Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 50 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

चले अब हम आगे चलते है
 
बस थोड़ी देर और इंतज़ार कर लीजिये पोस्ट ही कर रही हूँ
 
सब से पहले तो बहोत बहोत शुक्रिया दोस्त की आपको कहानी और लेखन दोनों पसंद आये.

जी आप से सहमत हु की मेरे पास ऐसा कोई pic या gif नहीं है जिस का मैनुप्योग करी दूसरा कब कहा और कैसे प्रयोग करू वह भी नहीं सुजता

सब से बड़ी बात यह है की मेरे पास उतना समय भी नहीं है की मैं यह सब कर सकू.

मेरा सोचना यह है की मैंने शब्दों से पकड़ कर रखना है ज्यादातर संवादों और वर्णात्मक शैली का प्रयोग करती हु यह मेरी हर कहानी में होगा, कुछ मैं पाठको के लिए छोड़ देती हु ताकि वह उस पात्र को समझे या पसंद करे या फिर उसे इमेजिन करे, हर व्यक्ति का इमेजिन उसके पसंदगी का पात्रो से जोड़ते है, उदहारण के तौर पर सुंदरी को ले लो हर वक़्त कहानी में एक ही बात कही जाती है की वह सब से श्रेष्ठ है, अब श्रेष्ठता की व्याख्या तो है ही नहीं. कोई उसे अपनी पसंदगी की हिरोइन से जोड़ता है और उस तरीके से सुंदरी को देखता है तो कोई अपने पडोसी लेडी...........से........ उसी तरह मुनीम अभी तक कैसा है मैंने बताया ही नहीं छुपा रखा है लेकिन पात्र को सभी जानते है की कैसा है अब फिमेल उसे किस तरीके से देखती है वह उसका इमेजिनेशन पर है..............

खेर सब की शैली एक सी नहीं है

मुझे आपके विचार अच्छे लगते है आप कहानी की उन्ड़ाई देखते है ............मुझे अच्छा लगता है की कहानी के पीछे का मर्म या हार्द पकड़ते है................. ऐसे तो मैं भी इतना लंबा लेक्चर नहीं देती लेकिन आपकी भी खूबी तो है ...................

चलिएय आगे बढ़ते है ...................
 
अब आगे..................

उसका दिल खूब जोर जोर से धड़क रहा था। इससे पहले सुंदरी अपनी मर्जी से परम, सेठ और विनोद के लंड को अपनी चूत में पेलवाती थी। लेकिन आज सुंदरी इस अजनबी से चुदवाने में घबरा रही थी। सुबह जब सेठ ने कहा था यहां आने के लिए तो उसने सोचा था कि सेठ ही फिर चुदाई करेगा लेकिन यहां तो एक काला कलूटा जवान मर्द खड़ा था उसे चोदने के लिए। सेठ ने अचानक ही उसकी साड़ी को खींच कर अलग कर दिया कर दिया था और अब सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज़ में।

उसने अपने हाथों को क्रॉस करके अपनी चुची को ढक रखा था। काला आदमी समय बर्बाद नहीं करना चाहता था। उसने अपने पूरे कपड़े उतार दिए और सुंदरी के पास आया। उसने मुँह मोड़ने की कोशिश की, लेकिन अजनबी ने उसे पकड़ लिया और उसे ऊपर खींच लिया। वह चूमने लगा और चूमते-चूमते उसके स्तन दबाने लगा। कुछ मिनट तक सुंदरी स्थिर रही, लेकिन कब तक? आख़िरकार वह एक जवान औरत थी और अजनबी धीरे-धीरे लेकिन मज़बूती से उसकी चुची दबा रहा था और चूम रहा था।

उसने जवाब दिया। उसने उसका एक पैर उठाया और उसे अपनी कमर के चारों ओर लपेट लिया। अब अजनबी का हाथ उसके कूल्हों पर घूम रहा था और उसकी चूत दबा रहा था। सुंदरी ने अपना पेटीकोट खोला और उसका लंड पकड़ लिया। उसने लंड को अपने जघन क्षेत्र और योनि के होंठों पर रगड़ा। अजनबी उत्तेजित हो गया। उसका लंड उछल पड़ा। यह एक सामान्य आकार का लंड था, लगभग 6 इंच लंबा और 1.5 इंच मोटा। कुछ मिनट तक उसे चूमने के बाद उसने सुंदरी को बिस्तर पर धकेल दिया और बिना किसी मस्ती के उसके पैरों को अलग किया, लंड को चूत पर रखा और जोर लगाया।

चूत के अंदर पूरा जाने के लिए उस मर्द को जाम कर 4-5 धक्का लगाना पड़ा। सुंदरी जोर से कराह उठी। जैसे पहली बार कोई लंड उसकी चूत में प्रवेश कर रहा हो। ऐसा ही करना पड़ता है तभी तो सामनेवाले को मजा अत है।

“आआहह……”

अजनबी को जोश आ गया और उसने सुंदरी को ज़ोर-ज़ोर से चोदा। 7-8 मिनट के बाद उसे झड़ने का एहसास हुआ और उसने सुंदरी से पूछा-

