Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 27 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

Yes, thank you very much.

With your support and cooperation, this story will keep entertaining you.

It will probably be difficult for me to mark you in every update, but put this story in the watch list and you will keep getting notifications every time.

And I will keep updating this story almost every day because the story is quite long. This story is in chapters, so to finish it quickly, I will either have to give big updates or give updates every day. It is becoming very difficult to write big updates friend, especially a story which is very erotic.

I apologize to you that I cannot mark you every day.

Just stay connected with this story and keep giving your opinion.

*******

जी, बहोत-बहोत शुक्रिया आपका।

आपके साथ और सहकार से यह कहानी आपको मनोरजन देती रहेगी।

हर अपडेट में आपको मार्क करना तो शायद मेरे लिए मुश्किल होगा, पर इस कहानी को वाच लिस्ट में डाल दीजिये तो आपको हर बार नोटिफिकेशन आता रहेगा।

और यह कहानी में ऑलमोस्ट रोज ही अपडेट देती रहूंगी क्यों की यहाँ कहानी काफी लम्बी है चेप्टर्स में है यह कहानी तो जल्दी ख़तम करने के लिए मुझे या तो बड़े अपडेट देने होंगे या फिर रोज अपडेट देने होंगे। बड़े अपडेट लिखना बहोत मुश्किल हो रहा है दोस्त , खास कर ऐसी कहानी को जो की बहोत एरोटिक हो

आप से माफ़ी चाहती हूँ की मैं आपको हररोज मार्क नहीं कर सकती।

बस, आप इस कहानी से जुड़े रहिये और अपने मंतव्य देते रहिये।।।।।।
 
मैंने एक कहानी शुरू की है जो हिंदी में लिखी गई है। जिसका नाम "लूई के पन्ने" है।

मुझे आशा है कि आप इसे पढ़ेंगे और अपनी राय देंगे। जिसका लिंक नीचे दी गई है।

https://xforum.live/threads/लुइ-के-पन्ने.191718/#post-11406191

I have started a story written in Hindi. Its name is "Louis Ke Panne". I hope you will read it and give your opinion. The link of which is given below.

https://xforum.live/threads/लुइ-के-पन्ने.191718/#post-11406191
 
Shukriya dost....

Kahani kaa main aim to readers ka entertainment hi hai. Readers ko maja aya matlab mera prayas safal raha.

Bas aap jude rahiye... Shayad aapko aur bhibjyada aanand mile.
 
हिंदी दिवस की शुभ कामनाएं।



हिंदी हमारी शोभा और पहचान है।



उसकी कदर करे और अपनाए।

शुक्रिया दोस्तो.
 
आप पहले भी अपना टाइम बेकार में वेस्ट कर चुके है दोस्त.................... यह कहानी में ज्यादा इन्सेस्ट है इसलिए यह टेग किया गया है.............. अब आपकी इन्सेस्ट की परिभाषा में यह नहीं है तो बेहतर है की आप यहाँ से आगे ना पढ़े................यह कहानी आपके टेस्ट की नहीं है तो कृपया अपना और दूसरो का समय बर्बाद ना करे ....................

||जय भारत||
 
चले अब कहानी में आगे बढे.......................

कहानी को साथ और सहकार की जरुरत है ....................
 
“नहीं पापा वैसे मैं इसे परम भैया के लिए लाइ थी वह परम से प्यार करती थी पर अब आप के लंड से उसकी सिल टूटनी लिखी थी तो टूट गई, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है पापा।“

बेटी मेरा लंड कैसा लगा? मुनीम अब अपनी बेटी को पटाने में लग गया था।

******

अब आगे

“मस्त लोडा है पापा आपका तभी मम्मी (सुंदरी) कही किसी से नहीं चुद्वाती।“

“मुझे उस से कोई फर्क नहीं पड़ता बेटी, अगर तुम.....मेरे लंड का ध्यान रखो तो सुदरी को मैं मुक्त कर दूंगा।“

“मुक्त???? मतलब क्या है आपका पप्पा?”

“अरे बेटी, ऐसा कुछ नहीं जो तुमने समजा। मुक्त मतलब वह जहा चाहे जिस से चाहे चुदवा सकती है, हो सकता है मेरे सामने भी...”

“ओह्ह्ह तब तो ठीक है बाबूजी....लेकिन अभी नहीं...समय आने पर सब...हो.....गा...!”

