Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 149 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

मेरी कहानी गोसिप पर पेस्ट हो रही है बस इतना पता है
 
जी हां बिलकुल

वैसे कहानी में यही कहना था की परवश और लस्ट , और अति उत्साह, कामाग्नि के आगे दिमांग काम करना बंद कर देता है. क्या सोचते है और क्या होता है.

जो अपने पर काबू रख सकता है वह जित जाता है..............

शुक्रिया दोस्त
 
शुक्रिया दोस्त

आपको और सभी पाठको को मजा आया मतलब मेरा प्रयास सफल......................
 
बस थोड़ी ही देर में आगे बढ़ेंगे
 
चलिए दोस्तों कहानी को थोडा आगे लेके जाते है
 
महक मुस्कुराई उसकी चूत भी मुस्कुराई ऐसा उसे प्रतीत हुआ....और कुछ भी सोचे बिना उसका एक हाथ अपने पेट पर चला गया। वह मुस्कुराई और मन में हो बोली बाबूजी मैंने पिल्स ले ली है, आपका छोटा यहाँ नहीं हो पायेगा। और वह विनोद के बारे में सोचा जो पिछले चार दिनों से उससे नहीं मिला है। परम ने उसे बताया था कि विनोद कोलकाता गया है और कल बुधवार को लौटेगा।

उसने पूरा दिन विनोद के साथ बिताने का फैसला किया।

अब आगे.......................

परम के साथ पैडल रिक्शा में अपने घर जाते हुए, सलोनी ने पिछली रात की हर घटना का ज़िक्र किया और उसे इतनी बेरहमी से चोदने के लिए डाँटा भी लेकिन सलौनी और मुनीम ही जानते थे की कौन जुल्मी था। उसने परम को बताया कि कैसे उन तीनों लड़कियों ने मुनीम को बहकाया। सलोनी ने बताया कि मुनीम इतना उत्तेजित हो गया था कि वह तीन बार झड़ गया और जब महक ने सचमुच उससे चुदवाना चाहा, तब भी उसका लंड ढीला ही रहा। इतना ही नहीं, सलोनी पूरी रात मुनीम के साथ नंगी सोई, उसने उसकी चूत और चुची भी चूसी, लेकिन उसका लंड चुदाई के लिए तैयार नहीं हो पाया।



सलोनी ने बताया कि महक को अपने पिता के लोडे से चुदते देखकर और उनसे चुदने की इच्छा होने के बाद, उसने भी अपने पिता से पहली चुदाई करवाने का फैसला कर लिया था। लेकिन परम ने उसकी चूत फाड़ दी। उसने परम को उसके आनंद और संतुष्टि के लिए धन्यवाद दिया। उसने बताया कि उसे पहली चुदाई के बाद और दूसरी चुदाई में बहुत मज़ा आया।
फनलवर की पेशकश



"फिर कब चोदोगे मुझे?" सलोनी ने पूछा।

"जल्दी....अब तुझे चुदते रहना है क्या?" परम ने अपनी चूत सलवार के ऊपर से दबाई और कहा कि जब भी वह उसके घर आएगी, वह उससे प्यार करेगा।

लेकिन सलोनी ने परम के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उसने कहा कि अब जब भी सलोनी परम के घर आएगी, मुनीम उसे ज़रूर चोदेगा और उसे अपने बेटे और बाप, दोनों के साथ चुदाई करने में ज़रा भी दिलचस्पी नहीं है। इसके अलावा, सलोनी ने कहा कि एक बार परम के घर में आकर वह महक को उसे बिगाड़ने से नहीं रोक पाएगी।

"परम, तेरी बहन महक किसी भी लड़की को रंडी बना सकती है।" सलोनी ने पूरे विश्वास के साथ कहा कि अगर परम सलोनी को दोबारा चोदना चाहता है, तो उसे उसके घर में ही चोदना होगा।

“तब तो मुझे प्रभा काकी को पटाना होगा तभी तो तुम्हें तुम्हारे घर में चोद पाऊंगा।” परम फुसफुसाया।।

