Romance भंवर (पूर्ण) - Page 15 - SexBaba
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Romance भंवर (पूर्ण)

Update:-121

अपस्यु:- बस मुझे इतना ही जानना था, बाकी खेल तो शुरू हो ही गया है, मज़े लो बस…

मेघा:- हां मै तो पॉपकॉर्न के साथ मज़े लूंगी इस सह और मात के खेल का। वैसे तुम्हे डर नहीं लग रहा।

अपस्यु:- अपना डर दूर करने ही तो मैदान में उतरा हूं.. वरना मुझे क्या परी थी।

मेघा:- जिंदा रहे तो फिर मज़े करेंगे डार्लिंग। अब मैं चलती हूं।

मेघा वहां से निकल गई और अपस्यु अपने सिगरेट का धुआं उड़ाते कुछ सोच में डूबता चला गया। एक छोटे से चिंतन के बाद अपस्यु मुक्ता अपार्टमेंट से अपने फ्लैट लौटा और श्रेया को मिलने का आमंत्रण दिया।

श्रेया किसी घायल शेरनी की तरह पगलाई अपस्यु का इंतजार कर रही थी। जैसे ही वो मिलने के लिए फ्लैट में घुसी, ना कोई बात ना कोई वार्निग, सीधा फायरिंग शुरू कर दी। गुस्से में पगलाई श्रेया ने जैसे ही पुरा मैग्जीन खाली किया अपस्यु ने उसे तेजी से पकड़ा।….

श्रेया खुद को छुड़ाने के जद्दो जेहद में लग गई। काफी कोशिश के बाद जब वो नाकाम सी महसूस करने लगी, छटपटाने बंद करके वो स्थिर हो गई और तेज-तेज श्वांस लेती श्रेया गुस्से में पागल होकर इधर-उधर देखने लगी….

अपस्यु अपने हाथों की पकड़ बनाए….. "तुम मुझे जान से मारने कि कोशिश कर रही हो, लेकिन मार नहीं पा रही। कहीं मैंने सोच लिया तो तुम्हारे साथ-साथ यहां रह रही तुम्हारी पूरी टीम भी साफ हो जाएगी। बेहतरी इसी में है कि हम बैठकर बातें कर ले।"

श्रेया अपनी पिस्तौल नीचे गिराती हुई "हां" कही और अपस्यु ने उसे छोड़ दिया। ख़ामोश होकर वो हॉल में बैठी… "बताओ क्या बात करनी है।"

अपस्यु:- ये सीधा गोली मारना कहां से सीखी।

श्रेया:- जब खून सवार होता है तो सीधा गोली ही मारी जाती है, बातचीत तो समझौते का रास्ता खोलती है।

अपस्यु:- और खून क्यों सवार हो गया तुम्हारे सर पर..

श्रेया:- मेरे 5 लोग को बड़ी बेरहमी से मारने के बाद ऐसा पूछ रहे, कमाल हो गया ये तो।

अपस्यु:- वो तुम्हारे लोग थे और तुम मेरे पीछे हो, ये मुझे अगले दिन पता चला, इसलिए इसका दोष मुझपर ना ही दो तो अच्छा है। मेरे सामने भी मुझे और ऐमी को जान से मारने कि कोशिश हुई थी। तुम्हारे 5 लोगों को जान से मारने का अफ़सोस है, लेकिन मुझे फसाने के लिए तुमने गलत रास्ता चुना था। अगर कुछ इतना ही जरूरी था तो सीधा बात कर लेती, उस जगदीश राय को मारने के लिए भी मुझे सोचना पड़ता क्या?

श्रेया:- आई एम् सॉरी। मैं एक तरफा सोचकर ही सब गड़बड़ कर गई।

अपस्यु:- उन 5 लोगों की फैमिली डिटेल मुझे दे देना। उनका कर्जदार हूं मै, क्योंकि योजना तुम्हारी थी और पीस गए गलत लोग, जिन्हें मौत तो नहीं ही मिलनी चाहिए थी, क्योंकि वो ऑर्डर फॉलो कर रहे थे।

श्रेया:- मेरे टीम के लोग थे इसलिए मै मौत का बदला ले रही थी बस, बाकी मुझे कोई गिल्ट नहीं उन 5 के मरने का। सच मानो तो 10 और ऐसे लोग है, जो मेरे टीम से चले जाए तो शायद उनके मरने का बदला मै ले लूं, लेकिन उनके जीने से ज्यादा उनके मरने कि ही ख्वाहिश दिल में है।

अपस्यु:- एक खतरनाक टीम लीड करने वाली की इतनी भावनाएं। हुआ क्या था, जो इन 15 से लोगों से तुम नफरत करती हो?

श्रेया:- कुछ बातें ना ही जानो तो अच्छा होगा। खुद को बड़ी हिम्मत से खड़ा किया है, तुम्हारे कहे शब्द और एक दोस्त की तरह मुझे समझना, मुझे फिर से किसी और दौड़ में ले जाएगा। इसलिए मेरी इतनी रिक्वेस्ट मान लो। और हां, आई एम् ए बैड गर्ल, इसलिए मेरे किसी दिमागी फितूर के कारन मुझे जान से मारना पड़े तो अफ़सोस मत करना, बाकी मुझे यदि तुम्हे मारना होगा तो पहले तुम्हे मारूंगी और बाद में थोड़ा सा अफ़सोस कर लूंगी।.. हीहीहीहीही…

अपस्यु:- पूरे पागल हो तुम !

श्रेया:- सो तो हूं। अब छोड़ो इन सब बातों को, सीधे मुद्दे पर आती हूं। तुम मेरे बारे में जानते हो और मै तुम्हारे बारे में, सो अब ये लुका-छिपी का खेल क्यों? सीधे बात करते हैं।

अपस्यु:- मै भी यही सोचकर पब में सब ओपन कर दिया था।

श्रेया:- मेरी ट्रेनिग एक कातिल के रूप में हुई है। हमारी टीम अबतक 4 काम को चुपचाप अंजाम दे चुकी है, लेकिन हमलोग 2 टारगेट में फंस गए। 2 टारगेट में फसना भी गलत होगा, जगदीश राय को ही मारने में इतने बुरी तरह से असफल हो गए की दूसरा टारगेट तो उससे कई गुना हाई लेवल का है। हम लोग जब जगदीश राय की फील्डिंग कर रहे थे, तब मैंने तुम्हारा जलवा देखा था, उसके अंडरग्राउंड फाइट क्लब में। जहां पर कोई जगदीश राय के खिलाफ कुछ करने की सोच नहीं सकता, उस जगह तुम 2 लोग सामने से अंदर घुसे और अपना काम करके निकल गए।

"हम लोग तो दंग ही हो गए थे ये सब देखकर। हमारी, जगदीश राय को मारने कि पहली प्लांनिंग ही चल रही थी, और जोश इतना था कि हमने जीत जश्न में इतना ही कहा था… "जब दो लोग सामने से घुसकर इतनी तबाही मचा सकते हैं, फिर हमारे पास तो एक पूरी टीम है।"

"वक़्त बीतता रहा लेकिन जगदीश राय क्या चीज है, हमे समय-समय पर पता चलता रहा। हम समझ चुके थे कि ये जगदीश राय हमसे बहुत ऊपर की चीज है इसलिए फिर हमने तुम्हे ढूंढ़ना शुरू किया। केवल 2 मकसद थे, तुम्हे समझकर अपने साथ मिलाना या साथ मिलकर काम करने लायक नहीं हुए तो तुम्हे फसाकर काम निकलवाना। बेसिकली हमारी पूरी टीम ही इस मामले में कच्चे है, किसी को फसाकर काम निकलवाने में हम लोग फिसड्डी साबित हुए।"

"मेरे काम के अंदाज़ से तो तुम समझ ही चुके होगे कि ये हमारा पहला हाई केवल काम था और तुम्हे जाल में फंसाकर हमे 2 बड़े टारगेट एलिमिनेट करने का काम मिला था। एक को तो तुमने साफ कर दिया। अब बस अपना एक हाई क्लास टारगेट एलिमिनेट करवाना है।"

अपस्यु:- नाम बताओ, यदि अनैतिक नहीं होगा तो मै ये काम कर दूंगा।

श्रेया:- मैं जानती हूं तुम्हारे काम करने के तरीके को। मेरे टारगेट का नाम सुनकर तुम मना नहीं कर सकते इस काम को।

अपस्यु:- नाम, काम और दाम बताओ।

श्रेया:- लोकेश प्रताप सिंह.. कीमत तुम खुद बता दो।

अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है अगले 3 दिन में यह काम जो जाएगा। उम्मीद है तुम और तुम्हारी टीम का काम यहां खत्म हो गया, सो तुमलोग अपने ये रेंट का फ्लैट छोड़कर आराम से निकल जाओ, और इस काम के बाद ना तो मै तुम्हे जानता हूं, और ना तुम मुझे। इस काम कि कीमत होगी 50 करोड़।

श्रेया:- लेकिन तुम्हारी कीमत तो 2 करोड़ हुआ करती है ना।

अपस्यु:- लोकेश राठौड़ इतनी बड़ी मछली है कि तुम तो 100 करोड़ निकलवाओ अपने बॉस से, 50 तुम्हारे और 50 मेरे। और हां, हम दोनों एक दूसरे के बारे में जानते है, ये किसी को भनक भी नहीं लगने देना।

श्रेया:- कीमत ज्यादा है पहले उसपर बात जर लें, फिर दूसरी चर्चा भी हो जाएगी।

अपस्यु:- इसलिए मैं लड़कियों के साथ डील नहीं करता, यहां भी बारगेनिंग।

श्रेया:- सो तो है। तो डील कुछ ऐसी है कि तुम्हे में 10 करोड़ दिलवाती हूं।

अपस्यु:- 50 करोड़ से सीधा 10 करोड़, ये कैसी बारगेनिंग है।

श्रेया:- लवली बारगेन है। आज तुम्हारा पीछा करके मै जान गई हूं कि तुम्हारा भी वही टारगेट है जो मेरा है। मै 10 करोड़ ना भी दूं तो भी ये काम तुम करोगे। सो पैसों की डील तय हो गई। अब आते हैं दूसरे हिस्से पर। तुम मेरी सच्चाई नहीं जानते। ठीक है तुम मेरी सच्चाई नहीं जानते, लेकिन इस डील के लिए मैंने तुम्हे राजी कैसे किया। सो एक दमदार एग्जॉटिक प्ले होगा और तुम मेरे बिछाए हुस्न के जाल में फस गए।

अपस्यु:- मुझे तुम्हारे साथ फिजिकल होने में कोई ऐतराज नहीं, लेकिन तुम्हे ये जरूरी लगता है तो अभी कर लो, वरना मुझे काम पर फोकस करना है।

श्रेया:- हम्मम ! कोई नहीं, ठीक है इस बार बच गए लेकिन मै अपनी डिजायर तो कभी ना कभी पूरी कर ही लूंगी। अलविदा दोस्त फिर शायद ही हम कभी मिले।

अपस्यु 2 मीटिंग समाप्त कर चुका था लेकिन रात के इस प्रहर में अंदर से हृदय थोड़ा कमजोर सा पड़ता जा रहा था। जिंदगी में पहली बार उसे डर का आभास सा हो रहा था। अपस्यु एक बहुत बड़े खेल का हिस्सा बन तो गया था, लेकिन आने वाले पल की कल्पना अपस्यु के अंदर डर का माहौल बनाए हुए थे।

अपस्यु को भले ही खेल शुरू होने से पहले, अनचाहे डर ने उसे घेर रखा था, लेकिन लोकेश अपनी मकसद को पूरा करने के लिए पूरे जोर से आगे बढ़ना शुरू कर चुका था। सुबह जिस नंदनी रघुवंशी का चेहरा, लोकेश ने अपस्यु के मोलबाइल में देखा, रात तक उसकी और उसके पूरे परिवार की डिटेल सामने थी।

12 अगस्त की रात विक्रम और लोकेश मीटिंग हॉल में बैठकर नंदनी की पूरी डिटेल देख रहे थे…. "पापा क्या यही है आप की बहन"..

विक्रम:- सौ फीसदी यही है नंदनी रघुवंशी।

लोकेश:- ठीक है पापा फिर कल दिन में उनके यहां आने की स्वागत कीजिए। अब अपना पुरा दाव खेलने का समय आ गया है।

विक्रम:- लोकेश वो सेंट्रल होम मिनिस्टर है , उसपर हाथ देने का मतलब तुम समझ रहे हो।

लोकेश:- पापा, जब विपक्ष अपने साथ हो, उसके पार्टी के कई नेता अपने साथ हो, पुरा मामला मायलो ग्रुप के मालिक और सेंट्रल होम मिनिस्टर के बीच का होना है, फिर आप चिंता क्यों करते है? अब आप समझे की हमे नंदनी रघुवंशी की इतनी जरूरत क्यो थी?

लोकेश के इस छोटे से मीटिंग के बाद, सबसे पहले अपस्यु और उसके परिवार पर ही गाज गिरने की तैयारी शुरू होने लगी, क्योंकि लोकेश के अपने सबसे बड़े दाव के लिए नंदनी रघुवंशी का उसके पास होना जरूरी था और 12 अगस्त की पूरी रिसर्च के बाद 13 अगस्त, दिन के 2 बजे तक उसे हर हाल में नंदनी रघुवंशी अपने बेस पर चाहिए था।

गोवा से लेकर मुंबई और मुंबई से लेकर दिल्ली तक, अपस्यु और उसके परिवार के नाम की लिस्ट निकल चुकी थी। हर जगह के लोकेश के पाले प्रोफेशनल पहुंच चुके थे और सबका काम और टारगेट बांट दिया गया था। एक रात और जीने की गुंजाइश के बाद, नंदनी के सारे परिवार को दिन के 2 बजे तक समाप्त करके नंदनी को राजस्थान लाने कि सारी तैयारियां हो चुकी थी।

सुबह के लगभग 5 बजे से ही हर कोई फील्डिंग लगाकर बैठ चुका था। गोवा में आरव और लावणी एक हसीन रात बिताने के बाद सुबह के 5 बजे, मोरजिम बीच घूमने के लिए निकले थे। हाथों में हाथ थामे एक और हसीन सुबह लुफ्त उठाने। दोनो जैसे ही अपने रिजॉर्ट से बाहर निकले, खबरी ने तुरंत यह संदेश आगे तक पहुंचाया।

एक चेन के माध्यम से खबर लोकेश के ऑपरेटिंग रूम तक पहुंची, और वहां का ऑपरेटर अजय लाइव वीडियो फुटेज ऑन करके टारगेट को एलिमिनेट करने का हुक्म दिया। 2 स्नाइपर और 7 गनमैन फाइटर के साथ ये लोग भी मोरजिम बीच के पास, जंगल झाड़ियों में अपना ठिकाना बनाया।

शूटर 1:- लड़का मेरे निशाने पर है।

शूटर 2:- उसकी कमाल कि हॉट गर्लफ्रेंड मेरे निशाने पर है।

लोकेश के कंट्रोल रूम का ऑपरेटर अजय…. "दोनो टारगेट को खत्म करो"…

इधर फायरिंग के आदेश आए और उधर 9 लोगों की भीड़ में कौतूहल का माहौल हो गया। वीडियो आरा तिरछा आ रहा था, किसी की कमीज़ दिख रही थी तो किसी की पैंट। आवाज़ से इतना तो समझ में आ रहा था कि उस जगह पर मारपीट हो रही थी, लेकिन कौन किसको मार रहा था कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था।

तकरीबन 10 मिनट बाद वहां से ऑडियो और वीडियो दोनो आने बंद हो गए। ऑपरेटर हेल्लो, हेल्लो करता रह गया, लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया। ऑपरेटर अजय से जब ये गुत्थी नहीं सुलझी, तब वो आनन फानन में गोवा के लोकल गैंग से संपर्क किया और 2 करोड़ की एक डील तय करके आधे पैसे उन तक पहुंचा दिए।
 
Update:-122

तकरीबन 10 मिनट बाद वहां से ऑडियो और वीडियो दोनो आने बंद हो गए। ऑपरेटर हेल्लो, हेल्लो करता रह गया, लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया। ऑपरेटर अजय से जब ये गुत्थी नहीं सुलझी, तब वो आनन फानन में गोवा के लोकल गैंग से संपर्क किया और 2 करोड़ की एक डील तय करके आधे पैसे उन तक पहुंचा दिए।

लोकल गैंग के लिए लाख रुपए में कत्ल करना कोई बड़ी बात नहीं थी, यहां तो मामला करोड़ में था। तकरीबन 20 गुंडों की टीम मोरजिम बीच के लिए रवाना हो गई। आरव और लावणी दोनो एक छोटे से पत्थर पर बैठकर सुबह के हसीन नजारा का लुफ्त उठा रहे थे।

इधर 20 लोगों की टीम जब निकली तो वो भी ऑडियो और वीडियो के साथ कनेक्ट होकर निकली थी। ये लोग जंगल में छिपकर, बड़ी सी स्निपर राइफल निकालकर, चुपके से निशाना लगाने वालों में से नहीं थे, बल्कि सीधा घुसो मारकर निकलो वाली नीति थी।

4 जीप में 5-5 लोग सवार होकर, घनघनाते हुए, मोरजिम बीच पर अपनी गाड़ी आगे बढाते टारगेट की पहचान करने लगे। बीच के दूसरे किनारे टारगेट की पहचान हो गई। फिर तो जीप पूरे पिकअप के साथ आगे बढ़ी। लेकिन जीप जब आधे रास्ते पर थी, तभी समुद्र के लहरों के साथ 20-25 अनियंत्रित जेट-की हवा से छलांग लगती एक साथ चारो जीप से टकराई।

क्या नजारा था वो जेट-की उड़ती हुई सीधा जीप के ऊपर गिर रही थी और उनके घेरे में तो वो सभी जीप दिखना ही बंद हो गए थे। ऑपरेट और कमांड दे रहे अजय को, गोवा में क्या चल रहा है कुछ भी समझ में ही नहीं आ रहा था। पहले 9 लोग गायब हो गए, अब ये 20 लोग गंभीर रूप से घायल होकर हॉस्पिटल में। ऊपर से कोई जवाब तक नहीं दे पा रहा था।

सुबह के 5 से 6 बजे के खेल में लोकेश के टारगेट को भनक तक ना लगी कि उसपर जानलेवा हमला होने वाला है और किसी ने आकर उसके पूरे गेम की बैंड बजा दी। अजय कुछ सोचकर गोवा के ऑपरेशन को होल्ड में डालकर मुंबई और दिल्ली पर फोकस करने लगा।

अजय को लगने लगा था कि अपस्यु ही इकलौता सबको मॉनिटर कर रहा है और यदि अपस्यु साफ हो गया तो नंदनी का पूरा परिवार साफ हो जाएगा। वक़्त था एक जल्दी एक्शन का इसलिए अजय ने तुरंत 4 बेस्ट फाइटर को अपस्यु के फ्लैट पर ही रवाना होने बोल दिया।

8 बजे तक वो चारो अपस्यु के अपार्टमेंट में थे और निर्भीक होकर फ्लैट नंबर 301 के लिए बढ़ने लगे। ये चारो भी ऑडियो वीडियो के साथ आगे बढ़ रहे थे। चारो, चोरी से जैसे ही अपस्यु के घर में दाखिल हुए, गेट अपने आप की लॉक हो गया। सारे मीडिया कनेक्शन ऑटोमेटिक डिस्कनेक्ट हो गए। अजय हेल्लो-हेल्लो करता रह गया लेकिन उधर से कोई आवाज़ नहीं आया।

इधर जैसे ही वो चारो अंदर दाखिल हुए, अपस्यु आराम से डायनिंग टेबल पर बैठकर सूप पी रहा था और अपने कंप्यूटर स्क्रीन को देख रहा था। चारो अंदर आते ही अपस्यु को देखकर तेजी दिखाते हुए, आव देखा ना ताव और एसएमजी (smg) से फायरिंग शुरू कर दी।

बौखलाहट में फायरिंग तो शुरू कर दिया, लेकिन पूरे मैगज़ीन खाली करने के बाद भी अपस्यु वहीं बैठकर आराम से अब भी सूप पी रहा था। चारो अपनी बड़ी सी आखें किए बस अपस्यु को ही देख रहे थे…. "अबे वो काल्पनिक इमेज देख रहे हो, होलोग्राम वाली गधे।"

