Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 177 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

पुष्पा ने बेटी की गोद में आराम से लेटते हुए, आह भरकर पूछा, “तुझे परम ने चोदा है ना...?”



पूनम ने माँ के एक निप्पल को मुंह में लेते हुए चूसना शुरू कर दिया और बोली,

“हाँ माँ... बहुत बार चोदा है...”
फनलवर की प्रस्तुति

फिर पूनम ने सीधे माँ की आँखों में देखकर साफ-साफ कहा,

“माँ, मैंने फैसला कर लिया है। मैं सेठजी की रखैल बन जाऊँगी। लेकिन शादी किसी ऐसे आदमी से करूँगी जो मेरे और सेठजी के रिश्ते को पूरी तरह स्वीकार करे। जब चाहे, जहाँ चाहे, सेठजी का लंड मेरी चूत और गांड में समा जाए। तुम भी चुदवा लो ना मम्मी... अच्छा लगेगा...”

पुष्पा ने तुरंत सिर हिलाया और बोली,

“नहीं बेटी... परम के अलावा मुझे कोई और लंड नहीं चाहिए। बस उसी का मोटा लंड...”

पूनम ने मुस्कुराते हुए माँ को पूरी तरह लिटा दिया। उसने माँ की टाँगें चौड़ी कीं, घुटनों के पास से पकड़कर ऊपर की ओर मोड़ा और माँ की चूत पर झुक गई। पहले तो पूरी चूत को सूँघा, फिर जीभ निकालकर लंबी-लंबी चाट लगानी शुरू कर दी।

“आआह्ह्ह... ओह्ह पूनम... किसने सिखाया तुझे ये सब... तेरे हाथ और जीभ में जादू है बेटी... मैं तो सोचती थी कि सिर्फ सुंदरी ही ये जादू जानती है...” पुष्पा जोर से कराह उठी। उसकी कमर उछलने लगी।

पूनम ने माँ की चूत में दो उँगलियाँ ठेल दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगी। साथ ही क्लिटोरिस को चूसते हुए बोली,

“माँ, एक बार महक के साथ रहो ना... वो तुझे एक नंबर की रंडी बना देगी...”

“क्या बात है! महक में भी वैसा ही जादू है जो उसकी माँ में है?”

“अरे माँ... वो माँ-बेटी किसी को भी अपने जाल में फंसा सकती हैं। तू बस एक बार उनके सामने जा और अपना माल दिखा दे... वो तेरा धंधा तेरे सामने ही करवा देंगी।”
एडिट किया है मैत्री ने

पुष्पा हाँफते हुए बोली, “नहीं बेटी... मुझे धंधे में कोई रुचि नहीं है। तेरे पापा मानेंगे नहीं। वैसे उन्होंने कहा तो है कि मैं किसी से भी चुदवा सकती हूँ, लेकिन इज्जत का ध्यान रखकर...”

पूनम ने माँ की चूत में जीभ डालकर गहराई तक चाटते हुए कहा,

“माँ, हम बाजार में तो अपना माल लेकर चुदवाने नहीं जा रहे। बस सेठजी के दोस्तों और जान-पहचान वालों में अपना माल बाँटेंगे और चुदवाकर अच्छा-खासा पैसा भी ले लेंगे। धंधा करना बुरा नहीं है। हमारे गाँव की कई औरतें शहर जाकर धंधा करके आती हैं और यहाँ रौब ठोकती हैं।”

पुष्पा ने बेटी के सिर को अपनी चूत पर और जोर से दबाते हुए कराहा,

“हाँ बेटी... सही बात है... धंधा बुरा तो नहीं... लेकिन इज्जत का भी सवाल है। वैसे जो औरतें करती हैं, वो भी इज्जत देखकर ही करती होंगी। पर फिर भी... मेरे ससुर तो मेरे माल पर बहुत मरते थे, लेकिन मेरी माँ ने मना कर दिया था कि अपना माल दबाकर रखो। रख लिया... क्या पाया? सिर्फ पंडित का छुट्टा लंड!”

