Erotica मोहे रंग दे - Page 47 - SexBaba
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Erotica मोहे रंग दे

हाँ दो ने दो बातें और बतायी जो बात हम लोग कर रहे थे वो डार्क वेब के थ्रू, और जो मैं इमेज उनकी देख रही थी वो होलोग्राफिक इमेज थी जो जिस जगह से ट्रांसमिट हो रही थी , दी जहाँ थीं उसे ८,४४८ किलोमीटर दूर थी। जिस से कोई उनकी लोकेशन नहीं ट्रेस कर सकता।

मैंने उन्हें बताया की कल मैं अपने मायके जा रही हूँ , दो दिन बाद होली है , तो दस दिन तक उनके बहनोई वहीँ रहेंगे और उनकी साली सलहज उनकी रगड़ाई करेंगी , बीच में एक दिन टाइम निकाल के मैं बनारस भी जाउंगी और दूबे भाभी से उनकी सलामती भी बता दूंगी।

तय हुआ की हम जब इनकी पोस्टिंग पर पहुँच जाएँ तो उसके ठीक एक हफ्ते बाद, दी मुझे मेसेज देंगीं, और एक बार फिर सिक्योर बात चीत

लेकिन चलने के पहले उन्होंने मुझे मेरे मोबाइल फोन्स के बारे में भी ताकीद कर दी,...

और मैं ध्यान से सुन रही थी लेकिन उसके पहले उन्होंने ये जरूर बता दिया की आज कल कहीं जाओ, नेट पर कुछ खोलो, मोबाईल नंबर पहले मांगता है. एकाध बार तो होटल में, मॉल में घुसने से मना कर देते हैं जबतक मोबाइल नंबर न बताओ।

" उसी का तो रास्ता बता रही हूँ , तीन मोबाइल फोन रखो " वो हंस के बोलीं

" दो तो है मेरे पास और दोनों में डबल सिम " मैंने चहक कर बताया।

" एक वो पुराने जमाने वाला नान स्मार्ट , नान स्मार्ट ही असल में स्मार्ट है , जिसमें इंटरेनट का कोई जुगाड़ न हो, बस ब्रिक वाला गेम, टार्च और मेसेज भी १०० से ज्यादा नहीं, ... बस वही लेकर घर से बाहर निकलो, और कोई पूछे तो मोबाइल का नंबर तुरंत बता दो , झगड़ा करने से फायदा क्या लेकिन कम से कम दो नंबर उसके गलत बताओ, वो फोन करके चेक तो करता नहीं है, और घर से बाहर इंटरनेट का इस्तेमाल भी न करो सिम्पल। नेट पर भी यही फोन। "

बात उनकी एकदम सही थी लेकिन वो फोन मिलेगा कहाँ, फिर मुझे याद आया गाँव पर पड़ा था, कित्ता पुराना फिर मैंने उसे छुटकी को दे दिया था उसने अपनी गुड़िया को।

और दूसरा फोन इंटरनेट वाला ,... मैंने पूछ लिया।
 
और दूसरा फोन इंटरनेट वाला ,... मैंने पूछ लिया।

"उसका इस्तेमाल घर में करो न , बैंकिंग का काम या नेट का कोई और काम , बाकी के लिए तो तेरे पास आई पैड है ही, पर उसमें भी बायोमेट्रिक सिक्योरिटी और फोन की तरह मेल आईडी भी ,... जो कॉमन वाली मेल आई डी हो,... हाँ लेकिन मेरे बहनोई से बात करने के लिए उसका इस्तेमाल कभी मत करो , क्योंकि तेरे उस फोन के हैक होने की पूरी संभावना है लेकिन एक फोन होना चाहिए जिसे हैकर्स हैक कर सके, मेसेज वाले मेसेज भेज सकें वरना सब सोचेंगे न की आज के ज़माने की लड़की और मोबाइल नहीं , व्हाटसअप नहीं, तो तेरी ननदों का जो ग्रुप है , सहेलियों का ग्रुप है, उसके लिए तो एक फोन चाहिए अपनी ननदों की अच्छी अच्छी फोटो अपनी भाभियों और माँ से शेयर करोगी तो उसके लिए फोन चाहिए न , हाँ इसके लिए तुम वो तीन कैमरे वाला फोन इस्तेमाल करो. और कभी बाहर ले भी जाना हो तो उसे बंद कर के बैटरी निकाल के, पर्स में। "

