In Love.. With You... - Page 8 - SexBaba
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In Love.. With You...

अपडेट 53

राघव नेहा को उसके मायके छोड़ अपने ऑफिस आ गया था लेकिन उसका ऑफिस मे किसी भी काम मे मन नहीं लग रहा था राघव ने नेहा को चैलेंज तो कर दिया था लेकिन कही ना कही वो खुद भी जानता था के वो इस चैलेंज को पूरा नहीं कर पाएगा पिछले कुछ दिनों मे उनके रिश्ते मे बहुत से बदलाव आए थे जो सकारात्मक थे और अब कही ना कही राघव को नेहा की आदत सी होने लगी थी और नेहा से दूर रहना उसके लिए मुश्किल होने वाला था वही नेहा राघव की इस सिचूऐशन का खूब मजा ले रही थी लेकिन मन ही मन वो राघव को खूब मिस भी कर रही थी।

देखते देखते दोपहर का समय हो चुका था और राघव और नेहा दोनों ने ही एकदूसरे से किसी तरह का कोई कॉन्टेक्ट नहीं किया था

‘ये काम मे बिजी होंगे, लेकिन इतना भी क्या काम के मैं भी याद नहीं इनको! ऐसा लगता है मैं ही पागल हु जो इन्हे मिस किए जा रही हु, ये मेरा चैलेंज ही मेरी जान लेने वाला है’

नेहा राघव को याद करते हुए अपने फोन को देख सोच रही थी तभी एक आवाज आया

“दीदी!!!!!”

ये आवाज सुन नेहा ने आवज ही ओर देखा तो उसके चेहरे पर एक स्माइल आ गई उसका भाई सचिन घर आ गया था

नेहा- अरे तू आ गया

नेहा ने सचिन को गले लगाया

सचिन- मैंने आपको बहुत मिस किया है, कैसे हो आप? सब सही है ना एकदम? जिजू खयाल रखते है ना आपका?? कोई प्रॉब्लेम नहीं है ना?? कोई कुछ बोलता तो नहीं ना??

सचिन ने एकदम से नेहा पर सवालों की झड़ी लगा दी थी और उसे चुप कराने के लिए नेहा को उसके मुह पर हाथ रखना पड़ा

नेहा- अरे चुप चुप!! बाबारे इतने सवाल!! सब ठीक है मैं ठीक हु और कुछ टेंशन नहीं है

नेहा ने एक लाइन मे सचिन के सारे सवालों का जवाब दे डाला जिसके बाद दोनों भाई बहन की बाते शुरू हो गई पुराने दिन याद आने लगे वही दूसरी तरफ ऑफिस मे.....

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“सर मेरे हिसाब से यही सबसे बढ़िया ऑप्शन रहेगा" नेहा ने राघव ने कहा वही राघव बस उसकी खूबसूरती मे खोया हुआ था उसका ध्यान भी नहीं था नेहा की बातों पर वो बस नेहा को देखे जा रहा था उसकी स्माइल, उसकी आंखे, उसके हवा के साथ लहराते बाल उसे सब कुछ अच्छा लगने लगा था

राघव अपनी जगह से खड़ा हुआ और नेहा के करीब गया और उसका हाथ पकड़ा नेहा की आंखे बड़ी हो गई थी और वो इधर उधर देखने लगी

“सर.... सर क्या... क्या कर रहे है?” उसने नर्वस होते हुए कहा

राघव- सर?? तुम मुझे सर क्यू कह रही हो चिक्की? नाम से बुलाओ ना अच्छा लगता है अपना नाम तुम्हारे मुह से सुन कर

राघव ने नेहा को कमर से थामे अपनी ओर खिचा नेहा की आंखे बाहर आने लगी वो राघव की बाहों मे छटपटाने लगी

राघव- क्या हुआ?? ऐसे छटपटा क्यू रही हो जैसे पहली बार हो

“पहली बार ही है”

राघव- क्या????

“सर!!!!!!!” उसने राघव को हिलाया तब राघव अपने होश मे आया और जैसे ही राघव ने उस बंदे को देखा उसे छोड़ पीछे हट गया

राघव- रवि!!! तुम कब आए ??

वो राघव का असिस्टेंट रवि था जिसे राघव नेहा समझ रहा था उसे हर जगह नेहा ही दिख रही थी

रवि- मैं तो कबसे यही हु सर आप भी प्लीज मैडम के सपने देखना बंद कीजिए वरना लोग हमारे बारे मे गलत समझेंगे

रवि ने कहा जिसने राघव को थोड़ा शर्मिंदा कर दिया

रवि- सर मैं जाऊ??

राघव- हम्म

जिसके बाद रवि जितनी जल्दी हो सके वहा से निकल गया और राघव अपने बाल खिचते हुए अपनी खुर्ची पर जाकर बैठा

‘तू क्या पागल हो गया है क्या राघव? ये क्या हो गया था अभी अभी पता नहीं रवि क्या सोच रहा होगा! हट्ट यार!!’ राघव अपने आप पर चिढ़ा हुआ था

‘ये सब नेहा की गलती है जानबुझ के चैलेंज दिया है उसने और मैंने भी जोश जोश मे हा बोल दिया अब क्या करू?? ये दो दिन दो साल जैसे लग रहे है’

राघव अपने आप से ही बड़बड़ाए जा रहा था

कॉल कर लू क्या?? नहीं नहीं नहीं!! हारना नहीं है जब चैलेंज लिया है तो पूरा करूंगा ही लेकिन यार उससे बात करने का भी बहुत मन है’

‘ये तुमने मुझे क्या कर दिया है चिक्की जो तुम्हारी एक झलक के लिए मरा जा रहा हु मैं! मैं पहले कभी इतना इम्पैशन्स नहीं रहा जितना आज हो गया हु । मैं क्यू तुमसे एक दिन भी दूर नहीं रह पा रहा हु??’


राघव नेहा को बहुत ज्यादा मिस कर रहा था

देखते देखते रात का समय हो गया था

सतीश- चलो बढ़िया है तुम दोनों के बीच अब सब सही चल रहा है

चाचा ने डिनर करते हुए नेहा से कहा

संगीता- हा फिर मेरी बेटी है ही ऐसी जो सब सही कर देती है

नेहा- ऐसा कुछ नहीं है चाची

सचिन- बाकी दी जिजू भी आपको मिस कर रहे होंगे नहीं

सचिन ने कहा और इसी के साथ ही नेहा का दिमाग सुबह वाले चैलेंज पर शिफ्ट हो गया दूसरी तरफ देशपांडे वाडे मे

श्वेता- भईया!!! भईया!!!!

राघव- हूह??

श्वेता ने राघव को हिलाया तब राघव अपने खयालों से बाहर आया वही डिनर टेबल पर सब लोग उसे कन्फ्यूज़ होकर देख रहे थे सब अपना खाना खा रहे थे लेकिन राघव तो किसी और ही दुनिया मे था

श्वेता- आपका खाना... ठंडा हो रहा है...

श्वेता ने राघव की प्लेट की ओर इशारा किया और उसने भी गर्दन हिला कर खाना शुरू किया

शिवशंकर- आज नेहा नहीं है तो सब कितना अलग अलग लग रहा है ना

दादू ने जानबुझ कर धीमी आवाज मे कहा जिसपर राघव भी अनजाने मे अपने खाने से खेलते हुए जवाब दे बैठा

राघव- हा ना

धनंजय- मिस कर रहे हो उसे?

अब धनंजय जी भी राघव के मजे लेने के मूड मे आ गया थे और अपनी हसी दबा रहे थे

राघव- बहुत।

जानकी- तो बात कर लो उससे

राघव- वही तो नहीं कर सकता न..

रमाकांत- क्यू??

राघव- वो....

लेकिन राघव बोलते बोलते रुक गया क्युकी उसके दिमाग ने उसे इशारा कर दिया था के वो क्या बोलने जा रहा था उसे नजर उठा कर ऊपर देखा तो सब उसे ही देख रहे थे और राघव के ऊपर देखते ही सब हसने लगे और राघव अपने बड़ों को बोलता भी क्या यहां अगर शेखर होता तो उसे वो चुप करा देता लेकिन चाचा को क्या ही बोलता बस चुपचाप बैठा रहा

मीनाक्षी- राघव हम भी मिस कर रहे है नेहा को लेकिन उसके लिए ऐसे देवदास बनने की क्या जरूरत है कल आ जाएगी वो वैसे भी

चाची ने मुसकुराते हुए कहा

शेखर- अब भाई भी क्या करे मा रहा नहीं जाता न

शेखर ने चिढ़ाया और राघव ने बदले मे उसे घूर के देखा, आज डिनर टेबल का टॉपिक राघव ही था और सब उसे चिढ़ाने मे लगे थे लेकिन अपना देवदास कुछ नहीं कर पा रहा था

कुछ समय बाद राघव अपने रूम मे इधर उधर घूम रहा था और नेहा से बात करने के तरीके सोच रहा था

सोच सोच राघव कुछ सोच इतना बड़ा बिजनेसमैन कोई आइडिया नहीं सोच पा रहा बीवी से बात करने का.... हा ये सही रहेगा फाइल के बारे मे पूछने के लिए फोन लगता हु जेनुइन भी लगूँगा, यस!!! लेकिन नहीं मैं थोड़ी बात कर सकता हु अब क्या करू’

राघव सोच ही रहा था के तभी उसे रिद्धि वहा से जाते हुए दिखी तो उसने रिद्धि को आवाज दी

राघव- रिद्धि सुनो

राघव की आवाज सुन रिद्धि रूम मे आई

रिद्धि- हा भाई

राघव- ये मेरा फोन लो और तुम्हारी भाभी को कॉल लगाओ

राघव ने अपने फोन रिद्धि के हाथ मे पकड़ाया

रिद्धि- ये काम तो आप भी कर सकते हो

रिद्धि थोड़ी कन्फ्यूज़ थी के राघव उसे कॉल करने क्यू कह रहा था

राघव- नहीं कर सकता

रिद्धि- क्यू??

राघव- बस कर दो ना यार और सुनो उससे पूछना मेरी रेड फाइल कहा रखी है

रिद्धि राघव को शक भरी नजरों से देख रही थी लेकिन फिर भी उसने नेहा को कॉल लगा दिया इधर नेहा ने जब अपने फोन का रिंग सुना तब वो अपनी चाची की किचन मे मदद कर रही थी और जैसे ही उसने कॉलर आइडी पर राघव का नाम देखा उसके चेहरे पर स्माइल आ गई लेकिन साथ ही चैलेंज भी दिमाग मे आ गया नेहा ने अपने फोन उठाया और सचिन के रूम मे गई

नेहा- सचिन ये लो अपने जिजू से बात करो

सचिन- हैं! क्यू? आप ही कर लो ना बात

सचिन भी कन्फ्यूज़ था

नेहा- नहीं कर सकती तुम बस कहा वो करो

और सचिन ने नेहा के हाथ से फोन लेकर कान से लगाया और दूसरी तरफ रिद्धि थी

रिद्धि- हैलो!

सचिन- दी जिजू को कोई प्रॉब्लेम है क्या? उनका आवाज लड़की जैसा आ रहा है

सचिन ने धीमी आवाज मे नेहा से कहा और नेहा चौकी

नेहा- क्या? ‘लड़की का आवाज! ये किसी लड़की के साथ तो नहीं है ना इसीलिए इन्होंने चैलेंज के लिए हा कहा था’

नेहा- लाओ मुझे दो फोन

नेहा ने एक झटके के साथ सचिन के हाथ से फोन छीना

नेहा- व्हाट द हेल कौन हो तुम और मेरे हज़बन्ड का फोन तुम्हारे पास क्या कर रहा है?? और इन मिस्टर देशपांडे को तो मैं छोड़ूँगी नहीं

नेहा एकदम फोन पर चिल्लाने लगी वही दूसरी तरफ रिद्धि उसकी आवाज सुन सकते मे थी

रिद्धि- भाभी! भाभी रीलैक्स मैं हु रिद्धि आप क्या बोल रहे हो भाई किसी के साथ नहीं है वो तो घर पर है

नेहा- हैं?

अब नेहा सचिन को घूर के देखने लगी

नेहा- सॉरी रिद्धि वो मुझे लगा कोई और है वो मेरे भाई ने फोन उठाया था और वो तुम्हें नहीं जानता ना लेकिन इनका फोन तुम्हारे पास?

रिद्धि- वो पता नहीं क्यू लेकिन भाई आपसे बात नहीं कर रहा है और उनको उनकी कोई रेड फाइल चाहिए

नेहा- रेड फाइल?

नेहा के पहले तो कुछ समझ नहीं आया फिर उसे फोन के दूसरे साइड से खुसफुसाहट सुनाई दी राघव रिद्धि से फोन स्पीकर पर रखने कह रहा था और नेहा के चहरे पर मुस्कान आ गई

नेहा- मुझे कोई रेड फाइल नहीं पता बाय!