पूनम ने माँ की चूत चाटते-चाटते कहा,

“बस माँ, मैं भी वही कह रही हूँ। तुम पापा से बात करना। मेरे बारे में पूछ लेना। अगर उनकी हाँ है तो मैं सेठजी की रखैल अभी से बन जाती हूँ। वरना भी बन जाऊँगी, लेकिन बाप के अनजाने में नहीं करना चाहती। तुम बस पापा को पैसा दिखाना... मुझे पैसा से मतलब नहीं, मुझे तो मोटे-मोटे लंडों से मतलब है... मेरे दोनों छेद अच्छे से चुदते रहें, बस।”

पुष्पा ने बेटी को ऊपर खींचकर गहरी किस की और बोली,

“वैसे बेटी तुम एक वेश्या से भी बदतर सोच रही हो फिर भी ठीक है बेटी... मौका मिलते ही पापा से बात करूँगी। मुझे नहीं लगता कि पैसों के सामने वो ज्यादा विरोध कर पाएंगे। जो तुम्हें हर महीने मिलेगा, उसमें से कुछ उन्हें भी दे देंगे। वो भी खुश, तेरा माल भी खुश...”

पूनम ने माँ की चूत में तीन उँगलियाँ डालकर तेजी से फक करते हुए कहा,

“हम्म... लेकिन मुझे सेठजी को जवाब देना है माँ। जो भी करना है, जल्दी करना।”
फनलवर की रचना है

पुष्पा ने बेटी को चूमते हुए जवाब दिया,

“अरे बेटी डरती क्यों है! तू जा के सेठजी को बता दे कि तू उनकी रखैल बनने के लिए तैयार है। जब पापा तैयार हो जाएँगे, तब उन्हें बताएँगे। आज से पूनम सेठजी का माल है... और वो जिससे चाहे, जितनी बार चाहे चुदवा सकती है। बात खत्म। मुझे कोई एतराज बही है, तुम चाहो तो सेठजी को यहाँ लाके भी चुदवा सकती हो पर ध्यान रहे तेरी छोटी बहन भी है और यह लोडो को चूत से काफी मतलब होता है और मैं नहीं चाहती की मेरी दूसरी बेटी भी ऐसे ही किसी के सामने अपनी चूत को खोले बेटी, वह परम का माल है और परम के खूंटे से ही लटकने दे।”

ऐसे ही दोनों माँ-बेटी एक-दूसरे की चूत चाटते, उँगलियाँ डालते, स्तन चूसते, गांड में उँगली करते और बेहद गंदी-गंदी बातें करते हुए नंगे ही एक-दूसरे से लिपटकर सो गए...



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यही तक दोस्तों


फिर मिले तब तक फूँलवर के जय भारत।।
 
दोस्तों लंबा अपडेट्स दिए है। प्रसंग को पूरा करने की पूरी कोशिश की गई है



आशा है की आप सबको पसंद आएगा। आपकी कमेन्ट की प्रतीक्षा सह:
 
चलिए दोस्तों कहानी को थोडा आगे ले जाते है
 
उधर सेठजी के घर से वापसी के बाद - महक के घर पर (आप सब को याद ही होगा)



पूनम और उसके परिवार को छोड़ने के बाद ड्राइवर ने कार महक के घर की तरफ मोड़ दी। पीछे की सीट पर महक, उसके पिता मुनीम और वो नया आदमी - बबलू - बैठे थे।
फनलवर की प्रस्तुति



कार घर के गेट पर रुकी। महक ने दरवाजा खोला और थोड़ी शर्म के साथ बबलू की तरफ देखा। फिर नरम आवाज में बोली, “अंदर आइए...”

मुनीम ने बेटी का हाथ पकड़कर बबलू से परिचय कराया, “ये मेरी बड़ी बेटी महक है। और बबलू, ये कोलकाता का है। सेठजी के कुछ काम से आया है। सेठजी ने कहा है कि आज रात इसे हमारे यहाँ ही ठहरा लो।”

बबलू ने महक को ऊपर से नीचे तक घूरा। महक ने साड़ी में अपनी भरी-भरी देह को छुपाने की कोशिश की, लेकिन उसके भारी स्तन, पतली कमर और चौड़े नितंब साड़ी के नीचे भी साफ झलक रहे थे।

महक ने पूछा, “आपको कुछ चाहिए?”

मुनीम ने तुरंत कहा, “बेटी, दो गिलास, बर्फ और कुछ नमकीन ले आ।”

महक को मकसद समझ में आ गया। पिता और मेहमान शराब पीने वाले थे। वह रसोई गई और दो गिलास, बर्फ का डिब्बा, काजू-मूंगफली की दो प्लेटें और कुछ चिप्स ले आई।

उसने पिता से कहा, “मैं सोने जा रही हूँ। बबलू भैया के जाने से पहले मुझे जगा देना।”

महक ने जाते-जाते एक बार फिर बबलू की तरफ देखा। वो करीब 5'8" लंबा, हृष्ट-पुष्ट, मजबूत बाँहों वाला, चौड़े कंधों वाला गोरा युवक था। उसके घने बाल और आकर्षक चेहरा देखकर महक के मन में एक अजीब सी सिहरन हुई।

