In Love.. With You... - Page 2 - SexBaba
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In Love.. With You...

अपडेट 4

नेहा के पास घरवालों के सवाल का कोई जवाब नही था, वो सब के चेहरे देखते हुए खामोश रही फिर उसने बात संभालते हुए कहा

नेहा – पापाजी वो सुबह जल्दी चले गए उनकी कोई अर्जन्ट मीटिंग थी

नेहा ने सधी हुई आवाज मे नम्रता के साथ जवाब दिया

शिवशंकर- मुझे समझ नाही आता ये लड़का इतना काम क्यू करता है। अभी उसकि शादी को बस 5 ही महीने हुए है और ये है के अपने परिवार को थोड़ा समय देने के बदले काम मे उलझ हुआ है..

शिवशंकर जी ने थोड़ा इरिटेट होते हुए कहा उनको अपने बिजी पोते पर बहुत गुस्सा आ रहा था

गायत्री- आज कल तो वो घर पर रहता ही नही है, तुम्हें उससे बात करनी चाहीये न इस बारे मे नेहा, उसे घर पर रोकना तुम्हारा काम है पत्नी हो तुम उसकी

गायत्री जी ने नेहा को ताना मारा

नेहा बस सर झुकाए सबकी बाते सुन रही थी वो इसका जवाब नही देना चाहती थी या ये कहना ज्यादा सही होगा के उसके पास इसका कोई जवाब ही नही था।

उसका डीयर हसबंड शादी की रात को ही सारी रस्मे पूरी होने के बाद दो महीनों के लिए बिजनेस ट्रिप पर निकल गया था, और पिछले तीन महीनों से वो उसे पूरी तरह से इग्नोर कर रहा था मानो नेहा उसके लिए उस घर मे मौजूद ही नही थी, पता नही के उसने नेहा का चेहरा भी सही से देखा था या नही, नेहा ने राघव को उनके रूम मे बस 6-7 बार ही देखा था वो भी तब जब राघव भूल जाता था के नेहा भी उसी कमरे मे रहती है, वो रात मे देरी से आता था और सुबह जल्दी चला जाता था, उसके इस बर्ताव की वजह से नेहा उसकी ओर देख भी नही पाती थी, उसने तो राघव का चेहरा भी इन पाँच महीनों मे बस 4-5 बार ही देखा था बाकी समय राघव नेहा को देखते ही अपना रास्ता बदल लेता या नेहा उसे उसके बर्ताव की वजह से इग्नोर कर देती

उन्हे देख के कोई नही कह सकता था के वो दोनों शादी शुदा है, दो अनजान लोग अगर बातचित करे तो भी इनसे ज्यादा बाते कर सकते थे

विवेक- दादी इसमे कोई कुछ नही कर सकता, जब भईया किसी की बात सुनते ही नही तो इसमे भाभी क्या करेगी

विवेक ने नेहा की साइड लेते हुए कहा

शेखर- हा दादी, राघव भाई बैक टु बैक मीटिंग्स मे बिजी है नई ब्रांच के लॉन्च को लेकर इसमे भाभी की क्या गलती ,उझे तो यकीन है भाई ने भाभी की बात को भी इग्नोर कर दिया होगा

नेहा ने शेखर को इशारे से ही चुप रहने कहा

गायत्री- हा हा इसमे इसकी कहा गलती है, राघव के पास जब घर पर रुकने का कोई रीज़न ही नही है तो वो क्यू रुकेगा

गायत्री जी ने नेहा को फिर से ताना मारा

श्वेता ने नेहा की तरफ देखा लेकिन वो नीचे देख रही थी

शिवशंकर- बस बहुत हो गया गायत्री, तुम्हारा पोता इतना भी छोटा नही है के वो ये बात ना समझ सके, उसे भी ये बात सोचनी चाहिए के उसका भी एक परिवार है

रमाकांत- हा मा राघव अब बच्चा नाही है और हर बार हमेशा नेहा क्यू समझ के ले, राघव को भी अपनी जिम्मेदारियों का एहसास होना चाहिए

शिवशंकर जी के बाद रमाकांत ने भी नेहा की साइड ली जीसे सुन कर गायत्री जी अपनी जगह से उठी और “मेरे सत्संग का समय हो गया है” बोल कर अपने कमरे मे चली गई और उनके पीछे पीछे शिवशंकर जी भी चले गए

कुछ ही समय मे विवेक और रिद्धि भी कॉलेज के लिए निकल गए और शेखर भी अपने रूम मे काम के लिए चला गया

रमाकांत- बेटा आइ एम सॉरी उसकी...

नेहा- कोई बात नाही पापा आप क्यू सॉरी कह रहे है वो बिजी है इसीलिए सबको टाइम नही दे पा रहे

नेहा की बात सुनकर धनंजय उसके पास आए और उसके सर पर हाथ रख कर बोले

धनंजय- हर बार उसकी साइड लेकर उसे बढ़ावा मत दो बेटा

नेहा ने कुछ नही कहा

धनंजय- चलिए भईया

जाते जाते रमाकांत के नेहा के सर पर हाथ फेरा और वहा से चले गए

जानकी - मुझे पता है तुम मेरे नालायक बेटे को सही रास्ते पर ले आओगी वो शुरू से ही ऐसा है

जानकी की बात सुन कर नेहा मुस्कुरा दी

मीनाक्षी- बेटा तुम जाओ और अपने बाकी के काम निपटाओ यहा मैं और जीजी संभाल लेंगे और घर मे सब नौकर है

जिसपर नेहा से गर्दन हिलाई और अपने रूम मे चली गई और जैसे ही वो रूम मे पहुची उसके पीछे किसी ने दरवाजा खटखटाया, नेहा ने दरवाजा खोला तो वहा श्वेता खड़ी थी

नेहा- हम्म तो मेरी देवरानी को मुझसे क्या काम है

नेहा ने थोड़े शरारती अंदाज मे पूछा

श्वेता- कुछ नही मैं तो बस अपनी जेठानी जी से मिलने आई थी

श्वेता ने भी उसकी टोन मे जवाब दिया

श्वेता- भाभी... आपसे एक बात पुछु ??

नेहा- हा हा पूछो न

नेहा ने बेड पर के कपड़े समेटते हुए कहा

श्वेता- भईया कहा है? मैंने तो उन्हे हमारी शादी मे भी नही देखा

श्वेता के सवाल ने नेहा के हाथ रोक दिए थे

नेहा- जैसा मैंने कहा वो काम मे बिजी है वरना ऐसा कौनसा भाई होगा जो अपने छोटे भाई की शादी मिस करेगा

नेहा के जवाब से श्वेता थोड़ा कन्विन्स हो गई थी

श्वेता- हा ये तो सही है लेकिन भाभी...

श्वेता कुछ आगे बोलती इससे पहले ही उसका फोन बजने लगा देखा तो वो शेखर का था

श्वेता- भाभी मैं आपसे बाद मे बात करती हु शेखर मुझे बुला रहे है

और श्वेता वहा से चली गई और उसके जाते ही नेहा अपने रूम के सोफ़े पर बैठ गई और उसने एक लंबी सास ली

“ये तो मुझे भी नाही पता के वो कहा है तो मैं तुम सबको क्या बताऊ ? मुझे तो ये भी नही पता के वो कल रात घर आए भी थे या नही, अब तो कभी कभी लगता है मेरी शादी हुई भी है या नही”

नेहा ने अपनी आंखे बंद की और सोफ़े पर ही लेट गई

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शेखर- इतना क्या सोच रही हो स्वीट्हार्ट

शेखर ने श्वेता को पीछे से गले लगाते हुए कहा

श्वेता- भईया और भाभी के बारे मे सोच रही हु

शेखर- हूह? क्यू?

श्वेता- दादी ने कहा ना के भईया बहुत बिजी रहते है और उन दोनों की शादी को भी बस 5 ही महीने हुए है तुम्हें नाही लगता भईया को भाभी के साथ टाइम स्पेन्ड करना चाहिए ? तुमने भाभी का चेहरा देखा था जब बड़े पापा ने उन्हे भईया के बारे मे पूछा था ?

शेखर- बात तो तुम्हारी सही है, भाई हमेशा घर से दूर रहता है और उसने अपने आप को काम मे इतना उलझा लिया है के वो कभी कभी तो ऑफिस मे ही सो जाता है

श्वेता – तुम्हें क्या लगता है उनकी शादी बगैर उनकी मर्जी के हुई है?

शेखर – न, मुझे तो ऐसा नही लगता, हा ये सच है के उनकी अरेंज मेरिज है लेकिन अगर वो एक दूसरे को पसंद ना करते तो इस शादी से मना कर सकते थे और भाभी फॅमिली के साथ बहुत खुश लगती है और मैंने जब भी भाई भाभी को साथ देखा है वो मुझे नॉर्मल ही लगे और जहा तक भाई की बात है तो वो अपने आप को एक्स्प्रेस नाही करता और अब वो रूम के अंदर कैसे है ये मैं नहीं बता सकता सब हमारे जैसे नही होते न बेबी,

शेखर ने श्वेता के गाल को चूमते हुए कहा और उसे अपनी तरफ घुमाया और धीरे धीरे अपने होंठों को उसके होंठों की तरफ बढ़ाने लगा

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जानकी- नेहा बेटा तुम ऑफिस चली जाओ अभी, तुम्हारे पापाजी ने एक इम्पॉर्टन्ट फाइल मँगवाई है और कहा है ये किसी फॅमिली मेम्बर के हाथ से ही भेजे, शेखर तुम्हारे साथ चला जाएगा और इन लोगों का लंच भी लेती जाओ, वैसे तो मैं शेखर को ही भेजती लेकिन उसे ऑफिस के बाद कही बाहर जाना है

नेहा- कोई बात नाही मा आप मुझे फाइल और लंच दे दीजिए मैं चली जाऊँगी

जानकी- हा मैं पैक करवाती हु तुम तब तक जाके रेडी हो जाओ

जिसके बाद नेहा अपने रूम मे रेडी होने चली गई

थोड़े समय बाद जानकी ने नेहा को 2 फाइल और लंच बोक्सेस दिए

जानकी- नेहा इस बात का खास ध्यान रखना के मेरा नलायाक बेटा और तुम्हारा पति खाना खा ले तुम तो जानती हो के वो इस मामले मे कितना लापरवाह है

और जैसे ही नेहा ने राघव के बारे मे सुना उसकी दिल की धड़कन बढ़ गई, वो तो उसके बारे मे भूल ही गई थी फिर भी उसने हा मे गर्दन हिला दी

शेखर- चले भाभी..

शेखर ने सीढ़ियों से उतरते हुए कहा लेकिन उसका ध्यान उसके फोन मे था

वो दोनों कार मे जाकर बैठे

‘हे भगवान मैं उनसे कैसे बात करूंगी मैंने तो इन 5 महीनों मे कभी उनसे बात नाही की’ नेहा बहुत नर्वस थी और अपनी ही सोच मे गुम थी

शेखर- क्या हुआ भाभी? आप नर्वस हो क्या? आप आज पहली बार अपनी कंपनी मे जा रही है न

शेखर की बात पर नेहा ने हा मे गर्दन हिलाई

शेखर- अरे इतना नर्वस मत होइए भाभी भईया भी तो वही है

नेहा- वही तो प्रॉब्लेम है

नेहा ने ये बात एकदम धीमे से कही थी जीसे शेखर नही सुन पाया

शेखर- आपने कुछ कहा क्या?

नेहा- न... नही तो..

शेखर- आपको पता है भाभी हम ना अभी शेर की गुफा मे जा रहे है

शेखर ने नेहा को छेड़ते हुए कहा लेकिन नेहा उसकी बात नही समझी

नेहा- शेर? हमने ऑफिस मे शेर क्यू रख रखा है ?

शेखर- वो तो आपको वही जाकर पता चलेगा

शेखर ने स्माइल के साथ कहा जिसने नेहा को और भी ज्यादा कन्फ्यूज़ कर दिया लेकिन इससे पहले नेहा कुछ और पूछ पाती वो लोग ऑफिस पहुच चुके थे

कार से उतारने के बाद नेहा ने सामने देखा और उसका नर्वसनेस और बढ़ गया, इसीलिए नाही क्युकी वो देश की टॉप कंपनी के सामने खड़ी थी बल्कि इसीलिए क्युकी वो नही जानती थी के वो राघव से कैसे बात करेगी और सबसे इम्पॉर्टन्ट बात राघव उसे ऑफिस मे देख कर कैसे रीऐक्ट करेगा

शेखर- आओ भाभी

शेखर ने कहा जिसके बाद वो दोनों ऑफिस मे इंटर हुए, उनके अंदर घुसते ही सब लोगों ने उन्हे ग्रीट करना शुरू कर दिया

शेखर- भाभी मुझे एक कॉल आ रहा है आप आगे जाइए मैं कुछ देर मे आता हु, मैं किसी को कहता हु आपको कैबिन तक छोड़ दे, उम्म मिस रूबी प्लीज भाभी को कैबिन तक छोड़ आइए

शेखर ने वहा खड़ी एक एम्प्लोयी से कहा जिसके जवाब मे उसने हा मे गर्दन हिला दी और स्माइल के साथ नेहा को देखा बदले मे नेहा ने भी उसे एक स्माइल दी

रूबी- मैडम प्लीज मेरे साथ आइए

जिसके बाद नेहा रूबी के पीछे पीछे जाने लगि लेकिन बीच रास्ते मे ही एक लड़की ने आकार उनको रोक दिया और कहा

“रूबी, धनंजय सर ने अपॉइन्टमेंट लिस्ट मँगवाई है जल्दी” उस लड़की ने कहा

रूबी- मैं तो भूल ही गई थी कोई बात नाही मैं अभी सर को वो लिस्ट दे देती ही लेकिन पहले मुझे...

नेहा- नही कोई बात नाही बस आप मुझे बात दीजिए मैं चलि जाऊँगी

नेहा ने रूबी से कहा जिसपर पहले तो रूबी थोड़ा रुकी लेकिन फिर बाद मे उसने नेहा को रास्ता बता दिया

नेहा उस फ्लोर पर पहुची जो उसे रूबी ने बताया था, वो आगे कैबिन की तरफ जा ही रही थी के किसी ने उसे रोक दिया

“मिस कहा जा रही है आप?”

उस लड़की ने थोड़ा कड़े शब्दों मे पूछा जिससे उस फ्लोर पर सबका ध्यान उनकी ओर चला गया

नेहा- वो मुझे कुछ काम था तो...

पर उसने नेहा की बात पूरी ही नही होने दी कुछ लोगों ने उस लड़की को रोकने की भी कोशिश की लेकिन वो किसी की नही सुन रही थी

“काम?” उसने नेहा को ऊपर से नीचे तक देखा

“तुम तो कोई इम्प्लॉइ नही लगती हो और बगैर अपॉइन्टमेंट के यहा कोई नही आ सकता, सर बिजी है अभी” उसने रुडली कहा

नेहा – मैं कोई इम्प्लॉइ नाही हु और ना ही मुझे यहा आने के लिए किसी अपॉइन्टमेंट की जरूरत है, मैं.....

नेहा को अब थोड़ा गुस्सा आ रहा था जिस तरीके से वो बात कर रही थी लेकिन उसने एक बार फिर नेहा की बात काट दी

“मैं तुम जैसी लड़कियों को अच्छे से जानती हु जिन्हे बस आमिर लोगों की अटेन्शन चाहिए होती है” उस लड़की की बात सुनकर नेहा की आंखे बड़ी हो गई वही वहा खड़े लोगों को थोड़ा शॉक लगा लेकिन नेहा उसकी बात का कुछ जवाब दे पाती उससे पहले ही वहा एक आवाज गूंजी

ऐसी आवाज जिससे नेहा अपनी सुध खो देती थी वो जब भी उसे सुनती थी और उसके दिल की धड़कन बढ़ जाती थी..

नेहा अपनी जगह जाम गई थी और वहा खड़े को डर से नीचे देख रहे थे

क्या होगा अब?