“माँ को कैसे पटाना है तुम जानो, लेकिन मुझे हर हफ्ते कम से कम एक बार तुम्हारा लंड चाहिए…चूत और मुँह में।”

सलोनी परम के साथ चुदाई के लिए तैयार थी लेकिन अपने घर पर ही।

वे सलौनी के घर पर उतरे। प्रभा ने परम के गालों को थपथपाया, उसके माथे को चूमा और डांटा कि वह उन्हें भूल गया है।

"बेटा, कितने दिनों के बाद आया है!" उसने परम को अंदर खींच लिया। लेकिन परम को देखते हुए वह सलौनी की चाल की तरफ देखना भूल गई थी शायद। या फिर अनदेखा किया पता नहीं। लेकिन अगर देखती तो पता चल जाता की वह कितनी बड़ी औरत बनकर आई है।

“मां, मैं रात भर नहीं सोई। उन दोनों के साथ बहुत मजा आया। मैं सोने जा रही हूं....”
फनलवर की प्रस्तुति



सलोनी अपने कमरे में चली गयी। अंदर से दरवाज़ा बंद किया, कपड़े उतारे और बिस्तर पर लेट गई।

“ओह्ह्ह्ह……परम, रेखा ऐसे ही तेरे लिए पागल नहीं है…। तूने मुझे भी पागल बना दिया…। बस मुझे भी चोदता रह…।” सलौनी को परम के साथ चुदाई की याद आई और वह सो गई।

सलोनी अपनी मां के सामने परम का सामना नहीं करना चाहती थी। उसे डर था कि उसकी बेढंगी चाल से माँ को पता चल जायेगा कि उसे परम ने चोदा है। इसलिए जब वह घर में जा रही थी तब अपनी चाल को ठीक कर रही थी लेकिन वह ज्यादा ठीक नहीं कर पायी क्यों की निचे सुजन ही उतनी थी। कमरे के अंदर उसने पूरे कपड़े उतार दिए और बिस्तर पर लेट गई। पिछली रात की मस्ती, फिर मुनीम से साथ महापराक्रम और सुबह परम के साथ हुई बेहद संतुष्टिदायक चुदाई के बारे में सोचते-सोचते वह सो गयी। वह सचमुच बहुत थक गई थी। उसकी चूत अभी भी सूजी हुई थी। वह ठीक से मूत भी नहीं पाती थी। लेकिन वह मुनीम के आक्रमण से बहोत खुश थी। वह सोच रही थी की कैसे मुनीम ने एक झटके में उसका महान सुपारा से चूत में खलबली बना दी थी और कैसे उसकी झिल्ली टूटी और दर्द के बावजूद वह उसके लिपटी और मनभर के उनका लंड लिया। दर्द तो काफी था पर वह खुश भी तो बहोत थी, उसने अपनी चूत पर हाथ रखा और बोली, मेरा माल अब कैसा भी लंड हो ले सकेगी है न, तभी उसको मुनीम की उसकी गांड से की हरकतों याद आई और उसकी ऊँगली अनायास ही सही लेकिन उसकी गांड के छेद तक चली गई, उसकी गांड चुतरस से भरी हुई थी और एक ऊँगली बड़ी आराम से अन्दर तक चली गई। लेकिन वह अब स मूड में नहीं थी की वह खुद ही पानी गांड मारती। पर वह ऐसे ही मुनीम के लंड का गांड में प्रवेश के बारे में सोचते ही झड गई।

बाहर सलोनी की माँ 'प्रभा' परम के लिए कुछ खाने का सामान लेकर आईं और उसे खाने के लिए ज़ोर दिया।



शुक्रिया दोस्तों जयेइगा नहीं अभी आगे लिख रही हूँ
 
दोस्तों एक छोटा सा अपडेट लिखा है जो पोस्ट भी कर चुकी हूँ

कृपया इसे पढ़िए और अपनी राय दीजिये जब तक मैं एक और अपडेट लिख लू .......................
 
