Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 21 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १४२/१

तब धिरेन खुस होते बहार नीकल गया ओर गाना गुनगुनाते अपनी बाइक लेकर होस्टेलकी ओर नीकल गया.. तो वहा पहेलेसे ही नीलम धिरेनके इन्तेजारमे इधर उधर टहेल रही थी.. आज उसने रीसेसके बाद स्कुलमे बंक मारलीया था.. तभी धिरेन वहा पहोंच गया.. तो वहाकी हेडनेभी उनको पहेचान लीया.. ओर उसने नीलमको नीचे बुला लीया.. फीर हेडसे बात करके नीलमको लेकर होस्टेलसे बहार आगया....अब आगे

धिरेन : (हसते) हां तो रानीसाहीबा.. कहो पहेले कीधर जाना हे.. हें..हें..हें.. आज इन कपडोमे क्या मस्त लग रही हे..

नीलम : (सरमाते हसते) थेन्क्स.. कल आपहीने दिलवाये हे.. तो आज पहेन लीया.. हें..हें..हें..

धिरेन : (बाइक स्टार्ट करते धीरेसे मुह पीछे करते) मेनेतो ओरभी कपडे दीलवाये हे.. तो क्या आज वोभी पहेना हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (सर्मसार होते अ‍ेक पीठमे मुका मारते) मुजे नही पता.. आप बहुत गंदे हो.. नही बताना मुजे.. अब चुपचाप चलीये..

धिरेन : (हसते) हंम चल ठीक हे.. वैसे मेतो कीसीभी तराह उसे देख ही लुगा.. बोल पहेले कीधर चलना हे..?

नीलम : (मुस्कुराते) अरे मुजे क्या पता..? मेने यहा थोडीना कुछ देखा हे.. जहा आपका मन करे लेलो.. अगर कोइ गार्डन जैसा हो.. ओर वहा बहुत कम लोग हो.. फीर हम फील्म देखने चले जायेगे..

धिरेन : (हसते) नीलु.. आजतो तेरी मेट्रन कुछ नही बोली..? क्या तुमने उसे घर जानेकी बात करली..? वो तुजे परेसान तो नही करती..?

नीलम : (सरमाते हसते) नही.. मेने कलही उनको बोल दियाथा की जीजाजी मुजे लेने आयेगे.. ओर वो पुनमदीदीकी पहेचान वाली हे.. तो घर जानेकी बातभी करली हे.. आप फीकर मत करो..

धिरेन : नीलु.. अब जबभी तुम मेरे साथ बहार नीकलो.. अपना मुह अपने दुपटेसे ढक लीया करो.. पता नही यहा कौन हमारे पहेचान वाले मील जाये ओर हमे देखले.. तो बी केरफुल..

नीलम : (दुपटा बांधते) हंम.. अब खयाल रखुगी.. चलीयेनां.. हम वही जाकर बात करेगे..

फीर दुपटा बांधकर नीलम अ‍ेक लवरकी तराह धिरेनके पीछे उनसे चीपककर पीछे बैठ गइ.. कुछही देरमे दोनो अ‍ेक गार्डनमे चले गये.. तो वहा थोडे बहुत लोग दीखाइ दे रहेथे.. ओर वहा ज्यादातर कपलही अ‍ेक दुसरेसे चीपककर बैठे थे.. तब धिरेन ओर नीलमभी सबलोगो से थोडे दुर अ‍ेक खाली पेडके नीचे उनके पीछे जाकर बैठ गये.. तो नीलमके दिलकी धरडन थोडी तेज होगइ.. ओर वो धिरेनसे बहुत सरमाने लगी..

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दोनोही अ‍ेक दुसरेके साथ सटकर बैठ गये.. तब धिरेनने नीलमकी जागपे हाथ रखदीया.. तो नीलम सरसे पांव तक हील गइ.. ओर उसने सरमाकर धिरेनके कंधेपे सर रख दीया.. तो धिरेनने उनकी कमरमे हाथ डालकर उसे ओर नजदीक अपने तनसे सटालीया.. तब नीलम बहुतही सरमाइ.. ओर वो नजरे चुराते धिरेनकी ओर देखने लगी.. तभी धिरेनने अपना मुह नीलमके मुहके पास धीरेसे लेजाते उनके होठोपे होठ रखदीया..

तो नीलमकी आंख बंध होगइ.. ओर वो धिरेनका साथ देने लगी.. जबसे धिरेनको हवेलीपे रुममे अकेली मीलीथी तबसे नीलमकी आग भडकी हुइथी.. हर दिन वो धिरेनको इमेजींग करते अपनी चुतमे उगलीया करते अपने आपको सांत करती थी.. ओर आज फीरसे नीलम ओर धिरेन अकेले मील गये नीलम धिरेनको मीलकर आज वोही प्यार पाना चाहती थी.. तो वो बहुतही अ‍ेक्साइटेड थी..

तभी उसे अपने छोटे संतरे जैसे बुब्सपे धिरेनका हाथ महेसुस हुआ.. तो नीलम कांपने लगी.. उनके दोनो उरोज सख्त होगये.. उनकी चुतमे सुरसुराहट होने लगी.. ओर उसने जोरोसे धिरेनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. उनको समजमे नही आ रहाथा की वो क्या करे.. उनकी सांसे उखडने लगी.. जो धिरेन उनकी सासंको साफ सुन पा रहाथा.. तब धिरेन अ‍ेक बार फीर नीलमके होंठ चुमते उनके बुब्सको हल्कासा दबाते मसल दिया..

तब नीलमभी उतेजीत होने लगी.. ओर वो आधी आंद चडाते मदहोस होने लगी.. उसने अपना मुह हटाते धिरेनके कंधेपे रख लीया.. वो धिरेनको सबकुछ करने दे रहीथी.. वो चाहती थी की धिरेन आजही उनको चोदकर उनका काम तमाम करदे.. धिरेन उसे पुरी तराह मसलदे.. नीलम अपनी मम्मी रमा की तराह ही बहुत कामुक लडकी थी.. जबसे लखनने अपने दिलकी बात रमासे कही तबसे रमा भी भानु ओर लखनके बीच असंमजमे फसी हुइ थी..

लेकीन नीलमका विजन बीलकुल क्लीयर था.. वो मनसे धिरेनको पुरी तराह समर्पीत हो चुकी थी.. लेकीन अभी नीलमको अपने आने वाले भविस्यके बारेमे नही पताथा.. इधर वो धिरेनको अपना सबकुछ मान चुकीथी.. लेकीन उनकी मम्मी रमाके मनमे कोइ ओरही प्लान घुम रहा था.. वो लताकी तराह नीलमको भी लताकी सौतनके रुपमे हवेलीकी रानी बनानेका सपना देख रहीथी.. तभी धिरेनने नीलमके बुब्सको जोरोसे मसल दिया.. तो..

नीलम : (भारी सांसोसे धीरेसे) बस.. बस.. धिरे दबाओना दर्द होता हे.. धिरेन.. अभी यहा नही.. कोइ हमे देख लेगा.. चलोना हम कही ओर जाते हे.. यहा डर लग रहा हे..

धिरेन : (धीरेसे गाल चुमते) नीलु यहा कीसीसे डरनेकी जरुरत नही.. सब हमारी तराह वोही करने आये हे..

नीलम : (बाहोमे भीचते सरमाते) नही.. फीरभी यहा जाहेरमे अ‍ेक डर लग रहा हे.. कही कोइ हमे पहेचान वाले देखनाले.. कही ओर चलीयेनां..? क्या कीसी दोस्तका कोइ रुम बुम नही हे..? वहा हमे मीलनेमे आसानी रहेगी.. वहा आपको जोभी करना हे करलीजीये..

धिरेन : (मुस्कुराते) हंम.. मतलब तेरीभी बहुत मीलनेकी इच्छा हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) नही नही.. वो.. वो.. उस दिन आप आग लगाकर जो गयेहो.. तबसे कही चेइनही नही मीलता.. कास उस दिन भावना मम्मी नही आती.. वरना उसी दिन हमारे बीच सबकुछ होजाता.. जानु चलोना हम कही ओर जाते हे.. जहा कोइ हमे देखता ना हो.. मुजे कुछ हो रहा हे.. क्या हम आज नही कर सकते..? हंम..?

धिरेन : (उनकी गोदमे सर रखते लेटते) नही नीलु.. बस थोडासा कंट्रोल करले.. हम दोनो जल्द ही मीलन करेगे.. वोभी अ‍ेक खास जगाहपे.. हंम.. थोडी ही देरमे हमे फील्म देखने जाना हे.. थोडी देर इधर बैठ मुजे तुमसे बात करनी हे..

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते गाल चुमते) क्या..?

धिरेन : नीलु.. हमारे मेनेजरको अपना मकान बेचना हे.. तो मे चाहता हु तुम उसे देखले.. अगर तुजे पसंद आगया तो वो हमे लेना हे.. वो कोइ बडा मकान ले रहेहे तो बेच रहे हे..

नीलम : (सरमाते हसते) तो मुजे क्यु दीखाते हो..? अपनी बीवीको दीखादो.. वोही सब तैय करेगी..

धिरेन : (मुस्कुराते) तो उसीकोतो दीखाने ले जा रहा हु.. नीलुु.. मेरी असली बीवी तुम हो.. मुजे तुमसे जो प्यार मीला हे वो प्यार मुजे पुनो नही दे पाइ.. ओर ये मकान मे तेरे लीये ले रहा हु.. पुनोके लीये नही.. जब हमारी सादी होजायेगी तब तुजे यही रहेना हे.. मेरी बीवी बनके.. बस मेरी अ‍ेकही तम्मना हे..

नीलम : (मनमे खुस होते मुस्कुराते गाल सहेलाते) क्या..? कहो मे आपकी हर तम्मना पुरी करनेकी कोसीस करुगी.. आइ प्रोमीस..

धिरेन : (लेटेही उनकी आंखोमे देखते) नीलु.. बस प्यारमे अ‍ेक ही तम्मा बाकी रेह गइ.. मुजे पुनोसे सादीसे पहेले वो प्यार नही मीला.. जो मे चाहता था.. क्या वो प्यार तुम मुजे दोगीनां..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे गरदन हांमे हीलाते) हंम.. धिरेन ये बात पहेलेही आपने मुजे कहीथी.. बस मेरा खयाल रखना.. कही मुजे मजधारमे अकेली छोडकर मत चले जाना.. वरना मे कहीकी नही रहुगी.. बस यही अ‍ेक डर सता रहा हे.. वरना मेतो कबसे आपको अपना पती मानचुकी हु.. मे सबकुछ करनेके लीये रेडी हु..

धिरेन : नीलु.. मे मांकी कसम खाते कहेता हु.. मे तुजे कभी नही छोडुगा.. बस.. तुम अच्छेसे पढले.. तेरी लास्ट अ‍ेक्जाम खतम होते ही हम सादी करलेगे.. आइ प्रोमीस.. क्या अबभी कोइ डर हे..?

नीलम : (सर्मसार होते नामे गरदन हीलाते) नही.. आप कसम मत खाओ.. मे आपकी हर तम्मना पुरी करनेकी कोसीस करुगी.. जब आप कहो.. क्या आज आपको करना हे..? तो चलीये.. मे रेडी हु..

धिरेन : (मुस्कुराते खुस होते) थेन्क्स नीलु.. बस यही बातपे मे तेरे उपर फीदा हु.. जीतनी आसानीसे तुम सबकुछ करनेको तैयार हो.. वोही बातके लीये पुनोने मुजे मना करदीयाथा.. वो हमारी सादीके बाद सबकुछ करनेको केह रहीथी.. थेन्क्स अगेइन.. मेरे प्यारमे विस्वास करनेके लीये.. नीलु.. आइ लव यु..

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) आइ लव यु टु.. जानु.. तो अब हम चले..? वहा टीकीटभी लेनी हे..

फीर दोनोही खडे होगये तब नीलम फीरसे दुपटेसे अपना मुह ढकने लगी.. ओर दोनो गार्डनसे बहार आगये.. नीलु धिरेनकी बातोसे बहुतही उतेजीत हो चुकीथी.. वो धिरेनको दिलोजानसे चाहने लगी थी.. लेकीन उनको पता नही थाकी उनकी चाहत प्यार नही.. उनकी उम्रकी वजहसे महज अ‍ेक वीपरीत लींगका आकर्सणकी वजहसे अ‍ेक वासना हे.. तब उनकी चुतकी दोनो नाजुक पंखुडीया फडफडाते पानीका रीसाव करने लगी थी..

नीलम अ‍ेक बहुतही कामुक लडकीथी.. तब नीलमको नही पताथा की.. उनकी आने वाली जींदगीमे उनके नसीबमे कीतने लंड लीखे थे.. अ‍ेक तरफ जल्दसे जल्द धिरेन नीलमको चोदनेकी फीराकमे था तो दुसरी ओर हमारे लखन भैया अपनी साली मानकर उनपे हक जमानेको तैयार थे.. नीलमको पानेके लीये खुद उनकी मा रमाको सेट करनेमे लगे हुअ‍े थे.. ओर इस मामलेमे वो थोडा बहुत कामयाब भी हो गयाथा..

जबसे लखनने रमाके सामने देखना ओर उनसे बाते करना बंध करदीयाथा तबसे रमाको कही चेइनही नही मीलताथा.. वो कीसीभी हालमे लखनसे बात करना चाहती थी.. बस सीर्फ वो सही मौकेकी तलासमे थी.. तो दुसरी ओर नीलमको भी जल्द से जल्द अ‍ेक सख्त लंडकी कमी महेसुस हो रहीथी.. बस इस वक्त कोइभी आकर नीलमको थोडासा प्यारसे पटाले.. तो वो उनके नीचे लेटनेके लीये तुरंत रेडी होजाती..

दोनोही अ‍ेक अ‍ैसे थीअ‍ेटरपे चले गये जहा ज्यादा भीड नही होती.. फील्म चाहे कोइभी हो.. दोनोको ही फील्मसे कोइ मतलब नही था.. बस उनकोतो अ‍ेकांत चाहीये था.. आग दोनोकी ओरसे बराबर लग चुकीथी.. धिरेनने दो टीकीट कोर्नरकी लेली.. ओर दोनोही अंदर केन्टीनमे चले गये.. वहा दोनोने कुछ खानेको ओर ठंडा लीया.. तब पीछला सो खत्म हुआ ओर लोग बहार नीकल गये.. तब दोनोही अंदर चले गये..

अंधेरेकी वजहसे नीलमने धिरेनका हाथ थाम लीया.. ओर टीकीट दीखाइ.. तो दोनोही पछेकी ओर चले गये ओर अपनी जगाहपे बैठ गये.. वहा आजु बाजु कोइ नही था.. तो नीलमकी दिलकी धडकन अ‍ेक बार फीर बढ गइ.. पुरे थीअ‍ेटरमे पचास लोगभी नही थे.. पुरा थीअ‍ेटर खाली दीख रहाथा.. ओर जो आयेथे वो भी धिरेनकी तराह अपनी मासुकाके साथ मजे करनेके लीये आये थे..

ओर धिरेनने अपना अ‍ेक हाथ पीछे लेजाते नीलमके कंधेपे रख दीया.. ओर अपनी ओर खीच लीया तब नीलमभी सरमाते धिरेनसे सटकर बैठ गइ.. वो जींदगीमे पहेली बार अपने यारके साथ अ‍ैसे अकेली फील्म देखने आइथी.. तब उसेभी पताथा की फील्म सीर्फ अ‍ेक बहाना हे.. वो अपने यारको प्यार देनेके लीये मानसीक रुपसे अ‍ेकदम रेडीथी.. क्युकी गार्डनमे धिरेनने उनके साथ काफी छेडछाड कीथी..

तो नीलम बहुतही गरम हो चुकीथी.. तभी कुछही देरमे अंधेरा होगया.. ओर फील्म सुरु होगइ.. तो यहाभी धिरेन ओर नीलम अ‍ेक दुसरेके साथ छेडछाड करने लगे.. धिरेनने नीलमके चहेरेको अपनी ओर करदीया.. ओर अपना होंठ नीलमके होठोपे रख दीया तब नीलम बहुतही सरमाइ.. उनकी आंखोमे अ‍ेक नसा छाने लगा.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके मुहमे जीभ डालके अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे..

दोनोही मदहोस होकर सब कुछ भुल चुकेथे.. ओर प्यारका खेल खेलने लगे.. धिरेनने आहिस्तासे नीलमका टोप थोडा उपर करके अपना हाथ घुसा दीया ओर उनके संतरे जैसे बुब्सको अपने हाथोमे थाम लीया.. आज धिरेन डायरेक्ट पहेली बार नीलमके बुब्सको छु रहा था.. तो नीलमभी सीहर गइ.. उनके तनमे अ‍ेक जुनजुनाहट की लहेर दोड गइ.. ओर धिरेन उनके होठोको चुमते बुब्सको धीरेसे दबाते मसलने लगा..

तब नीलमसे बरदास्त करना मुस्कील हो गया ओर उसने बैठेही जोरोसे धिरेनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेके होठोको जोरोसे चुसने लगे.. तब नीलम पुरी तराह कामाग्नीमे जलते कदहोस हो चुकीथी.. उनके उपर वासना पुरी तराह हावी हो चुकीथी.. उनकी चुतसे लगातार पानीका रीसाव होने लगा.. अचानक धिरेन नीलमके होंठ चुमते उनके टोपके बटन खोलने लगा..

तब नीलमने कोइ विरोध नही कीया.. धिरेन जोभी करता था नीलम उसे करने देती थी.. ओर धिरेनने नीलमका टोप आगेसे खुला करदीया तो नीलमके गोरे संतरे जैसे बुब्स धिरेनने दिलवाइ ट्रन्सपरन्ट ब्रामे कैद होते दीखने लगे.. ओर धिरेनने धीरेसे ब्राको थोडी उची करदी.. तब नीलमका अ‍ेक बुब्स थोडा उछलके बहार आगया तो धिरेनने उसे अपने हाथोमे थाम लीया.. फीर हल्कासा दबाकर वो बुब्सकी ओर जुक गया..

ओर अपना मुह बुब्सपे लगाके बुब्सकी नीपलको अपने हाठोसे दबाते बुब्सको मुहमे भरलीया.. आज नीलमका ये पहेला अनुभव था.. तो वो सरसे पव तक कांपने लगी.. उसने धिरेनके सरको अपने दोनो हाथोमे भीडलीया ओर बुब्सपे दबाव बनाने लगी.. तबतक धिरेन दोनो बुब्स आजाद करते उसे बारी बारी चुम रहाथा.. तो नीलम पुरी तराह मदहोस होकर आधी आंख चडाते अपने बुब्स चुसाइका मजा लेने लगी.. तब..

नीलम : (कामुक सीसकारीया करते धीरेसे कानमे) सीइइइ.. आह.. जा..नु.. आइ.. लव..यु.. मुजे.. कु..छ.. हो रहा.. हे.. जानु क्या.. कर.. दिया..आपने.. बहुत मजा.. आरहा.. हे..कुछ.. कीजीयेना.. नही रहा जाता..

धिरेन : (कामुक आवाजमे धीरेसे) हंम.. बुच.. बुच.. नीलु.. क्या करु..? हंम.. डालदु अंदर..? हंम..

नीलम : (सरमाते धीरेसे कानमे) मुजे नही पता.. लेकीन यहा..? नही नही.. कोइ देखलेगा.. चलोना कीसी होटेलपे चले जाये.. हंम.. वहा प्यार करेगे.. आपको करना हे..? हंम.. चलोना.. वही करलेना..

धिरेन : डार्लींग बस.. थोडा सबर करले.. मेभी तेरे बीना नही रेह पाउगा.. मुजेभी जल्दसे जल्द तुमसे मीलन करना हे.. बस अ‍ेक दो दिन ठहेरजा मे कुछ जुगाड करता हु.. ये सब मे आरामसे करना चाहता हु.. हमारे बीस्तरपे.. मेरे घर.. आयेगीनां वहा..? हंम..

नीलम : (सरमाते मदहोसीमे) हंम.. हा.. आउगी.. लेकीन वहा मेरी सोतन तो नही होगी..? तो कैसे..?

धिरेन : (होंठ चुमते) उनको मायके भेज दुगा.. सेटर डे सन्डे.. सीर्फ हम दोनोही होगे.. तब हमारी सुहागरात होगी.. नीलु. हमारे बेडपे तुजे कुआरी लडकीसे ओरत बनाउगा.. अ‍ेक कलीसे फुल.. हंम..? इसके लीये तुम रेडी होनां..? हंम..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) हंम.. हां.. मेतो अभी भी रेडी हु.. आप करलेना.. मुजेभी आपसे मीलन करनेकी बहुत जल्दी हे.. मुजे बहुत इच्छा होरही हे.. अभी कुछ कीजीयेनां.. प्लीज..

कहा तो धिरेनने अपना हाथ नीलमकी चुतपे रख दीया.. तो नीलम चेयरसेही उछल पडी.. ओर जोरोसे सीसकारीया करते धिरेनका हाथ पकड लेती हे.. ओर उनके कंधेपे सर रख देती हे.. वो कुछ भी बोल नही पाइ.. वोभी कामाग्नीमे जल रहीथी.. वो खुद मनसे चाहतीथी की धिरेन इस मामलेमे आगे बेढे.. ओर उसे आजही चोदले.. तब धिरेनने उनके लोअरमे हाथ डाल दीया..

ओर धीरे धीरे दो उंगलीयोसे नीलमकी चुतको नीकरके उपरसे ही सहेलाने लगा.. तो नीलमका पुरा नीकर गीला हो चुका था.. नीलम अभीभी धिरेनकी बाहोमे उनसे चीपककर बैठीथी.. उनका सरीर अबभी कांप रहाथा.. आज धिरेनने नीलमको पुरी तराह गरम करदीयाथा.. धिरेन अबभी उनकी चुतको सहेला रहाथा.. अगर थीयेटरमे इके दुके लोग होते तो वो आज सामनेसे धिरेनको इधरही चोदनेके लीये कहेती..

नीलम : (अपने दोनो होठ दांतोमे दबाते नजरे चुराते) अंह.. अंह.. अंह.. धि..रे..न.. आइ.. लव..यु.. बस.. बस.. मे कंट्रोल नही करपाउगी.. कुछ कीजीयेना.. आइ.. सीसससइइइइ आह.. आह.. बस.. बस..आइइइइ..

धिरेन : (कामुक आवाजमे गलेको चुमते) नीलु.. आइ लव यु टु.. मजा आ रहा हे..? हंम.. ओर करु..?

नीलम : (गलेमे मुह डालते धीरेसे) हंम.. नही पता.. लेकीन.. बहुत म..जा.. आ रहा हे.. सीइइइ.. धिरेन.. कुछ कीजीयेनां.. नही रहा जाता..

धिरेन : (धीरेसे) नीलु.. मेरी गोदमे आजा.. तेरे बुब्स बहुत अच्छे हे.. मुजे चुसना हे..

नीलम : (सरमाते धीरेसे गीडगीडाते) धिरेन.. कोइ देख लेगा.. यहीसे करलोनां.. वरना चलो कोइ होटेलमे.. वहा आरामसे करलेना.. धिरेन.. प्लीज.. मुजे बहुत इच्छा हो रही हे.. कुछ करोनां..

धिरेन : (कानकी बुट चुमते) हंम.. कोइ नही देखेगा.. सब अपनी गर्लफ्रेन्डके साथ लगे हुअ‍े हे.. आजा..

कहातो नीलम सरमाते हुअ‍े थोडी खडी होकर धिरेनकी गोदमे बैठ गइ ओर उनके गलेमे दोनो हाथ डालकर उनसे चीपक गइ.. तब धिरेनने उनका टोप हटा दीया.. तो धिरेनने दिलवाइ हुइ ट्रान्फरन्ट ब्रा नजर आइ.. ओर धिरेनने दोनो हाथ उनमे डालकर नीलमके दोनो बुब्स अपनी हथलीमे थामलीया.. ओर उसे जोरोसे मसलते दबाने लगा.. तब नीलम धिरेनके गलेमे मुह डालकर आंख बंध करके मदहोसीमे बैठी रही..

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नीलमके दोनो बुब्स तनके कठोर होगये थे.. अब उनसे बरदास्त करना मुस्कील हो रहाथा.. ओर अपना अ‍ेक हाथ नीचेकी ओर ले गइ.. ओर पेन्टके उपरसे ही धिरेनके लंडको पकड लीया ओर मुठीमे लेकर हल्केसे मसलने लगी.. दोनोही पुरी तराह काम अग्नीमे जल रहेथे.. अब दोनोसे बरदास्त करना मुस्कील होने लगा.. ओर धिरेनने जीलमको गोदमे घुमाके उलटा बीठा दीया.. फीर अ‍ेक हाथसे बुब्सको मसलते अ‍ेक हाथ नीलमकी नीकरमे डाल दीया..

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ओर धिरेनने नीलमकी चुत सहेलाते अ‍ेक उंगली नीलमकी चुतमे घुसादी.. तब नीलम उछल गइ.. ओर पीछे मुह करते धिरेनके गले लग गइ.. वो आंख बंध करते जोरोसे सीसकारीया करने लगी.. आज पहेली बार कीसी मर्दने उनकी चुतको छुआथा.. तभी धिरेन नीलमके बुब्सको मसलते उंगलीको चुतमे अंदर बहार करने लगा.. तब नीलम सातवे आसमानमे पहोंच गइ.. वो आंख बंध करके सीसकारीया करती रही..

ओर धिरेनकी अ‍ेक अ‍ेक मुवमेन्टको अ‍ेन्जोय करने लगी.. आज नीलमकी चुतमे उनके अलावा अपने यारने उंगली डालीथी.. तब नीलमका जोस कइ गुना बढ गया.. ओर उनसे बरदास्त करना मुस्कील होने लगा.. वो अपनी कमर आगे पीछे करते हीलाने लगी.. जैसे धिरेनसे चुदवा रही हो.. वो धिरेनके साथ अपनी चुदाइको इमेनींग करते धिरेनका साथ देने लगी.. नीलम जोरोसे धिरेनके होठोको चुमने लगी..

आज उसने अपनी सब सरमको त्याग दिया.. ओर धिरेनकी खुलकर साथ देने लगी.. नीलमके तनमे दोनो ओरसे हमले हो रहेथे.. धिरेनने जोरोसे बुब्सको मसलते बुब्सको लाल कर दीयाथा.. नीलम अपनी कमरको उछालती रही.. ओर अचानक नीलमकी चुतमे सुरसुराहट होने लगी.. ओर नीलम ने पीछे मुडकर जोरोसे धिरेनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर धिरेनके होठोसे होेठ मीलाके लीपलोक करलीया..

तभी उनकी चुतसे अ‍ेक तेजधार नीकलते धिरेनके हाथोको भीगोने लगी.. ओर कुछही देरमे नीलम जडकर सांत होकर धीरेनकी बाहोमे उनके कंधेपे सर रखके बैठी रही.. तबभी धिरेन हल्केसे नीलमके दोनो बुब्स बारी बारी मसलते नीलमके गलेको चुम रहाथा.. आज धिरेनके द्वारा उनकी पहेला स्खलन हुआथा.. फीर अपना सर थोडासा उचा करते सरमके मारे धिरेनकी ओर अपनी नजरे चुराते दखने लगी.. तब धीरेसे..

धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. तेरा होगया..? हंम..? मेरा अभी बाकी हे.. तुम कुछ करोनां..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम..? क्या..? जानु.. आज बहुत मजा आया.. आपनेतो मुजे जनतकी सेर करवादी.. क्या इसमे इतना अच्छा मजा आता हे..? हंम..? धिरेन.. कहीयेना मे क्या करु..? हाथसे हीलादु..? हंम..?

धिरेन : (मुस्कुराते धीरेसे कानमे) नही नीलु.. हाथसे नही.. कुछ ओर करना हे.. अपने मुहसे.. जब ये हथीयार अंदर जाता हेना..? तो इनसेभी ज्यादा मजा आता हे.. येतो कुछभी नही.. चलना.. अब मुजेभी अ‍ेक बार ठंडा करदे.. चल मे नीकालता हु..

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) मुहसे..? जानु.. कैसे..? आप कहोना..? मुजे नही पता..? हंम.. आप सीखादो..

धिरेन : (कानमे धीरेसे) अरे कुछ नही.. बस ब्लुजोब देना हे.. मुहमे लेकर.. धीरे धीरे चुसना हे..

