखी और अपस्यु को अपने करीब देखकर वो बेचारी मारे लाज के भाग गई।

इधर आरव, अपस्यु को गुस्से भरी नजरों से देखकर तेज तेज सासें लेने लगा…. "ओए लूक मत दे … लव यू भाई। तू तो मेरी जान है।"… अपस्यु, आरव के गले लगते उसे चूम लिया… आरव यहां कर भी क्या सकता था, वो बेचारा वहां से हटने में ही अपनी भलाई समझा और अाकर सबके पास बैठ गया।

जबतक आरव सबके पास आया, तबतक स्वस्तिका और ऐमी सबको इनके किस्से सुना चुकी थी। ऐमी और स्वस्तिका को छोड़कर तो बाकी सभी लोग जिज्ञासावश देखने लगे कि आगे ये दोनों क्या करते है। और इधर तीनों आरव, ऐमी और स्वस्तिका मुंह लटकाए आने वाले तूफान को सोचकर परेशान हो रहे थे।

ऐमी:- ध्रुव, क्या आप अपने दोस्तों को वहां से हटा लेंगे, मैं नहीं चाहती कि यहां कोई बात बिगड़े।

ध्रुव:- बात बिगड़ती है तो बिगड़ने दो ऐमी, वो मेरे दोस्त है, यदि मेरी बात ना समझ पाए तो फिर किस बात के दोस्त। उस दिन मैंने तुम दोनों का देसी राउडी गर्ल को खूब एंजॉय किया था, आज इन्हे करूंगा।

आरव, अपने सर पर हाथ रखते… "कोई ना, तुम नहीं भी चाहोगे तो भी ये तुम्हारी इक्छा पूरी कर देंगे।"

इधर सिन्हा जी जबसे गाना बजवाना बंद करवाए थे, वहां के कुछ लड़के-लड़कियां हल्ला करने पर उतारू हो गए थे, खासकर कबीर के दोस्त जो बार काउंटर पर पी भी रहे थे और हल्ला भी कर रहे थे। तभी उनमें से एक ने अपस्यु का कॉलर पकड़कर पूछने लगा… "डीजे क्यों बंद है।"..
 
Update:-69

ध्रुव:- वाउ अब एक्शन शुरू होगा…

आरव:- इतने पर कुछ ना होगा, उसे थप्पड मारो या डंडा अभी अपने धुन में है वो..

ध्रुव:- लेकिन उसने गीरेवान पकड़ रखा है..

आरव:- कोई फर्क नहीं पड़ता भाई.. देखते जाओ..

तभी उस माहोल में पहला गीत बजना शुरू हुआ… "पीले पीले ओ मेरे राजा।".. और सिन्हा जी बार काउंटर से 2 बोतल सर पर उठाकर नाचते हुए चल दिए अपस्यु के पास…

"ले छोटे एक तेरे लिए।"… "ना बापू मुझे मेरा कॉकटेल ही चाहिए".. "अरे बोल दिया है, बीच-बीच में वो सर्व करता रहेगा तू तो क्लासिक बेवड़ा सोंग का मज़ा ले और मेरे साथ ठुमके लगा।"..

फिर क्या था अपस्यु भी बॉटल उठाया, और अपने सिर पर रखकर नाचने लगा और नाचते-नाचते पीने लगा। उनका नाचना और पीना देखकर क्या गुस्साए और क्या जिज्ञासा से देखने वाले, सभी जोड़-जोड़ से ठहाका लगाकर हंसने लगे।

डांस फ्लोर कर अब भीड़ ना के बराबर हो चुकी थी। कबीर और नीरज के दोस्त बस साइड होकर बड़बड़ा रहे थे, बीच में केवल ध्रुव के 2-3 दोस्त ही बचे थे जो इनके देसी डांस को पूरा एन्जॉय करते हुए इनको कॉपी कर रहे थे और नाच रहे थे। इतने में कबीर गुस्साए हुए आया और अपस्यु को पकड़ कर धक्का देकर गिरा दिया।

ध्रुव:- अब तो पक्का यहां बवाल होगा।

ऐमी:- वहां देखिए क्या हो रहा है..

डीजे को पहले से निर्देश मिला हुआ था, जैसे ही कोई गिरे, नागिन की धुन शुरू होनी चाहिए। और सामने जो डांस फ्लोर पर चल रहा था, उसे देखकर ध्रुव भी खुद को रोक नहीं पाया, अपनी जगह छोड़ने से। सब अपस्यु के ऊपर अपने रुमाल से बीन बजा रहे थे और अपस्यु नीचे लेटकर सबको नागिन डांस दिखाते हुए डसने की कोशिश कर रहा था।

ध्रुव भी उनके बीच सामिल होता बीन बजाने लगा और अपना एक हाथ देकर अपस्यु को उठाया.. अपस्यु उठकर उसके गले लगाते हुए नाचने लगा.. और साथ में सिन्हा जी भी झूम रहे थे। कुछ देर नाचने के बाद ध्रुव फिर से सबके बीच बैठते हुए कहने लगा…. "ये पक्का क्रेज़ी है। मै भी किसी दिन फुल टल्ली होकर इनकी महफ़िल ज्वाइन करूंगा।

ध्रुव इतना बोल ही रहा था कि आरव, ऐमी और स्वस्तिका चौंक कर खड़े हो गए। डांस फ्लोर पर एक लड़का अपस्यु का गिरेवान पकड़ कर उसे एक थप्पड लगा चुका था और दूसरा लड़का सिन्हा जी के गीरेवां पर हाथ डाले हुआ था।

ध्रुव:- चिल यार ये दोनों काफी फ्रैंडली है…

अभी ध्रुव इतना कह ही रहा था कि साउंड बॉक्स पर बज रहे इतने लाउड म्यूज़िक के बीच एक जोरदार तमाचा पड़ने की आवाज़ सबने सुनी। जिस लड़के ने सिन्हा जी का कॉलर पकड़ा था, वो बेहोश नीचे परा था और इसी के साथ वहां गाना बजना बंद हो चुका था। … "साले बापू का कॉलर पकड़ने की हिम्मत।"…. "सबश छोटे, कब से कह रहा था एक्शन कर तू सुन ही नहीं रहा था।"..

इतना कहकर सिन्हा जी बार काउंटर पर आ गए और बैठकर हवा में जाम लहराते हुए शाबाश-शाबाश करने लगे। एक-एक करके कबीर के दोस्त आते रहे और अपस्यु का एक पॉवर पंच खाकर नीचे बेहोश होने लगे। इतने में कबीर भी चिल्लाते हुए अपस्यु को मारने पहुंचा… अपस्यु ने उसका हाथ पकड़ा और मारने के लिए हाथ उठाया ही था कि साची और लावणी दोनों "नहीं" करती खड़ी हो गई।

अपस्यु ने एक नजर साची को देखा, कुछ पल के लिए उसकी नजर साची पर रुकी और वो अपना चश्मा निकालकर आखों पर लगा लिया… "तू तो घर का आदमी लगता है। साले ये तेरे ही दोस्त है जो मार खाकर पड़े हैं? जा उठाकर ले जा, वरना देर हुई तो हड्डियां जुड़ने में समस्या भी होगी…. अरे बापू पूरा मूड ऑफ हो गया। रूको मै भी आया।"..

अपस्यु जब उस जगह को छोड़कर जा रहा था, नीचे जमीन पर कई लड़के पड़े-पड़े कररह रहे थे। अपस्यु बार काउंटर से अपना फेवरेट को कॉकटेल लिया और उसकी चुस्कियां लेते हुए सबके बीच आ गया… "तुम लोगों को क्या हुआ? कुंजल, बेटा तेरा मुंह क्यों उतरा है? कितने खुश होकर तो तू निकली थी ऐमी और स्वस्तिका के साथ।"

कुंजल:- आप की ये बेवेडे वाली हरकत मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आ रही। ऊपर से यहां झगड़ा भी कर रहे हो।

अपस्यु:- अरे अरे अरे.. बेटा उन लड़कों ने बापू का कॉलर पकड़ा था। अब मुझ तक रहता तो कोई बात नहीं थी, लेकिन हिम्मत तो देखो उनकी…

कुंजल:- अच्छा और आप दोनों ने क्या किया, यहां आकर पहले तो माहौल को आप दोनों ने ही खराब किया था ना… जाओ मुझे बात ही नहीं करनी आप से..

"आह ये लड़कियों का इमो ड्रामा… ओय बापू बहना नाराज हो गई है।"… "क्या बोल रही है वो।"….. "कह रही है हम बेवड़े है।"…

ऐमी समझ गई अब इनकी जुगलबंदी खत्म नहीं होगी और ये दोनों यहां से सबको भागकर ही मानेंगे। ऐमी अपनी हाई हिल उतार कर खाली पाऊं डांस फ्लोर तक पहुंची और बिना म्यूज़िक के ही उसने अपना पहला मूव दिया.. उसके हवा में किए फ्लिप को देखकर डीजे ने तुरंत ही रॉकिंग म्यूज़िक शुरू कर दिया और ऐमी उसके धुन पर नाचती हुई इशारों में अपस्यु को बुलाने लगी..

अपस्यु भी 20 फिट का घुटनों पर स्लाइड करता हुआ ऐमी के पास पहुंच गया। अब तक लोगों ने बेवड़ों को देखा था, अब दातों तले उंगलियां दबाकर 2 प्रोफेशनल डांसर्स को देख रहे थे। जो ही माहौल ऐमी ने वहां बनाया.. अपस्यु उसके इशारे पर बस नाचता जा रहा था और उनके हर मूव पर लोग हूटिंग करते हुए उन्हें घेर लिए।

आरव के मायूस चेहरे पर भी वापस से खुशियां छा गई। वो भी लावणी को लेकर पहुंच गया… एक-एक करके वापस से वहां फिर से महफ़िल जमने लगी। अपस्यु ऐमी को देखकर मुस्कुराया और मुस्कुराते हुए कहने लगा… "अपनी जादूगरी दिखा ही दी ना तुमने।"..

ऐमी:- आज फिर नशे में होने का नाटक दिखा ही दिया तुमने… पूछ सकती हूं आज किसे टारगेट किया था।

अपस्यु:- साची के भाई को, उसने आरव को सबके बीच जो मारा था।

ऐमी:- फिर छोड़ क्यों दिए, साची के खातिर क्या?

अपस्यु:- हां कह सकती हो, जाने दिया उसे…

ऐमी:- अच्छा किया इन्हे मारकर, वरना मै प्लान कर रही थी, पार्टी खत्म होने के बाद।

अपस्यु:- किसके साथ किया था इन लोगों ने अपनी ऊटपटांग हरकते..

ऐमी:- छोड़ो ना क्या करोगे जानकर, गलती की बराबर सजा मिली है। वैसे भी बदला लेने आएंगे ही, बाकी हिसाब तब पूरा करेंगे..

अपस्यु:- मैंने दूर से ही कुंजल का चेहरा पढ़ लिया था, चिंता मत करो दोबारा नहीं आने वाले। होगा तो पुलिस ही आएगी, क्योंकि सबको तोड़ा हूं।

ऐमी:- उसकी नजरें तो पढ़ लिए, मेरी नजर नहीं पढ़ पाए..

अपस्यु:- उसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा, वैसे ध्रुव की क्या रिपोर्ट है।

ऐमी:- क्लीन है, अपने बाप का बिजनेस बस देखता है, शक इसके दीदी और जीजा पर है।

अपस्यु:- मुझे भी उन्हीं कर शक है। देखो अब क्या होता है। आग तो लगा ही दिया हूं अब बस उसकी जलन देखनी है।

ऐमी:- लास्ट मूव..

दोनों ने फिर एक फाइनल मूव दिया डांस का और सब लोग तालियां बजाते हुए थके नहीं। … पार्टी पूरी तरह से खत्म हो गई, अपस्यु सिन्हा जी को लेकर उन्हीं के कमरे में सोने चला गया। उसके पीछे पीछे बाकी सब लोग भी आ रहे थे।

साची भी ध्रुव के साथ चल रही थी और चलते-चलते बस अपस्यु के बारे में ही सोच रही थी। ध्रुव भी अपस्यु के तारीफों के कसीदे पढ़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा था। उसकी फाइटिंग, उसका डांस, उसका बेवड़ा रूप, हर बात का वो फैन हुआ जा रहा था। साची अपने कमरे में पहुंची और ध्रुव को बाय बोलकर अपने बिस्तर पर बैठ गई।

कुछ ही देर में लावणी भी वहां पहुंच गई और साची को ऐसे अकेले सोच में डूबा देखकर उससे पूछने लगी… "क्या हुआ दी, आप ऐसे मायूस क्यों बैठी हो।"..