चारो ओर से अपस्यु की आवाज़ गूंजने लगी और आवाज़ के साथ ही अपस्यु ने एक छोटा सा कमांड दिया और दीवार के अंदर से कई सारी पतली पाइप निकल आयी। देखते ही देखते उनसे निडिल निकलकर उन चारो के बदन में घुस गए। चारो वहीं बेहोश।

अजय ने जिनको भेजा था वो चार केवल ट्रेंड प्रोफेशनल नहीं थे बल्कि वो लोकेश के टीम के वो जल्लाद थे, जिन्होंने आज तक हार का मुंह नहीं देखा था। अजय का इन लोगों से भी संपर्क टूट चुका था। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे क्या ना करें। अजय को ऐसा महसूस हो रहा था कि उसके दिमाग के नसों की सारी वायरिंग ही ढीली पर चुकी है।

बौखलाए अजय ने दिल्ली में कई सक्रिय गैंग से संपर्क किया लेकिन जब सबने टारगेट डिटेल मांगी और नाम अपस्यु रघुवंशी का आया, तो किसी ने भी काम हाथ में नहीं लिया, क्योंकि सिन्हा जी के होने वाला दामाद और होने मिनिस्टर का मुंह बोले बेटे से किसी भी कीमत पर पंगा लेने की हिम्मत किसी में नहीं थी।

सबका एक ही बात कहना था, कुछ दिन पहले अपस्यु रघुवंशी और उसकी होने वाली बीवी ऐमी सिन्हा पर पार्किंग में हमला हुआ था, दोनो तो बच गए लेकिन उसी रात दिल्ली में तूफान सा आया था। एक पूरी लोकल गैंग गायब हो गई। उस लोकल गैंग को जिस प्रोफेशनल ने हायर किया था उनकी लाश उसी के अपार्टमेंट से निकली और जिसने मर्डर प्लान किया था, उसे घर में घुसकर गोली मारी थी। यहां प्रशाशन से बढ़कर कोई गुंडा नहीं, अपस्यु रघुवंशी को दिल्ली में मारने का मतलब है, खुद के मौत की तैयारी कर लो, फिर 500 करोड़ की डील हो या 1000 करोड़ की, जान जाने के बाद किसका होगा ये पैसा।

अजय अब तक समझ चुका था कि जल्दबाजी में लोकेश से भयंकर चूक हो गई है। जिन लोगों को बेस से बाहर भेजकर काम पर लगाया गया था, वो लोकेश के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट के वो सिपाही थे, जो अब तक किसी भी असंभव काम को संभव करते आए थे। उनके फसने का सीधा मतलब था कि लोकेश के जीत का राज सामने आ जाना, ऊपर से दिल्ली के सभी लोकल गैंग और गुंडों ने अपस्यु पर हाथ डालने से मना कर दिया।

असमंजस की स्तिथि में अजय ने बेस से एक पूरी टीम भेजी, जिसमें 1 स्नाइपर, 2 शूटर और 7 फाइटर थे। 4 खास हाई क्लास प्रोफेशनल को गवाने के बाद अजय की बुद्धि थोड़ी खुली। अगली टीम को उसके घर के अंदर हमला ना करके, घात लगाकर बस वहां रुके और अपस्यु के बाहर निकालने का इंतजार करे।

इधर मुंबई में 2 टारगेट, स्वास्तिका और कुंजल और फ्लैट के बाहर खबरी नजर दिए। दोनो ही बहने आपस में हंसी मज़ाक में लगी हुई थी और नंदनी सुबह का नाश्ता तैयार कर रही थी। 2 दिन बाद ही वापस दिल्ली लौटना था इसलिए चोरी से दीपेश के साथ कुछ वक़्त बिताने का प्लान बना।

दोनो बहन 11 बजे के लगभग शॉपिंग के बहाने फ्लैट से निकली। जैसे ही खबरी दोनो को बाहर जाते देखा, एक के बाद एक, चेन के माध्यम से यह खबर ऑपरेटर तक पहुंची। वो ऑपरेटर अजय अब बेहद ही चिंता में आ चुका था। हर जगह पहुंची उसकी हमला करने वाली टीम गायब हो रही थी, जिसकी कोई खबर ना थी। उपर से लोकल कॉन्ट्रैक्ट किलर भी निकम्मे साबित हो चुके थे। गोवा और दिल्ली के शिकस्त के बाद, अजय ने फिर से हिम्मत बांधी और गोवा की तरह यहां भी 2 स्नाइपर और 7 गनमैन फाइटर की टीम को पीछे लगाया।

उपयुक्त माहौल कुछ देर में ही मिल गया। कुंजल और स्वास्तिका एक बड़े से शॉपिंग मॉल की पार्किंग में अपनी कार पार्क कर रही थी और सभी गनमैन क्लोज रेंज में निशाना लेना शुरू कर दिए। इधर नंदनी को उसके फ्लैट से उठाने के लिए 4 लोग उसके फ्लैट के ओर बढ़े।

अजय और उसके सहयोगी लगातार स्क्रीन पर बने हुए थे। एक ओर जहां पार्किंग के सीने में घटना यह हो गई की कुछ लोगों की भीड़ अचानक से वहां पहुंच गई और गनमैन अपना शॉट लेते-लेते रुक गए। लेकिन इस बार हमले के तरीके में अजय ने बदलाव कर दिया था। सभी 7 गनमैन को पार्किंग में फ़ैल जाने तथा जैसे ही भिड़ से हटकर दोनो लड़कियां दिखे, सीधा शूट कर देना।

गनमैन सब फ़ैल चुके थे। स्वास्तिका कार के बाहर खड़ी होकर दीपेश को कॉल लगाई और कुछ देर की बातचीत के बाद दोनो बहने पैदल निकली। दोनो कुछ ही कदम आगे बढ़ी, और वो भिड़ से अलग हो गई, इस से पहले की पिस्तौल से कोई फायरिंग होती, वहां चारो ओर धुआं ही धुआं हो गया, केवल बाहर निकालने वाले रास्ते को छोड़कर।

स्क्रीन पर धुआं का नजारा देखकर ही अजय पागलों की तरह चिल्लाने लगा…. "नहीं, नहीं, नहीं… ये नहीं हो सकता। साला ये आधा कच्चा इंसान हमे इतनी आसानी से मात नहीं से सकता।"…

जैसा कि धुआं देखकर अजय को पहले ही समझ में आ चुका था कि पार्किंग के टीम का भी वही हाल होना तय था, जैसा दिल्ली और गोवा में हुआ। अजय ने नंदनी को उठाने गए टीम का भविष्य सोचकर, अंत में उसे वापस लौटने का हुक्म दिया। नंदनी को किडनैप करने गई टीम को कुछ समझ में नहीं आया और वो वापस लौटने लगी। लेकिन आज तो अनहोनी होकर रहनी थी, और यहां के टीम का भी वहीं हाल हुआ। सब के सब संपर्क से बाहर हो गए।

दिल्ली अपस्यु का गढ़ था लेकिन मायानगरी, वो जगह तो अंडरवर्ल्ड के कंट्रोल में थी। अजय ने सीधा अंडरवर्ल्ड से संपर्क किया और 2 लड़की को मारने और 1 औरत के उठाने का कॉन्ट्रैक्ट उन्हें 200 करोड़ में दे दिया। उन लोगों ने जब डिटेल मांगा और सामने नंदनी, कुंजल और स्वास्तिका की तस्वीर खुली… अंडरवर्ल्ड माफिया डॉन खुद ही लाइन पर आकर कहने लगा…

"साले चुटिए, तू इसका कॉन्ट्रैक्ट मुझे देने आया था, किसी को कहना भी मत। चल अब फोन रख, और मुंबई तो क्या अखी इंडिया में इसका कॉन्ट्रैक्ट कोई नहीं ले सकता।"..

अजय:- एक 22 साल का लड़का अपस्यु, तुम सब का बाप बना बैठा है। खुद को माफिया और डॉन कहना छोड़ दो।

डॉन:- सुन बे चूहे, यें जो तू जिसका भी नाम ले रायला है, उसे हम में से कोई नहीं जानता, लेकिन उसके पीछे जो है, उसकी कहानी तू ना ही जान और ना ही उससे उलझ तो बेहतर होगा। पूरा मुंबई उसके नाम से पेशाब कर देती है। चल अब फोन रख और दोबारा कभी फोन मत करना।

गोवा, दिल्ली, मुंबई हर जगह नाकामी झेलने के बाद अजय ने अपस्यु के पीछे लगे टीम को वापस बुला लिया, और सर पकड़ कर बैठ गया। 12 बजे के करीब अजय ने लोकेश से संपर्क किया। इधर लोकेश अपने आलीशान महल में जीत के रथ पर सवार अपने प्राइवेट रूम में जश्न माना रहा था..

3 नंगी लड़कियों के बीच अकेला सवार, और हर लड़की उसके अंग को चूसते और चाटते हुए भरपूर मज़े के बीच, एक-एक करके सवारी का मज़ा ले रही थी। अजय ने 12 बजे के आसपास लोकेश को इमरजेंसी संदेश भेज दिया था, लेकिन 1 बजे तक लोकेश की कोई खबर नहीं थी।

तकरीबन 2 बजे लोकेश तैयार होकर कंट्रोल रूम पहुंचा और सैंपैन की बॉटल उड़ाते हुए ही अंदर आया…. "अजय, अजय, अजय… क्यों इतना एक्साइटेड थे, समझना चाहिए था मै कहां बिज़ी हूं। तो बताओ नंदनी रघुवंशी कहां पहुंची?

लोकेश को लगा 12 बजे के करीब सभी टारगेट को एलिमिनेट करने के बाद, नंदनी को अपने कब्जे में लेकर अजय उसे इमरजेंसी संदेश भेजा हैं। और संदेश मिलने के 2 घंटे बाद लोकेश इसलिए पहुंचा था कि नंदनी रघुवंशी के आने का इंतजार ना करना परे।
 
Update:-123

अजय:- सर अपने 4 हाई क्लास स्नाइपर, 22 हाई क्लास ट्रेंड सिपाही लापता है। गोवा के एक गैंग के 20 मेंबर इस वक़्त हॉस्पिटल में है। उनकी गंभीर हालात देखकर और अन्य जगह पता लगाने के बाद, गोवा के कॉन्ट्रैक्ट किलर्स ने अपने टारगेट का कॉन्ट्रैक्ट लेने से मना कर दिया। दिल्ली और मुंबई में तो इस से भी बुरे हाल थे। गोवा में तो एक ने कॉन्ट्रैक्ट ले भी लिया लेकिन मुंबई और दिल्ली के किसी भी कॉन्ट्रैक्ट किलर में इतनी हिम्मत नहीं थी कि उनका कॉन्ट्रैक्ट ले सके। आपने अपने दुश्मन को बहुत कम आंका सर।

अजय की पूरी डिटेल सुनने के बाद लोकेश तो पागल सा हो गया। कहां होम मिनिस्टर को मारने कि प्लांनिंग हो रही थी और यहां एक लड़का और उसका परिवार मार नहीं पाए, उल्टा अपने सबसे बेस्ट लड़के और शार्प शूटर्स को भी खो दिया। अजय को खींचकर 2 थप्पड़ लगाने के बाद वहां उसे कंट्रोल रूम से बाहर भेजकर लोकेश सभी फुटेज को देखने लगा।

एक ही सीन को बार-बार, कई बार दोहरा कर देखते हुए समझने की कोशिश कर रहा था कि वहां हुआ क्या होगा? कौन है ये अपस्यु और कितनी बड़ी है उसकी गैंग, जिसकी सुपाड़ी अंडरवर्ल्ड तक नहीं के रहा।

लोकेश को जब कुछ समझ में नहीं आया, तब उसने मेघा को दिल्ली से वापस अपने बेस पर बुला लिया। लोकेश ने अजय को भी वापस कंट्रोल रूम में बुलाया और बंद हुए ऑडियो वीडियो डिवाइस से पुनः कनेक्शन बनाने के लिए कहने लगा। अजय अपने काम में लग गया और लोकेश अपनी मूर्खता पर बस इतना ही सोच रहा था कि…..

"मैंने पूरी ताकत से हमला किया, उस लड़के को कोई फर्क नहीं पड़ा, ये दिल्ली में ही था, जब चाहता तब मुझे मार सकता था, लेकिन क्षमता होने के बावजूद भी मारा क्यों नहीं?"..

लोकेश का दिमाग पजल बाना हुआ था और अपस्यु उसके लिए किसी रहस्य से कम नहीं। तभी ऑपरेटर अजय चौंककर कहने लगा… "सर स्क्रीन देखो।"

लोकेश ने जैसे ही स्क्रीन देखा… सामने अपस्यु, ऐमी, और आरव तीनों उनके लाइन पर थे और अपना हाथ हिला रहे थे। लोकेश उन्हें देखकर जवाब में अपना हाथ हिलाया।

आरव:- क्यों खडूस ये अपने लोकेश भईया कुछ ज्यादा ही कंफ्यूज दिख रहे है।

अपस्यु:- हां कंफ्यूज तो दिख रहा है ये आस्तीन का सांप, लेकिन सुबह से कितना डराया है हमे। अपने बुआ के परिवार पर हमला, जारा इसे भी डर से परिचय करवाओ।

ऐमी:- क्यों नहीं अभी करवा देते है।

लोकेश ख़ामोश होकर तीनों की बातें सुन रहा था, तभी उनके स्क्रीन पर चिल्ड्रंस केयर की विजुअल आने लगे, जहां लोकेश की प्यारी पत्नी मीरा और उसकी लाडली बहन कुसुम, चिल्ड्रंस केयर के लड़के-लड़कियों के साथ प्यार से वक़्त बिता रहे थे।

लोकेश अपने चेहरे का पसीना साफ करते…. "देखो मानता हूं मैंने गलत किया है, लेकिन प्लीज उन्हें जाने दो।"

आरव:- लोकेश भईया, पत्नी तो सबको प्यारी होती है, फिर मेरी होने वाली पत्नी पर हमला।

लोकेश:- देखो मै ताकत के नशे में अंधा हो गया था। प्लीज उन्हें जाने दो… (लोकेश यहां तक मिन्नते भरे लहजे में विनती कर रहा था.. उसके बाद गूंजी उसकी अट्टहास भारी हंसी)… या फिर खुद ही रख ले या मार दे, लेकिन तुम जैसे पिद्दी ये सोच लो कि मुझे ब्लैकमेल कर सकते हो, तो यह तुम्हारी भुल होगी। मेरे पास इतना पैसा है कि मै मीरा जैसी चार पत्नियां घर में रख लूं। दूसरी वो बहन, जब तेरे मामा ने अपनी जिंदा बहन का श्राद्ध कर दिया। मेरा बाप तेरी मां को गोली मारने से पहले सोचेगा तक नहीं, ऐसे कुल में पैदा हुए लड़के को तू बहन के नाम से डरा रहा है। शौक से मार दे।

अपस्यु:- जैसी तुम्हारी इक्छा।

अपस्यु इतना कहकर इशारा किया और लोकेश के नज़रों के सामने 2 स्निपर की गोली एक साथ चली, एक कुसुम और दूसरी मीरा को लगी। लोकेश हंसते हुए कहने लगा…. "तेरा तो मै फैन हो गया। मुझे ऐसे लोग पसन्द है जो बातों से ज्यादा एक्शन दिखाते है। मैंने तेरे परिवार को जान से मारने कि कोशिश की और बदले में तुमने मेरे 26 लोग और 2 परिवार के सदस्य को लुढ़का दिया। दिल जीत लिया तूने।"

आरव:- ये भाई इतनी तारीफ काहे कर रहा है। लगता है दिमाग में कहीं ना कहीं होगा की लोभ दो, अपने बेस पर बुलाओ और टपका डालो।

लोकेश:- ओह मतलब मुझपर पूरा होमवर्क करके आए हो। मेरा कोई बेस है यह तक पता है तुम लोगों को। शाबाश !!!

ऐमी:- सॉरी जेठ जी, लेकिन आप जैसे लोग को यहां दिल्ली में चुटिया कहते है। हमे तो बस विक्रम राठौड़ चाहिए, आप बेकार में खुद को हाईलाइट किए हो।

लोकेश:- कुछ बातें पब्लिक के बीच ना हो तो ही अच्छा है। मुझे ऐसा क्यों लगा रहा है कि हम साथ मिलकर बहुत ज्यादा धमाल कर सकते हैं। तुम तीनों कोई आम इंसान तो कतई नहीं हो सकते। मेरा न्योता स्वीकार करो और यहां चले आओ।

अपस्यु:- तुम पर भरोसा नहीं लोकेश… इसलिए तुम ही यहां दिल्ली क्यों नहीं चले आते।

लोकेश:- भरोसा तो तुम पर भी मुझे नहीं अपस्यु। अभी-अभी तुम्हारे परिवार को मारने कि मैंने कोशिश की और जिस हिसाब से तुमने उन्हें सुरक्षा दे रखा था, तुम पहले से हमले ले लिए तैयार थे। इसलिए हालात को समझे और परिवार के प्रति तुम्हारे प्यार को देखते हुए मेरी तो इक्छा ही मर गई अपने बेस से निकलने की।

अपस्यु:- फिर चलने दो चूहे बिल्ली का खेल, मुझे तो मज़ा आ रहा है।

लोकेश:- लेकिन मुझे तो मज़ा नहीं आ रहा ना। तुम कुछ ऐसा बताओ जिसके करने के बाद तुम्हे मुझ पर यकीन हो जाए।

अपस्यु:- तुम पर यकीन नहीं लेकिन मै खुद पर तो यकीन करता हूं। 15 अगस्त की शाम, आजादी का जश्न तुम्हारे यहां ही होगा। तुम्हारे सारे आदमी सुरक्षित है, कल उन्हें 16 अगस्त के बाद उठा लेना। तुम्हारी प्यारी पत्नी और बहन को मैंने ट्रांकुलाइजार दिया था। उनके होश में आते ही मै उन्हें सुरक्षित पहुंचा दूंगा।

लोकेश:- रहम दिल अपस्यु। खैर अब मेरे ओर से भी कोई कोशिश नहीं होगी, मिलते हैं 15 अगस्त को फिर।

जबतक लोकेश अपस्यु से बात कर रहा था, मेघा भी वहां पहुंच गई। वो ख़ामोश एक कोने में खड़ी होकर दोनो की बातें सुन रही थी। अपस्यु से बात समाप्त करके लोकेश और मेघा प्राइवेट मीटिंग रूम में पहुंचे। कल से जो जीत के घोड़े पर सवार था, आज मेघा से बात करते वक़्त तो ऐसा लग रहा था कि उसके जीत के घोड़े में पंख भी लग गया हो।

कहानी जैसे पुरा ही पलटी मार चुकी थी, और कहानी की यह पलटी कहीं ना कहीं मेघा के मन में वो ज़हर घोल गई, जिसका अंदाज़ा लोकेश नहीं लगा सकता था। जिस अपस्यु को महज एक छोटा मोहरा बोलकर मेघा को यह कहने पर मजबूर किया गया कि… "काम को लेकर अब उसकी रुचि अपस्यु में नहीं रही"… आज वही लोकेश, अपस्यु के साथ मिलकर अपने भविष्य की नीति बाना रहा था।

आज उसी लोकेश को अपस्यु एक मामूली प्यादा नहीं, बल्कि बराबर का एक साथी मान रहा था। जिस होम मिनिस्टर को कल से मारने का सपना संजोए जा रहे थे, आज उसी होम मिनिस्टर को अपने पाले में मिलने और आने वाला लोकनसभा इलेक्शन पर नजरें बनाया जा रहा था। एक ही रात में कहानी ने ऐसी पलटी मारी, की मेघा का दिमाग ही घूम गया।

अपस्यु को लेकर उसके बदले विचार के बारे में जब पूछा गया, तब लोकेश ने अजय को बुला लिया और सुबह से हुई सारी घटना सुनाने के लिए बोल दिया। अजय जब एक-एक करके सभी बातों पर प्रकाश डाला, तब कहीं जाकर मेघा के दिल को सुकून मिला। मेघा अपने साथ हुए धोक को लेकर हताश तो थी ही किन्तु उसे लोकेश का भविष्य भी समझ में आ चुका था।

सारी बातें सुनने के बाद मेघा हंसती हुई कहने लगी… "कल तो मै उसे साथ मिलाकर काम करने वाली थी, और आज उसी अपस्यु को तुमने अपने पाले में मिला लिया।"

लोकेश:- तुमने उसे कम आंका और मैंने उसी अनुसार योजना बनाई। आज सुबह जब मै उससे टकराया तब मुझे उसकी क्षमता का अंदाज़ा हुआ।

मेघा:- क्षमता का अंदाज़ा तो ठीक है लेकिन क्या वो साथ काम करेगा ?