महक अपने कमरे में गई। उसने साड़ी उतारकर फेंक दी। अब वह सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। टॉयलेट जाने के लिए वह बाहर निकली। उसके उछलते हुए स्तन और कसे हुए नितंब देखकर बबलू और मुनीम दोनों का खून गरम हो गया।

महक ने टॉयलेट से वापस आते हुए बबलू की तरफ देखा तक नहीं, लेकिन बबलू की नजरें उसके झूलते स्तनों और नितंबों पर टिकी हुई थीं। महक कमरे में घुसी और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।
कथाकार फनलवर है

अंदर जाकर उसने ब्लाउज और पेटीकोट भी उतार दिया। सिर्फ एक बहुत पतला, पारदर्शी सूती टॉप पहना, जिससे उसके निप्पल साफ दिख रहे थे। फिर वह बिस्तर पर लेट गई और जल्दी ही नींद में चली गई।

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बाहर ड्राइंग रूम में

मुनीम और बबलू शराब पी रहे थे। दोनों पुराने जान-पहचान वाले थे। बबलू एक दलाल था - शादी-ब्याह और पार्टी में लड़कियाँ और गायिकाएँ सप्लाई करता था।

बबलू ने शराब का घूँट लेते हुए बताया, “इस बार छोटे भाई ने मुझे बताया था कि 10-15 अच्छी गायिकाएँ चाहिए। लेकिन सेठजी और परम ने खुद 15 लड़कियाँ बुक कर लीं। पिछली बार मेरी दी हुई लड़कियों से बाराती संतुष्ट नहीं हुए थे। इस बार मैं बेहतर और कम उम्र की माल लाता, लेकिन सेठजी को परम पर ज्यादा भरोसा है।”

शराब बढ़ती गई। गर्मी भी ज्यादा थी। दोनों ने शर्ट उतार दी और सिर्फ अंडरवियर में बैठ गए।

बबलू ने एक बैग खोला और उसमें से करीब 100 नंगी लड़कियों की तस्वीरें निकालीं। सारी तस्वीरें मेज और बिस्तर पर बिखेर दीं।

“देखिए मुनीम भाई... ये कोलकाता और दिल्ली की टॉप क्लास रंडियाँ हैं। अगली बार जब आप आएँ, तो मैं आपको मुफ्त में नया-नया माल दिलवाऊँगा।”
फनलवर की पेशकश

मुनीम शराब के नशे में तस्वीरें देख रहा था। बबलू की पैंटी में उसका मोटा उभार साफ दिख रहा था। दोनों की नजरें बार-बार महक के कमरे की तरफ जा रही थीं...

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जुड़े रहिये दोस्तों.


फूँलवर.
 
महक के कमरे में - रात



महक ने दरवाजा बंद करते ही एक गहरी साँस ली। कमरे में सिर्फ हल्की नीली नाइट लैंप जल रही थी। उसने पतला सूती टॉप पहन रखा था, जो उसके घुटनों तक पहुँच रहा था। अंदर कुछ नहीं था - न ब्रा, न पैंटी।

वह बिस्तर पर लेट गई, लेकिन नींद नहीं आ रही थी।
फनलवर द्वारा लिखित

उसके मन में तूफान चल रहा था।

“ये बबलू... कौन है ये? इतना तगड़ा, गोरा, चौड़े कंधे... और वो उभार... अंडरवियर में साफ दिख रहा था।”

महक ने आँखें बंद कीं। उसके हाथ अनजाने में ही अपनी जाँघों पर घूमने लगे।

“आज दिन भर कितनी चुदाई हो गई... सुबह पापा ने चोदा, फिर परम ने ऑफिस में जोर-जोर से फाड़ा, सेठजी के घर पर भी नजरें घूम रही थीं... और अब ये नया आदमी घर में...”

उसकी साँसें भारी हो गईं। टॉप को ऊपर सरकाकर उसने अपनी एक भारी चुची को हाथ में ले लिया और निप्पल को हल्के से मरोड़ने लगी।

“मैं क्या हो गई हूँ... पहले तो शर्म भी आती थी, अब हर मोटे लंड को देखकर मेरी चूत गीली होने लगती है। मुनीम पापा का लंड... परम का मोटा लंड... और आज सेठजी का... सब अलग-अलग, सब मजेदार...”

