सेठ निर्णय नहीं कर सका कि कौन बेहतर है।
“क्या रे महक…भूल गई कल बड़ी भाभी ने क्या कहा था…!” पूनम ने महक से गुस्से में कहा।
“क्या?”
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अब आगे.......
'साली बस, विनोद को याद रखो बाकी सब भूल जाओ...!'
“भाभी ने कहा था कि आज से शादी तक सबसे बड़ी लड़कियों को साडी ही पहन कर आना है… रोज रात को नाच-गाना होगा…।”
“बहुत मजा आएगा तुम लोगो को नाचते देख कर।” सेठजी ने हस्तक्षेप किया।
इस पर पूनम ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, ''बस आप मर्द सब सपने में हमारा नाच देखिए। ये नाच गाना सिर्फ लेडीज के लिए है।'' उसने अपने नयनो को पटपटाते हुए कहा।
उसने महक की ओर देखा और उसे साड़ी बदलने के लिए कहा। महक को याद आया कि भाभी ने क्या निर्देश दिया था। वह बेडरूम की ओर चली दी। पूनम ने उसका पीछा किया लेकिन महक ने पूनम को रोक दिया।
“तू कहाँ अंदर आ रही है, मादरचोद! रोज़ तो मुझे देखती है। देख कही वह चुतिया अंदर ना आ जाए, किसी का भरोसा करना नहीं चाहिए।” महक ने पूनम को रुकने और सेठजी से बात करने की सलाह दी।
महक ने दरवाज़ा बंद कर दिया और सेठजी ने पूनम को अपनी गोद में खींच लिया।
“पूनम तू बहुत सुन्दर है…।” सेठ ने गले लगाया और चूमा…”ओह आखिरी एक साल से तेरी जवानी के लिए पागल हूं।” उसने उसे अपनी बाहों में कुचल लिया। फनलवर द्वारा निर्मित।
“सेठजी छोड़िये ना…। महक देखेगी तो क्या बोलेगी…!” वह फुसफुसाई।
सेठजी ने मौके को भांप लिया। पूनम महक की तरह उनके चंगुल से छूटने के लिए संघर्ष नहीं कर रही थी, पूनम को चिंता थी कि कहीं महक उसे सेठजी के साथ आनंद लेते हुए न देख ले और सेठजी ने चुची को सहलाना और दबाना शुरू कर दिया।
“ओह बेटी, पहले तो एक सुंदरी ही पूरी गाँव को पागल कर रही थी और अब तुम भी…! तेरे निचे का माल भी तो....उफ्फ्फ।”
सेठजी ने चुची को कसकर दबाया और अपने कुर्ते के पैकेट से नोटों का बंडल निकाला और ब्लाउज के अंदर धकेल दिया… उन्होंने नंगी चुची को सहलाया और निचोड़ा। पूनम खुद को छुड़ाने की ज्यादा कोशिश नहीं कर रही थी लेकिन लगातार बंद बेडरूम के दरवाजे की तरफ देख रही थी।
“बस सेठजी, हो गया…आपका, अज्जू भी मेरी जवानी के लिए पागल है…जब भी मिलता है शादी करने की बात करता है…।” पूनम ने सेठजी का हाथ नहीं खींचा। बल्कि उसके हाथ को सही जगह पहुचने में मदद कर दी।
“हरामी बोलता है कि वो भाभी को चोदेगा मेरे लिए…बेचारी लीला भाभी तो कितनी अच्छी है…।” उसने मुस्कुराते हुए कहा।
बेटा तो अब तक हाथ भी नहीं छू पाया और बाप ने सीधा हाथ अंदर ही डाल दिया। सीधा माल पर आक्रमण!” पूनम ने उसके हाथो से अपनी निपल पर खिचाव महसूस करते हुए कहा।
“तुमको अज्जू चोदे या परम…लेकिन तुम हो बहुत मस्त माल…सारे गाँव के मरद तुमको सुंदरी जैसा पसंद करेंगे और पत्नी बनाएंगे या फिर अपनी बहू बनाकर छोड़ेंगे।”
सेठ ने निपल मसलते हुए एक बार कस कर चुमा और फिर हाथ बाहर निकाल लिया और पूनम कुछ सोचती या कहती, सेठ एक हाथ साड़ी के अंदर डाल कर चूत को मसलने लगे।
“नहीं...नहीं...” वह कराह उठी। फनलवर की रचना।
एक हाथ से चूत पर ताड़ते हुए, साथ दूसरे हाथ से उसने गले से सोने का मोटा हार निकाला और साड़ी के अंदर धकेल दिया। इस बार पूनम ने ताकत लगाई और खुद को दूर खींच लिया और बाथरूम की ओर भाग गई।
उधर सेठजी ने अपना दोनो हाथ को चूमा और चाटा, पूनम के बोबला और चूत का स्वाद लिया।
और इधर बाथरूम में पूनम दर्पण की ओर मुंह करके खड़ी थी। उसने साड़ी से हार निकाला, ब्लाउज के बटन खोले और पैसे निकाले, उसने गिना,यह 22000 था, सभी 1000 और हार कम से कम 30 ग्राम का था।
पंडित की बेटी होने के नाते, यह उनके लिए बहुत बड़ी रकम थी।