जानेंगे अगले भाग मे

क्रमश:
 
अपडेट 5

“क्या हो रहा है वहा”

पीछे से एक डीप डोमीनेट करने वाली आवाज आई, उस आवाज मे एक जरब थी, हुकिमीपन था जो किसी को भी अपने सामने झुका सकता था

नेहा अपनी जगह पर जम गई थी हर बीतते पल के साथ उसके दिल की धड़कने भी बढ़ रही थी और नेहा को अब उसके गुस्से से डर लग रहा था

वहा खड़े सब लोग डर से नीचे देख रहे थे और नेहा भगवान से प्रार्थना कर रही थी के इस फ्लोर पर मौजूद सभी को उसके गुस्से से बचा ले

“स.. सर.. वो.. ये लेडी बगैर अपॉइन्टमेंट के आपके केबिन की तरफ जा रही थी और जब मैंने उसे रोका तो उसने कहा के उसे किसी अपॉइन्टमेंट की जरूरत नाही है” जिसने नेहा को रोका था उस लड़की ने कॉन्फिडेंट बनते हुए कहा और तभी नेहा के दिमाग मे एक बात आई

वो तो उसके केबिन मे नही जा रही थी वो तो पापा के केबिन मे जा रही थी

“टर्न”

उसने नेहा से कहा मानो वो उसकी कोई इम्प्लॉइ हो नेहा अपनी सारी का पल्लू पकड़ा और उसकी ओर मुड़ी, उसकी वो डोमीनेट करने वाली आवाज नेहा को कुछ सोचने ही नही दे रही थी, उसकी आवाज मे कोई नम्रता नही थी लेकिन नेहा ने अपने आप को शांत रखा

और वो उसकी तरफ मुड़ी और उस इंसान की तरफ देखा जो अभी उसके सामने खड़ा था

जो उसका सबकुछ था

परफेक्ट जॉलाइन तीखी नाक और उससे भी खूबसूरत आंखे, जेल लगा कर सेट किए हुए बाल हल्की दाढ़ी और काले रंग के सूट में वो वहा कहर ढा रहा था, उसके ऑफिस की लगभग हर लड़की को उसपर क्रश था और हो भी क्यू न वो था ही वैसा, इस जगह का राजा

राघव देशपांडे

नेहा ने उसकी नीली आँखों मे देखा, पहली बार उसने उसके साथ नजर मिलाई लेकिन बस एक सेकंद के लिए बाद ने उसने अपनी नजरे घुमा ली

राघव ने कुछ समय तक उसको देखा और फिर एक ऐसा सवाल पूछा जिसकी नेहा को कोई उम्मीद नही थी,

राघव- नाम क्या है तुम्हारा?

राघव ने साफ सर्द आवाज मे पूछा

नेहा और बाकी इम्प्लॉइ उसे ऐसे देख रहे थे मानो वो कोई भूत हो लेकिन वो बस नेहा को देख रहा था ईमोशनलेस चेहरे के साथ

राघव- इनसे इनका नाम पूछो

राघव ने उस लड़की से कहा जिसने नेहा को रोका था, उसकी आवाज से खतरे का अंदाज लगाया जा सकता था

“आप.. आपका नाम क्या है मैडम” उस लड़की ने हकलाते हुए पूछा

नेहा- न.. नेहा

नेहा ने इधर उधर देखते हुए अपनी आँखों मे जमे आँसुओ को छुपाते हुए कहा जिसमे वो कमियाब भी रही

कौन लड़की चाहेगी के उसका पति उससे शादी के पाँच महीने बाद उसका नाम पूछे वो भी ऐसे लोगों के सामने जो उनका रीलेशन जानते थे

राघव- पूरा नाम।

नेहा- नेहा देशपांडे

राघव- मैंने पूरा नाम पूछा है

राघव ने दोबारा नेहा की तरह देखते हुए अपने हर शब्द पर जोर देते हुए कहा

नेहा- नेहा राघव देशपांडे

नेहा ने नीचे देखते हुए कहा

राघव- मिसेस नेहा राघव देशपांडे

राघव ने एक एक शब्द पर जोर देते हुए नेहा को देखते हुए कहा जिससे नेहा ने भी उसकी ओर देखा

उसके मुह से आज अपना नाम सुन कर नेहा को अच्छा लगा लेकिन साथ ही उसके रूखे व्यवहार से तकलीफ भी हो रही थी राघव ने फिर उस लड़की की तरफ देखा

राघव – मुझे लगता है ये पहचान काफी है

राघव ने एक सर्द आवाज मे कहा और फिर अपने अससिस्टेंट से बोला

राघव- रवि, इसका टर्मिनेशन लेटर बनाओ

इतना बोल कर राघव अपने केबिन मे वापिस चला गया बगैर किसी की तरफ देखे और नेहा शॉक होकर उसकी तरफ देखती रही लेकिन नेहा से ज्यादा वो लड़की शॉक मे थी

“मैडम सॉरी मैडम, मुझे नाही पता था आप सर की वाइफ है, मुझे माफ कर दीजिए मैडम” उस लड़की की हेकड़ी उतर चुकी थी

नेहा- मैं बात करती हु

इतना बोल कर नेहा राघव के पीछे पीछे उसके केबिन मे चली गई

नेहा रघाव के पीछे बगैर नॉक किए केबिन मे जाने वाली थी लेकिन वो अपनी जगह रुक गई और उसने सोचा

‘ये पहले ही गुस्से मे है कही इनका गुस्सा ज्यादा ना बढ़ जाए’

नेहा ने केबिन का दरवाजा खटखटाया लेकिन कोई जवाब नही आया, नेहा ने दोबारा थोड़ा जोर से खटखटाया लेकिन इस बार भी हालत सेम ही रही फिर नेहा सीधा दरवाजा खोल कर अंदर चली गई

अंदर राघव अपनी खुर्ची पर आंखे मूँदे बैठा था

केबिन मे आने के बाद नेहा ने एक बात नोटिस की थी के अब राघव ने सिर्फ सफेद शर्ट और पैन्ट पहनी हुई थी कोट उसका सोफ़े पर पड़ा हुआ था..

नेहा को समझ नही आ रहा था के बात कैसे शुरू करे, बाकी लोगों के सामने तो वह बहुत बातुनी थी लेकिन राघव के सामने उसकी बोलती बंद हो गई थी ऐसा लग रहा था मानो उसके गले मे आवाज ही ना हो

राघव- अब तुम कुछ बोलोगी या वैसे ही मुझे देखती रहोगी

राघव ने वैसे ही बैठे बैठे बंद आँखों के साथ पूछा उसकी आवाज मे इरिटेशन झलक रहा था, नेहा ने अपनी नजरे घुमाई और बोली

नेहा- प्लीज उसे फायर मत कीजिए उसकी कोई गलती नही थी

राघव- तो किसकी गलती थी?

राघव ने अपनी आंखे खोली और अपने दोनों हाथ टेबल पर रखते हुए नेहा की ओर देखते हुए उससे पूछा और इससे पहले नेहा कुछ कह पाती वो आगे बोला

राघव – अगर पापा को पता चला के मैंने इस मामले मे कोई एक्शन नही लिया है तो मुझे उनका लेक्चर सुनना पड़ेगा तो मैंने एक्शन ले लिया ज्यादा मत सोचो

राघव ने थोड़ा रुडली कहा जिसके बाद नेहा से कुछ बोलते ही नही बना

राघव – वैसे तुम क्यू आई हो ?

राघव ने अपना लैपटॉप ऑन करते हुए पूछा जिसके बाद नेहा का दिमाग चला के वो वहा क्यू आई थी

नेहा- वो पापा का केबिन कहा है, मुझे उन्हे ये फाइल देनी थी

जिसके बाद राघव ने अपना एक हाथ बढ़ा दिया लेकिन नजरे उसकी लैपटॉप मे ही जमी हुई थी जिससे नेहा थोड़ा उदास हो गई

राघव- मुझे दे दो मैंने ही वो फाइल पापा से कह कर मँगवाई थी

नेहा- नहीं

जिसके बाद राघव ने अपना काम रोका और नेहा को देखा

नेहा- वो... मतलब पापा ने कहा था के फाइल बस उन्हे ही देनी है इसीलिए उन्होंने फॅमिली मेम्बर को लाने कहा था

जिसके बाद राघव ने उसे थोड़ा घूर के देखा

‘नेहा क्यू शेर को शिकार का मौका दे रही हो’ नेहा ने मन ही मन सोचा

राघव- मुझे दे दो मैं दे दूंगा पापा को

नेहा- नहीं, मैं सिर्फ पापा को ही ये फाइल दूँगी आपको चाहिए तो पापा से ले लेना

नेहा से थोड़ा कॉन्फिडेंट बनते हुए कहा और इसके आगे राघव कुछ बोल पाता शेखर वहा आ गया

राघव- अंदर घुसने से पहले नॉक नहीं कर सकते क्या!

राघव शेखर पर भड़क गया जिससे वो दोनों ही वही जम गए

शेखर- अरे यार भाई आराम से मुझे नाही पता था आपको भाभी के साथ प्राइवसी चाहिए

राघव- शट उप !

राघव पहले ही बाहर हुए वाकये से गुस्से मे था और अब उसमे शेखर उसे छेड रहा था

शेखर- भाभी बड़े पापा ने कहा है के फाइल भाई को ही दे दो

शेखर की बात सुनते ही नेहा ने हा मे गर्दन हिलाई और फाइल राघव की डेस्क पर रख दी और राघव उसे ऐसे देखने लगा मानो वो कोई ऐलीअन हो

वाह! मैंने कहा फाइल मुझे दे दो तो मेरी बात तो नहीं मानी लेकिन शेखर के बोलते ही फट से फाइल रख दी’ राघव ने मन ही मन सोच जिससे उसका गुस्सा थोड़ा और बढ़ गया

शेखर- और हा मैंने पापा और बड़े पापा को लंच दे दिया है आपने भाई को दे दिया ?

जिसके बाद नेहा ने लंच बॉक्स भी टेबल पर रख दिया

नेहा – मा ने कहा है पहले कहना खा लीजिएगा फिर काम कीजिएगा

नेहा से बहुत प्यार से कहा जीसे कोई मना कर ही नहीं सकता था लेकिन अपने राघव भाई बस लैपटॉप मे नजरे टिकाए बैठे रहे

शेखर- चलो भाभी हम लोग चलते है भाई खाना खा लेना और भाई दादू का स्ट्रिक्ट ऑर्डर है के आज 8 बजे के पहले घर आ जाना वरना दादू का गुस्सा देखने के लिए रेडी रहना

शेखर की बात सुनकर राघव ने नेहा की ओर देखा और सोचा के काही इसने अपनी कम्प्लैन्ट तो नहीं कर दी जिसके बाद नेहा और शेखर दोनों वहा से चले गए

आज इन पाँच महीनों मे पहली बार उन दोनों के बीच इतनी बात हुई थी और यही वो दोनों इस वक्त सोच रहे थे और यहा मैं सोच रहा हु के दादू को ऐसी कौनसी बात करनी है जिसके लिए उन्होंने राघव को जल्दी बुलाया है अगर आप भी यही सोच रहे है तो साथ बने रहिए आगे भाग मे तब तक आप लोग अपने कमेंट्स मे राघव को गाली दे सकते है मुझे बुरा नहीं लगेगा :D मिलते है आप से अगले अपडेट मे..

क्रमश:
 
अपडेट 6

नेहा और शेखर ऑफिस से घर लौट आए थे।

शाम को नेहा किचन मे सब्जियां काट रही थी लेकिन उसके दिमाग मे अभी भी ऑफिस वाली बाते ही घूम रही थी, कैसे राघव ने उसका नाम लिया और बाद मे राघव का ये कहना के वो सब उसने सिर्फ पापा की वजह से किया था, ये कहना साफ झूठ होगा के नेहा को उस बात का बुरा नही लगा था, अपनी पत्नी के सन्मान की रक्षा करना आखिर पति का फर्ज होता है उसके लिए उसे किसी रीज़न की जरूरत नही होती,

नेहा अपने की खयालों मे गुम काम कर रही थी और उसे उसके खयालों से बाहर निकाला श्वेता ने जो दौड़ते हुए किचन मे आई थी

नेहा- क्या हुआ श्वेता ऐसे भाग क्यू रही हो??

श्वेता- भाभी वो... वो..

श्वेता थोड़ा हकलाई, अब क्या बहाना बनाए उसे समझ नही आ रहा था और सच वो नेहा को बता नही सकती थी की उसने शेखर को उसे किस करने का चैलेंज किया है जिससे बचने के लिए वो यहा भाग कर आई है और वो ये भी जानती थी के नेहा के सामने भी शेखर पीछे नाही हटेगा क्युकी शेखर देशपांडे कभी चैलेंज नही हारता था और अब श्वेता को उसे चैलेंज देने का अफसोस हो रहा था और अब शेखर वहा पहुचे इससे पहले उसे नेहा वो वहा से बाहर भेजना था, नेहा ने श्वेता के चेहरे के सामने चुटकी बजा कर उसे होश मे लाया

नेहा- क्या हुआ है बताओगी?

श्वेता- भाभी.. वो.. वो.. राघव भईया आपको रूम मे बुला रहे है

श्वेता ने झट से कहा जैसे ही उसके ध्यान मे आया के उसने राघव को सीढ़िया चढ़ कर रूम मे जाते देखा था

नेहा- क्या...!!!

नेहा ने करीब करीब चीख कर कहा जिससे श्वेता भी थोड़ा चौकी

श्वेता- भाभी क्या हुआ? मैंने तो बस इतना कहा के भईया आपको बुला रहे है

नेहा- तुम मजाक कर रही हो न!

नेहा को अब भी श्वेता पर यकीन नही हो रहा था

श्वेता- न.. नहीं भाभी मैं क्यू मजाक करूंगी

श्वेता ने एक नर्वस स्माइल के साथ कहा

नेहा- तुम शुअर हो न? तुमने कुछ और तो नही सुना?

नेहा ने श्वेता से वापिस कन्फर्म करना चाहा

श्वेता- भाभी भईया ने मुझे आपको अभी भेजने कहा है अब जल्दी जाइए वो पहले ही काफी गुस्से मे है

श्वेता अब इस सवाल जवाब से थोड़ा परेशान हो गई थी, श्वेता की बात सुन कर नेहा ने हा कहा और वहा से चली गई

‘ये अब मुझे क्यू बुला रहे है? श्वेता सच कह रही थी न? उसने कहा ये गुस्से मे है अगर वो गुस्सा मुझ पर निकला तो?’ रूम मे जाते हुए यही सब सवाल नेहा के दिमाग मे चल रहे थे

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शेखर- तो यहा है मेरी डीयर वाइफ

शेखर ने किचन मे घुसते हुए कहा और श्वेता बस आँखों के इशारे से उसे रुकने कहने लगी

श्वेता- शेखर, बेबी प्लीज यहा नहीं बेबी मैं.. मैं अपना चैलेंज वापिस लेती हु

श्वेता पीछे सरक रही थी और शेखर उसकी ओर बढ़ रहा था

शेखर- उमहू अब तो चैलेंज पीछे लेने का कोई चांस ही नहीं है तुम तो जानती हो शेखर देशपांडे चैलेंज से पीछे नाही हटता अब तो मुझे ये चैलेंज पूरा करना ही होगा

श्वेता- शेखर प्लीज ना यहा नही प्लीज मैं वादा करती हु रूम मे जो तुम कहोगे करूंगी यहा कोई देख लेगा ना

श्वेता शेखर को रोक रही थी और शेखर उसके सामने रुक गया

शेखर- मैं जो भी कहूँगा करोगी?

शेखर ने अपनी एक भौ उठाते हुए पूछा

श्वेता- हा बाबा जो कुछ कहोगे

श्वेता के कन्फर्म करने पर शेखर के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई

शेखर- सोच लो तुमने ही कहा है अब तयार रहना बाद मे मैं कोई बहाना नही सुनूँगा

श्वेता ने एक राहत की सास तो ले ली लेकिन शेखर की उस शरारती मुस्कान से उसे मामला गड़बड़ लग रहा था

गायत्री – तुम यहा क्या कर रहे हो ?