महक ने मुनीम के लंड पर हाथ तो रखा फिर तुरंत अपने आप को कंट्रोल करते हुए कहा “आज तो बाबूजी ने मस्त चूत का मजा ले लिया अब और क्या चाहिए!! हो सकेगा तो मैं और चूत का बंदोबस्त कर दूंगी, लेकिन मैं अभी फिलहाल नहीं।“

“अरे बेटा, अगर तुम ऐसा कर सकती हो तो तुम जैसा इस दुनिया में कोई नहीं।“

“कर क्यों नहीं सकती बाबूजी! जरुर कर सकती हु और करुँगी भी, आखिर मेरे पापा के लंड को माल की कमी महसूस तो नहीं होनी चाहिए।“

“बेटे, अब तुम ही एक ऐसा माल हो, जिसको भी मिल जाए वह दुसरे माल की इच्छा ना रखे।“

बाबूजी, मस्का मारना तो बस, कोई आप से सीखे।“ उसकी नजर अभी भी बाबूजी के लंड पर थी।

महक ने मशकरी करते हुए आगे बोली:“और यह बाबूजी का प्यारा सा नन्हा सा खिलौना भी बहोत मस्का मारता होगा।“

पूनम बस इन दोनों की बाते सुनती रही।

पूनम को लगा की महक अगर उसके माल को दिखा दे तो मुनीम यानी की उसके पापा का लंड उसकी चूत में पूरा नहीं तो टहलने को तो चला जायगा। वैसे भी इस दुनिया में ऐसा कोई मर्द नहीं जो उसके आँखों के सामने एक नन्ही सी चूत हो अरु उसका लंड खड़ा न हो और उस चूत के सैर करने को तैयार ना हो। फिर वह चाहे बाप हो या भाई। मर्द तो पहले मर्द है बाद में भाई-बाप या फिर मोई और रिश्तेदार। बस एक चूत के होल पर ही मर्द की दुनिया टिकी हुई होती है। छुट तैयार तो लंड किसी का भी हो खड़ा हो के छुट मारने को बेताब हो ही जाता है। उसे अपने माल पर गर्व हुआ। भगवान् तेरा बहोत बहोत धन्यवाद की मुझे चूत दी है, उस माल के जरिये मैं बहोत लंडो को उनके पेंट में ही झाड सकती हु।

“बस, बेटी, अब बस कर मुझे अब निचे तकलीफ हो रही है। मैं ज्यादा सहन नहीं कर पाऊंगा।“ महक भी तो वही चाहती थी। वह अपने बाप के सुपारे पे अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार थी। वह अब उस सुपारे को अपने अन्दर समाना चाहती थी। शायद अगर पूनम ना होती तो......अबतक यह सुपारा उसके अन्दर होता। और लंड को पूरा का पूरा खाली कर देती।

“अरे पापा अब उसे क्यों तंग कर रहे हो, पूनम का माल का उद्घाटन तो आपने कर ही दिया। उसकी परी को अब खूब लंड लेने के लिए मुक्त कर दिया।“ महक अपने बाबूजी को ज्यादा से ज्यादा उकसाने के प्रयास में थी। वह चाहती थी की एक बार फिर से पूनम की चूत की खबर अपने पापा का लंड से ले ली जाए। और वह यही प्रयास में थी की मुनीम बस एक बार फिर से पूनम की चूत में अपना लंड खाली कर दे। आये मौके को गवाना नहीं चाहिए।

मुनीम भी एक मौके की तलाश में था की पूनम थोडा सा आगे पीछे जाए तो महक को दबोच ले। वैसे भी वह थोडा डर रहा था। और अगर महक को गुस्सा आ गया तो पूनम को फिर से उसके लोडे के निचे आने नहीं देगी। और यह भी हो सकता है की आगे जाके जो महक ने कहा की वह नयी चूत का बंदोबस्त करेगी वह भी नहीं करेगी। नुकशान उसीका होगा। वह बड़े संयम के साथ वही खड़ा रहा। वैसे वह भी चाहता था की उसका लंड खड़ा रहे। लेकिन पूनम के जाने के राह देख रहा था। मुनीम के लिए हर एक पल एक दिनके बराबर होता जा रहा था।

उधर महक अपने निशाने को खली नहीं जाने दे रही थी, वह बार बार बाप को उक्साके उसका लंड खड़ा रखने की कोशिश में थी। हलाकि वह खुद भी अब इतनी गरम हो चुकी थी की अगर पूनम वह ना होती तो अच्छा था किवः अपने बाप को लुट लेती। उसके सुपारे को चूस देती। उसको अब परम से ज्यादा अपने बाप का लंड से प्रेम हो गया था। वह सोच थी की जो दर्द पूनम को हुआ वैसा ही दर्द मुनीम का लंड अपनी चूत में समा के वही दर्द को महसूस करना चाहती थी। यह कहानी मैत्री और नीता की अनुवादित है


