Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 101 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

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फीर दोनोने साथमे सावर लीया.. तो श्रीधरने वहा भी वृन्दाके मना करनेके बावजुद उनको फीरसे खडे खडे चोद लीया.. ओर वृन्दाको पुरी तराह संतुस्ट करदीया.. फीर दोनो बहार आकर कंपलीट हो गये.. वृन्दाकी चालमे कुछ खास फर्क नही पडा.. बस.. वो धीरे धीरे चल रही थी.. फीर दोनो बच्चेके कपडे लेकर घरको ताला लगाकर नीकल गये.. तो रास्तेमे..

वृन्दा : (मुस्कुराते) श्रीधर.. आज तुमने मेरा दील जीत लीया.. समजले आजसे बेटीके साथ तेरी सास भी तेरी होगइ.. अ‍ेक बार जयश्री तुम्हारे घर आजाये.. फीर यहा कोइ डर नही.. तुम जब भी मेरे घर आना चाहो आ सकते हो.. लेकीन दीनमे.. दोपहोरके वक्त.. तब दोनो भाइ अपने धंधेपे होते हे..

श्रीधर : (मुस्कुराते) ठीक हे.. आजाउगा..

वृन्दा : (मुस्कुराते) क्या सचमे लोग अपनी मांसे सादीया कर रहे हे..?

श्रीधर : (मुस्कुराते) हां.. लेकीन वीधवा ओर त्यक्ता होनेके बाद..

वृन्दा : (मुस्कुराते कामुक नजरोसे) तो फीर तेरी मां भीतो त्यक्ता हे.. तु क्यु उनसे सादी नही करलेता..

श्रीधर : आप पागल होगइ हो क्या..? वो मेरी मां हे.. मे कैसे..? (मनमे) अब आपसे कैसे कहु.. वो भी तेरी बेटीकी सौतन होगइ हे..

वृन्दा : (मुस्कुराते) क्यु.. अभी अभी तो तुमने कहा.. की तेरे दोस्तने उनकी मांसे सादी करली.. तो क्या दीकत हे..? कमीनी अभीभी पटाका लग रही हे.. सीर्फ मजेही तो करने हे..

श्रीधर : (सामने देखते) तो फीर आपको बुरा नही लगेगा..? सोचलो आपकी बेटी मेरी बीवी हे..

वृन्दा : (मुस्कुराते) इसमे बुरा लगनेकी क्या बात हे..? कीतना दमदार हथीयार हे तेरा.. अ‍ेक को क्या तु चार चार ओरतोको सम्हाल सकता हे.. अभी अभी बीवीकी मांको तो तीन तीन बार चोद लीया.. तब तो तुजे बुरा नही लगा.. मेभी तो तेरी सासके साथ बडी मम्मी ओर मौसी भी हु.. जब मुजे चोदलीया तो तेरी मांको चोदनेमे क्या दीकत हे..? मुजसे तो काफी जवान ओर खुबृसुरत भी हे.. अ‍ेक बार सोचले..

श्रीधर : (मुस्कुराते) मौसी.. पता नही था आप इतने खुले सोच वाली होगी.. तो फीर आपकी बेटीकी सादीसे क्यु नाराज थी..?

वृन्दा : (मुस्कुराते) तुजे तो सब पता हे फीर भी बतादु.. जयश्री मेरी ओर तेरे पापाकी ओलाद हे.. ओर इस नाते तुम दोनो सगे भाइ बहेन हो.. इसीलीये मे मना कर रही थी.. अब गांवमे ही सगे भाइ बहेन सादी कर रहे हे तो फीर मुजे क्या अ‍ेतराज हे..? इसीलीये मेने सबकुछ अ‍ेक्सेप्ट करलीया..

श्रीधर : (मुस्कुराते) तो फीर आपका ओर पापाका अफैर कब सुरु हुआ..?

वृन्दा : (मुस्कुराते) चल आज तुजे ये राज भी बता देती हु.. लेकीन याद रखना.. ये बात कीसीको मत कहेना.. ना तेरी मांको.. ना जीतुको ओर नाही तेरी बीवीको.. आज मेरा दील तुजपे आगया इसीलीये तुजे बता रही हु..

श्रीधर : (मुस्कुराते) आइ प्रोमीस.. कीसीको नही बताउगा.. क्या आप आइसक्रीम खाओगी..?

वृन्दा : (मुस्कुराते) हां लेले.. देख आइसक्रीम पार्लर इधर ही हे.. आज हम दोनोके नये रीस्तेकी सुरुआत हुइ हे.. तो कुछ मीठा तो बनता ही हे.. चल तुजे वहा आरामसे बैठकर बताती हु..

श्रीधर : (दोनो अंदर जाकर बैठते हे तब आइसक्रीमका ओर्डर देनेके बाद) हां तो सासुमा.. अब बताइअ‍े..

वृन्दा : (सरमाकर मुस्कुराते) क्या बताउ..? सुन.. मेने जवानीके देहलीजपे कदम रखा तबसे ही मे अ‍ैसी हु.. बहुत ही कामुक.. चुदकड.. मतलब तबसे ही मुजे चुदाइकी लत लग चुकीथी.. मेने घरमे ही अपनी चुदाइका जुगाड करलीया था.. मेरा छोटा भाइ.. उन्होने मुजे खुब चौदा हे.. दोनोका रुम अ‍ेक ही था तो कीसीको सक भी नही हुआ..

श्रीधर : (मुस्कुराते) लेकीन मैने सुनाहे आप मायके बहुत ही कम जाती थी..?

वृन्दा : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. इसी वजहसे.. अ‍ेक दीन मेरी माने हम दोनोको चुदाइ करते पकडलीया.. मुजे खुब मारा.. ओर भाइको भी बहुत डाट पडी.. फीर आनन फाननमे मेरी सादी करवादी.. तुम्हारे बडे पापासे.. हम दोनोकी उमरमे काफी फर्क हे.. वो मुजसे दस साल बडे हे..

श्रीधर : (मुस्कुराते) ओह.. समजा.. पापाके साथ क्यु रीलेशनमे आइ..

वृन्दा : (जब आइसक्रीम आगइ तब खाते मुस्कुराते) हां.. क्युकी तेरे बडे पापा मुजे सतुस्ट नही करपा रहे थे.. ओर मुजे चुदाइकी लत लग चुकी थी.. मे इसी वजहसे आपके बडे पापाको छोडने भी वाली थी.. तभी अ‍ेक दीन मेने जीतुका लंड देखलीया.. तब उनकी सादी भी नही हइ थी.. वो मेरे भाइकी उमरका ही था..
 
श्रीधर : (मुस्कुराते) फीर..?

वृन्दा : (मुस्कुराते) तो फीर क्या..? जवान लडकोको फसाना कौनसा मुस्कील काम हे.. बस.. मेने जीतुको सेट करलीया.. वो मुजे संतुस्ट करने लगा.. बल्की मेरे भाइसे भी ज्यादा वो मेरी चुदाइ करने लगा.. तब वो कोलेजमे था.. तेरे बडे पापा धंधेपे चले जाते तो वो दीनमे भी मेरी दो तीन बार चुदाइ कर लेता.. ओर हर रात हम दोनो उनके रुममे या फीर घरकी छतपे मीलकर कमसे कम अ‍ेक बारतो चुदाइ कर ही लेते..

श्रीधर : (मुस्कुराते) तो फीर उनकी मेरी मम्मीसे सादी क्यु करवाइ..?

वृन्दा : (मुस्कुराते) क्या करती..? जीतुने मुजे प्रेगनेन्ट करदीया तो मेरी डीलीवरीमे देखभालके लीये मेरी माने मेरे चाचाकी लडकी यानीकी ब्रीन्दाको भेज दीया.. ओर तेरे बडे पापाको वो जीतुके लीये भा गइ.. उसने डायरेक्ट मेरे मायकेमे बात चलाइ.. ओर तेरी माका ब्याह जीतुसे हो गया.. ओर फीर तेरा भी जन्म हुआ..

श्रीधर : (मुस्कुराते) पापाके तो बडे मजे थे.. दोनो बहेने.. हें..हें..हें..

वृन्दा : (मुस्कुराते) हां.. लेकीन मुजे ये सब अच्छा नही लगता था.. मे जीतुको कीसी ओरके साथ नही बाटना चाहती थी.. ओर मेरा तेरी मांसे इसी वजहसे जगडा होता था.. ओर मायके मेभी भाइकी सादी होगइ थी.. सादीमे हम सब गये थे.. कमीने ने सादीके अगले दीन रातमे मुजे खुब रगड रगडके चौद लीया.. कीसीको पता भी नही चला..

श्रीधर : (मुस्कुराते) क्या आपके भाइने..? मीन्स.. मामाने..?

वृन्दा : (मुस्कुराते) हां.. कमीनेकी सादी होगइ फीर भी मुजे नही भुला.. फीर मे जब भी दो तीन दीनके लीये मायके जाती कमीना कुछना कुछ जुगाड करते दो तीन बारतो मुजे चोद ही लेता.. ओर मेभी मजेसे चुदवाती.. आखीर मेरा पहेला प्यारजो था.. बस.. तबसे चुदवानेकी लत लग चुकी हे.. लगता हे अब ये चुदवानेकी लत तुमसे ही खतम होगी.. हें..हें..हें..

श्रीधर : (मुस्कुराते) तो सुरुसेही आप अपने भाइसे चुदवाती थी.. तो फीर मेने जयश्रीको चोदलीया तो क्या गुनाह करदीया..? आप भी तो अपने भाइसे चुदवाती थी..

वृन्दा : (हसते धीरेसे हाथ थामते) अरे यार.. समज.. बुरा मत मान.. मुजे सती सावीत्री होनेका नाटक तो करना ही था.. लेकीन अंदरसे मे बहुत ही छीनाल हु.. बडी वाली चुदकड.. बस.. अब मे तुमसे ही चुदवाउगी.. हम सास दामाद हेतो कोइ हमपे सक भी नही करेगा.. चल अब आइसक्रीम खाली हेतो.. देर होजायेगी..