“तेरी चूत में मूत दू…?”
मैत्री और नीता की रचना

“नहीं राजा, बाहर निकल लो.. मैं हाथ से ठंडा कर दूंगी।”

उसने अपना लंड बाहर निकाला और सुंदरी के चेहरे के पास घुटनों के बल बैठ गया।

“रानी, चूस कर ठंडा कर दो..” उसने लंड सुंदरी के मुँह में ठूँस दिया। हालाँकि अजनबी पूरा लंड सुंदरी के मुँह में ठूँसना चाहता था, लेकिन उसने लंड का सिर्फ़ ऊपरी हिस्सा ही लिया और उसे अपने होंठों के बीच चूस लिया। सुंदरी का चूसना एक अनोखा अनुभव था जो किसी मर्द ने पहले कभी नहीं किया था। वह उसे लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी और उसके अंडकोषों को भी सहला रही थी। अजनबी खुद को रोक नहीं पाया और सुंदरी ने अपना मुँह बाहर खींच लिया। उसने लंड को पकड़े रखा और वीर्य की बूँदें अपने स्तनों पर गिरने दीं। सुंदरी उसके वरी को पीना या चाटना नहीं चाहती थी। उसने उस आदमी की आँखों में देखा और पूछा,

"कैसा रहा?"

उसने उसे चूमा और कहा, "तुम बहुत मस्त हो, बहुत मज़ा आया..." उसने अपने गले से 'सोने का हार' निकाला और सुंदरी को पहनाने में मदद की। दोनों एक-दूसरे को पकड़कर बिस्तर पर लेट गए। वे इधर-उधर की बातें करते रहे और अजनबी सुंदरी के शरीर को सहलाता रहा। वह लंड को सहलाती रही और लगभग आधे घंटे बाद लंड फिर से सुंदरी की गीली चूत में था। इस बार वह उसे ज़मीन पर खड़ा करके चोद रहा था, सुंदरी के दोनों पैर हवा में फैले हुए थे। वह अपने दोनों मज़बूत हाथों में उसके पैरों को संतुलित करके चोद रहा था।

वह हर धक्के के साथ अपना 80 किलो वज़न चूत के अंदर डाल रहा था। सुंदरी इस चुदाई का पहले से कहीं ज़्यादा आनंद ले रही थी। परम और विनोद परिपक्व नहीं थे, उसका पति एक साधारण सा चोदू था और सेठ उसे तेज़ी से चोद सकता था। वह बहुत भारी था। उसने चूत के अंदर हर धक्के का आनंद लिया। हर धक्के के साथ वह कराह रही थी और उसकी कराह तेज़ होती जा रही थी। इस बार मनुष्य योनि को अधिक समय तक अंदर रोक कर रख सकता है और उसे बाहर निकालने की अनुमति नहीं मांग सकता है। उसने सुंदरी की चूत को अपने वीर्य से भर दिया और डिस्चार्ज होने के बाद वह सुंदरी के ऊपर उसकी जाँघों के बीच गिर गया। सुंदरी ने तुरंत अपनी चूत पर जोर लगाया और उसका वीर्य को बाहर उगल दिया।

दोनों ने अपनी सांसें वापस पाने की कोशिश की और तभी उन्हें दरवाजे खुलने की आवाज सुनाई दी। उन्होंने कोई परवाह नहीं की। सेठजी अंदर कमरे में आये।

"क्यों सर, माल कैसा लगा! मजा आया कि नहीं.?" सेठ ने पूछा।
मैत्री और फनलवर की रचना

अजनबी ने सुंदरी की चुची से अपना सिर उठा लिया। परम और सेठ दोनों ने सुंदरी को मुस्कुराते हुए देखा। अजनबी उसके स्तन सहला रहा था और सुंदरी के दोनों पैर अजनबी की कमर के चारों ओर घिरे हुए थे।

"बहुत मस्त माल है सेठजी, मजा आ गया। आपने जितना बोला था साली उस से भी ज्यादा मस्त है। माल ने मुझे खुश कर दिया है, लाइये मैं आपको खुश कर देता हूं।" अजनबी ने जवाब दिया और उसने फिर से उसे चूमा।

उन्होंने फिर कहा, “मुनीम को बोलो सारा बुक लेकर आ जाए, आज इस माल के नंगे बदन को खा कर तुम्हारा सारा बिल पास करा दूंगा।”

जैसे ही सुंदरी ने यह सुना, वह भयभीत हो गई। उसने अजनबी को धक्का दिया और उठ गई। उसने पेटीकोट पहनने की कोशिश की लेकिन अजनबी ने पेटीकोट खींच लिया और कहा

'तुम्हारे मस्त बडी गांड पर रजिस्टर रख कर साइन करूंगा।“
मैत्री और नीता की रचना

सुंदरी तुरंत डॉगी पोज़ में घूम गई और अजनबी की जांघों के बीच अपना सिर घुसा दिया। अजनबी दोनों पैर फैलाए बैठा था। वह सुंदरी के लंबे और घने बालों से खेलने लगा। तभी सेठ और मुनीम कमरे में दाखिल हुए। सुंदरी ने मुनीम के कदमों की आहट सुनी। वह डर गई। उसे यकीन था कि मुनीम उसे पहचान लेगा और उसके पास आत्महत्या के अलावा कोई चारा नहीं होगा।

