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- Dec 5, 2013
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अपडेट 70
यहाँ सुबह का वक़त था मोहन खेत मैं गया था सविता सुमि और मेघा और मनोज सो रहे थे क्यों की सुलोचना ने पहले hi सब को बोल दिया था क्यों आज संडे था तो उनको देर से उठने को बोलै था
इसी लिए अभी सब लोग सो रहे थे
पर आकाश के रूम के अटैच्ड बाथरूम मैं अलग hi सीन चल रहा है
इस वक़त सुलोचना के बालखुले हुए है बाथरूम मैं और ब्लाउज एक कोने मैं पड़ा हुवा था और घागरा भी दुरी साइड पड़ा हुवा था और अभी वो दीवार से टेक लेकर कड़ी हुयी थी
और उसकी एक तंग को आकाश अपने कंधे पर टिका कर जोर जोर से धक्के मर रहा था
और सुलोचना आकाश की छाती पारा पने हाथ फेर रही थी और कुछ hi धक्को मैं आकाश जड़ गया और अपने वीर्य से अपनी माँ के पेट पर चोर दिया
दोहो hi हाफ रहे थे जब सुलोचना ने नल चालू किया तो आकाश ने उसे रोक दिया
आकाश : माँ आज पानी से नहीं अपने बेटे से वीर्य से नहाना है
सुलोचना : मैं तो तैयार हु पर तू hi बाटे कर रहा है ला अपना लुंड इसे खड़ा करती हु
आकाश : जरा रुको माँ जोड़ा सास l3ne दो तब तक आप थोड़ा आराम करलो
फ िर दोनों hi थोड़ी देर बाथ रूम मैं hi आराम करते है फिर आकाश अपना लुंड अपनी माँ के तरफ बाधकता है और सुलोचना उसे मुँह मैं भर लेती है चूसने लग टी है
वो अभी चूस hi रही थी की आकाश को बहुत hi तेज मूत आयी और सोचने का टाइम hi नहीं मिलता तो उसे मूतना शुरू करदिया पर सुलोचना ने चुसंक नहीं रोका उसने आधे से ज्यादा को अपने हलक से उतर लिया पर जब आकाश को पता चला तो उसे कुछ और सुजा और उसने अपने मूत की धार से सुलोचना पर डालना सुरु किया
और सुलोचना भी हस्ते हुए अपने बेटे के मूत से नाहा ने लगी ये अनु भाव दोनों केलिए hi बेहद नया था और मज़ेदार था
फिर आकाश का लुंड खड़ा हुवा और उसने कहा
आकाश : माँ अब जल्दी से चित को खोलो अपनी ये छूट का कला रंग मुझे पागल कर रहा है
सुलोचना : अभी ले बीटा मैं तो कब से तैयार हु
फिर से आकाश ने सुलोचना न की छूट मैं लुंड उतर दिया और भाड़ा भाड़ छोड़ने लगा और इस बार 20 मं मैं hi दोनों का काम तमाम होगया
फिर दोनों ने साथ मैं नहाया और सुलोचना ने आकाश को आज फिर नहलाया
और दोनों बहार आगये सुलोचना अपने कमरे मैं चले गयी और आकाश को बीएड पर लेटते hi नींद लग गयी पर अभी 8 hi बजे थे की उनके घर की बेल बजी और सविता ने दूर खोला तो सामने सुलोचना का भाई सुरेश खड़ा था
सविता : अरे भैया आप
सुरेश : है नमस्ते किसी हो बहिन और हमारी भेना कहा है
सविता : अरे आईये आईये नमस्ते और भाभी तो ऊपर होंगी अपने कमरे मैं रुकिए मैं बुलाती हु
फिर सविता सुलोचना को बुलाती है
सुलोचना अपने छोटे भाई के गले लग जाती है
सुलोचना : अरे भाई तूने बताया नहीं की तू आ रहा है बोलना था न थोड़ी तैयारी करके रखती और घर में सब कैसे है
सुरेश : सब लोग ठीक है और मेरा hi या अचानक आना हुवा मैं यहाँ गौण मैं शादी मैं आया था और आज लौट रहा था तो सोचा मिलता चालू
सुलोचना : ये तो अच्छा किया आप बस थोड़ी देर रुकिए मैं अभी नास्ता बना देती हु आप आज यही रुकेंगे ठीके है
सुरेश : अरे दीदी मैं नहीं रुक सकता कल खेत मैं फसल निकली जाएगी तो मुझे अभी जाना होगा और तूने कहा है तो नास्ता करके जाऊंगा और अगली बार पक्का रुकूंगा बस
सुलोचना : तू हर बार यही केता है भाई पर अगली बार एक नहीं सुनूंगी
