Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 102 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

चलिए अब आगे बढ़ते है.....................
 
पुष्पा ने कहा की वह थोड़ी ही देर के लिए आई हुई थी तो सब लोग वहा उसके घर चले। उन्होंने नाश्ता खत्म किया, तैयार हुए और सब साथ में घर से निकल पड़े। वे सब पुष्पा के घर पहुँचे। पुष्पा घर में ही रही और पूनम ने महक को पकड़ लिया और उससे साथ रहने का अनुरोध किया। उसने कहा कि शाम को वे दोनों सेठजी के घर चलेंगे। परम ने पूमा को देखा, लेकिन इससे पहले कि वह कुछ कह पाता, पुष्पा का पति बाहर आ गया। सुंदरी ने अपना सिर ढक लिया और कहा, "प्रणाम भैया" और परम ने उनके पैर छुए। आखिर वह परम के होने वाले ससुर जो थे।

*****


अब आगे.................

कुछ बातचीत के बाद परम और सुंदरी ने रिक्शा लिया और सेठजी के घर पहुँच गए। सेठजी के बेटे अभी तक नहीं लौटे थे। सेठजी भी घर पर थे। उन्होंने परम को बहुत सारा काम सौंपा और जब तक परम ने सारा काम पूरा किया, रात के खाने का समय हो गया। उन्होंने खाना खाया और पिछली रात की तरह सुंदरी और परम सेठजी के घर रुके। शाम को महक पूनम और उसकी बहन के साथ आई थीं। वहाँ और भी दोस्त थे। रेखा के साथ समय बिताने के बाद,

महक, पूनम के साथ उसके घर गई और खाना खाने के बाद पूनम, महक के साथ उसके घर गई। हालाँकि घर पर कोई पुरुष नहीं था, फिर भी दोनों रात भर सो नहीं पाईं। उन्हें परम के बिस्तर के नीचे दो किताबें मिलीं और दोनों ने उनके पन्ने पलटने का आनंद लिया। उन्होंने ज़ोर-ज़ोर से कहानियाँ पढ़ीं और एक-दूसरे के साथ वैसे ही आनंद लिया जैसे पहली बार लिया हो। उसके बाद मुनीम ने अपनी बेटी महक की मौजूदगी में पूनम का कौमार्य भंग किया। दोनों लड़कियाँ तस्वीरें देखकर खुश हो गईं, जिनकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
फनलवर की रचना

पूनम: महक, ऐसा हो सकता है क्या?

महक: "क्या?"

पूनम - "यहीं सब।" पूनम अपनी कसी हुई चूत में महक की उंगली करने का आनंद ले रही थी “उसने किताबें फेंक दीं और कहा कि चूत के लिए बस परम और मुनीम जी जैसा मस्त लौड़ा चाहिए।”

महक ने पूनम की चूत में तीन-तीन उंगली एक साथ घुसते हुए कहा, "कुटिया चुदवाती होगी तभी तो ये फोटो है। देख चुदक्कड क्या आराम से पेलवा रही है।"

“तो क्या हुआ…मैं जब तेरा बाप और परम का मोटा लम्बा लंड अपनी चूत में ले सकती हूँ तो साला इसका लंड क्या है! वो तो आराम से चूत में घुस जाएगा।” पूनम ने अपनी चूची को मसलते हुए कहा।

“तू मरवायेगी इस से?” महक ने पूछा।

“ना बाबा ना… मुझे तो बस मुनीम काका का ही लंड चाहिए। काका क एल्न्द से मेरी चूत कब की हार कर फ़िदा हो गई है।” पूनम ने कहा।

लेकिन महक को इस बात पे उस पर गुस्सा आ गया था, वह मुनीम के लंड को सिर्फ और सिर्फ उसकी चूत के लिए है ऐसा वह मानती थी। वह उसके बाप का बच्चा भी रखना चाहती थी। हलाकि वह परम और वह अनजान सेठ के लंड को अपनी चूत में समा चुकी थी पर वह अभी भी अपने बाप का वह मोटा सुपारा....की सोच मात्र से उसकी चूत बह जाती थी। फिर भी वह अपने बाप को नयी-नयी चुतो को सप्लाय भी करना चाहती थी क्योकि उसकी माँ अगर दुसरे लंड को खा सकती थी तो उसका बाप क्यों नहीं। हलाकि सभी लोगो से एक बात तो तय थी की महक अब उसके बाप की रखैल थी। उसे यह भी पता था की जब सुंदरी को यह बात का पता चला तो उसका मुंह ख़राब हो गया था लेकिन उसने ना मन से स्वीकार भी था। वह दोनों माँ-बेटी मुनीम को किसी और के साथ नहीं सहन कर पा रही थी। सुंदरी के लिए उसका पति ही प्रथम प्रेम था और महक के लिए उसके बाप का लंड ही सर्वोपरी था। वही सोच से ही बाप का लंड उसकी चूत को फाडेगा की सोच से वह और कामुक हो गई।

अब महक ने पूनम की जांघों को उठा कर अपने कंधे पर रख लिया था और जोर जोर से चूत को मसल रही थी।

