महक मुस्कुराई उसकी चूत भी मुस्कुराई ऐसा उसे प्रतीत हुआ....और कुछ भी सोचे बिना उसका एक हाथ अपने पेट पर चला गया। वह मुस्कुराई और मन में हो बोली बाबूजी मैंने पिल्स ले ली है, आपका छोटा यहाँ नहीं हो पायेगा। और वह विनोद के बारे में सोचा जो पिछले चार दिनों से उससे नहीं मिला है। परम ने उसे बताया था कि विनोद कोलकाता गया है और कल बुधवार को लौटेगा।
उसने पूरा दिन विनोद के साथ बिताने का फैसला किया।
अब आगे.......................
परम के साथ पैडल रिक्शा में अपने घर जाते हुए, सलोनी ने पिछली रात की हर घटना का ज़िक्र किया और उसे इतनी बेरहमी से चोदने के लिए डाँटा भी लेकिन सलौनी और मुनीम ही जानते थे की कौन जुल्मी था। उसने परम को बताया कि कैसे उन तीनों लड़कियों ने मुनीम को बहकाया। सलोनी ने बताया कि मुनीम इतना उत्तेजित हो गया था कि वह तीन बार झड़ गया और जब महक ने सचमुच उससे चुदवाना चाहा, तब भी उसका लंड ढीला ही रहा। इतना ही नहीं, सलोनी पूरी रात मुनीम के साथ नंगी सोई, उसने उसकी चूत और चुची भी चूसी, लेकिन उसका लंड चुदाई के लिए तैयार नहीं हो पाया।
सलोनी ने बताया कि महक को अपने पिता के लोडे से चुदते देखकर और उनसे चुदने की इच्छा होने के बाद, उसने भी अपने पिता से पहली चुदाई करवाने का फैसला कर लिया था। लेकिन परम ने उसकी चूत फाड़ दी। उसने परम को उसके आनंद और संतुष्टि के लिए धन्यवाद दिया। उसने बताया कि उसे पहली चुदाई के बाद और दूसरी चुदाई में बहुत मज़ा आया। फनलवर की पेशकश।
"फिर कब चोदोगे मुझे?" सलोनी ने पूछा।
"जल्दी....अब तुझे चुदते रहना है क्या?" परम ने अपनी चूत सलवार के ऊपर से दबाई और कहा कि जब भी वह उसके घर आएगी, वह उससे प्यार करेगा।
लेकिन सलोनी ने परम के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उसने कहा कि अब जब भी सलोनी परम के घर आएगी, मुनीम उसे ज़रूर चोदेगा और उसे अपने बेटे और बाप, दोनों के साथ चुदाई करने में ज़रा भी दिलचस्पी नहीं है। इसके अलावा, सलोनी ने कहा कि एक बार परम के घर में आकर वह महक को उसे बिगाड़ने से नहीं रोक पाएगी।
"परम, तेरी बहन महक किसी भी लड़की को रंडी बना सकती है।" सलोनी ने पूरे विश्वास के साथ कहा कि अगर परम सलोनी को दोबारा चोदना चाहता है, तो उसे उसके घर में ही चोदना होगा।
“तब तो मुझे प्रभा काकी को पटाना होगा तभी तो तुम्हें तुम्हारे घर में चोद पाऊंगा।” परम फुसफुसाया।।
“माँ को कैसे पटाना है तुम जानो, लेकिन मुझे हर हफ्ते कम से कम एक बार तुम्हारा लंड चाहिए…चूत और मुँह में।”
सलोनी परम के साथ चुदाई के लिए तैयार थी लेकिन अपने घर पर ही।
वे सलौनी के घर पर उतरे। प्रभा ने परम के गालों को थपथपाया, उसके माथे को चूमा और डांटा कि वह उन्हें भूल गया है।
"बेटा, कितने दिनों के बाद आया है!" उसने परम को अंदर खींच लिया। लेकिन परम को देखते हुए वह सलौनी की चाल की तरफ देखना भूल गई थी शायद। या फिर अनदेखा किया पता नहीं। लेकिन अगर देखती तो पता चल जाता की वह कितनी बड़ी औरत बनकर आई है।
“मां, मैं रात भर नहीं सोई। उन दोनों के साथ बहुत मजा आया। मैं सोने जा रही हूं....” फनलवर की प्रस्तुति।
सलोनी अपने कमरे में चली गयी। अंदर से दरवाज़ा बंद किया, कपड़े उतारे और बिस्तर पर लेट गई।
“ओह्ह्ह्ह……परम, रेखा ऐसे ही तेरे लिए पागल नहीं है…। तूने मुझे भी पागल बना दिया…। बस मुझे भी चोदता रह…।” सलौनी को परम के साथ चुदाई की याद आई और वह सो गई।
सलोनी अपनी मां के सामने परम का सामना नहीं करना चाहती थी। उसे डर था कि उसकी बेढंगी चाल से माँ को पता चल जायेगा कि उसे परम ने चोदा है। इसलिए जब वह घर में जा रही थी तब अपनी चाल को ठीक कर रही थी लेकिन वह ज्यादा ठीक नहीं कर पायी क्यों की निचे सुजन ही उतनी थी। कमरे के अंदर उसने पूरे कपड़े उतार दिए और बिस्तर पर लेट गई। पिछली रात की मस्ती, फिर मुनीम से साथ महापराक्रम और सुबह परम के साथ हुई बेहद संतुष्टिदायक चुदाई के बारे में सोचते-सोचते वह सो गयी। वह सचमुच बहुत थक गई थी। उसकी चूत अभी भी सूजी हुई थी। वह ठीक से मूत भी नहीं पाती थी। लेकिन वह मुनीम के आक्रमण से बहोत खुश थी। वह सोच रही थी की कैसे मुनीम ने एक झटके में उसका महान सुपारा से चूत में खलबली बना दी थी और कैसे उसकी झिल्ली टूटी और दर्द के बावजूद वह उसके लिपटी और मनभर के उनका लंड लिया। दर्द तो काफी था पर वह खुश भी तो बहोत थी, उसने अपनी चूत पर हाथ रखा और बोली, मेरा माल अब कैसा भी लंड हो ले सकेगी है न, तभी उसको मुनीम की उसकी गांड से की हरकतों याद आई और उसकी ऊँगली अनायास ही सही लेकिन उसकी गांड के छेद तक चली गई, उसकी गांड चुतरस से भरी हुई थी और एक ऊँगली बड़ी आराम से अन्दर तक चली गई। लेकिन वह अब स मूड में नहीं थी की वह खुद ही पानी गांड मारती। पर वह ऐसे ही मुनीम के लंड का गांड में प्रवेश के बारे में सोचते ही झड गई।
बाहर सलोनी की माँ 'प्रभा' परम के लिए कुछ खाने का सामान लेकर आईं और उसे खाने के लिए ज़ोर दिया।
शुक्रिया दोस्तों जयेइगा नहीं अभी आगे लिख रही हूँ।