दादी ने किचन मे आते हुए जब शेखर को किचन मे देखा तो पूछा जिसपर वो दोनों थोड़ा हड़बड़ा गए

शेखर- वो.. दादी.. मैं.. मैं.. हा पानी... पानी लेने आया था

दादी ने शेखर को थोड़ा शकी नजरों से देखा और शेखर ने झट से एक पानी बोतल उठाई और वहा से बाहर चला आया जिसके बाद दादी की नजरे सीधे श्वेता पर पड़ी

दादी- और तुम यहा क्या कर रही हो तुम अभी खाना नहीं बना सकती आज पहला ही दिन है तुम्हारा और नेहा कहा है ?

श्वेता – वो दादी भाभी रूम मे है भईया ने उन्हे कुछ काम के लिए बुलाया था

श्वेता ने दादी को भी वही बताया जो उसने नेहा से कहा था लेकिन वो जानती थी के इसका जवाब उसे नेहा को तो देना ही पड़ेगा के उसने झूठ क्यू कहा था, दादी ने श्वेता की बात पर मुंडी हिलाई और वहा से चली गई जिसके कुछ ही पल बाद जानकी और मीनाक्षी किचन मे आई और उन्होंने वहा श्वेता को उतरे हुए चेहरे के साथ खड़ा देखा तो वो समझ गई के वहा क्या हुआ होगा

श्वेता- मा-बड़ी मा भाभी उनके रूम मे गई है कुछ काम से कुछ ही समय मे आ जाएंगी

मीनाक्षी- हा वो ठीक है बेटा लेकिन तुम यहा क्या कर रही हो नई दुल्हन पहले ही दिन काम नहीं करती

मीनाक्षी ने एक स्माइल के साथ कहा

जानकी- हा, जाओ बेटा वो विवेक और रिद्धि कुछ समय पहले तुम्हारे बारे मे पुछ रहे थे उनसे मिल लो

जिसपर श्वेता ने हा मे गर्दन हिलाई और वहा से चली गई।

--x--

नेहा अपने रूम के दरवाजे के बाहर खड़ी होकर सोच रही थी के अंदर जाए या ना जाए और आखिर मे उसने रूम मे जाने का फैसला किया और बगैर नॉक किए अंदर चली गई और यही उसने गलती कर दी

अंदर उसे वो काही नाही दिखा और अचानक उसे बाथरूम का दरवाजा खुलने का आवाज आया और उसने उस तरफ देखा और..

नेहा- आह्ह!

नेहा अपनी आंखे बड़ी करके चीखी

क्यू??

क्युकी वहा उनके पतिदेव श्रीमान राघव देशपांडे बगैर कपड़ों के खड़े थे अपनी इज्जत को अपनी कमर पर लपेटे एक टॉवल से बचाते हुए

राघव भी नेहा की तरफ आंखे बड़ी करे मुह फाडे देख रहा था और नेहा एकदम से पलट गई

नेहा- वो... मैं... आ... मैं... आप.. सो.. सॉरी... वो.. मैं...

नेहा के मूह से शब्द ही नही निकल रहे थे और वो इससे ज्यादा कुछ नही बोल पा रही थी जिससे वो वहा एक पल भी नहीं रुकी और रूम से बाहर आ गई वही राघव अब भी वहा खड़ा हुआ अभी अभी हुए सीन को पचाने की कोशिश कर रहा था

नेहा अपने रूम से बाहर भाग आई और एक जगह रुक कर अपनी बढ़ी हुई सासों पर काबू करने लगी

‘हे भगवान ये... ये क्या हुआ अभी अभी’ नेहा ने सोचा

विवेक- भाभी क्या हुआ आप इतनी जोर जोर से सासे क्यू ले रही हो?

रिद्धि- हा भाभी क्या हुआ आपको?

विवेक और रिद्धि ने जब नेहा को देखा तो सेम सवाल पुछ डाला

नेहा- वो.. एक्चुअल्ली.. मैंने चूहा.. हा चूहा देख लिया तो डर गई और भाग आई यहा हे हे

नेहा ने बात संभालते हुए उन दोनों भाई बहनों को देखा जो अब भी नेहा को घूर रहे थे, उनके लिए ये बात पचा पाना मुश्किल था, वो नेहा को कुछ पल और वैसे ही देखते रहे और फिर जोर से हसने लगे

विवेक- क्या भाभी आप भी चूहे से डर गई

रिद्धि- हा ना वो चूहा आपको खा थोड़ी जाता जो आप ऐसे भाग आई

नेहा को उनकी बात पर कुछ बोलते नही बन रहा था क्युकी वो दोनों नही जानते थे के नेहा ने किस चूहे को देखा था

नेहा- अब हसना हो गया हो तो चलो खाने का वक्त हो गया है

नेहा ने बात बदल दी और वो तीनों डाइनिंग हॉल मे आ गए,

घर के सब लोग डाइनिंग टेबल पर बैठे थे और नेहा और श्वेता सबको खाना परोस रही थी तब नेहा ने देखा के राघव एक ब्लैक टीशर्ट और ट्राउज़र मे सीढ़ियों से नीचे आ रहा है

‘मुझे नाही पता था के ये कैजुअल कपड़ों मे भी इतने हॉट लगते है’ नेहा ने मन ही मन राघव को देखते हुए सोचा

नेहा सबसे सामने ऐसे तो मत घूरो उन्हे’ नेहा ने अपने ही दिमाग मे अपने आप को डाट लगाई जिससे शर्म से उसके गाल लाल हो चुके थे, मोमेंट तो था

विवेक- अरे वाह देखो तो आज स्वयं महाराज राघव जी हम तुच्छ प्राणियों के साथ खाना खाने वाले है, हमारे तो भाग ही खुल गए

विवेक ने राघव को चिढ़ाते हुए कहा और बदले मे उसे मिला क्या तो राघव का गुस्से वाला लुक

धनंजय- बेटा कभी हस भी लिया करो क्या हमेशा एक ही इक्स्प्रेशन लिए रहते हो

धनंजय से राघव को समझाया

राघव- मुस्कुराने का रीज़न भी तो होना चाहिए न चाचू

राघव ने अपनी सीट पर बैठते हुए कहा

रमाकांत- कहना क्या चाहते हो राघव

लेकिन राघव ने रमाकांत जी की बात का कोई जवाब नही दिया और चुप रहा और माहोल थोड़ा गरम होते देख दादू को बोलना पड़ा

शिवशंकर- खाना खा ले पहले, उसके बाद राघव मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है

जिसकर राघव ने भी अपनी गर्दन हा मे हिला दी

मीनाक्षी- अरे तुम दोनों भी बैठो ना सब लोग सर्व कर लेंगे खाना

मीनाक्षी जी ने श्वेता और नेहा से कहा जिसके बाद स्वेता जाकर शेखर के बगल वाली खुर्ची पर बैठ गई और नेहा रिद्धि के तरफ जा रही थी के जानकी बोली

जानकी- नेहा उधर कहा जा रही हो देखो तुम्हारी सीट तो वहा राघव के बाजू मे रीज़र्व्ड है

जिसपर नेहा ने कहा तो कुछ नही लेकिन राघव का नाम आते ही उसे अभी थोड़ी देर पहले हुआ सीन याद आया और उसके गाल लाल हो गए, दिल की धड़कन बढ़ गई जैसे ही उसने राघव को देखा, वो राघव के बाजू मे आकार बैठी लेकिन राघव तो बस अपनी खाली प्लेट को घूरे जा रहा था जिससे नेहा का चेहरा थोड़ा उतर गया लेकिन तभी उसके ध्यान मे आया के ग्रेट राघव देशपांडे कभी अपनी थाली नहीं परोसते उसे कोई न कोई खाना सर्व करने के लिए चाहिए होता है, ऑफिस मे ये काम उसका अससिस्टेंट करता है और जब वो रात का खाना खाने घर आता है तब भी कोई न कोई नौकर उसे खाना सर्व कर देता है क्युकी नेहा वहा नही होती

ऐसा नही था के नेहा उसकी राह नही देखती थी लेकिन राघव घर ही इतना देरी से आता था के तब तक नेहा दिन भर के काम से थक कर सो चुकी होती थी और दोपहर मे सोने की आदत ना होने की वजह से वो कितनी भी कोशिश कर ले ज्यादा नही जाग पाती थी, पर जब उसने कुछ महीने पहले राघव के उनके रीलेशन के बारे ख्याल सुने थे के उसे इस सब से कोई मतलब नहीं है तब से वो उसे थोड़ा इग्नोर कर रही थी उसने उसकी राह देखना छोड़ दिया था पर आज जब सारा परिवार साथ खाना खा रहा था और कोई नौकर सर्व नही कर सकता था तो ये उन दोनों के लिए थोड़ी दुविधा थी

नेहा ने अपना हाथ बढ़ा कर राघव की प्लेट मे खाना सर्व किया जिसका उसने कोई विरोध नही किया और जब नेहा उसे खाना सर्व कर रही थी तब भी वो बस अपनी प्लेट को ही देखे जा रहा था, उन दोनों के देख के जानकी के चेहरे पर मुस्कान आ गई

विवेक- ओयेहोयहोय तो अब भाभी के परोसे बगैर भाई खाना भी नाही खा सकता, सही है

लेकिन राघव ने इस बार भी विवेक को कोई जवाब नाही दिया और वही नेहा ने अपना खाना शुरू किया

रिद्धि- भाई आपको पता है भाभी को चूहों से डर लगता है, कुछ समय पहले वो आपके रूम से निकल कर कॉरिडोर मे भाग रही थी जैसे चूहा उन्हे खा जाएगा

रिद्धि ने कहा जिससे राघव का निवाला उसके गले मे ही अटक गया और उसे ठसका लगा वही नेहा डर से अपनी आंखे बड़ी करके रिद्धि को देखने लगी लेकिन जब राघव जोर से खांसा तब उसने रिद्धि ने ध्यान हटाया और राघव को पानी का ग्लास पकड़ाया

जानकी- राघव, ठीक हो?

जिसपर राघव ने बस गर्दन हिलाई

मीनाक्षी- आराम से खाओ

शेखर- आराम से कैसे खाएगा मा जब भाभी ने इतने प्यार से खाना बनाया है तो

शेखर ने राघव को छेड़ते हुए कहा और बदले मे पाया राघव का गुस्से वाला लुक

राघव- श्वेता मुझे माफ कर देना क्युकी अभी मैं तुम्हारे इस डीयर हज़्बन्ड के दात तोड़ने वाला हु

राघव ने शेखर को साफ साफ धमकी दे डाली एक तो नेहा ने उसे चूहा कहा था ऊपर से ये लोग भी उसे चिढ़ाये जा रहे थे राघव की बात सुन कर श्वेता मुस्कुराई लेकिन जब शेखर से उसे देखा तो बिचारी ने मुंडी नीचे कर ली, विवेक और रिद्धि हसने लगे लेकिन जैसे ही रमाकांत जी ने उन्हे देखा वो भी चुप हो गए

गायत्री- बस अब चुप चाप सब अपना खाना खतम करो

खाना खाने के बाद राघव स्टडी मे चला गया जहा उसके दादू पहले ही उसकी राह देख रहे थे, राघव ने दरवाजा खटखटाया और पर्मिशन मिलते ही अंदर घुसा तो देखा के दादू खुर्ची पर बैठे थे

राघव- जी दादू कहिए क्या बात करनी है आपको

शिवशंकर- बात बहुत जरूरी है राघव, मुझे तुम्हारे और नेहा के बारे मे बात करनी है.....

क्या बात करनी होगी दादू को?

राघव का कम बोलने वाला गुस्से वाला स्वभाव क्या राघव और नेहा को पास आने देगा?

देखते है अगले अपडेट मे..

क्रमश:
 
अपडेट 7

“मुझे तुम्हारे और नेहा के रिश्ते के बारे मे तुमसे कुछ बात करनी है”

शिवशंकर जी ने राघव से सीधे मुद्दे पर बात करना शुरू किया

शिवशंकर- आराम से बैठ जाओ राघव ये बात चित थोड़ी लंबी चलेगी

जिसके बाद राघव वहा रखी खुर्ची पर बैठ गया जिसके बाद शिवशंकर जी ने अपनी बात आगे बढाई

शिवशंकर- राघव तुम्हारी तुम्हारे काम के प्रति कुछ जिम्मेदारिया है मैं ये बात जानता हु और वैसे ही तुम्हारी तुम्हारे दोस्तों तुम्हारे परिवार के लिए भी कुछ जिम्मेदारिया है लेकिन इन सब मे जो तुम्हारे लिए सबसे इम्पॉर्टन्ट होना चाहिए वो है तुम्हारी पत्नी, तुम समझ रहे हो ना मैं क्या कह रहा हु?

राघव ने कुछ नही कहा बस एक सपाट चेहरे के साथ दादू को देखा

शिवशंकर- राघव अब तुम्हारी शादी हो चुकी है और ऐसा भी नही है के ये सब तुमसे जबरदस्ती कराया गया हो, मैंने तुमसे इस मामले मे तुम्हारी राय ली थी लेकिन मैंने पिछले महीनों मे जबसे तुम्हारी शादी हुई है देखा है के तुम अपनी पत्नी की तरफ अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहे हो उसे इग्नोर कर रहे हो

दादू ने राघव को उसकी गलती समझाई

राघव- मैं अपनी जिम्मेदारियों से नाही भाग रहा हु दादू मैं तो बस...

लेकिन शिवशंकरजी ने राघव को बीच मे ही रोक दिया

शिवशंकर- तुम सिर्फ नेहा को इग्नोर कर रहे हो, है ना?

दादू की बात सुन राघव ने नजरे घुमा ली

शिवशंकर- बेटा किसी भी रिश्ते से भागना कोई ऑप्शन नही है, मैं जानता हु जिम्मेदारी निभाने का मतलब तुम्हारे लिए सबकी जरूरतों को पैसों से पूरा करना है लेकिन मेरे बच्चे तुम्हारी ये सोच गलत है। एक बिजनेसमैन होने के नाते मैं ये भी जानता हु के पैसों से तुम कुछ भी खरीद सकते हो लेकिन इसका ये मतलब नाही की पैसों से तुम सब कुछ खरीद पाओ, रिश्तों मे जिम्मेदारी का मतलब होता है प्यार, खुशी, एक दूसरे के साथ बिताया समय, प्यार तुम्हारे परिवार वालों के लिए तुम्हारे दोस्तों के लिए तुम्हारे जीवनसाथी के लिए।

बोलते बोलते दादू दो पल रुके और फिर बोलना शुरू किया

शिवशंकर- मुझे पता है तुम शादी नही करना चाहते थे और हमने तुमपर इस बारे मे कोई दबाव भी नही डाला था, जब मैंने नेहा के बारे मे तुम्हारे बताया था तब तुमसे तुम्हारी मर्जी भी पूछी थी और उस वक्त तो तुमने भी हा कहा था लेकिन फिर क्या हुआ? तुम उससे भाग क्यू रहे हो? बेटा मैं अपनी सारी जिंदगी के अनुभव के आधार पर कह सकता हु के तुम्हारी नेहा से शादी कराना मेरी जिंदगी का सबसे सही फैसला था जीसे मैं सपने मे भी नही झुठला सकता, मैं जानता हु तुम इतने तो समझदार हो के अपनी जिंदगी के फैसले खुद कर सको लेकिन मेरे परिवार के लिए क्या सही है और क्या गलत ये भी मैं जानता हु और जहा तक बात है नेहा की तो उसके जैसी साफ और नेकदिल लड़की का तुम्हारी जिंदगी मे होगा तुम्हें खास बनाता है तुम्हें उस हीरे को संजोना है, हर किसी की अपने जीवनसाथी से कुछ उमीदे होती है वैसी नेहा की भी तो होंगी कभी इस बारे मे सोचा है?

