Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 53 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

ओह्ह अभी कहाँ????

अगले अपडेट में जुरूर चुदेगी..................
 
चलिए अब थोडा आगे बढ़ते है ...............
 
अब आगे.......

परम ने एक बार अपने लंड को मुट्ठी में दबाया और कहा, “काकी पेलवा लो… बहुत मज़ा आएगा।”

यह सुनकर रजनीने अपना चेहरा हटा लिया, लेकिन परम उसके पास आया और अपना लंड उसके गालों को छूने दिया। हालाँकि रजनी ने अपना चेहरा हटा लिया, लेकिन परम का लंड देखकर वह बहुत उत्तेजित हो गई। उसने सोचा था कि यह एक छोटा पतला डंडी होगा, लेकिन यह तो एकदम कसी हुई चूत में भी छेद करने के लिए काफी अच्छा था। उसे लगा की परम का लोडा उसके किल्ले को सही तरीके से भेद सकता है बस एक सही हमले कि जरुरत है। उसे अपनी चूत में गीलापन महसूस हुआ। परम के लंड की लंबाई और मोटाई से ज़्यादा मोटा गोल सुपारा (लंड का ऊपरी हिस्सा) देखकर वह हैरान रह गई। उसके पति का लंड बेलन आकार का था और इस लड़की रिंकू के आने तक उसकी सेक्स लाइफ संतुष्ट थी। मैत्री और नीता की रचना

रिंकू के आने के बाद उसका पति रिंकू को दिन-रात नियमित रूप से चोदता है। रात में उसे उसके साथ बिस्तर शेयर करना पड़ता है। शुरुआत में उसने बहुत विरोध किया लेकिन जब उसने आखिरकार उससे कहा कि अगर वह रिंकू को उनके साथ सोने के लिए राजी नहीं हुई तो वह उसे छोड़ देगा। उसके पास कोई चारा नहीं था। वह अपने पति को अपने बगल में लेटी नौकरानी को चोदते हुए देखती थी। हफ्ते में एक-दो बार वह उसे भी चोदता था। यह सिलसिला चलता रहा लेकिन उसने विरोध करना बंद नहीं किया। जब उसने कहा कि इसका उनकी बेटी सुधा पर बहुत बुरा असर पड़ेगा, तो उसके पति ने उसे बताया कि सुधा को रिंकू के साथ उसकी चुदाई के बारे में पता है। उसने यह भी कहा उसके पति ने भी उससे कहा था कि अगर वह किसी बाहरी आदमी से चुदवा ले तो उसे कोई आपत्ति नहीं होगी। लेकिन अब तक उसने अपनी पवित्रता बनाए रखी थी। और अब यह जवान लड़का परम अपना लंड उसके गालों पर रगड़ रहा था और उससे चुदने की विनती कर रहा था।

रजनी ने अपना चेहरा परम की तरफ घुमाया और लंड उसके होंठों से छू गया। एक सहज क्रिया के रूप में उसने लंड को अपने मुँह में जाने से रोकने के लिए उसे मुट्ठी में भींच लिया। परम का लंड उसके पसीने से तर हाथ में गर्म और मोटा था। उसकी एक खास खुशबू थी। उसे लंड का आकार भी पसंद आया। लेकिन उसमें एक स्वाभाविक झिझक थी। बचपन से ही उसे बताया गया था कि एक औरत को सिर्फ़ उसके पति से ही चुदवाना चाहिए और किसी और को उसकी नग्नता नहीं दिखानी चाहिए, न ही उसे किसी और मर्द को छूने देना चाहिए। बस घर की बात कुछ अलग है पर बाहरी मर्द तो कभी नहीं। उसके घर में जब से वह बैठती हई तब से वह देख रही थी की उसकी माँ, बुआ,और काकी घर में सभी से चुदवाती थी यहाँ तक की उसके दादाजी भी उसकी माँ को चोदते थे और वह भी उसके सामने। तब माँ कहती थी की घर के लंडो को शांत रखना घर की चुतो में आता है लेकिन कोई भी बाहरी पुरुष नहीं,कभी नहीं, चाहे जैसा भी हो घर के लंड ही। एक दो बार उसके पिताजी ने छेड़-छाड़ की थी पर माँ ने उनको मन कर दिया था, एक बार दादाजी ने उसके बोबले पर हल्का सा दबाव दिया था पर माँ ने उन्हें भी मन कर दिया की रजनी को अक्षत ही रखना है। तब से लेके किसी ने कुछनही किया हां कभी कभी माँ उसे दबा देती थी और कहती थी माल सही बनाना है पर हो भी गए थे। वह अपने अतीत में थी, लेकिन यह लड़का बिल्कुल नंगा खड़ा था और उसकी मुट्ठी में उसका टाइट, मोटा और गर्म लंड था।