परम जब खाना खा रहा था, तब उसकी नज़र परम पर पड़ी। वह बहुत सुंदर लग रहा था और उसे लगा कि वह सलोनी के लिए एक बहुत अच्छा पति होगा। लेकिन उसे दुख हुआ कि उसकी बेटी सलोनी लगभग परम की ही उम्र की है, इसलिए वह सलोनी की शादी परम से करने के बारे में सोच भी नहीं सकती। इसके अलावा, प्रभा ने सुना था कि परम पूनम को बहुत पसंद करता है और पूनम के माता-पिता भी उसे पसंद करते हैं। लेकिन उसे शक था कि क्या मुनीम और सुंदरी पूनम और परम की शादी के लिए राज़ी होंगी क्योंकि पूनम परम से 2-3 साल बड़ी है। वह अपने बहुरंगी सपने में चली गई थी।



प्रभा को लगा कि पूनम की छोटी बहन पूमा परम के लिए बहुत अच्छी रहेगी। वे पहले से ही सलोनी के लिए एक अच्छे वर की तलाश में हैं। और अब परम जैसा कोई मिल जाए। वह कुछ अलग ही सोच रही थी की अगर परम जैसा कोई जमाई मिल जाए तो अपने आप को कैसे रोक सकेगी? क्या उसकी अन्तरंग मन में जमाई का लंड जाएगा! यह सब सोच के वह परम की ओर देखते देखते ही उसकी चूत गीली होने लगी थी।

उसे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि इस लड़के ने उसकी प्यारी सी बच्ची का कौमार्य भंग किया है और उससे पहले उसके पिता से भी बड़े एक आदमी ने सलोनी की चूत पर अपना लंड सहलाया और रगड़ा है और दोनों घंटों तक नग्न सोए हैं। उसे यह भी नहीं पता था की उसकी बेटी की चूत अभी किस हाल में है। और अभी अन्दर उसकी बेटी उसके ही पिता सामान व्यक्ति के लंड की परिकल्पना में अपनी गांड में ऊँगली डाले बैठी हुई है।
फनलवर की पप्रस्तुति।

लेकिन प्रभा परम को देखने में ज़्यादा दिलचस्पी रखती थी। उसका एक बेटा है जो सलोनी से कुछ साल छोटा है और कॉलेज गया में है। और परम के साथ अकेली होने का एहसास उसे न जाने क्यों उत्तेजित कर रहा था। वह अंदाज़ा नहीं लगा पा रही थी कि यह अपने से 18 साल छोटे लड़के के लिए यौन इच्छा की भावना है।

प्रभा की शादी लगभग 18 साल पहले कम उम्र में हो गई थी और अपने पति के अलावा उसने कभी किसी और मर्द के साथ नहीं सोया। हालाँकि, कई बार वह किसी भाग्यशाली पुरुष के हाथ को अपनी चुची, नितंबों और यहाँ तक कि साड़ी के अंदर अपनी चूत पर पड़ने से नहीं रोक पाई। ऐसी घटनाएँ ज़्यादातर होली के दौरान और अपने घर आने-जाने की रात भर की यात्रा के दौरान होती थीं। लेकिन सोना या दूसरा लंड लेना बस एक सपना ही था। वह खूब चाहती थी की कोई दूसरा लंड उसकी चूत की सफाई कर दे पर ऐसा नहीं कर पाई थी। होली में कुछ लोगो ने बस उसके बोबले से खेला और ज्यादा से ज्यादा किसी देवर या जेठ ने उसकी चूत ऊपर से ही मसली और उसे एक नए आग की ओर भेज देते थे। खेर वह सब होली या फिर शादी समारोह में ही ऐसा हो पता था। जो की आम बात हुआ करती थी।

