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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २७७
वृन्दा बहुत ही कामुक ओरत थी.. उसे हर रात प्यार चाहीये था.. मानो उनको चुदाइकी आदत लग चुकी थी.. ओर उनको अैसा जवान मर्द चाहीये था जो कीसीको उनपे सक ना हो.. ओर पहेली बार श्रीधरकद गले मीलते नीचे चुंभन हुइ तब ही वृन्दाने श्रीधरको फसानेका मन बना लीया था.. ये भी नही सोचाकी ये उनका भांजा ओर अब उनका दामाद भी हे.. ओर आज गोद भरइाकी रश्मके बहाने इस रीस्तेको आगे बढाने आइ थी.. इसीलीये तो ब्रीन्दाके फोन आते ही उसने आनेके लीये हां केह दीया था.... अब आगे
तो दुसरी ओर पुनमने लखनको सबकुछ समजा दीया.. की चंदाके साथ कैसे आगे बढना हे.. ओर चंदाको पहेली बार जबरदस्तीसे अेक मोर्डन ड्रेस पहेनाया.. तो चंदा बहुत ही सर्मसार होने लगी.. पुनमने चंदाको अेक जवान लडकीकी तराह हल्कासा मेकअप करके सजा दीया..
ओर सामको जब लखन राधीकाको लेकर घर आया तो चंदा पहेलेसे ही रेडी थी.. लखन भी फ्रेस होते तैयार होगया.. ओर चंदाको लखनके साथ अकेले घुमने भेज दीया.. आज चंदा लखनके साथ उनकी नइ कारमे आगे बैठी थी ओर बहुत ही सरमा रही थी.. लखन पहेले उसे कोलेजके पास ले गया.. ओर कारको वही रोक दी..
लखन : (मुस्कुराते कोलेजकी ओर इसारा करते) भाभी.. देखीये ये हमारा कोलेन हे.. जहा बापु नीर्मला आंटी.. भुमी भाभी.. फीर बडे भैया मंजुमोम.. भावनाभाभीके बाद मे ओर पुनोभी यही पढे हे..
चंदा : (मुस्कुराते) जानती हु मे.. आपके बडे भाइसे पहेले मेभी इस कोलेजमे पढ चुकी हु.. ओर तब मे हमारी ही होस्टेलमे रहेती थी.. जहा पुनो रहेती थी.. मेने सबकुछ देखा हे यहा..
लखन : (हसते) अच्छा..? तबतो आपने यहा सबकुछ देखा होगा.. तो फीर मे आपको कहा घुमाने लेजाउ..? हें..हें..हें..
चंदा : (हसते) अरे.. कहीभी घुमाओ.. मेतो बस आपके साथ घुमना चाहती हु.. मेरी पढाइके बाद यहा काफी कुछ बदल चुका हे.. नया होटेल.. मोल.. मोलमे थीअेटर.. बहुत कुछ.. मेने नया कुछ भी नही देखा..
लखन : (मुस्कुराते) तो क्या हम कीसी थीअेटरमे चले..? कोइ अच्छीसी फील्म देखेगे..
चंदा : फील्म..? नही.. रातमे बहुत देर हो जायेगी.. कीसी ओर दीन चलेगे.. जैसे थीअेटर तो बहुत देखे हे पर मोलके नही देखे.. कभी हम मोलमे ही फील्म देखने चलेगे.. अभी तो कोइ अच्छे गार्डनमे लेलो.. फीर घर चले जायेगे..
लखन : (आस्चर्यसे देखते) गार्डन..? हमे डीनर भी करना हे.. पुनोने कहा हे..
चंदा : (सरमाते धीरेसे) हां गार्डन.. वहा बहुत अच्छा लगता हे.. सीर्फ अेक बार गइ थी.. वोभी सहेलीओके साथ.. आज वहा लेलो.. देखेतो सही वहा कीतना बदलाव हुआ हे..