"मासी, चुदवा लो, परम से...बहुत मज़ा आएगा।" नौकरानी ने उसका लंड मुट्ठी में दबाते हुए देखकर कहा।

“चुप कुतिया, साली चुदासी, तू क्यों नहीं इस लंड को अपनी चूत में घुसेड़ लेती है! मेरे पति का लंड तो रोज़ खाली करती है आज इसका भी लंड खाली कर दे … हरामजादी, मादरचोद…।”
मैत्री और नीता की रचना

रजनी ने पलटकर जवाब दिया, लेकिन उसने लंड की मुठ्ठी मारना जारी रखा। असल में मुठ्ठी मारने की स्पीड बढ़ गई थी।

परम को मज़ा आ रहा था। उसने सोचा कि अब वह चुदाई के लिए तैयार हो जाएगी, इसलिए उसने नीचे झुककर उसके स्तनों को दबाया। रजनी इसके लिए तैयार नहीं थी। उसने परम को धक्का दिया और कहा:

“मादरचोद, जा इस कुतिया को चोद.. ।” उसने उसे नौकरानी की तरफ धकेल दिया। लेकिन परम ने फिर से संतुलन बनाया और अपना लंड हाथ में लेकर फिर से रजनी के गालों पर लंड रगड़ा।

“काकी तुम जो बोलेगी, तुम्हारी गुलामी करूंगा लेकिन मुझे चोदने दे…तुम्हारी चूत बहुत मस्त है…बहुत मजा आएगा पेलने में…चुदवा लो काकी तुमको भी बहुत मजा आएगा…मैं कब से तेरी चूत में लंड पेलने को बेकरार हूं..!”

रजनी को भी लंड चाहिए था। उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो गई थी और लंड के लिए तड़प रही थी। हालाँकि रजनी का शरीर परम के लंड को स्वीकार करने के लिए तैयार था लेकिन उसका मन नहीं था। उनका जन्म और पालन-पोषण पारंपरिक तरीके से हुआ। हालाँकि उसके पति ने उसे नौकरानी की उपस्थिति में अपनी पसंद के किसी भी व्यक्ति से चुदाई करवाने के लिए कहा था और अब उसके पास निश्चित रूप से अपने पति की तुलना में बहुत बड़ा और मजबूत लंड था, लेकिन वह झिझक रही थी। उसने परम को उसे छोड़ने और रिंकू को चोदने के लिए प्रेरित करने की कोशिश की। उसका लोडा सहलाते हुए रजनी बोली।

“बेटा तेरा लोडा तो बहुत मस्त है लेकिन मेरे साथ इस लंड को मजा नहीं आएगा, मैं बूढी हो गइ, मेरा सारा मजा सुधा के बाबूजी ने चूस लिया है अब मेरे नीचे भी कोई रस नहीं है (उसकी चूत गीली होकर पच-पच हो रही थी) तू रिंकू को चोद, जवान लड़की है तुझे बहुत मजा आएगा। तेरा लंड मस्त हो जायेगा। रिंकू भी काफी चुदासी है,हरदम वह अपने चूत को गिला रख पाती है। मेरा पति भी उसकी चूत को मार-मार के सही माल कर दिया है। जा रिंकू को चोद और अपने लंड को शांत कर दे। रिंकू, बीटा अपना माल परमा को दे दे और खूब ऐश करो तुम दोनों मुझे कोई आपत्ति नहीं है।“ लेकिन ना तो उसने परम का लंड छोड़ा पर उसने लंड पर एक हल्का सा चुम्बन लिया।


"नहीं, काकी रिंकू को बाद में चोदूंगा लेकिन पहले अपनी चूत में मेरा लंड ले लो। अब बर्दाश्त नहीं होता है।"

आशा है की आपको यह एपिसोड अच्छा लगा होगा........आपकी प्रतिक्रया का

।।जय भारत।।
 
अब आगे...........