और नेहा ने अचानक फोन काट दिया और इधर फोन कटते ही राघव रिद्धि से बोला

राघव- फोन क्यू काटा

रिद्धि- मैंने नहीं भाभी ने कट किया है और आपको हुआ क्या है ऐसे देवदास क्यू बने हो आ जाएगी भाभी कल और बात करना है तो कर लो ना यार, क्या आप दोनों का झगड़ा हुआ है क्या??

रिद्धि के सवाल पर राघव ने ना मे गर्दन हिला दी

रिद्धि- फिर क्या बात है

और अब राघव से रहा ना गया वो अपने बेड पर बैठा और उसने अपनी दुखभरी कहानी अपनी बहन को सुनाई पहले को रिद्धि को हसी आई लेकिन फिर अपने भाई की हालत उससे देखि भी नहीं जा रही थी

रिद्धि- आप लोग बच्चे हो क्या यार!! अच्छा अब मुह मत सड़ाओ एक आइडिया है मेरे पास

आइडिया का सुनते ही राघव ने रिद्धि को देखा

राघव- क्या है जल्दी बताओ

फिर रिद्धि ने राघव के कान मे आइडिया कहा

राघव- पागल है क्या, ऐसा करने पे सब मेरे बारे मे क्या सोचेंगे रिद्धि?

रिद्धि- ठीक है दूसरा आइडिया सुनो फिर

फिर रिद्धि वापिस उसके कान मे फुसफुसाई

राघव- ये तो उससे भी बुरा है ये नहीं होगा मुझसे

रिद्धि- क्या भाई हर आशिक अपने प्यार के लिए ये करता है फिर आप क्यू नहीं

राघव- कौन करता है ऐसा?

रिद्धि- मेरी किताबों का हीरो तो करता है

राघव- तुम नेहा के साथ कम रहा करो थोड़ा उसकी आदते आ रही है तुममे

रिद्धि- ऐसा कुछ नहीं है मैंने आइडिया बता दिया है लेना है लो वरना जाने दो

जिसके बाद रिद्धि वहा से चली गई और राघव अपना लैपटॉप लेकर बैठ गया ताकि काम के चक्कर मे नेहा के खयालों को दिमाग से निकाल सके लेकिन वो उसे बहुत ज्यादा मिस कर रहा था उसे अपना रूम खाली खाली सा लग रहा था, उसे एक तरह से नेहा की आदत हो चुकी थी उसे अपनी नजरों के सामने देखने की और यही आदत अब उसके लिए मुसीबत बनी हुई थी

दूसरी तरफ नेहा अपने परिवार के साथ समय बिताकर अपने रूम मे आ गई थी लेकिन उसके दिमाग मे भी बस राघव ही छाया हुआ था उसने बेड पर लेटे लेटे सोने की कोशिश की लेकिन नींद उसकी आँखों से कोसों दूर थी

नेहा ने अपना फोन उठा कर राघव का नंबर भी डाइल किया लेकिन कॉल नहीं लगाया, नेहा भी राघव को बहुत ज्यादा मिस कर रही थी राघव को जैसे नेहा की आदत हो चुकी थी वैसा ही हाल नेहा का भी था, नेहा अपने बेड पर लेटी सोने की कोशिश करने लगी उसने अभी करवट ली ही थी के उसके कुछ आवाज आया नेहा अचानक से उठी, उसने इधर उधर देखा लेकिन कुछ नहीं था वो वापिस लेटने ही वाली थी के वापिस से आवाज आई जिसने उसे इस बार थोड़ा डरा दिया

ऊपर के फ्लोर पे बस नेहा का अकेली का रूम था बाकी सबके कमरे नीचे थे माने अभी वहा उस फ्लोर पर नेहा के अलावा और कोई नहीं था

नेहा- क.... कौन है??

नेहा ने डरते डरते पूछा और रूम मे रखी सचिन की क्रिकेट बैट उठा ली

नेहा- कौन है? देखो जो भी है सामने आ जाओ वरना इस बैट से बहुत मारूँगी

तभी वहा उसे एक बिल्ली के होने का एहसास हुआ कमरे के लाइट डीम थे और बाहर से चलती हवा माहोल को थोड़ा डरावना बना रही थी हवा के चलते एक फ्लावर पॉट नीचे गिरा था नेहा ने उसे उठा कर उसकी जगह पर रखा

और जैसे ही वो पलटी उसकी नजरे किसी पर पड़ी उसकी आंखे बड़ी हो गई मुह खुल गया और वो जोर से चीखी.......

क्रमश:
 
अपडेट 54

अपने सामने किसी को खडा देख नेहा एकदम से चौकी और वो चीखी लेकिन तभी उस बंदे से अपने हाथ से नेहा का मुह दबा दिया ताकि उसकी चीख कोई सुन ना पाए और तभी नेहा ने अपने हाथ मे पकड़े बॅट से उस बंदे के सर पे दे मारा जिससे वो बंदा थोड़ा हिला उसके मुह से हल्की सी आह निकली लेकिन फिर वापिस उसने अपने हाथ से नेहा का मुह बंद कर दिया और उसके हाथ से बॅट छीन लिया नेहा छूटने के लिए छटपटाने लगी और इसी कशमकश मे वो लोग बेड पर जा गिरे पहले नेहा और उसके ऊपर वो बंदा

“ओये चिक्की चीखो मत मैं हु”

अब आधे लोगों ने अंदाजा पहले की लगा लिया होगा ये वो राघव ही था

नेहा- मम्मम्मम्

नेहा ने बोलने की कोशिश की

राघव- ओ हा सॉरी

राघव ने नेहा के मुह से अपना हाथ हटाया

नेहा- आप क्या...

राघव- धीरे! धीरे मेरी मा सबको जगाओगी क्या

राघव ने फुसफुसाकर कहा

नेहा- आप क्या पागल हो गए है क्या? ये क्या कोई तरीका है आने का? वो भी इस टाइम पर??

राघव- हा तो क्या तुम ऐसे मारोगी मुझे

राघव अपना सर सहलाने लगा जहा नेहा ने उसे बॅट से मारा था और नेहा को भी फिर ये ध्यान मे आया

नेहा- शीट!!! सॉरी सॉरी मुझे नहीं पता था ना आप है इसीलिए

बोलते बोलते नेहा की आँखों ने आँसू आ गए और यही राघव बाबू पिघल गए उसे खास लगी भी नहीं थी लेकिन अपन ने राघव को मारा है इस बात से नेहा को तकलीफ हो गई थी वही राघव से नेहा के आँसू नहीं देखे जा रहे थे

राघव- हे चिक्की क्या हुआ? कोई कुछ बोला क्या? ऐसे रो क्यू रही हो? मुझे बताओ अभी सीधा करता हु उसे

राघव ने एकदम अपनी जगह से उठते हुए कहा वही नेहा ने उसे खिच के वापिस बीठा लिया और राघव के गले लग गई

ऐसे अचानक नेहा के गले लगने से राघव पहले तो थोड़ा चौका लेकिन फिर जैसे ही उसने नेहा की रोने की सिसकी सुनी उसे अपने से चिपका लिया

राघव- क्या हुआ नेहा ऐसे रो क्यू रही हो मुझे टेंशन हो रही है यार बताओ ना?

नेहा- मैंने बहुत मिस किया आपको

राघव- बस इतनी सी बात! उसमे रोने जैसा क्या है यही हु मैं

राघव ने अपने हाथ से नेहा के आँसू पोंछे

नेहा- आप यहा क्यू आए वो भी इतना लेट ?

राघव- क्यू सप्राइज़ पसंद नहीं आया क्या? और मिस करने का ठेका क्या तुम्हारा है मैं भी मेरी चिक्की को मिस कर रहा था तो आ गया

नेहा- आइ हेट यू

राघव- क्यू?

नेहा- आप कितने दुष्ट है ना एक बार भी कॉल नहीं किया मुझे

राघव- हा तो चैलेंज भी तो तुमने दिया था वैसे मैडम कॉल आप भी कर सकती थी

नेहा- मैं कॉल करती तो चैलेंज फेल हो जाता ना

नेहा ने राघव को देख कहा और दोनों हसने लगे

राघव- फिर कौन हारा चैलेंज?

नेहा- आप और कौन!

राघव- कैसे? मैडम आपने मुझे पकड़ रखा नहीं मैंने आपको नहीं

नेहा- हा तो पहले आप आए हो यहा मैंने थोड़ी बुलाया था

फिर कुछ देर दोनों ऐसे ही बात करते रहे एकदूसरे को बताते रहे के उन्होंने एकदूसरे को कितना मिस किया और कुछ समय बाद

राघव- चलो सोते है अब बहुत रात हो गई है तुम्हारी आँखों मे भी नींद है

नेहा- लेकिन आप??

राघव- लेकिन क्या? मैं यही रुक रहा हु

नेहा- कोई देख लेगा आपको जाइए आप

राघव- कैसी बीवी हो यार एक तो मैं इतना रिस्क लेकर पाइप से चढ़ कर बालकनी से आया हु और तुम हो के मुझे भगाने मे लगी हो..... पत्थर दिल बीवी

राघव ने उदास चेहरा बनाए कहा

नेहा- अच्छा अच्छा बाबा रुक जाइए लेकिन सुबह सबके उठने से पहले चले जाइएगा

नेहा को राघव को देख कहा जो अभी किसी कॉलेज स्टूडेंट की तरह ड्रामे कर कहा था

नेहा- हम किसी कॉलेज जाने वाले कपल की तरह बिहेव कर रहे है ऐसा नहीं लगता आपको

दोनों बेड पर लेट गए नेहा ने अपना सिर राघव के सीने पर रखा और उसका एक हाथ अपने कंधे पर, खिड़की से वो लोग आसमान मे निकले चाँद को देख सकते थे

नेहा- अब आप मेरे साथ गणेशोत्सव मे पूरे 10 दिन आरती में शामिल होंगे

नेहा ने राघव को करीब करीब ऑर्डर देते हुए कहा

राघव- सब कितना बदल गया है ना?

राघव ने चाँद को देखते हुए कहा

नेहा- क्या??

राघव- हमारा रिश्ता! कितना बदल गया है ना? हम... मतलब मैं उस टाइम कितना गधा था जो इस शादी से भाग रहा था तुमसे दूर भाग रहा था और अब देखो तुम्हें देखने तुमसे मिलने यहा भागा भागा आया हु

नेहा- हम्म बदलाव तो आया है

नेहा ने स्माइल के साथ कहा

राघव- आइ प्रॉमिस मैं कभी तुमसे झगड़ा नहीं करूंगा भले कोई रीज़न हो हा छोटी मोटी नोक झोंक के बारे मे कुछ नहीं कह सकते लेकिन अब तुम्हें कभी वो राघव नजर नहीं आएगा जिससे तुम 6 महीने पहले मिली थी, तुम जैसे हो वैसी ही मुझे बहुत पसंद हो नेहा कभी भी अपने आप को मत बदलना... और अपना सेल्फ रिस्पेक्ट कभी मत छोड़ना तुम जैसी हो परफेक्ट हो

राघव की बात सुन नेहा ने उसकी तरफ देखा

नेहा- क्या हुआ आप अचानक ऐसे क्यू बात कर रहे है? मैं जानती हु आप कभी मेरा साथ नहीं छोड़ेंगे

राघव- पता नहीं बस लगा के कहना चाहिए तो कह दिया.. हा एक और बात कोई तुम्हें कुछ कहे किसी से कंपेयर करे किसी की बातों को दिल से लगाने की जरूरत नहीं है बस इतना ध्यान मे रखो के मुझे तुम जैसी हो वैसी ही बहुत बहुत बहुत अच्छी लगती हो

राघव ने नेहा को अपनी बाहों मे कस लिया

नेहा- पता है आप उतने बुरे भी नहीं है जितना लोग सोचते है

राघव- मतलब मैं क्या बुरा हु

नेहा- नहीं बात मेरा वो मतलब नहीं था

राघव- जो भी मतलब था मेरा ये साइड सिर्फ तुम्हारे लिए है चिक्की किसी और के लिए नहीं बाकी लोगों के लिए मुझे खडूस ही रहने दो और सो जाओ अब

‘मैं नहीं जानता के मैं तुम्हें डिजर्व भी करता हु या नहीं चिक्की लेकिन मैं इतना तो जानता हु के अब चाहे कुछ हो जाए हमे अलग नहीं कर सकता मैं तुम्हें कभी अपने से दूर नहीं जाने दूंगा’ राघव ने सोचा जिसके बाद वो दोनों नींद के आगोश मे समा गए

अगले दिन सुबह नेहा की आँख खुली तो राघव वहा से जा चुका था और नेहा के फोन पे उसने एक मैसेज छोड़ा हुआ था

"गुड मॉर्निंग मिसेस चिक्की! जैसा मैंने कहा था मैं सुबह जल्दी निकल गया हु और अब कोई चैलेंज नहीं है तो अब हर 3 घंटे मे मेरा कॉल बजेगा"

राघव का मैसेज देख नेहा के चेहरे पर स्माइल आ गई लेकिन उसके कोई रिप्लाइ नहीं दिया और मैसेज को सीन पर छोड़ दिया राघव ताकि राघव को छेड़ सके और बाथरूम मे चली गई

जब वो बाथरूम मे बाहर आई तो उसका फोन घनघना रहा था और कॉलर आइडी पर राघव का नाम फ्लैश हो रहा था

नेहा- हैलो!