राघव- उसे और क्या चाहिए होगा दादू? किसी भी लड़की के लिए मैं परफेक्ट हु

राघव ने थोड़े घमंड मे कहा जिसपर दादू मुस्कुराये और उन्होंने ना मे गर्दन हिला दी जिससे राघव वापिस शांत हो गया

शिवशंकर- हर लड़की को जिंदगी मे सिर्फ पैसा ही नही चाहिए होता राघव जिसके बल पर तुमने अभी ये बात कही है कुछ को प्यार और अटेन्शन भी चाहिए होता है, मैंने नेहा को कभी तुम्हें प्यार से देखते नही देखा है जानते हो क्यू? क्युकी वो डरती है तुमसे, तुम्हारे गुस्से से जिसके बारे मे उसने सबसे सुन रखा है अरे उसे तो असली राघव क्या है राघव का सॉफ्ट साइड क्या है पता ही नही है

राघव- मैं ऐसा ही हु दादू मेरा कोई दूसरा साइड नही है

राघव ने नजरे घूमते हए कहा

शिवशंकर- ना! तुम ऐसे नहीं हो, मैं तुम्हें बाकी लोगों के मुकाबले ज्यादा अच्छे से जानता हु तुम्हारा सारा बचपन मेरी ही गोद मे बीता है राघव बस बात ये है ये तुम अपने आप को एक्स्प्रेस नहीं करते हो क्युकी तुम इस रिश्ते को स्वीकारना ही नही चाहते ना जाने इसके पीछे क्या वजह है। देखो शादी शुदा जिंदगी मे अजस्ट होने मे समय लगता है मैं जानता हु और जब से तुम्हारी शादी हुई है तुम बस यहा से वहा भाग रहे हो इस बात को इग्नोर करते हुए के तुम्हारी शादी हो चुकी है, इस रिश्ते को सफल बनाने के लिए तुम दोनों को एफर्ट्स करने पड़ेंगे।

शिवशंकर- नेहा को ये कभी अच्छा नही लगेगा के तुम उसे सिर्फ अपनी एक रीस्पान्सबिलटी मानो, वो डेफ़िनटेली चाहती होगी के तुम उसे अपने पूरे मन से अपनाओ जहा तुम उसका खयाल रखो इससलिए नही क्युकी वो तुम्हारी जिम्मेदारी है बल्कि इसलिए क्युकी तुम उससे प्यार करते हो। हा अब प्यार एक ऐसी चीज है जो कहने से नहीं होती लेकिन मैं बस ये चाहता हु के तुम इस रिशर्ते हो एक मौका दो थोड़ा वक्त दो और अगर फिर भी तुम्हें इससे भागना ही है तो मैं उस लड़की की जिंदगी खराब करने के पक्ष मे नहीं हु

दादू की बात सुन राघव ने उन्हे देखा

शिवशंकर- राघव, तुम्हारे मा बाप को तुम्हारा समय चाहिए, तुम्हारे चाचा चाची को तुम्हारा समय चाहिए मैं तुम्हारी दादी विवेक रिद्धि सबलोग तुमको घर मे बहुत ही कम देखते है सबको तुम्हारा थोड़ा वक्त चाहिए जो तुम उनके साथ बिताओ बाते करो लेकिन तुम्हारी वाइफ उसे तुम्हारा टाइम भी चाहिए तुम्हारी अटेन्शन भी और तुम्हारा प्यार भी।

शिवशंकर- इस घर मे सब जानते है के शेखर और श्वेता एकदूसरे से कितना प्यार करते है वो तो कॉलेज के समय से एकदूसरे को जानते है पसंद करते है उनको देखके क्या नेहा को ऐसा नही लगता होगा के तुम लोगों का रिश्ता भी काश उनके जैसा होता? वो कभी कुछ कहती नही है इसका ये मतलब तो नही के उसकी कुछ इच्छाए नही है, वो कभी बताती नही है लेकिन उसे तुम्हारी फिक्र है क्युकी शी केयर फॉर यू शी सीम्स तो लाइक यू।

दादू की बात से राघव थोड़ा शॉक हुआ, अपने पिछले महीनों के नेहा के साथ के बर्ताव को देखते हुए वो ये सोच ही नहीं सकता था के नेहा उससे प्यार करती होगी

शिवशंकर- इन पिछले 5 महीनों मे जब भी उसे तुम्हारी जरूरत थी तुम उसके पास नही थे पर अब मैं चाहता हु तुम उसकी भरपाई करो उसके साथ वक्त बिताओ इस रिश्ते को सफल बनाने के लिए एक चांस दो , अब भले तुम इसे मेरा ऑर्डर मानो या कुछ और लेकिन मैं तुम्हें और नेहा को साथ देखना चाहता हु, उसके साथ वक्त बिताओ उसे काही घूमने ले जाओ, नई शादी हुई है तुम्हारी इस पल को थोड़ा इन्जॉय करो तभी तो एकदूसरे को तुम थोड़ा जान पाओगे। एकदम से मैं तुम्हारा काम रोक तो नही सकता लेकिन अब से तुम्हारा ऑफिस टाइम बस सुबह 9 से शाम 7 तक होगा उसके पहले या बाद मे मुझे तुम घर मे दिखने चाहिए

दादू की बात से राघव का चेहरा ऐसा हो गया मानो किसी बच्चे के हाथ से उसका पसंदीदा चॉकलेट ले लिया हो किसी ने

राघव- दादू लेकी...

शिवशंकर- ना! कोई बहाना नही चलेगा राघव तुम नही जानते तुम्हारी गैरमौजूदगी मे उसे कितने सवालों के जवाब देने पड़ते है, शेखर की शादी की सारी रस्में उसने अकेले की है जब तुम्हें उसके साथ होना चाहिए था लेकिन तुम कहा थे? तुम उससे भाग रहे थे पर अब बहुत हो गया अब ये सब अभी से बंद होना चाहिए

दादू की बातों से और आवाज से साफ पता चल रहा था के वो राघव से बहुत ज्यादा गुस्सा थे

शिवशंकर- जब तक तुम ही उसे पूरे मन से नही अपनाते वो इस परिवार को अपना परिवार कैसे माने बताओ? जब भी कोई उससे तुम्हारे बारे मे पूछता है वो कोई न कोई बहाना बना देती है जिससे तुम्हारी दादी के ताने उसे सुनने पड़ते है पर उसने कभी तुम्हारी शिकायत नहीं की। ऐसा नहीं है के वो इन बातों का या उन तानों का जवाब नही दे सकती लेकिन वो चुप रहती है सिर्फ तुम्हारे लिए

राघव चुप चाप बैठ सब सुन रहा था

शिवशंकर- एक लड़की अपना सब कुछ छोड़ कर अपने पति के साथ उसके जीवन मे प्रवेश करती है उसका पति ही उसके लिए सबकुछ होता है लेकिन जब उसका वो जीवनसाथी ही उसे अकेला छोड़ दे तब वो किसी से कुछ भी नही कह सकती।

शिवशंकर- मैं बस इतना चाहता हु के तुम इस शादी को एक मौका दो मैं अपने पूरे अनुभव के साथ कहता हु के तुम्हें अफसोस नही होगा

इतने कह कर दादू के राघव का कंधा थपथपाया और रूम मे बाहर चले गए और राघव वही सोच मे डूबा बैठा रहा

राघव ने अपने पीछे 5 महीनों के बर्ताव के बारे मे सोचा, उसने कभी नेहा से बात करने की कोशिश नही की थी पहली बार जब उसने नेहा से बात की तब वो शादी की रात को ही टूर पर निकल गया था और वापिस आने के बाद तो उसने उसे साफ और रुडली कह दिया था के वो उससे दूर रहे जससे उनके बीच दूरिया और बढ़ गई थी और बहुत देर इस बारे मे सोचने के बाद राघव ने एक लंबी सास ली और सीढ़िया चढ़ कर अपने रूम की ओर जाने लगा, जाते जाते उसकी नजर गार्डन मे बैठ कर बाते करते शेखर और श्वेता पर पड़ी जो एक हैप्पी कपल का बेहतरीन उदाहरण थे वही उसने तो कभी नेहा के साथ वक्त भी नही बिताया था या ये कहना ज्यादा सही होगा के उसने तो नेहा को कभी वाइफ समझा ही नही था, वो अपने रूम मे आया।

राघव जब रूम मे आया तो उसने देखा के नेहा बालकनी मे रजाई ओढ़े कोई बुक पढ़ रही थी, राघव ने कुछ पल तक नेहा को देखा और जब नेहा को लगा के कोई उसे देख रहा है तो उसने मूड कर देखा तो वहा राघव को पाया जिसके बाद नेहा ने नजरे नीची कर ली और दोबारा किताब पढ़ने लगी क्युकी वो जानती थी के राघव उससे बात नहीं करेगा और ऐसा जताएगा के वो वहा हो ही नही।

वो दोनों ही एकदूसरे के लिए अजनबी थे वो कोई बात कभी शुरू नही करता था वही नेहा भी कोई पहल नही करती थी क्युकी उसे शायद ये अच्छा ना लगे

राघव कुछ नही बोला और बेड पर जाकर काफी जगह छोड़ कर लेट गया, पिछले कुछ दिनों मे लगातार काम की थकान से उसे जल्दी नींद आ गई,

नेहा ने उसकी तरफ देखा और फिर लाइटस बंद कर दी, उसे वही बालकनी मे अच्छा लग रहा था वो तो वही सितारों को देखते हुए सो गई...

पता नहीं इनके जीवन मे क्या लिखा था...

क्या राघव इस शादी को एक मौका देगा??

अब क्या करेगा राघव??

और क्या नेहा कोई पहल करेगी??

देखेंगे अगले अपडेट मे..

क्रमश:
 
अपडेट 8

अगली सुबह

अलार्म मे घनघनाने की आवाज से राघव की नींद खुली और वो उठ कर बैठा, पूरी आंखे खोलने के बाद उसने अपने बाजू मे बेड पर देखा तो उसका चेहरा उतर गया, उसके बाजू का बेड का साइड खाली था नेहा वहा नहीं थी।

(पहले खुद इग्नोर करो फिर वो क्यू नहीं है इसपे चेहरा भी उतारो, हिपाक्रसी की भी सीमा होती है राघव बाबू :redface: )

इस वक्त सुबह के 5 बज रहे थे और जहा तक राघव नेहा को जानता था वो सुबह 5 बजे नही उठती थी राघव ने अपने रूम मे इधर उधर नजरे घुमाई तो पाया के बालकनी का दरवाजा खुला है वो बेड से उठा और बालकनी मे जाकर देखा तो नेहा वहा सोई हई थी,

‘इसको अचानक क्या हो गया? अब क्या मैडम मेरे साथ बेड भी शेयर नहीं कर सकती?’ (जैसे तुमको तो रहना ही है उसके साथ :sigh: ) राघव के दिमाग मे खयाल आया लेकिन वो कुछ नही बोला, उसने अपना सर झटका और रूम से बाहर चला आया जिम करने

यहा नेहा को बालकनी मे सोते सोते थोड़ी गर्मी लगने लगी जिससे उसकी आंखे खुल गई और उठकर जब उसने अपने आजू बाजू देखा तो पाया के वो रात को आसमान मे सितारे देखते हुए बालकनी मे ही सो गई थी, नेहा रूम मे आई और उसने घड़ी को देखा तो पाया के अभी उसके उठने का समय नहीं हुआ था इसीलिए वो वापिस बेड पर जाकर सो गई बगैर किसी बात की चिंता करे, नेहा को अपनी नींद से बहुत प्यार था लेकिन ये बात वो कभी मानती नहीं थी।

कुछ समय बाद..

राघव जिम से वर्काउट करके लौट रहा था और अपने रूम की ओर जा रहा था तब उसकी मा ने उसे रोका

जानकी- राघव रूम मे ही जा रहे हो ना?

राघव- हा मॉम! कुछ चाहिए आपको?

जानकी- नहीं बस नेहा को नींद से जगा देना उसने मुझसे उसे जल्दी जगाने कहा था वो आज श्वेता उसके मायके जा रही है न तो उसे बाय करने के लिए

राघव- दुनिया मे बहुत सालों पहले अलार्म का आविष्कार हो चुका है मॉम और इस काम के लिए उसने आपसे कहा?

जानकी- हा पर नेहा को नींद से जगाना अलार्म के बस का नहीं है या तो कोई उसे नींद से जगाए या वो खुद के हमेशा के टाइम पर ही उठेगी

ये नेहा के बारे मे एक नई जानकारी थी जो आज राघव को पता चली थी राघव ने हा मे गर्दन हिलाई और अपने रूम मे चला आया और जब वो रूम मे पहुचा तो उसने देखा के अब नेहा रूम मे आकर बेड पर सो रही थी तो राघव उसके पास आया

वेट! इसको जगाऊ कैसे अब?

सुनो! ना ना ये सही नही लगेगा कुछ और सोचना पड़ेगा राघव

हैलो? ना ये भी नाही

'हा एक काम करता हु इसके नाम से ही उठता हु लेकिन मैंने कभी इसके पहले उससे बात भी नहीं की है’

राघव का दिमाग सोच मे डूबा हुआ था के नेहा को कैसे जगाए क्या बुलाए उसे और आखिर मे उसने उसे उसका नाम पुकारके उठाने की ठानी (वाह! अपनी की बीवी को कैसे बुलाए इसपर दिमाग खपाया जा रहा है :sigh: )

राघव- न..नेहा

अबे जोर से बोल और हकला मत’

राघव- नेहा!

राघव ने थोड़ा जोर से कहा लेकिन नेहा अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिली, राघव ने रजाई खीचनी चाही लेकिन नेहा ने उसे कस के पकड़ा हुआ था राघव ने रजाई को अपनी ओर खींच कर निकालने की कोशिश की लेकिन नेहा ने नींद मे ही उसे वापिस अपने ऊपर खीच लिया और राघव बस उसे देखता ही रहा

राघव- नेहा उठ जाओ देखो लेट हो रहा है, तुम्हें श्वेता को सीऑफ करना था ना?

राघव ने एक और बार कोशिश की जिसपर

नेहा- बस 5 मिनट

उनींदी आवाज मे नेहा ने इतना कहा और वापिस सो गई, उसे वो क्या कर रही है क्या बोल रही है इसकी खबर भी नहीं थी

मॉम सही कह रही थी इसके बारे मे’ राघव ने मन मे सोचा

राघव- हे नेहा बहुत हुआ अब उठ जाओ

इतना बोल कर राघव ने पूरी रजाई खीच ली

नेहा- मैं नही उठने वाली जो करना है कर लो!

नेहा ने अपनी उसी उनींदी आवाज मे चीख कर कहा और वापिस सो गई और राघव बस उसे आंखे फाड़े देखता रहा, किसीने आज तक उसके साथ उची आवाज मे बात नही की थी और ये उसपर नींद मे ही सही लेकिन चिल्लाई थी

राघव- वापिस आकार सो जाना अब उठो

राघव ने नेहा का हाथ पकड़ कर उसे बेड पर बैठाते हुए कहा जिससे इरिटैट होकर नेहा ने एक तकिया उठाया और उसे सीधा राघव के मुह पर दे मारा और वापिस बेड पर गिर गई लेकिन आंखे उसकी अब भी बंद थी

बस अब बहुत हो गया था अब तो नेहा ने खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मार ली थी उसने ग्रेट राघव देशपांडे के मुह पे तकिया दे मारा था

राघव- ए पागल लड़की अभी के अभी बेड से नीचे उतरो!

राघव चिल्लाया लेकिन गेस करो क्या हुआ होगा,

राघव के चिल्लाने का नेहा पर कोई असर नहीं हुआ और वो वैसी ही सोई रही और उसको ऐसे देखते हुए अब राघव को गुस्सा आने लगा था और वो सीधा बाथरूम की तरफ गया और वहा से एक पानी की बाल्टी ले आया और पूरी पानी से भरी बाल्टी उसने नेहा पर उड़ेल दी जिससे नेहा हड़बड़ाकर उठी

नेहा- सुनामी! सुनामी! मेरा फोन कहा है... मेरा फोन!!

नेहा बेड से उठी और चिल्लाने लगी वही राघव अपने हाथ बांधे उसे देख रहा था और जब नेहा को होश आया और उसके ध्यान मे आया के कोई सुनामी नहीं है तो उसने रूम मे देखा और पाया के राघव उसे घूर रहा था और राघव के हाथ मे पानी की बाल्टी थी

नेहा- ये कोई तरीका है किसी को जगाने का?

