Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 110 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

सृती : (धीरेसे फुसफुसाते) भाइ.. मुजे आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे..

लखन : (होठको चुमते धीरेसे) हां दीदी.. बोलो.. इतनी रात..? जरुरी बात हे क्या..?

सृती : (कामे फुसफुसाते) हां भाइ.. बहुत जरुरी हे.. अच्छा हे कमरेमे सीर्फ हम तीनो ही हे..

लखन : (बातकी गंभीरता समजते) दीदी.. कोइ चीन्ताकी बात तो नही..? बोलो..

सृती : (सामने देखते धीरेसे) भाइ.. सायद चीन्ताकी बात ही हे.. खाना खानेके बाद हम सोनेके लीये उपर आये.. भावुतो हमारे कमरेमे चली गइ थी.. लेकीन आज नीलु कुछ परेसान दीख रही थी.. जब मे उनके कमरेमे गइ तो अ‍ेक अजीबसी आवाज सुनी वो बाथरुममे थी.. मेने वहा जाकर देखा तो वो उल्टीया कर रही थी..

लखन : (थोडी चीन्तासे) ओह गोड.. कुछ गडबड हे क्या..? क्युकी आजकल वो कुछ ज्यादा ही हमारे साथ सोने लगी हे..

सृती : (सामने देखते धीरेसे) वही तो.. भाइ.. मुजे भी उनकी टेन्शन होने लगी हे.. मेने उसे पुछा भी.. तो कहा हर बार आपसे मीलनके बाद वो आइपील लेती हे.. ओर वो आइपील लेना कभी नही भुलती.. मेने उनकी आइपील देखी.. तो उनके पास ढेर सारी आइपीलकी स्ट्रीप थी.. उनकी डेट देखी तो सब अ‍ेक्सपायर होचुकी थी..

लखन : ओह गोड क्या मुसीबत हे..? आपने उसे चेक कीया क्या..?

सृती : (सामने देखते धीरेसे) हां भाइ.. मेने उसे हाथ देखकर चेक कीया.. तो उनकी पल्स कुछ असामान्य लगी.. जैसे प्रेटनेन्ट लेडीकी होती हे.. भाइ.. सायद नीलु प्रेगनेन्ट हो गइ हे.. पका तो क्लीनीकपे रीपोर्टके बाद ही होगा..

लखन : (थोडा डरते धीरेसे) दीदी.. तब तो गडबड होजायेगी.. क्या इस बारेमे कीसी ओरको पता हे..?

सृती : (सामने देखते) नही भाइ.. ये सब अभी कुछ देर पहेले ही हुआ हे.. इस बारेमे हम दोनोके अलावा कीसीको नही पता..

लखन : (सामने देखते धीरेसे) अच्छा हुआ.. अभी कीसीको बताना भी मत.. दीदी.. तो अब हम क्या करे..? इसे तो अभी ओर पढना हे.. उनकी सादी भी धिरेनसे हो चुकी हे.. ओर अभी उनके पास भेजना भी ठीक नही.. तो आपने कुछ सोचा हे..?

सृती : (सामने देखते) भाइ.. मेने उनकी आइपीलकी स्ट्रीप देखी.. उनके पास ढेर सारी थी.. लेकीन आउट ओफ डेटकी.. अक्सपायर हो चुकी थी.. पुछा तो कहा मे जब यहा आइ तब मेरी मम्मीने दी थी.. पता नही उनकी मम्मीने उसे यहा पढनेके लीये भेजाहे की चुदवानेके लीये.. आप समज गयेनां..?

लखन : (थोडा जोरोसे मुस्कुराते) दीदी.. पहेले वो यहा आइ तब कुछ ओर मक्सदसे आइ थी.. आपको सब पता हे.. ये लडकी भीनां.. मेने कहाथा हप्तेमे सीर्फ अ‍ेक बार.. लेकीन आपने ही उनकी आदत बीगाडी हे.. क्या जरुरत थी उनको हमारे साथ सामील करनेकी..? अब उसे हर रात हमारे साथ सोना हे.. अब क्या करे..?

सृती : (सरमे हाथ घुमाते धीरेसे) भाइ..मुजे क्या पता वोभी अपनी मांकी तराह चुदकड होगी.. कल मे उसे कोलेज तो भेजुगी.. लेकीन उसे कहुगीकी वो कोलेज नही.. सीधे मेरी क्लीनीकपे आजाये.. वहा उनकी रीपोर्ट करुगी.. अगर रीपोर्ट पोजीटीव आइ तो इस कमीनी(भावीका)को कहुगी.. ये कुछ करदेगी.. इस काममे ये कमीनी माहीर हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. अब तो इस गाली मत दो.. आपकी सौतन होगइ हे..

सृती : (मुस्कुराते) सौतन होगइ हे इसीलीयेतो गालीया सुनती हे.. कमीनी आपके पीछे तो पागल होगइ हे.. सारा दिन आपके नामकी माला ही जपती रहेती हे.. हमारा लखन अ‍ैसा.. हमारा लखन वैसा हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. वो सचमे मुजे बहुत प्यार करने लगी हे.. ओर हो सके तो ये कीसीको बताना नही.. आप दोनो ही इसे नीपटालो.. अब हमे नीलुका भी कुछ करना पडेगा.. आइपील लेनेके बाद भी वो प्रेगनेन्ट होगइ हे.. अब ध्यान रखना पडेगा.. बस.. खासकर चंदा भाभीको इनका पता ना चले..

दुसरे दिन सुबह सबलोग चाइ नास्तेपे बैठे थे तब नीलम थोडी चींतीत थी.. ओर सबके सामने जबरदस्ती मुस्कुराने नाटक करते नोर्मल होनेकी कोसीस करती रही.. अब चंदाका दिन बहुत ही नजदीक था.. तो सृती गभरा रही थी.. की चंदा वहा क्लीनीकपे आये इनसे पहेले ही नीमलका नीपटारा होजाये.. तभी..

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. तेरी मम्मीका फोन आया था.. वो लोग हमारे गांवमे सीफ्ट हो रहे हे.. ओर सब सामान पेकींग कर रहे हे.. तो तुजे अ‍ेक दो दिन मददके लीये बुलाया हे..

चंदा : (मुस्कुराते) हां नीलु.. वैसे भी रमा पेटसे हे.. उसे काम करनेके दिकत होगी.. चली जाओ..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) जी.. आज ही चली जाती हु.. जीजु.. छोडने आओगेनां..?

लखन : (सृतीकी ओर मुस्कुराते) हां.. नास्ता करले.. फीर चेन्ज करके आजा..

राधीका : आज मेभी घरपे बहुगी.. अब चंदादीदी ओर भावनादीदी का खयाल रखना बहुत जरुरी हे.. वहा अब रजुदीदी ओर दया बहेनने सबकुछ अच्छेसे सम्हाल लीया हे.. अब होस्टेलकी चीन्ता नही हे..

सृती सबकुछ समज गइ.. वो कुछ नही बोली.. ओर फटाफट चाइ नास्ता करके वो भावीकाको लेकर क्लीनीक पे चली गइ.. राधीका घरका काम करने लगी.. तो चंदा ओर भावना बच्चेको लेकर होलमे बैठ गइ.. नीलम चेन्ज करने उपर चली गइ.. तो लखनने कीचनमे जाकर राधीकाको अपनी बाहोमे भर लीया..

तो वो पलटके लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनोके होठ मील गये.. अब अ‍ैसी बाते सामान्य हो गइ थी.. फीर लखन होलमे चला गया.. ओर भावनाकी बच्ची ओर विजयके साथ खेलने लगा.. फीर लखनने बारी बारी चंदा ओर भावनाके होठोको भी चुम लीया.. जीसे दोनोही सरमा गइ.. ओर अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर हसने लगी...

तभी नीलु चेन्ज करके ओर अ‍ेक कपडेकी छोटी बेग लेकर नीचे आगइ.. वो राधीका चंदा ओर भावनाके गले मीली.. फीर दोनो कार लेकर घरसे नीकल गये.. बहार नीकलते ही नीलम कारमे ही लखनसे लीपट गइ.. ओर आंसु बहाने लगी.. लखनने कारको अ‍ेक सुमसान जगाहपे खडी करदी.. तो..

नीलम : (लीपटर रोते) लखन.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजसे गलती होगइ.. आइ अ‍ेम प्रेगनेन्ट..

लखन : (उनके आंसु पोछकर सांत करते) चुप होजा.. इसमे तेरी कोइ गलती नही हे.. लेकीन तुजे देखना चाहीये.. की ये दयाइ अ‍ेक्सायरी डेटकी तो नही.. नीलु.. तेरी मंजील अभी थोडी दुर हे.. वरना ये सब नही करना पडता..

नीलम : (आंसु पोछते) आइ नो लखन.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु.. मेभी चाहती हु की हम दोनोकी अ‍ेक नीशानी हो.. लेकीन अभी नही.. क्युकी मेरे भी कुछ लक्सय हे.. बस.. अ‍ेक बार उसे हासील करलु.. फीर हम दोनो जरुर हमारा बच्चा पैदा करेगे..

फीर इसके बाद दोनो सृतीकी क्लीनीकपे पहोंच गये.. तो भावीकाकी रीसेपनीस्ट आरती लखनकी ओर देखकर मुस्कुराइ.. फीर लखन ओर नीलमको लेकर सृतीकी केबीनमे चली गइ.. वहा सृती ओर भावीका चाइ पी रही थी.. सृतीने आरतीको कहेकर लखनके लीये भी चाइ मंगवाइ.. जब आरती चली गइ तो..

भावीका : (आस्चर्यसे देखते) अरे नीलु.. गांव जानेकी तैयारीया करली..? लखन छोडने आ रहे हे..?

सृती : (थोडा जीजकते) भावु.. नीलु गांव नही जा रही.. वो चंदादीदीके सामने हमने जुठ बोला.. दरसल.. सा..य..द.. सी इस प्रेगनेन्ट.. अभी रीपोर्ट करते हे.. अगर पोजीटीव आया तो इनका अ‍ेबोर्सन करना पडेगा.. तु समज गइनां..

भावीका : (जोरोसे हसते) कमीनी अब ये काम फीरसे करना पडेगा..? चल ठीक हे घरका मामला हे.. (नीलुकी ओर देखते हसते) चुदकड कहीकी.. कैसे उछल उछलके हमारे पतीका ले रही थी.. प्रेगनेन्ट नही होगी तो क्या होगी.. इनकी वजहसे तो हमारी भी दुसरी बार कुटाइ होजाती थी..

लखन : (गरदन दबोचते) ओ.. इनका जो करना हे करो.. ज्यादा चपड बपड करनेकी जरुरत नही हे..

भावीका : (गरदन छुडाकर अ‍ेक मुका मारते) सालीकी बडी दया आ रही हे..? जब उनको ठोकते थे तब पता नही था..? तब तो उछल उछलके मजे ले रहे थे.. ओर ये कमीनी भी कैसी आवाज नीकालती थी.. हमे फीरसे आपके नीचे आना पडता था..

सृती : (हसते) ओ.. चुप होजाओ दोनो.. भावु.. सुन.. तुजे कुछ कहेना हे..

भावीका : (लखनकी ओर कातीलाना मुस्कुराते) बोल.. क्या..?

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) दरसल.. नीलु लखनकी सीक्रेट बीवी हे.. तेरी तराह इन दोनोने भी गांधर्व सादी करली हे.. बस.. धिरेनसे सादी तो सीर्फ दिखावेकी हे.. अ‍ेक औपचारीक.. ओर ये सब हमे चंदादीदीसे छुपाके रखना हे.. क्युकी इनके भी कुछ रीजन हे..

भावीका : (मुस्कुराते) अरे तु टेन्शन मतले.. मेतो मजाक कर रही थी.. ये सब बाते पुनोदीदीसे हो गइ हे.. बस.. इतना पता नही थाकी नीलु भी इनकी बीवी हे.. तु इनकी प्रेगनन्सी चेक कर तबतक मे हमारे पतीसे कुछ जरुरी बात करती हु..

फीर सृती नीलमको लेकर अंदर चली गइ.. तभी आरती लखनके लीये चाइ लेकर आगइ.. तो भावीकाने सरारतसे आंखे नचाते लखनको आरतीकी ओर इसारा कीया.. तो आरती सरमसे पानी पानी होगइ.. फीर भावीकाने धीरेसे लखनको आरतीका भी खयाल रखनेको कहा.. तो आरती सरमाकर मुस्कुराते बहार चली गइ..

तभी सृती ओर नीलम बहार आ गये.. ओर रीपोर्टका इन्तजार करने लगे.. तो कुछ ही देरके बाद रीपोर्ट आगइ.. तो पता चला नीलुको अभी दुसरा महीना चल रहा था.. फीर भावीका नीलुको लेकर ओपरेशन थीअ‍ेटरमे चली गइ.. तो सृती लखनको चेक करने वाली केबीनमे खीचकर चली गइ..

अंदर भावीकाने नीलुको कुछ दवाइ पीलाइ.. जीसे नीलु थोडा बेहोसीमे चली गइ.. फीर कुछही देरके बाद उसे नीचेसे ब्लीडींग होने लगी.. बाकीका काम भावीकाकी दो नर्सोने सम्हाल लीया जो अपने साथ लेकर आइ थी ओर इस काममे माहीर थी.. भावीका हाथ साफ करके फीरसे केबीनमे आगइ..

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तब उसे पेसन्ट चेक करनेकी जगाहसे हल्कीसी सीसकारीया सुनाइ दी.. वो अंदर देखने गइ तो लखन वही टेबलपे सृतीको चोद रहा था.. जब भावीका आइ तो सृती उनकी ओर देखकर सरमा गइ.. फीर हसने लगी.. तो भावीकाने दांत पीसते जुठे गुस्सेसे लखनकी पीठमे मुका मारदीया ओर बहार चली गइ..

दो पहोर तक नीलुको अ‍ेक स्पेसीयल रुममे सीफ्ट करदीया.. लखन नीलुके पास ही रुक गया.. ताकी घरपे चंदा ओर भावीकाको लगेकी लखन नीलुको गांव छोडने गया हे.. भावीका आरतीको नीलमका खयाल रखनेको कहेकर सृतीको लेकर घर चली गइ.. नीलु कमजोरीकी वजहसे सो गइ थी..

दो पहोरके समय ज्यादातर स्टाफ भी खानेके लीये चला गया था.. तभी लखन आरतीके पास चला गया तो आरती सरमा गइ.. फीर दोनोने बाते करते मीलनेक तैय कर लीया.. ओर आरती लखनको लेकर उपरकी मंजीलपे अ‍ेक खाली रुममे चली गइ.. ओर अंदर जातेही लखनने आरतीको अपनी बाहोमे दबोच लीया..

फीर दोनोके होठ मील गये.. ओर प्यारका खेल खेलने लगे.. जब आरतीने लखनका लंड देखा तो अ‍ेक पलके लीये तो वो गभरा गइ.. फीर लखनने उसे तसली दीकी वो दोनो अभी नही मीलेगे.. क्युकी लखनको पता था की अ‍ेक बार मीलनके बाद आरतीकी हालत खराब हो जायेगी..

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फीर आरतीने लखनको वही ब्लुजोब दीया ओर लखनने भी आरतीकी चुतके रसको मुह लगाकर नीकाल दीया.. दोनोने अ‍ेक दुसरेको संतुस्ट कीया.. आरती बहुत खुस होगइ.. फीर दोनोने कंपलीट होते कपडे पहेन लीये तब आरती लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनोने मीलनके लीये समय तैय करलीया..

फीर दोनोने साथमे खाना खाया.. खाना खाते आरतीने अपने बारेमे सबकुछ लखनको बता दीया.. फीर सृती भावीकाके आनेके बाद देर साम लखन घर चला गया.. तीनोने नीलमका मामला बखुबी सम्हाला.. नीलमको तीन दिन तब वहा आराम करने दीया.. जब नीलम आखीर घर आइ तो वो बीमारीका बहाना बनाकर अ‍ेक हप्ते तक आराम करती रही.. जब नोर्मल होगइ तो उसने फीरसे कोलेज जाना सुरु करदीया..

इसी बीच साहील कइ बार सहेरमे सायराको मीलने चला जाता.. तो कभी कादीर ही उसे टुरकी वजहसे दो तीन दिनके लीये बुला लेता.. तब साहील ओर सायराका मीया बीवीकी तराह रहेते ओर खुब जमकर चुदाइ करते.. सायरा अब साहीलके साथ दोहरी जींदगी जीने लगी थी.. सायराकी प्रेगनन्सीकी वजहसे साहीलने सायराकी पीछवाडेका भी उद्घाटन करलीया था ओर आजतक सायरा ओर साहीलनेअपने बारेमे कादीरको पता नही चलने दीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २९८

इसी बीच साहील कइ बार सहेरमे सायराको मीलने चला जाता.. तो कभी कादीर ही उसे टुरकी वजहसे दो तीन दिनके लीये बुला लेता.. तब साहील ओर सायराका मीया बीवीकी तराह रहेते ओर खुब जमकर चुदाइ करते.. सायरा अब साहीलके साथ दोहरी जींदगी जीने लगी थी.. सायराकी प्रेगनन्सीकी वजहसे साहीलने सायराकी पीछवाडेका भी उद्घाटन करलीया था ओर आजतक सायरा ओर साहीलनेअपने बारेमे कादीरको पता नही चलने दीया.... अब आगे

तो दुसरी ओर श्रीधर ओर वृन्दाके बीच भी अफेर गहेरा हो गया.. वोभी सहेरमे जाकर उनकी मौसी.. यानीकी उनकी सासको कइ बार चोद चुका था.. अब श्रीधरका वृन्दाके साथ सास दामादसे ज्यादा अ‍ेक मीया बीजी जैसा रीस्ता होगया था.. वो वृन्दाका भी अ‍ेक बीवीकी तराह खयाल रखने लगा.. दोनो काफी नजदीक आ गये थे..

दोनो अब जीतुलालके सामने भी खुलकर हस हसके बाते करते ओर आपसमे हल्कीसी मजाक भी कर लेते.. जीसे जीतुलालको भी कुछ अजीब लगा.. ओर वो असुरक्षाकी भावनासे अपने ही बेटेसे जलने लगा.. लेकीन इस बातसे वृन्दाको कोइ फर्क पडने वाला नही था.. क्युकी वो पहेलेसे ही अ‍ेक बीन्दास्त ओरत थी..

उनको पता थाकी अब जीतुलालका उनकी पत्नीसे डीवोर्स हो चुका हे.. इसीलीये अब जीतुलालको उनके अलावा कोइ सम्हालने वाला नही हे.. इस बातसे वृन्दा बहुत ही लापरवाह हो चुकी थी.. ओर इसी वजहसे उन्होने श्रीधरकी मम्मी ओर अपनी कजीन ब्रीन्दासे भी मेल जोल बढा लीया था.. ताकी वो ज्यादासे ज्यादा श्रीधरकी नजदीक रेह सके..

दुसरी ओर श्रीधर भी सावधानीया बरतता.. वो आते ही पहेले अपनी बीवी जयश्रीके पास चला जाता ओर उनके होठ चुमलेता.. फीर बच्चेके साथ खेलता.. ओर जयश्रीके दोनो बुब्सके साथ हल्केसे छेडखानी करता.. जीसे जयश्री भी बहुत खुस होती.. तब कुछ देर दोनो पती पत्नीको अकेलेमे मीलनेका मौका देनेके बाद वृन्दा भी इन दोनोके साथ सामील हो जाती..

ओर वृन्दा श्रीधरके साथ बातोसे मस्तीया करने लगती.. ओर मोका मीलते ही वो जयश्रीसे छुपकर आंखोसे श्रीधरको दुसरे कमरेमे अकेलेमे मीलनेका इसारा करती.. जयश्री भी उनकी मां वृन्दा ओर अपने पतीके नजदीकीयासे बहुत खुस थी.. क्युकी उनको लगाकी उनकी मम्मीने दामादके रुपमे श्रीधरको पुरी तराह अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे..

लेकीन उनको नही पता थाकी दोनो सास दामादके बीचमे क्या खीचडी पक रही हे.. डीलीवरीके बाद जयश्रीको भी मायकेमे ओर डेढ महीना हो गया था.. तो अ‍ेक दिन ब्रीन्दा ओर श्रीधर सहेरमे आकर जयश्री ओर उनके बच्चेको लेकर वापस गांव चले गये.. तो वृन्दाने राहतकी सास ली.. क्युकी अब बीना कोइ डर वो ओर श्रीधर घरपे आसानीसे मील सकते थे..

जयश्रीके चले जानेके बाद तीसरे ही दिन सुबह जब उनका पती ओर जीतुलाल अपने धंधेपे चले गये तब वृन्दाको उल्टीया हुइ.. उनको मनमे आंसकाअ‍े हुइ तो मेडीकल स्टोरसे दो तीन प्रेगनन्सी टेस्टकी कीट लेकर आ गइ.. ओर दुसरे दिन सुबह टेस्ट करलीया.. तो रीजल्ट पोजीटीव देखकर वो मन ही मन बहुत खुस होगइ..

क्युकी जो काम अबतक सरेहमे आकर जीतु नही करपाया वो काम श्रीधरने उसे प्रैगनेन्ट करके करदीया था.. सुबह चाइ नास्ताके बाद जैसे ही उनका पती ओर जीतुलाल अपने बीजनेसपे चले गये.. वृन्दा बनठनके तैयार होगइ.. ओर सीधे ही सृतीकी क्लीनीकपे चली गइ.. सृती उनको पहेचान गइ..

फीर भावीकाने वृन्दाको चेक करलीया ओर रीपोर्ट मंगवाइ.. तो पता चला वृन्दा प्रेगनेन्ट थी.. रीपोर्ट देखते ही वृन्दाकी आंखोमे खुसीके मारे आंसु आगये.. फीर वो सृतीसे दवाइया लेकर वापस घर आगइ.. ओर सोचने लगीकी इस बातकी वो श्रीधरको कैसे खबर दे.. ओर आखीर उसने श्रीधरको फोन लगा ही दीया..

श्रीधर : (मुस्कुराते फोनपे) हांजी डार्लींग सासुमा.. कहो कैसे याद कीया..? सब ठीक तो हेनां..?

वृन्दा : (मुस्कुराते धीरेसे) सासुमांके बच्चे पहेले देख आजु बाजु कोइ हे तो नही..?

श्रीधर : (मुस्कुराते धीरेसे) क्यु..? नही.. मे बहार हु.. तभी तो आपको डार्लींग बोला.. कहीये..

