Incest चीरहरण (Completed) - Page 4 - SexBaba
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Incest चीरहरण (Completed)

अपडेट 30

समर का मन बार बार उसे गजसिंह की बातों पर यक़ीन करने रोक रहा था.. मगर कहीं ना कहीं समर गजसिंह की कही हुई बातों में छुपी सच्चाई की तलाश कर लेना चाहता था.. समर अपने मन में ये प्राथना कर रहा था कि गजसिंह की कहीं हर बात झूठ निकले औऱ उसके मन की जीत हो.. मगर गजसिंह ने जो जो बात समर को बताइ थी उनमे से कुछ ऐसी बात थी जो सिर्फ समर जानता था औऱ उसने अपनी माँ लता को बताइ थी..

समर गजसिंह का कटा हुआ सर लेकर जब अपने घर पहुंचा तब लता धान साफ कर रही थी औऱ बाहर द्वार पर किसी के आने की आहट पाकर लता उठ खड़ी हुई औऱ बाहर झाँक कर देखी तो उसे समर खून से लथपथ दिखाई दिया.. लता द्वार पर जाकर ही समर को देखने लगी..

लता - इतना लहू? कहा चोट लगी है? मैं जाकर वैद को बुला लाती है तू बैठ यहां..

समर - मैं ठीक हूँ माँ.. ये खून उन शत्रुओ का है जिन्होंने रास्ते में राजकुमारी पर हमला किया था..

लता - तेरे ऊपर हमला हुआ था?

समर थैले से गजसिंह का सर निकालते हुए - हाँ माँ.. मैंने कहा था ना.. तेरे दोषियों को सजा दूंगा.. देख उस चांडाल का सर..

लता गजसिंह का कटा हुआ सर देखकर कुछ भी नहीं बोल सकी औऱ सन्न खड़ी रह गई..

समर अपनी माँ के चेहरे पर गजसिंह का कटा सर देखने के बाद भी ख़ुशी औऱ उल्लास के स्थान पर एक फ़िक्र औऱ बेकसी देखकर हैरान था उसके मन की हार होने लगी थी औऱ वो अब औऱ भी चिंता में डूबे जा रहा था लता के हावभाव उसके मन के मेड़ को बहा ले जा रहे थे..

लता सन्न खड़ी हुई उस कटे सर को देखकर ऐसे चुप थी जैसे जमींदार का फरमाबरदार डांट खाकर हो जाता है.. अपनी माँ की ऐसी हालत देखकर समर का शक अब यकीन में बदलने लगा था मगर अब भी उसके मन में कहीं ना कहीं अपनी माँ के लिए इज़्ज़त औऱ सम्मान था जिसके करण वो अब भी पूरी तरह यक़ीन करने में असमर्थ था..

समर - ख़ुशी नहीं हुई माँ आपको?

लता सन्नाटे से बाहर आती हुई - समर तूने सच में गजसिंह को मार डाला..

समर - माँ आपका अपमान करने वाले को मैं कैसे छोड़ सकता हूँ? मेंने कहा था ना मैं इस जालिम को एक ना एक दिन जरूर ढूंढ़ के मौत के घाट उतार दूंगा.. मैंने उतार दिया..

लता आगे कुछ नहीं बोलती औऱ भीतर चली जाती है.. समर लता का ये व्यवहार समझ नहीं पाया था उसके मन में लता के मन के भाव जानने की इच्छा थी जो अब पूरी नहीं उसी थी.. समर ने गजसिंह का सर घर से थोड़ा दूर लेकर लकड़ियों के साथ जला दिया औऱ वापस घर आ गया..

रात होने पर लता ने खाना पकाया था मगर अब तक लता ने समर से कुछ बात ना की थी.. रात का खाना खाते हुए समर ने लता से कहा..

समर - माँ आप इतनी बेचैन क्यों है?

लता मुस्कुराते का नाटक करती हुई - नहीं तो बेटा.. मैं तो बहुत खुश हूँ तूने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेकर साबित कर दिया कि तू भी सच्चा मर्द है.. एक माँ को इससे ज्यादा औऱ क्या ख़ुशी होगी.. ले.. खा ना.. आज स्वाद नहीं बना भोजन?

समर लता की बातों के पीछे उसके भाव उसके बनावटी चेहरे से बखूबी पढ़ रहा था उसने खाना खाया औऱ उठकर सोने चला गया.. अब उसके मन में गजसिंह की बातें पूरी तरह उतर चुकी थी.. उसे लग्ने लेगा था कि गजसिंह जो कुछ कह रहा था सब सच औऱ सत्य है..

समर को गजसिंह की एक बात याद आने लगी.. गजसिंह ने कहा था उसके बाजू पर बना निशान लता की गांड पर भी है गौतम ने तय करलिया था की वो अपनी माँ के गांड के निशान को देखकर रहेगा..

आधी से ज्यादा का समय बीत चूका था समर चारपाई से उठकर भीतर सो रही अपनी माँ लता के पास जाने लगा.. अंदर दिए की रोशनी में उसे लता सोती दिखी.. देखने से लगता था कि लता सो गई है मगर वो सोइ नहीं थी.. समर लता के करीब जाकर चटाई पर लेट गया जिसका आभास लता को हो चूका था औऱ उसका मन उथल पुथल मचाने लगा था.

लता ये सोच कर शाम से ही डरही थी कहीं गजसिंह ने समर को सारी सच्चाई ना बता दी हो वही समर इस बात से डर रहा था कि गजसिह की बटाइ बातें सच ना हो..

समर बाती की रोशनी जमीन पर चटाई पर सो रही अपने माँ लता की गांड के पास लेजाकर अपनी माँ लता के घाघरे को धीरे धोरे ऊपर करने लगा.. लता समझ गई थी की समर निशान देखने की कोशिश कर रहा है..

समर ने धीरे धीरे जांघो तक घाघरा उठा लिया औऱ अब उसे गांड पर बना निशान हल्का सा दिखने लगा था कि लता ने समर का हाथ पकड़ते हुए उसे अपना घाघरा औऱ ऊपर उठाने से रोक दिया औऱ बोली..

लता - औऱ ऊपर मतकर समर.. रात बहुत हो गई है.. यही मेरे पास सो जा..

समर अपनी माँ लता के बदल में चटाई पर लेटते हुए - यानी जो कुछ गजसिंह कह रहा था सब सच है.. (समर की आँखों से आंसू बहने लगे थे)

लता समर के आंसू पोंछकर - मैंने अबतक जो भी किया कभी मज़बूरी में तो कभी हमारी भलाई के लिए किया है समर..

समर - आपने बाबूजी को..

लता समर का गाल सहलाती हुई - अगर मैं नहीं मारती तो वो मुझे मार देता बेटा..

समर - उस रात जो हुआ सब आपकी मर्ज़ी से हुआ?

लता - उन बातों को भूला दे समर.. उनसे किसी का भला नहीं होगा..

समर - वापसी का रास्ता भी आपने ही बताया था गजसिंह को?

लता समर को बाहों में लेकर सर सहलाती हुई - मैं मजबूर थी बेटा..

समर - माँ राजकुमारी को कुछ भी हो सकता था. वो डर गई थी..

लता - वो तो राजकुमारी है समर.. हम जेसो का क्या? इतने बड़े खतरे को टालने के बाद भी जागीरदार ने तुझे याद तक नहीं किया..

समर लता को देखकर - मैंने किसी को नहीं बताया कि मैंने गजसिंह औऱ कर्मा को मार दिया है.. इसलिए सब उन दोनों को ढूंढ़ रहे है..

लता - बता भी देगा तो कोनसा वीरेंद्र सिंह तेरे लिए महल के दरवाजे खोल देगा? समर मैंने दुनिया देखी है मुझे परख है सबकी.. तू मुझसे प्रेम करता है ये तुझे अब साबित करना होगा.. मेरी गलती के लिए तू मुझे माफ़ कर.. और मेरी बात सुन समर.. वीरेंद्र सिंह औऱ जागीर के प्रति तेरी निष्ठा तुझे तकलीफ ही देगी..

ये कहते हुए लता ने समर को अपने गले से लगा लिया औऱ उसके समर के सर को अपनी चाती में घुसाती हुई बातों में हाथ फेरकार सुलाने लगी.. समर थका हुआ बोझाल आँखों के साथ नींद के हवाले होने लगा था. कुछ देर बाद उसे लता की बाहों में नींद आ गई..

सुबह समर उठा तो लता ने उसके आगे रसोई परोस दी जिसे ठुकराते हुए समर ने लता से कहा..

समर - मैं अब आपके हाथ का खाना नहीं खा सकता.. मेरी निष्ठा औऱ कर्त्तग्यता जागीरदार के प्रति है.. मैं उनसे गद्दारी नहीं कर सकता है.. आपने जो किया गलत किया.. मैं आपके साथ अब औऱ नहीं रह सकता..

लता चिंता से सुबकती हुई - समर तू जागीरदार को अपनी माँ के बारे में सब बता देगा? बेटा तू जानता है गद्दार को कैसी सजा मिलती है.. मेरी बात सुन बेटा.. मैं तेरी माँ हूँ.. मेरे साथ ऐसा मत कर..

समर - मेरा हाथ छोड़ दो.. मैं अब औऱ यहां नहीं रुकने वाला.. रात को सच्चाई जानने के बाद एक पाल के लिए में गुम राह जरूर हुआ था मगर अब मुझे होश आ गया है..

लता भय चिंता औऱ क्रोध से भरते हुए बोली - समर अगर तूने घर से कदम बाहर रखा तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.. मैं आखिरी बार कहती हूँ रुक जा समर..

समर लता की बात नहीं सुनता औऱ घर से चला जाता वही लता सोचने लगती है की समर जागीरदार को उसके सच्चाई बता देगा औऱ जागीरदार गद्दारों को मिलने वाली दर्दनाक मौत की सजा लता को भी देगा.. मगर समर के मन में लता के प्रति प्रेम औऱ सम्मान पूरी तरह से नहीं निकला था.. उसने लता के बारे में जागीरदार को बताने के बारे में नहीं सोचा था औऱ ना ही वो अपनी माँ की जासूसी के बारे में बताना चाहता था.. वो जानता था की जागीरदार को अगर वो लता की सच्चाई बता देगा तो लता कितनी कड़ी सजा मिलेगी..

लता को समर पर क्रोध आ रहा था वही उसके चिंता भी थी की समर्थन अब जागीरदार को सब सच बता देगा औऱ भय इस बात का था कि जागीरदार उसे एक दर्दनाक भयानक मौत देगा.. लता ने अपने एक साथी लंगड़ू के पास चली गई जिसे समर अपने मामा के रूप में जानता था क्युकी लता ने बचपन से लंगड़ू को अपना भाई बनाकर समर से मिलवाया था...

क्रोध भय औऱ चिंता से भरी हुई लता ने लंगड़ू से कुछ बात की औऱ उसके 4-5 साथियो से साथ हो गई वही समर महल के जनाना कश के बाहर पहरेदारी ओर खड़ा हो गया..

*************

सुन रे कागा नगर बता

जहा जाकर ढूँढू मीत पुराना

कबतक औऱ किस-किस को सुनाये

मिलन की रतिया गीत पुराना

विराह की बाते कर मो से

उ याद दिलावे भीत पुराना

हाय रे बैरी ज़ी ना छोड़े

ज़ी से गावे संगीत पुराना

सुन रे कागा नगर बता

जहा जाकर ढूँढू मीत पुराना

बैरागी सांझ ढले महल के पीछे उद्यान में बैठे हुए गीत गुनगुना रहा था..

उसके आस पास औऱ कोई नहीं था.. रात्रि का काला प्रकाश उजाले को निगलने ही वाला था.. बैरागी बंद आँख से अपने अतीत की स्वर्णिम यादो की मिठास में खोया हुआ था उसे कब सुबह से दिन हुआ औऱ दिन से रात हुई पता ही नहीं चल सका था.. बैरागी बस गीत गाता हुआ एक नीम की ठंडी चाव में सुबह का बैठा रात तक बैठा ही रहा था..

प्रेम अगर रोग बन जाए तो रोग का उपचार आवश्यकत बन जाता है.. आपके मधुरम गीत.. सुनने वाले के कान में मिश्री सी मिठास घोल देते है मगर इसके पीछे की विराह को जानना उनके लिए चोसर के खेल से कम नहीं..

समर ने बैरागी के समीप बैठते हुए उससे कहा तो समर की बात का प्रतिउत्तर देते हुए बैरागी बोला..

प्रेम तो अपनेआप में उपचार है.. जिसके होने से फूल खिल उठता है औऱ बारिश बरसने लगती है.. पपीहे गाने लगते है औऱ पंछी गुनगुनाने.. प्रेम तो जीवन का आधार है.. प्रेम के बिना तो सब वासना है..

समर - प्रेम औऱ वासना में अंतर मनुष्य के लिए आसान नहीं रागी भईया..

बैरागी - प्रकृति के लिए तो है समर.. प्रेम करुणा है औऱ वासना क्रोध.. प्रेम कोमल है वासना क्रूर.. प्रेम कुछ देता है वासना कुछ मांगती है.. प्रेम किसी के साथ भी हो सकता है वासना हर किसी पे नहीं होती..

समर - प्रेम औऱ सम्बन्ध का अल्पज्ञान मेरी सोच की सीमाओ को सिमित रखता है रागी भईया.. आपकी बातें मेरे जैसे साधारण योद्धा के कहा समझा आ सकती है..

बैरागी - तो फिर आने का प्रयोजन बताओ समर.. बिना कारण ही तुम मुझे इस तरह मेरे एकान्त से नहीं निकालोगे.. अभी तो रात्रि भोजन में भी समय है..

समर - रानी माँ.. मेरे आने का करण रानी माँ है बरागी भईया.. उन्होंने आपको अविलम्ब उनके समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया है..

बैरागी खड़ा होता हुआ - तो चलिए.. चलकर उनके बुलावे का करण जान लेते है..

समर साथ चलते हुए आसमान देखकर - लगता है पहली बारिश कभी भी हो सकती है.. बदल मंडराने लगे है..

बैरागी - बदलो के आने से वर्षा नहीं होती समर.. ये तो बस एक ऊपरी दिखावा है जों कुछ पल उम्मीद दे चला जाता है..

समर - इतना निराश होना मृत्यु के सामान है रागी भईया.. जयसिंह ज़ी कहते है.. औऱ आप देखना आज पहली बारिश होकर ही रहेगी..

बैरागी - तुमसे किसने कहा मैं निराश हूँ? मैं तो हर पल अपने मीत की प्रीत में गीत गाते हुए आनंदित रहता हूँ.. आशातीत रहता हूँ.. उसके साथ भी उसका था उसके बाद भी उसका हूँ..

समर - कुछ बताओ ना उनके बारे में..

बैरागी - क्या बताऊ समर.. उसके बारे में कुछ भी तो शब्दो से बयाँ कर पाना कठिन है.. हाँ बस एक बात मुझे आश्चर्य की लगती है.. मृदुला का मुख तुम्हारे मुख से बिलकुल मेल खाता है.. उसके नयननक्श, रंग औऱ आँखे बिलकुल तुम्हारे जैसी थी.. जैसे तुम्हारी जुड़वाँ बहन हो..

समर - उस दिन परछाई में मैं अपना अक्स देखा था.. तब से मैं यही सोच रहा था की ये कैसे संभव है? मैं औऱ आपकी मृदुला एक सामान मुख वाले कैसे हो सकते है?

बैरागी - मुझे ये जानने में कोई रूचि नहीं समर.. हाँ तुम चाहो तो अपनी संतुस्टी के लिए जान लो.. मृदुला ने बताया था की उसे कोई औरत जंगल में छोड़ कर चली गई थी.. उसके बाद जंगल में एक साधना करने वाले आदमी ने उसे पाला.. जिसे मृदुला बाबा बोलती थी.. औऱ वो आदमी भी मृदुला को बेटी ही समझता था.. लो.. हम पहुंच गए..

बैरागी महल के जनाना हिस्से में रानी सुजाता के साथ चला जाता है औऱ समर बैरागी से बात करके महल के जनाना हिस्से के बाहर पहरेदारी पर खड़ा हो जाता है..

समर के सर में बैरागी की कही एक एक बात वापस घूमने लगी औऱ वो सोचने लगा कि क्या सच में ऐसा हो सकता है कि उसकी कोई जुड़वाँ बहन हो?

समर को रह रह कर उस पागल की याद आ रही थी जो ये बात बताता था की उस रात उसने शान्ति को बच्चा ले जाते देखा था.. समर ने ये तय कर लिया था की अब वो शान्ति से इस सच्चाई को उगलवा के रहेगा.. चाहे कुछ भी हो जाये वो सच्चाई जानकार रहेगा.. वो अधीरता से अपने पहरेदारी के समय की समाप्ति का इंतजार करने लगा..

बैरागी जब जनाना महल में पंहुचा तो उसे सुजाता रुक्मा के कश में ले गई जहा रुक्मा ज्वार में थी वैद्य भी वही बैठा था..

बैरागी के आते ही वैद्य ने कहा - मेरी उम्र तुमसे तीन गुना है बैरागी.. मगर मैं जानता हूँ मेरा ज्ञान तुमसे उतना ही अल्प है..

बैरागी - बात क्या है वैद्य ज़ी.. कुछ बताएंगे..

सुजाता - रुक्मा जब से गढ़ से वापस आई है रागी.. उसपर ज्वार चढ़ा हुआ है.. तीन दिनों से ना ठीक से खाया है ना पिया है.. बस नींद में राजकुमार कहकर चुप हो जाती है.. मुझे तो लगता है रास्ते में जो कुछ हुआ उसका भय रुक्मा के मन में बैठ गया है.. जागीरदार भी गजसिंह औऱ कर्मा की तलाश में जा चुके है उन्हें संदेसा भिजवाया है पर उनका कोई पता नहीं.. अब मुझे समझ नहीं आ रहा रागी मैं क्या करू?

वैद्य - ज्वार में जो औषधि दी जाती है मैं राजकुमारी को दे चूका हूँ पर ये ज्वार तो जाने का नाम ही नहीं लेता.. तुम ही कुछ उपाए बताओ बेटा..

बैरागी नींद में लेटी रुक्मा की जांच करके - ज्वार तो बहुत तेज़ है औऱ आपकी दी हुई औषधि भी सही है.. फिर राजकुमारी के स्वास्थ्य में सुधार क्यों नहीं हो रहा? ये आश्चर्य की बात है रानी माँ..

सुजाता - रागी अब तुम ही कोई उपाय करो..

बैरागी - मैं कुछ करता हूँ रानी माँ.. आप बाहर से समर को बुलवा दीजिये.. मुझे उससे कुछ मँगवाना है..

सुजाता ने एक पहरेदार से समर को अंदर भेजनें को कहा..

समर अंदर आकर सर झुकाते हुए - रानी माँ..

समर की आवाज रुक्मा के कानो में जाते ही उसकी आँख खुल गई औऱ उसकी नज़र समर पर पड़ते ही रुक्मा की आँखों में चमक आ गई..

बैरागी की नज़र भी रुक्मा पर पड़ गई औऱ रुक्मा जिस प्रेम लगाव औऱ तृष्णा की भावना से भरकर समर को देख रही थी उससे बैरागी को समझते देर न लगी कि रुक्मा का ज्वार किसी औषधि से नहीं बल्कि समर की उपस्थिति से ठीक होगा..

सुजाता बैरागी से - रागी.. बताओ क्या लिवाना है.. समर उपस्थित है..

बैरागी मुस्कुराते हुए - अब कुछ लिवाने की आवश्यकता नहीं है रानी माँ.. आप खाने का आदेश दीजिये.. राजकुमारी को भूख लगी है..

रुक्मा समर को देखे जा रही थी औऱ अब समर की नज़र भी रुक्मा से मिल चुकी थी मगर समर ने होनी आँख नीचे झुका ली..

सुजाता ये बात नहीं समझ सकी थी वो बोली - क्या कह रहे हो रागी? रुक्मा ने तीन दिनों से खुश नहीं खाया..

बैरागी मुस्कुराते हुए - रानी माँ.. अब आप खिलाइये.. राजकुमार सब खा लेगी.. औऱ वैद्य ज़ी के साथ समर को भी यही रहने दीजिये.. उसे राजकुमारी के कश की पहरेदारी पर लगा दीजिये.. वैद्य ज़ी को आसानी होगी..

सुजाता खाना मंगवाती है औऱ रुक्मा को खिलाने लगती है रुक्मा कश के बाहर तैनात समर को खिड़की के झरोखे से देखती हुई खाना खा लेती है..

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बैरागी बाहर आ जाता है औऱ बाहर होती बरखा देखकर मुस्कुराता आसमान औऱ फिर धरती की तरफ देखता है..

रुक्मा को खाना खिलाने के बाद सुजाता वहा से आ जाती है औऱ बैरागी को गलियारे के किनारे पर खड़ा देखकर उसके पास आ जाती है..

सुजाता - सावन की पहली बरखा.. कितनी मनोरम होती है.. मन में मोर नाचते हुए प्रतीत होते है.. कोयल की मधुर आवाज औऱ पपीहे की कुहू ह्रदय को कितना सुख देती है.. ऐसे में साजन या सजनी साथ ना ही तो सावन भी जेठ लगने लगता है..

बैरागी सुजाता को देखकर - रानी माँ.. सावन प्रेम के बंजर को हरा भरा रखने के लिए प्रकृति का वरदान है.. किसी के लिए ये वियोग का विलाप है तो किसी के लिए मिलन की मधुर बेला.. इसे देखना अपनी अपनी आँख की बात है.. जिसे जैसा लगता है वैसा कहता है.. मेरे लिए तो ये आज भी मृदुला की मनमोहक यादो से जुडा हुआ है..

सुजाता - इतना प्रेम? रागी.. मैं ये कहने की अधिकारी तो नहीं, मगर तुम मेरे पुत्र सामान हो तो कह देती हूँ.. प्रेम अविरल बहने की रीत है.. रुकने पर जैसे नदी का पानी सड़ जाता है वैसे ही प्रेम भी रुकने पर मानव के सम्पूर्ण जीवन को सड़ा कर नस्ट कर देता है.. जो हो गया उसे पीछे छोड़कर आगे बढ़ो.. मृदुला के प्रति तुम्हारा प्रेम, मृदुला के बाद तुम्हारे जीवन को नस्ट कर रहा है.. केवल 24 वर्ष की आयु मैं यूँ बैराग धारण करना सही नहीं है.. तुम अब भी फिर से प्रेम करने औऱ प्रेम पाने के योग्य हो.. अगर तुम कहो तो मैं तुम्हारे विवाह योग्य स्त्री ढूंढती हूँ.. किसी के जाने से जीवन नहीं समाप्त होता..

बैरागी मुस्कुराते हुए - मिलन औऱ विरह दोनों ही प्रेम के पूरक है रानी माँ.. मैंने जितना मेरे प्रियतम के साथ मिलन का सुख भोगा है उतनी ही उसके वियोग में विराह की पीड़ा भी भोगने का पात्र हूँ..

सुजाता बैरागी के करीब आकर - रागी.. मैं कामना करती हूँ तुम्हारी पीड़ा का जल्द ही समापन हो. औऱ कोई तुम्हे उसी तरह चाहे जैसे तुम मृदुला से प्रेम करते हो..

बैरागी मुस्कुराते हुए सुजाता को देखता है औऱ सुजाता भी मुस्कुराते हुए बैरागी को देखकर वहा से चली जाती है..

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जब समर के पहरदारी करने का समय समाप्त हुआ था वो सीधा शान्ति के पास चला गया.. शांति घर के अंदर थी औऱ उसका पति खेत में गया हुआ था.. आँगन में उसके 14 का बेटा औऱ 9 की बेटी खेल रहे था.. समर ने लड़के को अपने पास बैठा लिया औऱ लड़की को अंदर शान्ति को बुलवाने भेजा..

शान्ति जब बाहर आई तो उसने समर को देखकर कहा..

शान्ति - अरे समर तू कब आया? कुछ काम था?

समर अपनी कटार निकाल कर लड़के की हथेली पर चुभाते हुए - हाँ.. मौसी.. काम तो था.. औऱ बहुत जरुरी काम था..

शान्ति - समर क्या कर रहा है.. उसे लगेगा.. रक्त आ जाएगा..

समर - आएगा.. मगर तब जब आप झूठ बोलोगी..

शान्ति - मैं समझी नहीं समर तू क्या कह रहा है?

समर - वो बुढ़ा पागल.. जो कहता ये था कि उसने तुम्हे मेरे जन्म की रात मेरे घर से एक बच्चा ले जाते हुए देखा था.. कहा ले गई थी आप वो बच्चा?

शान्ति हड़बड़ाती हुई - कोनसा बच्चा समर? क्या कह रहा है.. देख उसे लग जाएगा..

समर लड़की की हथेली पर कटार चुबो कर रक्त निकाल देता है औऱ कटार अब लड़के के गले पर लगा देता है..

समर - एक औऱ झूठ औऱ ये यही चित... मैं वापस नहीं बताऊंगी मौसी.. कहा लेकर गई थी आप वो बच्चा?

शान्ति डर से चिल्लाते हुए - जंगल.. समर छोड़ उसे..

समर - मुझे पूरी बात जाननी है मौसी..

शान्ति डरते हुए जमीन पर बैठकर समर को सारी सच्चाई बता देती है.. औऱ समर सच्चाई जानने के बाद लड़के को छोड़कर शांति के घर से निकल जाता है औऱ जंगल की तरफ उसी दिशा में जाने लगता है जहा शान्ति ने उसे बताया है..

***********

समर के पीछे उसकी माँ लता औऱ उसके 4-5 साथी लंगड़ू के साथ समर का पीछा कर रहे थे..

जंगल में एक जगह समर जाकर खड़ा हुआ औऱ जमीन पर गिरे हुए जामुन को खाने की नियत से उठाने के लिए नीचे झुका की पीछे से लंगड़ू का चलाया तीर समर के झुकने से उसे ना लगकर पेड़ को लगा औऱ समर अपनी तलवार निकालकर पीछे मुड़ गया जहा उसने 6 लोगो को खड़ा देखा.. लता पेड़ के पीछे छुप गई थी..

उन लोगों ने आव देखा ना ताव.. औऱ समर को मारने के लिए उसपर कुच कर दी मगर सभी लोग एक एक करके समर की तलवार के वार से जीवन को छोड़ कर चले गए.. लंगड़ू घायल होकर जमीन पर था..

लंगड़ू - समर मुझे छोड़ दे समर.. मैं तेरा मामा हूँ ना.. देख मैं तुझे नहीं मारना चाहता था.. समर... मुझे तो तेरी माँ यहाँ लाई थी..

लता एक मरे हुए साथी की तलवार उठा कर पीछे से समर पर हमला कर देती है मगर समर उसके तलवार का वार नाकाम करके एक जोरदार थप्पड़ लता के गाल पर मार देता है जिससे लता के हाथ से तलवार छुटकरा गिर जाती है औऱ लेता भी जमीन पर गिर जाती है..

समर लंगड़ू को मार देता है औऱ लेता जब वापस समर पर हमला करती है तो समर वापस उसके गाल पर थप्पड़ जड़ देता है औऱ एक लात लता की गांड पर मारकर उसको जमीन पर गिरा देता है..

लेता गुस्से में देखते हुए - खड़ा खड़ा देख क्या रहा है मार दे मुझे भी.. जागीरदार की सजा से तड़पकर मरू उससे अच्छा है तेरे हाथो से मर जाऊ...

गौतम लता की ओढ़ानी खींचकर उससे अपनी तलवार साफ करता हुआ कहता है - वैश्या को मारा नहीं जाता.. उसके साथ बदन की आग बुझाई जाती है..

ये कहते हुए समर ने अपनी तलवार एक तरफ रख दी औऱ अपनी माँ के ऊपर आ जाता है औऱ उसकी चोली फाड़ देता है..

लता एक थप्पड़ मारकर - छोड़ मुझे..

समर लेता का घाघरा उठा कर उसकी झंगिया नीचे सरका देता है औऱ अपना फंफनता हुआ लंड अपनी माँ की चुत में घुसा देता है औऱ अपनी माँ को चोदने लगता है..


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लता लंड घुसते ही - समर.. अह्ह्ह्ह...

समर लगातार लता की चुत में झटके पर झटके मारके अपनी माँ लता उर्फ़ लीलावती को चोदने लगता है जिससे लता भी अब कामुक होने लगती है.. पहलेपहल विरोध औऱ बगावत करने वाली लता अब काम पीपासा से भर गई थी.. उसकी सारी चिंता, भय औऱ क्रोध अब काम की अग्नि में जलकर स्वाह हो गई थी...

कुछ देर पहले तक लता अपने बेटे समर के प्राण लेने पर उतारु थी मगर अब वो समर के नीचे पड़ी हुई समर की मर्दानगी से प्रभावित होकर समर को देख रही थी.. समर के सुन्दर मुखमंडल को देखते हुए लता चुदाई का सुख भोगने लगी थी अभी तक उसने अपनी औऱ से कोई शुरुआत नहीं की थी मगर अब उसने समर का विरोध करना भी छोड़ दिया था.

समर लगातार चोदते हुए अपनी माँ को गुस्से की नज़र से देख रहा था मगर अब लता की आँखों में समर के प्रति गुस्सा नहीं था बल्कि प्रेम उतर चूका था..

समर के मजबूत औऱ बड़े लंड की चोट खाकर लता गजसिंह के बूढ़े पतले औऱ अदमरे लंड को भूल चुकी थी..

समर के लंड की ठोकरे खाकर लता की चुत ने अपने बाँध का पानी छोड़ दिया औऱ वो झड़ गई जिससे अब समर का लंड औऱ आसानी से लता की चुत में अंदर बाहर होने लगा औऱ थप थप घप घप की आवाज का औऱ भी अधिक मधुरम संगीत आस पास सुनाई देने लगा..


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समर चोदते हुए लता का एक बोबा पकड़कर मसलते हुए पहली बार अपने होंठ लता के होंठों ओर रख देता है जिसे लता अपने होंठों से चूमने लगती है औऱ अपने दोनों हाथ समर के गले में डालकर उसके बाल सहलाते हुए समर के मुंह में अपनी जीभ डाल देती है औऱ समर एक दम से लता के इस व्यवहार से चौंक जाता है मगर लता की कामकला में पारंगत होने के करण समर लता को रोक नहीं पाता औऱ लता के मुख का स्वाद लेने लगता है..

समर को चोदते हुए काफी देर हो गई थी मगर उसका निकला नहीं था लता ने समर को धक्का देते हुए पलट दिया औऱ उसके ऊपर आकर जोर जोर से अपनी गांड हिलाने लगी जिससे समर सम्भोग के जाल में बुरी तरह फंस गया.. स्मार्ट अब लता को अपनी माँ या गद्दार के रूप में नहीं बल्कि एक चुदाई के सामान के रूप में देखने लगा था..


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उसे लगा था की वो लता को चोद कर सजा देगा मगर अब लता ही समर को चोद रही थी औऱ उसके साथ अपनी भी काम इच्छा संतुष्ट कर रही थी..

लता फिर से झड़ने की कगार पर थी औऱ समर भी लता के गांड हिलाने की कला से अब झड़ने के नज़दीक था..

दोनों एक साथ झड़ते हुए सम्भोग के शिखर तक पहुंच गए.. फिर लता समर के ऊपर ही गिर गई...


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लता के चुचक समर के सीने में चुभ रहे थे.. जो उसे एक मीठा औऱ दिलकश अहसास देने लगे थे.. समर का सारा गुस्सा लता की चुत ने शांत कर दिया था औऱ अब समर को केवल लता से नाराजगी थी..

वही लता का भी सारा डर चिंता औऱ भय समाप्त हो चूका था.. उसके मन में अब अपने बेटे समर के प्रति काम इच्छा का उदय हो चूका था..