साची:- यहां भी वो किसी लड़की को देखता तक नहीं। उसकी अपनी ही दुनिया है और उसी में खुश रहता है। मेरा दिल आज भी उसके लिए धड़कता है, लेकिन उसका दिल शायद सबके लिए धड़कता है।

लावणी:- ये आप क्या बडबडा रही हैं, मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा।

साची, लावणी को देखकर हंसती हुई कहने लगी… "आज तू बहुत प्यारी लग रही थी। ऐसा लगा जैसे अचानक से बड़ी हो गई, पहले तो बच्ची ही दिखती थी।"

लावणी:- ओह हो तो आप ने है आरव को ये सब सिखाया था हां।

"क्या, आरव भी तुझे यहीं बात बोला क्या?" .. साची हंसती हुई पूछने लगी

लावणी:- हां बिल्कुल दीदी.. आप की हंसी बता रही है कि आपने ही उसे सब सिखाया होगा…

साची उसकी बात कर फिर से हंसती हुई कहने लगी…. "अच्छा एक बात बता, तुझे पता है कि मैं, तुम्हे ऐसा क्यों कही।"

लावणी:- मुझे क्या पता, आप को लगा होगा इसलिए आप ने ऐसा बोला…

साची फिर से हंसती हुई उसे आइने के पास ले जाकर खड़ी कर दी और लावणी के बदन पर प्वाइंट करती हुई कहने कहीं…. "जब तू अपने ऊपर वो पूरे ढिले कपड़े दिन भर डाले रहती थी तब कुछ पता भी नहीं चलता था कि तू कितनी बड़ी हो गई.. और आज देख खुद को। अब समझी तुम्हे ऐसा क्यों कहा जा रहा है।" बेचारी को जब समझ में आया तब शर्म के मेरे उसका चेहरा शूर्ख लाल हो गया। वो तो सीधा अपना बिस्तर ही पकड़ ली।…

अगली सुबह जब नंदनी जागी… उसके पास कोई नहीं पहुंचा सोने। रात में ना तो स्वस्तिका उसके पास लौटी और ना ही कुंजल। नंदनी समझ गई कि तीनों ऐमी के कमरे में सोई होगी। नंदनी तीनों को ढूंढ़ते उसके कमरे में पहुंची, लगातार बेल बजाने के बाद भी कोई जवाब नहीं।

काफी देर वहां खड़े रहने के बाद जब कोई भी जवाब नहीं मिला, फिर नंदनी आरव के कमरे में गई लेकिन वहां भी कोई जवाब नहीं। एक-एक करके नंदनी ने ने सारा कमरा छान मारा, लेकिन किसी का कुछ पता ही नहीं था। आखरी में केवल एक कमरा बचा था वो था सिन्हा जी का कमरा।

यहां तो कमाल हो गया। कमरा खुला था और सभी एक ही कमरे में, कोई यहां परा था कोई वहां परा। नंदनी ने कमरा लॉक किया और वीरभद्र को सबके ऊपर पानी डालने बोली… सब लोग लगभग रात के 1 बजे सोए थे और सुबह के 5 बजे नंदनी सबके ऊपर पानी डलवा रही थी।

कच्चे नींद से उठकर सब वीरभद्र को गालियां ही दे रहे थे, और वीरभद्र अपनी उंगली नंदनी के ओर इशारा करते दिखा देता… अब सामने नंदनी को देखकर कोई क्या ही कहे… सभी जाग रहें थे और सर पकड़ कर वापस सो जाते। नंदनी अनपर लगातार बारिश करवाती रही, अंत में ना चाहकर भी सबको उठना ही परा। नंदनी ने बिना देर किए सबको आधे घंटे में अपने कमरे पहुंचने के लिए बोली ..

ठीक आधे घंटे बाद सभी लोग नंदनी के कमरे में इकट्ठा हो गए, सिवाय अपस्यु के। नंदनी ने अपस्यु को ना देखकर वीरभद्र को उसे बुलाकर लेने के लिए कहने लगी और बाकी इधर के लोगों को देखने लगी…

आरव, थोड़ा चिढ़ते हुए… "ये अजीब दादागिरी है, सुबह-सुबह हम सबको जगा कर क्या यहां सत्संग करवाएंगी।"…

नंदनी:- तू इधर आ..

आरव:- नहीं, मै यहीं ठीक हूं, आप वहीं से जो बोलना है वो बोलिए…

नंदनी:- ये बताओ कि कल तुमलोग में से किसने नहीं पिया था?

सबने एक साथ हाथ ऊपर उठा दिया… नंदनी होटल से मंगवाएं सीसी टीवी फुटेज चलाती हुई पूछने लगी… "अब बताओ किस-किस ने नहीं पिया था?"

इस बार केवल एक हाथ आरव का उठा बाकी सारे हाथ नीचे…. "मतलब जो पियक्कड़ था उसने शराब हाथ नहीं लगाई, और तुम तीनों ने पिया था।"..

"नहीं आंटी दरअसल हुआ ये था कि कल आरव के एंगेजमेंट की पार्टी थी तो थोड़ा मस्ती के लिए हमने लिया था… बस थोड़ा।"…. ऐमी अपनी बात कहती हुई आगे चली आयी और जैसे ही नंदनी के पास पहुंची उसका एक झन्नाटेदार थप्पड खाकर अपनी जगह पर…

ऐसे ही कुछ हाल कुंजल और स्वस्तिका का भी हुआ, दोनों को भी नंदनी के हाथ का गुड मॉर्निंग विश मिल गया था। अंत में नंदनी ने सबको चेतावनी देती हुई कहने लगी…. "दोबारा यदि किसी को भी मैनें शराब पीते हुए पाया, तो उसे 21 दिनों के लिए घर में बंद कर दूंगी। 21 दिन तक घर से क्या अपने कमरे से भी वो बाहर निकल नहीं पाएगा या पाएगी। जरा भी शर्म है तीनों को, पीने के बाद बेहोश होकर अपने कमरे तक नहीं पहुंच पाई। और अभी तक वो बेवड़ा कहां परा हुआ है। कहां है तुम सबका गुरुजी अपस्यु, उसे तो मै आज बताती हूं।"

आरव:- वो हमारे साथ कमरे में कहां था?

सब एक दूसरे का मुंह देखते हुए सोचने लगे और वहां से दौड़े-दौड़े होटल के अपने सभी कमरों में ढूंढ़ने लगे.. अपस्यु का कहीं कोई पता नहीं। हर किसी को कॉल लगाकर पूछ लिया, अपस्यु का कहीं कोई पता नहीं। उसका फोन भी सिन्हा जी के कमरे में ही परा था। सब लोग वापस नंदनी के कमरे में पहुंचे और हर किसी के नजरों से साफ पता चल रहा था कि किसी को भी अपस्यु का पता नहीं।

अभी सब एक दूसरे को सवालिया नजरों से देख ही रहे थे कि हॉस्पिटल से कॉल आया। यह कॉल पार्थ का था, अपस्यु की खबर देते हुए उसने सबको तुरंत हॉस्पिटल पहुंचने के लिए बोला….
 
Update:-70

अभी सब एक दूसरे को सवालिया नजरों से देख ही रहे थे कि हॉस्पिटल से कॉल आया। यह कॉल पार्थ का था, अपस्यु की खबर देते हुए उसने सबको तुरंत हॉस्पिटल पहुंचने के लिए बोला….

कोई समझ नहीं पा रहा था कि हुआ क्या है? नंदनी तो अलग ही डर के शाये में चली गई, उन्हें अपस्यु की बातें याद आने लगी, "हमारे परिवार कुछ कातिल यहां है।".. एक अनचाहा डर की कहीं उन कातिलों में से किसी को अपस्यु के बारे में पता तो नहीं चल गया, जिसने अपस्यु के साथ कुछ बहुत ही बुरा किया हो।

नंदनी सदमे से धम्म से गिरी। सभी लोग नंदनी के ओर दौड़े, उन्हें संभला और होश में लाने की कोशिश करने लगे। इधर सभी लोग नंदनी को संभालने में लगे हुए थे, उधर कुंजल गुस्से में निकली और सीधा कबीर के कमरे का दरवाजा खटखटाने लगी। वो भी देर रात सोया था, नींद में ही उसने दरवाजा खोला, और दरवाजे पर कुंजल को देखकर उसे कहने लगा… "तू है, क्या चाहिए।"

कुंजल पर गुस्सा पहले से सवार था, उसने दरवाजे पर जोड़ की एक लात मारी और पूरा दरवाजा खुल गया। दरवाजा तेज से खुलने के कारन कबीर के पाऊं में चोट लगी और वो तेज दर्द में चिल्लाते हुए कुंजल के कंधे को पीछे से पकड़ा।

कुंजल अपने हाथ कंधे तक लाती उसके उंगली को पकड़ी और तेजी से मुड़ते हुई, उसके पकड़ में आयी उंगलियों को उल्टा घुमा कर तोड़ दी। फिर नजर ईधर-उधर दौड़ाती हुई उसे मारने के लिए कोई हथियार ढूंढ़ने लगी। पास में ही पर्दे के ऊपर रोड लगा हुआ था। कुंजल उसे तेजी के साथ निकाली और पहले तो दरवाजा बंद की, फिर कबीर के पाऊं पर इतना तेज मारी की वो जहां था वहीं बैठ गया।

कबीर जैसे ही बैठा, उसे एक लात मारकर कुंजल ने लिटाया और जो ही उसके पीठ को उधेड़ी वो, अपनी चैरिटी में उसने फिर कोई कसर नहीं छोड़ी। कुंजल रोड वहीं पटकती हुई उसे कहने लगी…. "अभी सिर्फ शक है कि कल रात तुमने कुछ ऐसा किया कि मेरा भाई अभी हॉस्पिटल में है। मेरे दोनों भाई केवल परिवार और रिश्तों का लिहाज करके तुझे छोड़ते आ रहे है, लेकिन मै आरव या अपस्यु नहीं हूं। एक बार यदि मुझे पता चला ना की तेरे वजह से मेरा भाई हॉस्पिटल में है तब तो तू सोच लेना, आज बंद कमरे में मारी हूं, बाद में जहां मिलेगा वहां मारूंगी मारकर हॉस्पिटल भी खुद ही पहुंचाऊंगी और जब तू ठीक होकर आएगा तो फिर मारकर तुझे हॉस्पिटल में एडमिट करवाऊंगी।"

कुंजल बड़े गुस्से में वहां से निकली और वापस कमरे में आ चुकी थी। नंदनी पर छींटे मारकर उसे जगाया गया। जैसे ही वो जागी अपने बेटे को देखने के लिए छटपटा गई। लगभग रोई सी आवाज़ में वो जल्दी से अपने बेटे के पास ले चलने की विनती करने लगी। जो जिस हाल में थे, वैसे ही वहां से भागे-भागे निकले। पार्थ के दिए हुए पते पर सभी पहुंचे।

तेजी के साथ भागते हुए सभी अंदर पहुंचे।अंदर पहुंचकर जैसे ही थोड़ा आगे बढ़े, अचानक ही आरव के कदम रुके। 2 कदम अभी ऐमी और स्वस्तिका भी बढ़े थे कि वो दोनों भी जहां थे वहीं रुके…. "कुंजल, मां, आप दोनों जहां है वहीं रुको।".. आरव वहां के माहौल का चारो ओर से जायजा लेते हुए कहने लगा।

नंदनी और कुंजल पीछे मुड़ कर जिज्ञासावश पूछने लगी… "कहां है सोनू (अपस्यु)"…

स्वस्तिका:- आप समझी नहीं यह एक जाल है, हमे फंसाया गया है, आप दोनों हमारे पीछे आ जाइए।

कुंजल:- क्या कुछ ऐसा है जो हम सीधे-सीधे समझ जाए या फिर ज़िन्दगी हमारी पजल सॉल्व करने में ही बीत जाएगी।

आरव:- मां, कुंजल.. अपस्यु बिल्कुल ठीक है, इसलिए दोनों अपना चिंतन छोड़ दीजिए। अब ये सब क्यों हो रहा है उसका इकलौती वजह वो पार्थ है, अंत में ही पता चलेगा वो ऐसा कर क्यों रहा है?..

"यहां जो दिखता है, मात्र एक भ्रम है, अभी एक पल में कोई पास है, तो अगले पल ना जाने कहां।"….. आरव, नंदनी और कुंजल से बात कर ही रहा था, इसी बीच उस जगह की रौशनी चली गई और उस जगह पर ये बातें गूंजने लगी। आवाज़ गूंजना बंद हुआ और पास में ही एक लड़के की इमेज उभरी जो धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा…

सभी लोग उस उस इमेज के पीछे चल दिए और आगे अंधेरा ही अंधेरा था। किसी को कुछ भी नजर नहीं आ रहा था, बस एक दूसरे को सुन रहे थे। तभी उस जगह एक फोकस लाइट जली…. जो सीधा स्वस्तिका के ऊपर थी।

"मिलिए हमारे बीच की सबसे खूबसूरत और प्यारी सी लड़की से, जिससे आप जितनी बार भी मिलो कुछ नया देखने जरूर मिलेगा। मासूम लेकिन खतरनाक, जिद्दी लेकिन तय ना कर सको की जिद भी किया इसने, मोस्ट फैशनेबल लेकिन कभी सजती संवरती नहीं.. मिलिए हमारी बर्थडे गर्ल …. स्वस्तिका से।"…

बैकग्राउंड से इतना चलने के बाद वहां पूरी रौशनी हुई। हैप्पी बर्थडे का म्यूज़िक बजता हुआ, ठीक सामने पार्थ और अपस्यु जो खड़ा-खड़ा मुस्कुरा रहा था। स्वस्तिका दोनों के सरप्राइज पर मुस्कुराती हुई सबको देख रही थी और सभी लोग उसे घेर कर बधाइयां देने लगे। दीप जले, केक कटा, सबने खूब सेलीब्रेट किया और जब सब खुशियां बांटा जा रहा था उसी बीच नंदनी पार्थ के पास पहुंची।

पार्थ नंदनी को देखते ही उसके पाऊं छु लिए और दोनों कान पकड़ कर माफी भी मांगा। नंदनी उसे इशारों में थोड़ा नीचे झुकने कहीं, जैसे ही वो नीचे हुआ… एक थप्पड उसे चिपका दी। उसकी हालत देखकर सब हंसने लगे…. फिर सब जोर जोर से चिल्लाने लगा.. कल रात का सबसे बड़ा मुजरिम अभी बाकी है…

फिर क्या था नंदनी उसका स्वागत भी उसी अंदाज़ में कि। इतने थप्पड अपस्यु को आज तक कभी एक साथ नहीं पड़े थे। वहां जैसे एक परिवार, पूरा हो रहा था। सब लोग आपस में मिल रहे थे, गले लगकर खुशियां बांट रहे थे। पूरा दिन सभी लोग बाहर ही रहे। पूरा परिवार एक होकर आज स्वस्तिका के लिए खुशियां माना रहा था। सबके बीच आज वही स्पेशल गर्ल बनी हुई थी।

शाम के 4 बजे सभी लोग वापस आए। वापस आने के क्रम में ही ध्रुव का संदेश अपस्यु को मिला जिसमें उसे और ऐमी को शाम का खास आमंत्रण मिला हुआ था। ठीक यही संदेश ऐमी के पास भी पहुंचा हुआ था।.. खैर दोनों ही ये संदेश देखकर बिना किसी प्रतिक्रिया के सभी के साथ वापस लौट गए।

सभी रात देर से सोए थे और सुबह जल्दी ही उठकर निकले, सब लोग थकान में चूर अपने अपने कमरे में चले गए सोने। शाम को तकरीबन 7 बजे ऐमी उठकर बिल्कुल कातिलाना अंदाज में तैयार होने लगी, जब वो आधी तैयार हुई थी तभी कुंजल उसके कंधे के ऊपर लटकती हुई कहने लगी… "कहीं बाहर जा रही हो क्या?"..

ऐमी:- हां बाहर तो जा रही हूं, लेकिन इतना चहक कर मेरे पास खड़ी हुई और सिर्फ इतना सा सवाल तुम्हारे मन में कैसे?

