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- Dec 5, 2013
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मैं : हाँ बुआ यह सुच है वो आप की बचपन की सहेली ज़ीनत है
बुआ ने जब यह सुना तो फ़ौरन उठ क ऊपर की तरफ दौड पड़ी हम सुब बी उन क पीछे भागे बुआ ऊपर पांच क्र जैसे hi रूम का दूर खोली तो सामने ज़ीनत और उस की बेटियां उठ चुकी थीं लेकिन अभी तक बीएड पेय hi बैठी थीं दूर खुलने की आवाज़ सुन क्र सब ने दूर की तरफ देखा ज़ीनत की नज़र जब रानी पेय पड़ी तो वो बी बीएड से उठ गई दोनों एक दूसरे को टिक टिकी लगये देख रही थीं दोनों की आँखों मैं आंसू थे बुआ से कण्ट्रोल नहीं हुवा
बुआ : ज़ीनाअत...
ज़ीनत: रणीय
दोनों भाग क एक दूसरे क गले लग गई यह देख क सब की आँखों मैं आंसू आ गए मैं हैरान था आज दादी बी ऊपर आ गई थी क्यों क ज़ीनत की माँ ज़ुलेखा दादी की अचपन की सहेली थी दादी ने ज़ीनत को बी अपनी गोद मैं खेलाया था
बुआ : कहँ थी अब तक कंही मेरी यद् नहीं आई
ज़ीनत : तुझे भूली hi कब हों जो यद् करती मैं तो गाओं मैं hi रह गई थी आप लोगों का कुछ पता नहीं चला कहँ गए रातो रात फिर कभी कोई खबर नहीं आई बोहत रोइ मैं तेरे लिए रानी बोहत रोइ एक तू hi थी जिस क सतह मेरी साँसे चलती थीं तेरे जाने क बेहद मैं टूट स गई थी
रानी : मेरा बी तेरे जैसा हल था बीएस हालात से मजबूर हो क हम यहाँ आ गए फिर वापिस नहीं जा सके
दादी : अब बीएस बी करो आज ख़ुशी का दिन है मेरी दूसरी बेटी बी आ गई
ज़ीनत : खला आप..
और रानी बुआ से अलग हो क्र ज़ीनत दादी क गले लग गई दादी ने ज़ीनत को प्यार किया
ज़ीनत : खला आज बरसो बेहद ऐसा लग रहा है क माँ की अघोष मैं आ गई हों एक सकूं जो सिर्फ माँ की बाँहों मैं होता है वो मिल गया है
दादी : तो आज से तू मुझे एमी बोलै क्र ठीक है
ज़ीनत : ग एमी
दादी : मेरी पोतियों से नहीं मिलवाए गई
ज़ीनत : ो महफ करना अम्मी यद् नहीं रहा इधर आओ आमना अक़्सा
वो दोनों अपनी माँ क पास आई तो
ज़ीनत : यह है बड़ी बेटी आमना और यह छोटी बेटी अक़्सा
दादी ने दोनों को प्यार किया
दादी : खुश रहो बोहत hi पायरी हैं दोनों
मेरे मुंह से निकल गया
मैं : ग दादी वो तो है पायरी तो हैं
मेरे ऐसा बोलते hi सब बहने मुझे घूरने लगी और मुझे अपनी ग़लती का अहसास हुवा तो मैं ने अपना सर पकड़ लिया
फरिहा : ाचा ग पायरी हैं हाँ हम नहीं हैं है न
फरहाना : तू तो गया काम से अब
सैर : ज़रा अकेले मिल आज तेरी खैर नै
सना : हमरी तो कभी तहरीफ़ नै की
फरज़ाना: बीएस क्र दो झाँसी की रानियों क्यों उन को पेरशान क्र रही हो क्या ग़लत कहा ुनों ने पायरी तो हैं दोनों और आज से अपने ग्रुप मैं बी शामिल हो गई समझ जाओ अब
सुब एक सतह लो ग अब करो गिनती कितनी हो गई हैं
चची : चुप क्र जाओ सब क्या सब्ज़ी मंडी लगा ली है यह नहीं क मेहमान ए हैं कुछ नाश्ता बनाएं बातें सुन लो इन की और तुम दोनों सैर सना भाई क सतह तमीज से बात किया करो पता है न उस का मक़ाम क्या है