लोकेश:- देखा जाए तो अभी वो 40000 करोड़ का वारिस है। जितना क्षमता और कनेक्शन है उसके, वो चाहता तो कबका मायलो ग्रुप का पूरा मालिक बन जाता। और हां ! मैं तो उसके बारे में कल से जाना हूं, लेकिन वो तो मेरे बारे में बहुत पहले से जानता था। एक छोटी सी भी यदि वो प्लांनिंग करता, तो मुझे भनक भी नहीं लगती और मैं खत्म। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया, इसका मतलब साफ है वो दुश्मन बनाने में नहीं, बल्कि साथ मिलकर काम करने में विश्वास रखता है।

मेघा:- एक ही दिन में इतना विश्वास?

लोकेश:- विश्वास की कहानी इतनी सी है कि हम दोनों को साथ काम करना है। कुछ तो छिपे मकसद उसके भी है और कुछ छिपे मकसद मेरे। हम दोनों के छिपे मकसद जबतक पूरे नहीं होते तबतक हम एक दूसरे को नहीं ही मार सकते है।

मेघा:- और उसके बाद..

लोकेश:- उसके बाद हम दोनों एक दूसरे को जान चुके होंगे। तब तो 2 ही बात होगा, या तो मौका देखकर हम में से कोई एक दूसरे को खत्म कर देगा या फिर एक मकसद खत्म होने के बाद किसी दूसरे मकसद के लिए राजी कर लिया जाए।

मेघा:- ऐसा लग रहा है तुम्हारे सारे सितारे जोड़ मार रहे है। ..

लोकेश हंसते हुए कहने लगा… "मेरे सितारे की नई दिशा जो तय करने वाला है वो लकी तो तुम्हारे गोद में पुरा बैठा है, ये क्यों भुल जाती हो। हो ना हो वो अपने हर काम में तुम्हे साथ रखेगा।"..

मेघा:- वो तो आने वाले 15 तारीख को ही पता चलेगा… फिलहाल और कुछ जो हमे करना चाहिए..

लोकेश:- हां बिल्कुल, मायलो ग्रुप की मालकिन लौट आयी है, ये बात सबको पता चलना चाहिए।

लोकेश और मेघा अपनी बातचीत खत्म करके दिल्ली के लिए रवाना हो गए। कुछ ही देर में एक बड़े से प्रेस कॉन्फेंस का आयोजन किया गया, जिसमें मायलो ग्रुप की मालकिन को दिखाया गया। साथ ही साथ कई सारे सवालों का जवाब लोकेश और विक्रम ने दिए।

मायलो ग्रुप के मालकिन के बारे में जानकर फिर तो प्रेस रिपोर्ट्स ने सवालों के बौछार लगा दिए। जिसमे नंदनी रघुवंशी का उनके साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में ना आना, पारिवारिक कलह और बीते इतने वर्षों में वो क्यों छिपी रही, यह प्रमुख सवालों में से एक था।

लोकेश सभी सवालों से बचते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया और बस यह कहकर निकल लिया की उनके सवाल का जवाब नंदनी बेहतर तरीके से दे सकती है। उन्हें भी नंदनी रघुवंशी के बारे में आज ही पता चला है, वो भी कई वर्षों की तलाश के बाद।

अपस्यु बड़े सुकून से अपने घर के हॉल में बैठा हुआ था। ऐमी बिल्कुल उसके पास और दोनो बैठकर आराम से लोकेश के प्रेस कॉन्फ्रेंस का मज़ा ले रहे थे। ऐमी, अपस्यु के ओर मुस्कुराती हुई देखने लगी…

अपस्यु:- हेय लव तुम्हे क्या हुआ?

ऐमी:- शायद कल रात हम दोनों की कुछ चिंता थी, अभी काफी सुकून मिल रहा है।

अपस्यु, किनारे से ऐमी को अपने बाहों में समेटकर उसके गले को चूमते…. "आह ! ऐसा नहीं लग रहा, काफी सुकून में आ गए हैं हम दोनों।"

ऐमी:- अच्छा और सुकून में आते ही ये तुम्हारे हाथ जो साइड से शरारतें कर रहा है उसका क्या?

अपस्यु, ऐमी के कानो को नीचे चूमते… "आप को जब पता हो कि कल आपके पूरे परिवार पर हमला होने वाला है, तब ऐसे ऐसे बुरे ख्याल दिल में आते है कि एक पल काटना दूभर हो जाता है।

"आव, बेशर्म... दूर रहो थोड़ा सा, और चलो जारा अपने गॉडफादर और गॉडमदर से भी बात कर लिया जाए। दोनो वादा करके मुकड़ गए।"… ऐमी अपस्यु के बाहों के घेरे से उठती हुई, अपनी बात कही और प्राइवेट लाइन से कनेक्ट हो गए..

पल्लवी:- हाय रात को याद कर रहा है मेरा देवर, कुछ-कुछ होने तो ना लगा..

ऐमी:- भाभी, मेरे होने वाले को रिझाना बंद करो, वरना झगड़ा हो जाएगा।

पल्लवी:- सुन ले अपस्यु मै कहे देती हूं, ये ऐमी की बच्ची तेरे लिए ठीक ना है, अभी से हमारे बीच की दीवार बन रही है।

अपस्यु:- आप दोनो बस भी करो। भाभी काम कि बात कुछ कर ले।

पल्लवी:- सबसे ज्यादा काम कि बात तो कर ही रही हूं, तू है कि दुनिया कि तमाम चीजें कर केवल एक यह जबरदस्त काम छोड़कर।

जेके:- बस भी करो तुम पल्लवी। अपस्यु बधाई हो, आज तो कमाल ही कर दिया। हम दोनों न्यूज में तुम्हारी ही खबर देख रहे थे।

अपस्यु:- आप सब तो शर्मिंदा ना कीजिए। किसने बताया था मुझे की लोकेश आधे दिन में हमारे परिवार की पूरी जानकारी पता लगाएगा। बचे आधे दिन में वो अपने सारे एक्सपर्ट को हमारे पूरे परिवार को मारने के लिए हमारे पीछे लगाएगा और अगले दिन सुबह से ही मौका देखकर सबको साफ कर दिया जाएगा।

जेके:- तुमने भी तो जगदीश राय की तिजोरी से मुझे वो डायरी दी थी, जिसकी मदद से 6 महीने में सॉल्व होने वाला केस, सिर्फ 2 महिने में निपट गया। ऊपर से हम जिसे नहीं ढूंढ पाते, उस डायरी की मदद से हमने उन्हें भी खोद निकला।

अपस्यु:- इसमें तो थैंक्स फिर मेरे ससुर जी को दे दो। क्योंकि उन्होंने ही मुझे जगदीश राय की तिजोरी खोलने का कॉन्ट्रैक्ट दिया था और वहीं पर ये काम की डायरी दिख गई तो मैंने चुरा लिया।

जेके:- और इसी डायरी की वज़ह से मैंने केस जल्दी सॉल्व कर लिया और एनएसए (NSA) हेड को लगा कि दिल्ली में मेरे बहुत ज्यादा कॉन्टैक्ट है इसलिए केस का नतीजा इतना जल्दी आ गया। इसी गलतफहमी के साथ वो अपनी एक समस्या मुझ से डिस्कस कर गए।
 
Update:-124

जेके:- और इसी डायरी की वज़ह से मैंने केस जल्दी सॉल्व कर लिया और एनएसए (NSA) हेड को लगा कि दिल्ली में मेरे बहुत ज्यादा कॉन्टैक्ट है इसलिए केस का नतीजा इतना जल्दी आ गया। इसी गलतफहमी के साथ वो अपनी एक समस्या मुझ से डिस्कस कर गए।

अपस्यु:- हाहाहाहा.. लेकिन आपमें और मुख्य सचिव में तो बनती नहीं थी ना भैय्या।

जेके:- "हां सो तो है, लेकिन जब वो मदद मांगने आया तो उसका विषय सुनकर मै मदद किए बिना रह नहीं पाया। हुआ ये था कि मायलो ग्रुप के विपक्ष और पक्ष के संबंध को देखकर होम मिनिस्टर थोड़ा सचेत हो गया था। याद है, राजीव मिश्रा की हरकत, उस वक़्त मायलो ग्रुप ने पुरा महाभियोग चला दिया और होम मिनिस्टर को उसके पद से हटाने की वो पूरी तैयारी कर चुका था।"

"बस इसी बात से खिसियाकर, होम मिनिस्टर ने उस बक्शी को ही मायलो ग्रुप के पीछे लगा दिया। बक्शी जब इसके पीछे गया, तभी तो सारी बातों का खुलासा हुआ। मायलो ग्रुप में जिसके पीछे बक्शी की पूरी इन्वेस्टिगेशन चल रही थी, यानी कि नंदनी रघुवंशी, मायलो ग्रुप की मालकिन, वो कभी बक्शी को मिली ही नहीं। बक्शी भी चक्कर खा गया और मेरे पास पता लगाने आया था कि नंदनी रघुवंशी कैसे पर्दे के पीछे सारा खेल रच रही है?

"वहीं से फिर पता चला था कि ये लोकेश, नंदनी रघुवंशी के नाम पर बहुत से कांड किए है और चूंकि नंदनी रघुवंशी को किसी ने देखा नहीं, इसलिए सब इस बात में जुटे रह गए की जिसके मालिक ने आज तक एक भी दस्तावेज सिग्नेचर नहीं किए उसे कैसे फसाया जाए।"

"तभी तो मैंने तुझसे कहा था कि जिस दिन नंदनी इन लोगों को मिलेगी। केवल 2 दिन में ये लोग अपना सभी बड़े टारगेट को खत्म करके नंदनी रघुवंशी पर सारा इल्ज़ाम डालेंगे और खुद बाहर रहकर पुरा कंट्रोल अपने हाथ में रखेंगे।"

अपस्यु:- इस डेढ़ साने का बड़ा टारगेट होम मिनिस्टर ही था। अब समझ में आया मुझे, की इसने देर शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस करके केवल इतना क्यों कहा कि मायलो ग्रुप की मालकिन मिल गई और प्रेस के किसी भी सवाल का उत्तर क्यों नहीं दिया।

जेके:- हां वो तो मैंने भी देखा। अब भी इसके दिमाग ने खिचड़ी पक ही रही है।

अपस्यु:- हां शायद, तभी तो दूसरों को हिंट कर गया कि मां शुरू से पर्दे की पीछे थी, बस अब सामने आ रही है।

जेके:- कर लेने दे अब उसे अपनी बची खुची प्लांनिंग, मैंने बक्शी को नंदनी और उसका पूरा इतिहास खोल दिया है। तू तो बस 15 अगस्त की अब प्लांनिंग कर, बाकी का काम तो बक्शी की टीम कर जाएगी क्योंकि उन्हें अब मामला समझ में आ चुका है और एक्शन प्लान तो उनका बन ही चुका होगा।

अपस्यु:- हां इधर सब संतुलन में ही है समझो। आप दोनो से लेकिन मै काफी नाराज हूं। कहां गए ना तो वो बताए हो और ना ही ये की कब मिशन शुरू कर रहे।

जेके:- हम एक्शन प्लान से बाहर है, बस कुछ इन्वेस्टिगेशन का जिम्मा मिला है।

पल्लवी:- सॉरी ये वादा मैंने किया था और मै तुम दोनों को अपडेट नहीं कर सकी। हम दोनों इस वक़्त रोंचेस्टर सिटी में है और मयो क्लीनिक का इन्वेस्टिगेशन में आए है।

अपस्यु:- ये वही मायो क्लीनिक है ना जिसके लिए कुछ इंडियन डॉक्टर्स ने रिक्वेस्ट की थी और तब नाना जी ने अपने कंपनी में नाम से यह हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर खोला था।

पल्लवी:- लड़का अपने खानदान का पूरा इतिहास समेटे है। हां ये वही मायो क्लीनिक है।

अपस्यु:- ठीक है भाभी, आप दोनो इन्वेस्टिगेशन का मजा लो और हमे अपडेट करते रहना। पता नहीं क्यों मेरा भी दिल कर रहा है आप दोनो के साथ एक बार पूरे एक केस पर काम करने की।

जेके:- चल रे इमोशनलेस प्राणी, लोगों के बीच रहकर ज्यादा इमोशनल होने वाली बीमारी ना पाल।

पल्लवी:- हां अपस्यु जेके ने सही कहा। हम दोनों जल्द ही मिलते है, तबतक तुम दोनो मिलकर एक जूनियर ऐमी या जूनियर अपस्यु का प्रोडक्शन करके रखना। यह हमारा आखरी केस है, इसके बाद हमने फैसला किया है कि फील्ड जॉब छोड़कर नए रिक्रूट को ट्रेंड करेंगे।

ऐमी:- बेरा गर्क हो। ओय भाभी फिर उस फक्र की मौत का क्या जिसके हसीन सपने दोनो मियां बीवी देखते थे, फील्ड में एक्शन करते हुए मरना।

पल्लवी:- हीहीहीही… अब फील्ड तो नसीब ही नहीं होगा। यहां भी तो हमे फील्ड से बाहर रखकर बस इन्वेस्टिगेशन में डाले हैं। केवल इन्वेस्टिगेशन करो और रिपोर्ट दो। चल अब रखती हूं, दोनो अपना ख्याल रखना और हमारे आने तक एक जूनियर को ले आना।

पल्लवी अपनी बात पूरी करके कॉल डिस्कनेक्ट कर दी। और इधर ऐमी को देखकर अपस्यु… "चलो फिर चलते है।"..

ऐमी:- कहां बेबी।

अपस्यु:- सुनी नहीं क्या भाभी ने क्या कहा, उनके लौटने तक मेहनत करके एक बच्चा उनकी गोद में देना है।

ऐमी, अपनी आखें बड़ी करती… "तुम्हे नहीं लगता आंटी के जाने के बाद तुम्हे खुला खजाना मिल गया है।"

अपस्यु, ऐमी को पकड़ने की कोशिश कर ही रहा था कि ठीक उसी वक़्त घर की बेल बजी…. "जाओ देखो आ गई छिपकली, हमारा रोमांस खत्म करने। अगर श्रेया हुई ना तो तुम देख लेना।"..

अपस्यु, दरवाजे के ओर बढ़ते… "और नहीं हुई तो क्या करोगी।"..

ऐमी:- मैंने केवल श्रेया के होने पर क्या होगा वो बताई, बाकी ना होगी तो तुम्हारे लिए अच्छा होगा। अब दरवाजा खोलकर सस्पेंस दूर कर लो।

अपस्यु:- डफर, सीसीटीवी भी नहीं देखती क्या, दरवाजे पर कुसुम है।

अपस्यु दरवाजा खोलने लगा और ऐमी अपने सर पर हाथ मारती दरवाजे के ओर देखने लगी। दरवाजा खुलते ही कुसुम अंदर आयी और दरवाजा बंद करके हॉल में बैठ गई। थोड़ी परेशान दिख रही थी। ऐमी कुसुम के ओर पानी बढ़ाती… "तुम इतनी परेशान क्यों नजर आ रही हो।"

कुसुम:- जब से सुनी हूं, भईया मेरे कजिन है तब से जितनी खुश नहीं हूं, उस से ज्यादा मै परेशान हूं। आप लोग मेरे भाई और पापा को नहीं जानते, वो अच्छे लोग नहीं है।

अपस्यु:- हेय । मैं तो कुसुम को जनता हूं ना, वो तो अच्छी और प्यारी है। तुम चिंता नहीं कर, हमे कुछ नहीं होगा।

कुसुम:- भईया आप समझते क्यों नहीं, सब के सब झल्लाद है। जबतक स्वार्थ है तबतक आपके साथ है, एक बार इनका मतलब निकल गया, फिर ये लोग, लोगों को गायब कर देते है।

कुसुम की चिंता उसकी बातों से साफ झलक रही थी। तकरीबन आधे घंटे तक कुसुम केवल यह समझने की कोशिश में जुटी रही की उसके पिता और भाई पॉवर और पैसों के लिए कुछ भी कर सकते है, और अपस्यु बस इधर उधर की बातों से उसका दिल बहलाता रहा।

अंत में जब वो वहां से जाने लगी तब भी वो गुमसुम थी, एक फीकी मुस्कान के साथ वो अपस्यु को अपना ख्याल रखने के लिए बोलकर चली गई। कुसुम कबका दरवाजे से निकल गई, लेकिन ऐमी अब भी दरवाजे के ओर ही देख रही थी…. "इतनी गहरी सोच, बहुत मासूम है ना वो।"..

ऐमी, तेज श्वांस छोड़ती…. "और बहुत मायूस भी थी, आगे आने वाला वक्त इसके लिए काफी मुश्किल से भड़ा होगा।"…… "ऑफ ओ अपस्यु"..

"ऐमी, उसके लिए तो आने वाला वक्त मुश्किलों से भड़ा है, लेकिन मेरा भारी वक़्त तो ना जाने कब से शुरू है।"…

ऐमी, अपस्यु को मुसकुराते हुई देखी, अपने होंठ से अपस्यु के होंठ को स्पर्श करती…. "हम हर मुश्किल वक़्त को बांट लेंगे। आधा तुम्हारा आधा मेरा।"..

14 अगस्त की सुबह….

प्यार भरे सुकून के पल बांटने के बाद एक खुशनुमा सुबह की शुरवात हो रही थी। ऐमी मीठी अंगड़ाई लेकर जाग रही थी और अपस्यु वहीं पास में सुकून से लेटा हुआ था। उसे खामोशी से यूं सुकून से लेटे देख, ऐमी कुछ सोच कर हंसने लगी।

ऐमी अपने दोनो पाऊं उसके कमर के दोनों ओर करके, उसका गला पकड़कर जोड़-जोड़ से हिलाने लगी…. अपस्यु ने जैसे ही अपनी आखें खोली, उसके होंठ से होंठ लगाकर जोरदार और लंबी किस्स करना शुरू कर दी। आह्हह ! इस से बेहतरीन सुबह की शुरवात भला हो सकती थी क्या? अपस्यु तो मदहोश होकर जागा।

ऐमी जब किस्स को तोड़कर अलग हुई, दोनो की श्वांस चढ़ी हुई और आखों में चमक और हंसती हुई कहने लगी…. "किसी एक दिन मेरी सुबह की शुरवात भी इतनी धमाकेदार हुई थी लेकिन पुरा दिन किसी को मेरा ख्याल नहीं आया। पे बैक टाइम बेबी"

इससे पहले कि अपस्यु उठकर उसे दबोच पता, ऐमी हंसती हुई उसके पास से भागकर दूसरे कमरे में आ गई, और दरवाजा लॉक करके हंसने लगी। ऐमी बिस्तर पर बैठकर हसने लगी और इधर अपस्यु भी उसकी इस अदा पर हंस रहा था।…. कुछ ही देर में दोनों तैयार होकर हॉल में बैठे थे। अपस्यु सोफे से टिका था और ऐमी उसके सीने पर सर रखकर दोनो प्यार भरी बातें कर रहे थे। तभी खटाक की आवाज़ के साथ दरवाजा खुला और सामने आरव था।

आरव की देखकर, ऐमी और अपस्यु के चेहरे खिल गए। आरव दौड़ता हुआ पहुंचा दोनो के बीच और तीनों गले मिलने लगे…. तीनों साथ बैठकर कुछ देर बात करते रहे, फिर आरव वहां से उठकर अपने कमरे चला गया।

ऐमी:- 15 को लौटता ना ये तो, एक दिन पहले चला आया।

अपस्यु:- अब ये तो आरव ही जाने, लेकिन आज सुबह की शुरवात जिस जोरदार रोमांस से हुई थी, उसमे ये ग्रहण लगाने चला आया।

ऐमी:- हीहीहीहीही… बोल दूं क्या चला जाए यहां से।

अपस्यु:- कभी-कभी ना तुम्हारी ये खीखी मेरा सुलगा देती है।

ऐमी अपनी पाचों उंगली अपस्यु के चेहरे पर फिराती…. "रात ही तो अपनी मर्जी का सब किए थे, अब सुबह-सुबह ऐसे चिढ़ जाओगे तो कैसे काम चलेगा। चलो, स्माइल करो।

अपस्यु, ऐमी को खींचकर अपने सीने से टिकते… "होंठ से बस होंठ को छू लो, स्माइल तो ऐसे ही आ जाने है।"..

