Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 58 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

अरे....उसमे आभार किस बात का!!!!!!!!!!!!!!!

अगर अच्छा सुझाव है और कहानी को अच्छे से प्रस्तुत करने में कोई सुझाव काम में आ सकता है तो मैं तो उस सुझाव को वेलकम ही करुँगी................हाँ यह बात है की तुरत एप्लाय करना शायद मुश्किल हॉट अहै क्यों की प्लाट उस हिसाब से बन चुका होता है...........लेकिन जब भी नए प्लॉट्स बनते है तब यह सुझाव का पर्याप्त उपयोग कर सकते है........जरुरी भी नहीं की हरबार हो ................लेकिन महत्तम उपयोग करने का प्रयास जरुर करुँगी दोस्त........

शुक्रिया की आपने सुझाव दिए और मैं बेहतर कर सकी शायद..................
 
चले अब थोडा आगे लिख देती हु....................
 
अब आगे.................

उसने टोक दिया,

“तू झूठ बोलता है… कोई ससुर अपनी बहू के बारे में ऐसा ना सोचेगा ना बोलेगा।”

“भाभी तुम मानो या ना मानो…, मैं जो कह रहा हूं सब सच है…वो तो और भी बहुत कुछ कहते है कि लेकिन मैं क्यों बोलूं...तुम मान ही नहीं रही हो...और मैं कह भी नहीं सकता...'' परम चुप रहा।

लेकिन उसने उसके मन में उत्सुकता जगा दी है।

लीला जानती थी उसे कभी भी खूबसूरत नहीं माना गया... हाँ, वह एक बोल्ड और आकर्षक लड़की के रूप में मशहूर है। लेकिन, किसी ने कभी उसकी खूबसूरती की कद्र नहीं की और ना,शादी से पहले या शादी के बाद, किसी ने भी उससे सेक्स के लिए संपर्क नहीं किया, सिवाय उनके घर के ड्राइवर के, जो उसे ड्राइविंग सिखाने के बदले में चुदाई चाहता था। और उसी से फसी भी थी।

यहाँ तक कि उसके पति ने भी साफ़-साफ़ कहा था कि वह एक साधारण 'माल' है, लेकिन बाद में उसने कहा कि वह उसे पसंद करता है। वह जानती थी कि उसका पति कलकत्ता में वेश्याओं और कॉल गर्ल्स के पास जाता है। उसने कई बार विरोध किया, लेकिन उसके पति ने कहा कि वह कुछ नहीं कर सकता। उसे नियमित रूप से दूसरी औरतों के साथ सेक्स करना पड़ता है। अब वह यह सुनकर उत्साहित थी कि उसके ससुर सेठजी उसे पसंद करते हैं और उसकी खूबसूरती की सराहना करते हैं और एक बहुत छोटे लड़के, जो उससे भी छोटा है, से उसके बारे में बात करते हैं।

लीला यह सब सोच ही रही थी कि कुछ देर शांत रहने के बाद परम ने दूसरा कार्ड फेंक दिया।

“भाभी, प्लीज़ किसी को मत बोलना कि मैंने ये सब कहा है.. लेकिन जो भी कहा है.. सब सच है।”

"अच्छा! और क्या बोलते हैं तुम्हारे सेठजी जो तुम नहीं बोल सकते!" लीला धीरे से बोली।

“छोड़ो ना भाभी…जान कर क्या करोगी…तुम मानोगी नहीं”

“बोल.. ना… नख़रे मत कर..” लीला ने ज़ोर से कहा “मैं भी तू सुनु तुम्हारे सेठजी अपनी बहू के बारे में क्या ख्याल रखते हैं..!”

“किसिको बोलोगी तो नहीं…” परम ने विनती की..!