सब एक सतह सॉरी बोली और कानो को हाथ से पकड़ लिया तो
मैं : आर्य चची कुछ न कहो इन को यह न हो क कोई इन मैं से रो डे आप को तो पता है मैं इन की आँखों मैं आंसू नहीं देख सकता इन क जितने आंसू गिरते हैं उतना मेरा खून जलता है इस लिए तो सब को खुश रखता हों
अम्मी : जीता रह मेरे शेर तुझ से एहि उम्मीद थी मुझे ाचा चलो ज़ीनत बहन फ्रेश हो लो फिर नाश्ता करते हैं फिर कशी हम सब को ले क्र शॉपिंग पेय चले गए
फरिहा: यह शॉपिंग किस ख़ुशी मैं
अम्मी : आर्य पागल लड़की देख नहीं रही तुम्हरी नै बुआ ज़ीनत और तुम्हरी इन बहनों क पास कपडे नहीं हैं यह पुराने पहने हैं इन क लिए और बाक़ी सब बी अपने लिए कुछ न कुछ ले लें गए
फरिहा : उदास हो क ok ठीक है आप लोग जाओ मैं घर hi रूकती हों
अम्मी : मैं सिर्फ बता नहीं रही आर्डर डे रही हों सब चलें गए ok
फिर सब फ्रेश हो क्र नाश्ता करने लगे नाश्ता करने क बेहद सैर, सना, फरिहा और फरहाना ने आमना को सतह लिया और अपने रूम मैं चली गई और फरज़ाना और सोबी अक़्सा को ले गई मेरे वाले रूम मैं और मैं भाभी क रूम की तरफ चल पड़ा उन क रूम का दूर नॉक किया तो भाभी बोली
भाभी : आर्य आप आ जाओ आप को नॉक करने की ज़रुरत नहीं है
मैं अंदर चला गया भाभी बीएड पेय बैठी थी
मैं : आप को कैसे पता क मैं हों
भाभी : प्यार करती हों आप से आप जब बी मेरे पास एते हो मेरे दिल की धड़कन बाद जाती है
मैं : इतना प्यार न करो कहें न मिल पाए तो बिखर जाओ गई
भाभी : जिस दिन मुझे लगा क मैं आप से नहीं मिल पाऊँ गई तो वो दिन मेरी ज़िन्दगी का आखिरी दिन हो गए
मैं ने आगये बाद क्र भाभी को गले लगा लिया
मैं : नै मेरी जान ऐसा नहीं बोलते मेरी क़सम आज क बेहद ऐसा नहीं बोलो गई ी रियली लव यू मैं बी तुम्हें चाहने लगा हों खोना नहीं चाहता
भाभी : ी लव तू जान बीएस जल्दी से मुझे अपनी बना लें
मैं : पैर भाई का क्या हो गए
भाभी : मैं ने उन से बात की थी वो बी खुश हैं क मैं ने तुम्हें चुना है और वो कल आ रहे हैं और आप से बात बी करें गए कुछ न कुछ हल निकल क hi जैन गए
मैं : वो क्या आप उन क सतह हमबिस्तर बी हों गई
भाभी : आप को क्या लगता है
मैं : मुझे लगता है क नै हों गई
भाभी : बिलकुल ठीक मैं ने उन को बता दिया है क अब यह जिसम यह रोअह कशी क लिए है
मैं : एक बात बोलों
भाभी : हाँ बोलो न
मैं : आप बोहत ख़ूबसूरत हो
भाभी : वो तो मैं हों ाचा सुनो कल मेरी अम्मी अबू बी ऍन गए उन से बी बात करनी है और आप बी तैयार रहो नेक्स्ट जो फैसला हो गए उस क लिए और मुझे लगता है क आप की अम्मी और चची ने यह फैसला लिया है क आप क भाई इमरान से मेरी डाइवोर्स हो जाये और फिर आप से शादी
मैं : भाई तो टूट जैन गए इस तरह
भाभी : मैं बी एहि सोच रही हों बाक़ी आप खुद बात क्र लेना
मैं : ok ठीक है ाचा आज आपि का बर्थडे है तो उन को पता नहीं चलना चाहिए सरप्राइज पार्टी का