फीर दोनो खडे हो गये ओर आइसक्रीमका बील पे करके कारमे बैठ जाते हे.. फीर दोनो होस्पीटलकी ओर बाते करते नीकल जाते हे.. वृन्दा अपनी लाइफके ओर कीस्से भी श्रीधरको सुनाती हे.. की वो कैसे अपने पतीको चकमा देते जीतुके साथ हनीमुन मनाने चली जाती थी..

वृन्दा : (मुस्कुराते) देख बातो ही बातोमे होस्पीटल आगइ.. बस.. याद रखना मेरी बेटीको मीलनेके लीये दोपहोरके वक्त अकेले आया करो.. दोनो खुब मजे करेगे.. ओर फोनपे भी चेट करेगे.. मेने तुजे अपना नंबरतो देदीया हे..

इधर लखन सृतीको लेकर घर चला गयाथा.. वहा सबने खाना खाया.. उस रात वृन्दा रातमे घर चली गइ.. ओर ब्रीन्दा श्रीधर वही जयश्रीके पास रहे.. उनको सृतीने स्पेसीयल रुम दीया था.. तो तीनो रुम बंध करके सोने लगे.. देर रात श्रीधरने वही अपनी मां ब्रीन्दाको जमकर दो बार चोद लीया..

जयश्रीको दो दीन क्लीनीकपे रखा फीर उनको भी छुटी दे दी गइ.. दीन बीतने लगे.. अब पुनम भी अपनी बच्चीको सम्हालनेमे व्यस्त रहेने लगी.. लेकीन लखनका खयाल रखना नही भुलती.. इसी बीच रजीया राधीका भावना ओर कभी कभी नीलन लखनकी प्यास बुजाती रही..

तो गांवमे भी सब रुटीन चलने लगा.. जयश्री अभी भी अपनी मम्मीके वहा मायकेमे थी.. तो इस बातका फायदा ब्रीन्दा ओर श्रीधर खुब उठाते रहे.. दोनो अब खुलकर पती पत्नीकी तराह रहेने लगे.. ब्रीन्दा हर सुबह श्रीधरके नामका सींदुर अपने सरपे लगाती..

तो श्रीधर हप्तेमे तीन चार बार सुबह सहेर जयश्रीको मीलने चला जाता.. फीर वही खाना खालेता.. जयश्री खाना खाकर आराम करते सो जाती तो श्रीधर चुपकेसे वृन्दाके कमरेमे चला जाता.. ओर वृन्दाकी जमकर चुदाइ कर लेता.. जीसे वृन्दा भी खुस रहेने लगी..

बरखा बसंतीके अलावा अब मुना भी अपनी मामीके साथ रीलेशनमे आ चुका था.. हालाकी उनकी मामी उमरमे मुनासे काफी बडी थी.. दोनो फोनपे चेट ओर प्यार भरी बाते करते काफी आगे बढ चुके थे.. अ‍ेक दीन बातो ही बातोमे उनकी मामी गीतासे पता चलाकी उनका पती अभी घरपे नही हे.. ओर देर रात आयेगा..

बस.. मुना सीधा ही गीताके घर चला गया.. मुनाको देखते ही पहेलेतो गीता थोडी गभरा गइ.. फीर कुछ ही देरके बाद दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे अ‍ेक दुसरेके होठोको चुम रहे थे.. आधे घंटेके बाद गीताके बेडरुमसे उनकी हल्कीसी चीखे कमरेमे गुंज रही थी..

ओर कुछ ही देरके बाद वोही कमरेसे गीताकी जोरोसे कामुक सीसकारीया सुनाइ दे रही थी.. ये दोनोकी पहेली चुदाइ थी.. मुना गीताकी घमासान चुदाइ कर रहा था.. सभी दोस्तोकी अ‍ेक आदतके कारण मुनाने भी गीताको बीना लंड बहार नीकाले दो बार चोद लीया.. ओर गीताकी हालत बीगाडदी..

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फीर तो दो तीन बार ओर मुनाको अ‍ैसा मौका मीला.. ओर वो दीनमे गीताकी चुदाइ करके आजाता.. अब गीताको भी मुनाका साथ अच्छा लगने लगा था.. जब भी उनका पती घरपे नही होता गीता फोन करके मुनाको घर बुला लेती.. ओर अपनी प्यास मुनासे बुजा लेती..

गांवमे भी स्कुल ओर होस्पीटलका काम तेजीसे हो रहा था.. ओर आधेसे ज्यादा काम खतम हो चुका था.. चारुके सरपंच होते ही गांवमे काफी सुधार होगया था.. तो मंजुकी तबीयत भी लडखडाने लगी थी.. देवायतको दया ओर लताने सम्हाल लीया था.. वो अक्सर चारु नीशा वंदना ओर रश्मीको भी मीलने चला जाता.. तो दुसरी ओर वसुधाकी कामाग्नी भडकने लगी थी..

अब वो अक्सर बाथरुममे जाकर उंगलीसे अपने आपको सांत करने लगी थी.. वो मुनाके बारेमे सोचती थी.. लेकीन उनके मनमे अ‍ेक डरसा होने लगा था.. कही कीसीको पता चल गया तो..? खास करके बरखा ओर बसंतीका डर.. क्युकी वो जानती थी की अब दोनो मुनाकी बीवीया हे..
 
इसी बीच लखन ओर चंदा भी दोस्तीके नामसे काफी करीब आचुके थे.. अब तो दोनो हल्कीसी छेडखानी भी करने लगे थे.. चंदाको फीरसे जींन्दा महेसुस होने लगा.. चंदाके मामलेमे लखन कोइ जल्दबाजी करना नही चाहता था.. वो चंदाको योजना बध्ध तरीकेसे धीरे धीरे ट्रेससे बहार नीकाल रहा था..

तो चंदा भी लखनके साथ अब बहुत खुस रहेने लगी थी.. जबभी उनकी कामाग्नी भडक जाती वो लखनकी ओर कातील नजरोसे हसते उनके दोनो गाल खीच लेती.. या लखनकी पीठमे मुका मारते उनकी मस्तीया करती तो जवाबमे लखन भी चंदाकी पीठमे मुका जड देता..

या उनकी कमरमे चीमटी काटता.. ओर कभी कभी चंदाके पीछवाडेमे चपत लगा देता.. ओर मौका मीलते ही चंदाकी मस्तीया करते उनको पीछेसे बाहोमे भीचलेता.. ओर उपर उठा लेता तब वो चंदाके बुब्सको छु लेता.. तब चंदा बहुत ही सर्मसार होजाती.. ओर जोरोसे हसते लखनसे छुटनेकी कोसीस करती..

फीर छुटतेही वो लखनकी ओर तीरछी नजरोसे हसती.. अ‍ेक साम लखन नीलम चंदा ओर राधीका दीयाकी सादीमे चले गये.. दीयाका रीसेप्शन था.. तोवो नीलम ओर लखनको देखकर बहुत खुस होगइ.. उसने अपने पतीसे लखन नीलम राधीका सबका परीचय भी करवाया.. तो उनकी सासने राधीकाका हाथ थाम लीया..

दीयाकी सास : (मुस्कुराते) राधीकाजी.. थेन्कयु वेरी मच.. आपने हमारी दीयाका अ‍ेक मांकी तराह बहुत खयाल रखा..

राधीका : (मुस्कुराते) अरे.. ये तो मेरा फर्ज था..

दीयाकी सांस : (मुस्कुराते) ये तो दीयाकी फ्रेन्ड नीलम हे लेकीन ये हेन्डसम लडका कौन हे..?

राधीका : (मुस्कुराते) ये --गांवके छोटे ठाकुर हे.. मेरे पती..

दीयाकी सांस : (फुसफुसाते) क्या..? ये आपके पती हे..? अरे हां.. मे इनके बडे भाइको जानती हु.. मेरे साथ ही पढते थे.. क्या ये देवायतके छोटे भाइ हे..?

राधीका : (मुस्कुराते) हां.. ये उनके छोटे भाइ हे.. लखन नाम हे इनका.. ओर ये मेरी जेठानी हे.. चंदा भाभी.. उसी देवायतजीकी पत्नी..

दीयाकी सास : (हसते) अरे.. तब तो आप लोग हमारे स्पेसीगल गेस्ट हे.. आइअ‍े..

फीर दीयाकी सासने अपने पतीसे सबका गहेराइमे परीचय करवाया तो उनके पतीकी आंख भी चमक गइ.. उसने लखनका फोन नंबर भी अ‍ेक्सचेन्ज करलीया.. फीर सबने वहा डीनर कीया.. तभी नीलम दीयाको मीलने चली गइ.. फीर सबलोग वापस घर आगये..

अ‍ेक दीन सुबह लखन अपनी ओफीसमे बैठा था.. ओर उसे अ‍ेक टेक्स मेसेज आया.. मेसेजमे लखनको फ्री होते ही कोल करनेको कहा था.. ओर ये टेक्स मेसेज सृतीकी डो. सहेली भावीका का था.. क्युकी भावीका ओर लखन काफी दीनोसे बाते कर रहे थे..

जबसे सृतीका हादसा हुआ तबसे ही दोनो मेसेज ओर फोनपे बाते करते काफी आगे बढ चुके थे.. हर टेक्समे दोनो दील वाला इमोजी भेजना नही चुकते थे.. लखन जो भी करता सबकुछ पुनमको बता देता.. ओर पुनम भी लखनको आगे बढनेमे पुरा साथ देतीथी.. लखनने बहार नीकलकर फोन कर दीया..

लखन : (मुस्कुराते) हेलो डोक्टर साहीबा.. कहो.. कैसे याद कीया..? हमारी बहुत याद आ रही हे क्या..?