महक ने टाँगें थोड़ी फैला दीं। उसकी चूत पहले से ही गीली थी। उसने एक उँगली अपनी चूत की फाँक पर रखी और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी।

“बबलू... उसकी उम्र मेरे जितनी ही होगी... शरीर इतना हट्टा-कट्टा... अगर वो मुझे चोदना चाहे तो...?”

उसके मन में एक गंदा ख्याल आया - बबलू उसके कमरे में आता है, उसे नंगा करता है, उसके मोटे लंड को उसके मुँह में ठूँसता है, फिर उसे कुत्ते की तरह चोदता है...

“आह्ह्ह...” महक ने अनायास कराह ली। उसकी उँगली अब चूत के अंदर जाने लगी थी।

“मैं कितनी गिरी हुई हो गई हूँ... पापा की बेटी हूँ, फिर भी हर नए मर्द को देखकर मेरी चूत पागल हो जाती है। परम मुझे चोदता है, पापा चोदते हैं, सेठजी चोदते हैं... अब ये बबलू भी...”

उसने दूसरी उँगली भी अंदर डाल दी और तेजी से फक करने लगी। उसकी दूसरी hand अब अपनी गांड के छेद पर थी।

“मुझे लगता है... मैं अब रंडी बन गई हूँ... लेकिन अच्छा लग रहा है। बहुत अच्छा लग रहा है। जब कोई मोटा लंड मेरी चूत में घुसता है, तब लगता है जैसे मैं स्वर्ग में हूँ।”
फनलवर की रचना

महक की साँसें तेज हो गईं। उसकी कमर उठ-उठकर हिलने लगी।

“बबलू... अगर आज रात वो मेरे कमरे में आ जाए... मुझे पकड़कर चोद दे... मेरी चूत फाड़ दे... मेरी गांड में लंड डाल दे... तो मैं क्या करूँगी? विरोध करूँगी या चुपचाप टाँगें फैला दूँगी?”

उसके मन में गहरी बेचैनी और कामुकता का मिश्रण था। वह जानती थी कि वह बदल गई है। पहले की शर्मीली महक अब नहीं रही। अब वह एक ऐसी लड़की बन गई थी जिसकी चूत हर नए लंड की भूखी थी।

“कल सुबह वो जाएगा... लेकिन अगर वो रुक जाए... तो...?”

महक ने आखिरी बार जोर से उँगलियाँ हिलाईं और एक लंबी कराह के साथ झड़ गई। उसके चूत का रस जाँघों पर बह गया।

वह पसीने से तर होकर लेटी रही। आँखें बंद।
मैत्री द्वारा एडिटेड

“मैं अब रंडी बन चुकी हूँ... और मुझे इसमें मजा आ रहा है...”



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जुड़े रहिये दोस्तों

फूँलवर.
 
उधर महक के घर पर - ड्राइंग रूम में रात

मुनीम और बबलू शराब पीते हुए काफी नशे में आ चुके थे। कमरे में व्हिस्की और रम की तेज महक फैली हुई थी। दोनों सिर्फ अंडरवियर में थे। फनलवर रचित कहानी

मुनीम ने बबलू के अंडरवियर की तरफ देखते हुए शराब का घूँट लिया और मुस्कुराते हुए बोला,

“अरे बबलू... तेरा डंडा तो बहुत मस्त लगता है यार...! इतना मोटा और लंबा... पैंटी फाड़कर बाहर आने को तैयार है।”

बबलू ने हँसते हुए अपना लंड ऊपर से सहलाया और गर्व से बोला,

“हाँ भाई... चूँकि मैं रंडियों के बीच रहता हूँ, इसलिए रोज नया-नया माल चोदता हूँ। इतनी प्रैक्टिस के बाद मेरा लंड हमेशा तैयार रहता है। कोई भी लड़की हो - 18 की हो या 40 की - मैं उसे खूब जोर-जोर से चोद सकता हूँ।”

बबलू ने मुनीम की तरफ देखा और पूछा,

“तुम... अपने घरवाली के अलावा किसी और को रगड़ते हो क्या?”

मुनीम ने शराब का घूँट लेते हुए मुस्कुराते हुए जवाब दिया,

“घरवाली तो अब बोर कर चुकी है... पहले बहुत मजा आता था, अब कुछ नहीं मिलता। लेकिन भगवान ने मुझ पर मेहरबानी कर दी है। अब मैं कुछ बहुत कम उम्र की, टाइट और रसीली चूतों को चोद रहा हूँ... सब मेरी बेटी महक की सहेलियाँ हैं।”

मुनीम ने अपना लंड अंडरवियर के ऊपर से सहलाते हुए गर्व से कहा,

“जिन लड़कियों को मैंने चोदा है, वे सब अब नियमित रूप से मेरे पास आने लगी हैं। कहती हैं - ‘मुनीमजी, आपका लोडा और खासकर आपका सुपारा बहुत मस्त है... कोई भी माल नंगी हो जाएगी इस मस्त लौड़े को देखकर...’”