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. कुछ होगातो नही.. क्या मुहमे लेना हे..? हंम..? हाथसे करदु..?

धिरेन : (मुस्कुराते) हाथसे नही.. मुहसे.. पहेले थोडा जीभसे गीला करके मुहमे अंदर बहार करना हे.. चल नीचे बैठजा मे नीकालता हु..

तब धिरेनने अपना हाथ रुमालसे पोछते अपनी पेन्टकी क्लीप खोलदी.. तब नीलम धिरेसे सरकते धिरेनके दोनो पैरोके बीच नीचे घुटनोके बल बैठ गइ.. ओर नजरे चुराते धिरेनकी ओर देखने लगी.. ओर धिरेनने नीकरको थोडा नीचे करलीया तब धिरेनका लंड हवामे लहेराने लगा.. तो नीलम उसे देखकर बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर मुह दुसरी ओर करते मुस्कुराने लगी.. आज नीलमने पहेली बार कीसी मर्दका लंड इतने नजदीकसे देखाथा.. ओर नीलमने सरमाते लंडको मुठीमे पकडलीया..

धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. तुजे पसंद आया..? हंम..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेनकी ओर कामुक नजरोसे मुस्कराते) हंम.. मेरे होने वाले पतीका हे.. बहुत अच्छा हे.. क्या इसे मुहमे लेना हे..?हंम..?

धिरेन : (हसते) हां.. पहेले इसे गीला करो.. फीर मुहमे लेलेना..

कहातो नीलम सर्मसार होते धिरेनके लंडकी ओर अपना मुह लेगइ फीर धिरेनकी ओर देखते अपनी जीभ नीकालते धिरेनके लंडको अपनी मुठीमे थामते अपनी जीभ से लंडको गीला करने लगी.. जब लंड गीला हो गया.. तब नीलमने पहेले अपने होठोसे लंडको पकडकर थोडा दबा लीया..

तो धिरेनके मुहसे सीसकारीया नीकल गइ.. ओर नीलमने धीरे धीरे करते लंडको अपने मुहमे भर लीया.. लंडमे तरल पदार्थकी वजहसे नीलमको मुहमे नमकीनसा स्वाद आने लगा.. ओर धीरेनकी ओर देखते लंडको मुहमे धीरे धीरे अंदर बहार करने लगी....

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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १४२/२

तो धिरेनभी आंख बंध करके मजे लेने लगा.. आज उनकी मासुका उनको ब्लुजोब दे रही थी.. ओर मजेकी बाततो यही थी की जोभी धिरेन उसे करनेको कहेता.. वो बीना कोइ विरोध उनकी हर बात मानती थी.. नीलम ओर धिरेन अपने प्यारमे अ‍ेक कदम ओर आगे बढ चुके थे.. तब कुछही देरमे धिरेनके लंडसे उनका लावा फुट पडा.. ओर नीलमके मुहमे पीचकारीया मारते उनकी हलकमे चला गया..

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तो नीलमने जटसे लंडको मुहसे बहार नीकाल दीया ओर वही घांसते हुअ‍े थुकते नीकालने लगी.. तो आगे बैठे लोग पीछे मुडकर उन दोनोकी ओर देखने लगे.. तब धिरेन ओर नीलम बहुतही सरमा गये.. ओर नीलम अपने कपडे सही करते वापस अपनी चेयरपे बैठ गइ.. अब दोनोको सरमके मारे यही बैठना मुस्कील होने लगा.. तभी नीलमने धिरेनका हाथ पकडके बहारकी ओर जानेको कहा.. ओर दोनोही बहार आगये..

तो बहार आतेही नीलम लेडीस टोयलेटकी ओर चली गइ.. ओर अंदर जातेही गेन्डीमे पानीसे अपना मुह साफ करने लगी.. आज पहेली बार अपने यारके हथीयारके पानीका स्वाद चखा था.. जो नीलमके लीये पहेला अनुभव था.. तभी पीछेसे अपनी कमरमे कीसीने हाथ डालके उसे बाहोमे भीच लीया तो नीलम गभराके पलट गइ.. देखातो धिरेन उनको बाहोमे भीचते नीलमके गलेको चुम रहाथा तब नीलम बहुतही सर्मसार होगइ..

नीलम : (सरमाते कामुक आवाजमे धीरेसे) धिरेन प्लीज.. यहा नही.. ये लेडीस टोयलेट हे.. यहा कोइभी लेडीस आ सकती हे.. छोडीये मुजे.. हम कही ओर जाते हेनां.. आप बादमे करलेना..

धिरेन : (होंठ चुमते) नही नीलु मे तेरे बगैर नही रेह सकता.. मुजे जल्दसे जल्द तुम्हारे साथ मीलन करना हे..

नीलम : (सरमाते मुस्कराते धीरेसे) जानु.. प्लीज.. यहा नही.. कोइ देखलेगा.. चलोना हम कही ओर चले जाते हे.. हम होटेलमे चले..? हंम.. मेभी आपके बगैर नही रेह सकती.. प्लीज.. आप वही करलेना..

धिरेन : नही नीलु.. अब हम दोनो सीधेही हमारी सुहागरातमे मीलेगे.. मे तुमसे जल्दी मीलन करना चाहता हु.. तुमने तो मुजे पागल कर दीया हे.. इतनातो पुनोने भी नही कीया..

नीलम : (सर्मसार होते) आजतो आपनेभी मुजे पागल करदीया हे.. धिरेन.. प्लीज.. पहेले हम बहार चले..? फीर कही बैठकर बाते करते हे.. पहेले यहासे चलो..

कहेते नीलम धिरेनकी बाहोसे छुट गइ.. ओर धिरेनका हाथ पकडके उनके सामने देखकर मुस्कुराती उसे खीचकर बहारकी ओर लेआइ.. फीर दोनोही अपनी बाइक लेकर वहासे नीकल गये.. ओर धिरेनने बाइक अ‍ेक बडीयासी रेस्टोरन्टपे लेली.. वहा दोनो अ‍ेक केबीनमे आमने सामने बैठ गये.. तब धिरेनने कुछ खानेका ओर्डर दीया.. ओर अपने पैरोसे नीलमके पैरको सहेलाने लगा तो नीलम बहुतही सर्मसार होते मुस्कुराने लगी..

नीलम : (सरमाते कामुक नजरोसे देखते हसते) जानु.. आप बहुत नोटी हो.. ना जाने आज मुजसे क्या क्या करवा लीया.. आपने आज कैसी आग लगाइ थी.. जानु.. आज बहुत मजा आगया..

धिरेन : (दोनो हाथ थामते आंखोमे देखते) नीलु.. येतो कुछभी नही हे.. जब हमारा मीलन होगा तब तुम नजतकी सैर करोगी.. मे सचमे तुजे बहुत प्यार करता हु.. बस हमारी सादी होजाये.. तो हम दोनोही हमारे नये घरमे रहेगे.. तब हर रात हमारी सुहागरात होगी.. आइ प्रोमीस..

नीलम : (थोडा सीरीयस होते) आइ नो.. जानु सादीतो हम करलेगे.. लेकीन आप अपनी मम्मीको ओर मे अपने मम्मी पापाको क्या जवाब देगे..? कभी इनके बारेमे सोचा हे..? खास करके मेरी सौतनको.. हमे पुनोदीदी लता बुआ.. सबका सामना करना पडेगा.. क्या आपने कुछ इनके बारेमे तैय कीया हे..?

धिरेन : (सोचते) नीलु.. अगर तुजमे हिंमत हे ओर तुम मेरा साथ दोगी तो हम दोनो सबसे लड जायेगे.. खुद जीजुने मेरी मासे इस उमरमे दुसरी सादी करली हे.. तेरे पापानेभी अपनी मामीसे दुसरी सादी करली हे.. तो वो लोग हमारी सादीके लीये क्यु अ‍ेतराज करेगे..? अगर पुनोने कुछ कहा तो मे उनके साथ नही रहुगा.. मे हमेसाके लीये तेरे साथ इधर सहेरमे रहेने आजाउगा.. बस मुजे तेरा साथ चाहीये.. तुम मुकर मत जाना..

नीलम : (आंखोमे देखते) जानु.. आप मेरा पहेला प्यार हो.. ओर मे आपसे हमारी सादीसे पहेलेही पुर्ण समर्पीत होजाउगी.. मे आपसे वादा करती हुकी मे मरते दम तक आपका साथ कभी नही छोडुगी.. फीर चाहे मुजे कीसीके साथभी क्युना लडना पडे.. बस.. आप मुजे कभी मत छोडना.. वरना मेरे लीये जीना मुस्कील होजायेगा.. मुजे कीसीभी हालमे आपके साथ रहेना हे.. फीर भलेही मुजे बीचमे पढाइ छोडनी पडे..

धिरेन : (मुस्कुराते हाथ चुमते) थेन्क्स नीलु.. बस मुजे तुमसे यही उमीद थी.. तुम पढाइ छोडनेकी बाते मत करो.. इस साल तुम अच्छेसे पढाइ करले.. फीर कोलेजतो युही चला जायेगा.. फीर मे तेरी जोब हमारी बेन्कपे लगवा दुगा.. नीलु.. हम दोनोको सेटरडे के दीन हमारा मकान देखने जाना हे.. अगर तुजे पसंद आगया तो हम ले लेगे..

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. जानु.. आप पुनोदीदीको भी दीखा देना.. ताकी पीछसे आपको कोइ प्रोबलेम ना हो.. वो बहुतही अच्छी हे.. कास वो हमारी सादीको अ‍ेक्सेप्ट करले.. तो हम तीनोही साथ रहेगे..

धिरेन : नही नीलु.. माने उनको गांवमे हमारी खेतीबाडी ओर हमारे पुर्खोके घरकी सब जीम्वेवारी दी हे.. ओर उपरसे उनको सहेरमे रहेनेके लीये मना करदीया हे तो पुनो वही रहेगी.. ओर मेभी नही चाहताकी तुम उनके साथ रहो.. वरना मे तुमको वो प्यार नही दे पाउगा जो मे तुजे देना चाहता हु..

नीलम : (मुस्कुराते) ठीक हे.. जैसे आपकी मरजी.. धिरेन.. अ‍ेब बात पुछु..? हम दोनो सादी कब करेगे..?

धिरेन : (हसते) बहुत ही जल्द.. लेकीन इनसे पहेले मे मेरी इस खुबसुरत बीवीको अच्छेसे प्यारतो करलु..

नीलम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हंम.. मेने थीअ‍ेटरके अंदर देखा आपका प्यार.. हें..हें..हें.. मुजे पताहे आपकी कोनसी फेन्टासी हे.. मतलब.. क्या आप सचमे.. आइ मीन.. हमारा मीलन..

धिरेन : हां नीलु.. मेरी सुरुसेही फेन्टासी रही हेकी मे सादीसे पहेले वो सबकुछ करना चाता हु जो अ‍ेक कोलेज लाइफमे मेरे सभी दोेस्तो अपनी गर्लफ्रेन्डके साथ कर चुके हे.. ओर तुम सीर्फ मेरी गर्लफ्रेन्ट नही मेरी मासुका मेरी हमसफर सबकुछ हो.. बेबी.. क्या इसके लीये तुम रेडी तो होनां..?

नीलम : (सरारतसे मुस्कुराते) जानु.. क्या आप बता सकते हेकी कोलेजमे आपके सभी दोस्तो कैसे अपनी गर्लफ्रेन्डको मीलते थे..? प्लीज.. हें..हें..हें..

धिरेन : (मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. डार्लीग.. वो सब यातो कीसी थीयेटर या गार्डनमे चले जाते थे.. अगर कीसीको मौका मीलतातो उनकी गर्लफ्रेन्डको कोलेजके बाथरुममेही दबोच लेते थे.. ओर उनके साथ सबकुछ करलेते थे.. उनको अपने कपडेभी नही नीकालने देतेथे.. बस उनको जुकाके उनका लोअर उचा करके पीछेसेही घुसाके चोद लेते थे.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) छी.. कीतना गंदा बोलते हो आप.. हें..हें..हें..

धिरेन : नीलु.. बस.. यही मेरी फेन्टासी हे.. मे चाहता हु जब दुसरा या तीसरा मीलन हो.. तब तुमभी अपने स्कुलके ड्रेसमे हो.. मेभी उसी कपडोमे तुम्हारे साथ करना चाहता हु..

नीलम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते मुस्कुराते कामुक नजरोसे धीरेसे) हंम.. मतलब सादीसे पहेले सीर्फ अ‍ेक बार नही ओरभी करना चाहते हे.. ठीक हे.. आपकी जीतनीभी मरजी हो इतनी बार करलेना.. जानु.. सच कहु..? तो मेरीभी यही फेन्टासी हे.. मे खुलकर जीना चाहती हु.. मुजे अ‍ेक आजाद पंछीकी तराह जीना हे.. मेरी होस्टेलवाली फ्रेन्डने भी कहाहे की तेरे बोयफ्रेन्टका सब प्यार बटोरले.. उसीने मुजे अ‍ेक आजाद पंछीकी तराह जीना साखाया हे.. वोभी इसी तराह जीती हे.. तो मेभी उनकी तराह खुलकर जीना चाहती हु..

धिरेन : (मुस्कुराते) अच्छा..? क्या नाम हे तेरी फ्रेन्डका.. क्या कभी मुजसे मीलवायेगी..?

नीलम : (सरारतसे हसते) नही.. बीलकुल नही.. वरना जनाबको पसंद आगइतो मेरा चान्स तो गया.. हें..हें..हें.. ओर वो कमीनी हे भी अ‍ैसी पटाका.. जानु.. मे उनको मीलवाके कोइ रीस्क लेना नही चाहती.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) नीलु.. तुम सब लडकीयोमे अ‍ेक दुसरेके लीये ज्वेलेसी बहुत होती हे.. इनसेतो हच्छे हम लडके हे.. सब बाते खुलकर करते हे.. मेने देखाहे जीजुके गांवमे लखनभैयाके सभी दोस्तो अपनी मासुकाको लेकर सभी तराहकी चर्चा करते हे.. ओर लखनभैया खुदभी बहुत अच्छे हे.. वोभी रंगीन मीजाजके हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (आस्चर्यसे हसते) क्या.. लखन जीजु..? ओर रंगीन मीजाज..? आइ कान्ट बीलीव.. दीखनेमे तो कीतने भोले भाले लगते हे.. हें..हें..हें.. धिरेन प्लीज.. मुजे बताओना आप लोग कीस तराहकी चर्चा करते हो.. आपको पता हे..? वो ओर लतादीदीभी अपनी सादीसे पहेले सबकुछ कर चुके हे..

धिरेन : (सरारतसे हसते) अच्छा..? सबकुछ मतलब..? क्या..?

नीलम : (सर्मसार होते हसते) जाओ.. मुजे नही पता.. आप बहुत गंदे हो.. हें..हें..हें..

धिरेन : (धीरेसे हसते) अरे बताना.. इसमे काहेकी सरम.. हमभी तो वोही करने वाले हे.. बस अ‍ेक बार बतादे.. हें..हें..हें.. वरना मेरी कसम देदुगा.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते जटसे अ‍ेक मुका मारते) नही.. कसम मत देना.. आप बहुत कमीने हो.. मुजे तो सर्म आ रहीहे.. नही कहुगी.. हें..हें..हें..

धिरेन : (जुठमुठ रुठते मुह घुमालेता हे) ठीक हे मत बताओ.. मे समजुगा तुम मुजे प्यार नही करती..

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) अरे.. नाराज होगये..? चलो.. बताती हु.. लेकीन सीर्फ अ‍ेक बार.. आइमीन.. मेरा मतलब.. जो आप सादीसे पहेले मेरे साथ करना चाहते हे.. मतलब दोनोका मीलन.. चु..दा..इ.. अबतो खुस..?

धिरेन : (मुस्कुराते बुब्सको दबाते) हंम.. खुस.. नीलु.. हम भी मीलकर वोही करने वाले हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) आइइइइ.. जानु.. थोडा धीरेसे दबाओनां..? दर्द होता हे.. हटो.. कोइ आ रहा हे..

तभी दोनोके खानेका ओर्डर आगया तो दोनोही सही होकर बैठ गये.. तो नीलम बहुतही सरमाइ.. जब वेइटर खाना रखके चला गयातो.. दोनोही खाने लगे.. तब खाना खाते धिरेन सरारतसे नीलमके पैरको सहेलाते पैरको उनकी चुतकी ओर लेगया.. तो नीलम बहुतही सरमाइ ओर जोरोसे हसते धिरेनको मुका मारने लगी.. फीर नीलम धिरेनकी ओर मुस्कुराते कामुक नजरोसे देखती रही.. तभी धिरेनने कहा..

धिरेन : नीलु.. तुजे पता हे..? लखनभैया केह रहेथे अब उस गांवमे ओर आजुबाजु सभी गांवमे बहुत बडा बदलाव होने वाला हे.. सब लोग मीलकर उन्हीकी च र्चा कर रहेथे.. सब लोग उस बदलावका इन्तजार कर रहेहे ताकी जीनके साथ उनका टाका भीडा हुआ हे उनसे सादी कर सके..

नीलम : (मुस्कुराते) अच्छा.. अगर दोनो प्यार करते हे तो इस बदलावकी क्या आवस्यक्ता हे.. वोतो अ‍ैसेही कर सकते हे..जैसे हम दोनो करने वाले हे.. लेकीन आपने बताया नही कीस टाइपका बदलाव आने वाला हे..

धिरेन : (मुस्कुराते खाना खाते) नीलु.. अ‍ैसा बदलावकी हम सोचभी नही सकते.. ओर ये बललाव जीजुके घरपे पीछली तीन पीढीयोसे आ चुका हे.. मतलब.. सब लोग आपसी रीस्तोमे सादीया करते होगे.. इनमे कोइ रीस्ते नाते नही देखना.. जीसे जीनके साथ सादी करनीहे वो कर सकते हे..

नीलम : (आस्चर्यसे मुह फाडके देखते) व्होट..? मतलब..? क्या कहा आपने फीरसे कहीयेतो..?

धिरेन : (मुस्कुराते) हां नीलु.. सबलोग आपसी रीस्तोमे सादीया करते होगे.. ओर अभी गांवमेभी अ‍ैसे कइ रीस्ते पनप रहे हे.. हमारे सभी दोस्तोका कीसीना कीसीके साथ रीलेशन हे.. मतलब आपसी रीस्तोमे रीलेशन.. तुम समज गइनां..?

नीलम : (सरमाते हसते) हां इतनीभी भोली नही हु.. आपसी रीस्तोके बारेमे पता तो हे.. फीरभी मुजे आप कुछ रीस्तोके बारेमे बताइअ‍े.. मुजे जानना हे..

धिरेन : (हसते) नीलु.. कीसीका उनकी सगी बहेनके साथ तो कीसीको उनकी कजीन बहेनके साथ.. रीलेशन हे.. तो कीसीको उनकी विधवा बुआ या चाची या ताइ.. के साथ रीलेशन हे.. बस इसीकी बात कर रहा था.. सब आपसमे सादीया कर सकते हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (मुस्कुराते) हंम.. मतलब मेरे पापा ओर मेरी मम्मीकी तराह.. हें..हें..हें.. वो दोनोभी तो मामी भांजे थे.. हें..हें..हें.. जानु.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? मेरे जो अभी ये पापा हेना..? वो ही मेरे असली पीता हे..

धिरेन : (अब चोंकनेकी बारी धिरेनकी थी) क्या..? मतलब भानुजीजु.. क्या वोही तेरे असली पीता हे..?

नीलम : हां धिरेन.. लेकीन आप ये बातका जीक्र अभी कीसीके सामने नही करेगे.. आपको मेरी कसम..

धिरेन : जीलु.. तुमने कसम क्यु दी..? मुजेतो कुछ ओरही आइडीया आ रहा था.. अब क्या करु..?

नीलम : (आस्चर्यसे देखते) कोनसा आइडीया..? धिरेन प्लीज.. क्या आप मुजे बता सकते हे..?

धिरेन : (सामने देखते) नीलु.. इस बातका हम हमारी सादीमे फायदा उठा सकते हे.. तेरे घरवालेको हमारी सादीको मानना ही पडेगा.. बात कुछ समजमे आइ..? तुम समज गइनां..? कुछ आइडीया आया..?

नीलम : (खुसीसे मुस्कुराते) हंम.. समज गइ.. लेकीन जानु वो सब आपको देखना पडेगा मे कुछ नही केह पाउगी.. (मुस्कुराते कातील नजरोसे) जानु आपका दिमागतो बहुत चलता हे.. हें..हें..हें..

धिरेन : (मुस्कुराते) हंम.. मेरी नीलु डार्लींगके लीये दिमागतो लगाना पडेगानां..? नीलु.. मुजे अ‍ेक बात बता.. अगर भानुजीजु तेरे पीता हे तो तेरी मम्मी ओर भानुजीजु दोनो रीलेशनमे कैसे आगये..?

नीलम : (सरमाते खाना खाते) जानु.. जहा तक मेने सुना हे.. तब पापाकी भावना मम्मीके साथ सादीभी नही हुइथी.. तब पापाभी जवान थे.. ओर मम्मीकीभी सादीको अ‍ेक दो साल हुअ‍े होगे.. उनकाभी छोटी उमरमेही ब्याह हुआथा.. जब मेरे पापाका अ‍ेक्सीडन्ट हुआ तब मेरे ये पीता ओर मम्मी ही उधर होस्पीटलमे रुकेथे.. बस.. वहा दोनोकी आंख मील गइ.. तबसे दोनोका टाका भीडा हुआ हे..

जब पापा होस्पीटलमे थे तबही मेरे ये पीताने मांको प्रेगनेन्ट कर दीयाथा.. ओर नव महीनेके बाद मेरा जन्म हुआ.. बस.. तबसे दोनो रीलेशनमे हे.. पापा रेग्युलर माको बार बार मीलने आते थे.. तब मुजे नही पताथा की यही मेरे पीता हे.. ये बात मुजे यहा आकर पता चली.. बस.. जानु.. अब हमभी आसानीसे सादी कर सकते हे.. अब हमे कीसीका डर नही रखना.. अगर कीसीने अ‍ेतराज कीया तो मे आपके साथ भागनेके लीये तैयार हु.. हम भागकर सादी करलेगे..

धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. थेन्क्स.. लेकीन मुजे नही लगता हम दोनोको भागकर सादी करनेकी आवस्यक्ता होगी.. हम कीसी मंदिरमे जाकर सादी करलेगे.. ओर सबको बतादेगे.. वो सब तुम मुजपे छोडदो..

नीलम : (थोडा जीजकते सरमाते) जानु.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? हम दोनो सादीतो करलेगे.. फीरभी मे आपकी इलीगल बीवी कहेलाउगी.. आपके उपर पहेला हक तो हमेसा पुनोदीदीका ही रहेगा..

धिरेन : (कुछदेर सोचनेके बाद कातील मुस्कानसे) नीलु.. तुम फीकर मत करो.. मेने इस बारेमे कुछ सोचलीया हे.. कुछ दिनोके बाद तुम ही मेरी कायदेसरकी बीवी कहेलाओगी.. हें..हें..हें..

नीलम : (थोडासा गभराते) जानु.. आप क्या करने वाले हो..? देखना कुछ उल्टा सीधा मत करना.. मे आपसे दुर नही रेह सकती.. जोभी करना हो सोच समजके करना..

धिरेन : (मुस्कुराते) नही नीलु.. तुम जो सोच रही हो अ‍ैसा कुछभी नही करना.. देखना पुनो सामनेसे मुजे डीवोर्स पेपरपे साइन करदेगी.. फीर हम कोर्टमे सादी करलेगे बस.. ये सब तुम मुजपे छोडदो.. तुम टेन्शन मतलो..

दोनोही अपनी सादी ओर फ््युचरकी प्लानींग कर रहेथे.. तब उनको नही पताथा की दोनो होस्टेलसे नीकलते ही उनकी मेट्रनने पुनमको फोन करदीया था.. तब पुनम अपने रुममे जाकर आंख बंध करके बैठ गइ.. ओर इन दोनोपे पुरा ध्यान लगाकर बैठी दोनोकी सब हरकत ओर बाते जान रही थी.. मंजुने ये विद्या पुनमको सीखाइ तबसे वो इसका पुरा इस्तमाल करती थी..

ओर आजभी दोनोकी करतुत ओर बाते सुनकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी.. आज धिरेनने खुद पुनमका उनके भाइ देवायतके साथ रहेनेका रास्ता साफ करदीयाथा.. ओर वैसेभी अब पुनमको धिरेनसे कोइ मतलब नही था.. उनकोतो सीर्फ अपने भाइकी प्यारकी नीशानीके लीये अ‍ेक बापका नाम चाहीये था.. इसके लीये पुनमने जरुरी था इतना मीलन धिरेनके साथ करलीया था.. जो कुछही दिनमे सबको बताना था..

धिरेन ओर नीलमने खाना खालीया.. उनके बाद धिरेनने आजभी नीलमको मंहेगी गीफ्ट दीलवाइ.. फीर उनको वापस होस्टेलमे छोडकर वहासे अपने गांवकी ओर नीकल गया.. तो दुसरी ओर गांवमे सुधीरकी क्लीनीकपे बरखा पेसन्टके केस नीकाल रहीथी.. तब मुना अपनी केबीनमे सुधीरकी लीखी हुइ दवाइआ दे रहा था.. जब पेसन्ट कम होगये तब वो अपनी मां बसंतीने रखी हुइ सर्तके बारेमे सोचने लगा..

बसंतीने मुनाको सब बाते खुलकर बता दीथी.. ओर इसी सर्तपे वो बरखाकी सादी मुनासे करवानेके लीये राजी हुइथी.. तो मुनाने तबही बसंतीकी सर्त मानके उनको अपने रुममे दबोच लीया था.. मुनातो अ‍ेक चुत मांगने गयाथा.. ओर उनके बदलेमे दो दो चुतका इन्तजाम हो गयाथा.. वो ये सोचकर अ‍ेक्साइटेड होने लगा ओर पेन्टमे ही लंड जटके मारने लगा.. तो दुसरी ओर बरखासे उनकी मांके बारेमे उनके ओर भानुके अवैध रीस्तोके बारेमे पता चला..

तभी मुनाको ये लगने लगाकी उनकी मां बहुत कामी ओरत हे.. जो पतीके सुखके बीना नही रेह पाती.. अगर बहारके आदमीसे रीलेशन रखती हेतो तो फीर मे क्यु नही.. यही सोचते मुनाका लंड तनके खडा होगया.. ओर घडीकी ओर देखने लगा.. तो अभी साडे पांच बजनेको आये थे.. ओर वो सोचने लगाकी अभी बरखा भी दो ढाइ घंटे तक इधर रहेगी.. ओर उनके बापुभी रमेशकी दुकानपे होगे.. तो इस वक्त मां घरपे अकेली होगी..

तो मुजे घरपे जाकर अ‍ेक बार मांसे अच्छेसे मील लेना चाहीये.. हो सकताहे मा को मीलकर कुछ बात बन जाये.. जब उनके रुममे मेने उसे पकडके दबोच लीया तबभी वो कुछ नही बोली.. अगर मां खुद मेरे साथ रीलेशनमे आना चाहती हे तो मुजे क्या प्रोबलेम.. अगर मोका मीला तो अभी घर जाकर मे मा को चोद लुगा.. क्या गदराया माल हे वो.. ओर वो यही सब सोचते सुधीरके पास चला गया..

मुना : (जुठ बोलते) अंकल मुजे ठाकुरसाहबने कुछ काम सोपा हे.. तो क्या मे जाउ..? मे अ‍ेकाद घंटेमे वापस आजाउगा..

सुधीर : (मुस्कुराते) हां.. अब मे तुजे मना थोडीना कर सकता हु.. जा.. क्या बरखाभी साथ चल रही हे..?

मुना : (सरमाते मुस्कुराते) नही अंकल.. सीर्फ मुजे जाना हे.. मे अभी उनको कहेकर जाता हु की मेरा कामभी देख लेगी..

सुधीर : (हसते) ठीक हे जाओ..

मुना : (हसते हुआ बहार आते बरखाको धीरेसे) बरखा.. मे जरा ठाकुरसाहबके कामके लीये बहार जा रहा हु.. तुम जरा सम्हाल लेना.. अ‍ेक देढ घंटेमे वापस आजाउगा.. फीर हम दोनो साथ घर चले जायेगे..

