जय भारत।
उसी समय एक दस्तक हुई।
अब आगे
सुंदरीने दरवाज़ा खोला और देखा सेठ दरवाजे पर खड़ा है। उसने उसे अंदर जाने दिया और खाट पर बैठने को कहा। उसने दरवाज़ा बंद कर दिया। सेठ ने काफी समय से महक को नहीं देखा है। वह उसकी सुंदरता और युवा शरीर को देखकर बहुत प्रभावित हुआ। सेठ ने महक को अपने पास बैठने के लिए कहा और उसने उसकी पीठ पर अपना हाथ फिराया। दूसरे हाथ से उसने उसके गाल थपथपाये। वह उसके शरीर की गर्मी को महसूस कर सकता था,
"सुंदरी, तेरी बेटी तो पूरी जवान हो गई है, इसके लिए कोई लड़का देखा की नहीं..." उसने महक को अपने शरीर पर खींच लिया।
“सेठजी, शादी के लिए तो बहुत लड़का मिल जाएगा लेकिन मैं चाहती थी कि पहले कोई इसकी सील तोड़े।” मैत्री और नीता की रचना।
..सुंदरी ने सेठ की ओर देखा और सवाल किया, "आप ही क्यों नहीं इसकी सील तोड़ने का पुण्य लेते हैं" बेचारी आपको आशीर्वाद देगी। वह पूरी तरह से कुंवारी है। किसी ने उसे नहीं देखा है... उसके माल को।” सेठ को पता था कि पिछले दस दिनों से उसका अपना भाई हर रात उसकी 'मालिश' से खेल रहा था और कल रात उसके पिता ने उसे लगभग चोद ही दिया था।
सेठ प्रस्ताव पर उत्साहित तो हुआ, लेकिन बोला, "तुम तो जानती हो सुंदरी, अब (तुम्हें चोदने के बाद) मैं इसकी सील कैसे तोड़ सकता हूँ..?"
उसने महक के गालो को चूमा।
“तू एक काम कर, इसे रोज मेरे घर ले कर आया करो, वहा अभी रोज शाम को कई लोग आते हैं..इसका सील तोड़ने वाला जल्दी मिल जाएगा…।”
सेठ को महक के कसे हुए स्तन अपनी छाती पर महसूस हो रहे थे! मैत्री और फनलवर की रचना।
“वैसे महक तुमने अपना माल का सही तरीके से विकास किया है। और इसकी चूत का पटल तोड़ने की क्या कीमत रखती हो?”
“अब मैं क्या कहू सेठजी? जो ज्यादा से ज्यादा देगा चूत उसकी पर एक रात के लिए।“
“फिर भी कुछ सोचा तो होगा ना तुम लोगो ने मिलके?”
“कमसे कम दो लाख..” सुंदरी ने कहा और फिर पूछा “ज्यादा है क्या?”
सेठ ने महक को अपने सामने खींच लिया। उसने उसकी ऊपर से नीचे तक जांच की और फिर उसे वापस कर दिया। फिर वह अपनी सिट से उठ कर महक के सामने आया और उसकी फ्रॉक को ऊपर उठाया और उसकी चूत का दर्शन किया। सुंदरी भी पास में ही खड़ी थी, सेठजी उसके पास गए और उसका पेटीकोट उठाया और उसकी चूत देखि और फिर सुंदरी के सतनो को थोडा मसला और बोले:
तभी परम भी अन्दर आ चुका था। मैत्री और नीता की रचना।
“नहीं, ज्यादा तो नहीं है… दो लाख से ज्यादा देने वाले भी मिल जायेंगे..”? सेठ ने कहा और जारी रखा। उसने बताया कि बारातियों के मनोरंजन के लिए उसने 4-5 तवायफ़ (नर्तकियाँ) रखी हैं जो शाम को नाचेंगी और गाएँगी और रात में चुदाई के लिए भी उपलब्ध रहेंगी। सेठ ने सुंदरी से फिर कहा कि उसे वी.वी.आई.पी. के मनोरंजन के लिए कुछ गाँव की औरतें चाहिए और उसने सुंदरी से शादी के दौरान दो रातों के लिए खुद को मुक्त रखने का अनुरोध किया, खूब चुदवाना है बरातियो को खुश रखना है और उसकी जिम्मेदारी तुम्हे देने आया था। सेठ ने कहा कि वह उन्हें अच्छी तनख्वाह देता है।