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बने रहिये। आपके के कोमेंट की प्रतीक्षा रहेगी।

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।।जय भारत।।
 
मुझे लगा की सुंदरी का अब क्या होगा वह ज्यादा सुस्पेंस ना रखु और लिख दू

हालाँकि मुनीम ने खुद उसे सेठजी को संतुष्ट करने के लिए कहा था, लेकिन उसे यकीन था कि सेठजी को उसका किसी और के साथ चुदना बिल्कुल पसंद नहीं आएगा। उसने खुद को अजनबी की जांघों के बीच और भी करीब खींच लिया। दूसरी ओर, मुनीम को उस समय गहरा सदमा लगा जब उसने एक नग्न आकर्षक महिला को एक नग्न पुरुष की जांघों के बीच अपना सिर घुसाते देखा। मुनीम ने अपनी पत्नी की खुली हुई चूत देखी। उसका मन उसे चोदने का कर रहा था। मुनीम अन्दर से जानता था की वह औरत कौन है। अजनबी ने मुनीम से कहा कि वह सुंदरी की पीठ पर रजिस्टर रखे। मुनीम बिस्तर पर बैठने से हिचकिचाया, लेकिन वह अपने प्रलोभन का विरोध नहीं कर सका। चूत को करीब से देखने का मन हुआ और वह सुंदरी के बहुत करीब बैठ गया। मुनीम ने एक-एक करके रजिस्टर खोला और अजनबी ने मनचाही जगहों पर हस्ताक्षर और मोहरें लगाईं।


पन्ने पलटते हुए मुनीम ने सुंदरी को इधर-उधर छुआ और एक बार तो चूत पर अपनी उंगली भी फिराई। वह उसका चेहरा देखना चाहता था, लेकिन सुंदरी का चेहरा उसके घने बालों से पूरी तरह ढका हुआ था। रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने में सिर्फ़ 10 मिनट लगे, लेकिन सुंदरी को तो सालों लग गए। मुनीम के जाने और सेठ के अंदर से दरवाज़ा बंद करने के बाद, सुंदरी ने अपना सिर उठाया।

सेठ मुस्कुराया।

"आप बहुत गंदे हैं," उसने सेठ की तरफ मुस्कुराते हुए कहा, "मुझे सबके सामने नंगा कर दोगे..." उसने अजनबी का लंड सहलाया और पूछा, "

किसी को चोदना है? कि कपड़े पहन लूँ...?"

अजनबी उठा और सुंदरी को चूमा, "मैं तो थक गया हूँ..." और कपड़े पहनने लगा। सेठ ने कुछ देर तक उसे सहलाया और फिर दोनों बाहर चले गए, सुंदरी को कमरे में अकेला छोड़कर। उसने अंदर से दोनों दरवाज़े बंद कर लिए और बिस्तर पर नंगी पड़ी रही। उसने मुस्कुराते हुए खुद से कहा, "मैं आज से वेश्या बन गई हूँ और मेरा बेटा,पति और सेठजी मेरे दलाल बनगए है!" और अपनी आँखें बंद कर लीं।


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।।जय भारत।।
 
Ji bahot shukriya dost sarahna ke liye.

आप कमेंट पर कुछ लिखने के लिए शब्द नहीं है। तो सिर्फ धन्यवाद कहती हूं।



लाल रंग पर प्रकाश डाला गया

आपने इस एपिसोड और उसके पीछे का एपिसोड का हार्ड पकड़ा है। एक भ्रष्ट अधिकारी हार गिफ्ट कराता है मतलब जो सिर्फ लेने में मानता है वह दे जाता है।

गांड पर दस्तावेज रख के साइन करने के पीछे मुझे लगा कि ऐसे शब्दों से सुंदरी की मनोदशा और दयानीयता अशलीलता के साथ-साथ दिखाई जा सकती है।

मुनीम के द्वार की गई हरकत के जरीये दिखाने का प्रयास था कि चाहे कोई भी हो जैसा भी हो जैसी सोच हो पर जब प्रत्यक्ष अपनी बीवी को देखना सहन नहीं होता।

और अंत में एक महिला यह कहेगी कि एक वैश्या को भी अपने आप को वैश्या कहलाना मृत्यु से कम नहीं। उसकी मुस्कुराहट के पीछे ये दर्द था। और उसके शब्दो द्वार उन डालालो को एक कटाक्ष था।



ऐसा मेरा मान ना था जो लिख दिया।

Readers ko achchha laga bad mera kam ho gaya.

Thanks a lot again.
 
Kuchh aosa hi samajo dost.

Jaha paise ke len-den hai wah business hi hai.
 
Shukriya dost.

Asha hai ki aap ko aage bhi yah kahani aur lekhan shaili manoranjan deti rahegi.
 
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