बरखा : (सरमाते हसते) जी भैया.. मे यही हु.. आप जल्दी आजायेगा.. क्या हमारे लीये जा रहे हे..?

मुना : (मुस्कुराते) हंम.. सायद हमारी सादी जल्द होजायेगी.. बस उसी कामके लीये जा रहा हु..

बरखा : (सरमाते खुस होते) हंम.. जाइअ‍े यहा मे सब सम्हाल लुगी..

कहातो मुना हसते हुअ‍े वहासे चला गया.. ओर गांवकी ओर घुमते अपने बापुकी दुकानपे चला गया.. क्युकी वो कोइ रीस्क लेना नही चाहता था.. तो वही जाकर उनके बापुसे बात करके कंन्फोर्म करलेना चाहता था.. क्युकी आज वो अपनी मां को नही अपनी मासुकाको मीलने जा रहा हे.. अ‍ैसा फीर करने लगा.. ओर वो रमेशकी दुकानपे आगया.. तो उनके बापु वही बैठे कीसीका माल तोल रहेथे.. जब वो फ्री होगये तब उसने मुनाको पुछ ही लीया..

विभु : हां बेटा.. इस वक्त यहा..? होस्पीटल नही गया क्या..? कुछ काम था..?

मुना : हां बापु मे जरा कामसे बहार जा रहा हु.. हम ८ बजे घर आजायेगे.. आप कब घर जाओगे..? क्युकी अगर मुजे आनेमे देर होगइ तो रातमे मां ओर बरखा अकेली होगी तो पुछ लीया..

विभु : बेटा.. आजकल रमेशभाइ बहार रहेते हेतो आठतो बजही जायेगा.. ठीक हे मे आठ बजे दुकान बंध करके चला जाउगा.. क्यु कुछ जरुरी काम हे..? जो इतनी देर होजायेगी..?

मुना : (मुस्कुराते) हां बापु.. मुजे ठाकुरसाहेबके अ‍ेक कामके लीये बहार जाना हे.. तो चलता हु..

विभु : (मुस्कुराते खुस होते) हां बेटा.. बडेही नेक इन्सान हे.. हमपे उनका बहुत बडा अहेसान हे.. वरना हमारी जमीनतो गइथी हाथसे.. जा करदे उनका काम..

तब मुना खुस होगया.. ओर गांवमे घुमते पीछली गलीसे अपने घरपे चला गया.. तो दरवाजा बंध था.. तो मुनाकी दिलकी घरडन तेज होने लगी.. मानो आज वो अपनी माको नही.. अपनी मासुकाको मीलने आया हो.. यही सोचते उनका लंड तनके सख्त होने लगा.. उनको अ‍ैसा लगा वो आज अपने घरपे नही.. सबसे छुपाते अपनी मासुकाके घरमे घुस रहाहो.. ओर उसने भारी मनसे धीरेसे घरके दरवाजेको धका देदीया..

तो दरवाजा खुल गया तो उनको घरके अंदर कोइ दीखाइ नही दीया.. तब अ‍ेक बार पीछे मुडकर अपनी गलीमे नजर दोडाके देखने लगाकी कही कोइ देखतो नही रहा.. ओर उसने धीरेसे दरवाजा बंध करके लोक करलीया.. ओर दबे पांव घरके अंदर चला गया तो वहाभी उनको कोइ नजर नही आया.. तो वो तीनो रुममे नजर घुमाने लगा.. उनको अपनी मां बसंती कही नजर नही आइ.. ओर मुना उनके रुमकी ओर चला गया..

तो बसंतीके रुममे बाथरुमसे पानीकी आवाज आ रहीथी.. तो मुना समज गयाकी उनकी मां अंदर नहा रही हे.. ओर मुनाने हींमत करके उनके रुमका दरवाजा भी बंध करलीया.. तो पुरे रुममे अंधेरा होगया.. ओर मुना दबे पांव जाकर उनके बेडपे बैठ गया ओर बसंतीके बहार नीकलनेका इन्तजार करने लगा.. क्युकी बसंतीने खुद मुनाको खुलकर उनके साथ रीलेशन रखनेकी बात कहीथी.. ओर मुनाने उसी दिन अपनी मांको उनके रुममे दबोच लीयाथा.. तो आज मुनाको कोइ डर नही लग रहाथा.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १४३

तो बसंतीके रुममे बाथरुमसे पानीकी आवाज आ रहीथी.. तो मुना समज गयाकी उनकी मां अंदर नहा रही हे.. ओर मुनाने हींमत करके उनके रुमका दरवाजा भी बंध करलीया.. तो पुरे रुममे अंधेरा होगया.. ओर मुना दबे पांव जाकर उनके बेडपे बैठ गया ओर बसंतीके बहार नीकलनेका इन्तजार करने लगा.. क्युकी बसंतीने खुद मुनाको खुलकर उनके साथ रीलेशन रखनेकी बात कही थी.. ओर मुनाने उसी दिन अपनी मांको उनके रुममे दबोच लीयाथा.. तो आज मुनाको कोइ डर नही लग रहाथा.. तभी....अब आगे

तभी बाथरुमसे पानीकी आवाज आनी बंध होगइ.. तो मुना सतर्क होगया.. की अभी उनकी मां बसंती बहार नीकलेगी.. तब उसने क्या पहेना होगा..? ओर उनसे बातकी सुरुआत कैसे करे..? वही सब सोचते मुनाके दिलकी धडकन बढ गइ.. आज उसने ठानलीथी की जोभी हो आज माको अच्छी तराह मीलना हे.. यही सब सोचताही था की तभी बाथरुमका दरवाजा धीरेसे खुल गया..

जब बसंती बहार नीकली.. तब मुना उसे देखताही रेह गया.. क्युकी घरपे कोइ नही था तो बसंती भी बीन्दास्त थी.. ओर वो अ‍ैसे हर बार अकेली होती तबही नहाने जातीथी.. ओर नंगी ही बहार नीकलती थी.. क्युकी उस टाइम घरपे कोइ नही होता था.. ओर आजभी अपने माथेपे टोलीया लपेटते नंगीही बहार नीकली.. लेकीन रुममे दरवाजा ओर लाइट बंध होनेकी वजहसे रुममे काफी अंधेरा था.. तो उनका ध्यान बेडकी ओर नही गया.. ओर वो सीधेही आयनेके सामने चली गइ..

तबतक मुना अपनी खुबसुरत नंगी मां की ओर देखता ही रहा.. मुनाको अपनी मां आज अ‍ेक लडकीकी तराह कामदेवकी मुरत दीखने लगी.. उनका गदराया बदन देखकर मुना पागल जैसे होने लगा.. उनका लंडभी नइ चुत मीलनेकी उमीदमे खडा होकर जटकेपे जटका मारने लगा.. ओर मुना हिंमत करके धीरेसे बेडसे खडा होगया.. ओर दबे पांव अपनी मां बसंतीके पास चला गया.. ओर उनके पीछे जाकर खडा होगया..

अ‍ेकतो बसंती नहाके नीकलीथी.. उपरसे पुरी नंगीथी.. तो बहुतही कामुक दीख रहीथी.. जीनकी वजहसे पुना अपना कंट्रोल खो चुकाथा.. तो आज मुनाने कीसीभी हालमे बसंतीके साथ सबकुछ करनेकी ठानली.. तभी बसंतीको आयनेमे मुना उनके पीछे खडा दीख गया.. तो वो जटसे अपने माथेसे टोलीया हठाकर अपने उरोजोपे ढकते अपनी चुतपे हाथ रखते पलट गइ.. ओर गभराके दो कदम पीछे हट गइ..

बसंती : (गभराते दरवाजेकी ओर अ‍ेक नजर डालते) अरे मुना..? तुम..? इस वक्त यहा क्या कर रहा हे..? ओर ये दरवाजा क्यु बंध कीया..? जा बहार.. मुजे कपडे बदलने हे..

मुना : (सरमाते धीरेसे) मां.. उस दिन आपने कहाथानां..? दो पहोरमे आना मे अकेली होती हु.. तो आज आगया.. तो आप अंदर नहा रहीथी तो आपका यही बैठकर इन्तजार कर रहाथा..

बसंती : (सरमाते सब समज गइ.. तो धीरेसे) हंम.. क्या बरखाभी साथ आइ हे..? हंम..?

मुना : (सरमाते मुस्कुराते) नही मां.. सीर्फ मे अकेला आया हु.. वो ओर बापु आठ बजे आयेगे.. इस वक्त आप अकेली होगी.. तो सोचा आपकी सर्तका अच्छेसे जवाब देदु.. क्युकी अ‍ैसी बात बरखाके सामने करना उचीत नही लगा.. तो में अकेला आगया.. हें..हें..हें..

बसंती : (कातील नजरोसे देखते मुस्कुराते) हंम.. बडाही कमीनाहे तु..? उसी दिन बरखा घरपे होनेके बावजुद इतनी हिमंत करके मेरे रुममे आकर मुजे दबोचके अच्छे से जवाब तो देदीया था.. पुरा दिन मेरे दुधुमे दर्द रहा.. तो अब कोनसा जवाब देने आया हे..? वैसे काफी समजदार हो.. जो इस वक्त अकेला आगया.. कहो..? और क्या कहेने आये हो..? अभी कुछ कहेना बाकी हे..?

मुना : (कमरमे हाथ डालके अपनी ओर खीचते अपने तनसे सटाते) हां.. मां.. उस दिन मे आपको अच्छेसे जवाब नही देपाया.. तो मुजे लगा आज अपनी मांको अकेलेमे मीलकर अच्छेसे जवाब देदु.. बस.. आप मेरी ओर बरखाकी सादी करवा दीजीये.. मे आपको बहुत खुस रखुगा.. आपको सीकायतका अ‍ेकभी मौका नही दुगा.. मे अकेलाही आपकी सारी कशर पुरी कर दुगा..

कहा तो बसंती मुस्कुराकर मुनाके सीनेपे अपना सर रख देती हे.. ओर उनके सीनेको सहेलाने लगती हे.. फीर थोडासा सर उचा करते मुनाकी ओर टेडी नजरसे कामुक स्माइल करते सरमाती हे.. ओर बसंतीने थोडासा टोलीया अपने उरोजोसे हटालीया तो उनके दोनो बुब्स मुनाके सीनेमे चुभने लगे.. तो मुना अ‍ेक नजरसे उनको वासनाभरी नजरोसे देखने लगा.. ओर बसंतीके बुब्सको अपने हाथोसे थामलीया..

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मुना : (लडखडाती आवाजमे) मां.. आइ लव यु.. तुम बहुत खुबसुरत हो.. मेरी बरखाकी तराह..

बसंती : (कामुक स्माइल करते, सीनेमे हाथ घुमाते, धीरेसे) तो क्या सीर्फ इतनीसी बात कहेने ही आयाथा..? तो फीर देखले.. अ‍ेक बार अच्छेसे सोचकर जवाब देना.. मुजे भी बरखाकी तराह जींदगीभर इसी तराह सम्हालना पडेगा.. जो अभी सम्हालके खडा हे.. बोलो ये सर्त मंजुर हे..?

मुना : (कातील नजरोसे उरोजोको मसलके दबाते) हां मां.. मेने सब सोचलीया हे.. मुजे आपकी हर बात मंजुर हे.. बस.. मेरी भी अ‍ेक सर्त हे.. आप बुरा मत मानना..

बसंती : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? अब तेरी कौनसी सर्त हे..?

मुना : (नजरे चुराते धीरेसे) मां.. आप बुरा मत मानना.. इसके बाद आप कीसीके साथभी रीलेशन नही रखोगी.. बस सीर्फ यही कहेना था..

बसंती : (थोडा गभराते धीरेसे) ये सब तुजे कैसे पता चला..? क्या ये तुजे तेरी बीवीने कहा..? सच बताना..

मुना : (नीतंबसे पकडते अपने तनसे चीपकाते) नही मां.. मुजे ये बात मेरे दोस्तोसे पता चली हे.. इसके बारेमे बरखाको कुछ नही मालुम.. मां.. आप इस बारेमे बरखाको कुछ मत कहेना..

बसंती : (मुस्कुराते मुनाके चहेरेको थामते) हंम.. अपनी बीवीको बहुत प्यार करता हे..? हंम..? चल ठीक हे.. मुजे भी तेरी सब सर्त मंजुर हे.. लेकीन याद रखना.. अब आजसे मुजेभी तेरे अलावा कीसीके सहारेकी जरुरत नही हे.. ओर जबभी हम दोनो अकेले हो तो तुम मुजे नाम से बुला सकते हो.. तेरे बापुकी तराह.. क्युकी इसके बाद हम दोनोके बीच मां बेटेका रीलेशन खतम होजायेगा.. अ‍ेक बार सोचले..

मुना : (सरमाते हसते) नही मां.. मेने सब सोचलीया हे.. मां हमारे बीच कोइ रीलेशन खतम नही होगे.. मे आपको मा ही कहुगा.. जैसे बरखाको बहेन कहेता हु.. मे बरखाके साथ उनको बहेन मानकरही मीलन करता हु.. मे बरखाको हमारी सादीके बादभी बहेन मानुगा..

इसी तराह आपके साथ बीस्तरमे मीलन होते हुअ‍े भी आप मेरी मां रहेगी.. हां कभी मन हुआतो नाम लेकर भी बुलाउगा.. हां जब हमारा मीलन होजायेगा तो हम मां बेटे दोनोका रीस्ता खतम होजायेगा.. लेकीन फीरभी मे आपको मा मानकेही प्यार करुगा.. यही समजलो ये मेरी फेन्टासी हे.. हें..हें..हें..

बसंती : (कामुक नजरोसे देखते हसते) बडाही कमीना हे तु.. सब पहेलेसे ही तैय करके आये हो.. अपनी मां के साथही सबकुछ करना चाहते हो.. मेने तुमसे जरासी खुलकर क्या बात की.. तुमने तो मुजे दोपहोरको ही मेरे रुममे आकर दबोच लीया.. देख मेरे पुरे दुधु लाल करदीये.. अगर बरखाने देखलीया होतातो..? क्या थोडासा कंट्रोल नही कर सकता..? अबतो हमे अ‍ैसे कइ मौके मीलेगे..

मुना : (अचानक जोरोसे बाहोमे भीचते) मां.. जबसे मेने तुम्हारी सर्त मानलीया तबसे कंट्रोल करना बहुत ही मुस्कील हे.. इसीलीये तो मे अभी आया हु.. मां.. मे तुमसे मीलन करना चाहता हु.. अभी इसी वक्त.. आइ लव यु.. आजसे तुम भी बरखाकी तराह मेरी बीवी होगी.. आजसे हमारे बीच मा बेटेका रीस्ता खतम.. मां.. क्या मुजसे सादी करोगी..?

बसंती : (जोरोसे बाहोमे भीचते चहेरेको देखते) मुनाहहह.. आइ लव यु टु.. बस.. में तेरे मुहसे यही सुनना चाहती थी.. हां.. अगर तेरी बरखाको हमारे रीस्तेसे कोइ प्रोबलेम नही हे तो मे तुमसे सादी भी कर लुगी.. वरना हम दोनो अ‍ैसेही सबसे छुपकर हमारा रीस्ता कायम रखेगे..

लेकीन जबतक तेरे बापु हे हम हमारी सादी सबसे छुपायेगे.. आजा.. तेरी मा बहुत प्यासी हे.. जबसे तु मुजे छेडके गया हे तबसे कही चेइनही नही मीलता.. बस अ‍ेक बार जल्दीसे मेरी आग बुजादे.. बाकी बाते हम बादमे करेगे.. आजा.. मेरे लाल..

कहेते बसंती मुनाके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. तभी मुनाने बसंतीका चहेरा अपनी हथेलीओमे थाम लीया.. ओर उनकी आंखोमे कामुक नजरोसे देखने लगा.. मुनाको बसंतीकी आंखोमे वासना दीखने लगी.. तब बसंतीने सरमके मारे अपनी नजरे जुकाली.. ओर मुनाने धीरेसे बसंतीके होठोपे होठ रखदीया तब बसंतीने अपनी आंखे बंध करली.. तब उसे पताभी नही थाकी उनके उरोजोसे टोलीया हटकर कब नीचे गीर गया.. बसंती मुनाकी बाहोमे पुरी नंगी खडी थी..

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तभी बसंतीको अपने उरोजोपे मुनाका हाथ उरोज मसलते महेसुस हुआ.. तो वो सरसे पांव तक हील गइ.. वो बहुतही सरमाने लगी.. क्युकी आज वो जीनकी बाहोमे थी वो भानु नही अपना खुदका बेटा मुना था.. आग दोनो तरफ लग चुकी थी..

दोनोके उपर कामवासना पुरी तराह हावी हो चुकीथी.. बसंतीकी आंखे लाल होने लगी.. ओर गालपे लाली छागइ.. ओर उसने जोरोसे मुनाको अपनी बाहोमे भीच लीया..

तभी अचानक मुनाने बसंतीको अपनी गोदमे उठा लीया.. तब बसंतीको रीयेलाइज हुआकी वो पुरी नंगी हे.. ओर बसंतीने अ‍ेक हाथसे अपनी चुतको ढकते अपना सर मुनाके सीनेमे छुपालीया.. ओर बहुतही सरमाते मुस्कुराने लगी.. ओर मुनाने बसंतीको वही ड्रेसींग टेबलपे बीठा दीया.. ओर फटाफट अपने सभी कपडे नीकाल दीये.. तब बसंती मुनाका लंड देखते ही पागल होगइ..

बसंतीने मुनाको जटसे अपने दोनो पैरोके बीच खीचलीया.. तो मुना बसंतीके दोनो पैर फेलाके पैरोके बीच आगया.. ओर अपना लंड पकडके बसंतीकी चुतपे घीसने लगा.. तो बसंती पागलो जैसे होने लगी.. उनके उपर वासना पुरी तराह हावी हो चुकीथी.. तब बसंतीने जोरोसे मुनाको अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर हाथ नीचे लेजाकर मुनाके लंडको पकड लीया.. आज बसंती पुरी तराह मदहोस हो चुकीथी..

वो कही दिनोसे वासनाकी आगमे जल रहीथी.. तो आज वो जल्दसे जल्द अपनी चुतकी आगको अपने बेटेके तगडे लंडसे सांत करना चाहती थी.. उसे आज अपने बेटेका लंड अपने पती ओर भानुके लंडसे भी बडा ओर तगडा लंड मुनाका लगा.. ओर मुनाकी ओर वासना भरी नजरोसे देखते मुनाके लंडको अपनी चुतपे धीसते उनके बीलका रास्ता दीखा दीया.. ओर मुनाने खडे खडेही बसंतीकी कमरमे हाथ डालकर अपनी कमरको जटका देदीया..

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तब बसंतीकी चुतमे अ‍ेकही जटकेमे मुनाका पुरा लंड घुस गया.. तो बसंतीकी जोरोकी चीख नीकल गइ.. ओर अपनी आंखोसे आंसु बहाते बसंतीने मुनाको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. मुनाके इतने बडे लंडकी तो बसंतीने भी कल्पना नही कीथी.. वो मुनाको जोरोसे बाहोमे भीचने लगी..

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तबतक मुना अपनी कमर हीलाते बसंतीको जोरोसे चोदने लगा.. तो बसंतीका मुह खुला ही रेह गया.. उनके मुहसे अ‍ेक सब्दभी नही नीकल रहाथा.. उसने मुनाके गलेमे हाथ डालके उनको पकडलीया.. ओर मुना बसंतीको जोरोसे चोदे ही जा रहाथा.. दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी..

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बसंती : (दर्दसे) हाय..रे.. मेरे.. लाल.. तुने.. क्या घुसा दीया.. तेरा लंड.. कीतना बडा.. हे.. इइइसीससस धीरे.. मु..ना.. बस.. बस.. धीरे चोदनां.. बहुत दर्द हो रहा हे..

मुना : (जोरोसे कमर हीलाते लडखडाती आवाजमें) मां.. क्या.. मज.. आ रहा.. हे.. हंम..? पसंद.. आया.. मेरा.. लंड.. हंम..?

बसंती : (दर्दसे सीसकारीया करते) हंम.. बहुत बडा हे.. मुना.. बहुत मजा आ रहा हे.. बस.. मुजे चोदते रहो..

काफी धकापैनी चुदाइके बाद बसंती अकडने लगी.. ओर उसने मुनाको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर मुनासे चीपकके जडने लगी.. तब मुना अ‍ैसेही लंड नीकालके बसंतीको अपनी गोदमे उठा लेता हे.. ओर बेडकी ओर लेजाते बेडपे लीटा देता हे.. तो बसंती मुनासे नजरे चुराने लगी..

वो कुछ समज पाती उनसे पहेले ही मुना उनपे जुक गया.. ओर बसंतीके बुब्सको मुहमे लेकर जोरोसे चुसने लगा.. तो बसंती मुनाके सरको पकडते सीहरके कांप उठी.. फीर वो मुनाके बालोको सहेलाते मदहोस होने लगी.. आज पुरे गांवमे पहेली बार अ‍ेक सगे बेटेका उनकी मांके साथ मीलन हो चुकाथा..

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तभी मुना बुब्सको चुमते अ‍ेक हाथ नीचेकी ओर लेगया ओर बसंतीकी चुतपे रख दीया ओर हल्केसे चुतको सहेलाने लगा.. तब बसंती बीस्तरपे छटपटाने लगी.. ओर उसने मुनाके सरको जोरोसे अपने सीनेमे भीचलीया.. ओर मुहको इधर उधर करने लगी.. तो मुना उनके गलेको चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा.. ओर बसंतीके बुब्सको मसलते अपना मुह उनकी चुतपे रख दीया तब बसंती सरसे पांव तक हील गइ..

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ओर बसंती पुरी तराह मदहोस होकर मुनाके बालोको पकडते नोचने लगी.. ओर पागल जैसी होगइ.. वो मुनाके बाल पकडते अपने उपर खीचने लगी.. तो मुनाने अपनी जीभ नीकालकर बसंतीकी चुतमे घुसादी.. ओर बसंतीको उतेजीत करने वाला चुतके दानेको अपनी जीभसे खरोदने लगा.. तब बसंती सातवे आसमानपे चली गइ.. ओर वो कमर हीलाते छटपटाने लगी.. उनके उपर पुरी तराह मदहोसीका नशा छा गयाथा..

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बसंती : (आधी आंख चडाते मदहोसीमे) बस.. बस.. मुना ओर नही.. मे वापस छुट जाउगी.. बस.. अब आजा.. आज दीखादे अपनी मांको अपना जलवा.. तुमतो मेरा शेर बेटा हो.. आजा.. बुजादे मेरी प्यास.. तेरी मां बरसोसे प्यासी हे.. आज मेरे सुखे कुअ‍ेको भरदे अपने पानीसे..

कहेते बसंती मुनाके लंडकी ओर टेडी नजरसे देखने लगी.. क्युकी मुनाका लंड उनके पती ओर भानुसेभी बडा था.. उसे देखतेही बसंतीके मुहमे पानी आगया.. ओर उसे देखती ही रही.. तभी मुना बसंतीके उपर चड गया.. तो बसंतीने मुनाको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर अपने तनसे पुरा चीपका दीया तो मुना बसंतीके गलेमे मुह डालकर गलेको चुमने लगा तो बसंती वापस पुरी तराह मदहोस होके वासनामइ होगइ.. ओर हाथ नीचे लेजाकर मुनाके लंडको पकडलीया..

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बसंती : (मदहोसीमे) मु..नाहह.. आइ लव यु.. बस.. डालदो अब.. ओर मत तडपाओ.. अपनी मांको.. तेरी मां.. बरसोसे प्यासी हे.. आज मीटादे मेरी सारी प्यास.. सीचदे अपने पानीसे मेरा कुआ.. जो बरसोसे सुखा पडा हे.. तुम बहुतही मस्त चोदते हो.. मेतो तुम्हारी दिवानी होगइ.. आजा.. आजसे ये बसंती तेरी होगइ..

मंना : (गलेको चुमते) हां मां.. तुमभी मुजे बहुत अच्छी लगती हो.. अब हमारा मीलन होगया हे.. आजसे तुम मेरी बीवी हो.. क्या बनेगीनां.. मेरी बीवी.. हंम..? मे तुजेभी बहुत चाहता हु.. तुजे बहुत खुस रखुगा..

बसंती : (मदोहसीमे लंडको चुतपे घीसते) हां मुना.. बनाले मुजे अपनी घरवाली.. मे भी तेरे बच्चे पैदा करुगी.. बरखाकी तराह भरदे मेरी कोख.. आजसे हम मा बेटी दोनोही तेरी बीवीया हे.. अब मुजे कीसीकी परवाह नही.. तेरे बापुकीभी नही.. उसे मे सम्हाल लुगी.. आजा.. अब डालदे अपना बडा हथीयार.. कीतना बडा ओर दमदार हे.. मेरी तो चीखेही नीकलवादी.. तुम बहुतही मस्त चोदते हो.. बस.. मुजे अब अ‍ैसेही चोदते रहेना..

मुना : (बुब्सको चुमते) मां.. क्या तुजे मेरा हथीयार पसंद आया..? हंम..? तेरी बेटीको बहुत पसंद हे.. देखले.. इसी लंडसे उनको प्रेगनेन्ट कीया हे.. क्या तुजेभी करदु..? हंम..? बनेगी मेरे बच्चेकी मां..?

बसंती : (लंड घीसते चुतपे सेट करते) हंम.. हा.. करदे.. तेरा लंड बहुत पसंद आया.. बस अ‍ेक बार अपनी माको अच्छेसे चोदले.. करदे मेरी आगको सांत.. फीर देख.. तुजे मे कैसे खुस करती हु.. आज मुजे अ‍ेक रंडीकी तराह चोदले.. अब डालदे.. ओर दीखा अपना जलवा.. मेभी देखु मेरे बेटेमे कीतना दम हे..

कहेते बसंती मुनाको चोदनेके लीये उक्साने लगी.. बसंतीने मुनाके गलेमे दोनो हाथ डालकर उसे जोरोसे अपने तनसे चीपका लीया.. ओर मुनाने बसंतीके गलेको चुमते अ‍ेक जोरका जटका दीया तो मुनाका लंड बसंतीकी चुतमे घुस गया.. तो बसंतीकी वापस हल्कीसी चीख नीकल गइ.. अ‍ेक बार फीर उनकी आंखसे आंसुओकी बुंद नीकल गइ.. तब मुना कमर हीलाते बसंतीको वापस चोदने लगा.. ओर बसंतीने मुनाको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर अपनी कमर उछालते मुनाका साथ देने लगी..

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बसंती : (मदहोसीमे कंधेको चुमते) साबास मेरे शेर.. वाकइ तेरा लंड बहुत बडा हे.. मेरी चीख नीकलवादी.. बस अ‍ैसेही लंडकी जरुरतथी मुजे.. आज अपनी माको चोदले.. आजसे मे तेरी रंडी हु.. चोदले अपनी रंडी मांको..

मुना : (जोरोसे कमर हीलाते) नही मां.. तु मेरी रंडी नही.. मेरी बरखाकी सौतन हे.. देखना अ‍ेक दिन तुम मां बेटीको साथमे अ‍ेकही बीस्तरमे चोदुगा.. क्या चुदवायेगीनां..? हंम..?

बसंती : (आधी आंख चडाते) हंम.. चोदलेना.. लेकीन अभी नही.. सही समय आनेदे.. फीर मे सामनेसे कहुगी.. तब हम दोनो मा बेटीको चोद लेना.. आइ.. बस.. मुना.. थोडा धीरेसे.. नीचे दर्द होता हे.. कीतना बडा घुसा दीया हे.. क्या पुरा अंदर हे..? हंम..?

मुना : (मुस्कुराते) बस मां.. थोडा बाकी हे.. क्या पुरा घुसादु..? हंम.. चीखोगीतो नही..? हंम..?

बसंती : (मुनाको देखते थोडा गभराते) क्या.. अभी बाकी हे..? मुना.. प्लीज.. धीरेसे करना.. तेरा बहुत बडा हे.. मेने इतना बडा लंड कभी नही लीया.. लगता हे तुम वाकइ मेरी हालत खराब कर दोगे.. देख येभी मेरी बच्चेदानीसे टकरा रहा हे.. तेरा हथीयार कीतना बडा हे.. बीलकुल गध्धे जैसा.. आजा मेरे शेर.. आज जीभरके चोदले अपनी मां को.. बुजादे मेरी प्यास..