एक तरीके से यह ट्राएंगल सा बन गया था। पूनम चाहती थी की उसके सामने महक के बाप का लंड महक की चूत को रोंद डाले जैसे उसकी चूत का हाल हुआ। तो दूसरी तरफ महक चाहती थी की पूनम अब जाए तो वह अपने बाप के लंड पर बैठ जाए। तो मुनीम का तो ठिकाना ही नहीं था वह तो दोनों को साथ में चोदना चाहता था लेकिन सब से पहले महक की चूत को मारना चाहता था ताकि उसके लिए बाकी सभी रस्ते खुल जाए और घर में ही एक जवान चूत का मजा मिल सके और वह भी कभी भी। तीनो अपनी अपनी सोच में डूबे थे।

बने रहिये और इस एपिसोड के लिए अपनी राय, मंतव्य दे................
 
Update 07

पूनम को लगा की कुछ ज्यादा बाप-बेटी में वार्तालाप हो गया है, शायद महक खुल के ना बोल देगी तो!!!!

पूनमने अपनी जांघें फैला दीं और फिर पूछा, "महक देख तो, मेरी चूत फटी तो नहीं?" और उसने खुद ही अपनी चूत के होंठों को सहलाया और दूर खींच लिया।

"मुझे अभी भी समझ में नहीं आ रहा है कि इतना मोटा लंड इस पतली सी चूत में कैसे घुस गया..घुस भी गया और उसका भयानक रूप भी दिखा दिया अन्दर उसने काफी धमाल की थी। सच में!"

मुनीम ने दूध खत्म किया और नंगा ही टॉयलेट चला गया। जब वह आधा खड़ा, और लहराता लंड लेकर लौटा, तो पूनम टॉयलेट चली गई। जैसे ही पूनम नज़रों से ओझल हुई, मुनीम ने महक को खींच लिया। उसने उसे एक बाँह में लिया और अपने नंगे बदन से चिपका लिया। वह सिहर उठी। हालाँकि पिछले पंद्रह दिनों से वह अपने भाई के साथ अनाचार का आनंद ले रही थी, लेकिन उसने कभी नहीं सोचा था कि उसका इतना सीधा-सादा दिखने वाला पिता उसकी दोस्त के साथ संभोग करेगा और बेटी साथ नंगा बैठने में कोई आपत्ति नहीं करेगा। वह यह सब सोच ही रही थी कि मुनीम ने उसे बाहों में ले लिया और एक हाथ से उसके गालों को सहलाते हुए बोला,

“बेटे, माँ को मत बोलना कि मैंने तुम्हारी सहेली को चोदा है।”

“नहीं बाबूजी, आप नाहक चिंता कर रहे हो, यह भी किसी को कहने की बात है भला! घर की तो बात है और मैं समज सकती हु की परिश्थिति जी कुछ ऐसी बन गई थी की यह सब होना ही था, आखिर आपका भी तो लंड है और जवान माल सामने हो तो कोई भी अपना लंड शांत करने की कोशिश करेगा, आप डरिये मत, यह सब घर की ही बात है और मैं किसी को नहीं बोलूंगी।”

उसने अपना हाथ नहीं हटाया और मुनीम ने उसका हाथ अपनी बेटी के स्तन पर फिसलने दिया। उसने उन्हें धीरे से दबाया।

“तुम्हारी बोबले तो पूनम से बड़े है।” के सहलाता रहा और दबाता रहा। उसने देखा के महक का कोई विरोध नहीं है तो उसको थोड़ी हिम्मत आई।

“बेटे, एक बार कपड़े उतार कर अपनी पूरी जवानी दिखाओ ना!” मुनीम ने उसकी जाँघों के बीच हाथ फिराया।

“मुझे शर्म आ रही है.. घर में कोई नहीं होगा तो दिखा दूंगी..”

महक ने जवाब दिया, पर वह अपनी चूत पर अपने पिता के हाथ का दबाव महसूस कर सकती थी। मुनीम खूब आराम से एक हाथ से अपनी जवान बेटी की मस्त बोबले को रगड़ रहा था और दूसरे हाथ से फ्रॉक के ऊपर बेटी की चूत को दबा रहा था। मुनीम ने उसके थन को दबाते हाथ को फ्रॉक के नीचे घुसाया और मुनीम का हाथ बेटी की गरम चूत से सुत गया..