“सच बता, तुझे परम का लंड ज्यादा पसंद है कि मेरे बाप का।”

“मालूम नहीं…जब तेरा बाप चोदता है तो बहुत मजा आता है, फाड़ कर रख देता है, दो दिन तक चुदवाने का नाम नहीं लेती मेरी चूत, सूज के बड़ी रोटी जैसी बन जाती है। लेकिन परम के साथ चोदने में भी बहुत मजा आया था,लेकिन मुझे दोनों में तेरा बाप का सुपारा बहुत पसंद है।” पूनम ने कहा।

“साली, मेरे बाप को ज्यादा मत निचोड़ना! उस पर मेरा अधिकार भी है। बस सही समय की राह देख रहि हूँ।” महक को पसंद तो नही आया पर कुछ कर ना भी नहीं कह सकती थी।

महक ने अपनी सहेली को खूब डांटा और फिर दोनों 2-3 बार एक-दुसरे को झड के सुबह तक सोये रहे।

******

सेठाजी के घर पर परम के लिए सेट बैक था। रेखा, बड़ी बहू और सुंदरी ने मासिक धर्म के पहले दिन में प्रवेश किया। इसलिए चुदाई के लिए केवल छोटी बहू और सेठानी ही उपलब्ध थीं। रात के खाने के बाद जब सब बातें कर रहे थे तो सोने से पहले सेठानी ने चिंता व्यक्त की कि उसके दोनों बेटे अभी तक वापस नहीं आये हैं।

बड़ी बहू ने जवाब दिया..

“चिंता क्यों करती है! माँजी, दोनों किसी वेश्या के साथ कोठे पर मस्ती मार रहे होंगे!”

सुंदरी और सेठजी हँसे लेकिन सेठानी को बुरा लगा, उसने टिप्पणी की, "वो दोनों तुम बहुओं का कितना ख्याल रखते हो और तुम उन्हें बदनाम कर रही हो!"

“कितना ख्याल रखता है वे सिर्फ हम दोनों जानते हैं।” छोटी बहू ने कहा और अपने कमरे में चली गई।

सुंदरी, सेठजी और सेठानी के साथ उनके कमरे में चली गई। और कुछ देर बाद लीला परम के पास आई और दोनों ने तब तक चुदाई की जब तक वे फिर से उत्तेजित नहीं हो गए।
फनलवर की रचना

“परम, तू ही मेरा पति है…। हर बार मुझे खुश कर देता है।”

“भाभी, जिस दिन मैंने आपको पहली बार प्यार किया था, उस दिन कहा था ना,” परम ने बहू को गले लगाया और कहा: “मैं आपका जनम-जनम का गुलाम हूं।” उसने लीला को अपने कमरे में जाने को कहा। वह उठी और वहां खड़ी सेठानी का सामना किया।

“साली, खुद तो छिनार है, मेरी बेटो को रंडीबाज बोलती है! मादरचोद, यहाँ अपनी माँ चुदवा रही थी क्या!” सेठानी ने बहू को गाली दी।

लीला सास के पास आई और सेठानी के ढीले लेकिन काफ़ी बड़े स्तन दबाते हुए बोली, “माँजी, परम बहुत मस्त चुदाई करता है…आपकी सूखी हुई चूत को फिर से रसीला कर देगा। मेरी माँ को भी चुदवा लुंगी अगर अवसर मिला तो लेकिन सांस को चुदवा सकती हूँ अभी।” लीला ने परम को संबोधित करते हुए कहा,

“राजा, इस कुतिया को चोद कर अपनी बना दे!” उसने सास को परम की ओर धकेला।

परमने सेठानी को गले लगाते हुए कहा, "लीला भाभी, सेठानी जी मेरी पहली औरत है, पहली माल है।"

“माँ ही जब रंडी होगी, छिनाल होगी तो बेटा रंडीबाज बनेगा ही…और वो रेखा भी जरूर सबसे से चुदवाती होगी।” लीला ने कहा और देखा कि परम ने सेठानी को नंगा कर दिया है।

“साला, एक नंबर का जादूगर है ये सुंदरी का बेटा।” लीला अपने कमरे में चली गई, “किसिको भी पटा लेता है। साला मस्त भोस की पैदाश है।”

छोटी बहू बड़बड़ाती हुई अपने कमरे में चली गई। सेठाजी को अपने बिस्तर पर देखकर उसे कोई आश्चर्य नहीं हुआ। वह उसकी बाहों में समा गई और दोनों ने रात भर खूब मस्ती की। परम ने सेठानी को जी भर के चोदा। सेठानी भी खुश हो कर काफी बार उसकी चूत रस छोड़-छोड़ कर आराम से परम के ऊपर पड़ी थी।

इधर सुंदरी भी सेठजी के साथ में थी हालाकि उसकी चूत भी लिक कर रही थी, पर सेठजी ने उसे खूब मसला।

“सेठजी अभी सेठानी आ जायेगी।”

“तो क्या? डरो मत वह परम के साथ होगी,मुझे पता है, मेरी बहु के साथ होगी, अपना मजा वह खुद ले लगी।“ उसने सुंदरी के स्तन को अपने मुंह में भरते हुए कहा।
फनलवर की पेशकश