कहातो मुना समज गया ओर बसंती उसे ओर कुछ कहेती इनसे पहेलेही मुनाने बसंतीके होठोपे होंठ रखते लीपलोक करलीया.. ओर अपनी कमर उची करते अ‍ेक जोरोका जटका दीया.. तो मुनाका पुरा लंड बसंतीकी चुत चीरके अंदर घुस गया ओर बसंतीकी बच्चेदानीसे टकराया तब बसंतीकी जोरोकी चीख नीकलते मुनाके मुहमेही दब गइ.. आंखोसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. ओर अपने दोनो पेर बेडपे पटकते छटपटाने लगी..

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मुना : (होंठ छोडते हाथ मुहपे रख दीया) बस.. बस.. होगया मां.. तुमतो अ‍ैसे चीला रहीहो जैसे पहेली बार चुदवा रही हो.. दो दो लंड खालीये फीरभी तुम्हारी चुत अ‍ेक कुआरी लडकीकी तराह कसी हुइ लग रही हे.. मां अ‍ेक बात बता.. क्या मे ओर बरखा इसी चुतसे नीकले हेनां..? हें..हें..हें..

बसंती : (सर्मसार होते हसते अ‍ेक मुका मारते) कीतने कमीने हो.. अपनी मांके उपर चडके पुछता हे..? अ‍ेकतो गधे जैसा लंड घुसा दीया मेरी तो हालत खराब करदी.. ओर उपरसे मजाक करता हे.. थोडी देर रुकजा.. मेरे लाल.. बहुत जलन होती हे.. हायरे.. जालीम.. तुने आज अपनी मांको चोदही लीया.. अ‍ैसा लगता हे तुने मेरी चुतमे बहुत बडा डंडा घुसा दीया हे.. क्या ये तेरा लंडही हेनां..?

मुना : (पुरा लंड घुसाके रुकता हे ओर होंठ चुमते) हां.. मां.. देखले.. मे तुम मां बेटी दोनोको इसी लंडसे खुस रखुगा.. मां.. वाकइ तेरी चुत मस्त हे.. बीलकुल बरखाकी तराह.. हम पीछले चार सालसे चुदाइ कर रहे हे.. लेकीन उनकी चुतभी आजभी वैसी की वैसी हे.. बीलकुल तेरी तराह.. मे तो दो दो बीवीया पाकर धन्य होगया.. भला हो ठाकुरसाहबका.. हें..हें..हें..

बसंती : (सरमाते हसते) हंम.. मुना.. धन्य तुम नही.. धन्य तो मे ओर बरखा होगइ हे.. मुजे तो पताही नही थाकी मेरा बेटा अ‍ेक शेर मर्द हे.. ओर इतने बडे लंडका मालीक हे.. वरना मे तो तुमसे बरखासे पहेले ही चुदवा चुकी होती.. मुजे क्या जरुरत थी बहार मुह मारनेकी..

बस.. अबतो मुजे ओर बरखाको तुजे अ‍ैसेही खुस करना होगा.. फीर भलेही मे प्रेगनेन्ट होजाउ.. मुजे कीसीकी परवाह या डर नही.. कास मेने पहेलेसेही तुनसे चुदवालीया होता.. मुना.. अब जबभी तेरा मन करे मुजे चोद लेना.. मे कभी मना नही करुगी.. आजसे ये बसंती तेरी होगइ.. आजसे तुही मेरा पती हे..

मुना : (बसंतीकी ओर देखते) मां.. अ‍ेक बात पुछु..? यहा गांवमेतो ठीक हे.. लेकीन अगर तुम पेटसे हो गइ.. तो नानीके घर जाओगी तो उनको क्या कहोगी..? अच्छा हे अभी नाना नही हे.. वो गुजर गये हे.. लेकीन वहा मामा ओर मामी.. नानी सब हे.. ओर अबतो तुम वहा जातीभी नही हो.. ओर हमेभी नही जाने देती.. कुछ खास वजह..?

बसंती : (थोडी सीरीयस होते) मुना.. कसम खाओ.. आजके बाद तुम मे या बरखा.. वहा कभी नही जायेगे.. मे मायकेमे सब रीस्ता तोडके आइ हु.. तो तुमभी वहा जानेकी जीद मत करना.. भुलजाओ उन लोगोको..

मुना : (सीरीयस होते ) मां.. क्या हुआ..? कोइ खास वजह..

बसंती : (कुछ सोचते) मुना अभी नही.. वरना हम दोनोका मुड खराब होजायेगा.. इस बारेमे हम दोनो बादमे बात करेगे.. मे मेरे इस पतीको सबकुछ बतादुगी.. लेकीन अभीतो अपनी इस बीवीको मजा देदो.. अब धीरे धीरे सुरु करो.. दर्द नही हे.. हम इस बारेमे कभी बादमे बात करेगे.. चल मेरे शेर.. सुरु होजा.. आज नीकलवादे अपनी मांकी चीखे.. मेरा असली शेर मर्द हे तु..

कहातो मुना बसंतीके उपर हाथके बल उचा होगया.. ओर उनकी आंखोमे देखते कमर हीलाते बसंतीको चोदने लगा.. तो बसंतीभी मुनाकी आंखोमे लगातार देखते उनके गालको सहेलाते चुदवाती रही.. दोनोही अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे देखते नीसब्द होकर चुदाइका मजा लेने लगे.. दोनो अबभी अ‍ेक दुसरेकी आंओमे देखते आंखोकी भासामे बाते करते चुदाइ करते रहे.. आज बसंती वाकइ जनतकी सैर कर रहीथी.. वो मनही मन अपने आपको मुनाको पुर्ण समर्पीत कर चुकीथी..

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तभी अचानक मुना बसंतीके गले ओर दोनो बुब्सको बारी बारी चुमते जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा.. तो बसंती छटपटाते चदर पकडते चुदवाने लगी.. उनके दोनो बुब्स उछलने लगे.. आज बसंतीका असली मर्दसे पाला पडाथा.. जो उनका बेटा ही था.. मुना बडेही बेहरेहमीसे बसंतीको जोरोसे कमर हीलाके चोदता रहा.. ओर बसंती दर्दके मारे हल्कासा चीखते चीलाते जोरोसे सीसकारीया करते चुदवाती रही..

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तभी अचानक बसंतीने मुनाको गलेमे हाथ डालके अपने तनसे चीपका लीया.. ओर मुनाको जोरोसे बाहोमे भीचते अपनी कमरको जटके देने लगी.. तब मुनाके सरीरमेभी हजारो चीटीया रेदती अपने लंडकी ओर दोडते महेसुस हुइ.. ओर उसनेभी बसंतीको जोरोसे लीपलोक करलीया ओर अपना लंड बसंतीकी चुतमे जड तक धुसा दीया..

ओर कमरको रुक रुकर जटके देने लगा.. तब उनके लंडसे तेज पीचकारीया नीकलते बसंतीकी चुतको भरने लगा.. बसंतीकी आंखे बडी होगइ.. वो लगातार मुनाकी आुखोमे देखती रही.. तभी बसंतीको अपने बच्चेदानीपे मुनाका गरम विर्य महेसुस होने लगा..

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दोनोही साथमे जडने लगे.. तो बसंतीका मुह खुलाही रेह गया.. ओर कुछही देरमे दोनो सांत होगये.. दोनोही पसीनेसे भीग चुके थे.. तब मुना बसंतीके सीनेमे सर रखते ढेर होगया.. ओर बसंती सरमके मारे मुनाकी पीठ ओर उनके सरको सहेलाती रही.. उनको अभीभी यकीन नही हो रहाथा की आज उनके बेटेने उनकी जबरदस्त चुदाइ करली हे.. ओर अभीभी उनके नीचे लेटी हुइ हे.. यही सब सोचते वो रोमांचीत ओर खुस हो रहीथी.. ओर उसने अब हमेसाके लीये मुनाको मन ही मन अपना पती मान लीया था..

काफी देर दोनो अ‍ैसेही लेटे रहे.. तब मुनाका लंड थोडा ढीला होगया तो बसंतीको अपनी चुतके अंदर सुरसुराह होती महेसुस हुुइ.. ओर उसने मुनाको प्यारसे अपने उपरसे हटनेको कहा.. जैसे अपने पतीको रीक्वेस्ट कर रही हो.. तब मुना साइडमे लुढक गया तो बसंती जटसे बेडपे बैठ गइ.. ओर मुनाका नीकर लेकर अपनी चुतको साफ करने लगी.. तब चुतके अंदरसे ढेर सारा दोनोका काम रस नीकल रहाथा..

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तो बसंती देखतेही बहुतही सरमा गइ.. ओर मुनाकी ओर देखते मुस्कुराने लगी.. फीर धीरेसे बेडसे उतर गइ.. ओर बाथरुमकी ओर जाने लगी.. तो उनकी चुतमे बहुत दर्द होने लगा.. ओर अ‍ेक बार फीर पीछे मुडकर मुनाकी ओर देख लीया.. फीर धीरे धीरे लंगडाते बाथरुममे चली गइ.. ओर फीरसे अपनी चुतको साफ करके नहाने लगी.. आज मुनाने अपनी मांको चोदकर उनकी चालही बदलदीथी.. आज बसंतीको अपने बेटेकी मर्दानगी पर गर्व महेसुस हो रहाथा.. वो अपने बेटेसे जबरदस्त तरीकेसे चुदवा चुकी थी..

तबतक मुना अ‍ैसेही नंगा होकर बेडपे पडा था.. तब उसे बाथरुमसे पानीकी आवाज सुनाइ दे रहीथी.. तो मुना बेडपे बैठ गया.. ओर कपडेसे लंडको साफ करने लगा.. तब कुछही देरमे बसंती फीरसे टोलीया लपेटकर बहार आगइ तब मुना बेडपे बैठकर उनका इन्तजार कर रहाथा.. तो मुनाको देखतेही बसंती सर्मसार होगइ.. ओर वो कुछ नही बोली.. वो मुनाकी ओर देखते मुस्कुराते सीधे मीररके सामने खडी होकर अपने बालोको सवारने लगी..

अब उसे मुनाके सामने नंगी होनेकी कोइ सरम नही आइ.. ओर वो बर बार चोर नजरसे आयनेमे मुनाको देखती रही.. तभी उसे अपने पेटपे मुनाका हाथ महेसुस हुआ.. तो बसंती आंख बंध करके मदहोस होने लगी.. ओर अपना सर पीछे मुनाके कंधेपे डाल दीया.. तभी मुना बसंतीको पीछेसेही अपनी बाहोमे भरलेता हे.. तो बसंती नंगीही जटसे पलटकर मुनाकी बाहोमे समा गइ.. ओर उनके कंधेपे सर रख दीया.. तो मुनाने बसंतीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर उनके होंठ चुमलीये.. तब..

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बसंती : (सरमाते धीरेसे) मुनाजी.. आजसे ये बसंती आपकी अमानत होगइ.. अब ये तनपे सीर्फ आपकाही अधीकार होगा.. आजसे मेने आपको अपना पती मानलीया हे.. बस कुछ दिन इन्तजार कीजीये मे आपसे सादीभी कर लुगी.. लेकीन इनसे पहेले मे बरखाकी सादी आपसे करवाना चाहती हु.. कहो कब करनी हे आप दोनोको सादी..?

मुना : (गालको चुमते) बसंती.. आइ लव यु.. आज वाकइ तुमने मुजे जनतकी सैर करवादी.. तेरी बेटीभी बीलकुल तेरी जैसी ही हे.. उनकोभी पहेली बार चोदलीया तब वोभी तेरी तराह मुजे पुरी तराह समर्पीत होगइ थी.. बस जब ठाकुरसाहब कहेगे तब हम सादी कर लेगे.. वोभी सबके सामने.. बस अब बापुको समजानेकी जीम्वेवारी आपकी..

बसंती : (सरमाते धीरेसे) मुनाजी.. आपकी नही.. तेरी कहो.. अब मे आपकी बीवी हु.. जनतकी सैरतो आपने मुजे करवाइ हे.. आज फीरसे आपने मुजे मेरी जवानीका अहेसास करवा दीया.. आप अ‍ेक वाकइ असली मर्द हो.. आपने मुजे जीत लीया.. मुजे अपनी दीवानी बनादी.. मुजे आपपे गर्व हे.. बस अ‍ैसेही मेरा खयाल रखीयेगा.. मेभी आपका अ‍ेक पत्नीकी तराहा खयाल रखुगी.. ओर अपने बापुकी चीन्ता मत कीजीये.. उसे मे सम्हाल लुगी..

मुना : (मुस्कुराते) मां.. मुजे आपके मुहसे मुनाजी सुनकर अजीब लगता हे.. हें..हें..हे.. मुजे सीर्फ मुना कहेकर ही बुलाइअ‍ेना.. मे हमारा रीस्ता चेन्ज करना नही चाहता.. मुजे मेरी बीवीको नही.. मेरी मांको ओर मेरी बहेनको प्यार करना अच्छा लगता हे..

बसंती : (सरमाते हसते) नही मुनाजी.. अब अकेलेमे मे आपको वही कहुगी.. आपजो मेरे पती हो.. बस सबके सामने ठीक हे.. फीर आप हमे कुछभी समजके प्यार करो.. ओर हां.. अ‍ेक बात ओर.. वो सादी भलेही तब सबके सामने हो.. लेकीन मे आप दोनोकी मंदिरमे जाकर सादी करवाना चाहती हु.. मे आपके बापुको समजा दुगी.. बाकी कीसीकी परवाह करनेकी जरुरत नही हे..

हम दो तीन दीनमे ही कीसी मंदिरपे चले जोयेगे आप कोइ मंदिर देख लेना.. ओर हां अब बरखाको भी धीरे धीरे करते मेरे बारेमे समजाइअ‍े.. वो बहुत भोली हे ओर मुजसे प्यारभी करती हे.. वो आपकी बात मान जायेगी.. हम दोनोही मा बेटी अब आपकी बीवी बनके रहेना चाहती हे.. आजसे बरखा मेरी सौतन हे.. हें..हें..हें..

मुना : (सरमाते हसते बाहोमे भीचते) हंम.. ठीक हे.. तो डार्लींग.. अब मे चलु..? हंम..

बसंती : (हसते होंठ चुमते) हां.. ये हुइना बात.. बस मुजे अकलेमे अ‍ैसेही बुलाइअ‍े.. जाओ.. मेरी सौतन अकेली होगी.. हें..हें..हें.. मुजेभी आज आराम करना पडेगा.. कीतना जोसमे करते थे आप.. आजतो मुजे थकाही दीया.. अभीभी नीचे दर्द हो रहा हे.. पुरा तन तोडके रखदीया आपने.. हें..हें..हें..

कहेते बसंतीने अ‍ेक बार फीरसे मुनाको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनोके होंठ मील गये.. काफी देरतक अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमते रहे.. बसंती अबभी मुनासे अलग होना नही चाहती थी.. फीर मुना कपडे पहेनकर घरसे नीकल गया तब बसंतीने अपने कपडे पहेन लीये.. ओर कंपलीट होकर बेडको चदर बदलके सही कर दीया.. ओर वही लेटकर आराम करने लगी.. आज वाकइ मुनाने उनकी हालत खराब करदी थी.. अब बसंतीने भानुको हमेसाके लीये भुलनेकी ठानली..

आज मुनाके घरमे सबकुछ बदल चुकाथा.. सुबह जब घरसे नीकला तब बसंती उनकी मां थी.. ओर अभी वो उनकी मासुका होकर मुनासे चुद गइथी.. रीस्ताही बदल गया.. ओर ये सीर्फ मुनाके घरपे नही.. सामतके घरमे.. बनवारीलालके घरमे.. ओर गांवमे अ‍ैसे बहुत सारे घरथे.. सभी घरोमे रीस्तोमे बदलाव आ चुका था.. बस अभी ये बात सीर्फ अपने अपने घर तक सीमीत थी.. बहुतही जल्द सभी रीस्ते गांवमे उजागर होने वाले थे....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १४४/१

आज मुनाके घरमे सबकुछ बदल चुकाथा.. सुबह जब घरसे नीकला तब बसंती उनकी मां थी.. ओर अभी वो उनकी मासुका होकर मुनासे चुद गइथी.. रीस्ताही बदल गया.. ओर ये सीर्फ मुनाके घरपे नही.. सामतके घरमे.. बनवारीलालके घरमे.. ओर गांवमे अ‍ैसे बहुत सारे घरथे.. सभी घरोमे रीस्तोमे बदलाव आ चुका था.. बस अभी ये बात सीर्फ अपने अपने घर तक सीमीत थी.. बहुतही जल्द सभी रीस्ते गांवमे उजागर होने वाले थे....अब आगे

उधर सृतीने भी साम होते ही घरपे आकर भुमीको कल दो पहोरके बाद जानेकी बात करली.. ओर अ‍ेक हप्तेके कपडेभी साथ लेजानेको कहा.. तो भुमीको सुनकर आस्चर्य हुआ.. ओर मंद मंद मुस्कुराने लगी.. उनको लगाकी अब सृती देवुके बगैर नही रेहपाती होगी इसीलीये जानेकी बात कर रही हे.. तो वो कुछ नही बोली.. ओर मनही मन खुस होगइ.. क्युकी वही हाल भुमीका भी था.. वोभी देवायतको मीलना चाहती थी..

तो इधर राजीवके गांवमे देवायत मंजु भावना चंदा नीर्मला सबलोग साथमे बैठकर गांवमे बदलावकी चर्चा करते रहे.. तभी सबको लगाकी राजीव इस बदलावके बारेमे बहुत कुछ जानता हे.. फीर सब लोग डीनर करने बैठ गये.. तब भावना ओर नीर्मला देवायतको नीचेसे पैरसे पैर सहेलाते इसारोसे बाते करते उनको रातमे रुकनेके लीये इसारा करती रही.. फीरभी देवायत रातका डीनर करके नीकल गया.. जबतक भावना वहा रुकने वाली थी.. तबतक राजीवने मंजु ओर चंदाकोभी उतने दीन रोक लीयाथा..

सायद राजीवभी अपने बारेमे सबकुछ जान चुकाथा.. जब देवायत नीकल गया.. तब मंजु चंदा भावना नीर्मला ओर राजीव होलमे साममे बैठकर कुछ देर बाते करते रहे.. फीर मंजु भावना अपने बच्चेको लेकर रुममे चली गइ तो चंदाभी घरके सभी दरवाजे बंध करने लगी.. तब राजीव ओर नीर्मलाभी खडे होगये.. ओर अपने रुमकी ओर जाने लगे.. तो चंदाने घरकी सभी लाइटे बंध करदी ओर मंजुके पास उनके रुममे चली गइ.. जो दोनोही अपने बच्चेको दुध पीला रहीथी..

राजीव नीर्मला अपने रुममे आगये तो राजीव चेन्ज करने लगा.. तब नीर्मलाने रुमका दरवाजा बंध करदीया ओर वोभी चेन्ज करने लगी.. अभी नीर्मलाने चेन्ज करनेके लीये अपने कपडे नीकालेही थे.. तब राजीवने आकर उसे जोरोसे अपनी भाहोमे भरलीया.. ओर नीर्मलाको बेइम्ताह चुमने लगा.. तो नीर्मलाभी पागल होगइ.. ओर वोभी राजीवका साथ उनको चुमकर देने लगी.. उसे मंजुकी अ‍ेक अ‍ेक बाते याद आगइ..

राजीव : (जुठ बोलते) नीमु.. आइ लव यु.. मेने डोक्टरकी सब परमीशन लेली हे.. अब कोइ दीकत नही..

नीर्मला : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. क्या सच केह रहे हो..? हंम..? जुठतो नही बोलते..?

राजीव : (बुब्स मसलते) नीमु.. मे क्यु जुठ बोलुगा..? मेरी कसम.. बस..?

नीर्मला : (राजीवको गालपे चपत लगाते जोरोसे बाहोमे भीचते) ओह.. मेरे भाइ.. कसम क्यु दी..? हंम..? चल आजा.. आज मे मेरे भाइको खुब प्यार करुगी.. अपनी सारी कशर पुरी करलो.. लेकीन इनसे पहेले अपनी दवाइ पीलो.. आज मे जीभरके अपने भाइको प्यार करुगी..

राजीव : नीमु.. बादमे पीता हुनां.. अबतो डोक्टरने दवाइभी कम करदी हे.. आज मुजे मेरी बहेनको जी भरके प्यार करना हे.. चल आजा.. मे बादमे दवाइ पीलुगा..

नीर्मला : (राजीवका हाथ पकडकर बेडपे लेआते) नही भाइ.. मुजे कोइ रीस्क नही लेना.. आप पहेले दवाइ पीलो.. ओर आज सीर्फ ओरलही करना हे.. हम धीरे धीरे करके आगे बढेगे ओर प्यार करेगे.. अ‍ेकदमसे नही.. समज गयेनां..? अब हमारे पास वक्त ही वक्त हे.. मे मेरे भाइको हर तराहका सुख दुगी.. चलो पहेले दवाइ पीलो.. आज सीर्फ मेही करुगी.. आप अ‍ैसेही लेटे रहो..

राजीव : (मुस्कुराते गाल चुमते) तुम आजभी इतनीही जीदी हो.. ठीक हे बाबा.. आज सीर्फ तुमही करना..

नीर्मला : (मुस्कुराते) हंम.. गुडबोय.. हें..हें..हें.. चलो आप पेन्ट उतारदो मे दवाइ लेकर आती हु..

कहातो राजीव खुस होगया.. ओर अपनी पेन्टको नीकालने लगा.. तब नीर्मला सीर्फ ब्रा ओर पेन्टीमेही राजीवकी दवाइ लेकर आगइ.. ओर राजीवको पानीके साथ पीलादी.. नीर्मला अंतरवस्त्रोमे बहुतही कामुक दीख रहीथी.. राजीव उनको देखकरही पागल हो रहाथा.. राजीव उनके सामने लगातार देखताही रहा.. ये वोही नीर्मलाथी.. जब उनके पेटमे मंजु पल रहीथी.. राजीवका हर तराह खयाल रखती थी..

ओर धीरे धीरे करते दोनोही अ‍ेक दुसरेको पती पत्नीकी तराह ट्रीट करने लगे.. ओर नीर्मला राजीवकी ओर ढलते अ‍ेक दिन उनके बीस्तर तक पहोच ही गइ.. उस दिन दोनोही बहेक गयेथे.. दोनोही अ‍ेक दुसरेको पागलोकी तराह चुमने लगेथे.. जैसे दोनोही इस प्यारसे बरसोसे वंचीत रहे हो.. ओर कुछही देरके बाद नीर्मला अपने भाइके लंडको अपनी चुतमे लेकर राजीवके नीचे लेटी हुइथी.. नीर्मला अपने भाइके नीचे लेटकर बहुतही सरम रहीथी.. उस दिन भाइ बहेनके बीच सारी मर्यादा मीट गइ थी..

फीरतो दोनोही भाइ बहेनके बीच कोइ पर्दा नही रहा.. ओर समयके साथ नीर्मलाने मंजुको जन्म दिया.. फीरभी नीर्मला हर रात अपने भााइका बीस्तर गरम करती रही.. उनकी हर रात सुहागरातकी तराह बीतने लगी.. ओर नतीजेके फल स्वरुप राजीवने नीर्मलाको फीरसे प्रेगनेन्ट करदीया.. दोनोही भाइ बहेन बहुत खुस थे.. फीरतो दोनोने मंदिरमे जाकर सादीभी करली.. ओर नव महिनेके बाद नीर्मलाने भावनाको जन्म दिया.

राजीव अपने अतीतको याद करते नीर्मलाकी ओर देखेही जा रहाथा.. तभी नीर्मला राजीवकी ओर मुस्कुराते बेडपे आकर राजीवके बगलमे लेट गइ.. तो राजीवने नीर्मलाको जोरोसे अपनी भाहोमे भीचलीया.. ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेको बाहोमे भीचते होठोको चुमने लगे.. तब नीर्मला राजीवके पेरोके बीच चली गइ.. ओर उनकी चडी नीकालदी.. तब राजीवका लंड तनके सख्त होकर हवामे लहेराने लगा..

ओर नीर्मला उसे अपनी मुठीमे पकडके होले होले सहेलाने लगी.. तब राजीव आंख बंध करके परम आनंदकी अनुभुती लेने लगा.. राजीवका लंड लोहेके माफीक सख्त होगया.. तब नीर्मला थोडासा जुकते लंडपे अपनी जीभ फीराते उसे गीला करने लगी.. जब लंड गीला होगया तो कामुक नजरोसे राजीवकी ओर देखते उसने लंडको अपने मुहमे भरलीया.. ओर राजीवके लंडको मुहसेही अंदर बहार करते चोदने लगी..

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राजीव : (कामुक आवाजमे) आहहह... नीमु.. आइ लव यु.. बस अ‍ैसेही चुसती रहो.. आज कीतने दीनोके बाद मेरी बहेना अ‍ैसे मुहमे ले रही हे.. बहुत मजा आ रहा हे..

नीर्मला : (मुहसे लंड नीकालते) भाइ.. अब मे आपको पहेलेकी तराह हर सुख दुगी.. बस.. सीर्फ दो दीन ठहेर जाओ.. मे धीरे धीरे करते आपको वोही प्यार दुगी.. जो हम पहेले करते थे.. भाइ आइ लव यु टु..

कहेते नीर्मला वापस मुहमे लंड लेकर जोरोसे अंदर बहार करते चुसती रही.. तब कुछही देरमे राजीवका लंड अकडने लगा.. ओर उनमेसे पीचकारीया छुट पडी.. तो नीर्मलाका पुरा मुह विर्यसे भर गया.. ओर नीर्मलाके हलकमे चला गया.. ये पहेली बार नही था.. नीर्मला कइ बार अपने भाइके पानीको पी चुकीथी.. ओर वो जटसे बेडसे उतरके बाथरुममे भाग गइ.. ओर वोस बेसीनमे थुकते अपना मुह साफ करने लगी..

फीर बहार आके अपने नाइटके कपडे पहेनलीये.. ओर राजीवके पास आकर उनकी बगलमे लेट गइ.. तो राजीवने नींदमेही नीर्मलाको अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर उनसे चीपकके सो गया.. तब नीर्मलाको पता नही थाकी ये सब कुदरतके हीसाबसे चल रहा हे.. उनके नसीबमे कबतक अपने भाइको प्यार देना लीखा हे वो उनकोभी नही पताथा.. उनकोतो सीर्फ अपने भाइको प्यार करते अपना कर्तव्य नीभाना था..

इधर देर रात देवायत गांवमे आगया.. तो पुरे गांवमे सनाटा छाया हुआथा.. ओर वो सीधाही रश्मीके घरपे चला गया.. अ‍ैसा नही थाकी सब सो चुकेथे.. बस.. सब अपनी मासुकाके साथ लगे हुअ‍ेथे.. जबसे गांवमे अ‍ेक दुसरेके माध्यमसे सबको पता चलाकी गांवमे अ‍ैसा बदलाव आने वाला हे तबसे कीसीको अपने यार या मासुकाको मीलनेका डरही खतम होगया था.. ओर ये सब मंजु चारुभाभी नीशा ओर रश्मीकी महेरबानीसे संभव हुआ था..

सभी ओरतोने ओरतेसे बाते करके इनका इतना प्रचार करदीयाथा की अबतो आजु बाजुके गांवमेभी इनकी चर्चा होने लगी थी.. सभी लोग मानसीक तौरपे इस बातको स्वीकार करनेके लीये तैयार हो रहेथे.. यही बाते आज बसंतीके घरपेभी देखनेको मीली.. आज मुनाने खुलकर अपनी माको चोदकर अपनी मासुका बनालीया था.. ओर उनको बडे ही बेहरेहमीसे चोद भी लीया था..

मुनाने हमेसाके लीये बसंतीको अपना बना लीयाथा.. इस बातपे बसंती भी बहुत खुस नजर आ रहीथी.. वो साम तक आराम करती रही.. उनकी चुतमे अबभी मीठासा दर्द हो रहाथा.. वो मुनाको अपना पती मानकर मनही मन उनको समर्पीत हो चुकीथी.. सामको जब सब लोग घरपे आये तो बसंती अ‍ेक नइ नवेली दुल्हनकी तराह खुस होते खाना बना रहीथी.. तब बरखाने बसंतीको थोडा लंगडाते चलते हुअ‍े देख लीया.. तो बरखाने उसे पुछही लीया..

बरखा : (सरमाते धीरेसे) मम्मीजी.. आप अ‍ैसे क्यु चल रही हे..? आपके पैरमे कुछ हुआ हे क्या..?