वृन्दा : (सरमाते धीरेसे) श्रीधर.. थेन्कयु वेरी मच.. अभी मे क्लीनीकसे ही आ रही हु.. आइ अ‍ेम प्रेगनेन्ट.. हमारी महेनत रंग लाइ.. सब तुम्हारी वजहसे मुमकीन हुआ.. थेन्क्यु सो मच.. आइ लव यु जान..

श्रीधर : (चौकना होते धीरेसे) क्या..? आर यु स्योर..? मीन्स ये हमारा..

वृन्दा : (धीरेसे) हां श्रीधर.. ये हमारा बच्चा हे.. क्युकी जबसे हम यहा सहेरमे आये तबसे मेने ओर जीतुने बहुत ट्राइ कीया.. अब तो मुजे ठीकसे संतुस्ट भी नही कर पाता.. कइ महीने होगये.. तेरे बापसे तो कुछ नही हुआ.. बस.. तुमसे ही आस थी.. जो उपर वालेने मेरी सुनली.. मे इस बच्चेको जन्म दुगी.. चाहे कुछ भी हो.. लडका या लडकी.. अब ओर रीस्क नही लेना..

श्रीधर : (धीरेसे) डार्लींग.. क्या मे अभी घरपे बताउ..?

वृन्दा : (धीरेसे) नही श्रीधर.. कुछ दिन इन्तजार करो.. फीर मे खुद ब्रीन्दाको फोन करके बता दुगी.. ओर याद रहे.. इस बच्चेके बारेमे अभी कीसीको कुछ पता ना चले.. मे सबको बोल दुगी.. की ये बच्चा मेरा ओर जीतुका हे..

श्रीधर : (धीरेसे) क्या बडे पापा मान जायेगे..?

वृन्दा : (धीरेसे) बस उसीकी टेन्शन हे.. मुजे ओर उनको.. हम दोनोको पता हेकी वो अब बच्चा देनेमे सक्षम नही हे.. जब मेरा पेट नीकलने लगेगा तब तेरे मौसाजीको भी जवाब देना पडेगा.. लेकीन तु फीकर मत कर.. मे सब सम्हाल लुगी.. ओर याद रहे.. ये राज सीर्फ हम दोनोके बीच ही हेना चाहीये.. की बच्चा तेरा हे.. ठीक हे..? चल बाय..

श्रीधर : (मुस्कुराते धीरेसे) ठीक हे डार्लींग.. बाय..

तब वृन्दाको पता नही थाकी सहेरमे आनेके बाद पीछले कइ दिनोसे जीतुलाल ठीकसे सेक्स नही करपाता था.. तो उसने वृंन्दासे छुपकर अपनी चांज करवाली थी.. तब डोक्टरने वही कहा जो भानुको कहा था.. की उनकी सेक्स करनेकी क्षमता खतम हो रही हे.. ओर वो अब कभी बच्चा पैदा नही कर सकता.. ओर जीतुने ये बात वृन्दासे छीपाइ..

डोक्टरने जीतुलालको वही दवाइआ दी जो भानुको दी थी.. फीर जीतुलालको अब डोक्टरने वायग्रा खाकर अपनी पत्नीको सेक्स करनेकी सलाह दी.. ताकी वो जींदगीका आनंद उठा सके.. तबसे जीतुलाल हर दिन वायाग्रा खाकर वृन्दाके साथ चुदाइ करता.. लेकीन वृन्दा ओर श्रीधरके बीच बढते रीस्तेने उनकी चीन्ता ओर बढादी थी.. भानु ओर जीतुको कभी पता नही चलाकी उनकी ये हालत कैसे हुइ..

वृन्दा उस रात जीतुसे बच्चेके बारेमे बात करनेके लीये बहुत ही उत्साहीत थी.. ओर साथमे थोडी डरी हुइ ओर नर्वस भी थी.. ओर उसी नर्वसेसकी वजहसे उसे पता भी नही चला की वो आज रात अपने पती जवेरीलालको रातमे सोते समय दुधमे जो नींदकी गोलीया मीलाकर पीलाती थी वो नींदकी गोलीया डालना भी भुल गइ..

सहेरमे आकर जीतुलतके साथ छुपकेसे सादी करलेनेके बाद वृन्दा दोनो पतीको सम्हालते दोहरी जींदगी जी रही थी.. रातको वृन्दाने सोनेसे पहेले अपने पहेले पतीको दुध पीलाया.. फीर सभी लाइट दरवाजा अच्छेसे बंध करदीया.. ओर अ‍ेक आदर्श पत्नीकी तराह चेन्ज करके अपने पती जवेरीलालके साथ सो गइ जो वो हमेसा सोजाती थी..

जब देर रात उनके पती गहेरी नींदमे खर्राटा मारने लगते तब वो चुपकेसे उठकर जीतुलालके पास सोने चली जाती.. अब तो नींदकी गोलीयोकी वजहसे वो अपने रुमका दरवाजा बहारसे लोक करनेकी भी जहेमत नही उठाती.. बस.. हल्कसे दरवाजा बंध कीया ओर जीतुलालके कमरेमे चली जाती..

जीतुलाल भी वायग्रा खाकर वृन्दाका इन्तजार करता.. फीर सुरु होता दोनोका नंगा नाच.. जब वृन्दा संतुस्ट होजाती तो दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे वही सो जाते.. फीर सुबह पांच बजे अपने पतीसे जागनेसे पहेले जाग जाती ओर अपने पतीके रुममे चली जाती.. ये अब हर दिनके लीये रुटीन हो गया था..

आज रात उत्साहकी वजहसे वृन्दा सो नही पाइ.. उसने अ‍ेक नजर अपने पतीकी ओर डाली.. जो उनकी ओर मुह करते सोया था.. वृन्दाको लगा अब गोलीयोकी वजहसे गहेरी नींद सोगये हे.. तब वो चुपकेसे खडी हुइ.. ओर आज जीतुके कमरेमे जानेसे पहेले ड्रेसींगके सामने बैठ गइ.. ओर हल्कासा शृंगार करने लगी..

शींगारके कुछ डीबोकी आवाजसे जवेरीलालकी आंख खुल गइ.. उसने देखा वृंन्दा उनकी बगलमे नही हे.. ओर उसने सोते सोते ही आवाजकी ओर आंख घुमाइ.. देखा तो वृन्दा आइनेके सामने बैठकर अपने आपको सवार रही थी.. जीसे देखकर जवेरीलालको आस्चर्य हुआ.. उसे लगाकी इतनी देर रात वृन्दाको सजनेकी क्या आव्यसक्ता होगइ..? ओर तभी उनके मनके कीडे सतर्क होगये..

वो चुपचाप सोनेका नाटक करते आधी आंखसे वृन्दाकी हरकतको देखने लगे.. तो कुछ ही देरमे वृन्दा खडी होगइ.. ओर अ‍ेक बार फाइनल आयनेमे देखते अपने बालोको ठीक कीया.. फीर दरवाजेकी ओर जानेसे पहेले जवेरीलालकी ओर देखती हे.. तो जवरेलालने अपनी आंखे जटसे बंध करदी.. वृन्दा मुस्कुराते बहारकी ओर जाने लगी..

जवेरीलालने दरवाजा खुलने ओर बंध होनेकी आवाज सुनी.. तो वो आंख खोलकर जटसे बेडपे बैठ गये.. उनके मनमे वृन्दाको लेकर संकाये जागने लगी.. तो उनकी सांसे तेज चलने लगी.. वो धीरेसे खडे हो गये.. ओर दबे पांव दरवाजेकी ओर चल पडे.. बहार आकर देखा तो जीतुलालके रुममे लाइट जल रही थी..

जवेरीलाल दबे पांव वहा चले गये.. ओर थोडासा दरवाजा खुला था तो अंदर जांकने लगे.. जैसे ही अंदरका नजारा देखा.. देखकर दंग रेह गये.. वृन्दा जीतुलालकी बाहोमे थी ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होंठ चुम रहे थे.. जीसे देखकर अ‍ेक पलतो जवेरीलाल सास लेना चुल गये.. उसे पसीना आने लगा ओर सीनेमे जकडन महेसुस हुइ.. फीर वो वापस अंदर देखने लगे.. तभी..

जीतुलाल : (धीरेसे) डार्लींग.. क्या बात हे..? आज तो पुरा सज सवरके आइ हो.. कोइ खास बात हे क्या..? बहुत होट लग रही हो..

वृन्दा : (मुस्कुराते हाथ पकडकर बेडकी ओर लेजाते) हां जीतु.. आज बहुत ही खास बात हे.. क्या तुमने वो गोली बोली खाइ हेकी नही..?

जीतुलाल : (मुस्कुराते बेडपे अपने उपर खीचते) अरे वोतो तुमने खानेके टाइम इसारा कीया तब ही मे समज गया था.. गोली खाकर कबसे तुम्हारा इन्तजार कर रहा हु.. देख नीचे फटा जा रहा हे..

वृन्दा : (मुस्कुराते सीना सहेलाते) क्या करु..? वो बुढा सोये तब आउनां.. मेभी कबसे तुमसे मीलन करनेके लीये तडप रही हु.. चल.. पहेले अ‍ेक राउन्ड लगाके मेरी प्यास बुजा.. फीर हम आरामसे बात करते हे.. आज तो मे तुजे पुरी रात सोने नही दुगी.. क्युकी बात ही कुछ अ‍ैसी हे..

जीतुलाल : (होंठ चुमते) डार्लींग पहेले बताओनां आज क्या खास बात हे.. फीर आरामसे करते हेनां..

वृन्दा : (जीतुका हथीयार सहेलाते) नही जीतु.. पहेले अ‍ेक बार मुजे ठंडी करदे.. जबथक अ‍ेक बार तुमसे नही चुदवाती तबतक मुजे चेइन नही मीलता.. ओर आजतो बहुत जोस चढा हुआ हे.. फीर तुजे अ‍ेक खुस खबर सुनाती हु..

सुनकर जवुरीलालकी आंखोमे आंसु छलक गये.. उन्होने अपने दोनो हाथ सीनेपे रख दीये.. उनको उमीद नही थी की अपनी ही पत्नी उसे प्यार करने ओर वफादार रहेनेका नाटक करते उनको इतना बडा धोखा दे रही हे.. तभी रुमसे वृन्दाकी जोरोकी सीसकारीयोकी आवाज आने लगी.. तो जवेरीलाल फीरसे अंदर जांकने लगे..

देखा तो वृन्दा पीठके बल जीतुलालके नीचे नंगी लेटी हुइ थी.. उनके दोनो पैर जीतुलालके कंधे पे थे.. ओर जीतुलाल हाथके बल उचा होते जोरोसे कमर हीलाते वृन्दाको चोद रहा था.. जवेरीलाल ये सब देखते दंग रेह गये.. दिलतो चाहता थाकी अभी कमरेमे जाकर दोनोकी जमकर पीटाइ करे..

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लेकीन कुछ सोचते चुप रहे.. क्युकी वो देखना चाहते थेकी ये दोनोकी रासलीला कीतने समयसे चल रही थी.. ओर वृन्दा आज जीतुलालको कोनसी बात कहेने वाली थी.. कुछ देरके बाद दोनोने अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर वृन्दा अपनी कमरको आडी टेडी करते जटके मारने लगी.. फीर दोनो सांत हो गये तो जवेरीलाल चोकने हो गये.. ओर कान लगाकर सुननेकी कोसीस करने लगे..

जीतुलाल : (अपनी सांसको दुरस्त करते) हां डार्लींग.. अब बोल.. तु क्या कहेने वाली थी..

वृन्दा : (मुस्कुराते जीतुलालकी पीठ सहेलाते) जीतु.. लगता हे भगवानने हमारी सुनली.. हमारी महेनत रंग लाइ.. मे फीरसे.. मी..न्स.. आइ अ‍ेम प्रेगनेन्ट.. मे आज ही क्लीनीकपे चेक करवाके आइ.. मे गर्भवती हु.. अ‍ेक महीना हो गया हे.. मे फीरसे तुम्हारे बच्चेकी मां बनने वाली हु..

इतना सुनते ही जीतुलालको अ‍ेक जटका लगता हे.. वो आंखे फाडके वृन्दाकी ओर देखने लगा.. ओर अ‍ेक जटकेसे लंडको चुतमेसे खीचकर वृन्दाके उपरसे उतर गया.. तब वृन्दा आस्चर्यसे जीतुकी ओर देखने लगी.. वो अपनी चुतको कपडेसे साफ करते बेडपे बैठ गइ.. तो बहार जवेरीलाल भी सुनकर सोक्ट हो गये..

वृन्दा : (आस्चर्यसे देखते धरीेसे) क्या हो गया..? अंदर ही रहेने देता.. कीतना मजा आ रहा था..

जीतुलाल : (धीरेसे वृन्दाके पास बैठते) नही वृन्दा.. ये नही हो सकता.. कहेदो ये जुठ हे.. कही तुम मजाक तो नही कर रही होनां..?

वृन्दा : (थोडा चीडते) जीतु.. ये तुम क्या बकवास कर रहे हो..? ये हमारा बच्चा हे.. मे जुठ क्यु बोलुगी..? ओर ये कोइ मजाक नही.. मे सचमे प्रेगनेन्ट हु.. ओर ये हमारा बच्चा हे..

जीतुलाल : (खडे होते मनमे) यार तुजे कैसे समजाउ.. की अब मे बच्चा देनेमे सक्षम नही हु.. अब इनको सबकुछ सच बताना ही पडेगा..

जीतुलाल खडे होकर अपनी अलमारीसे अ‍ेक फाइल नीकालता हे.. ओर वृन्दाके पास बैठते उनमेसे अ‍ेक रीपोर्ट नीकालकर वृन्दाको पढनेके लीये देता हे.. तो वृन्दा डोक्टरका नाम पढते ही जीतुकी ओर आस्चर्यसे देखने लगती हे.. तब दोनोको पता नही थाकी दो आंखे अंदर देखते दोनोकी बात सुन रही हे..
 
वृन्दा : (आस्चर्यसे) जीतु.. क्या हे ये सब.. सेक्सोलोजीस्ट..? तु कब गया था इनसे मीलने..? क्या हुआ हे तुजे..?

जीतुलाल : (नजरे चुराते धीरेसे) वृन्दा.. जबसे हम गांव छोडकर इधर सहेरमे आये तबसे मुजे नीचे कुछ अजीब फील हो रहा था.. मीन्स.. थोडा थोडा दर्द.. ओर मे ठीकसे तुमको चोदभी नही पा रहा था.. तो मेने इनके डोक्टरको दीखाया.. तो पता चला मेरी सेक्स करनेकी क्षमता खतम हो रही हे.. ओर मे बच्चा पैदा करनेमे भी सक्षम नही रहा.. इसीलीये तो मुजे हर दिन वायग्रा खानी पडती हे.. देख ये मेडीसीन..

वृन्दा : (आस्चर्यसे थोडी उची आवाजमे) क्या बकवास कर रहे हो..? तुमने मुजे पहेले क्यु नही बताया..? तुम मुजे ठीकसे तो चोदते हो.. कीतने जोसमे.. तो क्या मे जुठ बोल रही हु..? अगर तुम बच्चा देनेमे सक्षम नही रहे तो फीर ये कहासे आया..?

जीतुलाल : (नजरे चुराते) वृन्दा.. वो सब मुजे नही पता.. यार तु समज..

वृन्दा : (थोडी उची आवाजमे) क्या नही पता..? क्या समजु..? तो क्या मे बहार कीसी ओरसे पेटसे होकर आइ हु..? मेरी उमरतो देखो.. क्या अब इस उमरमे मे कीसीके साथ अफैर करुगी..? जीतु.. जबसे मे सादी करके आइ हु तबसे तुजे ही मेने प्यार कीया हे.. ओर तुजे ही अपना असली पती माना हे.. तुम जानते होनां जयश्री हम दोनोकी बच्ची हे..?

जीतुलाल : (सामने देखते धीरेसे) आइनो.. वृन्दा मुजे पता हे जयश्री हम दोनोकी बच्ची हे.. मेतो बस..

वृन्दा : (थोडी सखतीसे) बस जीतु.. मुजे तुमसे ये उमीद नही थी.. जयश्रीके बाद भी मे कइ बार तुमसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हु.. मे अ‍ेक लडका चाहती थी.. लेकीन हर बार लडकी होनेसे तुम्हारे कहेनेसे मेने अ‍ेबोर्सन करवाया.. ओर बार बार अ‍ेबोर्सनसे अपनी बच्चेदानी तक खराब करली.. ओर फीर भी तु केह रहा हे ये बच्चा तुम्हारा नही हे..?

जीतुलाल : (नजरे चुराते थोडी उची आवाजमे) वृन्दा बातको पहेले समज.. जब हम गांजमे थे तब अ‍ैसी कोइ प्रोबलेम नही थी.. पता नही क्यु जबसे हम सहेर आये तबसे ये प्रोबलेम हुइ हे.. मे सचमे बच्चे पैदा करनेमे सक्षम नही रहा..

वृन्दा : (थोडा गुस्सेसे) तो क्या मे जुठ बोल रही हु..? जीतु अब मे तुम्हारी बीवी हु.. मेने तुमसे वादा कीया था.. हमने यहा आकर बाकायदा सादी भी करली हे.. ओर तुम हर बार ठीकसे तो करते हो.. कीतना मजा देते हो तुम.. अ‍ेक मीनीट.. कही तु मुजपे सक तो नही कर रहा..?

जीतुलाल : (नजरे चुराते धीरेसे) नही डार्लींग.. अ‍ैसी कोइ बात नही हे.. मे तो बस.. मेरे बारेमे सब जानता हु.. बाकी सब तुजे पता.. मे सचमे बच्चा देनेमे सक्षम नही रहा..

वृन्दा : (अ‍ेक नजरसे देखते) ओह.. समज गइ.. मतलब तु मुजपे सक कर रहा हे.. लेकीन अ‍ेक बात खान खोलकर सुनले.. इस बार मे अ‍ेबोर्सन नही करवाउगी.. ये बच्चा तो मे पैदा करके ही रहुगी.. चाहे कुछ भी हो.. सारा मुड खराब करदीया..

जीतुलाल : (सामने देखते) अ‍ैसा नही हे यार.. तु मुड खराब मत कर.. बात ये नही हे.. लेकीन ठंडे दिमागसे सोच.. जब पेट बढेगा तब तु बडे भैयासे क्या कहोगी..?

वृन्दा : (सामने देखते थोडी उची आवाजमे) जबसे सादी करके आइ हु तबसे यही तो प्रोबलेम हे.. अगर तुम्हारे बडे भैयामे इतना दम होतानां तो मे उनसे ही तीन चार बच्चे पैदा ना करलेती..? जीतु जब तु कोलेजमे था तबसे मे तुमसे प्यार करती हु.. अगर मे प्यार ना करती तो आज तक अ‍ेक रखैलकी तराह तुमसे कभी नही चुदवाती.. सोचाथा यहा आकर तुमसे सादी करके सबकुछ ठीक हो जायेगा.. ओर मे आरामसे हमारा बच्चा पैदा करुगी..

जीतुलाल : (नाकपे उंगली रखते) सी.. सी.. धीरे बोल.. कही वो जाग गयेतो हमारा भांडा फुट जायेगा..

जवेरीलाल : (जोरोसे दरवाजा खोलते अपने सीनेपे दोनो हाथ रखते) क..मी..नो.. भांडा फुट जायेगा नही फुट गया.. (सीनेमे दर्दके मारे लडखडाते अंदर आते) हरामजादो.. तुम दोनोने मुजे इतने सालो तक धोखेमे रखा..? ओर धोखा देकर ये सीलसीला दीया..? ओर वृन्दा.. मे तुजे कीतना प्यार करता था.. तुजे कीतना सरीफ समजता था..

जवेरीलालकी आवाज सुनकर दोनोकी सीटीबीटी गुल हो गइ.. दोनो ही गभराते जवेरीलालकी ओर देखने लगे.. वृन्दाने जटसे अपनी सारी लेकर अपने सीनेसे रखली.. ओर अपना नंगा तन छुपानेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. तो जीतुलाल भी जटसे अपना लहेंगा पहेनने लगा.. वृन्दा जवेरीलालकी हालत देखते उनको सम्हालने उनकी ओर बढने लगी.. तभी..

वृन्दा : (आस्चर्यसे) अ‍ेजी.. क्या हुआ आपको..? सोये नही थे क्या..? वो.. हम.. आप जाग कैसे गये..?

जवेरीलाल : (बीचमे ही बात काटते गुस्सेसे) दुर रहे मुजसे.. कुलटा.. छी..ना..ल.. तु डायन हे.. हाथ मत लगाना मुजे.. अच्छा हुआ आज तुम दुधमे नींदकी गोलीया डालना भुल गइ.. सक तो मुजे उसी दिनसे था जब इसने मेरी बेटी जैसी ब्रीन्दासे नाता तोड दीया तब तुम खुस थी.. भगवान तुम दोनोको इनकी सजा जरुर.. दे..गे.. आइइइइ..

कहेते जवेरीलाल अपने सीनेपे दोनो हाथ कसते गीर पडे.. जीतुलाल सर्ट पहेनते उनको सम्हालने लगे.. तो वृन्दाने भी फटाफट अपने कपडे पहेन लीये.. दोनो जवेरीलालको दर्दसे तडपते हुदे देखते सम्हालनेकी कोसीस करने लगे.. तभी वृन्दाने जीतुलालको होस्पीटल लेजानेको कहा..

वृन्दा : (लगभग चीलाते) जी..तु.. जल्दीसे अ‍ेब्युलन्सको फोन कर..

सुबह सुबह श्रीधर ओर ब्रीन्दा अ‍ेक दुसरेसे चीपकते नंगे ही सोये हुअ‍े थे.. क्युकी जयश्री बच्चेकी वजहसे अभी अ‍ेक महीना ओर सेक्स नही कर सकती थी.. इसीलीये श्रीधर ब्रीन्दासे ही अपनी प्यास बुजाता था.. तभी श्रीधरका फोन बजने लगा.. जीसे ब्रीन्दा ओर जयश्रीकी आंख खुल गइ..