ऐमी बड़ी अदा से मुस्कुराती हुई…. "और किस्स ना करूं तो बेबी के फेस पर स्माइल नहीं रहेगी क्या?"..

अपस्यु:- स्माइल तो तब भी रहेगी लेकिन जो स्माइल तुम्हारी नजरें ढूंढती है वो ना रहेगी।

ऐमी अपना चेहरा ऊंचा करके धीरे-धीरे ऊपर बढाने लगी। अपस्यु के होटों पर आयी मुस्कान को देखकर ऐमी का चेहरा खिल गया। इंच दर इंच धीरे-धीरे ऐमी के होंठ अपस्यु के होंठ के बिल्कुल करीब आ गए। होंठ से होंठ स्पर्श होने लगे और दिल में कुछ गुदगुदा सा महसूस होने लगा। सौम्य सी छुअन थी होंठ की और दोनो की आखें बंद होने लगी।

गले की तेज खड़ास की आवाज़ के साथ… "इतनी बेख्याली की लोग कब घर में घुसे पता ही ना चले।"..

गले की खराश की आवाज़ के साथ ही दोनो झटक कर अलग हो गए। नंदनी जबतक अपना डायलॉग बोल रही थी, तबतक कुंजल दौर कर अपस्यु से लिपट गई और ऐमी अपना सर पुरा नीचे झुकाए, अंदर ही अंदर हंस रही थी, जिसे अपस्यु भाली-भांति महसूस कर रहा था।

इस से पहले की नंदनी कुछ सवाल-जवाब करती, ऐमी झट से नंदनी के पास पहुंची और उसके पाऊं छूकर कहने लगी…. "मां, मै आपसे आकर मिलती हूं। बस जा ही रही थी और विदाई सेशन चल रहा था हमरा।".. नंदनी, ऐमी को रोकती रह गई लेकिन वो रुकी नहीं।

नंदनी, ऐमी का चुलबुला पन देखकर हसने लगी और हंसती हुई अपने कमरे में चली गई। इधर कुंजल, अपस्यु को बिठाकर बातें करने लगी और अपस्यु का ध्यान स्वास्तिका के खिले हुए चेहरे पर था। वो स्वास्तिका के अंदर चल रहे खुशी को महसूस कर सकता था।

"भईया, सुनो तो आप, मै क्या कह रही हूं।"… कुंजल अपस्यु का ध्यान अपनी ओर खींचती हुई कहने लगीं। अपस्यु, कुंजल को कुछ देर शांत रहने का इशारा करके स्वास्तिका को अपने पास बुलाया…. "15 अगस्त की रात से पहले इन आखों में आशु नहीं आने चाहिए। तुम समझ रही है ना।"..

स्वास्तिका, कुछ बोल तो नहीं पाई लेकिन खुशी से अपना सर "हां" में हिलानें लगी। स्वास्तिका को अपने पास बिठाकर उसके सर को सीने से लगाकर अपस्यु कहने लगा…. "वर्षों से जल रही आग का कल हिसाब हो जाएगा। हम जब कल उन्हें आजमाना शुरू करेंगे, तो वादे अनुसार उनको हम अपने कतरे-कतरे जले अरमानों से अवगत करवा देंगे।"

कुंजल:- मुझे भी अपनी जलन शांत करनी है। क्या मैं भी आपके साथ चल सकती हूं।

स्वास्तिका:- नहीं ! वहां बहुत खतरा है।

अपस्यु:- ये अपनी दीदी और भाभी के बीच रहेगी। जिसके आगे पीछे इसके दो भाई रहेंगे, और सर के ऊपर पुरा सुरक्षित शाया। कल मेरी बहन जाएगी और जरूर जाएगी। लेकिन एक बात याद रखना, 7 साल का नासूर दर्द सीने में है, कोई किसी को मारना मत। मृत्यु उनके लिए मोक्ष होगी और मै किसी को भी मोक्ष नहीं देना चाहता।

"तुम कहां जा रहे हो और क्या होने वाला है, उसमे कितना खतरा है ये सब देखने की जिम्मेदारी तुम्हारी है अपस्यु लेकिन मुझे अपने सभी बच्चे मेरे नजरों के सामने चाहिए, बिना किसी नुकसान के।" … नंदनी पीछे से आकर तीनों के सर पर हाथ फेरती हुई कहने लगी।
 
Update:-125

अपस्यु:- मां आप बेफिक्र रहो। कल हम सब वैसे भी एक्शन ना के बराबर करेंगे और पुरा शो पॉपकॉर्न के साथ एन्जॉय करेंग। आप भी हमारे साथ क्यों नहीं चलती।

नंदनी:- नहीं मै नहीं आ सकती बेटा। जैसे तुम्हारी अपनी योजना है वैसे ही मेरी अपनी योजना है। एक अच्छे आदमी का नाम खराब किया है अपस्यु इन लोगो ने। मरणोपरांत किसी के नाम को मिट्टी में मिला दिया गया। मेरे पापा और मेरे भाई ने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा, और ना ही कभी पैसों को तब्बजो दिया है। बस अपनी मां की एक ख्वाहिश पूरी कर देना, जब तुम लौटो तो उनका नाम पर लगा कलंक साफ हो जाना चाहिए, और इधर मै उनके एक बहुत बड़े सपने को साकार करने की दिशा में काम करूंगी। 16 अगस्त को जब सब सामान्य हो जाएगा, मै उसी दिन ये घोषणा करना चाहती हूं। क्या तुम मेरे लिए एक अच्छी टीम अरेंज कर सकते हो जो मेरे प्रोजेक्ट को पूरी तरह से प्लान कर दे।

अपस्यु:- मेरे बापू कब काम आएंगे मां। आप सिन्हा जी से मिल लीजिए, आपका सारा काम हो जाएगा….

नंदनी:- मै भी वही सोच रही थी। तुम सब अपने काम में लग जाओ, और हां ऐमी को भी बुला लो, उसे इस वक़्त यहां होना चाहिए।

कुंजल:- आप खाली थप्पड़ चलाने के लिए हो क्या मां, इतना तो आप भी कर सकती है, वो भी पूरे हक से।

स्वास्तिका, कुंजल के सर पर एक हाथ मारती…. "पागल कहीं की, बोलते-बोलते कुछ भी बोल जाती है।"..

अपस्यु:- हो गया, छोटी के मुंह से कुछ ज्यादा निकल गया हो तो एडजस्ट कर लो तुम लोग।

नंदनी:- तेरे छोटी और बड़ी कि हेंकरी तो मै 17 अगस्त से निकालूंगी, अभी जारा मै काम कर लूं। वैसे आते वक़्त मैंने गुफरान और प्रदीप को नहीं देखी, दोनो को कहीं भेजे हो क्या?

अपस्यु:- दोनो काम छोड़ गए मां। रुको आरव को बोलता हूं छोड़ आएगा।

तीनों एक साथ आश्चर्य… "आरव यहां है और अब तक कमरे के बाहर नहीं आया।"

अपस्यु:- कुछ जरूरी काम कर रहा होगा इसलिए बाहर नहीं आया।

नंदनी:- नहीं उसे रहने दो , मैं सिन्हा जी को बोल देती हूं किसी को भेज देंगे। और ऐमी को भी फोन लगा देती हूं।

अपस्यु:- मां, आज आप अकेली ही रहना, हम सब कुछ देर में राजस्थान के लिए निकलेंगे।

नंदनी:- मै अकेली क्यों रहूंगी, श्रेया तो है ना।

अपस्यु:- नाह ! उसने तो कल ही फ्लैट छोड़ दिया।

नंदनी:- हम्मम ! कोई बात नहीं, आज मै अपने 120 पोते-पोतियों के बीच सोऊंगी। पूरा भड़ा पुरा माहौल में, वो भी पूरी मस्ती के साथ। तुम लोगों को जहां जाना है वहां जाओ।

नंदनी ने ऐमी को ही कॉल लगाकर किसी ड्राइवर के साथ आने के लिए कह दी। कुछ देर बाद ऐमी फ्लैट के अंदर थी और नंदनी सिन्हा जी से मिलने चली गई। सुबह के 11 बज रहे थे, अपस्यु सबको वैन में लेकर दिल्ली राजस्थान हाईवे पर था।

सभी के मन में कई सवाल थे लेकिन अपस्यु बस उन्हें शांत रहकर सरप्राइज का इंतजार करने के लिए कहने लगा। 10 मिनट के बाद वैन एक बड़े से स्क्रैप यार्ड के पास खड़ी हो गई। सबको वैन में रुकने के लिए बोलकर, अपस्यु स्क्रैप यार्ड के अंदर घुसा और वहां एक लड़के से बात करने लगा। उस से बात करने के बाद अपस्यु वापस वैन में बैठा और वैन कुछ दूर आगे जाकर रुकी।

अपस्यु सबको नीचे आने का कहकर एक बड़े से गराज का शटर खोला, अंदर एक लाइन में 5 कार खड़ी थी जिसके ऊपर पेपर का कवर चढ़ाया गया था।… "क्या यार हम राजस्थान के लिए निकले है या यहां एनएच के कबाड़खाना देखने आए है।"…

"हम्मम ! अच्छा सवाल हैं। लेकिन इस सवाल का जवाब इन पेपर के अंदर छिपे कार में है।"….. अपस्यु एक कार के ऊपर के सारे पेपर हटाते हुए कहने लगा। … "पेश है पूरी तरह कस्टम की गई फरारी। ऑटोमोबाइल इंजीनियिंग का नायाब कारीगरी, जिसे आपकी प्यारी भाभी और मेरी होनी वाली प्यारी पत्नी ने आप सबको गिफ्ट किया है।"

कुंजल:- ऐसा क्या खास कस्टम किया है भाई ?

अपस्यु:- "कार की खास बात सिर्फ इतनी सी है कि, हम किसी के यहां बुलावे पर खाली हाथ अशहाय की तरह पहुंचेंगे और हमारी सारी जरूरत ये कार पूरी करेगी। इसके अलावा बहुत से और भी गुण के साथ इसे कस्टम किया है। हर किसी के लिए यहां उसकी अपनी कस्टम कार है और हर कार पर उसके मालिक का नाम लिखा है। 100% कंप्यूटराइज्ड बायोमेट्रिक सुरक्षा तकनीक के साथ जिसे बिना आपके कमांड के ऑपरेट नहीं किया जा सकता। इसके अलवा अंदर के सारे फंक्शन भी आपके हुक्म के गुलाम है।"

"बाकी सारी डिटेल कार के अंदर है, धीरे-धीरे सभी खूबियां समझ में आ जाएगी। यहां से वीरभद्र के गांव का सफर लगभग 700 किलोमीटर का है । हम बीच में जयपुर में हॉल्ट लेकर लंच करेंगे और फिर वहां से उदयपुर और उदयपुर से वीरभद्र के गांव। जयपुर हॉल्ट का जीपीएस लोकेशन मैंने भेज दिया है, यहां से हम अपनी कार में रेस करते हुए निकलेंगे।"

सभी लोग हूटिंग करते हुए कार का कवर खोले। कुछ ही समय में सभी कार सड़क पर थी। इंजन की आवाज़ घन-घन करने लगी और सबने अपने कार को भगाना शुरू कर दिया। कार हवा से बातें करना शुरू कर चुकी थी। जल्द ही सबके कार की गति 140-150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के हिसाब से चलने लगी थी। इससे ज्यादा तेज गति में कार ले जाने की हिम्मत किसी में नहीं हुई सिवाय अपस्यु के, जो टॉप स्पीड में लगभग 300 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ते हुए सबके बीच दूरियां बनता जा रहा था।

सभी लोगों कि गाड़ी हॉल्ट डेस्टिनेशन पर जैसे ही रुकी…. "आज क्या गाड़ियों की सेल लगी थी, जो हर कोई फरारी लिए घूम रहा है।"… आरव पार्किंग में अपनी गाड़ी खड़ी करते हुए सोचने लगा। यही हाल स्वास्तिका और कुंजल का भी था।

"ज्यादा आश्चर्य करने की जरूरत नहीं है, 20 कार कस्टम की गई थी, जिसमें से 7 अपने पास है।"…. ऐमी तीनों के पीछे खड़ी होकर कहने लगी।

आरव:- ओह हो मतलब 13 गाडियां कॉलीब्रेशन की है। अब मुझे समझ में आ गया कि दृश्य भईया किस धरती के बोझ की बात कर रहे थे, और अपस्यु ने अचानक ही सारे योजना को किनारे करके नई योजना पर क्यों काम शुरू कर दिया।

स्वास्तिका:- तुम दोनो कोड में बात क्यों कर रहे हो।

कुंजल:- उम्मीद है इस कोड का खुलासा किए बिना अब हमे इंतजार करने के लिए कहा जाएगा।

ऐमी:- हां इंतजार करने कहा जाएगा और साथ में यह भी की शादी जैसा माहौल होने वाला है।

सभी एक साथ…. "ये शादी जैसा माहौल का क्या मतलब है।"

ऐमी:- जैसे एक रिश्ता, शादी तक पहुंचाने के लिए घरवाले पूरी मेहनत करते हैं ठीक वैसे ही हमने अपने काम को आखरी अंजाम तक पहुंचा दिया है। अब शादी में बस हम सब को एन्जॉय करना है, पुरा एन्जॉय और शादी का पूरा भार किसी जिम्मेदार को सौंप दिया है।

कुंजल:- लेकिन भाभी, थोड़ा-नाच गाना और विधि वाले काम तो हमारे हिस्से में है ना।

ऐमी:- हां हां वो हमारे हिस्से में ही है और हम लोग पूरे मज़े के साथ उसे करने वाले है। चलो अन्दर चला जाए।

सभी लोग जैसे ही अंदर पहुंचे, अपस्यु किसी के गले लगकर उसके कानों में कुछ कहा और वो पलट कर सबको हाथ दिखता वहां से चला गया। सभी लोग एक टेबल पर आकर बैठ गए…. "अब ये महाशय कौन है।"… स्वास्तिका ने पूछा।

आरव:- ये दृश्य भईया है, मौसेरे भाई। शादी का पूरा व्यवस्था देखना इन्हीं के जिम्मे है और अपना काम होगा पूरी शादी एन्जॉय करना।

कुंजल, अपनी छोटी सी आंख बनाती, कुछ कहने ही वाली थी, उस से पहले ही अपस्यु कहने लगा…. "सब आराम से यहां लंच एन्जॉय करो। वैसे भी तमाम उम्र सवाल जवाब में ही गुजरा है, सो मैं चाहता हूं तुमलोग शादी एन्जॉय करो, बाकी बातें तो ये इवेंट एन्जॉय करने के बाद भी होता रहेगा।"

अपस्यु की बात मानकर सभी लंच करने लगे। लंच के दौरान तीखी बहस छिड़ी हुई थी। आपस में चिढाना और खींचा तानी लगा हुआ था। जयपुर हॉल्ट से सभी लोग तकरीबन 3 बजे निकले। इस बार जब जयपुर से निकले, तभी कुंजल सबको आखें दिखती कह दी… "इस बार कोई आगे पीछे नहीं भागेगा। सब साथ में चलेंगे।"

कुंजल की बता भला कोई ना माने। ऐमी ने सभी 5 गाड़ी के एसेस कंट्रोल लिया और अपस्यु के कार को कमांड दे दिया। ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी का क्या कॉम्बो कस्टम किया था। सभी कार ऑटो ड्राइव कमांड में थे। आगे अपस्यु अपनी कार ड्राइव कर रहा था, और पीछे इंजन से लगे बोगी की तरह बाकी कार चल रही थी।

ऐमी कुंजल के साथ आकर बैठ गई और आरव स्वास्तिका के साथ। बातचीत करते हुए सभी 6 बजे के आसपास उदयपुर की सीमा में घुसे। वहां से फिर सभी अपने-अपने कार में सवार होकर वीरभद्र के घर। सायं-सायं करती सभी कार वीरभद्र के घर के आगे रुकी। चूंकि वीरभद्र को पहले से सूचना थी, इसलिए वो बाहर खड़ा ही उनका इंतजार कर रहा था।

इतनी सारी कार एक साथ आते देख लोगों की भीड़ भी आकर वहां जमा होना शुरू हो गई। वीरभद्र ने तुरंत सभी कार को अपने पीछे आने का इशारा किया। थोड़ी ही देर में कार वीरभद्र के वर्किंग सेक्शन के पास खड़ी थी। अपस्यु के इशारे पर आरव सबको लेकर वीरभद्र के ट्रेनिंग एरिया के ओर चल दिया…

कुंजल:- वीरे जी..

वीरभद्र:- जी कुंजल जी…

कुंजल:- अरे मै इतने दिन बाद मिल रही हूं, ना कोई दुआ ना कोई सलाम, आप तो इधर-उधर घूम रहे है।

निम्मी:- ये छोड़ा जारा शर्मिला है। लड़कियों से ठीक से बात नहीं कर पाता, ऊपर से मालिक की बेटी, कहां से नजर मिला पाएगा।

कुंजल:- और तुम्हारी तारीफ।

एक छोटे से परिचय के बाद सब लोग आपस में बात करने लगे। पार्थ भी वहीं पर था, लेकिन सभी लोगों ने जो एक बात गौर की वो था पार्थ का बदला स्वभाव। बोल्ड और बेवाक बातें करने वाला पार्थ, किसी भीगी बिल्ली की तरह बस थोड़ा सा हंस रहा था और थोड़ा सा बोल रहा था।

स्वास्तिका और आरव उसे लेकर कोने में पहुंचे। निम्मी, पार्थ के विषय में बहुत कुछ देखकर भी अनदेखा करके वीरभद्र और कुंजल के साथ बातों में लगी हुई थी। तीनों आपस में बातें कर रहे थे, बीच, बीच में कुंजल वीरभद्र को छेड़ देती और उसका शर्माना देखकर निम्मी और कुंजल हंसने लगती। बातों के दौरान कुंजल के हंसी मजाक को देखकर निम्मी ने कह ही दिया…

"आप हमारे मालिक की बेटी है, और जिस तरह से आप घुल मिलकर मज़ाक कर रही है उस से लगता है, आप सबकी चहेती होंगी। देखने में तो कोई जवाब ही नहीं, किसी भी लड़के का दिल धड़क जाए… मेरी विनती है कि मालिक और नौकर के बीच मेल-जोल थोड़ा कम ही रहे तो अच्छा है।"..

कुंजल का हंसता चेहरा, निम्मी की बात सुनकर जैसे मुरझा सा गया हो। वीरभद्र भी समझ नहीं पाया कि अचानक ही निम्मी ने ऐसा क्यों कह दिया। लेकिन उसे भी निम्मी की बात कहीं ना कहीं सही ही लगी, इसलिए उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया। कुंजल चुपचाप वहां से उठकर अपस्यु और ऐमी के पास चली आयी जो इस वक़्त कार के अंदर की सब व्यवस्था पर चर्चा कर रहे थे।

दोनो आपस में बात कर रहे थे, तभी बात करते-करते दोनो की नजर कुंजल पर गई।… "बच्ची का मुंह कहे उतरा है। अभी तो इसकी खिली सी हंसी की आवाज़ आ रही थी।"… अपस्यु कुंजल को देखते हुए ऐमी से कहा।

ऐमी:- लगता है कोई बात चुभ गई है। चलो देखते हैं।

ऐमी जैसे ही 2 कदम आगे बढ़ी अपस्यु पीछे से जमीन पर लेटकर नागिन डांस करने लगा। कुंजल के उतरे चेहरे पर हंसी की लहर तैर गई। जोर से चिल्लाती हुई वो कहने लगी… "भाभी, इनकी नौटंकी शुरू हो गई। प्लीज उठाओ भईया को, कहीं भी लेटकर नागिन डांस दिखाने लगते है।"

ऐमी जब पीछे मुरी तब अपस्यु की हरकत देख वो भी हसने लगी। कुंजल का चिल्लाना सुनकर पीछे से वीरभद्र और निम्मी भी वहां पहुंचे। अपस्यु खड़ा होकर कुंजल को अपने पास बुलाया…. "ये क्या है कुंजल, तेरा मुंह क्यों फुल गया।".. तबतक वीरभद्र और निम्मी भी उनके पास पहुंच गए थे।
 
Update:-126

ऐमी जब पीछे मुरी तब अपस्यु की हरकत देख वो भी हसने लगी। कुंजल का चिल्लाना सुनकर पीछे से वीरभद्र और निम्मी भी वहां पहुंचे। अपस्यु खड़ा होकर कुंजल को अपने पास बुलाया…. "ये क्या है कुंजल, तेरा मुंह क्यों फुल गया।".. तबतक वीरभद्र और निम्मी भी उनके पास पहुंच गए थे।

कुंजल वीरभद्र और निम्मी को देखती हुई कहने लगी… "अगर वीरे जी से मुझे शादी करनी हुई, तो क्या आपको ऐतराज होगा।"..