सुरेश : वो सब तो ठीक है दीदी हमारे भांजे कहा पर है
सुलोचना : अरे वो सो रहे है आज संडे है न इसी लिए
थोड़ी देर बाद आकाश और मनोज निचे आजाते है और फिर सब बैठ के नास्ता करते है नाश्ते के बाद सुरेश जाने वाला होता है की मनोज उसके साथ जाने की जिद्द करने लगता हुआ
मनोज : माँ प्लीज मुझे मां के साथ जाना है कितने दिन होगये है प्लीज मुझे जाने दोना
सुलोचना : नहीं हम वैसे भी थोड़े दिन बाद जायेंगे मां की बेटी की शादी मैं
मनोज : नहीं माँ मुझे आज hi जाना है आप भैया के साथ आजा प्लीज मुझे आज hi जाना है
सुरेश : दीदी आने दोना मनोज की बहुत मैं है और वैसे भी अगले हफ्ते की एन्ड मई hi शादी है ज्यादा टाइम भी नहीं है
सुलोचना : अच्छा ठीक है पर वह कोई शैतानी मत करना
फिर सुलोचना मनोज को रेदय करती है और सुरेश मनोज को लेकर निकल जाता है
अब घर मैं बचे थे सुलोचना सुमि मेघा सविता और आकाश क्यों की मोहन भी खेत गया था क्यों की आज आकाश के खेतो मैं भी फसल निकलने वाली थी
फिर सुलोचना अंदर आयी और मैं दूर बांध करदिया
और उसके होठों पर एक सेक्सी मुस्कान थी वो अंदर आयी और बोली
सुलोचना : अब जब घर मैं हम सब hi है तो शर्म किसी बीटा आज मैं तुझे एक मस्ट तोहफा दूंगी
सविता मेघा और सुमि क्यों न आज हम सब घर मैं ंकज hi रहे आज के दिन हम आकाश के साथ चुद कर एक नया अनु भाव करे
आकाश ने सोचा ये माँ क्या कह रही है ये तीनो अब पता नहीं कैसे रियेक्ट करेगी लेकिन आकाश ने उन तीनो की और देखा तो शौक होगया
क्यों की तीनो hi आकाश को देख कर मुस्कुरा रही थी
सुलोचना : आकाश क्यों केसा लगा तोहफा अब तुझे उन कामिनिओ के पास जाने की जरुरत नहीं है क्यों की तेरे घर मैं hi तेरी चार रंडिया है और आज हम सब इस घर मैं नंगे hi रहेंगे तेरा जबाब भी मन हो तू किसी को भी किसिस भी वक़त छोड़ सकता है कोई तुझे कुछ नहीं बोलेगा
आकाश : आपका सुक्रिया माँ ये सच में hi एक नया अनुभव होगा
सुलोचना : सब से पहले यहाँ आके हमे पूरी तरह नंगा करदे फिर हम तुझे नंगा करेंगे
आकाश सबसे पहले hi सुलोचना के पास गया और पहले उसकी सारे खोली और उसका पल्लू गिरा दिया और सरे को निकल दिया और आकाश ने पहले सुलोचना के भरी ूरोज़ो को थम कर एक बार जोरसे डाबडिया और सुलोचना के साथ ये होता देख बाकि तीनो के सरीर मैं भी सिहरन दौड़ गयी
फिर आकाश ने बड़ी hi जल्दी से सुलोचना का बलयश खोला और उसके दोनों पपीता को आज़ाद किया फिर उसके दोनों ूरोज़ो के बिच एक बार अपनी जीभ से चाट लिया और फिर आकाश ने उसके पेटीकोट के नदी कोई खोला और उसकी राशि चोरडी जिससे पेटीकोट निचे सरक गया और फिर सुलोचना की चड्डी भी निचे सरला दी सुलोचना के डार्क ब्रॉउन निप्पल्स और उसी रंग की काली छूट दोनों hi सुलोचना को निखरा हुवा बता रहे थे
अब आकाश सुमि के पास गया और उसकी सारी खोली और फिर उसके ब्लाउज को खोला फिर उसे भी शामे तरीके से नंगा करदिया मेघा को भी वैसे hi नंगा किया और अब सविता की बरी थी
आकाश सविता के पास गया और उसे भी वैसे hi खोला नंगा किया सविता हलकी सावली थी पर नैन नक्श बहुत hi ज्यादा तीखे आकाश ने जैसे सविता के पेटीकोट के नारे को खोल कर खींचा और उसकी चड्डी भी सरका दी और आकाश ने एक बार सविता की छूट पर अपना हाथ की दो उंगलिओ से रगड़ा आकाश को पता चल चूका था ये चारो की बत्ती जैसी छूट है चारो की चारो बहुत hi ज्यादा गरम है
अब देखना ये है की आकाश की रससलीला किसी होती है इन चारो के साथ