कुंजल:- ठीक है मै सीधा-सीधा कह देती हूं। तुम में मुझे अपनी भाभी नजर आ रही है, और मुझे कुछ नहीं समझना कि तुम दोनों दुनिया को क्या बताते हो।

ऐमी, कुंजल की बात पर मुस्कुराती हुई अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की और तुरंत ही तैयार होकर अपस्यु के पास निकल गई। लॉबी के आधे रास्ते में ही थी कि अपस्यु भी तैयार होकर उसी के पास आ रहा था। दोनों एक दूसरे को दूर से ही देखकर हसने लगे और ध्रुव के घर निकल लिए।

ऐमी के जाते ही कुंजल भी थोड़ा बहुत तैयार हुई और वो स्वस्तिका को सोते छोड़कर आरव के कमरे में चली आयी। आरव अब तक सोया हुआ था, वो अपने भाई को एक नजर देखी और उसे भी सोते हुए छोड़कर वीरभद्र के कमरे में चली आयी।

कुंजल:- क्या वीरे जी, क्या कर रहे है।

वीरभद्र:- कुछ नहीं बस ऐसे ही बैठा हुआ था, आप सब आज सुबह से कहां गए थे।?

कुंजल:- मेरी बहन का आज बर्थडे है, वही सुबह से सेलीब्रेट कर रहे थे।

वीरभद्र:- ओह ! और मुझे छोड़ गए.. यहां मै पूरा दिन ऊब गया बैठे-बैठे, कोई काम ही नहीं था।

कुंजल:- सॉरी वीरे जी, वो भाई ने ऐसा सरप्राइज प्लान किया था कि हमलोग बिना प्लान के ही निकाल गए होटल से। वैसे कोई बात नहीं है जी, आप दिन भर बोर हुए लेकिन शाम आप की हसीन होगी। चलिए..

वीरभद्र:- कहां चलना है?

कुंजल:- आप सवाल बहुत करते है वीरे जी, अब जल्दी से तैयार होते है या फिर मै नाराज हो जाऊं आपसे।

वीरभद्र:- तैयार ही तो हूं, अब और कितना तैयार हो जाऊं।

कुंजल वीरभद्र के साथ बार में चली आयी। बार को देखकर ही वीरभद्र को चक्कर आने शुरू हो गए, वो घबराकर कुंजल से पूछने लगा… "कुंजल जी, सुबह का भूल गई, जो यहां आयी है।"

कुंजल:- अरे घबरा क्यों रहे है वीरे जी, अभी सिर्फ 7.30 बजे है, 3-4 घंटे में तो पूरा नशा ही उतर आना है।

वीरभद्र:- एक बात मै सच सच कहना चाहूंगा, मैंने आज से पहले इतनी खतरनाक लड़की से पहले कभी नहीं मिला।

कुंजल:- अच्छा, ऐसा है क्या? तो जरा बताइए किस तरह की लड़कियों से आज तक आपकी मुलाकात हुई है।

वीरभद्र:- आप को छोड़कर मेरी मां, मेरी बहन और गांव की कुछ लड़कियां बस।

कुंजल:- "हीहीहीहीहीही… ऐसी बात है क्या? अच्छा ये बताइए की वो लड़की कैसी लग रही है।"… कुंजल सामने एक हॉट लड़की के ओर इशारे करती हुई पूछने लगी।

वीरभद्र थोड़ा शर्माते हुए… "क्या कुंजल जी आप भी ना"…

कुंजल:- अरे इतना शर्मा क्यों रहे है, थोड़ा मर्दों वाली फीलिंग लाइए…

"और मर्दाना जोश भी इसे दिखाओ, कोई मिल नहीं रहा तो छटपटा रही है।"… कबीर दोनों के बीच दखलंदाजी करते हुए कहने लगा…

वीरभद्र उसकी बदतमीजियों पर आग बबूला होता अपनी जगह से उठकर उसकी ओर बढ़ा ही था… "बैठ जाओ वीरे जी, इसकी कुटाई आज मैंने की है, उसी का भड़ास निकल रहा है, एक लड़की से पीटा है, किसी तरह भड़ास तो निकलेगा ही।"

वीरभद्र:- हाहाहाहा.. ओह ऐसी बात है क्या, वैसे कुंजल जी खातिरदारी पूरी तरह की या कुछ कमी रहा गई थी?

कुंजल:- इसकी बहनों के वजह से छोड़ दी वीरे जी, वरना खातिरदारी में तो कोई कमी नहीं छोड़ने वाली थी। वैसे भी इसके जगह पर, इसी में घर में घुस कर मैंने इसे मारा है वीरे जी, अब इससे ज्यादा और क्या मै और क्या हाईलाइट बताऊं। लगता है थोड़ा कम मार खाया था, इसलिए ऐसी छिछोड़ी हरकत पर उतारू है।

कबीर:- तुझे तो मै वो सबक सिखाऊंगा की तू भी क्या याद रखेगी?

वीरभद्र:- सुन बे छिपकली की कटी हुई दुम, ज्यादा फड़फड़ा नहीं। तू सबक सीखाने की सोचने से पहले जरा इनके बैकग्राउंड का इतिहास उलट लेना। जब इनकी मां ने दहरा था तब तेरा बाप की घिघी नहीं निकली थी। कुंजल जी ने तेरे घर में घुस कर मारा। अभी तो तूने केवल औरतों का जलवा देखा है तो बिलबिला गया, कहीं इसके भाई ने तुझे सीरियसली ले लिया ना, फिर तू खुद को कोसेगा "की मैंने अपने बड़बोलेपन के कारन ये क्या कर दिया।" अब इससे पहले कि मेरा माथा घूम जाए और मै भूल जाऊं की तू आरव का कोई रिश्तेदार है कट ले यहां से।

कुंजल सिटी बजती हुई कहने लगी… "लव यू वीरे जी क्या डायलॉग मारा है। अब बस भी करो, वरना डर के मारे कहीं इसकी सूसू ना निकल आए।

दोनों कबीर पर हंसते हुए लगातार तंज कसे जा रहे थे। कबीर एक बात बोलता और दोनों मिलकर उसे छिल देते। इस शित युद्ध में तो कबीर कहीं दूर-दूर तक खड़ा ना हुआ इन दोनों के सामने और ऐसी भारी बेइज्जती दोनों ने कर डाली कि कबीर बिलबिला कर वहां से भाग गया।

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इधर कुंजल जब आरव के कमरे से निकली, उसके कुछ देर बाद ही लावणी चुपके से आरव के कमरे में दाखिल हुई। आरव वहां अकेला लेटा हुआ था। लावणी उसे सोते देख, वो भी उसके पास जाकर लेट गई और अपना चेहरा बिल्कुल आरव के चेहरे के सामने रखकर, उसे सुकून से सोते हुए देखने लगी।

बहुत दिलकश और मासूम लग रहा था आरव। आरव के सकून से सोने को मेहसूस करती हुई लावणी अपनी उंगलियां उसके चेहरे पर चलाने लगी। उंगलियों के स्पर्श से अराव की आखें खुल गई, और अपने नजरों के सामने अपने कम्बल में लावणी को देखकर, उसने अपनी पलकें 2 बार झपकी, और उसे प्यार से देखते हुए मुस्कुराने लगा। लावणी भी खामोशी से उसे देखती हुई प्रतिक्रिया में मुस्कुरा रही थी। आरव मुस्कुराते हुए धीमी आवाज़ में "आई लव यू" कहकर उसके चेहरे पर अपनी उंगलियां चलाने लगा।

लावणी के गुदगुदाते अरमान, और वो खिलकर कुछ पल के लिए हंसी। हंसती हुई वो अचानक ही खामोश हो गई और ध्यान से आरव का चेहरा देखती हुई, उसके होंठ पर अपने होंठ रख उसे प्यार से चूमने लगी। आरव भी उसे चूमते हुए अपने हाथ और पाऊं के बंधन में उसे जकड़ते हुए, धीरे-धीरे पकड़ बनाने लगा। "आऊच! ऐसे कौन करता है।"… लावणी आरव की जकड़ में कसमसाती, किस्स को तोड़ती हुई अपनी आखें दिखाती उसे डांटने लगी।

आरव अपने बंधन खोलते उसके होंठों पर किस्स करते हुए अपने हाथ उसके पीछे रखते, उसके नितम्बों को अपने हाथों से जकड़ दिया। लावणी फिर से किस्स तोड़ती हुई उस घूरने लगी… "ये आज चल क्या रहा है, हां।"..

आरव:- ऑफ ओ.. जो भी कहना है वो किस्स करती हुई कहो, ऐसे अधूरे किस्स में मज़ा नहीं आता।

लावणी:- अच्छा जी, होटों के लिए किस्स और हाथों के लिए बम.. बहुत मस्ती चढ़ी है हां…

आरव बिना कुछ बोले कम्बल के अंदर जाकर, उसके गले के नीचे चूमने लगा और अपना हाथ उसके टी शर्ट के अंदर डालकर लावणी के पेट पर अपने हाथ फेरते, धीरे-धीरे हाथ ऊपर ले जाते.. ब्रा को छू रहा था…. "इशशशशशश… बेबी नो.. प्लीज … छोड़ो भी…"

आरव रुका और उसके ऊपर आकर उसकी आखों में देखते हुए कहने लगा…. "ओह बेबी येस.. आज मै नहीं रुकने वाला।"… इतना कहकर अपना चेहरा उसके सीने में घुसा कर उसे चूमने लगा…. "हीहीहीही.. छोड़ो भी आरव कोई आ जायेगा… उफ्फ … आरव नो.. हटो भी बाबा.. कोई आ जाएगा.. दरवाजा खुला है… आरव.. आरव…"

अचानक ही लावणी उसे तेज तेज हिलाती, हुई कहने लगी… बेबी रुको भी कोई बेल बजा रहा… ऑफ ओ.. आरव स्टॉप एंड लिसेन।" .. लावणी थोड़ा तेज बोली और आरव रुकते हुए उसके ऊपर आया और गुस्से से अभी उसको देख ही रहा था, कि इतने में दरवाजा खुला और नंदनी अंदर… "कब से बेल बजा रही हूं तू दरवाजा क्यों नहीं खोल रहा।"… दरवाजा खुलने के आवाज़ के साथ ही लावणी कम्बल के अन्दर घुस गई और आरव करवट लेकर पलटा और नंदनी के ओर देखने लगा….
 
Update:-71

दरवाजा खुलने के आवाज़ के साथ ही लावणी कम्बल के अन्दर घुस गई और आरव करवट लेकर पलटा और नंदनी के ओर देखने लगा….

नंदनी:- मै तुम्हारे कमरे में क्यों आयी थी?

आरव:- मां अब मुझे क्या पता कि आप क्यों आयी थी?

"हां ये भी सही है।" नंदनी इतना कहती हुई पलट गई और वापस जाने लगी। इसी बीच कंबल के नीचे से लावणी ने आरव के गले पर किस्स करती हुई उस जोरों से काट ली, नंदनी अभी पीछे मुड़ी ही थी कि आरव की दर्द भरी चींख निकल गई… "क्या हुआ, तू ऐसे चिल्लाया क्यों।" नंदनी वापस पलटती हुई पूछने लगी।

आरव:- कुछ नहीं मां लगता है कम्बल में कोई खून की प्यासी कीड़े ने जोड़ का काट लिया है।

"हुंह ! खाली नाम का 5 स्टार होटल है, और अंदर ऐसे कीड़े चलते हैं। चल उठ देखूं किस कीड़े ने काटा है, कहीं जहरीली हुई तो…" नंदनी अपनी बात कहती हुई कम्बल खींचने के लिए हाथ बढ़ाई ही थी कि तभी आरव उसे रोकते हुए कहने लगा…. "नहीं, नहीं मां मत खींचो कम्बल।"

नंदनी:- हद पागल हो तुम, देखने तो दे की किस कीड़े ने काटा है।

"आय आय रे"… "जहरीली कीड़े" का बदला लेती हुई लावणी ने इस बार पीठ पर दांत काट ली… अब तो नंदनी बढ़ ही गई कम्बल हटाने के लिए… तभी एक बार फिर आरव जोड़ से चिल्लाते हुए… "नहीं मां नहीं… मत हटाओ कम्बल।"

नंदनी:- तुम इतना पागलों कि तरह चिल्लाकर क्यों माना कर रहे। कम्बल के नीचे किसी को छिपकर तो नहीं रखा?

आरव:- हां लावणी को कम्बल के नीचे छिपा रखा है, अभी आप कम्बल हटाओगी और वो फुदक कर बाहर आ जाएगी…. "आहहहह" इस कीड़े की तो.. बहुत परेशान कर रखा है।

नंदनी:- बेटा अगर कम्बल से लावणी निकली ना तब तो तेरा जुलुश मै अपने हाथों से निकालूंगी.. अभी दूध का दूध और पानी का पानी किए देती हूं…

आरव:- पागल हो गई है आप, मत छुओ कम्बल..

नंदनी:- अब यदि तूने नहीं बताया ना की मुझे क्यों रोक रहा है फिर मै तुम्हे बताती हूं।

आरव:- अरे मेरी भोली मां, मैंने अंदर कोई कपड़ा नहीं डाला.. एक भी कपड़ा नहीं।

नंदनी:- कैसा बेहूदा है रे.. अच्छा सुन है कुंजल कहां है, अपने कमरे में नहीं थी।

आरव:- कॉल लगा कर पूछो ना कहां है..

नंदनी वहीं से कुंजल को कॉल लगाती…. "कहां है मेरा बेटा।"… "मां मै वीरे जी के साथ हूं, कोई काम था क्या?"…. "नहीं कोई काम नहीं था बस ऐसे ही फोन की थी, कोई नहीं तुम वीरे के साथ घूमो। अच्छा सुन, अपस्यु को कहीं देखी है क्या?"……. "मां, भाई और ऐमी कहीं निकले है बाहर, मैंने नहीं पूछा वो कहां गए है। मै कॉल लगाकर पूछ लूं क्या?"….. "नहीं रहने दे, उसे भी घूमने दे। अच्छा सुन मै अनिरुद्ध (सिन्हा जी) जी के साथ बाहर जा रही हूं, डिनर भी बाहर ही करूंगी, तुम लोग खा लेना। ठीक है बेटा।" …… "ठीक है मां, अब मै फोन रखुं।"…

नंदनी फोन रखती हुई आरव को एक बार देखी, वो अब भी करवट लिए हुए थे…. नंदनी उसे देखकर वहां से निकल गई। उसके जाते ही आरव उठा और जाकर सबसे पहले दरवाजा बंद किया, जबतक लावणी कम्बल के बाहर आ चुकी थी… "ऐसे दरवाजा क्यों बंद कर रहे हो जी।"… लावणी थोड़ी सहमी हुई सी पूछने लगी..