भावीका : (सरमाते धीरेसे) हां.. तभी तो फोन करनेको कहा.. कहो.. कलका क्या प्रोग्राम हे..?

लखन : (मुस्कुराते) कुछ खास नही.. हुकुम फरमाइये..?

भावीका : (मुस्कुराते) मे अ‍ेक अ‍ेड्रेस सेन्ड कर रही हु.. वहा सुबह दस बजे पहोंच जाना..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु..? कोइ खास बात हे..?

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. बहुत खास बात हे.. अब ज्यादा सवाल नही.. हम लंच ओर डीनर साथमे करेगे.. घरपे कुछ भी बहाना बनाकर छोटे बच्चेकी तराह आजाना..

लखन : (मुस्कुराते) हुकुम तो अ‍ैसे कर रही हो.. जैसे तुम मेरी बीवी हो..

भावीका : (मुस्कुराते) हुकुमके बच्चे जीतना कहा हे उतना ही करो.. ओर अगर जरुरत पडी तो आपकी बीवी भी होजाउगी.. कल.. दस बजे.. भुलना मत..

लखन : (मुस्कुराते) जो हुकुम डोक्टर डार्लींग.. ओर कुछ..?

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. बस अ‍ैसे ही बुलाया करो.. अब तो सीर्फ आपके मुहसे ही सुननेको मीलता हे..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु..? अब धृव आपको अ‍ैसे नही बुलाता..?

भावीका : (मुस्कुराते) नही.. वो सब बाते हम कल मीलकर करेगे.. आपको कुछ खास बताना हे.. अच्छा ये बताओ.. सृतीसे मीलना सुरु करदीया..?

लखन : (मुस्कुराते) नही.. अभी कहा..? आप नेही तो मना कीया हे.. ढाइ महीना होगया..

भावीका : (मुस्कुराते) अब धीरे धीरे सुरु कर सकते हो.. दो दीन बाद उनको लेकर आना.. आपके सामने ही उसे बता दुगी.. वैसे भी वो खुद डोक्टर हे.. आपको मना नही करेगी..

लखन : (मुस्कुराते) ओर हम कब मील रहे हे..? मीन्स.. कुछ स्पेसीयल..

भावीका : (सरमाते मुस्कुराते) वो आपको कल पता चल जायेगा.. सुबह.. दस बजे.. आइ लव यु.. माय लव..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. लव यु टु..

भावीका : (मुस्कुराते) ओर हां.. इस बारेमे कीसीको पता ना चले.. धृवको भी नही.. बाय..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. बाय..

फोन कट करते लखन मुस्कुराने लगा.. तब कुछ ही देरमे उनके फोनमे मेसेजका टोन बजा.. लखनने वोट्सअ‍ेप खोलकर देखा तो भावीका का मेसेज आगया था.. उनमे अ‍ेक आलीशान होटेलका अ‍ेड्रेस था.. ओर साथमे कमरा नंबर भी था.. तो लखन सबकुछ समज गया..
 
इस रात रजीया राधीकाको चोदनेके बाद लखन पुनमके पास चला गया.. पुनम अपनी बच्चीको दुध पीला रही थी.. ओर सृती घोडे बेचकर सो रही थी.. लखनने पुनमके दुसरे बुब्सपे मुह लगा दीया.. ओर पुनमका दुध पीने लगा.. तो पुनम हसते हुअ‍े लखनके बालोमे उंगलीया घुमाने लगी..

पुनम : (मुस्कुराते) मेला बे..बी.. दुध पीना हे.. दोनोको ठंडी करके जी नही भरा क्या..?

लखन : (बैठकर होंठ चुमकर) दीदी.. आपके ओर सृतीके अलावा कही जी नही भरता हे क्या..?

पुनम : (मुस्कुराते) अब ढाइ महीना होगया.. तो अ‍ेक बार सृतीको उनकी सहेलीको दीखा दीजीये.. फीर उनको पुछकर सुरु करदो.. कमीनी बहुत प्यासी हो गइ हे..

लखन : (सामने देखते धीरेसे) दीदी.. आज ही उनका फोन आया था.. कल सुबह मुजे होटेलमे बुलाया हे.. कहेती थी लंच डीनर साथ करेगे.. ओर कीसीको बतान मत..

पुनम : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. कल उनको अच्छेसे मीललो.. कुछ जरुरी बात करके अपना जी हल्का करना चाहती हे.. भाइ.. अ‍ेक ओर बात.. अब उनकी जींदगी बदलने वाली हे.. भवीस्यमे हमारी सौतन होगी.. वो हमारे साथ जुड जायेगी.. तो उनको अच्छेसे सम्हालना..

लखन : (मुस्कुराते) क्या सचमे..? आप मुजे दुसरेके साथ भेजती होतो आपको बुरा नही लगता..?

पुनम : (मुस्कुराते) लगता हे लेकीन आपको भेजना भी जरुरी हे.. अ‍ेक बार उनको अच्छेसे मीललो.. ओर परसो हमे गांव भी जाना हे.. वहा मंजु मोमकी तबीयत भी अच्छी नही हे..

लखन : (आंख गीली करते) दीदी.. हम मोमके बगैर क्या करेगे..?

पुनम : (आंसु टपक गये) भाइ.. हमे हीमत रखनी पडेगी.. ओर वो वापस भीतो आ रही हे.. भावना दीदीकी कोखसे.. क्युकी इस बार वो भाइसे प्रेगनेन्ट हुइ हे.. उनका पांचवा महीना सुरु होते ही मोम उनके गर्भमे चली जायेगी..

लखन : (सामने देखते) तो फीर अभी भावना भाभीका कीतना महीना चल रहा हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) तीन महीना.. मोमके पास अभी दो महीने हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. इस बच्चीको हम पालेगे.. हमारी बेटीकी तराह.. हमारी मोम..

पुनम : (प्यारसे गाल सहेलाते) भाइ.. आप कीतने अच्छे हे.. अपने परायेमे फर्क नही रखते..

लखन : (मुस्कुराते) यहा कौन पराया हे..? सब अपने हीतो हे.. भाइका खुन भीतो हमारा खुन हे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. अब वक्त नजदीक आ गया हे.. हो सकता हे हमे हमेसाके लीये गांव वापस जाना पडे.. चंदा भाभी यही रहेगी.. तो अब आप भाभीके साथ आगे बढ सकते हो..

लखन : (मुस्कुराते) अभी उसे पुरी तराह ठीक तो होनेदो..

पुनम : (मुस्कुराते) वो काफी हद तक ठीक हो गइ हे.. देख रही हु आपके साथ ज्यादा घुमने लगी हे.. आके साथ कैसे मस्तीया करती हे.. ओर वो बहुत खुस भी हे.. यहा आकर उसने कोइ अ‍ैसी वैसी हरकत नही की जो गांवमे करती थी.. ओर गुमसुम बैठी रहेती थी.. यहा आकर वो बहुत खुस हे.. बस.. अब आखरी वारकी जरुरत हे..

लखन : (सामने देखते) क्या उनके साथ.. मीन्स.. सब जरुरी हे क्या..?

पुनम : (सामने देखते) अभी भी क्यु सकोच कर रहे हो..? बहुत जरुरी हे.. बल्की सीर्फ इनके साथ नही.. वो सभी जो आपके साथ रीलेशनके लीये राजी होगी.. आपको सबको खुस रखना पडेगा.. खास करके चंदा भाभीको..

लखन : (मुस्कुराते) तो क्या मेरे साथ रीलेशनमे आकर वो ठीक होजायेगी..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. वो पुरी तराह ठीक होजायेगी.. जब आप दोनोका पहेला मीलन होगा.. फीर देखना वो कैसे आपकी दीवानी हो जाती हे.. फीर वो आपके कहेनेसे धिरेनको आसानीसे माफ कर देगी.. ओर नीलुको भी स्वीकार करलेगी.. आखीर उसे नीलुके साथ हीतो रहेना हे..

फीर पुनमने बच्चीको जुलेमे सुला दीया तो लखन ओर पुनम अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपक कर सो गये.. इसी वक्त फीरोज गांवमे अपनी बीवी जरीनाकी चुदाइ करके उनके सीनेपे ढेर होते पडा था.. ओर जरीना प्यासी रेह गइथी.. फीर भी मनमे फीरोजको गालीया देते उनकी पीठ सहेला रही थी..

फीरोज : (सर उचा करते जरीनाकी ओर देखते) जरीना.. आज मेने काजी साहबसे बात करली हे.. वो परसो हमारे घरपे आकर हमारा नीकाह करवा देगे..

जरीना : (सामने देखते) तो फीर आपने दीदीसे नीकाह करनेका फैसला कर ही लीया..

फीरोज : (आस्चर्यसे सामने देखते) हां तो..? हमारी बात तो हुइ थी.. ओर मे हमारी सबानाकी सादी साहीलसे करवानेके लीये राजी भी हु.. तो क्या मे सलमा भाभीको लीखके दु..?

जरीना : (मुह घुमाते) नही.. इनकी कोइ जरुरत नही हे.. जब आपने सब तैय कर ही लीया हेतो मे क्या कहुगी..? अब आप मना करोगे तो भी मे मेरी सबानाकी सादी साहीलसे करवा दुगी.. क्या आपको यकीन हेकी आप दो दो ओरतोको सम्हाल पाओगे..?
 
फीरोज : (सलमाके उपरसे उतरते बैठते) तु कहेना क्या चाहती हे..? की मे तुम दोनोको सम्हालनेमे काबील नही हु..? मत भुल मे असली मर्द हु.. दो क्या मे चार चार बीवीया सम्हाल सकता हु.. ओर ये हमारे समाजमे जाहीज भी हे..

जरीना : (चुतको साफ करते थोडा गुस्सेसे) शुक्र मनाओ हमारे साहीलका.. ओर उन ठाकुरोका.. वरना सहेरमे तो बडी मुस्कीलसे हमारा गुजारा होता था.. अ‍ेक बीवीको सम्हालनेमे भी दीन रात आपको फेक्टरीमे काम करना पडता था.. भुल गये..? अच्छा हुआ साहीलने हमारी मदद की..