देखा तो श्रीधर फोनपे बाते करते गंभीर हो गया.. फीर उसने तुरंत ब्रीन्दा ओर जयश्रीको तैयार होनेके लीये केह दीया.. ओर लखनको फोन घुमाने लगा.. तो लखन भी नंगा सृतीसे चीपककर सोया हुआ था.. उन्होने श्रीधरसे बात करली.. तो फटाफट अपने कपडे पहेनने लगा.. ओर सृतीको श्रीधरका फोन था.. इमरजन्सी.. कहेते कार लेकर नीकल गया..

अ‍ेक घंटेके बाद श्रीधर ब्रीन्दा जयश्री ओर बच्चेको लेकर सीधे ही होस्पीटल पहोंच गया.. तो वहा लखन पहेलेसे ही पहोंच गया था.. ओर मेडीकल स्टोरसे कुछ दवाइआ ले रहा था.. ब्रीन्दा ओर जयश्री बच्चेको लेकर सीधे ही अंदर चले गये.. ओर श्रीधर लखनके पास चला गया.. तो लखनका चहेरा चीन्तासे मुरजाया हुआ लगा..

लखन : (श्रीधरको देखते ही) अरे श्रीधर.. आ गया तु..? फटाफट अंदर जा.. मे दवाइ लेकर आता हु..

श्रीधर : (सामने देखते) यार हुआ क्या हे बडे पापाको..? बस मेरी सासने इतना ही कहा बडे पापाकी तबीयत अचानक खराब होगइ हे.. ओर सबको लेकर फटाफट आजाओ.. ओर सीधा यही होस्पीटलमे आनेको कहा..

लखन : (दवाइ लेते सामने देखते) तु पहेले चल अंदर.. (दोनो जटसे जाते) श्रीधर.. तेरे बडे पापाको सवीयर हार्ट अ‍ेटेक आया हे.. बहुत ही क्रीटीकल कंडीशन हे.. आइ सी यु मे हे.. डोक्टर उनको बचानेकी पुरी कोसीस कर रहे हे.. उन्होने ये इजेक्शन मंगवाया हे.. पहेले इसे देदु फीर बात करते हे..

कहेते लखन दोडकर इन्जेक्शन देने चला गया.. अ‍ेक नर्स लखनका इन्तजार ही कर रही थी.. श्रीधरने देखा तो बहार जीतुलाल बैचेन बैठे थे.. ओर वृन्दा आंसु बहा रही थी.. तो ब्रीन्दा उसे सांत करनेकी कोसीस कर रही थी.. जयश्री भी बच्चेको लेकर आइ सी युमे आंसु बहाते सीसेसे अंदर जांकनेकी कोसीस कर रही थी..

काफी देरके बाद डोक्टर बहार आगये.. ओर जीतुलालके पास चले गये.. तो श्रीधर ओर लखन भी उनकी बात सुनने दोडकर उनके पास चले गये.. तभी डोक्टरने कहा.. की उनके पास ज्यादा समय नही हे.. पल्स गीरते ही जा रहे हे.. उसे आखरी बार देखना चाहे तो देख लीजीये.. श्रीधरने इसारेसे सबको बुलाया.. ओर सब अंदर चले गये..

सब दुरसे ही जवेरीलालको देखने लगे.. तभी जवेरीलालने जयश्री ओर श्रीधरको पास बुलाया.. ओर उसने श्रीधरको जयश्रीका खयाल रखनेको कहा.. वृन्दाको लगाकी अब उसे भी बात करनेके लीये बुलायेगे.. लेकीन जवेरीलालने श्रीधर को कहाकी सबको बहार भेजदे वो सीर्फ ब्रीन्दासे अकेलेमे बात करना चाहते हे..

तब श्रीघरने ब्रीन्दाको हाथसे इसारोसे बुलाया.. ओर खुद जयश्रीको लेकर सबके पास आ गया ओर कहाकी बडे पापा मम्मीसे अकेलेमे बात करना चाहते हे.. तो ब्रीन्दा आंसु बहाते जटसे उनके पास चली गइ.. चहेरेपे ओक्सीजन मास्क लगाया था.. तो जवेरीलालने खुद हटा दीया.. तो बाकी सबलोग उनकी ओर देखते बहार नीकलने लगे..

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जीतुलाल ओर वृन्दा समज गयेकी अब वो उनसे कभी बात नही करेगे.. क्युकी सीर्फ वो दोनोही जानते थेकी जवेरीलालकी इस हालतके जीम्वेवार वो दोनो खुद हे.. ओर जवेरीलालको दिलका दौरा कीसलीये पडा इस बारेमे दोनो कीसीसे भी बात नही करेगे.. तभी अंदरकी ओर..

ब्रीन्दा : (आंसु बहाते) जीजु.. कैसी हे तबीयत..?

जवेरीलाल : (मुस्कुराते उखडी आवाजमे धीरेसे) जीजुकी बच्ची बाप हु तेरा.. सुन.. मेरी हालतके जीम्वेवार वो दोनो हे.. आज मेने दोनोको रंगे हाथो पकडलीया.. अच्छा हुआ तुमने उसे छोडदीया.. बेटी.. वो तेरे लायक नही था.. मुजे माफ करदे.. मेने तेरी जींदगी खराब करदी..

ब्रीन्दा : (हाथ थामते आंसु बहाते) पापा.. कुछ मत बोलो.. मेरी कीस्मतमे ही यही लीखा था.. आप माफी मत मांगो.. आपने हमेसा मुजे अ‍ेक बेटीकी तराह प्यार दीया हे..

जवेरीलाल : (सामने देखते धीरेसे) सुन.. जीस दिन तुमने उसे छोडा तब ही मुजे उनपे सक था.. इसीलीये मेने सबकुछ श्रीधरके नामपे करदीया था.. तुजे आज अ‍ेक राजकी बात बताता हु.. जीतु हमारा खुन नही हे.. वो ठाकुरका खुन हे.. देवुके बापकी ओलाद.. वृन्दाकी तराह मेरी माने भी मेरे बापको धोखा दीया था.. ओर ये बात बापुको पता चली.. इसीलीये तो उसने ठाकुरोको बदनाम कीया.. फीर भी तु वृन्दाका खयाल रखना.. वो भटक गइ हे..

ब्रीन्दा : (मनमे) पापा.. मुजे भी माफ करदेना.. अब आपसे ये बात कैसे कहुकी ये राज मे पहेलेसे ही जानती थी.. श्रीधर भी उसीका खुन हे.. जीतुका.. तभी तो बाप बेटे दोनोका हथीयार इतना दमदार हे.. जो ठाकुरोकी पहेचान हे.. आज मेरे गर्भमे भी उसी ठाकुरका बच्चा पल रहा हे.. मे खुसनसीब हु.. की जबसे सादी करके आइ हु तबसे उसी ठाकुरके खानदानके मर्द मुजे संतुस्ट करते आये हे.. पहेले जीतु.. फीर मेरा अपना ही बेटा श्रीधर.. ओर अब लखन..

जैसे ही ब्रीन्दा अपनी सोचसे बहार नीकली.. देखा तो जवेरीलाल अ‍ैसे ही ब्र्रीन्दाकी ओर देखते सीथील पडे थे.. ब्र्रीन्दाने उसे हीलाया.. कुछ प्रतीक्रीया नही मीली तो उसने तुरंत वही खडे डोक्टरको आवाज दी.. ओर डोक्टरने नब्स चेक करके जवेरीलालकी आंख बंध करदी.. ओर उनपे कपडा डाल दीया..

बहार सबलोग ब्रीन्दाका इन्तजार कर रहे थे.. तभी ब्रीन्दा जोरोसे रोते हुअ‍े बहार नीकली.. सबलोग उनकी ओर दोड पडे.. ब्रीन्दा दीवालकी ओर मुह करते उनके सहारे खडी होगइ.. ओर दोनो हाथोसे चहेरा छुपाकर जोरोसे रोने लगी.. जीतु ओर वृन्दा जटसे अंदर चले गये.. देखा तो जवेरीलालके उपर सफेद कपडा डाला हुआ था..

दोनो समज गयेकी अब जवेरीलाल इस दुनीयामे नही रहे.. तब वृन्दा भी फुटफुटके रोने लगी.. फीर कुछ लीगल प्रोसीजर हुइ.. ओर सबलोग जवेरीलालकी बोडीको लेकर घर चले गये.. तबतक लखनने फोन करके घरपे ओर गांवमे अपने दोस्तोको बता दीया.. तो गांवसे ओर सहेरसे भी कुछ रीस्तेदार जवेरीलालके घरपे आगये..

दो पहोरको जवेरीलालकी अंतीम यात्रामे गांवके कइ लोग सामील थे.. श्रीधरने जवेरीलालको मुखागनी दी.. फीर साम होते सबलोग स्मसानसे वापस आगये.. ओर जीतुलाल श्रीधरको मीलकर सबलोग वापस चले गये.. रातमे लखनके सभी दोस्तोने खानेका प्रबंध कीया.. ओर खानेके बाद वो लोग भी चले गये..

जवेरीलालकी अंतीम क्रिया तक श्रीधर ब्रीन्दा ओर जयश्री वही रुकने वाले थे.. ब्रीन्दा श्रीधर ओर वृन्दाके बारेमे सबकुछ जानती थी.. क्युकी जब श्रीधर पढता था.. ओर उनके साथ पहेली बार सारीरीक सबंध बनाया.. फीर पढाइके बाद दोनोने छीपकर सहरेमे आकर मंदिरमे सादीकी तब ही ब्रीन्दाने श्रीधरसे अ‍ेक वादा लेलीया था..

की वो इनसे कभी भी कोइ बात नही छीपायेगा.. ओर अपने पीता ओर मौसीसे बदला लेगा.. ओर उसी दिन उसने वृन्दा ओर जीतुलाके बारेमे बातकी.. ओर उनसे बदला लेनेकी कसम खीलाइ.. उसी समय मुनाने भी सभी दोस्तोको सेक्स पावरकी जडीबुटीका कोर्स करवाया था.. ओर ब्रीन्दाने पहेला बदला वृन्दाकी बेटी ओर श्रीधरकी कजीन बहेन जयश्रीको ही श्रीधरके साथ सेट करके लेलीया..

फीर दुसरा बदला.. उन्होने श्रीधरकी लाइ हुइ जडी बुटी जीतुलालाको चाइमे मीलाकर पीलादी.. जीसे जीतुलालका हथीयार बेकार होने लगा.. जब जीतुसे डीवोर्सके बाद जब दोनो परीवार अलग होगये तब जयश्रीकी प्रेगनन्सीके बाद पहेली बार वृन्दा घरपे आइ.. ओर उनका श्रीधरके साथ दोस्ताना व्यवहार देखकर ब्रीन्दाके मनमे अ‍ेक ओर बदला लेनेका खयाल आया..

वो श्रीधरकी स्टेमीनाको अच्छी तराह जानती थी.. ओर उसने जान बुजकर श्रीधरको वृन्दाके करीब आने दीया.. जयश्रीके मायके चले जानेके बाद अ‍ेक रात वो अपने बेटे श्रीधरके नीचे लेटे प्यारका पल जी रही थी तब उसने श्रीधरको अपने मनकी बात बतादी.. तो श्रीधर मुस्कुराने लगा.. ओर अपनी योजनापे आगे बढने लगा..

आखीर उसने वृन्दाको सेट करलीया.. ओर जयश्रीकी डीलीवरीके दिन पहेली बार श्रीधरने वृन्दाको अपने नीचे लीटाकर अपने वसमे करलीया.. उसी रात वृन्दाके घर चले जाने ओर जयश्रीके सोनेके बाद दोनो मां बेटे होस्पीटलके बेडमे ही अ‍ेक होगये.. ओर श्रीधरने ब्रीन्दाको सबकुछ बता दीया.. तो ब्रीन्दाने अ‍ेक रहस्यमय मुसकार की..

अब ब्रीन्दाको कीसीका भी डर नही रहा.. वो अब वृन्दाको आसानीसे अपने वसमे कर सकती थी.. ओर अब जवेरीलालके नीधनके बाद अ‍ेक हप्ते तक वो यही रहेने वाली थी.. अब उसे पता थाकी वृन्दाको कैसे कंट्रोल करना हे.. ओर उसे यही समय सबकुछ अपने नीयत्रंणमे लेनेका मौका मील गया..

अ‍ेक हप्तेमे जवेरीलालका सभी कार्य नीपटाना था.. तो अ‍ेक हप्तेमे ब्रीन्दा वृन्दासे बहुत नजदीक आगइ.. वो वृन्दासे हस हसके गांवकी परंपरा ओर वहाके हर रीस्तोके बारेमे बात करती.. की श्रीधरके कीन दोस्तोने उनकी बहेन ओर उनकी मासे सादी करली हे.. जब उसे लगाकी वृन्दा अ‍ैसी बातोमे काफी दीलचस्पी लेने लगी हे.. तब ब्रीन्दाने धीरेसे अपने मनकी बात कहेनेकी ठानली..

तो दुसरी ओर जीतुके मनमे भी अ‍ेक सक हमेसाके लीये घर कर गया.. की वो अगर बच्चा देनेमे सक्षम नही हे.. तो फीर वृन्दाके पेटमे कीसका बच्चा पल रहा हे..? उसे वृन्दापे नजर रखना सुरु करदीया.. देखा तो वृन्दा श्रीधरसे कुछ ज्यादा ही चीपकके बाते कर रही थी.. ओर वृन्दा ओर ब्रीन्दा.. दोनो बहेने अ‍ेक दुसरेके काफी नजदीक आगइ थी..

जो ज्रीन्दा अ‍ेक जमानेमे अपनी बहेनको अपनी दुस्मन मानती थी वो आज हस हसके अ‍ेक पकी सहेलीकी तराह बाते करती थी.. वृन्दा ओर ब्रीन्दाकी बढती नजदीकीयासे जीतुलालके पेटमे अ‍ेक सुल चुभने लगी.. जीतुलालने गौर कीया तो उसे वृन्दा ओर श्रीधरके बीचका व्यवहार भी अजीब लगने लगा..

श्रीधर ओर वृन्दा जबभी मीलते ओर बात करते तब वृन्दाका कातीलाना नजरोसे श्रीधरको देखना.. फीर दोनो अकेलेमे बाते करते तब वृन्दाकी कातील मुस्कानसे श्रीधरसे बात करना.. दोनोके बीच हल्कासा मजाक मस्ती करना.. वो नजरे ओर मुस्कान जो भुतकालमे कभी उनके लीये हुआ करती थी..

आज वृन्दा बीलकुल अलग लग रही थी.. जीतुको अपने ही बेटे श्रीधर ओर वृन्दाके नजदीक आना उनके सकको ओर पका करदीया.. लेकीन जीतुकी मजबुरी थी.. वो वृन्दाके स्वभावको अच्छी तराह जानता था.. वो वृन्दासे थोडा डरता भी था.. क्युकी जीतुसे सादी करलेनेके बाद वो उसे अपनी उंगलीओपे नचाती थी..

जीसे जीतुकी वृन्दाके साथ बहेस करनेकी हिंमत ही नही थी.. वृन्दा ओर ब्र्रीन्दाकी बढती नजदीकीया देखकर अ‍ैसा लगता था अब वृन्दा भी ब्रीन्दासे मील गइ हे.. ओर उनसे चुनचुनके बदला ले रही हे.. क्युकी ब्रीन्दा जीतुलालके सामने देखती तक नही थी.. ओर वृन्दा ज्यादातर ब्रीन्दाके साथही रहेथी..

जीतुलालने अ‍ेक बात ओर भी नोटीसकी.. उसे अपनी पुर्व पत्नी ब्रीन्दा ओर अपने बेटे श्रीधरके बीच बात चीतका व्यवहार भी कुछ अजीब लगा.. जैसे दोनो बाते करते तब अ‍ेक मा बेटे नही.. अ‍ेक पती पत्नी बाते करते हे अ‍ैसा लगा.. ओर आखीर कार्यसे ठीक अ‍ेक दिन पहेले दोनो बहेने दो पहोरको भोजनके बाद आरम करते फुरसतसे लेटे अ‍ेक कमरेमे अकेली बात कर रही थी..

तब ब्रीन्दाने उसे बता दीयाकी गांवकी परंपराके हीसाबसे ओर जयश्रीसे कहेनेपे उसने श्रीधरसे सादी करली हे.. ओर इस वक्त वो श्रीधरसे प्रेगनेन्ट भी हे.. जीसे सुनकर वृन्दा सोक्ट होगइ.. फीर वृन्दाने सबकुछ अ‍ेक्सेप्ट करलीया.. ओर वृन्दाने भी उसे बता दीयाकी उसने सहेरमे आकर जीतुसे सादी करली हे..

ओर वो भी इस वक्त उनसे प्रेगनेन्ट हे.. वृन्दाको ये नही पता थाकी उनके ओर श्रीधरके बारेमे ब्रीन्दा सबकुछ जानती हे.. वो बाते उसने जरुर सेरकी.. की आजकल जीतु बहुत कमजोर हो गया हे.. ओर अब उसे सारीरीक सुख देनेमे सक्षम नही रहा.. तब ब्रीन्दा मनही मन कुटील मुस्कान करती हे..

क्युकी उसे पता थाकी जीतुलालकी कमजोरी कीस वजहसे आइ हे.. ओर वोही कमजोरीकी वजहसे वृन्दा श्रीधरके नजदीक आकर उनसे सारीरीक सबंध बनाती हे.. जीनकी वजहसे आज वृन्दा प्रेगनेन्ट हे.. ब्रीन्दाको वृन्दाकी प्रेगनन्सीके बारेमे सबकुछ पता चल गया.. ब्रीन्दाने बडी ही सावधानीसे अपना बदला लेलीया था..

ओर कार्य समाप्त होते ही दुसरे दिन श्रीधर ब्रीन्दा ओर जयश्री भी गांव चले गये.. तब जाते वक्त ब्रीन्दा ओर वृन्दा खेक दुसरेको गले मीलकर खुब रोइ.. ब्रीन्दाने उसे आस्वासन दीयाकी उनकी डीलीवरीकी देखभालके लीये वो गांवमे उनके घरपे लेजायेगी.. इसके बाद जीतुलाल वृन्दाको पुछनेकी कभी हींमत नही करपाया.. की ये बच्चा कीसका हे..
 
इसी बीच लखन भी दो बार ओर टीनाको उनके घरपे मीलकर आगया.. जब तीसरी बार वो टीनाकी चुदाइ करने गया तब टीनाने उसे कहाकी वो प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. उस दिन दोनोने सेलीब्रेट करते खुब चुदाइ की.. उस दिन टीना बहुत ही खुस लग रही थी.. तब लखनने टीनाको सृतीको मीलनेके लीये कहा..

तो उधर गांवमे भी अ‍ेक दिन वसुधाने चारु ओर नीशाको बता दीयाकी वो लखनसे मीलन कर चुकी हे.. तो नीशा ओर चारु सोक्ट होते खुसीसे मुस्कुराते वसुधाकी ओर देखने लगी.. फीर चारुने लखनसे मीलनेका अ‍ेक्सपीरीन्स पुछा.. तो वसुधाने सरमाकर हसते सबकुछ बता दीया.. ओर लखन ओर उनके हथीयारकी बहुत तारीफ की..

तबसे चारु ओर नीशाकी लखनसे मीलन करनेकी प्यास ओर बढ गइ.. ओर चारु नीशाने ये बात रश्मी ओर वंदनाको भी बताइ.. तो रश्मी तो पहेलेसे ही लखनसे मीलनेके लीये तडप रही थी.. लेकीन चारु नीशाकी बात सुनकर वंदनाने भी लखनसे मीलन करनेका अपना इरादा पका करलीया.. क्युकी बच्चेकी वजहसे वोभी कइ दिनोसे सेक्स वंचीत थी.. ओर देवायत उसे मीलने बहुत ही कम आता था..

इसी दौरान सहेरमे लखनकी सोसायटीमे रहेते रमेश ओर जया भी अ‍ेक दिन सृतीकी क्लीनीकपे चले गये.. ओर वहा सृतीने जयाकी डलीवरीकी.. तो जयाने अ‍ेक सुंदर बच्चीको जन्म दीया.. ओर उसी साम चंदाको भी लेबर पेइन हुआ.. तो लखन उसे अपनी कारमे राधीकाको साथ लेकर क्लीनीकपे चला गया..

लखनने पुनमको फोन करदीया.. तो सामके वक्त पुनम नीर्मलाको लेकर देवायत भी क्लीनीकपे पहोंच गया.. मंजुला उसे कहेकर ही गइ थी.. उनके मुताबीक सामको चंदाने भी अ‍ेक सुंदर बच्चीको जन्म दीया.. तो वहा देवायतको रमेश भी मील गया.. दोनोने मीलकर गांवके बारेमे खुब बाते की..

रमेशने यहा अ‍ेक कीरानेकी दुकान लेली थी.. जो बहुत अच्छी चलने लगी थी.. वो ओर जया अपने नये संसारसे बहुत खुस थे.. रमेशको नही पता थाकी जया सांती ओर उनकी बेटी जागृती हमेसा फोनसे कोन्टेक्टमे रहेती थी.. ओर गांवकी बाते करती थी.. फीर सबने खुसी खुसी चंदा ओर जयाकी बच्चीको सगुन दीया..

दुसरे दिन दोनोको छुटी मील गइ थो सुबह सुबह ही सांती ओर जागृती बंसीसे बात करके पहेली बार जयाको मीलने ओर बच्चीको देखने सहेर आगइ.. जया अकेली बच्चीको नही सम्हाल सकती थी.. तो सांतीने दुबारा बंसीसे बात करली.. ओर कुछ दिन वो जयाकी देखभालके लीये रुकनेकी परमीशन मांगती हे..

अब सांती भी प्रेगनेन्ट थी.. ओर उनका भी पेट नीकल गया था.. जीसे बंसी उसे हाथ नही लगाता था.. फीर जया उनकी मां भी थी.. तो बंसीने सांतीको खुदका भी खयाल रखनेकी नशीहत देते वही रुकनेकी परमीन देदी.. तो सांती रुक गइ.. ओर जागृतीको पुनम देवायतके साथ वापस घर भेज दीया..

जागृतीको बंसीसे खुब प्यार मील रहा था.. लेकीन फीर भी दिलके अ‍ेक कोनेमे अबभी लखनके लीये सोफ्ट कोर्नर था.. कभी उन्होने ओर लखनने मीलकर कुछ वादे भी कीये थे.. जीनकी वजहसे वो अपने भाइसे सादी करनेके लीये राजी होगइ थी.. लेकीन बंसीसे उसे इतना प्यार दीया की उसने लखनसे कीया वादा भी भुल गइ..