“नहीं बोलूंगी...वादा करती हु।” उसने उत्तर दिया।

अब तक सभी चीजें ठीक से रख दी गई थीं। परम उसके पास गया और उसके पैरों के पास फर्श पर बैठ गया।

“करीब 15 दिन पहले सेठजी ने मुझे अपने ऑफिस में बुला कर कहा कि मेरा एक काम कर दू.., मुझे बहुत रुपया दे देंगे... मुझे लालच हो गया। मैंने पूछा क्या काम सेठजी, तो उन्होंने कहा कि मैं अपनी मां सुंदरी को मनाऊ कि वो मेरे (सेठजी) के साथ चुदाई करे…।”

“हे!!!… सेठजी ने ऐसा कहा… सुंदरी के बारे में…!!! और तुम ने सुन भी लिया?”

लीला का पूरा बदन सिहर गया एक लड़के के मुँह से 'चुदाई' का शब्द सुन कर...

वह इस बात से नाराज नहीं थी कि परम ने 'चुदाई' शब्द बोला। यह बहुत आम शब्द था उनके घर और गाव सभी जगह। वह ये शब्द बचपन से सुनती आ रही थी जब उसके पिता और चाचा नौकरानियों और मजदूरों को डांटते थे। कुटी, यहीं पटक कर चोद दूंगा, साली अपने बाप से चुदाई करती है.. तेरी मां को चौराहे पर पटक कर चोदूंगा...आदि.. लेकिन यह सुनकर कि उसकी फिल्म ने परम से उसकी मां के बारे में यही बात कही है, वह उत्तेजित हो गई।

“हा भाभी… मुझे तो चुदाई के बाद में कुछ मालूम नहीं था, लेकिन ये जानता था कि ऐसा किसी की मां बहन के बारे में बोलना गाली होता है लेकिन सेठजी ने बहुत खुशामद किया और मुझे एक हजार रुपया दिया… फिर उन्हें कहा कि सुंदरी जो मांगेगी मैं दूंगा..!“

“तुमने सुंदरी से कहा..?” “लीला उत्सुक थी।

“हाँ भाभी, उसी दिन मैंने माँ से सब कहा तो वो शर्मा गई…!”

“तो सेठजी ने सुंदरी को चोदा नहीं…?”

“मुझे क्या मालूम भाभी.. वो थोड़े ही मेरे सामने चुदवाएगी…” परम ने लीला को घूरकर देखा और झिझकते हुए अपना हाथ उसके घुटने पर रख दिया। लीला ने कोई प्रतिवाद नहीं किया।

परम ने आगे कहा, ''उसी दिन सेठजी ने तुम्हारे बादे में भी कुछ ऐसा ही बोला।''

“क्या?” लीला परम की ओर झुक गयी।

“सेठजी ने कहा कि उन्हें सिर्फ दो (केवल दो) औरत ही पसंद है एक तो सुंदरी और दूसरी छोटी बहू, लीला।“

परम शांत हो गया।

“चुप क्यों हो गया.. और क्या बोला..?” उसने पूछा।

“सेठजी ने कहा, कि छोटी बहू बहुत जबरदस्त माल है.. जब भी उसको देखते हैं तो उनका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. मन करता है कि लीला को बाहों में लेकर कर मसल डालू, उसके उँगलियों को सहलाऊँ और उससे कूद कर... "परम चुप रहा।

वह जानती थी कि आखिरी शब्द क्या हो सकता है, फिर भी उसने पूछा, " कूद कर क्या...?"

परम लीला को घूरता रहा और उसे पता ही नहीं चला कि कब उसके हाथ उसकी ऊपरी जाँघों पर पहुँच गए और वह उसका हाथ अपने हाथों में थामे हुए थी और उसे अपनी दोनों जाँघों के बीच दबाए हुए थी। परम उसकी कसी हुई जाँघों की गर्मी महसूस कर रहा था। उसने उसकी आँखों में देखा और कहा,

" ... उसे जम कर चोदू… उसकी टाइट चूत में लंड पेलकर बहुत मजा आएगा…हो सके तो मेरे लंड के बिज से उसको माँ बना दू।”

इतना सुनना था कि बहू खड़ी हो गई.. “छि… ऐसा भी कोई अपनी बहू के बारे में बोलता है…?!”

