Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 73 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

सब से पहले तो आपका धन्यवाद.

आपके लिए अब ज्यादा नहीं लिखूंगी......बस आप कहानी के पीछे का मकसद बहोत अच्छे से पढ़ रहे है...........

जैसा मैंने पहले भी कहा था इस पूरी कहानी में अश्लीलता के पीछे एक दर्द,ख़ुशी,फिलिंग छुपी रहेगी जो पाठक अपने हिसाब से उसके पीछे का मर्म समझेंगे. पूरी कहानीमे कही भी मैं हार्द या गहराई को उजागर नहीं करुँगी. कोशिश भी नहीं रहेगी.

हा हा हा आपका सुझाव ध्यान में रहेगा अगर यह कहानी ख़तम हुई जो की शादी समारोह तक सिमित है, और अगर पाठक गण उसे आगे लिखने की इच्छा जाहिर करते है तो अगले चेप्टर का नाम यही रख देंगे (चोदु गाँव). अब कितनी इच्छाए प्रगट होती है और कैसे होती है उस पर आधार रखता है. अभी तो कोइ प्लान नहीं है. लेकिन आगे सुंदरी के जीवन के बारे में या फिर परम के बुढ़ापे तक लिख सकते है......हा हा हा हा हा

अब तक तो यही दर्शाने की कोशिश है की पैसा और वासना दोनों मिल जाते है तो एक हद से आगे वह व्यभिचार है और इसके लिए अपनी विवेक बुध्धि ही सब से बेस्ट है.

अब मुनीम को अपना हिस्सा मिलता भी है या नहीं, अगर मिलता है तो कब,कैसे,क्यों......यह सब आगे की कहानी ही बता सकती है, अभी फिलहाल तो मुझे भी नहीं पता..... :DD:

फिर से आपका बहोत बहोत धन्यवाद

ऐसा ही एक गाँव और भी है जो मेरी दूसरी कहानी में है लेकिन वह सिर्फ गाँव है जहा अश्लीलता कम है और गाँव का परिचय ज्यादा है. शायद अआपने पढ़ी होगी.........
 
हे हे vakharia भाई सब से पहले मेरे इस छोटे से प्रयास और थ्रेड पर आपका स्वागत है।

आप जैसे बड़े लेखक मेरे जैसी छोटी और सिखाऊ लेखिका के थ्रेड को पढ़ रहे है जानकर ही एक गुरुर पैदा हो जाता है।

मुझे ख़ुशी हुई के मेरे कुछ शुरूआती पाठक में से आप एक हो और यहाँ मुझे अपनी टिप्पणियो से बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

मुझे यहाँ सब के सामने कहने में गर्व महसूस होता है की आप उन लोगों में से एक वही है जिन्होंने मुझे लिखना सिखाया या फिर प्रोत्साहित किया था। शायद आप भूल गए होंगे पर मेरे लिए भूलना थोडा मुश्किल है।

आपकी इस टिपण्णी ही मेरे लिए दिवाली की गिफ्ट है................आपको नए साल की शुभकामनाये।

मेरी अगली कोममेंट में ऐसा ही लिखा है की इस कहानीमे भरपूर अश्लीलता के साथ और उसके पीछे दर्द,ख़ुशी,दुःख,आनंद,फीलिंग्स,और समाज के नियम को कुछ हद तक शब्दों के पीछे मर्म के तौर पर रखा है।

जैसा की पैसा ही सब कुछ करवाता है......बहोत कुछ......महिला की अन्दर छुपी अभिवयक्ति,विचार,दर्द,पछतावा और पैसा बहोत कुछ.....शायद आप आगे पढेंगे।

सब जानते है की आपकी लेखनशैली के सामने मेरी लेखनशैली कुछ भी नहीं है। पर कोशिश जुरूर करुँगी आप के सामने बैठ सकू।


शब्दों का चयन...!! जैसे मख्खन पर चाकू चल रहा हो.. हर वाक्य में एक लय है, एक संगीत है.. अश्लीलता नहीं, बल्कि एक कलात्मक अभिव्यक्ति है..

