तो नीलम अपनी बच्चेदानीपे लखनका गरम विर्य महेसुस करने लगी.. ओर लखन नीलमकी चुतमे पीचकारीया छोडते जडने लगा.. तभी लखनका पानी अपने बच्चेदानीपे महेसुस करते नीलम अेक बार फीर कांपने लगी.. ओर लखनके साथ जडने लगी..
दोनोका कामरस नीलमकी चुतसे बहार नीकलने लगा.. ओर कुछ ही देरमे लखन नीलमके सीनेपे ढेर हो गया तो नीलम उनकी पीठको सहेलाने लगी.. दोनो अपनी अपनी सांसको दुरस्त करते कुछ देरके लीये अैसे ही पडे रहे.. फीर नीलम लखनके सरको सहेलाते उनके होठोको चुम लेती हे..
नीलम : (सरमाते धीरेसे) जानु.. थेन्क्यु वेरी मच.. आखीर आपने मुजे ओरत बना ही दीया..
लखन : (होंठ चुमते) क्यु.. तो तुम ओरत नही थी..? उस कमीनेके साथ तो बहुत मजे कीये हे..
नीलम : (सरमाते धीरेसे) जीजु.. पुनो दीदीने उनको अैसे ही नही छोड दीया.. खुद मुजे भी फील नही हो रहा था तो पुनोदीदको क्या खाक ओरत बनायेगे..?
लखन : (सामने देखते) मतलब..? क्या वो तुजे संतुस्ट नही करता..?
नीलम : (नामे गरदन हीलाते) इसीलीये तो उनके साथ बीन्दास्त चली जाती थी.. क्या आप ओर पुनोदी पहेली बार मीले तब उनको खुन नही नीकला था..? फीर भी यकीन ना होतो नीचे देखलो.. आज सही मायनेमे मेरा कौमार्य भंग हुआ हे.. ओर वो भी मेरे पहेले पतीसे.. इसीलीये तो मेरी सादीसे पहेले आपसे मीलना चाहती थी..
लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) ओह नीलु.. आइ लव यु सो मच.. मुजे यकीन नही हो रहाकी तुम मुजसे इतना प्यार करती हो.. तो फीर क्यु अपनी जींदगी दावपे लगा रही हो..? करले मुजसे सादी.. मे तुजे भी अपना लुगा..
नीलम : (आंख गीली करते) नही जीजु.. आपके प्यारके लीये थेन्क्स.. मे वादा करती हु जींदगी भर आपसे प्यार करती रहुगी.. लेकीन मेरी भी कुछ मजबुरी हे.. कुछ नइ जीम्वेवारी मीली हे.. सोरी.. हम सादी नही कर सकते..
लखन : (गालको चुमते) अैसी क्या मजबुरीया हे जो तु उस नामर्दसे सादी कर रही हे.. क्या इस बारेमे भी पुनोसे चर्चा हुइ हे..?
नीलम : (मुस्कुराते हांमे गरदन हीलाते) हां.. बहुत सारी.. जीजु.. जीस तराह बाबाने पुनोदीको कुछ जीम्वेवारी दीथी.. उसी तराह मुजे भी मंजु मोम ओर पुनोदीने कुछ जीम्वेवारी दीहे.. उसे नीभाना हे..
लखन : (सामने देखते) मुजे बता सकती हे कैसी जीम्वेवारी..?
नीलम : (मुस्कुराते होठ चुमते) हंम.. बता सकती हु.. चंदा मोमको सम्हालने की.. हमारे विजयको सम्हालनेकी.. आपको भीतो सम्हालुगी.. क्या इस बीवीको मीलने नही आओगे..?
लखन : (मुस्कुराते) आउगा.. जरुर आउगा.. जब तु बुलायेगी आजाउगा.. थेन्क्स नीलु.. तुम हमारे परीवारके लीये इतना कुछ कर रही हे..
नीलम : (आंख गीली करते) जीजु.. बस.. मेरा अेक काम करना..
लखन : (होंठ चुमते) हंम.. बोल.. मे तेरे लीये सबकुछ करुगा..
नीलम : (सामने देखते) बस.. ओर कुछ नही.. आप मम्मीका खयाल रखना.. बहुत दुख जेले हे उसने..
