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लखन : (बेडपे बैठते) हां बोलो..
पुनम : (सामने देखते धीरेसे) सृतीदीका बच्चा गीर गया हे.. ओर इस बातका उसे कोइ अफसोस भी नही हे.. आज कहेती थी मेरे अेक्स हसबन्डका बच्चा था.. अब मे मेरे लखनके बच्चे पैदा करुगी..
लखन : (सामने देखते) पुनो.. क्या ये सही हे..? ज्यादा सेक्सकी वजहसे हुआ हेनां..?
पुनम : (मुस्कुराते अपनी बींदी लगाते) नही.. उनकी कीस्मतमे लीखा था.. वो भी मनसे इस बच्चेको नही चाहती थी.. अब आपको अेक ओरकी कोख भरनी हे.. बीलुकल नइ.. आपपे बहुत लटु हे.. उसे बच्चा देदो..
लखन : (सामने देखते) यार.. मे क्या बच्चा देनेका मशीन हु..? कौन हे वो..?
पुनम : (सामने देखते धीरेसे) हमारे धृव भैयाकी बीवी.. भावीका..
लखन : (सामने देखते) पुनो.. तुजे नही लगता अब ये कुछ ज्यादा हो रहा हे..?
पुनम : (सींदुरकी डीबी लेकर पास आते) नही.. मत भुलो आप ओर हम कौन हे.. ओर ये सब आपके मजेके लीये नही हे.. वो हमारे वीजयके लीये हे.. तो आपको जीतना कहा जाये उतना करते जाइअे.. लीजीये मांग भर दीजीये..
लखन : (खडा होते मांग भरते) हां ये तुम ओर सृती नही भुलती.. अब अपने आप भरलो..
पुनम : (जुठे गुस्सेसे देखते) क्यु.. आपको मांग भरनेमे कोइ तकलीफ हो रही हे..? चुपचाप भरदो.. अब आपकी बीवी हु.. आप जब बोलते हो मे देती हु.. मेने कभी आपको मना कीया..?
लखन : (बाहोमे भीचते हसते) ओह.. सोरी सोरी.. माइ स्वीट हार्ट.. नाराज क्यु होती हे.. क्या भावीका भाभीसे कोइ बात हुइ..?
पुनम : (दांत पीसते सीनेमे मुका मारते) देखा..? नही चुतके लीये कैसे मचल रहे हो.. कोइ बात नही हुइ.. ओर वो कुछ आगे बढना चाहे तो मना मत करना.. आगे बढना..
लखन : (सामने देखते) पुनो.. क्या ये धृव भैयाके साथ धोखा नही हे..? वो तो बच्चे देनेमे भी सक्षम हे..
पुनम : (सामने देखते) ओर तुम्हारा धृव भैया उनकी बहेन ओर उनकी मां को ठोकते उनकी बीवीको धोखा दे रहा हे वो..? ओर पता हे..? मुजे लगता हे ये बात भावीकाको भी पता चल गइ हे.. अब मीलेगी तब बात होगी.. फीर कुछ ओर वजह भी हे.. जीसे भावीका आपका बच्चा ही चाहती हे..
लखन : (सामने देखते) ठीक हे पुनो.. सायद उनकी बहेन पुजा दुबारा प्रेगनेन्ट होगइ हे.. उनका पहेला बच्चा भी धृव भैयाका हे.. ओर अब ये दुसरा..
पुनम : (मुस्कुराते) दुसरा नही तीसरा.. आप भुल गये.. पहेले बच्चेकी वजहसे ही उनका अपने पहेले पतीसे डीवोर्स हुआ था.. फीर उनकी दुसरी सादी हुइ.. तब ओलरेडी उनके गर्भमे धृव भैयाका दुसरा बच्चा था.. वो भी अपने भाइके पीछे पागल हे.. मेरी तराह.. हें..हें..हें..
लखन : (जोरोसे हसते) कमीने मेरे सभी दोस्त अैक जैसे ही हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (हसते) भाइ.. अेक बात ओर बताउ.. धृव भैयाने दो बार उनकी मम्मीका भी अेबोर्सन करवाया हे.. कमीनी वो भी अपने बेटेके पीछे पागल हे..
लखन : (मुस्कुराते) बेचारी क्या करेगी..? अंकल उनपे ध्यान नही हेते होगे..
पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. वो कहेते हेनां.. घरकी मुर्गी दाल बराबर.. कमीना वो भी बहुत चुदाइका सौकीन हे.. अपनी पार्टीकी कइ ओरते ओर लडकीयाको चोद चुका हे.. ओर कुछ तो परमेनेन्ट होगइ हे.. जीनको कइ बार प्रेगनेन्ट कर चुका हे.. ओर सबका ओब्रेसन भावीका भाभीसे करवाता हे..