फीरोज : (सामने देखते) ताने मार रही हो..? साहील भीतो हमारा ही खुन हे.. ओर इसके लीयेतो सबुका हाथ उनको दे रहा हु.. क्या तुजे अभी जगडा करना हे..?

जरीना : (सामने देखते) मे कौन होती हु जो आपसे जगडा करु.. अब जगडा करना हेतो नइ बीवीके साथ करना.. इस बीवीसे तो आपका मन भर गया हे.. अब सोजाइअ‍े.. मे सुबह सलमा दीदीसे बात कर लुगी.. की वो परसो नीकाहके लीये तैयार रहे..

फीरोज : (बाहोने भरते सोते) अब सोजा.. तेरेसे मन थोडीना भरता हे.. इसीलीये तो अभी तुजे प्यार कीया..

जरीना : (मुह बीगाडते) ठीक हे ठीक हे सोजाइअ‍े..

फीरोज : (हसते सोते) बीवीओके हजार नखरे होते हे.. हें..हें..हें.. सोजा..

जरीना : (सोते मनमे) कमीना.. अ‍ेक बीवीकोतो ठीकसे चोद नही पता.. हर बार मुजे प्यासी रख देता हे.. इनसे तो सलमा दीदी ओर साहीलका अच्छा हे.. मेरा साहील जवान मुंडा हे.. उनका हथीयार भी कीतना दमदार हे.. सलमा दीदी कीतनी खुस रहेती हे.. अब तो सलमा दीदीकी बात माननी ही पडेगी..

क्या फर्क पडता हे वो मेरा खुन हे.. कादीर भीतो मेराही खुन था.. कमीना कैसे मुजे ब्लेकमेइल करके चोदता था.. मुजे भी उनकी आदत लग चुकी थी.. तो फीर साहीलसे चुदवानेमे क्या दीकत हे..? अब कुछभी हो मे साहीलसे चुदवाकर ही रहुगी.. इनसे तो अब कोइ उमीद नही हे..

सोचते सोचते जरीना भी नींदकी आगोसमे चली गइ.. तब मुना अपने घरपे बसंतीको.. ओर श्रीधर अपने घरपे ब्रीन्दाको अब भी चोद रहा था.. अब ब्रीन्दा ओर बसंती हर सुख अपने बेटेसे सादी करके पा रहीथी.. गांवमे अब बीना सादीके भी लोग रीलेशन बनानेमे नही हीचकीचाते थे..

अ‍ैसे ही सुबह होगइ.. सुबह लखन कंपलीट होगया तो सबलोग डाइनींगपे आगये.. रजीया ओर सृतीने सबको चाइ नास्ता दीया ओर खुद भी बैठ गइ.. सबने हसी मजाक करते चाइ नास्ता कीया.. ओर लखनने नीलमको स्कुटी लेकर राधीकाको छोडने ओर लानेका कहे दीया..

राधीका : (मुस्कुराते) क्यु..? आप कही जा रहे हो..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. हमारे धंधेके कामके लीये बहार जा रहा हु.. सायद रातमे भी आनेमे देर होजाये.. तो तुम सबलोग खा लेना.. मे बहार खाकर आउगा..

चंदा : (मुस्कुराते) ठीक हे.. लेकीन वहा पहोंचते ही कोल कर देना..

पुनम : (मुस्कुराते) देखा भाइ.. आजकल भाभी आपकी बहुत चीन्ता करती हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (मुस्कुराते) हां तो चीन्ता तो करुगीनां.. मेरा अ‍ेक लौता देवर ओर दामाद जो हे..

फीर अ‍ेक अ‍ेक करते सबलोग लखनको हग करके अपने अपने कामपे जाने लगे.. रजीया ओर पुनम कीचनका काम समेटने लगी.. फीर वो अपनी बच्चीके पास चली गइ.. चंदा लखन सोफेपे बैठे थे.. तब चंदा अ‍ेक आस भरी नजरोसे लखनकी ओर देख रहीथी.. तभी लखन भी खडा होकर जाने लगा..

चंदा : (धीरेसे फुसफुसाते) क्या अपनी गर्लफ्रेन्डको मीलकर नही जाओगे..?

लखन : (वापस बैठते हग करते) हां.. व्हाइ नोट..?

कहेते लखन वापस सोफेपे बैठ गया.. ओर लखनने बैठेही चंदाको हग करलीया.. तभी लखनने अ‍ैसी हरकत की जीनकी चंदाको उमीद नही थी.. हग करके लखनने चंदाके दोनो गालको बारी बारी चुम लीया तो चंदा मुस्कुराती रही.. तभी अचानक लखनने चंदाके होठोपे होठ रख दीया.. सो चंदा सोक्ट हो गइ..

ओर लखन मुस्कुराते खडा हो गया ओर बहार नीकल गया.. चंदा अब भी सोक्ट होते लखनको जाते देखती रही.. तभी उसे खयाल आया तो वो जटसे उठकर अपने रुममे चली गइ ओर दरवाजा बंध करके उनके पीछे अपने सीनेपे दोनो हाथ रखते खडी होगइ.. उनका सीना जोरोसे धडक रहा था..

उनकी सांस तेज चलने लगी.. फीर वो हल्केसे सरमाकर मुस्कुराइ.. उसे अपनी हसीपे आस्चर्य हुआ.. की आज लखनकी इस हरकतसे उनको लखनपे गुस्सा क्यु नही आया..? चंदाके दोनो बुब्स कठोर होगये थे.. ओर उनकी चुत हल्केसे फडफडाते पानी छोडने लगी.. चंदा जटसे बाथरुममे घुस गइ.. ओर सारीको कमर तक करके कमोडपे बैठ गइ.. ओर धीरेसे अपनी चुतपे हाथ रख दीया.. ओर आंख बंध करते अपनी चुतको सहेलाने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २८३

उनकी सांस तेज चलने लगी.. फीर वो हल्केसे सरमाकर मुस्कुराइ.. उसे अपनी हसीपे आस्चर्य हुआ.. की आज लखनकी इस हरकतसे उनको लखनपे गुस्सा क्यु नही आया..? चंदाके दोनो बुब्स कठोर होगये थे.. ओर उनकी चुत हल्केसे फडफडाते पानी छोडने लगी.. चंदा जटसे बाथरुममे घुस गइ.. ओर सारीको कमर तक करके कमोडपे बैठ गइ.. ओर धीरेसे अपनी चुतपे हाथ रख दीया.. ओर आंख बंध करते अपनी चुतको सहेलाने लगी.... अब आगे

दुसरी ओर गांवमे सुबह सुबह फीरोज जल्दी अपने खेतोपे चला गया.. ताकी चाइ नास्ताके वक्त जरीना खुलके सलमा ओर साहीलसे नीकाहकी बात कर सके.. जरीनाने उसे चाइ नास्ता बना दीया था.. तो चाय नास्ता करते उसने जरीनाको सलमासे बात करलेनेको कहा.. ओर चला गया..

घरका कुछ काम नीपटाकर जरीना सलमा फ्री होगइ.. ओर साहीलका इन्तजार करने लगी.. तभी साहील भी कंपलीट होते बहार आगया.. जरीना उसे देखकर सरमा गइ.. फीर तीनो चाइ नास्तेके लीये इकठे बैठ गये.. जरीना असहज महेसुस कर रही थी.. की बातकी सुरुआत कैसे करे..

साहील ओर सलमा बार बार अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते मुस्कुरा रहे थे.. तभी सलमाने जरीनासे नजर बचाते साहीलको आंखोसे जरीनाकी ओर इसारा कीया.. ओर हसने लगी.. तो साहील भी सरमाकर मुस्कुराने लगा.. दोनोको हसते हुअ‍े देखकर जरीना भी मुस्कुराने लगी.. तभी..

सलमा : (मुस्कुराते) जरीना.. आज देवरजी जल्दी कैसे चले गये..? खेतोपे ज्यादा काम हे क्या..?

जरीना : (मुस्कुराते धीरेसे) हं..? न..नही.. ब..स.. दीदी.. मुजे आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे..

सलमा : (मुस्कुराते) हां हां.. बोल.. इनमे इतना गभरा क्यु रही हे..?

जरीना : (नजरे चुराते धीरेसे) दीदी.. उसने कल काजी साहबसे बात करली हे.. कल वो घरपे आकर आप दोनोका नीकाह करवा देगे.. सीर्फ हम घरवालेके बीच.. कीसीको न्योता नही.. उसने कल सुबह नीकाहके लीये आपको तैयार रहेनेको कहा हे..

सलमा : (साहीलकी ओर दया भावसे देखते) अच्छा.. इसीलीये वो जल्दी चले गये..

इतना सुनते ही साहीलका चहेरा मुरजा गया.. उनकी आंख गीली होगइ.. उसने जल्दी जल्दी पानी पीलीया.. ओर खडा होकर बीना कुछ कहे अपने कमरेमे चला गया.. सलमा ओर जरीना उसे देखती ही रेह गइ.. तभी सलमा जटसे उठकर साहीलके पास चली गइ..

जरीना भी थोडा गभराते सलमाके पीछे पीछे साहीलके रुममे चली गइ.. अंदर जाकर देखा तो साहील ओर सलमा दोनो ही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे आंसु बहा रहे थे.. जरीना थोडी असेहज हो गइ.. फीर भी हींमत करते दोनोके पास चली गइ.. ओर सलमाकी पीठ सहेलाने लगी.. तभी..

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सलमा : (आंसु बहाते साहीलकी पीठ सहेलाते धीरेसे) साहील.. आप दील छोटा मत कीजीये.. ये सब आपके बहेतर भवीस्यके लीये नीर्णय लीया गया हे..

साहील : (धीरेसे अलग होते) अम्मी.. चाची हे..