भाभी : हाँ ग पता है और मेरी तरफ से गिफ्ट क पैसे आप दो गए
मैं : लो क्र लो गाल शादी होइ नहीं बीवी वाले काम शुरू
इस बात पेय हम दोनों हंस पड़े इतने मैं बुआ अंदर आ गई
बुआ : आर्य कशी तू यहाँ बैठा है मैं तुझे पूरे घर मैं ढून्ढ रही हों
मैं : क्या बात है बुआ मेरी यद् कैसे आ गई
बुआ मेरे पास आ क मुझे गले लगा लिया मेरे चेहरे को हर जगा चूमने लगी
मैं : खैर है बुआ आज बातझे पेय प्यार सा रहा है सुआग रात मानाने का दिल तो नहीं
बुआ : हंस क्र मेरी जान वो बी मन लें गए आज जो ख़ुशी तुम ने मुझे दी है उस क बदले मैं खुद को बी तुझ पेय क़ुर्बान क्र डॉन यह जिसम क्या चीज़ है
मैं : वैसे बुआ उस मैं बी मेरा hi फ़ायदा है आप को अपनी सहेली मिल गई और मुझे उन की माखन जैसी बेटियां वो बी एक नै 2
बुआ : वो बी 2 नै 3 hi समझ ज़ीनत बी तेरे पेय लाटू है मैं ने देखा उस की आँखों मैं जब नाश्ता क्र रहे थे तुम्हें hi बार बार देख रही थी
भाभी: लो ग पहले थोड़ी हैं क बढ़ती hi जा रही हैं
बुआ : उन की क्या ग़लती अपने दिल से पूछ तू पीछे हैट सकती है
भाभी : बुआ ग सोचना बी मत ऐसी बात
बुआ : जवाब तू ने खुद hi डे दिया उन की बी ग़लती नहीं है
मैं : ाचा वो बेहद की बात है चलो फिर आप लोग तैयारी शुरू करो जीयदा मेकअप करने की ज़रुरत नहीं है वाहन सिटी मैं पारलर चली जाना सब मेरी बात हो गई है सिटी का सब से बड़ा पारलर है आज सिर्फ आप लोगों क लिए बुक है और आज आप सब को बी एक सरप्राइज मिलने वाला बल्कि एक नहीं बोहत से सरप्राइज तो झटका सहने क लिए तैयार रहना
भाभी: कैसा सरप्राइज?
बुआ : बता बा कैसा सरप्राइज
मैं : वो तो आज की शाम को hi मिले गए ok मैं चलता हों आप दोनों मुंह मीठा करवाओ
भाभी शर्मा गई और बुआ आगे आई और मेरे होंठों पेय किश क्र क चली गई उन को लगा क शायद भाभी उन की वजा से न करे हुवा बी यही जून hi बुआ गई भाभी ने मुझे बीएड पेय पटख दिया और इस से पहले क मैं कुछ समझता उन क नरम और कोमल होंठ मेरे होंठों से मिल चुके थे हम एक दूसरे क होंठ चूसने लगे मेरे हाथ भाभी की पथ पेय घूम रहे थे अचानक से गुड़िया रूम मैं आई
फरज़ाना: ो लैला मजनू छोड़ो एक दूसरे को कुछ तो ख्याल करो दरवाज़ा खुला है
मैं : क्या यार द्र hi दिया था
फरज़ाना: मुझे न मीठी मीठी फीलिंग्स होइ तो मैं समझ गई क जब कहें मुंह मर रहे हैं और यह बी समझ गई क दूर बी खुला हो गए इसी लिए भागी आई क किसी और ने देख लिया तो पता नहीं क्या हो ाचा हुवा नज़दीक hi मिल गए हो भाभी क पास वर्ण पता नै किस किस का रूम चेक करना पड़ता
मैं : थैंक्स गुड़िया मैं भूल गया था दूर खुला है ाचा चलो चलते हैं शॉपिंग बी जाना है और आप तैयार हो जाओ
फरज़ाना: भाभी पंतय चेंज क्र लेना
भाभी : ठहर तू भाई की चमची
इतना सुनते hi गुड़िया भाग गई मैं बी हंस दिया और एक छोटा सा किश क्र क भाभी को निकल आया
बाक़ी का नेक्स्ट अपडेट मैं.....