अपस्यु:- हाहाहाहाहा…. नाह बिल्कुल ऐतराज नहीं होगा, हां बस तुमसे शादी के लिए वीरे को तुम्हारा दिल जीतना होगा। क्या कोई मालिक नौकर वाली बात कही किसी ने?

कुंजल:- हां इसकी बहन निम्मी ने।

अपस्यु:- तुम्हारा हाथ कैसा है निम्मी।

निम्मी, खामोशी से… "ठीक है, बस हल्का स्क्रैच आया था। मै सोचती थी बस मेरा निशाना ही परफेक्ट है, लेकिन आपने मेरा भ्रम तोड़ दिया।"..

ऐमी:- हमारी छोटी से ऐसा क्या कह दी, जो बेचारी का खिला चेहरा उतर गया।

निम्मी:- कुछ नहीं, बस आप सब बड़े लोग है और छोटी सी गलतफहमी बहुत असर करती है। मेरे भाई की तो परमानेंट नौकरी है, इसलिए वो रहेगा तो आप लोगों के साथ ही, और इनका मज़ाक कहीं कोई गलतफहमी ना पैदा कर दे इसलिए पहले से सचेत कर रही थी।

ऐमी:-:हां ये गलतफहमी अच्छी चीज नहीं। लेकिन अगर वीरे चाहे तो कुंजल का दिल जीतने की कोशिश कर सकता है। हम दोनो को लड़का पसंद है।

कुंजल:- अरे अरे अरे… ये आप लोग कौन सा स्टेशन पकड़ लिए। मैं तो बस निम्मी को समझना चाहती थी कि हमारे घर में कोई ऐसा नहीं जिन्हें मेरा वीर जी से बात करना बुरा लगे।

निम्मी:- हां मै जानती हूं ये बात। और मैंने आपके लिए नहीं कहा था। मैं अपने भाई को ही समझा रही थी। कई बार हम लड़कियों का हंसकर बात करना, हमारे लिए पाप हो जाता है। हम तो बस हंसकर बात करते है और सामने वाला कोई और ही मतलब निकाल लेता है।

अपस्यु:- हम्मम ! बात तो निम्मी की भी सही है। क्यों भाई वीरे जी आपका क्या सोचना है इस मुद्दे पर।

वीरभद्र:- मुझे नहीं पता कि निम्मी ने अचानक चल रहे अच्छे माहौल में ऐसी बातें क्यों कही, लेकिन विश्वास रखिए, मै कुंजल जी के मज़ाक को महज मज़ाक के तौर पर लेता हूं। किसी भी बेवाक कहीं बात पर ना तो मेरी सोच गलत हो सकती है और ना ही मेरी नजर।

अपस्यु:- अब क्या कहना है निम्मी…

निम्मी:- कुछ नहीं छोड़िए सर, शायद मै ही कुछ पुराने बातों को लेकर कुछ ज्यादा ही ओवर रिएक्ट कर गई।

निम्मी, अपस्यु को लेकर एकांत में लती हुई..… "मै चाहती हूं आप मेरे भाई को वहां ना लेकर जाएं, कुछ बातें उसे ना ही पता चले तो अच्छा है।"

अपस्यु:- ना ही वो जाएगा और ना ही तुम्हारे साथ क्या हुआ वो जान पाएगा। अब खुश।

निम्मी:- खुशी तो कबकी खत्म हो गई है सर, बस जिंदा हूं।

अपस्यु:- पार्थ तुम्हे पसंद करता है, तुम उसे थोड़ा वक़्त क्यों नहीं देती।

निम्मी:- नहीं सर, अब मन नहीं किसी को भी वक़्त देने का। लोकेश से अपना हिसाब बराबर करने के बाद मै दृश्य भईया के साथ निकलूंगी। अब मेरा काम और मेरा जीवन उन्हीं को समर्पित है। उनके साथ काम करके कम से कम सुकून तो रहता है।

अपस्यु:- पार्थ को तुम भी चाहती हो ना।

निम्मी:- प्लीज सर दिल के अरमानों के तार मत छेड़ो। मेरी भी इक्छाएं है लेकिन पार्थ जैसे लोग किसी एक के होकर नहीं हो सकते। किसी भी तरह के अरमान उसके साथ संजोना ही बेईमानी होगी। वैसे भी कल जब उसे मेरे बारे में सब पता चलेगा फिर उसकी चाहत भी खत्म हो जानी है।

अपस्यु:- और यदि सब सच जानने के बाद भी तुम्हारे पीछे आया तब..

निम्मी:- एक तो ऐसा होगा नहीं लेकिन ऐसा हुआ तो मैं यही समझूंगी की आपने अपने दोस्त का ब्रेनवाश किया है। ऊपर से मै वो क्षण झेलना नहीं चाहती जब किसी दिन के झगड़े में वो मेरे अतीत को उलट दे।

अपस्यु:- एक बात का भरोसा मै तुम्हे दिलाता हूं, वो कभी भी गांव के माहौल में नहीं पला इसलिए वो बीती बातों को मुद्दा नहीं बनाएगा। रही बात उसके ब्रेनवाश की तो मै कुछ नहीं बताने वाला, यकीन मानो। अब बताओ.. सब सच जानने के बाद भी वो तुम्हारे पीछे आया तो…

निम्मी, मुस्कुराती हुई… "फिर उसकी नजर और दिलफेंक अदा को कैसे काबू में रखना है वो मै जानती हूं।"

अपस्यु:- उम्मीद करता हूं तुम्हारे अरमानों के पंख को हवा मिल जाए।

निम्मी गुमसुम आयी थी, लेकिन मुसकुराती हुई लौट रही थी। इधर आरव और स्वास्तिका, अपने बड़बोले और दिलफेंक दोस्त को सुन रहे थे, और पार्थ की बात सुनते हुए दोनो की हंसी ही नहीं रुक रही थी। पार्थ के अनुसार उसने आज तक इतनी गंभीर और फोकस लड़की को नहीं देखा। जितना काम होता है उतने के अलावा वो बात ही नहीं करती।

पार्थ के अनुसार निम्मी, ना तो ज्यादा बात बनना और ना ही इधर-उधर की बातों में कोई रुचि लेना। अपने भाई और मां के आलावा किसी से हंसी मज़ाक नहीं करती और कोई कुछ भी उल्टा बोल दे या कुछ ग़लत कर दे, फिर तो उसके गुस्से का प्रकोप फुट परता है। कुल मिलाकर पार्थ अपना दिल हार चुका था, लेकिन लगभग 2 महीने में निम्मी उससे ठीक से बात तक नहीं करती।

पार्थ की हालत पर आरव और स्वास्तिका दोनो बहुत ही हंसे जा रहे थे। तभी आरव जब अपस्यु के ओर देखा…… "अबे तेरे साथ कोई बात आगे नहीं बढ़ी और तेरी निम्मी अपस्यु के साथ बात करते हुई मुस्कुरा रही है।"...

पार्थ की नजर भी उस ओर गई…. "क्या यार ये पहली बार मिल रहा है फिर उसके साथ इतना अच्छे से बात कर रही, मुझमें क्या काटें लगे है।"

स्वास्तिका:- तुझमें काटें नहीं लगे पार्थ, बस उसके छोटे से अरमान होंगे कि जो उससे प्यार करे वो सिर्फ उसी का होकर रहे और ये यकीन तू उसे दिला नहीं पाया है। चल आरव इसकी लव स्टोरी फ्लॉप है।

पार्थ:- तू ऐसा क्यों बोल रही..

आरव:- क्योंकि तू जिसके प्यार में परा है उसके अरमान तो तुम्हे समझ में नहीं आए, तो अपने लिए उसके दिल में विश्वास क्या घंटा पैदा करोगे। स्वार्थ वाली भावना है तुम्हारी पार्थ, जिसमें केवल तुम्हे अपने दिल के अरमान दिख रहे। फिर तो शायद तुम्हारा प्यारा, प्यारा ना होकर बल्कि एक फीलिंग हो की इतनी लड़कियों को पटाने के बाद, इसने तुम्हे इग्नोर क्यों कर दिया।

आरव और स्वास्तिका पार्थ को उसके हाल पर छोड़कर सबके बीच आ गए। कुछ देर की बातचीत के बाद सब लोग घर के अंदर पहुंचे। रात के खाने के बाद सब लोगों के बीच काफी लंबी चर्चा चली। हंसी मज़ाक और तीखी नोक-झोंक के कारन घर का पूरा माहौल की हसी की की किलकारियों से गूंज रहा था।

रात के तकरीबन 11 बजे सब सोने चल दिए। तैयारियां पूरी होने के बाद एक सुकून की रात थी। अपस्यु रात की इस खामोशी को अपना साथी और साक्ष्य बनाते, खुले छत के ऊपर लेटा आसमान को ताक रहा था। एक के बाद एक हुई सभी घटना जैसे उसके दिमाग में चल रही थी और आंखों के किनारे से कुछ बूंदे बहते चले जा रहे थे।

कमाल की मनोदशा थी उसकी। आखों में गम के आशु थे, लेकिन हर जाने वाले को मुसकुराते चेहरे से याद कर रहा था। उनकी हर प्यारी छवि और तस्वीर उसके दिमाग में थी। ख़ामोश रात उसके लिए जैसे समा बांध रहा हों।

छोटी सी उंगली, एक-एक करती अपस्यु के आंसू पोंछती, उसके होंठ से होंठ को स्पर्श करके ऐमी उसके पास लेट गई… "वो दूर देखो 2 तारे जो साथ में है, एक सुनीता (ऐमी की मां) है और दूसरी सुनंदा (अपस्यु की मां)। दोनो साथ ही है और ऊपर से हमे देख रही।"

अपस्यु करवट लेकर ऐमी के ओर मुरकर, अपनी उंगली उसके चेहरे पर फिराते…. "तब तो उन दोनों ने हमे चूमते हुए देखा होगा।"..

ऐमी भी अपस्यु के ओर करवट लेती, उसके नाक पर अपनी उंगली फीराती… "नाह ! दोनो ने अपनी आखें मूंद ली होगी और ऊपर से मुसकुराते हुए आशीवार्द से रही होगी।"

अपस्यु नाक से नाक को स्पर्श करते… "बस तुम्हे यकीन है ना कि वो दोनो खुश होंगे।"..

ऐमी:- हां बिल्कुल खुश होंगे। तुमने तो अपने बदला लेने से पहले, दोनो के प्रिय लोगों को संजोए है। खुश क्यों नहीं होंगे।

अपस्यु:- नाह ! मैंने एक के साथ बिल्कुल भी अच्छा नहीं किया ऐमी। मैं कुंजल और मां को देखता हूं तो खुद में दोषी सा महसूस करने लगता हूं। जैसे मैंने अपनी मासी की तलाश की थी, उसी प्रकार पहले मुझे अपने बहन और छोटी मा की तलाश करनी चाहिए थी। अंदर के द्वेष ने मुझे रोका और हर पल मुझे इस बात का एहसास होते है कि काश मैंने कोशिश की होती तो उन्हें नरक के कई साल झेलने ना परते।

ऐमी, अपस्यु का चेहरा अपने सीने से लगाकर बालों में हाथ फेरते हुए कहने लगी…. "तुम्हे जीते देखती हूं तो अच्छा लगता है। खुद को बीते वक़्त में ले जाने से अच्छा है, अब जब वो साथ है तो उन्हें हर खुशी दी जाए।"

अपस्यु, सुकून से अपना आखें बंद करते… " हां ये भी सही है अवनी"..

ऐमी:- हां मै समझ रही हूं, तुम मुझे अवनी क्यों पुकार रहे हो। ठीक है कल का काम खत्म करके चलेंगे मासी और मामा के यहां। मै भी जोड़ने कि एक कोशिश करती हूं, लेकिन अब भी यदि कोई विकार उगल दिए उन लोगों ने…

अपस्यु:- तो उसे मात्र एक इंसानी स्वाभाविक सोच, समझकर हम मुकुराएंगे और यह मान लेंगे की वो भी अपने है, बस सोच नहीं बदली जा सकती।

ऐमी:- आई लव यू..

अपस्यु अपना चेहरा ऐमी के सीने से अलग किया और उसके चेहरे को देखते हुए मुस्कुराने लगा। ऐमी भी मुसकुराते हुए अपनी ललाट ऊपर खींचती इशारे में पूछने लगी "क्या हुआ"…

अपस्यु जवाब में ऐमी के होंठ से होंठ लगाकर प्यार से चूमते हुए अलग हुआ और उसके आखों में आखें डालकर कहने लगा…. "लव यू टू"..… दोनो एक दूसरे को देखकर मुसकुराते रहे और अपस्यु अपने आलिंगन में ऐमी को लेकर सो गया। सुबह कौतूहल में दोनो की नींद टूट गई। सुबह के 6 बज रहे थे, और बच्चे काफी उत्साह से फ्लैग होस्टिंग के लिए कतार बनाकर जा रहे थे।

अपस्यु उनके कतार को देखकर मुस्कुराते हुए कहने लगा…. "देश तो इन बच्चो के दिलों में धड़क रहा है, वरना हम तो काम में इतने फिक्रमंद हो गए की कभी जुबान से देश का नाम नहीं निकला।

ऐमी:- टैक्स चोरी नहीं कर रहे ना, बस हो गई देश सेवा, और आज तो हम अपना निजी स्वार्थ साधने के चक्कर में कहीं ना कहीं देश के काम भी आ ही जाएंगे..

अपस्यु:- वकील की बेटी हो ना, लॉजिक तो जोड़ ही दोगी। चलो चलकर फ्लैग होस्टिंग का हम भी हिस्सा बने।

अपस्यु जल्दी से तैयार होकर सबको हॉल में बुला लिया। सब लोग इकट्ठा होकर टीवी चालू करके झंडारोहण में हिस्सा लेने लगे। पूरा कार्यक्रम सब ने देखा। शक्ति प्रदर्शन को देखकर गर्व सा महसूस करते सबने एक बार उन सहासी वीर जवानों को नमन किया।

सुबह के 9 बजे, सब वहां से निकल गए। अपस्यु, वीरभद्र को कुछ बातें समझाकर वहां से सबसे आखरी में निकला। 6 गाडियां एक कतार में एक जैस गति को बनाए, लोकेश के इलाके में घुस रहे थे। लोकेश के हाई टेक गांव के सरहद पर अपस्यु के पुरा कारवां रोककर कंट्रोल रूम से संपर्क किया गया। वहां से ऑर्डर मिलते ही सभी गाड़ियों को आगे जाने दिया गया।

तकरीबन 2 किलोमीटर अंदर घुसने के बाद विक्रम राठौड़ का भी साम्राज्य दिखने लगा, जिसे लोकेश के इशारे पर री मॉडलिंग किया गया था। चारो ओर खूबसूरत बिल्डिंग, सड़क और फेंसिंग ऐसी मानो हॉलीवुड की पुरा कॉपी करके उतार दिया गया हो। 12 लेन की सड़क के दोनों ओर निश्चित दूरी पर डुप्लेक्स मकान बने हुए थे जिनके आगे का इंटरियर पूरे सिसे का था। हर घर के आगे बागवानी और पुरा गांव छोटी सी घाटी में बसा था। दूर से देखने पर ऐसा लगता था, एक घर के ठीक ऊपर दूसरा घर बना है, लेकिन जब उन घरों के बीच से निकलो, फिर पता चलता कि घाटियों की घुमावदार सड़क है, जो हल्का स्लोप बनाते उपर की ओर ले जाती है।
 
Update:-127

सबसे ऊपर और घाटी के आखरी में एक शानदार महल बाना था, जिसकी सीमा तकरीबन 500 मीटर में फैली थी। महल की बाउंड्री से कई सारे स्वीट्स और 3-4 मनमोहक स्विमिंग पूल थी, और ठीक उन सब के बीचों बीच, बड़ा सा महल था… तकरीबन 200 मीटर के दायरे में 80 फिट ऊंचा महल।

एक-एक करके सभी गाडियां उस महल में घुसने लगी। एक स्टाफ ने इशारे से सभी कार को सेपरेट पार्किंग देकर, अपने पीछे आने के लिए कहा। कुछ छोटी सी पिकअप वैन उन्हें लेने के लिए पहुंची। भाव्य महल के मुख्य द्वार पर लोकेश और मेघा दोनो खड़े थे। अपस्यु को सामने देखकर उसके गले मिलते हुए लोकेश कहने लगा…. "आज से पहले किसी से मिलने की इतनी बेताबी कभी नहीं हुई।"..

"क्यों हम सब का श्राद यहीं पर करने के लिए मरे तो ना जा रहे लोकेश सर।"… पीछे से आरव से तंज कसते हुए कहने लगा।

लोकेश:- जब साथ मिलकर हम पूरी दुनिया जीत सकते है फिर एक दूसरे को मारकर ताकत कम क्यों करना। राजपुताना इतिहास गवाह है कि जब-जब भाइयों कि शक्ति इकात्रित हुई है, हमने फतह हासिल की है।

आरव:- फिर ऐमी सिन्हा यानी कि ये तो मेरी भाभी की बेज्जती कर रहे है, क्योंकि वो हमारे साथ ना हो तो दुनिया तो दूर की बात है, गाली फतह ना कर पाए।

स्वास्तिका:- क्यों आप इन सब बातों को छेड़कर बाबा अपस्यु को बोलने पर मजबूर कर रही हो, जो खुद को ब्राह्मण मानता है।

ऐमी:- और ये आरव तो वैश्य है ना।

लोकेश इनकी बातें सुनकर हैरानी से सबका चेहरा देखते…. "ये तुम लोग मेरे साथ मज़ाक कर रहे हो ना।"

कुंजल, लोकेश का कन्फ्यूजन से भरा चेहरा देखती हुई कहने लगी…. "बस भी करो सब, बंद करो लोकेश भईया को छेड़ना। लोकेश भैय्या इनकी बातों को ध्यान मत दो, वरना आपको संन्यास लेना होगा। वो आपका स्टाफ हमारा बैग लेकर वहां क्या कर रहा है?

स्वास्तिका:- कितने शर्म कि बात है, हमारे अंडरगारमेंट्स को आखें फाड़े ये लोग नुमाइश के तौर पर देख रहे है, वो देखो एक-एक कपड़ा उठाकर चेक कर रहे। शर्म आनी चाहिए आपको।

अपस्यु:- लोकेश भईया, उनसे कहो अभी के अभी बैग पैक कर दे। विश्वास मानो अगर मुझे यहां का पूरा कुनवा साफ करने का इरादा होता तो महज एक रात की कहानी थी। आपसी विवाद ना हो कहीं इन छोटी छोटी बातों से और मै ये सोचने पर मजबूर हो जाऊं की भीख में मिली हमारी इस जगह पर आप हमारी बेज्जती कर रहे हो।

बातों ही बातों में लोकेश की ऐसी घोर बेज्जती हो गई की वो गुस्से का घूंट पीकर अपने स्टाफ के पास गया और खींचकर तमाचा मारते हुए अच्छे से समझा दिया कि जो आए है वो मेहमान नहीं, बल्कि परिवार के लोग है, बैग को पैक करके चुपचाप कमरे तक पहुंचा दिया जाए।

वहां के स्टाफ को समझाने के बाद लोकेश स्टाफ हेड मिस काया के पास पहुंचा और आए हुए लोगों के बारे में सभी बातें समझाकर, वापस अपस्यु के पास लौटा…. "लगता है हम दोनों को कुछ वक़्त साथ गुजरना होगा एक दूसरे को समझने के लिए। अभी हुई बदतमीजी के लिए मै माफी चाहता हूं, यहां केवल बाहरी लोग आते है और काम ऐसा है कि एक छोटी सी गड़बड़ी के कारन हमारी छिपी दुनिया बाहर आ सकती है। कभी यहां परिवार लेकर आए ही नहीं जो इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते। अभी के लिए माफ करो, मैंने यहां के स्टाफ हेड काया को सब समझा दिया है, एक इंच भर की भी परेशानी नहीं आएगी।"..