जागृती पुरी तराह अपने भाइ बंसीको समर्पीत होगइ थी.. अब उसे लखनसे ना मीलनेका कोइ अफसोस नही था.. क्युकी उसे अब अपने भाइ बंसीसे ही उतना प्यार मील रहा था.. तो लखनको दिलसे बहार नीकालकर बंसीको पुरी तराह अपना लीया था.. वो अब बंसीके प्यारमे पागल होचुकी थी..

अब बंसीसे चुदवानेके बाद जो आइपील लेती थी.. वो आइपील लेना भी बंध करदीया था.. ओर बंसीसे खुलकर ओर प्यार करने लगी.. बंसी भी अपनी बहेनसे बहुत प्यार करता था.. जबतक सांती जयाके पास रही दोनो भाइ बहेनने अकेलेपनका खुब फायदा उठाया.. ओर दिन रात उसी काम (चुदाइमे) लगे रहेते..

जब भी बंसी कामसे घर आता दोनो मील जाते.. बंसीने जागृतीकी हर अ‍ेन्गलसे हर जगाह चुदाइकी.. घरका अ‍ेक कोना नही छोडा.. जागृतीने भी अपने भाइको ओर कामुक होते खुब साथ नीभाया.. ओर हर बार अ‍ेक ही मक्सदसे अपने भाइके बीजको अपने गर्भमे पहोचानेकी कोसीस करती रही..

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सांती लगभग पंद्नह दिन जयाकी देखभालके लीये सहेरमे रुकी.. फीर अ‍ेक दिन लखनके साथ गांव वापस चली गइ.. चंदाका भी सबने खुब खयाल रखा.. खास करके लखन सृती ओर राधीकाने.. जीसे चंदा बहुत खुस थी.. अब लखन सबके सामने उनके होठोको चुम लेता तब चंदा बहुत ही सरमा जाती..

बंध कमरेमे भी लखन चंदाका खुब खयाल रखता.. जब भी चंदा अपनी बच्चीको दुध पीलाती तो लखन चंदाके दुसरे बुब्सपे मुह लगाता.. ओर बच्चीके साथ ही चंदाका दुध पीने लगता जीसे चंदा हसते लखनके सरको सहेलाती.. फीर वो लखनको ब्लुजोब देते संतुस्ट करती ओर वादा करतीकी अ‍ेक दिन वोभी उनके बच्चेको जन्म देगी..

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इसी बीच अ‍ेक दिन मुना बहार घुम रहा था तो गीताका फोन आते ही उसे मीलने चला गया.. क्युकी उनका पती दो दिनके लीये बोम्बे गया हुआ था.. उस दिन दोनोने प्रेगनन्सीकी खुसीमे खुब चुदाइ की.. फीर गीताने मुनासे चुदवाते ही उनकी पुरी कहानी बीना कुछ छुपाये मुनामो सुनादी.. जीसे मुना गीतासे उनकी सचाइसे बहुत प्रभावीत हुआ..

मुना गीतासे सचमे प्यार करने लगा था.. दोनो ही नंगे बेडपे लेटकर बाते करते रहे.. ओर बीच बीचमे अ‍ेक चुदाइका दौरभी चलता.. मुना अब भी गीताके उपर लंड चुतमे डालकर लेटा हुआ था.. तब गीताने मुनाको अपने बारेमे भी बतानेको कहा.. तो मुनाने बदलेकी भावनाकी बातको छोडकर गीताको भी सबकुछ सच बता दीया..

जीसे सुनकर गीता सोक्ट होगइ.. ओर आंखसे आसुं नीकलने लगे.. क्युकी उसे ये जानकर सोक्ट लगाकी अभी जो उनकी चुदाइ कर रहा हे.. ओर वो जीनसे प्रेगनेन्ट हुइ हे वो कोइ ओर नही खुदकी भांजीका बेटा हे.. तब मुनाने अ‍ेक बार फीर प्यारका इजहार कीया.. ओर कहाकी इस बारेमे मामाको कभी पता ना चले..

फीर दोनोने अ‍ेक बार फीरसे कुछ वादे सीकवे कीये.. ओर गीता इस राजको हमेसाके लीये छुपाने राजी होगइ.. फीर इस बार दोगुना जोसमे मुनासे चुदवाने लगी.. चुदवानेके बाद गीताने उनकी मम्मीको मीलकर मांफी मांगनेकी पेसकस की.. तो मुनाने उसे कुछ दिन ओर इन्तजार करनेको कहा.. ओर इस बारेमे मामाको कभी पता ना चले.. इनका गीतासे प्रोमीस लेलीया..

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गीता आज बहुत खुस थी.. मुना देर साम तक वहा रुका.. उन्होने अपने मामाके बीजनेशके बारेमे पुछा तो इस बारेमे गीताको भी कुछ पता नही था.. वो बस अब मुनाके साथ अपनी जींदगी अ‍ैसे ही बीताना चाहती थी.. ओर वो मुनासे ओर बच्चा भी चाहती थी.. फीर कल दोबारा मीलनेका वादा करके मुना घर चला गया..

दिन बीतने लगे.. पुनमको पता थाकी अब भावनाकी डीलीवरीका वक्त आ गया हे.. उसने घरपे नीर्मलासे बात करली.. तो सब बहुत ही उत्साहमे आगये.. क्युकी सबको पता थाकी भावनाकी कोखमे मंजु पल रही हे.. सबलोग मंजुके आगमनकी तैयारीया करने लगे.. ओर डीलीवरीसे ठीक तीन दिन पहेले ही सबलोग सहेर आगये..

हवेलीपे सीर्फ चंपाकाकी अकेली थी.. अब लखन जब भी गांव जाता कभी कभी उनको भी लखनसे सुख मील जाता.. पुनमने चारु ओर रश्मीको वापस आने तक हवेलीका खयाल रखनेको केह दीया था.. देवुकी बाकी सभी बीवीया भी भावनाकी कोखसे मंजुके वापस आनेका इन्तजार कर रही थी..

तो गांवमे भी सब लोगोको पता था.. तो भावनाकी बात सुनकर अनायास ही अ‍ेक उत्सव जैसा माहोल हो गया.. सबलोग भावनाका अ‍ेक रानीकी तराह खयाल रखने लगे.. भावनाको उमीद नही थीकी मंजु उनकी गोदसे जन्म लेगी तो उसे इतना प्यार मीलेगा.. सबलोग भावनाकी वीसेस केर करने लगे..

जीसे भावना अ‍ैसे सरमा जाती जो वो हवेलीकी खास रानी हो.. उनका बेटा भावेश रमाके पास ही था.. ओर बडी बच्ची भी अब बडी होगइ थी तो वो ओर विजय साथ खेलते.. ओर कभी कभी अ‍ेक ही खीलोनेके लीये आपसमे जगडा करते.. तो पुनम भी अपनी बच्चीका बहुत खयाल रखती.. ओर उनके दुध भी अब काफी बडे ओर भरावदार हो गये थे..

ओर आखीर ये दिनभी आगया.. सुबह चार बजे भावनाको लेबर पेइन हुआ.. तो सबलोग जाग गये.. ओर लखनने तो बहार कार भी रेडी रखी थी.. नीर्मला पुनम देवायत राधीका लखनके साथ सृती ओर भावीका भी रेडी होयइ.. पुनमने लता ओर नीलमको चंदाका खयाल रखनेको कहा.. ओर सबलोग क्लीनीकपे चले गये..

भावीकाने अपने स्टाफको फोन करके बुला लीया.. ओर कीसी भी इमरजन्सीके लीये सबको कोल करके रेडी रहेनेको कहा.. ठीक ब्रह्म मुहुर्तमे भावीकाको बहुत दर्द होने लगा तो उसे ओटीमे लेजाया गया.. तो सृतीने लखनको भी इसारोसे केबीनसे अंदर आनेको केह दीया.. तो लखन सृतीकी केबीनसे ओटीमे चला गया..

लखन : (मुस्कुराते) यार मुजे क्यु अंदर बुलाया..? मुजे कहा डीलीवरी करनी हे..?

सृती : (पीठमे अ‍ेक मुका मारते) भाइ.. ज्यादा चपडबपड मत करो.. जीतना कहा जाये उतना करो.. आप अपनी भावना भाभीको सम्हालो.. हमे नोर्मल डीलीवरी करनी हे..

लखन : (सामने देखते धीरेसे फुसफुसाते) भाभीको मे सम्हालु..? पर कैसे..?

सृती : (सरारती मुस्कानसे) क्यु..? उन हिमालयकी कीताब नही पढी क्या..? कैसे वो राजा डीलीवरीके वक्त अपनी बीवीओको सम्हालते थे.. अ‍ैसे ही सुरु होजाओ.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) यार वो टोटका यहा काम थोडीना करेगा..?

सृती : (मुस्कुराते) अरे मुजे विस्वास हे.. जरुर करेगा.. आप अ‍ेक बार ट्राइ तो करो.. चलो सुरु होजाओ..

कहा तो भावना दर्द होनेके बावजुद भी सरमा गइ.. ओर लखन मुस्कुराते उनके सरके पास जाकर खडा होगया.. ओर भावनाके सरको सहेलाने लगा.. भावना सरमाके लखनकी ओर देखकर मुस्कुराने लगी.. तबतक भावीकाका स्टाफ भी आ गया.. ओर लखनको वहा देखकर मुस्कुराने लगा.. सृती ओर भावीकाने लखनको इसारा करते मोर्चा सम्हाल लीया..

भावीकाको अ‍ेक इन्जेक्शन दीया तो दर्द ओर बढ गया.. सृती भावनाको ओर जोर करनेको कहेने लगी.. भावीका भावनाके पेटको पुस करने लगी.. ओर सृती भावनाके दोनो पैरोके बीच ग्लोज लगाकर बच्चेका इन्तजार करने लगी.. भावना कुछ समजे उनसे पहेले ही लखन उनके सरको सहेलाते होठोपे कीस करने लगा..

भावना दर्द होनेके बावजुद भी मदहोस होने लगी.. दोनोके होठ मीले हुअ‍े थे.. ओर चुंबन इतना गहेरा हो गयाकी बच्चेके रोनेकी आवाजसे ही दोनो होसमे आये.. देखा तो सृती बहुत ही खुस होते बच्चीको अपने हाथोमे लीये खडी थी.. ओर उसे कोटनसे पोछ रही थी.. फीर बच्चीको अंदर लेजाया गया..

भावनाकी आंखोसे हर्षके आसुं बहेने लगे.. उसने जोरोसे लखनके हाथोको थामते रखा था.. फीर लखनकी ओर देखते फुसफुसाते बस इतना ही कहा.. थेन्क्स.. आइ लव यु.. ओर लखनने अ‍ेक बार फीर उनके होठ चुम लीया.. ओर मुस्कुराने लगा.. तबतक भावीका भावनाकी चुतपे टांके लगा रही थी.. तो..

लखन : (सरारती मुस्कानसे) डार्लींग.. जरा अच्छेसे.. हें..हें..हें..

भावीका : (जुठे गुस्सेसे) कीतने कमीने हो.. अ‍ेक ज्यादा ही लगाउगी.. फीर मजे करते रहेना..

सृती : (मुस्कुराते बच्चेको बहार लाते) देखा भाइ.. वो टाटका काम कर गया.. भावना भाभीको पता भी नही चला की बच्ची आ गइ हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. ये बच्ची नही हमारी मोम हे..

फीर सृती बच्चीको अच्छेसे साफ करके भावनाको दीखाती हे.. तो भावीका भी हाथ लेकर उसे प्यार देती हे.. जब उसने बच्चीको लखनके हाथोमे दीया तो लखनकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. ओर उनके मुहसे सीर्फ इतना ही नीकला.. मो..म.. हमारी फेमीलीमे आपका फीरसे स्वागत हे.. आपका दर्जा हमेसा मोमका ही रहेगा..

इतना सुनते ही सृती भी भावुक हो गइ.. ओर उनकी आंख भी गीली होगइ.. फीर सृती बच्चीको अपने पास लेलेती हे.. ओर बहार चली जाती हे.. तब लखन भावनाके होठोपे कीस करके वापस सृतीकी केबीनसे बहार चला जाता हे.. बहार देखता हेतो देवायत बच्चीको सीने लगाते खुसीसे आंसु बहाता हे..

फीर बारी बारी पुनम नीर्मला ओर राधीका भी बच्चीको प्यार देते हे.. ओर सबकी आंखे खुसीसे नम होती हे.. लखनने वही फोन करके चंदाको घरपे बता दीयाकी मोम वापस आगइ हे.. सुनकर देवायत लखनसे लीपटकर आंसु बहाने लगा.. तो नीर्मलाने देवायतको लखनसे अलग कीया ओर उसे हग करते सम्हाल लीया..

सृतीने दुसरे दिन तक भावनाको वहा रखा.. तो नीर्मला ओर देवायत वही क्लीनीकपे रुक गये.. बाकी सब लोग घर चले गये.. उस रात लखनने स्पेसीयल सीर्फ पुनम ओर लताके साथ ही सारीरीक सबंध बनाये.. दोनोको देर रात तक खुब प्यार कीया.. जीसे लता बहुत ही खुस हो गइ.. उस रात पुनमने लखनको गांवके बारेमे ओर अपडेट दीया.. खास करके बंसीके बारेमे..

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जीसे सुनकर लखन भी चौक गया.. दुसरे दिन भावनाको छुटी देदी तो लखनने सबको जबरदस्ती अ‍ेक दिन ओर रुकनेके लीये कहा.. उस रात भी सृती भावीका राधीका पुनम ओर लता.. सबलोग साथमे सोये.. सबने लखनको पुरी रात जगाया.. ओर बारी बारी सबने लखनसे खुब चुदाइ करवाली.. सुबह सबलोग देरसे जागे..
 
फीर दुसरे दिन सबलोग चाइ नास्ता कर रहे थे तब दो दो बच्चे सम्हालनेमे तकलीफ ना हो इसीलीये पुनमने चंदाको भी कुछ दिन गांव आनेके लीये कहा.. तो चंदाका लखनकी ओर देखते चहेरा उतर गया.. लेकीन पुनमने उनके कानमे कुछ कहेते बात सम्हालली.. तो चंदा भी मुस्कुराते जानेके लीये राजी होगइ..

तभी देवायतके फोनपे भानुका फोन आगया.. ओर सबको गांव आनेके लीये कहा.. फीर देवायतने सबको भानुके घर सीफ्ट करनेकी खबर देदी.. ओर कहाकी कल सबको भानुके नये घरपे जाना हे.. वहा उसने वास्तु हवन ओर पुरे गांवको खानेके लीये न्योता दीया हे.. जीसे सुनकर नीलम बहुत खुस होगइ.. सबलोग अ‍ेक साथ जानेके लीये तैयार होगये.. ओर तैय हुआकी सब लोग आश्रम होकर जायेगे..

पुनमने दया ओर रजुको भी फोन कीया तो सीर्फ दया आनेके लीये तैयार होगइ.. ओर रजीया होस्टेलकी वजहसे नही आरही थी.. देवायत लखन ओर भावीका ओर सृतीने अपनी अपनी कार लेली.. सबलोग जानेकी तैयारीया कर रहे थे तब दया भी तैयार होकर आगइ.. फीर सबलोग घरको ताला लगाकर नीकल गये..

आश्रम पहोये तो आज आश्रममे अ‍ेक अलग ही रोनक थी.. बाबा सबको देखकर बहुत खुस होगये.. सबने उनका आशीर्वाद लीया ओर वही बैठ गये.. तब भावनाकी बच्ची रोने लगी.. तो बाबाने उसे देनेको कहा.. ओर जैसे ही बाबाने बच्चीको लीया वो सांत होगइ.. ओर बाबाके सामने पहेली बार हसने लगी..

जीसे देखकर बाबाकी आंखोमे भी हर्षके आसुं आगये.. जैसे ही बाबा उनके हाथको सहेलाने लगे बच्चीने बाबाकी उंगली पकडली.. भावनाकी पहेली बच्चीका नाम तो बाबाने पहेलेसे ही सख दीया था.. विभा.. फीर इस बचीने बाबाका दामन थामे रखा था तो बाबाने इनका ना दामीनी रख दीया..

पुनमकी बच्चीका नाम पुजा तो मंजु रखके ही गइ थी.. तो चंदाकी बच्चीका नाम साधना रखा.. फीर बाबाके साथ कुछ समय बीताके सबलोग गांव चले गये.. तो देवायतकी सभी बीवीया हवेलीपे आगइ.. साथमे वसुधा भी थी.. जो लखनको देखते ही सरमा गइ.. सबलोगोने बच्चोका अच्छेसे कलश घुमाकर स्वागत कीया..

फीर सबलोग बच्चोको गोदमे लेकर उनके साथ खेलने लगे.. इसी दौरान लखन खेतोकी ओर नीकल गया.. देखा तो वहा खटीयापे हरीया बैठा हुआ था.. ओर उनकी दुसरी बीवी रेणु अपने बच्चेको दुध पीलाते खटीयाके पास नीचे हरीयाके पास बैठी थी.. जैसे ही लखन आया वो सरमाकर बच्चेको लेकर चली गइ..

लखन : (हरीयाके पास बैठते) हरी.. भानुभाइ दीखाइ नही देते.. कही बहार गये हे क्या..?

हरीया : (देखते ही खटीयासे खडा होते) अरे छोटेमालीक आप..? आइअ‍े.. आइअ‍े.. बैठीये.. भानुभाइ तो घरपे हे.. कल नये घरपे हवन हेनां.. तो दो तीन मजदुरो ओर अपना टेम्पो लेकर सामान सीफ्ट कर रहे हे.. मे आपके लीये कुछ लाउ..?

लखन : (खडा होते) नही हरी.. मे वही चलता हु.. देखता हु कीतना सामान अभी बाकी हे..

फीर लखन नदीके उस पार भाजुके नये घरपे जाता हे.. वहा सीर्फ सरलाकाकी थी.. जो सामानके बीच अपनी वोही पुरानी खठीयापे बैठी थी.. जैसे ही सखन आया वो खडी होगइ.. ओर जटसे दरवाजा बंध करलीया.. फीर लखनको लेकर अ‍ेक खाली रुममे चली गइ.. ओर लखनके होठो चुमने लगी..

लखन : (हसते) अरे काकी क्या कर रही हो..? कोइ देख लेगा.. सबलोग कीधर हे..?

सरला : (मुस्कुराते) कोइ नही हे.. रमा वही हे.. सायद अब आखरी फेरा होगा.. भानुके साथ आयेगी.. वो सामान लेने गया हे.. अच्छा हुआ तु आगया.. चल देर मत कर.. अ‍ेक बार तेरी काकीको खुस करदे..

लखन : (मुस्कुराते) क्या काकी..? ये नया घर हे.. कुछ तो सरम करो.. मे अभी कुछ भी करने वाला नही हु.. क्या सारा दिन यही काम करता हु..? अ‍ेक बार हवन होजाने दो.. फीर तो यही मीलना हे.. तो फीर चलो मे वही जाता हु.. उनकी कुछ मदद करदु..

सरला : (हाथ पकडते) अरे कही नही जाना.. अब सबकुछ आ गया हे.. बस बचा कुचा सामान लेने गया हे.. हमारे लीये तो यही हवन हे.. जबसे तेरा बडा हथीयार लीया हे तबसे मे पागल हो रही हु.. मेरी काम वासना ओर बढ गइ हे.. चल नखरे मत कर.. नये घरमे उद्घाटन करदे.. ताकी ये घरभी उस घरकी तराह कामुक्तासे भरा रहे.. उस दिन आग लगाकर गया फीर तो दीखा ही नही.. कीतना इन्तजार कीया तेरा.. चल सुरु होजा.. देर मत कर..

लखन : (मुस्कुराते) अरे काकी.. मे कीतना काममे फसा था.. सुनो.. अभी भावना भाभी ओर चंदा भाभीको बेबी हुइ हे.. हमारी मंजुमोम वापस आगइ.. हम सबलोग आये हे.. सुना हे कल कुछ हवन बवन रखा हे आपने..?

सरला : (सारी कमर तक उची करते अ‍ेक बक्षेसे हाथ टीकाकर जुक गइ) हां.. इसीलीये तो तुम सबको बुलाया हे.. देर मत कर.. उनके आनेसे पहेले नीपट जायेगा.. चल सुरु होजा..

लखन : (हसते पेन्टकी क्लीप खोरते) आप मानोगी नही.. कीतनी चुखकड होगइ हो..

सरला : (पीछे देखते) अरे वोतो जवानीके दहेलीजपे कदम रखा तबसे ही मे बडी चुदकड हु.. चल सुरु होजा..

फीर लखन मुस्कुराते पेन्टकी जीप खोलता हे.. ओर सरलाके पीछे जाकर उनकी कमरको थाम लीया.. ओर अ‍ेक ही जटकेमे पुरा हथीयार सरलाकी चुतमे उतार दीया.. तो सरला हल्केसे मुहपे हाथ रखते चीख पडी.. फीर लखनने जोरोसे कमर हीलाते मोर्चा सम्हाल लीया.. पुरे कमरा सरलाकी कामुक सीसकारीयोसे गुंजने लगा..

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लखनको पता नही थाकी सरलाकाकी की इतनी उार होनेके बावजुद भी इतनी हवसी होगी.. वो खडा होते पीछेसे धनाधन सरलाको चोदता रहा.. ओर आखीर दोनो अपनी मंजीलपे पहोंच गये.. ओर भानुके वापस आनेके डरसे लखनने दुसरा राउन्ड नही लगाया.. उसने तो बस.. सरलाकी भावनाका सन्मान कीया.. सरलाकाकीने अ‍ेक कपडेसे अपनी चुतको साफ कीया.. फीर दोनो कपडे सही करते बहार आगये.. ओर खटीयापे बैठ गये..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु काकी.. मजा आया..?

सरला : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. बहुत.. जो मजा तु देता हे वो ओर कीसीके साथ नही आया.. कीतने दिनोके बाद मीला हे मुजे..

लखन : (मुस्कुराते) काकी.. इस उारमे भी आपके अंदर बहुत आग हे.. कीतनी होट हो आप..

सरला : (सरमाकर धीरेसे) लखन.. तु मेरे बारेमे सब जानता तो हे.. मे सुरुसे ही अ‍ेक कामी ओरत हु.. तेरे बापुके बाद देवुने भी मेरा खुब खयाल रखा हे.. अब तुजे रखना हे..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा वो सबतो ठीक हे.. क्या आप भानुभाइके साथ कुछ आगे बढी की नही..? मतलब उनको सेट कीयाकी नही..?