"बाबूजी मत करो..!" महक फुसफुसा कर बोली। हलाकि उसने अपने पिता का हाथ वहा से हटाया नहीं।

“बस एक बार मेरे इस लंड को अपनी चिकनी चूत से रगड़ने दो!”
यह मैत्री और फनलवर से अनुवादित कहानी है

मुनीम ने बेटी की स्तन को छोड़ कर, बेटी का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया। लंड टाइट होने लगा था, मुनीम ने महेक के चूत को मसलते हुए कहा:

“बेटी लंड को सहलाओ।”

महक लंड को मुठ मारने लगी और लंड बहुत टाइट होने लगा…उसका बड़ा सुपारा अब उसकी चमड़ी से बाहर आके अन्दर जाने लगा।”

“साली पूनम ने इतना मोटा लौड़ा चूत के अंदर लिया कैसे..?” उसने खुद से फुसफुसाया।

मुनीम ने फ्रॉक उठाकर अपनी बेटी की चूत देखी।

“बेटी, चूत को लंड से सटाओ..।”

“नहीं बाबूजी, अभी नहीं…पूनम के सामने नहीं…।” मौका मिलने पर पूरा लंड चूत में समा दूंगी…। ऊपर से करो बस।“

वे एक-दूसरे को सहला रहे थे और उसी समय उन्हें पूनम के कदमों की आवाज़ सुनाई दी। तुरन्त महक चारपाई से उतर कर मुनीम से दूर कड़ी हो गई। पूनम नंगी आ गयी, उसने मुनीम का लंड पकड़ लिया और बोली:

“साला, काका तुमने इतना जोर-जोर से चूत में धक्का मारा की टट्टी (स्टूल) निकल गया। और चूत तो खून से लथपथ हो गई है।”

वह नीचे झुकी और सुपाड़े पर एक चुम्बन ले लिया।
यह कहानी मैत्री और नीता की अनुवादित है

“मेरे चूत का मालिक हो गया अब तो यह लंड! मस्त सुपर है यह उसीने मेरी चूत की झिल्ली को फाड़ डाली और अब मैं एक औरत हो गई हु। बेटीचोद फिर से तुन गया है.. अब किसका चूत फाड़ेगा?” उसने महक की ओर देखा और कहा, “आजा महक अब तू चुदवा ले..।”

“आज तू ही चुदवा, पहली बार बहुत दर्द हुआ था ना..इस बार चुदवायेगी तो बहुत मजा आएगा।” उसने मुनीम की ओर देखा और कहा,

“बाबूजी एक बाद फिर से इसे चोदो..” उसने बाबूजी को आँखों से इशारा कर के आगे बढ़ने को कहा। और खुद ने सोचा मुझे इस राक्षसी लंड से बचना ही होगा।

“तेरा बाप मुझे चोदे इससे पहले मैं तुम्हें चोदूंगी… तुमने ने मेरा चूत चाट कर इतना गरम कर दिया था कि मेरे तुम्हारे बाप का लंड से चूत को ठंडा करना पड़ा। तुम्हे पता भी है की इस मोटे लंड ने मुझे कितनी बार झडा दिया! मेरी इस मुनिया बहोत बार झड़ी है अब मुझे नहीं लगता की मेरी चूत में अब और पानी होगा।”

“बेटी, चूत तो पानी का दरिया है और वह पानी छोडती रहती है और मेरा लंड भी तो पानी भरेगा। चूत तो जितनी बार झाडे उतना चूत का लिए और बाकि शरीर के लिए अच्छा ही है।“
मैत्री और फनलवर की अनुवादित रचना है

“जी बाबूजी, आप सही कह रहे हो।“ महक ने बाबूजी की बात में हामी भरी और पिताजी को उकसाने की कोशिश करी।

पूनम: अब ज्यादा शानी मत बन महक! क्या सिर्फ तुम्हारी माँ ही तुम्हे यह सब सिखाती है! मेरी माँ ने मुझे नहीं सिखाया होगा!”


पूनम महक के पास गई और उसका फ्रॉक ऊपर कर दिया और बोली : काका, जो आपने कहा वह सब मैं जानती हु, लेकिन यह माल भी देखिये, शायद आपको अच्छा लगे, वैसे मैं अभी थकी हुई भी हु लेकिन मेरा मन कह रहा है इस मस्त लंड को जाने मत दे और समा ले अपनी चूत में फिर से।“

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आपके कोमेंट की प्रतीक्षा रहेगी.................
 
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