परम ने साहसपूर्वक उसके हाथ पकड़ लिए और कहा, “भाभी सेठजी की कोई गलती नहीं है… तुम हो ही ईएसआई मस्त माल। इतनी मस्त कि कोई भी तुम्हें चोदना चाहेगा।“

“चलो अलग हटो… कोई आ रहा है…!”


दोनों अलग हो गए। तभी सुंदरी अंदर आई और उसने परम को बताया कि सेठजी उसे बुला रहे हैं।

आज के लिए बस यही तक

कल फिर देखेंगे आगे क्या क्या हुआ कहानीमे एक नए अपडेट के साथ


। जय भारत
 
जी शुक्रिया दोस्त

जी हां अब कौन पहले डुग को जीतेगा वह तो आनेवाले अपडेट्स ही बता पाएंगे

बने रहिये
 
चले अब थोडा आगे की ओर चलते है......................
 
जी बिलकुल अब परम धीरे-धरे काफी सिख चुका है...............और सफल ट्रिक को बार बार अपनाए जा रहा है
 
Update 10

जाने से पहले, परम ने लीला से विनती की कि वह किसी को कुछ न बताए। परम के जाने के बाद, सुंदरी ने पूछा; “परम क्या कह रहा था?”

लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया और दोनों बाहर आ गईं। बड़ीबहू ने देखा कि लीला शरमा रही है, उसने सोचा कि परम ने उसे भी वैसा ही मज़ा दिया है जैसा उसने पिछली शाम दिया था। वह संतुष्ट हो गई। लगता है की उसकी गिफ्ट परम को लुभा गई।

जब परम और लीला कमरे में बातें कर रहे थे, सेठजी दूसरे शहर से एक और सेठ के साथ घर आए। उन्होंने बड़ी बहू से उनके लिए कुछ नाश्ता और मीठा पेय भेजने को कहा। सुंदरी ने अपनी बेटी महक से नाश्ता अंदर ले जाने को कहा। वह स्कर्ट और ब्लाउज़ पहने हुए थी, कॉलेज ड्रेस पहने हुए थी क्योंकि वह सीधे कॉलेज से आई थी। उसने खाने का सामान मेज़ पर रखा और बिना कुछ बोले बाहर आ गई।

"क्या मस्त माल है!" दूसरे सेठ खुद को रोक नहीं पाए। "मैं तो इस लड़की के साथ एक बार सोने के लिए और थोडा चोदने के लिए कुछ भी देने को तैयार हूँ।"

“लड़की पसंद आई..?”
मैत्री और फनलवर की रचना

"हाँ दोस्त, देखते ही मेरा मूड और लंड गरम हो गया है..मुझे तो उसका माल बिना देखे ही अच्छा लगने लगा।" उसने लंड पर हाथ फेरा। और बोला, "इसे अभी चोदना है... साली कितना लेगी?" उसने पूछताछ की और सेठजी ने बताया कि महक उसके करीबी दोस्त की बेटी है।

सेठजी को सुंदरी की बात याद आई, जो उसने सुबह महक के बारे कहा था।

देखो, एक तो आप हमारे खास है,और ऊपर से आप को यह माल पसंद आया है। अब कुछ करना तो पड़ेगा।“ सेठजी ने मेहमान की झंगो पर हाथ रखते हुए कहा।

“अरे, कुछ करो वरना यह लंड मेरा ऐसे ही पागल कर देगा मुझे। मुझे जो चीज़ पसंद आती है वह मेरे लंड को देनी पड़ती है आप तो भली भांति जानते हो। आपके लिए क्या नया है!”