सरला : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हां.. कमीना मानता ही नही था.. बहोत बुध्धु हे.. उनको बहुत संकोच हो रहा था.. फीर मेने उसे कहाकी मे सुरुसे ही बहुत कामी ओरत हु अगर तु नही माना तो बहार कीसी ओरसे ठुकवानेकी बात कही.. तो फौरन मान गया.. तु कहेता था अ‍ैसा ही हे.. उनको वाकइ बडी उमरकी ओरते ही अच्छी लगती हे..

लखन : (मुस्कुराते) काकी.. आप वाकइ इतनी होट होकी वो आपके दीवाने हो जायेगे..

सरला : (मुस्कुराते) सच कहा तुने.. जब हम पहेली बार मीले फीर तो मेरा दिवाना हो गया हे.. देखना कीसीको पताना चले.. अब रमासे ज्यादा तो वो मेरे पीछे पडा हुआ हे.. लेकीन उनको कुछ प्रोबलेम लगता हे.. कमीना हर बार कोइ गोली खाता हे.. उनके बाद करता हे..

लखन : (मुस्कुराते) फीकर मत करो.. उनका कुछ इलाज चल रहा हे.. तो पहेलेकी तराह ठीक हो जायेगे.. अब तो आपका घरपे ही जुगाड होगया.. काकी.. आपके तो माजे ही मजे हे.. हें..हें..हें..

सरला : (मुस्कुराते) अरे क्या खाक मजे हे.. जो मजा तु देता हे वो भानुसे नही मीलता.. बस.. काम चल जाता हे.. अच्छा हुआ देवुने भावना ओर तुमने रमाको सम्हाल लीया.. वरना उसे सम्हालनेके लीये भानुके बसकी बात नही हे.. कमीनी मुजसे भी दो कदम आगे नीकली.. तु रमाको सम्हालले.. मे भानुको सम्हाल लुगी.. ओर कभी कभी तुभी आता जाता रहे.. वैसे क्या हुआ हे उनको..?

लखन : (मुस्कुराते) कुछ खास नही.. बस.. ज्यादा सेक्स करनेकी वजहसे कुछ नीजी प्रोबलेम.. आप फीकर मत करो.. बहुत ही जल्द सब ठीक होजायेगा..

सरला : (थोडे गुस्सेमे) हां तो होगा ही.. कमीना सारा दीन वो कलमुही रीटाके साथ ही लगा रहेता हे.. ये नही की कुछ घरकी ओरतोपे थोडा ध्यान दे..

तभी टेम्पोकी आवाज आती हेतो लखन दरवाजा खोल देता हे.. कुछ ही देरमे मजदुरो सामान लेकर अंदर आने लगे.. तभी पीछे भानु ओर रमा भी आगये.. तो भानु लखनको देखते ही खुसीके मारे उनके गले लग गया.. तो रमा लखनको देखते ही सरमा गइ.. ओर अपने बढे हुअ‍े पेटपे हाथ घुमाने लगी..

फीर लखनने भानु ओर रमाको भावना ओर चंदाकी बच्चीकी खुसखबर सुनाइ.. तो सरला ओर रमा बहुत ही खुस होगइ.. अब भानु भावनाको पुरी तराह भुल चुका था.. फीर सामान सेट करना था.. ओर कलके हवनकी तैयारीया भी करनी थी.. ज्यादातर उसने तैयारीया तो करली थी..

फीर भी भानु लखनके साथ हवनकी तैयारीया करने लगा.. ओर लखनने नीलम ओर लताको भी फोन करके वहा बुला लीया.. जैसे ही नीलम लता आइ तो नीलम लखनको देखकर सरमा गइ.. ओर ये बात रमाने नोटीस करली.. नीलमने रमाको ज्यादा पेट नीकलनेकी वजहसे अ‍ेक तरफ बीठा दीया.. ओर घरका सामान सेट करने लगी..

रमा नीलमको देखती रही.. क्युकी अब नीलमका सरीर काफी भर गया था.. वो अ‍ेक कुआरी लडकीसे ज्यादा अ‍ेक सादी सुधा ओरतकी तराह दीख रही थी.. फीर लखन ओर भानुने मीलकर हलवाइ वालोको ओर पंडाल वालोको बोल दीया फीर गांवके पंडीतसे भी बात करली.. ओर साथमे भानु सबको फोन करके न्योता भी देता रहा.. ओर बीच बीचमे लखन नीलम ओर लताकी मदद भी करता रहा..

वंदना ओर पुनमको पता चला तो वोभी आगइ ओर साम होते होते लगे हाथो बहुत कुछ सामान सेट करलीया जो कलके लीये जरुरी था.. आज कामकी वजहसे पुनमने सबके खानेका इन्तजाम हवेलीपे ही करलीया.. ओर काम खतम होते ही सबलोग हवेलीपे आ गये.. वहा रमाने चंदा ओर भावनाके बच्चेको सगुन दीया..

रातके खानेके बाद रश्मी चारु नीशा ओर वसुधा भी आगइ.. सबलोग भावना ओर चंदाकी बेटीको प्यार देते आपसमे मस्ती मजाक करते रहे.. अ‍ैसा लग रहा था सबकी लाइफ फीरसे पटरीपे आगइ थी.. सबको पता थाकी अब सबकी मंजील लखन ही हे.. तो सबने मीलकर लखनका खुब मजाक उडाया.. ओर मौका मीलते ही सब अ‍ेक दुसरेसे छीपकर लखनसे आंख मीचोली खेल लेती..

इस रात लखनको पुनम सृती भावीका ओर राधीकाने खुब प्यार दीया.. दुसरे दिन सबलोग भानुके घरपे तैयार होकर चले गये.. वहा भानु ओर रमा हवनमे बैठे तो साथमे सरलाकाकी ओर नीलम भी बैठी थी.. आज नीलम भी अच्छेसे तैयार होते बहुत ही जच रही थी.. ओर छुपकेसे लखनसे आंखोसे इसारा कर रही थी..

आखीर भानु इस गांजमे रहेने आही गया.. वहा लखनके सभी दोस्त अपनी फेमीलीके साथ आये थे.. सबलोग काममे बीजी थे.. लखनको पुनमके माध्यमसे पता चल गया था.. की उनके सभी दोस्तोकी कुछना कुछ नइ खीचडी पक रही हे.. तब लखन अ‍ेक अ‍ेक दोस्तको मीलकर उनका हाल चाल जानने लगा..

तो सबकी लाइफ अब मजेसे कट रही थी.. सभी दोस्तोमे अ‍ेक अच्छी अंडरसेन्डींग थी.. ज्यादातर अपना हर राज दोस्तोके बीच खुलकर बता देते थे.. ओर इस बातकी कीसी ओरको कानो कान खबर भी नही मीलती.. सब अ‍ेक दुसरेपे बहुत विस्वास करते थे.. लेकीन कुछ बाते अ‍ैसी थी जो सभी दोस्त अ‍ेक दुसरेसे अपने कुछ अफैर छीपाने लगे थे..

लखनने पहेले साहीलको पकडा.. तो साहीलने लखनको सबकुछ सच बता दीया.. क्युकी उसे पता था लखनको पुनमके माध्यमसे अ‍ैसे ही सबकुछ पता चल जाता हे.. साहीलने बतायाकी उस दिनके बाद वो सबानाको दो बार ओर बेंगलोर मीलकर आगया था.. क्युकी अब सबाना साहीलके लीये पुरी तराह पागल हो चुकी थी..

ओर जब भी कादीर टुरपे होता तो वो अक्सर सायराको मीलने उनके घर चला जाता.. ओर सायराकी जमकर लेता.. वो सायराको कइ बार मील चुका था.. ओर साथमे जरीनाके साथ अफैरकी बात भी बतादी.. येभी कहाकी सलमा ओर जरीना हर रात बारी बारी उनके साथ सोने लीगी हे.. जीससे जरीना भी उनसे सचे दिलसे प्यार करने लगी हे..

ओर ये भी बता दीयाकी दोनो मां बेटी उनको अपना खसम मानने लगी थी.. सायरा ओर जरीना दोनो अब उनसे प्रेगनेन्ट भी हो चुकी हे.. बस.. अब उसे सबानाके वापस आनेका इन्तजार था.. फीर साहीलने अपने चाचा ओर खेतोकी अ‍ेक मजदुर लडकीके बारेमे भी बता दीया.. साहीलने लखनको सबकुछ सच बता दीया.. फीर उसने श्रीधरसे भी अकेलेमे बातकी.. तब..
 
लखन : (सामने देखते) हां श्रीधर.. बोल.. नया क्या चल रहा हे..? तेरी सासको मीलने जाता हेकी नही..?

श्रीधर : (सरमाकर मुस्कुराते) क्या भाइ.. क्यु मजाक कर रहे हो.. मुजे पता हे आपको सबकुछ मालुम हे.. पुनम भाभीने जो बता दीया होगा..

लखन : (सामने देखते) हां कमीने.. तो फीर मुजे सच क्यु नही बताता..? खैर.. तेरे बडे पापाका सब कार्य नीपट गया..? मीन्स.. इस बारेमे तेरी साससे ओर कोइ बात हुइ..?

श्रीधर : (धीरेसे) हां भाइ.. पीछली बार मीलने गया तब मेरी सासने मुजे सबकुछ सच बता दीया.. उस रात मेरी सास बडे पापाके दुधमे नींदकी गोलीया डालना भुल गइ थी.. ओर देर रात उसने पापाको ओर मेरी सासको चुदाइ करते रंगे हाथो पकडलीया.. बस.. बडे पापा ये धोखा बरदास्त नही कर पाये.. ओर उसे दिलका दौरा पड गया..

लखन : (सामने देखते) ओर तेरा बाप..? क्या उसे पता हे उनका हथीयार क्यु बेकार हो गया.. तुमने ओर ब्रीन्दा भाभीने उसे जडी बुटी पीलाइ थीनां..? उस दिन बंसीकी सादीमे दो लोगोको दी गइ थी.. बता..

श्रीधर : (पसीना पोछते) भाइ आप मीया बीवी बहुत डेन्जर हो.. क्या पुनम भाभीने सबकुछ बतादीया..?

लखन : (मुस्कुराते) तो कमीने इतना गभरा क्यु रहा हे.. मेतो बस पुछ रहा हु.. कमसे कम मुजे तो सच बता.. दुसरे भानुभाइ थेनां..?

श्रीधर : (मुस्कुराते धीरेसे) हां भाइ.. जडीबुटी सीर्फ भानुभाइके लीये ही थी.. उस दिज बडे भैयाके मना करनेके बावजुद भी वो बसंती भाभीको इसारा करते बुला रहे थे.. ओर ये सब मुनाने देख लीया.. तो उसने गुस्सेमे आकर हथीयार बेकार करनेवाली जडीबुटी मुजे छुपकसे भानुभाइको पीलाने दीथी.. ओर मैने भी अपने बापसे बदला लेनेके लीये उनमेसे आधी नीकालली.. ओर मम्मीको कहेकर मेरे बापको भी पीलादी..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा हुआ तुमने आधी करली.. वरना पुरी भानु भाइको देते तो उनका हथीयार बीलकुल बेकार हो जाता.. कमसे कम इनमे ठीक होनेके चान्सीस तो हे.. ओर बता.. क्या कहेती हे तेरी सास..

श्रीधर : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. जबसे हम दोनो रीलेशनमे आये हे तबसे तो वो मेरे पीछे पागल होगइ हे.. भाइ.. अभी कीसीको बताना नही.. वो मुजसे प्रेगनेन्ट होगइ हे.. ओर जबसे मुजसे प्रेगनेन्ट हुइ हे तबसे उसे पापाका डर भी नही हे.. वो अपनी बाकीकी लाइफ हमारे साथ बीताना चाहती हे.. कहेती थी मौका मीलते ही वो पापाको सब सच बता देगी.. पता नही आगे क्या होगा.. भाइ.. भाभीको तो सब पता होगा.. तो अ‍ेक बार पुछलोनां..

लखन : (सामने देखते) यार पुछतो लुगा.. क्या तेरे पापाको सब सच बताना जरुरी हे..?

श्रीधर : (धीरेसे) भाइ मेभी इसी उलजनमे हु.. पहेले तो मम्मी ओर मेरी सासके बीच बीलकुल नही जमती थी.. सच कहु तो ये मम्मीका ही प्लान थाकी मे मेरी सासको फसाउ.. उन्होने हम दोनोको पुरा स्पेस दीया..ओर अब देखो.. दोनो पकी सहेलीया बन गइ हे.. पता नही दोनो आपसमे क्या खीचडी पका रही हे.. सायद अ‍ेक दो दिनमे वो मम्मीको मीलने आ रही हे.. अब देखते हे आगे क्या होता हे.. आप अ‍ेक बार भाभीसे जानलो..

इनके बाद लखन मुनाको भी मीला.. तो मुनाने भी साहीलकी तराह लखनको सबकुछ सच बता दीयाकी उनसे अपनी मामी गीताको प्रेगनेन्ट करके अपनी मम्मीका बदला लेलीया हे.. लेकीन इसी जुठके रीस्तोसे दोनो अ‍ेक दुसरेको सचा प्यार करने लगे थे.. तो उसने अपनी पहेचान जाहीर करदी..

तब उसे पता चलाकी वो जीनके साथ सो रही थी.. ओर जीनसे प्रेगनेन्ट हुइ हे वो असलमे उनकी भांजीका बेटा हे.. पहेले तो खुब रोइ.. लेकीन हम दोनो अ‍ेक दुसरेसे सचा प्यार करने लगे थेतो वो माफी मांगकर सबसे छुपकर फीर भी ये रीस्ता जारी रखना चाहती हे.. मुनाने सबकुछ सच बता दीया.. सुनकर..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे मुना.. तु फीकर मतकर.. उनके सब पेपर सबमीट करवा दीये हे.. समजले उनकी नोकरी पकी.. दोनो मजे करो.. बता.. बंसीका क्या हाल हे..?

मुना : (हसते धीरेसे) भाइ जबसे सांतीभाभी प्रेगनेन्ट हे तबसे उनकी बहेनके साथ कुछ ज्यादाही मजे कर रहा हे.. ओर आजकल तो दोनो भाइ बहेन खुलकर प्यार करने लगे हे.. पता नही था.. जागृतीभाभी इतनी फोरवर्ड होगी.. बाइकमे भी उनके पीछे भी कैसे चीपकके बैठती हे.. हें..हें..हें..

फीर हवनका कार्य समाप्त हुआ तो सबलोग खानेके लीये बैठ गये.. तब खाना लेकर लखन बंसीके पास चला गया.. तो सांती लखनसे हसकर बाते करने लगी.. लेकीन जागृतीने लखनके सामने तक नही देखा.. वो बस सबलोग थे तो सीर्फ केज्युअली स्माइल करते वहासे चली गइ.. तब..

लखन : (मुस्कुराते) सांतीभाभी.. कैसी हो..? आप वहा पंदर दिन रुक कर चली गइ.. अ‍ेक बार भी हमारे घर नही आइ.. आइ तो बस गांव जानेके लीये.. आपको पता हेनां हम पीछेकी गली मेही रहेते हे..

सांती : (सरमाकर अ‍ेक नजर बंसीको देखते) नही लखन भैया.. बस.. वो.. मम्मी ओर बच्चेको सम्हालनेमे टाइम ही नही मीला.. अब आउगी तो बंसीके साथ.. सीधे आपहीके घर आउगी..

बंसी : (मुस्कुराते) लखन.. अगले महीने इनका रुटीन चेकअप हे.. तो मे ओर सांती दोनो आयेगे.. ओर खाना तेरे यहा पका..

लखन : (हाथ पकडकर बंसीको लेकर थोडा दुर चला गया) बंसी.. कहो कैसी चल रही हे लाइफ.. सबकुछ ठीक..?

बंसी : (मुस्कुराते) हां भाइ.. सबकुछ ठीक ही चल रहा हे.. कुछ खास हे क्या..?

लखन : (कुटील मुस्कानसे) कमीने खास हे इसीलीये तो पुछ रहा हु.. वो बात बता जो आज तक कीसीको नही मालुम.. तुजे पता हेना मेरी बीवी कौन हे..?

बंसी : (हसते हाथ पकडर थोडा ओर दुर लेजाते धीरेसे) क्या भाइ.. आपतो मरवाओगे.. आपको सब पता चल गया..? यार लाइफ अच्छेसे कट रही हे.. देखना कुछ गडबड मत करना.. कमीनी क्या कडक माल हे.. अ‍ेकदम वर्जीन..

लखन : (मुस्कुराते) कमीना.. क्या मे तुजे गडबड करनेवाला लगता हु.. सुरुसे बता.. कैसे फसी वो..?

बंसी : (आजुबाजु अ‍ेक नजर डालते धीरेसे मुस्कुराते) भाइ.. कुछ नही.. बस.. उनको अपने पतीसे वो संतुस्टी नही मीलती थी.. इसीलीये हम दोनोका छुपकर अफैर चल रहा हे.. पडोसी हे फीर भी मेरे सामने तक नही देखती.. बस.. मेरी बीवीओके साथ होता हु तब बडी मुस्कीलसे केज्युअली बात होती हे..

लखन : (मुस्कुराते) लेकीन तुमसे फसी कैसे..? दीखनेमे तो अ‍ेकदम भोली भाली गाय जैसी दीखती हे..

बंसी : (मुस्कुराते) भाइ.. ये साली चुतकी आग ही अ‍ैसी हे.. जीतनी भोली दीखती हे उनके अंदर उतनी ही आग होती हे.. बस अ‍ैसे ही अ‍ेक दिन सुबह मे छतपे टहेल रहा था.. तो वोभी कपडे सुखाने छतपे आइ थी.. पहेले सीर्फ हेलो हाइ हुआ.. तो मैने उनके चहेरेपे थोडी उदासी देखी.. पुछा तो मुस्कुराते बात टालदी.. फीर अ‍ैसे हम तीन चार बार ओर अ‍ैसे मीले.. ओर हमारी बात बढती गइ..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा.. तो मामला धीरे धीरे आगे बढा.. फीर..?

बंसी : (मुस्कुराते) फीर क्या भाइ.. बात करते करते हम अ‍ेक दुसरेकी मजाक करने लगे.. ओर अ‍ेक दिन मेरी कसम देकर पुछ लीया तो आंसु बहाने लगी.. फीर उसने बतायाकी उनके पतीकी उमरकी वजहसे वो उसे संतुस्ट नही कर पाते.. ओर उनके बेटेके छोडनेके बाद उसे सम्हाल लीया हे तो उसे धोखा भी नही देना चाहती..

लखन : (मुस्कुराते) तो फीर पटी कैसे..?

बंसी : (मुस्कुराते) बस.. कुछ नही.. मुजे थोडी महेनत करनी पडी.. उस दिनके बाद हम रेग्युलर अ‍ेक ही टाइमपे मीलने लगे.. ओर इस बातपे खुलकर चर्चा करने लगे.. हमने गांवके अफैर ओर आपसी रीस्तोके बारेमे बात कही.. तो बोली कास.. मेरा भी कोइ भाइ होता.. तो मेने मजाकमे केह दिया.. तो आजसे मुजे ही अपना भाइ समजलो.. तो वो बहुत सरमाइ.. ओर मुजे पीठमे अ‍ेक मुका मारते हसती हुइ चली गइ..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा.. हसी तो फसी वाली बात.. फीर..?

बंसी : (मुस्कुराते) भाइ अ‍ेक दिन मेने अपने प्यारका इजहार करदीया.. तो वो बहुत डर रही थी.. खासकर वो मेरे सुखी संसारको बीगाडना नही चाहती थी.. फीर मेने उसे कहाकी हम उनके घरमे ओर यहा छतके अलावा ओर कही नही मीलीगे.. ओर वोभी देर रात तीनसे चार बजेके बीच.. मेने उनके पतीके लीये कुछ नींदकी गोलीया दी.. ओर सांती जागुको नीपटानेके बादका सेडयुल तैय करलीया..

बस.. उस रात हम दोनो देर रात पहेली बार मीले.. उसे नीचे खुन भी नीकला.. इसके बाद हप्तेमे तीन बार मीलनेका सुड्युल तैय कीया.. फीर हम तैय सेड्युलके हीसाबसे रेग्युलर मीलने लगे.. आप तो जानते हो वो जडीबुटीकी वजहसे हम सभी दोस्तोकी आदत.. कमसे कम बीना नीचे उतरे दो बार..

बस.. उसी आदतकी वजहसे वो मेरी दिवानी होगइ.. दुसरोके सामने हम सामान्य वहेवार ही करते.. कही बाजारमे मीलती तो मेरे सामने देखती तक नही.. हम दोनोने इतनी सावधानी बरती.. ओर आज वो मुजसे प्रेगनेन्ट हे.. उन्होने अपने पतीको कन्वीस करवालीया की वो बच्चा उनके पतीका ही हे..

लखन : (मुस्कुराते) तो क्या बनवारीलाल मान गये..?

बंसी : (मुस्कुराते) हां.. क्युकी वो कहेती थी बनवारीलाल हमेसा उनको सुरुसेही वायग्रा खाकर ही चोदते हे.. ताकी उनको संतुस्ट कर पाये.. लेकीन हकीकतमे अब उमरकी वजहसे बच्चा देनेमे सक्षम नही हे.. ये बात सीर्फ मे ओर बींन्दीया भाभी ही जानते हे.. ओर प्लीज.. आप भी ध्यान रखना.. वरना हम दोनोकी जींदगी खराब होजायेगी.. हमारे दोस्तो या हमारी बीवीओको भी नही.. हमारे बारेमे आज तक कीसीको भी नही पता..

लखन : (मुस्कुराते) कमीने.. क्या मे अ‍ैसी बात बताउगा क्या..? समजले ये राज राज ही रहेगा.. मे पुनोको भी बतादुगा की वो कीसी ओरको ना कहे.. अब खुस..? ओर सुना.. गांवमे नया कुछ..?

बंसी : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ नया तो हे.. आज ही हुआ हे.. जो मेरा बरसोसे अ‍ेक सपना था.. लेकीन अ‍ेक बार सृती भाभीसे चेक करवालु.. क्युकी आज सुबह जागु उल्टीया कर रही थी.. उनका पीरीयडमी इस महीने मीस होगया हे.. भाइ.. मेने अपनी बहेनको प्रेगनेन्ट करदीया हे.. अब वो पुरी तराह मेरी होगइ हे..