आरव:- बेबी बहुत तुमने काट लिया, अब जो भी होगा इस बंद दरवाजे के अंदर ही …. ही ही.. होगा.... सुनो लव ये क्या कर रही हो। मत करो ना प्लीज।

आरव अपनी बात कहता जबतक दरवाजा बंद करके पलटा, तब तक लावणी अपना टी शर्ट उतारकर बैठी हुई थी। केवल कली ब्रा पहने वो आरव के दिल पर जैसे बिजली गिरा रही थी। आरव का गला सूखने लगा था, नजरे जो बार-बार लावणी के खुले बदन पर अटक जाती और दिमाग दरवाजे पर था कि कहीं कोई आ ना जाए…

लावणी:- क्या हुआ मेरे भोले पंछी, तुम्हारी हालत कुछ ठीक नहीं लग रही। मुझे लगा मेरी टी-शर्ट तुम्हे परेशान कर रही होगी। आओ भी बेबी, इतने दूर क्यों खड़े हो।

आरव अपना मुंह फेरते हुए पीछे दरवाजे के ओर घूम गया… "लावणी, मेरे प्राण सुख रहे है। तुम्हारा ये अवतार एक मन को बेचैन कर रहा है तो दूसरे मन को परेशान। प्लीज टी-शर्ट पहन लो, इस वक़्त कोई भी आ सकता है। मेरा पूरा खानदान भूतों का खानदान है, कोई कभी भी आ धमकेगा।"

लावणी:- अच्छा ऐसी बात है क्या? लेकिन टी-शर्ट में मैं तो तुम्हे बच्ची दिखती हूं ना, पीछे मुड़ कर चेक तो कर लो कि मैं बच्ची दिख रही हूं की पूरी जवान।

आरव:- उफ्फ, ऐसी बातें मत कहो, मेरे अंदर क्या चल रहा है तुम समझ नहीं सकती। ऐसे वक़्त में जान बूझ कर अपने लवर को टीज करना अच्छी बात नहीं।

आरव अपनी बात ख़त्म ही किया था कि उड़ती हुई स्कर्ट उसके सिर से लेकर चेहरे को ढक दी…. और लावणी खुलकर हंसती हुई कहने लगी… "उफ्फ ये तेरा शर्माना। मुझे लगा कल तुम मुझे नीचे लहंगे में देखकर ज्यादा अच्छे से जज नहीं कर पाए होगे ना। अभी पीछे मुड़ भी जाओ ना लव।"

आरव, लंबी-लंबी श्वांस खिंचते…. "लावणी, बेबी ये देखने का प्रोग्राम आज लेट नाइट रखो ना, मै पूरी विस्तृत जानकारी दूंगा।

इस बार ब्रा और पैंटी दोनों साथ उड़ते हुए आरव के सिर पर लैंड हुई…. "ऐसे लंबी श्वांस लेते और बेकाबू धड़कन के साथ पीछे क्यों मुड़े हो? अभी से जायजा करो, फिर लेट नाइट क्या सुबह तक समीक्षा करते रहना जान। अब मुड़ भी जाओ ना।"… लावणी शरारत भरी अपनी अंदाज़ से आरव को पागल बनाए जा रही थी। उसकी बातें सुनकर आरव का नियंत्रण खोता सा जा रहा था।

आरव ब्रा और पैंटी को अपने हाथ में लिए उसे देखने लगा। पीछे की कल्पना करके उसकी श्वांस चढ़ने लगी। लंबी श्वांस खींचकर उसने अपनी आंखें बंद की और अपने मचलते ख्यालों के साथ पीछे मुड़ा और अपनी आखें खोली…. "हीहीहीहीही…हीहीहीहीही…. हीहीहीहीहीहीहीहीहीही…" जोड़ जोड़ के खिलखिलाकर लावणी के हसने की आवाज गूंज रही थी और वो आरव का झुंझलाया चेहरा देखकर और भी जोड़-जोड़ से हसने लगी थी।

"अभी बताता हूं तुम्हे मैं लावणी… मेरा दिमाग तबसे घुमा कर रखी हो।.. जबतक बेचारा आरव धड़कते और मचलते अरमान के साथ पीछे मुड़ा तब तक लावणी स्लीवलेस शॉर्ट सेट पहन कर तैयार खड़ी थी।

आरव तेजी से उसके ऊपर झपटते पीछे से उसके कमर को पकड़ा.. और उसके गर्दन के नीचे अपने दांत गड़ाते हुए कहने लगा…. बहुत मस्ती चढ़ी है।.. रूको अभी बताता हूं।"…… "हीहीहीहीही…हीहीहीहीही…. हीहीहीहीहीहीहीहीहीही.. आरव, ऐसे कोई करता है क्या, तुम तो वहशी की तरह अपने दांत गड़ा रहे।"..

आरव:- हुंह ! मां के सामने ही मुझे फसा रही थी, अभी टीज कर रही थी। अब तो मै नहीं रुकने वाला..

लावणी:- हीहीहीहीही…हीहीहीहीही…. अच्छा सुनो आज रात भर मै तुम्हारे साथ ही हूं, तो अभी हम चलें कहीं घूमने, फिर आराम से मुझे रात भर बताते रहना जो भी बताना हो।

आरव, लावणी को पलट कर उसकी आखों में देखते हुए, नजरों से ही पूछने लगा… "क्या सच में ऐसा होगा"… लावणी भी अपने चेहरे पर फैली मुस्कान के साथ जब नजरे नीचे झुका ली, फिर तो उसकी स्वीकृति को समझकर आरव उसे बाहों में भरकर चूमते हुए नीचे उतरा और भागकर तैयार होने चला गया।

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इधर स्वस्तिका जब घोड़े बेचकर सो रही थी तभी उसे ऐसा लगा कि कोई उसे पाऊं से खींचकर नीचे गिरा रहा है। उसने अपनी जब आखें खोली तब पार्थ उसके पाऊं को खींच रहा था…. "पर्था, छोड़ ना जाग गई हूं।…

पार्थ:- जाग गई है तो जल्दी तैयार हो जा, बहुत दिन हुए बातें किए।

स्वस्तिका:- ठीक है रुक 2 मिनट, अभी आयी..

स्वस्तिका झटपट तैयार होकर उसके साथ निकली। दोनों पैदल चलते होटल के बाहर आ गए। दोनों खामोश चल रहे थे तभी स्वस्तिका कहने लगी…. "तू इतना खामोश मतलब तुझे फिर प्यार हुआ क्या?"..

पार्थ, स्वस्तिका के ओर घूमकर उसे देखते हुए मुकुराने लगा और हां में सर हिलाते कहने लगा… "तू तो जीनियस है नॉटी।"

स्वस्तिका:- पूछ सकती हूं तेरा आवारा दिल अब किस लड़की पर आया है…

पार्थ:- तुझपर और किसपर..

स्वस्तिका:- ठीक है मुझे मंज़ूर है। चल अब अपनी गर्लफ्रेंड को किस्स कर।

पार्थ:- रुक रुक रुक.. तू इतना फास्ट जाएगी तो कैसे काम चलेगा.. मै तो स्लो हूं ना…

स्वस्तिका:- हां तेरी स्लो नजर हम सब ने पढ़ी थी, जो सुबह कुंजल से हटा कर किसी दूसरे पर लाते हुए कई मिनट लग जाते थे।

पार्थ:- "हम सब ने" से तुम्हारा क्या मतलब.. कहीं आरव और अपस्यु ने तो भी नहीं पढ़ लिया।

स्वस्तिका:- हम सब का मतलब तुझे समझ में नहीं आती क्या?..

पार्थ:- तुम्हारा सजेशन…

स्वस्तिका:- तू मुझ से मेरी ही बहन के बारे में सजेशन मांग रहा है, एक कारन बता की मैं तेरा नाक अभी क्यों ना तोड़ दू?

पार्थ:- अरे यार, अब तुम लोग नहीं सजेस्ट करोगी तो कौन करेगी।

स्वस्तिका:- बहुत बड़े वाला केस है तू पार्थ… तुझसे अपस्यु ने कुछ कहा क्या ?

पार्थ:- नहीं।

स्वस्तिका:- तुझ से आरव या ऐमी ने कुछ कहा क्या?

पार्थ:- नहीं।

स्वस्तिका:- बात सिंपल है, हम सब एक परिवार है। तुझे यदि कुंजल पसंद है और कुंजल को तू पसंद आ गया तो इससे ज्यादा खुशी की बात हमारे लिए क्या हो सकती है। लेकिन तुम दोनों के बीच छोटी सी गलतफहमी पूरे परिवार में टेंशन का माहौल बना सकती है। इसलिए ये फैसला तुम दोनों को करना है, दोनों ही समझदार हो और दोनों के फैसले के बीच में कोई भी परिवार का सदस्य नहीं आएगा।

पार्थ:- रहने दे, ये सिचुएशन ही डार्क टाइप फील हो रही है। वैसे भी वो मुझे एकतरफा पसंद आयी है तो बात यहीं खत्म करते है।

स्वस्तिका पार्थ की बात कर हंसती हुई कहने लगी…. "बेबी तुम भाग और छिप तो सकते हो, लेकिन प्यार से बच नहीं सकते। फिलहाल पहली नजर थी तो यही मनाओ की यह मात्र एक आकर्षण हो…

पार्थ:- तू ही क्यों मिली इस बात के लिए। मुझे समझ जाना चाहिए था कि तेरे से बात करूंगा तो तू मुझे सीधे बताने के बदले कंफ्यूज करेगी। मै ऐमी से ही सलाह ले लूंगा। और ये बता ये जो तू मुझे लैक्चर सुना रही है.. तेरे और उस अहद अली के बीच क्या हुआ था.. तू तो कहती थी कि ये मेरा ट्रू लव है।

स्वस्तिका:- मै ऐसा थोड़े ना कहती थी, वो तो उसने मुझ से ऐसा कहा था.. पहली ही डेट पर फिर सभी तरह के उसके ख्यालात बदल गए…

पार्थ:- और मैडम ऐसा कैसे हो गया था..

स्वस्तिका:- मेरी इक्चा नहीं हुई की मै कोई फ़ैशन करके उसके साथ डेट पर जाऊं और बेचारे के दोस्तों ने उसे इतना छिला की उसने रोते-रोते मुझ से ब्रेकउप कर लिया।

पार्थ:- सिचुएशन की डिटेल प्लीज।

स्वस्तिका:- 3 कपल, 1 वीक, लुनावला का टूर प्लान हुआ। मै कार में बैठ ही रही थी कि उसका एक दोस्त अहद को ताने देते हुए कहने लगा.. "साला काम वाली बाई को गर्लफ्रेंड बना कर लाया है।".. ऐसी बात सुनकर ही बेचारे का छोटा सा मुंह हो गया था, मुझे बहुत दया आयी थी उसका उतरा सा छोटा चेहरा देखकर। पूरे रास्ते उसके दोस्त हमे देखते और उसपर हंसते… शाम को जब हम कमरे में थे तब उसने रोते-रोते कहा था मुझसे, ये रिश्ता नहीं टिक पाएगा, इसलिए अभी हम ब्रेकअप करते हैं। मै उसे कहीं भी ना टिके रिश्ता उसपर बाद में बात कर लेंगे लेकिन अभी हफ्ते भर है, एन्जॉय करके चलते हैं। लेकिन शायद वो अपने दोस्त और उसके गर्लफ्रेंड के ताने को सह नहीं पाया। जिस प्यार को वो मुझमें ढूंढ़ रहा था, मात्र दूसरों के ताने के कारन उसने भी रूप को तवोज्जो दिया और मुझसे ब्रेकअप कर किया। बस ऐसे हो गया हुअमार ब्रेकअप।

पार्थ:- लगे हाथ इसका परिणाम भी बता ही दो…

"हीहीहीहीहीही… परिमाण… रात को एम्बुलेंस में तीनों लड़के जा रहे थे। तोड़ने में फिर मैंने कोई रहम नहीं किया था। फिर तो मुझे उस अहद का मासूम चेहरा और आशु भी ना दिखे, जिसे मैंने सबसे पहले तोड़ा।… स्वस्तिका हंसती हुई कहने लगी…

दोनों लगभग अर्शे बाद मिल रहे थे। बीच की जितनी भी घटनाएं दोनों के जिंदगी में हुई थी दोनों उसपर बात करते रहे और एक दूसरे साथ घूमते रहे…

इधर नंदनी और सिन्हा जी की लगभग एक जैसी ही कहानी थी। दोनों ने एक ही वक़्त कर अपने सबसे अजीज को खोया था। किसी के जाने के एहसास को तो ये दोनों भी सीने मै दबाए थे। वो भी इनके ऐसे अजीज खो गए जिनके बिना दोनों ही अधूरे हो गए।

नंदनी और सिन्हा जी काफी वक़्त बाद हम उम्र के साथ वक़्त बीता रहे थे, शायद आज से पहले कभी कोई ऐसा मिला ही नहीं जिसके दर्द उनके दर्द के बराबर हो। दोनों की शाम भी बातों में कट गई। डिनर करके दोनों ही फुर्सत हुए थे और सड़कों पर पैदल ही चले आ रहे थे। तभी नंदनी जिज्ञासावश सिन्हा जी से अपने अंतरमन में उठ रहे एक तीर जैसे प्रश्न को सिन्हा जी के पास रख दी…

"माफ़ कीजियेगा अनिरुद्ध जी, मेरे बेटे ने तो मना किया था बीती किसी बात की चर्चा नहीं करने, लेकिन एक सवाल जो मेरे मन में शुरू से उठ रही है, जो कि शायद आप के जिंदगी से जुड़ी कुछ निजी सवाल है, क्या आप मुझे उसके उत्तर देने में सहज होंगे। खासकर उस खौफनाक रात की घटना से जब जुड़े सवाल हो।"… नंदनी ने बड़ी ही सरलता से अपनी दुविधा सिन्हा जी को बताकर उनके जवाब का इंतजार करने लगी।

सिन्हा जी:- उस घटना का जिक्र ही सिना चिर देने वाला है, लेकिन आप उसकी मां है जिसने मुझे और मेरी बच्ची को बेसहारा समय में सहारा दिया था। आप के मन में उठे हर शंका का जवाब मै बिना भावुक हुए देने कि कोशिश करूंगा।

"हम्मम ! बस मुझे इतना जानना था कि जब हर किसी की पहचान हो गई थी, तब उन कातिलों को आपने भरी अदालत में क्यों नहीं घेरा? उन्हें क्यों सजा नहीं दिलवा पाए, जबकि आपके पास चश्मदीद गवाह थे? आपके पास तो पैसा, पॉवर और रूतवा तीनों ही थे जिससे आप गलत को भी सच साबित कर सकते है, फिर इतने बड़े झाख्मों का हिसाब लेने में आप पीछे क्यों हट गए?
 