नेहा ने धीमी आवाज मे पूछा और राघव अविश्वास से उसे देखने लगा, ये वही लड़की थी जो नींद मे उसपर चिल्लाए जा रही थी, उसके मुह पर तकिया फेक रही थी और अब इतना धीमे बात कर रही थी के इसपर यकीन होना मुश्किल था

राघव- पागल लड़की मैं तुम्हें पिछले 20 मीनट से जगा रहा था और तुम पुछ रही हो ये क्या तरीका है अरे मैं पूछता हु सोने का ये कौनसा तरीका है?

नेहा- झूठ मत बोलिए मैं एक आवाज मे ही उठ जाती हु

नेहा ने कॉन्फिडेंट बनते हुए कहा और राघव बस उसे चुप चाप देखता रहा

राघव- वो तकिया दिख रहा है तुम्हें ?

राघव ने उस तकिया की तरफ इशारा किया जो नेहा ने उसे मारा था और जो अभी फर्श पर पड़ा था, नेहा ने उसे देखते हुए हा मे गर्दन हिलाई

राघव- वो तुमने फेका है।

नेहा- तो??

राघव- मेरे मुह पे !

नेहा- ओह... हैं..! क्या??

राघव- हा तुम... तुम किसी नशे मे धुत आदमी जैसा बिहेव कर रही थी, नहीं.. उससे भी बुरा वो भी अच्छे होते है पागल कही की

नेहा- मैं पागल नहीं हु और ना ही बेवड़ी

नेहा भी अब डिफेन्स मोड मे आ गई थी

राघव- तुम हो

नेहा- नहीं!

राघव- ओह शट उप सोच रहा हु मॉम को कैसा लगता अगर मेरी जगह वो तुम्हें जगाने आती तो

और मॉम का नाम आते ही नेहा के दिमाग की बत्ती जली के उसी ने जानकी को उसे जगाने कहा था और वो सीधे बाथरूम की ओर भागी बगैर राघव की एक बात सुने

राघव- कहा जा रही हो मेरी बात पूरी नहीं हुई अभी

राघव उसके पीछे से चिल्लाया लेकिन उसने उसे इग्नोर कर दिया

‘ये लड़की एक दिन मेरा ब्लड प्रेशर बढ़ा देगी’ राघव बड़बड़ाते हुए रूम के बाहर चला गया

कुछ समय बाद नेहा ने रेडी होकर रूम मे इधर उधर नजरे घुमा कर देखा के कही राघव वहा तो नही है, सुबह के उनके सीन के बाद वो राघव के सामने नहीं जाना चाहती थी और जब उसे राघव कही नही दिखा तो उसने राहत की सास ली और अपने आप को आईने मे देखा तभी उसे किसी के गला खखारने की आवाज आई नेहा ने थोड़ा साइड से देखा तो पाया के राघव उसे देखते हुए उसके पीछे आ रहा है

नेहा पलट कर थोड़ा पीछे जाने लगी लेकिन फिर रुक गई क्युकी इससे ज्यादा वो पीछे नहीं जा सकती थी और राघव उसके पास आए जा रहा था

नेहा- वो.. वो.. वो..

नेहा के मुह से आवाज नहीं निकल रही थी और राघव ने सवालिया नजरों से उसे देखते हुए अपनी एक भौ उठाई

वो नहीं जानती थी के क्या करना है वो उसके बेहद पास था जिससे उसके दिल की धड़कने बढ़ गई थी नेहा उसकी नजरों के बचने के लिए इधर उधर देखने लगी लेकिन राघव की इन्टेन्स नजरों से वो अपने को नहीं बचा पा रही थी

नेहा- वो.. वो वहा क्या है?

नेहा ने राघव के पीछे देखते हुए पूछा जिससे राघव ने भी पीछे पलट कर देखा की नेहा क्या कहना चाह रही है लेकिन तभी नेहा ने उसे हल्का सा धक्का दिया और वहा से जितना हो सके उतना तेज भाग ली

जब वो भागते हुए बाहर आई तो वो रिद्धि से टकरा गई

रिद्धि- भाभी क्या हुआ ऐसे भाग क्यू रही हो आप?

नेहा- वो.. वो रिद्धि...

लेकिन नेहा को कोई बहाना नहीं मिल रहा था

रिद्धि- आपने वापिस चूहा देख लिया क्या??

रिद्धि ने अंदाज लगाते हुए पूछा जिसपर नेहा ने हा मे गर्दन हिला दी

रिद्धि- भाभी उसमे इतना क्या डरना वो एक चूहा ही तो है

नेहा- ये वाला बहुत बड़ा है

नेहा ने धीमे से कहा लेकिन रिद्धि से सुन लिया

रिद्धि - बड़ा वाला! कोई ना मैं कहती हु किसी से वो चूहा ढूँढने अब चलो श्वेता भाभी का जाने का समय हो गया है उन्हे बाय भी तो करना है

जिसके बाद वो दोनों वहा से चली गई...

क्रमश:
 
अपडेट 9

कुछ समय बाद परिवार के सभी लोग घर मे बने मंदिर मे सुबह की आरती के लिए इकट्ठा हो रहे थे आज संडे का दिन था तो किसी को काम पर जाने की कोई जल्दी नहीं थी।

विवेक- गुड मॉर्निंग भाभीलोंग

विवेक ने वहा खड़ी नेहा और श्वेता के बीच मे आकार खड़े होते हुए कहा

नेहा- गुड मॉर्निंग

नेहा ने विवेक की नाक खीच ली

शेखर- ओहो आज तो भाभी का मूड बड़ा अच्छा लग रहा है

राघव - ऐसा कह सकते है!

राघव ने पीछे से आते हुए शेखर की बात का समर्थन किया और नेहा को देखने लगा और नेहा नीचे देखने लगी

विवेक- हेनजी!

राघव- मतलब वो ऐसे कभी बिहेव नहीं करती ना

रिद्धि- भाई आपको ना कुछ नही पता आप घर पर ही कहा होते हो जो आपको भाभी का मस्ती वाला मूड पता हो भाभी को जानने के लिए पहले उसके साथ रहा तो कीजिए

रिद्धि ने कहा जिसपर ‘वो कभी होते ही तो नहीं है’ ये ख्याल नेहा के दिमाग मे आया और उसका चेहरा उतर गया और राघव बराबर नेहा के उतरे चेहरे का रीज़न समझ गया वो अच्छे से जानता था के नेहा को चेहरा क्यू उतरा और इसका रीज़न वो खुद था इसीलिए वो वहा से बगैर कुछ बोले चला गया

गायत्री- चलो सब लोग आरती के लिए आ जाओ आज चूंकि सब लोग है घर मे तो सब अपने अपने जोड़े के साथ आरती करेंगे

जिसके बाद गायत्री और शिवशंकर जी ने आरती शुरू की उनके बाद रमाकांत-जानकी, धनंजय- मीनाक्षी, विवेक, रिद्धि और श्वेता- शेखर

श्वेता ने आरती की थाली नेहा को दी और राघव उसके करीब आया और उसने प्लेट को छुआ और प्लेट को पकड़ते हुए उसका हाथ नेहा के हाथ को टच किया और वो हल्का सा स्पर्श नेहा के दिल की धड़कन बढ़ाने के लिए काफी था, नेहा ने उसकी तरफ देखा, वो भगवान की मूर्ति की तरफ देख रहा था जिसके बाद नेहा ने भी अपना ध्यान आरती मे लगाया

भगवानजी मैंने आपसे कभी कुछ नाही मांगा है आपने मुझे बिन मांगे ही सबकुछ दिया है लेकिन आज मांगती हु मेरे परिवार को हमेशा खुश रखना और इनकी सारी परेशानिया दूर करना’ नेहा ने आंखे बंद करके भगवान से प्रार्थना की और राघव बस उसे देखता रहा (क्या ही सही लड़की है bc पत्थर को सनम मान रही 🥲)

भगवान मेरे परिवार को हमेशा सुरक्षित और खुश रखना, मेरे पूरे परिवार को’ राघव ने मन ही मन भगवान से कहा और आखरी शब्द उसने नेहा को देखते हुए कहे (चलो कुछ तो अकाल आई इसको)

उसके बाद नेहा ने घर के सभी लोगों को आरती दी और पूजा की थाली मंदिर मे रख दी जिसके बाद सभी लोग नाश्ते के लिए डाइनिंग टेबल पर आ गए सबने अपने हाथ से अपना अपना नाश्ता लेना शुरू किया सिर्फ नेहा ने राघव की प्लेट मे नाश्ता परोसा फिर खुद लिया

रिद्धि- मॉम प्लीज किसी से कह कर नेहा भाभी का रूम क्लीन करवा दीजिए उनके रूम मे बहुत चूहे हो गए है और भाभी को उनसे डर लगता है

रिद्धि ने नाश्ता करते हुए ये बात छेड़ी जिससे नेहा का निवाला उसक मुह मे ही अटक गया और उसे ठस्का लगा और वो रिद्धि को देखने लगी

मीनाक्षी- अरे बेटा आराम से खाओ

रिद्धि - भाभी ठीक हो आप?

रिद्धि ने चिंता से पूछा जिसपर नेहा ने हा मे गर्दन हिलाई

जानकी- हा ठीक है मैं करवा दूँगी लेकिन चूहा आया कहा से हमारे घर मे तो चूहे नहीं है

विवेक- अरे भाभी ने कल भी देखा था एक चूहे को

और विवेक की बात सुन कर राघव कन्फर्म हो गया के ये लोग किस चूहे की बात कर रहे है, उसने एक बार नेहा को देखा जो नर्वसली इस बातचित को सुन रही थी

रिद्धि- हा पर आज वाला चूहा बड़ा था

रिद्धि ने विवेक से कहा जिसपर राघव ने जूस का घूट लेते हुए नेहा को देखा

शेखर- सिम्पल है न चूहे मारने वाली दावा छिड़क दो रूम मे उसमे क्या है चूहा मर जाएगा

और अब जूस गले मे अटकने की बारी राघव की थी क्युकी चूहा कौन है ये वो जानता था और यहा तो उसी का भाई उसे मारने की प्लैनिंग कर रहा था लेकिन राघव ने कुछ नहीं कहा वो बस नेहा को देखता रहा और नेहा ‘मर गई’’ वाला लुक लिए वहा बैठी रही

रमाकांत- बेटा अगर तुम चूहों से इतना डरती हो तो राघव से कहना चाहिए था ना वो उसे बाहर निकाल देता

अब अपने आपको अपने ही रूम से बाहर कैसे निकलू’ राघव धीमे से पुटपुटाया जिसे नेहा ने सुन लिया और राघव वापिस नेहा को देखने लगा के अब वो इसपे क्या बहाना बनाती है पर वो कुछ कहती इससे पहले धनंजय बोल पड़े

धनंजय- राघव को तो ये बात पता होगी न भाईसाब, क्यू राघव तुम्हें नहीं पता था तुम्हारे रूम मे एक चूहा है ?

राघव- मुझे तो नही दिखा चाचू इसीलिए मैं किसी से कहने वाला था लेकीन रिद्धि ने बात छेड दी

राघव ने नेहा को देखने हुए कहा और उसका रिएक्शन देखने लगा वही नेहा ने एक राहत की सास ली के राघव ने बात संभाल ली थी

गायत्री- अगर सब का नाश्ता और बाते हो गई हो तो चलो श्वेता को कुछ रस्मे करनी है वो अपने मायके जाए उससे पहले

उसके बाद सबने नाश्ता किया और श्वेता ने कुछ रस्मे की, श्वेता का भाई उसे लेने आया हुआ था और वो सबको बाय बोल कर उसके साथ चली गई, शेखर कल उसके मायके जाकर उसे ले आएगा।

गायत्री- रमाकांत, मैं और तुम्हारे पापा सत्संग मे जा रहे है आज संडे है तो

शिवशंकर- हा और हमारा शाम का खाना भी वही होगा तो हमारी राह मत देखना

जिसके बाद दादू दादी दोनों रेडी होने चले गए

धनंजय- मुझे और मीनाक्षी को भी अनाथालय जाना है हमेशा की तरह

रमाकांत- और आज बड़े दिनों बाद छुट्टी मिली है तो...

रमाकांत जी जानकी की ओर देखने लगे

नेहा – पापा आप और मा आज काही घूम आइए एंजॉय कीजिए

नेहा ने अपने ससुर का इशारा समझते हुए कहा और रमाकांत ने उसे आँखों से ही धन्यवाद कहा

नेहा- मा मुझे मंदिर जाना है जाऊ?

जानकी- हा हा जाओ ना बेटा तुम्हें पूछने की क्या जरूरत है, हमेशा जैसे तुम चारों चले जाओ और हा मेरे नलायाक बेटे को भी ले जाओ

जानकी ने आखरी लाइन सीढ़ियों से ऊपर जाते राघव को देख कर कही जीसपर नेहा मुस्कुरा दी वही राघव उसे घूरने लगा

शेखर- भाभी मैं चल तो लू आपके साथ लेकिन आपका खदूस पति चाहता है के मैं मीटिंग अटेन्ड करू, आज बताओ छुट्टी के दिन काम करवा रहे मेरे से आप बात करो ना भाई से

शेखर ने नेहा को मस्का मारने की कोशिश की वही रघाव ने इन भाभी देवर की बाते सुन ली और बोला

राघव- सोचना भी मत शेखर कोई बहाना नहीं चलेगा तुम पहले ही बहुत छुट्टी ले चुके हो सीधा ऑफिस के लिए निकलो चलो

रिद्धि- भाभी हम भी नही आ पाएंगे इग्ज़ैम आ रहे है, मुझे और विवेक को लाइब्रेरी जाना है इग्ज़ैम के चलते कॉलेज मे संडे को भी लाइब्रेरी ओपन रखी है कुछ बुक्स लानी वरना हम ये चांस नहीं छोड़ते , सॉरी भाभी

नेहा- अरे उसमे सॉरी क्या जाओ तुम लोग

शेखर- भाभी मैं वादा करता हु जल्दी आ जाऊंगा बस तब तक भगवान आपको इस जालिम आदमी को सहने की शक्ति दे

शेखर ने राघव को देखते हुए कहा जो सीढ़ियों पर खड़े होकर ये नौटंकी देख रहा था

विवेक- भाभी पक्का जाए न हम आप जाएंगी भाई के साथ?

विवेक के सवाल पर नेहा ने हा मे गर्दन हिला दी

मीनाक्षी- वो राघव के साथ जा रही है किसी माफिया डॉन के साथ नहीं जो तुम लोग ऐसा कर रहे हो

मीनाक्षी ने विवेक रिद्धि और शेखर से कहा और जब सब लोग अपने अपने काम पर निकल गए तब नेहा ने राघव को देखा जो उसी को देख रहा था

नेहा- आइ एम सॉरी

नेहा ने नीचे देखते हुए कहा

राघव- क्यू?

नेहा- वो सुबह के लिए और फिर नाश्ते के वक्त...

इसके आगे नेहा से कुछ नहीं बोला गया

नेहा- आप चिंता मत करो मैं चली जाऊँगी आपको आने की जरूरत नहीं है मैं किसी को कुछ नाही कहूँगी

नेहा ने नर्वसली कहा

राघव - तयार हो जाओ मैं अपनी मा की बात नही टालता

राघव ने कहा और मूड कर रूम मे जाने लगा और जाते जाते रुका फिर बगैर मुड़े बोला

राघव- और हर बात के लिए सॉरी कहना बंद करो

जिसके बाद राघव अपने रूम मे चला गया और नेहा शॉक मे वही खड़ी रही ये सोचते हुए के ‘राघव को क्या हुआ है’ क्यूके उसका ऐसा बिहेवियर नॉर्मल नही था

तयार होकर नेहा और राघव भगवान राम के मंदिर जाने निकले

दोनों सारे रास्ते शांत थे लेकिन ये शांति नेहा से सहन नहीं हो रही थी लेकिन कुछ बोलने मे भी डर लग रहा था, जब वो लोग पहुच गए तब गाड़ी से उतर कर राघव बोला

राघव- चलो वहा से पूजा की थाली ले लेते है

राघव ने मंदिर के पास बनी एक बड़ी दुकान की ओर इशारा किया

नेहा- रुकिए.. मतलब वहा से क्यू यही से ले लेते है न इन लोगों की भी मदद हो जाएगी

नेहा ने एक छोटी की दुकान को देखते हुए कहा जिसके बाद वो उस दुकान मे चली गई और पूजा के लिए जरूरी चीजे लेकर वो दोनों मंदिर मे आए

नेहा ने पूजा की थाली पंडित जी को दे दी जिसे पंडित जी ने भी मुस्कुराकर लिया और बादमे पंडित जी ने आकर उन दोनों को प्रसाद दिया और कुछ ऐसा कहा जिससे राघव को एक झटका लगा...