परम ने कहा और फिर से झुककर उसके छोटे स्तनों को दबाता रहा। दबाते हुए, उसने ब्लाउज के कप ऊपर खींच दिए और अब उसके नर्म, नंगे स्तन उसके हाथों में थे। उसने लंड को छोड़ा और सोफ़े पर लेट गई। परम उसके स्तनों को बेरहमी से मसल रहा था और उसकी गर्मी बढ़ती जा रही थी। और वह अब परम की हरकतों के आगे समर्पण कर रही थी। वह कराह उठी।

“आआआआआआआआआआआआआआआहहह… छोड़ दे बेटा,,, वो धीरे से बोली। लेकिन उसने परम के हाथो को अपने बोबले से दबाये रखा।

लेकिन परम ने उसका ब्लाउज उसके बदन से खींच ली और उसके हाथ उसके वक्ष और पेट पर फिरने लगे। उसने उसे ऊपर खींच लिया। उसने डरते हुए सामान्य विरोध किया। परम ने उसे दूसरे कोने में रखे दीवान पर खींच लिया।

परम ने रजनी को बिस्तर पर लेटा दिया और एक झटके में उसका पेटीकोट खोलकर उसके बदन से उतार दिया। वो ऊपर से नीचे तक नंगी थी। उसने अपनी टाँगें क्रॉस कर लीं और परम की नज़रों से अपनी चूत छिपाने की कोशिश की।

“काकी, अब रुको, देखो तुम्हारी चूत पानी-पानी हो गई है.. मेरा लंड लेने के लिए बेताब है… अब चुदवा ही ले रानी। उसके सिवा अब तेरा यह माल तुजे चेन से जीने नहीं देगा।“
फनलवर और मैत्री की रचना

यह कहते हुए परम ने उसकी जाँघें अलग कीं और रजनी की प्यारी क्लीन शेव्ड चूत देखी। यह उसकी बहन महक और सुधा की चूत से भी छोटी थी। परम ने चूत पर एक चुम्बन लिया। उसे चूत से निकलने वाले रस का स्वाद आ रहा था। लेकिन अचानक रजनी ने अपने पैर परम की छाती पर रख दिए और जोर का धक्का दे दिया। परम दीवान से गिर गया। रजनी और रिंकू दोनों हँस पड़े।

“मासी बेचारे को क्यों तड़पा रही हो… अब तो उसका लंड माल में लेलो.. नहीं तो लंड फूट जाएगा। और आपका माल अधुरा रह जाएगा। चलो परम उठो और मौसी की चूत पर अपने लंड से हमला करो और माल जित लो। फिर मैं भी हूँ।“

वह उठ बैठी,परम को खींच लिया और फिर से उसका लंड हाथ में ले लिया। उसने कहा;

“देख परम, मैं तुमसे आज ही नहीं, बार-बार चुदवाऊंगी लेकिन एक शर्त पर…!”

“तू जो बोल काकी, मैं सब करूंगा…” परम ने उत्तर दिया और पहली बार उसके होंठों को चूमा।

“तू अगले रविवार को अपनी माँ सुंदरी को लेकर आयेगा और मेरे और रिंकू के सामने अपनी माँ को काका (उसके पति) से चुदवायेगा…” रजनी ने कहा!

“ठीक है काकी, मैं सुंदरी को मना लूंगा, वो तेरे पति से चुदवाएगी लेकिन मैं भी काका के सामने तुम्हें चोदूंगा…।” परम ने कहा।

“हाँ हिसाब तो बराबर करना पड़ेगा।” रजनी ने अपनी चूत खोलते हुए कहा।
मैत्री और फनलवर की रचना

“लाओ मौसी मैं आपके पैर उठाके पकडती हूँ लगता है यह लम्बे समय का घोडा है।“ और उसने रजनी के पैरो को ऊपर उठाये और उसकी चूत पर हाथ घुमाया और परम से बोली; “माल तैयार है बस हथोड़े की जरुरत है मार दो साली की चूत में।“

“हाँ हाँ डार्लिग देखती जा मेरे लंड की कमाल, एक बार मुझ से जो चुद गई वह दुबारा अपने पैर फैलाके ही मेरे पास आती है।“ परम को उसकी बात ने ज्यादा उत्तेजित कर दिया और धक्के की स्पीड बढ़ गई।