सलमा : (जरीनाकी ओर देखते मुस्कुराते) आप इनकी फीकर मत कीजीये.. इनको हमारे बारेमे सब कुछ पता हे.. मेने ही इनसे सब बता दीया हे..

जरीना : (मुस्कुराते) हां साहील.. फीकर मत करो.. मुजे सब पता हे.. ओर इस बारेमे मुजे कोइ अ‍ेतराज भी नही हे.. मे जानती हु अ‍ेक अकेली ओरतको जींदगी काटना कीतना मुस्कील हे..

साहील : (सामने देखते धीरेसे) लेकीन चाची.. मे सबानासे सादी कर रहा हु.. क्या आपको इस बातसे बुरा नही लगा..?

जरीना : (कुटील मुस्कानसे) बुरा..? बुरा क्यु लगेगा..? यहा तो बुढेको भी फीरसे जवानी चढने लगी हे.. तेरे चाचा भी दो दो सादीया करने तैयार होगये हे.. अ‍ेक तो ठीकसे सम्हाल नही पा रहे हे.. ओर दुसरा नीकाह करना हे.. लगता हे इनको भी गांवकी हवा लग गइ हे..

साहील : (नजर जुकाते) चाची.. अम्मा अकेली थी.. उनकी तडप मुजसे देखी नही गइ.. बस.. हो गया..

जरीना : (सामने देखते) साहील.. मे अच्छी तराह जानती हु.. की अ‍ेक अकेली ओरपकी तडप कैसी होती हे.. फीर भी तुमतो जवान हो.. गलतीया कीससे नही होती.. मुजे यकीन हे तुम मेरी सबुको भी सम्हाल लोगे..

सलमा : (जरीनाका हाथ थामते धीरेसे) जरीना.. तुम मेरे साहीलको सम्हाल लेना.. वो मेरे बगैर नही रेह सकता..

जरीना : (सर्मसार होते धीरेसे फुसफुसाते) दी..दी.. में..

सलमा : (सामने देखते) हां तुम.. तुमने मुजसे वादा कीया था.. हमे भी तुम्हारे अतीतसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. जब आपको कादीर सम्हाल सकता हे तो फीर मेरा साहील क्यु नही..?

जरीना : (नजरे जुकाते धीरेसे) ठीक हे दीदी.. मे साहीलको सम्हाल लुगी..

सलमा : (मुस्कुराते) हंम.. गुड.. साहील.. आपको जाना हेतो जाइअ‍े.. मुजे जरीनासे कुछ बात करनी हे.. ओर हां.. अब कोइ रोना धोना नही.. मे हमेसा आपकी थी.. आपकी हु.. ओर आपकी ही रहुगी.. बल्की अब तो मे ओर जरीना दोनो आपका खयाल रखेगी.. वो भी तुम्हारे चाचासे संतुस्ट नही हे..

साहील : (सरमाते मुस्कुराते बहार जाते) ठीक हे अम्मा..

जरीना : (जाते ही मुस्कुराते) दीदी.. क्या ये अब भी आपको अम्मा केह रहा हे..?

सलमा : (हाथ पकडते बेडपे बीठाते) हां.. चल बैठ इधर.. मे तुजे कुछ ओर बताती हु..

जरीना : (सरमाते हसते धीरेसे बैठते) क्या..?

सलमा : (हसते) जरीना.. पता हे..? इनके सभी दोस्तोको अपनी बहेन ओर मां ही अच्छी लगती हे.. कीसीको कहेना नही.. वो मुना भाइ.. ओर श्रीधर भाइने उनकी बहेन ओर मां.. दोनोसे सादी करली हे.. ओर ये भी बीस्तरमे मुजे अम्मा अम्मा कहेते ही.. तु समज गइनां..

जरीना : (सरमाकर हसते धीरेसे) हां दीदी.. ये तो मेने भी सुना हे..

सलमा : (जरीनाके दोनो हाथ थामते) जरीना.. कल अगर हमारा नीकाह हेतो हमारी सुहागरात भी होगी.. तो मे चाहती हुकी तुम कल रात मेरे साहीलको सम्हाललो.. क्युकी जडीबुटीकी वजहसे उनको हर रात चाहीये.. वरना उनको नीचे दर्द होने लगता हे.. इसीलीये तो उनके सभी दोस्तोमे दो दो सादीया कीहे.. बहेन ओर मां के साथ..

जरीना : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. उनका तो बहुत बडा हे.. अगर आपके देवरको पता चल गया तो..?

सलमा : (मुस्कुराते) तु उनकी फीकर मत कर.. मेरे पास अ‍ेक ट्युब हे.. लगालेना.. फीरसे कस जयेगी.. मे साहीलको केह दुगीकी ध्यानसे धीरे धीरे करेगा.. तुजे कोइ तकलीफ नही होगी.. बाकी देवरजीका इलाज हे मेरे पास.. बस.. तुम मेरे साहीलको सम्हालले.. फीर देख हम दोनोकी जींदगीमे कैसे बहार आती हे..

जरीना : (सरमाकर मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. मे कोसीस करुगी.. बहुत सरम आ रही हे..

सलमा : (मुस्कुराते) अरे सरमा मत.. कोसीस नही.. तु देर रात बीन्दास्त साहीलके कमरेमे चली जाना.. मे उनको सब समजा दुगी.. बस.. मे कहु अ‍ैसा करती जा.. हम दोनोकी जींदगी सवर जायेगी.. हो सकेतो तु आजसे ही साहीलको रीजानेमे लगजा.. सरम दुर होजायेगी..
 
दुसरी ओर सहेरमे दस बजे लखन उसी होटेलमे चला गया जहा उनको भावीकाने मीलनेके लीये बुलाया था.. लखनने नीचेसे उनको फोन कीया तो भावीकाने उसे कमरा नंबर ३१२ मे आनेके लीये कहा.. तो रीसेपनीस्टने मुस्कुराकर लखनको लीफ्टका रास्ता दीखाया..

लखन उपर चला गया ओर ३१२ मे नोक कीया.. तभी भावीका सीधे ही बाथरुमसे सरपे ओर सीनेपे टोलीया लपेटकर आगइ.. ओर उसने दरवाजा खोला तो सामने लखन मुस्कुराते खडा था.. भावीका साइडमे हट गइ.. ओर लखन अंदर चला गया..

तो भावीकाने बहार डु नोट डीस्टर्बका टेग लटका दीया ओर दरवाजा बंध करके लोक करदीया.. लखन कमरेकी सजायट देख रहा था.. तभी भावीका दोटकर लखनकी ओर चली गइ तो लखनने जोरोसे उनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. दोनो अ‍ेक दुसरेके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगे..

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तभी लखनने उनको अपनी गोदमे उठा लीया ओर बेडकी ओर चल पडा.. भावीका बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर लखनके गलेमे बाहे डालकर हसती रही.. लखनने उसे बेडपे लीटा दीया.. ओर खुद भी उनकी बगलमे लेट गया तो भावीकाने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया..

भावीका : (मुस्कुराते होठ चुमते) स्वीट हार्ट कोइ ज्लदी नही.. आज पुरा दीन हमारा हे.. बस.. मुजे अपने जानुके लीये थोडी तैयार होनेदो..

लखन : (मुस्कुराते देखते) कोइ सजने सवरनेकी जरुरत नही हे.. आप वैसे भी बहुत खुबसुरत हो.. पता नही धृव इतनी खुबसुरत बीवीपे ध्यान क्यु नही देता..

भावीका : (सामने देखते) वो सब मे बादमे बताउगी.. बस.. थोडासा सजने सवरने दो.. फीर सीर्फ प्यार ही प्यार.. आज आप मेरी गीरफ्तमे हो..

लखन : (मुस्कुराते) वैसे भी कुछ देरमे सभी कपडे नीकलने ही वाले हे तो फीर क्यु पहेनना..?

भावीका : (सरमाकर मुस्कुराते) यार थोडा बालतो बनानेदो.. ठीकठाक लगुगी..

लखन : (होंठ चुमते) नही.. आज इस टोलीयामे ही खुबसुरत ओर सेक्सी लग रही हो.. कुछ भी करनेकी कोइ जरुरत नही हे.. वैसे ये टोलीया भी हटने वाला हे..

भावीका : (मुस्कुराते) बीलकुल पागल हो.. जैसा सृतीने कहा था.. क्या उसे पता हे..?

लखन : (सामने देखते) अरे ना बाबा.. उसे बताना भी मत.. उसे पता चलाकी मे तुम्हारे साथ था.. तो वो जलके भस्म होजायेगी.. सीर्फ पुनोदीको पता हे..

भावीका : (मुस्कुराते) दोनो भाइ बहेनमे अच्छी अंडर स्टेन्डींग हे.. आज हम दोनोका पहेला मीलन हे.. तो जरा ध्यानसे.. फोनमे तो बहुत बार दीदार करलीये.. आज रुबरु देखुगी.. क्या अ‍ैसे ही प्यार करोगे..? कपडे नही नीकालना क्या..?

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कहेते भावीका लखनके कपडे नीकालने लगी.. तो लखनने उनके सीनेसे टोलीया खीच लीया तो भावीका सरमाके हसने लगी.. लखन भावीकाका गोरा बदन देखकर पागल होने लगा.. कुछ ही देरमे दोनो नंगे अ‍ेक दुसरेके जीस्मके साथ खेलने लगे.. पुरा कमरा भावीकाकी सीसकारीयोसे गुंजने लगा..

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भावीका लखनका हथीयार देखते ही पागल होने लगी.. उसने लखनको ब्लु जोब दीया.. ओर लखनने भी उनकी चुतका रस चखा.. लखनने बीना चोदे ही भावीकाको दो दो बार जडा दीया.. फीर सुरु हुआ असली खेल.. लखन भावीकाके उपर छागया ओर उनके दोनो हाथ कसके पकड लीये..

