Update..No..31 (मेगा अपडेट )
मैं अभी गार्डन में बैठा हुआ,
िमरब से मीटिंग के बारे में सोंच रहा था ki...Tabhi
मीरा की आवाज़ आयी...
मीरा - क्या सोंच रहे हो अकेले इतनी टेंशन में...??
मैं - आज की मीटिंग के बारे में...
मीरा - दीदी की बातों से कुछ समझ hi नहीं आ रहा था,
आप साफ़ साफ़ बताओ न की आखिर मैं प्रॉब्लम क्या है...??
मैं एक लम्बी अहह भरते हुए बोलना शुरू किया....
कबीर और रश्मि की टेंशन का मुख्या कारन िमरब इंटरनेशनल कंपनी थी...
जिस पर अब दब. बॉस का राज़ चलता था..
क्यूंकि दब. बॉस ने पैसों के डैम पर अपने अंडर काम करने वाले सख्स को कंपनी का चेयरमैन ेलेक्ट करवा दिया...
जिसका पता रश्मि दी को आज मीटिंग के दौरान, चेयरमैन से मिलने के बाद हुआ...
बस इतना hi कारन नहीं था, टेंशन तो मर. काइल ने पैदा की,
जो रिसर्च उसने कबीर को Hand-over की थी,
Mr.Kyle ने K.M. ग्रुप के साथ बहुत बड़ी जालसाज़ी ki...wo भी सिर्फ चाँद पैसों के लिए..
उसने कुछ सैंपल बचा लिए थे ब्लैक मार्किट में बेचकर और पैसा बनाने के लिए....
मर. काइल ने सैंपल िमरब के चेयरमैन को Muh-mange दाम में बेंच दिए...
जिसका नतीजा ये हुआ की...
घूम - फिरकर वो सैंपल फिर से Db.Boss के हाथ आ गए,
वैसे भी उसके पास एक पहले से hi था,
जिसका डर काम नहीं था.. ..जो की अब और बढ़ गया...
परेशानी यही ख़त्म नहीं हुयी...
जो कभी नहीं होना चाहिए था वो हुआ...
परेशानी का सबसे बड़ा कारन था टूरिस्ट का गायब होना,
वो दरअसल किसी एक्सीडेंट के चलते नहीं गायब हो रहे थे,
उन्हें किडनैप किया जा रहा था Db.Boss के कहने पर...
सबसे छिपकर उनपर जेनेटिक म्युटेशन का एक्सपेरिमेंट किया जा रहा था,
जिसका अंजाम बहुत बुरा होने वाला था....??
िमरब का K.M. ग्रुप को मीटिंग में बुलाने का मैं उद्देश्य K.M ग्रुप की रिसर्च को खरीदना था...
जो की कबीर ने Mr.Kyle से खरीदी थी....
रश्मि ने िमरब का ये ऑफर ठुकरा कर चली आयी...
जिसके कारन बदले में चेयरमैन ने उनका बुसिनेस्स और रिसर्च सेंटर बर्बाद कर देने की धमकी भी दी...??
डर धमकी का नहीं था,
और न hi दूसरे वेपन्स का था क्युकी अंतितोड़े तो हमारे पास थे...
डर तो रिसर्च से था जो ह्यूमन पर किया जा रहा था इसका परिणाम बहुत भयानक होने वाला था...??
इतनी सब परेशानी बताने के बाद मई उठकर जाने लगा अंदर...
तो मीरा ने बोलै...
मीरा - ाजी सुनो न..
कहा चल diye...Baithiye तो सही..
कुछ बात करनी है आपसे..??
कबीर - अरे महारानी साहिबा अब हमने क्या गलती कर दी...??
मीरा - बचे बहुत शरारती हो गए है..
अब हमें संभल जाना चाहिए...
मैं - क्यों ऐसा क्या हो गया.. जो संभल जाने की बात करती हो..
फिर मीरा ने मुझे कदम कदम वाली बात बताई....
कबीर - मेरा तो हँसते हँसते पेट गुल गया..
मैं बोलै, जान तुम भी न बेवजह नाराज़ होती हो..
