Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 121 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

पुष्पा को बहुत दर्द हो रहा था। अब उसने अपना माथा आराम टेके पर टिका लिया था और नीचे देखने लगी। वह नहीं चाहती थी कि परम उसके आँसुओं को लगातार गिरते हुए देखे। उसे याद आया, उसकी छोटी बहन ने लगभग 10-12 साल पहले क्या कहा था।

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अब आगे........


जब दीदी की नयी नयी शादी हुई थी। और पहली बार पीहर आई थी, तब रिवाज के अनुसार उसे लेने के लिए उसके ससुर जी आये थे। उसके ससुर ने फर्स्ट क्लास की टिकिट ले राखी थी। और समय आने से अच्छे मुहूर्त में दीदी और उसके ससुरजी रेलवे के लिए निकल पड़े। फनलव की पेशकश है यह।

रात के समय था और ससुरजी का मूड बन चुका था। उन्हों ने मुझे सहलाने की शुरुआत की, पहले तो आनाकानी करती रही पर आखिर ससुरजी थे। उनका हक बनता था। और उसी अधिकार का उन्हों ने फायदा उठाया दीदी। धीरे धीरे हम आगे बढे।

“दीदी, उसने खूब प्यार किया, पूरे बदन को सहलाया, मेरी चूत के रस से वह बार-बार मेरी गांड को रस पिला रहे थे। और गांड को भी क्या चाहिए मजा लेती रही। गांड को खूब गीला करने के बाद साले ने लंड को गांड के छेद पर दबाने लगा। दीदी, मेरी तो जान निकल गई! मैं रोती रही, उस से मना करती रही, लेकिन उस मादरचोद ससुर ने ट्रेन के फर्स्ट क्लास के डीब्बे में मेरी गांड फाड़ डाली,और जब साले का 7-8 इंच लंबा और मोटा लंड गांड के अंदर पुरा घुस गया तो उसने लंड को 5-6 मिनट तक गांड में बिना धक्का मारे मेरे ऊपर लेटा रहा। जब मेरी गांड उसके लंड को सपोर्ट देने लगी तब धीरे से लंड को बहार खिंच के अन्दर प्रवेश करा दिया। मैं तो उछल ही रही थी मना भी नही कर सकती थी। लेकिन वह पक्का गांड चोदु था। उसने मेरी गांड को सहलाते हुए अपने धक्के लगाना शुरू कर दिया। आखिर गांड भी कब तक मना करती।

"लेकिन दीदी उस के बाद हरामी ने जब धीरे धीरे धक्का मारना शुरू किया तो पूछो मत! लेकिन ज्यादा देर तक मुझे तकलीफ नहीं हुई, फिर हर धक्के के साथ मुझे मजा आने लगा और मैं खुद ही मेरी गांड को आगे पीछे करती रही और गांड मरवाती रही. थोड़े समय के बाद मेरी गांड ने मेरे ससुरजी का लंड पूरा निगलना शुरू कर दिया मेरा दर्द अब आनंद में बदल गया। फिर उस रात मेरी गांड को दो से तीन बार उनके लंड को निगल ने का मौक़ा मिल गया। मैं भी खुश और मेरी गांड भी खुश। चूत तो मरवाती थी ही मैं। गांड मरवाने में बहुत मजा आया...और...उसके बाद मैं बार-बार ससुर से गांड मारवाती हूं। लेकिन जब सुबह पता चला की मैं ठीक से चल नहीं सकती और मेरी गांड छिल भी चुकी थी पर उस गांड चुदाई से मैं खुश थी और थोडा दर्द झेलना माँ ने सिखाया ही था। अब तो ऐसा है की दिन में चुदाई से ज्यादा ससुर के साथ गांड मरवाने में आता है...मेरी गांड अब मेरे ससुर की हो गई है। हररोज दुपहर को खेत से आने के बाद मेरी गांड उनके लंड को मांगती ही है। और वह बड़े आराम से मारते भी है।"