फीर लखन ओर चंदा सहेरके मसहुर गार्डनमे चले गये.. वहा ज्यादातर प्रेमी जोडा ही थे.. कुछ लोग फेमीलीके साथ आये थे जो उनके बच्चे खेल रहे थे.. लखन ओर चंदा कार पार्क करके अंदर चले गये.. दोनो साथ साथ चल रहे थे.. ना दुरी बनाके ना ज्यादा नजदीक..
चंदा : (मुस्कुराते) देवरजी.. यहा तो काफी कुछ बदल गया हे.. पहेलेसे भी ज्यादा सुंदर हेये..
लखन : (मुस्कुराते अेक बेंचकी ओर इसारा करते) हां भाभी.. चलो यहा जगा हे.. वही बैठते हे..
चंदा : (बेंचपे बैठते मुस्कुराते) पता हे देवरजी.. मे कीसी लडके के साथ जींदगीमे पहेली बार गार्डनमे आइ हु.. अेक बार आइ थी वोभी पढाइके वक्त सहेलीओके साथ..
लखन : (पास बैठते) क्या केह रही हो भाभी..? कीसीके साथ नही आइ..? कोलेजमे कोइ बोयफ्रेन्ड..
चंदा : (मुस्कुराते) नही.. कभी नही.. मे इस चकरमे कभी नही पडी.. तब हमारी हालत भी उतनी अच्छी नही थी.. बादमे पता चलाकी मेरी पढाइ ओर होस्टेलके खर्चा आपके बापु दे रहे थे.. तब सायद होस्टेल आपकी राधीकाकी मम्मी सम्हाल रही थी.. आपके बापु अक्सर उनको मीलने आते थे..
लखन : (मुस्कुराते) आपको पता हे वो कौन थी..?
चंदा : (मुस्कुराते) हां.. तब पता नही था.. बादमे पता चलाकी वो हमारे रामुकाकाकी छोटी बहेन थी.. ओर उनका बापुके साथ रीलेशन था.. मंजुने बताया सब.. दयाकी मौसी हेनां..?
लखन : (मुस्कुराते) हां.. बापुके साथ उनका नाजायज रीस्ता था.. उनकी बडी बहेनके साथ भी.. जो हमारी हवेलीमे काम करती थी.. इसीलीये तो राधु मेरी बहेन हे..
चंदा : (मुस्कुराते) पता नही तब आपके बापुके कीतनी ओरतोके साथ रीस्ता था.. अब तो अैसे रीस्तोसे कोइ फर्कभी नही पडता.. राधुकी मम्मी बहुत कडक थी.. हमे कभी कभार ही बहार नीकलने देती थी.. कोलेज खतम होते ही सादी होगइ.. फीर भी पती इधर नही लेआया.. बादमे मेरी जींदगीमे देवु आया.. वो भी मुजे दो तीन बार यहा लेकर आया.. लेकीन वोभी सीर्फ होटेलमे..
लखन : (हसते) अच्छा दोनो मजे करने आये थे.. हें..हें..हें..
चंदा : (सर्मसार होते जुठे गुस्सेसे अेक मुका मारते) न..ही.. मतलब.. हां.. सीर्फ दो बार.. हम दोनोका सबसे छुपकर अफैर चल रहा था.. सादीतो बादमे हुइ.. फीर खाना खाकर वापस गांव चले जाते.. ओर वो भी दो पहोर.. धीरेनके ओनेसे पहेले गांव पहोंचना जरुरी था.. लेकीन आज पहेली बार आपके साथ गार्डनमे आइ हु..
लखन : (नजर घुमाते) भाभी.. देखो.. ज्यादातर लवर्स ही यहा आते हे..
चंदा : (मुस्कुराते) हां देख रही हु.. कमसे कम तसलीतो मीलीकी चलो बोयफ्रेन्ड नही.. लेकीन मे अपने देवरके साथ तो आइ हु..