बबलू की आँखें चमक उठीं। उसने मुनीम के अंडरवियर की तरफ देखते हुए कहा,

“जरा मैं भी तो देखूँ तुम्हारा लंड और सुपारा...”

दरअसल बबलू उभयलिंगी (Bisexual) था। सालों पहले जब उसकी बहन पहली बार ‘बहू बाजार’ में चुदी थी, तब दलालों ने उसकी गांड भी मारी थी। उसके बाद उसने अपनी बहन को अपनी रंडी बना लिया और दोनों पति-पत्नी की तरह रहने लगे। अब वह मर्दों और औरतों दोनों को चोदता था।
फनलवर की प्रस्तुति

वो मुनीम का लंड देखना चाहता था और अगर मौका मिला तो उसकी गांड भी मारना चाहता था।

दोनों और शराब पीने लगे। नशा बढ़ता जा रहा था।

लगभग दो घंटे बाद...

महक की नींद अचानक टूट गई। पिछले कुछ महीनों से वह अकेले सोने की आदत खो चुकी थी। हर रात किसी न किसी के साथ - परम, पापा, सुंदरी या सहेलियों के साथ - सेक्स करके सोती थी। आज अकेले बिस्तर पर लेटे हुए उसे बेचैनी हो रही थी। उसकी चूत हल्की-हल्की खुजला रही थी।

वह उठी, पतला टॉप ठीक किया (जिससे उसके निप्पल साफ दिख रहे थे) और बाहर ड्राइंग रूम की तरफ गई।

वहाँ पहुँचकर उसने देखा - पापा और बबलू दोनों नशे में थे। कमरे में शराब की बोतलें, गिलास और सैकड़ों नंगी लड़कियों की तस्वीरें बिखरी पड़ी थीं।

महक ने आश्चर्य से कहा,

“क्या जी... इतनी रात हो गई है और आप लोग अब तक सोए नहीं?”

बबलू को संबोधित करते हुए बोली,

“आपको 6 बजे जाना है ना? अभी 2 बज रहे हैं... कब सोएँगे?”

महक ने उन्हें शराब बंद करने और सोने की सलाह दी।
संपादिका मैत्री

जब वह मुड़कर जाने लगी, तो उसकी नजर बिखरी हुई नंगी तस्वीरों पर पड़ी। वह झुक गई और फोटो इकट्ठा करने लगी।

झुकते ही उसका पतला टॉप और ऊपर चढ़ गया। उसकी भारी चूचियाँ लगभग आधे बाहर आ गईं। पीठ के बटन खुले हुए थे, जिससे उसकी गोरी पीठ और कमर का निचला हिस्सा साफ दिख रहा था।

बबलू की साँसें भारी हो गईं। उसका लंड अंडरवियर में फड़कने लगा। मुनीम भी अपनी बेटी की झूलती चूचियों और नितंबों को देख रहा था।

महक ने एक फोटो उठाकर देखी - एक नंगी लड़की कुत्ते की तरह घुटनों पर बैठी हुई थी और एक मोटा लंड उसकी चूत में घुसा हुआ था।

“किसका फोटो है ये? कौन हैं ये औरतें...?” महक ने पूछा।

बबलू ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,

“ये सब प्रोफेशनल रंडियाँ हैं... कोलकाता और दिल्ली की टॉप क्लास...”

महक ने फोटो देखते हुए सोफे के कोने पर बैठ गई। उसकी जाँघें थोड़ी खुली हुई थीं।

“आप बाबूजी को ये गंदी फोटो दिखाने लाए हैं?”

बबलू ने महक की जाँघों और उभरी चूचियों को घूरते हुए सब कुछ बताया - वह क्यों आया है, सेठजी के लिए लड़कियाँ सप्लाई करता है, आदि।

महक की नजर बबलू के अंडरवियर पर पड़ी। उसका मोटा, खड़ा लंड साफ उभरा हुआ था। फिर उसने पिता की तरफ देखा - पिता का भी अंडरवियर तना हुआ था।

महक शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसकी चूत में एक गर्म लहर दौड़ गई। रचयिता फनलवर है

“आप... रंडियों के दलाल हैं...?” महक ने बबलू से पूछा, उसकी आवाज थोड़ी काँप रही थी।

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आज के लिए यही तक।

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फूँलवर की ओर से जय भारत।।
 
आशा है की ये एपिसोड आपका विक एंड अच्छा बना सकेगी

आपके मंतव्यो की प्रतीक्षा सह.........................
 