लखन : (गालको चुमते) नीलु.. आइ प्रोमीस.. तुम दोन मां बेटीका हम जींदगीभर खयाल रखेगे.. क्युकी तुम दोनो ही हमारे परीवारका हीस्सा हो.. ओर कुछ चाहीये तो बोल..
नीलम : (जोरोसे बाहोमे भीचते) नही जीजु.. ओर कुछ नही चाहीये.. बस.. हम दोनो मां बेटीको आपका प्यार अैसे ही मीलता रहे.. आपको पता हे..? मम्मी खुद चाहती हे की मे आपके साथ रीलेशन रखु.. वो हम दोनोके बारेमे सबकुछ जानती हे..
लखन : (सामने देखते) क्या..?
नीलम : (सरमाते हांमे गरदन हीलाते) हां.. हम मां बेटीके साथ अच्छी सहेलीया भी हे.. मम्मी को पता हे मे आपके साथ यहा हु.. वो चाहती हेकी मे ओरत बननेका सुख आपसे पाउ.. जीजु.. आज मे बहुत खुस हु.. देखो.. अभी भी अंदर सख्त महेसुस हो रहा हे..
लखन : (मुस्कुराते) तो फीरसे सुरु करे..? हंम..
नीलम : (सामने देखते) अभी..? थके नही हो क्या..? मेरी इतनी लंबी चुदाइ कभी नही हुइ..
लखन : (होंठ चुमते) नही.. तुजे नही पता जबतक मे मेरी बीवीको लगातार दो बार चोद नही लेता तबतक इसे बहार नही नीकालता.. तो तुम भी फीरसे चुदनेके लीये तैयार होजाओ..
नीलम : (सरमाते धीरेसे) जीजु.. तब तो ये तीन चार दिन नीकालना मुस्कील होजायेगा.. आप मेरी हालत बीगाड दोगे.. अभी पुरी रात जागना हे.. क्या कल हम आराम करनेके बाद कही लोंग ड्राइवपे चले..?
लखन : (मुस्कुराते) हंम.. तबतक तुजे आराम भी होजायेगा.. ठीक हे हम चलेगे.. लेकीन कहा..?
नीलम : (कातील नजरोसे) जहा आपका मन करे.. अैसी जगाह.. जहा सीर्फ हम दोनोके सीवा कोइ नाहो.. बीच जंगल.. जहा नदी हो.. अेक बार खुले आसमानके नीचे.. आप समज गयेनां..?
लखन : (गलेको चुमते) हंम.. समज गया.. तेरी भी क्या क्या फेन्टासी हे.. ओर कुछ होतो बता..?
नीलम : (आंख मारते मुस्कुराते) हे.. अेक बार नदीमे.. पानीके अंदर.. फीर कारमे.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) ये कैसी फेन्टासी हे तेरी.. ठीक हे चलेगे.. अब सुरु करे..?
नीलम : (सरमाते) हंम.. लेकीन इस बार धीरे धीरे.. आप बहुत जोरोसे करते हो..
ओर अेक बार फीर लखन ओर नीलमके बीच चुदाइ सुरु होगइ.. इस बार भी नीलमको दो दो बार जडाके तीसरी बार दोनो साथमे जडे.. दुसरी बार दोनोके बीच काफी लंबे समय तक चुदाइ चली.. लखनने नीलमके अेक अेक अंगको ढीला करदीया.. उनकी सारी गर्मी नीकाल दी..
फीर भी नीलम लखनका साथ देती रही..आजवो बहुत खुस थी.. अब नीलु लडकी नही रही थी.. वो ओरत बन चुकी थी.. फीर लखनने लंडको नीकाल दीया.. तो दोनोका कामरस नीलमकी चुतसे बहार बहेने लगा.. नीलमने जटसे अपने नीकरदो चुतपे दबा दीया..
तो पुरा नीकर दोनोके कारस ओर खुनसे भीग गया.. नीलम उसे देखकर सरमा गइ.. वो बडी मुस्कीलसे बेडपे बैठ गइ.. ओर बेडकी चदरको देखने लगी.. बीचमे दोनोके कामरसके साथ खुनका बडा धबा हो गया था.. ओर नीलम लखनकी ओर देखते हसने लगी.. तभी लखन उसे गोदमे उठाकर बारुममे ले गया..