नेक्स्ट अपडेट पोस्टेड दोस्तों
ी होप यू लिखे आईटी
सी यू सून
ब्बये
यहाँ सुबह का वक़त था मोहन खेत मैं गया था सविता सुमि और मेघा और मनोज सो रहे थे क्यों की सुलोचना ने पहले hi सब को बोल दिया था क्यों आज संडे था तो उनको देर से उठने को बोलै था
इसी लिए अभी सब लोग सो रहे थे
पर आकाश के रूम के अटैच्ड बाथरूम मैं अलग hi सीन चल रहा है
इस वक़त सुलोचना के बालखुले हुए है बाथरूम मैं और ब्लाउज एक कोने मैं पड़ा हुवा था और घागरा भी दुरी साइड पड़ा हुवा था और अभी वो दीवार से टेक लेकर कड़ी हुयी थी
और उसकी एक तंग को आकाश अपने कंधे पर टिका कर जोर जोर से धक्के मर रहा था
और सुलोचना आकाश की छाती पारा पने हाथ फेर रही थी और कुछ hi धक्को मैं आकाश जड़ गया और अपने वीर्य से अपनी माँ के पेट पर चोर दिया
दोहो hi हाफ रहे थे जब सुलोचना ने नल चालू किया तो आकाश ने उसे रोक दिया
आकाश : माँ आज पानी से नहीं अपने बेटे से वीर्य से नहाना है
सुलोचना : मैं तो तैयार हु पर तू hi बाटे कर रहा है ला अपना लुंड इसे खड़ा करती हु
आकाश : जरा रुको माँ जोड़ा सास l3ne दो तब तक आप थोड़ा आराम करलो
फ िर दोनों hi थोड़ी देर बाथ रूम मैं hi आराम करते है फिर आकाश अपना लुंड अपनी माँ के तरफ बाधकता है और सुलोचना उसे मुँह मैं भर लेती है चूसने लग टी है
वो अभी चूस hi रही थी की आकाश को बहुत hi तेज मूत आयी और सोचने का टाइम hi नहीं मिलता तो उसे मूतना शुरू करदिया पर सुलोचना ने चुसंक नहीं रोका उसने आधे से ज्यादा को अपने हलक से उतर लिया पर जब आकाश को पता चला तो उसे कुछ और सुजा और उसने अपने मूत की धार से सुलोचना पर डालना सुरु किया
और सुलोचना भी हस्ते हुए अपने बेटे के मूत से नाहा ने लगी ये अनु भाव दोनों केलिए hi बेहद नया था और मज़ेदार था
फिर आकाश का लुंड खड़ा हुवा और उसने कहा
आकाश : माँ अब जल्दी से चित को खोलो अपनी ये छूट का कला रंग मुझे पागल कर रहा है
सुलोचना : अभी ले बीटा मैं तो कब से तैयार हु
फिर से आकाश ने सुलोचना न की छूट मैं लुंड उतर दिया और भाड़ा भाड़ छोड़ने लगा और इस बार 20 मं मैं hi दोनों का काम तमाम होगया
फिर दोनों ने साथ मैं नहाया और सुलोचना ने आकाश को आज फिर नहलाया
और दोनों बहार आगये सुलोचना अपने कमरे मैं चले गयी और आकाश को बीएड पर लेटते hi नींद लग गयी पर अभी 8 hi बजे थे की उनके घर की बेल बजी और सविता ने दूर खोला तो सामने सुलोचना का भाई सुरेश खड़ा था
सविता : अरे भैया आप
सुरेश : है नमस्ते किसी हो बहिन और हमारी भेना कहा है
सविता : अरे आईये आईये नमस्ते और भाभी तो ऊपर होंगी अपने कमरे मैं रुकिए मैं बुलाती हु
फिर सविता सुलोचना को बुलाती है
सुलोचना अपने छोटे भाई के गले लग जाती है
सुलोचना : अरे भाई तूने बताया नहीं की तू आ रहा है बोलना था न थोड़ी तैयारी करके रखती और घर में सब कैसे है
सुरेश : सब लोग ठीक है और मेरा hi या अचानक आना हुवा मैं यहाँ गौण मैं शादी मैं आया था और आज लौट रहा था तो सोचा मिलता चालू
सुलोचना : ये तो अच्छा किया आप बस थोड़ी देर रुकिए मैं अभी नास्ता बना देती हु आप आज यही रुकेंगे ठीके है
सुरेश : अरे दीदी मैं नहीं रुक सकता कल खेत मैं फसल निकली जाएगी तो मुझे अभी जाना होगा और तूने कहा है तो नास्ता करके जाऊंगा और अगली बार पक्का रुकूंगा बस
सुलोचना : तू हर बार यही केता है भाई पर अगली बार एक नहीं सुनूंगी
सुरेश : वो सब तो ठीक है दीदी हमारे भांजे कहा पर है