बसंती : (सरमाते हसते) अरे नही नही.. बहु.. बस.. दोपहोरको बाथरुममे नहाने गइथी तो जरा पैर फीसल गयाथा.. तो पैरमे थोडी मोच आगइ हे.. ओर कुछ नही..

बरखा : (थोडी चीन्तासे) मम्मीजी.. क्या ज्यादातो नही लगी..? हंम..? तो कहो.. अभी आपके बेटेको सुधीर अंकलके वहा आपके साथ भेजती हु.. अ‍ेक बार आप उनको दीखादो.. तो कुछ दवाइआ दे देगे..

बसंती : (मुस्कुराते) अरे नही बहु.. तु मेरी कीतनी चीन्ता करती हे.. जा.. तेरे ससुरजी आगये हे.. उनको जरा खाना दे दे.. ओर हां.. अब सरपे पलु डालकर जाना.. क्युकी अब वो तेरे ससुर हे.. अब सादीके बाद घरमे तुम सारी पहेनना सुरु करदे.. क्युकी हमारे गांवमे बहुअ‍े अ‍ैसे डे्रस नही पहेनती.. समजी..?

बरखा : (सरमाते) जी.. सासुमां.. अभी मे दुपटेसे सरको ढकलुगी.. सारी पहेनुगी तो मेरे ससुरके मनमे कुछ संकाये आयेगी.. आप फीकर मत करो..

कहेतेही दोनो जोरोसे हसने लगी.. ओर अ‍ेक दुसरेके गले लग गइ.. जैसे दोनोही सहेली हो.. अबतो जबभी बरखा ओर बसंती दोनो अकेली होती तो ये सास बहु वाला खेल खेलती.. ओर इस खेलमे दोनोको मजाभी बहुत आरहा था.. ओर रात होतेही बरखा सज धजके मुनाके रुममे चली गइ.. अबतो उसे कीसीकाभी डर नहीथा.. वो बसंतीकी हाजरीमे भी मुनाके रुममे चली जाती.. तो बसंती मुनाकी ओर देखते बडीही कामुक स्माइल करती..

अभी मुना अपनी बहेन बरखाकी जबरदस्त तरीकेसे चुदाइ कर रहाथा.. अब बरखा इस घरकी नइ बहुकी तराह रहेने लगी थी.. इनकी मम्मीके दिलमे उनके लीये इतना प्यार देखते कभी कभी बरखाकोभी बसंतीकी चीन्ता होने लगीथी.. वो भली भांती जानती थीकी उनकी मम्मी भी अ‍ेक औरत हे.. ओर उनके पापा इतने सक्षम नही हे की अपनी मांको वो सारीरीक सुख दे सके..

ओर उपरसे उन दोनो भाइ बहेनने उनको भानुका राज बता दीयाथा.. तबसे बसंती भानुसेभी दुर होचुकी थी.. इस बातको लेकर बरखा उनकी मम्मीकी बहुत चीन्ता करने लगी थी.. इस बारेमे उन्होने अ‍ेक प्लानभी सोचकर रखाथा.. लेकीन वो इस बारेमे अपने भाइसे कैसे बात करे..? बस यही सोचते वो अ‍ेक सही मौकेके इन्तजारमे थी.. जो मौका आज उसे मीलही गया..

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अभी उनका भाइ इनकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. काफी देरकी चुदाइके बचु दोनोही साथमे जडकर सांत होगये.. तब बरखा अपनी चुतको साफ करते बेडसे उतर गइ.. ओर अपने बालोका जुडा बनाते बाथरुमकी ओर नंगीही जाने लगी.. तो मुनाभी उनके पीछे नंगाही घुस गया.. ओर बरखाको अ‍ेक बार फीर बाथरुममे दबोच लीया.. तब बरखा बहुतही सर्मसार होने लगी.. जब दोनोही मस्तीया करते साथमे नहाने लगे तब.. तब बरखाको अभी अपनी मम्मीके बारेमे बात करना उचीत लगा..

बरखा : (सर्मसार होते) भाइ.. अब छोडोभी.. क्या अभी तक आपका जी नही भरा..?

मुना : (बाहोमे मुस्कुराते बुब्सको चुमते) बरखा.. क्या कभी अ‍ेक भाइको अपनी बहेनको अ‍ेक बार चोदकर जी भरता हे..? आजा बहेन.. तुजे यहा अ‍ेक बार ओर चोदना चाहता हु..

बरखा : (सरमाते बाहोमे) उइइइ मां.. भाइ धीरेसे दबाओनां.. दर्द होता हे.. भाइ मुजे आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे..? आप नाराज तो नही होगे..?

मुना : (बाहोमे भीचते होंठ चुमते) बरखा.. बस अ‍े बार चोदलेने दे फीर हम आरामसे बात करेगे..

बरखा : (सरमाते धीरेसे) भाइ नही.. आप इस बारेमे अभी बात करो.. फीर आपको जोभी करनाहे करलीजीये.. मुजे इस बारेमे अभी आपसे बात करनी हे..

मुना : (बाहोसे छोडते बरखाकी ओर देखते) बरखा.. तुम बहुत जीदी हो.. बता कीस बारेमे बात करनी हे..?

बरखा : (सरमाते धीरेसे नजर जुकाते) भाइ.. हमारी मांके बारेमे.. आप नाराजतो नही होगे..?

मुना : (आस्चर्यसे देखते) मांके बारेमे..? लेकीन इसमे मे क्यु नाराज होउगा..?

बरखा : (सरमाते नजरे चुराते) भाइ बातही कुछ अ‍ैसी हे.. जो मुजे आपको बतानेमे भी सर्म आ रही हे..

अ‍ेक बारतो मुनाभी डर गया.. क्युकी आजही सामको जब उनकी मां घरपे अकेलीथी तब वो अपनी मां बसंतीकी जबरदस्त चुदाइ करके आया था.. तो मुनाको डर लगने लगाकी उनके ओर बसंतीके बारेमे बरखाको पतातो नही चल गया.. फीरभी हींमत करते बरखाको पुछही लीया..

मुना : बरखा.. क्या कीया हे मांने.. कुछ हुआ हे क्या..? जो तुम सरमा रही हो..

बरखा : भाइ.. मांने हम दोनोकी हर बात मानली हे.. ओर बदलेमे हमने उनको क्या दिया..? भाइ.. आप बुरा मत मानना.. उनको अ‍ेक सुख बहार भानुभाइसे मील रहाथा वोभी हमने उसे ब्लेकमेइल करके बंध करवा दीया.. ओर उपरसे पापाभी तो इतने सक्षम नही हे.. तो हमे मांके बारेमे भी कुछ सोचना चाहीये..

मुना : (बरखाकी आंखोमे देखते) बरखा.. तो इसमे हम क्या कर सकते हे..? अब पापाभी जीन्दा हे तो इस उमरमे उनकी दुसरी जगाह सादीभी तो नही कर सकते.. क्या तेरे दिमागमे कोइ ओर प्लान हे..?

बरखा : (सरमाते धीरेसे) हां भाइ.. लेकीन आपको कहेनेमे अ‍ेक डर लग रहा हे.. कही आप नाराज ना होजाओ.. इसीलीये मे ये बात आपको कहेनेमे डर लग रहा हे..

मुना : बरखा.. अब तुम मेरी होने वाली बीवी हो.. तो मुजसे कैसा डर.. हमने भाइ बहेन होते हुअ‍ेभी प्यार कीया.. तबभी तुम कीसीसे नही डरी थी.. तो अब मुजसे क्या डरना.. बता जोभी कहेनाहे खुलके बता..

बरखा : (सर्मसार होते नजरे चुराते धीरेसे) भाइ.. प्लीज मेरी बात सुनकर नाराज मत होना.. भाइ.. अगर मे आपकी बहेन होकरभी इस सुखको अपनेही घरमे रहेकर अपने भाइसे पा सकती हु तो फीर मां क्यु नही..

मुना : (मनमे खुस होते भी बहारसे नाराज होनेका नाटक करते) बरखा.. तेरा दिमागतो ठीक हेनां..? तुम मां के बारेमे अ‍ैसा सोचभी कैसे सकती हो..?

बरखा : (थोडा गभराते धीरेसे) भाइ.. मे इसीलीये केह रहीथीकी आप मुजपे नाराज मत होना.. आप अ‍ेक बार ठंडे दिमागसे सोचना.. क्या इसके अलावा आपके पास ओर कोइ रास्ता हे..? तो कहीये हम उनपे विचार करेगे.. मुजेतो बस यही अ‍ेक रास्ता दीखता हे..

मुना : (थोडा सांत होते) बरखा.. तुम सोचो.. इसका मतलब भी जानती हो..? इस बारेमे सोचकर तुम अपनेही पैरोपे कुहाडी मार रही हो.. तुम हमारी मांको अपनीही सौतन बनानेकी सोच रही हो.. क्या इसके बारेमे तुमने कभी सोचा हे..?

बरखा : (मुनाके दोनो गाल प्यारसे सहेलाते) भाइ.. मेने इस बारेमे काफी कुछ सोचलीया हे.. मे सबकुछ सोच समजकर ही बोल रही हु.. आप इतने सक्षम हे की आप हम दोनोको सम्हाल सकते हे.. भाइ.. अ‍ेक बार ठंडे दिमागसे सोचो.. इनमे घरकी बात घरमेही रेह जायेगी.. हमारी मांकी इजत बहार अ‍ैसेही रहेगी.. वरना सोचो वो फीरसे कही बहार भटक गइ तो..? भाइ इसीलीये मे केह रही हु..

मुना : (मनमे खुस होते) बरखा बाततो तेरी सही हे.. लेकीन फीरभी.. वो हमारी मां हे..

बरखा : (अपनी बात बनतेही खुस होकर होंठ चुमते) भाइ.. तो क्या हुआ.. अब हमारे गांवमे इतना सारा बदलाव होने वाला हे तो उनकी सुरुआत हमसे क्यु नही..? भाइ.. मे मांको अपनी सौतन बनानेके लीयेभी तैयार हु.. (सरमाते हसते) ओर वैसेभी सुबह होते होते आप मेरी हालत बीगाड देते हो.. तो इनसेतो अच्छा हे कुछ प्यार मांकोभी मील जायेगा.. हें..हें..हें..

मुना : (मुस्कुराते बाहोमे भीचते) हंम.. मेरी बीवी काफी समजदर हो चुकी हे.. जो सबकी चीन्ता करती हे..

बरखा : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. जबतक पापा हे तबतक हम आप दोनोके रीस्तेको छुपायेगे.. क्या कहेते हो..?

मुना : (बरखाको अपने तनसे चीपकाते) हंम.. वैसेभी अ‍ैसे रीस्तोको बहार उजागर नही करना चाहीये.. चल इस बारेमे हम बादमे सोचेगे.. पहेले मुजे मेरी बीवीसे प्यार करने दे..

कहातो बरखा सरमाके मुनाके सीनेमे सर रख देती हे.. तब कुछही देरमे मुना यही खडे खडे बरखाकी चुदाइ कर रहाथा.. तब बरखाको कहा पताथा की उनकी मां बसंती आजही उनकी सौतन हो चुकीहे.. ओर मुनासे जबरदस्त तरीकेसे चुदवाकर अपने आपको मुनाको समर्पीत कर चुकी हे.. मुनाने बरखाको बाथरुममेही चोदलीया.. फीर दोनोही सावर लेकर नंगे बहार आगये.. तब दो घंटेके बाद मुनाने फीरसे बरखाको चोदलीया.. ओर उनकी हालत पतली करदी..

तो गांवमे देर रात १० बजे बंसी अपने रुममे अपनी विधवा बुआ सांतीका बेसब्रीसे इन्तजार कर रहाथा.. तो दुसरी ओर जबसे जागृतीने लखनसे अपने भाइके बारेमे सुना.. ओर अपनी सहेली जयश्रीनेभी उनको अपने भाइके साथ रीलेशनकी बात कही तबसे जागृतीको कही चेइनही नही मील रहाथा.. वो बार बार अपने भाइ बंसीके बारेमे सोचते अपने बेडपे करवटे बदलती रही..

ओर बीच बीचमे बहार दरवाजे तक आकर बंसीके रुमकी ओर देखने लगती.. तभी अचानक उनकी बुआ सांतीके रुमका दरवाजा खुला.. तो जागृती थोडा दरवाजा बंध करके अ‍ेक कदम पीछे चली गइ.. ओर सांतीके रुमकी ओर देखने लगी.. तो उनकी बुआ सांती अ‍ेक सादीसुधा औरतकी तराह सजधजके बहार नीकली.. ओर अपने रुमको बंध करके आजु बाजु सभी जगाहपे नजर घुमाते बंसीके रुमकी ओर जाने लगी..

तभी उनकी नजर जागृतीके दरवाजेकी ओर चली गइ.. तो वहा जागृतीको खडी देकर वो गभरा गइ.. ओर वही रुक कर जागृतीकी ओर देखने लगी.. तो जागृती बीन्दास अदब लगाते सांतीकी ओर देखते कातील मुस्कान करने लगी.. जीसे देखकर अ‍ेक बारतो सांतीकी गांडभी फटने लगी.. तभी अचानक जागृतीने सांतीको हाथके इसारेसे बंसीके रुममे जानेके लीये कहा.. तो सांतीको बडाही आस्चर्य हुआ..

ओर वो सरमाते धीरेसे बंसीके रुममे चली गइ..तो जागृतीभी अपना रुम बंध करके अपने बेडपे लेटते मुस्कुराने लगी.. फीर आज पहेली बार जागृती अपने भाइ बंसीको इमेजींग करते अपनी चुतमे उगली डालकर अपने आपको सांत करती हे.. फीर सो जाती हे.. तो दुसरी ओर सांती ओर बंसीभी मीया बीवीकी तराह अ‍ेक साथ चुदाइ करके सो गये थे.. तब सांतीको इस वक्त बंसीको जागुतीके बारेमे बताना उचीत नही लगा..

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लखनके सारे दोस्त ओर गांवके दुसरे लडकेभी अपनी मासुकाके साथ लगे हुअ‍े थे.. अ‍ेक लडका आजभी अपनी विधवा ताइकी अपने घरकी छतपे उनकी जमकर चुदाइ कर रहाथा.. तो अ‍ेक लडका अपनी विधवा भाभीको उनके रुममे जाकर चोद रहाथा.. ज्यादातर लडके अपनी बहेनकोही चोद रहेथे.. तो आज जागृतीकी सहेली जयश्रीभी जागृती ओर लखनकी चुदाइ देखकर बहुतही उतेजीत होगइ थी.. तो रातमे अपने चाचाके लडके श्रीधरके साथ उनके रुममे बेडपे लेटकर चुदाइमे मसगुल थी....

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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १४४/२

श्रीधर जयश्रीको बडेही कामुक तरीकेसे चोद रहाथा.. तभी अचानक जयश्रीको मुहमे कुछ अजीबसा लगा ओर वो उबके करते जटसे श्रीधरको अपने उपरसे हटा देती हे.. ओर अपने मुहपे हाथ रखते नंगीही बाथरुमकी ओर भागने लगी.. तो कुछ पल ये सब देखकर श्रीधरभी गभरा गया ओर वोभी नंगाही जयश्रीके पीछे बाथरुममे चला गया.. तो वहा जयश्री उल्टीया कर रहीथी.. ओर श्रीधर उनके पास जाकर उनकी पीठको सहेलाने लगा..

जब उल्टीया होगइ तब जयश्रीने अपना मुह साफ करलीया तो श्रीधर उनको हाथ पकडके बहार बेडपे लेकर आगया ओर जयश्रीको वही बेडपे लीटा दीया.. ओर उनके सामने सवालीया नजरोसे देखता रहा.. तब जयश्री सरमा गइ.. ओर मंद मंद मुस्कुराते श्रीधरको हाथ पकडके अपने उपर खीचने लगी.. जब श्रीधर उनके उपर आगया तब जयश्रीने जोरोसे श्रीधरको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होठोको चुमलीया..

श्रीधर : दीदी क्या हुआ..? आपको उल्टीया क्यु हुइ..? ओर आप हस क्यु रही हो..?

जयश्री : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. आप मुजे बार बार भागनेके लीये केह रहेथेनां..? तो मुजे लगता हे अब हमारे भागनेका वक्त आगया हे.. आप जानेकी तैयारीया सुरु करदो..

श्रीधर : (खुसीसे आस्चर्यसे) लेकीन अ‍ैसे अचानक क्यु..? क्या हुआ हे आपको..?

जयश्री : (जोरोसे बाहोमे भीचते होंठ चुमते) भाइ.. आज दोपहोरकोभी मुजे उल्टीया हुइ थी.. सायद हमारे प्यारकी नीशानी मेरे पेटमे पल रही हे.. भाइ.. सायद आपने मुजे प्रेगनेन्ट करदीया हे.. भाइ.. मे हमारे बच्चेकी मां बनुगी.. आज में बहुत खुस हु.. भाइ आइ लव यु..

श्रीधर : (मनमे बहुत खुस होते) लव यु टु.. दीदी.. क्या आप सच केह रही हो..? तो चलो हम भागजाये.. वरना बडी मम्मी हमारे इस बच्चेको कभी इस दुनीयामे नही आने देगी.. ओर आपकी सादीभी कही ओर करदेगी.. मे आपको छोडना नही चाहता..

जयश्री : (जोरोसे बाहोमे भीचते) नही भाइ.. मे हमारे प्यारकी नीशानी नही गीरवाने दुगी.. ओर मुजे आपके अलावा कीसीसेभी सादी नही करनी.. मे अपनी जान देदुगी.. भाइ.. कुछ करो.. हमे जल्दसे जल्द इस घरको छोडना होगा.. आप मेरे देवरको फोन करदीजीये.. आपकेतो खास दोस्त हे..

श्रीधर : दीदी वो सबतो इन्तजाम होजायेगा.. लेकीन इस बारेमे हमे अ‍ेक बार मम्मीको बताना चाहीये..

जयश्री : भाइ.. अभीतो मुजे आपसे प्यार करना हे.. अगर फीरसे उल्टीया हुइ तो इस बार मे खुद चाचीसे बात करलुगी.. आप सुरु होजाइअ‍े.. आज मुजे जीभरके आपसे चुदवाना हे.. भाइ चोदलो मुजे..

फीर कुछ देरके बाद अ‍ेक बार फीर दोनोके बीच धमासान चुदाइका दौर चल पडा.. दोनोही सुबह साडे तीन बजे तक चुदाइ करते रहे.. इसी बीच श्रीधरने जयश्रीकी चुतको दो बार अपने पानीसे सीच दीयाथा.. फीर जयश्री नहाने चली गइ.. तद अ‍ेक बार फीर उनको उल्टीया हुइ..

तो उनकी आसंकाअ‍े मजबुत होने लगी.. वो बाथरुम मे ही अपना फोन लेजाकर कीसीको फोन करने लगी.. फीर बहार आकर अपने कपडे पहेनकर रुमसे बहार चली गइ.. तो वहा श्रीधरकी मम्मी यानी जयश्रीकी चाची ब्रीन्दा उनके इन्तजारमे रुमके बहार खडी थी.. तब..

श्रीधरकी मम्मी ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हंम.. बोल मेरी बच्ची.. इतनी देर रात तुमने फोन क्यु कीया..? अच्छाथा मेने सीर्फ वाइब्रन्ट मोडमे रखाथा.. अगर तेरे चाचा रींगकी आवाज सुनकर जाग जाते तो..?

जयश्री : (सरमाते धीरेसे) सोरी चाची.. बात ही कुछ अ‍ैसी थी की मुजे आपको अभी बताना जरुरी लगा..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे.. चल.. बता.. क्या बात हे.. कुछ हुआ क्या..?

जयश्री : (सरमाते धीरेसे) चाची.. अभी रातमे मुजे दो बार उल्टीया हुइ हे.. आज दो पहोरकोभी हुइ थी.. ओर अभीभी कुछ अ‍ैसाही लग रहा हे.. बहुत बैचेनी जैसा लगता हे.. कही कुछ उच नीच तो नही होगइ..?

ब्रीन्दा : (मनमे खुस होते धीरेसे) क्या..? बेटी तबतो बहुत अच्छा हे.. अभी ठहेरो.. मे तुमको अ‍ेक प्रेगनन्सी चेक करनेकी कीट देती हु.. तुम उनपे पीसाब करके देखलो.. अगर वो पोजीटीव हेतो.. मुजे तुरंत बहार आकर बताना..

कहेतेही श्रीधरकी मम्मी ब्रीन्दा अपने रुममे चली गइ.. घरमे सब लोग गहेरी नींदमे सो रहेथे.. तब जयश्री श्रीधरके रुमके पासही खडी रही.. तब कुछही देरमे ब्रीन्दा अ‍ेक कीट लेकर आइ ओर जयश्रीको देते उनको धीमी आवाजमे कुछ समजाने लगी.. ओर जयश्री कीट लेकर अंदर चली गइ.. फीर कुछही देरमे वो वापस कीट लेकर बहार आगइ.. तबतक ब्रीन्दा वही बहारही खडी रही.. ओर जयश्रीने कीट उनको देदी..

ब्रीन्दा : (कीटको देखतेही खुस होते..) बेटी अब वक्त आगया हे तुम दोनो यहासे भाग जाओ.. बाकी मे यहा सब सम्हाल लुगी.. अब वक्त जाहीर मत करो.. श्रीधरको जगाकर कहेदे वो जानेका इन्तजाम करले..

जयश्री : (थोडी परेसान होते धीरेसे) लेकीन चाचीजी हुआ हे क्या..? कुछ तो कहीये..

ब्रीन्दा : (सरमाते मुस्कुराते) अरे मेरी बच्ची.. यही जो मे चाहती थी.. तुम मेरे श्रीधरके बच्चेकी मां बनने वाली हो.. तुम प्रेगनेन्ट हो चुकी हो.. अगर इस बातका तेरी मम्मीको पता चल गयातो वो तुम दोनोको कभी अ‍ेक नही होने देगे.. ओर इस बच्चेको भी गीरवा देगे.. क्या तुम ये सब चाहती हो..?

जयश्री : (जटरसे धीरेसे) नही नही.. मे मेरे श्रीधरके बच्चेको कभी नही गीरवाने दुगी.. ये हम दोनोके प्यारकी नीशानी हे.. मे अभी इनको जगाकर बात करती हु.. ओर हमारे जानेका इन्तजाम करनेको कहेती हु.. चाची.. प्लीज.. आप यहा सब सम्हाल लेना.. सब ठीक होतेही हम वापस आजायेगे.. वहा जाकर हम कोर्टमे सादी करलेगे.. बस अ‍ेक बार वो सादीका सर्टीफीकेट आजाये.. फीर कोइ कुछ नही कर सकता..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते धीरेसे हग करते) हंम.. मेरी बच्ची.. बहुतही समजदार होगइ हे.. चल जा फटाफट श्रीधरको जगादे.. ओर चार बजेसे पहेले ही तुम दोनो यहासे नीकल जाओ.. ओर हां.. अपनी मम्मीको अ‍ेक चीठी लीखकर जाना.. जाओ जल्दी..

जयश्री जटसे वापस श्रीधरके रुममे चली गइ.. ओर श्रीधरको सारी बाते बतादी.. तो श्रीधरने वहीसे बंसीको ओर लखनको फोन करदीया.. ओर भागनेका सब इन्तजाम करलीया.. इसी बीच जयश्रीने फोन करके जागृतीसे भी सब बाते करली.. फीर उनकी मम्मीके नाम चीठी लीखने बैठ गइ.. फीर दोनोने अपने अपने कपडे अ‍ेक बेगमे पैक करलीये.. ओर चुपकेसे बहार आगये.. तब ब्रीन्दा अपने रुमके दरवाजेके पास खडीथी..

तब दोनोही उनके पास जाकर उनके पैरको छुने लगे.. तो ब्रीन्दाने खुस होते दोनोको गले लगाकर आशीर्वाद दीया.. फीर श्रीधर ओर जयश्री दोनोही धरसे बहार नीकल गये.. ओर फटाफट पैदल ही गांवके बहार तक चले गये.. तो वहा बंसी पहेलेसे ही लखनकी जीप लेकर खडा था.. ओर बंसी उन दोनोको लेकर सहेरकी ओर चला गया.. कल जबसे बनवारीलालकी ओर उनकी बहुकी देवायतसे बात हुइ.. तबसे वोभी कल रातसे मीया बीवीकी तराह खुलके साथमे सोने लगथे..

तो आज रजीयाभी सब काम नीपटाकर लखनकी पत्नीकी हेसीयतसे सब शींगार ओर अपनी मांगमे सींदुर भरके लखनके रुममे चली गइथी.. तो लखन उनको देखकरही खुस होगया.. ओर लखनने अ‍ेक कामोतेजनाकी गोली खाली.. ओर इस पुरी रात लखन रजीयाकी जमकर चुदाइ करता रहा.. लखनने रजीयाको अपनी पत्नी मानकर उनकी हर तराह हर अ‍ेन्गलसे चुदाइ की.. ओर उनकी चुतको भरता रहा..

तो दुसरी ओर देवायतने आतेही गांवके बहारसे रश्मीको फोन करदीया ताकी कीसीको पता ना चले तब कुछही देरमे रश्मीने गेइटको धीरेसे खोल दीया ओर देवायतने अपनी कारको सीधेही अंदर लेलीया.. तब रश्मीने गेइट बंध करदीया ओर कारके पास आगइ.. जैसेही रातके अंधेरे देवायत कारसे उतरा तो रश्मी देवायतसे लीपट गइ.. ओर उनको अपनी बाहोमे भीचते होठोको चुमने लगी.. तब देवायतने हसते हुअ‍े रश्मीको अपनी गोदमे उठालीया ओर घरके अंदर आगया.. ओर रश्मीको नीचे उतार दीया तो....

रश्मी : (खुस होते मुस्कुराते) जानु.. इधर मेरे रुममे नही.. आप इस रुममे चले जाइअ‍े मे सब दरवाजा लाइट बंध करके आती हु.. फीर आपको कुछ बताती हु.. जाइअ‍े..

देवायत : (मुस्कुराते) क्यु.. तेरे रुममे क्या प्रोबलेम हे.. चलना वही सोना हे.. कल उठनेमे देरभी होगइ तो कोइ दीकत नही हे..

रश्मी : (सरमाते हसते) नही.. अरे इधर जाइअ‍ेना.. वहा कोइ सोया हुआ हे.. बस यही समजलीजीये आपके लीये सरप्राइज हे.. जाइअ‍ेनां.. हें..हें..हें..

(थोडासा फ्लेसबेक)

तब देवायत मुस्कुराते राघव वाले रुममे चला गया.. दरसल जब सामको देवायतने अपने ससुरके घरपे था.. जब मंजु चंदाकी वहा रुकनेकी बात हुइ तबही देवायतने रश्मीको फोन करके उनके घरपे सोनेके लीये आनेको बता दीयाथा.. जब देवायतका फोन आया तब रश्मी वंदना साथमे ही पंचायतकी ओफीसमे बैठकर गपे लगा रही थी.. तो रश्मी देवायतके उनके घरपे आनेकी बात सुनकर बहुत खुस हुइ थी.. ओर उसे तबही आइडीया आगया..

रश्मी : (सरारतसे मुस्कुराते) वंदु.. आज तुम मेरे घर सोने चल.. खाना वही खा लेना..

वंदना : (सरमाते हसते) क्यु..? भाभी.. कीसका फोन था..? जो अचानक मुजे अपने घर लेजा रही हो.. हें..हें..हें..

रश्मी : (हसते) अरी चलनां..? तु नखरे बहुत करती हे.. देवुका फोन था.. आज अच्छा मौका हे.. मीलले उसे.. रातको घरपे आयेगा.. मंजुभाभी चंदाभाभी लता सब अपने अपने मायके गइ हे.. तो रातको देवु मेरे घर ही रुकेगा..

वंदना : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. पागल होगइ हो क्या..? अ‍ैसे कैसे मीलु उसे..? अभीतो हमने कोइ बात भी नहीकी.. कुछतो सरम करो..

रश्मी : (मुस्कुराते) अरे कुछ नही होगा.. आज मीले तो बातभी करलेना उसमे क्या हे..? अभी ठहेरो मे चारुभाभीको फोन करदेती हु की वंदना आज मेरे घर सोने आरही हे.. वो मना नही करेगी.. हें..हें..हें..