रीत दी ने अच्छी तरह समझा दिया , लेकिन साथ में एक वार्निंग भी दे दी ,

" और उस फोन से मेरे बहनोई को तो फोन करना मत और कोशिश करो की जब कभी वो आफिस वाली बात कर रहे हों, या कोई और तुम ही उनसे कोई बात कर रही हो , तो वो फोन कमरे के बाहर हो, या अलमारी में बंद हो "

लेकिन मान लीजिये कभी मुझे आपके नालायक बहनोई से बात करनी ही पड़े ,... " खिलखिलाते हुए मैंने मन की बात पूछ ली.

" अरे तू भी न , इसलिए तो तीसरा फोन बोला था न, लेकिन वो इमरजेंसी फोन की तरह बस आठ दस लोग, और घर वाले रिश्तेदार दोस्त सहेलियां एकदम नहीं क्योंकि फिर वो नंबर वो बांटने लगेंगे और फिर वो ट्र कॉलर पर आ जाएगा। और उस फोन में कोई जीवाणु कीटाणु घस गए तो वहां से तेरे ननद के यार के फोन में ,... "

रीत दी अपने असली रंग में आ रही थीं, मैंने भी उसी तरह जवाब दिया।

दी, मेरी ननद के यारों की कोई गिनती नहीं, उसने खुद कबूला है कुल चौदह भौरें उसके पीछे मंडरा रहे हैं सात का तो व्हाट्सअप मेसेज भी मुझे फारवर्ड भेज चुकी है, हाँ बात ये सही आपके बहनोई ने उसकी झिल्ली फाड़ी है इसलिए यार नंबर वन तो वही हुए न। और फिर उसके बाद तो मेरे आपके , हमारे भाई सब बनारस वाले उसका रस लेंगे चढ़ेंगे उसके ऊपर,... तो वो भी तो उसके यार ही होंगे , मेरा पक्का इरादा है उसकी सेंचुरी बनवाने का। "

" एकदम " ननदों के बारे में मेरी और रीत दी की राय में पूरी तरह से इत्तफाक था , और बल्कि दी बोलीं , " यार ननद के तो आठ दस यार एक साथ, जब तक गैंग बैंग न हो तो क्या मज़ा"

लग रहा था वो जाने वाली हैं फिर रुक गयीं, बोली उस अनारकली ऑफ़ आजमगढ़ का नंबर तो बता ज़रा,... और वो तो मुझे रटा पड़ा था, पल भर के लिए वो अदृश्य हुईं और लौट के बोलीं

स्साली मस्त माल है , एकदम कच्ची अमिया कुतरने लायक कचर कचर,...

दी आपने कैसे देख लिया , मैं चकित हो गयी.

वो हंसने लगी, बोलीं, वही तो तू अकेले ननद का मजा लेगी, फिर सीरियस हो के बोलीं ,
 
बात आपकी सोलहो आना सही है, लेकिन ये थोड़ा संयोग भी है.

आपका आशय शायद कहानी में मेरे नाम से , कोमल से और गुड्डी से है ,लेकिन इसी फोरम में मेरी कई कहानियां ऐसी हैं, जिनमे ये दोनों ही पात्र नहीं है, पर वो पूरी हो चुकी हैं, जैसे

१. मजा पहली होली का ससुराल में

२. लला फिर अइयो खेलन होरी,... होली है थ्रेड में ,

३ होली में फट गयी, होली है थ्रेड में , ... मेरी पहली एरोटिक कहानी

४. होली के रंग - ( अभी पाज मोड पर है )

५. Its a Hard rain- English story

मैं ज्यादातर कहानियां फर्स्ट परसन में ही लिखती हूँ, लेकिन अपने नाम का इस्तेमाल पहली बार मैंने जोरू का गुलाम में किया, वो भी आफ्टरथाट के तौर पर, ये मेरी कहानी दो बार शुरू होकर रुक गयी , पहली बार अंग्रेजी में बल्कि रोमन लिपि में, फिर पिछले फोरम में मेरी फागुन के दिन चार, एक बहुत लम्बी कहानी बल्कि उपन्यास के ख़तम होने के बाद जोरू का गुलाम मैंने फिर से लिखा देवनागरी लिपि में और उस बार कोमल का नाम किसी भी कहानी के पात्र के रूप में पहली बार आया, ...लेकिन जब जोरू का गुलाम समाप्ति के कगार पर थी , वो फोरम बंद हो गया, और अबकी मैंने फिर यहाँ , ... लेकिन कोमल नाम का पूरा इस्तेमाल जहां उस चरित्र की भाषा एक पर्सोना साफ़ साफ उभरा है वो यही कहानी है। पहली बार।