अध्याय - २७७
वृन्दा बहुत ही कामुक ओरत थी.. उसे हर रात प्यार चाहीये था.. मानो उनको चुदाइकी आदत लग चुकी थी.. ओर उनको अैसा जवान मर्द चाहीये था जो कीसीको उनपे सक ना हो.. ओर पहेली बार श्रीधरकद गले मीलते नीचे चुंभन हुइ तब ही वृन्दाने श्रीधरको फसानेका मन बना लीया था.. ये भी नही सोचाकी ये उनका भांजा ओर अब उनका दामाद भी हे.. ओर आज गोद भरइाकी रश्मके बहाने इस रीस्तेको आगे बढाने आइ थी.. इसीलीये तो ब्रीन्दाके फोन आते ही उसने आनेके लीये हां केह दीया था.... अब आगे
तो दुसरी ओर पुनमने लखनको सबकुछ समजा दीया.. की चंदाके साथ कैसे आगे बढना हे.. ओर चंदाको पहेली बार जबरदस्तीसे अेक मोर्डन ड्रेस पहेनाया.. तो चंदा बहुत ही सर्मसार होने लगी.. पुनमने चंदाको अेक जवान लडकीकी तराह हल्कासा मेकअप करके सजा दीया..
ओर सामको जब लखन राधीकाको लेकर घर आया तो चंदा पहेलेसे ही रेडी थी.. लखन भी फ्रेस होते तैयार होगया.. ओर चंदाको लखनके साथ अकेले घुमने भेज दीया.. आज चंदा लखनके साथ उनकी नइ कारमे आगे बैठी थी ओर बहुत ही सरमा रही थी.. लखन पहेले उसे कोलेजके पास ले गया.. ओर कारको वही रोक दी..
लखन : (मुस्कुराते कोलेजकी ओर इसारा करते) भाभी.. देखीये ये हमारा कोलेन हे.. जहा बापु नीर्मला आंटी.. भुमी भाभी.. फीर बडे भैया मंजुमोम.. भावनाभाभीके बाद मे ओर पुनोभी यही पढे हे..
चंदा : (मुस्कुराते) जानती हु मे.. आपके बडे भाइसे पहेले मेभी इस कोलेजमे पढ चुकी हु.. ओर तब मे हमारी ही होस्टेलमे रहेती थी.. जहा पुनो रहेती थी.. मेने सबकुछ देखा हे यहा..
लखन : (हसते) अच्छा..? तबतो आपने यहा सबकुछ देखा होगा.. तो फीर मे आपको कहा घुमाने लेजाउ..? हें..हें..हें..
चंदा : (हसते) अरे.. कहीभी घुमाओ.. मेतो बस आपके साथ घुमना चाहती हु.. मेरी पढाइके बाद यहा काफी कुछ बदल चुका हे.. नया होटेल.. मोल.. मोलमे थीअेटर.. बहुत कुछ.. मेने नया कुछ भी नही देखा..
लखन : (मुस्कुराते) तो क्या हम कीसी थीअेटरमे चले..? कोइ अच्छीसी फील्म देखेगे..
चंदा : फील्म..? नही.. रातमे बहुत देर हो जायेगी.. कीसी ओर दीन चलेगे.. जैसे थीअेटर तो बहुत देखे हे पर मोलके नही देखे.. कभी हम मोलमे ही फील्म देखने चलेगे.. अभी तो कोइ अच्छे गार्डनमे लेलो.. फीर घर चले जायेगे..
लखन : (आस्चर्यसे देखते) गार्डन..? हमे डीनर भी करना हे.. पुनोने कहा हे..
चंदा : (सरमाते धीरेसे) हां गार्डन.. वहा बहुत अच्छा लगता हे.. सीर्फ अेक बार गइ थी.. वोभी सहेलीओके साथ.. आज वहा लेलो.. देखेतो सही वहा कीतना बदलाव हुआ हे..