कुछ देर यूँही पड़े रहे के बाद समर लता को अपने ऊपर हटाते हुए खड़ा हो गया औऱ अपने वस्त्र ठीक करने लगा.. लता ने भी कपडे पहन लिए औऱ समर के हाथो में उसकी तलवार देकर बोली - जान नहीं लेगा मेरी?


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समर लता का घाघरा उठाकर उससे अपना लंड साफ करता हुआ - मुझे अगर तुम्हारी जान लेनी होती तो मैं सुबह ही ले लेता लीलावती... या जागीरदार को सच्चाई बताकर तुझे क़ैद करवा लिया होता..

लता समर के हाथ से घाघरा लेकर खुद समर का लंड साफ करते हुए शर्म औऱ पछतावे भरे स्वर में - मुझे क्षमा कर दे समर.. मैं तेरी दोषी हूँ.. मैंने तेरी जान लेने की कोशिश की है..

समर जाते हुए - तुम मेरे लिए मर चुकी हो लीलावती.. अच्छा होगा कि तुम भी मुझे अब मरा हुआ मान लो.. तुम्हे जैसे जिसके साथ भी जीना है जाओ जिओ..

लता खड़ी खड़ी समर को जाते हुए देखती रहती है औऱ तब तक देखती जबतक समर आँखों से ओझल नहीं हो जाता.. फिर लता जंगल से निकलकर घर चली जाती है औऱ समर को मनाने का निर्णय करने लगी.. समर भी जंगल में इधर उधर घूमकर वापस आ जाता है उसे कहीं मृदुला के निशान नहीं मिले थे. समर घर जाने बजाये किसी औऱ के पास जाकर रात बिताता है औऱ सुबह फिर पहरेदारी पर तैनात हो जाता है..

समर पहरेदारी पर तैनात था.. रुकमा अपने कक्ष से रह रहकर समर को देख रही थी.. खिड़की से मिलती समर की झलक रुकमा के मन में प्रेम की छाप आपको और प्रगाढ़ कर रही थी.. रुक्मा अब तक समर से बात नहीं की थी वह समर से बात करना चाहती थी मगर वेद जी की उपस्थिति सुजाता के आने जाने और अन्य पहरेदारों के होने से उसकी हिम्मत समर से बात करने की नहीं हो रही थी.. रुकमा की बीमारी में सुधार आया था ये वैध जी की औषधि ने काम नहीं किया किंतु समर की उपस्थिति में रुकमा के स्वास्थ्य को सुधारने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई..

समर अपने प्रति रुकमा के मन में भरे प्रेम से पूरी तरह अनजान था.. समर को अब तक नहीं पता लगता था कि रुकमा उसे पर पूरी तरह से अपना दिल और जान हार बैठी है..

पहरेदारी के दौरान जब बैरागी और समर की बातचीत हुई तब समर ने बैरागी को बताया कि किस तरह शांति ने जन्म के दौरान उसकी जुड़वा बहन को जंगल में ले जाकर छोड़ दिया था.. बैरागी ये जानकार कर पूरी तरह समझ हो चुका था कि समर मृदुला का ही जुड़वाँ भाई है.. समर ने बैरागी से मृदुला के बारे में जानने की कोशिश की.. और बैरागी ने बड़े इत्मीनान और ठहराव के साथ समर को मृदुला के स्वभाव और गुणो के बारे में बताना शुरू कर दिया.. समय मृदुला की एक मनोरम छवि अपने हृदय में बना कर उसके बारे में सोचने लगा.. जिस तरह बैरागी में मृदुला का गुणगान किया था उससे समर को अपनी बहन से ना मिल पाने और उसे ना देख पाने का पछतावा और दुख हो रहा था.. उसे लग रहा था कि क्यों उसने उस बूढ़े आदमी कि बात पर पहले विश्वास नहीं किया और पहले अपनी बहन को नहीं खोजा..

बैरागी बैठा हुआ पौधों को देखा और परख रहा था.. विरेंद्र सिंह की बताई हुई जगह पर बैठकर बैरागी ने चार दिनों के भीतर कई रोग का इलाज ढूंढ लिया था जिसमें से एक स्त्री रोग भी था.. बैरागी किसी और रोग का उपचार ढूंढ रहा था कि वहां सुजाता आ गई और बैरागी को देखकर उससे बात करने लगी.. बैरागी और सुजाता की बात बैरागी के काम के साथ चलने लगी बैरागी पौधों की जांच और परख करता हुआ औषधि निर्माण कर रहा था और सुजाता उससे उस बारे में बातचीत करते हुए औषधीय और पौधों के बारे में जानकारी ले रही थी..

वीरेंद्र सिंह गजसिंह और कर्मा डाकू को ढूंढने के लिए निकल चुका था मगर उसे दोनों कहीं नहीं मिले.. और ना ही उसे इस बात की खबर मिली कि समर में उन दोनों को पहले ही मार गिराया है.. वीरेंद्र सिंह जंगल में यहां वहां भटकता हुआ जागीर की सीमा के बाहर भीतर आ जा रहा था और गजसिंह और कर्मा के सारे ठिकानों पर ढाबा बोल रहा था जहां उसे कोई नहीं मिल रहा था.. हर जगह बस उसे गजसिंह औऱ कर्मा के गांब होने की खबर मिल रही थी..

वीरेंद्र सिंह ने जिन सैनिको को पश्चिम में भेजा था वो लोग वही ठहर कर पहली बारिश का इंतजार कर रहे थे औऱ बटाइ गई चीज लाने को आतुर थे.. पश्चिम में अभी सावन की पहली बरखा नहीं गिरी थी..

लता समर के साथ सम्भोग के बाद पूरी तरफ बदल गई थी औऱ अब वो समर से माफ़ी मांगकर उसे अपने पचाताप का अहसास दिलाना चाहती थी.. इसके साथ ही लता चाहती थी की समर उसके जोबन की अभिलाषा को शांत कर उसके साथ नया रिश्ता कायम करें..


गौतम ने सपने में इतना सब देखा औऱ फिर उसकी नींद खुल गई.. उसने सपने के बारे में कुछ देर सोचा फिर उसे एक सामान्य सपना मानकर अपने ख्याल से निकाल दिया..
 
अपडेट 31

सुबह 10:00 बजे नींद के आगोश में सोए गौतम की नींद दिन के 2:00 खुली.. गौतम ने जो सपना देखा था उसके बारे में काफी देर तक वो सोचता रहा कि कैसे उसे ऐसे अपने आ रहे है.. लेकिन फिर अपना ध्यान सपने से हक़ीक़त में लाता हुआ बेड से खड़ा हो गया... गौतम ने होटल में देखा तो लगभग सब घर जा चुके थे.. होटल में सिर्फ कुछ मेहमान लोग ही बचे थे. गौतम ने सुमन को फोन किया तो सुमन ने उसे घर आने के लिए कहा.. गौतम का सारा सामान सुमन अपने साथ घर ले जा चुकी थी बस एक शराब की बोतल यही पड़ी थी अभी तक.. और नींद में होने के कारण सुमन ने गौतम को जगाना जरूर नहीं समझा क्योंकि सुमन जानती थी कि गौतम रात भर का जगा हुआ है. सुमन से बात करके गौतम ने फोन रख दिया और फिर अपना मुंह धो कर होटल से घर के लिए निकल गया उसने देखा की यहां आज भी किसी ना किसी की शादी तैयारी चल रही थी..

गौतम जब घर पहुंचा तो उसने देखा कि ऋतु के विदाई की तैयारी चल रही है और घर पर कुछ खास मेहमानों के अलावा घर के लोग ही थे. गौतम अपने कमरे में जाकर नहाने लगा. जब गौतम बाथरूम से नहा कर निकाला तो उसके सामने चाय का कप हाथ में लिए गायत्री खड़ी थी गायत्री ने चाय का कप टेबल पर रखा और फिर गौतम के गाल को सलाहकार उसपर एक प्यारा सा चुंबन करती हुई बोली..

गायत्री - गूगु चाय पी ले और जल्दी से तैयार होकर नीचे आ जा.. तेरी दीदी की विदाई होने वाली है..

गौतम ने गायत्री की कमर में हाथ डालकर उसे अपने बिल्कुल करीब खींचते हुए गले से लगा लिया और दीवार से चिपक कर उसके होठों के बिल्कुल करीब अपने होंठ लाकर गायत्री से बेहद कामुक अंदाज में बोला..

गौतम - विदाई तो होती रहेगी नानी थोड़ी सी चुदाई करें?

गायत्री गौतम के होठों से अपने होंठ सटाती हुई बोली - अभी नहीं बेटा.. पिछली बार का दर्द अब तक बाकी है जब ठीक हो जाएगा तब कर लेना..

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गौतम ने कुछ पल गायत्री के होठों का चुम्मा ही था कि उसे किसी के आने की आहट सुनाई दी और वह गायत्री से दूर हटकर टेबल पर रखे चाय के कप को उठाकर चुस्कियां लेते हुए चाय पीने लगा और दरवाजे के बाहर से अंदर आते हुए उसे संजय दिखा जिसने आते ही गायत्री से कहा..

संजय गायत्री से - माँ चलो ना ऋतू को विदा करना है..

गायत्री - चल संजय मैं तो ग़ुगु को चाय देने आ गई थी..

संजय - ग़ुगु तू जल्दी नीचे आजा बेटा..

गौतम - ज़ी मामा ज़ी.. नहाने लग गया था मैं बस तैयार होकर आता हूँ..

गायत्री संजय के साथ नीचे चली गई थी और गौतम अपने कपड़े पहनने लगा था.. गौतम तैयार होकर जैसे ही नीचे आया उसने देखा कि हॉल में बहुत सारे लोग एकत्रित हो रखे थे और बीच में ऋतु में बैठे हुए थी राहुल के साथ. दोनों से मेहमान हंसी स्टोरी कर रहे थे और अपनी अपनी बातें एक दूसरे को बता रहे थे जब विदाई की बारी आई तो ऋतु के आंसू निकलने लगे और वह रोती हुई संजय औऱ गायत्री से लिपट गई..

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ऋतू तो फूट के रोने लगी और एक-एक करके सबसे मिलने लगी उसने सबसे पहले अपने पिता संजय फिर गायत्री फिर कोमल सुमन चेतन आरती और फिर ग़ुगु के गले लगते हुए रोना जारी रखा.

गौतम के गले लगकर रितु बहुत जोर से फूट-फूट कर रोने लगी जिस पर गौतम ने धीमी आवाज में ऋतु के कान में कहा.. दीदी इतना ड्रामा मत करो.. मैं जानता हूं आपको घंटा रोना नहीं आ रहा..

गौतम की बात सुनकर रितु रोना कम कर देती है मगर रोना बंद नहीं करती.. ऋतू आम लड़कियों की तरह ऐसा जता रही थी जैसे वह घर से विदा नहीं होना चाहती और हमेशा यही रहना चाहती है मगर गौतम को ऋतू की ये नाटक और ड्रामेबाजी अच्छे से समझ आ रही थी. सबके बार-बार समझाने पर भी रितु रोने का नाटक करने के राहुल के साथ विदा होने से इनकार कर कर रही थी और जाने से मना कर रही थी..

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घर के दरवाजे पर गाड़ी तैयार थी मगर ऋतू उसमे बैठने को तैयार नहीं थी उसने अब तक घर के हाल से कदम आगे नहीं बढ़ाया था और सब उसे बारी बारी से समझा कर थक चुके थे की बेटी लड़की को ससुराल जाना पड़ता है लड़की पराया धन होती है. जब ऋतू किसी के समझाने से नहीं समझी और अपना रोने धोने का नाटक जारी रखते हुए हाल में ही बैठ गई तो गौतम में रितु को अपनी गोद में उठा लिया और हाल से उठकर बाहर लाते हुए गाड़ी में बैठा दिया..

गौतम इमोशनल ड्रामा करते हुए ऋतू के बगल में बैठे हुए राहुल से कहा - जीजा जी ख्याल रखना मेरी बहन का.. फूलों की तरह कोमल नाजुक प्यारी है.. बहुत संस्कारी सुशील औऱ पवित्र भी.. कभी दिल मत तोडना मेरी बहन का..

राहुल - आप फ़िक्र मत कीजिये.. मैं ऋतू को खुश रखूँगा..

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गौतम इतना कहकर गाड़ी से दूर हो गया और फिर बारी-बारी से घर के लोग ऋतू से मिलने लगे और उसे समझने लगे की ससुराल में उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं.. इतना सब हो ही रहा था कि गौतम घर के गेट पर खड़ा हो गया.. औऱ अपने फ़ोन में पिंकी का कॉल आते देखकर ऊपर छत पर चला गया और पिंकी का कॉल उठाकर बोला..

गौतम - हेलो बुआ?

पिंकी - केसा है मेरा ग़ुगु?

गौतम - आपके बिना केसा हो सकता हूँ बुआ? कल कितने फ़ोन किये आपको.. पर आप फ़ोन बंद करके बैठी थी.. उस दिन कहा था ना शादी में आना है.. आपके बिना बोरिंग थी सादी..

पिंकी - सॉरी ग़ुगु.. वो फ्लाइट इतनी डिल्य हो गई की आना हो ही नहीं पाया.. फ़ोन भी चार्ज नहीं किया था मैंने.. अभी अभी घर पहुंची हूँ..

गौतम - कहाँ गई थी आप?

पिंकी - तेरे फूफा ज़ी के साथ लन्दन गई थी ग़ुगु.. तेरे लिए बहुत से गिफ्ट लाई हूँ.. अभी यही है ना?

गौतम - हाँ.. दीदी की विदाई का नाटक चल रहा है..

पिंकी हसते हुए - अच्छा वो सब छोड़ जल्दी मेरे पास आजा..

गौतम - एड्रेस पहले वाला ही है ना?

पिंकी - नहीं बाबू अब वहा नहीं रहते.. मैं तुझे व्हाट्सप्प करती हूँ अड्रेस.. तू जल्दी से आजा अपनी बुआ के पास.. मुझे तेरे प्यारे से होंठ चूमने है..

गौतम - आता हूँ बुआ..

पिंकी - बाय बाबू..

गौतम - बाय बुआ..

ऋतू की विदाई हो चुकी थी औऱ गौतम अपने कमरे में जूते पहन रहा था तभी सुमन अंदर आते हुए बोली - खाना खा ले ग़ुगु..

गौतम - होटल में खा लिया था माँ.. अब रात को ही खाऊंगा..

सुमन - कहीं जा रहा है..

गौतम - हाँ.. उस दिन आपने बुला लिया तो शहर अच्छे से घूम नहीं पाया था.. कल तो वैसे भी वापस घर चले जाएंगे तो आज बाकी का शहर घूम लेता हूँ..

सुमन मुस्कुराते हुए गौतम के सर को चूमकर - वापस आने में ज्यादा देर मत करना..

गौतम - I'll be back soon माँ..

सुमन - हम्म्म.. क्या ग़ुगु?

गौतम सुमन के गाल पर चूमा देकर - मैंने कहा मैं जल्दी आ जाऊंगा..

सुमन मुस्कुराते हुए - हाँ तो ऐसे बोल ना.. अंग्रेजी में क्या गिटर पीटर करता मेरी तो कुछ समझ नहीं आता..

गौतम - आपने ही बड़े स्कूल में डलवाया था याद है?

सुमन - हा हा तो क्या अपनी अंग्रेजी अपनी अनपढ़ माँ पर झाड़ेगा?

गौतम सुमन का हाथ पकड़ते हुए - अनपढ़ कैसे हुई आप.. पढ़ना लिखना तो अच्छे से आता है आपको.. टीवी देखकर सारे इंग्लिश के वर्ड भी सिख गई हो.. औऱ घर का सब काम भी कितनी अच्छे से करती हो.. आप तो भारतीय संस्कारी नारी का परफेक्ट एक्साम्प्ल हो..

सुमन गौतम के होंठों को उंगलियों से पकड़कर - अब इतनी भी तारीफ़ मत कर अपनी माँ की..

गौतम सुमन ऊँगलीयों को चुमकर - काश मैं आपकी तारीफ़ कर सकता माँ.. आपकी तारीफ़ के लायक़ शब्द हो नहीं बने दुनिया में..

सुमन हसते हुए - हट बदमाश.. चल अब जा.. मुझे भी बहुत काम है अभी..

गौतम प्यार से बच्चों जैसा फेस बनाकर - किस्सी तो दे दो माँ..

सुमन मुस्कुराती हुई गौतम के सर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उसके होंठों से अपने होंठ मिलकर एक छोटा सा चुम्मा करती हुई गौतम से बोली - खुश? चल अब जाने दे..

सुमन चली जाती है औऱ गौतम भी घर से निकल जाता है..

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**********

अरे अरे कहा घुसे चले आ रहे हो भाई? क्या काम है, किससे मिलना है?

गॉर्ड ने बँगले के गेट पर गौतम को रोककर कहा..

गौतम - ज़ी मुझे पिंकी बुआ से मिलना है..

बँगले के गेट पर खड़े दो गार्डो में से एक ने कहा - यहां कोई पिंकी नहीं रहती जाओ यहां से..

गौतम फ़ोन में एड्रेस देखकर - पर ये अड्रेस तो यही का है..

एक गार्ड ने एड्रेस देखकर कहा - एड्रेस तो यही का है भईया पर यहां कोई पिंकी नहीं रहती.. गलत अड्रेस भेजा है किसी ने आपको.. आप जाइये यहां से मालकिन बहुत गर्म मिज़ाज़ की है.. उन्होंने किसी अजनबी को देख लिया तो हमारी नौकरी खतरे में पड़ जायेगी..

गौतम पिंकी को फ़ोन लगाता हुआ - हेलो.. बुआ?

पिंकी बँगले के गेट के पास अंदर बने गार्डन में एक चेयर पर बैठी हुई कोई फेशन मैगज़ीन पढ़ रही थी की गौतम का फोन आने पर फोन उठती हुई बोली - हाँ बाबू..

गौतम - बुआ ये अड्रेस तो गलत है शायद.. गेट पर खड़े गार्ड बोल रहे है यहां कोई पिंकी नहीं रहती है..

पिंकी गुस्से में मैगज़ीन सामने रखी टेबल पर फेंककर - तू रुक वही.. मैं आती हूँ..

गौतम को तुरंत ही रूपा का फ़ोन आ जाता है औऱ वो रूपा से बात करते हुए गेट से दूर चला जाता है..

पिंकी गुस्से से तिलमिलती हुई गार्डन से गुजरते हुए बंगले के गेट पर पहुंची..

पिंकी को देखकर दोनों गॉड सर झुकाकर एक साथ बोले - नमस्ते मेम साब..

पिंकी गुस्से में - तुम दोनों की हिम्मत कैसे हुई मेरे भतीजे को गेट पर रोकने की? इतनी भी तमीज नहीं है कि किसे रोकना है औऱ किसे नहीं? ये सब भी सीखना पड़ेगा तुम लोगों को..

एक गार्ड सर झुका कर - माफ़ करना मेमसाब.. हम नहीं जानते थे भईया ज़ी कौन है.. गलती हो गई हमसे..

पीछे से पिंकी के पति फ़कीरचंद आता हुआ..

फ़कीरचंद - क्या हुआ प्रमिला.. क्यों चिल्ला रही हो इन दोनों बेचारो पर..

पिंकी गुस्से में - चिल्लाऊ नहीं तो क्या करू.. पहली बार मेरा ग़ुगु मेरे पास आया है औऱ उसे अंदर आने से रोक दिया दोनों ने.. इनको अभी नौकरी से निकालती हूँ मैं..

दूसरा गार्ड सर झुका कर - मालिक.. हमें माफ़ कर दो.. हमें गलतफेहमी हो गई थी.. हमें पता नहीं था प्रमिला मेमसाहेब के घर का नाम पिंकी है..

फ़कीरचंद मुस्कुराते हुए - अरे छोडो ना प्रमिला.. गलतफहमी हो जाती है.. इंसान है.. औऱ ग़ुगु आया है? कहा है वो?

प्रमिला गेट के बाहर आकर देखती है तो गौतम थोड़ी दूर पर रूपा से फ़ोन पर बात कर रहा होता है..

पिंकी आवाज लगा कर - ग़ुगु..

गौतम पिंकी को देखकर रूपा से बाद में बात करने की बात बोलकर फ़ोन रख देता है औऱ वापस आ जाता है..

फ़कीरचंद मुस्कुराते हुए - कितना बड़ा हो गया है ग़ुगु? बिलकुल हीरो लगने लगा है..

पिंकी गौतम को जोर से गले लगाती हुई - लगने क्या लगा है.. है ही हीरो मेरा ग़ुगु..

गौतम - बुआ आराम से..

फ़कीर चंद हसते हुए - अब छोड़ भी दो अपने भतीजे को प्रमिला..

प्रमिला - सॉरी तुझे वेट करना पड़ा गेट पर..

गौतम - कोई बात नहीं बुआ.. ये तो बहुत छोटी सी बात है..

पिंकी - पैर वेर छूना नहीं सिखाया भाभी ने तुझे..

गौतम मुस्कुराते पिंकी के पैर छूकर - अच्छा लो..

पिंकी - अरे मेरे नहीं अपने फूफाज़ी के.. पागल बच्चा.. चल अंदर.. तेरे लिए तेरी मनपसंद चीज बनाई है..

फ़कीरचंद - अच्छा तभी आज अपने हाथों खाना बनाया जा रहा था..

पिंकी - तो ना बनाउ? पहली बार मेरा ग़ुगु मेरे पास आया है..

फ़कीरचंद - अच्छा तुम बुआ भतीजे बात करो मैं जरा बाहर हो आता हूँ..

पिंकी - अब आप कहा जा रहे हो?

फ़कीरचंद - फैक्ट्री हो आता हूँ.. मुकेश को कुछ कागजो पर दस्तखत चाहिए थे..

पिंकी - तो उसे ही यहां बुलवा लिया होता.. आपको मैनेजर के पास जाने की क्या जरुरत?

फ़कीरचंद - वो तो आ रहा था मैंने ही मना कर दिया.. सोचा थोड़ा टहल भी आऊंगा.. बहुत समय हो गया फैक्ट्री गए हुए.. आते हुए कारखाने की तरफ भी हो आऊंगा..

पिंकी - दवाइया साथ लेकर जाना.. औऱ ड्राइवर से कहना गाडी धीरे चलाये..

फ़कीरचंद - ठीक है..

गौतम पानी पीते हुए - दवाइया कैसी?

पिंकी - मधुमय है तेरे फूफाजी को.. तू चल बैठ टेबल पर.. मैं अपने हाथ से खाना खिलाऊंगी मेरे बाबू को आज..

गौतम - खाना तो खा चूका हूँ बुआ..

पिंकी - ठीक पर खीर तो खानी पड़ेगी.. पसंद है ना तुझे? (पिंकी आवाज लगाकर) कम्मो.. ख़िर लेकर आना जरा.. एक औरत ख़िर की प्याली लेकर आती है जिसे पिंकी लेकर गौतम के बगल में डाइनिंग टेबल पर बैठकर उसे खिलाने लगती है..

गौतम ख़िर खा कर - बस बुआ.. औऱ नहीं..

पिंकी - अच्छा.. ये बता भईया भी आये है शादी में?

गौतम मुंह साफ करता हुआ - नहीं बुआ.. उनको कहा फुर्सत.. मैं भी नहीं आने वाला था मगर माँ ने कसम खिला दी औऱ ले आई..

पिंकी गौतम को ऊपर अपने कमरे में लेजाती हुई - अच्छा किया भाभी.. वरना तू मुझसे मिलने कैसे आता?

गौतम - वैसे बुआ उस दिन फूफाजी को देखकर लगा नहीं था इतने अमीर होंगे वो..

पिंकी कमरे का दरवाजा लगाकर मुस्कुराते हुए - सही हाथ मारा है ना तेरी बुआ ने?

गौतम - ऐसे क्यों बोल रही हो बुआ.. आप कितना ख़याल रखती हो फूफाजी का.. उनको आपका शुक्रगुजार रहना चाहिए..

पिंकी अपनी साडी उतारते हुए - शुक्रगुजार तो है ही.. इसलिए मेरे नाम पर ये बांग्ला ख़रीदा है उन्होंने औऱ कुछ दिनों में दोनों फैक्ट्री औऱ कारखने भी मेरे नाम करने वाले है..

गौतम मुस्कुराते हुए - वो तो करना ही था.. आगे पीछे है भी कौन फूफाजी के आपके अलावा.. सही खेल गई बुआ आप तो..

पिंकी हसती हुई अपनी साडी कमरे में रखे सोफे पर पटककर बेड पर गौतम के पास आती हुई - मान गया ना अपनी बुआ को? है ना मेरा शातिर दिमाग.. पहली मुलाक़ात में ऐसा फसाया की अब तक फसा रखा है..

गौतम - वो तो है.. अच्छा लन्दन केसा है? सिर्फ तस्वीरों में देखा है मैंने.. जैसा फिल्मो में दीखता है वैसा ही है?

पिंकी गौतम के ऊपर आती हुई - काश में तुझे वहा ले जा पाती.. भाभी को फ़ोन किया था पर तेरी माँ तो जैसे मेरे पिछले जन्म की बैरी है.. मेरे कहते ही बोलने लगी.. ग़ुगु वहा जा कर क्या करेगा? तू अकेले ही चली जा.. ग़ुगु के इम्तिहान भी आने वाले है.. फलाना ढिमकाना.. औऱ एक हफ्ते से तुझे यहां शादी में लाकर बैठी है.. अब भाभी को तेरे इम्तिहान की परवाह नहीं है.. चालक चुड़ैल कहीं की..

गौतम - बुआ माँ को चुड़ैल मत बोलो..

पिंकी - क्यों तुझे बहुत तकलीफ होती है.. वो जब मेरे बारे में इतना कुछ कहती है तब तुझे तकलीफ नहीं होती?

गौतम - जब माँ आपके बारे में कुछ गलत बोलती है तो मैं उनको भी मना करता हूँ चाहो तो पूछ लो.. मुझसे तो आप औऱ माँ दोनों एक जैसा प्यार करती हो.. मैं आप दोनों के लिए कुछ गलत नहीं सुन सकता..

पिंकी - अच्छा छोड़.. मुझे अब मेरी किस्सी चाहिए..

गौतम पिंकी को चूमते हुए - ठीक है बुआ..

पिंकी चूमते हुए - बहुत सॉफ्ट लिप्स है तेरे बाबू..

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गौतम - आपके भी तो कितने प्यारे लिप्स है बुआ मन करता है खा जाऊ..

पिंकी जीभ से चाटते हुए - खा जा ना बाबू.. बुआ मना थोड़ी करेंगी अपने ग़ुगु को..

गौतम चूमता हुआ - बहुत miss किया बुआ आपको..

पिंकी गौतम की टीशर्ट उतारकर - ये सब क्या है ग़ुगु.. तेरे गले पर सीने पर इतने निशान किसने किये?

गौतम मुस्कुराते हुए - ये शादी में मिले है बुआ.. एक लड़की ने बहुत तंग किया मुझे..

पिंकी मुस्कुराते हुए - क्या नाम था उसका?

गौतम - सिमरन..

नाम लेटे ही सिमरन का फ़ोन गौतम के फ़ोन पर आ गया जिसे देखकर गौतम हसता हुआ बोला - देखो ना बुआ.. शैतान का नाम लिया शैतान हाज़िर..

पिंकी मुस्कुराते हुए - उठा ना.. बात कर क्या कहती है..

गौतम फ़ोन उठाकर - हेलो..

सिमरन - क्या कर रहे हो?

गौतम - तुम्हे याद कर रहा था..

सिमरन - झूठ.. बड़े आये तुम मुझे याद करने वाले.. कल तो कितना भाव खा रहे थे..

गौतम - आखिर में प्यार भी तो किया था भूल गई?

सिमरन - कैसे भूल सकती हूँ रसगुल्ले.. अब तक चुत में आतंक मचा हुआ है.. सुबह तुझे याद करके बहुत गालिया दी मैंने..

गौतम हसते हुए - खतरों से खेलने का शोक तो तुम्हे ही था.. वापस कब मिलोगी?

सिमरन - मिलना चाहो तो आज रात को मिल सकती हूँ.. पर याद रखना सुरंग में नहीं घुसने दूंगी..

गौतम - तेरा बाप मान जाएगा? तूने तो कहा था बहुत स्ट्रिक्ट है वो..

सिमरन - वो सब मुझपर छोड़ दो.. सिटी मॉल में मिलना आठ बजे.. मूवी देखेंगे साथ.. लेट मत करना रसगुल्ले वरना घर से उठवा लुंगी..

गौतम हसते हुए - उठवाने की जरुरत नहीं पड़ेगी मैं पहुंच जाऊँगा.. फ़ोन कट हो जाता है..

पिंकी गौतम को छेड़ती हुई - रसगुल्ले.. हम्म्म..

गौतम मुस्कुराते हुए - बुआ आप भी ना..

पिंकी - अच्छा फोटो तो दिखा सिमरन की.. आवाज तो बहुत प्यारी है.

गौतम फोटो दिखाकर - लो.. कैसी है..

पिंकी - है तो मस्त.. चुचे औऱ चुत्तड़ भी अच्छे है फेस भी बड़ा प्यारा है.. पहली बार कैसे चोदा तूने इसको?

गौतम अपनी गांड मराई याद करते हुए - मैंने कहा चोदा बुआ.. यही मुझे चोद गई..

पिंकी हसते हुए - उसका क्या कसूर? तू है ही इतना चिकना..

गौतम - आप भी ना बुआ.. अब जल्दी से अपना ये घाघरा उठाओ बहुत मन कर रहा है आपकी गुफा में घुसने का..

पिंकी पेटीकोट कमर तक ऊपर करके - घाघरा नहीं पेटीकोट बोलते है इसे बाबू..

गौतम जीन्स खोलकर - पेंटी तो उतारो..

पिंकी गौतम के लंड को पकड़कर मसलते हुए - उतारने की क्या जरुरत है बाबू.. साइड हटा के घुसा दे.. (पिंकी पेंटी को एक हाथ से साइड करके दूसरे हाथ से गौतम का लंड अपनी चुत में घुसाती हुई)

गौतम पूरा लंड चुत में पेलकर - आह्ह.. बुआ अब मिली है असली जन्नत...

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पिंकी सिसकती हुए - आह्ह... बाबू.. बहुत याद किया इसे मैंने..

गौतम अपने दोनों हाथ से पिंकी के ब्लाउज को पकड़कर एक झटके में पूरा फाड़ देता है औऱ उसकी ब्रा ऊपर करके पिंकी के बूब्स चूसते हुए पिंकी को धीरे धीरे चोदने लगता है..

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पिंकी - ग़ुगु चूसके खाली कर अपनी बुआ के बोबो को बेटा.. आहहह...चोद बुआ को अच्छे से.. रांड समझके चोद मुझे बाबू.. मार झटके मेरी चुत में..

गौतम चोदने की स्पीड बढ़ाते हुए - लो बुआ सम्भालो.. अपने ग़ुगु के लंड को..

पिंकी - आह्ह.. ग़ुगु.. आह्ह... चोद मुझे.. आह्ह.. बहुत मज़ा आ रहा है बाबू.. आह्ह..

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गौतम मिशनरी में चोदने के बाद पिंकी को घोड़ी बनाता हुआ चोदने लगता है - कितनी मोटी गांड है बुआ आपकी.. फूफाजी ने तो नहीं की चोदकर इतनी बड़ी.. कौन है बुआ आपका आशिक आवारा?

पिंकी आह करती हुई - बाबू तूने ही पेला था पिछली बार.. तब से किसीके साथ नहीं किया..

गौतम बाल पकड़ कर पीछे से झटके मारता हुआ - चल मेरी बुआ टूक टुक टुक.. चल मेरी बुआ टुक टुक टुक..

पिंकी - अहह.. अहह... अहह..