हाँ जानता तो हूँ पर यह घर है और ऊपर से यह वेश्या नहीं है, पूरा कच्चा माल है, मैंने मेरे लिए उसे बड़ा कर रखा है, पर आप कहते हो तो कुछ करता हूँ, मुझे उसके घरवालो से पता करना पड़ेगा।“ सेठजी चाहते थे की महक का शील के दाम ज्यादा से ज्यादा मिले।

सेठजी बात को लम्बाई देते हुए कहा: “वैसे तो माल काफी भरा हुआ है पर अभी तक उसे उसकी माँ ने कही इधर-उधर होने नहीं दिया।“

“अरे, ऐसे कच्चे माल की कोई कीमत नहीं होती दोस्त, बस वह जो मांगे देने के लिए तैयार हूँ।“

“हाँ, शेठ, सही कहा आपने। मैं खुद की बात करू तो अब तक जितनी बार इस माल को देखता हूँ तब या तो मुझे आपकी भाभी को चोदना पड़ता है या फिर मुठ मारनी पड़ती है।“ सेठजी ठह्काके हँसने लगे।

“चलो, मैं ही कुछ करता हूँ उसकी माँ से बात करता हूँ अगर वह मान जाती है इस माल की कीमत बोलती है तो मैं आपको बताता हूँ” उसने सेठ को वही बू=इतने का इशारा किया और अंदर की ओर चले गये।

थोड़ी देर अपने कमरे में इधर-उधर घूम के वापिस आये और दुसरे सेठ को कहा;

“सेठजी वैसे तो उसकी माँ ने बिलकुल मन कर दिया की वह अपनी बेटी को अनचुदी रखना चाहती है, पर पैसा क्या नहीं करवाता, मैंने उसे दिलासा दिया है की उसकी शील के अच्छे दाम दिलवा सकता हूँ तो वह ना ना करते हुए सहमत हुई है, अगर आप तीन लाख रुपये दे सके तो वह उस लड़की की चुदाई का इंतज़ाम कर सकता है।“

दूसरे सेठ ने अपना बैग खोला और नोटों के बंडल निकाले। उसने गिनकर तीन लाख रुपये सेठजी को दिए। उसने उन्हें दूसरे बैग में डालकर अलग रख दिया। दूसरे सेठ महक को घर में ही चोदना चाहते थे, लेकिन सेठजी ने कहा कि यह मुमकिन नहीं है क्योंकि यहाँ बहुत सारे लोग हैं। फिर उन्होंने परम को बुलाया और परम को सलाह दी कि वह कोई बहाना बनाकर महक को घर से बाहर ले जाए और उसे और दूसरे सेठ को अपने ऑफिस रूम में ले जाए जहाँ सुंदरी की चुदाई हुई थी।

परम अंदर गया और सुंदरी से बात कही की सेठजी ने महक का सौदा आर दिया है, उसकी चूत के लिए सेठजी ने लंड ढूँढ लिया है। सुंदरी ने महक को घर जाने को कहा, क्योंकि उसके पिता अकेले रहें। महक परम के साथ घर से बाहर निकली और कुछ दूर तक चली जहां दूसरा सेठ अपनी कार मे उनका इंतजार कर रहा था। परम ड्राइवर के पास बैठ गया और महक उस सेठ के साथ पिछली सीट पर बैठ गई।

महक समझ गई कि आज उसकी कुंवारी चूत फटने वाली है वो भी बाप के उमर के मोटे सेठ से...इसका मतलब साफ़ है की परम और सुंदरी ने उसका और उसकी चूत का सौदा कर दिया है, सेठजी ने काफी मदद की है और हो सकता है सुंदरी ने जो माँगा हो वही भाव में मेरी चूत का सौदा हो गया हो। फिर मन ही मन सोचा की जो भी हो मुझे क्या! मुझे तो लंड से मतलब है, फिर मैं भी किसी से भी चुदवा सकुंगी, शायद बाबूजी पहले हो सकते है क्यों की मैं और बाबूजी ही ज्यादत घर में अकेले होते है, सुंदरी और परम तो सेठ के आस-पास ही होते है। उसे पता था की बाबूजी घर क्यों जल्दी आ जाते थे, उठते बैठते उसकी चूत के दर्शन करते रहते थे।