नेहा ने धीमे से कहा और अपनी स्माइल दबाने के लिए अपने होंठ दांतों से दबा लिए

राघव- मैंने कितनी बार कहा है अपने होंठ मत चबाया करो

राघव की बात सुन नेहा की आंखे बड़ी हो गई उसने इधर उधर देखा लेकिन राघव वहा नहीं दिखा

राघव- इधर उधर मत देखो चिक्की मैं वहा नहीं हु

नेहा- फिर आपको कैसे पता की मैंने...

राघव- जस्ट अ सेक्सी गेस😉

नेहा फोन पर ही राघव के चेहरे पर आई स्माइल फ़ील कर सकती थी

नेहा- आपने क्यू कॉल किया

राघव- अरे न कोई मॉर्निंग विश न किस!

नेहा- नहीं!

राघव- क्यू?

नेहा- मुझे विश नहीं करना है

राघव- तो किस के बारे मे क्या खयाल है 😉

राघव की बात सुन नेहा की आंखे बड़ी हो गई और उसके चेहरे पर लाली उभर आई

नेहा- शट उप

राघव- अरे तुम यहा नहीं हो ऐसे मे मैं शर्ट कैसे ऊपर कर सकता हु

राघव ने मासूमियत से कहा और नेहा ने अपने माथे पे हाथ मार लिया

नेहा- आपको पता है ये फ्लर्ट की डिक्शनेरी मे सबसे पुराना लाइन है

राघव- मुझे कैसे पता होगा मेरी बीवी खुद तो रोमांटिक नोवेल्स पढ़ती है लेकिन मुझे कुछ नहीं सिखाती

नेहा- आपको ऑफिस नहीं जाना क्या जाइए तयार होइए मुझे नीचे जाना है बाय!

जिसके बाद बगैर राघव के रिप्लाइ के नेहा ने फोन काट दिया और नीचे चली गई, उसे रह रह कर राघव की बातों पर हसी आ रही थी

पूरा दिन किसी पानी के झरने जैसा बह गया राघव अपने वादे मुताबिक उसे हर 3-4 घंटे मे कॉल या विडिओ कॉल कर रहा था और जब कॉल पर राघव ने नेहा के चाचा चाची को उसे कुछ दिन और रोकने के बारे मे सुना तो उसे तो हार्ट अटैक ही आने वाला था वो तो उसी समय नेहा को लेने जाने वाला था लेकिन नेहा ने उसे सुबह आने का बोला

अगले दिन राघव नेहा को लेने उसके घर पहुचा तो वो बहुत खुश था जिसके बाद वो दोनों शॉपिंग करने के लिए गए

ये पहली बार था जब नेहा और राघव ऐसे शॉपिंग करने गए थे क्युकी गणेशोत्सव में बस दो ही दिन बचे थे और जब वो सब निपटा कर घर पहुचे तो देशपांडे वाड़े मे नेहा का जोरदार स्वागत हुआ सब उसे बताने लगे के सबने उसे कितना मिस किया और जब नेहा को घरवालों ने राघव की हालत बताई तो नेहा की हसी नहीं रुक रही थी वही गणेशोंत्सव की तयारिया शुरू हो चुकी थी अब पता नहीं ये गणेशोत्सव इनके जीवन मे क्या नया तूफान लाने वाला था.......

क्रमश:
 
असलो गाइस सफ पर एलेक्शंस हो रहे है बहुत मजा आने वाला है और मैं कुछ दिन उसमे बहुत ज्यादा बिजी हु, यू कैन सी इलेक्शन कमिश्नर बैज ों माय प्रोफाइल, इसीलिए अपडेट थोड़ा लेट हो सकता है (पॉसिबिलिटी है) वैसे मैं पोस्ट कर hi दिया करूँगा बूत एकड़ दिन समझ लेना प्ल्ज़ :प्रे:

आल्सो विजिट लाउन्ज सेक्शन जो सबसे ऊपर है, वह बहुत मजे आने वाले है, 2 पार्टीज इलेक्शन लड़ रही है, टास्कस गेम्स सब होंगे बोले तो फुल मजे

:चियर्स:
 
अपडेट 55

अगले दो दिन पूरे देशपांडे वाडे मे चहल पहल थी बाप्पा के आगमन की तयारिया पूरे जोर शोर से चल रही थी सारे शहर मे देशपांडे वाडे का गणेशोत्सव मशहूर था ये शहर का सबसे बड़ा घरगुती गणपती था और अब आने वाले 10 दिन वाडे मे बाप्पा के दर्शन को आने वाले और देशपांडे परिवार के खास लोग और बिजनस पार्टनर्स को खास इन्वाइट किया जाने वाले था बेसिकली अगले 10 दिन घर के सब लोग बस आने वाले मेहमानों के स्वागत मे और बाप्पा की पूजा मे बिजी रहने वाले थे, इन 10 दिनों मे वाडे मे अलग अलग प्रोग्राम्स भी आयोजित किए जाते थे जैसे शास्त्रीय संगीत और भजन के कार्यक्रम, पिछले कुछ सालों मे राघव ने अपने आप को इन सब से दूर कर लिया था वो बस आरती के समय आता फिर वापिस गायब हो जाता था लेकिन इस बार वैसा नहीं था नेहा की वजह से राघव पूरे मन से इस बार का उत्सव मनाने वाला था वो भी अपने सारे कामों को भूल के और आज वो दिन था जब बाप्पा का वाडे मे आगमन होना था सुबह से घर मे सब लोग काम खत्म करवाने मे लगे थे गणेश स्थापना का मुहूर्त दोपहर का था और दोपहर मे पूजा के बाद शाम को भव्य आरती होने वाली थी जिसमे देशपांडेस के बिजनस पार्टनर्स और स्टेट के कुछ बड़े पोलिटिकल लीडर्स और भी की जानी आणि हस्तिया आने वाली थी l।

राघव भी आज सबके साथ सारे काम खुद देख रहा था सारी अरेंजमेंट्स जांच रहा था।

जानकी- राघव ये फूल प्रसाद की टोकरिया सब लेजाके मंडप मे रखो पूजा के सामान के साथ और ऐसे रखना के किसी बच्चे का उस तक हाथ न पहुचे वो लोग एक फूल नहीं छोड़ेंगे

जानकी जि ने राघव को बुला कर कहा और उसने भी अपनी मा की बात का पालन किया जिसके बाद उसकी नजर नेहा पर पड़ी जो रिद्धि और श्वेता के साथ किसी गहन चर्चा मे डूबी हुई थी तो राघव उनके पास पहुचा।

नेहा- मैं न बहुत कन्फ्यूज़ हु सारी पहनु या लहंगा या नऊवारी तुम लोग कुछ सजेस्ट करो ना...

रिद्धि- कुछ भी पहन लो भाभी आप पर सब सूट करता है

श्वेता- हा और एक ईजी ऑप्शन दु जो भईया पहने उससे कुछ मैचिंग पहन लो

तभी वहा राघव पहुंचा

राघव- और लेडिज क्या चल रहा है

रिद्धि- डिस्कशन! भाभी का अभी तक क्या पहनना है डिसाइड नहीं हुआ है!

राघव- ये क्या कोई डिस्कशन का टॉपिक है क्या 🙄😂

राघव की बात पर नेहा ने उसे घूर कर देखा तभी राघव की नजर नेहा ने हाथ मे पकड़ी नऊवारी पर पड़ी

राघव- तुम ये पहनने वाली हो?? मुझे नहीं पता था तुम्हें नऊवारी पहननी आती है

(अबे शादी मे भी तो वही पहनी थी उसने 🤦🏻‍♂️)

नेहा- हा और आपको इसका कुछ नहीं पता है तो आप चुप रहिए

तभी श्वेता और रिद्धि वहा से चली गई और राघव और नेहा ही वहा बचे

राघव- जो भी हो बट मुझे नहीं लगता नऊवारी अच्छी लगेगी तुमपे

राघव ने नेहा को सर से पाओ तक देखते हुए कहा वही नेहा हाथ बांधे उसे देख रही थी

नेहा- कहना क्या है आपको

राघव- कुछ नहीं मैं तो बस सच कह रहा हु

नेहा- पक्का?

राघव- हा और नहीं तो अच्छा चलो एक वादा करता हु अगर तुम्हें देख कर मैं अपनी जगह पर जमा रह गया तो पूरे 10 दिन बस तुम्हारे पीछे पीछे घूमूँगा

राघव ने नेहा के कान मे कहा

नेहा- तो फिर तयार हो जाइए मेरे पीछे घूमने के लिए मिस्टर देशपांडे

इतना बोल कर नेहा वहा से चली गई और राघव भी दूसरे कामों मे लग गया

कुछ समय बाद घर के सब मर्द जाकर ढोल ताशे के साथ बप्पा को ले आए और उन्हे मंडप मे स्थापित किया गया जिसके बाद विधिवत स्थापना की गई और अब शुरू हुई शाम की भव्य आरती की तयारिया....

शाम का वक्त हो चला था और मेहमान आने लगे थे आरती का वक्त हो रहा था और घरवाले भी सब गेस्ट्स को अटेन्ड कर रहे थे राघव और धनंजय अपने बिजनस क्लाइंट्स को संभाल रहे थे वही शेखर रमाकांतजी के साथ उनका पोलिटिकल सर्कल हैंडल कर रहा था शिवशंकर देशपांडे भी सबसे मिल रहे थे

रमाकांत- सब रेडी है?

धनंजय- हा भाईसहब सब डन है!

गायत्री- चलो सब आरती का समय हो गया है

शिवशंकर- नेहा कहा है

दादू ने जब अपनी बहु को नहीं देखा तो पूछा फिर राघव भी इधर उधर देखने लगा लेकिन नेहा उसे नहीं दिखी अभी विवेक ने इशारा किया

विवेक- वो रही भाभी

और जैसे ही राघव ने उस ओर देखा वो नेहा की खूबसूरती मे खो गया, उसने एक नीले रंग की नऊवारी साड़ी पहनी हुई थी गले मे चपला हार, माथे पर चंद्र कोर बिंदी और नाक मे नथ, उसने अपने बालों का जुड़ा बनाया हुआ था जिसमे गजरा लगा हुआ था और इस पारंपरिक महराष्ट्रीयन लुक मे वो कमाल की खूबसूरत दिख रही थी।

राघव की आंखे बस नेहा पर जमी हुई थी एक पल के लिए भी उसने अपनी नजरे नेहा ने नहीं हटाई थी वही सेम टाइम मे कई और लोगों की नजरे नेहा पर जमी हुई थी और ये राघव को रास नहीं आ रहा था जो झट से जाकर नेहा के बाजू मे खड़ा हो गया मानो कह रहा हो के वो सिर्फ उसकी है

शिवशंकर- चलो भाई सब आ गए तो आरती शुरू करते है

जिसके बाद शुरू हुई बप्पा की भव्य आरती

नेहा के साथ बप्पा की आरती करते समय राघव के चेहरे की मुस्कान एक पल के लिए भी गायब नहीं हुई थी, वो तो इस वक्त दुनिया का सबसे खुश आदमी था और वो मन ही मन बप्पा को धन्यवाद दे रहा था नेहा को उसकी जिंदगी मे लाने के लिए

आरती के बाद नए आए गेस्ट्स के स्वागत मे सब लग गए

“congratulations मिस्टर देशपांडे फॉर योर मेरिज, सॉरी मैं तब आ नहीं पाया था” एक 40 की उम्र के आसपास के आदमी ने राघव से हाथ मिलते हुए कहा

“कोई बात नहीं मिस्टर शाह मीट माइ वाइफ मिसेज नेहा राघव देशपांडे”

राघव ने मिस्टर शाह को नेहा से मिलाया

“नाइस तो मीट यू मिसेज देशपांडे, आई मस्ट से मिस्टर देशपांडे योर वाइफ इस ब्यूटीफुल आप दोनों की जोड़ी काफी अच्छी लगती है"