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गौतम बाल छोड़कर पिंकी के दोनों हाथ पकड़ कर पीछे से चोदने लगता है - बुआ गांड कब दोगी मुझे?

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पिंकी - बड़ा है तेरा ग़ुगु.. चुत में दर्द कर देता है गांड का पता नहीं क्या हाल करेगा..

गौतम पिंकी को उठाकर अपनी गोद में लेलेता है औऱ चोदने लगता है - तो क्या मैं आपकी गांड से वंचित रह जाऊँगा बुआ?

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पिंकी चुदवाते हुए आहे भरकर - इस बार चुत से काम चला ले मेरे बाबू.. अगली बार पक्का गांड दे दूंगी.. पिंकी झड़ चुकी थी औऱ अब झड़ने के साथ अब मूतने भी लगी थी जिसमे उसे शर्म आ रही थी मगर गौतम ने लंड निकालकर अपना मुंह पिंकी चुत पर लगा दिया औऱ उसकी चुत से निकलते मूत को पिने लगा.. पिंकी ये देखकर हैरान औऱ रोमांचित हो उठी थी औऱ बार बार गौतम को अपना मूत पिने से रोकने की कोशिश कर रही थी मगर गौतम ने पिंकी की आखिरी मूत की बून्द तक अपने मुंह में लेकर पी ली..

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मूत पिने के बाद गौतम पिंकी की चुत चाटने लगा औऱ पिंकी गौतम के बाल पकड़ कर फिर से काम के दारिया में गोते खाने लगी. पिंकी ने अपनी चुत चटवाने का आनंद भोगते हुए गौतम का सर बहुत जोर से अपनी चुत पर दबा दिया जिससे गौतम की सांस घुटने लगी मगर गौतम ने जैसे तैसे अपने आप को पिंकी के हाथ से छुड़वा कर पिंकी दोनों टाँगे हाथों से उठा कर उसकी चुत चाटने लगा..

गौतम चुत चाटने के बाद पिंकी को उठाकर दिवार के सहारे खड़ा करते हुए उसी तरह छिपकली बनाकर चोदने लगा जैसे उसने सुबह शबनम को चोदा था..

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पिंकी चुदवाते हुए कामुक सिसकियाँ लेकर - थोड़ा धीरे ग़ुगु.. तेरी बुआ को दर्द हो रहा है.. अहह...

गौतम थोड़ी देर छिपकली पोज़ में चोदने के बाद पिंकी को पलट कर अपनी तरफ घुमा लेता है औऱ दिवार से सटाकर पिंकी की दोनों टाँगे उठाकर उसे चोदने लगता है.

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पिंकी गौतम के गले में दोनों हाथ डालकर उसे चूमते हुए सिस्कारिया भरके चुदवाती रहती है. वो वापस झड़ने वाली थी औऱ अब गौतम का भी निकलने वाला था..

गौतम - बुआ होने वाला है..

पिंकी - मेरा भी वापस होने वाला है बाबू.. मुझे बेड पर लेटा दे..

गौतम पिंकी को अपने ऊपर में लेटा कर पेलने लगता है औऱ कुछ देर बाद पिंकी के साथ ही झड़ते हुए पिंकी की चुत में अपना वीर्य भर देता है..

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पिंकी औऱ गौतम एक दूसरे की शकल देखते हुए मुस्कुराने लगते है पिंकी अपने फटे हुए ब्लाउज से गौतम के चेहरे पर आ रहा पसीना पोछती है..

पिंकी थोड़ी देर उसी तरह लेटी रहकर गौतम से बात करके बोलती है - अब इस शैतान को तो मेरी गुफा से बाहर निकाल लो..

गौतम - रहने दो ना बुआ थोड़ी देर गुफा के अंदर.. बेचारा बहुत दिनों बाद अपनी बुआ से मिला है..

पिंकी पलटकर- अच्छा ठीक है..

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गौतम पिंकी के ऊपर ही उसकी चुत में लंड घुसा के हल्का हल्का झटका मारते हुए लेटा रहता है औऱ पिंकी गौतम के होंठों को चूमते हुए उसके बालों में उंगलियां फिराती हुई गौतम के नीचे लेटी रहती है.. कुछ देर चूमने के बाद गौतम की आँख लग जाती है औऱ पिंकी भी अपने ऊपर लेटे हुए गौतम को सोने देती है करीब एक घंटे बाद जब गौतम की आँख खुलती है तो वो देखता है की पिंकी अभी भी उसके नीचे लेटी हुई है औऱ उसका लंड अभी भी पिंकी की चुत में घुसा हुआ है.

गौतम की नींद टूटने पर पिंकी - उठ गया मेरा बाबू?

गौतम - टाइम क्या हुआ है बुआ?

पिंकी - सात बजे है..

गौतम चुत से लंड निकाल कर खड़ा होता हुआ - जाना है बुआ..

पिंकी मुस्कुराते हुए खड़ी होकर - सिमरन के पास?

गौतम कपडे पहनते हुए - हाँ..

पिंकी पास में पड़े अपने पर्स से एक कार्ड निकाल कर गौतम की जीन्स में रखती हुई बोली - 2002..

गौतम एटीएम कार्ड देखकर वापस देता हुआ - बुआ मुझे नहीं चाहिए.. आप इसे अपने पास रखो..

पिंकी गौतम के होंठ चूमकर एटीएम वापस उसकी जेब में डालती हुई - मैंने पूछा नहीं है तुझसे लेना है या नहीं.. चुपचाप रख ले.. कुछ भी चाहिए हो खरीद लेना.. शर्माना मत.. मैंरे पास औऱ भी दो है..

गौतम पिंकी का बोबा पकड़कर उसके होंठ चूमते हुए - आई लव यू बुआ..

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पिंकी - लव यू टू मेरा बच्चा...

गौतम - अच्छा बुआ अब चलता हूँ.. जल्दी मिलूंगा आपसे..

पिंकी ब्रा औऱ पेंटी के बाद nighty पहनते हुए - ग़ुगु रुक..

गौतम - हाँ बुआ..

पिंकी एक बेग निकालकर - इसे लेजा..

गौतम - इसमें क्या है..

पिंकी - कुछ कपडे है घड़ी परफ्यूम औऱ शूज भी तेरे लिए..

गौतम - बुआ इतना सब लाने की क्या जरुरत है हर बार..

पिंकी - क्यों जरुरत नहीं है.. तेरे सिवा मेरा है ही कौन जिसके लिए मैं कुछ खरीदू.. आगे जाके इन सब चीज़ो का वारिस तुझे ही तो बनना है.. ये तुझे ही तो संभालना है..

गौतम मुस्कुराते हुए पिंकी को बाहों में भरके - मुझे पैसो में कोई दिलचस्पी नहीं है बुआ, चुत में है... कम पैसो से भी मेरा काम चल जाता है.. पैरों में जूते जॉर्डन के हो या कैंपस के मुझे फर्क नहीं पड़ता..

पिंकी गौतम का चेहरा अपने हाथों में लेकर - पर मुझे फर्क पड़ता है ग़ुगु.. अपनी पसंद की चीज के लिए जैसे मैं तरसी हूँ वैसे मैं तुझे तरसते नहीं देखना चाहती.. मेरे पास जो कुछ है सब तेरा है.. तू मेरा सबकुछ है ग़ुगु.. तेरे लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ.. किसी की जान भी ले सकती हूँ..

गौतम - माँ सच कहती है बुआ.. आप ना सनकी हो..

पिंकी चूमते हुए - ऐसा सोचती है मेरे बारे में तेरी माँ..

गौतम - बुआ आप अब यूँही मुझे पकड़े रहोगी तो मैं जा नहीं पाऊंगा..

पिंकी गौतम अपनी बाहों से आजाद करती हुई - चल जा.. मज़े कर अपनी उस गर्लफ्रेंड के साथ.. मगर कंडोम लगा कर.. नहीं तो इतनी सी उम्र में बाप बन जाएगा..

गौतम पिंकी के सर औऱ गाल को चूमते हुए - बाय मेरी प्यारी बुआ..

पिंकी गौतम के होंठों को डांत से खींचकर चूमती हुई -

बाय बच्चा..

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गौतम पिंकी के पास से सिटी मॉल की तरफ चल देता औऱ कार पार्किंग में लगा कर मॉल के बाहर बनी एक चाय की टपरी पर बैठते हुए सिमरन को फ़ोन करता है..

गौतम - कहा रह गई यार..

सिमरन - आ रही हूँ बाबा.. जरा भी सब्र नहीं है तुम्हे तो.. अभी तो सिर्फ पौने आठ बजे है.. मूवी शुरू होने में डेढ़ घंटा है..

गौतम - मतलब अभी घर पर ही हो तुम.. ठीक है आ जाओ अपनी मर्ज़ी से.. मैं इंतजार कर लूंगा..

सिमरन - अच्छा सुनो भईया भी साथ आ रहे है उनकी भी टिकट बुक कर देना..

गौतम - वो कबाब में हड्डी बनने क्यों आ रहा है?

सिमरन - बाबा.. मम्मी ने अकेले जाने से मना किया इसलिए भईया को लाना पड़ेगा.. तुम उनकी फ़िक्र मत करो.. भईया थोड़ा दूर बैठ जाएंगे..

गौतम - ठीक है सिम्मी..

सिम्मी - क्या पहन के आउ रसगुल्ले?


गौतम - कुछ भी पहन के आजा मेरी रसमलाई.. होना तो नंगा ही है तुझे.. चल बाय.. मैं वेट कर रहा हूँ..
 
अपडेट 32

गौतम सिटी मॉल के बाहर इधर-उधर घूम रहा था उसने सिटी मॉल के पास ही सडक पर एक चाय की टपरी के पीछे एक औरत को उदास बैठे हुए देखा तो गौतम के मन में उसके पास जाकर उसे औरत से बात करने की और उसकी उदासी का कारण जानने की इच्छा हुई..

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औरत की हालत ऐसी थी कि जैसे मानो अब वह रोने ही वाली हो.. औरत की उदास आंखों को देखकर गौतम से रहा ना गया और वह चाय की टपरी के पीछे पड़े हुए खाली डिब्बो में से एक डिब्बे पर बैठी हुई औरत के करीब आकर उसके पास वाले डिब्बे पर बैठकर उसे औरत को देखा हुआ बोला..

गौतम - क्या हुआ आंटी?

औरत उदास आँखों से गौतम को देखकर - हम्म्म...

औरत इतनी उदास और अपने आप में खोई हुई अपने ख्यालों में उलझी हुई इतनी हताश और निराशा थी कि उसे गौतम के अपने पास आकर बैठने का अंदाजा ही नहीं हुआ और ना ही उसे पता चला कि गौतम ने अभी-अभी उससे क्या कहा है. गौतम के सवाल पर वह सिर्फ हम्म्म करके ही रह गई..

औरत अपनी उदास आंखों से एक नजर को गौतम को देखकर फिर से नीचे जमीन की ओर देखने लगी.. तभी गौतम ने वापस अपने सवाल को अलग अंदाज़ में दोहराते हुए कहा..

गौतम - आंटी आप ठीक तो है..

इस बार गौतम का सवाल औरत के कान तक ठीक-ठाक पहुंच गया और औरत गौतम की तरफ देखती हुई उसी निराशा और हताशा के साथ बोली..

औरत - हम्म्म..

गौतम औरत की मनोदशा समझ रहा था और वह जानता था कि उस औरत को कुछ ना कुछ समस्या जरूर है.. मगर वह औरत उस समस्या को किसी से बयां नहीं करना चाहती गौतम ने वापस औरत की तरफ देखते हुए कहा..

गौतम - आंटी आप सच में ठीक है? मैं बहुत देर से आपको यूं ही गुमसुम उदास और अकेले बैठे हुए देख रहा हूं.. आपको कोई प्रॉब्लम है तो आप मुझसे शेयर कर सकते हो..

गौतम के मासूम चेहरे और अपनेपन से भरी हुइ इन बातों को देख सुनकर औरत ने मुस्कुराते हुए अपनी आंखों की नमी पोछते हुए अपने हाथ से गौतम के गाल को सहलाया और जवाब दिया..

औरत - मैं ठीक हूँ बेटा..

गौतम - आप सच में ठीक हो?

औरत इस बार हल्का सा मुस्कुराते हुए - हम्म्म.. मैं सच में ठीक हूँ..

गौतम और उस औरत के अलावा चाय की टपरी के पीछे पड़े हुए दिन खाली डब्बे पर कोई और बैठा हुआ नहीं था जो उन दोनों को देखा और सुन सके. गौतम ने वापस इस अपनेपन से औरत से सवाल किया..

गौतम - आप किसी का इंतज़ार कर रही हो.. कोई आने वाला है?

औरतों में गौतम के सवाल पर भावुक होकर अपनी आंखों से एक बार फिर नामी पहुंचते हुए कहा..

औरत - आने वाला था बेटा.. पर अब नहीं आएगा..

गौतम मुस्कुराते हुए - लगता है आपकी हस्बैंड से लड़ाई हुई है..

औरत गौतम को देखकर - मैं शादीशुदा नहीं हूँ बेटा..

गौतम - अच्छा तो बॉयफ्रेंड था आपका?

औरत उदासी से - हम्म्म..

गौतम - तभी मैं सोचु.. आप इस तरह क्यों उदास है.. लड़ाई हुई है ना?

औरत ना में सर हिला देती है औऱ कहती है - अब उसे मेरे साथ नहीं रहना.. कोई औऱ मिल गई होगी इसलिए मुझे छोड़ दिया..

यह कहते हुए औरत की आंखों में आंसू आ जाते हैं जिसे गौतम अपने रुमाल से पोछता हुआ औरत से कहता है..

गौतम - आंटी आप फिक्र मत करो.. जो बुरा करता है उसके साथ बुरा ही होता है.. देखना कर्मा उसे ऐसा रुलाएगा कि वह याद रखेगा..

औरत इस बार गौतम को देखकर मुस्कुराती हुई बोली - बहुत प्यारी बातें करते हो तुम.. नाम क्या है तुम्हारा?

गौतम - मेरा नाम गौतम है आंटी.. आपका..

औरत गौतम के गाल पर हाथ फेरते हुए बोली - पूनम..

गौतम - बहुत प्यारा नाम है आंटी आपका..

पूनम मुस्कुराते हुए - thanks बेटा..

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गौतम - आप मुझे उस आदमी का नम्बर दे सकती हो.. मैं सबक सीखा दूंगा उसे.. इतनी खूबसूरत औरत के साथ इतना गलत वो कैसे कर सकता है?

पूनम की उदासी गौतम की बातों से कम हो रही थी और वह बार-बार गौतम के चेहरे को देखकर अपने हाथ से गौतम के गाल को सहलाती हुई गौतम के मासूमियत भरे सवाल का जवाब दे रही थी..

पूनम - गलती मेरी थी बेटा.. खुद 45 साल की होकर एक 35 साल के आदमी से प्यार करने लगी थी. सोचा था एकदिन शादी करके साथ रहेंगे मगर मुझे क्या पता था उस आदमी का मकसद कुछ और था.. 2 साल प्यार के झूठे वादे करने के बाद जब उसका मन मुझसे भर गया तो वह मुझे छोड़ कर चला गया..

इस बार पूनम की बात सुनकर गौतम ने उसे कोई सवाल नहीं किया और चुपचाप इस तरह बैठा रहा.. पूनम की आंख एक बार फिर से नम हो गई थी जिसे गौतम ने एक बार फिर अपने रुमाल से साफ कर दिया और अपना एक हाथ पूनम के कंधे पर रख कर कन्धा सहलाता हुआ बोला..

गौतम - आंटी पता है सबसे ज्यादा दुख दर्द इंसान को कोनसी चीज देती है..

पूनम यह देखकर हैरान थी की कैसे उससे आधी उम्र का लड़का बिना उसकी इज़ाज़त उसके कंधे पर इतनी आसानी से हाथ रखकर उससे कोई सवाल पूछ रहा है.. गौतम की बातों में आत्मविश्वास था और उसकी बॉडी लैंग्वेज उसके बात में विश्वास को झलका रही थी.. पूनम थोड़ी देर चुप रहकर गौतम की तरफ देखकर बोली..

पूनम - कोनसी?

गौतम पूनम की आँखों में देखता हुआ - उम्मीद.. जो हम किसी से लगा बैठते है.. हम भूल जाते हैं कि इंसान की फितरत में छलकपट भरा हुआ है.. आपने उस इंसान से शादी की उम्मीद लगाईं.. भरोसा किया यही आपके दुखो का करण है.. मेरी सलाह मानो तो फिर कभी किसी पर भरोसा मत करना.. ना ही कोई उम्मीद किसी से लगाना..

पूनम गौतम को देखती हुई - अकेली औरत का बड़े शहर में रहना आसान नहीं है बेटा.. हम जब अकेले घर से निकलते हैं और रात को जब अकेले घर आते हैं तो रास्ते में कहीं निगाहें हमें इस तरह से देखती है जिस तरह हम किसी अलग दुनिया में रहते हैं.. सैकड़ो लोग 1000 उल्टी सीधी बातें करते हैं.. सही गलत लांछन लगते हैं.. अकेली औरत का कम कमाई में इतने बड़े शहर में अकेले जीना बहुत मुश्किल है.. उसे किसी न किसी का सहारा चाहिए ही होता है..

गौतम - कॉफ़ी पीती हो आंटी?

गौतम के इस सवाल पर पूनम हैरानी से - हम्म्म.. क्यों..

गौतम पूनम का हाथ पकड़कर - चलो मेरे साथ..

गौतम ने पूनम की इजाजत लिये बिना ही उसका हाथ पकड़ते हुए उसे खड़ा कर लिया था और अपने साथ सड़क क्रॉस करके दूसरी तरफ बने एक कॉफ़ी कैफ़े में ले आया था.. गौतम जानता था कि इस वक्त पूनम की हालत मृगतृष्णा में पड़ी हुई हिरनी की सी है. पूनम 45 साल की थी मगर एक 20 साल के लड़के के साथ इस तरह जा रही थी जैसे मेले में कोई मां-बाप अपने बच्चों को हाथ पकड़ कर ले जाता है..

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गौतम ने कैफे का दरवाजा खोलते हुए अंदर प्रवेश किया और पीछे-पीछे हाथ पकड़ कर पूनम को भी ले आया. कैफे के अंदर पुराने गांव जैसी झुग्गियां टाइप बैठने की व्यवस्था थी जो इस तरह बनाई गई थी कि वहां बैठने वालों को फुल प्राइवेसी मिले.. अक्सर यहां लव बर्ड्स आते थे..

गौतम ने एक केबिननुमा झुग्गी मैं बैठते हुए अपने पास ही पूनम को बैठा दिया.. और वेटर के आते ही उसे दो काफी का ऑर्डर दे दिया..

पूनम हैरानी औऱ सवालों भरी नज़रो से गौतम को देख रही थी की गौतम बोला..

गौतम - देखो आंटी में तुम्हारे अकेलेपन का तो कुछ नहीं कर सकता.. मगर तुम्हारे लिए इतना जरूर कर सकता हूं कि तुम्हे एक अच्छी जॉब दिलवा सकूं.. जिससे तुम्हें शहर में रहने में कोई परेशानी नहीं होगी..

पूनम ये देखकर बिल्कुल हैरान थी की कैसे उसकी आधी उम्र का लड़का उसे बच्चों की तरह समझा रहा है और अब वह आप की जगह तुम पर आ चुका है.. गौतम की इन बातों से हालांकि पूनम को कोई एतराज नहीं था ना ही उसे गौतम के मुंह से ये सब सुनने में कोई परेशानी थी. वह बस यह देखकर हैरान थी कि गौतम कितना आत्मविश्वास से भरा हुआ है और उसके मुकाबले में पूनम कितनी खोखली और डरी हुई औरत है.. उसे जीने के लिए सहारो की जरूरत पड़ रही है.. पूनम ने गौतम को देखकर कहा..

पूनम - तुम मुझे अच्छी जॉब दिलवा सकते हो..

गौतम - कोशिश कर सकता हूं.. उम्मीद तो है कि मिल जाएगी.. रुको मैं कॉल करता हूं.. अभी क्या करती हो तुम?

पूनम - मैं यही सामने मॉल में टॉय शॉप में जॉब करती हूँ.. सुबह से शाम तक यही सड़ना पड़ता है औऱ पैसे सिर्फ 14 हज़ार कुछ..

गौतम चेतन को कॉल करता है औऱ फ़ोन स्पीकर पर डालकर सामने टेबल पर रख देता है - हेलो चिटू भईया?

चेतन - हाँ ग़ुगु..

गौतम - आप कल कह रहे थे ना.. नई दूकान के लिए स्टाफ की जरुरत है.

चेतन - हाँ ग़ुगु.. तू संभालेगा दूकान?

गौतम - मुझसे कहाँ काम होता है.. आप तो जानते हो मैं कितना आलसी औऱ कामचोर हूँ.. आपकी तरह सुबह से शाम तक बैठना मेरे बुते के बाहर की बात है.. मेरी एक फ्रेंड है उसे जॉब की need है..

चेतन - ठीक है ग़ुगु.. कल सोहन काका के पास भेज दे अपनी फ्रेंड को.. मैं उनको फ़ोन कर दूंगा वो 3 में से किसी ना किसी दूकान में जॉब दिलवा देंगे..

गौतम - भईया.. सेलेरी थोड़ी ठीक रखना.. जरुरत में है अभी..

चेतन - ठीक है ग़ुगु मैं बोल दूंगा सोहन काका को.. 30-35 तक दिलवा दूंगा..

गौतम - बाय भईया...

चेतन - तू कब तक घर आएगा? बुआ पूछ रही थी..

गौतम - भईया 9.15 का शो है मूवी देखने आया हूँ लेट हो जाऊँगा..

चेतन - ठीक है चल.. एन्जॉय कर..

गौतम पूनम से - खुश?

पूनम मुस्कुराते हुए - हम्म्म.. तुम बहुत अच्छे हो.. पहली मुलाक़ात कोई किसी के लिए इतना कुछ नहीं करता..

गौतम कंधे पर हाथ रखकर कन्धा सहलाते हुए - अब आप उस आदमी को भूल जाओ औऱ आगे का सोच कर जिओ..

पूनम मुस्कुराते हुए - उम्र क्या तुम्हारी..

गौतम - क्यों बॉयफ्रेंड बनाना है? आई ऍम 18 प्लस.. अगर बनाना है तो आई ऍम रेडी...

पूनम हसते हुए - कितनी प्यारी बातें करते हो..

गौतम पूनम का कन्धा पकड़ कर अपनी तरफ खींचते हुए - प्यार भी बहुत प्यार से करता हूँ.. ट्राय करना हो बताना..

इतने में वेटर कॉफ़ी ले आता है.. औऱ टेबल पर रख देता है..

गौतम - कुछ खाना है?

पूनम शर्माती हुई - नहीं..

गौतम वेटर से - एक पिज़्ज़ा.. लार्ज़..

वेटर चला जाता है गौतम कॉफ़ी का सीप लेकर पूनम से भी पिने को कहता है..

पूनम - पिज़्ज़ा क्यों मंगवाया मुझे भूक नहीं है..

गौतम पूनम के पेट पर हाथ रखकर पेट दबाते हुए कहता है - भूक कैसे नहीं है.. पूरा खाली तो लग रहा है तुम्हारा पेट.. जैसे सुबह से कुछ खाया ही ना हो..

पूनम मुस्कुराते हुए गौतम को देखकर - तुम सच में 18 प्लस हो ना? मैं बॉयफ्रेंड बनाऊ तो..

गौतम कॉफ़ी पीते हुए - मैंने बता तो दिया.. अब क्या मेरा आधार कार्ड देखोगी तुम?

पूनम मुस्कुराकर कॉफ़ी पीते हुए - कोई जरुरत नहीं है.. मुझे यक़ीन है तुमपर..

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गौतम थोड़ा पीछे होकर तिरछी नज़र से पूनम की कमर देखता हुआ - 32.. नहीं 30..

पूनम गौतम को देखकर - 28...

गौतम आगे देखते हुए - हम्म्म क्या?

पूनम मुस्कुराते हुए - 28 है मेरी कमर का साइज.. वही देख रहे थे ना तुम?

गौतम - नहीं.. मैं क्यों तुम्हारी कमर देखने लगा..

पूनम मुस्कुराते हुए - झूठ भी बोलते हो तुम?

गौतम - मेरी गर्लफ्रेंड का फ़ोन आ रहा है शायद आ गई..

पूनम - वही जिसे मूवी देखने बुलाया है..

गौतम - हाँ यार.. (फ़ोन उठाकर) हेलो

सिम्मी - कहा है रसगुल्ले..

गौतम - सामने कैफ़े में कॉफ़ी पी रहा था बस आ रहा हूँ..( फ़ोन काटते हुए )

सिम्मी - ठीक है..

गौतम - पूनम फ़ोन दो तुम्हारा..

पूनम फ़ोन देते हुए - जा रहे हो..

गौतम - हाँ यार.. लो ये नम्बर है मेरा.. व्हाट्सप्प करना..

वेटर पिज़ा लाते हुए - सर आपका आर्डर..

गौतम - कितना हुआ..

वेटर - 480..

गौतम पैसे दे देता है औऱ वेटर चला जाता है..

पूनम - कोनसी मूवी देखने जा रहे हो?

गौतम मुस्कुराते हुए - पहली मुलाक़ात..

पूनम - मैं भी चलू?

गौतम असमंजस में - ले तो चलता आंटी पर गर्लफ्रेंड नाराज़ हो जाएगी..

पूनम - मैं अलग बैठ जाउंगी..

गौतम पिज़्ज़ा का एक स्लाइस खाते हुए - ठीक है तुम व्हाट्सप्प पर hi भेजो. मैं टिकट बुक करके टिकट व्हाट्सप्प करता हूँ तुम्हे..

पूनम - ठीक है बेटा..

गौतम मुस्कुराते हुए पूनम के गाल चूमकर - बेटा नहीं हूँ तुम्हारा समझी..

पूनम मुस्कुराते हुए - मैं कब कहा तुम मेरे बेटे हो? पर आधी उम्र के हो तो अपने आप मुंह से बेटा निकल जाता है..

गौतम उठते हुए - अच्छा तुम ये फिनिश करके आ जाओ.. मैं नहीं गया तो गर्लफ्रेंड यहां आ जायेगी..

पूनम हसते हुए - बहुत लकी है तुम्हारी गर्लफ्रेंड...

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गौतम - नहीं.. मैं बहुत लक्की हूँ.. चलो चलता हूँ...

गौतम इतना कहकर पूनम को वही केफे मैं छोड़कर वापस सिटी मॉल की तरफ आ जाता है जहां एंट्री पर सिमरन अपने भाई मनोज के साथ खड़ी हुई थी..

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सिमरन गौतम को देखते ही भाग कर उसके गले से लिपट जाती है और एक चुम्मा उसकी गाल पर करते हुए पूछती है..

सिम्मी - प्यारे लग रहे हो..

गौतम - कैसी हो?

सिम्मी - सुरंग में खुदाई का दर्द बाकी है उसके अलावा सब ठीक है..

गौतम - 2-3 बार औऱ खुदाई होगी तो दर्द गायब हो जाएगा.. वैसे सलवार में लुटेरी लगती थी पर साडी में तो क़ातिल लगती हो..

सिम्मी
- तुम्हारे आगे तो कुछ भी नहीं हूँ..

मनोज पीछे से - क्या खुसर फुसर चल रही है दोनों में..

गौतम - कुछ नहीं.. चलो चलते है..

सिम्मी - अभी आधा घंटा मूवी शुरू होने में..

गौतम - तो क्या करें फिर?

सिम्मी - यही बैठ जाते है बाहर.. उस चाय की टपरी पर.. मैं चाय पी लुंगी आप दोनों सुट्टा पी लेना..

मनोज - हाँ चलो यार..

पूनम केफे से निकल कर मॉल में जा रही थी गौतम औऱ पूनम की नज़र बीच बीच में मिल भी रही थी.. इस बार पूनम औऱ गौतम ने एक दूसरे को ऊपर से नीचे तक फुल चेक आउट किया.. जिसका अंदाजा दोनों को एक दूसरे की नज़रे देखकर हो चुका था..

गौतम - अरे ये चाय अच्छी नहीं बनाता.. चलो सामने केफे में चलते है तु कॉफ़ी पी लेना..

सिम्मी - ठीक है.. चलो भईया वही चलते है..

मनोज - हाँ.. सिम्मी... चलो..

गौतम वापस सिम्मी औऱ मनोज के साथ केफे में आ जाता है औऱ एक झुग्गीनुमा केबिन में सिम्मी के साथ अगल बगल बैठ जाता है औऱ सामने मनोज बैठ जाता है..

वेटर आता है..

सिम्मी - तीन कॉफ़ी..

मनोज - एक बड़ी एडवांस भी..

गौतम - इतनी देर कैसे हुई तुमने तो आठ का कहा था..

सिम्मी - यार बहाना बनाना पड़ा.. पूछो ना भईया से

मनोज - हाँ गौतम.. आज पापा घर पर ही थे..

गौतम सिमरन के गले में हाथ डालकर उसके गाल चूमता हुआ - thanks आने के लिए..

सिम्मी - बेबी सामने भईया बैठे है.. कुछ तो शर्म करो.. ये सब बाद में..

गौतम - भईया बैठे है तो मैं क्या करू यार..

मनोज - मैं मुंह घुमा लेता हूँ तुम्हे जो करना है कर लो..

वेटर कॉफ़ी लेकर आता हुआ.. सर सिगरेट.. एंड लाइटर

सिम्मी - कॉफ़ी तो बहुत सही है..

गौतम - कहा था ना..

मनोज सिगरेट जलाकर - लो गौतम..

गौतम कॉफी का सिप लेकर अपना फ़ोन देखता है जिसमे पूनम का hi आ चूका था.. गौतम ने एक टिकट बुक करके पूनम को व्हाट्सप्प पर सेंड करते हुए लिखा.. तुम्हे अकेले बैठना पड़ेगा उसके लिए सॉरी..

पूनम ये देखकर मुस्कुराते हुए लिखती है - कोई बात नहीं.. औऱ एक लव का इमोजी भी साथ में सेंड कर देती है..

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सिम्मी - कहा ध्यान है गौतम?

गौतम मनोज से सिगरेट लेकर सिगरेट सिम्मी को देते हुए - कुछ नहीं.. यार.. फ़्रेंड का मैसेज था.. रिप्लाई कर रहा था..

सिम्मी सिगरेट लेने से मना करती हुई - गोतम भईया बैठे है..

गौतम - तो? मनोज तुम्हे सिमरन के सिगरेट पिने से ऐतराज़ है?

मनोज - मुझे क्यों होने लगा.. सिम्मी की अपनी मर्ज़ी है..

गौतम - बस.. लो अब..

सिम्मी सिगरेट लेकर कश मारती हुई - भईया बता रहे थे बहुत अच्छी मूवी है..

मनोज - मैंने तो बस सुना है कल एक दोस्त बता रहा था.. उसकी बातों पर भरोसा भी नहीं किया जा सकता..

गौतम - ट्रेलर देखा है.. काफी एडल्ट सीन्स है मूवी में..

सिम्मी मुस्कुराते हुए सिगरेट का अगला कश लेकर सिगरेट गौतम को देती हुई - वो तो होंगे ही हीरोइन सनी लियॉन जो है मूवी में..

गौतम सिम्मी के गले में हाथ को थोड़ा नीचे करके उसका बोबा पकड़ते हुए - हीरोइन तो तुझे होना चाहिए मेरी..

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सिम्मी अपने बूब्स पर से गौतम का हाथ हटाती हुई - गौतम तुम भी ना.. कहीं भी शुरू हो जाते हो.. बेशर्म कहीं के..

गौतम - इसमें क्या गलत है.. मनोज तुम ही बताओ.. अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रोमांस करना गलत है क्या?