*****

बहन ने उसे अपने पति या किसी और को गांड चुदवाने के लिए उकसाने की सलाह दी थी लेकिन पति महोदय ने गांड मारने से मना ही कर दिया था। कहा यह सब गन्दा होता है अच्छे से चूत को मरवाओ। और मेरी इच्छा मन ही मन में रह गई। लेकिन आज अब परम गांड चोद रहा है। लेकिन दर्द कम नहीं हुआ है। परम का लंड उसकी बहन के गांड में लिए लंड से कहीं ज़्यादा मोटा हो सकता था। पुष्पा ने उस बहन को यहाँ बुलाने और परम द्वारा दोनों छेदों में उसकी चुदाई देखने का फैसला किया। लेकिन अब वह चाहती थी कि परम लंड को गांड से बाहर निकाले। वह अपना वीर्य त्याग करे ताकि उसकी गांड को थोड़ी राहत मिले।

"बेटा, पुमा के बाबूजी का आने का समय हो गया, ला ला लौड़ा चूस कर ठंडा कर देती हूँ।" वह परम को यह नहीं बताना चाहती थी कि उसे पीछे से गाड़ी चलाना और बाद में उसकी चाल बदल सकती है या गांड फट सकती है तो उसके पति को पता चले यह सब पसंद नहीं था।
आप फनलव की रचना पढ़ रहे है।

परम ने डार्लिंग की बात मानी, लंड बाहर निकाला, दोनों लड़कियों के बेडरूम में आ गए। परम ने अब पुष्पा को सीधे पोज़ में चोदा।

“वाह बेटा, ऐसे चोदते रहो तो मैं पूरी तरह से चूत खोल कर रहूंगी। आह बहुत मजा आ रहा है।” लेकिन इस चुदवाने में बार बार वह अपनी गांड के छेद की तलाशी ले रही थी की कही फटी तो नहीं।

उसने वास्तव में इस धमाके का आनंद लिया और अंततः परम का स्खलन हो गया, लेकिन पुष्पा के संभोग सुख के बाद ही। कुछ देर तक दोनों गले मिले रहे और फिर पुष्पा ने उसे दूर धकेल दिया।

“काकी, लंड की भूख तो तेरी चूत ने मिटा दिया, अब पेट भी भर दो…” उसने चूची को चूमा।

“मुझे उठने देगा तब ना! मादरचोद! चोदते-चोदते जान ले लेता है।” उसने उसे वापस चूमा और पूछा।

“रेखा को चोदा की नहीं…?”

परम ने कपड़े पहनना शुरू किया और जवाब दिया “रेखा वर्जिन है।“

“काकी, वो तो रोज चोदने के लिए बोलती है…लेकिन मैंने सोचा है कि उसे कुंवारी ही रखूंगा…उसके पति के लिए…।”

परम ने चूत को चूमा और कहा, “लेकिन मैं उसे अपने बच्चे की माँ बनाऊँगा जुरूर।”

उसने चूत को दबाया और फिर से खाना मांगा। मस्त गदराई हुई माल (औरत) को चोद कर परम भी थक गया था।

पुष्पा नंगी ही रसोई की ओर चल दी। उसने पेटीकोट और ब्लाउज पहना लेकिन परम ने उसे साड़ी पहनने की इजाजत नहीं दी।

“तेरे काका को पता चल जाएगा कि मैं तुझसे चुदवाती हूँ।”

वह 'स्टफ परांठा' गर्म करने लगी, जो उसने परम के लिए पकाया था।

“काकी, मैं जल्दी काका और पूनम के सामने तुम्हें चोदूंगा।”

“सच! बहुत मजा आएगा…।” पुष्पा ने जवाब दिया।।” मैं खुलकर तेरे साथ प्यार करना चाहती हूं। किसी भी डर के बिना। आज़ादी से अपनी चूत मरवाना चाहूंगी।”

जब पुष्पा परम को परोठा खिला रही थी, तभी दस्तक हुई। पुष्पा ने जल्दी से अपने कपडे पहने और दरवाजा खोला और अपने पति को अंदर जाने दिया।

परम ने प्रणाम किया और खाना जारी रखा।

“काका, पुष्पा काकी का खाना बहुत टेस्टी है…खाने में बहुत मजा आता है…” उसने आगे कहा,