राघव- थैंक यू, प्लीज इन्जॉय

जिसके बाद राघव और नेहा कई और लोगों से मिले राघव सबसे नेहा को इन्ट्रोडूस करा रहा था और जब दोनों के आसपास कोई नहीं होता तो दोनों अपनी प्यार भारी नोक झोंक मे बिजी थे तभी विवेक वहा नेहा को बुलाने आया

विवेक- भाभी आपको दादी बुला रही है और भाभी मैंने पहले बोला नहीं लेकिन आप बहुत अच्छी दिख रही हो आज

विवेक ने कहा

नेहा- थैंक यू विवेक कम से कम कोई तो है जो कॉम्प्लीमेंट करना जानता है

नेहा ने राघव को देखते हुए विवेक से कहा और वहा ने चली गई और विवेक भी जाने ही वाला था के राघव ने उसे पकड़ा और उसके गले मे अपना हाथ डाल के उससे बोला

राघव- तुझे हमेशा कबाब मे हड्डी क्यू बनना होता है बे

विवेक- मैंने क्या किया अब और वैसे भी गलती आपकी है आप भाभी की तारीफ नहीं करते और मैं तो प्रैक्टिस कर रहा हु आगे अपने को कोई दिक्कत नहीं चाहिए 😎

जिसके बाद विवेक भी वहा से चला गया और राघव अपने क्लाइंट्स से मिलने लगा

कुछ समय बाद राघव और नेहा फिर से साथ साथ थे और इस बार राघव उसे लेकर एक साइड मे आया था जहा कोई उन्हे डिस्टर्ब करने वाला नहीं था और उसी वक्त वहा देशपांडे वाडे के गेट पर एक गाड़ी आकार रुकी और उसमे से एक शक्स उतरा जो फोन पर किसी से बार कर रहा था

“हा पहुच गया हु मैं..... हा हा उससे मिलने की जल्दी तो मुझे भी है...... उसे उम्मीद नहीं होगी के मैं आज यह आने वाला हु.... देखते है वो कैसे रीऐक्ट करेगा..... ” जिसके बाद उस इंसान ने फोन काट दिया और वो अंदर आया

उसे आता देख रमाकांत जी उसे लेने के लिए गए वही राघव जो नेहा के साथ था उसकी नजर जैसे ही उस इंसान पर पड़ी वो अपनी जगह जम गया, उसका दिमाग एकदम ब्लैंक हो गया.......

कौन था वो और उसे देख राघव ऐसे चौक क्यू गया किससे मिलना था उस इंसान को बहुत से सवाल है जिनका जवाब आने वाले भागों मे मिलेगा तब तक साथ बने रहिए कहानी कैसी लग रही है कमेंट्स करिए

क्रमश:
 
नोट:- नेक्स्ट अपडेट विल बे ों 20तह सितम्बर, गाइस 2 दिन में गणेशोत्सोव है बहुत तैयारियां है, घर + मंडल सब देखना है, साथ में सफ एलेक्शंस है, तो मैं बहुत ज्यादा hi बिजी रहूँगा और आने वाले उपदटेस बहुत ज्यादा इम्पोर्टेन्ट है तो उनको फुल टाइम देना चाहता हु इसीलिए अब नेक्स्ट अपडेट 20 सेप्ट को आएगा, और आपको पता है मैं वेड से नहीं चुकता, होप यू गाइस अंडरस्टैंड. थैंक यू फॉर योर कांस्टेंट लव एंड सपोर्ट कीप सपोर्टिंग :थैंक्स:
 
अपडेट 56

राघव नेहा को सबसे दूर लेके आया था ताकि अकेले मे उसके साथ कुछ प्यार भारी बाते कर ले लेकिन तभी देशपांडे वाडे के गेट से एक शक्स की एंट्री हुई जिसे देख राघव अपनी जगह पर जम गया उससे भी ज्यादा हैरत उसे तब हुई जब उसने देखा के उसके पापा रमाकांत उस इंसान का स्वागत कर रहे थे और उनके साथ शेखर था

उस शक्स को देख राघव का दिमाग एकदम ब्लैंक हो गया उसके दिमाग मे पुरानी यादें चलने लगी वो नेहा से एकदम दूर हो गया वही अचानक राघव में आए इस बदलाव का कारण नेहा को समझ नहीं आ रहा था राघव नेहा से बगैर एक शब्द कहे वहा से चला गया वही नेहा को इस तरह उसके ऐसे बर्ताव का कारण समझ नहीं आ रहा था वो राघव को आवाज देते हुए उसके पीछे भागी तब तक जब तक वो घर के दूसरे कोने मे नहीं पहुचे राघव की आंखे एकदम लाल हो गई थी और उसे ऐसे देख नेहा को और चिंता होने लगी

नेहा- राघव क्या हुआ है आपको?

नेहा ने अपने हाथों से राघव का चेहरा थामते हुए उससे पूछा और राघव ने एकदम से उसे गले लगा लिया वो भी एकदम कस कर

नेहा- अचानक क्या हुआ आपको बताइए मुझे?

नेहा ने राघव की पीठ सहलाते हुए उससे पूछा

राघव- वो... वो है यहा जिससे मैं जिंदगी मे कभी नहीं मिलना चाहता था वो यही है मैंने देखो उसे

राघव बहुत ज्यादा नर्वस था उसकी साँसे भी तेज चल रही थी वही राघव की बात सुन नेहा समझ चुकी थी के वो किस बारे मे बात कर रहा है

नेहा- मैं जानती हु राघव, सब जानती हु

नेहा ने कहा जिसे सुन राघव ने उसे अपने से अलग किया और कन्फ़्युशन मे उसे देखने लगा

राघव- तुम.. तुम जानती हो?

नेहा- हा! शेखर ने बताया उस दिन जब मैं ऑफिस से रोते हुए घर आई थी

अब राघव के दिमाग मे सब क्लियर था कैसे उस दिन के बाद नेहा में एकदम बदलाव आया था वो डरी हुई नेहा और बोल्ड नेहा, उनके रिश्ते मे भी उसी दिन से बदलाव आया था वो नेहा को देखने लगा

राघव- तुम सब जानती थी लेकिन फिर भी मुझे कुछ नहीं बताया?

नेहा- मुझे लगा आप वापिस उन बातों मे उलझ जाएंगे इसीलिए काभी ये बात छेड़ी ही नहीं लेकिन उससे आपको हर्ट नहीं करना था मुझे

नेहा की बात सुन राघव कुछ नहीं बोला वो अपने ही खयालों मे गुम था नेहा ने उसे पुकारा तब जाकर वो अपने खयालों से बाहर आया उसने अपने चेहरे से नेहा का हाथ हटाया और पीछे हटने लगा

नेहा- क्या हुआ कहा जा रहे है आप

राघव- मुझे.... मुझे थोड़ा वक्त चाहिए नेहा मेरा दिमाग अभी जगह पर नहीं है और प्लीज मुझे रोकना मत

इतना बोल राघव वहा से चला गया और नेहा बस उसे जाते हुए देखती रही

‘है बप्पा इनकी रक्षा करना, सब ठीक कर देना’ नेहा ने मन ही मन प्रार्थना की

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राघव ने अपनी गाड़ी निकाली और घर से दूर निकल गया उसके दिमाग मे इस वक्त बहुत कुछ चल रहा था और जब वो एक सुनसान जगह पर पहुचा उसने गाड़ी रोकी और बाहर आया, उसे कुछ घुटन सी महसूस हो रही थी उसने अपने कुर्ते के ऊपर के 3 बटन खोले उसके दिमाग मे लोगों की आवाजे गूंज रही थी

“राघव यू आर अ लूसर”

“सब तुम्हारी वजह से हुआ है”

“ये तो साला है ही मनहूस”

“इसके साथ कभी कोई खुश नहीं रह पाएगा”

“अरे तभी तो इसका कोई दोस्त नहीं है”

“किलर...”

राघव- नहीं!! नहीं!!! नहीं!!

राघव अपने दोनों कानों पर हाथ रख जोर से चीखा वो पसीने से पूरा तरबतर था और उसकी साँसे भी तेज चल रही थी और वो अपनी गर्दन बार बार ना मे हिला रहा था

राघव- ये तुमने सही नहीं किया नेहा!! तुम्हें मुझे ये बात बता देनी चाहिए थी के तुम मुझ पर तरस खा रही हो इसीलिए मेरे साथ हो मेरे पास्ट की वजह से

राघव अपने घुटनों पर बैठ गया, उसकी आंखे नम हो गई थी और जैसे ही उसने अपनी आंखे बंद की वो उन्ही यादों मे खो गया

इधर घर मे नेहा इधर से उधर चक्कर काट रही थी रात के 1 बज रहे थे और राघव अभी तक लौटा नहीं था और नेहा को अब उसकी चिंता होने लगी थी वो कई बार राघव को कॉल लगा चुकी थी लेकिन राघव ने किसी कॉल का जवाब नहीं दिया था नेहा ने घरवालों के सामने तो जैसे तैसे राघव के काम का बहाना बना दिया था लेकिन चिंता के मारे उसका दिल इसवक्त जोरों से धडक रहा था उसने दोबारा राघव को कॉल लगाया लेकिन इस बार उसे फोन की रिंगटोन भी सुनाई दी देखा तो राघव आ चुका था

नेहा- कहा थे आप? और मेरा फोन क्यू नहीं उठा रहे थे? आप ठीक है ना??

बदले मे राघव ने बस हा मे गर्दन हिला दी और अपने रूम मे चला गया और उसके पीछे पीछे नेहा भी, राघव का उतरा हुआ चेहरा नेहा से देखा नहीं जा रहा था उसके दिमाग मे भी इसवक्त बहुत सी बाते चल रही थी और उसकी तंद्री तब टूटी जब राघव उसके बाजू मे आकार बैठा नेहा ने बेड पर उसके लिए जगह बनाई और राघव लेट गया

नेहा- राघव, आप ठीक है?

राघव- मैं ठीक हु नेहा बस थका हुआ हु सोना चाहता हु

राघव की बात सुन नेहा ने भी फिर किसी बात पर जोर नहीं दिया और राघव से लिपट कर सो गई

अगली सुबह जब नेहा की आँख खुली तो राघव वहा नहीं था नेहा ने राघव को बाद मे पूरे घर मे ढूंढा लेकिन वो उसे कही नहीं दिखा और जब नेहा ने राघव को कॉल करने के लिए अपना फोन खोला तो उसने राघव का मैसेज था

‘अर्जन्ट मीटिंग मे हु’

बस। सिर्फ चार शब्द उसने उसे भेजे थे बदले मे नेहा ने उसे घर जल्दी आने के लिए कहा जिसे रिप्लाइ मे राघव बस इतना बोला के ‘कह नहीं सकता कोशिश करूंगा’

नेहा को राघव के रिप्लाइज कुछ रूखे से उखड़े से लग रहे थे उसके अतीत के खयाल अब तक उसे तंग कर थे और नेहा का अब राघव से बात करना जरूरी था उसने राघव के घर आने के बाद उससे बात करने का फैसला किया लेकिन राघव उसके बाद घर आया ही नहीं

राघव इसवक्त बिल्कुल भी नेहा के सामने नहीं जाना चाहता था, उसे ये बात सबसे ज्यादा तकलीफ दे रही थी के उसकी चिक्की उसके अतीत की वजह से अबतक बस उसपर तरस खा रही थी। उसने ऑफिस से ही धनंजयजी को बता दिया था के वो 7 दिनों के लिए किसी बिजनस ट्रिप पर जा रहा है न तो उसने नेहा को कॉल किया न उसके कॉल का जवाब दिया, नेहा राघव के इस बर्ताव से बहुत खफा थी लेकिन वो ये भी जानती थी के वो तकलीफ मे था और अब उसे सब सही करना था।

आज 5 दिन हो चुके थे और अब राघव को ये सब फेस करना ही था

नेहा- शेखर अपने भाई को कॉल लगाओ

नेहा ने शेखर के रूम मे जाते हुए कहा,

शेखर- क्या हुआ भाभी

नेहा- अपने भाई को कॉल लगाओ और उनसे आज के आज वापिस आने कहो

शेखर- लेकिन भाभी भाई कभी कोई डील अधूरी छोड़ के नहीं आएगा

नेहा- उनसे कहो मेरी हालत बहुत खराब है और मुझे वो मेरी आँखों के सामने चाहिए

शेखर- भाभी सब ठीक है ना??

नेहा- जो ठीक नहीं है वो हो जाएगा

शेखर ने राघव को कॉल लगाया लेकिन राघव ने उसका कॉल नहीं उठाया और जब 5-6 बार ऐसा हुआ तो

नेहा- तुम्हारे पास उनके दोस्त विशाल का नंबर है

शेखर- हा

नेहा- वो विशाल के साथ होंगे विशाल को कॉल करो

जिसके बाद शेखर ने विशाल को कॉल किया और विशाल ने एक झटके मे कॉल उठाया

विशाल- हा शेखर बोलो

शेखर- भाई राघव भैया आपके साथ है?