सुलोचना : अरे वो सो रहे है आज संडे है न इसी लिए
थोड़ी देर बाद आकाश और मनोज निचे आजाते है और फिर सब बैठ के नास्ता करते है नाश्ते के बाद सुरेश जाने वाला होता है की मनोज उसके साथ जाने की जिद्द करने लगता हुआ
मनोज : माँ प्लीज मुझे मां के साथ जाना है कितने दिन होगये है प्लीज मुझे जाने दोना
सुलोचना : नहीं हम वैसे भी थोड़े दिन बाद जायेंगे मां की बेटी की शादी मैं
मनोज : नहीं माँ मुझे आज hi जाना है आप भैया के साथ आजा प्लीज मुझे आज hi जाना है
सुरेश : दीदी आने दोना मनोज की बहुत मैं है और वैसे भी अगले हफ्ते की एन्ड मई hi शादी है ज्यादा टाइम भी नहीं है
सुलोचना : अच्छा ठीक है पर वह कोई शैतानी मत करना
फिर सुलोचना मनोज को रेदय करती है और सुरेश मनोज को लेकर निकल जाता है
अब घर मैं बचे थे सुलोचना सुमि मेघा सविता और आकाश क्यों की मोहन भी खेत गया था क्यों की आज आकाश के खेतो मैं भी फसल निकलने वाली थी
फिर सुलोचना अंदर आयी और मैं दूर बांध करदिया
और उसके होठों पर एक सेक्सी मुस्कान थी वो अंदर आयी और बोली
सुलोचना : अब जब घर मैं हम सब hi है तो शर्म किसी बीटा आज मैं तुझे एक मस्ट तोहफा दूंगी
सविता मेघा और सुमि क्यों न आज हम सब घर मैं ंकज hi रहे आज के दिन हम आकाश के साथ चुद कर एक नया अनु भाव करे
आकाश ने सोचा ये माँ क्या कह रही है ये तीनो अब पता नहीं कैसे रियेक्ट करेगी लेकिन आकाश ने उन तीनो की और देखा तो शौक होगया
क्यों की तीनो hi आकाश को देख कर मुस्कुरा रही थी
सुलोचना : आकाश क्यों केसा लगा तोहफा अब तुझे उन कामिनिओ के पास जाने की जरुरत नहीं है क्यों की तेरे घर मैं hi तेरी चार रंडिया है और आज हम सब इस घर मैं नंगे hi रहेंगे तेरा जबाब भी मन हो तू किसी को भी किसिस भी वक़त छोड़ सकता है कोई तुझे कुछ नहीं बोलेगा
आकाश : आपका सुक्रिया माँ ये सच में hi एक नया अनुभव होगा
सुलोचना : सब से पहले यहाँ आके हमे पूरी तरह नंगा करदे फिर हम तुझे नंगा करेंगे
आकाश सबसे पहले hi सुलोचना के पास गया और पहले उसकी सारे खोली और उसका पल्लू गिरा दिया और सरे को निकल दिया और आकाश ने पहले सुलोचना के भरी ूरोज़ो को थम कर एक बार जोरसे डाबडिया और सुलोचना के साथ ये होता देख बाकि तीनो के सरीर मैं भी सिहरन दौड़ गयी
फिर आकाश ने बड़ी hi जल्दी से सुलोचना का बलयश खोला और उसके दोनों पपीता को आज़ाद किया फिर उसके दोनों ूरोज़ो के बिच एक बार अपनी जीभ से चाट लिया और फिर आकाश ने उसके पेटीकोट के नदी कोई खोला और उसकी राशि चोरडी जिससे पेटीकोट निचे सरक गया और फिर सुलोचना की चड्डी भी निचे सरला दी सुलोचना के डार्क ब्रॉउन निप्पल्स और उसी रंग की काली छूट दोनों hi सुलोचना को निखरा हुवा बता रहे थे
अब आकाश सुमि के पास गया और उसकी सारी खोली और फिर उसके ब्लाउज को खोला फिर उसे भी शामे तरीके से नंगा करदिया मेघा को भी वैसे hi नंगा किया और अब सविता की बरी थी
आकाश सविता के पास गया और उसे भी वैसे hi खोला नंगा किया सविता हलकी सावली थी पर नैन नक्श बहुत hi ज्यादा तीखे आकाश ने जैसे सविता के पेटीकोट के नारे को खोल कर खींचा और उसकी चड्डी भी सरका दी और आकाश ने एक बार सविता की छूट पर अपना हाथ की दो उंगलिओ से रगड़ा आकाश को पता चल चूका था ये चारो की बत्ती जैसी छूट है चारो की चारो बहुत hi ज्यादा गरम है
अब देखना ये है की आकाश की रससलीला किसी होती है इन चारो के साथ
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