रिंकू भी समज गई की परम उसकी बातो से ज्यादा उत्तेजित हो के अपने हमले तेज कर रहा है। वह उसके अन्डकोशो को हाथ में लिए कहा; “मेरी मालकन बहोत चुदासी है परम, जब से साहब नेमुझे चोदना चालू किया तब से वह बेचारी अपनी चूत सह्लाती रही और मुझे ही उसकी चूत को ठंडा करना पड़ता था। आज उसके माल को पूरा मौक़ा मिला है की वह एक जवान लड़के का लंड से अपनी चूत मरवा रही है। थोक दे आज और भर दे उसकी चूत।“

हाँ हां रंडी तुमने मेरे पति के लंड पर कब्जा किया हुआ है तो मैं क्या करू! परम लगा आज मेरी चूत का भोंसडा बना दे। मैं भी देखू की तेरे लंड में कितना दम है, मेरी चूत हारती है या तेरा यह लंड। जो मस्त मार रहा है, मार दे मेरी चूत को फाड़ दे।“

और उसके बाद दोनों ने मिशनरी पोज़ में आ गए और परम का लंड एक झटके में तो अन्दर नही घुसा लेकिन 3-4 धक्को में रजनी के माल की उन्ड़ाई को नापने अंदर तक पहुच गया। रिंकू बस उसके अंडकोष ही देख पाती थी और लंड अन्दर से बहार आके फिर अन्दर जाके रजनी के माल की खुदाई कर रहा था। रजनी की आँखे बंद कर के हर धक्के को अपनी गांड उछाल कर जवाब देने लगी थी। रिंकू ने उन्हें चुदाई करते हुए देखा। उसने देखा कि परम का बड़ा और मोटा लंड उसकी मालकिन की चूत में बहुत तेज़ी से अंदर और बाहर जा रहा था। वो बहुत उत्तेजित हो गई और उसने अपनी ड्रेस उतार दी। वह नंगी हो गई और परम चोदते हुए काकी के ठीक सामने खड़ी हो गई।

"काकी कैसा लग रहा है?" परम ने पूछा।

"ओह बेटा तू तो बहुत बड़ा चोदु है। मुझे पहले पता होता तो अब तक तेरे बच्चे को जन्म दे चुकी होती। आह्ह बहुत मज़ा आ रहा है.. और ज़ोर से चोद... आह्ह... ।"


रिंकू ने खुद को उंगली से चोदा और परम ने काकी को चोदने और रिंकू को खुद को उंगली करते देखने का आनंद लिया। एक साल से ज़्यादा समय के अंतराल के बाद रजनी ने चुदाई का आनंद लिया। जब से उसका पति रिंकू के साथ उसके बिस्तर पर सोने लगा, उसकी चुदाई में रुचि खत्म हो गई थी, लेकिन अब उसे मज़ा आ रहा था और वह ज़्यादा देर तक खड़ी नहीं रह सकती थी। वह चरम पर पहुँच गई और परम को कसकर पकड़ लिया। उसने परम पर चुम्बनों की बौछार कर दी और कुछ ही पलों में परम रजनी की चूत में ही झड़ गया। उधर रजनी की चूत ने भी बाकी रहा अपना चुतरस त्याग दिया। दोनों पूरी तरह से संतुष्ट थे। उसकी चूत को परम का लंड अभीभी अपना पानी पिला रहा था और धीरे धीरे ठंडा होक बाहर आने की कोशिश कर रहा था। जब की रजनी वैसे ही पैरो को फैलाके रह गई थी और वह उसकी चूत में हर एक बूंद की गरमी को महसूस कर सकती थी। उसने परम को जकड कर रखा हुआ था और अपने चूत की मंस्पेशियो को खिंच कर परम के लोडे को निचोड़ रही थी। परम को मजा आता था इस प्रकिरू=या से उसका लंड की हर एक बूंद निचोडे जा रही थी।

शुक्रिया दोस्तों

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आपके कोमेंट की प्रतीक्षा में

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कल तक आपसे विदा चाहूंगी


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।।जय भारत।।
 
Thank you friend

Ji lagta to aisa hi hai. Ek ke saath ek free. Dekhte hai aage.
 
Yes, now he has some fantastic tricks to seduce mature women.

Let's see what take place ahead.

Stay tuned
 
Bahot bahot dhanyawad aapka

Ji vastavik hota to shayad kuchh aur jit sakta tha par avastavikta me aapke soch ke anurup hi chalna chahiye......

Dekhte hai aage kya hota hai. Kaun si soch powerful hai.

Shukriya again.
 
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