वंदना : (थोडी परेसान होते) भाभी.. रहेने दो मत करो फोन.. मुजे नही आना.. मे बादमे आउगीनां..

रश्मी : (थोडा गुस्सेसे) अरे पागल हो क्या.. क्यु नही आना..? वो तुजे खा थोडीना जायेगा.. सीर्फ बातही तो करनी हे.. चल..

कहेते रश्मीने चारुभाभीको फोन लगा दीया तो दो तीन रींगके बाद चारुभाभीने फोन उठा लीया..तो वंदना जुठे गुस्सेसे रश्मीको अ‍ेक पीठमे मुका मारते सरमाते मुस्कुराती रही..

चारु : (फोनपे) हेलो.. हां रश्मीभाभी.. बोलो..

रश्मी : (मुस्कुराते) चारुभाभी.. आज वंदुको मेरे घरपे सोनेके लीये लेजा रहीहु.. क्या हेनां.. मेरी तबीयत थोडी नरम हे.. तो खाना हम मेरे घरपे ही खा लेगे..

चारु : रश्मीभाभी.. क्या हुआ हे..? अगर तबीयत ज्यादा खराब हे तो आप इधर हमारे घरपेही चली आओ.. मे इधर खाना बना दुगी.. आप ओर वंदु साथ सोजाना..

रश्मी : (मुस्कुराते) अरे नही नही भाभी.. आज नही.. मुजे वंदुसे कुछ कामभी हे.. आप समज गइनां..?

चारु : (खुस होते धीरेसे) रश्मीभाभी.. क्या हमारी बात हुइथी वो.. मतलब.. देवु..

रश्मी : (मुस्कुराते वंदनाकी ओर देखते) हंम.. हा वोही.. अभी फोन आया था.. आज वो मेरे घरपे आने वाले हे.. तो वंदुको लेजा रही हु.. दोनोकी बात होजायेगी.. क्या कहेती हो..?

चारु : (खुस होते मुस्कुराते) तबतो भाभी.. मे आपकी जींदगीभर अहेसान मंद रहुगी.. जरा वंदुकोभी समजाओ.. कबतक अ‍ैसे बैठी रहेगी.. उनसे बातभी नही करती.. वरना अबतकतो दोनोका अ‍ेक बच्चाभी होगया होता..

रश्मी : (सरमाते हसते) भाभी.. देखती हु आज.. अगर भगवानने चाहा तो वोभी होजायेगा.. चलो मे रखती हु.. येतो ना नुकुर कर रही हे.. जरा आप इसे समजाइअ‍े.. मे वंदुको देती हु..

कहेते रश्मीने हसते हुअ‍े वंदनाको फोन देदीया तो वंदनाने अपने दांत पीसते रश्मीको अ‍ेक मुका ओर जड दीया ओर फोन लेलीया.. तब

वंदना : (सरमाते) हां मम्मी.. बोल..

चारु : वंदु.. रश्मीभाभीकी तबीयत खराब हेतो चलीजा उसमे क्या हे..? बेचारीके खाना बाना बना देना इधरकी फीकर करनेकी जरुरत नही हे.. ओर सुन.. अगर देवु वहा आये तो उनसे बात करलेना.. सरमाना मत.. चल मे फोन रखती हु..

वंदना चारुको कुछ कहे इनसे पहेलेही चारुने फोन काट दीया.. ओर खुस होकर मुस्कुराने लगी.. तब वंदनाने फोन रश्मीको वापस देते फीर अ‍ेक मुका जड दीया तो रश्मी जोरोसे हसने लगी.. ओर कहा..

रश्मी : (हसते) कमीनी कबसे मार रही हे.. देखना अ‍ेक दीन मेभी बदला लुगी.. हें..हें..हें..

वंदना : (कामुक मुस्कानसे धीरेसे) बदलातो लेलीया.. अब कीतने बदले लेगी.. तुम भाभी हो की मेरी दुस्मन..? भाभी मुजेतो सरम आ रही हे.. अगर उसने कुछ कीयातो..? मुजेतो बहुत सरम आयेगी..

रश्मी : (थोडा सीरीयस होते) वंदु.. अ‍ेक बात कहु..? मेरी तो छोड मेतो पराइ हु.. लेकीन चारुभाभी तो तेरी सगी मां हे.. मुजसे ज्यादा तेरी चीन्ता उनको हे.. हम भली भांती जानती हेकी अ‍ेक अकेली ओरतकी जींदगी कैसी होती हे.. नर्कसे भी ज्यादा बदतर होती हे.. लोग उसे भेडीयोकी नजरसे देखते हे.. इनसेतो अच्छा हे सादी करलो..

फीर चाहे पती जैसाभी हो.. हम अपने आपको सुरक्षीत महेसुस तो कर सकती हे.. इसीलीये मेने देवुसे रीलेशन रखलीया.. मुजे समाजकी परवाह नही हे.. कमसे कम लोगोको पतातो हेकी इनके पीछे उनका यार देवु खडा हे.. कोइ मेरी ओर आंख उठाके नही देखता.. फीर भलेही हम दोनोका रीस्ता नाजायज हो..

वंदना : (इमोस्नल होते हाथ पकडते) भाभी.. आइ नो.. मुजे सब पता हे.. ओर कीसने कहा आप मेरे लीये पराइ हे..? पुनोके बाद तो आप ओर नीशाही मेरी बेस्ट फ्रेन्ड हे.. तो आप सबलोग मेरी भलाइके लीये ही कर रहे हे.. लेकीन भाभी.. उनकी इतनी सारी बीवीया हे.. तो अ‍ेक मनमे डर भी लग रहा हे..

रश्मी : (वंदनाकी आंखोमे अ‍ेक नजरसे देखते) ठीक हे.. तो फीर तुम जीसे चाहो उनसे सादी करले.. कमसे कम तेरा घर बसाले.. कबतक अ‍ैसे घुट घुटके जीयेगी.. हम ओरतोको भी कुछ नीड होती हे.. अगर डर लग रहा हे.. तो तुजे अभी मेरे घर आनेकी जरुरत नही हे.. तु कोइ अच्छासा लडका देखकर उनसे सादी करले..

वंदना : (आंख गीली करते धीरेसे) भाभी.. मे वोभी तो नही कर सकती.. भलेही मे उनसे दुर हु.. लेकीन मेने भी उनको चाहा हे.. मेरा पहेला प्यार हे वो.. मे कीसी ओरसे कैसे सादी कर सकती हु..? अगर करभी ली तो मे ओर मेरा पती हम दोनो ही खुस नही रेह पायेगे.. मेरे दिलमे देवु हमेसा छाया रहेगा.. मेरीतो समजमे नही आताकी मे क्या करु..? कमीनी पुनोभी तो यहा नही हे.. वरना उनसे बात करके जी हल्का कर लेती..

रश्मी : (मुस्कुराते) कमीनी.. तुजे दुसरी जगाह भी सादी नही करनी.. देवुसे बात भी नही करनी.. तो फीर क्या करना हे..? ठहेर अभी पुनोसेभी बात करवाती हु.. उनकोतो तेरे बारेमे सब पता ही हे..

रश्मी : (पुनमको फोन लगते ही) हां पुनमदीदी.. मे रश्मीभाभी बोल रही हु.. ले तेरी कमीनी सहेलीको जरा समजा.. बहुत नखरे कर रही हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) क्यु.. अब क्या हुआ..? कहा हे वो कमीनी..? ओर उसे क्या समजाना हे..? बताइअ‍ेतो सही..?

रश्मी : (मुस्कुराते) हंम.. सुनो दीदी.. आज देवु मेरे घर आ रहा हे.. तो मे वंदुको मेरे घरपे ले जा रही हु.. तो कमीनी नखरे कर रही हे.. अब जरा आप ही इसे समजाइअ‍े.. लीजीये बात करीये..

वंदना : (सरमाते हसते) हां कुती. बोल.. तुमतो सादी करके हमे भुलही गइ.. क्या जीजु इतना प्यार करते हे तुजे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) हां.. कमीनी. अब ध्यानसे सुन.. चुपचाप रश्मीभाभीके घर चली जा.. ओर कहोतो भाइसे भी बात करलु..? हंम.. आज अच्छा मोका हे.. करले बात उनसे.. अगर आज नही कर पाइ तो तु भाइको हमेसाके लीये भुल जाना.. फीर तुम जींदगीमे कभी उनसे बात नही करपायेगी.. सरमकी पुछ..

वंदना : (सरमाते धीरेसे) पुनो.. सुन.. बस अ‍ेक डर लग रहा हे.. अगर हम कंट्रोल नही करपाये तो.. हंम.. अगर तुम साथमे होती तो..

पुनम : (हसते) वंदु.. सुन.. अगर तुम दोनो कंट्रोल नही करपाये तो ओरभी अच्छा हे.. सबकुछ कर लेना.. जीले अपनी जींदगी.. रश्मीभाभी सब सम्हाल लेगी.. मे उनसे बात करलुगी.. इसमे कुछ नही होता.. बस पहेली बार थोडा डर लगता हे.. समज गइनां.. मेभी डरी हुइ थी.. अबतो मजेही मजे हे..

ओर सुन.. मे कल सेटर डे सन्डे उधर आ रही हु.. तब हम बात करेगे.. मे आशा करती हु.. तबतक तुम्हारा ओर भाइका मीलन होगया हो.. चल.. अब कोइभी नखरेके बीना चुपचाप भाभीके साथ चलीजा.. बेस्ट ओफ लक.. फोन जरा भाभीको देना..

रश्मी : (वंदनाने सरमाते फोन रश्मीको दीया तब) हां पुनोदीदी.. कहीये.. समजा दीया इसे..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) हां भाभी सुनो.. वंदु आरही हे.. बस.. आप उनको सम्हालन लेना.. मे नही हु वरना मेही दोनोको सम्हाल लेती.. आप समज गइना.. यही समजलो आजही इस दोनोकी सुहागरात हे.. बस मुजे ओर कुछ नही कहेना.. चलो मे फोन रखती हु.. जब वहा आउतो मुजे अच्छी खुस खबर देना.. हें..हें..हें..

कहेते पुनमने फोन काट दीया तो रश्मी वंदनाकी ओर कातील स्माइल करते देखती रही.. तब वंदना सर्मसार होगइ.. ओर वंदनाको प्यारसे गालपे अ‍ेक चपत लगादी..

वंदना : (सरमाते हसते) तुम सब कमीनी हो.. सभी की सभी.. आपसमे मीली हुइ हो.. मेरी मां भी.. चलो.. मे आती हु.. देखना अगर कुछ हुआ तो आप सम्हाल लेना..

रश्मी : (जोरोसे हसते) हां.. हम सब मीली हुइ हे.. कमीनी सीर्फ तुम अ‍ेकही बीछडी हुइ हो.. चल तैयार होजा.. मे हुनां.. हें..हें..हें..

दोनोही साम ढलतेही घरपे आगइ.. फीर खाना बनाकर दोनोने खालीया ओर सब काम नीपटाकर दोनोही रश्मीके बेडरुममे लेटकर गपे लगा रही थी.. तब रश्मी आज वंदनासे खुलकर बाते कर रहीथी.. उनको सेक्सकी सब जानकीया दे रहीथी की सुहागरातमे क्या होता हे.. तब वंदनाभी सरमाते सब सुन रहीथी.. ओर बीच बीचमे उनको कोइ प्रस्न होता तो पुछ लेती थी.. कुल मीलाके रश्मी आज वंदनाको देवायतके साथ मीलन करने हेतु उनको मानसीक तौरपे तैयार कर रहीथी.. तब वंदना बहुत सरमाइ हुइ थी..

वंदना : (धीरेसे सरमाते) भाभी.. अगर मुजे कुछ होगया तो आप इधरही रहेना.. मुजे सम्हालतो सकोगी..

रश्मी : (मुस्कुराते) अरे तुम फीकर मत करो.. अ‍ैसा कुछ नही होगा.. ओर मे इधरही हु.. तु खामखा डर रही हे..

वंदना : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अ‍ेक बात कहु.. वो आपकेभी पती हे.. तो पहेले आप दोनो मील लीजीयेनां.. बादमे हम मील लेगे.. आप समज गइनां.. हंम..?

रश्मी : (सरमाते हसते) हंम.. हातो मे तो मील ही लुगी.. इतने दिनोके बादजो हाथ आये हे.. वंदु.. तुम इधरही रहेना.. आज मौका मीलेतो तुम दोनो यही अपनी सुहागरात मना लेना.. मे बाजुके रुममे जाकर उनसे करवा लुगी.. हंम.. मे दरवाजा खुला रखुगी.. समज गइना.. मे अभी तुम दोनोके लीयु दुध बुध गरम करके इधर रख देती हु.. बस अब वो आनेही वाले होगे.. चल अभी दुध लेकर आइ.. तुम इधरही बैठ..

कहेते रश्मी दो ग्लास गरम दुध लेकर आगइ ओर ढकके वही रख दीया.. तभी देर रात देवायतका फोन आगया.. तो रश्मीके चहेरेपे मुस्कान आगइ.. ओर वो दरवाजा खोलने गइ.. तब वंदनाकी दिलकी धडकन बढने लगी.. आज वो पहेली बार देवायतको मीलने जा रहीथी.. वोभी अकेली रातमे अ‍ेक बंध कमरेमे.. उनकोतो पताही नही थाकी उनकी अचानक देवायतसे अ‍ैसे मुलाकात होगी..

जो बात दोनोकी सुहागरात तक पहोच जायेगी.. यही सोचते उनकी चुतमे हरकत होने लगी.. ओर चुतसे तरल पदार्थ का रीसाव होने लगा.. वंदनाने जवानीके दहेलीजपे जबसे कदम रखा तबसे वो देवायतको पसंद करती थी.. ओर उनसे प्यार करनेके सपने देखती थी.. आज तक देवायतको लेकर अपने मनमे कइ सपने सजाके रखेथे.. जो साम होते ही अचानक सभी सपने वंदनाको पुरे होते दीखने लगे..

(फ्लेसबेक खतम..)

तभी वंदनाको बहार बहार कुछ आहट सुनाइदी.. तब उनके तनसे अ‍ेक कंपनसी लहेर दोड गइ.. वंदनाका दिल जोरोसे धडकने लगा.. जीनकी आवाज रातके सनाटेमे वंदना खुद सुनपा रहीथी.. अचानक घरकी सब लाइटे बंध होने लगी.. तभी अचानक रश्मीभाभी वंदनाके रुमपे आगइ.. ओर दरवाजेपे खडी होकर मुस्कुराते खुस होते वंदनाको थम्सअप की साइन दीखाकर वापस चली गइ..

तो वंदनासे रहा नही गया.. उनको गभराहट महेसुस होने लगी.. ओर वो भारी घडकनसे बेडसे खडी होगइ.. ओर सोचने लगीकी दोनो रुममे चले गये होगे.. तो देखने जाउ.. की नही.. यही कस्मकसमे थोडी देर सोचती रही.. ओर आखीर हीमंत करते दबे पांव दरवाजेकी ओर बढ गइ.. ओर धीरेसे बहार मुह नीकालते देख लीयाकी होलमे कोइ हेकी नही.. तब उनको दुसरे रुमसे कुछ हसनेकी आवाज सुनाइ दी.. ओर वंदना उस रुमको देखते धीरेसे दबे पांव आगे बढने लगी..

इधर रश्मीके रुममे आतेही दोडके देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर देवायतको पागलोकी तराह चुमने लगी.. तब देवायतभी रश्मीको जोरोसे बाहोमे भीचते उनके उरोजोसे मसलते खेलने लगा.. तब रश्मीकी सारीका पलु गीर गया.. रश्मीकी सारी सीर्फ उनकी कमर तक रेह गइ.. तब देवायत रश्मीके चहेरेको हथेलीमे थामते चुंबनोकी बारीस करता रहा.. ओर तब रश्मीने देवायतको कसके अपनी बाहोमे भीचलीया....

कन्टीन्यु
 
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १४५

इधर रश्मीके रुममे आतेही दोडके देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर देवायतको पागलोकी तराह चुमने लगी.. तब देवायतभी रश्मीको जोरोसे बाहोमे भीचते उनके उरोजोसे मसलते खेलने लगा.. तब रश्मीकी सारीका पलु गीर गया.. रश्मीकी सारी सीर्फ उनकी कमर तक रेह गइ.. तब देवायत रश्मीके चहेरेको हथेलीमे थामते चुंबनोकी बारीस करता रहा.. ओर तब रश्मीने देवायतको कसके अपनी बाहोमे भीचलीया....अब आगे

रश्मी : (लडखडाती आवाजमे धीरेसे) बस.. बस.. देवु.. आइ लव यु.. आपने बहुत इन्तजार करवाया..

देवायत : (होंठ चुमते) हंम.. अभी कुछभी नही.. अभी सीर्फ मुजे मेरी बीवीसे प्यार करना हे.. चल आजा..

कहेते देवायत रश्मीको गोदमे उठाकर बेडकी ओर लेगया.. तब रश्मी खुब सरमाइ.. उनकी आखोमे वासनाके डोरे मंडराने लगे.. वो चाहती थी की जल्दसे जल्द देवायतका मुसल लंड अपनी चुतकी गीरफ्तमे लेले.. जैसेही देवायतने रश्मीको नीचे उतारा रश्मी देवायतकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखते उनके सर्टके बटन खोलने लगी.. तो देवायतभी पागल हो चुकाथा.. वोभी रश्मीके बलाउसके बटन खोलने लगा..

फीर रश्मीकी सारी नीकालकर उनकी पेटीकोटका नाडा खीचलीया तो पेटीकोट सरकते नीचे गीर गया.. ओर रश्मी सीर्फ नीकरमे रेह गइ.. उसने ब्रा नही पहेनीथी.. तब रश्मीने देवायतकी पेन्टको भी नीकाल दीया ओर खुदकी पेन्टीभी खीचके नीकालदी.. जैसे उनको चुदवानेकी जल्दी हो.. जब दोनोही पुरे नंगे होगये.. तब देवायतने रश्मीको थोडासा धका देते बेडपे गीरा दीया ओर उनके उपर चड गया..

रश्मी : (भारी आवाजमे धीरेसे) जानु.. आज कुछभी नही.. पहेले इसे अंदर डालदो.. तबही मुजे सुकुन मीलेगा.. हमने आखरी बार चुदाइ की.. उनको कीतने दिन होगये..

देवायत : (बुब्स मसलते होंठ चुमते) हंम.. आज तुजे बडी जल्दी हे..? आरामसे करेते हेनां..? आजतो पुरी रात मेरी बीसीसे प्यार करना हे.. हमारे पास टाइम ही टाइम हे..

रश्मी : (देवायतका चहेरा पकडते प्यारसे धीरेसे) नही जानु.. आज मुजे सीर्फ अ‍ेक बार ठंडी करदो.. फीर आपके लीये आज बहुतही बडी मस्त सरप्राइज हे.. आज पुरी रात आपको उनसे प्यार करना हे..

देवायत : (आस्चर्यसे) कौन..? कौन हे अंदर..?

रश्मी : (मुस्कुराते धीरेसे होंठ चुमते) हे.. अ‍ेक आपकी दीवानी.. जो आपकी रानी बननेके लीये आपके पीछे बीलकुल पागल हे.. ओर कबसे आपको मीलनेके लीये तरस रही हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (आंखोमे चमकके साथ मुस्कुराते) कौन..? क्या अंदर वंदना हे..? हंम..?

रश्मी : (मुस्कुराते) अरे वाह.. मेरा जानुतो पहेचान गया..? क्या आपकोभी उनके बारेमे सब पता हे..?

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. पहेलेही इस बारेमे मेरी पुनोसे बात हो चुकी हे.. लेकीन मे डरता था.. क्युकी रमेशको मे क्या कहेता..? मेरा यारजो हे.. बस अ‍ेक बार चारुभाभीसे इस बारेमे बात हुइ थी..

रश्मी : (मुस्कुराते) जानु तो फीकर मत करो.. आजके बारेमे चारुभाभीको भी पता हे.. वो खुद चाहती हेकी वंदनाभी हम सबकी तराह आपकी सीक्रेट बीवी बने.. यही समजलो आज उन्होने ही वंदुको इधर भेजा हे..

देवायत : (मुस्कुराते) वोभी तेरी तराह पागल हे.. पता नही वो रमेशको कैसे हेन्डल करेगी.. रश्मी.. क्या इसके लीये वंदना आज तैयार हे..? देख उनका पहेली बार हेतो कल उसे आरामभी करना पडेगा.. तुम समज गइनां..?

रश्मी : (धीरेसे होंठ चुमते) जानु इसकी आप फीकर मत करो.. मेने सब सोचलीया हे.. हमने पुरी प्लानींग करली हे.. कल वो मेरे घरपही वहा आराम करेगी.. मे चारुभाभीसे केह दुगी.. आप फीकर मत करो.. चलो घुसादो अब.. नही रहा जाता.. आपनेतो बातोमे ही उलजा दीया..

दोनोही बाते कर रहेथे तब देवायतका लंड रश्मीकी चुतपे ठोकर मारते अपने बीलका रास्ता ढुंढ रहाथा.. तब वंदना दरवाजेके बहार खडी होते दोनोकी बाते सुननेकी कोसीस कर रहीथी.. लेकीन साफ सुन नही पाइ.. उनको अ‍ैसा लगाकी दोनोही उनके बारेमे बाते कर रहेहे.. तबतक देवायतके लंडने अपने बीलका रास्ता ढुंढलीया था.. ओर देवायतने अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड रश्मीकी चुतमे घुसा दीया..

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तो रश्मीकी चीख नीकल गइ.. ओर थोडी देर दर्दसे छटपटाती रही.. तब देवायतने रश्मीके होठोको अपने गीरफ्तमे लेलीया.. ओर उनके बुब्स मसलते होंठोपे कीस करते अपनी कमरको आगे पीछे करते चोदने लगा.. तब कुछही देरमे रश्मी पुरी तराह मदहोस हो चुकीथी.. वो सीसकारीया करते अपनी कमर हीलाते देवायतको चुदवानेमे साथ देने लगी.. तब उनको नही पताथाकी वंदना उन दोनोकी चुदाइ देख रही हे..

वंदना धीरेसे दरवाजेसे अंदर जांकते दोनोकी चुदाइ देखने लगी.. तब उनकी चुतभी फडफडाते हरकतमे आ गइ.. ओर वंदनाका हाथ अनायास ही अपनी चुतपे चला गया.. ओर चुतको धीरे धीरे सहेलाते दोनोकी चुदाइ देखती रही.. आज वंदना अ‍ेक मर्द ओर ओरतकी चुदाइ पहेली बार इतने नजदीकसे देख रहीथी.. आज वंदना बहुतही उतेजीत होगइ.. उनको लगाकी वोभी अभीके अभी अंदर चली जाये.. ओर अपना पैर फैलाकर लेट जाये.. तभी..

रश्मी : (मुस्कुराते) जानु.. वंदुके साथ बडे प्यारसे करना.. क्या हेना.. की उनका आज पहेली बार हेनां..?

देवायत : (धीरे धीरे सोट मारते) हंम.. मुजे पता हे.. क्या इस बारेमे वंदुसे बात होगइ हे..? हंम..?

रश्मी : (कामुक आवाजमे) आह.. आह..आह..आइइइ.. सीससससइइइ.. हंमम... हो गइ हे.. जानु थोडा जोरोसे.. बहुत मजा आ रहा हे.. बस.. आप वंदनाकोभी अ‍ैसे धीरे धीरे चोदना..

इतना सुनतेही वंदना सर्मसार होगइ.. अब उनसे कंट्रोल करना मुस्कुल होगया ओर उसने अपने लोअरमे हाथ डाल दीया.. ओर चुतको सहेलाते धीरेसे अ‍ेक उंगली अपनी चुतमे घुसादी वो दरवाजेके बहार दीवालसे सटकर सीधी खडी होगइ.. ओर अपनी दोनो आंख बंध करके देवायतको इमेजींग करते उंगलीको जोरोसे चुतमे अंदर बहार करने लगी.. तब कुछही देरमे उनकी चुतसे अ‍ेक फवारा नीकल गया..

ओर पुरा नीकर भीगो दीया तब वंदनाको होंस आया तब वो खुब सरमाइ.. ओर जटसे दबे पांव वापस अपने रुममे घुसतेही बाथरुममे चली गइ.. ओर नीकर नीकालते चुतको पानीसे साफ करने लगी.. फीर वही आंख बंध करके राहतकी सांस लेते दीवालसे सटकर खडी रही.. तब उसे अपनी दिलकी धडकर साफ सुनाइ दे रहीथी.. फीर वो धीरेसे अपने कपडे सही करते वापस बेडपे आकर बैठ गइ..

तभी बाजुके रुममे देवायत जोरोसे कमर हीलाते रश्मीको चोद रहाथा.. तब रश्मी अपने दोनो पैर देवायतकी कमरमे आंटी लगाके उनके गलेको अपने दातोसे काटने लगी.. वो बहुतही उतेजीत हो चुकीथी.. ओर उसने अचानक देवायतको अपनी बाहोमे भीचलीया ओर उनसे लीपलोक करलीया.. ओर अपनी कमरको जटके देने लगी.. तब देवायतको उनके लंडपे गरमाहट महेसुस हुइ..

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तो उनके सरीरमेभी जुरजुरीसी कंपन फैल गइ.. ओर उसने जोरोसे पुरा लंड रश्मीकी चुतमे घुसा दीया ओर रश्मीको कसके अपनी बाहोमे भीच लीया.. तब रश्मीको चुतके अंदर देवायतका गरम लावा महेसुस हुआ.. दोनोही अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे देखते लीपलोक करते जोरोसे होंठ चुस रहेथे.. ओर कुछही देरमे दोनो जडके सांत होगये.. ओर देवायत लीपलोक छोडते रश्मीके बुब्सको चुसने लगा.. तब रश्मी देवायतकी पीठ सहेलाती रही..

रश्मी : (सरमाते धीरेसे) जानु.. आपनेतो आज मुजे अ‍ेकही बारमे नीचोड लीया.. बस अ‍ैसेही यहा आते रहो..

देवायत : रश्मी.. मे चाहता हु तुमभी आज हम दोनोके साथ रहेना.. वरना वंदना बहुत सरमायेगी.. ओर कुछ नही कर पायेगी..

रश्मी : (गलेमे हाथ डालके होंठ चुमते) नही जानु.. पहेले आप उनका कुआरापन तोडदो.. जानु.. उनकी अ‍ेकभी नही सुनना.. पर ध्यानसे.. मुजे वंदनाकी सरम मीटानी हे.. फीर मे आप दोनोको जोइन करुगी.. आप हम दोनोको बारी बारी चोदते रहेना.. आज मुजेभी पुरी रात आपसे प्यार करना हे.. कीतने दिनोके बाद अ‍ैसा मौका मीला हे.. अब मे ओर वंदु दोनो आपको यही मीलेगी..

देवायत : रश्मी.. मुजे वंदनासे सादी करनी हे.. वोभी मेरी सीक्रेट जगाहपे.. जहा अ‍ेक मंदिर हे..

रश्मी : (खुस होते) हंम.. जानु हमेभी कहेना.. मे ओर चारुभाभी साथ आयेगी.. ओर आप दोनोकी सादी करवा देगी.. क्या कहेते हो..?

देवायत : (थोडा सीरीयस होते धीरेसे कानके पास) नही रश्मी.. मेने चारुकोभी वादा कीया हे.. वोभी मुजसे सादी करना चाहती हे.. तेरी तराह वोभी मेरी सीक्रेट वाइफ होना चाहती हे.. तो मे सोच रहा हु.. वंदनासे पहेले मुजे चारुभाभीसे सादी करनी हे.. ओर अ‍ेक दिवानी ओरभी हे.. मुजे उनकाभी कल्याण करना हे.. तो क्या करु..?

रश्मी : (आंखोमे देखते धीरेसे) जानु.. अ‍ेक बात कहु..? आप उनसेभी सादी करलो.. क्युकी रमेशभाइ उनको खुस नही कर पाते.. ओर वैसेभी आजकल जयाभाभीकी वजहसे दोनोकी लाइफ काफी डीस्टर्ब होगइ हे.. जानु.. चारुभाभी आपसे बहुत प्यार करती हे.. इस बातका वंदनाको भी पता हे..

देवायत : (चोंकते) व्होट..? पर कैसे..?