सिम्मी - भईया से क्या पूछ रहे हो.. उनकी कोई गर्लफ्रेंड थोड़ी है.. उनको तो लड़की से बात करना तक नहीं आता..

गौतम - इतनी सी बात मैं बनवा दूंगा.. बस थोड़ा सा तुम्हारे भईया कॉन्फिडेंस दिखा दे तो..

सिम्मी - पक्का..

गौतम - पक्का मेरी रसमलाई..

ये कहते हुए गौतम ने सिगरेट मनोज को दे दी औऱ सिमरन के होंठों को मनोज के सामने ही चूमने लगा औऱ उसके बूब्स को अपने हाथ में लेकर मसलने लगा..

मनोज सिगरेट का कश लेकर - भाई यहां तो छोड़ दे मेरी बहन को.. अंदर हॉल में तो पता नहीं क्या क्या करेगा तू..

सिम्मी खुदको छुड़वाकर एक हलका सा थप्पड़ गौतम के गाल पर मारकर - रसगुल्ले तू ना बहुत बेशर्म है.. चल अब टाइम हो रहा है मूवी निकल जायेगी..

गौतम - ठीक है मेरी जान..

मनोज - भाई सच में गर्लफ्रेंड बनवाएगा मेरी?

गौतम - तेरी बहन की कसम..

सिम्मी हसते हुए - अब चलो..

मनोज बिल पे करके मॉल में आ जाता है जहा लगभग खाली पड़े सिनेमा हॉल आगे कोने में तीनो बैठ जाते है हॉल में कुछ ही लोग थे जो पीछे बैठे थे औऱ उनमे से ज्यादातर लवबर्ड्स जो अपनी अपनी gf bf के साथ कहीं ना कहीं लगे हुए थे.. कोने में मनोज बैठा उसके बगल में सिम्मी औऱ उसके बगल में गौतम.. पूनम दो सीट पीछे बैठकर गौतम को देख रही थी..

मूवी शुरू हो चुकी थी और तीनों बैठकर मूवी देखने लगे थे मूवी शुरू होने की कुछ ही देर बाद गौतम ने सिमरन के गले में हाथ डालकर उसे अपने करीब खींचते हुए उसके होठों को अपने होठों से लगाकर चुंबन की शुरुआत कर दी मनोज अपनी बहन और गौतम को चूमता देखकर वहां से उठने की कोशिश करता हुआ बोला मैं कहीं और बैठ जाता हूं. जिस पर गौतम में चुंबन तोड़कर मनोज कहा अरे बैठे रहो यार यहीं पर.. सिमरन इस पर कुछ नहीं बोला और मनोज भी गौतम की बात सुनकर वहीं बैठ गया और मूवी देखने लगा.. गौतम फिर से सिम्मी को चूमने लगा और उसके होंठों का रस पीने लगा.. सिम्मी इस हॉल के अंधेरे में गौतम को पकड़ कर अपनी तरफ खींचते हुए चूम रही थी और उसके होठों को बराबर साथ देते हुए उसके मुंह का स्वाद ले रही थी और अपने मुंह का स्वाद उसे चखा रही थी..

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गौतम ने सिम्मी को कुछ देर चूमने के बाद उसके गले में हाथ जो डाला हुआ था उसे थोड़ा और नीचे सरका दिया और सिमरन की ब्लाउज में हाथ डालते हुए उसके बूब्स को पड़कर मसलने और दबाने लगा.. मनोज अपनी बहन के बूब्स दबाते हुए देख रहा था और अब कुछ भी करने में असमर्थ था..

गौतम ने ब्लाउज के बटन खोलके अंदर हाथ डालकर ब्रा को ऊपर सरकार दिया था जिससे सिमरन के बूब्स पूरी तरह नंगे हो चुके थे ब्लाउज के अंदर नंगे हो चुके बूब्स को गौतम चूसना चाहता था इसलिए वह सिमरन की तरफ झुकते हुए उसके पल्लू को उठाकर उसके बूब्स को अपनी तरफ कर दिया और अपने होंठ उसके बूब्स पर लगाते हुए उसके बूब्स चूसने लगा..

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मनोज के सामने उसकी बहन के बूब्स खुलकर आ चुके थे जिन्हें गौतम मजे से चुस्त हुआ सहला रहा था और मसल रहा था.. मनोज कुछ भी करने में असमर्थ था वह केवल पिक्चर देखे जा रहा था और अपने बगल में अपनी बहन और गौतम का रोमांस देखकर वह भी अब काम भावना से उत्प्रोत होने लगा था..

गौतम ने ब्रा को खोलते हुए सिमरन की ब्रा को उतार कर अपनी जेब में रख लिया था और अब सिमरन सिर्फ एक ब्लाउज में ही थी जिसे उठा उठा कर गौतम बार-बार उसके बूब्स को चुम औऱ चाटते हुए उसके निपल्स दबा दबा कर मरोड़ रहा था और सिमरन अपने भाई मनोज के बगल में बैठी हुई कामुक सिस्कारिया अपनी दबी हुई आवाज में ले रही थी जिसको सुनते हुए मनोज भी काम भावनाओं से भर रहा था.. दो सेट पीछे बैठी पूनम भी यह सब होता देख रही थी मगर उसे कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था वह इतना जरुर जानती थी कि गौतम अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रोमांस कर रहा है.. पूनम के दिल में गौतम के लिए एक अलग जगह बन चुकी थी.. जिस तरह से उसने पूनम को समझाया था और मदद की थी इसी के साथ में गौतम ने जिस तरह पूनम को अपनी हम उम्र की लड़की मान कर बातें की थी उससे पूनम गौतम के प्रति आकर्षित हो चुकी थी और वो गौतम से और बात करना चाहती थी.. गौतम में पूनम को एक नई उम्मीद दिख रही थी यह उम्मीद वैसी नहीं थी जैसी उसने अपने पिछले आशिक से लगाई थी जो उसे छोड़कर चला गया था. वो उम्मीद एक दोस्त की थी कि गौतम उसका एक अच्छा दोस्त बनाकर उसकी बातों को सुन सकता है और उससे ढेर सारी बातें कर सकता है.. पूनम एक अच्छे मित्र के रूप में गौतम को देखने लगी थी.. पूनम के मन में भरी हुई उदासी को गौतम ने कुछ ही देर में निकाल कर फेंक दिया था और अब पूनम आगे की ओर देखने लगी थी..

मनोज अपनी बहन की कामुक आवाजो को सुनते हुए वहीं बैठा हुआ अपने लंड को अपनी पैंट के ऊपर से सहला रहा था और साइड में अपनी बहन औऱ गौतम का रोमांस देखकर मन ही मन कामुक हो रहा था..

गौतम सिमरन के बूब्स इस तरह चूस और चाट रहा था कि सिमरन के मुंह से कामुक सिसकियाँ आप निकलने लगी थी हालांकि यह सिस्कारिया और कामुक आवाज केवल उसके पास में बैठे हुए मनोज को ही सुनाई दे रही थी उसके अलावा कोई और आसपास वहां सुनने वाला था ही नहीं..

सामने चलते सनी लियोन के मूवी के चुदाई सीन और साइड में बैठी हुई अपनी बहन सिम्मी और गौतम के चूसाईं सीन देख कर मनोज सब रहा नहीं गया और वह उठकर मुठ मारने बाथरूम की तरफ चला गया..

उसके जाने के बाद गौतम ने भी सिमरन को अपनी तरफ झुका लिया और अपना लंड बाहर निकाल कर सिमरन का सर अपने लंड पर झुकते हुए सिमरन के मुंह में आपका लौड़ा घुसा कर सिमरन को सिनेमा हाल में ही अपना लंड चूसने लगा..

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सिमरन भी गौतम के अनुसार उसके ऊपर झुक गई और गौतम को खुश करने में लग गई.. सिमरन किसी प्रोफेशनल रंडी की तरह गौतम के लिंग को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी और चाट रही थी औऱ अपने हाथ से उसके अंडकोष भी सहला रही थी जिससे गौतम को बहुत संतुष्टि का अनुभव हो रहा था.. गौतम प्यार से सिमरन के बाल सहलाते हुये जुल्फे सवारते हुए उसे अपना लोडा चूसने में मसरूफ था..

मनोज बाथरूम में अपना हिला कर वापस अपनी सीट पर है तो उसने देखा कि सिमरन गौतम के उपर झुकी हुई है और गौतम उसे अपना लंड चूसा रहा है ये देखकर मनोज फिर से कामुक होने लगा था.. मगर इस बार मनोज बगल में बैठकर सामने मूवी देखने लगा सिमरन लोडा चूस रही थी और मनोज अपनी बहन सिमरन को चुसता हुआ देख रहा था गौतम सिमरन लंड चूसाईं का आनंद ले रहा था..

मनोज औऱ पीछे बैठी पूनम ने जब गौतम के लंड की झलक देखी तो दोनों अचरज में पड़े हुए उसके लंड को देखते ही रह गए..

गौतम अब काम भावना से भरकर चुदाई के मूंड में चुका था गौतम ने सिमरन का हाथ पड़कर उसे सीट से उठा लिया और बाथरूम ले गया.. जहां मेल टॉयलेट में ले जाकर गौतम ने एक बाथरूम में घुसकर सिमरन के साथ दरवाजा बंद कर लिया. गौतम और सिमरन दोनों काम भावनाओं से भरे हुए थे कि उनको किसी और का कोई ख्याल नहीं था.. गौतम ने सिमरन की साडी खोल दी और सिम्मी को पलट कर उसकी चुत में अपना लिंग घुसते हुए धीरे-धीरे उसके बाल पड़कर पीछे से चोदने लगा.. सिमरन सिसकियाँ लेते हुए गौतम से चुत मरवाने लगी थी..

गौतम ने सिमरन का ब्लाउज उतार कर साइड में रख दिया और उसकी पेंटी भी उतार कर अपनी जेब में रख ली.. सिमरन अपनी चुत में गौतम का लौड़ा लेते हुए बहुत ही मस्ती से चुदवा रही थी.. गौतम अपना पूरा लौड़ा घुसा घुसा के सिमरन की चुत मारे जा रहा था और सिमरन चुत मरवाते हुए सिसकियाँ लेकर गौतम को मुड़ मुड़कर देखते हुए कामुकता से आहे भर रही थी..

मनोज कुछ देर बाद ही सीट से उठकर बथरूम में आ गया था औऱ उसके जस्ट बगल वाले बाथरूम में घुस गया.. मनोज अपनी बहन की सिस्कारिया सुनते हुए वापस मुट्ठी मारने लगा औऱ मुट्ठी मारके वापस चला गया..

गौतम जब झड़ने वाला हुआ तो उसने सिमरन को पलट कर नीचे घुटनों पर बैठा दिया और उसके मुंह में अपना लौड़ा डालकर उसके बाल पकड़ते हुए लौड़ा चूसने लगा और थोड़ी देर में उसके मुंह में अपना सारा माल भर के झड़ गया..

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सिमरन पूरा माल पीते हुए मुस्कुराते हुए गौतम को देखने लगी औऱ गौतम ने सिमरन को चुम लिया..


मूवी का मध्यांतर हो चुका था और सभी अब कुछ ना कुछ खाने का सामान लेने जा रहे थे मगर गौतम उसी तरह बैठा हुआ वही एक बात सोच रहा था कि कैसे सिमरन और वो उसकी खुली आंखों से देखे गए सपने में संभोग करते हुए एक दूसरे को अलग नाम से बुला रहे थे और दोनों पूर्ण रूप से सम्भोग कर रहे थे..

सिम्मी - क्या खाना है रसगुल्ले?

सिम्मी ने गौतम का ध्यान तोड़ते हुए कहा तो गौतम ने कहा- कुछ नहीं.. भूख नहीं है..

मनोज - कुछ तो खा ले भाई. इतनी मेहनत की है तूने..

गौतम - अभी कुछ खाने की इच्छा नहीं है..

सिम्मी मनोज के साथ जाती हुई - चलो भईया.. मुझे तो पॉपकोन खाने है.. वो लेकर आते है..

मनोज - ठीक है सिम्मी.. चल..

मनोज और सिमरन सिनेमा हॉल से बाहर पॉपकोन लेने चले जाते हैं और पूनम मौका देखकर गौतम के बगल वाली सीट पर आकर बैठ जाती है..

पूनम - गर्लफ्रेंड बहुत खूबसूरत है तुम्हारी..

गौतम पूनम की तरफ देखकर - thanks आंटी..

पूनम - पीछे से देखा मैंने.. बहुत तंग कर रहे थे तुम बेचारी को.. बाथरूम में भी बहुत सताया तुमने उसे..

गौतम - तुम हमारे पीछे बाथरूम तक आई थी? यार आंटी क्या है ये..

पूनम अपना एक कान पकड़कर मुस्कुराते हुए - सॉरी.. पर वो साथ वाला लड़का भी गया था..

गौतम - अच्छा.. मूवी कैसी है?

पूनम - पूरी मूवी में सनी लियॉन के अलावा कुछ औऱ हो तब तो बताऊ..

गौतम - बोर हो गई ना..

पूनम - हाँ अकेली तो बोर ही होंगी...

गौतम - मैं भी बोर हो गया.. मैंने अब जाने वाला हूँ यहां से..

पूनम - बिना बताये मत चले जाना.. इशारा करना.. कुछ औऱ बात करनी है तुमसे..

गौतम - ठीक है..

पूनम - मैंने पीछे जाती हूँ.. तुम्हारी गर्लफ्रेंड आने वाली होगी..

इतना कहकर पूनम पीछे वापस अपनी सीट पर जाकर बैठ जाती है और कुछ देर बाद मनोज और सिमरन वापस गौतम के पास आकर बैठ जाते हैं और पॉपकॉर्न खाते हुए बातें करने लगते हैं जिसमें मूवी से जुड़ी हुई बातों के अलावा के बहुत सी बातें हो रही थी गौतम ने अपनी बात करते हुए मूवी के बोरिंग होने का हवाला देते हुए यहां से चलने की बात कही जिस पर मनोज और सिमरन एक मत से हामी भरते हुए बोले..

सही कहा.. चलते है..

आगे आगे मनोज और सिमरन जाने लगे तो पीछे से गौतम ने पूनम को जाने का इशारा कर दिया.. तीनों मॉल के गेट के बाहर आ चुके थे और पार्किंग में जाते हुए दूसरे से बात कर रहे थे..

गौतम और सिमरन का हाथ एकदूसरे के हाथ में था और दोनों अब आखरी बार एक दूसरे से गले मिलते हुए एक दूसरे को चूम रहे थे मनोज उनके चुम्मी के खत्म होने का इंतजार कर रहा था..

पूनम पीछे छूपके खड़ी हुई यह सब देख रही थी..

मनोज पार्किंग से अपनी बाइक ले आया था और अब वह गौतम और सिमरन से कहने लगा था..

मनोज - आज ही करनी है क्या सारी चुम्मी तुम दोनों को.. सिम्मी अब चल यार..

सिम्मी चुम्बन तोड़ते हुए - बाय रसगुल्ले.. जल्दी मिलने आना वरना मैंने आ जाउंगी..

गौतम अपनी जेब से सिम्मी की ब्रा पेंटी निकालकर सिम्मी को देते हुए - रास्ते में सुनसान जगह पहन लेना.. औऱ अपना ख्याल रखना..

सिम्मी मनोज के पीछे बाइक पर बैठ जाती है औऱ बाय करते हुए वहा से मनोज के साथ चली जाती है..

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गौतम जैसे ही पार्किंग की तरफ बढ़ता है उसके सामने पूनम आकर खड़ी हो जाती है..

गौतम - घर छोड़ दू आंटी?

पूनम - हाँ बेटा..

गौतम पार्किंग से कार निकालकर - आओ आंटी अंदर बैठ जाओ..

पूनम - तुम्हारी कार है?

गौतम - नहीं.. किसी औऱ की है मैंने तो बस चला रहा हूँ.. अच्छा किस तरफ है आपका घर..

पूनम - घर कहा है बेटा.. किराए का कमरा है..

गौतम - पर शहर के किस हिस्से में है आंटी आपका वो कमरा.. जगह तो बताओ..

पूनम उसी वेडिंग हॉटल के आसपास की जगह का नाम बताती है जहा कल ऋतू की शादी हुई थी..

गौतम गाडी चलाते हुए - मुझे भूख लगने लगी लगी है आंटी.. चलो पहले कहीं खाना खाते है फिर मैं आपको छोड़ दूंगा..

पूनम - बेटा यहां आसपास कोई अच्छा रेस्टोरेंट नहीं है.. तुम मेरे साथ चलो मैं अपने हाथ से बनाके खिला दूंगी..

गौतम उसी होटल की जगमग देखकर - रेस्टोरेंट की क्या जरुरत है आंटी..

ये कहते हुए गौतम गाडी वेडिंग होटल की पार्किंग में लगा देता है.. जहा चकाचोध देखकर लग रहा था कि आज भी यहां किसी की शादी है..

पूनम - बेटा.. बिन बुलाये नहीं जाना चाहिए कोई रोक लेगा..

गौतम - डरो मत आंटी.. मैं हूँ ना आपके साथ.. चलो उतरो.. आ जाओ..

गौतम पूनम को लेकर वेडिंग होटल के अंदर ले आता है औऱ होटल से गुजरते हुए पीछे वेडिंग लोन में चल रहे फंक्शन में आ जाता है.. रात के लगभग 10.45 का समय हो रहा था औऱ फंक्शन में अब कम भीड़ थी.. गौतम बिना किसी शर्म औऱ झिझक के खाना लेकर टेबल पर पूनम के साथ बैठ गया औऱ खाने लगा जहाँ गोतम को देखकर बिरजू उसके पास आ गया..

बिरजू - भईया ज़ी.. नमस्ते... कल रात आप आये नहीं.. मैं पूरी रात जाग रहा था..

गौतम बिरजू से - कल नींद आ गई थी बिरजू.. तू चिंता मत कर अभी तेरी जरुरत पड़ेगी..

बिरजू पूनम की तरफ देखकर - भईया आपकी माँ है..

गौतम मुस्कुराते हुए पूनम की तरफ देखकर - हाँ बिरजू ये मेरी माँ है..

पूनम गौतम की तरफ देखकर उसके झूठ में शरीक हो गई औऱ बोली - हाँ मैं इसकी माँ हूँ.

बिरजू झुक कर प्रणाम करते हुए - नमस्ते आंटी ज़ी..

पूनम एक झलक गौतम को देखने के बाद बिरजू से - नमस्ते..

बिरजू चला जाता है..

पूनम - कौन था ये?

गौतम खाना खाते हुए - यहां की निगहेबानी करता है आंटी.. तुम्हे देखकर उसे लगा होगा की तुम मेरी माँ हो.. मैंने भी उसके भरम नहीं तोड़ा..

पूनम खाना खाते हुए - कल क्यों जाग रहा था वो.. औऱ तुम क्यों जाने वाले थे उसके पास..

गौतम - पीछे हलवाईखाने के बगल में थोड़ा दूर इसका रूम है जहा ये रहता है.. मैंने इसे कहा था रात को गर्लफ्रेंड के साथ आ सकता हूँ तेरा रूम खुला रखना.. इसिलए..

पूनम खाना खाते हुए - कल भी तुम बिन बुलाये खाना खाने आये थे यहां? डर नहीं लगता तुम्हे?

गौतम पूनम को खाने की एक कोर खिलाते हुए - कल मेरी बहन की शादी थी यहां.. अब समझी? मैंने कोई भूखा नंगा थोड़ी हूँ.. जो जहाँ कहीं बिन बुलाये आता जाता रहूँगा.. आसपास कोई रेस्टोरेंट नहीं था यहां आना पड़ा.. औऱ कुछ नहीं..

पूनम मुस्कुराते हुए गौतम को देखकर उसके हाथ का निवाला खाते हुए - मैंने कब वैसा कहा..

कुछ देर बाद दोनों खाना खा कर उठ गए औऱ पूनम ने गौतम से कहा.. अब चले यहां से?

गौतम - एक सेकंड आंटी.. बिरजू से मिलके आता हूँ.. बेचारा रात भर जाग रहा था कुछ तो मिलना चाहिए उसे..

पूनम गौतम का हाथ पकड़ कर - मैं भी चलती हूँ बेटा.. बिन बुलाये यहां इतनी बड़ी शादी में मुझसे अकेले नहीं रहा जाएगा..

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गौतम पूनम के साथ बिरजू के कमरे की तरफ आ जाता है जहा बाहर अंधेरा था औऱ अंदर कमरे में वही धीमी रौशनी का लट्टू जल रहा था.. बिरजू आसपास नहीं था..

गौतम पुनम के साथ उस छोटे से कमरे में आ जाता है औऱ दरवाजा अंदर से बंद करने लगता है बगैर कुंदी लगाए...

पूनम - यहां कोई नहीं है बेटा.. अरे तुम दरवाजा क्यों बंद कर रहे हो?

गौतम मुड़कर पूनम को देखता हुआ - क्यों आंटी आपको डर लग रहा है? कहीं मैं आपके साथ कुछ गलत काम ना कर दूँ..

पूनम हसती हुई - मुझे क्यों डर लगेगा? वो भी तुम्हारे जैसे इतने खूबसूरत और प्यारे लड़के से.. डरना तो तुम्हे मुझसे चाहिए.. कहीं मैंने तुम्हारा फ़ायदा उठा लिया तो...

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गौतम पूनम के करीब आता हुआ उसकी कमर को अपने दोनों हाथों से पकड़कर पूनम को अपनी तरफ खींचते हुए - अच्छा? तुम ऐसा क्या कर सकती ही आंटी.. जो मुझे तुमसे डर लगना चाहिए..

पूनम को देखकर हैरानी से - बेटा.. क्या कर रहे हो तुम.. छोडो मुझे.. तुमसे इतनी बड़ी हूँ मैं.. तुम्हारी माँ जैसी..

गौतम - आंटी मैं जानता हूँ आप अंदर से बहुत अकेली हो.. आपको एक दोस्त की जरुरत है.. मैं आपका दोस्त बनने के लिए तैयार हूँ.. आपकी ख़ुशी के लिए मैं सब कुछ कर सकता हूँ..

पूनम - बेटा तुम मुझे गलत समझ रहे हो.. तुमने इतने प्यार से बात की, मेरी इतनी मदद भी की उसके लिए मैं तुम्हारी अहसानमंद हूँ.. मगर अपनी ख़ुशी के लिए तुम्हारे जैसे इतने प्यारे बच्चे का फ़ायदा नहीं उठा सकती.

गौतम की नज़र खाट के किनारे पड़े हुए सिगरेट के पैकेट औऱ लाइटर पर पड़ी जो कल उसने यही छोड़ दिया था.. उसने पूनम को बाहों की क़ैद से आजाद कर दिया.. औऱ एक सिगरेट निकालकर सुलगाकर कश लेते हुए बोला - औऱ अगर ये बच्चा तुम्हारा फ़ायदा उठाना चाहे तो आंटी? तुम तब भी मुझे मना करोगी?

पूनम खाट पर बैठती हुई - बेटा तुम्हारे साथ मुझसे ये सब नहीं होगा.. तुम बहुत छोटे हो.. कहाँ मैंने 45 साल की औऱ कहा तुम 18-19 साल के..

गौतम खाट पर पूनम के बदल में बैठकर सिगरेट के कश लेता हुआ - 20 साल.. आंटी पुरे बीस साल का हूँ.. (कमर में हाथ डालता हुआ) आंटीलवर सुना है तुमने.. मैं वही हूँ.. आपके जैसी खूबसूरत आंटीया मुझे बहुत पसंद है.. मैं एक बात सच बताऊ तुम्हे आंटी?

पुनम अपनी कमर से गौतम का हाथ नहीं हटाती औऱ गौतम को देखकर कहती क्या - क्या?

गौतम सिगरेट का कश लेकर - मैं तुम्हे उदास देखकर तुम्हारे पास नहीं आया था आंटी.. तुम्हारा फिगर औऱ उम्र देखकर तुम्हारी तरफ खींचा चला आया था.. सोचा था तुम्हारा फ़ायदा उठा लूंगा.. मगर तुम्हारा दिल टुटा हुआ था इसलिए मैंने कोशिश नहीं की.. मैं तुमसे दोस्ती करना चाहता हूँ आंटी.. मेरी दोस्त बनोगी?

पूनम गौतम की बात सुनकर उसे ही देखे जा रही थी..

इस बार जैसे ही गौतम ने सिगरेट अपने होंठो से लगाई पूनम ने अपनी उंगलि से गौतम के होंठों से सिगरेट लेकर फर्श पर फेंककर अपने पैरों की चप्पल से बुझा दी औऱ गौतम को देखकर कहा - सिगरेट पीना अच्छा नहीं होता बेटा..

गौतम ने अपनी कलाई का धागा लाल होते देखा तो वो समझा गया की पूनम उसके साथ सोने के लिए तैयार हो चुकी है..

गौतम पूनम को बाहों में भरता हुआ खड़ा हो गया औऱ उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर चूमने लगा.. इस बार पूनम ने उसे कुछ भी करने से नहीं रोका उलटे दोनों हाथों से गौतम की कमर को पकड़कर चुम्बन में बराबर उसका साथ देने लगी..

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कमरे के बीचो-बीच खड़े होकर गौतम और पूनम एक दूसरे को चुम ही रहे थे कि बिरजू गेट खोलकर अंदर घुस गया.. बिरजू ने जब गौतम और पूनम को एक दूसरे को चूमता देखा तो वह हैरानी से भर गया कि कैसे एक माँ बेटा आपस में चुम सकते है.. बिरजू के आने से गौतम और पूनम का चुंबन भी टूट गया..

गौतम बिरजू को देखकर अपनी जेब से 500 का नोट निकालकर देता हुआ - अरे बिरजू.. ले..

बिरजू पैसे लेकर - कुछ लाना है भईया ज़ी..

गौतम - नहीं यार.. कल तू मेरी वजह से पूरी रात जागता रहा है..

बिरजू - धन्यवाद भईया ज़ी..

गौतम पूनम को बाहों में भरता हुआ - अच्छा बिरजू.. अभी कुछ देर मैं यही तेरे कमरे में इस खाट पर अपनी माँ के साथ सोऊंगा.. तू नीचे बिछा के सो जा.. औऱ दरवाजा बंद कर दे..

बिरजू - पर भईया ज़ी.. आपकी माँ..

गौतम - बिरजू मैं अपनी माँ से सच्चा प्यार करता हूँ.. औऱ मेरी माँ भी मुझसे.. क्यों माँ..

पूनम झिझकती हुई धीरे से गौतम से - बेटा.. इसके सामने..

गौतम अपनी शर्ट उतारकार पूनम को खाट पर लेटाता हुआ - अरे बिरजू की चिंता मत करो माँ.. ये मेरा पक्का दोस्त है किसी को कुछ नहीं कहेगा.. क्यों बिरजू..

बिरजू फर्श पर चटाइ बिछाकर लेटता हुआ - ज़ी भईया..

गौतम पूनम को चूमता हुआ उसके बूब्स पर हाथ फेरकर मसलने लगता है औऱ धीरे धीरे साडी का पल्लू हटाकर ब्लाउज खोलने लगता है.. साडी औऱ ब्लाउज उतारकर एक तरफ करने के बाद गौतम जैसे ही पूनम के पटीकोट के नाड़े पर हाथ लगाता है पूनम गौतम का हाथ पकड़ कर बोलती है..

पूनम - खोलो मत बेटा वैसे ही कर लो..

गौतम - चुदाई तो नंगे होकर ही की जाती है माँ... अब छोडो मेरा हाथ.. पूनम हाथ छोड़ देती है औऱ गौतम पुनम का पेटीकोट भी निकाल देता है.. अब पूनम सिर्फ पैंटी औऱ ब्रा में थी.. गौतम भी अपनी जीन्स खोल चूका था औऱ वो भी चड्डी में था..

बिरजू दोनों से पीठ करके सब सुन रहा था औऱ लेटा हुआ लंड को पज़ामे के ऊपर से हिला रहा था..

गौतम पूनम से - कंडोम पहनु?

पूनम गौतम को चूमकर - नहीं.. मेरे पास गोली है.. बेटा बस थोड़ी शर्म आ रही है..

गौतम बिरजू से - बिरजू मेरी माँ को शर्म आ रही है.. ये लट्टू बंद कर दे.. अंधरा होगा तो शर्म चली जायेगी औऱ खुलके कुछ कर पाएगी....

बिरजू लट्टू बंद करके वापस लेट जाता है औऱ गौतम अपनी चड्डी नीचे सरका कर पूनम की पेंटी नीचे कर देता है औऱ चुत को टटोल कर लंड सेट करता हुआ पुनम से कहता है - मैं अंदर डाल रहा हूँ.. चिल्लाना मत..

पूनम मुस्कुराते हुए - मैं क्यों चिल्लाने लगी बेटा..

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गौतम एक जोरदार धमाकेदार धक्का देखकर

एक बार में अपना सारा का सारा लंड पूनम की चुत में घुसा देता है जिससे पूनम एक दम से पूरी आवाज के साथ चीख पडती है..

बिरजू चिंख सुनकर डरता हुआ खड़ा होकर लट्टू जला देता है औऱ दोनों को देखता है.. खाट पर पूनम पीठ के बल लेटी थी औऱ गौतम उसके ऊपर उसकी चुत में लंड डालकर..

गौतम बिरजू से - लट्टू बंद कर मादरचोद..

बिरजू - पर भईया आपकी माँ..

गौतम गुस्से में - अबे मेरी माँ है मैं कैसे भी चोदू.. तू लाइट बंद कर..

बिरजू लाइट बंद कर देता है..

पूनम की चीख बहुत जोर की थी मगर लोन में बजते dj की आवाज में उसका पाता किसीको चलने वाला नहीं था.. केवल बिरजू औऱ गौतम ही उसकी चिंख सुन पाए थे..

गौतम - बोला था चिल्लाना मत..

पूनम सिसकती हुई - ये क्या डाल दिया तूने..

गौतम - लंड डाला है मेरा औऱ क्या डाला है..

पूनम - इतना बड़ा? मुज्जे तो दर्द होने लगा है..

गौतम चोदना शुरू करते हुए - बिरजू..

बिरजू - हाँ भईया ज़ी..

गौतम - दारु पड़ी है?

बिरजू - नहीं है भईया ज़ी मेरे पास तो..

गौतम - होटल के रूम नम्बर 26 में जा सकता है अभी.. दिन में मैं छोड़ आया था एक बोतल..

बिरजू - ज़ी भईया.. दिन से बंद ही पड़ा है.. शाम को सफाई वाले ने चाबी मुझे ही दी थी.. मैं अभी लाता हूँ..

बिरजू चला जाता है औऱ एक थैले में बोतल ले आता है.. साथ में दो गिलास भी..

गौतम पूनम को धीरे धीरे चोदते हुए - दो लर्ज़ पेग बना बिरजू..

बिरजू पेग बनाकर - लो भईया..

गौतम पेग पूनम को देकर - लो ये पिलो फिर दर्द नहीं होगा..

पूनम गौतम को देखते हुए दोनों पेग पी जाती है औऱ किसी रांड की तरह पेर फैलाकर लेट जाती है एक पेग गौतम भी पी लेता है औऱ फिर से चुदाई का सुभारम्भ कर देता है..

गौतम - अब थोड़ी दर्द हो रहा है?

पूनम - नहीं बेटा.. अब मज़ा आ रहा है..

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घप घप की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था औऱ बिरजू भी झड़ चूका था वो बस दोनों को माँ बेटा समझा कर उनकी चुदाई की कामुक भारी आवाजे सुन रहा था..

गौतम फूल स्पीड में चोद रहा था औऱ पूनम भी मज़े से अब चुदवा रही थी उसे लगा था गौतम मामूली लड़का होगा पर चुदाई के पहले झटके ने उसकी सोच बदल दी.. गौतम ने काफी देर तक सुमन को मिशनरी में छोड़ा और फिर पूनम के झड़ने पर उसे कुतिया बना लिया औऱ चोदने लगा...