रही बात गुड्डी की , तो पहली बार वो आयी मेरी पहली लम्बी कहानी, ' ननद की ट्रेनिंग में ' क्योंकि कहानी एक किशोरी ननद पर ही बेस्ड थी, उस के चरित्र को मैंने सोच के उकेरा। उसके बाद दो और लम्बी कहानियों में फागुन के दिन चार , ( जहाँ उस का रोल एकदम अलग था और ननद भाभी का मामला बहुत सीमित था, क्योंइक वो एक एरोटिक थ्रिलर बन गयी थी, मार धाड़ से भरपूर), जोरू का गुलाम और फिर इस कहानी में ,

यह एक संयोग है की इस समय इस फोरम पर चल रही तीनों कहानियों में किशोरी कन्या का नाम वही है , पर सब की पृष्ठभूमि, मिज़ाज और कथावस्तु एकदम अलग है,

मुझे विशवास है आप इस सारी कहानियों का रसास्वादन भी करेंगी और अपने मत से अवगत भी कराएंगी।
 
Himmat hai meri Reet ko Bhulne ki, ...main kya jisne bhi phagun ke din chaar padha hai use nahi bhool sakata. aur aapne dekha hoga ki pichle kayi episodes men Reet kudate fandte is kahani men bhi taak jhaank kar hi rahi hai,... last ke kuch parts men khaas taur se ,... lekin maine kaha na har kahani alag hai , balki Phagun ke din chaaar to ek Upnayaas sa hi tha size men bhi , characters men bhi aur vo meri akeli kahani thi jahan kayi readers ne accept kiya ki unki ankhe nam ho gayin, aur last ke scene men to ekdam ...
 
एक ऐप ऐसा

" ननदों के बारे में मेरी और रीत दी की राय में पूरी तरह से इत्तफाक था , और बल्कि दी बोलीं , " यार ननद के तो आठ दस यार एक साथ, जब तक गैंग बैंग न हो तो क्या मज़ा"

लग रहा था वो जाने वाली हैं फिर रुक गयीं, बोली उस अनारकली ऑफ़ आजमगढ़ का नंबर तो बता ज़रा,... और वो तो मुझे रटा पड़ा था, पल भर के लिए वो अदृश्य हुईं और लौट के बोलीं

"स्साली मस्त माल है , एकदम कच्ची अमिया कुतरने लायक कचर कचर,...

दी आपने कैसे देख लिया , मैं चकित हो गयी.

वो हंसने लगी, बोलीं, वही तो तू अकेले ननद का मजा लेगी, फिर सीरियस हो के बोलीं ,

" देख अभी तो मैंने डिफेन्स सिखाया था, सिक्योर बात हम दोनों के बीच लेकिन अभी मैंने तेरी ननद के फोन में एक जादू डाल दिया है और वही तेरे फोन में भी जब बैटरी लगा के ऑन करेगी, तो आ जाएगा , एक फूडी ऐप ऐसा, बस अब तू अपनी ननद की बात सुन सकती है उसे देख सकती है, यारों के साथ वो फोन आठ दस मीटर दूर भी रहेगी बैग में भी रखेगी तो भी तुझे सुनाई देगा , बाहर होगा तो दिखाई भी देगा वो क्या कर रही है , लेकिन उससे भी बड़ी बात, उसका जो बहनों वाला ग्रुप है न उसमे भी तू सेंध लगा सकती है , सहेलियों , भौरों, के फोन में भी उस ऐप में ४८ नंबर्स को टैग कर सकती है, तो उस ननद रानी के फोन के बाद उसकी जितनी कजिन्स हैं,

मैं फिर टोका उन्हें १४ तो कुँवारी है इनकी सारी कजिन्स और शादी शुदा में मुझे दिलचस्पी नहीं।

" तो बस उन चौदहों को अभी ,... और ज्यादा टाइम नहीं लगता घुसने में, ... और हरदम देखना भी पन्दरह दिन तक की तो वो रिकार्डिंग रखता है तू उसे किसी हार्ड ड्राइव पर सेव भी कर सकती है , पन्दरहवें दिन पुराने सात दिन की रिकार्डिंग डिलीट हो जाती है। "

