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फीर साम होते ही भानु सरला ओर रमाको लेकर वापस घर चला गया.. तो दुसरी ओर साम ढल चुकी थी.. ओर लखन नीलम जाग गये.. नीलमने चाइ बनाइ.. ओर नास्ता नीकाला.. फीर दोनोने चाइ नास्ता करलीया ओर दोनोने साथमे सावर लीया.. लखन नीलमकी मस्ती करने लगा..
तो नीलमने उसे दुर रखा.. फीर नीलम घरसे अपनी मम्मीका लाल जोडा लेकर आइथी वो पहेन लीया.. तबतक लखनने फोन करके खाना ओर्डर कर दीया था.. नीलमने लखनको भी अच्छे कपडे पहेननेको केह दीया.. जब दोनो कंपलीट हो गये तो नीलम लखनको लेकर घरके मंदीरके सामने चली गइ..
लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. क्या कर रही हो..? ये सादीका जोडा..
नीलम : (मुस्कुराते) हां.. जीजु.. आज हमारे भगवानके सामने हमेसाके लीये आपकी होजाना चाहती हु.. वो भी कायदेसे..
लखन : (मुस्कुराते) लेकीन तुम तो सादीके लीये मना कर रही थी.. अब क्या हुआ..?
नीलम : (हाथ मे डीबी लेकर मुस्कुराते) हां.. लेकीन दुनीयाके लीये.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच रहेगी.. सीर्फ औपचारीक की सादी.. क्या कहेते हे.. वो.. गांधर्व विवाह.. अैसे ही करते हेना सब..? लीजीये.. मेरी मांग भर दीजीये..
लखन : (चुटकी सींदुर लेते सामने देखते)......
नीलम : (मुस्कुराते) देख क्या रहे हे..? भरदो मेरी मांग.. भले ही मे धिरेनसे सादी करलु.. ये मांग हमेसा आपके नाम ही भरेगी..
लखन : (इमोस्नल होते धीरेसे) नीलु.. इनसे तो अच्छा होता तुम मुजसे सादी ही कर लेती..
नीलम : (सामने देखते) नही जीजु.. कुछ जीम्वेवारीया हे जो मुजे नीभानी हे.. आप भर दीजीये मांग..
फीर लखनने नीलमकी मांग भरदी.. ओर दोनोने बारी बारी अेक दुसरेको पती पत्नी स्वीकार करलीया.. लखन नीलमको वहीसे गोदमे उठाकर होलमे आ गया.. दोनो सोफेपे बैठ गये तो नीलम लखनकी बाहोमे समा गइ.. दोनो काफी देर अैसे ही बैठे रहे..
अब साम ढल चुकी थी.. तभी दरवाजेकी घंटी बजी.. तो लखन चला गया.. देखा तो खानेका पार्सल आगया था.. ओर लखनने पैसे देकर दरवाजा बंध कर लीया.. तो नीलमने लखनके हाथोसे पार्सल लेलीया.. ओर लेकर कीचनमे गरम करने लगी..
नीलम : (अंदरसे मुस्कुराते) जीजु.. मे खाना नीकालती हु.. फीर हमारा प्रोग्राम सुरु करेगे..
लखन : (हसते) लगता हे तुम ठीक हो गइ हो.. अबतो दर्द नही हेनां..?
नीलम : (कीचनसे) दर्द ही जेलने तो आइ हु.. मेरी चीन्ता मत करो.. अब मे ओरत होगइ हु..
लखन : (डाइनींगपे बैठते) अगर तेरी मम्मीको पता चलाना तो तेरी खैर नही.. हें..हें..हें..
नीलम : (अपना सर पीटते बहार आते) हाये.. मे कैसे भुल गइ.. उनको फोन करना था.. अभी खानेके बाद बात करती हु..
लखन : (मुस्कुराते) क्या..?
नीलम : (कातील नजरोसे खाना नीकालते) यही.. आपकी लडकी अब लडकी नही रही.. ओरत बन चुकी हे.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) अरे तु पागल होगइ हो क्या..? अैसी बाते कोइ बताते हे..?
नीलम : (मुस्कुराते खाना परोसते) आप यही हो.. हमारी बाते सुनलेना.. मे स्पीकरमे बात करुगी..
फीर लखन ओर नीलम डीनर करलेते हे.. नीलम कीचनका सभी काम नीपटा लेती हे.. तबतक लखन टीवी देखता.. ओर नीलम लखनके पास आकर बैठ गइ.. तो लखनने टीवी बंध करदीया.. ओर नीलमने अपनी मम्मीको फोन लगा दीया.. तो वहा रमा अकेली रुममे थी.. ओर भानु सरला बहार आंगनमे बैठे थे तभी नीलमका फोन आगया.. तो रमा मुस्कुराते उनसे बात करने लगी..
रमा : (मुस्कुराते धीरेसे) हां नीलु.. बोल.. दोनो पहोंच गये तो फोन भी नही कीया.. बोल..
नीलम : (स्पीकर ओन करते) मोम.. मेरी चीन्ता मत करो.. हम सहीसे पहोंच गये थे.. पहेले ये बताओ.. आप गइ थी वहा..?
रमा : (मुस्कुराते) हां.. मे ओर तेरी दादी.. दोनो तेरे पापाके साथ गये थे.. नीलु.. उसने मुजे माफ कर दीया.. वाकइ सबलोग कीतने अच्छे हे.. अच्छा ये बता.. इस वक्त कहा हे..? राधु दीदीके घर..?