ऐसा क्या कहा था पंडित जी ने जिसे सुन राघव शॉक हो गया??

जानेंगे अगले अपडेट मे तब तक कमेंट्स आते रहने चाहिए मुझे नहीं पता कैसे बस कमेंट्स चाहिए और वो भी भरपूर

क्रमश:
 
अपडेट 10

नेहा ने पूजा की थाली पंडित जी को दे दी जिसे पंडित जी ने भी मुस्कुराकर लिया और बादमे पंडित जी ने आकार उन दोनों को प्रसाद दिया और नेहा के सर पर हाथ रख कर बोले

पंडित- जन्मदिन की बहुत शुभकामनाए नेहा बिटिया

(जन्मदिन है बी अपनी नायिका का :D )

जिसपर नेहा ने भी झुक कर पंडित जी का आशीर्वाद लिया वही राघव शॉक मे खड़ा उन्हे देख रहा था उसे तो आज नेहा का बर्थडे इसका दूर दूर तक कोई अंदाजा नहीं था, राघव को नेहा के साथ देख पंडित जी ने नेहा से पूछा

पंडित- अरे बिटिया ये कौन है ?

पंडित जी के सवाल से नेहा के ध्यान मे आया के आज तो राघव भी उसके साथ था वरना तो वो अकेले ही होती थी

नेहा- वो.. वो पंडित जी ये.. ये मेरे पति है राघव देशपांडे

नेहा ने धीमे से कहा वही राघव अब भी उसे देखे जा रहा था

पंडित- अरे वाह! अच्छा लगा आप से मिल कर। हर साल नेहा बिटिया अकेले ही आती है पर अब आप है उसके साथ उसे प्यार करने वाला जीवनसाथी मिल गया है, बड़ा अच्छा लगा नेहा बेटा तुम्हें खुश देख कर

(खुश :confuse: )

पंडित जी ने राघव और नेहा से कहा वही राघव कुछ नही बोला बस नेहा को देख के मुस्कुरा दिया

प्यार करने वाला जीवनसाथी’ नेहा ने मन मे सोचा मानो अपने आप को चिढ़ा रही हो

राघव- जी पंडितजी अब मैं हु ना अब नेहा अकेली नहीं है

राघव ने नेहा को देखते हुए कहा वही नेहा ने उसकी बात सुन कर उसे देखा, राघव की नजरे नेहा के मन मे तितलिया उड़ा रही थी और उसकी बात सुन नेहा के गालों पर लाली छाने लगी थी, शायद उसके मन मे कुछ तो उम्मीद जग रही थी लेकिन नेहा भावनाओ मे बहने वाली लड़की तो बिल्कुल नहीं थी वो मानो जानती थी के ये सब शायद दिखावा है

मंदिर मे दर्शन करने के बाद वो दोनों बाहर आए और राघव कुछ बोलता इससे पहले ही नेहा उससे थोड़ा दूर आई और वहा मौजूद कुछ गरीब बच्चों की ओर चली गई और उन्हे लेकर पास वाली दुकान ने उन्हे खाने पीने का सामान दिलाने लगी वही राघव खड़ा खड़ा उसकी हर ऐक्टिविटी देख रहा था।

नेहा वापिस आई और दोनों कर मे आ बैठे लेकिन कार बस खड़ी रही और जब राघव ने कार शुरू नहीं की तो नेहा ने पूछा

नेहा- क्या हुआ?? आप गाड़ी क्यू नाही चला रहे?

राघव- मुझे छोड़ो तुम्हें क्या हुआ है?

राघव ने अचानक से पूछा जिससे नेहा थोड़ा चौकी

नेहा- क.. कहा क्या.. कुछ भी तो नहीं

राघव – तुमने किसी को क्यू नहीं बताया के आज तुम्हारा बर्थडे है, अगर तुम ये बात बताती तो हम कुछ प्लान करते ना

राघव ने नेहा को घूरते हुए कहा

नेहा- अरे इस.. इसमे इतनी बड़ी क्या बात है बर्थडे ही तो है

राघव- लोग अपने बर्थडे के लिए एक्सईटेड रहते है और तुम कह रही हो बर्थडे ही तो है! यार कम से कम बताना तो चाहिए था तुम्हें

राघव ने हल्के गुस्से मे कहा

नेहा- मुझे मेरा बर्थडे मनाना पसंद नहीं है बस इसीलिए नहीं बताया।

नेहा ने इधर उधर देखते हुए कहा

राघव- और ऐसा क्यू भला, बताएंगी आप?

(वैसे तो ये उससे बात नहीं करता अब इतनी पंचायत :sigh: )

राघव ने नेहा के बिहेवियर से इरिटेट होते हुए पूछा और नेहा ने कुछ पल उसे अच्छे से देखा और फिर बोली

नेहा- मैं एक बहुत ही सिम्पल लड़की हु जिसे सिम्पल छोटी छोटी चीज़े पसंद है, मेरी शादी एक बड़े परिवार मे हुई है इसका ये मतलब नही है के सब मुझे अटेंशन दे या मैं कोई गोल्ड डिगर हु, मुझे किसी भी चीज का दिखावा पसंद नही है, मैं जानती थी के मैं अगर ये बात किसी को भी बताती तो घरवाले कुछ न कुछ प्लान जरूर करते और बर्थडे ना मनाना मेरी खुद की चॉइस है और इसीलिए मैंने किसी को नही बताया

नेहा बोलते बोलते कुछ पल रुकी और वापिस बोलना शुरू किया

नेहा- और आप को अचानक मेरी लाइफ मे इतना इंटरेस्ट कहा से आया? आप इस शादी से कभी खुश नही लगे मुझे फिर अब इतना इंटरेस्ट क्यू? मुझे किसी से किसी चीज की एक्सेप्टेशन नहीं है क्युकी भले ही वो मेरे लिए इम्पॉर्टन्ट क्यू न हो पर जब मेरे हसबैंड ही मुझे एक्सेप्ट नहीं करते तो मैं उस फॅमिली को अपना कैसे मानू?

बोलते बोलते नेहा की आँखों मे पानी आ गया था और राघव उसके इस कन्फेशन से शॉक होकर उसे देख रहा था

नेहा- प्लीज घर मे किसी को मेरे बर्थडे के बारे मे मत बताइएगा मैं उसे ही मेरा गिफ्ट समझ लूँगी

नेहा ने अपने आँसू पोंछते हुए कहा, कहना तो नेहा को बहुत कुछ था लेकिन कुछ भी कह कर कोई मतलब नहीं था, राघव इन बातों को कभी नहीं समझेगा ऐसा उसे लगता था।

राघव कुछ नहीं बोला और उसने शांति से गाड़ी घर की तरफ बढ़ा दी, घर पहुचने पर नेहा जल्दी से गाडी से उतरी और घर के अंदर चली गई वही राघव बस कार मे बैठा उसे जाते देखता रहा।

क्या मैंने उसे इतना हर्ट कर दिया? मैंने कभी नहीं सोचा था के मेरे एक्शंस उसे इतनी तकलीफ पहुचा देंगे और वो ऐसा कैसे सोच सकती है के मैं उसे एक गोल्ड डिगर मानता हु’ राघव ने गुस्से मे अपना हाथ गाड़ी के स्टिरिंग व्हील पे दे मार

‘मैं जानता हु मैंने कभी एक अच्छे पति की तरफ बिहेव नहीं किया है लेकिन मैंने कभी उसके बारे मे कुछ गलत भी नहीं सोचा, वही तो है तो जिसके आने से मेरा सारा परिवार खुश है, कितना खयाल रखती है सबका, मेरा भी, जबकि मैंने उसे कितना हर्ट किया है साफ कह दिया था उससे के मुझे उसकी कोई जरूरत नही फिर भी... शायद दादू सही थे नेहा के बारे मे’

एक तरफ राघव अपने खयालों मे गुम था वही नेहा को ऐसा लग रहा था के उसे राघव से वो सब बाते नहीं करनी चाहिए थी

‘हे भगवान क्या हो गया था मुझे? मैंने उनसे ये सब क्यू कह दिया? अब वो और ज्यादा गुस्सा होंगे, कुछ सोच नेहा कुछ सोच’ नेहा सोच मे गुम थी के तभी

“भाभी!!!!!” नेहा को विवेक और रिद्धि का आवाज आया जो उसे पुकार रहे थे और जब उसने पलट कर देता तो पाया के दोनों उसके रूम मे आ चुके थे

“हमने आपको बहुत मिस किया” रिद्धि और विवेक ने नेहा को दोनों साइड से हग करते हुए कहा

“और मैंने भी” उन दोनों की आवाज मे अब एक और आवाज मिल चुकी थी जो शेखर की थी जो कैजुअल कपड़ों मे था

नेहा- तुम्हारी मीटिंग थी ना गए नहीं तुम?

शेखर - हा वो जल्दी खतम हो गई तो लौट आया, बस अभी अभी लौटा हु और कपड़े बदल के आ गया

ये लोग बात कर ही रहे थे के इनको वहा किसी और के होने का भी एहसास हुआ और जब गेट पर नजर पड़ी तो देखा के राघव रूम के दरवाजे पे खड़ा था

विवेक- भाई हमारी भाभी का खयाल रखने का बहुत बहुत शुक्रिया अब अगर आपको ऑफिस जाना हो तो आप जाओ हम है अब यहां 😌

विवेक ने राघव को दूसरे शब्दों ने वहा से जाने के लिए बोल दिया था बोले तो उसे उसके ही रूम से निकाला जा रहा था और राघव विवेक को घूरने लगा लेकिन विवेक पे उसके कुछ असर नहीं हुआ

राघव- ओये चमन चिली! तुझे पता है न वो पहले मेरी बीवी है बाद मे तेरी भाभी

राघव की बात सुन कर नेहा उसे आखे बड़ी करके देखने लगी

शेखर- हा तो हम कहा कुछ कह रहे है भाई ओफकोर्स भाभी आप की ही है

शेखर ने राघव के मजे लेते हुए कहा लेकिन राघव ने कुछ रिस्पॉन्स नही किया और अंदर आकार बेड पर बैठ गया लेकिन मन ही मन वो खुश जरूर हुआ जब शेखर ने बोला के नेहा सिर्फ उसकी है

रिद्धि- भाई हम दिनभर भाभी से बाते करेंगे जैसे हर संडे को होता है आप बोर हो जाओगे

राघव- क्यू?? मैं क्यू बोर हो जाऊंगा मैं कोई 60 साल का नहीं हु समझी ना

विवेक- हा लेकिन बिहेव तो वैसा ही करते हो ना 60 साल वालों जैसा

राघव- विवेक, क्या बोला दोबारा बोलना

राघव मे विवेक को घूरते हुए पूछा

विवेक- क्या... यकीन ना हो तो भाभी से पूछ लो के आप 60 साल वाले अंकल जैसा बिहेव करते हो

विवेक ने मामला नेहा की ओर सरका दिया और नेहा बस राघव को देखने लगी जो अब नेहा के रिप्लाइ की राह देख रहा था

शेखर- हा हा बताओ भाभी

राघव- अब तो मुझे भी सुनना है बताओ

नेहा- वो... मैं... वो

नेहा कुछ बोलती इससे पहले ही रिद्धि बोल पड़ी

रिद्धि- ऑफफो क्या आप लोग भी भाभी से पूछ रहे वो तो भाई का ही साइड लेंगी ना छोड़ो ये बाते आज हमे बहुत कुछ करना है

शेखर- हा पहले बाते करेंगे फिर कोई मस्त फिल्म देखेंगे और फिर शाम मे कुछ बाहर से मंगवालेंगे खाने के लिए और रात.....

शेखर पूरा प्लान बता ही रहा था के राघव ने उसे बीच मे टोक दिया

राघव- उम्हू मूवी के बाद का प्लान रहने दो मैं और तुम्हारी भाभी बाहर जा रहे है

विवेक- क्यू??

विवेक ने राघव को घूरते हुए पूछा

राघव- मुझे अपनी बीवी को बाहर ले जाने के लिए तेरी पर्मिशन नहीं चाहिए

राघव ने भी विवेक को वैसे ही घूरते हुए कहा वही नेहा को राघव की बात सुनकर एक छोटा हार्ट अटैक ही आ गया

रिद्धि- ओहो भाई डेट पे लेजा रहे भाभी को 😉

राघव- यही रूम मे बैठो, बाते करो मैं अभी आता हु चेंज करके

राघव ने सबको इग्नोर किया और बाथरूम की ओर चला गया

शेखर- ये क्या हुआ अभी अभी

शेखर ने शॉक होकर पूछा

विवेक- लगता है मैं सपने मे हु

विवेक ने भी सेम टोन मे कहा

रिद्धि- भाभी भाई का सर वर टकराया है क्या कही ?

नेहा ने अपनी गर्दन ना मे हिला दी क्युकी राघव का ये बिहेवियर सबके लिए शॉकिंग था, वो कभी इनलोगों के साथ टाइम स्पेंड नही करता था, आज बड़ी मुद्दतों बाद राघव उनके साथ थोड़ा टाइम बितानेवाला था...

क्रमश:
 
अपडेट 11

“भाभी आपको पता है ये विवेक ने कॉलेज मे झगड़ा किया था”

रिद्धि ने अपना कंप्लेंट का पिटारा नेहा के सामने खोलना शुरू किया

“हा तो किया झगड़ा, भाभी आपको झगड़े का असल रीज़न नही पता है” विवेक ने अपने दात चबाते हुए थोड़े गुस्से से कहा

“क्या हुआ था क्यू हुआ झगड़ा?” शेखर ने पूछा

रिद्धि- आप क्या भाभी हो जो आपको बताए 😏

रिद्धि ने शेखर को चिढ़ाते हुए कहा जिसपर सब मुस्कुराये सिवाय एक के

विवेक- भाभी उसने रिद्धि को प्रपोज किया था अब आप ही बताओ मैं क्या चुप बैठ रहता दिए उसके दो क्या गलत किया

विवेक ने थोड़े गुस्से के कहा

“क्या!!”

अब रूम मे रिद्धि का एक ही भाई नही था ना दो और भी थे और जैसे ही उन्होंने ये सुना दोनों चीख पड़े, राघव जो बेड पर आधा लेटा हुआ था उठ के बैठ गया और उसके नेहा के बाजू मे बैठते ही नेहा भी सीधी बैठ गई वही शेखर विवेक के पास सरका

राघव- कॉलेज मे किसी ने रिद्धि को प्रपोज किया और तु अब बता रहा हमे🤨

राघव ने विवेक को डाटना शुरू किया

रिद्धि- ओ कम ऑन भाई इतनी भी बड़ी बात नहीं थी

रिद्धि ने बात संभालने की कोशिश की लेकिन तभी

शेखर- क्या बड़ी बात नहीं थी चुप तू बिल्कुल बहुत बड़ी बात थी ये के किसी ने तुमको प्रपोज करने की कोशिश की सही किया बे झगड़ के

राघव- और क्या, विवेक तू अभी के अभी मुझे उस लड़के का नाम और पता दे

अब राघव भी झगड़े मे कूद पड़ा था और उसे इन्वाल्व होता देख रिद्धि ने नेहा की ओर रुख किया

रिद्धि – भाभी बचाओ, प्लीज हेल्प!