लखन : (आस्चर्यसे सुनते) क्या..? खुद अपने बेटेकी बहुसे..? इतना ठरकी हे कमीना..? उनको अपनी बहुसे डर नही लगता क्या..?
पुनम : (मुस्कुराते) डर..? क्युकी वो कमीना जानता हेकी भाभी इलीगल अेबोर्सनका काम करती हे.. ओर दो बार वो भी भाभीके पीछवाडेका लाभ ले चुका हे.. धृव भैयाकी तराह उनका बाप भी भावीका भाभीके पीछवाडेका सौकीन हे.. ओर भाभी मजबुरीके कारण कुछ नही बोलपाती..
लखन : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? साला हरामी.. भाभीकी मजबुरीका अच्छा फायदा उठा रहा हे.. सायद ये बात भाभी जानती होगी इसीलीये उसने अलग मन बनालीया होगा..
पुनम : (मुस्कुराते) बीलकुल सही सोचा हे आपने.. अब चलो नीचे.. सबलोग नीचे इन्तजार करते होगे..
लखनने पुनको बाहोमे भीचते उनके होठोको चुम लीया.. फीर दोनो साथ नीचे आगये.. वहा भावना अपनी बच्चीको दुध पीला रही थी.. तो लखनकी ओर देखते ही सरमा गइ.. ओर अपने पलुसे आचलको ढकते लखनकी ओर देखते कामुक स्माइल करने लगी..
लखनने भुकीका का हाल चाल जाना.. फीर सबलोग बाते करते रहे.. खाना बन गया तो सबलोग खानेपे बैठ गये.. फीर लखन ओर पुनम टीफीन लेकर होस्पीटलपे चले गये.. सृती अब काफी बेहतर लग रही थी.. तो लखनने देवायतको घर जानेके लीये केह दीया..
मंजु देवायत साम तक रुके.. भावीकाने कल छुटीका केह दीया तो मंजुने सृतीको उनकी मम्मीके यहा आराम करनेकी सलाह दी.. फीर सबलोगोकी इजाजत लेकर देवायत भानु ओर मंजु चले गये.. लखनके घर जाकर अपना सामान लेकर सीधे गांवकी ओर नीकल गये..
पुनम : (सामने देखते धीरेसे) सृतीदीका बच्चा गीर गया हे.. ओर इस बातका उसे कोइ अफसोस भी नही हे.. आज कहेती थी मेरे अेक्स हसबन्डका बच्चा था.. अब मे मेरे लखनके बच्चे पैदा करुगी..
लखन : (सामने देखते) पुनो.. क्या ये सही हे..? ज्यादा सेक्सकी वजहसे हुआ हेनां..?
पुनम : (मुस्कुराते अपनी बींदी लगाते) नही.. उनकी कीस्मतमे लीखा था.. वो भी मनसे इस बच्चेको नही चाहती थी.. अब आपको अेक ओरकी कोख भरनी हे.. बीलुकल नइ.. आपपे बहुत लटु हे.. उसे बच्चा देदो..
लखन : (सामने देखते) यार.. मे क्या बच्चा देनेका मशीन हु..? कौन हे वो..?
पुनम : (सामने देखते धीरेसे) हमारे धृव भैयाकी बीवी.. भावीका..
लखन : (सामने देखते) पुनो.. तुजे नही लगता अब ये कुछ ज्यादा हो रहा हे..?
पुनम : (सींदुरकी डीबी लेकर पास आते) नही.. मत भुलो आप ओर हम कौन हे.. ओर ये सब आपके मजेके लीये नही हे.. वो हमारे वीजयके लीये हे.. तो आपको जीतना कहा जाये उतना करते जाइअे.. लीजीये मांग भर दीजीये..
लखन : (खडा होते मांग भरते) हां ये तुम ओर सृती नही भुलती.. अब अपने आप भरलो..
पुनम : (जुठे गुस्सेसे देखते) क्यु.. आपको मांग भरनेमे कोइ तकलीफ हो रही हे..? चुपचाप भरदो.. अब आपकी बीवी हु.. आप जब बोलते हो मे देती हु.. मेने कभी आपको मना कीया..?
लखन : (बाहोमे भीचते हसते) ओह.. सोरी सोरी.. माइ स्वीट हार्ट.. नाराज क्यु होती हे.. क्या भावीका भाभीसे कोइ बात हुइ..?