मैंने मन ही मन दी का जय कारा बोला, मुझे यही परेशानी खाये जा रही थी,कल तो मैं चली जाउंगी और कम्मो की प्लानिंग कभी फेल नहीं होती, उसने होली के अगले ही दिन तीन तीन जबरदस्त पठान के लौंडो को अपने गाँव से बुलाया है, गुड्डी रानी की गाँड़ फाड़ने के लिए और मैं देख भी नहीं पाउंगी,

दुनिया का सबसे अच्छा संगीत चुदती हुयी ननद की चीख सुनना है , और अब वो मैं सुन सकती थी." तो चल मिलते हैं ब्रेक के बाद हाँ अगली बार बस यही डबल डिलडो, स्ट्रैप आन की जरूरत नहीं पड़ेगी , और उन खिलौनों में से पांच जो मैं बता रही हूँ अपने साथ रखना भले बाकी ननदों के लिए छोड़ दे."

उस डबल डिलडो और सुपर स्ट्रैप ऑन के अलावा दो वाइब्रेटर और एक इन्फ्लेटेबल डिलडो था, सब के सब लाल, या काले रंग के थे. बाकी अभी सात आठ बचे थे , मैंने तय किया था की एक १२ इंच वाला कम्मो को दे जाउंगी गुड्डी रानी की फाड़ने के लिए.

रीत अदृश्य हो गयीं।

और अब मैं उस डबल डिलडो को सहला रही थी लेकिन वो उभरी हुयी डाट नहीं महसूस हो रही थी. स्ट्रैप ऑन भी मैंने उतार दिया, पानी और म्यूजिक बंद किया और सारे मोबाइल्स में बैटरी डाली।

यस्स मैं जोर से उछली।

फूडी वाल ऐप था और मेंने उसे ऑन किया तो ननद रानी फोन पर अपने एक भवरे को चारा डाल रही थीं, आवाज एकदम साफ़ सुनाई दे रही थी और वो दिख भी रही थी छोटी सी फ्राक पहने अपने कमरे में अकेले। लेकिन मेरी प्रायर्टी कुछ और थी , मैं उसके व्हाट्सऐप ग्रुप में घुसी और चुन चुन कर उन चौदह कन्याओ को , इनकी कजिन्स के मोबाइल नंबर इकट्ठा करके उसी ऐप में,...

और अब मेरे ऐप पर वो पद्रह कन्याये थी , उनकी फोटुएं , अगर वो कही बात करतीं या मेसेज करती चैट करती तो एक लाइट सी जल जाती और मैं सब सुन सकती थी।

तब तक बाहर से कुछ आवाज आयी , मेरी सास और जेठानी आ गयी थीं।रात भर की जगी मैं थकी थी, निंदासी, बार बार उबासी आ रही थी, लेकिन मेरी सास और जेठानी तो मुझसे भी ज्यादा थकी लग रही थीं,

बताया तो था इनकी एक चचेरी बुआ हैं , आयी थी मेरी शादी में उनकी लड़की भी, मेरी ही उम्र की होगी, नन्दोई जी ने खूब मस्ती की थी उससे, मज़ाक में वो थी भी नंबरी, ... हाँ तो उसी की शादी तय हो गयी थी , शादी तो खैर जाड़े में होगी, लेकिन कोई रसम थी खास तो मेरी सास और जेठानी उसी में गयी थीं. मुझे कल इनकी ससुराल जाना था इसलिए मैं नहीं गयी थी, मैंने खिलखिलाते हुए सासू जी को छेड़ा,

" क्यों कल रात फूफा जी ने सोने नहीं दिया था क्या, ? "
 
रतजगे की कहानी

" क्यों कल रात फूफा जी ने सोने नहीं दिया था क्या, ? "

" नहीं मैंने तेरी बुआ सास को सोने नहीं दिया,... " हँसते हुए मेरी सास बोलीं,

" अरे तेरी सास ने कल तेरी बुआ सास का नाड़ा खोल दिया था , रतजगे में , " जेठानी ने मुस्कराते हुए बतया लेकिन मैंने अपनी सास का ही साथ दिया,