अपस्यु:- थैंक्स भईया, ये जगह को आपने कमाल का डेवलप किया है, यहां अगर परिवार को नहीं लाते हैं, तो गलती आपकी है।

लोकेश:- चलो इस गलती को भी जल्द सुधार लूंगा, अभी मै चलता हूं। यहां आराम से घूमो फिरो, एन्जॉय करो। रात को सभी पार्टनर्स के साथ एक छोटी सी पार्टी है और पार्टी के होस्ट हम सब ही है, इसलिए शार्प 8 बजे तक पार्टी हॉल में ही मुलाकात होगी और फिर काम कि सारी बातों पर चर्चा कल सुबह।

अपस्यु:- ठीक है भईया।

लोकेश मेघा की लेकर वहां से निकल गया और ये सभी लोग काया के साथ अपने अपने कमरे के ओर चल दिए। जैसे ही लोकेश महल से बाहर आया, मेघा से झुंझलाकर कहने लगा…. "ये लोग क्या पागल है, मेरी जगह पर खड़े होकर मुझे ही बेज्जत कर रहे थे। 2 मिनट नहीं लगेंगे और सबकी कहानी समाप्त हो जाएगी।"

मेघा, लोकेश के चिढ़े चेहरे को देख सुकून सी महसूस करती हुई ठंडी श्वांस अपने अंदर खींची और हंसती हुई कहने लगी…. "तुम बेवकूफ हो क्या लोकेश। तुम्हरे बुलाने पर वो पुरा परिवार लेकर आया है और तुम ऐसे उसके कपड़े चेक करवा रहे थे। यार सच में बहुत बेगैरत हो। एक भाई का खून तो खौलेगा ही।"

किसी के बैग की ऐसी चैकिंग मतलब उस आदमी पर संदेह होना। साथ मिलकर काम भी करना है और इतना छोटा सोच भी रखना है। अब कम से कम यह दावा मत करना की उन्हें 2 मिनट में समाप्त कर सकते हो, ऐसा होता तो उनको ऐसे संदेह से नहीं देखते, बल्कि खुद में विश्वास होना चाहिये था की बैग में ये कुछ भी लेकार आओ लेकिन यहां का बादशाह मै हूं और यहां तुम मेरा बाल भी बांका नहीं कर सकते।

लोकेश:- हम्मम ! हां अब सब साफ समझ में आया। लगता है बहुत बड़ी गलती हो गई। खैर काया को और अच्छे से समझा दू और सारे रिस्ट्रिक्शन हटाने कहता हूं।

लोकेश फौरन काया से बात करके उसे साफ समझ दिया कि इस जगह पर जो अन्य लोगों के लिए प्रतिबंध होता है, वो इनपर लागु ना किए जाए, सिवाय कंट्रोल रूम के। वहां छोड़कर जहां जाने की इक्छा है वहां ले जाओ, जो करना चाहते है वो करने दो और जो वो कहते है, वो काम पहले पुरा होना चाहिए।

काया इस वक़्त जो अपस्यु और ऐमी के साथ उसके कमरे में आयी थी, लोकेश से बात करके हां में अपना सर हिला दी…. "क्या हुआ लोकेश ने बोल दिया हर रूम के सर्विलेंस को बढ़ा दो और उन लोगों की एक्टिविटी लगातार वॉच करते रहो। ये इतना लीचड़ कैसे हो सकता है।".. ऐमी तंज करती हुई कहने लगी।

काया:- नो मैम, उन्होंने कहा है की रूम के जितने भी सर्विलेंस है उन्हें हटा दिया जाए और आप सब फैमिली मेंबर है, इसलिए उन्होंने कहा है आप को मालिक की तरह ट्रीट किया जाए। बस केवल कंट्रोल रूम के ओर मना किया है आने से। वो चाहते हैं कि शाम की पार्टी और मीटिंग के बाद लोकेश आपको वो पूरी जगह खुद दिखाए और आराम से समझा सके कि वहां से क्या-क्या होता है।

काया हर सर्विलेंस को बंद करके अपस्यु के पास पहुंची… "लंच में अभी टाइम है सर, आप कहीं घूमकर आना चाहेंगे।"..

अपस्यु:- हां, हां क्यों नहीं, लेकिन आप हमे घूमने लेकर चलें और कोई मस्त सी जगह हो।

काया मुस्कुराती हुई अपस्यु को देखी और बस 2 मिनट बाद बाहर आने कही। 2 मिनट बाद जब अपस्यु और ऐमी बाहर आए, काया एक कार लिए दरवाजे पर इंतजार कर रही थी। अपस्यु और ऐमी, काया के साथ निकले। तकरीबन 10 मिनट की ड्राइविंग के बाद तीनों एक आर्टिफिशियल झील के पास पहुंचे। काया दोनो को झील दिखाते हुए आगे बढ़ने लगी।

चलते-चलते तीनों झील के पीछे पहुंचे जहां झील की पहली नीव रखी हुई थी। जैसे ही तीनों वहां पहुंचे, काया झट से अपस्यु के क़दमों में गिरती… "मेरा बच्चा कैसा है। कितना बड़ा हो गया वो। कोई तस्वीर हो तो प्लीज मुझे दिखा दो।"

ऐमी काया को उठाती….. "आपका बच्चा यूं समझो अब हमारा बच्चा है, और विश्वास मानिए उसके नए पिता बहुत ही केयरिंग है।"..

काया:- हां मै जानती हूं। बहुत दर्दनाक फैसला था वो, लेकिन मै कभी नहीं चाहूंगी की मेरा बच्चा या तो मुझ जैसा बने या अपने बाप जैसा।

अपस्यु:- उसके बाप में क्या बुराई है?

काया:- मुझे नहीं लगता कि तुम्हे बताने कि जरूरत है। जब मैंने तुम्हे वैभव को सौंपी थी तभी बताई थी… जिन बच्चों का हाथ तुमने थामा है, उसे ना तो वो देखने आए जो हमारे दिमाग को खराब करके हमे गलत करने के लिए मजबूर करते थे और ना ही उसने कभी ध्यान दिया जो सबको एक तराजू में तौलकर अपने तांडव से सबको बस यतीम करता चला गया।

अपस्यु:- वो आया था अपना बच्चा लेने..

काया, अपस्यु के ओर सवालिया नज़रों से देखने लगी, मानो उसका धड़कता दिल पूछ रहा हो, क्या मेरा बच्चा अभी उसके पास है या उसका पिता लेकर गया। काया की दुविधा को भांपते हुए ऐमी कहने लगी…. "ना तो तुम्हारा बच्चा यतीम है और ना ही उसके अभिभावक कमजोर। फिर यह ख्याल क्यों आया कि वो हमसे उस बच्चे को ले गया होगा।"

काया:- हम्मम ! थैंक्स.. वैसे सुनकर थोड़ा सुकून हुआ की कम से कम अपने बच्चे को ढूंढने तो आया दृश्य। वैसे तुम दोनो इस जल्लाद लोकेश के परिवार से हो, सुनकर थोड़ा अजीब लगता है।

अपस्यु:- एक अजीब बात और बताऊं, तुम्हारे बच्चे का बाप जो है, वो मेरा मौसेरा भाई है।

काया:- आह ! तभी मै सोचूं की वो अपने बच्चे को लेने आया और खाली हाथ कैसे गया। शायद तुम उसके भाई थे यह सोचकर कुछ नहीं किया वरना उसका गुस्सा सही गलत में फर्क नहीं करता।

अपस्यु:- काया ये बहुत लंबी कहानी है और समझना थोड़ा पेंचीदा। मुझे और दृश्य दोनो को पता है कि बचे हुए वीरदोयी लोकेश को अपनी सेवा दे रहे है।

काया:- नहीं, सभी बचे हुए वीरदोयी तो यहां नहीं है लेकिन हां जिनको खून खराबा और पॉवर का नशा सर पर है वो यहां है। और उन वीरदोयी के यहां होने से बहुत से वीरदोयी मजबूरी में फस गए जो आम ज़िन्दगी जीने की ख्वाहिश रखते थे। लेकिन दृश्य को पता चल चुका है कि बचे हुए वीरदोयी यहां है तो क्या वो आ रहा है?

अपस्यु:- घबराओ मत वो यहां तुम्हारे लिए नहीं आया था। तुम समझ सकती हो की यदि वो यहां आया होगा तो किसके पीछे आया होगा और उसके कारन एक बार फिर से तुम लोग उसके नज़रों में आ गए।

काया:- हम्मम ! किस्मत देखो.. बहुत से वीरदोयी यहां मज़े के लिए काम करते है तो बहुत से मजबूरी में। मैं दृश्य को भी गलत कहकर क्या करूंगी, जब अपने ही लोग अपना अस्तित्व मिटाने पर लगे है।

अपस्यु:- लंच के बाद तुम मेरे कमरे में मिलो, वहां हम दोनों मिलकर उन लोगो को बचा सकते है जो मजबूरी में यहां फसे है।

काया:- संभव नहीं है। मै इस कोने में इसलिए तुमसे बात कर पा रही हूं, क्योंकि यहां उनका सर्विलेंस नहीं है। वैसे भी जिस तरह से तुम लोगों ने लोकेश को डरा रखा है कम से कम 10 नजरें तो तुम सब पर टिकी ही होगी।

अपस्यु:- लोकेश क्या वाकई में डरा हुआ है?

काया:- हां ये बात सभी वर्किंग स्टाफ और उसके ऑपरेशन हैंडलर को पता है, तभी तो तुम लोगों के आने से पहले, 40 वीरदोयी लड़ाके को कंट्रोल रूम से लेकर महल तक काम पर लगाया है, वरना पहले तो सर्विलेंस के जरिए ही पुरा नजर रखा जाता था।

अपस्यु:- कोई बात नहीं है उसे डरने दो। तुम बस लंच के बाद मेरे कॉल का इंतजार करना।

ऐमी:- फिलहाल एक काम कर दो हमारे लिए। ऐसी जगह जहां कोई सर्विलेंस ना हो और वहां तारों का पूरा जाल बिछा हो।

काया, वैभव की मां और दृश्य की एक अनचाही पार्टनर, जिसे सिर्फ़ इसलिए दृश्य के बच्चे की मां बनने पर मजबूर किया गया था ताकि दृश्य को यदि मारना परे तो तो आगे के एक्सपेरिमेंट, काया और अपस्यु से पैदा हुए बच्चे पर किया जाना था। लेकिन बच्चे को जन्म देते ही, एक मां कि ममता जाग गई और वो अपने बच्चे को किसी पागल साइंटिस्ट के हाथ में नहीं सौंपना चाहती थी जो उसके ऊपर अपना एक्सपेरिमेंट करे।

छिपते भागते उसे एक दिन अपस्यु के बारे में पता चला था और रात के अंधेरे में वो अपने बच्चे को अपस्यु को हाथ में सौंप अाई थी। उसके बाद वो आज मिली थी। हालांकि अपस्यु को पहले से पता था कि दृश्य के तूफान से बचे वीरदोयी एक जगह जमा होकर कहां काम कर रहे है।

काया के मिलने से अपस्यु का काफी समय बच गया, वरना तारों के जाल को अपने माइक्रो डिवाइस से ढूंढने में काफी वक़्त लग जाता। अपस्यु ने जैसा बताया काया ने ठीक वैसी एक जगह पर अपस्यु को ले गई। ऐमी के लिए ये जैकपॉट से कम नहीं था, क्योंकि सर्वर का मुख्य कनेक्शन वायर मिल चुकी थी। 5 मिनट में हैकिंग डिवाइस सेट हो चुका था। वापस दोनो अपने कार पार्किंग से होते हुए लौटे और कार से हर जरूरत का सामान निकालकर अपने बैग में पैक हो चुका था।
 
Update:-128

काया के मिलने से अपस्यु का काफी समय बच गया, वरना तारों के जाल को अपने माइक्रो डिवाइस से ढूंढने में काफी वक़्त लग जाता। अपस्यु ने जैसा बताया काया ने ठीक वैसी एक जगह पर अपस्यु को ले गई। ऐमी के लिए ये जैकपॉट से कम नहीं था, क्योंकि सर्वर का मुख्य कनेक्शन वायर मिल चुकी थी। 5 मिनट में हैकिंग डिवाइस सेट हो चुका था। वापस दोनो अपने कार पार्किंग से होते हुए लौटे और कार से हर जरूरत का सामान निकालकर अपने बैग में पैक हो चुका था।

काया साथ थी, और लोकेश का आदेश फिर बैग कौन चेक करता है। दोनो वहां से अलग अलग कमरे में गए। अगले 1 घंटे में बिना लोकेश के टेक्निकल टीम की जानकारी के बगैर सारे फायरबॉल को भेदकर, ऐमी उनके पूरे सिस्टम में घुस चुकी थी।

बस थोड़ी देर की मेहनत और सभी कमरों की काल्पनिक ऑडियो-वीडियो फुटेज चलना शुरू हो चुका था। जैसे ही ऐमी का काम खत्म हुआ, अपस्यु ने सबको तुरंत संदेश भेजकर बता दिया कि, कमरे कि कहां-कहां की वायर को काटना है ताकि उनका असली ऑडियो, लोकेश के कंट्रोल रूम तक नहीं पहुंचे। 2 मिनट बाद सबके वापस संदेश पहुंच गए… "काम हो गया।"..

लोकेश के सर्विलेंस को छलने के बाद अपस्यु ने नीचे रिसेप्शन पर कॉल लगाया… जैसे ही उधर से हेल्लो कि आवाज़ आयी, अपस्यु ने काया को लाइन पर बुलाया और अपने अरमान जाहिर करते हुए कहने लगा…. "तुम्हारे साथ घूमने के बाद ऐसा लगा कि अब तुम्हारे एक-एक कपड़े निकालकर, तुम्हारे हरे-भरे बदन पर भी घूम लूं, जल्दी से मेरे कमरे में आ जाओ।"…

काया, अपस्यु की बात सुनकर कॉल डिस्कनेक्ट कर दी और लोकेश को कॉल करके अपस्यु का इरादा बताने लगी। लोकेश के दिमाग में मेघा और अपस्यु की छवि पहले से ही साफ थी। लोकेश खुश होकर काया को उसके कमरे में जाने के लिए बोल दिया। लोकेश को समझ में आ चुका था कि क्या होगा अंदर, इसलिए वो ऑपरेटर अजय को लगातार कमरे कि सर्विलेंस करने और उसके जोश को नोटिस करने बोल दिया।

काया जैसे ही कमरे के अंदर पहुंची, अपस्यु ने झटके से दरवाजा बंद कर दिया। इधर ऐमी पोर्न वीडियो के ऑडियो-विजुअल में अपस्यु और काया को एडिट कर, उस कमरे को फ्रेम कर दी और प्ले होता छोड़ दी। ऐमी अपना काम पूरा करने के बाद अपस्यु को 20 मिनट का संदेश भेजी।

इधर काया शांत उसके बिस्तर पर बैठी यही सोच रही थी कि अपस्यु के बारे में वो क्या राय बनाए।…. "हमारे पास बस 20 मिनट है, अब मुझे उस घटना कि जानकारी चाहिए जिसमें एक लोकल लड़की के साथ ग्रुप सेक्स किया था।"..

काया हैरानी से उसे देखती… "तुम्हे पता भी है तुमने मुझे क्यों बुलाया है, इस वक़्त कम से कम 20 लोग हमे देख और सुन रहे होंगे।"..

अपस्यु:- वो तो अभी हमारे सेक्स कि शुरवाती सीन देख रहे होंगे। मन में कोई दुविधा मत पलो, बस तुमसे लंबी जानकारी चाहिए इसलिए ऐसे बहाने से बुलाया है। अब जो पूछा वो बता दो।

काया:- "यहां लोकल बहुत कम लड़कियां लाई जाती है। हां पर उस चकुबाज लड़की को नहीं भुल सकती। जब वो यहां आयी थी तब हंसती हुई आयी थी। लोकेश उसके लिए कोई महान शक्सियत था, जिसके पास वो खुद को खड़ी पाकड़, काफी फक्र महसूस कर रही थी। पहले उसे लोकेश ने नोचा था, फिर बारी बारी से कई लोगों ने।"

"लगभग 15 दिन वो यहां रही थी। पहले 3 दिन तो वो लोकेश की होकर रही थी उसके बाद लोकेश ने एक मिशन सफल होने की खुशी में 40 लड़कियों को बुलाया था उन्हीं के साथ उस लड़की को भी सबके पास भेजा दिया। किसी ने उसकी सुनी नहीं। बस दिन रात नोचते रहे। 40 लड़कियां जो आयी थी उनका काम ही था जिस्मफरोशी, जबकि उस लड़की का विरोध करना और रोना सबको ज्यादा आकर्षित करता था जैसे। सब पहले उसी को नोचते फिर कहीं और मुंह मारते। इस से पहले भी लोकल की 2 और लड़कियां लाई गई थी। एक ने यहां की जिल्लत से आत्महत्या कर ली और दूसरी को कोई बड़ा नेता अपने साथ ले गया।

अपस्यु:- फिर वो चाकूबाज लड़की निम्मी, इनके चंगुल से कैसे निकली ?

काया:- श्वांस बंद हो रही थी, नब्ज से खुन लगातार निकालते रहे और किसी ने रोका तक नहीं था। बल्कि उस कुत्ते भार्गव के एक्सपेरिमेंट वीरदोयी, उसके नब्ज से खून निकल रहा था और उसके साथ सेक्स चल रहा था। मत याद दिलाओ वो मंजर। उस मंजर को देखकर तो हैवान तक का कलेजा कांप जाए। उस लड़की निम्मी की लाश को बाकी लाश के साथ फेक आए थे, ऐसे निकली वो।

अपस्यु:- हम्मम ! तो ये कनेक्शन है।

काया:- कैसा कनेक्शन।

अपस्यु:- बुरे फंसे हो तुमलोग, इसलिए वो दृश्य इतना पगलाया है और लोकेश को हर कीमत पर साफ करना चाहता है। निम्मी को मारा समझकर इन लोगों ने जिस अंधेरे में उसे फेका होगा, वहां दृश्य को निम्मी मिली होगी। पहले तो उसे बचाया होगा, फिर उसकी कहानी जाना होगा।

काया:- हाहाहाहाहा… अपस्यु इसे कर्मा कहते है। दृश्य की बेरहमी तो मै देख चुकी हूं, बस अब तुम्हारी बेरहमी देखनी है। वो 40 वीरदोयी जो कंट्रोल रूम से लेकर महल तक फैले है, नोचने वाली पूरी यही टीम है और उनका बाप वो लोकेश। ऐसा मारना कि बस दिल खुश हो जाए…

अपस्यु:- केवल वही 40 लोग है या और भी है?

काया:- यहां केवल वीरदोयी थोड़े ना काम करते है। यहां डिपार्मेंट बने है। 2 डिपार्मेंट एक ऑपरेशन हैंडलर और दूसरा टेक्निकल टीम, इनमे काम करने वाले लगभग लोग, 100% जल्लाद, गंदी नली के कीड़े हैं, केवल 4 को छोड़कर। उसके अलावा जैसे तरबूज को देखकर तरबूज का रंग बदलता है, ठीक वैसे ही अलग-अलग डिपार्मेंट में भी कई ऐसे लोग है जिनके वजह से यहां के कई इनोसेंट स्टाफ की लड़कियां मुक्ति पाना चाहती है।

अपस्यु, लैपटॉप के स्टाफ लिस्ट खोलकर… "इनमें से दूसरे डिपार्टमेंट के उन लोगों को चिन्हित करो जिनका मरना बेहद जरूरी है। और हां वो जो 4 इनोसेंट है जिसके बारे में कहीं थी, उन्हें भी दिखा देना। वैसे यहां के कितने लोग काम करते हैं?