रश्मी : (मुस्कुराते धीरेसे) जानु.. जैस पुनोदीदी ओर वंदना हे.. उसी तराह वो दोनो ही मा बेटीभी लेस्बीयन हे.. तब अ‍ेक बार बातोही बातोमे चारुभाभीने खुद वंदनाको बता दीया.. क्युकी वंदनाकोभी पता हे उनके पापा अपनी मम्मीको संतुस्ट नही करपाते.. वो दोनोही मा बेटी आपसमे खुलके चर्चा करती हे..

देवायत : (मुस्कुराते होंठ चुमते) हंम.. रश्मी तुम ओर चारुभाभी कल तैयार रहेना.. हम सुबह कही जा रहे हे.. ओर हो सकेतो कलही मे चारुभाभीसे सादी करलुगा.. मेरी पुनो ठीक कहेती थी.. चल ठीक हे.. पता नही मेरे नसीबमे कीतनी बीवीया हे.. अब उनकी बेटी वंदनाभी.. कहा हे वो..?

रश्मी : (धीरेसे मुस्कुराते) मेरे बेडरुममे.. आपका इन्तजार कर रही हे.. आज वो अपने प्यारका इजहार करना चाहती हे.. इसीलीये इधर आइ हे.. लेकीन मे ओर चारुभाभी चाहती हेकी आज ही सबकुछ होजाये.. इस बातके लीये पुनोदीदीसेभी बात होगइ हे.. उसने खुद वंदनाको कहा हेकी आजही अपनी सुहागरात मनाले.. आप समज गयेनां..?

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. समज गया.. वोभी पुनोकी तराह मेरे पीछे पागल हे.. लेकीन बहुतही सर्मीली हे..

रश्मी : (मुस्कुराते) जानु.. आज उनकी सारी सरम मीटादो.. आज बनादो उसे अ‍ेक कलीसे फुल.. जाओ.. आप बाथरुममे सही होकर आजाओ तबतक मे उसे रेडी करके आती हु..

देवायत : (मुस्कुराते होंठ चुमते) नही रश्मी.. थोडी देर अ‍ैसेही रहेना मुजे तुजे अ‍ेक बार ओर चोदना हे..

रश्मी : (होंठ चुमते) जानु.. तो मे कहा मना कर रही हु.. लेकीन मे चाहती हुकी आप मुजे ओर वंदुको पुरी रात प्यार करे.. क्युकी मुजे पता हे आज वो दर्दकी वजहसे आपको पुरी रात नही जेल पायेगी.. तब हम दोनो सुबह तक प्यार करते रहेगे.. फीर आपको जबभी वंदनाको मीलनेका मन करे मुजे बता देना.. मे उनको इधर बुला लुगी.. क्या कहेते हो..? हंम..?

देवायत : (उपरसे हटते) हंम.. सही हे.. चल.. जा मे अभी कपडे पहेनकर आता हु.. तुम अ‍ैसेही रहेना..

रश्मी : (सरमाते हसते चुत साफ करते) पागल हो क्या..? मुजे इस हालतमे देखकर तो वो कमीनी बहुतही सरमायेगी.. फीर तो यही कपडे नीकालने ही हे.. आप ध्यान रखना.. पहेली बार हेना तो थोडा प्यारसे.. कमीनी कही मेरी तराह बेहोस ना होजाये.. हें..हें..हें.. लेकीन जानु आज कोइ रहेम नही.. समजे..?

कहेते रश्मी बेडसे नीचे उतर गइ.. ओर अपने बालोका जुडा बनाकर कपडे पहेनने लगी.. तब देवायत बाथरुममे चला गया ओर अपना लंड अच्छेसे साफ करके मुह हाथ धोलीया ओर फ्रेस होगया.. फीर बहार आकर अपने कपडे पहेनने लगा तबतक रश्मी अपने कपडे पहेनकर जा चुकीथी.. ओर सीधेही अपने बेडरुममे चली गइ.. तब वंदना उनको देखतेही बेडसे खडी होगइ.. ओर रश्मीकी ओर देखते सरमाकर हसने लगी..

जब रश्मी उनके पास गइ थी तब बहुतही तैयार होके गइ थी.. ओर जब वापस आइ तो उनके पुरे बाल ओर कपडे अस्त व्यस्त थे.. जैसे कीसी ने उनको पंखीकी तराह पीख दीयाहो.. वंदना उनको देखकर बहुतही सरमाइ.. ओर रश्मी उनको लेकर मीररके सामने चली गइ ओर वंदनाका हल्कासा शींगार करने लगी.. तब..

वंदना : (सर्मसार होते धीरेसे) भाभी.. क्या कर रही हो..? मे बीलकुल ठीक हु.. हें..हें..हें..

रश्मी : (धीरेसे मुस्कुराते) अरे मेरी लाडो रानी.. अ‍ैसे थोडीना चलता हे..? आज अपने होनेवाले पतीके साथ पहेला मीलन करने जा रही हो.. देखना जब तेरी सादी इनसे होजायेगी.. तब मेही तुजे अपनी सुहागरातके लीये तैयार करुगी.. आज मेरी प्यारी ननंद पहेली बार अ‍ेक लडकीसे ओरत बनने जा रही हे.. तो तैयारतो करना पडेगानां..?

वंदना : (सर्मसार होते) भाभी.. क्या बहुत ज्यादा दर्दतो नही होगानां..? आप इधरही रुमके आसपास रहेना.. ओर दरवाजा खुलाही रखना.. ताकी मुजे कुछ होजायेतो आप सम्हाल सको..

रश्मी : (गाल चुमते मुस्कुराते) अरे मेरी ननंदरानी इतनी क्यु गभराती हे..? बादमे मेभी आप दोनोको जोइन करलुगी.. इनमे कुछभी नही होता.. बस मजेही मजे करना हे.. देखना आज तुम भी पुनोकी तराह जनतकी सैर करोगी.. क्या मस्त हथीयार हे इनका.. बस अ‍ेक बार अंदर लेलेगी.. तो बार बार लेनेकी जीद करेगी..

वंदना : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. मेने पुनोसे सुना हे.. इनका बहुत बडा ओर मोटाभी हे.. इसीलीये आपको केह रही हु.. आप इधरही रहेना..

रश्मी : (आंखोमे देखते) वंदु.. हम सब बहुतही नसीब वाली हे.. की हमारे नसीबमे इतना बडा हथीयार लीखा हे.. ओर तेरातो पतीभी होने वाला हे.. वरना देख चारुभाभी ओर नीशाको.. क्या तुम चाहती हो तुम्हारीभी हालत उन दोनोके जैसी हो..? हंम..?

वंदना : (सरमाते नां मे गरदन हीलाते) नही भाभी.. मेने मांकी तडपको देखा हे.. अच्छा हुआ उनकाभी रीलेशन इनके साथ हे.. कमसे कम घरकी बात घरमेतो रहेगी.. ओर हमारी इजतभी अ‍ैसेही रेह जायेगी.. वरना देखो.. सब पापा ओर जयाआंटीकी ओर बरखाकी मम्मीके बारेमे सब कैसी बाते करते हे.. पापा भीनां.. अपनी बीवीकोतो खुस नही रख पाते ओर बहार रीलेशन रख लीया..

रश्मी : (मुस्कुराते) वंदु छोड ये सब बाते.. इन बातोसे हमे दुख ही होता हे.. बस आज जीले अपनी जींदगी.. इस बारेमे हम बादमे चर्चा करेगे.. चल.. अभी देवु आताही होगा.. क्या मस्त लग रही हे.. बीलकुल दुल्हनकी तराह.. हें..हें..हें.. ओर सुन अब इनसे कोइ सरम मत करना.. जोभी बोलनाहो बीन्दास्त बोलना.. ओर वो जोभी करे उनको करने देना.. यही समजलो आज तुम दोनोकी सुहागरात हे..

वंदना : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. भाभी.. हीमत देनेके लीये थेन्क्स.. अब मे पीछेहट नही करुगी.. जोभी होगा देखा जायेगा.. कीतने दिनोके बाद उनसे बात करनेका मौका मीला हे..

रश्मी : (हग करते खुस होते) हंम.. ये हुइना बात..? चल मे जाती हु.. इधरही पासके रुममे हु.. अगर अ‍ैसा कुछ हुआतो मे आजाउगी.. तुम डरना मत.. इनमे कुछ नही होता.. हंम..? चल.. तेरी नइ जींदगीकी सुरुआतके लीये बेस्ट ओफ लक..

वंदना : (सर्मसार होते हसते धीरेसे) हंम.. थेन्क्स..

कहते रश्मी वंदनाको बेडपे बीठाकर बहार चली गइ.. तब वंदनाके दिलकी घडकन बढने लगी.. आज वो बहुतही रोमांचीत होने लगी.. रश्मीके साथ अ‍ैसी बातोसे उनको लगने लगाकी आज वो नइ नइ सादी करके इस घरमे आइ हे.. ओर अपनी भाभी सुहागरातके लीये तैयार करते कुछ टीप्स देकर गइ हो.. वंदना बहुतही सरमाने लगी.. ओर अपनी नजरे जुकाते बेडपे बैठीही थी तभी रुममे देवायत आगया..

तो वंदना गभराते जटसे बेडसे खडी होगइ.. ओर सरमके मारे अपनी नजरे जुकाते वही खडी रही.. तो देवायतने रुममे आतेही धीरेसे दरवाजा खाली बंध करलीया ओर पलट गया तो देखा वंदना बहुतही गभराइ हुइ थी.. तो देवायत वही खडा रहा.. ओर वंदनाकी ओर देखने लगा.. तब वंदनाने धीरेसे नजर उठाके देवायतकी ओर देखा.. तब देवायतने मुस्कुराते अपने दोनो हाथ फैला दीये.. ओर प्यार भरी नजरोसे वंदनाको देखते मुस्कुराता रहा..

तब वंदनाकी थोडी जीजक खतम होगइ.. ओर हिमंत करते देवायतकी ओर कदम बढाते जटसे आगइ.. ओर देवायतकी बाहोमे उनके सीनेमे सर छुपाके समा गइ.. तब देवायतने वंदनाको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. दोनोही थोडी देर अ‍ैसेही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे खडे रहे.. वंदनाकी आंखोसे खुसीके आंसु बहेने लगे.. तबतक वंदनाकी सारी जीजक खतम होगइ.. आखीर वो जीसे चाहतीथी.. आज उनकी बाहोमे खडीथी.. तभी..

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देवायत : (मुस्कुराते सरको सहेलाते) वंदु.. बहोत प्यार करती हे मुजे..? हंम..?

वंदना : (नजरे जुकाते आंख गीली करते हां मे गरदन हीलाते) हंम.. भाइ.. आइ लव यु..

देवायत : (मुस्कुराते सरको सहेलाते) आइ लव यु टु.. तो पगली.. पहेले क्यु नही बोली.. हंम..?

वंदना : (सरमाते आंसु बहाते) कैसे कहेती..? आपसे बात करनेमे बहुत सरम आ रहीथी.. ओर उपरसे आपकी इतनी सारी बीवीया.. तो हीमंत नही हुइ.. मुजे लगा आप मजे ठुकरा देगे..

देवायत : (सर चुमते) वंदु.. तुमतो मेरे बारेमे सबकुछ जानती हो.. फीरभी..? अ‍ेक तुमही तो हमारी राजदार थी.. जब मेने पुनोसे सादी करली थी.. तब मुजे क्यु नही कहा..? मे तुमसेभी सादी करलेता.. क्या तुजे पुनोने नही कहाथा..?

वंदना : (जोरोसे बाहोमे भीचते) सोरी.. मेरी हिंमत नही हुइ.. पुनोनेभी मुजसे बहुत कहाथा.. लेकीन मे हिंमत नही करपाइ..

देवायत : हंम.. सादी करेगी मुजसे..? हंम..? तेरी मम्मी बहुत खुस होजायेगी.. हें..हें..हें.. वोभी चाहती हेकी मे तुमसे सादी करलु.. लेकीन वंदु.. तुजे पतातो हेनां..? की मेरी जींदगीमे बहुत ओरते हे.. ओर आगेका पता नही.. बस.. मुजेतो मंजु ओर बाबा कहेते हे अ‍ैसा करता रहेता हु..

वंदना : (नजरे उठाते धीरेसे देखते) हंम.. मुजे आपके हर रीस्तोके बारेमे सब पता हे.. मुजे आपके कीसीभी रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. आपतो राजा हो.. मे आपसे सादी करनेके लीये तैयार हु..

देवायत : (सर चुमते) हंम.. अगर मुजसे सादी करके मेरे साथ हमारे घरपे रहेना चाहो तोभी मुजे अ‍ेतराज नही हे.. मेरी मंजु चंदा सब तुजे खुसी खुसी अ‍ेक्सेप्ट करलेगी..

वंदना : (नजर उठाके आंओमे आंसुके साथ देखते) भाइ.. बस.. यही प्यार मुजे चाहीये.. लेकीन.. सोरी.. मे वहा नही रहेना चाहती.. मे मम्मी पापाके साथ ही रहेना चाहती हु.. क्युकी उनका मेरे सीवा हे ही कौन..? भाइ आप बुरा मत मानना.. मे मेरी मम्मीको छोडना नही चाहती.. मे उसे बहुत चाहती हु..

देवायत : (मुस्कुराते आंसु पोछते) हंम.. चलो ठीक हे.. ओर ये भाइ भाइ क्या हे..? तेरे लीये सीर्फ मे देवु हु.. हम बहुतही जल्द मंदिरमे जाकर सादी करलेगे.. अब मे तुमसे ओर ज्यादा दुर नही रेह सकता.. बस सीर्फ अ‍ेक बार तुम्हारे मुहसे सुनना चाहता था.. मेरी पुनो सुनेगी तो बहुत खुस होजायेगी..

वंदना : (सरमाते) जी.. उनको सब पता हे.. सामकोही मेरी उनसे बात हुइ थी.. वो कल आ रही हे..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तो तुम पुरी प्लानींग करके आइ हो.. चल ठीक हे.. क्या तेरी मम्मीको पता हे तुम मुजसे मीलने वाली हो..?

वंदना : (सरमाते हसते) हमं.. उसने ओर रश्मी भाभीने ही हमारे मीलनका प्लान कीया हे..

देवायत : (चहेरा थामते) हंम.. तो मुजसे मीलन करोगी..? हंम..?

वंदना : (अ‍ेकदम सर्मसार होते मुस्कुराते) मुजे नही पता..

देवायत : (हसते) हंम.. तो अबतो मील लीयानां..? तो अब मे चलु..?

वंदना : (अ‍ेक बार नजर उठाते जुका लेती हे ओर सरमाते धीरेसे नां मे गरदन हीलाते) नही..

देवायत : (आंओमे देखते) वंदु.. तुम मुजे सच्चे दिलसे प्यार करती हो.. मेरे प्यारकी खातीर तुमने बहारभी सादी नही की.. तो मे तुमसे सादी करना चाहता हु.. लेकीन उनसे पहेले मेरी दुसरी ओरतोके साथ रीलेशनकी कुछ सचाइ बता देना चाहता हु.. क्युकी मे तुजे धोखेमे रखना नही चाहता..

वंदना : (सरमाते सीनेपे सर रखते) देवु.. कोइ जरुरत नही हे.. मुजे आपके बारेमे पुनोने सब बता दीया हे.. मे आपके हर रीलेशनके बारेमे जानती हु.. इससे मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

देवायत : (चहेरा हथेलीमे थामते आंखोमे देखते) नही वंदु.. कुछ रीस्ते अ‍ैसे भी हे तो तुम नही जानती.. मे नही चाहता जब तुजे इसके बारेमे पता चले तब तुजे दुख हो..

वंदना : (आंखोमे देखते) देवु.. मे आपके कहेनेका मतलब समज गइ.. मुजे अपके हर रीलेशनके बारेमे पता हे.. ओर मुजे पता हे आप मुजसे ये सब क्यु केह रहे हो.. मुजेतो खुसी हुइकी आप मुजसे कोइ बात छुपाना नही चाहते.. क्या आप मेरी मम्मीके बारेमे बात कर रहे हेनां..? मुजे सब पता हे.. सीर्फ मम्मीही नही भुमी बुआ.. नीर्मलाआंटी.. सरलाचाची.. सबके बारेमे मुजे पता हे.. मेरी पुनोसे सब बाते हो चुकी हे.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. बस मुजेतो सीर्फ आपका प्यार चाहीये..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तो तुजे सबके बारेमे पता हे.. तो क्या तुजे तेरी मम्मीका मेरे साथ रीलेशनके बारेमे सुनकर दुख नही हुआ..?

वंदना : (आंख गीली करते) नही देवु.., क्युकी मेने मम्मीको रात रातभर प्यारके लीये तडपते देखा हे.. पापा उनको खुस नही रख पाते.. ओर उपरसे दोनोके रीलेशनभी सीर्फ कहेनेको हे.. पापा मम्मीको ज्यादा पसंद नही करते.. वो हमारे सामतभाइकी बीवी जयाभाभीको ज्यादा पसंद करते हे.. कमसे कम मम्मी आपके साथ रीलेशनसे खुसतो हे.. बस मुजे उनके चहेरेपे खुसी चाहीये..

तब देवायत वंदनाका चहेरा हथेलीमे थामते थोडा अपने चहेरेकी ओर उचा करता हे.. तो वंदना सर्मसार होते उनकी आंखोमे देखते अपनी नजरे जुका लेती हे.. तब देवायत धीरेसे वंदनाके होठोपे अपने होंठ रख देता हे.. तब वंदनाकी आंखे बंध होजाती हे.. आज जींदगीमे कीसी मर्दके साथ उनका ये पहेला कीस था.. तो वो सरसे पांव तक कांपने लगती हे.. ओर मदहोस होने लगती हे..

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तभी अचानक देवायत उनके बुब्सपे हाथ रखते होंठ चुमते हुअ‍े धीरेसे मसलने लगता हे.. तो वंदना कांपते सीहर उठी.. ओर उसने जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमे भीच लीया.. वो अ‍ेकदम देवायतके तनके साथ पुरी चीपक गइ.. उनकी चुतकी नाजुक पंखुडीया हरकतमे आते फडफडाने लगी.. वंदना पुरी तराह अपना होंस खो चुकी थी.. ओर जल्दसे जल्द देवायतके साथ मीलन करना चाहती थी..

वंदन : (मदहोसीमे आंख बंध करते) ओह.. दे..वु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु.. मुजे अपना लीजीये.. बनालीजीये अपनी दासी.. मे जींदगीभर आपका साथ नीभाउगी..

देवायत : (जोरोसे बाहोमे भीचते) वंदु.. तुम मेरी दासी नही.. मेरी रानी बनकर रहोगी.. अब मे तुमसे दुर नही रेह सकता.. मे आज ही तुम्हारे साथ मीलन करना चाहता हु.. क्या तुम इसके लीये रेडी हो..? हंम..? अ‍ेक बार सोचले हम बीना सादी मीलन करने जा रहे हे.. क्युकी मेभी पुनोकी तराह तुमसे बीना सादी मीलन करना चाहता हु..

वंदना : (सीनेमे सर छुपाते सरमाते धीरेसे) हंम.. जानु.. मेने मनसे अपको पहेलेसेही अपना लीयाथा.. ओर आज तनसेभी आपको समर्पीत होजाउगी.. मे सोच समजकेही इधर आइ हु.. सीर्फ आपके लीये.. बस.. थोडासा डर लग रहा हे.. फीर भी मे रेडी हु.. अगर आज हमारा मीलन नही हुआ तो मे आगे हीमंत नही करपाउगी.. आज मुजे लडकीसे ओरत बननेका सुख देदो.. मेभी अ‍ेक बार बीना सादी मीलन करना चाहती हु.. मेरी पुनोकी तराह..

कहातो अचानक देवायतने वंदनाको अपनी गोदमे उठालीया.. तो वंदना देवायतके सीनेमे सर छुपाते सरमाने लगी.. ओर देवायत वंदनाको लेकर बेडकी ओर बढ गया.. तब उन दोनोको नही पताथाकी रश्मी दरवाजेके पास खडी रहेकर उन दोनोकी प्यार भरी बाते सुन रहीथी.. ओर सुनकर बहुतही खुस हो रही थी.. जब देवायत वंदनाको लेकर बेडकी ओर जाने लगा तब रश्मीने धीरेसे दरवाजा खोलकर अंदर जाकलीया..

तब देवायत वंदनाको गोदमे लेकर बेडकी ओर जा रहाथा तब रश्मीने हसते हुअ‍े धीरेसे वापस दरवाजा बंध करदीया.. ओर देवायतने बेडपे जातेही धीरेसे वंदनाको बेडके बीच लीटा दीया.. ओर खुदभी उनके बाजुमे लेटकर वंदनाकी ओर करवट लेते उनपे जुक जाता हे.. ओर वंदनाके होठोपे होठ रखते उनको चुमने लगता हे.. तब वंदनाभी हीमत करते देवायतके गलेमे हाथ डालकर उनके होठोको चुमने लगती हे.. तब..

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वंदना : (नसीली आंखोसे देखते धीरेसे सरमाते) जानु.. आज मे अपना ये तन आपको सोंप रही हु.. बस मुजे अ‍ेक लडकीसे ओरत बननेका सुख दे दीजीये.. बना दीजीये मुजे कलीसे फुल.. अब ये तनपे सीर्फ आपका अधीकार रहेगा.. मे अपने आपको आपके हवाले करती हु.. आज मुजपे कोइ रहेम मत करना..

कहेते वंदनाने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. उनके तनपे पुरी तराह वासना हावी हो चुकीथी.. देवायतका व्यक्तीत्व ओर आकर्सणही अ‍ैसाथाकी कोइ भी ओरत हो या लडकी.. उनके स्पर्स होते ही वासनाकी आगमे जलते अपने आपको देवायतके हवाले कर कर देती थी.. अ‍ेक दिन उनकी मम्मी चारुके साथभी यही हुआथा.. ओर आज वंदनाके साथभी यही हुआ.. उनको पताही नही चलाकी उनकी जीजक ओर सरम कहा चली गइ..

दोनोही अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमने लगे.. तब वंदनाने अपना मुह थोडासा खोल दीया.. ओर दोनोकी चीभ आपसमे मीलके नागकी तराह पेच लडाने लगी.. तभी देवायतने वंदनाके बुब्सपे हाथ रखदीया ओर उसे हल्केसे दबाकर मसलने लगा.. तब वंदनाकी कामवासना ओर भडक गइ.. उनकी सारी सरम मीट गइ.. ओर देवायतके गलेमे दोनो हाथ डालकर उनको अपने तनसे चीपकाकर जोरोसे होठोको चुमने लगी..

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वंदना मदहोसीमे सब भान भुल चुकीथी.. उनको पताही नही चलाकी देवायतने कब उनकी सलवारको उची करदी ओर कब उनके पायजामेका नाडा खीचलीया.. तभी देवायत अ‍ेक पैर उठाके वंदनाकी कमरपे डालके उनके उपर चड गया तब वंदनाने देवायतके होठोको चुमते उनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. वंदनाकी चुतसे लगातार तरल पानीका रीसाव होने लगा.. उनके उपर पुरी तराह वासना हावी हो चुकीथी..

वंदना : (लडखडाती आवाजमे) दे..वु.. प्ली..ज.. कुछ कीजीये.. मुजे कुछ हो.. रहा हे.. अब नही रहा जाता..

तभी देवुने वंदनाका टोप नीकाल दीया.. तो वंदनानेभी बैठकर सरमाते टोप नीकालनेमे मदद की.. तब वंदना सीर्फ ब्रा मे रेह गइ.. ओर वो सरमाते वापस लेट गइ.. तब देवुने उनका पायजामा खीचकर नीकाल दीया.. तो वंदना नीचेसे पुरी तराह नंगी थी.. वो अपना नीकर पहेलेही गीला होनेकी वजाहसे नीकाल चुकी थी.. तब वंदनाकी गोरी चीकनी गुलाबी चुत दीखाइ देने लगी.. तब वदंना बहुतही समरमाइ.. ओर देवायतने खुदके कपडेभी नीकाल दीये.. ओर सीर्फ नीकरमेही रेह गया..

देवायत वंदनाकी गोरी गुलाबी चुत देखतेही पागल होगया.. ओर उसने वंदनाकी चुतपे हाथ रख दीया तो वंदना सीहरते कांपने लगी.. ओर उसनेभी जटसे देवायतके हाथपे अपना हाथ रख दीया.. तब देवु वंदनाकी ओर कामुक नजरोसे देखते चुतको सहेलाने लगा.. तो वंदना सीसकारीया करते देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलेती हे.. तभी देवायत ब्राको खीचके उची करदेता हे.. तब वंदनाके गोरे गोरे संतरे जैसे बुब्स उछलके बहार आगये.. वंदना अ‍ेक कांचकी पुतलीकी तराह चमक रहीथी..

ओर देवायतने बुब्सको अपने मुहमे लेलीया ओर चुसने लगा.. तब वंदना मुहको इधर उधर करते छटपटाने लगी.. देवायत बारी बारी दोनो बुब्स चुमते अ‍ेक हाथसे चुतको सहेलाता रहा तब वंदना सातवे आसमानपे चली गइ.. ओर उसने देवायतके गलेमे दोनो हाथ डालके उनको अपने तनसे चीपका लीया.. वो चाहने लगीकी देवायत जल्दही अपना तगडा लंड उनकी चुतमे घुसादे.. ओर वो कमर उछालने लगी..

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वंदना : (कामुक आवाजमे छटपटाते) बस.. बस.. दे..वु.. आइ..लव..यु.. ओर नही.. कुछ हो.. रहा हे..सीइइइ..आह..सीइइइइ उइइइ मम्मीइइइइ.. आइइइइइ.. बस... बस.. बस.. दे..वु.. अब.. डालभी दो.. मत.. तडपाओ..

देवायत : (सामने देखते) वंदु.. क्या डालदु..? हंम..? बोलनां..? हंम..?

वंदना : (सर्मसार होते इधर उधर देखते) हंम.. नही पता.. जानु.. आइ लव यु.. लव यु सो मच.. कुछ कीजीयेनां..

देवायत : वंदु..? बोलना सीर्फ अ‍ेक बार.. मजा आ रहा हे..? हंम..? बोलना..? डालदु..?

वंदना : (सर्मसार होते धीरेसे नजरे चुराते) हंम.. बहुत मजा.. आ.. रहा हे.. बस.. बस.. अब रहेने दीजीये.. बरदास्त नही होता.. डालीयेनां.. जानु.. मुजे ओरत होनेका सुख देदो.. बनालो आपकी बीवी..

कहातो देवायत वंदनाके उपरसे उतर गया ओर अपना नीकर नीकालने लगा.. तब वंदना टेडी नजर करते नीकरकी ओर देखने लगी.. ओर देवायतने नीकरको नीकाल दीया.. तब देवायतका वीसाल तगडा लंड हवामे उपरकी तराह लहेराते जटके मार रहाथा.. तब वंदना उसे देखतेही बहुतही सरमा गइ.. उन्होने इतना बडा लंड कभी नही देखाथा.. ओर देखाभी थातो सीर्फ अपनी मम्मीका डील्डो देखाथा.. तब थोडा डरते धीरेसे..

वंदना : (सरमाते) देवु.. इतना बडा..? मुजे कुछ होगातो नही..? हंम..? रश्मीभाभीको बुलालु..?

देवायत : (वंदनाको बेडके कीनारे खीचते) अरे नही.. तुम डरो मत तुम्हे कुछ नही होगा.. हम प्यारसे करेगे.. मे हुनां..? चल आजा आज तुजे जनतकी सेर कराता हु..

कहेते देवायत वंदनाके पैरोके बीच बैठ गया.. ओर उनकी चुतमे मुह लगा दीया तो वंदना उछल पडी.. ओर देवायतका सर पकडके उनके बालोको खीचने लगी.. तबतक देवायत वंदनाकी चुतमे जीभ डालके उनकी चुतके दानेको खरोदने लगा.. तब वंदना पुरी तराह मदहोस होते नसेकी हालतमे चली गइ.. वो आंधी आंख चडाते देवायतके बालोको खीचते छटपटाने लगी.. ओर उसने जटसे अपनी ब्राको खीचके नीकालदी..

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वंदना : (मदहोसीमे) सीससइइइ.. देवु.. बस.. बस.. ओर नही.. आजाओ उपर.. प्ली..ज.. डालदो अपना लंड..अब रहा नही जाता.. उइइइ मां.. आह..आह..आह.. उइइ अंह..अंह..अंह.. न..ही.. मत करो.. दे..वु..