शेखर की बात सुन विशाल ने उसके साथ बैठे राघव को देखा लेकिन कुछ नहीं बोला राघव ने उसे फोन स्पीकर पर रखने कहा

शेखर- है या नहीं मैं नहीं जानता वो बस हमारे किसी कॉल का जवाब नहीं दे रहे है अगर आपका उनसे कॉन्टेक्ट हो तो कहना के भाभी...

बोलते बोलते शेखर रुका वही राघव के कान भी फोन पर जम गए

शेखर- भाभी की तबीयत बहुत खराब है उनकी कन्डिशन...

लेकिन शेखर आगे कुछ कहता उससे पहले ही राघव ने विशाल से फोन लिया

राघव- क्या हुआ नेहा को?? शेखर क्या हुआ है उसे? वो ठीक है ना? टेल मि डैमइट

राघव की आवाज मे चिंता साफ थी, वो भले नेहा को अवॉइड कर रहा था सोच रहा था के नेहा बस उसपर तरस खा रही थी लेकिन चिंता तो वो उसकी बहुत करता था आखिर उसे पसंद करता था वो, भले को घर मे किसी से बात नहीं कर रहा था लेकिन जब भी उसकी शेखर या अपने चाचा के बिजनेस रिलेटेड बात होती तो वो उसमे बीचमे नेहा के बारे मे पूछ लेता था। वो भी नेहा से बात करना चाहता था सब क्लियर करना चाहता था लेकिन बस उसे थोड़ा वक्त चाहिए था

राघव- शेखर क्या हुआ है उसे!!

राघव चीखा

शेखर- भाई आप बस जल्द से जल्द घर आ जाओ

जिसके बाद शेखर ने फोन काट दिया और नेहा का प्लान सक्सेस हो गया अब शेखर को इतना करना था के जब भी राघव का फोन आए उसे ना उठाए

नेहा जब अपने रूम मे आई तो एक मिनट मे उसके फोन पर राघव के 5 मिस कॉल आ चुके थे और जितना वो राघव को जानती थी उस हिसाब से राघव अब तक वापिस आने की तयारी शुरू कर चुका होगा

नेहा- अगर ये अभी आने के लिए निकलते है तब भी आधी रात से पहले नहीं पहुच पाएंगे तब तक अपने काम निपटा लेती हु

नेहा ने सोचा मानो ये कोई बड़ी बात ना हो लेकिन अंदर ही अंदर वो बहुत डरी हुई थी, आज बहुत सी चीजों का खुलासा होना था और उसे कोई आइडिया नहीं था के राघव कैसे रीऐक्ट करेगा जब वो यहा पहुचेगा..

इस वक्त रात के 11.30 बज रहे थे घर पर नेहा के अलावा कोई नहीं था बाकी सभी लोग गणपती दर्शन के लिए गए हुए थे और वो 1-2 बजे तक नहीं लौटने वाले थे उन्होंने नेहा से भी चलने कहा लेकिन उसने तबीयत ठीक नहीं है का बहाना बना दिया

नेहा इस वक्त अपने रूम मे बैठी टीवी के चैनल्स बदल रही थी तभी झटके के साथ उसके रूम का दरवाजा खुला और राघव हाफते हुए अंदर आया, राघव को देख नेहा के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई और इससे पहले के नेहा कुछ कहती राघव ने उसे कस के गले लगा लिया, नेहा ने भी राघव को गले से लगाया

राघव ने नेहा को ऐसे पकड़ रखा था मानो उनकी जिंदगी बस नेहा से साथ है वो किसी कीमत पर उसे नहीं खोना चाहता था और नेहा भी राघव की बढ़ी हुई धड़कनों को महसूस कर सकती थी

राघव- तुम ठीक हो?? क्या हुआ है तुम्हें?? शेखर ने कहा था तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है?? बेबी क्या हुआ है??

राघव ने नेहा का चेहरा अपने हाथों मे थामते हुए उसे ऊपर से नीचे देखते हुए पूछा

नेहा- मैं ठीक हु मुझे कुछ नहीं हुआ है मैंने ही शेखर से आपसे झूठ कहने कहा था

नेहा की बात सुन राघव उसे शॉक मे देखने लगा वो बस नेहा पर चिल्लाने ही वाला था के उसे अपना नेहा से किया वादा याद आया के वो कभी उसपर गुस्सा नहीं करेगा और उसके ट्रिप पर जाने का भी यही रीज़न था के वो अपने आप को शांत करना चाहता था उसने नेहा के वादा किया था के बगैर बात करे किसी नतीजे पे नहीं पहुचेगा लेकिन फिर भी उसने अपने मन मे ये धारणा बना ली थी के नेहा को उसपर बस तरस आ रहा था, उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था और वो एकदम से नेहा पर अपने सवालों की बारिश नहीं करना चाहता था जिससे नेहा को लगे के वो उसे दोष दे रहा है

राघव- क्यू??

राघव बस एक शब्द बोला, उसकी आवाज मे गुस्सा साफ था जिसे वो कंट्रोल कर रहा था

नेहा- आप मेरे कॉल्स का जवाब क्यू नहीं दे रहे थे?

नेहा के सीधा पॉइंट पर आते हुए सवाल का जवाब मे सवाल किया

राघव- तो इसीलिए शेखर से झूठ कहने कहोगी?? छोटी बच्ची हो क्या!! तुम्हें कोई आइडिया है मेरी क्या हालत हुई

नेहा- वही तो मैं भी जानना चाहती हु, मुझे पता है आप मेरे सवालों से बचने के लिए ही इस ट्रिप पर गए थे, आप मुझे इग्नोर क्यू कर रहे है??

राघव- मैं तुम्हें इग्नोर नहीं कर रहा हु मैं बस.... काम मे बिजी था

राघव ने नेहा से नजरे चुराते हुए कहा

नेहा- राघव मेरी ओर देखिए, आप मुझे उस दिन से इग्नोर कर रहे है, अगर आपके दिमाग मे कुछ चल रहा है तो प्लीज मुझे बताइए मैं हमेशा आपके साथ हु (नेहा ने राघव का हाथ पकड़ा) राघव मेरी ओर...

लेकिन नेहा बोलते बोलते रुकी जब उसने देखा के रघाव की आँखों मे पानी था

राघव- तुम मेरे अतीत की वजह से मुझपर तरस खा रही हो न? ये सब प्यार ये केयर सब मेरे पास्ट की वजह से है

नेहा- नहीं!!! नहीं नहीं!! आप ऐसा कैसे सोच सकते है ऐसा बिल्कुल नहीं है

राघव- तो फिर तुम्हारा बिहेवियर तब ही क्यू बदला जब शेखर ने तुम्हें सब कुछ सच बताया ?

नेहा- अब आप पहले मेरी बात ध्यान से सुनिए! हा शेखर ने मुझे सब बताया है क्युकी मैंने हमारे रिश्ते से सारी उम्मीदें खो दी थी ना तो आप कोशिश कर रहे थे ना ही मैं अब और आगे कुछ करना चाहती थी लेकिन इस रिश्ते को सार्थक करने किसी न किसी को तो कदम बढ़ाना ही था, मुझे फिक्र है आपकी और मुझे पूरा हक है ये जानना का की ऐसी कौनसी बात है जो आपको परेशान करती है और मैं इतना भी बता दु के उस सब मे आपकी कोई गलती नहीं थी आप बहुत बहादुर है राघव

नेहा- मेरा बिहेवियर इसीलिए नहीं बदला क्युकी मुझे आपके अतीत के बारे मे बात चला बल्कि मैं आपको मुझसे मिलाना चाहती थी आपका अतीत जो भी रहा हो मुझे उससे कोई फर्क नहीं पड़ता मुझे फर्क पड़ता है आपसे मुझे आपकी फिक्र है, आई एम सॉरी मुझे ये सब आपसे जानना चाहिए था ना की किसी और से लेकिन सिचूऐशन ही ऐसी थी के शेखर को मुझे सब बताना पड़ा वरना वो मुझे कभी वो बात नहीं बताता

नेहा ने राघव का गाल सहलाते हुए कहा

नेहा- शेखर ने मुझे सब बताया है लेकिन मुझे सब आपसे सुनना है। सब कुछ। शेखर ने मुझे सब सुनी सुनाई बाते बताई है लेकिन मुझे आपसे जानना है के क्या हुआ था, बताइए राघव आपका गुस्सा आपका डर आज सब बाहर आने दीजिए आज यहा आपको जज करने वाला कोई नहीं है आपको अपने डर का सामना करना होगा

राघव बस नेहा को देख रहा था

‘मुझे उसे सब बता देना चाहिए वो मेरी सारी बात मानेगी’ राघव ने मन ही मन सोचा

क्रमश:
 
अपडेट 57

राघव अपने बेड पर बैठ हुआ था और नेहा उसके बाजू मे बैठी थी..

कुछ समय बाद राघव ने बोलना शुरू किया...

राघव- शेखर को पूरी बात नहीं पता है उसे बस सुनी सुनाई बाते पता है और जो कुछ उसने विशाल से सुना है लोगो से सुना है, लेकिन आज तुम्हें पूरी बात बताता हु

नेहा- बोलिए राघव...

राघव- मैं हमेशा से ऐसा नहीं था नेहा, मतलब मैं हमेशा से ही मितभाषी रहा हु, मुझसे लोगों से मिला नहीं जाता , मैं नये दोस्त नहीं बना पाता हु , मुझे सोशल एलिमेंट नहीं कहा जा सकता था, और पहले तो मैं ऐसा दिखता भी नहीं था और शायद इसीलिए मेरे ज्यादा दोस्त नहीं है लेकिन किस्मत से नज़ाने कैसे विशाल मेरा दोस्त बना और उसका मेरे साथ होना किसी वरदान से कम नहीं है क्युकी उनसे मेरा वो फेज देखा है जो किसी को नहीं पता लेकिन विशाल अकेला नहीं है उसके जैसे दो और लोग थे या यू कहू के सिर्फ एक ही थी, वो दूसरा था उसका नाम निखिल था, उसे तुम मेरा लंदन पहला दोस्त कह सकती थी या सिर्फ वो दोस्ती बस एक तरफा हि थी क्युकी निखिल के इरादे ही कुछ और थे..

मैंने अपना पोस्ट ग्रेजुएशन लंदन से किया है नेहा। राघव देशपांडे भारत मे एक बूसिनेस फॅमिली का चिराग था लेकिन वहा एकदम अकेला था, लोग मेरा मजाक बनाते थे मुझे बुली करते थे मुझे मेरे लुक्स पर कभी कभी अनकंफर्टेबल फ़ील होता था,,

मुझे लोगों से कनेक्ट करने मे बात करने मे इनसिक्योर फ़ील होता था, अपने लुक्स पर अपने कपड़ों पर मैं बुरा फ़ील करता था, ऐसा नहीं था के मैं कुछ अफोर्ड नहीं कर सकता था लेकिन मैं क्या पहन रहा हु कैसा दिख रहा हु इसपर मैंने कभी ध्यान ही नहीं दिया था, जो मुझे सही लगता मैं पहन लेता था, उस टाइम मेरा और विशाल का कॉलेज अलग हुआ करता था वो इंजीनियरिंग कर रहा था और मैं बीजनेस स्टडीस

सब कुछ एकदम सही चल रहा था मैं अपने फर्स्ट ईयर मे था मैं अपनी क्लास मे जा रहा था रास्ते मे लोगों के मुझपर पास होते कमेंट्स सुन रहा था जिसकी वैसे तो मुझे आदत थी लेकिन वो दिन कुछ अलग था, मैं उस दिन कुछ अलग महसूस कर रहा था अब अच्छा या बुरा पता नहीं बड़ी मिक्स फीलिंग थी, मैं अपनी क्लास मे पहुचा जहा वो थी, मेरी सबसे अच्छी दोस्त, निशा, वो अकेली थी जिसे उस वक्त मैं अपना बेस्ट फ्रेंड कह सकता था, वो अकेली थी जो मेरे साथ हर वक्त रहती थी जब भी कोई मुझे बुली करता वो अकेली होती जो उनसे मेरे लिए लड़ती थी पर उसके बाद मुझे भी डाट देती थी के मैं वो सब बाते क्यू सुनता हु कुछ कहता क्यू नहीं हु निखिल हमेशा हम दोनों को चिढ़ाया करता था कहता था वो निशा को मेरी मा कहता था लेकिन मैंने उसकी बातों पर कभी ध्यान ही नहीं दिया वो मेरा दोस्त था पर बाद मे मुझे समझ आया के निखिल ने तो मुझे कभी अपना दोस्त माना ही नहीं