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गौतम पूनम को कुतिया बनाकर कुतिया की तरह ही चोद रहा था औऱ साथ में पूनम के बदन की औऱ उसके फिगर की तारीफ़ भी करहा था जिससे पूनम चुदाई के साथ अपनी तारीफ़ सुनकर भी मस्त हो गई थी..

थोड़ी देर कुतिया बनाके चोदने के बाद गौतम ने पूनम को अपने ऊपर ले लिया औऱ नीचे से झटके मारते हुए पेलने लगा.. जिसमे अब वापस पूनम झड़ने को हो रही थी औऱ गौतम भी उसकी कगार पर था.. कुछ देर में दोनों ने एक साथ अपना पानी छोड़ दिया औऱ झड़ गए..

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पूनम की संतुष्टि सातवे आसमान पर थी उसे आज तक ऐसी चुदाई नसीब नहीं हुई थी जिसने उसके रोम रोम को प्रफुलित कर दिया था.. पूनम अपने दोनों हाथों से गौतम को अपने गले से लगाकर अपने ऊपर लेटाए हुए खाट पर पड़ी थी..

गौतम बिरजू को लाइट ऑन करने का बोलकर पूनम से - मज़ा आया माँ?

पूनम हलके नशे में - हां बेटा.. बहुत मज़ा आया..

बिरजू - भईया ज़ी आपका फ़ोन आ रहा है..

गौतम खाट से खड़ा होकर फ़ोन उठाते हुए - अबे इस वक़्त क्यों फ़ोन किया चूतिये?

आदिल - कुछ फोटो भेजी है व्हाट्सप्प पर चेक कर..

गौतम - ऐसा क्या भेज दिया गांडू? आधी रात को चैन नहीं है.. बाद में देखूंगा..

आदिल - तेरी मर्ज़ी भोस्डिके मत देख..

गौतम फ़ोन रखकर पूनम से - माँ चल अब चलते है..

पूनम भी बिरजू के सामने नाटक करते हुए - ठीक है बेटा.. ले चल अपनी माँ को..

बिरजू - भईया ज़ी मेरा भी कुछ करवा दो..

गौतम बनावटी गुस्से में - भोस्दीके माँ है मेरी..तू चोदेगा इसे?

बिरजू - नहीं भईया ज़ी मैं ऐसा नहीं बोल रहा था.

पूनम साड़ी पहनकर - क्यों बेचारे पर चिल्ला रहे हो बेटा..

गौतम - अरे मुंह मत लटका बिरजू.. सुन.. सुबह वो मुन्नी आती ना होटल में.. ले उसे ये दो सो रूपये देकर पेल लेना.. मैंने देखा है उसे कल वॉचमैन के साथ.. उसीने ये बताया..

बिरजू - सच में भईया..

गौतम पूनम को बाहों में लेकर बिरजू के सामने उसके बूब्स पकड़कर - मेरी माँ के बोबो की कसम.. बिरजू..

पूनम - बेटा.. क्या कर रहा है चल अब..

गौतम पूनम को वहां से लेकर होटल की पार्किंग में आ जाता है और गाड़ी में पूनम के साथ बैठ जाता है..

पूनम एक सिगरेट गोतम के होंठों पर लगाकर जलाती हुई - फिर कब मिलने आओगे मुझसे?

गौतम कश लेकर - पता नहीं यार.. कल वापस जा रहा हूँ अजमेर.. लेकिन तुम्हे जब भी मेरी जरुरत हो मुझे फ़ोन कर देना..

पूनम गौतम से सिगरेट लेकर कश मारती हुई - पहली मुलाक़ात में ही तूने मेरे साथ सब कर लिया.. बिलकुल उस मूवी की तरह.. क्या नाम था उसका.. पहली मुलाक़ात..

गौतम - तुमने तो सिगरेट पिने से रोका था..

पूनम - बच्चा समझके रोका था मगर मुझे क्या पता था तुम तो मर्द हो..

गौतम रास्ते में एक सुनसान जगह गाडी रोकता है..

पूनम - क्या हुआ? अभी तो थोड़ा आगे औऱ है..

गौतम - बाथरूम लगा है करके आता हुआ..

पूनम मुस्कुराते हुए गौतम की जीन्स खोलकर उसका लंड हाथ में ले लेती है औऱ गौतम से कहती है - मैं हूँ ना.. मेरे मुंह में कर दो..

गौतम पूनम के हाथ से सिगरेट ले लेता है और बाहर फेंककर उसका सर अपने लंड पर झुकता हुआ उसके मुंह में मूतने लगता है

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जिसे पूनम पी जाती है फिर गौतम को अपने पुरे अनुभव से एक कामुक blowjob देने लगती है..

गौतम गाडी चला कर पूनम की के मोड़ पर गाडी रोक देता है.. आधी रात का वक़्त सुनसान सडक थी औऱ पूनम के मुंह में गौतम का लंड..

गौतम पूनम के सर पर हाथ फेरकर - आपका ठिकाना आ गया आंटी..

पूनम लोडा मुंह से निकालकर - आंटी नहीं बेटा पूनम.. दोस्तों को नाम से बुलाते है...

गौतम - अच्छा ठीक है पूनम.. अब जाओ मुझे भी जाना है.. औऱ कल याद से सोहन काका से जाकर मिल लेना..

पूनम - ठीक है पर ये खड़ा लंड लेकर कहा जाओगे? थोड़ी देर रुको मैं चूसकर झाड़ देती हूँ..

गौतम चूमकर - इतना खुश मत करो.. मैं संभाल लूंगा इसे तुम जाओ..

पूनम - इतना प्यारा दोस्त मिला है खुश तो रखना पड़ेगा ना.. बस पांच मिनट...

पूनम पूरी तन्मयता के साथ लूँ को जोर जोर से औऱ चूसने लगती है औऱ आंड भी चाटने लगती है गौतम प्यार से पूनम के बाल एक तरफ करके उसके सर पर हाथ फेरता हुआ पूनम को लोडा चूसवाता है.. औऱ कुछ देर बाद झड़ जाता है...

पूनम लंड का माल पीकर लोडा साफ कर देती है औऱ गौतम से कहती है - चल बाये बेटा...

गौतम - बाय पूनम..

पूनम मुस्कुराते हुए - अगली बार मिलोगे तो पूरी रात बितानी पड़ेगी मेरे साथ..

गौतम लंड पेंट में डालकर - पक्का पूनम..

गौतम पूनम को उसके घर छोड़कर अपने मामा के घर चल देता है और गाड़ी घर के बाहर पार्क करके घर के अंदर आ जाता है वो देखता है की उसकी नानी मामी भाभी औऱ माँ सब एक कमरे में साथ सो रहे थे जैसे एकसाथ बातें करके यही सो गए हो.. गौतम अपने कमरे में चला जाता है औऱ वो भी सो जाता है....
 
अपडेट 33

गौतम सुबह उठा तो उसने सबसे पहले किशोर कुमार के पुराने गाने लगा कर कान में इयर बड्स लगा लिए औऱ ब्रश करता हुआ बाथरूम में आ गया.. टट्टी करने इंग्लिश पोट पर बैठकर गौतम फ़ोन चलाते हुए फ़ोन देख ही रहा था उसे कल आदिल की बात याद आई औऱ उसने व्हाट्सप्प खोल लिया फिर आदिल के भेजे फोटो देखने लगा..

जैसे ही गौतम ने आदिल की व्हाट्सएप मैसेज पर भेज़ी हुई तस्वीर देखी और उनमें किसी जोड़े की शादी को देखा तो वह हैरत में पड़ गया और अपना सर को खुजाते हुए उसने आदिल को फोन कर दिया...

गौतम ने आदिल से तस्वीर के बारे में पूछताछ की और आदिल ने जवाब दिया कि कल जब वो अपने दोस्त मोनू (फोटोग्राफर) की दुकान पर गया था तब उसने दुकान पर यह तस्वीर देखी.. औऱ वही से इन तस्वीरों की पिक लेकर उसे massage किया..

गौतम ने आगे औऱ कुछ पूछा तो आदिल ने जवाब दिया की ये तस्वीर मोनू ने परसो खींची थी जब उसे एक आदमी ने बुलाया था.. किसी पुराने धार्मिक जगह पर ये शादी हुई थी औऱ गिनती के 3-4 लोग ही उसमे शामिल थे..

गौतम ने फ़ोन रख दिया औऱ फ्रेश होकर बाहर आ गया उसने सबसे पहले रूपा को फ़ोन किया औऱ कहा...

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(रूपा 41)

गौतम चिड़चिड़े पन से - ये क्या मज़ाक़ है?

रूपा - अच्छा तो तुम्हे खबर मिल गई? ये मज़ाक़ नहीं है नन्हे शैतान..

गौतम - माँ को पता चलेगा तो क्या होगा पता है ना?

रूपा - जो भी हो.. अब मैं कुछ नहीं कर सकती..

गौतम - तुम भी ना उड़ते तीर लेती हो.. अब संभालना माँ को आपको ही..

रूपा - मैं देख लुंगी.. तुम मत बताना..

गौतम - बताने के लिए ये कोई ख़ुशी खबर थोड़ी है.. आपने भी ना काण्ड कर दिया फालतू में.. पापा ही मिले थे आपको शादी करने के लिए..

रूपा - अच्छा ये सब छोड़.. ये बता तू केसा है..

गौतम - अब तक ठीक था पर आपने जो बम फोडा है उसके बाद सर दर्द होने लगा है..

रूपा हसते हुए - तू जल्दी से मेरे पास आजा मेरे नन्हे शैतान फिर मैं प्यार से तेरा सर दबाकर तेरा सर दर्द दूर कर दूंगी..

गौतम - हम्म्म..

रूपा - अपना ख्याल रखना नन्हे शैतान..

गौतम - ख्याल तो आप अपना रखना मम्मी.. जब से बाबाजी के पास होके आई हो एक बार भी मुझे अपनी गुफा में घुसने नहीं दिया.. इस बार कोई बहाना नहीं चलेगा..

रूपा - इस बार तुझे जो करना हो कर लेना मेरे नन्हे शैतान.. पर जल्दी से आजा बहुत दिन हो गए तुझे देखे हुए...

गौतम - रखता हूँ मम्मी.. कोई बुला रहा है..

रूपा - बाय गौतम..

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(माधुरी 36)

माधुरी - रूपा तुमने ये अच्छा नहीं किया.. किसी की मज़बूरी का फ़ायदा उठाना सही नहीं है..

रूपा - मैंने कहा किसी की मज़बूरी का फ़ायदा उठाया है माधुरी? मैंने तो बस एक सौदा किया था जगमोहन के साथ.. तुम भी तो राजी थी उसके लिए..

माधुरी - मैं राजी हुई क्युकी मेरे पास औऱ कोई रास्ता नहीं बचा था.. अगर तुम्हारी शर्त नहीं मानती तो जगमोहन को जेल हो जाती औऱ ये घर भी नीलाम हो जाता.. मैं सडक पर आ जाती..

रूपा - जगमोहन जुए में लाखों रुपए हार गया औऱ फिर रिश्वत लेते भी पकड़ा गया तो इसमें मेरी क्या गलती माधुरी? मैंने तो मदद करने की पेशकश की.. तुमने औऱ जगमोहन दोनों ने इसे माना था..

माधुरी - पर मैं ये नहीं समझ पा रही कि तुमने जगमोहन से शादी क्यों की? उसके पास ऐसा क्या है जो तुम्हे चाहिए.. मैंने बताया था तुम्हे कि वो अब किसी काम का नहीं.. ना उसके पासवर्ड कुछ ऐसा है जो तुम्हे वो दे सकता है..

रूपा - मुझे जगमोहन से सिर्फ उसकी पत्नी होने का दर्जा चाहिए था माधुरी.. वो मुझे मिल चूका है.. अब मुझे औऱ किसी की जरुरत नहीं..

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माधुरी - बहुत अजीब बात है रूपा.. तुमने ऐसे आदमी से शादी की जो अब नामर्द बन चूका है औऱ तुम खुश भी हो.. तुमने जगमोहन की नोकरी बचाई उसे जेल जाने से बचाया औऱ अब इस घर पर बाकी लोन भी चुकाने को तैयार हो.. मैं तुम्हे समझ नहीं पास रही..

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रूपा - माधुरी मैं तुम्हारे साथ इस घर में तुम्हारी बड़ी बहन बनकर रह सकती हूँ.. हमें आपस में लड़ने झगड़ने की जरुरत नहीं है.. मैं तुम्हे एक सच्चाई बताना चाहती हूँ..

माधुरी - कैसी सच्चाई रूपा?

रूपा - माधुरी मैंने जगमोहन से शादी इसलिए नहीं की कि मुझे जगमोहन पसंद है या मैं तुम्हारे साथ इस घर में रहना चाहती हूँ.. मेरे जगमोहन से शादी करने का कारण गौतम है.. मैं गौतम सको एक माँ औऱ एक प्रेमिका दोनों का प्यार देना चाहती हूँ..

माधुरी - ये क्या कह रही हो रूपा.. तुम होश में तो हो? गौतम बस एक बच्चा है.. जब उसे इसका पता लगेगा तो वो क्या सोचेगा तुम्हारे बारे में.. औऱ सुमन? सुमन तो तुम्हारी जान ही ले लेगी.. गौतम पर सिर्फ सुमन का अधिकार है..

रूपा - देखो माधुरी.. मैं जानती हूँ कि तुम भी गौतम के साथ उसी तरह रहना चाहती हो जैसे कि मैं.. मैंने कल तुम्हारी औऱ गौतम कि बाते सुनी थी औऱ मैं जानती हूँ तुम भी गौतम से वैसा ही रिश्ता रखना चाहती हो जैसा मैं रखना चाहती हूँ.. मुझसे तुम्हे कुछ छिपाने की जरुरत नहीं है.. हम दोनों मिलकर गौतम का हर तरह से ख्याल रख सकते है.. औऱ रही बात सुमन की तो उसे किसी भी तरह हमें समझाना पड़ेगा कि वो गौतम के साथ यहां हमारे साथ आकर रहे..

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माधुरी - ये तुम क्या बोले जा रही हो रूपा.. सुमन कभी ऐसा नहीं करेगी..

रूपा - सब होगा माधुरी.. मैं तुम औऱ सुमन तीनो इस घर में एक साथ गौतम की माँ बनकर रहेंगी.. सुमन के पीठ पीछे हम गौतम को माँ के साथ साथ उसकी प्रेमिकाएं बनकर भी उसका ख्याल रखेंगी..

माधुरी कुछ देर सोचकर - क्या ये सच में हो सकता है रूपा? क्या ऐसा मुमकिन है? क्या गौतम हम दोनों के साथ वैसा रिश्ता रखेगा?

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रूपा - हाँ माधुरी.. ऐसा जरुर होगा.. अब किसी तरह बस सुमन को यहां रहने के लिए राजी करना होगा.. मुझे पता है जब वो तुमपर गुस्सा है औऱ जब मेरी औऱ जगमोहन की शादी के बारे में जानेगी तब मुझपर भी गुस्सा होगी.. मगर हमें किसी भी तरह उसे मनाना होगा..

माधुरी कुछ देर ठहर कर - ठीक है रूपा.. मैं तैयार हूँ.. आज से हम दोनों बहने बनकर रहेंगी.. सुमन को मनाने में मैं तुम्हारी हर तरह से मदद करूंगी..

रूपा माधुरी के गले लगते हुए - मैं जानती थी माधुरी तुम जरुरत मेरी बात मान जाओगी..

माधुरी भी रूपा को गले लगाकर - बहन.. मैं तुम्हारे साथ हूँ.. तुम्हारी तरह मैं भी गौतम के बिना नहीं रह सकती..


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रूपा - मैं समझ सकती हूँ माधुरी.. गौतम ने मेरी तरह तुम्हे भी अपना दीवाना बना दिया है..

माधुरी - उसकी क्या गलती रूपा.. उसके प्यारा सा चेहरा मीठी बातें औऱ मर्दानगी किसी को भी अपना गुलाम बना सकती है..

रूपा - सच में माधुरी..

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गायत्री - कुछ दिन औऱ रुक जाती सुमन..

सुमन - माँ.. आप तो जानती है वहा कितना काम पड़ा है? ग़ुगु के आखिरी एग्जाम भी आने वाले है..

गौतम सीढ़ियों से नीचे उतरता हुआ - उनमे अभी समय है माँ.. हम 2-3 दिन औऱ नानी के साथ रह सकते है..

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आरती मुस्कुराते हुए - अब तो आप खुश है बुआ.. मेरे देवर ज़ी ने भी रुकने के लिए हामी भर दी है..

गौतम आरती को देखकर - अब आपने ख्याल ही इतना रखा है मेरा.. आपका कहा कैसे टाल सकता हूँ..

गायत्री - सुमन अब तो हमारे ग़ुगु ने भी कह दिया है अब तो रुकना ही पड़ेगा तुझे कुछ औऱ दिन मेरे साथ..

सुमन - पर माँ..

संजय - पर वर कुछ नहीं सुमन.. रुकना है तो रुकना है.. समझी?

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(कोमल 42)

कोमल - अरे शबनम.. कहा मर गई तू..

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(शबनम 30)

शबनम - आई मालकिन..

कोमल - कल से देख रही हूँ तू आहूत कामचोरी करने लगी है..

शबनम - नहीं मालकिन वो पैर में हलकी सी मोच आ गई थी इसलिए थोड़ा धीरे चल रही हूँ..

संजय - अब तेरे भी मेरो में मोच आ गई? माँ पता नहीं क्या हो रहा है? पहले कोमल फिर आरती बहु औऱ आपके मोच आई अब इस शबनम के भी मोच आ गई..

सुमन गौतम को देखकर - पत्थर की जगह पहाड़ से जाकर टकरायेगी तो मोच तो आएगी ना भईया..

संजय - मतलब सुमन?

सुमन - कुछ नहीं भईया.. सबको कहो देखकर चले.. मोच नहीं आएगी..

शबनम सबको चाय देते हुए गौतम के पासवर्ड आकर - ग़ुगु भईया चाय..

गौतम चाय लेते हुए धीरे से शबनम को - thanks मालकिन..

शबनम मुस्कुराते हुए वापस रसोई में चली जाती है..

चेतन बाहर से हॉल में आते हुए - पापा जीजाजी का फ़ोन आया था.. वो ऋतू को लेकर आने ही वाले है..

गौतम - कल विदाई हुई थी आज वापस भी आ रहे है..

गायत्री हसते हुए - ग़ुगु.. विदाई के बाद दुल्हन को पगफेरे की रसम के लिए वापस अपने माइके आना होता है..

सुमन - रहने दो माँ.. अंग्रेजी स्कूल में जाकर इसे ये सब रस्म औऱ रीवाज ढकोसला लगने लगा है..

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कोमल गौतम का गाल चूमते हुए - ऐसा क्यों कहती हो सुमन.. मेरा ग़ुगु तो कितना प्यारा है.. शादी वाले दिन मेरे ग़ुगु के सामने कोई औऱ नहीं नज़र ही नहीं आ रहा था.. चादन सा है मेरा ग़ुगु..

सुमन से कोमल जलते हुए - इतना लाड प्यार करने की जरुरत नहीं है भाभी.. ये पहले ही बहुत बिगड़ चूका है औऱ मत बिगाडो इसे..

कोमल - अरे बिगड़ना तो रईसो का शोक रहा है.. अब मेरा ग़ुगु जवानी में नहीं बिगड़ेगा तो कब बिगड़ेगा?

सुमन को कोमल से अब औऱ जलन होने लगी थी औऱ समझ रही थी कोमल क्या करने की कोशिश कर रही है उसने कहा - रहने दो भाभी.. मेरा ग़ुगु कोई रईस नहीं है..

कोमल गौतम के बाल सहलाते हुए - ऐसा क्यों कहती हो सुमन.. इतना सब तुम्हारे भईया ने जो कमाया है उसे खर्च करने वाला भी तो कोई चाहिए... ग़ुगु नहीं करेगा तो कौन करेगा? आखिरी ग़ुगु भी इसी घर का बेटा है..

सुमन से इस बारहा ना गया तो उसने कहा - मैं औऱ मेरा ग़ुगु जिस हाल मैं है खुश है भाभी.. आपको अगर आपके पैसे उड़ाने के लिए कोई वारिश चाहिए तो भईया के साथ एक बच्चा औऱ कर लीजिये...

कोमल सुमन की बात सुनकर मन ही मन सुमन पर झल्ला रही थी औऱ उसे दो चार खरी खोटी सुना देना चाहती थी मगर सबके वहा होने से वो ये बातें मन ही मन दबा गई.. संजय औऱ गायत्री जानते थे की कोमल बाँझ है औऱ सुमन ने अभी अभी उसे ताना मारा था..

गायत्री ने बात सँभालते हुए कहा - अरे अब कोमल को क्या जरुरत है बच्चा करने की.. हमारा ग़ुगु है तो.. चेतन तो संजय की तरह ही काम धंधे में घुस गया.. औऱ ऋतू पराई हो गई.. अब तो आरती से उम्मीद है वो हमें खुशखबरी दे दे..

आरती मुस्कुराते हुए गौतम को देखकर रसोई में चली गई..

गायत्री - देखो कैसे शर्मा के चली गई गई..

संजय - माँ मुझे एक जरुरी काम से बाहर जाके आना है.. एक घंटे में आ जाऊंगा दामाद ज़ी आये तो आप संभाल लेना..

चेतन - पापा मैं भी चलता हूँ..

कोमल - अरे यहां भी तो कोई होना चाहिए..

चेतन - आप लोग हो ना.. ग़ुगु भी तो है..

कोमल सुमन की बातों को दिल में बैठा चुकी थी उसे अपने बाँझ होने का दुख हो रहा था औऱ सुमन पर गुस्सा आ रहा था.. कोमल छत पर बने कमरे के पीछे कोने में सिसकती हुई खड़ी हो कर आंसू बहाने लगी थी..

गौतम जानता था की कोमल को सुमन की उस बात का कितना दुख पंहुचा है.. इसलिए गौतम कोमल के पीछे पीछे कुछ देर बाद ही छत पर आ गया था..

गौतम ने रो रही कोमल को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया औऱ कोमल की गर्दन चूमते हुए कहा..

गौतम - मामी आपके मुंह से रोते हुए सिसकियाँ अच्छी नहीं लगती बल्कि चुदवाते हुए सिसकियाँ अच्छी लगती है..

कोमल गौतम को देखकर आंसू पोछते हुए - तू कब ऊपर आया बेटा? बता तो देता.. मैं रो नहीं रही थी.. मेरी आँखों में तो कचरा चला गया था..

गौतम कोमल को अपनी तरफ घुमाकर दिवार से स्टाते हुए - मुझसे झूठ बोलोगी तो ऐसी गांड मारूंगा मामी अगले दस दिन रेंगति हुई चलोगी.. समझी? माँ की बात का बुरा लगा ना आपको?

कोमल मुस्कुराते हुए - मुझे क्यों सुमन की बात का बुरा लगने लगा बेटा? मैं तो यूँ ही ऋतू को याद करके रो रही हूँ..

गौतम ब्लाउज के ऊपर से कोमल के चुचे पकड़तकर मसलते हुए - मामी आपको झूठ बोलना भी नहीं आता..

कोमल अपने बूब्स ओर से गौतम का हाथ हटाती हुई - ग़ुगु.. कोई आ जायेगा.. बंद कमरे वाली चीज़े खुले में मत करा कर.. ये बोलकर कोमल गौतम को पीछे कमरे में ले जाती है.. औऱ अपनी साडी का पल्लू गिराते हुए गौतम के सामने घुटनो ओर बैठकर उसकी जीन्स खोलते हुए लंड हाथ में लेकर कहती है - सुबह से मेरे आगे पीछे घूम रहा था.. मैं तभी समझ गई थी आज मेरी इज़्ज़त खतरे में है..

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गौतम कोमल को लोडा चूसाते हुए - अब आप हो ही इतनी ब्यूटीफुल मामी.. आपको देखकर दिल कैसे ना करें चोदने का.. रात को तो आप सो गई थी वरना रात को ही मैं आपको प्यार करता..

कोमल मुंह से लंड खड़ा करके खड़ी होती हुई - इतनी जरुरत थी तो जगा लेता ग़ुगु.. मैं कुछ कहती थोड़ी तुझे..

गौतम कोमल को उस कमरे के बेड पर लेटा कर साडी ऊपर करके चड्डी नीचे सरकता हुआ - आप सोते हुए प्यारी लग रही थी मामी.. मुझे जगाना सही नहीं लगा..

ये कहते हुए गौतम ने अपना लंड कोमल की चुत में डाल दिया औऱ धीरे धीरे प्यार से चोदने लगा..

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कोमल गौतम को चूमकर आहे भरते हुए - आज क्या बात है ग़ुगु.. तू इतना प्यार से कर रहा है.. उस दिन तो जान निकाल दी थी तूने.. आज बहुत प्यार आ रहा है तुझे अपनी मामी पर?

गौतम चोदते हुए - मामी आप हो ही इतनी प्यारी.. प्यार तो आएगा ही औऱ आपकी चुत भी बहुत टाइट है.. खामखा जोराजोरी में बेचारी को दर्द सहना पड़ेगा..

कोमल - मेरी इतनी परवाह है तुझे ग़ुगु? काश तू मेरा अपना बच्चा होता.. फिर देखती वो सुमन की बच्ची कैसे मुझे इतना सब सुनाती..

गौतम कोमल को पलटकर पीछे से चुत चोदते हुए - मामी आप भी तो माँ को इतना सब सुना देती हो.. आप दोनों की कैट फाइट किसी फ़िल्मी मूवी से ज्यादा मसालेदार होती है..

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कोमल मुस्कुराते हुए - मैं तेरी माँ से कितना भी लडू ग़ुगु.. तू कभी मुझसे नाराज़ मत होना.. मैं बहुत प्यार करती हूँ तुझे..

गौतम हलके तेज़ धक्के मारते हुए - जानता हूँ मामी.. आप तो मेरी गर्लफ्रेंड हो.. औऱ इतनी टाइट चुत वाली गर्लफ्रेंड से नाराज़ नहीं होता मैं..

कोमल सिसकियाँ लेते हुए - ग़ुगु बेटा.. फ़ोन आ रहा है..

गौतम चुदाई रोककर साइड में पड़े फ़ोन को उठाते हुए - आपका आ रहा है मामी..

कोमल फोन उठाकर - हेलो..

चेतन - माँ जीजाजी.. दस मिनट में पहिचने वाले है..

कोमल - औऱ तु अपने पापा के साथ कब आ रहा है?

चेतन - हम निकल चुके है आधा घंटा लग जाएगा..

कोमल फ़ोन काट कर - ठीक है..

कोमल - ग़ुगु बेटा जल्दी कर दस में ऋतु आने वाली है..

गौतम वापस चुदाई शुरू करता हुआ - ठीक है मामी बस पांच मिनट औऱ.. ये कहते हुए गौतम सुमन की चुत में ताबड़तोड़ झटके मारने लगा जिससे कोमल औऱ ज्यादा सिसकियाँ भरने लगी..

कोमल सिसकिया भरते हुए - बेटा थोड़ा धीरे.. ग़ुगु.. आह्ह... बेटा आराम से.. आह्ह.. ग़ुगु धीरे चोद बेटा अपनी मामी को..

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गौतम - मामी आप लग ही इतनी प्यारी रही हो.. कहा था ना चुदवाते हुए सिसकियाँ लेती हुई अच्छी लगती हो.. रोते हुए नहीं..

कोमल झड़ते हुए - ग़ुगु.. आहहह... बेटा...

गौतम कोमल के साथ झड़ते हुए - आहहह... मामी मैंरा भी हो गया..

कोमल औऱ गौतम एक साथ झड़े औऱ मुस्कुराते हुए कोमल गौतम को बेतहाशा चूमती हुई प्यार करने लगी.. फिर दोनों ने खड़े होकर अपने आपको ठीक किया..

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कोमल मुस्कुराते हुए गौतम का गाल खींचकर - बस.. हो गयी इच्छा पूरी? अब तो खुश मेरा ग़ुगु?

गौतम मुस्कुराते हुए कोमल का हाथ चूमकर - बहुत खुश मामी.. जितना फेशन आप करती हो.. आपको देखकर कोई नहीं कह सकता आपकी इतनी टाइट होगी..

कोमल - तुझे मज़ा आया ना बेटा..

गौतम - बहुत मामी..

कोमल - ग़ुगु तू सुमन को समझा ना.. यही क्यों नहीं रह जाती वो तुझे लेकर.. क्यों ज़िद पर अड़ी हुई है.. मैं जानती हूँ उसके औऱ जगमोहन के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा.. वहा उस छोटे से पुलिस क्वाटर में कब तक दिन गुजारेगी?

गौतम - आप खुद ही क्यों नहीं समझा देती मामी.. मेरे समझाने से तो वो नहीं समझेगी.. उनकी औऱ आपकी लव स्टोरी भी तो बहुत उलझी हुई है..

कोमल गौतम के गाल सहला कर हसते हुए - चुप पागल.. चल नीचे.. ऋतू आ गई लगता है..

***********

राहुल ऋतू, ऋतू की सास औऱ ससुर सब हॉल में बैठे हुए थे.. उसके साथ गायत्री सुमन आरती औऱ अब कोमल भी आ बैठी थी.. नाश्ता सामने टेबल रखा था.. हंसी ख़ुशी का माहौल था.. शबनम चाय बना रही थी औऱ शबनम के पीछे गौतम उसे इधर उधर छू कर छेड रहा था जिस पर शबनम मुस्कुराते हुए बार बार गौतम को छूने से रोक रही थी..

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गौतम ने थोड़ा सा मौका पाकर शबनम की कमर पर अपने हाथों से चीकूटी काट ली औऱ शबनम गौतम की तरफ बनावटी गुस्से वाली आँखों से देखती हुई धीरे से बोली बोली..

शबनम - अब कुछ किया तो थप्पड़ पड़ेगा..

गौतम मुस्कुराते हुए गाल आगे करके - मारो ना मालकिन..

शबनम रसोई के दरवाजे को देखकर जल्दी से एक प्यार भरा चुम्मा गौतम के गाल पर करके एक धीमा सा थप्पड़ मार देती है..

गौतम शबनम को पकड़कर बाहों में भरता हुआ - गाल पर भी कभी चुम्मा होता है मालकिन? चूमा तो होंठों से होंठ मिलते है तब होता है..

शबनम दरवाजे को देखती हुई - छोड़ ग़ुगु कोई आ गया तो मेरी नोकरी चली जायेगी..

गौतम होंठ आगे करके - पहले चुम्मा दो मालकिन तभी छोडूंगा..

शबनम जल्दी से गौतम के होंठ चूमकर - बस अब छोड़..

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गौतम शबनम को छोड़कर - चाय बनाने के बाद छत पर आ जाना मालकिन.. साथ में एक सुट्टा मारेंगे..

शबनम - अभी नहीं ग़ुगु.. मालकिन बुला लेगी मुझे.. बाद में..

गौतम शबनम का बोबा दबाकर - ठीक है मालकिन..

शबनम मुस्कुराते हुए गौतम को धक्का देकर - अब जा यहां से.. वरना कोई देख लेगा..

गौतम रसोई से हॉल में आ जाता है..

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आरती गौतम का हाथ पकड़कर अपने पास बैठाते हुए - देवर ज़ी आओ.. हमारे साथ भी बैठो.. देखो आपकी दीदी.. आते ही आपके बारे में पूछ रही है.. मैंने भी कह दिया हमने अभी तक देवर ज़ी को कहीं जाने नहीं दिया औऱ रोक कर रखा है..

गौतम ऋतू को देखकर - भाभी दीदी की बोलती बंद है.. लगता है वापस आकर अच्छा नहीं लगा दीदी को..