" ठीक तो किया , इस घर की सब ननदे, ... अपने भैया से शलवार पेटीकोट का नाड़ा खुलवाती रहती हैं तो कभी कभार भौजाई ने खोल दिया या भौजाई के भाई ने खोल दिया तो कौन सी बड़ी बात हो गयी। "

" देखा मैं कह रही थी न मेरी बहू मेरा ही साथ देगी, बहू तुम देख समझ के एकदम अच्छी वाली देवरानी लायी हो "

सास ने एक ही वाक्य में मेरी और जेठानी दोनों की तारीफ़ कर दी,

मैं मुस्करा रही थी पर सास ने रतजगे की कहानी आगे बतानी शुरू की कि जेठानी जी ने क्या कारनामा किया , और उन्ही से बोली,

" चल मैंने अपनी ननद का नाड़ा खोल के , पेटीकोट उठा के उन की बुलबुल को जरा देर हवा खिला दी, लेकिन तूने तो अपनी ननद की बिल में ऊँगली डाल के गचागच, गचागच ,... "

मेरी जेठानी पर जब हंसने का दौर पड़ता था तो रुकता नहीं था, और वही हुआ जो हंसी रुकी तो वो बोलीं,

" ठीक तो किया। अपने नन्दोई का काम आसान कर रही थी, और वैसलीन का खरचा भी बचेगा, सीधे सटाया घुसाया और सटाक से अंदर , गप्प से घोंट लेगी। फिर मैंने ऊँगली से पहले टो लिया था, झिल्ली कब की फट चुकी थी , तो फिर मैं क्यों छोड़ती। पता नहीं अपने किस भाई से फड़वा लिया है मेरी ननद ने "

" अरे दी , तो क्या गलत किया, इस शहर की सारी ननदें यही करती हैं , चलिए आप लोग फ्रेश हो जाइये मैं चाय बनाती हूँ। "

चाय बन रही थी और मैं अपनी ख़ास ननद के बारे में सोच रही थी, कल की रात के बारे में नहीं आने वाली दिनों के बार में, कल से उसकी चिड़िया उसकी उड़ने लगी थी और क्या चिड़िया उड़ी थी , सुहागरात तो छोड़िये हनीमून में भी नहीं होता होगा , पहले दिन ही छह बार , दो बार शाम को और चार बार रात को , ... हर तरह का आसान, लिटा के निहुरा के खड़ी कर के,... इसलिए अब फिर से उसके शरमाने लजाने के चांसेज तो कम ही हैं।
 
रतजगे की बात

चाय में चीनी छोड़ते हुए मैं सोच रही थी , और फिर उसकी तीन घंटे की एडिटेड वीडियो और सैकड़ॉ स्टिल्स, सब मैं कम्मो को दे जाउंगी , अगर नाड़ा खोलने में ज़रा भी देर की , किसी दिन कम्मो के बुलाने से न आयी तो सब की सब,... और फिर जो कम्मो पठान के लौंडों की बात हो रही थी , वो तो खुद ही मार मार के चूतड़ लाल कर देंगे,... लेकिन फिर मेरे दिमाग में आया, कल रात की बात और थी , जेठानी और सासू जी घर पे नहीं थी। फिर कल से तो जेठ जी भी आएंगे , जेठ जेठानी का कमरा भी कम्मो के कमरे की ओर है, कुछ भी चीख पुकार होगी तो सुनाई देगी।

.

चाय में उबाल आ गया था मैं चाय छान ही रही थी की मेरी जेठानी और सासू जी आ गयीं और वहीँ रसोई में गपाष्टक शुरू हो गयी,

वही रतजगे की बात

उकसाया मैंने और बीच बीच में जेठानी जी भी बात आगे बढ़ा रही थीं , लेकिन किस्सा पूरा सासू जी ने ही सुनाया, बिना सेंसर किये अच्छे वाले शब्दों के साथ,

मैं गाँव की लड़की, कितने रतजगे देखे थे, कभी दुलहा बनती थी कभी दुलहन, ...