पूनम के कमरे में



पूनम जाग रही थी। वह छत की तरफ देखते हुए सोच रही थी कि वह कितनी बदल गई है। फनलवर की प्रस्तुति

कुछ महीने पहले तक वह एक शर्मीली, पवित्र और कुंवारी लड़की थी। उसकी चूत और गांड बिलकुल साफ़ थी।

लेकिन अब सब कुछ बदल चुका था। पहले मुनीमजी के मोटे, नसों वाले लंड ने उसकी कुमारी चूत को फाड़ा। उसने याद किया कैसे मुनीमजी ने उसे घुटनों के बल बैठाकर अपने मोटे लंड को उसके मुंह में ठूंस दिया था, फिर उसकी जांघें चीरते हुए अंदर घुस गया। फिर उसी रात परम के बड़े लंड ने उसे दो बार चोदा। परम ने उसकी चूत को चाटते हुए गीला किया, फिर जोर-जोर से धक्के मारे थे, उसका शरीर हिलता रहा था। आज सेठाजी ने उसे अपनी रखैल बनने का प्रस्ताव दिया और वह बिना हिचकिचाहट के मान गई। सेठाजी के ऑफिस में खान के साथ मिलकर उन्होंने उसे चोदा था, दोनों लंड एक साथ उसकी चूत और मुंह में घुसते रहे।

उसे चुदाई अब बहुत पसंद आने लगी थी। खासकर मुनीमजी के साथ हुई चुदाई उसे सबसे ज्यादा भाती थी। आज तीन अलग-अलग आदमियों से चुदने के बावजूद भी उसकी चूत अभी भी मुनीमजी के लंड की भूखी थी। उसका शरीर अब आनंद लेने लगा था। अलग-अलग मोटे लंडों से चुदाई का उसे मजा आने लगा था। वह सोच रही थी कि कैसे मुनीमजी का मोटा लंड उसकी चूत को भर देता है, नसें रगड़ती हैं, और जब वह झड़ता है तो गर्म सहवास अंदर भर जाता है। पूनम की सोच में गहरी भावनाएं उमड़ रही थीं, वह महसूस कर रही थी कि मुनीमजी का लंड ही उसे सबसे ज्यादा संतुष्ट करता है, उसकी चूत की हर कोशिका उसकी मोटाई और नसों की रगड़ से कांप उठती है, वह चाहती थी कि मुनीमजी उसे बार-बार चोदें, उसकी चूत को फाड़ते हुए अंदर गहराई तक घुसकर गर्म सहवास से भर दें, यह कामुकता उसे और भी ज्यादा लुभा रही थी, वह सोचती कि उसका शरीर अब सिर्फ चुदाई के लिए बना है, अलग-अलग लंडों का स्वाद लेना उसे रोमांचित करता है, खासकर मुनीमजी का जो उसे पहली बार औरत बनाया, उसकी इच्छा थी कि मुनीमजी उसे अपनी रखैल की तरह इस्तेमाल करें, उसकी चूत को बार-बार अपना बना लें। वह सोच रही थी की अगर मुनीमजी उसे राकहिल बनाने का प्रस्ताव रखे तो वह सहर्ष सिवार कर लेगी। और उसके लिए वह जमाने से लड़ ने को तैयार थी। किसी भी बदनामी को सहने को तैयार थी।

आज यह परिस्थिति है की मैं अब लंड के बिना रह नहीं सकती। उसका श्रेय भी मुनीम को ही जाता है। अगर वह ना चोदते तो आज मैं इस परिस्थिति में नहीं आती। और यह सेठजी और उसका दोस्त उसकी चूत चोद सकते है पर मेरा मन नहीं चोद सकते। यह तोसिर्फ मुनीमजी या फिर परम ही कर सकता है। मैं उन दोनों बाप-बेटे से मन से शादी कर चुकी हूँ। और हो सकेगा तो मैं मुनीमजी के लंड से छुटी धार से बच्चा भी रखने को तैयार हूँ। लेकिन मुनीमजी तैयार नहीं। वह तो यह तक कह रहे है की हमारे रिश्तो की बात किसी से नहीं करना है बस चुदवा के चले जाना है। दुनिया की नजर में शरीफ ही रहना है उस मादरचोद को।