अब बचे समझदार हो गए है वो सब जानते समझते हैं..
अब इसका मतलब ये तो नहीं की हम प्यार करना hi छोड़ दे..
हम तो आपके आशिक़ hai..Jaan दे देंगे लेकिन प्यार करना नहीं भूल सकते....
वो तो बस तुमसे मस्ती कर रहे है अगर तुम ऐसे hi भागोजी तो वो और सतायेंगे...
एक दिन वो भी बड़े होंगे उनकी भी शादी होगी तब तुम छेड़ना ....
मीरा - धत्त तेरी की,
आप तो बच्चों से भी ज्यादा बचे हो...
वैसे सच कहा हमारे बचे बड़े हो रहे है...
नेक्स्ट 2 डेज बाद दोनों का बर्थडे भी है....
ख़ुशी के पल कितनी जल्दी बीत जाता है पता hi नहीं चलता...
मुझे तो आज भी उनकी बदमाशियां शरारतें याद है..
कितनी नाजों से पला है उन्हें...
कितने बुरे और अच्छे दौर से गुज़रे hai..hum सब..
कबीर - है मुझे भी सब याद hai.....Har एक pal...Har वो Lamha...achha हो या बुरा...
शार्ट फ्लैशबैक...
बात तब की जब हयान 8 साल का हुआ तब अन्य 8.5 साल की थी..
अब दोनों अच्छे खासे समझने की आगे के हो गए थे..
लेकिन शरारते कूट कूट कर भड़ी पड़ी थी..
कुछ chhoti-Moti अनहोनी तो हयान के साथ अक्सर होती रहती थी..
हयान को काले साये दीखते the..Jo रात में उसे सोने नहीं देते the..Jabtak की अन्य को साथ न लिटाया जाये,
दोनों को एक दूसरे का हाथ पकड़ कर सुलाने से हयान की साड़ी प्रॉब्लम ख़त्म हो जाती थी..
हयान को अकेले में छोड़ना मतलब किसी बुरे समय आने की आहात होती थी...
लेकिन हमने जान बूझकर एक गलती करदी..
हालाँकि ज्यादा कुछ तो नहीं हुआ, लेकिन जितना हुआ काफी था...
एक रात यूँही हयान खेलते - खेलते दूसरे कमरे में सो गया,
सबने उसे वहीँ सोने दिया की अब तो सब ठीक है बड़ा भी हो गया hai..samajhkar
हयान की नींद 11.30 बजे उसके पालतू डॉग के भौकने से खुली..
जो की बिस्तर के पास विंडो की तरफ देखकर भौंक रहा था...
हयान ने उठकर पेट्स को अपनी गॉड में ले लिया और शांत करने laga...puchkarne लगा..
डॉग की भौकने की आवाज़ सुनकर मीरा भी हयान के दरवाज़े के पास आयी तो उसे हयान पेट को प्यार से सहलाता हुआ दिखा...
मसेरा भी उसे प्यार से देखने lagi...Tabhi
तभी अचानक लाइट चली गयी और कमरे में अँधेरा फ़ैल गया...
मीरा कमरे में जाने को हुयी थी की हयान की आँखे अँधेरे में चमकने लगी.. आँखों से लाल रौशनी निकल रही थी..
हलकी सी रौशनी में हयान का चेहरा बहुत hi भयानक और डरावना नज़र आ रहा था...
अब मीरा की हिम्मत नहीं हो रही थी अंदर कमरे में कदम रखने की...
दरी सहमी आँखे फाड़े बीएस अंदर की ओर निहार रही थी...
डर तब और बढ़ गया जब हयान ने डॉग की गर्दन को अपने दांतो में दबा लिया..
डॉग की बस की की की की आवाज़ निकल रही थी और कुछ देर में उसने डैम तोड़ दिया...
डॉग की बॉडी बिलकुल सूख चुकी थी...
ऐसा लग रहा था उसका सारा खून चूस लिया गया हो..
हयान ने बॉडी को विंडो से बहार फेंक दिया...
ये सब नज़ारा देखकर मीरा वही गिरकर बेहोश हो गयी...
इधर कबीर,
मीरा के वापस आने में देर लगते देखा तो वो भी उठकर चल दिया...