नीलम : (लखनकी ओर देखते मुस्कुराते धीरेसे) मोम.. वहा आप अकेली हो..? कोइ हे आसपास..?
तो नीलमने उसे दुर रखा.. फीर नीलम घरसे अपनी मम्मीका लाल जोडा लेकर आइथी वो पहेन लीया.. तबतक लखनने फोन करके खाना ओर्डर कर दीया था.. नीलमने लखनको भी अच्छे कपडे पहेननेको केह दीया.. जब दोनो कंपलीट हो गये तो नीलम लखनको लेकर घरके मंदीरके सामने चली गइ..
लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. क्या कर रही हो..? ये सादीका जोडा..
नीलम : (मुस्कुराते) हां.. जीजु.. आज हमारे भगवानके सामने हमेसाके लीये आपकी होजाना चाहती हु.. वो भी कायदेसे..
लखन : (मुस्कुराते) लेकीन तुम तो सादीके लीये मना कर रही थी.. अब क्या हुआ..?
नीलम : (हाथ मे डीबी लेकर मुस्कुराते) हां.. लेकीन दुनीयाके लीये.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच रहेगी.. सीर्फ औपचारीक की सादी.. क्या कहेते हे.. वो.. गांधर्व विवाह.. अैसे ही करते हेना सब..? लीजीये.. मेरी मांग भर दीजीये..
लखन : (चुटकी सींदुर लेते सामने देखते)......
नीलम : (मुस्कुराते) देख क्या रहे हे..? भरदो मेरी मांग.. भले ही मे धिरेनसे सादी करलु.. ये मांग हमेसा आपके नाम ही भरेगी..
लखन : (इमोस्नल होते धीरेसे) नीलु.. इनसे तो अच्छा होता तुम मुजसे सादी ही कर लेती..
नीलम : (सामने देखते) नही जीजु.. कुछ जीम्वेवारीया हे जो मुजे नीभानी हे.. आप भर दीजीये मांग..
फीर लखनने नीलमकी मांग भरदी.. ओर दोनोने बारी बारी अेक दुसरेको पती पत्नी स्वीकार करलीया.. लखन नीलमको वहीसे गोदमे उठाकर होलमे आ गया.. दोनो सोफेपे बैठ गये तो नीलम लखनकी बाहोमे समा गइ.. दोनो काफी देर अैसे ही बैठे रहे..
अब साम ढल चुकी थी.. तभी दरवाजेकी घंटी बजी.. तो लखन चला गया.. देखा तो खानेका पार्सल आगया था.. ओर लखनने पैसे देकर दरवाजा बंध कर लीया.. तो नीलमने लखनके हाथोसे पार्सल लेलीया.. ओर लेकर कीचनमे गरम करने लगी..
नीलम : (अंदरसे मुस्कुराते) जीजु.. मे खाना नीकालती हु.. फीर हमारा प्रोग्राम सुरु करेगे..
लखन : (हसते) लगता हे तुम ठीक हो गइ हो.. अबतो दर्द नही हेनां..?
नीलम : (कीचनसे) दर्द ही जेलने तो आइ हु.. मेरी चीन्ता मत करो.. अब मे ओरत होगइ हु..
लखन : (डाइनींगपे बैठते) अगर तेरी मम्मीको पता चलाना तो तेरी खैर नही.. हें..हें..हें..
नीलम : (अपना सर पीटते बहार आते) हाये.. मे कैसे भुल गइ.. उनको फोन करना था.. अभी खानेके बाद बात करती हु..
लखन : (मुस्कुराते) क्या..?
नीलम : (कातील नजरोसे खाना नीकालते) यही.. आपकी लडकी अब लडकी नही रही.. ओरत बन चुकी हे.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) अरे तु पागल होगइ हो क्या..? अैसी बाते कोइ बताते हे..?
नीलम : (मुस्कुराते खाना परोसते) आप यही हो.. हमारी बाते सुनलेना.. मे स्पीकरमे बात करुगी..
फीर लखन ओर नीलम डीनर करलेते हे.. नीलम कीचनका सभी काम नीपटा लेती हे.. तबतक लखन टीवी देखता.. ओर नीलम लखनके पास आकर बैठ गइ.. तो लखनने टीवी बंध करदीया.. ओर नीलमने अपनी मम्मीको फोन लगा दीया.. तो वहा रमा अकेली रुममे थी.. ओर भानु सरला बहार आंगनमे बैठे थे तभी नीलमका फोन आगया.. तो रमा मुस्कुराते उनसे बात करने लगी..
रमा : (मुस्कुराते धीरेसे) हां नीलु.. बोल.. दोनो पहोंच गये तो फोन भी नही कीया.. बोल..
नीलम : (स्पीकर ओन करते) मोम.. मेरी चीन्ता मत करो.. हम सहीसे पहोंच गये थे.. पहेले ये बताओ.. आप गइ थी वहा..?
रमा : (मुस्कुराते) हां.. मे ओर तेरी दादी.. दोनो तेरे पापाके साथ गये थे.. नीलु.. उसने मुजे माफ कर दीया.. वाकइ सबलोग कीतने अच्छे हे.. अच्छा ये बता.. इस वक्त कहा हे..? राधु दीदीके घर..?
नीलम : (लखनकी ओर देखते मुस्कुराते धीरेसे) मोम.. वहा आप अकेली हो..? कोइ हे आसपास..?