काया:- लगभग 1200 लोग का स्टाफ है। 40 लोगों की सर्विलेंस टीम है और 12 सॉफ्टवेर इंजिनियर काम करते है। इनमे से 1 को छोड़कर बाकी कोई भी जिंदा रहने के काबिल नहीं। और हां इसकी टीम का हेड है वो अजय, अगर हो सके तो उसे मारने का मौका मुझे दे देना, तुम्हारी एहसानमंद रहूंगी।

अपस्यु:- एक काम करो यहां स्क्रीन को देखकर मुझे सभी लोगों की लिस्ट दे दो जिनकी आत्मा मर चुकी है। तुम्हे जितना वक़्त चाहिए उतना वक़्त लो, और आराम से अलग करो…

काया को फ्री छोड़कर अपस्यु ने ऐमी को कॉल लगा दिया। उसे दूसरा वीडियो अपलोड करने के लिए कह दिया। साथ में यह भी कहा कि थोड़ा स्लो स्टार्ट वाला वीडियो प्ले करे, जबतक वो काम खत्म होने से 5 मिनट पहले इंफॉर्मेशन भेज देगा।

काया को ज्यादा वक़्त नहीं लगा। तकरीबन आधे घंटे में उसने संभावित लोगों की तस्वीर को टिक कर दिया। अपना काम खत्म करने के बाद काया कहने लगी… "कोई अगर छूट जाएगा और उसकी करतूत बाहर आ जाएगी, उसके लिए दृश्य या तुम्हे परेशान होने की जरूरत नहीं, उन्हें हम देख लेंगे।"

काम खत्म हो चुका था, अपस्यु ने ऐमी को को संदेश भेजा और ठीक 5 मिनट बाद ऐमी… "3 की गिनती से उसे बाहर जाने कहो।".. अपस्यु ने काया को इशारा किया। काया अपने बाल और हालात को पहले ही बिगाड़ चुकी थी, अपस्यु की 3 की गिनती मिलते ही वो बाहर निकल गई।

एक पल के लिए वहां बैठे ऑपरेटर अजय को शक हुआ कि अंदर से बाहर निकलते वक़्त काया के हुलिया में कुछ तो फर्क था। उसने वीडियो रिवाइंड किया लेकिन ऐमी भी उसकी गुरु थी, जैसे ही काया बाहर हुई, उसकी करंट इमेज को तुरंत दरवाजे के पीछे वाली इमेज से रिप्लेस कर चुकी थी।

काया के रूम से निकलते ही, अपस्यु भी अपना कमरा छोड़कर ऐमी के कमरे में आ गया। ऐमी अपने लैपटॉप से, हर चप्पे-चप्पे को देख रही थी। ऐमी तेजी से अपना काम करती, अपस्यु को बीच-बीच में कुछ कहती और अपस्यु भी उसके आदेश अनुसार काम को आरव, स्वास्तिका, कुंजल और खुद में बांट लेता।

तकरीबन 2 घंटे तक बैठकर सबने मिलकर काम को खत्म कर लिया। जैसे ही काम खत्म हुआ अपस्यु ने पूरी डिटेल दृश्य से साझा कर दिया। साथ में अपस्यु ने एक छोटा सा लिंक भी साझा किया, जिसके जरिए दृश्य का टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट आरूब आसानी से सर्वर में घुस जाए।

शाम के 4 बजे तक सारा काम खत्म कर चुका था। काम समाप्त करने के बाद ऐमी और अपस्यु दोनो हॉल में पहुंच गए। अपस्यु को देखकर ऐमी मुस्कुराती हुई कहने लगी… "मै कुछ पीना चाहती हूं, क्या तुम मेरा साथ दोगे।"

अपस्यु:- तुम्हारा साथ नहीं दे पाया तो फिर किसका साथ दूंगा स्वीटी, आज जो तुम पीना चाहो वो तुम पियो, और तुम्हारे साथ निभाने के लिए मै अपना प्यारा कॉकटेल पियूंगा।

ऐमी:- मिस्टर अपस्यु रघुवंशी..

अपस्यु:- येस मैम, आदेश करें।

ऐमी:- मेरे साथ देने का मतलब है कि मै जो पियूंगी वो तुम्हे पीना पड़ेगा।

अपस्यु:- तुम अब वो जेम्स बोंड वाली वेस्पर मार्टिनी कॉकटेल लोगी और वो मुझे पसंद नहीं।

ऐमी:- हुंह, तुम्हरे उस बकवास एटॉमिक शैम्पेन कॉकटेल से तो कई गुना बेहतर है।

अपस्यु:- हां तो तुम मार्टिनी पियो मै एटॉमिक शैम्पेन कॉकटेल पीता हूं, और एक दूसरे का साथ देंगे।

ऐमी:- ओह हो हो हो! अभी तो 2 मिनट पहले कह रहे थे कि मेरा साथ नहीं दोगे तो किसका दोगे। अब तुम जरा चुप बैठो। भईया यहां आना..

ऐमी ने एक स्टाफ को आवाज़ लगाई और वो तुरंत ऐमी के पास आकर खड़ा हो गया। ऐमी… "एक काम करो, हमारे लिए 2 मार्टिनी ले आओ।"

स्टाफ:- जी मैम, और कुछ..

ऐमी:- और कुछ हल्का फुल्का स्नैक्स ले आना।

स्टाफ:- सर आपके लिए कुछ लेकर आऊं..

अपस्यु:- कुछ लेकर मत आ, मैडम को ही बार काउंटर पर ले जा।

"क्या हुआ भाई, आपका मुंह क्यों उतरा हुआ है।"… जबतक अपस्यु बार काउंटर पर ले जाने की बात कर रहा था, तबतक कुंजल उसके पास आकर बैठती हुई, पूछने लगी।

ऐमी:- सुनो एक काम करो आप तो जल्दी से 5 मार्टिनी और एक बेस्ट माकटेल भिजवा दो।

कुंजल:- भाभी, भईया को क्या हुआ है, ये ऐसे इनका मुंह क्यों लटका है।

आरव:- ऐमी ने ड्रिंक ऑर्डर किया है ना..

कुंजल:- हां भाई..

आरव:- हां तो इसका मुंह लटकाना ही था। अभी कहेगा नहीं-नहीं मुझे मार्टिनी पसंद नहीं और ना-ना बोलकर 10 मार्टिनी गटक जाएगा।

स्वास्तिका:- तुम लोग बड़े एहसान फरमोश निकले, कम से कम बता दिया होता की सब यहां बैठने वाले हो।

ऐमी, पार्थ के ओर इशारा करती…. "इस गरीब को क्या हो गया, कल से देख रही हूं बड़ा गुमसुम हैं।"

अपस्यु:- मैंने इश्क़ दा लगाया रोग, मेनू बचने दी नय्यो उम्मीद।

अपस्यु का तंज सुनकर सब लोग हसने लगे। इतने में सबकी ड्रिंक भी पहुंच गई। सभी लोग टोस्ट करते हुए अपना जाम उठा लिए। फिर वही हुआ जैसा आरव ने कहा था। सब लोग 2 ड्रिंक के बाद रुक गए और अपस्यु बड़े आराम से 10 ड्रिंक लेने के बाद वहां से उठा।

लोकेश को तो लगातार एक के बाद एक खुशखबरी मिलती जा रही थी। पहले सबाब फिर शराब। विकृत मानसिकता वाले इंसान के सभी लक्षण अपस्यु में नजर आने लगे थे। अपस्यु में खुद के जैसे गुण देखकर लोकेश जोर से हंसते हुए कहने लगा….

"यार अजय हटा ले इसपर से सर्विलेंस, बच्चा अबतक मां की छत्रछाया में था इसलिए अभी तक अच्छा और बुरे काम के बीच फसा हुआ है। मै तो इसके अंदर पुरा हैवान देख रहा हूं, बस सही राह की जरूरत है।"

अजय, भी हंसते हुए… सर इसकी क्षमता कल परख चुके है और आदत आज। ये तो हम में से एक है। ऊपर से उसके लाजवाब कॉन्टैक्ट, कौन इसे नहीं जानता, दिल्ली से लेकर मुंबई तक। लेकिन थोड़ा मेंटल है क्या?

लोकेश:- क्यों क्या हुआ अजय..

अजय:- नहीं हमारे बीच 3 हॉट आइटम ले कर चला आया है। इसे खबर नहीं की इन तीनों का यहां होना कितनों के दिल में आग लगा सकता है। बॉस रात को कुछ गड़बड़ी हो जाए तो फिर मुझे मत कहना।

लोकेश:- यात्री अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करे। वैसे भी जब ये अपस्यु पार्टी के बाद अपने कमरे में एक साथ कई अप्सराओं के साथ जन्नत की सैर में होगा, तो इसे घंटा कुछ फर्क पड़ेगा कि पास वाले कमरे में वही खेल चल रहा है।

अजय:- सो तो है बॉस। चलो इसपर से सर्विलेंस हटता हूं। इनफैक्ट मै तो चला दोस्तों के बीच। वैसे मेरे लिए अप्सरा का इंतजाम है कि नहीं।

लोकेश:- क्यों आज रात तू काया के साथ नहीं होगा क्या..

अजय:- काया की याद ना दिलाओ बॉस। जिस तरह से उस अपस्यु ने रौंदा है काया को, उसे याद करके मै उनके साथ आयी लड़कियों के साथ कुछ कर ना दू, ये डर है मुझे…
 
Update:-129

लोकेश:- पुरा सिस्टम तेरे हाथ में है, रात के अंधेरे में किसे पता कौन कहां है, बस कांड प्रकाश में आना चाहिए नाम नहीं। बाकी तू समझदार है।

अजय:- येस बॉस। जैसा आप कहें…

दृश्य का टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट अारुब को लिंक मिलते ही, वो भी तुरंत सर्वर से कनेक्ट हो गया। दृश्य अपनी पूरी टीम के साथ कंट्रोल रूम की सर्विलेंस ले ही रहा था, कि अजय और लोकेश के बीच की चल रही बातों का पता चला। उसके आखों में तो जैसे खून उतर आया हो…. "आज से पहले किसी को मारने की तलब इतनी तेज नहीं थी। आरूब पूछ जारा तेरा बॉस बक्शी इंटरेस्टेड है कि नहीं अपने साथ काम करने के लिए।"

अारूब:- भाई बक्शी सर को लाइन पर ले रहा हूं….

बक्शी:- क्या हुआ चैम्प, कोई समस्या है क्या?

दृश्य:- देखो सर मेरा भेजा फ्राय मत करो, कितने लोग भेज रहे हो जल्दी बताओगे, ताकि मै यहां प्लान करूं।

बक्शी:- यार तेरा क्या है तू उन वीरदोयी से तो निपट लेगा, लेकिन मैं उन वीरदोयी से निपटने के लिए कितने लोगों को भेजूं, वो समझ में नहीं आ रहा।

अारूब:- सर आप टीम मत भेजो, अपने पास कितने स्नाइपर है वो बताओ।

बक्शी:- डिपार्टमेंट में तो इस वक़्त 4 है।

अारूब:- क्या सर, कल इस लोकेश को 3 एरिया में टारगेट को एलिमिनेट करना था तो 6 स्निपर भेजे थे और आप के पास 4 है।

बक्शी:- प्लान क्या है वो बताओ, फिर मै सोचता हूं।

अारूब:- टोटल 120 वीरदोयी है। 10 के समूह में ये 8 अलग-अलग ठिकाने पर है। हमने इनके बीच का संपर्क प्रणाली तो हैक कार लिया है, लेकिन इनका अलार्म सिस्टम मैनुअल है, साथ में वाकी भी है। जिस जगह को भी हम साफ करेंगे वो एक साथ साफ करना होगा।

बक्शी:- हम्मम ! मतलब 10 स्निपर चाहिए वही ना। ठीक है मै होम मिनिस्टर से स्पेशल परमिशन लेकर अलग-अलग डिपार्टमेंट से अरेंज करता हूं। वैसे ये 80 लोग है, और बचे 40 लोग।

अारूब:- उन 40 का जिम्मा अपने भाई और उसके भाई की माथा पची है, क्योंकि वो बचे 40, कंट्रोल रूम से लेकर वहां के महल तक फैले है जिसे सामने से खत्म किया जाना है।

बक्शी:- सामने से खत्म करोगे और वो कहेगा आओ और मुझे मारकर निकल जाओ। क्या आर्म्स नहीं होंगे उनके पास।

अारूब:- कंट्रोल रूम और महल के आसपास किसी को भी हथियार रखने की अनुमति नहीं है। इमरजेंसी के लिए ये लोग हथियार अम्मुनेशन सेक्शन से लेंगे, जिसे हम लॉक कर चुके होंगे।

बक्शी:- ठीक है मै 10 स्नाइपर भेजता हूं, और साथ में 20 कचरा साफ करने वालों को। याद रहे कुछ भी करके इस लोकेश का चेप्टर एंड होना चाहिए, और इतने बड़े ऑपरेशन को हमने अंजाम क्यों दिया है उसकी ठोस वजह मुझे कल तक अपने टेबल पर चाहिए होगी। कमांडिंग ऑफिसर तुम ही होगे अारूब, इसलिए हर एक कि जिम्मेदारी तुम्हारी होगी।

दृश्य:- सर कचरा साफ करने के लिए 40 तेज ऑफिसर चाहिए। 20 मत भेजना।

बक्शी:- ठीक है हो जाएगा। 1 घंटे के अंदर पूरी टीम तुमसे संपर्क करेगी।

बक्शी ने जैसे ही कॉल डिस्कनेक्ट किया, दृश्य… "आदिल अपनी टीम स्टेटस बताओ।"

आदिल:- भाई 10 ट्रेंड फाइटर है और 10 स्नाइपर।

दृश्य:- आदिल, अप्पू तुम्हे अब लीड करेगा। अप्पू तेरे पास अब 20 स्निपर और 50 लोग है। काम हो जाएगा।

अारूब:- 20 स्नाइपर का मतलब है कब मौत उन्हें अपने सिकांजे में घेर लिया उन्हें पता तक नहीं चलेगा। काम खत्म करके संदेश भेजता हूं भाई।

पूरी तैयारी हो जाने के बाद दृश्य अपने साथ निम्मी और अश्क को लेकर चल दिया। दृश्य अपने चलने के साथ ही अपस्यु को सूचित कर दिया। सुचना मिलते ही अपस्यु ने लोकेश को कॉल लगाया…. "जी अपस्यु सर कहिए"

अपस्यु:- मै प्रताप ग्रुप के मालिक साहिल प्रताप को लेने जा रहा हूं। अपने सीमा को खुलवाकर रखो।

प्रताप ग्रुप और साहिल प्रताप का नाम बहुत बड़े उद्योगपति में आता था, ऊपर से प्रताप फैमिली राजस्थान की बहुत रेपुटेड परिवार था। लोकेश तो कनेक्शन देखकर ही चकरा चुका था। हालांकि दृश्य का नाम सुनकर तो लोकेश के वीरदोयी भी चक्कर खा जाते, लेकिन फिलहाल अभी तो दृश्य को छिपाकर रखना था।

शाम के 6.30 बजे तक दृश्य, अश्क और निम्मी के साथ महल में था। कैप ने नीचे अपना चेहरा छिपाए दृश्य सीधा अपस्यु के कमरे में पहुंचा।… "क्या भाभी, लुकिंग हॉटी, कहां बिजली गिराने आयी है।".. कमरे में पहुंचते ही अपस्यु ने अश्क से कहा।

अश्क:- दृश्य, बहुत बदतमीज है ये तुम्हारा भाई।

दृश्य:- क्या ही कर सकते है, एक तो भाई है ऊपर से डेविल ग्रुप का मुखिया, अब इससे पंगा कौन लेगा।

अश्क:- आज जारा मै व्यस्त हूं वरना इसे मै बताती…

"क्या भाभी… उमाम्मम्मह … बहुत ही गजब ढा रही हो"… आरव भी कमरे में आते कहा.. अब अश्क वो भी क्या रिएक्ट करे। पहले अपस्यु अब आरव ने छेड़ दिया। अश्क आरव के साथ आए सभी लोगो को एक बार देखी और कहने लगी…

"हीहीहीही… ये दोनो भाई पागल है। लेकिन जरा देखूं तो ये साथ ने कौन आया है इनके साथ.. ये है मेरी नंनद कुंजल, और ये दूसरी है स्वास्तिका… एक जिसे मै नहीं पहचान पा रही, ये मुंह लटकाए कौन खड़ा है।"..

अपस्यु, अश्क के कान में निम्मी और पार्थ की पूरी कहानी संक्षिप्त में समझाकर हटा। अश्क निम्मी और पार्थ के देखकर एक बार मुस्कुराई और अपस्यु के कान में वो भी धीमे से कहने लगी… "इनका जोड़ा लगाना के लिए हम सब मिलकर कोशिश करेंगे।".. पार्थ के लिए खुश होकर अपस्यु, अश्क के गाल को चूमते हुए… "लव यू भाभी" कहते पीछे हटा।

दृश्य:- सुनो अश्क, तुम ये अपस्यु के आस पास ना रहा करो। ये तो तुमसे मिलते ही तुम्हे चूमने लग जाता है। ..

दृश्य अभी अपनी बात समाप्त ही किया था, कि इतने ने दरवाजे से दो खूबसूरत कन्या अंदर आयी, एक ने तो कुछ नहीं किया लेकिन दूसरी ने खींच कर एक तमाचा जड़ दिया दृश्य को।

जैसे ही दृश्य को थप्पड़ पड़ा, वैसे ही सभी लोग एक्शन में आ गए, सिवाय अपस्यु और ऐमी के। उन दोनों ने काया को अपने बीच में लिया और गुस्साए लोग को किनारे होकर शांत खड़ा रहने के लिए कहने लगा… तभी दृश्य, गुस्से में आखें लाल किए… "तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे मारने की।"… तभी दृश्य के दूसरे गाल पर काया ने एक और तमाचा चिपका दिया।

दृश्य गुस्से में खड़ा काया को घूरता रहा… "दोबारा अगर मेरे बच्चे वैभव को यदि अपस्यु और ऐमी के पास से ले जाने की कोशिश भी किए, तो मैं तुम्हे जान से मार दूंगी। वो सिर्फ मेरा और सिर्फ मेरा बच्चा है, कभी अपने बाप होने की धौंस उसपर मत दिखाना।"..

अभी जो सबके गुस्से की भावना थी, वो एकदम से आश्चर्य के रूप में बदल गया, और सबसे ज्यादा इस वक़्त गुस्सा तो अश्क को आ रहा था, वो भी दृश्य पर…. अश्क दृश्य को आखें गुर्राती…. "वो तुम्हारे बच्चे की मां बन गई और तुम्हे याद भी नहीं।"…

दृश्य:- नहीं क्यूटी मुझे तो पुरा याद है…

अश्क:- ठीक है नाम बताओ इसका..