शुरुआत बुआ जी ने ही की थी अच्छा मौका था उनके पास अपनी भौजाई की रगड़ाई करने का, कुत्ता , गदहा, घोड़ा कोई नहीं बचा जिसे उन्होंने मेरे सासू पर नहीं चढ़ाया यहाँ तक की इनके सारे मामा लोगों का नाम ले लेकर, हर गारी में,

ननदें थी भी बहुत ज्यादा, जेठानी जी ने जोड़ा,

लेकिन मेरी सासू जी से पार पाना आसान है क्या, उन्होंने इशारे इशारे में बुआ जी की मोहल्ले की दो तीन बहुओं को पटा लिया, बस नाच शुरू हुआ और मेरी सास खड़ी हुयी तो उन्होंने खींच के बुआ जी को भी अपने साथ, ' अरे बन्नी की मम्मी तो सबसे बड़ी रंडी है उसके नाचे बिना,... " नाचते हुए उन्होंने अपने दोनों हाथों से बुआ जी के दोनों हाथों को कस के पकड़ रखा था. आँखों से उन्होंने हल्का सा इशारा किया तो दोनों बहुओं ने बस मिल के पीछे से बुआ जी की साड़ी साया दोनों कमर तक, बेचारी बुआ जी के दोनों हाथ तो जकड़े हुए थे , लेकिन मेरी सास इतने में कहाँ मानने वाली थीं , उन्होंने एक हाथ से अपनी ननद के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और वो सरसरा के नीचे गिर गया. एक बहु उसे उठाकर चम्पत। बुआ जी को गुदगुदी भी बहुत लगती थी, साड़ी कमर तक, और पूरे दस मिनट सास जी ने उन्हें चक्कर लगवाया, अरे पूरी दुनिया देख तो ले उस बुलबुल को जहाँ से ये बन्नी निकली है , अरे चलो फैला के दिखा देती हूँ , अंदर अभी तक गुलाबी है ,....

और उसके बाद तो एकदम फ्री फॉर ऑल, कोई ननद नहीं बची जिसकी स्कर्ट , शलवार, साया न खुला हो, एक भाभी खोलती और दूसरी लेकर गायब , जिससे बेचारी उघारे , जबतक अपने हाथ से खोल के भाभियों को न दिखाए , भाभियाँ मन भर ऊँगली न करें वापस नहीं मिलता, सुबह भोर होने तक चला, खूब मस्ती ,... इसलिए रात में वो दोनों लग ज़रा भी नहीं सोयीं , और सुबह तो यहाँ के लिए चलना ही था।

चाय पीते पीते हम तीनों बरामदे में आ गए थे,

जेठानी जी का फोन घनघनाया, और मैंने उचक कर देख लिया, जेठ जी का था.
 
साउथ की ट्रिप

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चाय पीते पीते हम तीनों बरामदे में आ गए थे,

जेठानी जी का फोन घनघनाया, और मैंने उचक कर देख लिया, जेठ जी का था.

जेठानी जी ने गुस्से से मुझे देखा और तब तक फोन की घंटी बंद हो गयी।

उनकी ठुड्डी पकड़ के मनाते हुए मैं बोली, " अरी दी, गुस्सा मत होइए अभी फिर आएगा। "

ये ट्रिक मैं जेठ जी की कई बार देख चुकी थी, पहली काल एक मिस्ड काल,... जिससे जेठानी जी कहीं कोने अतरे, जिससे दोनों कबूतर मन भर गुटरगूं कर सके, ठीक साढ़े चार मिनट बाद दूसरा फोन ,

वो मुस्कराने लगीं और एक जोर का मुक्का मेरी पीठ पर पड़ा, और मैं सासू जी की ओर देख के जोर से चिल्लाई, फिर मुस्करा के जेठानी जी को फिर से छेड़ा,

" दी, अरे यही तो बोलेंगे न कल आरहा हूँ, अगवाड़े पिछवाड़े अच्छी तरह वैसलीन लगा के रखना, अंदर तक। "

अबकी मुक्का सच में तेज था और साथ में जेठानी जी ने छेड़ा,

" अच्छा अपना भूल गयी , पूरी बड़ी वाली वैसलीन की शीशी तेरे तकिये के नीचे रखी थी और अगले दिन, आधे से ज्यादा खाली। अगली रात फिर नयी बड़ी शीशी वैसलीन की और पूरी एक लीटर वाली , कडुवा तेल की बोतल,... "

" क्या दी आप भी न एकदम कंजूस , जरा ज़रा सी चीजों का हिसाब रखती हैं , लेकिन ये बताइये यही फोन आएगा न अब हम से क्या शरमाना , हम दोनों तो एक ही नाव में हैं " मैंने भी मुस्कराते हुए उन्हें जवाब दिया।