पुनम : (दांत पीसते सीनेमे मुका मारते) देखा..? नही चुतके लीये कैसे मचल रहे हो.. कोइ बात नही हुइ.. ओर वो कुछ आगे बढना चाहे तो मना मत करना.. आगे बढना..
लखन : (सामने देखते) पुनो.. क्या ये धृव भैयाके साथ धोखा नही हे..? वो तो बच्चे देनेमे भी सक्षम हे..
पुनम : (सामने देखते) ओर तुम्हारा धृव भैया उनकी बहेन ओर उनकी मां को ठोकते उनकी बीवीको धोखा दे रहा हे वो..? ओर पता हे..? मुजे लगता हे ये बात भावीकाको भी पता चल गइ हे.. अब मीलेगी तब बात होगी.. फीर कुछ ओर वजह भी हे.. जीसे भावीका आपका बच्चा ही चाहती हे..
लखन : (सामने देखते) ठीक हे पुनो.. सायद उनकी बहेन पुजा दुबारा प्रेगनेन्ट होगइ हे.. उनका पहेला बच्चा भी धृव भैयाका हे.. ओर अब ये दुसरा..
पुनम : (मुस्कुराते) दुसरा नही तीसरा.. आप भुल गये.. पहेले बच्चेकी वजहसे ही उनका अपने पहेले पतीसे डीवोर्स हुआ था.. फीर उनकी दुसरी सादी हुइ.. तब ओलरेडी उनके गर्भमे धृव भैयाका दुसरा बच्चा था.. वो भी अपने भाइके पीछे पागल हे.. मेरी तराह.. हें..हें..हें..
लखन : (जोरोसे हसते) कमीने मेरे सभी दोस्त अैक जैसे ही हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (हसते) भाइ.. अेक बात ओर बताउ.. धृव भैयाने दो बार उनकी मम्मीका भी अेबोर्सन करवाया हे.. कमीनी वो भी अपने बेटेके पीछे पागल हे..
लखन : (मुस्कुराते) बेचारी क्या करेगी..? अंकल उनपे ध्यान नही हेते होगे..
पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. वो कहेते हेनां.. घरकी मुर्गी दाल बराबर.. कमीना वो भी बहुत चुदाइका सौकीन हे.. अपनी पार्टीकी कइ ओरते ओर लडकीयाको चोद चुका हे.. ओर कुछ तो परमेनेन्ट होगइ हे.. जीनको कइ बार प्रेगनेन्ट कर चुका हे.. ओर सबका ओब्रेसन भावीका भाभीसे करवाता हे..
लखन : (आस्चर्यसे सुनते) क्या..? खुद अपने बेटेकी बहुसे..? इतना ठरकी हे कमीना..? उनको अपनी बहुसे डर नही लगता क्या..?
पुनम : (मुस्कुराते) डर..? क्युकी वो कमीना जानता हेकी भाभी इलीगल अेबोर्सनका काम करती हे.. ओर दो बार वो भी भाभीके पीछवाडेका लाभ ले चुका हे.. धृव भैयाकी तराह उनका बाप भी भावीका भाभीके पीछवाडेका सौकीन हे.. ओर भाभी मजबुरीके कारण कुछ नही बोलपाती..
लखन : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? साला हरामी.. भाभीकी मजबुरीका अच्छा फायदा उठा रहा हे.. सायद ये बात भाभी जानती होगी इसीलीये उसने अलग मन बनालीया होगा..
पुनम : (मुस्कुराते) बीलकुल सही सोचा हे आपने.. अब चलो नीचे.. सबलोग नीचे इन्तजार करते होगे..
लखनने पुनको बाहोमे भीचते उनके होठोको चुम लीया.. फीर दोनो साथ नीचे आगये.. वहा भावना अपनी बच्चीको दुध पीला रही थी.. तो लखनकी ओर देखते ही सरमा गइ.. ओर अपने पलुसे आचलको ढकते लखनकी ओर देखते कामुक स्माइल करने लगी..
लखनने भुकीका का हाल चाल जाना.. फीर सबलोग बाते करते रहे.. खाना बन गया तो सबलोग खानेपे बैठ गये.. फीर लखन ओर पुनम टीफीन लेकर होस्पीटलपे चले गये.. सृती अब काफी बेहतर लग रही थी.. तो लखनने देवायतको घर जानेके लीये केह दीया..
मंजु देवायत साम तक रुके.. भावीकाने कल छुटीका केह दीया तो मंजुने सृतीको उनकी मम्मीके यहा आराम करनेकी सलाह दी.. फीर सबलोगोकी इजाजत लेकर देवायत भानु ओर मंजु चले गये.. लखनके घर जाकर अपना सामान लेकर सीधे गांवकी ओर नीकल गये..