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- Dec 5, 2013
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“परम, तुम अगर मुझे उस शाम फील्ड में चोद देते तो मैं मना नहीं करती…।”
“लेकिन रानी, उसके बाद…तुमने कितना नखरे किया…” परम ने उसे चूमा।।”पुरे 3 महीने तुमने मुझसे बात नहीं की।”
उसने गले लगा लिया ।।”तुम अगर मुझसे पहले ही चुदवा लेती तो शायद रेखा के पास जाता नहीं…।”
यहाँ से आगे....................
Update 25
“तू विष्वास कर पूनम, तू किसी और से चुदवाती है तो मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता।” परम ने अपनी जलन पूनम के सामने रख दी।
“चल ज्यादा प्यार मत दिखा। मैं रो पडूँगी साले। जा अपने हरामी सेठ को बुला ला।” उसने लंड को सहलाया और कहा।
“देखु साला बुड्ढा सेठ कैसा मस्ती देगा, मेरे इस माल पर अपना सिक्का कैसे जमा देता है।” मैत्री लिखित एपिसोड।
परम दरवाजा बंद करके बाहर चला गया और जब 10 मिनट बाद सेठजी के साथ लौटा तो उन्होंने देखा कि पूनम अच्छे कपड़े पहने हुए थी और दुपट्टे से सिर ढककर बैठी थी। सेठजी को देखकर वह उठ खड़ी हुई। सेठजी ने उसे बाहों में ले लिया और टिप्पणी की,
“पूनम, तू सुंदरी से भी जबरदस्त माल हो गई है।”
उसने पैसों से भरा एक बैग दिया और कहा कि “यह एक लाख है। मैं और भी दे देगा।“
“परम, तू बाहर जा। मुझे शर्म आ रही है।” पूनम ने सेठजी के बांहों में कसमसाते हुए कहा…।
परम को सचमुच बहुत बुरा लगा। पहली बार परम को सेठजी से नफ़रत हुई थी। उसको अपने बाप से नफ़रत नहीं हुई थी क्यों की वह मानता था की बाप को माल मिलने चाहिए। हालाकि जब उसका लंड खड़ा हो जाता और बाप माल ले जाता तब थोड़ी देर के लिए बुरा लगता। जब सेठ ने उसकी माँ को चोदा और सुंदरी और महक को भी दूसरों से चुदवाया, तब भी उसे ज़रा भी दुःख नहीं हुआ। लेकिन अब वह मन ही मन रोया। और मन ही मन कसम खाई।।।
"साले, मैं तेरी बेटी को अपने बाप से चुदवाऊँगा....।" (मुनीम के भी चार चाँद है, बिना कुछ किये माल का इंतजाम हो ही जाता है)
पूनम की तरफ़ देखे बिना ही वह कमरे से बाहर निकल गया और कहा कि “जब ख़तम हो जाए मैं तुम्हे लेने आऊंगा।
पूनम को एहसास हो गया था कि परम उसे सेठजी के साथ देखकर बहुत दुखी है।
"परम, मुझे माफ़ कर दे। अब बहुत देर हो गई है। मुझे रंडीपन अच्छा लग रहा है, बिलकुल तेरी माँ की तरह।" पूनम ने मन ही मन कहा।
परम ने बाहर से दरवाज़ा बंद किया और बड़ी बहू के लिए 'पॉन्डी' खरीदने के लिए किताबों की दुकान के सामने खड़ा हो गया।
परम अपने से कुछ साल बड़े एक किताब विक्रेता से बात कर रहा था और किताबें चुन रहा था। परम ने यह नहीं देखा कि कोई उसके पीछे खड़ा कोई उसकी हरकतें देख रहा है।
"बेटा, इतनी धूप में क्या कर रहा है। चल घर चल!!" फनलवर की पेशकश।
वह रजनी थी, कॉलेज से लौट रही थी। उसने परम को नंगी चुदाई की तस्वीरें वाली किताबें पलटते देखा।
"जल्दी से पैसे दे दे और चल।" रजनी चाहती थी कि परम किताबें खरीदे।
परम ने खुद रजनी के घर जाकर उसे चोदने का सोचा था, और उसे देखकर वह बहुत खुश हो गया। परम ने दो किताबें लीं, पैसे दिए और रजनी के साथ चल दिया।
लोगों ने परम को एक टीचर, रजनी के साथ चलते देखा। उनकी दोस्ती के बारे में पहले से ही छोटे शहर में चर्चा शुरू हो गई थी लेकिन कोई भी उन पर उंगली उठाने की हिम्मत नहीं कर रहा था।
“साला परम असल मर्द है, मास्टरनी भी फंस गई है उससे।”
महिलाएं आपस में और पतियों से यही बात कर रही थीं।
xxxxxxxxxxxx
बने रहिये........................