और रिद्धि की बात सुन उसकी साइड नेहा ने ली

नेहा- अरे अरे रुको सुनो जरा, प्लीज ऐसे गुस्सा मत होइए मैं जानती हु के आप तीनों उसके भाई है यू आपका गुस्सा होना लाजमी है लेकिन ये बहुत कॉमन बात है हर लड़की को कभी न कभी ये फेस करना ही पड़ता है और वैसा ही रिद्धि के साथ भी हुआ, देखो विवेक मैं जानती हु के तुम ने झगड़ा इसीलिए किया क्युकी तुम नही चाहते के तुम्हारी बहन किसी गलत लड़के को चुने जो की सही है लेकिन ये सोचो के अगर तुम किसी को पसंद करते हो और उसका भाई ऐसे ही तुम्हें रोक दे तो क्या तुम उसे पसंद करना बंद कर दोगे?

नेहा के सवाल पर विवेक ने ना मे गर्दन हिला दी

नेहा - शेखर तुमने और श्वेता ने तो कॉलेज मे एकदूसरे को डेट करना शुरू किया था ना सोचो अगर उस टाइम श्वेता का भाई तुम्हें ऐसे ही पीट के रोक देता तो? क्या आज तुम्हारी और श्वेता की शादी होती? नाही ना

नेहा - मैं ये नही कह रही के किसी भी ऐरे गैरे को रिद्धि के पास आने दो लेकिन उसे उसके डिसीजन लेने दो वो इतनी तो समझदार है के उसके लिए कौन सही है कौन नही ये चुन सके और आप लोग तो हमेशा उसके साथ हो ही जो उसे बुरे लोगों से बचाए

नेहा के इस एक्सप्लीनेशन से सब लोगों को उसकी बात समझ आ गई थी

विवेक- आप सही हो भाभी लेट रिद्धि हँडल दिस लेकिन मैं इसका ध्यान तो जरूर रखूँगा के कोई ऐरा गैरा रिद्धि के पास न फटके

जिसपर शेखर ने भी हामी भारी वही राघव बस नेहा को देखता रहा

रिद्धि- भाभी आपको कितने लड़कों ने प्रपोज किया था शादी के पहले ?

रिद्धि ने सवाल पूछा जिससे नेहा तो थोड़ी अनकंफर्टेबल हो गई लेकिन इस सवाल के जवाब के लिए राघव उत्सुक हो गया

विवेक- बता दो भाभी हम लोग ही तो है यहा आप हमसे ये शेयर कर सकती है

शेखर- मेरे हिसाब से कम से कम 40 प्रपोज़ल मिले होंगे भाभी को

शेखर ने ये बात थोड़े कान्फिडन्स मे कही जिसे राघव ने एकदम नेहा को शॉक होकर देखा

नेहा - मैंने कभी गिना नही है

नेहा ने थोड़ा हसते हुए कहा

शेखर - कम ऑन भाभी कोई तो होगा जिसका प्रपोज़ल थोड़ा अलग होगा थोड़ा स्पेशल बताओ ना

नेहा- अरे बाबा कुछ स्पेशल कुछ अलग नही था लेकिन हा एक बंदा था या यू कहू के मेरा एक दोस्त था जिसने मुझे प्रपोज किया था, जो भी एक लड़की अपने बॉयफ्रेंड मे चाहती है न उसका परफेक्ट एग्जांपल था वो

नेहा ने अपने पुराने दिन याद करते हुए मुस्कुराकर कहा और उसकी वो मुस्कान देख कर राघव का दिल बैठा जा रहा था क्यू पता नहीं

‘यार ये कैसे मेरे सामने किसी और की तारीफ कर सकती है’ राघव मन ही मन बोला

(जब तू उसे भाव ही नहीं देगा तो वो तो दूसरों की तारीफ करेगी ही नूबड़े )

रिद्धि- फिर आप ने एक्सेप्ट किया था वो प्रपोज़ल?

और यहां राघव बाबू भगवान से प्रार्थना करने लगे (जिसको ये पसंद ही नहीं करता वो किसी को पसंद न करती हो इसकी प्रार्थना करे जा रहा अजीब आदमी)

नेहा- नही!

नेहा के ना कहतो ही राघव के जान मे जान आई

विवेक- क्यू? आप ही ने तो कहा की वो परफेक्ट था

नेहा- पर्फेक्शन हमेशा सबकुछ नही होता कभी कभी आप के दिल को उसकी चाहत होती है जो उसने कभी सोचा भी नही होता

नेहा की बात सुनकर राघव को लगा मानो नेहा ने वो शब्द उसके लिए कहे थे

नेहा- मैंने ना कभी उसे उस नजर से देखा ही नही वो हमेशा मेरा अच्छा दोस्त ही रहा हालांकि उसने ट्राय बहुत किया था और उसने क्या मैंने भी उसे एक चांस देने का ट्राय किया था पर मेरे दिल ने कभी वो रीलेशन माना ही नहीं और हम बस दोस्त ही रहे

नेहा की बात सुन राघव ने मुट्ठी कस ली जिसे शेखर ने देख लिया

शेखर- बस भाभी आगे का रहने दो लगता है यहा कुछ जल रहा है

शेखर ने राघव को छेड़ा और अब नेहा के ध्यान मे आया के आज तो राघव भी उनके साथ था नेहा को अपने ऊपर राघव की नजरे महसूस हो रही थी लेकिन वो उसकी तरफ नहीं देख रही थी

कुछ टाइम बाद सब मूवी देख रहे थे और जब मूवी खतम हुई शाम हो चुकी थी

राघव- रिद्धि तुम्हारी भाभी को रेडी कर दो आज, समझो आज उसका एक स्पेशल दिन है

राघव ने नेहा को देखते हुए रिद्धि से कहा लेकिन उसके चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नही थे

राघव- और हा आज तुम मे से कोई भी मेरी डेट डिस्टर्ब नही करेगा समझे ना

राघव ने विवेक और शेखर को घूरते हुए कहा वही नेहा के मन मे तो मानो तितलिया उड़ रही थी उसकी बात सुन के

शेखर- हा हा नही करेंगे डिस्टर्ब जाओ अपनी बीवी के साथ चल बे विवेक अपन फिफा खेलते है

जिसके बाद शेखर और विवेक वहा से चले गए

रिद्धि- भाभी लगता है आज भाई अपने सारे बिजी शेड्यूल की भरपाई करने वाले है

रिद्धि ने नेहा को छेड़ते हुए कहा जिसने उसे और नर्वस बना दिया

कुछ समय बाद राघव अपने फॉर्मल्स पहने तयार था और नेहा की राह देख रहा था, पिछले 15 मिनट से वो नेहा की राह देखते हुए खड़ा था और अगर आज नेहा का बर्थडे ना होता तो वो जरूर उसे डाट देता या ये प्लान कैन्सल कर देता

राघव- यार! ये रिद्धि उसे इतना कितना तयार कर रही है जो इतना समय लग रहा है

राघव का पेशंस अब खतम हो रहा था और वो हॉल मे इधर से उधर घूम रहा था नेहा की राह देख रहा था और जब राघव का पेशंस जवाब दे गया और वो उन्हे आवाज देने सीढ़ियों की तरफ मूडा तब उसकी नजरे वही जम गई

आज पहली बार उसने नेहा को साड़ी के अलावा किसी और आउटफिट मे देखा था, नेहा काले रंग के एक अनारकली ड्रेस मे बहुत ही खूबसूरत लग रही थी उसपर उसकी चाँद बालिया उसकी खूबसूरती मे चार चाँद लगा रही थी, नेहा ने बहुत हल्कासा मेकप किया था और माथे पर एक छोटी सी डायमंड की बिंदी लगाई थी जिससे उसका चाँद सा चेहरा और भी ज्यादा खिल रहा था

राघव की इन्टेन्स नजरों से बचने के लिए नेहा ने अपनी नजरे झुकाई और धीरे धीरे सीढ़ियों से नीचे आने लगी और राघव की नजरे उसके हर कदम का पीछा कर रही थी

नेहा राघव के सामने आकार खड़ी हो गई और अपने बालों की लट को अपने कान के पीछे करते हुए बोली

नेहा- चले..?

नेहा ने एकदम धीमे से पूछा जिसने राघव को वापिस होश मे लाया जिसे वो नेहा को देखते ही खो चुका था और राघव ने हा ने गर्दन हिलाई

विवेक- भाई हेव अ गुड डेट 😉

विवेक ने राघव को आँख मारते हुए कहा

रिद्धि- और आराम से आना भाई आज की शाम पूरी भाभी के नाम कर दो

नेहा- हम नहीं है तो तुम लोग प्लीज लड़ना मत मुझे पता है तुम लोग किसी फालतू बात पर लड़ लोगे और खाना टाइम से खा लेना और घर का खयाल रखना

नेहा ने जाते जाते रिद्धि और विवेक को समझाया

शेखर- अरे आप जाओ और आपकी डेट इन्जॉय करो भाभी हम संभाल लेंगे यहा नही लड़ेंगे

जिसके बाद राघव ने अपना दाया हाथ नेहा की तरफ आगे बढ़ाया और नेहा ने भी उसके हाथ मे अपना हाथ दे दिया और दोनों वहा से निकल गए

आज नेहा को कुछ अलग ही लग रहा था आज वो राघव का नया रूप देख रही थी बहुत सारी भावनाए उसके मन मे उमड़ रही थी

राघव ने जेंटलमैन की तरह नेहा के लिए पैसेंजर सीट का दरवाजा खोला और फिर खुद ड्राइवर सीट पर आकर बैठ गया और कार चल पड़ी

कार अपनी मंजिल की ओर बढ़ रही थी लेकिन कार मे पूरी शांति रही और मन ही मन अपने आप से काफी लड़ने के बाद नेहा ने इस शांति को भंग करने के लिए कहा

नेहा- हम कहा जा रहे है ?

नेहा ने बहुत ही धीमे से प्यार से पूछा था और उसकी टोन मे छुपे इमोशंस कोई भी समझ सकता था सिवाय उसके बाजू मे बैठे इंसान के

राघव- डिनर के लिए

राघव ने पूरा ध्यान रोड पर लगाते हुए कहा

नेहा- क्यू?

राघव ने कोई जवाब नहीं दिया

नेहा- आज मेरा बर्थडे है इसीलिए ना पर मैंने आपसे कहा था मुझे बर्थडे सेलीब्रैट करना नही पसंद

ये बात बोलते हुए नेहा का आवाज नॉर्मल से थोड़ा अलग था

राघव- नही, क्युकी मुझे तुम्हारे साथ जाना था इसीलिए

राघव ने सपाट शब्दों मे कहा, जाहीर था उसे गुस्सा आ रहा था और वो बस नेहा का बर्थडे मनाना चाहता था

अब पता नही इस डेट पर क्या होगा... कुछ बात बनेगी या कोई बड़ा झगड़ा होगा जिससे सब बिखर जाए

जानेंगे अगले अपडेट मे...

क्रमश:
 
अपडेट 12

राघव- नही क्युकी मुझे तुम्हारे साथ जाना था इसीलिए

राघव ने सपाट शब्दों मे कहा, जाहीर था उसे गुस्सा आ रहा था और वो बस नेहा का बर्थडे मनाना चाहता था।

नेहा- अगर मेरा आज बर्थडे ना होता तो आप मुझे कभी ऐसे बाहर नही ले जाते, आपको बस बुरा लग रहा था दया आ रही थी मुझपर

नेहा ने कहा और बोलते बोलते उसकी आवाज भारी होने लगी थी जिसे सुन कर राघव ने गाड़ी को एक साइड मे रोका और सपाट चेहरे के साथ नेहा को देखा और उसे देखते ही राघव के चेहरे के हावभाव बदनले लगे, नेहा को देख के साफ लग रहा था के वो अभी रो देगी

राघव - पहली बात तो ऐसा बिल्कुल नही है अगर आज तुम्हारा बर्थडे ना भी होता तो मेरे पास तुम्हें ऐसे बाहर लाने के और भी बहाने थे इसीलिए ये बात तुम अपने दिमाग से निकाल दो

राघव ने प्यार से कहा और नेहा ने उतरे चेहरे के साथ उसे कुछ टाइम तक देखा लेकिन कुछ बोली नहीं

राघव- तुम क्यू नहीं चाहती के सब तुम्हारा बर्थडे मनाए क्यू नही बताना चाहती किसी को

नेहा- ऐसा क्यू है के हम किसी के लिए हमारा प्यार हमारी सारी केयर बस उस इंसान के बर्थडे पर ही दिखते है भले ही उससे बाकी दिन बात भी ना करे, मैंने ऐसा करते बहुत लोगों को देखा है और बस यही मुझे पसंद नहीं है

राघव समझ रहा था के नेहा को कोई बात परेशान कर रही है लेकिन उसने अभी के लिए उस बात को इग्नोर किया और बोला

राघव- ठीक है तुम्हें नही पसंद सेलिब्रेट करना तो ना सही लेकिन अभी ऐसा मानो के हम बस एक डेट पर आए है मैं लेकर आया हु तुम्हें तो इस शाम को इन्जॉय करो

राघव ने कार वापिस शुरू करते हुए कहा वही नेहा उसे ऐसे देखने लगी मानो वो कोई एलियन हो क्युकी राघव ने उसके साथ कभी ऐसे प्यार से समझा के बात नहीं की थी, जल्द ही वो लोग एक 5 स्टार रेस्टोरेंट मे पहुचे और साथ ही रेस्टोरेंट के अंदर गए।

उनके रेस्टोरेंट मे एंटर होते ही मैनेजर खुद उन्हे रिसीव करने आया और उन्हे टेरेस मे बने सेक्शन मे ले गया जहा से पूरे शहर का व्यू मिलता था

आज का वो पूरा टेरेस राघव ने उन दोनों के लिए बुक किया हुआ था ताकि कोई उन्हे डिस्टर्ब ना करे

राघव ने नेहा के लिए एक खुर्ची खिची और उसे बैठने कहा और फिर उसके सामने आकार बैठ गया और जल्द ही एक वेटर आया और उनके खाने के ऑर्डर्स लेकर चला गया

नेहा ने देखा के राघव को इटालियन खाना बहुत पसंद है

उन दोनों के बीच एक अजीब खामोशी छाई थी कोई कुछ नहीं बोल रहा था और जल्द ही उनका खाना भी आ गया और उन्होंने चुप्पी साधे ही खाना खाया जिसके बाद राघव ने ही इस शांति को भंग करने का सोचा और बोलना शुरू किया

राघव- उम्म... तुम्हें पता है मैं ना तुम्हारे बारे मे कुछ नही जानता हु.. मतलब देखो ना इन पाँच महीनों मे मैं हमेशा इस शादी से भागता रहा हु

राघव बोल रहा था वही नेहा उसे देख भी नहीं रही थी, उसकी हिम्मत ही नहीं हो रही थी

राघव- लेकिन अब नही..

राघव ने नेहा को देखते हुए कहा और ये सुन के नेहा ने भी अपनी नजरे उठा कर राघव को देखा तो पाया के वो उसे ही देख रहा था

राघव- मैंने इस बारे मे बहुत सोचा है, हमारे बारे मे सोचा है और ये जाना है के भागने का कोई पॉइंट ही नही है

राघव की बाते अब नेहा को नर्वस कर रही थी

ये ऐसे क्यू कह रहे है ? कही ये मुझे डिवोर्स तो नहीं ना देना चाहते?’ नेहा के मन मे खयाल आया जिससे वो और भी ज्यादा नर्वस हो गई और उसकी आँखों मे पानी जमने लगा था

राघव- लेट्स गिव दिस रिलेशनशिप अ चांस हमे हमारे रिश्ते को सुधारने के लिए एक मौका देना चाहिए

राघव ने अचानक कहा

नेहा- और ऐसा क्या हुआ जिससे आप इस नतीजे पर पहुचे?

राघव की बात सुन अचानक नेहा के मुह से निकल गया

राघव- हूह?? क्या?

नेहा- मतलब आप तो इस शादी को एक्सेप्ट नही करना चाहते थे और ना ही ये मानना के आप शादी शुदा है और मैं इतनी भी गधी नहीं हु के मुझे ये समझ ना आए के आप ये शादी करना ही नहीं चाहते थे तो फिर अब ये सब क्यू?