राघव आज अपने मन मे दबी बाते नेहा को बता रहा था

राघव- निशा एक अनाथ थी जब वो छोटी थी तब ही उसके माता पिता चल बसे थे वो सब कुछ खुद से मैनेज करती थी और इतनी मुश्किलें होने के बाद भी एकदम बेफिक्र थी हमेशा मुसकुराते रहती थी सच का साथ देना जानती थी, उसे लोगों का दूसरों को नीचा दिखाना बिल्कुल पसंद नहीं था इससे उसे सख्त चिढ़ थी और उसके सामने वैसा होता देख वो लड़ पड़ती थी

हमारा बॉन्ड समय के साथ साथ बहुत मजबूत हो गया था फ्रेंड से बेस्टफ्रेंड का सफर हमने बहूत जल्दी पार किया था और ये कहना तो बिल्कुल ही गलत होगा के मैं उसे पसंद नहीं करता था लेकिन वो प्यार नहीं था कभी नहीं

जब भी वो आसपास होती ना तो मैं मैं नही रहता था मितभाषी राघव बातूनी हो जाता था, उसके साथ ऐसा लगता मानो बाते कभी खत्म ही ना हो, उसके साथ से मैने अपने अंदर बहुत से बदलाव महसूस किए थे जो कि ऑफकोर्स अच्छे थे, सब कुछ एकदम अच्छा जा रहा था लाइफ जैसे एक परफेक्ट ट्रैक पर चल रही थी तब तक जब तक उसे प्यार नही हुआ, वो हमारी यूनिवर्सिटी के एक लड़के मैथ्यू से प्यार करने लगी थी जोकि हमारा सीनियर था, मैथ्यू दिखने में काफी अच्छा था और वो निशा की केयर भी बहुत करता था और निशा उसे पागलों की तरह चाहती थी, निशा और मैथ्यू की बढ़ती नजदीकियों की वजह से मेरे और निशा के बहुत झगड़े हुए, मुझे कभी भी मैथ्यू से अच्छी वाइब नही आई मैंने उसके बारे में बहुत कुछ सुन रखा था जो कि बहुत ज्यादा अच्छा नही था लेकिन मैंने किसी बात का यकीन नही किया था क्युकी मुझे निशा पर भरोसा था के वो अपने लिए गलत इंसान तो नही चुनेगी लेकिन फिर मैंने उसे किसी से यूनिवर्सिटी के गेट पर बाते करते सुना, उसकी बात सुन मेरी रूह तक कांप गई थी वो निशा की बॉडी की डील कर रहा था..

मैने उसे अपने एक दोस्त से कहते सुना था के वो पहले निशा का अच्छी तरह से इस्तमाल कर लेगा उसे भोग लेता और फिर उसे इंजेक्ट करके बेच देगा, मैथ्यू फीमेल ट्रैफिकिंग में था, लड़कियों को फसा कर उनका इस्तमाल कर उन्हे बेच देना धंधा था उसका..

मेरा मन किया के उसे अभी के अभी खत्म कर दू लेकिन मेरा उस वक्त मैथ्यू से भिड़ना निशा को खतरे में डाल देता, मैं वहा से निकला और सीधा निशा के पास पहुंचा

निशा इस वक्त यूनिवर्सिटी के गार्डन में अपने कुछ दोस्तो से बात कर रही थी मैंने उसे वो सब कुछ बता डाला जो भी मैने मैथ्यू से सुना था

पहले तो वो मेरी बात सुन थोड़ा चौकी लेकिन उसे मेरी बात पर विश्वास नहीं हुआ, उसे मेरी बात का यकीन दिलाने मैं जो कुछ भी कर सकता था मैंने किया यहा तक ने मैने उसके सामने हाथ तक जोड़ लिए अपने घुटनों पर आ गया लेकिन उसने मेरी एक बात भी नही सुनी उसे मुझसे ज्यादा मैथ्यू पर भरोसा था

तुम सोच रही होगी के ये कैसी दोस्त है जिसने अपने सबसे अच्छे दोस्त की बात सुनी तक नहीं लेकिन बात इतनी ही नही है, निशा का मेरे साथ रहना कई लोगो को खटकता था, निशा हमारे बैच की हार्टथ्रोब थी उसके चाहने वाले कई थे और वो सबसे बात करती थी उसके कई दोस्त थे लेकिन मेरे लिए बस एक वही थी और एक खूबसूरत लड़की को एक चंपू के साथ घूमता देखना कई लोगो को खटकता है, कई बार हमारे ही बैच के कुछ लोग निशा के मेरे बारे में कान भरते थे, उसका मैथ्यू के साथ रिलेशनशिप में आने के बाद हमारे बीच सबकुछ सही नही था और कई लोग आपको एक ही बात बार बार रिपीट करके बोले तो आप कही ना कही उसपर यकीन करने लगते हो भले फिर वो बात झूठ ही क्यों न हो सच को दबा ही देती है आप किसी बात को एक बार इग्नोर करोगे दो बार करोगे के लेकिन कोई एक ही बात आपको 100 बार बोले तो आप एक बार के लिए तो उसपर यकीन कर ही लेते हो

निशा को लगा मैं उसे पसंद करता हु इसीलिए मैं उसके और मैथ्यू के बीच प्रॉब्लम क्रिएट करना चाहता हु, हा मैं पसंद करता था उसे लेकिन मैं कभी उसको खुशी के आड़े नही आता लेकिन जब मुझे दिख रहा था के मेरी दोस्त खुद को कुएं में धकेल रही है तो मैं चुप कैसे रहता, उस बात पर हम दोनो का बहुत बड़ा झगड़ा हुआ जिसने वहा मौजूद सभी स्टूडेंट्स का ध्यान खींचा, बढ़ते बढ़ते बात इतनी बढ़ गई के हमने हमारी दोस्ती तक खतम कर दी,

मैं तो वैसे ही टारगेट था तो इस झगड़े के लिए वहा इकट्ठा भीड़ ने मुझे ही दोष दिया के मैं जान बूझ के निशा की लाइफ में खलल डाल रहा हु लेकिन उसकी परवाह किसे थी, मेरी दोस्त खतरे में थी और मुझे उसे बचाना था, चुकी हमारा झगड़ा बहुत बड़ा था तो मैथ्यू भी वहा पहुंच गया और उसे समझ आ गया के उसे अपने खेल को जल्दी अंजाम देना होगा

हमारे झगड़े के बाद वो अपने घर की ओर निकल गई और मैं अपने क्युकी मैंने सोचा के वो खुद के घर पर तो सेफ ही होगी लेकिन मेरा मन बेचैन था, मैंने घर पहुच कर उसे कई बार फोन ट्राइ किया व्हाट्सप्प कर कई सॉरी नोट्स भेजे लेकिन उसने किसी का रिप्लाइ नहीं किया बस देख कर छोड़ दिया, मैं उस पूरी रात सो नही पाया और बार बार उसे कॉल लगाता रहा और वो हर बार मेरा फोन काट ते रही मुझे लगा वो मुझसे बहुत ज्यादा गुस्सा है और जब आखिर मे मुझसे रहा नहीं गया तो मैं उसके रूम पर जा पहुचा लेकिन उसने दरवाजा तक नहीं खोला और अंदर से ही चिल्लाकर मुझे वहा से जाने कहा लेकिन मैं वही रहा जब तक....

जब तक के मुझे मेरे लैंडलॉर्ड का कॉल नहीं आया, उसका बेटा सीढ़ियों से गिर गया था और वो काफी बूढ़ा आदमी था तो उसने मुझे कार ड्राइव करने बुलाया था ताकि अस्पताल जा सके और मैं जानता था के निशा कितनी जिद्दी है वो दरवाजा नही खोलती और मैंने सोचा के वो अपने घर मे है तो थोड़ी सेफ होगी इसीलिए मैं वहा से चला गया

अगले दिन जब मैं कॉलेज पहुचा वो वहा सब लोग मुझे घृणा भरी नजरों से दख रहे थे मेरे बारे मे बात कर रहे थे के कैसे निशा ने मुझे दोस्त माना और मैंने उसी को बिट्रै किया, निशा उस दिन कॉलेज नही आई थी जिससे मुझे उसकी थोड़ी चिंता होने लगी थी इसीलिए मैं उस दिन वापिस उसके घर गया, उसके घर का दरवाजा पहले से खुला हुआ था तो मैं अंदर चला गया और वहा जो मैंने दख उसे मैं सपने मे भी नहीं सोच सकता था.......

क्रमश:
 
अपडेट 58

राघव- निशा उस दिन कॉलेज नही आई थी जिससे मुझे उसकी थोड़ी चिंता होने लगी थी इसीलिए मैं उस दिन वापिस उसके घर गया, उसके घर का दरवाजा पहले से खुला हुआ था तो मैं अंदर चला गया और वहा जो मैंने देखा उसे मैं सपने मे भी नहीं सोच सकता था...

मैंने सपने मे भी नहीं सोचा था के मुझे ऐसा दिन देखना पड़ेगा मैं आज भी उस दिन को उस सीन को भुला नहीं पाया हु

बोलते बोलते राघव की आँखों से आँसू बहने लगे थे उसने एक लंबी सांस खिची, उसकी आवाज टूट रही थी लेकिन फिर भी उसने बोलना शुरू किया

राघव- मैं जब उसके घर के अंदर पहुचा तो मैंने देखा के मेरी दोस्त मेरी सबसे अच्छी दोस्त अब इस दुनिया मे नहीं थी

उसकी लाश रस्सी से लटक रही थी, उसने आत्महत्या कर ली थी।

राघव की आँखों से कंटिन्यू आँसू बह रहे थे और उसकी हालत देख नेहा की भी आंखे पनिया गई थी उसने कस के राघव का हाथ पकड़ा हुआ था

राघव- अपने सामने निशा की लटकती लाश देख मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था के मैं क्या करू, अचानक मेरे शरीर ने, मेरे दिमाग ने मेरा साथ छोड़ दिया था, मैं एकदम ब्लैंक हो गया था जो इंसान मेरे लिए उस वक्त सबसे ज्यादा मायने रखता था उसने अपनी खुद की जान लेली थी लेकिन क्यू?? मैं नहीं जानता था,

मेरा सर घूमने लगा था आँसू बह रहे थे मैं चिल्ला चिल्ला कर मदद बुला रहा था मैंने उसके पास जाकर उसके पैर पकड़े और कुछ ही पालो मे मेरी आवाज सुन निशा के पड़ोसी वहा आए उन्होंने उसकी लाश उतारने मे मेरी मदद की मुझे लग रहा था के शायद शायद वो बच जाए लेकिन मैं गलत था वो मुझे छोड़ के जा चुकी थी

मेरे हाथ कांप रहे थे उसकी लाश मेरे हाथों मे थी उस इंसान की लाश जो मेरे लिए सबसे ज्यादा जरूरी था, वो दिन मेरी जिंदगी का सबसे बुरा दिन था तुम सोच भी नही सकती मुझे उस वक्त कैसा महसूस हो रहा था मेरे हाथों मे उस इंसान की लाश थी जो मेरे दिल के सबसे ज्यादा करीब था वो मुझे हमेशा हमेशा के लिए छोड़ के जा चुकी थी

मैं उसकी लाश को अपने हाथों मे पकड़े जोर जोर से रोए जा रहा था चिल्लाए जा रहा था उससे मिन्नते कर रहा था के वो लौट आए पर ये मुमकिन ही नही था, मैंने उसे खो दिया था

राघव नेहा के गले लग कर रोए जा रहा था और अब तक नेहा की आँखों से भी आँसू बहने लगे थे।

राघव- सुसाइड केस था उसके पड़ोसियों ने पुलिस को खबर कर दी थी और जल्द ही पुलिस वहा पहुच चुकी थी, उन्होंने आकर अपनी कार्यवाही शुरू की अपनी इंक्वायरी करने लगे और निशा की बॉडी एम्बुलेंस से पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दी गई, मैं कुछ भी सोचने समझने की हालत मे नहीं था, डॉक्टर्स ने बताया के उन्हे पोस्टमॉर्टम के लिए थोड़ा टाइम लगेगा क्युकी वो निशा की डेथ का असल रीज़न पता नहीं कर पा रहे थे और मैं उसके जाने के गम मे डूबा हुआ था, ऐसे मे मुझे एंजाइटी के दौरे पड़ने लगे थे और मेरी हालत तब बिगड़ी जब मेरे कॉलेज के लोगों ने मुझे उसकी मौत का जिम्मेदार ठहराया, वो मुझे निशा की मौत के पीछे समझते थे क्युकी निशा के सुसाइड के पहले ही हमारा झगड़ा हुआ था और उन्हे लगा शायद वही झगड़ा उसके सुसाइड के पीछे का रीजन होगा, उन्होंने मुझे किलर और न जाने क्या क्या कहा, मैं डिप्रेशन मे जा चुका था और ऐसे मे विशाल मुझे संभाल रहा था और ऐसे मे मुझे उसकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिली जिसने मुझे और भी ज्यादा हिला के रख दिया