लखन : (मुस्कुराते) कमीने बात पकी ही समज.. कोन्ग्रेच्युलेशन..

साम होते ही सब महेमान जाने लगे.. दो आंखे आज फीरसे लखनकी ओर ही मंडरा रही थी.. क्युकी जबसे वो लखनसे पहेली बार फीजीकल हुइ तबसे उनके मनमे दुबारा लखनसे मीलनेकी लालसा जाग गइ थी.. इसीलीये वो बार बार लखनकी ओर देखते फीरसे मीलनेकी कोसीस कर रही थी.. ओर वो थी श्रीधरकी मम्मी ओर अब बीवी.. ब्रीन्दा.. जो लखनसे प्रेगनेन्ट होनेके बाद दुसरी बार मीलन करना चाहती थी..

जाते जाते वसुधाने भी लखनको घरपे आनेका इसारा कीया.. लेकीन लखनने घरके लोगोकी ओर इसारा करते मना करदीया.. तो चारुने तो खुलकर लखनको घरपे खानेके लीये आमंत्रीत कीया.. अब सीर्फ दोनो घरके लोग ही थे.. क्युकी अब स्कुल होस्पीटलका काम भी खतम होनेके कगारपे था.. तो वहा भी सभी रुमोका फनीर्चरका काम हो रहा था..

तो सृती भावीका रश्मी सभी लेडीस इनकी चर्चा कर रही थी.. तो वंदनाने भी नया अ‍ेडमीशन लेना सुरु करदीया था.. कुछ दिन चंदा यही रहेने वाली थी.. तो भावना अब हमेसाके लीये यहा रहेने वाली थी.. ताकी उनके बच्चेकी देखभाल अच्छेसे हो सके.. स्कुलकी वजहसे सृतीने विजयको अपने साथ लेलीया..

देर रात खाना खाकर लखन सृती भावीका राधीका नीलम ओर दयाको लेकर अपनी अपनी कार लेकर सहेरकी ओर चले गये.. लखनने दयाको उनके घरपे ही ड्रोप करदीया.. तो दयाने सरमाते लखनको आंखोसे इसारा करते बादमे घरपे आनेको कहा.. फीर सब अपने घरपे आगये.. अ‍ेबोर्सनकी वजहसे कुछ दिन नीलमको लखनसे दुर रहेनेको कहा.. ओर उस रात सृती भावीका ओर राधीकाने लखनके साथ खुब मजे कीये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २९९

देर रात खाना खाकर लखन सृती भावीका राधीका नीलम ओर दयाको लेकर अपनी अपनी कार लेकर सहेरकी ओर चले गये.. लखनने दयाको उनके घरपे ही ड्रोप करदीया.. तो दयाने सरमाते लखनको आंखोसे इसारा करते बादमे घरपे आनेको कहा.. फीर सब अपने घरपे आगये.. अ‍ेबोर्सनकी वजहसे कुछ दिन नीलमको लखनसे दुर रहेनेको कहा.. ओर उस रात सृती भावीका ओर राधीकाने लखनके साथ खुब मजे कीये.... अब आगे

सबकी लाइफ रुटीन होगइ.. समय बीतने लगा.. दो महीने ओर गुजर गये.. लेकीन अ‍ेक दिन सुबह चार बजे सृतीको फोन आया.. तो देर रात तक जागनेकी वजहसे सृती लखनको सोते हुअ‍े ही छोडकर फटाफट भावीकाको लेकर क्लीनीकपे चली गइ.. जाते वक्त वो राधीकाको बताकर गइकी इमरजन्सी हे.. लताको लेकर नीर्मला पुनम ओर देवायत आ रहे हे..

राधीकाने लखनको जगाया.. ओर लताकी बात कही.. तो लखन फटाफट रेडी हो गया.. ओर चाइ नास्ता कीये बगैर ही क्लीनीक पहोंच गया.. तो वहा देवायत पुनम नीर्मला तीनोही मुरजाये हुअ‍े चहेरे लेकर बैठे थे.. लखनको देखते ही पुनम दोडकर आइ ओर लखनसे लीपटकर रोने लगी..

लखन : (सांत करते) दीदी.. सांत होजाओ.. क्या हुआ लताको..?

पुनम : (रोते हाथ पकडकर बहारकी ओर लेजाते) भाइ.. यहा नही चलो बहार.. वोही.. भुमी आंटीकी तराह.. लता सीडीयोसे गीर गइ.. सरपे चोट आइ हे.. गीर गइ तबसे बेहोस हे.. अंदर ओपरेशन चल रहा हे.. सृती दीदीने दीमागके डोक्टरको भी बुला लीया हे..

लखन : हे भगवान.. ये सब क्या हो रहा हे..? अ‍ेक मीनीट.. दीदी.. आपको तो सब पता चल जाता हेनां..?

पुनम : (हांमे गरदन हीलाते) हां भाइ.. लेकीन इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. सीर्फ हम दोनो होगे तब..

लखन : (सामने देखते) दीदी.. सीर्फ इतना बतादो.. लताको कुछ होगातो नही..? वो ठीक तो होजायेगीनां..?

पुनम : (सामने देखते धीरेसे) हां भाइ.. मेरा यकीन मानो.. लताको कुछ नही होगा.. लेकीन..

लखन : (सामने देखते) लेकीन क्या..?

पुनम : (धीरेसे) भाइ.. हमे इस बच्चेकी उमीद नही हे.. आप समज गयेनां..?

लखन : (आंसु बहाते) दीदी.. ओर क्या कर सकते हे.. हमारे साथ ही ये सब क्यु हो रहा हे..?

पुनम : (सामने देखते) भाइ.. हमारे हाथमे कुछ नही हे.. हमारी दुनीया कोइ ओर चला रही हे..

लखन : (सामने देखते धीरेसे) कौन..?

पुनम : (हाथ पकडकर अंदर लेजाते) भाइ अभी कुछ नही.. अंदर चलो.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे..

पुनम ओर लखन अंदर आगये.. तभी सृती बहार नीकली.. तो लखन पुनमके साथ देवायत नीर्मला भी उनकी ओर दोड पडे.. देखा तो सृतीके चहेरेपे चीन्ता ओर राहत.. दोनो भाव साफ दीखाइ दे रहे थे.. सबलोग डरे हुअ‍े ओर चीन्तीत थे.. की कही लताका भी भुमीकाकी तराह हाल ना हो.. तभी..

नीर्मला : (जटसे) सृती.. क्या हाल हे लताका.. वो ठीक तो हेनां..?

सृती : (थोडी मायुस होते) हां मौसी.. लता खतरेसे बहार हे.. लेकीन..

देवायत : (उत्सुक्तासे) लेकीन क्या..?

सृती : (सामने देखते धीरेसे) बडे भैया.. हम बच्चेको नही बचा सके.. ओपरेशन करके बच्चेको नीकाला.. तब वो ओल रेडी इस दुनीयामे नही था..उनको मरे हुअ‍े दो दिन हो गया थे.. इसी वजहसे लताको चकर आगये होगे.. ओर वो सीडीयोसे गीर गइ.. भगवानका शुर्क हेकी उनको सरपे गंभीर चोट नही आइ..

नीर्मला : (उपर हाथ जोडते) हे भगवान तेरा बहुत बहुत धन्यवाद.. मे भुमीको तो खो चुकी हु.. अब कीसी ओरको अ‍ैसे खोना नही चाहती..

सृती : मौसी.. अब चीन्ताकी कोइ बात नही हे.. आप भैयाको लेकर वो स्पेसीयल रुममे चले जाइअ‍े.. लताको अभी वही ला रहे हे.. ओर लखन पुनमदी.. आप मेरी केबीनमे आइअ‍े.. मे कुछ बहारकी दवाइआ लीख देती हु..

इतना सुनते ही देवायत ओर नीर्मलाने राहतकी सास ली.. ओर दोनो रुममे चले गये.. वहा जाते ही सबसे पहेले देवायतने भानुको फोन करदीया.. ओर लताके बारेमे जानकारी देने लगा.. पहेलेतो सुनकर भानु थोडा गभरा गया.. लेकीन चीन्ताकी बात नही थी तो वो ओर सरला आ रहे हे.. कहेकर फोन काट दीया.. इधर सृती लखन ओर पुनम सृतीकी केबीनमे चले गये.. अंदर जाते ही..

सृती : (सामने देखते) पुनोदी.. क्या हे ये सब..? आपको तो सब पता चल जाता हेनां..?

लखन : (सृतीको) दीदी.. अभी पुनोको कुछ मत पुछो.. इस बारेमे हमारी बात हो चुकी हे.. हम इस बारेमे आरामसे बात करेगे.. हमारे लीये खतरा टल गया वोही बडी बात हे.. क्युकी अभी पुनोदी भी थोडी टेन्शनमे हे..

पुनम : (हाथोमे चहेरा छुपाते आंसु बहाते) मोमने मुजे कैसी शक्तिया दी हे.. मानो शक्तिया ना होते अ‍ेक अभीसाप बन गइ हे.. यार मे सीर्फ जान सकती हु.. हादसेको रोक नही सकती.. मे नीयतीको नही टाल सकती.. मोमने मना कीया हे..

सृती : (आते हग करते) सोरी दीदी.. अब नही पुछुगी.. आप सांत हो जाइअ‍े.. मेतो बस.. युही पुछ रही थी.. अगर आपको बुरा लगा तो अगेइन सोरी..

पुनम : (आंसु पोछते मुस्कुराते) यार माफी मत मागो.. मोमने कहा हे जो होता हे होने दो.. हमे उनकी नीयतीमे कोइ बाधा नही डालनी.. जो होता हे अच्छेके लीये होता हे..

भावीका : (अंदर आते मुस्कुराते) हेइ.. क्या हुआ..? रीलेक्ष.. लतादीदीको होस आगया हे.. उनको हम रुममे सीफ्ट कर रहे हे.. दीदी रो क्यु रही हे..? कुछ हुआ क्या..?

सृती : (मुस्कुराते) आ कमीनी तुभी बैठ.. बस.. कुछ नही.. थोडी बात कर रहे थे..

लखन : (हसते पुनमको) दीदी.. दोनो उठकर सीधी ही भाग गइ.. देखो कैसे भुतनीकी तरह लग रही हे.. हें..हें..हें..

भावीका : (लखनकी पीठमे अ‍ेक मुका जडते) तो क्या करती..? हमे अ‍ैसे ही भागना पडता हे.. अच्छा हुआ हम आगइ.. ओर लतादीदीका ओपरेशन करदीया.. वरना स्थीती थोडी ओर गंभीर हो जाती.. बच्चेकी वजहसे उनके सरीरमे जहेर फैलना सुरु हो गया था.. अब कोइ दीकत नही हे..

पुनम : (मुस्कुराते) सृतीदी.. आप पुछ रही थीना मेने लताको क्यु सावधान नही कीया.. कीया था.. उसे प्रेगनन्सीकी वजहसे नीचे सोनेके लीये कहा था.. उन्होने मेरी बात नही मानी.. अब मे उसे खुलकर तो नही बता सकती.. मानलो.. खुलकर बता भी दिया होता.. तो क्या होता.. तो वो कोइ ओर तरीकेसे लताको गीरा देती..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) कौन..?

पुनम : (मुस्कुराते) वही जो उनकी कोखसे जन्म लेने वाली हे.. जो इस वक्त वहा अप्सरा ओर परीलोक की महारानी हे.. ओर वो इस घरतीपे आनेके लीये अपनी भुमीका बना रही हे..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) कौन..? सभीतो यहा धरतीपे जनम लेकर आचुकी हे.. ओर कौन बाकी हे..?

पुनम : (रहस्य मुस्कानसे) सभी आगइ हे लेकीन अ‍ेक नही आइ.. वोही.. हमारे राजाकी चहीती रानी.. उनकी बडी बहेन.. जो इस वक्त वहा सब सम्हालके बैठी हे.. हमारी नेनुदीदी..

सृती : (अपना सर पकडते) अरे हांआआआ.. यार सबके बारेमे सुन रही हु.. लेकीन उनकी ओर तो ध्यान ही नही गया.. कब आयेगी वो..?

पुनम : (मुस्कुराते) काफी टाइम हे उनके आनेमे.. बस.. आप लोगोने भले ही लताका ओपरेशन अच्छेसे करदीया हो.. लेकीन अब लता कही साल तक मां नही बनेगी.. इसके लीये हमारे लखन भैयाको मुनाभाइकी मददसे काफी महेनत करनी पडेगी.. तब जाके वो मां बनेगी.. बस.. ये बात सीर्फ हम चारोके बीच ही रहेनी चाहीये..

लखन : (मुस्कुराते) ओह.. अब समजा.. मतलब अब लताका इलाज इन दोनोके पास नही हे.. मुजे मुनासे आयुर्वेदकी मदद लेनी पडेगी..

पुनम : (मुस्कुराते) अ‍ेक्जेटली.. भाइ आपने बीलकुल सही सोचा..

भावीका : (मुस्कुराते) दीदी.. लेकीन अ‍ेक बात समजमे नही आइ.. इन दोनो भाइकी जीतनी बीवीयोकी डीलीवरी हुइ इनमे ज्यादातर लडकीया ही पैदा हुइ.. अ‍ेक दोको ही लडके पैदा हुअ‍े.. अ‍ैसा क्यु..?

पुनम : (मुस्कुराते) क्युकी हमारी दुनीया ही लडकीयोकी हे.. अप्सराये ओर परीया.. ओर लडके वो दोनो (नेनु ओर देवयानी) अपनी इच्छासे पैदा करती हे.. वोभी अपनी कोखसे.. क्युकी उनकी कोखसे जन्मा लडका इतना सक्षम होता हेकी वो अ‍ेक ही लडका कइ परीया ओर अप्सराओको सम्हालनेम सक्षम होता हे.. ओर उनसे ही हम अपना वंस ओर परीया अप्सराये पैदा करके आगे बढा सकती हे..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु..? ओर ज्यादा लडके होगे तो वंस भी जटसे ज्यादा बढेगानां..?

पुनम : (सामने देखते धीरेसे) हां बढेगा.. लेकीन यहा नही.. वहा.. हमारी उस दुनीयामे.. यहा धरतीपे हमारी दुनीया सयमीत रखनी हे.. यहा सबको पता हे हमे अ‍ेकही लडका सम्हालनेके लीये काफी हे.. जैसेकी पहेले हमारे बापु.. फीर बडे भैया.. ओर अब लखन.. फीर आगे जाकर हमारा विजय.. बाकी सब मोम बडी होजाये तब उनसे पुछ लेना.. हें..हें..हें..

उस साम भानु ओर सरला भी आगये.. ओर लताको ठीक देखकर राहतकी सास ली.. लखनने सबसे छुपकर सरलाको भानुकी ओर आंखसे इसारा कीया तो सरला सरमा गइ..उन्होने सबसे छुपकर लखनकी पीठमे मुका मारा.. इनके बाद लताको तीन दिन तक होस्पीटलमे रखा.. ओर बादमे उसे लखनके घरपे अ‍ेक महीने तक आराम करनेको कहा..

लताकी छुटीके बाद अ‍ेक दिन सबलोग लखनके घर रुके.. सामको नीलम कोलेजसे वापस आइ तो भानु सरला नीलमको देखकर दंग रेह गये.. क्युकी नीलमने बहुत ही मोर्डन ड्रेस पहेना हुआ था.. तो अ‍ेक पल भानु ओर सरला उनको नही पहेचान पाये.. तभी नीलम भानु सरलाको देखकर उनके गले लग गइ..

तो अ‍ैसे ड्रेसके लीये सरलाने थोडा नीलमको डांटा भी.. तो देवायत नीर्मला हसने लगे.. लताको नीचेके चंदा वाले रुममे रखा था.. उस रात खानेके बाद सरलाने उमरकी वजहसे मां बेटेके नीचे ही सोनेकी बातकी तो लखन सरलाकी ओर देखकर मुस्कुराने लगा.. तो सरला सबसे छुपकर बडी आंख करते लखनको नामे गरदन हीलाते रीक्वेस्ट करने लगी..

क्युकी सरला ओर भानुका राज पुनम लखनके सीवा कोइ नही जानते थे.. देवायत नीर्मला उपरके रुममे चले गये.. अब नीर्मला हमेसा देवायतके साथ ही रहेती ओर उनके साथ ही सोती.. पुनमभी गांवमे रहेनेकी वजहसे लखनको कम ही मीलती.. तो इस रात सृतीने नीलमको अपने साथ सोनेके लीये बुला लीया.. ओर लखन पुनमको अकेले सृतीने नीलमके रुममे भेज दीया..

रुममे जाते ही पुनम बेडपे बैठ गइ.. ओर बच्चीको अपनी गोदमे लेकर ब्लाउस उचा करते उसे दुध पीलाने लगी.. तबतक लखन भी चेन्ज करके आगया.. ओर पुनमसे सटकर उनको बाहोमे भीचता हे.. फीर उनके दोनो गाल ओर होठोको चुमकर पुनमकी गोदमे सर रखके मुस्कुराते पुनमके दुसरे बुब्सपे मुह लगाते दुध पीने लगा.. तो पुनम मुस्कुराते लखनके सरको भी सहेलाने लगी..
 
पुनम : (मुस्कुराते) अ..ले..ले.. मेला बे..बी.. भाइ.. बीलकुल मेरे छोटे बच्चे जैसे लग रहे हो.. अ‍ेकदम मासुम.. कास मेने पहेलेही आका चुनाव कीया होता.. तो आज हम दोनोका बच्चा होता..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. भुल जाइअ‍े सब.. देखीये आपके दुध काफी बडे हो गये हे.. आप कीतनी मस्त लग रही हो..

पुनम : (कातीलाना नजरोसे मुस्कुराते) भाइ.. कुछ आपकी महेनत.. ओर ये बच्ची आनेकी वजहसे.. सोरी.. कुछ जीम्वेवारीकी वजहसे मे ठीकसे अपना पत्नी धर्म नही नीभा रही हु.. मे आपको बहुत मीस कर रही हु..

लखन : (मुस्कुराते) दी.. जी छोटा मत करो.. मे आपसे आज भी इतना प्यार करता हु.. जीतना स्कुलके टाइम करता था.. आज भी मेरी पहेली चोइस आप हो.. आइ लव यु दीदी..

पुनम : (आंख गीली करते मुस्कुराते) लव यु टु भाइ.. मुजे आज भी आपकी फेन्टासी याद हे.. मेने आपको पती मानकर कभी प्यार नही कीया.. हमेसा मेरे भाइको ही प्यार कीया हे.. भाइ.. चलो आज फीरसे हमारे पहेले मीलनको याद करते हे.. उस दिन हम पुरी रात जागेथेनां..? हमारी सादी भी नही हुइ थी.. ओर मोमने हमारा पहेला मीलन करवाया था..

लखन : (मुस्कुराते) हां दीदी.. मे उस रातको कभी नही भुला.. हमारी मोम कीतनी प्यारी ओर समजदार थी..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. तो चलो आज फीरसे उस रातको दोहराते हे.. समजलो आज हमारा पहेला मीलन हे.. हमारी सुहागरात..

लखन : (होंठ चुमते) दीदी.. हम जब भी मीलते हे वो रात हमारी सुहागरात ही होती हे.. इसीलीये तो मे फटाफट सबको नीपटाकर आपके पास आजाता हु.. अब हमारी सृती भी आपकी तराह मुजे सम्हालती हे.. वो अब कीतनी समजदार होगइ हे.. आज भी उन्होने हमे अलग सोनेके लीये भेज दीया..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. अब वक्त आगया हे.. आप चंदाभाभीकी तराह भाइकी सभी बीवीयोको सम्हाललो.. बीना जीजकके.. कमीनी सबकी सब रेडी हे.. सीवाय नीर्मला आंटी.. उन्होने अब भाइको पुरी तराह सम्हाल लीया हे.. (बच्चीकी तरफ देखते) देखो.. बातो ही बातोमे येभी सो गइ.. मे इसे जुलेमे डालकर आती हु.. फीर आज हम पुरी रात प्यार करते खुब बाते करेगे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. मुजे आपको ओर कुछ भी बताना हे..

पुनम : (मुस्कुराते बचीको जुलेमे डालते) भाइ.. कुछ बतानेकी जरुरत नही.. मे सब जानती हु.. जो हो रहा हे होनेदो.. आपका आकर्सण ओर हथीयार ही इतना दमदार हेकी कोइ भी ओरत आसानीसे आपके नीचे लेटनेको तैयार होजायेगी.. मे ब्रीन्दा भाभी ओर सरलाकाकीके बारेमे भी सब जानती हु..

लखन : (सामने देखते) नही दीदी.. वो.. हमारी नीलु..

पुनम : (थोडी चीन्तासे) पता हे मुजे.. ये लडकी भीनां.. कीतनी लापरवाह हे.. भाइ.. अब वक्त दुर नही.. अब ये गलती दुबारा करे तब उसे अपने पती (धीरेन)के घर भेजदेना.. थोडा हंगामा होगा.. लेकीन भैया सबकुछ सम्हाल लेगे.. अब गांवमे भी सबकुछ सही चलने लगा हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. वो रजु ओर दया बहेनको भी मील चुका हु.. दोनो बहुत खुस हे..

पुनम : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. बस अब इसी तराह अपनी लाइफको अपनी बीवीओ ओर भाभीओके बीच रुटीन करदो.. ओर बाकी बची दुसरी भाभीओको भी सम्हाललो.. मे चाहती हुकी अब हमारे परीवारमे सेक्सको अ‍ेक रुटीन कार्यकी तराह लीया जाये.. क्या वो रश्मी भाभीकी सहेलीके भी अच्छे दिन चल रहे हेनां..? वो.. टीनादीदी..

लखन : (सरमाते) हां दीदी.. आपसे कुछ नही छीपा.. वोभी बहुत खुस हे.. आजतक वो अपने आपको बांज समज रही थी..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. धरती कभी बांज नही रहेती.. बस.. उनमे बीज बोनेवाला सही इन्सान होना चाहीये.. हम ओरतोका भी अ‍ैसाही हे.. अ‍ैसी कइ ओरते आयेगी.. बस.. आपको इसी तराह सबकी भावनाओका खयाल रखना हे.. समजलो अब आपका काम ही यही हे.. तभीतो हमारी घरकी इतनी ओरतोको सम्हाल पाओगे..