उसे याद आया कि ऐसी यात्रा के दौरान उसने दो बार सहयात्री के धड़कते हुए लंड को मुट्ठी में भर लिया था और वीर्य उसके हाथ पर लग गया था। लेकिन, वह कभी भी चुदाई के लिए अपनी चूत खोलने की हिम्मत नहीं कर पाई। प्रभा जानती थी कि ऐसी घटना हर औरत और बड़ी लड़कियों के साथ होती है और वह यह भी जानती थी कि इलाके में कई औरतें और अविवाहित लड़कियाँ एक से ज़्यादा बार यौन संबंध बना रही हैं, और यह बात इस गाव में सामान्य सी है। लेकिन प्रभा को चुदाई का कोई ऐसा मौका नहीं मिला या यूँ कहें कि इस गाँव के किसी भी मर्द को वो सुंदरी, पुष्पा और दूसरी खूबसूरत औरतों के मुकाबले ज़्यादा आकर्षक नहीं लगी, इसलिए किसी ने भी उसे रिझाने की कोशिश नहीं की। वो होली के दिन उसके साथ मौज-मस्ती करना ज़्यादा पसंद करते थे।

परम ने खाना ख़त्म किया और प्रभा खाली प्लेट रसोई में ले गयी। वह वापस आई और सुनिश्चित किया कि सलोनी गहरी नींद में है। सलोनी को अपने बिस्तर पर नग्न अवस्था में सोते हुए देखकर उसे आश्चर्य हुआ, लेकिन खुश भी हुई की एक रात में काफी सुधार है बेटी में। लेकिन अचानक उसकी नजर उसकी बेटी की चूत पर गई, और वह डर गई, इतनी सुजन कैसे है उसकी चूत पर, क्या वह चुद गई है! क्या उसको परम ने चोद दिया होगा, या फिर कुछ बैगन या ककड़ी का मार है, जो सहेलियों के साथ मस्ती कर से हुआ है! लेकिन तभी उसको ख़याल आया की परम बहार बैठा है। उसने खिड़की का शटर खींचकर बंद कर दिया। लेकिन एक बात से खुश हुई की उसकी बेटी विकास के पथ पर चल दी है। जैसे वह करती रहती थी अपनी उम्र में बैगन से। प्रभा उसकी बेटी की चूत देख कर थोड़ी खुश हुई और नाखुश भी। वह इस लिए की कौन उसे चोद गया होगा जो उसकी चूत इतनी बड़ी सूजी पड़ी है, उसका चूत का दाना भी देखना दुरलभ ही गया है। वह काफी असमंजस में थी और शायद शाम को या परम के जाने के बाद माँ बेटी बाते करेंगे सोच के परम की नजर ना जाए इसलिए दरवाजा बंद कर दिया।
फनलवर की लेखनी है।



वह परम के पास लौट आई।

उसने परम से कहा कि सलोनी बहुत थकी हुई लगती है और अब सो रही है।

“लगता है… तीन लड़कियों ने रात भर खूब मस्ती मारी, खूब बातें की।” उसने कहा और परम से इसकी पुष्टि चाही।

“मुझे नहीं पता काकी…मैं तो सेठजी के घर पर था पूरी रात, आपको पता तो है।” परम ने प्रभा की ओर देखा और कहा कि वह माँ के साथ सेठजी के घर पर था और जब सुबह वे कुछ देर पहले वापस लौटे,सुंदरी ने उसे सलोनी को घर ले जाने के लिए कहा।

“लेकिन ये लड़की आख़िर इतना क्या बात करती है…?” मन ही मन सोच रही थी की अगर परम सेठजी के वहा था तो फिर सलौनी को कौन चोद गया होगा? क्या उसकी गांड भी...................नहीं नही............गलत मत सोच प्रभा। अपने आप से मन ही मन बाते करते हुए।

परम अब प्रभा के पास बैठ गया.....परम को चिढ़ाते हुए पूछा।

“रेखा के साथ खूब मस्ती मारा रात भर…।”

*****



दोस्तों आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए फनलवर की ओर से जय भारत।



 
दोस्तों अक ओर एपिसोड पोस्ट किया है आपके मनोरंजन के लिए

आप दोनों एपिसोड के बारे में अपनी राय दीजिये

आप को शायद लगता होगा की मैं इस कहानी को लंबा खिंच रही हूँ पर क्या करे लिखने में मजा आ रही है और सब से महत्वपूर्ण बात यह की मेरे रीडर्स भी खुश है

जानती हूँ भाई शादी करनी है परम की अनुमानित पत्नी की.................देखते है की शादी होती भी है या नहीं.................

बने रहिये
 
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