Update:-72

"हम्मम ! बस मुझे इतना जानना था कि जब हर किसी की पहचान हो गई थी, तब उन कातिलों को आपने भरी अदालत में क्यों नहीं घेरा? उन्हें क्यों सजा नहीं दिलवा पाए, जबकि आपके पास चश्मदीद गवाह थे? आपके पास तो पैसा, पॉवर और रूतवा तीनों ही थे जिससे आप गलत को भी सच साबित कर सकते है, फिर इतने बड़े झाख्मों का हिसाब लेने में आप पीछे क्यों हट गए?

नंदनी सवाल पूछकर खामोश हो गई और सिन्हा जी के जवाब का इंतजार करने लगी। सिन्हा जी पास ही लगे बेंच पर नंदनी के साथ बैठे और कुछ पल की खामोशी के बाद कहने लगे…

"लोगों को भ्रम रहता है कि कोर्ट फैसले केवल बड़े आदमी के हक में में होता है और वहां कोई न्याय नहीं मिलता। जबकि सच्चाई ये है कि न्याय की अपनी एक प्रक्रिया होती है, वो इमोशन से नहीं बल्कि एविडेंस पर चलती है। हमारी कहानी सुनने में मार्मिक जरूर है लेकिन एक वकील होने के नाते केवल इतना ही कह सकता हूं कि इस घटना पर यदि मैंने कैसे भी करके उन्हें अदालत में खिंचा होता तो भी उसका कोई नतीजा नहीं निकलता।"..

"पहली बात तो ये की सरकार के रिकॉर्ड में गुरु निशी का आश्रम देहरादून के पास की एक जगह में है नैनीताल में नहीं। दूसरी बात उस आश्रम में किसी का रिकॉर्ड नहीं को कितने बच्चे वहां आश्रम में थे। अब ऐसी स्तिथि में पहले तो यह साबित करना होगा कि घटना गुरु निशी के आश्रम में हुई थी और वो देहरादून में ना होकर नैनीताल में है।"

"यदि इतनी बातें साबित भी कर दिया, तो वहां जो आग लगी थी और कुछ बच्चे मरे थे उसकी जिम्मेदारी 5 लोग लेंगे और उनको सजा मिल जाएगी। होगा ये की जिन्हे सजा मिलनी चाहिए वो बाहर घूमेंगे और हम उनके नजरों के सामने आ चुके हैं। इसलिए वो तैयारी करेंगे नए ज़ख्म देने की। रात के अंधेरे की वारदात जिसमे कई लोग सम्मिलित थे, उनमें कितनो की भी गिरफ्तारी क्यों ना हो जाए, उनका मुखिया बाहर ही रहेगा। कभी-कभी न्याय के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ता है, लेकिन न्याय जरूर मिलता है। विचारहीन कदम केवल और केवल खुद को नुक्सान देता है।"

नंदनी:- हम्मम ! शायद आपके पास उन मामलों का ज्यादा अनुभव है इसलिए आप बेहतर समझ सकते हैं। माफ़ कीजियेगा, पुराने ज़ख्म कुरेद दिए आपके।

सिन्हा जी:- कोई बात नहीं, आप का सवाल जायज था जिसे मै भी आज तक खुद से पूछते आ रहा हूं।

नंदनी:- फिलहाल जो जवाब मिल रहे है उसी से दिल बहलाने में ही समझदारी है। वक़्त हर किसी के सवाल का सही जवाब दे ही देगा, मुझे अपने पूरे परिवार पर पूरा भरोसा है।

सिन्हा जी:- मुझे भी…

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अपस्यु और ऐमी के लिए पहले से जिंदल की गाड़ी इंतजार कर रही थी। दोनों जैसे ही बाहर आए उनके आगे कार अाकर रुक गई। ऐमी कार में बैठते ही अपस्यु को खींचकर अपने करीब लाई और उसके होंठ से होंठ लगा कर चुमने लगी… अपस्यु भी उसे बाहों में भरकर किस्स करने लगा। दोनों की किस्स काफी लंबी चलती रही, किस्स के दौरान एक दूसरे के ऊपर लगातार हाथ फेरते रहे और एक दूसरे को किस्स करते रहे।

दोनों ने जब एक दूसरे को छोड़ा तब दोनो ही सीट पर सीधे होकर हांफ रहे थे। कुछ देर श्वांस सामान्य करने के बाद, इसबार अपस्यु ने ऐमी को खिंचा और उसके होंठ से होंठ लगाकर किस्स करने लगा। ये किस्स पहले वाले किस्स से भी ज्यादा लंबी चली। और जब एक दूसरे से अलग हुए तब वापस से हांफते हुए एक दूसरे को देखकर जोड़-जोड़ से हसने लगे…

ऐमी:- बहुत दिनों बाद इतने जोश में तुमने किस्स किया है अपस्यु, बात क्या है, किसे याद करते हुए किस्स किया जा रहा था हां।

अपस्यु अपने चेहरे पर शातिराना मुस्कान लाते हुए ऐमी को आंख मारा और कहने लगा…. "क्या करोगी जानकर, अब छोड़ो भी।"

ऐमी:- सिर्फ उसे याद करके इतने जोश में किस्स कर रहे थे, यदि उसी के साथ किस्स कर रहे होते जिसे याद कर रहे हो, तो क्या होता?

अपस्यु:- ये अमेरिका है बेबी, बताना पड़ेगा कि इतने हाई पैशन के बाद क्या होता है?

ऐमी:- कहो तो मै कोई चक्कर चला दूं क्या?

अपस्यु:- ना कोई चक्कर नहीं चल सकता। वो शादी-शुदा है और मुझसे कई साल बड़ी।

ऐमी:- हीहीहीहीही… फिर तो पक्का हो गया कि कोई नए रिश्तेदारों में से है। अब मिश्रा फैमिली में तो कोई भी ऐसा नहीं है मतलब मै समझ गई।

अपस्यु:- बस भी करो अब तो तुम हर बात ओपन ही करते चली जा रही। लगता है हम पहुंच गए…

कार एक बड़े से दरवाजे के अंदर घुसते हुए एक बड़ी ही आलीशान घर के सामने रुकी। ध्रुव खुद ही बाहर उनके स्वागत में खड़ा था और एक अच्छे मेजबान का फ़र्ज़ अदा करते हुए उसने कार का दरवाजा खोला और दोनों को देखकर "वेलकम" करने लगा।

जब से दोनों कार से नीचे उतरे, ध्रुव उनके तारीफों के फूल बांधते नहीं थक रहा था। दोनों को वो अपने साथ लेकर पूरा घर घुमाने लगा, अभी दोनों नीचे के हॉल में लगे सज्जो सामान को ही देख रहे थे कि इतने में मेघा भी वहां पहुंच गई।

मेघा अभी हॉल से गुजर ही रही थी कि ध्रुव ने उसे आवाज लगा दिया… "हे सीस, देखो तो कौन यहां आया है।"

मेघा उनके पास पहुंचकर अपना हाथ अपस्यु के ओर बढाती हुई… "हेल्लो अपस्यु"..

अपस्यु भी एक नजर उसके बदन पर डालते, उसके ओर हाथ बढ़ा दिया… "हेल्लो मेघा"…

मेघा:- ध्रुव क्या मै इस हैंडसम को अपने साथ के जा सकती हूं, पहली मुलाकात हमारे बीच कुछ अच्छा नहीं रहा था, शायद कुछ वक़्त साथ रहे तो उस दिन की गलतफहमी दूर हो जाए…

ध्रुव:- मेघा वो तो अपस्यु ही समझे, मुझे कोई प्रॉबलम नहीं।

अपस्यु:- मुझे भी कोई प्रॉबलम नहीं।

मेघा, ऐमी के ओर देखकर कहने लगी…. "हे स्वीटहार्ट, तुम्हारा बॉयफ्रेंड को कुछ देर के लिए साथ लिए जा रही हूं, कोई प्रॉबलम तो नही।

मेघा की बात सुनकर तीनों हसने लगे। इस तरह से सबको हंसते देख मेघा चिढ़ती हुई पूछने लगी…. "क्या हुआ जो ऐसे तुम लोग हंस रहे हो।"..

ऐमी:- दरअसल, हम दोनों गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड नहीं है।

मेघा:- व्हाटएवर, हे यूं हैंडसम कम विथ मी…

मेघा अपने ऐटिट्यूड में आगे चल रही थी और अपस्यु पीछे। तभी अपस्यु उसे पीछे से देखते हुए धीमे से सिटी बजाते हुए कहने लगा… "सुपर्ब बैक।" अपस्यु उतने ही तेज आवाज में बोला जितने में मेघा के कानो में हल्की आहट हो।

मेघा पीछे पलट कर अपने घमंड से भरे चेहरे पर अपने बेरुखे शब्दों को होटों से निकलती… "क्या कहा तुमने?"

अपस्यु:- वो तो यहां का इंटीरियर देख कर मुंह से सिटी निकल गया। क्या कर्व और शेप है इस जगह का, आई रिएली लाइक इट।

मेघा:- यह इंटरियर काफी हाई प्रोफ़ाइल है, हर कोई इस छूना तो दूर देख भी नहीं सकता।

अपस्यु:- क्लास कितनी भी हाई हो, बिना मजदूर के मेहनत के ऐसा इंटेरियर बनना संभव नहीं।

मेघा, अपनी घमंड भरे चेहरे पर घमंड भरी मुस्कान लाती हुई कहने लगी… "काफी तेज हो, कल मेरे डैड की इंप्रेस कर लिया और आज मुझे।".. दोनों एक बड़े से शीसे के कमरे में पहुंच गए थे जहां मेघा बैठती हुई अपनी बात पूरी की।

अपस्यु भी ठीक उसके पास बैठते…. "ये इंप्रेस करना मुझे नहीं आता। मुझे तो बस तोड़ना फोड़ना आता है।"..

मेघा:- हां कल देखी थी मै, तुम्हारी फाइटिंग स्टाइल गजब की है। तुम्हारे लिए एक जॉब है करोगे?

अपस्यु:- जॉब डिटेल प्लीज…

मेघा:- एक अंडरग्राऊंड फाइट करनी है, प्रोफेशन बॉक्सर के विरूद्ध।

अपस्यु:- नो रूल एरिया में लड़वाना है, वो भी मेरे घर से इतनी दूर यूएस में। कहीं मुझे मारने का प्लान तो नहीं है।

मेघा:- तुम्हे मरवाना कौन सी बड़ी बात है, वो तो कल शाम में ही हो जाता। तुम जानते हो मिस्टर अपस्यु मेरे डैड कभी किसी से माफी नहीं मांगते, तुममें कुछ तो बात उन्हें दिखी थी, फिर मैंने तुम पर नजर रखी, काफी इंप्रेसिव थे तुम। हां थोड़ी जुबान लंबी है पर हो तुम मास्टर पीस।

अपस्यु:- यहां मेरी तारीफ करने लाई थी या काम की भी बातें कर लें।

मेघा:- ये मेघा बहुत कम लोगों की तारीफ करती है मिस्टर अपस्यु तुम खुशनसीब हो, जिसे मैंने सराहा है।

अपस्यु:- तारीफ मेरे लिए कोई नई बात नहीं है, हर कोई करता है, मैं पहले से खुशनसीब हूं।

मेघा:- आई लाइक दिस ऐटिट्यूड।

अपस्यु:- जी बहुत-बहुत धन्यवाद..

मेघा:- तो क्या तुम्हारी मै हां समझूं..

अपस्यु:- पहले डील तो सेट हो जाए… कितने की बेटिंग है?..

मेघा:- 1 मिलियन यूएस डॉलर। अगर जीते तो तुम्हे तुम्हारे 2 करोड़ रुपए मिल जाएंगे।

अपस्यु:- डील 5 मिलियन की करो, 4 मिलियन मेरे होंगे।

मेघा, चौंकती हुई…. "तुम्हे पता भी है कि तुम क्या कह रहे हो? 50 लाख रुपए नहीं 50 लाख डॉलर लगे हैं दाव पर।

अपस्यु:- जी नहीं, मेरे 40 लाख यूएसडी लगे है और तुम्हारे 10 लाख।

मेघा, 2 ग्लास में सैंपेन डालती हुई ले आयी और एक ग्लास अपस्यु को सर्व करती हुई कहने लगी…. "तुम्हारे पैसे का सोर्स क्या है।"..

अपस्यु:- मार्केट.. 40 उठाऊंगा और 2 घंटे में उन्हें 45 लौटाऊंगा… बाकी मेरे भरोसे पर बहुत से लोग तैयार रहते हैं पैसे फेकने के लिए…

मेघा:- जितना सोची थी उससे कहीं उपर के चीज निकले… 2.5 मिलियन तुम्हारे 2.5 मिलियन मेरे। पूरे पैसे मैं लगाऊंगी, जीत गए तो मै 12.5% काटकर तुम्हे तुम्हरे पैसे दे दूंगी और यदि हार गए तो तुम मुझे 2 घंटे में 2.5 मिलियन यूएसडी लौताओगे वो भी 12% इंट्रेस्ट के साथ।

अपस्यु:- जीत तो मै जाऊंगा ही, उसकी चिंता तुम मत करो.. तुम तो बस सेलीब्रेट कैसे करना है वो सोचो।

मेघा:- जीत गए तो सेलीब्रेट भी करेंगे.. लेकिन कल पहले तुम्हे जरा अच्छे से चेक तो कर लूं।

अपस्यु:- यदि तुम्हे चेक करना है तो मै बता दूं कि मेरा फेल होना पक्का है, क्योंकि अपने से बड़ी उम्र के चेकर के साथ मै नर्वस हो जाता हूं।

मेघा:- डोंट वरी डार्लिंग, मुझे छोटे लड़कों के हैंडल करने का पूरा अनुभव है।

अपस्यु:- तो फिर ये भी तय रहा.. वैसे फाइट कब है..