ऋतू सरक कर अपने बगल में जगह बनाती हुई - तू इधर आ मेरे पास.. अभी बताती हूँ तुझे..

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गौतम उठकर ऋतु के पास बैठ जाता है.. औऱ ऋतू गौतम का कान पकड़कर - कब से आकर बैठी हूँ औऱ तू है की छिपा हुआ था?

राहुल हसते हुए - आराम से ऋतू.. भाई है तुम्हारा..

ऋतू की सास बबिता - हा ऋतू.. कितना जोर से कान खींचा है तूने.. दर्द होगा बेचारे को..

ऋतू - कुछ नहीं होगा इसे.. जब देखो मुझे सताने के बहाने ढूंढता रहता है..

सुमन - ऋतू आराम से बेटा..

ऋतू - आप बीच में मत बोलो बुआ.. जब से गई हूँ सबने फ़ोन किया है एक इसी बेशर्म को मेरी याद नहीं आई..

गौतम कान छुड़ाते हुए - अच्छा सॉरी ना.. छोडो..

संजय औऱ चेतन भी आकर सोफे पर बैठ जाते है..

सब हंसी ख़ुशी के माहौल में थे आपस में बातें कर रहे थे शबनम चाय की ट्रे लाकर चाय बाँट देती है औऱ नाश्ता करते हुए सब चाय पिने लगते है.. कुछ देर इसी तरह बातें करने के बाद में रितु अपने कमरे में चली जाती है और उसके कुछ देर बाद गौतम भी ऋतु के कमरे में चला जाता है..

गौतम ऋतू को गले लगता हुआ - बहुत खूबसूरत लग रही हो ऋतू.. याद आई मेरी रात में?

ऋतू - कमीने.. तेरी याद में तो नींद भी नहीं आई.. पता नहीं कैसे रहूंगी तेरे बिना अब..

गौतम - चिंता मत कर ऋतू.. मैं टाइम टाइम पर आता रहूँगा तुझसे मिलने.

ऋतू अपनी साडी उठाकर गौतम का लंड निकालकर अपनी चुत में घुसाती हुई - काश में तेरी दुल्हन बन पाती मेरे भाई.. तुझसे मिलने के लिए छुपना नहीं पड़ता..

गौतम चोदना शुरु करते हुए - फ़िक्र मत कर मेरी बहना जल्दी ही कोई ना कोई औऱ उपाय खोज लेंगे हम दोनों...

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ऋतू चुदवाते हुए - मैं तो कल से तेरे इस लंड के बारे में ही सोच रही थी ग़ुगु.. बहुत मस्त औऱ मोटा है.. काश हर रात ये मेरे नसीब में होता.. पता नहीं कौन इसे हर रात अपनी चुत में लेगी.. भाई तू वादा कर मुझे हर दम ऐसे ही प्यार करेगा..

गौतम - ऋतू तू मेरी बहन है जो कहेगी मैं मरते दम तक वही करूँगा.. बस मुझे अपनी ये गांड दे दे

ऋतू - आज नहीं भाई.. वक़्त नहीं है.. कभी फुर्सत में लेना मेरी गांड.. अभी मेरी चुत से काम चला ले.. अगली बार मैं खुद तेरे सामने अपनी गांड परोस दूंगी..

गौतम - वादा कर रही है ऋतू.. भूलना मत.. अगली बार गांड नहीं दी तो जबरदस्ती ले लूंगा..

ऋतू - ले लेना भाई.. मेरे ऊपर तेरा पूरा हक़ है.. अभी जल्दी कर नहीं तो भाभी आ जायेगी..

गौतम चोदते हुए - बस बहाना झड़ने वाला हूँ तेरी चुत में..

ऋतू - मैं भी झड़ने वाली हूँ भाई.. साथ में झड़ते है.. आहहह...

गौतम रितु एक साथ झड़ जाते हैं और फिर कुछ देर बाद एक दूसरे को देखते हुए बातें करने लगते है..

ऋतू - विक्रम का फ़ोन आया था..

गौतम - क्या बोला उसने?

ऋतू - माफ़ी मांग रहा था.. मैंने कह दिया वापस नज़र आया तो वीडियो नेट पर वायरल कर दूंगी..

गौतम - अच्छा किया बहना.. अब सबसे बचा के रखना अपनी चुत का अनमोल गहना..

ऋतू गौतम को चूमते हुए - वापस जाना पड़ेगा भाई..

गौतम - फ़ोन करती रहना बहना.. अगली बार मिलने का इंतजार रहेगा..

ऋतू - मुझे भी..

ऋतु रस्म निभाकर शाम को वापस चली जाती है औऱ अगले दो दिन गौतम गायत्री कोमल आरती औऱ शबनम की जहा मौका मिलता है वही चुदाई करता है.. औऱ आज सुमन के साथ वापस अजमेर जाने को तैयार था.. दोनों दोपहर को अजमेर के लिए निकलने वाले थे औऱ अभी सुबह हो रही थी..

***********

देवर ज़ी कुछ दिन औऱ रुक जाओ ना.. आपके बिना सब कुछ सुना हो जाएगा फिर से..

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रुकना तो मैं भी चाहता हूँ भाभी.. मगर क्या करू? आप तो जानती है माँ को अब अगर मैं कुछ बोलूंगा तो वो मुझे कितना सुनाएंगी..

आरती जीन्स के ऊपर से गौतम के लंड पर हाथ फिराती हुई - बहुत ख्याल रखा है अपने अपनी इस भाभी का देवर ज़ी.. औऱ बहुत सुख भी दिया है.. आप तो कुछ दिनों में दिल के अंदर इतना गहरा उतर गए कि सागर की गहराई भी उसके आगे कुछ नहीं है.. मैंने आपका कितना दिल दुखाया कितना कुछ बोला मगर आपने मुझे कितना प्यार किया.. मुझे माफ़ कर देना देवर ज़ी..

गौतम आरती के होंठ पकड़कर - कितनी ड्रामेबाज़ हो आप भाभी.. मैंने कहा ना हर महीने आपसे मिलने आऊंगा.. आप फ़िक्र मत करो.. आपकी चुत को वापस सिकुड़ने नहीं दूंगा..

आरती मुस्कुराते हुए - शुक्रिया देवर ज़ी..

गौतम - सुबह सुबह आपकी चुत से शुरुआत हुई है.. लगता है आज दिन अच्छा जाएगा मेरा..

आरती छत पर से नीचे जाते हुए - वापस चाहिए तो बता दो देवर ज़ी मैं कुछ नहीं बोलूंगी..

गौतम - अब थोड़ा वक़्त लगेगा भाभी..

आरती - ठीक है देवर ज़ी..

आरती छत से नीचे चली जाती हैऔऱ उसके कुछ देर बाद चेतन ऊपर आ जाता है..

यहां अकेला क्या कर रहा है ग़ुगु..

कुछ नहीं चिंटू भईया बस कुछ सोच रहा था..

क्या सोच रहा था ग़ुगु?

भाभी के बारे में भईया.. भाभी ने बहुत ख्याल रखा है मेरा..

चेतन मुस्कुराते हुए - ख्याल तूने भी अपनी भाभी का बहुत रखा है.. वो बता रही थी कैसे तू उसका सबसे प्यारा साथी बन गया..

गौतम - कहा चेतन भईया.. मैं बस थोड़ा हंसबोल लिया भाभी से.. भाभी इतने में ही खुश हो गई..

चेतन - ग़ुगु मैं भी तुमसे सिर्फ 6 साल बड़ा हूँ.. मुझे चिंटू ही कहकर बोल.. जैसे पहले बोला करता था.. ये फॉर्मेलिटी छोड़ दे..

गौतम - ठीक है चिंटू..

चेतन - अच्छा तूने एग्जाम के बाद का क्या सोचा है?

गौतम - कुछ नहीं.. बस कोई जॉब कर लूंगा औऱ क्या..

चेतन - पागल हो गया है हम जॉब देते है करते नहीं है.. तू एग्जाम के बाद बुआ को लेके यही आ जाना.. यहां अपना कितना काम है उसे कौन संभालेगा..

गौतम - नहीं चिंटू.. माँ कभी इस बात के लिए राज़ी नहीं होगी..

चेतन - ग़ुगु.. मैं जानता हूँ बुआ नहीं मानेगी मगर वो तेरी बात मानने से इंकार नहीं करेगी.. औऱ कल रात आरती भी तेरे जाने का सोच कर रो रही थी..

गौतम - भाभी रो रही थी.. मगर अभी तो उन्होंने कुछ नहीं बताया उसके बारे में..

चेतन - औरत को बात छुपीना औऱ बताना अच्छे से आता है ग़ुगु.. मैं जान चूका हूँ कि वो तुझसे प्यार करने लगी है तेरे बिना नहीं रह पाएगी... उसकी ख़ुशी के लिए एक बार कोशिश करना..

गौतम - चिंटू.. भाभी तुम्हारी पत्नी है..

चेतन - काहेकि पत्नी ग़ुगु.. उसे कभी पत्नी वाला सुख तो मैं दे ही नहीं पाया.. मैं सुबह से रात तक इसलिए दूकान पर रहता हूँ कि मुझे आरती की बातें उसके ताने ना सुनने पड़े.. मगर जब से तू आया है उसने एक बार भी मुझसे गुस्से में या अपने अड़ियलपन से बात नहीं की.. ग़ुगु मैं जानता हूँ तू अपनी भाभी के साथ सो चूका है.. तूने उसे वो सुख दिया है जो एक मर्द से एक औरत चाहती है..

गौतम नज़र झुका - मैं बहका गया था चिंटू.. मैं भाभी के साथ वो सब नहीं करना चाहता था मगर अपने आप सब होता चला गया.. मुझे माफ़ कर दे..

चेतन - ग़ुगु.. इसमें माफ़ी वाली कोई बात नहीं है.. मैं तो खुश हूँ कि तू आरती का ख्याल रख रहा था.. मैं अब भी वही चाहता हूँ.. तू ऐसे ही आरती का ख्याल रखे.. मुझे तेरे औऱ आरती के रिश्ते से कोई ऐतराज़ नहीं है..

ग़ुगु - मैं जानता हूँ चिंटू तू ऐसा क्यों बोल रहा है.. तू चिंता मत कर भाभी को मैं अच्छे से खुश रखूँगा.. वो तुझे परेशान नहीं करेंगी.. औऱ अब तू अपनी जिंदगी भी खुलकर ज़ी सकता है.. यूँ घुट घुट कर जीने की तुझे क्या जरुरत? दुनिया की परवाह छोड़ दे चिंटू.. दुनिया ने किस किस को क्या कुछ नहीं बोला..

चिंटू - मैं समझ नहीं पाया ग़ुगु.. तू कहना क्या चाहता है..

ग़ुगु चिंटू का हाथ पकड़ कर - चल दोनों भाई कहीं घूम के आते है..

चिंटू - कहा ग़ुगु..

ग़ुगु - अभी पता चल जाएगा..

गौतम चिंटू के साथ कहीं चला जाता है औऱ किसी को कुछ massage करता है...

गौतम चिंटू को लेकर एक फाइव स्टार होटल की तरफ आ गया था जहा किसी फ़िल्म की स्टार कस्ट ठहरी हुई थी.. गौतम चिंटू को लेकर एक रूम में आ गया था..

चिंटू - ग़ुगु मुझे यहां क्यों लेकर आया है? मुझे दूकान जाना है..

ग़ुगु - थोड़ी देर वेट करो चिंटू.. सब पता चल जाएगा..

चिंटू - तू क्या कर रहा है मेरी समझ ही नहीं आता..

गुगु - चिंटू मैं जानता हूँ तुझे लड़कियों में कोई दिलचस्पी नहीं है.. तू गे है.. औऱ तू ये बात अब तक सबसे छीपाता आया है.. मगर अब तुझे इस तरह घुट घुट कर जीने की कोई जरुरत नहीं..

चिंटू हैरानी से - ग़ुगु कैसे?

गौतम - चिंता मत करो चिंटू.. मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगा औऱ ना ही तुझे ऐसे घुट घुट के जीने दूंगा..

चिंटू शरमाते हुए - तुझे कैसे पता ग़ुगु.. मेरे बारे में..

गौतम - शादी वाली रात की अगली सुबह.. जब मैं टहल रहा था तब मैंने देखा था.. तू जिस आदमी के साथ था उसे रात को मैने ही बुलाया था..

दरवाजा की बेल बजते ही गौतम दरवाजा खोलकर - आओ वसीम.. किसी ने रोका तो नहीं..

वसीम - ऐसी जगह हमारे जैसे गरीब लोगों तो रोका ही जाता है भईया.. पर आपने रिसेप्शन पर बोला हुआ था इसलिए ज्यादा तकलीफ नहीं हुई आने में..

गौतम - वसीम.. अब से तुम्हे ये काम करने की जरुरत नहीं.. मेरा भाई तुम्हे काम पर रखना चाहता है.. जितना तुम महीने में कमाते हो उससे दुगुनी तनख्वाह मिलेगी.. काम सिर्फ इतना की मेरे भाई को हर दम खुश रखना होगा...

वसीम - जैसा आप बोले..

गौतम चेतन की तरफ इशारा करते हुए - जाओ वसीम भईया इंतजार कर रहे है..

वसीम चेतन के पास जाकर प्यार से उसके होंठ चूमने लगता है औऱ चेतन शर्माते हुए ग़ुगु को देखकर वसीम को रोकते हुए - ग़ुगु सुन.. ग़ुगु..

गौतम रूम से बाहर जाते हुए - एन्जॉय करो भईया..

ये कहकर गौतम रूम से बाहर आ जाता है औऱ दरवाजे पर डु नॉट डिस्टर्ब का sign लटका कर जैसे ही पीछे मुड़ता है उसका पैर फिसल जाता है औऱ वो इस रूम के जस्ट सामने वाले रूम में आगे की तरफ जाते हुए जमीन पर गिर जाता है..


नेक्स्ट अपडेट ों 50 लाइक्स
 
Thanks❤️

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👍🏿

भाई कहानी मैं अपने हिसाब से ही लिखूंगा..

पिछली बार की तरह लोगों की सुनके कहानी की माँ बहन नहीं करूँगा..

औऱ तर्क कुतर्क के चक्कर में मैं नहीं पड़ता.. जो सही लगता है लिखता हूँ.. वो किसी औऱ के हिसाब से सही हो या ना हो.. सो मुंह सो बातें.. हर किसी पर ध्यान नहीं देता..

किसी औऱ के हिसाब से कहानी लिखना या कहानी में बदलाव करना मेरी आदत नहीं है..

मैंने किसी के गले पर तलवार रखके नहीं कहा की मेरी तारीफ़ करो.. ना ही बुराई करने पर किसी को गोली मारी.. जिसका जो मन होता है कमेंट करके चला जाता है.. मुझे किसी से कोई परहेज नहीं है..

Comments करना ya ना करना.. कहानी पढ़ना या ना पढ़ना सबकी व्यक्तिगत चॉइस है.. उसके लिए ना मैं किसी को बोलता हूँ ना बोलूंगा..
 
अपडेट 34



गौतम जैसे ही रूम के अंदर दाखिल होता हुआ जमीन पर गिरता है वह देखता है कि इस रूम में घनघोर अंधेरा था और कोई भी इस कमरे में नहीं था.

गौतम जैसे तैसे उठकर अपने आप को संभालते हुए पीछे मुड़कर बाहर जाने की तरफ होता है कि कोई औरत रूम के अंदर एक तरफ से आते हुए दरवाजे को बंद कर देती है औऱ अँधेरे में गौतम को कोई औऱ समझकर उसके हाथ में कंडोम देती हुई बेड पर अपनी साडी उठाकर घोड़ी बनती हुई गौतम से कहती है..

औरत - डायरेक्ट साहब.. आप भी कभी भी याद कर लेते है.. इंटरव्यू को बीच में छोड़कर ब्रेक लेके आई हूँ.. एक घंटे है जल्दी कीजिये..

कमरे में इतना अंधेरा था कि कोई एक दूसरे की शक्ल देखना तो दूर एक दूसरे को आसपास खड़ा हुआ भी देख कर नहीं पहचान सकता था कि वह कौन है.. सिर्फ लोग एकदूसरे की परछाई को ही देख सकते थे.. गौतम ने बिस्तर पर घोड़ी बनी हुई औरत की मोटी गांड देखी तो उसके लंड में अकड़न आने लगी.. उसे लगा कि मौका अच्छा है.. और गौतम मौके पर चौका मारे बिना नहीं रह सकता था..

गौतम ने जल्दी से जीन्स नीचे सरका कर बिना कंडोम पहने लंड पर थूक लगाया औऱ औरत के बाल पकड़ कर पीछे से उसकी चुत पर लोडा सेट करके एक जोरदार धक्का मार दिया..
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जिससे गौतम का पूरा लंड औरत की चुत चिरता हुआ एक ही बार उसमें घुस गया मगर साथ में औरत की हालात भी खराब कर गया..

लंड घुसते ही औरत इतनी जोर से चीखी की गौतम घबरा गया.. होटल के रूम अगर साउंड प्रूफ नहीं होते तो औरत की आवाज होटल के बार खड़ी जनता को भी साफ साफ सुनाई दे जाती..

औरत चीखने के बाद दो तीन मिनट तकिये में मुंह देकर पड़ी रही फिर अपने फ़ोन की फ्लेशलाइट ऑन करके अपना चेहरा पीछे घूमती हुई गौतम को देखने लगी..

गौतम औऱ उस औरत ने फ्लेशलाइट में एकदूसरे की शकल देखी तो दोनों हैरानी से एकदूसरे को देखने लगे.. गौतम औरत का चेहरा देखकर हैरान औऱ रोमांचित हो उठा.. घोड़ी की जगह अब औरत पेट के बल बेड पर पड़ी हुई थी औऱ गौतम उसकी चुत में लंड डाले उसके ऊपर पड़ा हुआ था..

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गौतम औरत का चहरा देखकर बोला..

गौतम - बिग फन ma'am...

औरत गौतम को ऊपर से धक्का देकर पलट जाती है औऱ एक जोरदार थप्पड़ गौतम को जमाती हुई कहती है - what the fuck who you are?

गौतम तप्पड़ खाने के बाद असंतुलित होकर वापस औरत पर गिर गया औऱ उसका लंड फिर से संयोगवश औरत की चुत में अपने आप घुस गया जिससे वापस औऱत की चिंख निकल गयी औऱ वो आह्ह.. करते हुए अपनी चुत में गौतम के तगड़े मोटे लंड को महसूस करती हुई सिसक उठी..

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गौतम चुत की गर्माहट औऱ टाइटनेस महसूस करते हुए चोदे बिना नहीं रह सका औऱ चोदते हुए बोला - सॉरी ma'am.. गलती से चला गया.. मैं आपका बहुत बड़ा फन हूँ... आपकी सारी फिल्मे वेबसीरीज देखता हूँ.. आपकी तारे जमीन ओर तो मैंने 50 से ज्यादा बार देखी है..

औरत की चुत में गौतम के लंड से तहलका मच चूका था वो लंड की सख़्ती औऱ उसके घेराव को महसूस करते हुए कामुकता औऱ मादकता से भर चुकी थी.. गौतम बिना किसी का लाज शर्म या हया के उसी तरह औरत के ऊपर पड़ा हुआ उसे चोदने लगा था.

गौतम रोमांचित औऱ ख़ुशी से भरा हुआ था गौतम एक पल को भूल गया था की उसका शैतानी लंड औरत की गहराई में घुसा हुआ उसे चोद रहा है गौतम वापस बोला..

गौतम - tisca ma'am आप मेरी फेवरेट हो.. सच कहु तो आपके आगे करीना कटरीना दीपिका मुझे सब पानी कम चाय है...

(Tisca Chopra 51)

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गौतम ने इतना कहा ही था की दरवाजे पर रिंग हुई..

Tisca ने गौतम को धक्का देकर बगल में गिरा दिया औऱ बेड से उठने लगी.. जैसे ही tisca उठी उसकी जांघ कापने लगी औऱ उसे चुत पर अजीब सा महसूस हुआ उसने हाथ लगाया औऱ देखा तो फ्लेशलाइट में उसे हल्का सा खून दिखा.. Tisca ने फलेश गौतम पर डाल कर गुस्से में एक नज़र गौतम को देखा फिर दरवाजा खोलने बढ़ गई.. गौतम डरकर बेड के पासअलमारी के अंदर छिप गया..

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Tisca लंगड़ती हुई धीरे धीरे दरवाजे तक पहुंची औऱ लाइट ऑन करके दरवाजा खोलकर बाहर देखने लगी..

कमरे के बाहर एक आदमी खड़ा हुआ था जिसने दरवाजा खुलने पर tisca से कहा - tisca it's an emergency.. I have to go to the airport.. Sorry i bothered you & ruin your interview.. इतना कहकर आदमी वहा से चला गया..

Tisca ने दरवाजे के बाहर डु नोट डिस्टर्ब का sign लटका दिया औऱ दरवाजा बंद करके वापस लंगड़ती हुई अंदर आ गई.. Tisca ने टेबल पर वाटर बोतल से पानी गिलास में डाला औऱ पूरा गिलास पानी पीकर वही पड़े सिगरेट के पैकेट से सिगरेट निकालकर लाइटर से सुलगाते हुए दो - तीन कश लेकर बेड को देखने लगी जहा सफ़ेद चादर पर खून की 3-4 बून्द गिरी हुई थी. tisca ने अपनी चुत को लाइट के उजाले में देखा तो पाया की चुत पर हल्का सा खून लगा हुआ था औऱ उसकी चुत में अब कुलबुलाहत हो रही थी जो इस बात का संकेत थी कि उसे गौतम के लंड पसंद आ गया था..

Tisca ने मुस्कुराते हुए अपनी चुत को सहलाया औऱ सिगरेट के अगले कश मारते हुए कुछ सोचने लगी फिर अलमीरा के सामने आकर अलमीरा खोलते हुए गौतम को अंदर बैठा हुआ देखती है जो अब अपनी जीन्स ठीक से पहन चूका था.. लाइट के उजाले में tisca को गौतम बहुत खूबसूरत औऱ प्यारा सा लड़का लगा था लेकिन जो हरकत उसने अभी उसके साथ की थी उस वजह से tisca गौतम को गुस्से भरी आँखों से देख रही थी..

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गौतम tisca को देखकर अलमीरा से बाहर आते हुए - sorry ma'am.. गलती से आपके रूम आ गया था.. वैसे आप टीवी पर जितनी खूबसूरत दिखती हो उससे कहीं ज्यादा रियल में हो.. मैं अपने फ्रेंड्स को बताऊंगा तो उन्हें यक़ीन ही नहीं होगा..

Tisca गौतम को चुपचाप खड़ी हुई देख सुन रही थी औऱ सिगरेट के कश खींचते हुए धुआँ छोड़े जा रही थी..

गौतम आगे फिर कहता है - आपकी न्यू मूवी आ रही है ना सावन की रात? मैंने ट्रेलर देखा था उसका.. मूवी बहुत अमेज़िंग लग रही है...अच्छा ma'am मैं जाता हूँ.. Sorry for troubling you..

गौतम इतना कहकर जाने के लिए पीछे मुड़ा ही था कि tisca ने गौतम के कान पकड़कर वापस अपनी तरफ घुमा लिया औऱ सिगरेट का आखिरी कश लेकर सिगरेट बुझाते हुए गौतम को धक्का देकर बेड पर गिरा दिया औऱ उसके ऊपर चढ़ती हुई गौतम की जीन्स को पकड़कर खोलने लगी.. जीन्स का बटन खोलने के बाद चैन नीचे करके जीन्स नीचे सरका कर tisca ने गौतम को देखा तो पाया कि गौतम चुपचाप tisca को ऐसे देख रहा था जैसे कोई सपना हो..

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Tisca गौतम का लंड एक हाथ में पकड़कर सहलाती हुई हैरानी से उसके लंड को देख रही थी औऱ बार बार गौतम के चेहरे को देखकर दूसरे हाथ से गौतम के गाल बाल औऱ गले पर उंगलियां फिरा रही थी..

Tisca ने अच्छे से गौतम के लंड का जायजा लिया फिर मुस्कुराते हुए गौतम के होंठ पर अपने होंठ रखकर एक प्यार से भरा हुआ चुम्बन करके बोली..

Tisca - क्या age है तेरी?

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गौतम ऐसे tisca को देख रहा था जैसे उसे साँप सूंघ गया हो..

Tisca ने वापस पूछा - 18 का तो है ना तु?

गौतम में इस बार हाँ में सर हिला दिया औऱ tisca ने गौतम के लंड पर अपना मुंह लगा दिया..

Tisca ने गौतम के लंड को मुंह में लेकर चूमते हुए चूसना शुरु कर दिया औऱ गौतम अपनी पसंदीदा मिल्फ हीरोइन के मुंह से blowjob का सुख अनुभव करके सातवे आसमान पर पहुंच चूका था..

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Tisca लंड के साथ साथ दोनों बॉल्स भी मुंह में लेकर बड़ी आराम औऱ प्यार से चाट औऱ चूस रही थी.. इसके साथ ही वो बार बार प्यार औऱ काम वासना की निगाह से गौतम को देख रही थी जिससे गौतम भी अब लाज शर्म उतारने लगा था..

Tisca ने थोड़ी देर लंड चूसकर गौतम को पीछे धकेल दिया औऱ अपनी साडी उतारकर फेंकते हुए पटीकोत ऊपर करके गौतम के लंड के ऊपर बैठने लगी औऱ उसका लंड अपनी चुत में लेते हुए बोली..
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Tisca - नाम क्या है तेरा?

गौतम - ma'am गौतम..

Tisca कुछ सोचकर - गौतम... निक नेम ग़ुगु... तू वही है ना जो हर सुबह औऱ शाम मुझे इंस्टा पर गुडमॉर्निंग baby गुडनाइट baby का massage सेंड करता है हार्ट के साथ?

गौतम - ज़ी.. ma'am बहुत बड़ा फन हूँ आपका..

Tisca मुस्कुराते हुए लंड पूरी तरह चुत में लेकर अपनी गांड हिलाते हुए - बड़ा कहा इतना छोटा सा तो है तू.. बस तेरा ये सामान बहुत बड़ा है.. पहली बार किसी इंडियन के पास इतना बड़ा औऱ मजबूत सामान देखा है.. वो भी किसी बच्चे के पास..

गौतमआहे भरते हुए - बीस साल का हूँ ma'am.. बच्चा नहीं हूँ..

Tisca - मैं 51 की हूँ.. मेरे सामने तो छोटा सा baby ही है तू..

गौतम नीचे से झटके मारते हुए - आपको देखकर लगता नहीं की आप 51 साल की हो.. ऐसा लगता है आप अभी भी 25 की हो..

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Tisca सिसकियाँ लेते हुए अपने ब्लाउज के बटन खोलती हुई - मेरे साथ फल्ट कर रहा है? तेरे सामान के साथ साथ तुझे भी अपनी चुत में अंदर डाल लुंगी.. समझा baby?

गौतम - ma'am सच में.. आप बहुत प्यारी लगती हो मुझे.. आप इतनी बड़ी एक्ट्रेस हो.. मेरा ड्रीम था आपसे मिलना.. मगर ऐसे मुलाक़ात होगी कभी सोचा नहीं था..

Tisca ब्लाउज बेड के एक तरफ पटक कर - कैसी बड़ी एक्ट्रेस baby... हर दिन किसी ना किसी डायरेक्ट प्रोडूसर का बिस्तर गर्म करना पड़ता है तब जाकर छोटा मोटा रोल मिलता.. हमारे जैसी एक्ट्रेस कॉलगर्ल के जैसी होती है.. किसी भी फंक्शन या इवेंट में आधी नंगी होकर पब्लिक को सेड़ूस करती है ताकि पब्लिक में डीमाड बनी रहे औऱ फिर किसी ना किसी मर्द के बिस्तर में जाकर उसे खुश करती है ताकि छोटा मोटा रोल या कोई काम मिल सके..

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गौतम - ma'am मुझे नहीं मालूम था आपकी लाइफ इतनी हार्ड है.. मैंने तो आजतक आपको टीवी पर देखा है या न्यूज़ पेपर में पढ़ा है..

Tisca मुस्कुराते हुए - रोज़ किसी ना किसी को देती हूँ आज देने की जगह तेरी लुंगी...

गौतम tisca का हाथ पकड़ कर साइड में गिरा देता है औऱ मिशनरी में उसके ऊपर आता हुआ लंड का धीमा झटका मारके कहता है - नहीं ma'am.. आज भी आपको देनी ही पड़ेगी..

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औऱ फिर मिशनरी में tisca की चुत को तबाह करने के मिशन पर लग जाता है, अपने झटको की रफ़्तार तेज़ करते हुए गौतम tisca को ताबड़तोड़ चोदने लगता है जिससे tisca की चुदाई की आवाज के साथ साथ उसकी सिस्कारिया भी पुरे कमरे में जोर जोर से गूंजने लगी थी..

इधर tisca के चुदने की शुरुआत हो चुकी थी उधर वसीम औऱ चेतन का एक राउंड कम्पलीट हो चूका था औऱ अब दूसरे राउंड में चेतन वसीम का लंड मुंह में लेकर चूस रहा था..

चेतन ने वसीम औऱ वसीम ने चेतन की गांड चोद कर गुलाब के जैसी खिला दी थी औऱ दोनों में आपसी समझ औऱ कामइच्छा भी पनपने लगी थी..

गौतम बिस्तर पर tisca को खिसका खिसका के चोद रहा था औऱ tisca किसी सस्ती रांड के जेसी टांगे चौड़ी करके गौतम के लंड के जोरदार झटके खाती हुई चिल्ला रही थी..

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गौतम tisca को ऐसे चोद रहा था जैसे वो 50 साल की औरत नहीं बल्कि बाली उम्र की जवान कमसिन कली हो..

गौतम ने tisca की गांड पकड़कर डोमिनट करते हुए उसे घोड़ी बना लिया औऱ बाल पकड़ कर घोड़ी की सवारी करने लगा..

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Tisca लंड के आगे बेबस लाचार औऱ बेचारी सी बनाकर गौतम के झटके खाते हुए अह्ह्ह्ह... उह्ह्ह... की आवाजे निकालने के सिवा कुछ औऱ नहीं कर सकती थी..

गौतम tisca को घोड़ी बनाकर उसकी चुत में लोडा घुसाकर धक्के पर धक्के लगा रहा था जिसके कारण थप थप औऱ घप घप की मधुर आवाज दोनों के कानो में पड़ रही थी..

गौतम ने चोदते हुए tisca कि ब्रा का हुक खोल दिया जिससे अब tisca पूरी तरह नंगी हो चुकी थी..

गौतम ने बाल छोड़कर अब दोनों हाथों से tisca कि कमर को थाम लिया औऱ पूरे जोर से झटके मारने लगा जिससे tisca की पूरी ताकत के साथ चिल्लाती हुई पीछे गौतम को देखकर उसका हाथ पकड़ते हुए अपने आप को छुड़वाने लगी मगर गौतम ने झटके पर झटके मारकर tisca की चुत का जाइका लेने में कोई कसर नहीं छोडी..

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Tisca बेबसी औऱ लाचारी से अपनी 51 साल पुरानी महल जैसी चुत को खंडर बनते हुए देख रही थी औऱ उसका दर्द महसूस करते हुए जो सुख मिल रहा था उसे भोग रही थी.. उसे लुटने में भी मज़ा आ रहा था..

गौतम ने चोदते चोदते tisca की कमर को अच्छे से पकड़ कर उठा लिया औऱ दिवार से चिपका कर छिपकली वाले पोज़ में पीछे से झटके मारते हुए चोदने लगा..