इस पर मैं आपसे एक विनती जुरूर करुँगी की मेरी एक दूसरी कहानी भी चल रही है जहा मैंने अलंकारिक और कलात्मक शब्दों से विवरण करने का प्रयास किया है। आशा है की आप एक बार पढेंगे और अपने विचार, टिपण्णी, कुछ होमवर्क जुरूर देंगे।

कहानी का नाम है
"लूई के पन्ने!"

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Fantasy - लुइ के पन्ने!

चलिए एक और कहानी आपके सामने पेश करने जा रही हूँ। आशा है की अभी मेरी रनिंग कहानी "परम-सुंदरी" जैसा ही अवकार और सत्कार इस कहानी को भी मिले। https://xforum.live/threads/परम-सुंदरी.189875/ दोस्तों, यह कहानी के मूल लेखक...

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xforum.live

इस कहानी के पाठक कम है तो ध्यान भी कम है। लेकिन मुझे आशा है की आपको पसंद आएगी।

आपका फिर से बहोत बहोत धन्यवाद।
 
वैसे तो आप मुज से बेहतर कहानीकार है इसलिए अगर आप को मेरा कोई वाक्य पसंद आया और आप अपनी कहानी में प्रयोग करे उस से बेहतर मेरे लिए क्या हो सकता है...........
 
ohh so sorry to hear that.

Unfortunate you are!

By the way I think you are at wrong platform, I think this site is meant for stories, pic, gif to entertainment. In other words this site is for self entertainment. Not for dating or chating, I suppose.

But anyway I should wish you better luck ahead.
 
जी बहोत बहोत धन्यवाद आपका

थोड़ी ही देर में एक और अपडेट पेश करुँगी
 
चलिए अब कहानी में थोडा आगे बढ़ा जाए ......................
 
परम तो थक ही गया था, सुबह में पहली अपनी ही माँ की चूत फाड़ी, फिर बड़ी बहू, उसके बाद रजनी और उसकी नौकरानी रिंकू। बाद में शाम को पुष्पा और आख़िर में अपनी बहन महक। आज सबसे ज्यादा मजा परम को पुष्पा के साथ आया था। परम ने सोचा कि कल फिर मौका निकाल कर पुष्पा को चोदेगा और नन्ही पूमा के कमसिन बदन को सहला कर मजा लेगा।

परम माँ को अपने सीने से चिपका कर लेट गया। दोनो ने एक दूसरे के ऊपर टांग चढ़ाई और सहलाते हुए सो गए।

अब आगे...................

उधर महक ने देखा कि उसका बाप बिल्कुल नंगा पीठ के बल सोया हुआ है। वो नजदीक गई, आज उसने पहली बार ध्यान दिया कि उसके बाप का पेट निकल गया है। बाप की मोटी-मोटी जांघें और दोनों जांघों के बीच मोटा लंड आधा लंगड़ा हालत में था और ढीला आराम कर रहा था, लेकिन अभी भी सुपारा बहोत आकर्षक लग रहा था। महक को कल रात की बात याद आयी जब उसका बाप चुदवाने के लिए अपनी बेटी का ख़ुशामद कर रहा था। महक को ये भी याद आया कि जब बाप ने सुपारा चूत में दाल दिया था तो कैसे उसके बाप को थप्पड लगाया था। महक मुस्कुराती हुई बाप के बगल में लेट गई। महक ने सोचा कि आज या बाद में कभी भी बाप चोदना चाहेगा या गांड में लंड डालना चाहेगा तो 'ना' नहीं कहेगी। प्यार से अपनी चूत में बाप का लंड का माल लेगी और पैर और कुल्हे खोल के अपनी गांड मरवाएगी, महक ने बाप के गालों को हल्के से चूमा और हमसे अलग हट कर माँ के जगह पड़ गयी। महक भी शाम से चार बाद चुदवाकर पूरी थक गई थी इसलिए आज अपने बाप का लंड को छेड़ना मुनासिब नहीं समजा क्यों की एक बार लंड को छेड़ा तो फिर चूत के छेदअपने आप ही खुल जायेंगे और बेटी चाहती थी की उसका बाप पूरी ताकत से उसे चोदे और गांड मारे,और उसकी चूत और गांड दोनों छेद को बिना थके सहकार देना चाहती थी। आज्थाकावत की वजह से बाप के 3-4 शॉट से ही वह पायमाल हो सकती थी, और ऊपर से यह बड़ा सुपारा!!! बाप रे..... । लेकिन उसने यह तो तय किया था की अगर उसकी माँ अपने बाप को ज्यादा समय नहीं देगी तो बी=इति उसकी माँ की जगह कभी भी ले लेगी और बाप के लंड के लिए वह कभी भी अपने पैरो को फैलाएगी। फिर भी उसका मन नहीं कंट्रोल में रहा और अपना मुंह अपने बाप के लंड की तरफ ले गई और उसका सुपारे के छेद को थोडा चाटा और थोडा सा मुंह में समाया, लेकिन जैसे ही बाप उसकी तरफ घुमा, वह उठ के अपने बाप की बगल में सो गई।