नेहा की बात सुन अब राघव शॉक मे था

राघव- ये सब अचानक नहीं हुआ है नेहा मैंने इस बारे मे बहुत सोचा है और हा तुम सही हो मैं तयार नहीं था, उस समय मुझे थोड़ा टाइम चाहिए था तुम मुझे बताओ तुम क्या करती जब अचानक तुम्हें पता चलता के तुम्हारी किसी से शादी होने वाली है जिसे तुम जानती तक नहीं, हा मैंने दादू के डिसीजन के बाद शादी के लिए हा कही थी लेकिन मैं इसके बारे मे हमेशा कन्फ्यूज़ ही रहा

राघव- मुझे अपनी प्राइवसी और फ्रीडम बहुत प्यारी है नेहा और मैंने अपने दोस्तों को देखा है कैसे शादी के बाद उनकी लाइफ ही चेंज हो गई है उनकी लाइफ पार्टनर कैसे उन्हें कंट्रोल करती है और बस इसीलिए मैं शादी को लेकर शूअर नहीं था, कन्फ्यूज़ था लेकिन तुम उन सब से अलग हो ये मैं जान गया हु..

राघव आज पहली बार अपने दिल की बात नेहा से कर रहा था इससे पहले उन दोनों के बीच कभी ऐसी बाते नहीं हुई थी

नेहा- आपको क्या लगता है मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ? मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ है, मैं भी उस समय आपके बारे मे कुछ नही जानती थी लेकिन मैं कोशिश कर रही हु ना मैंने हमेशा हम दोनों के बीच चीजे बेहतर करने की कोशिश की है लेकिन आपने मुझे हमेशा इग्नोर किया, मैं ये तो जानती थी के मेरी शादी हो रही है लेकिन किससे ? आप एक बहुत अच्छे और बड़े परिवार के बेटे है एक सक्सेस्फूल बिजनेसमैन है लेकिन एक इंसान कैसे है मैंने कभी जाना ही नही, आपको याद है मैंने शादी से पहले आपसे कई बार मिलना चाहा था लेकिन आप हमेशा ही मुझे इग्नोर करते रहे

नेहा के कन्फेशन से राघव शॉक था उसे लगता था नेहा उसके बारे मे सब जानती है लेकिन यहा वो गलत था

नेहा- कुछ ही दिनों मे मेरी भी पूरी लाइफ चेंज हो गई थी मैं कंप्लेंट नही करती इसका ये मतलब तो नही के मुझे कुछ फरक ही ना पड़ा हो, मैंने आपको और दादाजी को इस बारे मे काफी बार बात करते सुना है लेकिन मैंने चुप रहना ही बेहतर समझा

नेहा- और रही बात प्राइवसी फ्रीडम और कंट्रोल की तो मैं आपकी प्राइवसी की बहुत रीस्पेक्ट करती हु और मुझे नही लगता के लाइफ पार्टनर्स हमेशा अपने बेटर हाफ ही लाइफ कंट्रोल करते है लेकिन कभी कभी आपको अपने पार्टनर को कुछ गलत करने से रोकना भी होता है चीजे दोनों तरफ से बैलेंस होनी चाहिए

नेहा- मैं आपको किसी बात के लिए टॉन्ट नहीं मार रही हु मैं बस हम दोनों के बीच कुछ बाते क्लियर कर रही हु जैसे आपने मुझे बताया के उस वक्त आपके दिमाग मे क्या था आपको कैसा लग रहा था वैसे ही मैं भी अपना पॉइंट ऑफ व्यू आपको बता रही थी क्युकी आप मेरे पति है और बस आप ही है जिससे मैं ये सब बाते कर सकती हु और मुझे खुशी है के आप ये सब बाते समझते है

नेहा ने एक स्माइल के साथ कहा, इस वक्त अपनी बात रखते हुए नेहा ऐसे लग रही थी जैसे वो किसी बिजनस प्रेजेंटेशन मे हो फूल कंसंट्रेशन के साथ

राघव- अपने बारे मे कुछ बताओ, मैं कुछ भी नही जानता हु

राघव ने दूसरी तरफ देखने हुए कहा

नेहा- मुझे लगता है मेरे साथ रह कर आप मेरे बारे मे ज्यादा अच्छे से जान पाएंगे न की सिर्फ सुन कर, इससे हमारा रिश्ता और मजबूत हो सकता है हम एकदूसरे को ज्यादा अच्छे से समझ पाएंगे

नेहा ने मुस्कुरा कर कहा

यार मुझे इतनी समझदार बीवी कैसे मिल गई ये कितनी ऑसम है यार और कितनी प्रैक्टिकल है, मिसेस नेहा देशपांडे तुम इस देश के वन ऑफ द बेस्ट बिजनेस टाइकून की पत्नी के रूप मे बेस्ट हो’ राघव ने मन ही मन सोच...

क्रमश:
 
अपडेट 13

मैं जानती हु ये इतना सब क्यू कर रहे है, ये सब दादाजी की वजह से है।

जब दादाजी ने कहा था के उन्हे इनसे बात करनी है तब वो हमारी तरफ ही देख रहे थे, अच्छा है के ये हम दोनों को एक मौका देनाचाहते है लेकिन जब आप खुद ही पूरे मन से किसी रिश्ते को अपनाने के लिए तयार ना हो तो कोशिश करके क्या फायदा? और ये सब बाते अगर ये खुद से करते तो थोड़ा अच्छा लगता लेकिन सिर्फ दादाजी के कहने से करना.
..

ऐसा नही है के मैं ये सब नही चाहती लेकिन तब जब ये पूरे मन से तयार को ना की तब जब किसी ने इनसे कहा है के मेरा खयाल रखें, वो मेरे लिए इतना सब सिर्फ मुझे अपनी जिम्मेदारी मान कर नही बल्कि प्यार से करते तो अच्छा लगता लेकिन मैं ये उम्मीद किससे लागए बैठी हु ग्रेट राघव देशपांडे से जिनकी डिक्शनरी मे प्यार नाम का शब्द ही नही है।

मैं चाहती हु के वो मुझे सच्चे दिल से अपनाये और फिर मेरे लिए ये सब करे प्यार के लिए ना की जिम्मेदारी निभाने के लिए, मैंने भले ही उनसे वो सब बाते बोली लेकिन जब तक वो शादी का सही मतलब नही समझते मुझे उनसे कोई उम्मीद नहीं है अगर वो ये सब सिर्फ अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए कर रहे है तो मैं भी एक पत्नी होने के नाते अपनी सारी जिम्मेदारिया निभाऊँगी लेकिन अगर वो इससे आगे नही बढ़ते है तो मेरी ओर से भी कोई पहल नहीं होने वाली, मैंने अपनी तरफ से बहुत कोशिश कर ली इस रिश्ते को सवारने की लेकिन उन्होंने हर बार मुझे रोक दिया अब उन्हे ये बात समझनी होगी, अब ऐटिटूड दिखाने की बारी मेरी है उन्हे समझना होगा के मैं भी एक इंसान हु और मुझे भी तकलीफ होती है’


डिनर के बाद से ही नेहा का दिमाग खयालों मे उलझा हुआ था वही राघव के दिमाग मे भी यही सब बाते घूम रही थी।

वो लोग घर लौट आए थे, बस हल्की फुलकी बात चित और एकदूसरे को निहारने के अलावा गाड़ी मे शांति ही छाई हुई थी उसे क्या बात करे समझ नही आता था और वो पहल नही करने वाली थी।

इस वक्त राघव अपने बेड पर बैठा लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था वही नेहा कपड़े बदलने गई हुई थी और जब नेहा रूम मे आई तो उसने देखा के राघव काम मे खोया हुआ था इतना के उसे नेहा के वहा होने का ध्यान भी नही था, नेहा कुछ टाइम बाद बेड की ओर गई तो राघव का ध्यान उसकी तरफ गया, उसने लैपटॉप से नजरे हटा कर नेहा को देखा और बोला

राघव- तुम यहा बेड पर सो जाओ मैं सोफ़े पर सो जाऊंगा

राघव की बात सुन नेहा ने चौक के उसे देखा, ये शब्द सुनते ही नेहा के दिल मे मानो किसी ने सुई चुभो दी हो ऐसे उसे लग रहा था और राघव बेड से उठ ही रहा था के नेहा ने उसे रोक दिया

नेहा- नहीं.. आप सो जाइए यहा, सोफ़े पर आप अनकंफर्टेबल होंगे मेरे लिए सोफ़ा काफी है

नेहा ने बगैर राघव को देखे बेड से तकिया लेते हुए कहा और अलमारी से अपने लिएएक एक्स्ट्रा राजाई ली और सोफ़े की ओर चली गई, तकलीफ तो उसे बहुत हो रही थी राघव के बर्ताव से मतलब ये आदमी कुछ समय पहले इस रिश्ते को चांस देने की बाते कर रहा था और अब ये नेहा के साथ एक बेड भी नही शेयर कर रहा था

राघव- नहीं कोई जरूरत नही है मैं सो जाऊंगा सोफ़े पे तुम बेड पे सो जाओ

राघव ने सोफ़े की तरफ आते हुए कहा लेकिन तब तक नेहा सोफ़े पे फिट हो चुकी थी

नेहा- मैं ठीक हु यहा और वैसे भी बेड आपका है तो आप ही सोइए वहा, गुड नाइट!

नेहा ने थोड़ा हार्शली कहा जो राघव को पसंद नही आया

राघव- मैं कुछ कह रहा हु ना उठो वहा से

राघव ने कडक शब्दों मे कहा लेकिन नेहा ने कोई जवाब नहीं दिया और आखे बंद करके सो गई जिससे राघव को और थोड़ा गुस्सा आ गया

‘अब इसको क्या हो गया यार अभी डिनर के वक्त तक तो सब ठीक था फिर अचानक इसका मूड कैसे बिगड़ा और इतना ऐटिटूड?? कहीं मैंने इसे समझने मे गलती तो नहीं कि ना?’

‘कही ये बेड और सोफ़े वाली बात से तो नहीं? मैंने तो ऐसा इसीलिए कहा के हम कभी सेम बेड पर नहीं सोये है मैं रोज लेट आता था और जब उसे सोते हुए देखता था इसीलिए तब गेस्ट रूम मे सो जाया करता था जिसके बारे मे कोई नहीं जानता क्युकी लेट आके सुबह जल्दी निकल जाओ तो ये बात कीसे पता चलनी थी और कल जब मैं रूम मे सोया था तब मैडम यहा सोने भी नहीं आई उन्होंने सोने के लिए बालकनी को चुना मुझे लगा ये मेरे साथ बेड शेयर करने मे कंफर्टेबल नहीं होगी लेकिन यहा तो मजरा ही अलग है इनके लिए सोचो और इनकी बाते भी सुनो मैं ही गधा हु जो दादू की बात मान के इसे बाहर लेके गया अब नहीं करने वाला मैं कुछ’


ये खयाल तेजी से राघव के दिमाग मे दौड़ने लगे जिससे उसका गुस्सा और भी बढ़ गया और वो तेजी से अपने बेड पर आया वही दूसरी तरफ

‘जब ये मेरे साथ बेड भी शेयर नहीं कर सकते तो फिर इन्होंने इस रीलेशन को चांस देने की बात क्यू कही थी? अब तो मैं कन्फर्म हु के इन्हे वो सब करने दादाजी ने कहा होगा या फिर इन्हे अपने बिहेवियर पर बुरा फ़ील हो रहा होगा के आज मेरा बर्थडे है और किसी ने कुछ नही किया, बस इसीलिए मुझे मेरा बर्थडे पसंद नहीं है। कल को अगर इन्होंने कहा के हमने तो कभी बेड भी शेयर नहीं किया तो इसमे भी कोई चौकने वाली बात नहीं होगी और शायद ये सही भी है क्युकी मैंने कभी उन्हे बेड पर मेरे बाजू मे महसूस ही नहीं किया’

‘मैं ही सबसे बड़ी गधी हु जो मैंने इनकी बातों पे यकीन कर लिया’


सोचते सोचे नेहा की आँखों से आँसू की एक बूंद गिर गई जिसे उसने पोंछ लिया और रूम की खिड़की बंद कर के सो गई

अगली सुबह...

नेहा की आँख आज सुबह जल्दी खुल गई और वो अपनी आंखे मलते हुए सोफ़े पे उठ बैठी, उसने घड़ी की ओर देखा तो इस वक्त सुबह के 6 बज रहे थे और उसकी नजरे बेड की ओर गई तो वो थोड़ा चौकी, राघव अभी घर मे ही था और सो रहा था।

नेहा ने उतरे चेहरे के साथ राघव की ओर देखा और उसकी आँखों के सामने कल रात वाली बात आ गई जिसने उसे उदास कर दिया था नेहा ने एक लंबी सास छोड़ी और उठ कर बाथरूम की ओर चली गई

नहा कर आने के बाद नेहा जब अपने बाल बना थी थी तब उसे आइने मे से राघव को देखा जो सोते वक्त किसी बच्चे जैसे मासूम लग रहा था

नेहा- सोते टाइम चेहरा देखो कितना शांत लगता है पर उठते ही पता नाही कौनसे राक्षस की आत्मा आ जाती है इनमे

नेहा ने खुद से ही धीमी आवाज मे कहा

“रावण” नेहा धीमे से राघव पर अपनी नजरे टिकाए बोली और फिर रेडी होकर रूम से बाहर चली गई

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नेहा- मा छोड़िए आप मैं कर लूँगी ये

जानकी- अरे नही बेटा रहने दो मैं कर रही हु ना

नेहा- तो मुझे बताइए मैं क्या करू?

जानकी- राघव घर मे है या चला गया?

नेहा - यही है घर मे सो रहे है

मीनाक्षी- चलो एक चेंज तो आया देखा जीजी काफी दिनों बाद आज वो इस वक्त घर मे है

मीनाक्षी ने किचन मे आते हुए नेहा की बात सुन कर कहा

जानकी- मुझे तो लगता है ना मीनाक्षी नेहा ने ही समझाया होगा उसे

जिसपर नेहा ने एक झूठी मुस्कान दे दी

मीनाक्षी- अच्छा है ना जीजी और मैंने तो सुना है कल कोई डेट पर भी गया था हैना नेहा

मीनाक्षी ने नेहा को छेड़ते हुए कहा जिसपर नेहा कुछ नहीं बोली

नेहा- वो... चाची

जानकी- उसे छेडना बंद करो मीनक्षी देखो तो कैसे शर्म से लाल हुए जा रही है वो लेकिन सच कहू नेहा मैं तुम दोनों के लिए बहुत खुश हु के अब तुम एकदूसरे को समझने लगे हो

‘हम एकदूसरे को कभी नहीं समझ सकते मा और कल की डेट तो बस उनका गिल्ट कम करने के लिए थी’ नेहा ने मन ही मन कहा

जानकी - नेहा एक काम करो तुम ना राघव के लिए लेमन टी बना दो वो जागने वाला होगा और जिम मे जाने के पहले उसे चाय चाहिए होगी

जानकी की बात सुन नेहा ने हा मे गर्दन हिला दी और वो सब अपने अपने काम मे बिजी हो गए

लेमन टी बनाने के बाद वो अपने रूम की ओर जाने लगी और जब वो रूम मे घुसी तो राघव उसे रूम मे कही नहीं दिखा तभी उसे बाथरूम मे पानी गिरने का आवाज आया तो उसने चाय बेड के बाजू वाले टेबल पर रख दी तभी बाथरूम का दरवाजा खुलने का आवाज आया

नेहा पीछे पलटी तब राघव बाथरूम मे बाहर आ रहा था, उन दोनों की नजरे एक सेकंद के लिए टकराई

नेहा- वो.. वो आपकी लेमन टी

नेहा ने नजरे फेरते हुए कहा और रूम से बाहर चली गई वही राघव बस उसे जाते हुए सुने चेहरे से देखता रहा

पता नहीं क्या होगा इन दोनों का बात बनेगी या.....

क्रमश:
 
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