रूम के बहार उसे मीरा बेहोश मिली
और हयान बीएड पर उल्टा लेता हुआ पड़ा था....
कबीर मीरा को उठाकर दूसरे कमरे में ले gaya...aur पानी के छींटे मरकर होश में लाया...
मीरा उठते hi डर के मरे कबीर के सीने लग गयी...
जब कुछ देर बाद खुद को सम्हाल लिया तो.. कबीर को पूरी बात batayi...ki क्या हुआ था अभी कुछ देर पहले..
जिसे सुनकर कबीर को भी तगड़ा झटका लगा...
कबीर और मीरा तुरंत उठकर हयान के कमरे में भागे..
हयान के मुँह में खून लगा था..
मीरा ने कपडे से मुँह साफ़ किया.
और चेहरा धुला..
लेकिन हयान बेहोश hi रहा..
पानी पड़ने पर भी आँखें नहीं खोली..
कबीर ने हयान को उठाकर अन्य के पास लिटा दिया...
और खुद भी दोनों उनके अगल बगल लेट गए...
ये सोंचकर की अब गुरूजी hi इसका उपाय बताएँगे....
अगली सुबह सब नार्मल था,
जैसा डेली रूटीन में होता था..
बस हयान बारे बार अपने पेट्स के बारे में पूछ रहा था..
जिसके जवाब में कबीर ने ये कहा की रात में दूर खुला रहा गया और वो भाग गया..
हयान को कुछ भी याद नहीं था रात को हुयी घटना के बारे में...
गुरूजी से मिलने पर इसका उपाय पूछा,
सदनं जी ने सोनो की हेल्प की....???
फ्लैशबैक एन्ड
मीरा कबीर को उसकी सोंच से बहार निकलती है...
मीरा - क्या हुआ कहा खोये हुए हो इतनी सेर से.
आज बारे बार कही न कही गम हो जाते हो,
सब ठीक तो है न..
मैं - है सब ठीक है..
अब मुझे गुरु जी से मिलना चाहिए एक बार फिर...
वही हमारी परेशानियों को दूर करेंगे...
सभी परेशानियों को किनारे रख कबीर को सबसे पहले बेटे हयान की प्रॉब्लम का हल खोजना सही लगा...
कबीर गाड़ी लेकर निकल गया आदिगुरु महाराज से मिलने...
कबीर दुपहर को hi गुरूजी के आश्रम पहुंचा और हयान के साथ बीती सभी बातों से अवगत कराया
कबीर - क्या मेरी भेंट आदिगुरु महाराज से हो सकती है...??
सदनं जी - महाशिवरात्रि के दो दिन बाद hi गुरुवार कही चले गए थे..
और अब तक उनकी कोई खबर नहीं...
किन्तु उन्होंने कहा था की उचित समय आने पर वो तुम्हारी मदद करने आएंगे..
किन्तु मुझे कुछ जरुरी बाटे बता गए है..
सायद अब वक्त आ गया है हयान की सीख्शा और ज्ञान का...
अब उसकी शक्तियां जागृत हो रही तभी ये अनहोनी हो रही है...??
गुरुवार के कथन अनुसार अब मुझे हयान का मार्गदर्शन करना होगा गुरुवार के आने तक्क...
कबीर - जैसा आपको उचित लगे...!!
सदनं जी, कबीर के साथ आकर उसके hi गांव आ गए...
कबीर के घर के अंदर hi गार्डन के पास वाला कमरा गुरूजी को दे दिया गया...
सदनं जी
हयान और अन्य को धर्म, नीति, शाश्त्र और जीवन का मार्गदर्शन करने लगे....
आज कबीर और मीरा का घर रौशनी और फूलों से जगमगा रहा था....
घर की सजावट देखते बन रही थी...
ऐसा लग रहा था की जैसे बरात आने वाली हो.....????
आज के लिए बस इतना hi...
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लाइक्स, कमेंट, वोट और रेविएवस का रखना Dhyan.....Aapka दोस्त हयान !!
थैंक्स गाइस !!
फॉर योर फैंटास्टिक सपोर्ट !!