“काका, पुष्पा काकी के खाने जैसा स्वादिष्ट किसी और का खाना नहीं है।”
फनलव की रचना।

पुष्पा शरमा गई, लेकिन उसने ब्लाउज के ऊपर से दिख रही चुची को छिपाने की कोई कोशिश नहीं की। यह पहली बार था जब उसके पति ने अपनी पत्नी को एक जवान लड़के की मौजूदगी में बिना साड़ी के देखा था, लेकिन उसे ज़रा भी शक नहीं था कि उसकी पत्नी परम के लिए एक वेश्या बन गई है।

पुष्पा के पति पंडितजी जानते थे कि परम और उनकी बड़ी बेटी पूनम, दोनों बचपन से ही बहुत अच्छे दोस्त हैं और अब उन्होंने परम की शादी छोटी बेटी पूमा से करने की इजाज़त भी दे दी है। उन्हें पूरा यकीन था कि पूनम या पूमा की देखभाल पूमा की होने वाली सास सुंदरी जैसी कोई और नहीं कर सकता।

पुष्पा नहाकर तैयार हुई और उन्होंने परम से बात की। इसके बाद, परम और पुष्पा दोनों बाहर आए और सेठजी के घर की ओर चल पड़े।

“परम, मैं तेरी वेश्या बन गयी हूँ…पूनम को चोदेगा?” पुष्पा फुसफुसाई।

“और काकी, मैं तेरा और तेरी चूत का गुलाम हो गया हूँ। पुमा की चूत और पूनम की चूत का इंतज़ाम कर के रखो।”परम ने उत्तर दिया।

दोनों घर पहुंचे। और बड़ी बहू ने परम को पुष्पा के साथ घर के अंदर प्रवेश करते देखा।

“हरामी, किसी को नहीं छोड़ेगा। मुझे पक्का यकीं है की यह मेरा चोदू पुष्पा की चूत का भोसड़ा बनाके ही आया होगा तभी तो वह यहाँ से भगा था। देखो साली रंडी की चाल जैसे गांड में कुछ घुस गया हो।” उसने खुद से फुसफुसाया।

किरण ने परम को घर वापस आते देख आह भरी।

सोमवार शाम को परम पुष्पा के साथ और सेठजी के बेटे के साथ गाँव लौटते समय, गुलाबो के साथ छोटी सी हनीमून ट्रिप के बाद, सेठजी ने अपनी किस्मत सही जगह आजमाई।

?????

आज के लिए बस यही तक मिलते है सोमवार को एक नए एपिसोड के साथ जहा ??????????? इसका जवाब लेंगे कहानी से.......।

तब तक के लिए फनलव की तरफ से।


।। जय भारत ।।
 
Shukriya dost



Yah sab aap sabhi readers ke cooperation se hi mumkin hua hai. Aap logo kaa sath aur sahakar se hi yah kahani chal rahi hai. Mera koi yogdan nahi hai.

All credits go to ALL READERS ONLY


Thank you all and looking forward the same.
 
Shukriya dost for wonderful comment.

Without all my readers support this would not have possible.

Thanks to all my readers and special thanks to you too. As you enjoyed the story with deep interests and wonderful honest comments.

Hope this will stay continued.

Thank you friend
 
जी बिलकुल सब की अपनी अपनी मर्यादा है मैं समज सकती हु

कोशिश अक्सर कामयाब होती है.......................सरजी

शुक्रिया दोस्त
 
आपके सपोर्ट के लिए आपकी तारीफ़ करती हूँ......

शुक्रिया दोस्त
 
Shukriya dost for wonderful comment.

Without all my readers support this would not have possible.

Thanks to all my readers and special thanks to you too. As you enjoyed the story with deep interests and wonderful honest comments.

Hope this will stay continued.

Thank you friend
 
ji shukriyaa dost

पुष्पा परम की मानिती स्त्र्यो में से एक है

देहते है आगे .....
 
बहोत ही आभार दोस्त

बने रहिये
 
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