दृश्य:- हाय निल कैसी हो, कभी सोचा ना था तुमसे दोबारा मुलाकात होगी…

अश्क, दृश्य पर झपटती हुई…. "इसकी हिम्मत तो देखो, मेरे ही सामने कैसे हंसकर बात कर रहे। कुछ दो मेरे हाथ में इन्हे मारने के लिए।"

ऐमी:- क्या दीदी आप भी पुरानी बातों को कुरेदने लगी। काया प्लीज क्या तुम यहां से जाओगी।

काया:- हां मेरा काम तो हो गया। बस नील अपने बच्चे को देखने के लिए व्याकुल थी, तो मै यहां ले आयी।

ऐमी, अश्क से…. "दीदी वो बस अपने बच्चे को देखने की चाहत में आयी है। आप प्लीज शांत हो जाओ।"

अपने सामने अपनी 2 सौतन को देखकर भला अश्क क्यों शांत हो। गुस्से में वो कमरे के बाहर चली गई। इधर दृश्य काया से माफी मांगते हुए कहने लगा…

"हम दोनों ही एक लंबे साजिश में फसे थे। तुम्हे तो सच्चाई पता भी थी, लेकिन मुझे और अश्क को तो कुछ और ही सच्चाई से अवगत कराया गया था। तुम यकीन मानो, यदि मुझे पता होता की बच्चा उन्हें एक्सपरिमेंट के लिए चाहिए तो तुम्हे ये दिन ना देखने परते। मेरे नाक के नीचे था वो कमीना डॉक्टर भार्गव।खैर उस दौड़ में बहुत सी गलितियां भी हुई, और मै हमेशा अपने भाई अपस्यु का शुक्रगुजार रहूंगा, क्योंकि वो मेरी हर गलत को चुपचाप सही करते चला गया।

नील:- ओय गलत तरीके से तुमने और काया ने मिलकर बच्चे पैदा किए थे, इसमें मुझे मत समिल करो। मैंने जो भी किया वो अपनी इक्छा से और बिल्कुल होश में। हां बस उनकी क्रूरता और नीयत को देखकर कभी अपने बच्चे को उनके बीच पालते नहीं देख सकती थी, इसलिए तुम्हे दे दी। पहले जाकर अपनी नकचढ़ी पत्नी को संभालो दृश्य। खुद ही 2 बच्चे देने की शर्त पर हामी भरी थी, लेकिन आज भी वो दोष तुम्हे ही दे रही।

दृश्य:- जब रिश्ता गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड का होता है, तब तो किसी लड़के या लड़की को बर्दाश्त ही नहीं होता कोई भी दूसरा संबंध, फिर तो वो मेरी पत्नी थी। फोन लाइन के उस ओर से उसने मुझसे कहा था सब करने, वो भी बिना ये जताए की उसके दिल पर क्या बीती होगी। उसके हर नखरे मुझे उम्र भर मजूर है। वैसे भी उसे मनाने का मज़ा ही कुछ और है।

नील हंसती हुई…. "हां मै ये बात जानती हूं। वैसे 6.30 बज रहे है, उम्मीद है तुमलोग यहां घूमने तो नहीं ही आए होगे।

अपस्यु:- जी हम बिल्कुल शेड्यूल से है। स्वास्तिका तुम दृश्य भईया निम्मी का जारा चेहरा ऐसा मस्त खिला सा बनाओ की कोई पहचान ना पाए। एक टफ बिजनेसमैन लुक और उसकी कमाल कि पीए। ऐमी तुम भाभी को के साथ बैठकर उन्हें मोबाइल ऑपरेटिंग कमांड सिखाओ, ताकि रियल टाइम में वो हमे कंप्लीट टेक्निकल सपोर्ट दे सके। आरव कुंजल तैयार होकर आधे घंटे में सब इसी कमरे में इकट्ठा हो जाओ.. 8 बजे से एक्शन शुरू होगा और हम लाइव कवरेज देखेंगे। सब जल्दी,जल्दी.. और हां काया तुम भी हमारे साथ पार्टी में चलोगी, आज तुम्हारा और अजय का भी हिसाब किताब सैटल कर दूंगा। चलो चलो सब निकलो…

सबके निकलते ही अपस्यु ने नीचे रिसेप्शन पर कॉल लगाया, छोटे से बार का सारा सामान उन्हें ऑर्डर करके जल्दी से रूम में भिजवाने के लिए बोल दिया। इधर हर किसी के कमरे में अपस्यु ने अपना एक ड्रिंक पहले से भिजवा चुका था। सेल रिप्लेसमेंट थेरेपी वाली वो माइक्रो लिक्वड के साथ न्यूरो एनरज़ाइजर.. ऐसा कॉम्बो जो खुद से कहीं ज्यादा शरारिक क्षमतावान दुश्मनों से लडने के लिए तैयार किया गया था।

बक्शी से लेकर अपस्यु तक सबको पता था कि, वीरदोयी ऐसे लोगों का समूह है जो एक साइंटिस्ट के एक्सपेरिमेंट का नतीजा है। लगभग 20 गुना तक उनकी शारीरिक क्षमता इस कदर बढ़ाई गई थी, जबतक एक सामान्य क्षमता वाले लोग रिस्पॉन्ड करते, ये वीरदोयी अपना काम खत्म करके, दूसरे पर ध्यान दे चुके होते।

न्यूरो एनरज़ाइजर के बारे में भी अपस्यु को गुरु निशी से ही पता चला था। एक बेहद दुर्लभ जड़ी-बूटी जो गुरु निशी अपने शिष्यों पर अत्यंत ठंड में इस्तमाल करते थे। इस जड़ी बूटी के परिणाम और दुष्परिणाम दोनो ही गुरु निशी अपस्यु से चर्चा करते थे। हालाकि दुष्परिणाम सामान्य से थे, लेकिन इंसानी शरीर में इस जड़ी-बूटी के लगातार सेवन से इसके लत लगना लाजमी था। ठीक कोकीन और अफीम की तरह, लेकिन ये जड़ी बूटी कोकीन और अफीम जैसी बिल्कुल नशीली नहीं थी।

न्यूरो एनरज़ाइजर के इस्तमाल और परिमाण की आकलन करे तो, इस जड़ी बूटी के कारन शारीरिक क्षमता कई गुना तक बढ़ाई जा सकती थी, वो भी कोकीन और चरस के मुकाबले बिल्कुल निम्न दुष्परिणाम के। इस जड़ी-बूटी का लगातार इस्तमाल इसलिए भी नहीं किया जा सकता था क्योंकि यह अति दुर्लभ जड़ीबूटियां में से एक थी, जिसके सेवान की लत अपस्यु को काफी दुख दे जाती।

दृश्य को छोड़कर हर किसी ने उसका सेवन किया। आराम से मस्त होकर तैयार हुए। इधर ऐमी अश्क के पास बैठकर कुछ टेक्निकल डिस्कसन कर रही थी, कुछ आसान से कमांड बताने के बाद वो अश्क के साथ बैठी…. "क्या हुआ दीदी, इतना भी किस सोच में डूब गई।"..

अश्क:- वो एक दौर था जो गुजर गया। गलतियां हम दोनों से हुई, लेकिन आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ होगा की दृश्य ने एक ही बात के लिए 4 बार नाराजगी जताई हो, और देख ना मैंने दृश्य से यहां भी झगड़ा कर लिया।
 
Update:-130

अश्क:- वो एक दौर था जो गुजर गया। गलतियां हम दोनों से हुई, लेकिन आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ होगा की दृश्य ने एक ही बात के लिए 4 बार नाराजगी जताई हो, और देख ना मैंने दृश्य से यहां भी झगड़ा कर लिया।

"कोई बात नहीं है दीदी, अब चलो भी तैयार हो जाओ। पहले बारातियों का स्वागत देखना है फिर बाद में हमे भी तो धमाल मचाना है।".. ऐमी अपने कपड़े बदलती हुई बात करने लगी।

अश्क:- आह ! मै तो आलसी हूं, आज तेरा एक्शन देखूंगी बस..

ऐमी:- क्यों अपने लव का एक्शन देखते-देखते बोर हो गई क्या।

अश्क:- कूल, ये फैंसी लिंगरी की शॉपिंग मुझे भी करवाएगी क्या?

ऐमी:- आप नहीं खरीदती क्या?

अश्क:- यार सोचकर जाती तो हूं कि खरीदना है, लेकिन जब वो दिखता है तो बस इत्तू सा छोटा कपड़ा लगता है कुछ समझ में ही नहीं आता।

ऐमी, स्ट्रेचेबल पेंसिल जीन्स डालती… "ठीक है जब कभी भी दिल्ली आना तो साथ चलेंगे शॉपिंग पर। अब उठो भी, वहां कहां आप बिस्तर पर जमी है। आप पहले किसी के साथ तैयार ना हुई क्या, जो ऐसे बैठकर मुझे तैयार होते देख रही है।"..

अश्क:- नाह मुझे देखना है कि जब तुम जैसी ट्रेंड फाइटर तैयार होती है तो अपने कपड़ों के साथ क्या-क्या कैरी करती है।

ऐमी:- दीदी ये फिर कभी और किसी मौके पर देखने को मिलेगा, क्योंकि आज का थीम है, उन्हीं के चराग से उन्ही का आशियाना जलाना है।

अश्क:- ओह ! चल ठीक है फिर मै भी तैयार हो लू..

इधर स्वास्तिका ने अपना बैग खोलकर बिस्तर पर सारा समान बिखेर दी, बड़ी तेजी से वो दृश्य के चेहरे पर हाथ चलाती गई, और अंत में एक गाढ़े हरे रंग की कॉन्टैक्ट लेंस दृश्य के आखों में लगाने के बाद… "ये हो गया आप का मेकअप सर"..

दृश्य:- ये सर क्या है, तू मुझे भाई नहीं मानती क्या?

स्वास्तिका:- मै रिश्ते मानने में नहीं, रिश्ते निभाने में विश्वास रखती हूं।

दृश्य:- प्वाइंट तो बी नोटेड, और हां मेरे लिए रिश्ता मुंहबोली नहीं, बल्कि दिल से जुड़ा होता है, इसलिए ज्यादा बातें नहीं, और मुझे अच्छा लगेगा जब तुम हक दिखाओगी।

स्वास्तिका हंसती हुई…. "जी भईया, वैसे कैसा लगा मेकअप।"

दृश्य:- निम्मी जारा देखकर बताओ की मै पहचाना जाऊंगा या नहीं।

निम्मी:- भईया आपके करीबी को छोड़कर कोई आपको पहचान नहीं पाएगा। और कितना भी करीबी क्यों ना हो, जबतक ध्यान से ना देखे पता, नहीं चलने वाला है।

दृश्य, स्वास्तिका के दोनो गाल खिंचते…. "थैंक्यू सो मच, क्या मेरे कुछ लोगों ये कला सीखा सकती हो।"

स्वास्तिका:- बिल्कुल भाई, दिल्ली में ही रहूंगी और अपना हॉस्पिटल खोलने वाली हूं, साथ में मेरा एक सपना है कि बहुत बरा रिसर्च सेंटर भी होता, लेकिन आपकी कहानी जानने के बाद वो विचार मैंने छोड़ दिया। सो एक हॉस्पिटल और उसमे मेरे अपने छोटे-छोटे क्यूट से रिसर्च। आप भी उनको भेज देना जिन्हे ये कला सीखनी हो।

दृश्य:- ऐसा नहीं है कि रिसर्च कोई भी बुरा होता है। हां लेकिन कुछ विकृत मानसिकता के महत्वकांक्षी लोग, उस प्रयोग को अभिशाप बना देते है, लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं कि अच्छे काम छोड़ दिए जाए। जब ऐमी का टेक्निकल सपोर्ट मिलेगा, तब तुम्हारे एक्सपेरिमेंट को कोई चुरा नहीं सकता, इसलिए अपना आइडिया ड्रॉप मत करो। और हां इसी बहाने मुझे भी किसी के लिए कुछ करने का मौका मिल जाएगा…

स्वास्तिका:- किसके लिए भाई?

दृश्य:- वैदेही है…. जिसने अपने एक्सपेरिमेंट से मेरे अंदर जीवन की नई परिभाषा डाली, डॉक्टर शांतनु की बेटी। वो भी अपने पिता की तरह एक काबिल खोजकर्ता है, लेकिन उसके पिता की दुर्गति जब मुझे याद आती है, तो मेरा रूह कांप जाता है। तुम्हारे हॉस्पिटल में वो सबके बीच और तुम्हारे टीम के साथ अपना प्रयोग जारी रख सकती है। क्या तुम मेरी मदद करोगी ?

स्वास्तिका:- इसपर आराम से बैठकर बात करेंगे भाई, अभी आप जाओ मुझे निम्मी को भी तैयार करना है, आपके पीए की तरह।

दृश्य जैसे ही बाहर निकला, स्वास्तिका निम्मी का मेकअप करती… "निम्मी, एक बात कहूं।"

निम्मी:- मै जानती हूं वो बात, मैंने अपस्यु को दी है सारी बातें। इसलिए प्लीज पार्थ को लेकर कोई बात नहीं करो।

स्वास्तिका:- हम्मम ! ठीक है नहीं करती, मै अपने बारे में तो कर सकती हूं ना।

निम्मी:- हां क्यों नहीं।

स्वास्तिका:- मैंने 19 साल की उम्र में अपनी वर्जिनिटी लूज की थी। 2 टाइमपास बॉयफ्रेंड रहे है और अपनी मर्जी अनुसार सेक्स को एन्जॉय किया। फिर एक दिन दीपेश से मुलाकात हुई, दिल में प्यार वाली फीलिंग जागी, उसके बाद मेरी सारी खुशियां उससे जुड़ गई। एक बात बड़े ईमानदारी से कहूंगी, आज तक कभी मेरे दिल मे उसके पिछले अफेयर जानने का ख्याल नहीं आया और ना ही उसने कभी अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से मेरे अफेयर्स के बारे में जानने की कोशिश किया।

निम्मी:- आप लोग अलग सोसायटी में पले बढ़े हो और मैं अलग।

स्वास्तिका:- "यही तो मै भी समझाना चाहती हूं। उसने भी कई सालों से अलग सोसायटी को देखा है, आज बस तुम्हारा होकर रहना चाहता है। मै तुम्हे फोर्स नहीं कर रही लेकिन बस इतना समझना चाहती हूं कि जैसे मेरे या दीपेश के दिल में कभी अतीत को लेकर कोई ख्याल नहीं आया, ठीक वैसे ही कभी पार्थ तुम्हारे अतीत को लेकर अपने मन में कोई ख्याल नहीं लाएगा, और विश्वास मानो वो रिश्ते निभाने में वो बेईमान नहीं।

"तुम दोनो एक हो जाओ उसका एक स्वार्थ तो यह है कि उस घुमक्कड़ को एक स्थाई ठिकाना मिल जाए, क्योंकि मै जानती हु, यहां का काम खत्म होते ही वो फिर हमारे लिए अजनबी होने वाला है। एक तो उसे बांधे रखने की ख्वाहिश है दूसरा जब से तुम्हरे बारे में जाना है, तबसे एक टीस ही उठती है। किसी और कि गलती के लिए तुमने हर खुशियों से मुंह मोड़ लिया।"

निम्मी:- स्वास्तिका मेरे बदन को यहां नहीं नोचा गया था, बल्कि मेरे आत्मा को नोचकर निकाल दिया गया था। बस दिल की आग ही है जो मुझे जीने की मकसद दी है, उसके बाद फिर मेरा कोई अस्तित्व नहीं।

स्वास्तिका:- सिर्फ तुम्हारा ही अतीत कलेजा चीरने वाला नहीं है, उसके हंसते चेहरे के पीछे भी कई दर्द छिपे है और जो मैंने बताया ना की कल से वो हमारे लिए अजनबी हो जाएगा, वो भी उसी ओर इशारा है कि उसने भी अपने जीने का मकसद नहीं बनाया और शायद वो भी तुम्हारे तरह ही सोचता है। एक छोटी सी उम्मीद कि किरण जागी है, बस दुआ करूंगी तुम दोनो को अपना अस्तित्व एक दूसरे में मिल जाए। हो गया तुम्हारा मेकअप भी। जारा देखकर बताओ कैसा है?

निम्मी:- बहुत शानदार है। चलती हूं अब।

इधर अपस्यु अपने कमरे में सारा इंतजाम करवा चुका था। बड़ा सा स्क्रीन तो पहले से उस कमरे में लगा हुआ था और अब वो सिस्टम से भी कनेक्ट हो चुका था। सबसे पहले पहुंची कुंजल, और वो अपस्यु के पास जाकर उसके बनाए छोटे से बार काउंटर पर बैठ गई।

कुंजल:- पियक्कड़ कहीं के, पुरा बार ही खोल लिया है अपने लिए तो। अब तो लगता है आपसे बात करना छोड़ दू उसी शर्त पर ये पीने की लत भी छोड़ दोगे।

अपस्यु:- सिर्फ ऐमी को पता है ये बात, आज तुम्हे बता रहा हूं, एक्सट्रीम ठंड और पहाड़ पर सीधी चढ़ाई लगातार चढ़ने के कारण, मेरे बॉडी में एक्स्ट्रा बॉडी फ्लूइड विकसित हुआ था। हर किसी के शरीर में यह थोड़े मात्रा में पहले से पाया जाता है, लेकिन मेरे अंदर ये काफी मात्रा में उत्पन होता है।

"जब कड़ाके के ठंड में भी मै गर्मियों के आम दिन की तरह कपड़े पहनकर अपना काम पूरे ध्यान से करता, बिना कापें, तब गुरुजी का ध्यान मुझपार गया। 4 दिन की यात्रा के बाद गुरुजी मुझे एक आऊर्वेदाचर्या के पास लेकर गए और मेरे बारे में उन्हें अवगत करवाया।"

"उन्होंने पुरा निरक्षण के बाद गुरु निशी से से कहा कि चिंता का विषय नहीं है, मानव शरीर की संरचना ही कुछ ऐसी है कि शरीर में वातावरण और काम के हिसाब से कुछ चीजें विकसित होती है तो कुछ चीजों के प्रयोग ना हो पाने के कारन विलुप्त हो जाती है। मेरे शरीर ने भी ऐसा ही एक एक्स्ट्रा फ्लूइड विकसित किया है।"

कुंजल:- इससे आपके पीने का क्या संबंध..

अपस्यु:- ये फ्लूइड जब अल्कोहल के साथ मिलता है तो इसके परिणाम काफी रोचक होते है। पहला तो मैं दिन रात-पिता रहूं, ये किडनी और लिवर में पहुंचने से पहले ही मेरे लिए दवा का काम करता है और मेरे इस एक्स्ट्रा फ्लूइड को स्टेबल कर देता है जो मेरे ध्यान लगाने की शक्ति में अदभुत मदद करता है।

"मै अपने आस पास की चीजों को महसूस कर सकता हूं। एक बार जिस जगह को देख लूं, मै इंच के हिसाब से बता सकता हूं। गोली की रफ्तार को 2000 गुना भी बढ़ा दो, फिर भी मै काफी दूर से हवा में हुए परिवर्तन को भांप लेता हूं, और एक चीज जो मै अबतक सबसे छिपाते आया हूं, मै हवा की गति को भांपकर उसी तेजी से प्रतिक्रिया देते हुए बच भी सकता हूं।"

"सबको लगता है कि मै धुएं की आड़ में बचने कि कोशिश करता हूं, लेकिन सच तो यह है कि हवा के गति में परिवर्तन होते ही, जैसे ही खतरे का अंदाज़ा होता है मेरा शरीर भी उसी स्पीड से प्रतिक्रिया में बचता है और कहीं बच पाना संभव नहीं होता, तो शरीर में जहां सबसे कम नुकसान हो, शरीर वहां पर वार झेल लेता है। मेरे हर विषय पढ़ने के पीछे की रुचि, मेरे कुछ नया सीखने की रुचि, और कुछ ही समय में किसी काम में महारथ हासिल करने की रुचि, इन सब का राज वो एक्स्ट्रा फ्लूइड ही है और अल्कोहल उसे स्टेबल करके दिशा प्रदान करने में मदद करता है।"

कुंजल:- आप तो सुपर स्टार निकले भईया। वैसे कहीं कोई कहानी तो नहीं बना रहे ना…..

अपस्यु:- मतलब मै इतने बड़े राज से पर्दा उठा रहा हूं, और तुम मुझे ही झूठा बोल रही।

कुंजल:- हीहीहीहीही, भईया जब आप सफाई देते हो तो बहुत मस्त दिखते हो। अच्छा सुनो ना मै क्या कह रही थी..……

अपस्यु:- हां बोल ना ?

कुंजल, कुछ सोचती हुई… "नहीं कुछ नहीं बस ऐसे ही"..

"हद है अपस्यु, अब यहां भी बार काउंटर"… ऐमी, अश्क के साथ कमरे में शिरकत करती हुई कहने लगी…

हाय क्या अदा थी ऐमी की, वो हल्के मेकअप के साथ, अपने लंबे और खूबसूरत तराशे बदन पर, जब वो बिजनेस क्लास वूमेन की तरह, पेंसिल हिल पर पेंसिल जीन्स और शर्ट पहने शिरकत की, अपस्यु के होश उड़े।… "कुछ देर पहले तो मै हॉटी थी, और अभी अपने होने वाली पर से नजर नहीं हट रही, कमाल है।"… अश्क, अपस्यु के आखों के सामने चूटकी बजाती अपनी बात कही और उसकी बात सुनकर तीनों ही हसने लगे।

ऐमी:- हद होती है अपस्यु, बेबी कुछ देर में हम पार्टी में तो होते ही। अब क्या सारा एन्जॉय यही कर लोगे।

कुंजल, ऐमी से….. भाभी हमारी पार्टी तो बस थोड़ी देर में शुरू होने वाली है, आधा इधर एन्जॉय करेंगे, आधा उधर एन्जॉय करेंगे..

अश्क:- सही है ये तो, बिल्कुल सही है, लेकिन एन्जॉय करने के लिए होश में होना जरूरी होगा, ना की पीकर बेहोश हो जाओ।

अपस्यु:- इसलिए तो यहां अल्कोहल की केवल एक ड्रिंक सर्व होगी, बाकी सब फ्रूट जूस पिएंगे…

"अच्छा उपाय है, हर किसी पर लागू कर दो, सिर्फ बाबा अपस्यु को छोड़कर, क्योंकि हमारा एक उनके 10 के बराबर होता है, और वो भी शायद मैंने कुछ कम बता दिया होगा।"… आरव पीछे से ताना देते हुए उनके पास आकर बैठ गया, और उसके साथ में पार्थ भी।
 
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