मैं : हाँ बुआ यह सुच है वो आप की बचपन की सहेली ज़ीनत है
बुआ ने जब यह सुना तो फ़ौरन उठ क ऊपर की तरफ दौड पड़ी हम सुब बी उन क पीछे भागे बुआ ऊपर पांच क्र जैसे hi रूम का दूर खोली तो सामने ज़ीनत और उस की बेटियां उठ चुकी थीं लेकिन अभी तक बीएड पेय hi बैठी थीं दूर खुलने की आवाज़ सुन क्र सब ने दूर की तरफ देखा ज़ीनत की नज़र जब रानी पेय पड़ी तो वो बी बीएड से उठ गई दोनों एक दूसरे को टिक टिकी लगये देख रही थीं दोनों की आँखों मैं आंसू थे बुआ से कण्ट्रोल नहीं हुवा
बुआ : ज़ीनाअत...
ज़ीनत: रणीय
दोनों भाग क एक दूसरे क गले लग गई यह देख क सब की आँखों मैं आंसू आ गए मैं हैरान था आज दादी बी ऊपर आ गई थी क्यों क ज़ीनत की माँ ज़ुलेखा दादी की अचपन की सहेली थी दादी ने ज़ीनत को बी अपनी गोद मैं खेलाया था
बुआ : कहँ थी अब तक कंही मेरी यद् नहीं आई
ज़ीनत : तुझे भूली hi कब हों जो यद् करती मैं तो गाओं मैं hi रह गई थी आप लोगों का कुछ पता नहीं चला कहँ गए रातो रात फिर कभी कोई खबर नहीं आई बोहत रोइ मैं तेरे लिए रानी बोहत रोइ एक तू hi थी जिस क सतह मेरी साँसे चलती थीं तेरे जाने क बेहद मैं टूट स गई थी
रानी : मेरा बी तेरे जैसा हल था बीएस हालात से मजबूर हो क हम यहाँ आ गए फिर वापिस नहीं जा सके
दादी : अब बीएस बी करो आज ख़ुशी का दिन है मेरी दूसरी बेटी बी आ गई
ज़ीनत : खला आप..
और रानी बुआ से अलग हो क्र ज़ीनत दादी क गले लग गई दादी ने ज़ीनत को प्यार किया
ज़ीनत : खला आज बरसो बेहद ऐसा लग रहा है क माँ की अघोष मैं आ गई हों एक सकूं जो सिर्फ माँ की बाँहों मैं होता है वो मिल गया है
दादी : तो आज से तू मुझे एमी बोलै क्र ठीक है
ज़ीनत : ग एमी
दादी : मेरी पोतियों से नहीं मिलवाए गई
ज़ीनत : ो महफ करना अम्मी यद् नहीं रहा इधर आओ आमना अक़्सा
वो दोनों अपनी माँ क पास आई तो
ज़ीनत : यह है बड़ी बेटी आमना और यह छोटी बेटी अक़्सा
दादी ने दोनों को प्यार किया
दादी : खुश रहो बोहत hi पायरी हैं दोनों
मेरे मुंह से निकल गया
मैं : ग दादी वो तो है पायरी तो हैं
मेरे ऐसा बोलते hi सब बहने मुझे घूरने लगी और मुझे अपनी ग़लती का अहसास हुवा तो मैं ने अपना सर पकड़ लिया
फरिहा : ाचा ग पायरी हैं हाँ हम नहीं हैं है न
फरहाना : तू तो गया काम से अब
सैर : ज़रा अकेले मिल आज तेरी खैर नै
सना : हमरी तो कभी तहरीफ़ नै की
फरज़ाना: बीएस क्र दो झाँसी की रानियों क्यों उन को पेरशान क्र रही हो क्या ग़लत कहा ुनों ने पायरी तो हैं दोनों और आज से अपने ग्रुप मैं बी शामिल हो गई समझ जाओ अब
सुब एक सतह लो ग अब करो गिनती कितनी हो गई हैं
चची : चुप क्र जाओ सब क्या सब्ज़ी मंडी लगा ली है यह नहीं क मेहमान ए हैं कुछ नाश्ता बनाएं बातें सुन लो इन की और तुम दोनों सैर सना भाई क सतह तमीज से बात किया करो पता है न उस का मक़ाम क्या है
सब एक सतह सॉरी बोली और कानो को हाथ से पकड़ लिया तो