'क्या सेठजी मुझे चोद देंगे...?' उसने खुद से सवाल किया और जवाब भी दिया।
“इतना कुछ दिया है तो एक बार चुदवाना ही पड़ेगा…।”
वह मुस्कुराई, साला ये दोनों बाप बेटा (मुनीम और परम) इतना चोदा लेकिन एक पैसा भी नहीं दिया…।”
“लेकिन क्या करूं… दिल को परम पसंद है और चूत को मुनीम…। उनके दोनों बाप बेटे के लंड मेरी भूख है और वह दोनों मेरी चूत को खोदने के लिए ही है। वे जैसा चाहे....मुझे आराम से चोद सकते है।”
उसने अपनी ड्रेस व्यवस्थित की और बाहर आई और महक को देखकर चिल्लाई।
“साली मैं तेरे साथ नहीं जाऊंगी…बाप रे आज तू सारे मर्दों को बरबाद कर देगी। सब के लंड आज खाली कर देगी और वह भी धोती और पेंट में ही।”
महक ने ब्लैक और पिंक मिक्स्ड प्रिंटेड साड़ी के साथ पिंक कलर का स्लीवलेस ब्लाउज पहना हुआ था। सेठजी खुद महक से नजरें नहीं हटा सके, वाह क्या ज्यादा सेक्सी और आकर्षक लग रही है।। उन्होंने खुद से कहा।
“महक सिर्फ चुदाई के लिए है… जब कि पूनम और सुंदरी जिंदगी भर प्यार करने के लिए।”
“देखिए सेठजी गाव कि सबसे सुंदर लड़की क्या बोल रही है…।” महक सेठजी के पास आई और उसने पूनम की कमर पर हाथ रखा और पूछा।
“सेठजी आप ही बोलिये,कौन ज्यादा सुन्दर है…?”
सेठजी ने आज़ादी ली,उन्होंने दोनों युवतियों की कमर पर हाथ रखकर कहा:
"महक गरम 'गुलाब-जामुन' है और पूनम रसभरी रस-मलाई।"
लड़कियाँ सेठ की बात का मतलब समझ नहीं पाईं, लेकिन दोनों को लगा कि सेठजी उसे बाकियों से ज़्यादा पसंद करते हैं। शेठजी को महक और पूनम का माल पसंद आया है, वैसे भी महक ने तो अपना माल दे ही दिया था और सेठजी को पॉकेट और लंड से दोनों से खाली कर दिया था। वही पूनम सोच रही थी की उसको जो भी मिला है उसके बदले में उसे अपना माल खोल देना चाहिए और सेठजी का लंड का स्वाद अपनी चूत को भी देना पड़ेगा। फनलवर निर्मित।
तीनों बाहर आ गए। महक ने दरवाज़ा बंद कर दिया और तीनों बाहर इंतज़ार कर रही एक कार में बैठ गए। वो सेठजी के एक दोस्त की कार थी।
दोनों बेटों ने ड्राइवर की पत्नी के साथ और पिता ने दो सबसे ज़्यादा सर्वाधिक वांछित (most wanted) लड़कियों के साथ मज़े किए। सेठजी वाकई खुशकिस्मत थे।
पूनम महक और सेठजी के बीच बैठी थी। महक शर्मिंदा थी और अपने साथ हुई घटना पर शर्मिंदा थी, उसके पिता से बड़े आदमी ने उसे चोदा और वो खुद एक बदचलन औरत की तरह व्यवहार कर रही थी, इसलिए वो बाहर देखती रही।
सेठजी ने पूनम की जांघें दबाईं और फुसफुसाए।
"कल दो बजे मेरे ऑफिस में आना। परम तुम्हारे पास आएगा।" उन्होंने पूनम की चूत को साड़ी के ऊपर से चुटकी काटी और धीमी आवाज़ में कहा:
"कल मैं तुम्हें बहुत प्यार से चोदूँगा। किसी को पता नहीं चलेगा। डरना मत।”
न महक ने सुना, न ड्राइवर ने।
पूनम ने बस सिर हिलाया। लेकिन सोच रही थी की जिस को भेजेगा वह मेरा चुदा हुआ लड़का है उस से अब कैसे बचू? वहा मुनीम भी होगा जिस का लंड मुझे दुनिया में सब से प्यारा है। उस से कैसे बचु! देखेंगे मुनीमजी को और परम को कुछ पटा के काम करवाना होगा और सेठजी को भी पता नहीं चलना चाहिए की मुनीमजी मेरी चूत का सब से बड़ा प्रेमी है।
कार रुकते ही, दोनों लड़कियाँ अंदर भाग गईं।
“ओह आज सच में बहुत अच्छा दिन है।”
सेठ बुदबुदाया और देखा कि उसकी कार बरामदे (पोर्टिको) में खड़ी है। ड्राइवर कुछ कहना चाहता था, लेकिन सेठ ने उसे थपथपाया और बस इतना कहा,
“कोई बात नहीं।” फनलवर की रचना पढ़ रहे है।
वह उसका मूड खराब करने के मूड में नहीं था।
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आज के लिए बा यही तक कल फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ।
तब तक के लिए फनलवर की तरफ से......
।। जय भारत ।।