raveenalover
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रवीना टंडन के मम्मों को सहलाने का एहसास...

रवीना टंडन के मम्मों को सहलाने का एहसास... यार, वो तो सीधे दिमाग़ की नसों में आग लगा देगा!
जैसे ही हथेली उसके एक मम्मे पर पड़ती है
- सबसे पहले महसूस होता है वो गर्माहट... मानो कोई रेशमी गर्म तकिया हो जो अभी-अभी धूप में रखा हो।
- फिर वो वज़न... इतना भारी कि हाथ में पूरी तरह नहीं समाता, उंगलियाँ अपने आप फैल जाती हैं, पूरा मम्मा पकड़ने की कोशिश में।
- स्किन इतनी मुलायम कि लगता है मक्खन पर हाथ फेर रहे हो, लेकिन अंदर से भराव... जैसे कोई रसीला आम हो जो दबाओ तो रस निकलने को बेताब हो।
- निप्पल्स पर जब उंगली फेरते हो तो वो सख़्त होकर खड़े हो जाते हैं, जैसे छोटे-छोटे कंकर... हल्का सा चुटकी काटो तो रवीना की सिसकारी निकल जाती है “उफ्फ़... और करो...”
- दोनों मम्मों को एक साथ दबाओ तो वो आपके हाथों में फैल जाते हैं, फिर वापस गोल हो जाते हैं – लोच इतनी कि बार-बार दबाने को जी चाहे।
- नीचे से उठाकर वज़न महसूस करो... इतने भारी कि लगता है हाथ थक जाएगा, लेकिन थकेगा नहीं, बस और ज़ोर से मसलते रहोगे।
- जब जीभ से चाटते हो तो निप्पल्स पर वो हल्की सी नमी और रवीना का बदन काँप जाता है, मम्मे अपने आप आपके मुँह की तरफ़ धकेलती है वो।
सहलाते-सहलाते जी चाहता है कि बस मुँह में लेकर चूसते रहो, दाँतों से काटो, हाथों से मसलो... और रवीना बस सिसकारियाँ भरती रहे “हाँ... ऐसे ही... और ज़ोर से...”
एहसास सिर्फ़ एक ही है:
रवीना के मम्मे हाथ में लेकर लगता है सारी दुनिया जीत ली हो... और अब बस इन्हें चूसते-मसलते मर जाना है!

रवीना टंडन के मम्मों को सहलाने का एहसास... यार, वो तो सीधे दिमाग़ की नसों में आग लगा देगा!
जैसे ही हथेली उसके एक मम्मे पर पड़ती है
- सबसे पहले महसूस होता है वो गर्माहट... मानो कोई रेशमी गर्म तकिया हो जो अभी-अभी धूप में रखा हो।
- फिर वो वज़न... इतना भारी कि हाथ में पूरी तरह नहीं समाता, उंगलियाँ अपने आप फैल जाती हैं, पूरा मम्मा पकड़ने की कोशिश में।
- स्किन इतनी मुलायम कि लगता है मक्खन पर हाथ फेर रहे हो, लेकिन अंदर से भराव... जैसे कोई रसीला आम हो जो दबाओ तो रस निकलने को बेताब हो।
- निप्पल्स पर जब उंगली फेरते हो तो वो सख़्त होकर खड़े हो जाते हैं, जैसे छोटे-छोटे कंकर... हल्का सा चुटकी काटो तो रवीना की सिसकारी निकल जाती है “उफ्फ़... और करो...”
- दोनों मम्मों को एक साथ दबाओ तो वो आपके हाथों में फैल जाते हैं, फिर वापस गोल हो जाते हैं – लोच इतनी कि बार-बार दबाने को जी चाहे।
- नीचे से उठाकर वज़न महसूस करो... इतने भारी कि लगता है हाथ थक जाएगा, लेकिन थकेगा नहीं, बस और ज़ोर से मसलते रहोगे।
- जब जीभ से चाटते हो तो निप्पल्स पर वो हल्की सी नमी और रवीना का बदन काँप जाता है, मम्मे अपने आप आपके मुँह की तरफ़ धकेलती है वो।
सहलाते-सहलाते जी चाहता है कि बस मुँह में लेकर चूसते रहो, दाँतों से काटो, हाथों से मसलो... और रवीना बस सिसकारियाँ भरती रहे “हाँ... ऐसे ही... और ज़ोर से...”
एहसास सिर्फ़ एक ही है:
रवीना के मम्मे हाथ में लेकर लगता है सारी दुनिया जीत ली हो... और अब बस इन्हें चूसते-मसलते मर जाना है!
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