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भावीकाको अपनी चुतपे लखनका लंड ठोकर मारते महेसुस हुआ.. उनकी आंखे वासनासे लाल हो चुकी थी.. ओर लखनकी ओर वासना भरी नजरोसे देखते आखरी वारकी प्रतीक्षा कर रही थी.. तभी लखनने उनके होठोको चुमवे लीप लोक करलीया.. भावीका समज गइ.. उसने डरके मारे अपनी आंख भीचली..

तभी लखनने अपनी कमर उठाकर अ‍ेक जोरोका जटका मारा.. तो लखनका आधा लंड भावीकाकी चुतको चीरते अंदर घुस गया.. भावीकाकी जोरोसे चीख नीकलते लखनके मुहमे ही दब गइ.. उनकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. ओर वो अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी..

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लखन इस मामलेमे बहुत माहीर था.. उसने बडी ही सावधानीसे भावीकाको सम्हाल लीया.. ओर धीरे धीरे करते पुरा लंड भावीकाकी चुतकी गहेराइओमे गोते लगाने लगा.. भावीकाकी दर्द भरी चीखे अब कामुक सीसकारीओमे तबदील होने लगी.. वो लखनका साथ कमर उछालते देने लगी..

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लखनका पहेली बार उभार देखते उनकी काम इच्छा जागृत हुइ थी.. तबसे लखनके लीये उसने सपने सजाये थे.. भावीकाका वोही सपना आज हकीकतमे तबदील होगया था.. ओर लखनकी वो ही आदत.. प्यार करनेकी अ‍ेक ही स्टाइल.. भावीकाको संतुस्ट करनेमे काफी थी..

लखनने बीना नीचे उतरे ही भावीकाकी चुतको दो दो बार अपने पानीसे सीच दीया था.. ओर लखन अभी भी लंड चुतमे डालकर भावीकाके उरोजोके साथ खेल रहा था.. भावीका बहुत ही सर्मसार हो रही थी.. ओर लखनसे नजरे चुराते उनकी पीठ सहेला रही थी.. तभी..

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लखन : (होंठ चुमते) मेडम.. आज अचानक अ‍ैसी हीमत कैसे करली..? कुछ खास बात..?

भावीका : (सामने देखते धीरेसे) लखन.. दो दीनसे घरपे अकेली हु.. कल पेसन्टमे बीजी थी.. आजकी कोइ अ‍ेपोइमेन्ट नही ली.. सीर्फ तुम्हारे लीये.. मे आपसे मीलना चाहती थी..

लखन : (सामने देखते) क्या ये धृवको धोखा नही हे..? वो मेरा सबसे अच्छा दोस्त हे..

भावीका : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. लेकीन आपका दोस्त मुजे धोखा दे रहा हे वो..? आप सब जानते थेनां..? फीर भी मुजे नही बताया..?

लखन : (मुस्कुराते) जानता हु.. लेकीन वचनसे भी बंधा हुआ हु.. दोस्तका भरोसा कैसे तोडता..?

भावीका : (मुस्कुराते) सबसे सच्चे दोस्त.. सही कहा आपने.. लेकीन मुजे सब पता हे.. की घरमे सब क्या हो रहा हे.. मे धृवकी सेकन्ड वाइफ हु..

लखन : (मुस्कुराते) ओह.. तो आपको सब पता हे.. सब कब पता चला..?

भावीका : कुछ दीन पहेले.. धृव पुरा दीन बहार था.. अ‍ेक होटेलमे.. अपनी बहेनके साथ..

लखन : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. दोनो अ‍ेक होटेलमे खाना खाते मुजसे मीले थे.. जब मे खाना पेक करवा रहा था..

भावीका : (फीकी मुस्कानसे) देर रात धृव सो रहा था.. तब उनके फोनपे चेटका नोटीफीकेशन आया.. मेने देख लीया.. मुजे उनका पासवर्ड पता था.. फीर तो सबकुछ पढलीया.. उनकी ड्राइव भी देखली.. तो कुछ ओर भी पता चला.. बस.. उसी दीनसे मेने ठानलीया.. की मे भी उसे धोखा दुगी..
 
लखन : (सामने देखते) ये क्या बात हुइ..? धोखेके बदले धोखा..?

भावीका : (सामने देखते) तो क्या आप अपनी बीवीओको धोखा नही देते..?

लखन : (सामने देखते) नही.. कभी नही.. मे जीसके साथ भी रीलेशन बनाता हु मेरी बीवीओको पुछकर.. पुनोदीको हमारे बारेमे सब पता हे.. लेकीन सृतीको इसीलीये नही बताया की वो नही चाहती हम दोनो मीले.. पता नही उनको तुमसे क्यु ज्वेलेसी हे..

भावीका : (मुस्कुराते) क्युकी वो मेरी खास दोस्त हे.. उनको मेरे अतीतके बारेमे सबकुछ पता हे.. वो नही चाहती की हम दोनोके रीलेशनकी वजहसे मेरा घर टुटे.. क्युकी मेने बडी मुस्कीलसे मेरा घर बसाया हे..

लखन : (मुस्कुराते) तुम अपनी दोस्तको कीतनी अच्छी तराह जानती हो.. मुजे आपके बारेमे जानना हे.. सबकुछ.. आपके घरके बारेमे.. आपके अतीतके बारेमे भी.. की आपने मुजे क्यु चुना..

भावीका : मेरे अतीतके बारेमे तो आप जानते हो.. क्या पुनोदी ओर सृतीने आपको नही बताया..?

लखन : (मुस्कुराते) बताया.. इतना बताया हे आप अ‍ेक बहुत ही बडे उद्योगपतीकी बेटी हो.. लेकीन मेने आपके बारेमे उनको डीटेइलमे नही पुछा..

भावीका : (मुस्कुराते) ठीक हे.. मे आपको बोर नही करुगी.. इस सोर्ट बताती हु.. मेरे पीता अ‍ेक बहुत बडे उद्योगपती थे.. वीधुर थे.. नीसंतान थे.. ओर मम्मी उनकी पर्सनल सेक्रेटरी थी.. दोनोके बीच अफैर चल रहा था.. ओर अ‍ेक दीन पता चला.. मोम उनसे प्रेगनेन्ट होगइ हे..

लखन : (मुस्कुराते) तो क्या दोनोने सादी नही की..?

भावीका : पता नही.. बहुत बडे उद्योगपती थे तो अपनी इजतके कारण सादी नही कीहोगी.. लेकीन दोनो उनके घर साथ रहेने लगे.. मीन्स.. लीव इन रीलेशनमे.. फीर मेरा जन्म हुआ.. तो उसने मम्मीके लीये अ‍ेक अलग बंगला खरीद लीया.. ओर हम मां बेटी वही रहेने लगे..

लखन : (सामने देखते) तो क्या उसने आपकी मम्मीको छोड दीया..?

भावीका : (मुस्कुराते) नही.. फीर पापा रेग्युलर मेरी मम्मीको मीलने आते.. ओर पतीका हर फर्ज पुरा करते.. मे बहुत छोटी थी.. मेरे स्कुलमे जानेसे पहेले ही वो इस दुनीयासे चले गये.. फीर पता नही क्या हुआ.. मे होस्टेलमे चली गइ थी.. लेकीन मम्मी केह रही थी.. पापाने अ‍ेक वील भी बनाया हे.. लेकीन उनके बारेमे मुजे नही पता.. बस.. मम्मीने अ‍ेरे अ‍ेकाउन्टमे कुछ पैसे डाले थे.. उसीमे मेने पढाइ की..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा.. समज गया.. तभी आपको पढाइमे कोइ तकलीफ नही हुइ..

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. मम्मीने मुजे अच्छी स्कुलमे पढाया.. होस्टेलमे रहेनेका इन्तजाम कीया.. लेकीन मे पढनेमे इतनी अच्छी नही थी.. ओर उपरसे होस्टेलमे रहेकर पढती थी.. मुजपे पाबंदी लगाने वाला कोइ नही था.. ओर नाही कोइ मुजे डांटने वाला.. क्युकी मेरे कोलेजमे आनेसे पहेले मम्मी भी इस फानी दुनीया छोड चुकी थी..

लखन : (सामने देखते) तो फीर सब मेनेज कैसे कीया..?

भावीका : मम्मीके अ‍ेकाउन्टमे सीर्फ इतने ही पैसे थे जीनमे मेरी होस्टेलका ओर पढाइका खर्चा मेनेज हो सकता था.. तब मुजे पता चला इसके बाद सीर्फ मुजे ही संघर्स कना पडेगा.. इनमे मे मंहेगे ट्युसन भी अफोर्ट नही कर सकती.. मेरा अतीत बहुत खराब हे.. बहुत महेनतसे डोक्टर बनी हु.. इसके लीये मेने सोर्टकटका रास्ता अपना लीया..

लखन : (सामने देखते) सोर्टकट का रास्ता..? मतलब..?

भावीका : (फीकी मुस्कानसे) खुबसुरत थी.. जवानी उफानपे थी.. बस.. जींदगीकी जंग लडनेके लीये इसी खुबसुरत बदनको हथीयारके तौरपे इस्तमाल कीया.. जहा जरुरत पडी प्रोफेसरो प्रीन्सीपाल ओर डीनका बीस्तर गरम कीया.. ओर इस मुकामको हासील कीया.. जींदगीकी जंग जीतनेके लीये मेरे पास ओर कोइ रास्ता नही था.. ओर मुजे कीसीसे भीख मांगना मंजुर नही था.. सृती मेरे बारेमे सबकुछ जानती हे..

लखन : (मुस्कुराते) मे इसे आपकी मजबुरी कहु या आपकी हींमत..?