रिपोर्ट मे लिखा था के निशा ने आत्महत्या नहीं की थी बल्कि उसका रेप किया गया था और उसके बाद उसे मार दिया गया था

राघव की बात सुन अब नेहा और भी ज्यादा शॉक थी उसे सुसाइड की बात तो पता थी लेकिन ये बात वो नहीं जानती थी, राघव की बताई गई कई बाते शेखर ने जो उसे बताया उससे अलग थी क्युकी शेखर ने बस ये सब सुना था लेकिन राघव ने जिया था

राघव- उस रिपोर्ट ने मुझे पूरी तरह हिला कर रख दिया था लेकिन मैं शायद इस सब के पीछे की, निशा के मरने के पीछे की वजह जानता था, इस सब के पीछे उसके सो कॉल्ड बॉयफ्रेंड मैथ्यू का हाथ था! मैंने उसे निशा की अंत विधि पर भी नही देखा था और ना ही वो उसके बाद कॉलेज आया था जिसने मेरा शक और बढ़ा दिया था

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने अपनी तहकीकात शुरू की और मैंने भी पुलिस को सब कुछ बता दिया था, मैंने खुद से भी मामले मे तहकीकात की और मेरी बहुत बहुत ज्यादा कोशिशों के बाद आखिर मुझे उसके ठिकाने का पता चला और मैंने उससे बात करने का सोचा और जब मैं उसके ठिकाने पहुचा मेरा माथा ठनका, वो पहले से ही निशा पर चीट कर रहा था और वहा किसी और लड़की के साथ था उन दोनों के शरीर आपस मे उलझे हुए थे बगैर कपड़ों के उसने तो दरवाजा तक लॉक नहीं किया था

मुझे कुछ समझ नहीं आया के मैं क्या करू एक तो वो ऐसी हालत मे थे लेकिन मुझे मेरे सवालों का जवाब चाहिए थे, मैंने सबसे पहले तो पुलिस को कॉल किया और फिर अपने फोन की रिकॉर्डिंग शुरू की और जोर से चिल्लाते हुए उनका ध्यान अपनी ओर खिचा, मेरी आवाज से वो लड़की सचेत हो गई और उसने उठकर कपड़े पहने और फिर मैथ्यू की तो मुझे चिंता ही नहीं थी

फिर मैंने ना आव देखा न ताव और मैथ्यू पर कूद पड़ा और एक जोर का मुक्का जड़ दिया, हम दोनों अब फिजिकली लड़ रहे थे

मैंने उससे पूछा के के उसने वो सब क्यू किया और उसने भी बता दिया क्युकी वो जानता था के मैंने उसकी बाते सुन ली थी और वहा हमारे अलावा और कोई नहीं था उसे जरा भी आइडिया नहीं था के मेरे फोन की रिकॉर्डिंग शुरू थी इसीलिए उसने अपनी गलती मानी उसने बताया था जिस दिन मेरी और निशा की लड़ाई हुई थी वो उस दिन निशा के रूम पर गया था,

मुझसे हुई लड़ाई की वजह से निशा रो रही थी और ऐसे मे उसके ईमोशनल स्टेट का फायदा मैथ्यू लेना चाहता था उसने तब उसका रेप किया, पहले तो उसने प्यार से कोशिश की लेकिन जब निशा नही मानी तो उसने उसके साथ जबरदस्ती की और तब निशा को समझ आया के मैं सही था वो मदद के लिए चीख रही थी लेकिन वहा उसकी मदद करने वाला कोई नहीं था

निशा ने उस हैवान से अपने आप को बचाने की काफी कोशिश की हाथापाई भी की उसके प्राइवेट पार्ट पर वार भी किया जिसने मैथ्यू को और भड़का दिया उसने गुस्से मे निशा का गला घोंट कर उसे मार डाला, उसने मुझे ये भी कहा था के उसका प्लान तो निशा की बॉडी की डील करना था वो उसे बेचने वाला था लेकिन अब मरने के बाद वो उसके किसी काम की नही थी उसका शरीर उसके लिए बस मास का टुकड़ा था जो जानवरों को खाना खिलाने के काम आता

जब तक पुलिस ना आ गई वो अपनी काली करतूते बताता गया, मैंने उसके जैसा घटिया इंसान अपनी जिंदगी मे कभी नहीं देखा था, पुलिस के आते ही मैंने वो रिकॉर्डिंग पुलिस के हवाले कर दी और उन्होंने उसे अरेस्ट कर लिया, बाद मे उसे डेथ सेन्टन्स दिया गया लेकिन जाते जाते वो मुझसे कह के गया था के वो मेरी जिंदगी को जीते जी नरक बना देगा और इसमे वो कामियाब भी रहा

राघव बोलते बोलते नेहा की बाहों मे रोए जा रहा था आज इतने सालों का समेटा गुबार बाहर आ रहा था राघव किसी के साथ अपना दर्द बाँट रहा था

राघव- उसके कॉलेज मे कुछ लोग थे जिन्होंने मेरा आखरी तक पीछा नही छोड़ा और मुझे ही निशा का कातिल बना दिया, सच सबको पता था लेकिन ब्लैम मुझे किया गया के अगर मैं उस दिन निशा से नही लड़ता तो शायद... शायद उसका रेप नहीं होता, शायद वो आज जिंदा होती मेरी क्या गलती थी नेहा.. मैं तो बस अपनी दोस्त को बचाना चाहता था ना,

बाद मे तो ये बाते होने लगी थी के मैं भी उस प्लान मे शामिल था, उन लोगों ने मुझे ब्लैम करने का एक मौका भी नहीं छोड़ा, और मैं उस गिल्ट मे धसता गया, और सबसे ज्यादा तकलीफ मुझे दी निखिल ने जिसे मैं अपना दोस्त मानता था जब उसने भी इस सब का दोष मुझे दिया मैं टूट चुका था और मुझे संभालते हुए विशाल की हालत खराब हो रही थी, मुझे किसी की कोई परवाह नहीं थी बस सबसे ज्यादा तकलीफ मुझे निखिल ने दी थी, वो निशा को चाहता था और उसका मेरे निशा के करीब रहना पसंद नहीं था ये बात मुझे बाद मे पता चली, उसने मुझे ही निशा की मौत का दोषी ठहराया और उसने मुझे अवॉइड करना शुरू कर दिया, मैंने उस दौर मे बहुत कुछ खोया है नेहा और लोगों पर भरोसा करना भी, उस दिन किसी के प्यार की वजह से दोस्ती टूटी थी और किसी के अंधे प्यार की वजह से एक जान गई थी

मेरे... मेरे पास उस वक्त कोई नहीं था जिससे मैं ये सब शेयर करू विशाल था, उसने कभी इसमे मेरा साथ नहीं छोड़ा, लेकिन वो हर वक्त मेरे साथ नहीं रह सकता था उसकी भी अपनी लाइफ थी वो भी तो उस वक्त कॉलेज मे ही था और आखिर मैं डिप्रेशन का शिकार हो गया, जब शेखर वहा आया तो उसके और विशाल की वजह से मेरी हालत थोड़ी ठीक हुई, कॉलेज मे शेखर के सामने जब कोई मुझे कुछ कहता तो शेखर उससे लड़ पड़ता लेकिन मैं उसे रोक देता क्युकी लड़ने का कोई मतलब नहीं था

मैंने भी अपने दिमाग के किसी कोने मे सोच लिया था के कही न कही इस सब के लिए मैं ही जिम्मेदार हु, मैं उसे बचा सकता था मैंने दोस्ती का फर्ज नहीं निभाया था, मुझे उसी दिन वापिस उसके घर जाना चाहिए था उसका खयाल रखना चाहिए था लेकिन मैंने वैसा नहीं किया अगर मैं उस दिन वहा चला जाता तो शायद... शायद आज वो मेरे साथ होती, हमारे साथ होती हमारे बीच होती

मुझे उस वक्त हर 2 दिन मे पैनिक अटैक आते थे, मेंटल हेल्थ एकदम ही बिगाड़ चुकी थी पर इतने सब मे भी इस सब की खबर घरवालों को नही थी, मेरा ट्रीट्मन्ट शुरू हो चुका था और जब मैं थोड़ा रिकवर हुआ तब मैं भारत लौट आया,

मैं अकेला रहता था, मैंने लोगों से बात करना बंद कर दिया था क्युकी मैं डरता था और मैं ऐसा बन गया

राघव नेहा के गले लग रोए जा रहा था,

राघव- शायद ये कई लोगों के लिए बहुत बड़ी बात ना हो लेकिन जिसके साथ ये होता है उसके लिए ये बहुत बड़ी बात होती है रोज टौंट सुनना, लोगो का तुम्हे उस बात के लिए अक्यूज़ करना जिसे तुमने किया नहीं है तुम्हें कातिल मानना, जिस बात को तुम भूलने की कोशिश कर रहे हो बार बार उसी बात को तुम्हें याद दिलाते रहना और ऐसे मे मजबूत से मजबूत दिमाग वाला आदमी भी डिप्रेशन मे चला जाएगा, मैं भले ऊपर से कितना ही मजबूत बन लू लेकिन ये बाते मुझे आज भी अफेक्ट करती है, वो शब्द आज भी मेरे कानों मे गूँजते है

शब्दों मे बहुत ताकत होती है, शस्त्रों से ज्यादा गहरे घाव शब्द दे जाते है जो कई बार आपका मानसिक संतुलन तक हिला देते है

राघव- रोज मैं नॉर्मल राघव बनने की कोशिश करता हु लेकिन वो राघव वो अब बदल चुका था वो एक घमंडी, गुरूर वाला, गुस्सैल आदमी बन चुका था जिसे बस लोगों पर चिल्लाना आता है, उन्हे तकलीफ देना आता है क्युकी वो खुद तकलीफ मे था

राघव की नजरे नेहा की नजरों से मिली

राघव- तुम्हारा राघव ऐसा नहीं है नेहा उस घटना ने मुझे ऐसा बना दिया है, तुम ही मुझे बताओ मैं कैसे....... कैसे प्यार पर यकीन कर लू जब मैंने अपनी सबसे अच्छी दोस्त को उसी के हाथों मरते देखा है जिससे वो प्यार करती थी? मैं कैसे किसी पर यकीन करू जब मैंने उस यकीन को पहले ही बिखरते देखा है? मैं आज भी उसे मिस करता हु, मुझे बताना नही आता इसका ये मतलब नहीं की मुझे तकलीफ नहीं होती, मैं रोज उस गिल्ट के साथ जी रहा हु के शायद.... शायद मैं उसे बचा सकता था

मुझे कोई फरक नहीं पड़ता के लोग क्या बोलते है क्या सोचते है मैंने उनमे से किसी के साथ कॉलेज के बाद कोई कान्टैक्ट नहीं रखा, लेकिन निखिल, मुझे उसकी बातों ने सबसे ज्यादा तकलीफ दी है , मैं उससे कॉलेज के बाद मिला हु लेकिन उससे कभी बात करने की हिम्मत ही नहीं हुई, मैंने उसकी आँखों मे मेरे लिए नफरत तो नहीं देखि लेकिन डरता हु के कही वो वापिस मुझे किलर न कहने लगे, तुम बताओ के क्या मैं निशा की मौत का जिम्मेदार हु?? अगर मैं मेरी दोस्त को ही नहीं बचा पाया तो अपनी फॅमिली को कैसे संभालूँगा??

बोलते बोलते राघव की आवाज कांप रही थी, वही नेहा को अब उसकी और भी ज्यादा चिंता हो रही थी, उसने राघव को ऐसी हालत मे कभी नही देखा था राघव इस वक्त पूरी बिखरी हालत मे था....