सुंदरी ने भी अपना स्तन को पकडे हुए निपल चूसाते हुए बोली: ”वह सब तो ठीक है लेकिन आप को पता है ना आज मेरी चूत लीकेज में है। इसलिए आपके लंड को कोई आराम की जगह नहीं है!” और उनके लंड को हाथ में ले के खेलने लगी।

“सुंदरी, मुनीम कुछ बोलता तो नहीं ना!” सेठजी ने निपल को छोड़ा।

“नही सेठजी, लेकिन हम एक दुसरे से इस तरह की बाते नहीं करते। और नाही परम और महक से। आप की बहु को मुनीम चोदा यह नहीं मुझे नहीं पता पर मेरा उसको नहीं पता।“ सुंदरी ने दूसरा स्तन की निपल को थोडा खिंचा और सेठजी के मुंह के आगे रख दिया।

“चलो, अच्छी बात है तुम सब एक दुसरे को नहीं बताते सब जानते हुए भी!” इतना कह के उसने सुंदरी का घाघरा निचे कर दिया, उसने देखा की सेठानी की पेंटी वह पहने हुए थी। उसने अपना हाथ पीछे ले जाके एक ऊँगली सुंदरी गांड में पिरो दी। एक हलकी सी सिसकारी सुंदरी के मुंह से निकली और अपने पैरो को थोडा खोला और अपने दुसरे हाथ से अपने कुल्हे को थोडा खिंचा ताकि ऊँगली अपने मार्ग पर आगे बढे।

बस इस तरह सेठजी ने उसकी गांड अपनी ऊँगली से मारते रहे और रात भर अपने लंड का माल से सुंदरी का पेट भरते रहे।

सुबह-सुबह सुंदरी उठ गई और वह सेठजी के कमरे से बाहर आई सब से पहले उसने बहु के रूम के पास गई। सुंदरी ने दरवाज़ा खटखटाया और नंगी सेठानी ने दरवाजा खोला जहा परम नंगा अपनी झंगो के बिच लंड लटकता हुआ सोया हुआ था।

उसने सेठानी से कहा सेठानी आपका काम रातभर हो चुका होगा शायद, आपकी चूत से अभी भी परम का आशीर्वाद टपक रहा है।”

उसने सेठानी की चूत के फाको पर हाथ रखते हुए बोला था। उसकी उंगलियों पर परम और सेठानी का मिश्र रस आके चिपक गया जो उसने बड़े आराम से अपनी ऊँगली को चाट लिया, और थोडा सेठानी के मुंह में रख दिया जो उसने भी बड़े आराम से चाट लिया और ऊपर से उसकी चूत में ऊँगली डाल के फिर से मिश्र रस को लिया और चाट गई।

“सुंदरी तेरे बेटे का रस बहोत बढ़िया है।“ सेठानी ने सुंदरी की गांड को दबय्ते हुए कहा।

“जानती हु सेठानिजी, और आपका स्वाद भी मस्त है तभी तो मैंने आपकी चूत से टपक रहा परम का माल भी चाट लिया।“ सेठानी ने सुंदरी बोल्स को दबाया और कहा “मुझे तेरा स्वाद चखने का मौक़ा कब दे रही है?”

“आपका तो माल है सेठानिजी जब चाहे मेरे पैरो को खोल के अपना मुंह अन्दर डाल दीजिये।“

“सेठ ने कुछ किया!”

सुंदरी मुस्कुराई और बोली:”पूरी रात गांड मारते रहे अपनी उंगलियों से।“

उसने जोड़ते हुए कहा: “अगर अब आपका काम हो गया हो तो आप अपने कमरे में वापस चले जाएँ, इससे पहले कि कोई मेहमान आप लोगो को एक साथ देख न ले।“

सेठानी की चुदाई के बाद, परम रेखा के कमरे में गया, लेकिन चूमने और सहलाने के बाद उसने उसे वापस भेज दिया।

जब वहा,पूनम और महक ने ज़बरदस्त लेस्बियन सेक्स के बाद अच्छी नींद ली।


*****

आज के लिए बस इतना ही
। हो सके तो अपनी राय देना ना भूले, बाकी आपकी मर्जी

फनलवर का

जय भारत
 
Shukriya dost.

Yes aap ne sahi kaha. Sabhi log apne apne swarth ko parinam dene me pade hue hai.

Sundari ke chahak sabhi hai aur shayad isiliye uske sath sambandh banane me safalta matlab disarose thik aage apne aap ko pate hai. Sudha jo ki apne baap aur rinku ko dekh dekh apni ichchha paida ho gai thi jo aaj puri ho gai aur wo bhi sab ke samne. Mahak ko sundari aur param se koi dar nahi, wo jo chahe kar sakti hai.

Muje lagta hai ki in sab me sugha kaa baap ko yah sauda sab se mahanga pad gaya. Ek ke samne do gai.

Kher aage dekhte hai
 
Ji bilkul sach kaha aapne.

Is pachrangi duniya me swarth ke siva kuchh bhi to nahi.
 
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