और अब उन्होंने भी बिंदास आवाज में पहले तो जबरदस्त अंगड़ाई ली फिर बोलीं बड़े झक्कास अंदाज में , ' अब हम लोग वैसलीन वैसलीन नहीं लगाते , तू लगाती है ? "

मैंने भी डबल कॉन्फिडेंस में उन्ही की तरह जवाब दिया , " नहीं दी. आखिर आप की असली एकलौती देवरानी हूँ , जैसे चले जेठानी वैसे देवरानी, मैं अब प्योर आर्गेनिक हूँ , आप के देवर इतना लार टपकाते रहते हैं न बस वही,... "

तबतक ४ मिनट २८ सेकेण्ड हो चुके थे जेठानी जी उठना चाहती थीं लेकिन मैंने कस के पकड़ रखा था , ठीक ४. ३० मिनट बाद घंटी फिर बजी और मेरे और सासु जी के सामने ही उन्हें बात करनी पड़ी, बात ज्यादा लम्बी चली भी नहीं, कुछ हूँ हूँ हाँ, अभी देखती हूँ। माता जी का , ... नहीं नहीं,...

कुछ समझ में मेरे आया, कुछ नहीं। इतना तो मुझे पता था की कल वो आनेवाले हैं और उसके बाद हफ्ते दस दिन घर पर ही रहेंगे। उनका बिजनेस ऐसा था की टूर का काफी काम रहता था, महीने में पन्दरह बीस दिन तो आम बात थी, हाँ जेठानी जी नहीं जाती थीं उनके साथ।

मैं और सासू जी बात ख़तम होने के बाद मुख्या समाचार सुनने का इन्तजार कर रहे थे.

जेठानी जी थोड़ी देर चुप रहीं जैसे उनकी समझ में न आ रहा हो क्या बोले कैसे बोले आखिर जब सासू जी ने टोका तो वो बोलीं।

मामला सच में थोड़ा सा उलझा था, होली के दो दिन बाद ही अचानक उनकी एक दिन चेन्नई में और उसके दो दिन बाद मदुराई में मीटिंग थी, इस लिए उन्हें होली के अगले दिन ही जाना पड़ेगा और आठ दस दिन साउथ इंडिया में,... जो बात जेठानी ने नहीं कही वो मैं और सासू जी दोनों समझ गए.

जेठ जी चाहते थे की जेठानी जी भी उनके साथ जाएँ, मीटिंग के साथ घूमना और मस्ती हो जायेगी,

" तू भी चली जा न, साउथ घूम आएगी, आठ दस दिन की तो बात है,... " सासू जी ने जेठानी जी का धर्म संकट दूर किया पर अब भी जेठानी जी ये सोच रही थीं की इन्हे अकेले छोड़ कर कैसे और रास्ता मैंने निकाला, ...

" आप भी चली जाइये न, आप दोनों आप देखिये साउथ घूमने का इतना अच्छा मौका नहीं मिलेगा, फिर कल मैं भी चली जाउंगी, "

मन तो उनका बहुत कर रहा रहा था लेकिन , फिर दबी जुबान से कुछ चिढ़ाते हुए बोलीं,

" अरे तू जा उसके साथ, मैं कहाँ दाल भात के बीच मूसलचंद।"

कुछ बातों में हम देवरानी जेठानी एकदम एक तरह सोचते थे , एक साथ दोनों बोले,

" अरे आपके लिए भी मूसलचंद का इंतजाम हो जाएगा , घबड़ाइये मत "
 
२१ दिन

कुछ बातों में हम देवरानी जेठानी एकदम एक तरह सोचते थे , एक साथ दोनों बोले,

" अरे आपके लिए भी मूसलचंद का इंतजाम हो जाएगा , घबड़ाइये मत "

इंटरनेट पर मेरा हाथ तेजी से चलता था, झट से मैने मेल एस्कॉर्ट्स इन साउथ इंडिया साइट खोल दी, एक से एक हंक,...

मैंने सासू जी को दिखाया पीछे से खिलखिलाती हुयी जेठानी भी झाँक रही थी,

" देखिये हर शेप साइज के हैं, मसाज से लेकर फुल सर्विस तक, आपके बेटों को पता भी नहीं चलेगा मैं अभी बुक कर देती हूँ ,... "

सासू ने मेरे गाल कस के पिंच कर लिए,... और अपनी समधन को दस असली वाली गालियां सुनाते बोलीं,

" बहू, तेरे बाप का तो पता नहीं, लेकिन तू एकदम अपनी माँ पर गयी है,... "

यानी वो जाने को तैयार हो गयी थीं.