भावीका : (मुस्कुराते) मजबुरीसे ही तो हींमत आइ थी.. अ‍ेक ही सपना था.. खुब पैसे बनाना.. ओर सीक्योर लाइफ जीना.. ओर आज मेने दोनो मुकाम हासील करलीये हे.. आप जानते हे मे इलीगल काम करती हु.. मे जानती थी धृव अ‍ेक अयास आदमी हे.. लेकीन उनके बापकी पोजीसनसे मुजपे कोइ उंगली भी नही उठा सकता.. मुजे धृवसे प्यार नही था.. बस.. उनसे सादी करना मेरी मजबुरी थी..

लखन : (मुस्कुराते) आप जानती थीनां इनके पापा पोलीटीक्शमे हे.. इसीलीयेनां..?

भावीका : (फीकी मुस्कानसे) हां.. ओर इसके लीये मुजे इसकी कीमत भी चुकानी पडी.. उनके पापाका बीस्तर गरम करके.. वो भी दो बार.. कमीना साराका सारा खानदान ही सडा हुआ हे..

लखन : तो फीर वो बंगला..? जो आपकी मम्मी रहेती थी.. क्या वो बेच दीया..?

भावीका : (मुस्कुराते) नही.. उनमे मेरा बचपन ओर मम्मीकी याद बसी हुइ हे.. डोक्टर बनके थोडा सेटल होनेके बाद उनको मेरे नाम रजीस्टर करवा लीया हे.. ओर धृवसे सादीसे पहेले वही रहा करती थी.. अब ससुरालमे हु.. तो अ‍ैसे ही बंध रखा हे.. महीनेमे दो तीन बार साफ सफाइ करवाती हु.. क्युकी पता नही मुजे कब वहा वापस रहेना पडे..

लखन : (सामने देखते) क्यु..? अ‍ैसा क्यु सोचती हो..?

भावीका : लखन.. मुजे इस बाप बेटेपे बीलकुल भरोसा नही हे.. अ‍ेक को अपनी पार्टी वर्कर महीलाओसे फुरसत नही हे.. ओर धृव अपनी मां ओर बहेनके बीच फसा हुआ हे.. पुनोदीने मुजे इनकी मां ओर बहेनके बारेमे भी बहुत कुछ बताया हे.. वो अ‍ेक बार मेरे पुराने घरपे आना चाहती हे..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? पुनोने अ‍ैसा कहा आपको..? लेकीन क्यु..?

भावीका : (मुस्कुराते) पता नही.. लेकीन कहा.. अ‍ेक बार मुजे मेरे पुराने घरपे लेजाओ.. आपके लीये कुछ सरप्राइज हे.. तो आप अ‍ेक बार पुनो सृतीको लेकर आये.. आप भी मेरा घर देखले..

लखन : (सामने देखते) आयेगे.. तो फीर मेरे साथ रीलेशनका भी कोइ मक्सद होगा..

भावीका : (मुस्कुराते होंठ चुमते) हां.. हे अ‍ेक मक्सद.. जींदगीमे आप पहेले अ‍ैसा मर्दहो.. जीससे मुजे सच्चा प्यार हुआ हे.. ओर मे मेरी पीछली लाइफ सीक्योर करनेके लीये आपके साथ रीलेशन बना रही हु.. वो भी सच्चे दीलसे.. क्या आपको मुजपे कोइ ओर सक हे..?

लखन : (नांमे गरदन हीलाते) नही.. मे मेरी पुनमसे परमीशन लेकर आया हु.. उसने कहा था आप भी हमसे जुडी हे.. बस.. आप अपना दीलका बोज हल्का करना चाहती हे.. उनको अ‍ेक बार अच्छेसे सुन लेना..

भावीका : (मुस्कुराते) मुजे पता हे उनको सबके बारेमे सबकुछ पता चल जाता हे.. आप लोग कीतने अच्छे हे.. क्या आपको पता हे धृव इस वक्त कहा हे..?

लखन : (मुस्कुराते) नही.. सायद.. अपनी दीदीके पास.. अहेमदाबाद मीलने गया होगा..

भावीका : (मुस्कुराते) नही.. पासही के सहेरमे हे.. अपनी मम्मीजीके साथ.. कहेकर गये हे.. कीसी रीस्तेदारके यहा जरुरी कामसे जा रहे हे.. अब उपरसे उतरीये.. तो मे कुछ आपको दीखाती हु..
 
लखन : (होंठ चुमते) नही.. आज आपकी इमानदारीपे बहुत प्यार आरहा हे.. अ‍ेक बार ओर होजाये..?

भावीका : (हसते) क्या ओर होजाये.. अरे बाबा.. जींदगीमे पहेली बार लगातार दो दो बार संतुस्ट हुइ हु.. ओर ना जाने कीतनी बार जडी हु.. जींदगीमे अ‍ैसा पहेली बार हुआ हे.. मुजे पुरी नीचोडली.. ओर जनाबको अ‍ेक बार ओर करना हे.. हटीये.. पुरा दीन पडा हे.. फीर करते रहीये..

लखन : (होंठ चुमते कमर हीलाते) बस अ‍ेक बार.. फीर कुछ खा पीलेते हे.. तब दीखाना..

भावीका : (हसते) मानोगे नही.. बहुत जीदी हो.. ठीक हे कर लीजीये.. लेकीन धीरेसे..

कहेते भावीकाने लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनकी कमरपे पैरोसे आटी लगादी.. इस बार भी भावीकाको दो दो बार जडाके उनकी धमासान चुदाइ करली.. ओर अंतमे दोनो साथमे जड गये.. भावीकाकी पुरी चुत लबालब भरी हुइ थी..

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लखन उसे गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया.. तो दोनोका कामरस फर्सपे टपकते जा रहा था.. वहा अंदर बाथ लेते भी दोनो अ‍ेक दुसरेको साबुनसे मल रहेथे.. जीसे दोनो फीरसे उतेजीत होगये.. लखनने वहा भी भावीकाको खडे खडे चोद लीया.. फीर दोनो नहाकर नंगे ही बहार आ गये..

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भावीका : (बदन पोछते मुस्कुराते) पता नही था आप इतने रोमांन्टीक होगे.. अब इतनी सारी बीवीया होना लाजमी हे.. यहातो धृव अ‍ेक ही बारमे फुस हो जाता हे.. वोभी कभी कभी मुजे प्यासी रख देता हे.. पता नही उनकी बहेनको तीन तीन बार कैसे प्रेगनेन्ट कर दीया..

लखन : (सर पोछते मुस्कुराते) आप भी आइपील लेलेना.. वरना गडबड होजायेगी..

भावीका : (बाहोमे आते सीनेमे सर रखते धीरेसे) नही लखन.. कोइ जरुरत नही.. मेरा अ‍ेक हप्ते पहेले ही पीरीयड हुआ था.. अभी सही समय हे.. आइ वोन्ट टु बेबी.. सीर्फ हमारा बच्चा..

लखन : (मुस्कुराते) क्या ये सही हे..? वोतो धृव भी दे सकता हे.. सीर्फ हमारा ही क्यु..?

भावीका : (मुस्कुराते) कुछ तो कारण होगा.. उन बाप बेटेको सीर्फ मेरे पीछवाडेसे ही मतलब हे.. जैसे मे कोइ अ‍ैयासीका साधन हु.. तो बच्चा कहासे होगा..? जबसे मेने आपके उभारको देखा ओर सृतीसे आपके बारेमे सुना.. तबसे मेने ठान लीया थाकी चाहे कुछ भी होजाये.. बच्चा तो मे आपसे ही करुगी..

लखन : (हसते) अच्छा..? अ‍ैसा क्या खास हे मेरे हथीयारमे..

भावीका : (हसते लंड पकडते) खांस..? अरे बाबा कीपना बडा ओर दमदार हथीयार हे आपका.. अगर हमारा बच्चा होगा तो उनका भी अ‍ैसा ही होगानां..? तो मेरी पीछाली लाइफमे काम आ सकता हे.. हें..हें..हें..

लखन : (जोरोसे हसते) क्या..? तो क्या आप अपने बेटेसे ही.. हें..हें..हें..

भावीका : (सरमाते हसते) हां तो क्यु नही..? आपके गांवमे तो ये सब आम बात हेनां..? ओर यहा तो घरमे ही अ‍ैसा हो रहा हे.. चलो मे आपको कुछ दीखाती हु.. आप समज जाओगे..

कहेते भावीका लखनका हाथ पकडते उसे टेबलके पास लेगइ.. ओर अपने मोबाइलसे कुछ वीडीयो क्लीप दीखाने लगी.. जीनमे धृव अपनी मम्मीकी भुदाइ कर रहा था.. ओर कुछ क्लीप धृव ओर उनकी बहेन पुजाकी भी थी.. जब वो मायकेमे आती तब धृव उनकी चुदाइ कर रहा था..

फीर भावीका वोट्सअपपे स्क्रोल करते अ‍ेक नाम ढुंढकर चेटको ओपन करदी.. ओर फोटोपे क्लीक करते लखनको दीखाने लगी.. देखा तो धृवकी मम्मी कीसी होस्पीटलके बेडपे लेटी थी.. ओर धृव बाजुमे टेबलपे बैठा था..

लखन : (देखते) ये तो कोइ होस्पीटलकी तसवीर हे.. क्या आंटीकी तबीयत खराब हे..? इनको अ‍ेडमीट कीया हुआ हे..

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. लेकीन खराब तबीयतकी वजहसे नही.. इनका अ‍ेबोर्सन हुआ हे.. धृव इसीलीये रीस्तेदारको मीलनेका बहाना बनाकर उनको दुसरे सहेरमे लेगया हे.. ताकी यहा कीसीको पता नाचले.. ना मुजे.. ओर नाही उनकी बहेनको.. अब बात समजमे आइ..?

लखन : (तसवीर देखते) कमीना.. साला ये तो मुजसे भी दो कदम आगे नीकला.. क्या अंकलको इस बारेमे पता हे..?