देवायतने वंदनाको पुरी तराह पागल करदीया था.. अब वंदनासे बरदास्त करना मुस्कील हो रहाथा.. वो देवायतके सरको छोडके धडामसे बेटपे लेट गइ.. ओर बीना पानी मछलीकी तराह तडपते छटपटाती रही.. तब उन दोनोको नही पताथा की बहार रश्मी पुरी नंगी होकर थोडा दरवाजा खोलके उन दोनोकी रासलीला देखते अपनी चुतको सहेला रहीथी.. उनको वंदनाकी सीसकारीयोकी आवाज बहार तक सुनाइ दे रहीथी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १४६

देवायतने वंदनाको पुरी तराह पागल करदीया था.. अब वंदनासे बरदास्त करना मुस्कील हो रहाथा.. वो देवायतके सरको छोडके धडामसे बेटपे लेट गइ.. ओर बीना पानी मछलीकी तराह तडपते छटपटाती रही.. तब उन दोनोको नही पताथा की बहार रश्मी पुरी नंगी होकर थोडा दरवाजा खोलके उन दोनोकी रासलीला देखते अपनी चुतको सहेला रही थी.. उनको वंदनाकी सीसकारीयोकी आवाज बहार तक सुनाइ दे रहीथी.... अब आगे

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तभी अचानक वंदना बीना सरम बेडपे बैठ गइ.. ओर देवायतके बाल खीचके अपने उपर खीचने लगी.. तो देवायतभी खडा होके वंदनापे जुक गया.. ओर वंदना बेडपे लेटते देवायतको बाहोसे खीचके अपने उपर चडा देती हे.. ओर अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते देवायतके लंडको अपने मुठीमे पकड लेती हे.. फीर वासनाभरी नजरोसे देखते लंड हीलाते अपनी चुतकी ओर लेगइ.. ओर चुतपे सहेलाते घीसने लगी.. तब देवायतका लंडभी नइ चुतमे घुसनेके लीये मचलने लगा.. जैसे कोइ साप अपने बीलमे घुसनेके लीये तैयार हो..

देवायत : (होंठ चुमते) वंदु.. क्या तुम रेडी हो..? हंम..? डालदु..?

वंदना : (सरमाते धीरेसे) हंम.. हां भाइ.. डालदो.. अब नही रहा जाता.. आपने मुजे बहुत तडपाया हे..

देवायत : (मुस्कुराते गाल चुमते) हंम.. क्या तुमभी मुजे भाइ कहोगी..? हंम..?

वंदना : (सरमाते हां मे गरदन हीलाते) हां भाइ.. मे पुनोको अपनी बहेन मानती हु.. जब उन्होने बहेन होकरभी आपसे सादी करली तो फीर मे क्यु नही..? मुजेभी अपनी बहेन मानकर सादी करलो.. आजसे आपकी ये बहेन आपके हवाले हे.. भाइ.. आज कोइ रहेम मत करना.. रश्मीभाभी सब सम्हाल लेगी..

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कहेते वंदनाने देवायतका लंड अपनी चुतपे घीसते लव होलमे थोडा फसाकर सेट करदीया.. ओर देवायतके गलेमे दोनो हाथ डालके उनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. फीर देवायतके होंठोको जोरोसे चुसने लगी.. लेकीन देवायतको मालुम था की वंदना पहेली बार चुदवा रही हे.. तो उनके लंडको जेलना वंदनाके लीये इतना आसान नही होगा.. तब देवायतने वंदनाके दोनो हाथ पंजोसे कसके पकडके फैलादीया..

देवायत : (कामुक नजरोसे देखते धीरेसे) वंदु.. आर यु रेडी..? हंम..? डालदु..?

वंदना : (सरमाते धीरेसे) हां भाइ.. मे रेडी हु.. डालदो.. पर धीरेसे..

तभी देवायतने वंदनाके होठोको चुमते लीपलोक करलीया.. तो वंदना समज गइ.. ओर आनेवाले पलके लीये देवायतकी आंखोमे देखते इन्तजार करती रही.. ओर अपनी नजरोसे देवायतको लंड डालनेकी अनुमती देदी.. वो आगे कुछ सोचे इनसे पहेलेही देवायतने अचानक अपनी कमर उची करके अ‍ेक जोरका जटका मारदीया.. ओर उनका तगडा लंड वंदनाकी चुतमे उनकी जीली चीरके अंदर घुस गया.. तब वंदनाकी जोरोसे चीख नीकल गइ.. ओर देवायतके मुहमे ही दब गइ.. वंदनाके दर्दके मारे आंसु बहेने लगे..

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फीरभी उनकी उ..उ.. आवाज बहार खडी रश्मी तक आगइ.. ओर उसने जटसे अंदर जाकके देखा तो वंदना बेडपे अपने दोनो पैर जोरोसे पटकते आंसु बहा रही थी.. ओर देवायतसे लीपलोक हटानेके लीये छटपटा रहीथी.. तब रश्मी नंगीही दरवाजा खोलके जटसे वंदनाके पास आगइ.. ओर उनके सरके पास बेठकर उनके सरको सहेलाने लगी..

रश्मी : (धीरेसे) बस.. बस.. वंदु होगया.. अब कुछ नही होगा.. बस थोडासा सहेन करले..

रश्मी इतना कहे उनसे पहेलेही देवायतने अ‍ेक ओर जटका मारदीया तो उनका पुरा लंड वंदनाकी चुतमे जडतक घुस गया.. ओर वंदना जोरोसे चीखते बेहोस होगइ.. तब रश्मी उनके सरको सहेलाते देवायतकी आंखोमे देखते मुस्कुराने लगी.. तभी देवायत हाथके बल उचा होकर बैठ गया ओर जोरोसे कमर हीलाते वो वंदनाको बेहोसीमेही चोदने लगा..

उनको पता था की वंदना होसमे उनको कभी चोदने नही देगी.. ओर देवायत अ‍ैसा कइ बार कर चुका था.. वो फटाफट अपनी कमर हीलाते वंदनाको चोदने लगा.. ताकी वंदनाकी चुत देवायतके लंडके हीसाबसे सेट हो जाये.. ओर दुसरी बार चुदवानेमे वंदनाको कोइ तकलीफ ना हो.. वंदनाके नाजुक बुब्स देवायतके हर धकेके साथ उछलते रहे.. तभी रश्मी देवायतके पास आकर बैठ गइ.. ओर देवायतके होठोको चुमने लगी..

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रश्मी : (धीरेसे कामुक आवाजमे) जानु.. इनको भी मेरी तराह होस आनेसे पहेले अपना काम करलो.. मे यही हु.. आखीर वंदुको आपने ओरत बनाही दीया.. कमीनी बहुत नखरे कर रहीथी..

कहेते रश्मी वहासे थोडी देरके लीये हट गइ.. तब देवायत हाथके बल वंदनापे जुक गया.. ओर वंदनाको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा.. वंदना अ‍ैसेही बेहोसीमे चुदवाती रही.. ओर उनके संतरे जैसे बुब्स उछलते रहे.. थोडी देर अ‍ैसेही देवायत वंदनाकी घमासान चुदाइ करता रहा.. अब देवायतका लंड बडेही आरामसे वंदनाकी चुतमे अंदर बहार हो रहीथा.. उनका पुरा लंड वंदनाकी चुतसे नीकले खुनसे भरा हुआथा..

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तभी वंदना दर्दके मारे सीसकारीया करते होसमे आने लगी.. तो रश्मी वंदनाके पास आकर उनके सरके पास बैठ गइ ओर वंदनाके सरके बालोको सहेलाने लगी.. तो देवायत वंदनाकी चुतमे जडतक अपना लंड धुसाके रुक गया.. ओर वंदनाके तनसे चीपकते उनके होठो ओर बुब्सको बारी बारी चुमने लगा.. वंदनाकी आंखसे अबभी आंसु बेह रहेथे.. उसने धीरेसे अपनी आंखे खोलदी.. ओर आंसु बहाते देवायतसे नजरे चुराने लगी..

रश्मी : (सरको सहेलाते) बस. वंदु होगया.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. जीतनी तकलीफ होनीथी होगइ.. अब कोइ दिकत नही.. तुम अब लडकीसे ओरत बन चुकी हो.. कुछही देरमे दर्द चला जायेगा फीर कोइ दर्द नही होगा.. अब सीर्फ मजेही करने हे.. आज मेरी ननंद अ‍ेक कलीसे फुल बन चुकी हे..

वंदना : (सरमाते दर्दसे मुह बीगाडते धीरेसे) भाभी.. बुहत दर्द हो रहा हे.. बहुत जलन हो रही हे.. मुजे नही करना..

देवायत : (होंठ चुमते) बस वंदु होगया.. तु उनपे ध्यान मत दे.. बस सीर्फ मुजे चुमती रहे..

वंदना : (सरमाते धीरेसे) देवु.. प्लीज.. नीकाल दीजीये.. मुजे नही करना.. बहुत दर्द हे..

रश्मी : (धीरेसे गाल चुमते) वंदु.. पागल होगइ हो क्या..? बस बेबी.. होगया.. जीतना दर्द होना था हो लीया.. अब कुछभी नही होगा.. अभी दर्द चला जायेगा.. आज तुम सही मायनोमे अ‍ेक कलीसे फुल बन चुकी हे.. कल तेरी मम्मी सुनेगीतो बहुत खुस होजायेगी.. बस हमे मौका मीलनेदे.. हम तेरी सादी देवुसे करवा देगे.. आज सही मायनोमे तु इनकी बीवी होचुकी हे.. बस अब सादीतो सीर्फ अ‍ेक औपचारीक रेह गइ..

वंदना : (सरमाते मुह बीगाडते) भाभी.. क्या मम्मीको सब पता हे..? आह..इइ सीइइसससइइइइ..

रश्मी : (खुस होते मुस्कुराते) हां वंदु.. उसे सब पता हे.. हम सब तेरे साथ हे.. बस अ‍ेक दिनतो ये सब होनाही था.. तो आज होगया.. अब तुजे अपनी सुहागरातमे ये दर्द वापस नही जेलना पडेगा.. तब सीर्फ मजेही मजे करने हे.. कल वो नीशा ओर पुनोदीदी सुनेगीतो बहुतही खुस होजोगी..

वंदना : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. वो सबतो ठीक हे.. लेकीन पापा.. उनको पता चलेगातो..?

रश्मी : (मुस्कुराते) वंदु तेरे पापाकी चीन्ता मत कर.. चारुभाभी उनसे बात करलेगी.. तुजे उनकी चीन्ता करनेकी जरुरत नही हे.. क्या पता कल सायद तुजेभी कोइ खुस खबर सुननेको मीले..

रश्मीने बडेही सीफततासे वंदनाको बातोमे उलजाके रखा.. तब कुछही देरमे वंदनाका दर्द खतम होने लगा.. तबतक देवायत उनके दोनो बुब्सको बारी बारी चुमते होठोकोभी चुम रहाथा.. तब कुछही देरमे वंदनाकी दर्दभरी सीसकारीया कामोतेजनाकी सीसकारीयोमे तबदील होगइ.. जब देवायत वंदनाके होठोको चुम रहाथा तब वंदनाभी उनके सरको सहेलाते अपना मुह खोल देती हे.. ओर देवायतके होठो चुमने लगी..

देवायत : (गालको चुमते) वंदु.. क्या दर्द खतम होगया..? हंम..?

वंदना : (जोरोसे बाहोमे भीचते) हंम.. जानु.. अब मे आपकी बीवी होगइ हु.. अबतो हमारी सादी सीर्फ औपचारीक रेह गइ हे.. मेरी तो आजही सुहागरात होगइ.. आप धीरे धीरे सुरु करो..

ओर देवायत धीरे धीरे कमर हीलाते वंदनाको चोदने लगा.. तबभी वंदनाको हल्कासा दर्द महेसुस हो रहाथा.. तभी रश्मीनेभी मोर्चा सम्हाल लीया ओर वोभी वंदनाके बुब्सको ओर देवायतके होठोको चुमती रही.. अब वंदनाने अपनी सभी सरमको त्याग दीया.. ओर देवायतके मुहमे अपनी जीभ डालकर उनकी जीभसे पेच लडाते अपनी कमर हीलाते देवायतका साथ देने लगी.. ओर दोनोके बीच चुदाइका दौर चल पडा..
 
आज गांवमे जबसे सामको रश्मीने फोन करके चारुसे वंदनाको अपने घर लेजानेकी बातकी तबसे चारुभी खुस होकर आगेकी प्लानींग करने लगी.. ओर अपने प्लानींगके तौरपे आगे बढनेके लीये तैयारीया करने लगी.. आज वंदना घरपे नही थी तो नहाके छोटे कामुक कपडे पहेनकर शींगार करके तैयार होगइ थी.. ताकी अपनी कल रातकी अधुरी बात अपने पती रमेशसे मनवा सके..

चारु अच्छी तराह जानतीथी की रमेशसे कैसे अपनी बात मनवानी हे.. रमेशके आनेसे पहेलेही वो खाना बनाकर तैयार होकर उनका इन्तजार करने लगी.. चारुको भी पताथाकी कल माफी मांगनेके बावजुद भी आज रमेश ओर जया दोनो मीलेथे.. ओर जया कीसी भी बहाने से रमेशसे मीलकर अपनी आगको सांत करलेती हे.. तब रमेश घरपे आयातो चारुको देखकर ही आधा पागल जैसा होगया.. ओर चारुको हग करके उनके होठ चुमने लगा..

रमेश : (खुस होते) अरे वाह डार्लींग.. आज क्या मस्त लग रही हे.. बीलकुल सेक्सी.. हें..हें..हें..

चारु : (उसे मुस्कुराते धका मारके दुर करते) जाओ जाओ.. जुठी तारीफ मत करो.. मेतो हमेसा अ‍ैसी ही हु.. मे थोडीना सेक्सी हु.. वोतो जयाभाभी हेनां..? आप उनकी तारीफ करना.. जाओ उनके पास वोही आपको सबकुछ देगी.. क्या आजभी दोनो मीलेथेनां..?

रमेश : (मुस्कुराते) अरे बाबा नही मीला.. ओर मेने कल माफीतो मांगली हे.. अब क्या मेरी जान लेगी.. हें..हें..हें.. नही चारु अब मुजे तेरे अलावा कीसीके साथ रीलेशन नही रखना.. जीतो चाहता हे आज हम फीरसे अपनी सुहागरात मनाले.. क्या वंदना घरपे नही हे..? तभी तो तुमने ये ड्रेस पहेना होगा.. हें..हें..हें..

चारु : (रमेशकी बाहोमे समाते) नही रमेश.. आज वो रश्मीभाभीकी तबीयत थोडी ठीक नही हे तो उनके घरपे गइ हे.. सायद दो तीन दीन उनके साथ ही रहेगी.. इसीलीये तो मे मेरे जानुके लीये तैयार हुइ हु..

रमेश : (गालको चुमते) हंम..? चलो ठीक हे.. तो क्या आज हम दोनो फीरसे अपनी सुहागरात मनाले..?

चारु : (सरमाते मुस्कुराते बाहोसे छुटते) नही.. आप पहेले फ्रेस होकर आइअ‍े.. पहेले खाना फीर मे सोचुगी.. की क्या करना हे.. हें..हें..हें.. तुम मेरी कोइ बात मानते तो हो नही..

रमेश : (हाथ पकडते नजदीक खीचते) डार्लींग अ‍ैसा जुल्म मत करो.. मेने तुम्हारी कोनसी बात नही मानी..? कीतने महीनोके बाद तो तुमने अ‍ैसे सेक्सी कपडे पहेने हे.. दिलतो करता हे अभीके अभी हम दोनो हमारे बेडरुममे चले जाये.. हें..हें..हें.. आज मेरी चारुको खुब प्यार करुगा..

चारु : (जुठा गुसा करते) कोइ जरुरत नही.. जाइअ‍े पहेले फ्रेस होकर आइअ‍े.. मुजे आपसे बातभी करनी हे.. तबतक मे हम दोनोका खाना नीकालती हु.. बादमे प्यार कर लेना.. हें..हें..हें..

कहेते चारुने रमेशको बाथरुमकी ओर धका मारदीया तो रमेशभी हसते हुअ‍े बाथरुममे चला गया.. तब चारु जटसे अपने बेडरुममे जाती हे.. ओर अपनी अलमारीसे उसने छुपाइ हुइ अ‍ेक वायग्राकी गोली लेकर आती हे.. फीर कीचनमे जाकर खाना नीकालते.. रमेशके खानेमे मीला देती हे.. आज वो रमेशसे अपनी बात मनवानेके लीये उसे तडपाना चाहती थी.. फीर उसेभी पता थाकी आज रमेश उनकी हालत बीगाड देगा.. वो अपनी बेटी वंदनाके लीये कुछ भी करने को तैयार थी..

रमेशके आतेही दोनो खानेके लीये बैठ जाते हे.. तब आज रमेश खुस होते चारुको खाना खीला देता हे.. जब दोनोने खालीया तो चारु घरका सब काम समेटने लगी.. तब गोलीनेभी अपना असर सुरु करदीया.. रमेशका लंड तनके खडा होगया.. ओर जटके मारते फटने लगा.. तो रमेशने फटाफट घरके सभी दरवाजा अच्छेसे बंध करदीया.. ओर चारुको जटसे बेडरुममे आनेको कहेते रुममे चला गया..

तो चारुभी सरमाके हसने लगी.. वो जानबुजके काममे देरी करने लगी.. वो रमेशको तडपाना चाहती थी.. ताकी अपनी बात उनसे मनवा सके.. इसी बीच रमेशने फीरसे दो बार आवाज लगाके चारुको बुलाया.. क्युकी उनका लंड तनके फटा जा रहाथा.. तो कुछ देरके बाद चारु घरकी सभी लाइटे बंध करके बेडरुममे चली गइ.. तो रमेश उनका लंड पेन्टमे हाथ डालकर सहेलाते इन्तजार कर रहाथा.. ओर चारु रुममे आतेही चेन्ज करने लगी.. तो रमेशने उसे चेन्ज नही करने दीया..

क्युकी चारु आज इन कपडोमे बहुतही सेक्सी लग रहीथी.. ओर चारु अ‍ैसेही सरमाते बेडके पास आगइ.. तो रमेश चारुको देखकर कबसे पागल हो रहाथा.. तो चारुके आतेही बेडसे उतरके उनको अपनी बाहोमे भर लेता हे.. ओर उनके चहेरेको पागलो की तराह चुमने लगता हे.. तो चारुभी जोरोसे हसते रमेशकी बाहोसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करती रही.. क्युकी रमेशने आज चारुको कसके अपनी बाहोमे भीचलीया था..

रमेश अपना लंड नीकालकर चारुकी ड्रेस उची करदेता हे.. ओर चारुकी चुतपे लंड रगडते उसे सोट मारते चोदनेकी अ‍ेक्टींग करने लगता हे.. उनको चारुको चोदलेनेकी बहुत जल्दी थी.. तो चारुभी कामुक होके रमेशके साथ जटके खाते चुदवानेकी अ‍ेक्टींग करने लगी.. उनको पताथाकी रमेशको चोदनेके लीये क्यु जल्दी कर रहा हे.. उन्होने खुद रमेशको छुपकर उसे कामोतेजक की गोली खीलाइ थी..

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चारु : (बाहोसे छुटनेकी कोसीस करते) रमशे छोडो मुजे.. मुजे नही करना प्यार.. अ‍ेकतो मेरी कोइ बात सुनते नही.. क्या आजभी उस् कमीनी जयाको मीलेथे की नही..?

रमेश : (बाहोमे गाल चुमते) अरे बाबा नही मीला उसे.. चारु चलना क्यु नखरे कर रहीहो..? तेरी सब बाततो मानता हु.. आजानां.. पता नही तुमने मुजे क्या खीला दीया हे.. देख ये फटा जा रहा हे.. चलना.. मुजे प्यार करना हे..

चारु : (हसते थोडी सांत होकर सामने देखते) ठीक हे.. लेकीन पहेले मुजसे बात करो.. फीर प्यार करने दुगी.. वरना सोजाओ.. हें..हें..हें..

रमेश : (होंठको चुमते) अरे ये क्या बात हुइ..? हम आरामसे बात करेगेनां..? चलना अभी अ‍ेक बार करनेदे.. जीतो चाहता हे आज तुजे पुरी रात प्यार करु.. देख तुजे देखकर ये केसे तनके खडा हे.. अ‍ेक बार मुहमे लेनां.. आज क्या मस्त लग रही हे तु..

चारु : (थोडा नखरे करते प्यारसे) नही.. जानु पहेले मेरी बात सुनो.. फीर प्यार करना.. वरना मुजे सोनेदो..

रमेश : (जोरोसे बाहोमे भीचते) अच्छा.. चल बोल क्या बात करनी हे.. मे सुनता हु..

चारु : जानु.. मे हमारी वंदुकी सादी देवुसे करना चाहती हु.. आप हां कहेदो.. मे सब सम्हाल लुगी.. फीर इसके बारेमे आपसे बात करुगी..

रमेश : (गाल चुमते) डार्लींग तुम समजती क्यु नही वो मेरा दोस्त हे.. मे वंदनाके बारेमे उनसे बात नही कर सकता..

चारु : (रमेशके गाल चुमते) जानु.. तुम सीर्फ हां कहेदो.. बाकी मे सब सम्हाल लुगी.. आपको उनसे बात करनेकी जरुरत नही हे.. आप सीर्फ परमीशन दे दो..

रमेश : (अ‍ेक नजरसे देखते) चारु.. तुम सब सम्हाल लोगी मतलब..? मे कुछ समजा नही..

चारु : (प्यारसे गाल सहेलाते) जानु बुरा मत मानना.. हमारी वंदना आजभी देवुको प्यार करती हे.. अगर वो दोनो खुद आगे बढे तो तुम कोइ अ‍ेतराज नही करोगे.. केह देती हु.. क्या कहेते हो..?

रमेश : (मुस्कुराते गाल चुमते) चारु.. अगर वो दोनो खुद आगे बढते हे तो मुजे क्या अ‍ेतराज हो सकता हे..? बस.. अ‍ेकही प्रोबलेम होगी.. देवु मुजसे बहुत सरमायेगा.. वो सरमके मारे मुजसे बात नही करपायेगा..

चारु : (मुस्कुराते होंठ चुमते) जानु.. चलो पहेले मुजे अ‍ेक बार प्यार करो.. फीर मे आपसे बात करती हु.. अ‍ैसे बात करनेमे मजा नही आता.. मे चेन्ज करलु..?

रेमश : (मुस्कुराते होंठ चुमते) चारु रहेने दोनां.. तुम आज कपडोमे मस्त लग रही हो.. मुजे इन्ही कपडोमे अ‍ेब बार चोदना हे.. फीर कपडे नीकाल देना.. आज तुम बहुतही सेक्सी लग रही हो.. हें..हें..हें..

चारु : (सरमाते हसते) बीलकुल पागल हो.. जानु लेकीन कपडे खराब होजायेगे.. अब मे अ‍ैसे ही कपडे पहेनुगी.. बस मे मेरे जानुको अच्छी लगनी चाहीये.. प्लीज.. नीकालने दोनां..

रमेश : (मुस्कुराते) हंम.. चल नीकालदे.. लेकीन सीर्फ नीकालना हे.. दुसरा मत पहेनना.. आज वंदु घरपे नही हे तो हम दोनो अ‍ैसेही नंगेही सोयेगे.. चल नीकालके आजा फटाफट देख ये तेरी चुतमे जानेके लीये फटा जा रहा हे.. हें..हें..हें..

चारु : (रमेशकी बाहोसे छुटतेही अ‍ेक चपत लगाते) छी.. कीतना गंदा बोलते हो.. आजकल जयाभाभीको चोदकर बहुत ठरकी होगये हो.. हें..हें..हें.. जानु छोडदो उसे..

रमेश : (बुब्स मसलते) चारु छोडतो दीया हे.. लेकीन वो फीरभी मेरे पीछे पडी हे.. जान.. इस बारेमे हब बादमे बात करे..?

चारु : (मुस्कुराते) हंम.. चलो ठीक हे.. आजतो तुम मुजे प्यार करलो.. लेकीन याद रखना.. अब मुजे पता चलाकी तुम दोनो अबभी मीलते हो.. तो.. तो.. तेरा ओर मेरा पती पत्नी वाला रीलेशन खतम..

रमेश : चारु ये क्या बात हुइ..? क्या कोइ पतीके साथ अ‍ैसे रीलेशन खतम करता हे..?

चारु : जानु छोडो सब अभीतो आजाओ आज मे आपको बहुत खुस करदुगी.. आप उन जयाको भी भुल जाओगे.. आजाओ..

कहेते चारुने अपने कपडे नीकाल दीये.. ओर नंगीही बेडपे आगइ.. तो रमेशने भी कपडे नीकाल दीये.. ओर बेडपे लेटतेही चारुका हाथ पकडके उसे खीचलीया ओर बेडपे लीटाकर उनके उपर चड गया.. तो चारुभी रमेशका उतावलापन देखके जोरोसे हसने लगी.. तब रमेश चारुके दोनो बुब्सको बारी बारी चुमने लगा तो चारुभी मदहोस होने लगी.. ओर उसने अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते रमेशका लंड पकडलीया ओर अपनी चुतपे घीसने लगी.. ताकी चुत गीली होजाये..

जब चुतसे पानीका रीसाव होने लगातो चारुने लंडको गीला करके अपनी चुतके लव होलमे लंडको फसा दीया.. तब अ‍ेकही जटकेमे रमेशने लंको चुतमे घुसा दीया तो चारुभाभीकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. क्युकी आज वायग्राकी वजहसे रमेशका लंड कुछ ज्यादाही सख्त हो गयाथा.. चारुको पताथा आज रमेश उनकी हालत बीगाड सकता हे.. लेकीन उनको कीसीभी कीमतपे आज रमेशसे अपनी बाते मनवानी थी..

चारु : (सीसकारीया करते) रमेश.. आज क्या खाकर आये हो..? आज बहुत सख्त ओर बडा लग रहा हे..

रमेश : (अपनी कमर हीलाते सोट मारते) चारु.. कुछभी तो नही खाया.. क्या मजा आ रहा हे..? हंम..?

चारु : (सरमाते नजरे चुराते) हंम.. बहुत.. बहुत मजा आ रहा हे.. बस अ‍ैसेही धीरे धीरे चोदना..

रमेश : (गलेको चुमते) चारु.. बस मुजे अ‍ैसेही तेरा प्यार चाहीये.. तो तु जोभी कहेगी मे करुगा..

चारु : (होंठ चुमते) हां जानु.. अभीतो तुम मुजे अ‍ेक बार अच्छीस तराहसे चोदलो.. हम बादमे बात करेगे..

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कहातो रमेश हाथके बल उचा होगया.. ओर चारुको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा.. तो चारुभी हल्कासा दर्दके मारे चीखने चीलाने लगी.. आन चारु बहुतही उतेजीत हो गइथी.. मानो अपने पती रमेशके साथ पहेली बार अपनी सुहागरात मना रही हो.. दोनोके बीच काफी देरतक घमासान चुदाइ होती रही.. तभी चारुके सरीरमे जनजनाहट होने लगी.. ओर उसने रमेशके गलेमे हाथ डालके खीचलीया.. ओर रमेश उनके गलेमे मुह डालते चारुको जोरोसे चोदने लगा..

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ओर चारु अपनी कमर उछालते जटके मारने लगी.. तब रमेशको अपने लंडपे चारुके पानीकी गरमाहट महेसुस होने लगी.. ओर वो चारुको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा.. तब चारु जोरोसे चीलाने लगी.. लेकीन रमेशने उनकी ओर ध्यान नही दीया.. वो काफी देरतक अ‍ैसेही चारुकी चुदाइ करता रहा.. ओर अचानक चारुकी चुतमे जड तक लंड घुसाते अपनी कमरको जटके मारने लगा..

तब चारुने रमेशको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. तो रमेशने चारुके होठोको लीपलोक करलीया.. तब दोनोही उतेजीत होकर अपनी चरमपे पहोंच गये.. ओर रमेश कांपते हुअ‍े अपनी कमरको जटके मारते जडने लगा.. तो चारुको गर्भमे भी गरमाहट महेसुस हुइ.. ओर वोभी कांपते हुअ‍े वापस जडने लगी.. तबतक रमेश जडतेही चारुके सीनेपे ढेर होगया.. ओर चारु उनके बालोको ओर पीठको सहेलाने लगी..

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