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Tisca के पैरों में कम्पन था मगर गौतम उसकी कमर को अभी भी थामें हुए था औऱ अच्छे से सटा कर tisca को पेल रहा था.. Tisca अब झड़ने लगी थी औऱ झड़ने के साथ ही उसने मूत भी दिया था मगर गौतम को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा वो बस चोदे जा रहा था..

दोनों की चुदाई पिछले आधे घंटे से चल रही थी औऱ Tisca आंनद के अथाह सागर में डूबती हुई गौतम की चुदाई का स्वाद लेते हुए उसपर मोहित हो चुकी थी.. गौतम ने छिपकली बनाकर चोदते हुए tisca के पैर उठा दिए औऱ अब दिवार से स्टाकार tisca को चोदने लगा.. Tisca किसी बेजान खिलोने से गौतम के आगे बेबस होकर चुदवाए जा रही थी जिसमे मज़ा उसे भी आ रहा था.. गौतम में अब tisca को पलटकर अपनी तरफ घुमा लिया औऱ उछाल उछाल कर चोदने लगा

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गौतम के हर झटके पर tisca का बदन ऐसे हिल रहा था जैसे हवा की आंधी में पत्ते हिलते है.. Tisca अब गौतम को कसके पकड़ रही थी औऱ वापस कामुक निगाह से गौतम को देखकर अपनी चुदाई का मज़ा ले रही थी..

गौतम tisca को उछाल उछाल कर चोदता हुआ अपने चरम पर आने लगा था औऱ वो tisca को अब अपने ऊपर लेटाने के लिए खुद बेड पर गिर गया था औऱ tisca गौतम के ऊपर थी..

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Tisca की चूत का चोबारा बन चूका था मगर उसे मिलते सुख के करण उसे इसका अंदाजा नहीं था.. Tisca ने गौतम के लंड पर अपनी चुत रगढ़ते हुए गांड हिलाना शुरु कर दिया औऱ जोर जोर गौतम के लंड को अपनी चुत में आगे पीछे करने लगी जिससे अब दोनों को झड़ने में ज्यादातर वक़्त नहीं लगा औऱ गौतम बिना कंडोम tisca की चुत में झड़ गया औऱ tisca भी गौतम के बाद झड़ गई..

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गौतम औऱ tisca यूँ ही बहुत देर तक बिना कुछ बोले एक दूसरे की बाहों में पड़े रहे फिर tisca का फ़ोन बजा तो उसने फ़ोन उठाकर बात करना शुरु किया..

Tisca - हेलो..

एक आदमी - where are you? interview is pending.. They asking for you..

Tisca - i don't feel well.. can you postpone this till the night..

आदमी - are you okey?

Tisca - i am okey.. I just want some time.. You know? Please do it for me..

आदमी - okey tisca.. I'll manage..

Tisca फ़ोन काट कर साइड में रख देती है औऱ एक नज़र गौतम पर डाल कर कहती है..

Tisca मुस्कुराते हुए - कुछ चाहिए तुम्हे?

गौतम भोलेपन से - जो चाहिए था आपने दे दिया ma'am.. अच्छा मैं अब जाता हूँ..

Tisca गौतम के सीने के ऊपर अपनी छाती टिकाकर - लेटे रहो चुपचाप.. बाद में जाना.. And Give me your contact नंबर baby..

गौतम tisca के फ़ोन में अपना नंबर सेव करते हुए - सॉरी ma'am.. आपको दर्द हुआ..

Tisca - अच्छा ये बताओ मैं सच में तुम्हारी फेवरेट हूँ या बस ऐसे ही बोल रहे थे?

गौतम - no ma'am.. Seriously.. मैं बहुत बड़ा fan हूँ आपका.. मेरे सब दोस्तों को भी पता है.

Tisca - thanks baby.. तूने बहुत थका दिया मुझे.. मैं थोड़ी देर सो जाऊ ऐसे ही तेरे ऊपर?

गौतम - ज़ी ma'am.. You don't need to take my permission..

Tisca गौतम के होंठ चूमते हुए - such a good boy.. मैं washroom होके आती हूँ.. जाना नहीं.. Okey?

गौतम हाँ में सर हिलाता है औऱ tisca लंगड़ती हुई बाथरूम में चली जाती है..

सुमन फोन पर - कहा है ग़ुगु? आज वापस भी जाना है..

गौतम - माँ चिंटू भईया के साथ हूँ.. आज जाने का मन नहीं है कल सुबह चलते है वापस..

सुमन - तू भी ना.. चल ठीक है..

गौतम - बाय माँ..

सुमन - बाय बच्चा..

गौतम आदिल को फ़ोन करता है..

आदिल - बोल रंडी..

गौतम - अबे रंडी होगी माँ..

आदिल आह्ह करते हुए - वो तो है ही..

गौतम अटपटी आवाज सुनकर - अबे क्या कर रहा है गांडु? ये आवाज कैसी है?

आदिल - भाई अम्मी को पेल रहा हूँ..

गौतम - शबाना मान गई? क्या बात है यार.. झंडे गाड दिए तूने तो...

आदिल - झंडे तो तूने गाड़े थे रंडी.. अम्मी बता रही थी कैसे कैसे चोद के गया था तू.. बहुत तारीफ़ करती है तेरी.

गौतम हसते हुए - भाई तेरी अम्मी है ही चोदने लायक़ तो क्या करता? बहुत प्यार से चुदवा रही थी..

आदिल - वापस कब आ रहा है भाई?

गौतम - कल आऊंगा यार..

आदिल - अच्छा अम्मी को बात करनी है तुझसे.. ले बात कर.

शबाना - हेलो.. गौतम?

गौतम - हाँ अम्मी.. कैसी हो?

शबाना - बस बेटा.. अच्छी हूँ.. तुझे याद नहीं आती मेरी?

गौतम - याद तो बहुत आती है अम्मी पर क्या करू? मज़बूरी है.. वैसे आदिल ज्यादा तंग तो नहीं करता ना..

शबाना - क्या बताऊ बेटा.. ये तो इसके अब्बू के दूकान जाने के बाद फ़ौरन मेरी चुत में घुस जाता है औऱ फिर शाम तक घुसा ही रहता है.. पिछले 7 दिनों में 17 बार चोद चूका है फिर भी इसे आराम नहीं है..

आदिल - भाई अम्मी की चुत है 17 नहीं 70 बार भी चोद लु तब भी मन नहीं भरेगा..

गौतम हसते हुए - ये तो सच कहा तूने भाई.. मैं वापस आता हूँ फिर दोनों सैंडविच बनाकर तेरी अम्मी को साथ में चोदेगे.. क्यों अम्मी चुदेगी ना हम दोनों से साथ में?

शबाना - मेरी चुत को लंड की लत लगा दी तुने.. तुम जो बोलोगे मुझे करना ही पड़ेगा ना..

आदिल - अच्छा भाई फ़ोन रखता हूँ.. पहला राउंड है आज का..

गौतम - अरे रुक लोडे.. तुझे कुछ बताना है?

आदिल - क्या भाई?

गौतम - तुझे पता है मेरी फेवरेट..

आदिल - tisca chopra..

गौतम - हाँ.. अभी अभी उसे पेला है..

आदिल - चल ना रंडी.. सुबह सुबह में ही मिला हूँ तुझे? किसी औऱ को चुतीया बनाना..

गौतम - मत माने गांडु.. तेरी मर्ज़ी..

आदिल - कैसे मानु भोस्डिके? कोई सबूत है तेरे पास?

गौतम - अभी वीडियो कॉल पे तेरी बात करवाता हूँ रुक जा..

आदिल - ठीक है मैं इंतजार कर रहा हूँ.. देखता हूँ तू ने ली है या किसी औऱ को पेल के बकचोदी कर रहा है..

गौतम फ़ोन काट कर एक तरफ रख देता है औऱ tisca बाथरूम से वापस आकर गौतम के ऊपर चढ़कर उसे बाहों में भरके सोने लगती है..

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गौतम - ma'am..

Tisca मुस्कुराते हुए - हम्म्म..

गौतम - ma'am.. मेरे एक फ़्रेंड को आप हेलो बोल दोगी तो सबको मैं बता सकता हूँ आप मुझसे मिली थी..

Tisca गौतम के गाल सहलाते हुए - बात कराओ..

गौतम वीडियो कॉल करता है..

आदिल - हेलो..

गौतम - ma'am..

Tisca फ़ोन लेकर - हेलो..

आदिल हैरानी से - हेलो.. आप..

Tisca - हाउ आर यू?

आदिल हाथ हिलाते हुए - मैं ठीक हूँ मैडम..

गौतम - अब तो यकीन आया?

आदिल - हाँ भाई..

गौतम - चल अब फ़ोन रख.. टाइम नहीं है मेरे पास..

आदिल - भाई सेल्फी लेकर आना..

गौतम - हां हां ठीक है.. फ़ोन काट देता है.. Thanks ma'am..

Tisca smile करती हुई - your welcome baby..

Tisca गौतम के सीने के ऊपर आराम करती हुई नींद में खो जाती है औऱ गौतम भी चेतन से बात करके उसी तरह सो जाता है..

गौतम की जब आँख खुलती है वो देखता है की वो अकेला बिस्तर पर नंगा लेटा हुआ था औऱ tisca आईने के सामने एक फ्रॉक पहनकर सिगरेट के कश लेते हुए तैयार हो रही थी. Tisca ने जब मुड़कर गौतम को देखा तो tisca बोली..

Tisca - उठ गए baby.. नींद कैसी आई?

गौतम - बहुत गहरी.. शाम हो गई?

Tisca सिगरेट पीती हुई - हाँ.. 5 घंटे सो कर उठे हो.. कुछ लोगे.. चाय कॉफ़ी जूस?

गौतम उठकर tisca को बाहों में भरते हुए - चुत ma'am... चुत दे दो एक बार औऱ..

Tisca हसते हुए - आधे घंटे बाद इंटरव्यू है.. दोपहर से बैठे है वो लोग..

गौतम tisca से सिगरेट छीनकर फेंक देता है औऱ tisca को उठाकर बिस्तर पर पटकते हुए - मैं ज्यादा टाइम नहीं लूंगा ma'am.. Promise..

Tisca अपनी फ्रॉक उठाकर पेंटी खिसकाते हुए - मुंबई बुलाऊंगी तो आओगे ना तुम?

गौतम चुत में लंड घुसते हुए - आप मांगोलिया बुलाओगी तब भी दौड़ा चला आऊंगा.. Ma'am..

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Tisca चुदवाते हुए - baby.. स्लोली.. दोपहर से तेरे कारण स्वलिंग हो रही है.. कितना हार्ड किया था तुने.. अब प्यार से करो वरना नहीं करने दूंगी..

गौतम - सॉरी ma'am.. मेरे कारण आपकी फुद्दी सूज गई.. Ma'am.. मुझे सेल्फी चाहिए आप दोगी ना..

Tisca हसते हुए - फ़ोन रख बुद्धू.. ऐसी हालात में सेल्फी लेगा क्या..

गौतम प्यार से चोदते हुए - सॉरी ma'am..

Tisca गौतम को kiss करते हुए - किसने नाजुक लब है तेरे..

गौतम - बच्चों जैसे ना? मेरी gf भी यही कहती है..

Tisca - बच्चा ही तो है तू.. वरना जो काम तुमने दोपहर में किया था अगर तेरी जगह कोई बड़ा होता तो जेल में डलवा देती.. अब जल्दी कर इंटरव्यू है औऱ फिर फ्लाइट भी..

गौतम मुस्कुराते हुए - ma'am एक बात बताऊ.. आपको बुरा तो नहीं लगेगा..

Tisca - बोल ना..

गौतम - आपके नाम पर बहुत मुट्ठी मारी है मैंने.. मेरे बाथरूम की दिवार का कलर बदल गया मेरे मुठ से.. मेरा ड्रीम था आपके साथ ये सब करने का..

Tisca हस्ती हुई - अब तो ड्रीम पूरा हो गया अब तो मास्टर्बशन नहीं करेगा ना.. मुझे याद करके..

गौतम - पक्का नहीं कह सकता ma'am.. याद आ गई तो करना भी पड़ सकता है..

Tisca - जब भी करें मुझे massage करके बता जरुर देना.. अब जल्दी कर.. मेरा तो हो भी गया लगता है..

गौतम - ma'am.. एक रिक्वेस्ट है...

Tisca - अब क्या रह गया baby?

गौतम धीरे धीरे चोदते हुए - ma'am.. Blowjob..

Tisca - नहीं baby.. लिपस्टिक खराब हो जायेगी.. बहुत टाइम लगेगा.. तू चुत से काम चला ले..

गौतम बच्चों सा मुंह बनाके - प्लीज ना..

Tisca एक नज़र गुस्से से देखकर - अच्छा ला..

गौतम बेड पर खड़ा हो जाता है औऱ tisca घुटनो पर बैठके लोडा चूसने लगती है..

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गौतम - उफ्फ्फ.. Ma'am.. आपके ऊपरी होंठ तो नीचे के होंठों से भी मज़ेदार है.. कितना अच्छा blowjob देती हो आप..

Tisca पूरी मेहनत के साथ लंड चुस्ती है औऱ कुछ देर में गौतम का वीर्यपान कर लेती है..

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Tisca - baby अब चल.. जा यहां से.. मुझे भी जाना है.. औऱ contact में रहना..

गौतम कपडे पहनकर प्यार से - जाने से पहले ma'am एक लव बाईट मिलेगी..

Tisca मुस्कुराते हुए गौतम की शर्ट हटाकर उसके निप्पल्स को मुंह में लेती हुई पहले चाटती औऱ चुस्ती है औऱ फिर दाँत से खींचती हुई निप्पल्स के बगल में एक lovebite कर देती है औऱ फिर कहती है..

Tisca अपनी लिपस्टिक ठीक करके - चल अब मैं निकलती हूँ.. बाय gugu baby..

गौतम भी जाते हुए - बाय ma'am...

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मॉडरेटर इस नॉट हैप्पी विथ शमले स्टफ.. एंड वांट में तो रिमूव ठोस सीन्स..

सून ी विल चेंज ठोस सीन्स..
 
अपडेट 35



मैंने बुलाया तब नहीं आई.. अब किसकी शादी में आई हो?

मेरे बस में थोड़ी है आना जाना.. इस बार असलम लेके आया है मुझे..

अच्छा बताओ कोनसी जगह हो जयपुर में?

गौतम यहां खतरा है आने की सोचना भी मत..

तुझसे मिलने हर खतरा उठा सकता है तेरा आशिक रेशमा.. तू जगह बता..

बाबा समझो वहां सब लोग है जगह भी नहीं है मिलने की..

वो सब मैं देख लूंगा कुतिया तू अड्रेस सेंड कर.

अच्छा ठीक है पर दूर ही रहना यहां लोग बहुत खराब औऱ पुरानी सोच के है.. तेरे साथ मुझे भी सजा देंगे..

तू अड्रेस सेंड कर ना कुतिया.. औऱ किसीकी शादी में आ रहे हो तुम दोनों.. वो भी बताना..

ठीक है कुत्ते.. करती हूँ.. मुझे भी बहुत तलब है तुझे देखने की.. कल शाम को मिलती हूँ...

**************

सुमन कमरे में आती हुई - ग़ुगु? ग़ुगु?

गौतम बाथरूम से - हां माँ?

सुमन - सुबह तो नहाया था बेटा अब क्यों नहा रहा है फिर से..

गौतम - कहीं जाना है..

सुमन - अब कहा जाना है तुझे? कल पूरा दिन बाहर था घर से... आज वापस जाना है?

गौतम - अरे माँ कल तो सारा टाइम चिंटू भईया के साथ दूकान पर था.. आप उनसे पूछ लो..

सुमन - अच्छा ठीक है.. वैसे जाना कहा है.

गौतम - एक स्कूल फ्रेंड के यहां.. कल अचनाक मिल गया था.. उसने बुलाया है उसकी बहन की शादी है आज..

सुमन - अच्छा.. लड़की की शादी है.. कहा है शादी.. कोनसी जगह है?

गौतम - उनके घर पर है.. हबीबगंज में.. बेचारा गरीब दोस्त है माँ..

सुमन - अपने से भी ज्यादा गरीब है?

गौतम - बहुत ज्यादा..

सुमन - तो फिर लड़की को कुछ अच्छा तोहफा देकर आना.. कंजूसी मत करना..

गौतम बाथरूम का दरवाजा खोलकर सुमन का हाथ पकड़ते हुए उसे अंदर खींचकर - आप भी चलो..

सुमन - मुझे नहीं जाना.. तू ही जा.. औऱ बेशर्म कम से कम चड्डी तो पहन ले..

गौतम सुमन को बाहों में भरके - चड्डी पहन कर कौन नहाता है माँ..

सुमन - अरे छोड़ ग़ुगु.. गिला करेगा क्या मुझे भी?

गौतम - मैं तो कब से कहना चाहता हूँ माँ आप ही मना कर रही हो..

सुमन अपने आप को छुड़ाकर - चाय लेले.. बाहर टेबल पर रखी है.

गौतम - माँ हर बार चाय दोगी क्या? कभी अपनी चुत भी दे दो..

सुमन गौतम के गाल पर हलकी सी चपत लगाकर बाथरूम से बाहर जाते हुए - घर में सबकी चुत मिल तो रही है तुझे.. मेरी मारके क्या करेगा..

गौतम - सबमे औऱ आपमें फर्क है माँ..

सुमन अलमीरा से कपडे निकाल कर - क्या फर्क है? जैसे उन सबकी है वैसी मेरी है..

गौतम तौलिये से सर के गीले बाल पोंछता हुआ - तो फिर दे क्यों नहीं देती? कब से तड़पा रही हो.. औऱ क्या निकाला है? मैं सूट पहन कर नहीं जाऊँगा..

सुमन - अच्छा लगेगा तुझपर ग़ुगु..

गौतम तौलिये से बदन पोंछकर बेड पर ड़ालते हुए - अरे मुझे अजीब लगेगा यार माँ..

सुमन - ठीक ये कोट रहने दे.. अब खुश?

गौतम चड्डी पहनते हुए - ठीक है.. ये बेस्ट है..

सुमन जूते निकाल कर - ग़ुगु.. माधुरी से बात की तूने?

गौतम कपडे पहनते हुए - हाँ कल बात की थी.. हमें अपने घर बुला रही थी छोटी माँ..

सुमन मुंह बनाते हुए - उसका घर कैसे हुआ?

गौतम बेड पर बैठकर - अरे छोडो ना माँ.. घर उनके नाम पर हो या आपके.. क्या फर्क पड़ता है.. छोटी माँ कह रही थी कि वही आकर रहना पड़ेगा आपको औऱ मुझे.. आपसे बात भी करना चाहती थी..

सुमन अलमीरा से परफ्यूम निकालकर गौतम को लगाते हुए - तो क्यों नहीं बात करवाई तूने? औऱ उस कमीनी की तो नज़र है ही तुझपर.. तभी तो मान गई.. उस कमीनी को तो छूने तक नहीं दूंगी तुझे..

गौतम - जलन हो रही है आपको?

सुमन परफ्यूम लगाकर - मुझे क्यों उस चुड़ैल से जलन होगी भला? ऐसा है ही क्या उसके पास?

गौतम - छोटा ग़ुगु है ना..

सुमन गुस्से में - असली कमीना तो तू है.. कितना प्यारा सा है मगर सबको पागल करके रखा हुआ है.. रूपा भी फ़ोन पर सिर्फ तेरी बातें करती रहती है..

गौतम अपनी माँ का हाथ पकड़ कर सुमन को अपनी गोद में लंड पर अच्छे से टिका कर बैठाते हुए - अच्छा क्या क्या बातें करती है रूपा मेरे बारे में..

सुमन - यही कि तू कब सोया कब उठा? क्या पहना? क्या खाया? ठीक है या नहीं.. तुझे पैसे की जरुरत है क्या? फलाना डिमखाना.. मैंने तो कल कह दिया.. अरे मैं माँ हूँ ग़ुगु की.. उसका ख्याल रखना आता है मुझे..

गौतम मुस्कुराते हुए - पापा के बारे तो बात नहीं की ना आप दोनों ने..

सुमन - तेरे पापा में ऐसा है ही क्या जो कोई उसके बारे में बात करेगा? अब जाने दे..

गौतम - इतनी भी क्या जल्दी है माँ बैठी रहो ना कुछ देर..

सुमन - तू मुझे सारी रात भी अपने लंड पर बैठा के रखेगा तो भी चुदने के लिए हाँ नहीं करुँगी.. समझा? (होंठ चूमकर) तू मेरा बेटा है औऱ बेटा ही बनकर रहना पड़ेगा तुझे..

गौतम खड़ा होते हुए - माँ आप ना.. अपनी चुत पर ताला लगवा लो.. किसीको देनी तो है नहीं आपको..

सुमन हसते हुए गौतम को बाहो में भरके चूमती हुई - तू ही ले आ बाजार से एक ताला खरीद कर औऱ लगा दे अपनी माँ की चुत पर..

गौतम सुमन को पीछे करते हुए - छोडो यार माँ.. जाने दो..

सुमन मुस्कुराते हुए अपनी साडी उठाकर चूत दिखाती हुई - गुगु.. सुसु आ रहा है..

गौतम मुस्कुराते हुए सुमन को बेड पर धकेल कर उसकी चुत पर अपने होंठ लगाते हुए चूसने लगता है.. औऱ सुमन गौतम के बाल पकड़ कर उसके मुंह में मूत देती है मगर मूत पीने के बाद भी गौतम सुमन की चुत से अपना मुंह नहीं हटाता औऱ सुमन की चुत चाटने लगता है जिससे सुमन कामुक होती हुई अपनी चुत अपने बेटे को चुसवाने लगती है औऱ कुछ देर की चूसाईं के बाद अपना माल भी गौतम के मुंह में छोड़ देती है..

गौतम माल पीकर मुंह साफ करते हुए - सुबह क्या मूली खाई थी आपने.. कितना अजीब टेस्ट था आज आपकी चुत का..

सुमन गौतम की बात पे हसकर कमरे से जाते हुए - खाई नहीं थी ग़ुगु घुसाईं थी मैंने तो..

गौतम हैरानी से - अच्छा ज़ी.. अब ये सब करने लगी हो आप..

सुमन दरवाजे पर जाकर - क्यों.. नहीं कर सकती मैं?

गौतम पानी पीते हुए - कर सकती हो आपके नसीब में खीरे मूली ही है.. छोटी माँ के नसीब में है छोटा ग़ुगु तो..

सुमन गुस्से में - तेरी छोटी माँ की चिटनी बना दूंगी अगर अब मेरे छोटे ग़ुगु को हाथ भी लगाया तो..

गौतम सुमन की चुची पकड़कर उसको दरवाजे से हटाते हुए - वो तो आप जानो औऱ छोटी माँ जाने.. अभी मुझे जाने दो.. वरना आप इतनी सेक्सी लग रही हो मैं कोई काण्ड ना कर दू आज.. फिर उस न्यूज़ पेपर में हमारी न्यूज़ आ जाएगी..

सुमन प्यार से हसते हुए - ठीक है जा.. अपना ख्याल रखना..

गौतम जाते हुए - ठीक है..

***********

(रेशमा 23)

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कहाँ तक पहुंची कुतिया?

क्या बताऊ यार रास्ते में बाइक खराब हो गई असलम की.. कब से यहां खड़े है..

असलम क्या कर रहा है?

क्या करेगा साला.. बाइक को देख रहा है औऱ सही करने में लगा हुआ है..

अड्रेस बता कुतिया.. कहा खड़ी है.. मैं निकल चूका हूँ घर से..

अरे ये vip रोड पर मदन स्वीट्स के पास.. पर तू यहाँ आके क्या करेगा?

तेरी चुत में उंगली करूंगा कुतिया..

असलम - फोन में क्या लगी हुई है बहनचोद.. इस वायर को पकड़ एक बार.. लगता है वायर में कुछ प्रॉब्लम है..

रेशमा आगे आकर वायर पकड़ती हुई - मैंने कहा था बस से चलते है पर आप नहीं माने..

असलम झाल्लाते हुए - तेरी माँ को चोदू रंडी.. मुंह बंद रखा कर अपना..

रेशमा बड़बड़ाते हुए - चोदने के लिए खड़ा भी होना चाहिए.. हिजरे..

असलम - क्या बोली?

रेशमा - कुछ नहीं.. ज्यादा बिगड़ गई है बाइक? अब क्या करें?

असलम - क्या करें क्या.. तू यही खड़ी रह.. मैं मैकनीक लेके आता हूँ..

रेशमा - मुझे अकेला छोड़ के जाओगे?

असलम - साली कोनसी सुनसान जगह है जो तू इतना डर ही है? खड़ी रह.. चुपचाप..

असलम इधर उधर घूमके वापस आ जाता है उसे कोई मकेनिक की शॉप नहीं मिलती..

रेशमा - क्या हुआ?

असलम गुस्से - होना क्या है.. आज साली तेरी शकल देख ली सुबह सुबह.. दिन तो खराब जाना ही था.. अब इसे हाथों से ले जाना पड़ेगा जब तक कोई मकेनिक नहीं मिल जाता..

असलम बाइक खींचकर ले जाते हुए औऱ रेशमा बैग हाथ में पकड़कर साथ चलते हुए..

रेशमा - अब्बू से बोलके इतनी अच्छी औऱ महंगी बाइक दिलवाई थी दहेज़ में मगर आपने 3-4 साल में ही बाइक की हालात ऐसी कर दी जैसे 20 साल पुरानी हो.. अपनी दारु औऱ ऐयाशी का पूरा ख्याल रहता है मगर कब बाइक की सर्विस करवानी है कब तेल बदलवाना है वो याद नहीं रहता...

असलम - बहन की लोड़ी.. मुंह बंद रख अपना.. वरना सडक पर ही पिटेगी तू..

रेशमा - औऱ कर भी क्या सकते हो आप.. औऱ कुछ तो होता नहीं है..

असलम गुस्से में बाइक गिराते हुए - साली रंडी जब से तू मिली तब से जिंदगी दोज़ख हो गई है.. एक लफ्ज़ औऱ बोला तो यही तलाक़ दे दूंगा..

रेशमा इस बार कुछ नहीं बोलती औऱ असलम वापस बाइक उठाने लगता है की साइड में एक कार आकर उनके पास रूकती है..

गौतम कार का शीशा नीचे करके असलम से - भाईजान ये हबीबगंज कहा पड़ेगा..

असलम गौतम को देखकर - यहां से एक घंटा दूर है.. आगे टूटी पुलिया से लेफ्ट हो जाना..

गौतम मुस्कुराते हुए - बाइक बिगड़ गई है?

असलम - हाँ.. लगता है वायर टूट गया है.. स्टार्ट नहीं हो रही..

गौतम कार से उतरकर - तो कोई मकेनिक क्यों नहीं बुला लेते..

असलम - आस पास कोई मकेनिक नहीं है.. मैं देख चूका हूँ..

गौतम - अरे यार कहा तुम बाबा आदम के जमाने में ज़ी रहे हो.. ये अप्प है ना.. इसमें आप अपनी लोकेशन डाल कर मकेनिक को यही बुला लो.. इस तरह कहा तक इस बाइक को खींच कर ले जाओगे..

असलम - भाईजान मेरा पुराना फ़ोन है आप ही मकेनिक को बुला दीजिये..

गौतम - पर भाईजान मुझे शादी में जाना है..

असलम - भाईजान.. हमें भी हबीबगंज ही जाना है.. मकेनिक आते ही आप चले जाना..

रेशमा मुस्कुराते हुए - कर दीजिये ना मदद.. आपको सबाब मिलेगा..

गौतम असलम से - अब भाभी ज़ी कह रही तो मैं बुला देता हूँ मकेनिक को..

असलम - वैसे आप हबीबगंज में किसके यहां जा रहे है..

गौतम - वो रहमत मिया है ना..

असलम - हाँ अलीगढ वाले..

गौतम - हां वही.. उनकी लड़की से मेरे दूर के भाई का निकाह है आज.. वैसे तो बाराती हूँ पर बारात से अलग ही जा रहा हूँ..

असलम हसते हुए - अरे भाईजान.. क्या इत्तेफाक है.. हम भी वही जा रहे है.. रहमत मिया मेरे खालू के भाई है.. उनकी लड़की के निकाह में शरीक होने के लिए ही हम जा रहे थे.. वो भी क्या इत्तेफाक करता है..

गौतम - सच में भाईजान.. अच्छा आओ.. कब तक यहां खड़े रहोगे.. गाडी में बैठ जाओ.. लाओ भाभी ज़ी बेग मैं रख देता हूँ..

रेशमा - सुक्रिया..

असलम गौतम के साथ कार में आगे बैठ जाता है औऱ रेशमा पीछे..

गौतम गाडी का ac बढ़ा देता है..

गौतम गाडी में गाने चलाते हुए..

असलम - आप ये अंग्रेजी गाने समने के शौकीन है?

गौतम - नहीं ये तो fm चल गया.. मैं गज़ले सुनने का शौकीन हूँ.. आप अपनी तरफ से उस रेक को ओपन कीजिये उनमे पेन ड्राइव पड़ी होगी..

असलम रेक ओपन करते हुए पेन ड्राइव निकालकर गौतम को दे देता है औऱ रेक में रखी हुई एक शराब की खाली बोतल देखकर कहता है - कमाल है भाईजान सब भरी हुई शराब की बोतल गाडी में रखते है आप खाली रखते है..

गौतम कोई ग़ज़ल लगाकर - अरे ये तो पहले की है फेंकना भूल गया शायद.. फेंक दीजिये..

असलम बोतल फेंककर - वैसे आपने नाम तो बताया ही नहीं अपना?

गौतम एक दम से सोचकर - ग़ालिब..

असलम हसते हुए - तालिब सुना है भाईजान पर ग़ालिब?

गौतम मुस्कुराते हुए बैक मीरर में रेशमा का चेहरा देखकर - अब क्या करे साहेब.. अपनों मेरा नाम मिर्ज़ा रखा औऱ दुनिया वालों ने ग़ालिब.. तो बन गया मैं मिर्ज़ा ग़ालिब..

असलम - शेरो शायरी के भी शौकीन लगते है..

गौतम - बेशक़.. लिखते भी औऱ सुनते भी है.. आपका नाम?

असलम - असलम..

गौतम - अच्छा शायद आपका मकेनिक आ गया..

गौतम औऱ असलम गाडी से उतरकर - हां यही बाइक है..

मकेनिक गाडी चेक करके - इसका तो इंजन बैठा हुआ है भाईजान? पूरा खोलना पड़ेगा..

असलम - अरे ऐसे कैसे इंजन बैठ गया..

मकेनिक - लास्ट बार सर्विस कब करवाई थी?

असलम - यही कुछ 2-3 महीने पहले..

मकेनिक - औऱ ओइल चेंज?

असलम - उसका पता नहीं वो भी शायद 4-5 महीने पहले करवाया था..

मकेनिक - महीने में कितना चलती है बाइक?

असलम - पता नहीं.. चलती होगी 3-4 हज़ार किलोमीटर..

मकेनिक हसते हुए - तो क्या टायर बैठेगा? भाईजान किस्मत अच्छी है आपकी.. बाइक अभी तक चल रही थी.. वरना जैसे आप बता रहे हो ये तो कब का हो जाना चाहिए था. हर चीज का ख्याल भी रखना जरुरी है..


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रेशमा - अपने अलावा किसी औऱ का ख्याल हो तो ना..

असलम रेशमा को घूरते हुए - अच्छा छोड़ दो.. हम देख लेंगे..

गौतम - क्या देखोगे असलम मिया? मकेनिक ठीक कह रहा है.. अब इंजन बैठ गया तो बैठ गया.. ले जाने दो बाइक कल बनाके दे देगा..

असलम - अरे नहीं.. मैं अच्छे से जानता हूँ इन लोगों को.. लम्बा चौड़ा बिल बना के दे देंगे..