सुंदरी ने परम की तरफ देखा। लेकिन महक ने कहा,
“पूनम और सुधा को मैं मना लूँगी…”
परम ने कहा कि वह विनोद की बहन को इसके लिए राज़ी कर लेगा।
सेठ को राहत मिली, वह उठा और परम से बोला
“आज सुंदरी को लेकर ठीक दो बजे ऑफिस के बाले रूम में ले आना..बेटे।”
फिर उसने सुंदरी से कहा,
“चलो नीचे कमरे में चलो.. तुमसे कुछ काम है..।” मैत्री और नीता की अनुवादित रचना।
सुंदरी ने अपनी आँखें नीची करके बैठी रही। उसे पता था कि क्या काम है। परम भी जानता था कि सेठ सुंदरी को चोदना चाहता है, इसलिए परम ने उसे ऊपर खींचा और कमरे में ले गया। सेठ ने सुंदरी को बाहों में ले लिया और जल्द ही दोनों नंगे हो गए और सेठजी का लंड सुंदरी के अंदर था।
महक को यकीन नहीं हो रहा था कि इतना मोटा इंसान भी इतनी अच्छी तरह से चुदाई कर सकता है। उसने सेठजी का लंड उसकी माँ की चूत में अंदर-बाहर होते देखा। महक ने देखा कि पूनम की तरह सुंदरी भी चुदाई का मज़ा ले रही थी और वह सेठजी को सहला रही थी और चूम रही थी। लेकिन इस बार सिर्फ़ 6-7 मिनट बाद ही सेठजी स्खलित हो गए और उसके बदन से उतर गए। महक ने सेठजी का लंड देखा जो 6 इंच से ज़्यादा लंबा और काफ़ी मोटा था, लेकिन उसे अंदाज़ा हो गया कि सेठजी का सुपाड़ा पतला था। उसे खुशी हुई कि उसके बाप और भाई का लंड सेठजी से कहीं ज़्यादा अच्छा था। सेठ ने अपने कुर्ते से नोटों के बंडल निकाले और सुंदरी के नंगे बदन पर नोट बिखेर दिए।
महक ने रंडियों के बारे में सुना था, लेकिन आज उसने अपने घर पर ही एक रंडी देखी। सुंदरी बिस्तर पर ही रही और सेठ कपड़े पहनकर बाहर आ गया। सेठ जब बाहर आ रहा था, तब सुंदरी ने सेठजी से कहा कि वह अपनी बड़ी बहू 'उषा' को उसके घर भेज दे और सेठ मान गया।
उसे नहीं पता था कि सुंदरी ने परम को बड़ी बहू से चुदवाने की योजना बना ली है। उसे ज़रा भी शर्म नहीं आई कि परम और महक ने भी उसे नंगा देखा। वह उन पर मुस्कुराया और महक को याद दिलाया कि वह शाम को उसके घर आए। और यह भरोसा भी दिलाया की उसकी चूत का कोई ना कोई मोल मिल ही जाएगा। उसने महक को भी थोडा अपनी तरफ खींचा लेकिन महक नहि खिंची।
सेठजी ने सुंदरी और परम के सामने देखते हुए कहा, “महक को अभी काफी सीखना है, ज़रा तुम अपनि स्किल उसे दे दो। लंड को देख के थोडा तो मुस्करा करो मेरी जान।“
अब सुंदरी ने महक को थोडा धक्का दिया और कहा “सेठजी है अपने है और भरोसे मंद है तुम्हे कोई चोट नहीं पहुचाएंगे। जाओ बेटी उनके पास जाओ अपे माल का थोडा हुन्नर भी दिखाओ ताकि तुम्हारी तारीफ़ वह आगे कर सके और तुम्हे जल्द से जल्द चूत का पटल खुले, बाकी आए लम्बी राह है।“
बस आज लिए यही तक। कल अगले अपडेट में मुलाक़ात होगी।
तब तक आप इस अपडेट के बारे में अपनी राय देना ना भूले।
प्रतीक्षा तो रहेगी ही।
जय भारत।