मेघा:- 2 जुलाई की शाम.. तैयार रहना…

अपस्यु:- मै तो तैयार ही हूं, रिस्क तुम्हारा है, तुम तैयार रहना।

मेघा:- बिना रिस्क कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। मै भी तैयार ही हूं।

अपस्यु:- बिल्कुल सहमत। सारी बातें हो गई हो तो चलें अब..

मेघा:- हां अब चलना चाहिए। कल तैयार रहना, मुझे इंतजार करना अच्छा नहीं लगता।..

दोनों बात ख़त्म करके वापस हॉल में लौट आए। मेघा अपस्यु को छोड़कर वहां से निकाल गई, इधर ये तीनों आपस में बातें करने लगे। डिनर खत्म करने के बाद ध्रुव खुद कार ले आया दोनों को ड्रॉप करने के लिए।

ध्रुव के साथ दोनों होटल ना जाकर समुद्र किनारे आ गए और वहां के मौसम का लुफ्त उठाते दोनों वहीं बैठ गए और ध्रुव उन्हें छोड़कर वापस लौट आया। दोनों खामोश बस सामने के लहरों को देख रहे थे।

दोनों के बीच की खामोशी में जैसे कोई गहराई थी। खामोश दोनों एक दूसरे के होने को मेहसूस कर रहे थे…. "मै एक नॉर्मल लाइफ जीना चाहता हूं, जैसे आरव और लावणी जी रहे, जैसे अन्य प्रेमी युगल जी रहे।".. ऐमी का हाथ थामते हुए अपस्यु कहने लगा…

ऐमी गहरी श्वांस लेती उसे मुड़कर देखने लगी और अपस्यु के चेहरे को पढ़ते हुए पूछने लगी…. "ऐसा क्या हो गया, जो मेरा टफ हीरो टूट गया।"..

अपस्यु:- बस अंदर से कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा। ऐसा लग रहा है चल रहे माहौल में तुम कहीं अकेली दूर खड़ी हो और मै हक से तुम्हारे पास भी नहीं रह सकता।

ऐमी:- जानते हो आज कुंजल क्या बोली…

अपस्यु:- क्या बोली..

ऐमी:- उसको मुझमें भाभी दिख रही है। सुनकर मुझे अच्छा लगा था।…

अपस्यु:- मुझे लगता है कुछ भी अब छिपाने की जरूरत नहीं है…

ऐमी:- भूल गए अपनी बात, हर किसी को पूरी सच्चाई नहीं बताई जा सकती। जो जितनी बातें जानेगा उतनी ही बातें सोचेगा और उतने ही बातें डिस्कस भी करेगा। ये हम सबकी सुरक्षा के लिए जरूरी है। अभी जैसा चल रहा है चलने दो। रही बात अभी की तो तुम साची को लेकर परेशान हो ना..

अपस्यु:- हां.. एक मासूम लड़की की सच्ची फीलिंग हर्ट कर दिया।

ऐमी:- यहां हर किसी की हर पल फीलिंग हर्ट होती है। मुझे विश्वास है कि तुम यदि उसे समझना चाहोगे तो वो समझ जाएगी।

अपस्यु:- हिम्मत नहीं बची ऐमी, लगता है हम न्याय नहीं किसी बदले के पथ पर है, जहां जो मिला इस्तमाल करते हुए अपना काम निकाल रहे है। मेरी आत्मा टूट रही है।

ऐमी, अपस्यु का हाथ थामती उसे खड़ा की और साथ चलते हुए कहने लगी… "याद है अपस्यु हमने कभी एक दूसरे को आई लव यू नहीं कहा।..

अपस्यु मुस्कुराते हुए….. हां जानता हूं…

ऐमी:- तुमने मेरे खामोशी को मियामी से लौटते वक़्त सुना था, जब हम फ्लाइट में थे और कैजुअल रिलेशन की बात कर रहे थे।

अपस्यु:- हां याद है मुझे। ये भी याद है कि तुम मुझसे बात करने के बाद वहां के वाशरूम साइड की लॉबी के पास खड़ी होकर रोई थी।

ऐमी:- और तुमने दूर बैठकर मेरी भावनाओ को सुना था, समझा था।

अपस्यु:- अकेले सिर्फ मैंने ही पढ़ा था क्या.. तुम तो मेरी भावनाओ को ना जाने कबसे परख रही थी। बिना इजहार के ही प्यार था ना जाने कबसे, बस उसे मानने मै बहुत देर कर दिए दोनों।

दोनों बीच पर चांद से आ रही रौशनी के बीच एक दूसरे को देख रहे थे.. देखते देखते दोनों प्यार से एक दूसरे में खोते हुए एक दूसरे को चूमने लगे… ऐमी किस्स को तोड़ती अपने सर को अपस्यु के सर से लगाते हुए उसकी आखों में देखती हुई कहने कहीं….

"जैसा तुम्हे फील हो रहा है साची के लिए, ठीक वैसे ही मेरी भी फीलिंग है। मैंने एक पल के लिए सोचा की तुमने मुझ से रिश्ता तोड़ लिया.. बस उस एक पल को मैंने पूरे सिद्दत से मेहसूस की, और वो दर्द मै शायद बयां ना कर सकूं। उसका टूटा दिल मुझे भी चैन से सोने नहीं दे रही। हमने मिलकर उसे दर्द दिया है, हम मिलकर उसे खुशी भी देंगे।"….
 
Update:-73

"जैसा तुम्हे फील हो रहा है साची के लिए, ठीक वैसे ही मेरी भी फीलिंग है। मैंने एक पल के लिए सोचा की तुमने मुझ से रिश्ता तोड़ लिया.. बस उस एक पल को मैंने पूरे सिद्दत से मेहसूस की, और वो दर्द मै शायद बयां ना कर सकूं। उसका टूटा दिल मुझे भी चैन से सोने नहीं दे रही। हमने मिलकर उसे दर्द दिया है, हम मिलकर उसे खुशी भी देंगे।"….

अपस्यु:- मै थका हुआ सा मेहसूस कर रहा हूं..

ऐमी:- यहीं लेटते है आओ..

दोनों वहीं रेत पर लेट गए… अपस्यु अपनी बाहें फैलाए और ऐमी उसके हाथ के ऊपर सिर रखकर लेट गई। चांद की हल्की रौशनी में दोनों एक दूसरे को देखकर चैन की श्वांस ले रहे थे।

ऐमी:- पार्थ के साथ मिलकर तुमने प्लान किया था क्या आज सुंबह का।

अपस्यु:- नहीं मैंने नहीं किया था। पार्थ को लगा कि कहीं मै उसके सरप्राइज का स्त्यनाश ना कर दूं, इसलिए उसने मुझे पहले बुला लिया था।

ऐमी:- हां ये तो सही किया फिर उसने। तुम्हे याद है वो मेहंदी वाला किस्सा।

अपस्यु:- छोड़ो भी उन किस्से कहानियों को, मेरे पास आओ…

ऐमी अपने चेहरे को उसके थोड़ा और करीब लाकर अपने नाक को उसके नाक से लगाती हुई… दोनों आखें मूंद कर वहां लेटे रहें। बहुत कम ही ऐसे मौके होते है, जब दोनों इतने सुकून से एक दूसरे के करीब होते है।…

कुछ वक़्त बीतने के बाद….. "अपस्यु हमे चलना चाहिए।"…. "हम्मम ! चलतें हैं।".. दोनों हाथ में हाथ डाले बीच से उठकर सड़क तक चले आ रहे थे, इसी बीच नंदनी का भी फोन आ गया और वो दोनों से वापस लौटने के बारे में पूछने लगी… "कुछ देर और" कहकर अपस्यु ने कॉल डिस्कनेक्ट किया और अपस्यु टैक्सी का इंतजार करने लगा…

ऐमी:- 4 किलोमीटर ही तो है.. पैदल चलते है ना…

अपस्यु:- ये भी सही है..

दोनों एक दूसरे के हाथों में हाथ डालकर सड़क के चारो ओर के कतूहाल को देखते हुए कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने लगे। … "मै क्या सोच रहा था… मै क्या सोच रही थी"…

दोनों एक ही वक़्त में एक दूसरे के ओर मुड़कर एक ही जैसी बातें बोलने लगे.. और फिर जब ऐसा हुआ तो दोनों जोड़-जोड़ से हसने लगे… "मियामी ही ना"… "हां मै भी वहीं कहने वाली थी।"..

अपस्यु:- एंगेजमेंट खत्म हो जाने दो फिर एक हफ्ते की छुट्टी लेंकर मियामी में होंगे।

ऐमी:- नो, अभी वक़्त नहीं है मिस्टर, नो हॉलीडे..

अपस्यु:- वो 2 जुलाई के बाद मै तय कर लूंगा की हॉलीडे पर जाना चाहिए कि नहीं। 5 मिलियन यूएसडी की फाइट के लिए मुझे तैयार होना पड़ेगा..

ऐमी:- वक़्त नहीं मिलेगा सबके बीच… रात को ही एडजस्ट करना पड़ेगा..

अपस्यु:- हां यही मै भी सोच रहा था। टेस्टिंग सॉफ्टवेर तुम डेवलप कर लेना.. कुछ डिवाइस मै लेकर आया हूं, उसी से सभी टेस्ट कर लेंगे…

ऐमी:- 5 मिलियन की फाइट है अपस्यु.. तुम्हे इतने लंबे गेम नहीं उलझना चाहिए था… सामने वाला सबसे बेस्ट लेकर आएगा…

अपस्यु:- तभी तो मुझे भी अपना बेस्ट दिखाने का मौका मिलेगा…

"चॉकलेट आईसक्रीम प्लीज"… ऐमी कोने आइसक्रीम लेती हुई कहने लगी… "तुम तो पहले से अपना बेस्ट दे रहे हो। मै साथ हूं।…

दोनों हाथ में हाथ डाले और बात करते हुए होटल के बचे फासले तय करके वापस आ गए। दोनों अंदर से काफी खुश थे और सीधा जाकर अपने-अपने बिस्तर पर लेट गए। रात हसीन ख्यालातों में बीती और सुबह के 3 बजे अपस्यु के दरवाजे पर दस्तक होने लगी।

अपस्यु ने झट से दरवाजा खोला और ऐमी को अंदर खिंचते दरवाजा बंद कर लिया। ऐमी को बेहताशा चूमने लगा…. ऐमी कुछ दूर हटती… "शुरू हो गया रोमांस का चेप्टर, अब क्लोज करो इसे और चलो।"

अपस्यु वापस से ऐमी के कमर में हाथ डालकर, उसे खुद से चिपकाते हुए, ऐमी को देखकर कहने लगा…. "मेरी आखों में झांक कर देखो, क्या इस वक़्त मै रोमांस के मूड में लग रहा हूं।"

ऐमी, खिलखिला कर हंसते हुई.... "हां समझ गई, सर काफी हॉर्नी और वाइल्ड दिख रहे है। लेकिन एक बात भूलो मत…"

अपस्यु:- क्या ???

ऐमी:- आज शाम तुमने मेघा आंटी को वक़्त दे रखा है। अपना ये रूप उसके लिए संभाल कर रखो..

अपस्यु अपने चेहरे पर सिकन लाते हुए…. "अरे यार… ऐमी तुमने मुझे फसाया है उसके चक्कर में, मुझे बाहर निकालो इससे…"

ऐमी:- बहुत अहम कड़ी और शातिर है वो… क्लोज होने का मौका मिल रहा है, इसे हम जाने नहीं दे सकते…

अपस्यु:- शातिर तो बहुत है, ये तो मानना होगा। कार में ही पूरा सर्विलेंस लगा रखी थी।

ऐमी:- डिस्को में भी पिटाई खाने वालों में उस मेघा के भी 3 लड़के थे। कबीर ने मात्र 9 लोगों को उठाया था, 3 के लिए बाहर से लोग आए थे।

अपस्यु:- वैसे शातिर होने के मामले में तुम तो उसकी भी मां हो….. खुद का मूड ना हो तो मुझे उलझाकर रख देती हो। जितनी बातें हुई उनमें कौन सी ऐसी बात थी जो मुझे पता ना हो, लेकिन फिर भी तुम्हे ये अभी ही डिस्कस करना था।

ऐमी, फिर से हंसती हुई…. "सुबह सुबह सेक्स करोगे तो तैयारी क्या तुम्हारे बदले मै करूंगी। वैसे मुझे कोई ऐतराज नहीं फाइट लेने में।

अपस्यु:- अच्छा ठीक है मै समझ गया, अब चलो…

दोनों तकरीबन सुबह के 7 बजे होटल वापस पहुंचे। दोनों फ्रेश होकर बुफे के पास पहुंचे जहां पहले से पूरे परिवार के बीच लंबी बातचीत का दौर शुरू था। अपस्यु आकर नंदनी के पास खड़ा हो गया और ऐमी कुंजल और स्वस्तिका के बीच थी।

नंदनी:- यहां कोई हल्ला नहीं करो। सब कमरे में पहुंचेंगे फिर इसपर बात होगी।.. नंदनी थोड़ी चिढी और खफा लग रही थी। अपस्यु किनारे से मां को गले लगाता हुआ पूछने लगा…. "कौन सी बात मां"

नंदनी थोड़ा पीछे हुई और एक थप्पड उसे लगाती हुई कहने लगी…. "देर से अाकर तुम्हे सबकुछ पहले समझना है। नाश्ता खत्म करके सब लोग मेरे कमरे में आओ। और हां केवल नाश्ता करना इन बाहरवालों के बीच कोई ड्रामा नहीं। 10 मिनट में से एक सेकेंड भी लेट लगा आने में तो फिर मै यहीं अाकर ड्रामा शुरू कर दूंगी।

नंदनी अपनी बात कहकर वहां से निकल गई। बाकी सब लोग थोड़ा बहुत नाश्ता करके 10 के बदले 5 मिनट में ही नंदनी के कमरे में इकट्ठा हो गए…. नंदनी कुर्सी लगाकर बैठी हुई थी और बाकी सभी बच्चे नीचे…

स्वस्तिका:- मां सब लोग तो आ गए फिर आप किसका इंतजार कर रही है। सभा शुरू कीजिए।

नंदनी:- तुम आगे आओ यहां मेरे पास..