गौतम - अरे उसकी चिंता आप क्यों करते है.. आप औऱ हम तो सम्बधी है.. भाई तुम ले जाओ बाइक औऱ पूरी नई करके दो.. जो खर्चा होगा मुझसे लेना..

असलम - पर ग़ालिब भाई..

गौतम - अरे छोडो ना.. बिगड़ी हुई बाइक कहा कहा लिए फिरोगे मिया.. निकाह है.. चलकर एन्जॉय करते है.. देखो आपके चक्कर में बेचारी भाभी कब से ऐसे ही खड़ी है.. चलो साथ में चलते है..

गौतम औऱ असलम वापस गाडी मैं बैठ जाते है औऱ रेशमा भी बैठ जाती है..

असलम - ग़ालिब भाई अब रुखा सफर न कटने पायेगा.. कुछ गला गिला किया जाए..

गौतम असलम को देखकर - पर भाभी..

असलम - अरे रेशमा क्या बोलेगी... औऱ अब नहीं लेंगे तो कब लेंगे..

गौतम आगे ठेके पर गाडी रोककर - बताओ असलम मिया क्या पीना पसंद करोगे?

असलम - तुम ही कुछ पीला दो ग़ालिब भाई.. हम तो देसी से विलायेति सब पी जाते है..

गौतम - ठीक है..

गौतम गाडी से उतर जाता है औऱ ठेके पर जाकर एक ब्लैक डॉग की बोतल औऱ पानी ले आता है औऱ असलम को बोतल देकर कहता है..

गौतम वापस धीरे धीरे गाडी चलता हुआ - लो असलम मिया करो शुरुआत..

असलम दो पेग बनाकर - लो ग़ालिब भाई..

असलम औऱ गौतम पेग को चिर्स करके पिने लगते है..

असलम - भाई आज तो मज़ा आ गया आपसे मिलके..

गौतम रेशमा को मीरर से देखकर - मुझे भी..

असलम - अच्छा आप बता रहे थे कुछ लिखते हो.. हमें भी सुनाओ कुछ..

गौतम पेग ख़त्म करके - अजी बस थोड़ा बहुत कोशिश करके है..

असलम द्वारा पेग बनाकर देते हुए - थोड़ा बहुत ही सुना दो यार..

गौतम गाडी सडक के किनारे लगाकर - हम्म्म... तो लिखा है..

कोई हसीन दिलरुबा आँखों में घर कर गई..

असलम - वाह.. क्या लिखा है ग़ालिब भाई..

गौतम - शुक्रिया मिया..

कोई हसीन दिलरुबा आँखों में घर कर गई..

इश्क़ की मिठास वो दिल में उतरकर भर गई

असलम - वाह्ह.. क्या मिसरा कहा है ग़ालिब भाई..

गौतम - बहुत शुक्रिया भाई..

असलम - आगे सुनाइए..

गौतम - सुनिये..

कोई हसीन दिलरुबा आँखों में घर कर गई..

इश्क़ की मिठास वो दिल में उतरकर भर गई

सोचा कि उसको चुम लूँगा अगली मुलाक़ात में

वो पारियों की शहजादी चूमके होंठ ही कुतर गई

असलम - अरे वाह ग़ालिब भाई.. मान गए आपको..

गौतम रेशमा को देखकर -शुक्रिया.. आपको केसा लगा भाभी..

रेशमा मुस्कुराते हुए - अभी कहा कुतरा है.. कुतरना तो अभी बाकी है..

असलम - लो ग़ालिब भाई..

गौतम - भाई अब रहने दो.. वरना सब कहने लगेंगे.. शराबी आ गए..

असलम हसते हुए - ये आखिरी है ग़ालिब मिया लो..

एक शेर मेरा भी सुनो..

गौतम पेग लेते हुए - इरशाद..

असलम - तो शेर कुछ ऐसा है..

मैं नहीं हूँ वो जिसकी तुम्हे तलाश है

कुछ नहीं है मेरे पास सिर्फ ये गिलास है

इस गिलास में घुले हुए है मेरे दर्द औऱ ग़म

औऱ पीछे बैठी हुई ये गले में चुबती फांस है

गौतम हसते हुए - लगता है भाभी प्यार नहीं करती आपसे..

रेशमा - प्यार करने लायक़ हो भी तो..

असलम नशे में - सिगरेट है आपके आप?

गौतम - रेक में देखो..

असलम सिगरेट जलाते हुए - एक औऱ सुनो..

ऊगा लूंगा मैं भी फसल जमीन को खोद कर

बना दूंगा तस्वीर इस कागज पे कलम गोद कर

(रेशमा को देखकर)

मेरी जान की दुश्मन बस इतनी बात बता मुझे

तेरे बाप को क्या मिला मेरी अम्मी चोद कर..

गौतम हसते हुए - अरे असलम मिया.. ये क्या था..

असलम - किसी से सवाल था ग़ालिब मिया..

रेशमा - मुझे गाना चलाना है..

गौतम - भाभी फ़ोन कनेक्टेड है आप इसमें चला लो.. चल जाएगा..

असलम नशे में - गाना क्यों चलाना है तुझे..

रेशमा - सवाल का जवाब नहीं चाहिए?

रेशमा गाना चला देती है.. मेरा बुढ़ा बलम करें छेड़खानी.. मेरी चढ़ती जवानी मांगे पानी पानी..

गाना सुनकर असलम का मुंह उतर जाता है..

गौतम हसते हुए - अच्छा बहुत हो गया असलम मिया.. चलो अब चलते है..

असलम गाना बंद करके - ठीक है ग़ालिब भाई..

गौतम गाडी चलाकर शादी वाली जगह ले आता है..

गौतम - लगता है बारात आ चुकी है..

असलम नशे में - हाँ.. आ गई है.. चलिए..

गौतम असलम औऱ रेशमा के साथ गाडी से उतारकर बाहर आ जाता है औऱ शादी वाले घर में आ जाता है जहा बहुत भीड़ थी औऱ घर छोटा था.. पीछे खाली प्लाट पर तम्बू खड़ा करके बारात का स्वागत चल रहा था..

असलम गौतम से - अरे ग़ालिब भाई आप कहा जारहे हो.. चलो ऊपर चलते है.. असलम गौतम को छत पर ले आता है..

गौतम - अरे असलम मिया आप तो इसे भी साथ ले आये..

असलम - इसके बिना कैसे काम चलेगा.. अभी तो आधी भी खाली नहीं हुई.. एक एक पेग औऱ पीते है फिर नीचे जाके dj पर तहलका मचाते है..

गौतम - ठीक है मिया बनाओ पर मेरा वाला पेग बिलकुल लाइट रखना..

गौतम पीछे नीचे की तरफ तम्बू में स्टेज के पास किसी को देखकर फ़ोन करता है..

गौतम - गांडु ऊपर देख..

आदिल ऊपर गौतम को देखता हुआ - अबे साली रंडी तू यहां क्या कर रहा है..

गौतम थोड़ा दूर जाकर - असलम के साथ आया हूँ.. मेरा नाम मिर्जा ग़ालिब बताया है असली नाम मत बताइयो उसे.. आजा ऊपर जल्दी..

आदिल - आता हूँ रंडी..

गौतम - पानी की ठंडी बीतल भी ले आइओ..

असलम - क्या हुआ भाई किस्से बात कर रहे थे..

गौतम - अरे एक दोस्त था.. पानी की बोतल मगवाई है ठंडी.. आ रह है.. आप तो नीट ही बनाने लगे..

असलम - अरे क्या फर्क पड़ता है ग़ालिब भाई..

गौतम - पक्के शराबी हो मिया..

आदिल पानी की बोतल रखकर - क्या हाल है जीजा ज़ी..

असलम - तू भी आया है..

आदिल - हाँ अकेला आया था.. सब घर पर ही है.. आपा कहा है..

असलम नशे में - नीचे होगी कहीं, मुझे क्या मालूम..

गौतम - अच्छा आप लोग बैठो आता हूँ.. आदिल के कान में - पीला पीलाके भंड कर दे मादरचोद को..

आदिल इशारे से - ठीक है..

गौतम नीचे चला जाता है औऱ आदिल बड़े बड़े पेग बनाकर असलम को पिलाने लगता है...

गौतम नीचे आ जाता है औऱ रेशमा को ढूंढने लगता है मगर उसे रेशमा कहीं नहीं नज़र आती.. गौतम जब रेशमा को कॉल करता है तो रेशमा कॉल नहीं उठती औऱ व्हाट्सप्प पर massage करती है.. अभी नहीं उठा सकती..

गौतम बदले में कहता है - औऱ कितना तड़पायेगी.. कुतिया..

रेशमा इस बार अपनी लाइव लोकेशन भेज देती है औऱ massage करती है आजा मेरे कुत्ते मेरे पास..

गौतम लाइव लोकेशन देखकर चल पड़ता है..

गौतम शादी के घर से थोड़ा दूर एक सुनसान मकान के पीछे उस लाइव लोकेशन को देखता हुआ आ जाता है औऱ उस खाली मकान में आकर इधर उधर देखने लगता है.. अंदर में उसे कुछ नहीं दीखता मगर कोई उसका हाथ पकड़ कर खाली मकान के एक कोने में ले जाता है औऱ गौतम हाथ की छुअन की कोमलता से समझ जाता है ये औऱ कोई नहीं बल्कि रेशमा ही है..

रेशमा सीधा गौतम के होठो पर टूट पडती है औऱ उसके होंठों से अपने होंठ से मिलाकर उसे बेतहाशा चूमने लगती है..

गौतम भी अँधेरे में रेशमा को होंठों को पूरी शिद्दत औऱ मोहब्बत के साथ चूमने लगता है..


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रेशमा चूमते हुए गौतम के लबों को दांतो से कुतरने लगती है औऱ गौतम को दर्द देती हुई उसके होंठों को खींच खींच कर गौतम को बेबाकी से अपने मुंह की मिठास औऱ लार के स्वाद से रूबरू करवा देती है..

गौतम आँख बंद करके रेशमा को अपनी बाहों में भरे हुए चूमता हुआ उसके पतले औऱ गुलाबी होंठों को अपने होंठों में भर भरके चूमता हुआ अपने हाथों से उसके बदन की उतार चढाव भरी नकाशी टटोलता है..

10-12 मिनट एकदूसरे को जमकर चूमने के बाद दोनों का चुम्बन किसी की आहट सुनकर टूट जाता है..

औऱ उनको ऐसा लगता है जैसे कोई आया है.. दोनों चुपचाप बाहर की तरफ देखते है जहा एक लड़का एक लड़की के साथ अभी अभी अंदर घुसा था.. गौतम औऱ रेशमा बिना किसी शोर के उनकी तरफ देखते है...

लड़का - मैं तुम्हारे बिना मर जाऊँगा शमा..

शमा - तू समझता क्यों नहीं नीरज.. मैं अगर तेरे साथ यहां से चली गई तो बबाल हो जाएगा.. मेरे अब्बू हमें जान से मार देंगे.

नीरज - बिछड़कर जीने से तो मर जाना अच्छा है शमा.. क्या हमने कसमे वादे इसीलिए खाये थे की एक दिन तू मुझे यूँ छोड़कर चली जाए? तू मुझे प्यार करती है ना.. तो क्यों किसी औऱ के साथ शादी कर रही है.. चल शमा में तुझे लेने आया हूँ..

शमा - तू समझता क्यों नहीं निरज.. आज मेरी शादी है कितनी बदनामी होगी हर जगह..

नीरज - तू बदनामी से डरती है.. मगर मुझसे बिछड़ने से नहीं.. क्या वो आदमी तुझे मुझसे ज्यादा खुश रख पायेगा? बोल जवाब दे..

शमा नीरज को चूमती है औऱ कहती है - मैं तुझे दिल औऱ जान से प्यार करती हूँ.. मगर तू ही बता ऐसे सब कुछ छोड़छाड़ कर भागना सही है? अब्बू अम्मी भाई सबकी नज़र शर्म से झुक जायेगी..

नीरज - उनकी नज़र शर्म से तब नहीं झुकी जब उन्होंने तुझसे 18 साल बड़े आदमी के साथ शादी तय कर दी.. बोल शमा? देख मैं तुझे लेने आया हूँ.. अगर तू मेरे साथ नहीं चली तो मैं यही अपनी जान दे दूंगा..

शमा रोते हुए - ज़िद मत कर नीरज.. जा यहां से.. मुझमे भागने की हिम्मत नहीं है.. मैं बहुत कमजोर हूँ..

इसबार रेशमा की चुडी की आवाज आ जाती है औऱ नीरज औऱ शमा को किसी के यहां होने की आहट मिल जाती है..

नीरज - कौन? कौन है वहा?

गौतम फ़ोन की फलेश लाइट सामने on करके - डरो मत.. हम दोनों शादी में आये..

रेशमा - शमा.. तू ये शादी नहीं करना चाहती?

शमा - मेरे चाहने से क्या होता है रेशमा आपा.. आज तक मेरी पसंद नापसंद घर में किसने सुनी है?

गौतम - देखो अगर तुम दोनों प्यार करते हो औऱ शादी करना चाहते हो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ..

शमा - पर अब्बू?

रेशमा - शमा मैं तेरे अब्बू को अच्छे से जानती हूँ.. वो अपने मतलब के लिए तेरा निकाल उस 38 साल के आदमी से करवाना चाहते है.. अभी भी मौका है..

नीरज - मैं कब से कह रहा हूँ शमा.. तुझे बहुत प्यार से रखूँगा.. चल मेरे साथ.. औऱ नहीं चलना तो ले इस पिस्तौल से मुझे गोली मार दे..

गौतम पिस्तौल छीनते हुए - अबे ये पिस्तौल कहा से खरीद लाया तू..

रेशमा - शमा पागल मत बन तेरी लाइफ का सवाल है..

शमा - ठीक है चलो.. मैं त्यार हूँ.. मगर तुम्हारे घरवाले क्या मुझे अपनाएंगे?

नीरज - नहीं अपनाएंगे तो मैं घर छोड़ दूंगा.. पर तुझे हमेशा अपने साथ रखूँगा.. चल रेशमा..

गौतम - अबे ओ मजनू.. घर छोड़ देगा तो रखेगा कहा लड़की को सडक पर? घरवालों से लड़ झगड़ मर घर में ही रखना.. रहता कहा है तू..

नीरज - अजमेर..

गौतम - अजमेर में कहा?

नीरज - पुराना चौखट.. गली नम्बर 22.. उलटे हाथ पर तीसरा मकान..

गौतम - विधयाक मालिराम है ना वहा का?

निरज - हां मालीराम खत्री है..

गौतम - नम्बर दे तेरे..

नीरज नम्बर देकर - अब चल शमा चलते है..

गौतम - मेरी बात सुन.. लड़की का ख्याल रखना.. पुलिस में है मेरा बाप.. इसपर जरा सी खरोच आई तो खानदान चोद के पटक दूंगा तेरा..

नीरज - प्यार करता हूँ अपनी जान से ज्यादा.. उम्र भर साथ रखूँगा..

गौतम - शमा अपनी सारी id औऱ डॉक्यूमेंट साथ लेकर जाना.. कोर्ट मैरिज में जरुरत पड़ेगी..

रेशमा - हाँ शमा..

शमा - नीरज मैं अभी घर जाती हूँ.. थोड़ी देर बाद तुझे बस स्टेण्ड पर मिलूंगी..

नीरज - मैं तेरा इंतजार करूंगा शमा.. शुक्रिया तुम्हारा..

दोनों चले जाते है..
 
अपडेट 36

रेशमा गौतम को बाहों में भरके - खानदान चोदेगा? इतना बड़ा है तेरा?

गौतम - फ़ोन में देखा नहीं था क्या तूने? चल अब सामने से देख ले.. गौतम पेंट नीचे करके लंड निकाल लेता है..

रेशमा फलेश लाइट में लंड हाथ में पकड़कर देखती हुई - क्या खाया था कुत्ते जो इतना बड़ा हो गया?

गौतम रेशमा के मुंह में लोडा देते हुए - काले जामुन मेरी कुतिया.. चल अब चूस बहन की लोड़ी.. कब से तरसा रही थी..

रेशमा मुंह में लेती हुई - आज तो पूरा निचोड़ लुंगी तुझे..

रेशमा मुंह में लंड भरके जोर जोर से चूसने लगती है औऱ गौतम सिगरेट सुलगाते हुए रेशमा को लोडा चूसाने लगता है..


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गौतम सिगरेट के कश लेता हुआ - उफ्फ्फ कुत्तिया क्या चुस्ती है तू.. लगता है मुंह से निकलवा देगी मेरा पानी..

रेशमा मुंह से लंड निकाल कर गौतम से सिगरेट लेकर एक लम्बा कश खींचती है औऱ वापस सिगरेट देकर लंड चूसने लग जाती है..

गौतम - पहले कितने नखरे दिखाती थी कितना लड़ती झगड़ती थी ताने मारती थी.. कबाड़ी की औलाद.. साली कबाड़न मुझे.. अब देखो कैसे रंडी की तरह लंड चूस रही है.. साली कबाड़न...

रेशमा - कबाड़न बोला तो तेरी अम्मी चोद दूंगी..

गौतम हसते हुए - लंड है तेरे पास? साली कबाड़न..

रेशमा लंड पर दाँत लगाते हुए काटने लगती है..

गौतम दर्द से - अबे ओ.. क्या कर रही है पागल हो गई है क्या.. बहनचोद दर्द हो रहा है..

रेशमा - बोलेगा कबाड़न वापस? साले ठुल्ले की औलाद..

गोतम लंड सहलाते हुए - साले तुम दोनों बहम भाई एक जैसे हो.. कितना जोर से काटा है..

रेशमा वापस लंड पकड़कर काटी हुई जगह को चूमते हुए - प्यार करोगे तो प्यार मिलेगा.. उल्टा बोलोगे तो सुनना भी पड़ेगा.. मुझे इतनी सीधी मत समझना.. बहुत बड़ी खिलाड़ी हूँ मैं..

गौतम सिगरेट का कश लेकर सिगरेट फेंक देता है औऱ रेशमा को खड़ा करके बाहों में भरते हुए कहता है - सच में कुत्तिया है तू.. बहुत काटती है.. औऱ कितनी बड़ी खिलाड़ी है ये तो अभी पता चल जाएगा मेरी जान..

रेशमा मुस्कुराते हुए - गौतम.. एक सच बताऊ?

गौतम होंठ चूमकर - बोल ना..

रेशमा - जब तुझे पहली बार देखा था ना.. मन में आया था कच्चा खा जाऊ.. इतना पसंद आया था तू.. मैं तुझसे सिर्फ इसलिए लड़ती थी ताकि तू मुझसे बात कर सके.. तेरी पसंद - नपसंद सब पता है मुझे.. तेरे लिए बड़े प्यार खाना बनाती थी.. जो आदिल लेजाकर तेरे साथ खाता था.. बस तू ये जो बेज्जतीया करता रहता था ना मेरी.. उसपर बहुत गुस्सा आता है..

गौतम मुस्कुराते हुए - मतलब मेरी कबाड़न भी मुझसे प्यार करती है.. ये औऱ भी अच्छा है..

रेशमा - तू फिर से शुरु हो गया ना.. एक बार औऱ कबाड़न बोला तो खा जाउंगी तुझे कच्चा...

गौतम प्यार से गाल चूमते हुए - अच्छा अब सलवार खोल दे.. बहुत मन कर रहा है..

रेशमा - पहले कुछ गिफ्ट दो..

गौतम - क्या गिफ्ट चाहिए?

रेशमा - कुछ भी.. इतनी आसानी थोड़ी खज़ाना दे दूंगी.. पहले तुम्हे भी कुछ देना पड़ेगा..

गौतम - अबे मैं तेरे भाई को लुटता हूँ तू मुझे लूट रही है...

रेशमा - रेशमा की सलवार का नाड़ा तो तभी खुलेगा जब तुम कुछ दोगे.. वरना मेरे लिए यहां तक आये हो इसलिए ऊपर ऊपर से कुछ भी कर सकते हो..

गौतम जेब एक चॉक्लेट कैंडी निकालकर - ये चलेगी?

रेशमा चॉकलेट कैन्डी लेकर सलवार का नाड़ा खोलते हुए - एक टॉफी के बदले चुत दे रही हूँ.. अहसान याद रखना मेरा.. औऱ कभी मिलने से मना किया तो तेरा क्या हाल करुँगी वो अंजाम भी याद रखना..

गौतम नीचे बैठकर चुत सूंघता है औऱ उसपर चुम्मा करके कहता है - बहुत कमीनी हो रेशमा.. पूरी चिकनी करके आई हो..

रेशमा - पहली बार पसंद के आदमी से चुद रही हूँ.. कोई शिकायत का मौका नहीं देना चाहती थी ..

गौतम चुत पर होंठ लगा देता है औऱ धीरे धीरे जीभ से चुत को अगल बगल से सहलाते हुए चाटने लगता है. रेशमा प्यार से अपनी टाँगे चौड़ी करके अपनी चुत के दाने को गौतम के मुंह में देकर जबरदस्ती गौतम को चूसाने लगती है औऱ काम भावना से भरकर कामुक सिसकियाँ भरने लगती है..


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जिस तरह से गौतम रेशमा की चुत का चटकारा ले रहा था उससे रेशमा का ज्यादा देर तक अपनेआप को काम की बारिश में भीगने से रोके रखना मुश्किल था.. कुछ ही मिनटों में रेशमा गौतम के मुंह में अपने जवानी का पानी छोड़कर फारीक हो गई..

गौतम रेशमा का पानी निकालकर खडा हो गया औऱ रेशमा की कुर्ती के ऊपर से ही उसके मदमस्त सुडोल औऱ सुगठित उरोजो का मर्दन करते हुए रेशमा के गले औऱ गले से नीचे अपने चुम्बन औऱ छूअन से उसे फिर वासना औऱ प्रेम की मिली हुई आंधी में उड़ा के ले गया..


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रेशमा ने गौतम के शर्ट को उतारकर उसके सीने औऱ गर्दन को अपने होंठों की अनगिनत छुअन औऱ चुम्बन से सजा दिया औऱ जगह जगह प्यार से दाँत चुभो कर काटने लगी.. रेशमा ने गौतम के निप्पल्स के मुंह में ले कर इस तरह चूसा जैसा गौतम के निप्पल्स से दूध निकल आएगा औऱ गौतम भी रेशमा के इस तरह से करने पर काम से भरते हुए कामदेव की शरण में बैठ गया था..

गौतम ने रेशमा की कुर्ती उतार दी औऱ इस बार रेशमा के चुचो का स्वाद लेने लगा..


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रेशमा के बदन से उठती महक गौतम की नाक में चढ़ रही थी वो रेशमा के बोबे जितना मुंह में भर सकता था भरकर चूस रहा था.. औऱ रेशमा तो जैसे आज गौतम के प्रति अपनेआप को समर्पित कर देना चाहती थी.. रेशमा ने बारी बारी से अपने दोनों चुचो को गौतम को चूसाया औऱ गौतम के चूसने औऱ दबाने के लिए खुला छोड़ दिया.. गौतम बूब्स पर lovebite छोड़ रहा था जिसमे रेशमा को होते मीठे दर्द औऱ गौतम को खुश करने की लालसा साफ झलक रही थी..

अच्छे से अपने बूब्स का भोग गौतम को लगाने के बाद रेशमा ने पलट कर अपनी एक टांग उठाकर आगे पड़ी हुई पट्टी पर रख दिया औऱ पीछे देखते हुए अपने दोनों हाथों से अपनी गांड खोल के गौतम से बोली..

रेशमा - आजा मेरे कुत्ते.. तेरी कुत्तिया तैयार है..

गौतम रेशमा की गांड पकड़ते हुए उसकी चुत के मुहाने पर लंड लगाकर बोला..

गौतम - बहुत टाइट है रेशमा..

रेशमा चुत में लंड घुसवाते हुए - तू डाल दे जानू.. मेरी चिंता मत कर..

गौतम धीरे धीरे प्यार से लंड घुसा देता है.. औऱ आधे से थोड़ा ज्यादा जाते जाते रेशमा की कामुक सिस्कारिया दर्द औऱ तकलीफ की आहो में बदल जाती है.. गौतम औऱ अंदर नहीं घुसाता औऱ उतने लंड से ही रेशमा को पेलने लगता है.. गौतम पीछे से रेशमा की चुत ले रहा रहा औऱ उसे बड़े प्यार से चोद रहा था.. रेशमा को इस बात की ख़ुशी थी की गौतम उसकी तकलीफ समझता है औऱ हवस में अंधा होकर उसके साथ जोर जबरदस्ती नहीं कर रहा.. वही अपने आप पर गर्व भी हो रहा था कि उसकी पसंद गलत नहीं है..


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गौतम ने पीछे से थोड़ी देर चोदकर रेशमा को अपने तरफ घुमा लिया औऱ उसकी एक टांग उठाकर उसकी चुत चोदने लगा.. रेशमा से रहा ना गया औऱ वो गौतम के सर को पकड़कर चूमने लगी औऱ खुद अपनी गांड आगे पीछे करती हुई चुदवाने लगी जैसे उसे अब इसमें कोई शर्म लिहाज नहीं रह गई हो.. दोनों के होंठ से होंठ औऱ चुत से लंड आपस में मिले हुए थे.. दोनों का मिलन एक अद्भुत माहौल बना रहा था..

गौतम ने रेशमा को अपनी गोद में उठा लिया औऱ लंड पर उछाल उछाल कर पेलने लगा.. इस बार रेशमा गौतम का पूरा लंड झेल गई औऱ उसे अब तकलीफ भी नहीं हो रही थी उसने चुदते चुदते गौतम को बहुत कुछ बता दिया दिया औऱ अपने मन के हर कोने से रूबरू करवा दिया था रेशमा गौतम के प्यार में अब औऱ गहराई में उतर चुकी थी.. वो गौतम लंडपर उछल रही थी मगर इस वक़्त उसका दिल भी उछल रहा था जो निकल कर गौतम के कदमो में आ गिरना चाहता था.. रेशमा ने पीछले कुछ वक़्त से गौतम के होंठों को जरा भी आराम नहीं करने दिया था.. वो लगतार चुदते हुए गौतम के होंठ कुतर रही थी..


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रेशमा वापस झड़ गई थी औऱ अब भी गौतम उसे चोदे ही जा रहा था.. दोनों को मज़बूरी में खड़े खड़े चुदाई करनी पड़ रही थी औऱ अब गौतम ने रेशमा को गोद से नीचे उतार कर अपने आगे झुका लिया था औऱ पीछे से रेशमा कि चुत पर हमला बोल दिया था जिसमे वो रेशमा के बाल पकड़ कर पीछे से उसकी चुत पर एक के बाद एक जोरदार झटके दे रहा था जिसकी आवाज उस कमरे में गूंजने लगी थी.. इस बार भी रेशमा को झड़ने में वक़्त नहीं लगा वो गौतम के झड़ने के साथ ही झड़ गई.. औऱ दोनों का पहला सम्भोग संपन्न हो गया..

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टप की आवाज के साथ गौतम का लंड रेशमा की चुत से बाहर निकला औऱ रेशमा नीचे बैठकर उसके लंड को मुंह में भरकर चूसते हुए साफ करने लगी.. गौतम औऱ रेशमा पसीने से लथपथ थे.. लंड साफ करने के बाद रेशमा खड़ी हुई तो गौतम ने उसके बदन को अपने रुमाल से पोंछा औऱ दोनों ने कपडे पहनें..

रेशमा अपने आप को आज बहुत हल्का महसूस कर रही थी उसने गौतम को गले लगाते हुए कहा - आई लव यू मेरे कुत्ते..

गौतम - लव टू मेरी कबाड़न..

रेशमा गुस्से से - गौतम..

गौतम - प्यार से बोल रहा हूँ मेरी कुतिया..

रेशमा - कबाड़न मत बोलो ना जानू.. प्लीज..

गौतम - ठीक है मेरी कुतिया.. अब नहीं चिढ़ाता..

रेशमा - तुम खुश हो ना?

गौतम - तुम्हे क्या लगता है?

रेशमा - चिढ़ा नहीं रहे मतलब खुश हो..

गौतम - चल यार भूक लगी है खाना खाते है वैसे भी थोड़ी देर में कोहराम मचने वाला है.. जब शमा की खबर लगेगी सबको.

रेशमा - तुम जाओ.. मुझे किसी ने तुम्हारे साथ देख लिया तो मुसीबत हो जायेगी.. मैं पीछे पीछे आती हूँ..

गौतम - चल ठीक है मेरी जानू.. जैसा तू बोले..

रेशमा चूमते हुए - फ़ोन करुँगी.

गौतम - बाए..

गौतम वहां से शादी वाले घर आ जाता है जहा छत पर असलम पी के टुन होके पड़ा था औऱ आदिल साइड में बैठा हुआ फ़ोन में कुछ कर रहा था.

गौतम - चल गांडू खाना खाते है..

आदिल - बाद में खा लेंगे..

गौतम - बाद में नहीं अभी.. मुझे जाना है वापस..

आदिल - चल यार..

गौतम - आराम से खा लेते यार.. कोनसा ख़त्म हो जाएगा...

गौतम - गांडु.. हंगामा होने वाला है..

आदिल हसते हुए - क्यों दुल्हन भागने वाली है क्या?

गौतम - हाँ..

आदिल - सच?

गौतम - तेरी कसम.. चल खाके निकलता हूँ वरना खामखा नौटंकी देखनी पड़ेगी..

आदिल - तुझे कैसे पता?

गौतम - मैंने ही भगवाया है एक लड़के साथ..

आदिल - बहन के लंड.. तू आदमी है झांट का बाल? लड़की को भगा दिया..

गौतम - अबे जबरदस्ती शादी हो रही थी यार उसकी.. लड़की किसी औऱ को चाहती है इसमें मेरी क्या गलती.. पनीर औऱ ले.. कम पड़ेगा..

आदिल - भोस्डिके तुझे क्या मतलब.. उसकी मर्ज़ी ना मर्ज़ी से.. यहां बैठते है आजा.. साले अच्छी भली शादी की अम्मी चोद दी तूने.

गौतम खाना खाते हुए - अम्मी तो तेरी चोदी है भूल गया.. औऱ छोड़ ना.. तू क्या इतना दुखी हो रहा है.. तेरी दुल्हन थोड़ी भागी है..

आदिल खाना खाते हुए - सलमा से मिला?

गौतम - हाँ.. दो बार.. मन भरके मिला.. उसे बोल दिया है वापस अजमेर आने के लिए. जल्द आ जायेगी..

आदिल - तू अभी रेशमा के साथ था..

गौतम - हाँ यार पसंद आ गई तेरी बहन... पर बहुत अकड़ू है यार तेरी बहन..

आदिल - तूने साले अकड़ तोड़ डी होगी.. मुझे पता है..

गौतम - भाई रेशमा को मैं ही प्यार करूँगा.. तू उसकी लेने का ख्याल छोड़ देना.. याद रखना..

आदिल - चल ठीक है.. चल अब निकल..

गौतम - अच्छा सुन.. तेरी बहन के लिए पायल खरीदी थी.. उसे दे देना यार.. मैं भूल गया देना..

आदिल - मैं क्या बोल के दूंगा साले तू ही दे दे..

गौतम - अब कहा अकेली मिलेगी.. यार.. चल कोई नहीं कुछ करता हूँ.. कल वापस जा रहा हूँ वहा मिलता हूँ तुझसे..

आदिल - ठीक है भाई..

गौतम वापस छत पर जाता है औऱ असलम के शर्ट की जेब में पायल रख देता है औऱ रेशमा को massage करके पायल लेने को कह देता है..

रेशमा असलम की शर्ट की जेब से पायल निकालकर मुस्कुराते हुए गौतम को याद करने लगती है..

गौतम घर पहुंच कर थकान से नींद के आगोश में चला जाता है औऱ फिर से कोई सपना देखने लगता है जिसमे उसके पिछले सपने के आगे की कहानी पता चलती है..
 
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