फीर बच्चीको सुलाकर पुनम लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनोके होठ मील गये.. दोनोकी आंखोमे ना कोइ वासना थी.. ओर नाही कोइ जल्दबाजी.. प्यार करते अ‍ेक के बाद अ‍ेक कपडे नीकलते गये.. आज लखन कुछ अलग ही जोसमे था.. ओर उपरसे पुनमका जोबन भी पहेलेसे काफी नीखर चुका था.. पुनम अ‍ेक अप्सराकी तरमह कयामत लग रही थी..

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कुछ देर फोर प्लेयके बाद पुरा कमरा पुनमकी हल्कीसी सीसकारीयोसे गुंजने लगा.. पीठके बल लेटे लखनका पुरा हथीयार पुनमने अपनी चुतमे नीगल लीया था.. ओर लखन होले होले कमर हीलाते पुनमको बडेही प्यारसे चोद रहा था.. पुनम भी आंधी आंख चडाते मदहोसीमे लखनका कमर हीलाते साथ दे रही थी..

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ठीक उसी वक्त नीचे देवायत भी नीर्मलाकी चुदाइ कर रहा था.. तब पुनमके अलावा कीसीको पता नही था.. की इस वक्त भानु भी वायग्रा खाकर अपनी मां सरलाके उपर सवार हो चुका था.. ओर उनकी जोरोसे कमर हीलाते चुदाइ कर रहा था.. जीनकी वजहसे सरला धीरेसे कामुक सीसकारीया करते भानुको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्सा रही थी..

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इस रात लखनने बीना नीचे उतरे पुनमकी चार बार चुदाइ करली.. चार बार चुदाइ करली कहेना बहुत ही आसान लगता हे.. लेकीन नोर्मल इन्शानके लीये ये पोसीबल नही हे.. इसीलीये तो मंजु ओर पुनमने मीलकर लखनको वो बाबाकी दी हुइ जडी बुटी पीलाइ थी.. जो लखनके लीये अ‍ेक साथ दस ओरतोको संतुस्ट करना पोसीबल था..

जबभी दोनो साथमे जडते दोनो अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भीच लेते.. फीर अ‍ैसे ही पडे रहेते दोनो बाते करते.. लखन पुनमको सबकुछ बता देता.. उनसे अ‍ेक भी बात नही छीपाता.. ओर पुनम भी उनको सजेसन देते गांवकी बाते करती.. पुनमने अब मंजुकी सब जीम्वेवारी अच्छी तराह सम्हाल लीथी..

बाते करते फीर दोनो उतेजीत होतेही सुरु होजाते.. अबतक पुनमने गांवकी सारी बाते लखनको बतादी.. ओर साथमे आगे भवीस्यकी बात भी बतादी.. ओर बातो ही बातोमे लखनने भावीका ओर उन वकील पंकजभाइ ओर उनकी पत्नी नयना ओर उनकी बेटी नेहाका जीक्र कीया.. जो नेहा भावीकाकी हम सकल थी..

तब पुनमने लखनको अ‍ेक रहस्य बताया.. जो आजतक कोइ नही जानता था.. सीवाय भावीकाके पापा.. ओर पंकजभाइकी बीवी नयना.. ओर ये बात भावीकाको ना बतानेकी सर्तपे लखनको कहा.. की नेहा भावीकाकी सौतेली बहेन हे.. दोनोका बाप अ‍ेक ही व्यक्ती हे.. भावीकाके पापा..

लखन : (होंठ चुमते) दीदी.. दोनोकी सकल अ‍ेक जैसी थी.. ओर जीस तराह नयना आंटीने बातको घुमाकर टाल दीया तो मुजे सकतो हुआ था.. लेकीन मे कुछ बोला नही..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. अच्छा हुआ आप कुछ नही बोले.. भावीकाकी मम्मीका उनके पापाके साथ अफैर हुआ उनसे पहेले ही वो अपने वकील दोस्तकी पत्नीके साथ रीलेशनमे थे.. इस बातका उनके दोस्तको भी कभी पता नही चला.. दोनो दोस्त थे तो घरपे बार बार मीलनेकी वजहसे दोनोकी आंख मील गइ.. ओर अपने दोस्तको बीजनेस टुरपे भेजते तब दोनो उनके घरपे ही मीलते.. ओर नतीजा वो भावीकाके पापासे प्रेगनेन्ट होगइ..

लखन : (सामने देखते) तो फीर भावीकाकी मम्मी..?

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ वोतो तब भी ओल रेडी उनके पापाकी पर्सनल सेके्रटरी बनकर उनकी जींदगीमे थी.. मतलब.. सेक्रेटरी कम.. ओर प्रेमीका ज्यादा.. दोनो अक्सर बीजनेस टुरपे साथ ही होते.. ओर अ‍ेकही कमरा अ‍ेकही बीस्तर साजा करते.. उनको नयना आंटीके बारेमे कभी पता नही चला.. फीर उसने भावीकाकी मम्मीसे सादी करली.. ठीक अ‍ेक साल बाद भावीकाका भी जन्म हुआ..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. आखरी बात.. वो श्रीधर.. अपनी सासके साथ भी रीलेशनमे हे.. ओर उनकी सास श्रीधरसे प्रेगनेन्ट भी हो गइ हे.. तो अब उनके पापाका क्या होगा..?

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ ओर क्या होगा..? ब्रीन्दा भाभीने अपना बदला लेलीया हे.. अपने पतीको नपुसक करके अपनी बडी बहेनको अपने ही बेटेसे रीलेशनमे फसाकर उनको प्रेगनेन्ट तक करवा दीया.. ब्रीन्दा आंटी सुरुसे ही दोनोके अफैरके बारेमे जानती थी.. ओर उन्होने जान बुजकर श्रीधर ओर वृन्दा आंटीको मीलने दीया.. ओर अपनी बहेनको अपनी ओर करलीया..

लखन : (सामने देखते) तो फीर अब उनके पापा..?

पुनम : (सामने देखते) भाइ.. वो जानते हेकी अब वो सेक्स करनेके काबील नही रहे.. जब उनको पता चलाकी वृन्दा आंटी भी प्रेगनेन्ट होगइ हे.. तो उनको वृन्दा आंटी ओर श्रीधर भैयापे सक हो गया हे.. श्रीधर भैयाको कहेना वो थोडी सावधानी बर्ते.. लेकीन वो वृन्दा आंटीसे डरते भी हे..

लखन : दीदी बात वो सककी नही हे.. जब उनको सचाइका पता चलेगा तो क्या होगा..?

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. जब उनको दोनो बहेनकी सचाइका पता चलेगा.. ओर अ‍ेक दिन अ‍ैसा भी आयेगा वृन्दा आंटी अपने नये पतीके सामने ही श्रीधरभैयाको लेकर बेडरुममे चली जायेगी.. ओर जीतु अंकल देखते रेह जायेगे वो घुटघुटके जलते रहेगे ओर वो दोनोको कुछ नही केह पायेगे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. वो ब्रीन्दा आंटी.. कही मेने श्रीधरको धोखा तो नही दीया..?

पुनम : (होंठ चुमते) नही भाइ.. आप गील्टी फील मत करो.. वो सब ब्रीन्दा भाभीकी इच्छा थी.. ओर आपको हर ओरतोकी इच्छाका सन्मान करना हे.. जब आप दोनो पहेली बार फीजीकल हुअ‍े तब ही वो आपसे प्रैगनेन्ेट होगइ थी.. भाइ.. ब्र्रीन्दा आंटी खुद आपका अंस चाहती थी.. उनके पेटमे आपहीका बच्चा पल रहा हे.. ओर ब्रीन्दा आंटी ये राजको राजही रखना चाहती हे..

देवायत ओर भानु दो राउन्ड लगाके सो चुके थे.. लेकीन इस रात पुनम ओर लखन अभी भी लगे हुअ‍े थे.. पुनमने लखनके हथीयारको अपनी चुतसे बहार नही नीकलने दीया.. मानो लखनसे चुदावानेकी अबतककी सारी कसर पुनम पुरी करना चाहती हो.. चार बार पुनमकी चुतको भरके बाथरुममे भी लखनने पुनको खडे खडे चोद लीया.. ओर देर रात दोनो अ‍ेक दुसरेसे नंगे ही चीपकके सो गये..

दुसरे दिन सबलोग देर सुबह तक सोते रहे.. पुनम पहेले ही जाग गइ थी.. ओर कंपलीट होकर अपनी बच्चीको दुध पीलाने लगी.. तबतक लखनभी जागकर नहाने चला गया.. फीर बहार आकर वोभी कंपलीट होगया.. तबतक पुनमने भी बच्चीको कंपलीट करदीया.. ओर वही लखनका इन्तजार करती रही..

जैसेही लखन कंपलीट हो गया पुनम लखनकी बाहोमे समा गइ.. दोनो ही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे काफी देर तक खडे रहे.. फीर पुनमने लखनके होठोपे होंठ रख दीया.. कुछ देर होंठ चुमते रहे तब अ‍ेक बार फीर पुनमने लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके सीनेपे सर छीपा लीया..

पुनम : (आंख गीली करते) भाइ.. आपके बीना जी नही लगता.. अ‍ैसा लगता हे मे आपसे कभी दुर ना रहु.. लेकीन मेरी मजबुरी भी हे.. सीर्फ कुछ दिन.. फीर तो ज्यादातर आप भी वहा रहोगे.. तब मे आपको खुब प्यार दुगी..

लखन : (पुनमका चहेरा थामते) आइ नो.. दीदी मुजे आपकी मजबुरीका पता हे.. कास सीर्फ हम दोनो ही पती पत्नी अकेले होते..

पुनम : (सामने देखते धीरेसे) भाइ.. अब सबकुछ सही हो गया हे.. बस.. अब भाइकी सभी बीवीयोको सम्हाललो.. फीर हमे विजय ओर हमारे बाकी बच्चोकी ओर देखना हे.. उनके भविस्यके लीये काम करना हे.. ओर जरुरत हुइ तो हम दोनो हमारा खुदका बच्चा भी पैदा करेगे..

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) ठीक हे दीदी.. अभी इनकी जरुरत नही हे.. वो हम आगे समय देखकर तैय करेगे.. आपने विजयके बारेमे काफी कुछ कहा हे.. अगर हमारी लडकी हइ तो मे नही चाहता वो हमारे विजयकी वासनाका सीकार होजाये..

पुनम : (मुस्कुराते) नही भाइ.. नीयतीको कोइ नही टाल सकता.. विजय जोभी कुछ करेगा वो सब हमारी नीयतीके हीसाबसे करेगा.. जैसे भैया ओर आपको कुछ जीम्वेवारी मीली हेतो विजयको भी कुछ जीम्वेवारी मीली होगी.. उनको आनेवाले वाले हमारे स्वामीके लीये रास्ता बनाना हे.. तब हम सभी ओरते ओर लडकीया उनके आधीन होगी.. अब चलीये सब हमारा इन्तजार करते होगे..

फीर कुछ देर ओर बाते करते दोनो नीचे आगये.. वहा सबलोग तैयार होकर लखन पुनमका ही इन्तजार कर रहे थे.. लताको कुछ दिन आराम करनेके लीये यही रुकना था.. फीर सुबह सब लोगोने चाइ नास्ता करने बैठ गये.. नीर्मला देवायतका अ‍ेक पतीकी हेसीयतसे पुरा खयाल रख रही थी.. तभी..
 
भावीका : (देवायतकी ओर देखते) भैया.. हमने मशीनरीका ओर्डर बहुत पहेले करदीया हे.. सायद अगले हप्ते सब मशीनरी आजायेगी.. तो आप ध्यानसे उतरवा लेना..

देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे.. लेकीन अ‍ैसेही थोडीना उतरेगी..? अगर तेरे नाम हेतो उनमे तेरी साइनभी चाहीये.. तुजेभी वहा आना पडेगा.. सायद हम अगले महीने होस्पीटल ओर हाइस्कुलका उद्घाटन कर पायेगे.. तो मे चाहता हु हमारे मुख्यमंत्रीके हाथो इतना उद्घाटन हो..

लखन : (मुस्कुराते) अरे वाह.. येतो बहुत बढीया होगा..

सृती : (मुस्कुराते) मशीने आयेगी तब हम सभी वहा आयेगे.. उद्घाटनके लीये कुछ प्लानभी सोचना पडेगा..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. आप लोग आइयेतो सही.. वो सब हम मेनेज करलेगे.. भैयाको ये सब कार्यक्रम सम्हालने दो.. हम वहा सबकुछ सम्हाल लेगे.. बस.. इनके बाद भावीकाको हमेसाके लीये वही रहेने आना पडेगा.. क्युकी अब अ‍ेक बार फीर हमे अपनी जीम्वेवारी तैय करनी हे.. ओर ये आखरी बार होगया.. फीर कोइ बदलाव नही..

नीर्मला : (मुस्कुराते) हां भैय तुजे सब पता चल जाता हे.. चलो अच्छा हे.. आखीर हम परीवारके सबलोग अच्छेसे सेट होगये हे.. अब हमारे बच्चोकी बारी..

सरला : (मुस्कुराते) हां.. हमारे भानुने भी गांवमे आकर अच्छा नीर्णय लीया.. अब हम भी आपके साथ रेह सकेगे.. (नीलमकी ओर देखते) नीलु बेटी.. पढाइके बाद तुमने क्या सोचा हे..? यही रहोगी की गांवमे..?

नीलम : (लखनकी ओर देखकर मुस्कुराते) दादी.. मेतो यही रहुगी.. बेंकमे जोब करुगी..

भानु : (हसते) मतलब हमे तेरे लीये लडका भी यही सहेरका ढुंढना पडेगा.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) भानु भैया आप नीलुकी चीन्ता मत करो.. इसे यही लडका मील जायेगा..

सरला : (मुस्कुराते) बेटी तुमतो सब जानती हो.. बतानां लडका कौन होगा..

पुनम : (सामने देखते) नही काकी.. मे ये नही बता सकती.. ये प्रकृतीके नीयमके खीलाफ हे.. मोमने मना कीया हे.. बस.. इतना केह सकती हु.. की नीलुकी जींदगीमे जोभी लडका होगा.. उसे आप सब लोगोको अ‍ेक्सेप्ट करना पडेगा.. कोइ हंगामा नही..

सरला : (नीलमकी ओर देखते) मतलब ये लडकी लव मेरेज करेगी.. देखना कही हमारी नाक मत कटवानां.. हें..हें..हें.. कोइ अच्छा लडका ढुंढना..

नीलम : (थोडी चीडते) क्या दादी.. आप अभीसे बातका बतंगड बना रही हो.. अ‍ैसा कुछभी नही होगा..

सरला : (राहतकी सांस लेते) तब तो ठीक हे बाबा.. देखना हमारी इजत रखना..

फीर सबलोगोने चाइ नास्ता करलीया.. ओर जानेकी तैयारी करने लगे.. आज पहेली बार सबके सामने पुनम खुलकर लखनके गले मीली.. फीर वो लताको मीलने चली गइ.. तो सरला भी सबको गले मीलकर आखीर लखनके गले लग गइ.. ओर लखनको थोडा ज्यादा भीच लीया.. फीर उनसे अलग होकर लखनको कहेने लगी..

सरला : (धीरेसे) लखन.. इस लडकीका थोडा खयाल रखना.. मुजे इनके चाल चलन कुछ ठीक नही लगते..

लखन : (मुस्कुराते) काकी इनकी चीन्ता मत करो.. अब नीलु पढी लीखी ओर बालीक हे.. इनका भला बुरा वो खुद सोच सकती हे.. जोभी होगा सब ठीक ही होगा.. फीर भी हम इनका खयाल रखेगे..

भानु : (मुस्कुराते) क्या मां.. तुम बेकारकी चीन्ता करती हो.. नीलु अब बडी ओर मेच्योर होगइ हे.. अब पहेले जैसा जमाना नही रहा की लडकीको हम बांधके रखे.. अगर लडका अच्छा हेतो हमे लव मेरीजमे भी कोइ प्रोबलेम नही हे..

नीलम : (हसते भानुके गले लगते) थेन्क्यु पापा.. दादीको समजाइअ‍े.. हें..हें..हें..

पुनम : (इसी दौरान लताके रुममे) लता.. अब कैसी हे तेरी तबीयत..?

लता : (मुस्कुराते धीरेसे) अब ठीक हु दीदी.. पहेलेसे बहेतर.. क्या आप लोग जा रहे हो..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. तुजे अ‍ेक महीना यही रहेना हे.. ताकी बार बार सृतीदीको दीखानेके लीये यहा आना ना पडे.. फीर हमेसाके लीये वहा गांवमे.. अब लखन भैयाभी वहा होगे..

लता : (सामने देखते) दीदी.. क्या मे आपको कुछ पुछ सकती हु..?

पुनम : (पास बैठते मुस्कुराते) पता हे मुजे.. की तु क्या पुछना चाहती हे.. फीर भी बोल..

लता : (सामने देखते धीरेसे) आपको ओर मोमको सब पता था तो फीर क्यु..? ये सब होना..था तो फीर बडे भैयासे क्यु सादी करवाइ..? अब तो लखन भी हम दोनोको बच्चा देनेमे सक्षम हेनां..?

पुनम : (सामने देखते) हां लता.. इस बारेमे पहेले भी हमारी बात हुइ हेनां..? फीर भी सुनना चाहती हे तो सुन.. सचाइ बहुत कडवी होती हे.. सुन पायेगी तु..?

लता : (नजरे चुराते) दीदी.. ये जींदगी भी कीतनी अजीब हे.. हमे जो चाहीये हमे हमारी मर्जीसे ओर सही समयपे कभी नही मीलता..

पुनम : (सामने देखते) तुजे क्या नही मीला..? सबकुछ तो मीला जो तुम चाहती थी.. हमे पता था लखन भैया भविस्यमे हमे बच्चा देनेमे सक्षम होगे.. तो क्या इनसे तेरी चाहत खतम होजाती..? नहीनां..? क्युकी तेरी पहेली चाहत लखन भैया नही.. हमेसा बडे भैया थे.. बोल.. क्या ये सच नही हे..?

लता : (नजरे जुकाते) हां हे.. लेकीन मे लखन भैयासे भी तो प्यार करती हु..

पुनम : (सामने देखते) नही लता.. लखन भैयासे तब प्यार हुआ.. जब तेरी सादी उनसे हुइ ओर उनको जडीबुटी पीलाइ.. इनसे पहेले तुमने जवानीके देहलीजपे कदम रखा तब तेरी चाहत हमेसा बडे भैया थे.. ओर इनके साथ फीजीकल रीलेशनमे आनेकी तुमने बहुत कोसीस भी कीथी.. येतो बडे भैयाने मना करदीया.. तब मजबुरीमे तुमने लखन भैयाको चुना.. ताकी तुम बडे भैयासे नजदीक रेह सके.. ओर उनको रीजाकर उनके साथ फीजीकल रीलेशन बना सके.. क्या ये सच नही हे..?

लता : (आंसु बहाते) हां हे.. दीदी तब मे नादान थी.. अच्छा बुरेका खयाल नही था.. मे बडे भैयाके साथ रेह सकु इसीलीये मेने लखन भैयासे सादी की.. ताकी मे उस घरपे रहेकर बडे भैयाको रीजा सकु.. क्युकी जबभी बडे भैया माको मीलने आते थे तब मे उन दोनोको छुपछुपके देखती थी.. ओर मुजे बडे भैयाका वो बहुत भा गया था.. ओर मे तबसे उनके साथ सारीरीक रीलेशन बनानेके लीये बेताब थी.. ओर मे ये सब लखन भैयासे सादीके बाद भी करना चाहती थी..

पुनम : (मुस्कुराते) यही तो तेरे सवालका जवाब हे.. तभीतो मंजुमोमने तेरी यही भावनाका तो खयाल रखा.. ओर जो तु चाहती थी वो होगया.. बडे भैयासे तुम्हारा सारीरीक संबध होगया.. ओर उन्होने तुजे प्रेगनेन्ट तक करदीया.. तो इसमे गलत कहा हुआ..? यही तो तुम चाहती थी..

लता : (नजरे जुकाते धीरेसे) लेकीन दीदी.. मे लखन भैयाको भी तो चाहती हु..

पुनम : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. इसीलीये तो अब लखन भैया तुजे अच्छे लगने लगे.. क्युकी तुम उनको भी प्यार करने लगी हो.. ओर अब मोमके जानेके बाद बडे भैयाभी उनकी कीसीभी बीवीको नही मीलते.. ओर तुम इस सुखसे वंचीत होगइ.. इसीलीये अब तुजे लखन भैया चाहीये.. अच्छा हुआ मोमने रीस्तोमे बदलाव कीया.. वरना तेरा क्या होता..?

लता : (आंसु बहाते) सोरी दीदी.. आजके बाद इस बातकी चर्चा कभी नही करुगी.. मुजे सब बाते समजमे आगइ.. आइ अ‍ेम सोरी..

पुनम : (मुस्कुराते गालको सहेलाते) सोरी मत बोल.. बस.. मेरा काम ही परीवारको सम्हालना हे.. अभी तो तु सीर्फ दो मर्दोसे ही वीचलीत होगइ.. तब क्या होगा जब हमारा विजय भी बडा होकर हम सबको भोगेगा.. उनके बाद तो वो स्वयंम.. हमारे विजयका बेटा..

जो मंजुमोमकी कोखसे पैदा होगा.. तब भी हम सब अ‍ैसे ही जवान होगी.. ओर हम सबका इनके साथ फीजीकल रीलेशन होगा.. हमे वोही अनुभुती करवायेगा.. जो उस जमानेमे मोमके साथ ओर अपनी बहेनोके साथ संभोग करते सबको संभोगकी अनुभुती करवाता था..

लता : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. मे उस पलका बडी बेसब्रीसे इन्तजार कर रही हु.. मोमनेभी मुजे ये बात बताइ थी.. कब आयेगा वो..?

पुनम : (हसते धीरेसे) बडी जल्दी हे तुजे..? अभी मोमको तो बडी होने दे.. अभी अभी उनका जन्म हुआ हे.. लेकीन इनसे पहेले हम सबको हमारे विजसे नीपटना होगा.. वोभी कुछ कम नही होगा.. तब हम सब लखन भैयाको भी भुल जायेगी ओर विजयके पीछे पागल होगी..

लता : (सरमाकर हसते) ओह गोड.. हमे क्या क्या जेलना पडेगा.. ठीक हे दीदी.. आइ अ‍ेम फाइन.. मे ठीक होकर जल्द ही वहा आजाउगी..