मैंने जेठानी जी के फ़ोन से जेठ जी का पूरा टूर प्रोग्राम निकाला, फिर उसी के साथ जोड़ के कुछ और ऊपर नीचे का एक ट्रेवेल साइट खोल के कुछ चैट की और जेठानी जी से बोला,

"डन, साउथ के सारे टेम्पल, बीचेज और जेठजी की मीटिंग्स भी, १४ दिन पंद्रह रातें, लेकिन एक मिनट पांच दिन का केरल और जोड़ देती हूँ , बैक वाटर्स, मसाज , पंच क्रिया,... जेठ जी को बोल दीजियेगा की कुछ छुट्टी ले लेंगे कुल २१ दिन "

" वही वो भी बोल रहे थे, कित्ते सालों से इन्होने छुट्टी नहीं ली छुट्टी का कोई मामला नहीं है। पर ट्रेन , रुकने का तुमने इतना लंबा प्रोग्राम बना तो दिया,... "

जेठानी जी अभी भी उलझी हुयी थीं, ... मन तो उनका बहुत कर रहा था, मेरे साथ साथ वो भी बुकिंग देख रही थीं , बेस्ट होटल्स, गाइडेड टूर्स,...

सासू जी भी परेशान लग रही थी,

" पूरे २१ दिन , इतने ट्रेनों में रिजर्वसेशन,... फिर सब जगह का , कैसे,... " मन उनका भी कर रहा था लेकिन कुछ समझ में नहीं आ रहा था, ...

तब तक ये आगये,

नींद से कोई जैसे उठा हो, उसी तरह, रात भर क्या, सुबह नौ बजे तो सोये होंगे,... लेकिन मैं उन्हें देखकर सासू जी से बोली

" अरे आपने ये छह फिट का लड़का क्यों पैदा किया है , खाली मेरी ननदों से आँख मटक्का करने के लिए,... "

और उन्हें मैंने सब कुछ समझा दिया,...

इन सब कामों में तो वो सुपर कम्प्यूटर थे, उंगलिया चलती नहीं दौड़ती थीं, बस दस मिनट के अंदर सारी ट्रेन की, होटल, एजंट्स , लोकल टूर,... और सब का पेमेंट ,. भी

" हे चाय मिलेगी। सब बुकिंग कन्फर्म है , अभी दस मिनट में सारे टिकट बुकिंग डिटेल्स आ जाएंगे, मैं कमरे में जाके प्रिंट आउट निकाल दूंगा। "

जेठानी जी खुश नहीं महा खुश और वो खशी उन्होंने अपने देवर का कान पकड़ के जाहिर की,

" हरदम मेरी देवरानी से मांगते रहते हो, किचेन में तेरी कम्मो भाभी हैं, जाके चाय मांग ले और कुछ मांगना है तो वो भी माँगना है तो वो भी मांग लेना,... "

ये किचेन में गए, और सासू ने अपनी मन में चल रही उथल पुथल बता दी,

" बहू पैसा बहुत लगा होगा न, ... "

मैं बड़ी सीरियस होके बोली,

" हाँ," फिर खिलखिलाती बोली,

" आप काहें चिंता कर रही हैं , बनारस जा रहीं हूँ न वहां दालमंडी ( बनारस का रेड लाइट एरिया ) में अपनी उस छुटकी ननदिया की एडवांस बुकिंग करा दूंगी तीन चार रात की , जो लगा है उस का तीन चार गुना मिल जाएगा।"

"लेकिन घर का क्या होगा, "

मेरी सासू जी ने चिंता व्यक्त की,
 
रस का आनंद लेने के लिए रससिद्ध रसिकों का साथ होना जरूरी है, जो रस भी लें, हुंकारी भी भरे और किस्सा कहानी वाली को बताते रहें की उन दिनों के, जब देवरानी-जेठानी और ननद के रिश्तों में रस की मिठास थी ,

एक बार फिर से आपको धन्यवाद, इस कथा यात्रा में साथ देने के लिए , सह यात्री बनने के लिए , बस साथ बनाये रखिये।
 
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