****

पहली नींद पूरी हो जाने पर मुनीम की नींद खुली। उसने आंख खोली तो देखा कि बगल में उसकी प्यारी मस्त जवान बेटी बिलकुल नंगी सोयी है। महक की मस्तानी जवानी देख कर बाप का लंड टाइट हो गया। मुनीम ने देखा कि उसकी बेटी महक फ्लैट लेटी है और एक पैर को घुटने से मोड़कर रखी है। महक के स्तन हर एक सांस के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे। मुनीम बैठ गया और बेटी की जवानी का निरीक्षण करने लगा। उसकी नजर बेटी के माल पर टिक गई थी।

घने और लंबे बाल, गोल कंधे, अच्छी तरह से विकसित ऊपरी भुजाएं, गुलाबी होंठ, मीठे गाल, लंबी गर्दन और भरे हुए और कसे हुए स्तन। निपल्स छोटे थे और निपल्स के चारों ओर का भूरा क्षेत्र आधा इंच के दायरे का था। निपल्स खड़े और कसे हुए थे। उसने नीचे देखा, सपाट पेट और सूजा हुआ जघन क्षेत्र। उसे पता ही नहीं था कि चार घंटे के अंदर उसकी चुदाई चार बार हो चुकी थी, और उसकी वजह से उसके चूत के होठ थोड़े खुले हुए थे। उसकी चूत के होंठ खुल गए थे और वो भी गुलाबी रंग के। पिछली शाम उसने उसकी बेटी को लगभग चोद ही दिया था, इसलिए वह समजता था की उसके लंड की करतूत से बेटी की चूत थोड़ी सी फैली हुई है। वो अपना मोटा लौड़ा उसकी चूत में घुसा सकता था, लेकिन उसने पूरी तरह से घुसने से मना कर दिया। उसे याद आया कि कैसे उसने अपने मुंह से उसकी बेटी की चूत खींची और उसका स्वाद चखा था। मुनीम ने अपने होंठ ऐसे चाटे जैसे उसकी बेटी की चूत का स्वाद अभी भी उसके होंठों पर हो (बेटी की चूत का रस सभी बाप को मीठा ही लगता है और बरसो तक उसका स्वाद अपने मुंह में समाये रहता है)। शाम को उसकी बेटी की दो सहेलियों सुधा और पूनम के साथ चुदाई करते हुए उन्होंने उसकी बेटी की मस्त जवानी पर बात की और दोनों लड़कियाँ इस बात पर सहमत हुईं कि महक की जवानी उनकी जवानी से कहीं ज़्यादा सेक्सी और लज़ीज़ है। उन्होंने कहा कि अगले 2-3 सालों में लोग सुंदरी को भूल जाएँगे और महक के रसीले बदन के पीछे पड़ जाएँगे, जैसे अभी सुंदरी की जवानी के पीछे पड़े हैं।