जब सेठाजी ने उसे अपनी रखैल बनाने की बात कही तो वह मन ही मन खुश हो गई थी। उसने सोचा कि उसकी माँ को उसकी रंडीपन के बारे में पता चल ही गया होगा। उसने सेठजी और खान के साथ हुई चुदाई के बारे में किसी को नहीं बताया था - न महक को, न किसी और को। वह यह राज सिर्फ अपनी माँ तक ही सीमित रखना चाहती थी। उसने तय किया की वह अपना सब पाप (मुनीमजी के सिवा) सब बता देगी और इस पाप के भर से छूटेगी। अगर मैंने किसी को नहीं बताया तो मैं मन ही मन घुट कर मर जाउंगी। एक तो द्वार होना चाहिए जहा मैं नंगी हो कर सब कुछ बता सकू। माँ को यह भी बताना चाहती हूँ की अब मेरा शरीर मेरे छेद लंड के बिना सही तरीके से काम नहीं कर सकते। लेकिन मैं उतनी बेकाबू रंडी भी नहीं बनना चाहती।

माँ से कह दूंगी की मैं सिर्फ परम और सेठजी के लंड से खुश रहेगी। मैं सेठजी की रखैल बन कर पैसा भी कम सकुंगी और परम जैसे लंड से संतुष्ट भी रह पाउंगी। मुझे आशा है की माँ मुझे मन नहीं करेगी। और हो भी सकता है की मैं सेठजी को माँ की चूत भी दे दू अगर माँ चाहे तो। परम ने तो माँ की चूत का भोसड़ा बना ही दिया होगा। मुझे इस से कोई जलन नहीं है की परम किस किस को चोदता है वह सिर्फ मुझे चोदता रहे बस। माँ को भी चोदे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता आखिर माँ की चूत है और माँ जाने।

तभी उसे माँ की आवाज सुनाई दी। रचयिता फनलवर है

पुष्पा कमरे में घुसी। सिर्फ पतला पेटीकोट पहने हुए, जिसके अंदर से उसके भारी स्तन और काले निप्पल्स साफ दिख रहे थे। पेटीकोट इतना पतला था कि उसकी जांघों की दरार और गोल-गोल नितंब साफ नजर आ रहे थे।

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जुड़े रहिये दोस्तों.



फूँलवर
 
उधर महक के घर पर - ड्राइंग रूम में रात

मुनीम और बबलू शराब पीते हुए काफी नशे में आ चुके थे। कमरे में व्हिस्की और रम की तेज महक फैली हुई थी। दोनों सिर्फ अंडरवियर में थे। फनलवर रचित कहानी।

मुनीम ने बबलू के अंडरवियर की तरफ देखते हुए शराब का घूँट लिया और मुस्कुराते हुए बोला,

“अरे बबलू... तेरा डंडा तो बहुत मस्त लगता है यार...! इतना मोटा और लंबा... पैंटी फाड़कर बाहर आने को तैयार है।”

बबलू ने हँसते हुए अपना लंड ऊपर से सहलाया और गर्व से बोला,

“हाँ भाई... चूँकि मैं रंडियों के बीच रहता हूँ, इसलिए रोज नया-नया माल चोदता हूँ। इतनी प्रैक्टिस के बाद मेरा लंड हमेशा तैयार रहता है। कोई भी लड़की हो - 18 की हो या 40 की - मैं उसे खूब जोर-जोर से चोद सकता हूँ।”

बबलू ने मुनीम की तरफ देखा और पूछा,

“तुम... अपने घरवाली के अलावा किसी और को रगड़ते हो क्या?”

मुनीम ने शराब का घूँट लेते हुए मुस्कुराते हुए जवाब दिया,

“घरवाली तो अब बोर कर चुकी है... पहले बहुत मजा आता था, अब कुछ नहीं मिलता। लेकिन भगवान ने मुझ पर मेहरबानी कर दी है। अब मैं कुछ बहुत कम उम्र की, टाइट और रसीली चूतों को चोद रहा हूँ... सब मेरी बेटी महक की सहेलियाँ हैं।”

मुनीम ने अपना लंड अंडरवियर के ऊपर से सहलाते हुए गर्व से कहा,

“जिन लड़कियों को मैंने चोदा है, वे सब अब नियमित रूप से मेरे पास आने लगी हैं। कहती हैं - ‘मुनीमजी, आपका लोडा और खासकर आपका सुपारा बहुत मस्त है... कोई भी माल नंगी हो जाएगी इस मस्त लौड़े को देखकर...’”

बबलू की आँखें चमक उठीं। उसने मुनीम के अंडरवियर की तरफ देखते हुए कहा,

“जरा मैं भी तो देखूँ तुम्हारा लंड और सुपारा...”