“क्या ये मुझे परम और बाबूजी जैसा मस्ती दे देगा…?” महक ने खुद से सवाल किया।

“ठीक है….जैसा चाहेगा चुदवा लूंगी….फिर घर जाकर आज ही बाबूजी और भैया दोनों के साथ पूरा मजा लूंगी…” उसने खुद को जवाब दिया।

वह अपना वादा भूल गई थी कि परम ही उसका कौमार्य भंग करेगा।

वे ऑफिस कक्ष में पहुंचे। परम अंदर रह कर अपनी बहन की ज़िंदगी की पहली चुदाई देखना चाहता था। लेकिन सेठ और महक ने भी परम को बाहर जाने और एक घंटे के बाद वापस आने के लिए जोर दिया।

“बेटा….ऐसे मस्त माल के लिए एक घंटा बहुत है……और कभी किसी की चुदाई नहीं देखना चाहीये….मर्द, औरत दोनों खुल-कर मस्ती नहीं कर पाते हैं…।” सेठ ने कुछ नोट निकाले और परम को दिए...

"जाओ, बाज़ार में जाकर खाओ पीयो...तब तक मैं इस मस्त कडक माल को लड़की से औरत बनाता हूँ...चखता हूँ...और थोड़ी ढीली कर के वापिस दे दूंगा। तुम किसी भी प्रकार की चिंता मत करना, बेटे। आराम से उसकी चूत को फाड़ दूंगा।"

परम के कमरे से बाहर निकलते ही उन्होंने दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया। लाइट जला दी। महक आँखें नीचे करके बिस्तर पर बैठ गई। सेठ उसके पास आया और उसकी ठुड्डी ऊपर उठाई। उसने उसे देखा। वह एक हट्टा-कट्टा आदमी था, लगभग 85-90 किलो वज़न का, लंबा और हट्टा-कट्टा। वह पिछले 15 दिनों से परम के साथ सेक्स का आनंद ले रही थी और कल रात उसके पिता ने उसे लगभग चोद ही दिया। उसने सुधा और उसकी माँ से भी सेक्स के बारे में बात की थी, लेकिन वह किसी अजनबी के साथ सेक्स करने से डर रही थी।


प्लीज़ मुझे बाहर जाने दो। “वह उठी और विनती करने लगी। मैत्री और फनलवर की रचना

"रानी, तुमको देखते ही मेरा लंड काबू से बाहर हो गया था। अब तो बिना चोदे थोड़े ही जाने दूंगा। अब जरा प्यार से नंगी हो जाओ।"


वह उसके पास आया, उसे बांहों में ले लिया और उसके होंठों को चूम लिया, उनकी पकड़ बहुत मजबूत थी, महक ने उसके चंगुल से निकलने की कोशिश की लेकिन उसने उसे नहीं छोड़ा।

“बोल रानी, तू कुंवारी है कि तेरी चूत फट चुकी है!”

“मुझे छोड़ो ना,… प्लीज़ तुम्हारे पैर पड़ती हु…!”

उसने उसके कूल्हों को पकड़ कर दबाया। “माल बहुत टाइट है.. बोल अब तक कितना लंड ले चुकी है इस मनमोहक चूत में?" सेठ ने उसकी स्कर्ट उठाई और अपना हाथ उसकी पेट के ऊपर रख दिया। अब वह उसके लगभग नंगे कूल्हों को पकड़ रहा था।


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जाऐगा नहीं आगे अभी लिख रही हूँ .................... शायद रात को पोस्ट कर दूंगी

आप इसके बारे में कोमेंट लिखिए तब तक मैं आगे का अपडेट पोस्ट करती हु............

। जय भारत
 
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