स्वस्तिका:- सॉरी मां।

नंदनी:- उनकी हिम्मत कैसे हुई… आरव तुम बताओ क्या किया जाए इनका।

आरव:- गुस्सा थूक भी दो मां, जाने दो नादान लोग है, केवल उम्र बढ़ गई है इनकी… हमे तो बस लावणी से मतलब है ना…

नंदनी:- ये लड़का पक्का ससुरालियों का निकलेगा, वो मिश्रा अपनी बेटी की शादी करने जा रहा है और अभी वो नादान है। आरव तुम मेरे पास आकर ही बैठो।

आरव:- मैं यही सही हूं। मेरे बदला मेरा भाई आप के पास जाकर बैठेगा.. जा मेरे शेर मेरे चिते, मां के पास जाकर बैठ जा…

नंदनी:- एंगेजमेंट में भी तेरे बदले उसी को भेज देती हूं, यही अच्छा रहेगा…

नंदनी की बात सुनकर सभी लोग हसने लगे…. साथ में नंदनी को भी हसी आ गई.. वो हंसती हुई सब को चुप रहने का बोलकर पार्थ से पूछने लगी…. "पार्थ तुम क्या कहते हो।"

पार्थ:- जब बात शुरू हुई, मै तो तब से कह रहा हूं कि ये रिश्ता ही कैंसल करो आंटी, अभी इसकी उम्र ही क्या हुई है…

पार्थ अपनी बात खत्म ही कर रहा था कि आरव का एक उड़ता चप्पल सीधा पार्थ के मुंह पर लगा और वो गुस्से में आरव को देखने लगा…. "आंटी अभी नहीं होती ना छछूंदर, तो तुझे मै अभी बता देता। आंटी देख रही हो इसकी हरकते।"

आरव:- तू इसी लायक है पार्था, मां थी इसलिए उठ नहीं पाया वरना अभी तू हॉस्पिटल में होता।

अपस्यु:- एक मिनट सब थोड़े शांत हो जाइए। इस पूरे प्रकरण में मै दोषी हूं।

चर्चा का माहौल सब एक साथ बोलने लगे… "जब वो और ऐमी कल रात उनसे मिले ही नहीं फिर मामला क्या है उसे कैसे पता.. बात घुमा रहा है.. झूट बोल रहा है.. ब्ला ब्ला ब्ला !!"… बुफे के जैसे यहां पर भी माहौल बिल्कुल मछली बाजार जैसा था…

"खामोशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशश !…" नंदनी की तेज गरज और सब लोग खामोश होकर बैठ गए…. "हद है इतना हल्ला कौन करता है। सोनू ये तुम क्या कह रहे हो, तुम्हे पता भी है कि हम लोग किस बात की चर्चा कर रहे है।"

अपस्यु:- हां पता है, आरव की एंगेजमेंट अलग हॉल में होगी मुझे पता है।

नंदनी:- इसका मतलब सारी बात तुमने ही फाइनल की थी और वो राजीव केवल मुझे फैसला बताने आया था।

अपस्यु:- हां सही कहा आपने मां।

नंदनी:- और क्या मै पूछ सकती हूं कि मेरे रहते तुमने ये अकेले फैसला कैसे ले लिया।

अपस्यु:- उस दिन फैमिली डिनर पर जिंदल की बेटी और दामाद के नखरे देखकर, मैंने ही उन लोगों से कहा था कि यदि एंगेजमेंट वाले दिन ऐसे कोई सीन हुए तो सभी दोस्तों और रिश्तेदारों के बीच काफी माहौल क्रिएट हो जाएगा। इसलिए बेहतर यही होगा कि हम एंगेजमेंट अलग-अलग रखे।

नंदनी:- शाबाश क्या फैसला लिया है। अच्छा किया। चल अब 100 बार उठक बैठक कर।

अपस्यु:- ये कैसी शाबाशी है, इनाम के बदले सजा…

नंदनी:- फैसला अच्छा हैं, इसमें कोई 2 राय नहीं, किंतु फैसला लेने का तरीका बिल्कुल गलत। चल अब शुरू हो जा…

एंगेजमेंट सर पर थी और सभी लड़कियां साथ और उसके साथ में नंदनी भी टूट परी थी शॉपिंग, ब्यूटीपार्लर और अन्य सजो समान के लिए। पूरे परिवार के अनुरोध पर स्वस्तिका भी अपने रूप सज्जा के लिए हामी भारती हुई सब के साथ वो भी ब्यूटीपार्लर में पूरा समय दे रही थी। इधर पार्थ भी आरव के साथ घूम-घूम कर उसके छोटी बड़ी फैंटेसी पर हंसते हुए बिल्कुल एक कमिने दोस्त की तरह उसके साथ रहा।

शाम के तकरीबन 6 बजे अपस्यु तैयार होकर निकला। मेघा के बताए जगह पर वो पहुंचने ही वाला था कि इसी बीच ऐमी का संदेश उसके पास आया जिसमें "2 किस्स इमोजी" उसने भेजा था। ऐमी का संदेश देखकर वो मुस्कुराते हुए आगे बढ़ा और दरवाजे पर खड़ा होकर बेल बजाने लगा।

एक लड़की दरवाजा खोलती हुई उसे अंदर बुलाई और उसे बैठने के लिए बोलने लगी। कुछ देर बाद वो अपस्यु को ड्रिंक सर्व करने लगी। अपस्यु उस ड्रिंक को लिया और सामने के टेबल पर रख दिया और उस लड़की को वहां से जाने के लिए बोल दिया। इसके बाद उसने ऐमी को वापस एक "टीज" वाली इमोजी भेजकर मुस्कुराने लगा।

अपस्यु ड्रिंक देखकर मुस्कुराया और एक ही घूंट में पूरा पी गया। बस पीने के कुछ पल बाद ही उसका सर गोल घूमने लगा और आखों के सामने थोड़ा अंधेरा छाने लगा.. अपस्यु लंबी श्वांस खिंचते हुए अपनी आखें खोला और उसके कान पूरा चौकन्ना था।

अपस्यु के पीछे हटने की कोशिश, लेकिन तबतक फ्लॉवर पोट अपस्यु के इतने करीब आ चुकी थी कि उसे हाथो से अपने साइड फेस को कवर करना परा…. "नाइस मूव मेघा, लेकिन एक जाम मुझे बेहोश नहीं कर सकती। सॉरी जानेमन अंधेरे कमरे में मेरी पिटाई का तुम्हारा प्लान फ्लॉप करने के लिए।"..

शरीर की गति पूरी कमजोर पर चुकी थी, सर इतना ज्यादा चक्कर दे रहा था कि ध्यान लगाने में थोड़ी परेशानी तो आ रही थी लेकिन वो दिमाग को अब भी केंद्रित किए हुए था… स्वाद और गंध रहित नींद की गोलि और साथ ने हल्का मात्रा में ब्राउन सुगर, डेडली कॉक्तैल अपस्यु जान बूझ कर पी चुका था।

नशे से बेहोशी की हालत हुई जा रही थी… कुछ देर और वो खड़ा नहीं रह सकता था। काफी तेजी के साथ वो अपनी शरीर के गतिविधियों का आकलन कर ही रहा था कि तभी एक जोरदार लात उसके कंधे पर लगी, और वो लड़खड़ा कर गिरता हुआ, दीवाल से जा टकराया…

किसी तरह दीवाल के सहारे वो उठा ही था कि इतने में तेज बेसबॉल डंडा चला और निशाने पर उसका कंधा। अपस्यु खुद को तेजी से पीछे खिंचा, बेसबॉल का डंडा दीवाल पर लगा और मारनेवाला का पुरा हाथ अपस्यु के ठीक सामने… अपस्यु अपने दोनो हाथ से उसका हाथ पकड़ा और तेजी से अपने घुटने ऊपर करके उसके ज्वाइंट के ठीक बीच में निशाना। ज्वाइंट उल्टा होकर ऊपर के ओर आ गया और वो मारनेवाला कर्राहते हुए नीचे जमीन पर।

डगमगाते कदम के साथ वो हॉल के बिल्कुल बीचों-बीच खड़ा था। धुंधली सी रौशनी में उसे 3 और लोग नजर आ रहे थे… अपस्यु के दाएं खड़ा आदमी ने उसके सर को निशाना बनाते हुए तेज बेसबॉल डंडा चलाया, उसी वक़्त बाएं खड़ा आदमी ने अपने पंच से उसके पसलियों को निशाना बनाया.. एक आदमी जो ठीक सामने था, उसी वक़्त सामने से अपस्यु के सीने पर लोहे का पंच लगा कर वार कर दिया।

बस छन भर का समय और अपस्यु ने अपने पूरे बदन को पीछे ले जाते गर्दन को ऊपर उठाए रखा और खुद को पीछे के ओर गिरने दिए। गिरने के क्रम में ही सामने वाला आदमी जो लोहे का पंच इस्तमाल कर रहा था, उसके दोनों पाऊं से अपस्यु का पाऊं नीचे से टकराया और वो आदमी अपस्यु के ऊपर जैसे ही गिरने लगा, अपस्यु अपना दायां पाऊं उठा कर उसके मुंह पर एक लात मारते खुद को लेफ्ट रोल किया और वो आदमी धड़ाम से अपस्यु के पास आकर गिरा।

वो आदमी छटपटा कर नीचे कर्राहने लगा। इधर दाएं खड़ा आदमी का बेसबॉल डंडा हवा में चक चुका था और बाएं वाले का पसलियों के निशाना वाला पंच भी खाली जा चुका था।

अपस्यु पास गिरे उस आदमी के हाथ से को लोहे का पंच निकला। इधर सीन ऐसा था कि अपस्यु जब लोहे के पंच को निकाल रहा था तब उसका सर बाएं वाले आदमी के पास था और उसका आधा बदन बेसबॉल डंडे वाले के सामने था। एक ओर से बयां वाला अपने पाऊं से अपस्यु के चेहरे पर अपने लात उठाकर मारने कि कोशिश करने लगा, तो दूसरी ओर से उसके बदन पर बेसबॉल डंडा चल चुका था।

अपस्यु खुद को बचाते हुए रोल करके अपना सर बेसबॉल वाले आदमी के पास ले आया और धर बाएं खड़े आदमी के पास। जैसे ही वो बेसबॉल वाले के पास पहुंचा उसने लोहे के पंच लगाकर 4 जोरदार पंच उसके पाऊं पर चला दिए। रोल होने के कारन बेसबॉल वाला अपने शॉट मिस कर गया और जो पाऊं चेहरे पर लगना चाहिए था वो पाऊं अपस्यु के पाऊं के ऊपर पड़ा। और इतने देर में अपस्यु बेसबॉल वाले पर हमला कर उसके डंडे को अपने हाथ में लिया। इधर बाएं खड़ा आदमी जबतक अपस्यु के करीब आकर एक बार फिर उसके चेहरे पर अपने बुट के छाप छोड़ने की कोशिश किया .. अपस्यु ने उसके पाऊं पर, आगे से बेसबॉल का डंडा चला कर उसे गिरा चुका था। सभी टारगेट नीचे जमीन पर और अपस्यु चैन की श्वास लेते धीरे-धीरे नींद कि गहराइयों में चला गया।
 
Update:-74 (A)

सभी टारगेट नीचे जमीन पर और अपस्यु चैन की श्वास लेते धीरे-धीरे नींद कि गहराइयों में चला गया। अपस्यु की जब आखें खुली वो किसी कमरे में था और उसके पास ऐमी बैठी हुई थी। अपस्यु थोड़ा उठकर टिकते हुए पूछने लगा… "कितने देर से मै सो रहा हूं।"…. "एक घंटे हुए है। अभी कैसा लग रहा है।"..

अपस्यु:- सर बहुत भारी लग रहा है ऐमी। अभी हम कहां है?

मेघा:- अभी तुम मेरी जगह पर हो। वैसे मानना पड़ेगा कमाल का बैकअप है तुम्हारा। यहां तुम बेहोश हुए और उधर ये पहुंच गई।

ऐमी:- जब एक दूसरे के साथ है तो एक दूसरे पर भरोसा जताना ही परता है।

मेघा:- ये लो तुम ये पहले टैबलेट खा लो, तुम्हे अच्छा लगेगा।

अपस्यु टैबलेट लिया और मेघा को बाय बोलकर जाने की इजाज़त लेने लगा… मेघा उसे रोककर ऐमी को कुछ देर के लिए बाहर इंतजार करने के लिए बोली… ऐमी के जाते ही मेघा कहने लगी…. "तुम्हारा आत्मविश्वास काफी कमाल का है। तुम एक विजेता हो, तुम पर 5 मिलियन नहीं 50 मिलियन लगाए जा सकते हैं। मुझे यकीन हो गया कि मै अपना पैसा सही जगह लगा रही हूं।"

अपस्यु:- उसके लिए तो सीधा फाइट रख लेती ना, मुझे नशा का कॉकटेल देने की क्या जरूरत थी।

मेघा:- मिस्टर अपस्यु जितना मै तुमसे मिल रही हूं, तुम उतना ही मेरी जिज्ञासा बढ़ाते जा रहे हो। तुम समझ चुके थे ना ड्रिंक में कुछ मिलाया गया है।

अपस्यु:- तुम्हारी वो वेटर जब दरवाजा खोलने आयी तभी मै समझ गया था।

मेघा:- दरवाजा खोलने से तुम्हे कैसे पता चल गया कि वो तुम्हारे ड्रिंक में कुछ मिला रही है।

अपस्यु:- ये बिजनेस सीक्रेट है, सबके साथ साझा नहीं किया जा सकता।

मेघा:- मै नहीं मानती की तुम्हे तब पता चला होगा। तुम्हे बस इंस्टिंक्ट हुआ होगा आखरी समय पर।

अपस्यु:- तुम्हारा ऐसा सोचना है तो ऐसा ही सही। एक बात याद दिला देना मै जाते-जाते बताऊंगा, फिलहाल तुम्हारी टेस्टिंग पूरी हो गई या और भी कुछ टेस्ट करना बाकी है।

मेघा:- और भी कुछ टेस्ट के लिए अभी तुम तैयार नहीं हो। बहरहाल आज के नतीजों से मै काफी उत्साहित हूं और इसमें कोई दो राय नहीं कि तुम वाकई कोई जादूगर हो। एंगेजमेंट में मिलते है, वहीं फिर आगे की बात होगी।

अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है फिर मै चलूं…

मेघा:- हां बिल्कुल, वैसे तुमने वो बात अभी तक नहीं बताई जो तुम जाते-जाते बताने वाले थे।

अपस्यु:- उसके लिए तुम्हे अपना ईगो भूलकर एक अच्छे मेजबान की तरह मुझे कार तक ड्रॉप करना होगा…

मेघा, अपस्यु की बात को हंसकर मान गई और उसे छोड़ने खुद कार तक आयी। अपस्यु कार में बैठा और कहने लगा….……. "कुछ ब्राउन सुगर, उसके साथ ट्स्टलेस और ऑर्डुर लेस नींद की गोलि लगभग 200 मिलीग्राम के डोज में विष्की के साथ मैंने पिया… जिसने भी तुमसे इस कॉकटेल की डील की होगी उसका दावा होगा की यदि बॉडी पचा नहीं पाया तो केस सीरियस होगा शायद जान भी जा सकती है। बॉडी ने यदि एक्सेप्ट कर लिया और कितना भी बड़ा नशेड़ी क्यों ना हो, ड्रिंक लेने के साथ ही वो बेहोश होगा और कम से कम 36 घंटे बाद होश में आएगा।"

"मै उसे पीने के बाद 8 मिनट तक खड़ा रहा और महज 1 घंटा में उठ गया। जाकर सोचते रहना की ये कैसे हो गया और उससे भी जवाब मांगने की कोशिश कीजिए जिसने ये दावा किया था। जाते-जाते अंत में एक आखरी बात, मै काम इंस्टिंक्ट पर नहीं बल्कि फैक्ट्स के साथ करता हूं। बाय-बाय डार्लिंग हैव ए स्वीट नाइट।"

अपस्यु अपनी बात ख़त्म करके ऐमी को इशारा किया और वो कार ड्राइव करने लगी। कुछ दूर ड्राइव करने के बाद… "अपस्यु…"

अपस्यु:- हां ऐमी कहो ना।

ऐमी:- कैरेक्टर से बाहर निकलिए सर उसका घर बहुत पीछे छूट गया।

अपस्यु:- ओह ! मैंने ध्यान नहीं दिया। कैसा रहा आज का परफॉर्मेंस..

ऐमी:- उमाहहहहहहहहहहहहहह… एकदम लाजवाब, बेचारी अभी बैठकर सर खुजा रही होगी। कामिनी बड़ी आयी थी मेरे अपस्यु को चेक करने वाली। साली की ना अक्ल अच्छी थी और शक्ल देख लो तो उल्टी करने का मन कर जाए।

अपस्यु:- हाहहाहाहहाहाहहाहा… बस भी करो कितनी गालियां दोगी उसे…

ऐमी:- हां छोड़ो उसे, वैसे मुझे जरा भी पसंद नहीं आया, तुम इतनी डिटेल उसे दे रहे थे।

अपस्यु:- मै उसे डिटेल थोड़े ना दे रहा ऐमी, बस उसके ईगो को रौंद रहा था। जब उसे मैंने कार के पास खड़ा करवाया ना तो मुझे अलग ही लेवल की संतुष्टि मिल रही है।

ऐमी:- खैर छोड़ो ये, और अभी एंगेजमेंट की तैयारी करते है। कल शाम छछूंदर की एंगेजमेंट है.. वूहू.... वूहू .…. वूहू ….

अपस्यु:- बस भी करो ऐमी, एक्साइटमेंट में आकर किसी को ठोक मत देना।

ऐमी:- खड़ूस कहिंके… अच्छा सुनो कल मै साड़ी पहनना चाहती हूं।

अपस्यु:- हां बाबा ठीक है पहन लेना।

ऐमी:- अपस्यु बात क्या है बताओगे.. वो भी बिना कोई वक़्त लिए..

अपस्यु:- मुझे साची से एक बार मिलना है। क्या अभी एक मीटिंग अरेंज हो सकती है।

ऐमी:- हम्मम ! मै कुंजल से बात करती हूं, वो हमारी मीटिंग फिक्स करवा सकती है।

अपस्यु:- नहीं, हम नहीं.. सिर्फ मै और साची… रूको मै खुद बात करता हूं। ..

अपस्यु साची को कॉल लगाते हुए…. "जी अपस्यु कहिए कैसे याद किया आपने।"..

अपस्यु:- मुझे तुमसे मिलना है, क्या तुम कुछ वक़्त निकालकर मिल सकती हो।

अपस्यु की इस बात से जैसे साची का दिल धड़का हो.. किसी तरह खुद को काबू करती हुई कहने लगी… "सॉरी, कल एंगेजमेंट है और उसी की तैयारियों में लगी हूं।"…

अपस्यु:- मैंने तुम्हारा हर कहा मना है, एक बार बस मेरा कहा मान लो। मै आधे घंटे बाद तुम्हारा होटल कि छत पर इंतजार करूंगा। वहीं बात करता हूं, अभी रास्ते में हूं।

अपस्यु ने अपनी बात कहकर कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया। कॉल कटते ही ऐमी ने अपस्यू का हाथ थाम ली, और उसकी ओर देखती हुई "थैंक्स" कहने लगी। इधर अपस्यु के कॉल कटते ही साची के मन में कई सारे सवाल एक साथ आने लगे… "क्या हुआ दीदी आप अचानक से किस सोच में पर गई।"..

साची:- अपस्यु का कॉल था, मुझसे मिलना चाहता है।

लावणी:- आप क्या सोच रही है?

साची:- वो कुछ सोचने का मौका दे तब ना कुछ सोचूं। बस एक रहस्य ही है वो, जितनी बार सोचा कि इस बार मिलकर हम सब कुछ सुलझा लेंगे, हर बार एक नए ही रहस्य में उलझ गई। बड़ी मुश्किल से तो उबर पाई थी, अब पता नहीं और कहां उलझा रहा है। जानती है जब से उसका कॉल आया है ना मेरी धड़कने बढ़ी। मन के अंदर जो भी चल रहा हो, लेकिन दिल तो सिर्फ इसलिए धड़क रहा है कि किसी भी तरह … बस किसी भी तरह वो बस मेरे साथ हो और मै उसके साथ… क्या करूं ये दिल ही बेईमान है।

लावणी:- जाओ दी, आप को जाना चाहिए.. किसे पता शायद इस बार आप के लिए कुछ अच्छा हो वहां। इस तरह उसके लिए तरप सकती हो, तो क्यों ना एक बार उससे मिलकर देख लो, शायद आज किसी पक्के निष्कर्ष पर पहुंच सके। जाओ दीदी जाओ…

लगभग आधे घंटे बाद अपस्यु होटल की छत पर पहुंचा.. साची उसका पहले से इंतजार कर रही थी। एक नज़र वो अपस्यु को देखी और फिर सामने देखने लगी। अपस्यु उसके पास पहुंचा। साची रेलिंग को पकड़े सामने देख रही थी और अपस्यु पीछे मुड़ कर रेलिंग से खुद को टीका लिया और साची को देखने लगा… "बहुत सुंदर लग रही हो साची, और पहले से काफी सेक्सी भी हो गई हो।"

साची:- ये बताने के लिए मुझे यहां बुलाया है।

अपस्यु:- नहीं बिल्कुल भी नहीं। बस तुम्हारी फीलिंग मुझे यहां खींच लाई।

साची:- जानते हो अपस्यु, एक बात जो मै अच्छे से जान चुकी हूं, मिस्टर अपस्यु मेरी फीलिंग से तो खिंचे आने से रहे। यदि ऐसा होता तो वो कब का आ चुका होता और मुझे इतनी दूर तक ना आना परा होता।

अपस्यु:- शायद हां, तुम्हारी बात सत्य है, लेकिन क्या तुम बता सकती हो, जब मै सच बोलकर गुनहगार हो गया तो सच ना पचा पाने वाली तुम, क्या तुम्हारा कोई दोष नहीं?

साची:- ओह तो तुम मुझसे क्या सुनना चाहते थे कि मै तुम्हारे प्यार में इतनी पागल हूं कि तुम मेरे सामने अपने उस ऐमी के साथ मौज करो, लेकिन मेरा साथ कभी नहीं छोड़ना।

अपस्यु अपनी आंखे बंद करके अपने अंदर तेज श्वांस खिंचा और धीमे-धीमे उसे छोड़ते हुए कहने लगा…. "जी तो करता है, अभी उठा कर यहां से नीचे फेंक दूं।"

साची:- एक यहीं तो तुम्हे आता है, पीना और मारना, रुके क्यों हो फेंक दो मुझे और किस्सा ही खत्म करो।

अपस्यु:- किस्सा ही खत्म करने आया हूं, बस कुछ वक़्त तो दो, मेरा वादा है आज तुम्हारे सर से तुम्हारे स्वार्थ और स्वार्थी चाहत का भूत उतार कर जाऊंगा।

साची:- मै जा रही हूं, तुम यहां रहकर उतरते रहो भूत…

अपस्यु:- अच्छा कहां जाओगी ऑनलाइन होकर अननोन गर्ल की आईडी ओपन करने और अपने उस क्रेज़ी बॉय से बात करने।

साची के बढ़ते कदम अपनी जगह ठहर गए। एक पल के लिए उसे ऐसा लगा जैसे उसकी छिपी दुनिया सबके सामने आ गई हो, वो तेजी से वापस आयी और बिना कुछ कहे अपस्यु को खींच कर एक तमाचा मार दी। लेकिन इस बार अपस्यु भी जवाब देते हुए, साची को भी एक नपा तुला थप्पड उसके गाल पर बिठा दिया… "मंदिर का घंटा समझ रखा है क्या मेरा गाल, जो जब जी में आया थप्पड लगा दिया।"…

साची:- क्रिमिनल हो तुम, ब्लैकमेलर.. मुझपर शक करने वाला इंसान जो मेरे लैपटॉप और फोन को चेक करते रहता था। बहुत ही घटिया हो तुम अपस्यु और अब तो मै भी देखूंगी की लावणी का एंगेजमेंट कैसे होती है तुम्हारे भाई के साथ। तुम्हारी पूरी फैमिली ही क्रिमिनल बैकग्राउंड की है। तुम सबको मै देख लूंगी।

अपस्यु:- क्या बात है एक थप्पड पड़ते ही मेरे पूरे खानदान को ही घसीट दी, मैं भी हर थप्पड के बदले तुम्हारे पूरे खानदान को घसीट लेता तब कैसा मन होता तुम्हारा।

साची:- मै ही पागल थी जो लावणी की बात सुनकर यहां चली अाई, मुझे आना ही नहीं चाहिए था।

अपस्यु:- इतनी देर में एक सही बात कही हो, तुम सच में पागल हो।

साची:- अपस्यु क्या तुम झगड़ा करने के लिए मुझे यहां बुलाए हो, क्यों फुटबॉल बनाकर खेल रहे हो मेरे साथ?

अपस्यु:- बस दिल पर एक बोझ था कि तुम्हारी सच्ची फीलिंग मैंने हर्ट की, यह बात केवल मुझे नहीं ऐमी को भी चुभ रही थी। हम दोनों का तो छोड़ो मेरे भाई, मेरी बहन उनको भी बहुत चुभ रही थी, और उन सबने तुम्हारे दर्द को समझा और कोशिश में लगे रहे की तुम अपना दर्द भूल जाओ, लेकिन नहीं तुम्हे तो मुझ से ही समझना था, इसलिए आज मै तुम्हारे सामने खड़ा हूं। झगड़ा करने नहीं आया, समझी।

साची:- तुम जो कर रहे हो उसे टॉर्चर कहते है अपस्यु …

अपस्यु:- चलो मान लेते है की मै तुम्हे बहुत ही ज्यादा परेशान कर रहा हूं, लेकिन तुमने क्या किया था?

साची:- क्या किया था मैंने?

अपस्यु:- एक लड़का जो 4 साल से तुमसे जुड़ा हुआ था, जिसके साथ तुमने अपनी पूरी फैंटेसी शेयर की। जो तुम्हारे हार सुख में साथ रहा, तुम्हारे हर दुख में तुम्हारे फीलिंग को समझा, तुम्हे हमेशा सही सलाह दिया.. जब उसने अपने लिए एक मौका मांगा की वो भी तुम्हे चाहने लगा है तो तुमने क्या किया.. क्या किया था उसकी फीलिंग के साथ…

साची:- वो वर्चुअल फ्रेंड था, उसे बस गलतफहमी थी और कुछ नहीं। वर्चुअल आईडी के फैंटेसी को वो गलत तरीके से आकलन किया था। मैंने साफ-साफ बता भी दिया था उसे। उसके बाद तो मैंने उससे बात भी बंद कर दी थी, लेकिन वो खुद मेरे पीछे आया था.. तुम एक वर्चुअल की कहानी रियल लाइफ से जोड़ कर कोई भी नतीजा मत ही निकालो तो अच्छा होगा।

अपस्यु:- बेचारा वो क्रेज़ी बॉय, वो भी ठीक वैसे ही हार कर दोबारा मैसेज कर रहा होगा, जैसे तुम हॉस्पिटल अाई थी, अपनी गलती मानकर। दिल के हाथों मजबुर होकर। ठीक वैसे ही जैसे मैंने तुमसे बात करना छोड़ चुका था कुछ आगे की समस्या को सोचकर.. दोनों सिचुएशन में क्या अंतर था साची? आईडी वर्चुअल थी ना क्या फीलिंग भी वर्चुअल होगी?

अपस्यु की बात सुनकर साची कुछ जवाब नहीं दे पाई, वो बस सोच में डूबी रही। तभी अपस्यु चुटकी बजाते हुए… "ओ मैडम, लौट आओ, इस सवाल का जवाब फिर कभी ढूंढ़ लेना, कल तुम्हारी एंगेजमेंट है, जल्दी से सारी बातें खत्म करके आज दोनों साथ खाना खायेंगे..

साची:- अपस्यु तुम ना मेरे दिमाग से खेलना बंद करोगे प्लीज। कितना घुमाते हो, क्यों कंफ्यूज करने पर उतारू हो। सब भूल कर ध्रुव को हां तो कर ही दी हूं, तुम भी भूल जाओ की मेरी फीलिंग हर्ट हुई है, मैं अपने आप निर्मल हो जाऊंगी कुछ दिनों में।
 
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