भावीका : (फीकी मुस्कानसे) उस कमीनेको अपनी पार्टीकी ओरतोसे फुरसत मीले तब पता होगानां.. पार्टी वर्कर ओरतोको लेकर अ‍ेक अ‍ेक दो दो हप्ते बहार रहेता हे.. ओर यहा उनकी बीवी अपने बेटेसे ही ठुकवा रही हे.. प्रेगनेन्ट नही होगी तो क्या होगी..? आपको पता हे वो अपनी मम्मीका इनसे पहेले भी दो बार अ‍ेबोर्सन करवा चुका हे..

लखन : (मुस्कुराते) क्या..? लेकीन ये सब आपके पास कैसे आया..?

भावीका : (मुस्कुराते) उनको पता नही हे.. की वो जीसकी होस्पीटलमे गये हे वो मेरी क्लासमेन्ट थी.. ओर हमारी सादीमे भी आइ थी.. तभी तो वो मम्मीजी ओर धृवको पहेचानती हे..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा तो आपकी फ्रेन्डने भेजा हे.. अच्छा पकडलीया..

भावीका : (मुस्कुराते) कल अ‍ेबोर्सन हुआ.. दो दीन आराम करेगी.. फीर कहा जायेगी..? लेकीन मे कुछ नही कहुगी.. क्युकी मुजे भी अपनी सीक्योरीटी चाहीये.. सब कुछ जानते हुअ‍े भी मुजे नजर अंदाज करना पड रहा हे.. बस.. अ‍ेक बार हमारा बच्चा हो जाये.. फीर कोइ दीकत नही..

लखन : (मुस्कुराते) क्या सचमे आप अ‍ैसा चाहती हे..? आर यु सीरीयस.?

भावीका : (मुस्कुराते हां मे गरदन हीलाते) हां.. मैने बहुत सोच समजकर ये फैसला लीया हे.. लेकीन याद रहे.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेनी चाहीये.. मे धृवसे कन्वीस करा लुगी की ये बच्चा उनका हे.. हमे कुछ दीन ओर कोसीस जारी रखनी पडेगी.. फीर मे आपको फोर्स नही करुगी.. हां अगर आप मुजे कभी मीलना चाहो तो मेरा दरवाजा हमेसा खुला हे..

फीर दोनो कपडे पहेनकर कुछ खानेका ओर्डर करते हे.. फीर कुछ देर आराम करते देर रात तक दोनोने खुब प्यार कीया.. अबतक लखनने भावीकाकी सारी कशर पुरी करदी थी.. उनको अबतक छेसे सात बार चोद लीया था.. लखनने इतनी चुदाइ कीसीकी नही कीथी..

फीर रातका डीनर करके लखन वापस घर आगया.. ओर भावीका वही सो गइ.. तब भावीकाको पता नही था की उसने लखनसे जीतनी उमीद कीथी उनसे कही ज्यादा पा लीया था.. बस.. इस बारेमे तो उनको अगली महावारी आने तक इन्तजार करना था..
 
तो गांवमे भी साहीलके घरपे नीकाहकी तैयारीया गुपचुपसे चल रही थी.. बीचमे सलमाने मौका मीलते ही साहीलको सबकुछ समजा दीया तो साहील सरमाके हसने लगा.. दो पहोरको खानेके बाद आराम करते मौका मीला तो साहीलने सलमाको चोद लीया..

सलमा साहील ओर जरीनाको अकेले मीलनेका मौका दे रही थी.. तो जरीना भी सलमाके कहेनेपे साहीलको रीजानेकी कोसीस करने लगी.. वो अब बीना सरम साहीलकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराने लगी.. ओर मौका मीलतेही साहीलकी हल्कीसी मजाक करते उसे छेड देती..

तो साहील भी कम नही था.. वोभी काम करते कभी कभी जरीनाको छु लेता.. तो जरीना बहुत ही सरमा जाती.. ओर मंद मंद मुस्कुराने लगती.. फीर साहीलकी पीठपे हसकर मुका मारती.. तो साहील भी उनकी खुली कमरपे चीमटी काट लेता.. तो जरीना साहीलको मारने आती तो साहील उनके दोनो हाथ पकडते बाहोमे भर लेता..

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जरीना जोरोसे हसते साहीलकी बाहोसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करती.. फीर साहीलकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराते छोडनेकी मनते करती.. सलमा दोनोकी मस्तीया देखकर सबकुछ समज गइ.. की जरीना ओर साहील दोनोही आगे बढ रहे हे.. जब फोरोज काजी साहबको कलके लीये मीलने गया तो साहीलको मौका मील गया..

सलमा साहीलकी ओर मुस्कुराते बहाना बनाकर कमरेसे बहार चली गइ.. तो जरीना ओर साहील दोनो कमरेमे अकेले रेह गये.. जरीनाके दीलकी धडकन बढ गइ.. वो बहुत ही सर्मसार होने लगी.. वो साहीलको तीरछी नजरोसे देखते हसने लगी.. तभी साहीलने अ‍ैसा कुछ कीया..

जीसे जरीना सरमसे पानी पानी होगइ.. साहीलने अचानक जरीनाका हाथ पकडते अपनी ओर खीच लीया.. ओर जरीनाको अपनी बहोमे भीच लीया.. जरीना सरमाते जोरसे हसने लगी.. ओर साहीलकी बाहोसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी..

तभी साहीलने उनके गालको चुम लीया.. तो जरीना सरमाके हसते हुअ‍े साहीलकी बाहोसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करते अपना मुह इधर उधर करने लगी.. तभी साहीलने जरीनाके चहेरेको अपनी हथेलीओमे थाम लीया.. तो जरीनाने अपनी मुस्कुराते पलके जुकाली.. ओर साहीलने उनके होठोपे होठ रख दीया..

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जरीनाने आंख बंध करते जोरोसे होठ भीच लीये.. उसने साहीलकी बाहोसे छुटनेकी कोसीस छोडदी.. फीर धीरेसे आंख खोलदी.. ओर अपने होठोको थोडे ढीले कर दीये.. फीर साहीलको चुमनेमे साथ देने लगी.. जब साहीलने होठ छोडा तो जरीना सरमसे पानी पानी होगइ..

जरीना : (फुसफुसाते धीरेसे) साहील.. प्लीज.. अभी नही.. दीदी यही हे.. हम कल रात आरामसे मीलते हेनां.. अभी छोडीये मुजे..

साहील : (मुस्कुराते) चाची.. क्या आप राजी तो होनां..? क्युकी मे आपकी बेटीसे सादी कर रहा हु..

जरीना : (सरमाते हांमे गरदन हीलाते) हां.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. बाकी सब बाते कल करेगे.. हभी छोडो मुजे कोइ आजायेगा..

साहील : (मुस्कुराते बाहोमे भीचते) अ‍ैसे नही.. मुजे खुलकर बोलीये.. आइ लव यु..

जरीना : (हसते) अरे छोडीयेनां.. आप बहुत बदमास हो.. वो सब कल.. अकेलेमे..

साहील : (उरोजोको थामते) कल नही.. अभी.. सीर्फ अ‍ेक बार..

जरीना : (सीहरते फुसफुसाते) बहुत जीदीहे आप.. ठीक हे.. आइ लव यु टु बा.. अब तो छोडीये..

फीर तो दोनोके बीच हल्कीसी छेडखानी सुरु होगइ.. हर बार जरीना हसते साहीलको जवाब देती.. इधर फीरोजभी बहुत अक्साइटेड था.. क्युकी कल उनके लीये अ‍ेक नइ चुतका इन्तजाम होने वाला था.. लेकीन उनको पता नही थाकी उनकी पीठ पीछे यहा क्या क्या प्लानींग हो चुकी थी..

सलमाने साहीलके लीये भी नइ चुतका इन्तजाम करलीया था.. ओर जरीना भी नये जवान लंडके लीये बहुत ही उत्साहीत थी.. वो अपने पती ओर अपने बडे बेटेसे चुदवा चुकी थी.. ओर कल उसे अपना छोटा बेटा भी चोदने वाला था.. तो इस रात उनको जरीनाने हाथ नही लगाने दीया..

तो इधर सहेरमे लखन देर रात घरपे आगया.. घरमे अंधेरा छाया हुआ था.. सब लोग अपने अपने कमरेमे जा चुके थे.. लखन दरवाजा बंध करके उपरकी मंजसकी ओर जाने लगा.. तभी उसे अ‍ेक आवाज आइ.. लखनने देखा तो चंदा अंधेरेमे सोफेपे अकेली बैठकर उनका इन्तजार कर रही थी..

चंदा : (धीरेसे) लखन..

लखन : (सोफेकी ओर देखते) अरे भाभी.. आप अभी तक जाग रही हे..? सोइ नही क्या..?

चंदा : (सामने देखते धीरेसे) नही.. आपका इन्तजार कर रही थी.. इधर आइअ‍े.. मुजे आपसे कुछ जरुरी बात करनी हे..

लखन : (सुबहकी हरकत याद आते ही थोडा डरते पास जाते) जी.. जी भाभी.. कहीये..

चंदा : (सामने देखते) बैठीये इधर.. मुजे आपसे बात करनी हे..

लखन : (बैठते धीरेसे) भाभी.. आइ अ‍ेम सोरी..

चंदा : (अ‍ेक नजरसे देखते धीरेसे) तो आपको सब पता हे की सुबह आपने क्या कीया था..

लखन : (नजरे जुकाते धीरेसे) जी.. मे थोडा भावनाओमे बहेक गया था.. सोचा हम गर्ल फ्रेन्ड बोय फ्रेन्ड हे तो आपको बुरा नही लगेगा.. आइ अ‍ेम सोरी..

चंदा : (सामने देखते) अगर हम गर्लफ्रेन्ड बोयफ्रेन्ड हे तो कुछ भी..? गर्लफ्रेन्ड बोयफ्रेन्डसे पहेले मे आपकी भाभी हु.. ओर गर्लफ्रेन्ड बोयफ्रेन्डकी भी अ‍ेक सीमा होती हे.. ओर मुजे लगता हे हमे अपनी सीमा तय करनी होगी..
 
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