बेटी की नंगी जवानी को बाप देख रहा था और अपना लंड सहला रहा था। मुनीम अब बेटी को पूरी तरह चोदना चाह रहा था। वो उठकर बेटी के पैरों पर आया और धीरे-धीरे दोनों पैरों को अपनी तरफ खींचा और थोड़ा फैला दिया। मुनीम दोनो टांगो के बीच में अपने घुटनो पर बैठ गया और लंड के सुपारे को बेटी के चूत से सटाया। बेटी की चूत की फांक पर लंड को रगड़ा और चुदी हुई चूत खुल गई। मुनीम को बेटी का छोटा सा क्लिट दिखायी दिया। पहले तो बाप ने सोचा कि बेटी की जवानी को खूब चूमे और चाटें। लेकिन फिर उसे याद आया कि कल शाम को बेटी की चुची और चूत को खूब चूसा था और बेटी ने भी लंड को चूस कर मोटे लंड का मजा लिया था। कल रात की बात सोच कर बाप का लंड टाइट होकर बेटी के चूत पर टकराने लगेगा। उसका लंड अब बेटी की चूतको फाड़ने के लिए बुलबुला रहा था और बेटी की चूत के मुंह के आगे ठोकर मार रहा था। बाप ने दोनो उंगली से चूत की फाँक को फैलाया और लंड को चूत में दबाया। कोई साधारण लंड होता तो शायद महक को पता नहीं चलता कि लंड कब चूत में घुस जाएगा। लेकिन बाप का मोटा सुपारा चूत में घुसते ही महक को लगा कि उसकी चूत फट जाएगी। उसने आँख बंद किये ही कहा,

“बाबू जी थोड़ा चूत को मसल कर गीला होने दो, फिर लंड को घुसाना चूत के अन्दर।”

लेकिन बाप को अब बर्दाश्त नहीं था, उसने बेटी का कमर दोनों हाथों से बाँधा और बैठे बैठे ही जोर का धक्का मारा..

“ओह्ह… माँ..” महक को लगा कि चूत फट जाएगी। उसने पैरों को और फैला दिया और रिफ्लेक्स एक्शन में चूत को ऊपर उठा दिया।

बाप ने कमर पकड़े-पकड़े एक और धक्का जोर से मारा और सुपारा चूत को चीरते हुए भीतर घुस गया। मुनीम थोड़ा लंबा हुआ और दोनों हाथों से बेटी की बोब्लो को मसलते हुए लंड को चूत में दबाने लगा,

“तेरी माँ कहाँ है?” मुनीम ने पूछा और जोर से धक्का दे दिया। अब आधे से ज्यादा लंड चुत के अन्दर था और बाकी का हिस्सा भी अन्दर सरक रहा था।

“मां (सुंदरी) भैया (परम) के साथ सोयी है।”

“ओह्ह, वाह, क्या वह यही कर रही है जो हम कर रहे है?”

“बाबूजी मुझे नहीं पता वह जगह कम होने से मैं आपके साथ आ गई लेकिन कपडे वही भूल आई।“

कोई बात नहीं बेटी, अब कपडे इ क्या जरुरत है वह परम के साथ तुम्हारी माँ भी तो नंगी ही होगी।“

“ह्म्म्म, बाबूजी उनको जो करना है करने दो, हमें क्या!!”

“हां, सही बात है बेटी।“
मैत्री और नीता की प्रस्तुति

“घर की बात है पिताजी, अब माँ अपने बेटे से चुदवा रही है तो बाप भी तो अपनी बेटी की चूत से खेलता था। आप उन दोनों पर ध्यान ना दे और यहाँ अपनी बेटी की चूत से खेले। बाबूजी माँ कहती है की मेरा माल भी बहोत अच्छा है, और वैसे भी कल आपने भी तो चखा हुआ है। कैसा था मेरे माल का स्वाद?“

“बेटी, एक तो चूत का स्वाद ऊपर इ बेटी की चूत वाह भाई मजे ही मजे!” मैत्री और नीता की प्रस्तुति

बाकी लिख रही हूँ जाइयेगा नहीं....बने रहिये.....

इस एपिसोड के बारे में अपनी राय देते रहिये प्लीज़..............

। जय भारत
 
मैं आप से बिलकुल सहमत हूँ
 
जी बिलकुल बहोत पुराने और जमे हुए खिलाड़ी है इस प्रकार की साईट के. उन्हों ने मुझे काफी कुछ सिखाया है. एक अच्छे समीक्षक है आपकी तरह........
 
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