दरअसल बबलू उभयलिंगी (Bisexual) था। सालों पहले जब उसकी बहन पहली बार ‘बहू बाजार’ में चुदी थी, तब दलालों ने उसकी गांड भी मारी थी। उसके बाद उसने अपनी बहन को अपनी रंडी बना लिया और दोनों पति-पत्नी की तरह रहने लगे। अब वह मर्दों और औरतों दोनों को चोदता था। फनलवर की प्रस्तुति।

वो मुनीम का लंड देखना चाहता था और अगर मौका मिला तो उसकी गांड भी मारना चाहता था।

दोनों और शराब पीने लगे। नशा बढ़ता जा रहा था।

लगभग दो घंटे बाद...

महक की नींद अचानक टूट गई। पिछले कुछ महीनों से वह अकेले सोने की आदत खो चुकी थी। हर रात किसी न किसी के साथ - परम, पापा, सुंदरी या सहेलियों के साथ - सेक्स करके सोती थी। आज अकेले बिस्तर पर लेटे हुए उसे बेचैनी हो रही थी। उसकी चूत हल्की-हल्की खुजला रही थी।

वह उठी, पतला टॉप ठीक किया (जिससे उसके निप्पल साफ दिख रहे थे) और बाहर ड्राइंग रूम की तरफ गई।

वहाँ पहुँचकर उसने देखा - पापा और बबलू दोनों नशे में थे। कमरे में शराब की बोतलें, गिलास और सैकड़ों नंगी लड़कियों की तस्वीरें बिखरी पड़ी थीं।

महक ने आश्चर्य से कहा,

“क्या जी... इतनी रात हो गई है और आप लोग अब तक सोए नहीं?”

बबलू को संबोधित करते हुए बोली,

“आपको 6 बजे जाना है ना? अभी 2 बज रहे हैं... कब सोएँगे?”

महक ने उन्हें शराब बंद करने और सोने की सलाह दी। संपादिका मैत्री।

जब वह मुड़कर जाने लगी, तो उसकी नजर बिखरी हुई नंगी तस्वीरों पर पड़ी। वह झुक गई और फोटो इकट्ठा करने लगी।

झुकते ही उसका पतला टॉप और ऊपर चढ़ गया। उसकी भारी चूचियाँ लगभग आधे बाहर आ गईं। पीठ के बटन खुले हुए थे, जिससे उसकी गोरी पीठ और कमर का निचला हिस्सा साफ दिख रहा था।

बबलू की साँसें भारी हो गईं। उसका लंड अंडरवियर में फड़कने लगा। मुनीम भी अपनी बेटी की झूलती चूचियों और नितंबों को देख रहा था।

महक ने एक फोटो उठाकर देखी - एक नंगी लड़की कुत्ते की तरह घुटनों पर बैठी हुई थी और एक मोटा लंड उसकी चूत में घुसा हुआ था।

“किसका फोटो है ये? कौन हैं ये औरतें...?” महक ने पूछा।

बबलू ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,

“ये सब प्रोफेशनल रंडियाँ हैं... कोलकाता और दिल्ली की टॉप क्लास...”

महक ने फोटो देखते हुए सोफे के कोने पर बैठ गई। उसकी जाँघें थोड़ी खुली हुई थीं।

“आप बाबूजी को ये गंदी फोटो दिखाने लाए हैं?”

बबलू ने महक की जाँघों और उभरी चूचियों को घूरते हुए सब कुछ बताया - वह क्यों आया है, सेठजी के लिए लड़कियाँ सप्लाई करता है, आदि।

महक की नजर बबलू के अंडरवियर पर पड़ी। उसका मोटा, खड़ा लंड साफ उभरा हुआ था। फिर उसने पिता की तरफ देखा - पिता का भी अंडरवियर तना हुआ था।

महक शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसकी चूत में एक गर्म लहर दौड़ गई। रचयिता फनलवर है।

“आप... रंडियों के दलाल हैं...?” महक ने बबलू से पूछा, उसकी आवाज थोड़ी काँप रही थी।

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आज के लिए यही तक।

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फूँलवर की ओर से जय भारत।।
यह आप क्यों लख रहे है मुझे नहीं पता


अगर आप को जी पेस्ट करना है तो मैं ना लिखू यहाँ......................

Funlove
 
यह आप क्यों लख रहे है मुझे नहीं पता


अगर आप को जी पेस्ट करना है तो मैं ना लिखू यहाँ......................


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sorry vo system mai track mai mai nikalna bhul gaya next time nahi honga
 
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