पुनम : (खडी होते हसते) हां आजाना.. क्युकी अब ढाइ तीन महीने तो तु लखन भैयासे भी हाथ नही लगा पायेगी.. बस.. दोनो उपर उपरसे ही मजे करना.. चलो मे चलती हु.. तु अपना खयाल रखना बाय..

लता : (मुस्कुराते) बाय दीदी..

फीर भानु सरला ओर देवायत नीर्मला पुनम गांवकी ओर नीकल गये.. सृती भावीका भी लताको चेक करके लखनके होठोपे कीस करके अपनी क्लीनीकपे चली गइ.. राधीका लताकी देखभालके लीये घरपे ही रुक गइ.. अब उनकाभी पेट काफी बढ गया था.. ओर लखन नीलमको लेकर कोलेज छोडने चला गया.. सबकी लाइफ अ‍ैसेही चलने लगी..

अ‍ैसे ही अ‍ेक महीना बीत गया.. लता अब काफी ठीक हो गइ थी.. लखन ओर राधीका उनका हर दीन खयाल रखते.. वो अक्सर लता ओर राधीकाके होंठ चुम लेता.. ओर तीनो मस्ती मजाक करते रहेते.. लखन राधीकाको दिनमे ही नीपटा लेता.. ताकी राधीका रातमे लताके साथ उनका खयाल रखनेके लीये सो सके.. अ‍ेक बारतो लखनने लताके सामने ही राधीकाको दिनमे चोद लीया..

तब राधीका सर्मसार होते हसते हुअ‍े चुदवानेके बाद लखनको मारनेके लीये दोडी.. ओर लता जोरोसे हसने लगी.. ओर यही कीस्सा लताने रातके खानेपे सृती ओर भावीकाको बताया तो दोनो खुब ठहाका मारते हसने लगी.. ओर राधीका सर्मसार होते लखनकी पीठमे मुका मारती हे.. ओर अ‍ेक बार फीर सबलोग हसने लगे..

अ‍ैसेही मस्ती मजाक करते दिन बीतने लगे.. अब नीलम भी काफी बेहतर होगइ थी.. अब वो फीरसे अक्सर लखनको ललचाइ नजरोसे देख रही थी.. ओर अ‍ेक दिन लखन उनको कोलेज छोडने गया तो उनके साथ छेडछाड करने लगी.. फीर सामको जब सृती भावीका आइ तो सृती फ्रेस होकर कीचनमे चली गइ..

वहा सृतीको अकेली देखकर वोभी मदद करनेके बहाने कीचनमे चली गइ.. ओर मौका मीलते ही उन्होने धीरेसे हीमत करते सृतीको केह दीया.. की वो अब ठीक होगइ हे.. ओर लखनसे अब सारीरीक सुख चाहती हे.. जीसे सुनकर सृती हसने लगी.. फीर उसने लताके घरपे होनेकी बात कही..

सृती : (धीरेसे) नीलु.. क्या तेरी बुआ.. मीन्स लताको सब पता हे..? की तेरी धिरेनसे कोर्ट मेरीज हुइ हे.. ओर धिरेनके साथ साथ तेरा लखनके साथ भी फीजीकल रीलेशन हे..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) नही दीदी.. उनको धिरेनके बारेमे कुछ नही पता.. सीर्फ लखन जीजुके बारेमे ही पता हे.. जब वो बडे जीजुके साथ सादी करके वहा चली गइथी.. तब अ‍ेक बार मेने उसे लखन जीजुके बारेमे बतादीया था.. की मेरा लखन जीजुके साथ फीजीकल रीलेशन हे.. उनको हमारे बारेमे सब पता हे.. इन्फेक्ट लखन जीजुका मम्मीके साथ फीजीकल रीस्ता हे वोभी उनको पता हे..

सृती : (कातील मुस्कानसे) ठीक हे.. मतलब अभी धिरेनकी बात हमे छुपानी हे.. तेरी लता बुआ काफी मेच्योर ओर समजदार होगइ हे.. वो ओर राधीका दीदी तो नीचे होगी.. तो आज देर रात तु आजाना.. मे तुजे आइपील दुगी.. कलही लाइ हु.. फीर भी मे कोइ रीस्क लेना नही चाहती.. तेरे जीजुको कहेना कोन्डम युज करे.. ओर मेभी उसे केह दुगी..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी कोन्डम रहेने दीजीयेनां.. नइ आइपीलतो हे.. हम दोनोको ही कोन्डम युज करना अच्छा नही लगता..

सृती : (हसते नीलमकी पीठमे मुका जडते धीरेसे) बडी कमीनी हो तुम.. तुभी रमा भाभीकी तराह बडी वाली चुदकड होगइ हे.. इसीलीये तो सब पेट फुलाकर घुम रही हे.. तुजे पता हेना तुजे धिरेनके साथ रहेना हे..?

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. इनसे पहेले सादीतो मेने लखन भैयासे कीहे.. फीर भी मे खयाल रखुगी.. क्युकी धिरेनके साथ रहेना मेरी मजबुरी हे.. वो सब बाते तो आपको भी पता हे..

सृती : (मुस्कुराते) हंम.. आइ नो मुजे सब पता हे.. ठीक हे रातको देरसे आजाना.. मे तुम दोनोका मीलन करवा दुगी.. मजे कर.. हें..हें..हें..

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इस रात लखनने सृती ओर भावीकाकी धमाकेदार चुदाइ करली.. तब दरवाजा धीरेसे खुला.. ओर नीलम सरमाते मुस्कुराते हुअ‍े अंदर आगइ.. ओर अंदर आतेही धीरेसे दरवाजा लोक करदीया.. इस रात लखनने बीना नीचे उतरे नीलमको तीन बार चोद लीया.. तब सृतीने उसे आइपील खीलादी.. ओर नीलम अपने कमरेमे चली गइ..
 
अ‍ेक दिन गांवमे पंचायतकी ओफीसमे अ‍ेक लेटर आया.. गांवका स्कुलतो शीक्षण समीतीके अंडरमे था.. लेकीन होस्पीटलके लीये सीर्फ जमीन ओर कुछ पेसे ही सरकारकी ओर मीले थे.. बाकीका खर्चा देवायतकी ओरसे ओर सभी मशीनरी भावीकाकी ओरसे डोनेटमे मीली थी..

तो सरकारने होस्पीटलके लीये अ‍ेक अ‍ेन जी ओका रजीस्ट्रेशन करवानेका सुजाव दीया था.. ताकी उन अ‍ेन जी ओके माध्यामसे होस्पीटलके लीये सरकारकी ओरसे ग्रांट मीलती रहे.. ओर अ‍ेन जी ओ ही इस होस्पीटलका वहीवट करे.. उन अ‍ेन जी ओमे पुनमने वसुधा.. भावीका.. लखन.. नीशा.. ओर चारुका नाम सजेश कीया..

ओर इसी बीच जीतने भी लोगोने आवेदन कीया था इन सबको घरपे लेटर आगया.. लनके आजुबाजुके कुछ गांवके लडके लडकीया तो कुछ सहेरसे आवेदन आया था.. ओर इनमे कइ युवा युवतीया इस गांवकी भी थी.. ज्यादातर आवेदन स्कुलके सीक्षीकके लीये तो बहुत सारे नर्सींग स्टाफके लीये भीथा..

जीनमे मुनाकी मामी गीताके अलावा जागृती ओर जयश्रीके साथ गांवकी ओर लडकीया भी सामील थी.. जीनकी सीफारीस देवायत ओर लखनने पहेलेसे ही करदी थी.. ओर मुना बरखाके अलावा आरती ओर भावीकाकी दो ओर नर्सको भी होस्पीटलके लीये आवेदन दीया था.. जीनमे नर्सींगके लीये सहेर ओर दुसरे गांवकी बहुत सारी लडकीया सामील थी..

इनमे जीनकी नीयुक्ती हुइ थी इन सबके घरपे लेटर आ गया.. ओर इनमे लीखा थाकी उद्घाटनके दिन सबको मुख्यमंत्रीके हाथसे नीयुक्ती पत्र दीया जायेगा.. तो सभी बहुत ही उत्साहीत थे.. खास करके गीता ओर उनका पती.. जो सरकारी नोकरीमे सीलेक्शनकी वजहसे बार बार मुना ओर लखनका आभार जता रहे थे..

ओर गीताने तो उत्साहमे आकर अ‍ेक दिन मुनाको भी घरपे बुला लीया.. जब उनका पती बहारगांव था.. उस दिन गीताने मुनाके साथ फीजीकल होते खुब सेलीब्रेट कीया.. ओर अपने पेटमे मुनाका बच्चा होनेके बावजुद भी गीताने मुनाको खुस करदीया.. सभी आवेदनकर्ता सक्ुल होस्पीलसे संपर्क करने लगे..

अ‍ेक दिन दो बडे ट्रक गांवमे आगये.. उनमे छोटे बडे मशीन भरे हुअ‍े थे.. ओर सबकुछ भावीकाके नाम था.. तो पुनमका फोन आते ही लखनको भावीकाको लेकर गांव जाना पडा.. तो भावीकाके साथ घरके सबलोग गांव जानेके लीये तैयार होगये.. वहा जाकर भावीकाने साइन करदी.. ओर मजदुरोने सभी मशीन ध्यानसे ट्रकसे उतारा ओर नइ होस्पीटलमे रख दीया..

गांवके सभी लोग देखनेके लीये इकठा होगये.. सबलोग बहुत खुस दिख रहे थे.. ओर खुसभी क्युना हो.. आखीर इतने छोटे गांवमे इतनी बडी होस्पीटल जो बन गइ थी.. ओर साथमे बडी हाइस्कुल भी.. जो अब सीर्फ कोलेजके लीये ही सहेर पढने जाना था.. उनका भी काफी सामान आ चुका था..

बस अब देर थी तो सीर्फ इनके उद्घाटनकी.. फीर ट्रक वालेको वीदा करके सबलोग हवेलीपे आ गये.. आज देवायतकी सभी बीवीया ओर वसुधा भी थी.. लखनको देखते ही पुनम दोडकर उनके गले लग गइ.. तो सबलोग हसने लगे.. फीर सबलोग होलमे आकर बैठ गये.. तब देवायतने सबको बतायाकी अ‍ेक महीनेके बाद मुख्यमंत्रीकी डेट मील गइ हे..

तो सबने खुसीसे तालीया बजाइ.. फीर सबलोग मीलकर उद्घाटनकी आगेकी योजना बनाने लगे.. मुख्यमंत्रीका आना मतलब पंडालमे बहुत बडी संख्यामे लोग होना चाहीये.. ओर ये देवायतके लीये कोइ मुस्कील काम नही था.. क्युकी आजु बाजुके असी (८०) गांवमे कोइ बडी होस्पीटल या हाइस्कुल नही था.. ओर सबलोग इस बातपे बहुत उत्साहीत थे..

लखनके जीम्मे कुछ जीम्वेवारी आगइ.. उद्घाटनके नीमंत्रण कार्ड.. पंडाल.. सबके भोजनकी व्यवस्था.. सबकुछ लखन ओर उनके दोस्तोको सम्हालना था.. होस्पीटलकी अंदरुनी व्यवस्था सृती भावीका ओर वसुधाने सम्हाल ली.. तो हाइस्कुलकी व्यवस्था वंदना जागृती जयश्री ओर बनवारीलालकी बहु बिन्दीयाने सम्हालली..

देवायतके गांव ओर आजु बाजुके बहुत सारे गांवकी लडकीया ओर ओर कुछ ओरतोने नोकरीके लीये आवेदन कीया था.. इनमे मुना बरखा ओर गीताके अलावा जयश्री जागुती बनवारीलालकी बहु बीन्दीया के साथ नीशाभी सामील थी.. ओर देवायतने इन सभीकी वीसेस सीफारीस भी कीथी..

फीर देर रात लखन सृती राधीका भावीका ओर नीलमको लेकर वापस सहेर आगया.. लता अब ठीक होगइ थी तो पुनमने उसे वही रोक लीया.. इस रात सबलोग बहुत ही उत्साहीत थे.. तो जाहीर हे सबने मीलकर अ‍ेक साथ बेडपे तबाही मचाकर सेलीब्रेट भी कीया.. जीनमे आज लखनने सृती ओर भावीकाकी हालत खराब करदी..

दुसरे दिन सबलोग अपनी जीम्वेवारीके हीसाबसे कामपे लग गये.. चारु ओर रश्मीने वोट्सअ‍ेपपे लखनको नीमंत्रण कार्डका ड्राफ भी भेज दीया.. इनमे दो तीन सुधारके बाद फाइनल करदीया गया.. कार्डकी पसंदगी करनी थी.. तो इसी बहाने रश्मी ओर चारुने मजाकमे लखनके साथ खेला करदीया..

रश्मीने कार्ड देखकर पसंद करनेकी जीदकी.. ओर लखनको कहाकी कार्डका आल्बम लेकर गांव आये ओर उसे दीखाये.. तो लखन सुबह सुबह ही कार्डका आल्बम लेकर गांव चला गया.. ओर सीधे पंचायतकी ओफीमे चला गया जहा रश्मी ओर चारु बैठती थी.. वहा जाकर देखा तो दोनो ही नही थी.. वहा सीर्फ वंदना बैठी थी..

वंदना : (जैसेही लखन आया सरमाकर मुस्कुराते) अरे लखन भैया.. आप..? सुबह सुबह..?

लखन : (थोडे गुस्सेमे) भाभी.. कहा गइ आपकी वो दोनो कमीनी सौतने..? कल तो मेरा दिमाग खराब ही करदीया.. कार्डकी इनती डीजाइन मोबाइलपे भेजी फीर भी कहेती हे रुबरु आल्बम लेकर आओ.. कहा मर गइ दोनो..

वंदना : (जोरोसे हसते) अरे गुस्सातो मत करो.. दोनो अभी घरपे ही हे.. सायद कुछ कामकी वजहसे आज दोनो नही आयेगी.. कहेती थी घरपे ही रहेगी.. क्या चाइ पीओगे..?

लखन : (मुस्कुराते वही बैठते) नही भाभी.. घरपे चाइ नास्ता करके ही आया हु.. कहो.. कैसीहे आपकी ओर मेरी भतीजीकी तबीयत..?

वंदना : (सरमाकर मुस्कुराते) मेभी ठीक हु ओर बच्ची भी ठीक हे.. लखन भैया.. हम ओल मोस्ट हम उम्र ही हे.. तो मुजे नामसे बुलाओगे तोभी चलेगा.. क्युकी मे पुनोदी ओर आप साथमे ही पढे हे.. हें..हें..हें..

लखन : (सरारती मुस्कानसे) क्यु..? भाभीमे क्या प्रोबलेम हे..? ओर कीतना अच्छा लगता हे जब कोइ साथमे पढती लडकी मेरी भाभी हो.. फीर पताहेनां मंजु मोमने हमारे परीवारके लीये कुछ नीयम बनाये हे.. कही आप मुजे दोस्त बनाकर मुजसे दुर करनातो नही चाहती..? गभराइअ‍े नही अ‍ैसा कुछ नही होगा..

वंदना : (सर्मसार होते धीरेसे मुस्कुराते) अरे नही नही.. आप गलत समज रहे हे.. मीन्स.. मेतो अ‍ैसेही केह रही थी.. ठीक हे आप कुछभी मानीये.. मे आपकी भाभी ही ठीक हु..

लखन : (सरारती मुस्कानसे) तो फीर मे इसका मतलब क्या समजु..?

वंदना : (सर्मसार होते कातील नजरोसे फुसफुसाते) क्या मतलब..? मीन्स.. जाओ मुजे नही पता.. आप अभी भी इतने ही सरारती हो.. (कातीलाना नजरोसे मुस्कुराते धीरेसे) क्या हमारे परीवारकी सर्तोका हमारे रीस्तोमे कोइ मायना हे..?

लखन : (मुस्कुराते) पता नही भाभी आपकी सोच क्या हे.. वो सब आपके नीर्णय ओर आपकी सोचपे डीपेन्ड करता हे.. बस.. मुजे अभी इतना पता हे मुजे मेरी सभी बीवीयो ओर भाभीओको सम्हालनेका हुकुम मीला हे..

वंदना : (सरमाकर मुस्कुराते) मेभी तो आपकी भाभी हु.. ठीक हे मे दोस्तीके साथ साथ आपकी भाभीका फर्ज नीभाउगी.. क्युकी अब बडे भैयासे तो कइ उमीद नही हे.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे..

लखन : (खडा होते) ठीक हे वंदु.. हम दोनो फुरसतमे मीलेगे.. अभी तो इन दोनो भाभीओको नीपटालु..

कहेते लखन खडा होगया.. इस वक्त पंचायतकी ओफीसमे सीर्फ लखन ओर वंदनाही थे.. तभी लखनने कुछ अ‍ैसा कीया जीसे वंदना सर्मसार होगइ.. इनके तनसे अ‍ेक बीजलीकी लहेर दोड गइ.. क्युकी लखनने अचानक वंदनाके पास जाकर उनके होठ चुम लीये.. तो वंदना सर्मसार होते दुसरी ओर मुह करते मंद मंद मुस्कुराने लगी.. फीर लखनकी ओर कातील नजरोसे देखते धीरेसे फुसफुसाइ..

वंदना : (फुसफुसाते) लखन.. आइ लव यु.. मे आपका इन्तजार करुगी.. मुजे मंजुमोमकी सभी बाते मंजुर हे..

वंदनाकी सहेमती मीलते ही लखन मुस्कुराते वहासे चला गया.. ओर सीधा रश्मीके घर चला गया.. वहा देखा तो रश्मी ओर चारु लखनका इन्तजार करते वही गपसप कर रही थी.. जैसेही लखन आया दोनो उनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराने लगी.. ओर आकर अ‍ेक अ‍ेक करते लखनके गले लग गइ..

लखन : (मुस्कुराते गले मीलते) दोनोकी दोनो भाभीया बहुत ही कमीनी हो.. आप मोबाइलसे भी कार्ड सीलेक्ट कर सकती थी.. मुजे यहा क्यु बुलाया..?

रश्मी : (हसते) अरे.. अभी आपने हम दोनोका कमीनेपन देखा ही कहा हे.. आइअ‍े बैठीये..

लखन : (सोफेपे बैठते) अगर नही देखा हेतो आज इसेभी दीखादो.. मेभी तो देखु दोनो कीतना कमीनापन दीखाती हो..

चारु : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) इसीलीये तो हमारा कमीनेपन दीखाने आज आपको यहा बुलाया हे.. हम देखती हे की मंजुदीदीने जो बात कही हे वो सीर्फ बाते ही हेकी इनपे आप अमल भी करते हो..?

लखन : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) आर यु स्योर..? देखना कही दोनोकी हालत ना बीगड जाये..

रश्मी : (सरमाकर मुस्कुराते लखनका हथीयार पेन्टके उपरसेही पकडते) बीगडने दो.. इसीलीये हम दोनो छुटी लेकर घरपे हे.. आज अपना जलवा दीखा ही दो.. देखते हे इनमे कीतना दम हे.. दोपहर तक इस घरसे बहार नीकलनेका मौका नही मीलेगा..

फीर रश्मीने लखनको पानी ओर चाइ पीलाइ.. ओर तीनोने मीलकर अ‍ेक कार्ड सीलेक्ट कीया.. जब कार्ड सीलेक्ट हो गया तो रशीने घरका दरवाजा अच्छेसे बंध करदीया.. तो लखन सबकुछ समज गया.. तभी चारु खडी होजाती हे ओर लखनका हाथ पकडकर उसे बेडरुममे ले गइ.. ओर पीछे पीछे रश्मीभी हसती हुइ आगइ..

लखनको लगा आजतो दोनो लगभग उनका बलात्कार ही करदेगी.. दोनोने देवायतके हथीयारको जेला था.. इसीलीये दोनो लखनको बहुतही हल्केमे ले रही थी.. लेकीन दोनोको नही पताथाकी लखन क्या चीज हे.. अंदर जातेही कमरा बंध करके दोनो फटाफट अपने कपडे नीकालने लगी.. तब चारुने नंगा होते ही लखनको अपने उपर खीच ही लीया..

तो कुछही देरके बाद कमरेसे अ‍ेक जोरोकी चीख सुनाइदी.. जो कमरा बंध होनेकी वजहसे बहार तक नही सुनाइदी.. चारु जोरोसे बेडपे पैर पटकते लखनसे छुटनेकी कोसीस करते आंसु बहा रही थी.. जीसे देखकर अ‍ेकपल तो रश्मी भी डर गइ.. क्युकी लखनका हथीयार ही इतना बडा दमदार ओर मोटा था जीसे देखकर अ‍ेकपल तो दोनोके पसीने छुट गये थे..

दोनोने लखनको बहुत ही हल्केमे लीया था.. इस वकत रश्मी भी अपने सभी कपडे नीकालकर बेडपे चारुके बगलमे लेटी हुइ अपनी चुतको सहेला रही थी.. ओर लखन जोरोसे कमर हीलाते चारुको चोद रहा था.. उसने आदतके अनुसार बीना लंड बहार नीकाले चारुको दो बार चोद लीया.. ओर चारुकी हालत खराब करदी..

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ओर ना जाने इसी बीच चारु कीतनी बार जडी होगी.. वो हर बार जडती तो लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती.. ओर अपनी कमरको आडी टेडी करते जटकने लगती.. लखनने चारुकी चुतको दो बार भरके हरी भरी करदी.. फीर रश्मी लखनके लीये बादाम वाला दुध लेकर आइ.. ओर तीनोने दुध पीकर कुछ देर आराम कीया..

फीर रश्मीकी बारी आइ.. तो वो लखनके लंडको बडी मुस्कीलसे जेल गइ.. उनकी आंखसे सीर्फ आंसुही नीकले.. फीर दोनोके बीच धमासान चुदाइ होने लगी.. चारुकी तराह लखनने रश्मीको भी दो बार चोद लीया.. फीर तीनो साथमे सावर लेने चले गये.. तो वहा भी लखनने अ‍ेक बार फीर चारुको खडे खडे चोद लीया..

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आखीर चारु ओर रश्मी लखनसे चुद ही गइ.. जीसकी चोजन दोनो कही दीनोसे बना रही थी.. लखनसे चुदवाकर दोनोही लखनकी दिवानी होगइ.. ओर दुसरी बार कब मीलेगे इनकी योजना बनाने लगी.. ओर चारुने लखनको येभी बतादीया की नीशा ओर वंदना भी इनसे चुदवानेके लीये इनका इन्तजार कर रही हे..
 
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