फीर लखन ओर चंदा सहेरके मसहुर गार्डनमे चले गये.. वहा ज्यादातर प्रेमी जोडा ही थे.. कुछ लोग फेमीलीके साथ आये थे जो उनके बच्चे खेल रहे थे.. लखन ओर चंदा कार पार्क करके अंदर चले गये.. दोनो साथ साथ चल रहे थे.. ना दुरी बनाके ना ज्यादा नजदीक..
चंदा : (मुस्कुराते) देवरजी.. यहा तो काफी कुछ बदल गया हे.. पहेलेसे भी ज्यादा सुंदर हेये..
लखन : (मुस्कुराते अेक बेंचकी ओर इसारा करते) हां भाभी.. चलो यहा जगा हे.. वही बैठते हे..
चंदा : (बेंचपे बैठते मुस्कुराते) पता हे देवरजी.. मे कीसी लडके के साथ जींदगीमे पहेली बार गार्डनमे आइ हु.. अेक बार आइ थी वोभी पढाइके वक्त सहेलीओके साथ..
लखन : (पास बैठते) क्या केह रही हो भाभी..? कीसीके साथ नही आइ..? कोलेजमे कोइ बोयफ्रेन्ड..
चंदा : (मुस्कुराते) नही.. कभी नही.. मे इस चकरमे कभी नही पडी.. तब हमारी हालत भी उतनी अच्छी नही थी.. बादमे पता चलाकी मेरी पढाइ ओर होस्टेलके खर्चा आपके बापु दे रहे थे.. तब सायद होस्टेल आपकी राधीकाकी मम्मी सम्हाल रही थी.. आपके बापु अक्सर उनको मीलने आते थे..
लखन : (मुस्कुराते) आपको पता हे वो कौन थी..?
चंदा : (मुस्कुराते) हां.. तब पता नही था.. बादमे पता चलाकी वो हमारे रामुकाकाकी छोटी बहेन थी.. ओर उनका बापुके साथ रीलेशन था.. मंजुने बताया सब.. दयाकी मौसी हेनां..?
लखन : (मुस्कुराते) हां.. बापुके साथ उनका नाजायज रीस्ता था.. उनकी बडी बहेनके साथ भी.. जो हमारी हवेलीमे काम करती थी.. इसीलीये तो राधु मेरी बहेन हे..
चंदा : (मुस्कुराते) पता नही तब आपके बापुके कीतनी ओरतोके साथ रीस्ता था.. अब तो अैसे रीस्तोसे कोइ फर्कभी नही पडता.. राधुकी मम्मी बहुत कडक थी.. हमे कभी कभार ही बहार नीकलने देती थी.. कोलेज खतम होते ही सादी होगइ.. फीर भी पती इधर नही लेआया.. बादमे मेरी जींदगीमे देवु आया.. वो भी मुजे दो तीन बार यहा लेकर आया.. लेकीन वोभी सीर्फ होटेलमे..
लखन : (हसते) अच्छा दोनो मजे करने आये थे.. हें..हें..हें..
चंदा : (सर्मसार होते जुठे गुस्सेसे अेक मुका मारते) न..ही.. मतलब.. हां.. सीर्फ दो बार.. हम दोनोका सबसे छुपकर अफैर चल रहा था.. सादीतो बादमे हुइ.. फीर खाना खाकर वापस गांव चले जाते.. ओर वो भी दो पहोर.. धीरेनके ओनेसे पहेले गांव पहोंचना जरुरी था.. लेकीन आज पहेली बार आपके साथ गार्डनमे आइ हु..
लखन : (नजर घुमाते) भाभी.. देखो.. ज्यादातर लवर्स ही यहा आते हे..
चंदा : (मुस्कुराते) हां देख रही हु.. कमसे कम तसलीतो मीलीकी चलो बोयफ्रेन्ड नही.. लेकीन मे अपने देवरके साथ तो आइ हु..