“लेकिन रानी, उसके बाद…तुमने कितना नखरे किया…” परम ने उसे चूमा।।”पुरे 3 महीने तुमने मुझसे बात नहीं की।”
उसने गले लगा लिया ।।”तुम अगर मुझसे पहले ही चुदवा लेती तो शायद रेखा के पास जाता नहीं…।”
यहाँ से आगे....................
Update 25
“तू विष्वास कर पूनम, तू किसी और से चुदवाती है तो मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता।” परम ने अपनी जलन पूनम के सामने रख दी।
“चल ज्यादा प्यार मत दिखा। मैं रो पडूँगी साले। जा अपने हरामी सेठ को बुला ला।” उसने लंड को सहलाया और कहा।
“देखु साला बुड्ढा सेठ कैसा मस्ती देगा, मेरे इस माल पर अपना सिक्का कैसे जमा देता है।” मैत्री लिखित एपिसोड।
परम दरवाजा बंद करके बाहर चला गया और जब 10 मिनट बाद सेठजी के साथ लौटा तो उन्होंने देखा कि पूनम अच्छे कपड़े पहने हुए थी और दुपट्टे से सिर ढककर बैठी थी। सेठजी को देखकर वह उठ खड़ी हुई। सेठजी ने उसे बाहों में ले लिया और टिप्पणी की,
“पूनम, तू सुंदरी से भी जबरदस्त माल हो गई है।”
उसने पैसों से भरा एक बैग दिया और कहा कि “यह एक लाख है। मैं और भी दे देगा।“
“परम, तू बाहर जा। मुझे शर्म आ रही है।” पूनम ने सेठजी के बांहों में कसमसाते हुए कहा…।
परम को सचमुच बहुत बुरा लगा। पहली बार परम को सेठजी से नफ़रत हुई थी। उसको अपने बाप से नफ़रत नहीं हुई थी क्यों की वह मानता था की बाप को माल मिलने चाहिए। हालाकि जब उसका लंड खड़ा हो जाता और बाप माल ले जाता तब थोड़ी देर के लिए बुरा लगता। जब सेठ ने उसकी माँ को चोदा और सुंदरी और महक को भी दूसरों से चुदवाया, तब भी उसे ज़रा भी दुःख नहीं हुआ। लेकिन अब वह मन ही मन रोया। और मन ही मन कसम खाई।।।
"साले, मैं तेरी बेटी को अपने बाप से चुदवाऊँगा....।" (मुनीम के भी चार चाँद है, बिना कुछ किये माल का इंतजाम हो ही जाता है)
पूनम की तरफ़ देखे बिना ही वह कमरे से बाहर निकल गया और कहा कि “जब ख़तम हो जाए मैं तुम्हे लेने आऊंगा।
पूनम को एहसास हो गया था कि परम उसे सेठजी के साथ देखकर बहुत दुखी है।
"परम, मुझे माफ़ कर दे। अब बहुत देर हो गई है। मुझे रंडीपन अच्छा लग रहा है, बिलकुल तेरी माँ की तरह।" पूनम ने मन ही मन कहा।
परम ने बाहर से दरवाज़ा बंद किया और बड़ी बहू के लिए 'पॉन्डी' खरीदने के लिए किताबों की दुकान के सामने खड़ा हो गया।
परम अपने से कुछ साल बड़े एक किताब विक्रेता से बात कर रहा था और किताबें चुन रहा था। परम ने यह नहीं देखा कि कोई उसके पीछे खड़ा कोई उसकी हरकतें देख रहा है।
"बेटा, इतनी धूप में क्या कर रहा है। चल घर चल!!" फनलवर की पेशकश।
वह रजनी थी, कॉलेज से लौट रही थी। उसने परम को नंगी चुदाई की तस्वीरें वाली किताबें पलटते देखा।
"जल्दी से पैसे दे दे और चल।" रजनी चाहती थी कि परम किताबें खरीदे।
परम ने खुद रजनी के घर जाकर उसे चोदने का सोचा था, और उसे देखकर वह बहुत खुश हो गया। परम ने दो किताबें लीं, पैसे दिए और रजनी के साथ चल दिया।
लोगों ने परम को एक टीचर, रजनी के साथ चलते देखा। उनकी दोस्ती के बारे में पहले से ही छोटे शहर में चर्चा शुरू हो गई थी लेकिन कोई भी उन पर उंगली उठाने की हिम्मत नहीं कर रहा था।
“साला परम असल मर्द है, मास्टरनी भी फंस गई है उससे।”
महिलाएं आपस में और पतियों से यही बात कर रही थीं।
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