मैं : आर्य चची कुछ न कहो इन को यह न हो क कोई इन मैं से रो डे आप को तो पता है मैं इन की आँखों मैं आंसू नहीं देख सकता इन क जितने आंसू गिरते हैं उतना मेरा खून जलता है इस लिए तो सब को खुश रखता हों
अम्मी : जीता रह मेरे शेर तुझ से एहि उम्मीद थी मुझे ाचा चलो ज़ीनत बहन फ्रेश हो लो फिर नाश्ता करते हैं फिर कशी हम सब को ले क्र शॉपिंग पेय चले गए
फरिहा: यह शॉपिंग किस ख़ुशी मैं
अम्मी : आर्य पागल लड़की देख नहीं रही तुम्हरी नै बुआ ज़ीनत और तुम्हरी इन बहनों क पास कपडे नहीं हैं यह पुराने पहने हैं इन क लिए और बाक़ी सब बी अपने लिए कुछ न कुछ ले लें गए
फरिहा : उदास हो क ok ठीक है आप लोग जाओ मैं घर hi रूकती हों
अम्मी : मैं सिर्फ बता नहीं रही आर्डर डे रही हों सब चलें गए ok
फिर सब फ्रेश हो क्र नाश्ता करने लगे नाश्ता करने क बेहद सैर, सना, फरिहा और फरहाना ने आमना को सतह लिया और अपने रूम मैं चली गई और फरज़ाना और सोबी अक़्सा को ले गई मेरे वाले रूम मैं और मैं भाभी क रूम की तरफ चल पड़ा उन क रूम का दूर नॉक किया तो भाभी बोली
भाभी : आर्य आप आ जाओ आप को नॉक करने की ज़रुरत नहीं है
मैं अंदर चला गया भाभी बीएड पेय बैठी थी
मैं : आप को कैसे पता क मैं हों
भाभी : प्यार करती हों आप से आप जब बी मेरे पास एते हो मेरे दिल की धड़कन बाद जाती है
मैं : इतना प्यार न करो कहें न मिल पाए तो बिखर जाओ गई
भाभी : जिस दिन मुझे लगा क मैं आप से नहीं मिल पाऊँ गई तो वो दिन मेरी ज़िन्दगी का आखिरी दिन हो गए
मैं ने आगये बाद क्र भाभी को गले लगा लिया
मैं : नै मेरी जान ऐसा नहीं बोलते मेरी क़सम आज क बेहद ऐसा नहीं बोलो गई ी रियली लव यू मैं बी तुम्हें चाहने लगा हों खोना नहीं चाहता
भाभी : ी लव तू जान बीएस जल्दी से मुझे अपनी बना लें
मैं : पैर भाई का क्या हो गए
भाभी : मैं ने उन से बात की थी वो बी खुश हैं क मैं ने तुम्हें चुना है और वो कल आ रहे हैं और आप से बात बी करें गए कुछ न कुछ हल निकल क hi जैन गए
मैं : वो क्या आप उन क सतह हमबिस्तर बी हों गई
भाभी : आप को क्या लगता है
मैं : मुझे लगता है क नै हों गई
भाभी : बिलकुल ठीक मैं ने उन को बता दिया है क अब यह जिसम यह रोअह कशी क लिए है
मैं : एक बात बोलों
भाभी : हाँ बोलो न
मैं : आप बोहत ख़ूबसूरत हो
भाभी : वो तो मैं हों ाचा सुनो कल मेरी अम्मी अबू बी ऍन गए उन से बी बात करनी है और आप बी तैयार रहो नेक्स्ट जो फैसला हो गए उस क लिए और मुझे लगता है क आप की अम्मी और चची ने यह फैसला लिया है क आप क भाई इमरान से मेरी डाइवोर्स हो जाये और फिर आप से शादी
मैं : भाई तो टूट जैन गए इस तरह
भाभी : मैं बी एहि सोच रही हों बाक़ी आप खुद बात क्र लेना
मैं : ok ठीक है ाचा आज आपि का बर्थडे है तो उन को पता नहीं चलना चाहिए सरप्राइज पार्टी का