क्रमश:
 
ी स्ट्रॉन्ग्ली बेलीवे तहत कंटेंट होल्ड्स थे पावर. आप बढ़िया कंटेंट लिखोगे तो रिस्पांस मिलेगा, है ऐसा हो सकता है के शायद लेट मिले बूत पीपल विल सुरेली एकनॉलेज योर वर्क, एंड आपका ये कमेंट, आईटी मीन्स ा लोट. सी गेटिंग ा प्राइसे फ्रॉम ओने ऑफ़ थे बेस्ट वरिटेरस ी हैवे रीड ों थिस फोरम इस ा ग्रेट फीलिंग. थैंक यू सो मच भाई :थैंक्स:
 
अपडेट 59

नेहा ने राघव के आँसू पोंछे और उसका चेहरा अपने दोनों हाथों मे थामा और उसे अपनी ओर देखने कहा

नेहा- मेरी बात आप ध्यान से सुनिए राघव, मैं जानती हु आपने बहुत कुछ खोया है, आपने उस इंसान को खोया है जो आपके दिल के बहुत करीब था, मैंने भी खोया है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है के आप उसका दोष अपने आप को दोगे, आपसे जो कुछ भी हो सकता था उसे बचाने आपने वो सब कुछ किया है, लेकिन कभी कभी कुछ चीज़े हमारे बस मे नहीं होती है, आपने निशा को न्याय दिलाया है राघव उस राक्षस को सजा दिलवा कर आपने निशा को न्याय दिलाया है और ना सिर्फ निशा को बल्कि उन तमाम लड़कियों को जिनके साथ उसने गलत किया था, साथ ही आपने उन लड़कियों को बचाया है जिन्हे वो आगे फसाता, अगर आप उसे पुलिस से नही पकड़वाते तो वो आज भी वही कर रहा होता, रही बात उन लोगों की जो आपको जज कर रहे थे वो इंसान नहीं बल्कि इंसान का शरीर लिए जानवर है जिन्होंने बगैर किसी बात को जाने के आपको ब्लेम किया, ऐसे लोगों को बस एक टॉपिक चाहिए होता है जिसपर जब वो बोर हो जाए तो बात कर सके और कुछ दिनों बाद भूल जाए आपको अपने आपको ऐसे लोगों को प्रूव करने की जरूरत नहीं है जो कोई मायने नहीं रखते है

नेहा- और आप किलर नही है!! ये बात आप अपने दिमाग मे फिट कर लीजिए, आपके दिमाग मे बसी ये बात आपके नही बल्कि उन लोगों के दिमाग की उपज है जिन्हे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी मे कुछ मसाला चाहिए होता है, ऐसे लोगों की सोच को अपने आप पर हावी मत होने दीजिए

नेहा- और जब आप किसी से इस बारे मे बात ही नहीं करेंगे तो आपकी मेंटल हेल्थ कैसे ठीक होगी! आपको अपने अंदर से इस सब को बाहर लाना होगा राघव, आपको अपने इस डर को फेस करना होगा, जब आपने किसी का बुरा नहीं किया तो कोई आपका बुरा कैसे कर सकता है, निशा आपको अपनी मौत का जिम्मेदार मानते देख रही होगी तो उसे भी बुरा लग रहा होगा क्युकी आपकी इसमे कोई गलती नहीं है

नेहा- और मेरा राघव न तो सेल्फिश है न ही हार्ट्लेस, आप बहुत अच्छे हो और मै अपने आप को खुशनसीब समझती हु जो आप मेरी जिंदगी मे आए, जो हुआ सो हुआ वो सब बीती बाते है आपको उन्हे भूलना होगा और साथ ही अपने अतीत से लड़ना भी होगा, उन लोगों को उनके शब्दों को भूल जाइए लेकिन उनका सामना कीजिए, आपने ऐसा कुछ नहीं किया जो आपको ऐसे लोगों से बचना पड़े

नेहा ने राघव की आँखों मे देखते हुए उसे अच्छे से समझाया वही राघव बड़े ध्यान से उसकी बात सुन रहा था

नेहा- मुझसे वादा कीजिए के अगली बार आप जब भी उनसे किसी से मिले, उनका सामना करे ना की उनसे दूर भागे और आप मुझसे कोई बात नहीं छुपाएंगे

नेहा ने अपना हाथ राघव के आगे किया, राघव ने कुछ समय तक नेहा के हाथ को देखा और फिर मुंडी हिला कर उसे वादा किया जिससे नेहा के चेहरे पर मुस्कान आ गई

राघव- मैं उस वक्त हमेशा इस शादी से भागता रहा, सबको लगा शायद मैं तुम्हें पसंद नहीं करता इसीलिए मैं दूर दूर रहता हु पर किसी ने कभी रीज़न पूछा ही नहीं, किसी ने मुझसे नहीं पूछा के मेरे ऐसे बर्ताव का रीज़न क्या है

राघव- सबको लगा मैं कितना गलत हु जो तुम्हारे साथ सही बर्ताव नहीं करता तुमसे दूर भागता हु लेकिन कोई इसके पीछे की वजह नहीं जानता था, हा जो जानते थे उन्होंने मुझे बहुत समझाया, विशाल तो लिटेरली मुझसे लड़ लिया था जब मैं शादी के अगले दिन उसके पास पहुचा था, मेरे अतीत मे जो कुछ भी हुआ उसकी वजह से मैं किसी रिश्ते हो अपनाने, किसी पर पूरी तरह भरोसा करने तयार ही नहीं था, वो तो किस्मत से मुझे तुम मिल गई, मैं बहुत ज्यादा डरपोक हु नेहा, और मैं थक चुका हु भागते हुए

राघव- लोगों ने मुझे बिना जानते हुए जज किया, और मैं अपने आपको बदल तो नहीं सकता था, एकदम से तो नहीं और मैं तुमसे भी यही चाहता हु, तुम जैसी हो एकदम पएफ़ेक्ट हो, कभी भी किसी के लिए भी अपने आपको मत बदलना

राघव आज नेहा से अपने दिल की बात कर रहा था

नेहा- आप बहुत अच्छे है राघव भले कोई कुछ भी कहे सोचे मुझे फरक नहीं पड़ता और जब आप मुझसे ना बदलने के लिए कह रहे है तो आप अपने आप को क्यू बदल रहे है? आप जैसे हो मुझे आपसे वैसे ही प्यार है और मैं इस राघव देशपांडे के साथ अपनी पूरी जिंदगी बिताना चाहती हु

अब तक राघव का रोना रुक गया था और वो ध्यान से नेहा की बात सुन रहा था और उसके हर के शब्द के साथ उसका मूड और अच्छा हो रहा था, उसके मन से एक बोझ सा हल्का हो गया था और अब नेहा को सब कुछ बताने के बाद राघव अच्छा महसूस कर रहा था

नेहा- मैंने डेविल.... मतलब सीरीअस राघव को देखा है, बेबी राघव को भी देखा है और ईमोशनल राघव को भी बट अभी मुझे मेरा बेबी राघव चाहिए क्युकी वही सबसे ज्यादा क्यूट है

नेहा ने राघव का मूड अच्छा करने कहा और राघव के चेहरे पर स्माइल आ गई, नेहा को अपने साथ पाकर इस वक्त राघव दुनिया का सबसे खुश आदमी था, जिस गिल्ट मी वो जी रहा था वो पूरी तरह नही पर कुछ हद्द तक काम जरूर हो गया था, दोनों एकदूसरे के बाजू मे बैठे थे एकदूसरे की आँखों मे देखते हुए, नेहा ने राघव की आँखों मे देखा जो उसकी आँखों से उसके होंठों के बीच घूम रही थी और उसने अपने निचले होंठ को दातों से दबाया, धीरे धीरे राघव के होंठ नेहा के होंठों के करीब बढ़ रहे थे

राघव की गरम साँसे नेहा अपने चेहरे पर महसूस कर रही थी जो उसकी साँसे बढ़ा रही थी, धीमे से राघव ने अपने होंठ नेहा ने होंठों से टिकाए, और हल्के हल्के उसे किस करने लगा... वो दोनों अपने मे खोए हुए थे के तभी उन्हे नीचे से किसी के आने का आवाज आया

उन्होंने अपना किस तोड़ा तो नेहा ने शर्मा के अपनी पलके झुका ली

राघव- मैं देख के आता हु कौन आया है!!

राघव ने उठते हुए कहा औ जल्दी से वहा से निकला ताकि नेहा उसके लाल होते गाल ना देखे और नेहा भी मुस्कुरा कर उसके पीछे नीचे आई तो घर वाले सब गणपती दर्शन से लौट चुके थे और लिविंग रूम मे थे, सभी लोग काफी थक चुके थे और विवेक और रिद्धि तो अपने अपने कमरों मे जा चुके थे

जानकी- राघव तुम कब आए??

जानकी जी ने जब अपने बेटे को वहा देखा तो पुछ लिया

राघव- अभी बस 1 घंटे पहले ही आया हु मा

शेखर- यस! यस!

शेखर ने हसते हुए कहा

धनंजय- तुम्हें पता था राघव आज आ रहा है? तुमने बताया नहीं?

शेखर- सप्राइज़! वो डैड भाई सप्राइज़ देना चाहता था बस इसीलिए, हैना भाई?

शेखर ने राघव को देखते हुए कहा और राघव को फसा दिया क्युकी इसपर राघव के पास बोलने को कुछ नहीं था

गायत्री- सच मे??

दादी ने राघव और नेहा को देखते हुए पूछा क्युकी उनका पोता ऐसे सप्राइज़ देगा इसकी उनको कम ही उम्मीद थी

राघव- वो... दादी...

शिवशंकर- अरे ठीक है राघव! हम समझते है

मीनाक्षी- मुझे लगता है हमे सोना चाहिए अब बहुत लेट ही चुका है

मीनाक्षी जी ने कहा जिसके बाद सब अपने अपने कमरों मे चले गए और जब राघव और नेहा अपने कमरे मे जा रहे थे तो नेहा रुक गई

राघव- क्या हुआ??

नेहा- आप चलो मैं अभी आई

इतना बोल के नेहा वहा से जाने ही वाली थी के राघव ने उसकी कलाई पकड़ ली

राघव- अरे लेकिन जा कहा रही हो

नेहा- बाद मे बताऊँगी मैं बस 1 मिनट मे आई आप तब तक जाकर चेंज कर लीजिए

इतना बोल के नेहा वहा से चली गई और राघव अपने कमरे मे आया

नेहा ने जाकर सीधा शेखर और श्वेता के कमरे का दरवाजा खटखटाया और श्वेता ने दरवाजा खोला

श्वेता- भाभी आप यहा??

नेहा- शेखर कहा है श्वेता?

तभी शेखर बाथरूम से बाहर आया

शेखर- क्या हुआ भाभी मैं यहा हु

नेहा- तुम्हारे पास वो गेस्ट्स की लिस्ट है वो पहले दिन की पूजा मे आए थे?

शेखर- हा! क्यू क्या हुआ??

नेहा- उस दिन तुम्हारे लंदन यूनिवर्सिटी से कौन आया था पूजा मे??

शेखर- भाभी वो...

नेहा- बताओ शेखर

शेखर- भाभी उसका नाम निखिल है

निखिल का नाम आते ही नेहा सब समझ गई के क्यू राघव उस दिन वैसे चला गया था, उसने उस इंसान को देखा था जिसने उसे सबसे ज्यादा तकलीफ दी थी उसका एकमात्र डर

नेहा- मैं चाहती हु तुम उसे विसर्जन पर भी बुलाओ, बुलाओगे??

शेखर- भाभी लेकिन भाई?? मैं तो उसे पहले दिन भी नहीं बुलाना चाहता था लेकिन बड़े पापा ने उसे बुलाया

नेहा- मुझे सब पता है शेखर बस उसे बुला लो बाकी तुम्हारे भाई देख लेंगे

शेखर- ठीक है आप कहती है तो बुला लेता हु बट प्लीज ऐसा कुछ मत करो जिससे भाई को तकलीफ हो

नेहा- अब सब सही होगा शेखर

इतना बोल के नेहा वहा से चली गई और अपने रूम मे आई तो उसने देखा के राघव चुप चाप बेड पर बैठा था नेहा उसके बाजू मे जाकर बैठ गई लेकिन राघव का उसपर ध्यान ही नहीं था इसीलिए उसने अपना गला खखारा जिससे राघव अपने खयालों से बाहर आया

राघव- तुम कब आई??

नेहा- बस अभी अभी। आप क्या सोच रहे थे?

राघव- कुछ नहीं सोच रहा हु इस बार विसर्जन पर अपने इस गिल्ट का भी विसर्जन कर दु

राघव की बात सुन नेहा की आँखों मे भी चमक आ गई उसके बगैर कुछ कहे ही राघव इस बारे मे सोच चुका था

राघव- छोड़ो अभी ये सब

राघव ने अपना सर झटका और नेहा को अपने करीब खिचा और बेड पर लेटा

राघव- मैंने ऐसे चिपक के सोने को बहुत मिस किया है

राघव ने कहा जिसपर नेहा हस दी

राघव- वैसे गई कहा थी तुम??

नेहा- आपको मुझपर भरोसा है??

राघव- खुद से भी ज्यादा

नेहा- बस तो आपको जल्दी पता चल जाएगा

नेहा ने उसके बालों मे हाथ घुमा दिया और राघव ने उसकी तरफ देखा और देखता ही रहा.....

क्रमश:
 
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