भाभी : हाँ ग पता है और मेरी तरफ से गिफ्ट क पैसे आप दो गए
मैं : लो क्र लो गाल शादी होइ नहीं बीवी वाले काम शुरू
इस बात पेय हम दोनों हंस पड़े इतने मैं बुआ अंदर आ गई
बुआ : आर्य कशी तू यहाँ बैठा है मैं तुझे पूरे घर मैं ढून्ढ रही हों
मैं : क्या बात है बुआ मेरी यद् कैसे आ गई
बुआ मेरे पास आ क मुझे गले लगा लिया मेरे चेहरे को हर जगा चूमने लगी
मैं : खैर है बुआ आज बातझे पेय प्यार सा रहा है सुआग रात मानाने का दिल तो नहीं
बुआ : हंस क्र मेरी जान वो बी मन लें गए आज जो ख़ुशी तुम ने मुझे दी है उस क बदले मैं खुद को बी तुझ पेय क़ुर्बान क्र डॉन यह जिसम क्या चीज़ है
मैं : वैसे बुआ उस मैं बी मेरा hi फ़ायदा है आप को अपनी सहेली मिल गई और मुझे उन की माखन जैसी बेटियां वो बी एक नै 2
बुआ : वो बी 2 नै 3 hi समझ ज़ीनत बी तेरे पेय लाटू है मैं ने देखा उस की आँखों मैं जब नाश्ता क्र रहे थे तुम्हें hi बार बार देख रही थी
भाभी: लो ग पहले थोड़ी हैं क बढ़ती hi जा रही हैं
बुआ : उन की क्या ग़लती अपने दिल से पूछ तू पीछे हैट सकती है
भाभी : बुआ ग सोचना बी मत ऐसी बात
बुआ : जवाब तू ने खुद hi डे दिया उन की बी ग़लती नहीं है
मैं : ाचा वो बेहद की बात है चलो फिर आप लोग तैयारी शुरू करो जीयदा मेकअप करने की ज़रुरत नहीं है वाहन सिटी मैं पारलर चली जाना सब मेरी बात हो गई है सिटी का सब से बड़ा पारलर है आज सिर्फ आप लोगों क लिए बुक है और आज आप सब को बी एक सरप्राइज मिलने वाला बल्कि एक नहीं बोहत से सरप्राइज तो झटका सहने क लिए तैयार रहना
भाभी: कैसा सरप्राइज?
बुआ : बता बा कैसा सरप्राइज
मैं : वो तो आज की शाम को hi मिले गए ok मैं चलता हों आप दोनों मुंह मीठा करवाओ
भाभी शर्मा गई और बुआ आगे आई और मेरे होंठों पेय किश क्र क चली गई उन को लगा क शायद भाभी उन की वजा से न करे हुवा बी यही जून hi बुआ गई भाभी ने मुझे बीएड पेय पटख दिया और इस से पहले क मैं कुछ समझता उन क नरम और कोमल होंठ मेरे होंठों से मिल चुके थे हम एक दूसरे क होंठ चूसने लगे मेरे हाथ भाभी की पथ पेय घूम रहे थे अचानक से गुड़िया रूम मैं आई
फरज़ाना: ो लैला मजनू छोड़ो एक दूसरे को कुछ तो ख्याल करो दरवाज़ा खुला है
मैं : क्या यार द्र hi दिया था
फरज़ाना: मुझे न मीठी मीठी फीलिंग्स होइ तो मैं समझ गई क जब कहें मुंह मर रहे हैं और यह बी समझ गई क दूर बी खुला हो गए इसी लिए भागी आई क किसी और ने देख लिया तो पता नहीं क्या हो ाचा हुवा नज़दीक hi मिल गए हो भाभी क पास वर्ण पता नै किस किस का रूम चेक करना पड़ता
मैं : थैंक्स गुड़िया मैं भूल गया था दूर खुला है ाचा चलो चलते हैं शॉपिंग बी जाना है और आप तैयार हो जाओ
फरज़ाना: भाभी पंतय चेंज क्र लेना
भाभी : ठहर तू भाई की चमची
इतना सुनते hi गुड़िया भाग गई मैं बी हंस दिया और एक छोटा सा किश क्र क भाभी को निकल आया
बाक़ी का नेक्स्ट अपडेट मैं.....